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मार्शल लॉ लागू करने वाले पूर्व राष्ट्रपति को दक्षिण कोरिया में उम्रकैद की सजा

सियोल दक्षिण कोरिया की एक अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को उम्रकैद की सजा सुनाई है. अदालत ने उन्हें 2024 में देश में मार्शल लॉ लागू करने, सत्ता के दुरुपयोग और विद्रोह की साजिश रचने का दोषी पाया. इस मामले में उन्हें मृत्युदंड तक की सजा हो सकती थी, लेकिन अदालत ने आजीवन कारावास का फैसला सुनाया. 65 वर्षीय यून सुक येओल ने दिसंबर 2024 में सेना और पुलिस बलों को सक्रिय कर संसद पर नियंत्रण की कोशिश की थी. आरोप है कि उन्होंने उदारवादी बहुमत वाली नेशनल असेंबली को अवैध तरीके से कब्जे में लेने की कोशिश की. उन्होंने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि यह कदम "राष्ट्र विरोधी ताकतों" को रोकने के लिए जरूरी था, जो उनके एजेंडे को बाधित कर रही थीं. मार्शल लॉ करीब छह घंटे तक लागू रहा था. भारी हथियारों से लैस सैनिकों और पुलिस ने संसद भवन की घेराबंदी कर दी थी. हालांकि सांसदों ने अवरोध तोड़ते हुए भीतर पहुंचकर सर्वसम्मति से मार्शल लॉ हटाने के पक्ष में मतदान किया था, जिसके बाद आपात आदेश वापस लेना पड़ा. इस घटना ने देश में गहरा राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया था. दक्षिण कोरिया में 1997 के बाद से किसी को फांसी नहीं जनवरी में अभियोजकों ने यून के लिए मृत्युदंड की मांग की थी. उनका कहना था कि "असंवैधानिक और अवैध मार्शल लॉ ने नेशनल असेंबली और चुनाव आयोग के कामकाज को कमजोर किया और उदार लोकतांत्रिक संवैधानिक व्यवस्था को नष्ट करने का प्रयास किया." हालांकि दक्षिण कोरिया में 1997 के बाद से किसी को फांसी नहीं दी गई है और इसे व्यवहारिक रूप से मृत्युदंड पर रोक माना जाता है. पूर्व राष्ट्रपति का साथ देने वालों पर भी कार्रवाई अदालत ने मार्शल लॉ लागू कराने में शामिल कई पूर्व सैन्य और पुलिस अधिकारियों को भी दोषी ठहराया. पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग ह्यून को इस योजना की केंद्रीय भूमिका और सेना को सक्रिय करने के लिए 30 साल की जेल की सजा दी गई. यून को पिछले महीने गिरफ्तारी का विरोध करने, मार्शल लॉ की घोषणा से जुड़े दस्तावेजों में हेरफेर करने और कानूनी रूप से अनिवार्य पूर्ण कैबिनेट बैठक किए बिना आपात आदेश जारी करने के मामले में पांच साल की सजा भी सुनाई गई थी. पूर्व प्रधानमंत्री को अन्य केस में पाया गया दोषी सियोल सेंट्रल कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री हान डक सू समेत दो अन्य कैबिनेट सदस्यों को भी अलग मामलों में दोषी ठहराया. हान डक सू को 23 साल की सजा दी गई है. उन पर आरोप था कि उन्होंने कैबिनेट बैठक के जरिए आदेश को वैध ठहराने, रिकॉर्ड में हेरफेर करने और शपथ के तहत झूठ बोलने की कोशिश की. उन्होंने फैसले के खिलाफ अपील दायर की है.

सीवरेज समस्या को लेकर मंत्री के PA से बदतमीजी पर इंजीनियर सस्पेंड

सिरसा. जन स्वास्थ्य विभाग (सीवरेज) के कार्यकारी अभियंता बलविंदर नैन को सरकार ने निलंबित कर दिया है। उनके सस्पेंशन आदेश में इसकी वजह नहीं बताई गई। इससे पहले राज्य मंत्री कृष्ण बेदी के पीए और अधिकारी के बीच सीवरेज समस्या को लेकर हुई फोन पर बहस चर्चा का विषय बनी हुई है। बलविंदर नैन फतेहाबाद में तैनात थे और सिरसा का अतिरिक्त प्रभार भी उनके पास था। मंगलवार रात को राज्य मंत्री कृष्ण बेदी सिरसा में नप उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार के नाम पर चर्चा के लिए पहुंचे थे। भाजपा पार्षद राजन शर्मा ने मंत्री के समक्ष सीवरेज लाइन डाले जाने की लंबित समस्या उठाई। पार्षद के अनुसार, सीवरेज लाइन का टेंडर पहले ही हो चुका है। कार्यवाही के निर्देश दिए पर नहीं उठाया ठोस कदम उपायुक्त ने कार्यकारी अभियंता को कार्यवाही के निर्देश दिए थे, परंतु कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। शिकायत मिलने के बाद मंत्री ने अपने पीए को तत्काल अधिकारी से बात करने को कहा। रात 10 बजकर 20 मिनट पर पार्षद के मोबाइल से काल की गई तो बलविंदर नैन का फोन व्यस्त चल रहा था। फिर मंत्री के पीए ने काल की। पीए ने सीवरेज समस्या की बात कही तो अधिकारी ने जवाब दिया कि रात दस बजे के बाद सीवरेज का कौन सा काम होता है। राजन ने बताया कि सुबह दोबारा काल की तो उन्होंने फिर से यही बात दोहराई कि रात को सीवरेज समस्या का समाधान थोड़ा होता है।

सुप्रीम कोर्ट में विवादित फिल्म का मामला, ‘घूसखोर पंडत’ का टाइटल वापस, किसी समुदाय को ठेस नहीं

मुंबई  नीरज पांडे की अपकमिंग फिल्म 'घूसखोर पंडत' को लेकर कानूनी विवाद खत्म हो गया है. ब्राह्मण समाज और बाकी संगठनों से मिली आलोचनाओं के बाद फिल्ममेकर ने घूसखोर पंडत टाइटल वापस ले लिया है. उनकी इस पहल को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म के खिलाफ दाखिला की गई याचिकाओं को बंद कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिल्ममेकर के पॉजिटिव रिस्पॉन्स को देखने के बाद इस विवाद को पूरी तरह खत्म कर देना चाहिए. कोर्ट ने कहा- हम आपके स्टैंड और फिल्म के टाइटल वापस लेने के फैसले की सराहना करते हैं. फिल्ममेकर की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि उनका कभी भी किसी समुदाय को अपमानित और उसे बदनाम करने का इरादा नहीं था.  कोर्ट में हुआ क्या दलीलें? फिल्ममेकर की तरफ से सीनियर वकील एन के कौल ने कोर्ट में दलील देते हुए कहा कि हमने टाइटल पूरी तरह वापस ले लिया है. किसी समुदाय को अपमानित करने का कोई इरादा कभी नहीं था. 'पंडत' शब्द फिल्म के मेन कैरेक्टर के निकनेम से आया था. जिसमें दिखाया गया कैसे एक बुरा पुलिसवाला अच्छा पुलिस अफसर बनता है. ये क्राइम ड्रामा है. जस्टिस नागरत्ना ने कहा– हम 'पंडित्य' और 'पंडित' शब्द समझते हैं. इसे 'घूसखोर' से जोड़ने पर गलत मैसेज जाता. एन के कौल– हमने टाइटल वापस ले लिया है. याचिकाकर्ता- टाइटल बदलना चाहिए. उन्होंने नया टाइटल तय नहीं किया है. सुप्रीम कोर्ट- उन्होंने कहा है कि टाइटल बदल रहे हैं. याचिकाकर्ता- मूवी के अंदर पंडित समुदाय को बदनाम करने वाला कोई कंटेंट नहीं होना चाहिए. एन के कौल– क्या आपने फिल्म देखी है? मूवी किसी को ठेस नहीं पहुंचाती, ना अपमानित करती है. याचिकाकर्ता- उन्हें ऐसा ऐलान करना चाहिए कि इस फिल्म में कुछ भी अपमानित करने वाला नहीं होगा. एन के कौल– हमने कहा है कि टाइटल बदल दिया है. जस्टिस नागरत्ना- फिल्म अभी एडिटिंग स्टेज पर है. उन्होंने पॉजिटिवि जवाब दिया है. अब क्या बचा है आगे?? एन के कौल– मैं क्लियर करना चाहता हूं कि टाइटल पूरी तरह वापस ले लिया गया. नया टाइटल अभी फाइनल नहीं हुआ, लेकिन मेरा वादा है कि नया टाइटल पुराने जैसा नहीं होगा. याचिकाकर्ता- कंटेंट का क्या होगा? ट्रेलर में तो इस शब्द का इस्तेमाल होता हुआ दिख रहा है. सुप्रीम कोर्ट- वो टाइटल वापस ले रहे हैं. क्या आपने बिना नाम वाली कोई तस्वीर देखी है? एन के कौल– हमने मूवी का नाम बदल दिया है. फिल्म के खिलाफ कोई याचिका दायर कर रहा है. कहीं FIR हो रही है. इस उत्पीड़न पर रोक लगनी चाहिए. जस्टिस नागरत्ना- डायरेक्टर-प्रोड्यूसर ने हलफनामा दाखिल कर दिया है. वरिष्ठ वकील ने बताया कि टाइटल पूरी तरह वापस लेने के बाद ये मामला खत्म हो गया. हलफनामे को रिकॉर्ड पर लिया जाए. काउंसिल ने बताया कि याचिकाकर्ता की शिकायतों का समाधान हो गया है. मूवी का नया टाइटल पुराने विवादित नाम जैसा बिल्कुल नहीं होगा. बात करें मूवी की तो, इसमें मनोज बाजपेयी, अजय दीक्षित का रोल प्ले रहे हैं. वो एक ऐसा पुलिस अफसर है जो करप्ट है. फिल्म को रितेश शाह ने डायरेक्ट किया है और नीरज पांडे ने लिखा है. मूवी में नुशरत भरुचा, साकिब सलीम, कीकू शारदा अहम रोल में दिखेंगे. 

चंडीगढ़ के 11 पुलिसकर्मियों ने किया नामचीन डॉक्टर का किडनैप

चंडीगढ़. शहर के नामी डेंटिस्ट डॉ. मोहित धवन की किडनैपिंग के मामले में चंडीगढ़ पुलिस के इंस्पेक्टर हरिंदर सिंह सेखों समेत नौ पुलिसकर्मी बुरी तरह फंस गए हैं। इस मामले में पिछले साल सीबीआई ने सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज की थी। करीब एक साल तक चली जांच के बाद सीबीआई ने जिला अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी। दो अन्य पुलिसकर्मियों के नाम भी जोड़ दिए। चार्जशीट में सीबीआई ने पुलिसकर्मियों की साजिश का पर्दाफाश किया है। सात जनवरी 2022 को डॉ.धवन का कथित तौर पर पर अपहरण किया गया था। सीबीआई जांच में सामने आया है कि डॉ. धवन का अपहरण करने के लिए पुलिसकर्मियों ने एक वॉट्सएप ग्रुप में साजिश रची थी। यह ग्रुप वारदात से कुछ घंटे पहले ही बना था जिसमें 11 पुलिसकर्मी जुड़े थे। इनमें इंस्पेक्टर हरिंदर सिंह सेखों भी शामिल थे। ग्रुप में डॉ.धवन की कपड़ों से पहचान करने के बारे में बात चल रही थी। जैसे ही एक पुलिसकर्मी की उन पर नजर पड़ी, उसने तुरंत वॉट्स एप ग्रुप में उनकी तस्वीर शेयर कर दीं। इसके बाद पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और जिला अदालत के गेट से डॉ. धवन को अगवा कर लिया। उन्हें एक प्राइवेट गाड़ी में बिठाकर शहर में घुमाते रहे। उन्हें कई घंटों तक गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया। सीबीआई जांच में सामने आया कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें अदालत में पेश होने से रोकने के लिए उनका अपहरण किया था। सीबीआई के मुताबिक डॉ.धवन को किसी आपराधिक मामले में कोर्ट में पेश होना था, लेकिन अपहरण के कारण वह पेश नहीं हो सके। उनके खिलाफ पुलिस की एक फर्जी रेड के सबूत भी थे। इसलिए भी पुलिस उन्हें अदालत में पेश होने से रोकना चाहती थी। वॉट्सएप ग्रुप में ऐसी रची गई साजिश – सात जनवरी 2022 को उन्हें अगवा किया गया। उससे कुछ घंटे पहले एसआइ सुरेश कुमार ने वॉट्स एप ग्रुप बनाया। नाम दिया गया ''धवन" हेड कॉन्स्टेबल रिंकू राम के मोबाइल की जांच में मिले इस ग्रुप के सबूत सुबह 9.44 बजे से 10.26 बजे तक डॉ.धवन की पुरानी तस्वीरें शेयर की गईं एसआइ सुरेश ने ग्रुप में लिखा "जो भी डॉ.धवन की पहचान करे, वह उनके कपड़ों की डिटेल ग्रुप में शेयर करे।" 10.29 बजे कॉन्स्टेबल विकास हुड्‌डा ने डॉ.धवन की कोर्ट में पहुंचने की तस्वीर शेयर कर दी। 11.01 बजे एएसआइ अजमेर ने मैसेज किया गया कि सभी आफिशियल लोकल बस स्टैंड साइड के गेट पर मिलें। इसके बाद सभी पुलिसकर्मी एक-एक ग्रुप से निकल गए ताकि सबूत छिपाए जा सकें। सुप्रीम कोर्ट की दखल के बाद मामला CBI को ट्रांसफर डॉ.मोहित धवन ने एक आपराधिक मामले में अग्रिम जमानत के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उस याचिका पर हाईकोर्ट ने डॉ.धवन को जिला अदालत में पेश होने के आदेश दिए थे। सात जनवरी 2022 को डॉ.मोहित धवन अदालत में पेश होने पहुंचे, लेकिन एंट्री गेट पर ही क्राइम ब्रांच की टीम ने उन्हें अगवा कर लिया। क्राइम ब्रांच की टीम ने उन्हें अवैध तरीके से हिरासत में लिया। अगले दिन पुलिस ने उन्हें अदालत में पेश कर उनका सात दिन का रिमांड भी ले लिया। डॉ.मोहित धवन बिना किसी अपराध के करीब दो महीने जेल में रहे। जमानत पर बाहर आने के बाद उन्होंने इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकाेर्ट ने जांच के लिए पंजाब पुलिस को विशेष टीम गठित करने के निर्देश दिए। हाईकोर्ट के इस फैसले को चंडीगढ़ प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने फिर अगस्त 2024 को हाईकोर्ट के फैसले को बदल दिया और मामले की जांच पंजाब पुलिस की बजाय सीबीआई को सौंप दी थी। इन पुलिसकर्मियों पर चलेगा केस इंस्पेक्टर हरिंदर सिंह सेखों एसआइ सुरेश कुमार एएसआइ अजमेर सिंह उर्फ अमितोज सिंह हेड कॉन्स्टेबल अनिल कुमार कॉन्स्टेबल विकास हुड्‌डा कॉन्स्टेबल सुभाष एएसआइ बलवंत हेड कॉन्स्टेबल रिंकू राम कॉन्स्टेबल प्रदीप

भाग्य और सफलता का योग: इस नक्षत्र में जन्मे बच्चों को मिलता है शनि का आशीर्वाद

ज्योतिष शास्त्र में ग्रह और नक्षत्रों का वर्णन विस्तार पूर्वक किया गया है. ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि नौ ग्रह हैं. ज्योतिष शास्त्र में ग्रह और नक्षत्र का बहुत महत्व है. ज्योतिषविद ग्रह और नक्षत्र देखकर ही कुंडली बनाते हैं. लोगों के भविष्य भाग्य और स्वभाव आदि के बारे में ग्रह, नक्षत्र और राशि देखकर ही अंदाजा लगया जाता है. ज्योतिष शास्त्र में कुल 27 नक्षत्र बताए गए हैं. सभी नक्षत्रों का स्वामित्व किसी न किसी ग्रह के पास है. ज्योतिष शास्त्र में बताए गए हर नक्षत्र का अपनी एक विशेषता है. 27 में से कुछ नक्षत्र अति विशेष और महत्वपूर्ण माने गए हैं. आज हम आपको उस नक्षत्र के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसमें जन्मे बच्चों को हमेशा भाग्य का साथ मिलता है. साथ ही इन पर शनि देव का विशेष आशीर्वाद बना रहता है. आइए जानते हैं इस नक्षत्र के बारे में. अनुराधा नक्षत्र में जन्मे बच्चे ज्योतिष शास्त्र में ऐसी मान्यता है कि अनुराधा नक्षत्र में जन्में बच्चे बहुत ही भाग्यशाली होते हैं. अनुराधा ज्योतिष शास्त्र का 17वां नक्षत्र माना जाता है. अनुराधा नक्षत्र के स्वामी शनि देव हैं. शनि को देवताओं में न्यायाधीश का दर्जा प्राप्त है. शनि देव लोगों को उनके कर्मों के अनुसार, फल और दंड प्रदान करते हैं. इस नक्षत्र में जन्मे बच्चों का साथ किस्मत कभी नहीं छोड़ती. मंगल की भी रहती है कृपा अनुराधा नक्षत्र में जन्मे बच्चों पर ग्रहों के सेनापति मंगल की भी कृपा देखने को मिलती है. इसके कारण इस नक्षत्र में जन्मे बच्चे बहुत साहसी, उत्साही और ऊर्जावान होते हैं. इस नक्षत्र में जन्मे बच्चे दूसरों के सामने अपनी बातों को बिना किसी डर के रखते हैं. इन्हें कोई बात घुमा फिराकर कहना नहीं आता है. इनका स्वभाव बहुत धार्मिक होता है. ये अवसर का पूरा लाभ उठाते हैं. ये अनुशासन के पक्के होते हैं, इसलिए बड़ी सफलता हासिल करते हैं. ये दूसरी की सहायता करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं.

NHM के तहत CHO, नर्स और टेक्नीशियन समेत 87 पदों पर भर्ती

बलौदा बाजार. रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं के लिए सुनहरा अवसर है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत कुल 87 रिक्त संविदा पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक अभ्यर्थी 28 फरवरी 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) के 17 पद, नर्सिंग ऑफिसर 4 पद, स्टॉफ नर्स 36 पद, एएनएम 2 पद, काउंसलर 2 पद, सपोर्ट स्टॉफ 3 पद जूनियर सेक्रेट्रीयल असिस्टेंट 6 पद, लैब असिस्टेंट 2, साइकोलॉजिस्ट 5 पद, काउंसलर 2 पद, फिजियोथेरेपिस्ट, ऑडियोलॉजिस्ट, लैब टेक्नीशियन, डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (डेटा), फीडिंग डिमांस्ट्रेटर, अटेंडेंट, कुक कम केयर टेकर,एवं सिक्योरीटी गार्ड के 1-1 के पदों पर संविदा भर्ती की जाएगी। संविदा पदों पर नियुक्ति के लिए समस्त अर्हताधारी इच्छुक छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवासी अभ्यर्थियों से आवेदन पत्र निर्धारित प्रपत्र में कार्यालय, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा (छ.ग.) को दिनांक 28 फ़रवरी 2026 शाम 5 बजे तक केवल पंजीकृत डाक अथवा स्पीड पोस्ट के माध्यम् से प्रेषित कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए https://balodabazar.gov.in/ का अवलोकन किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट को पत्र: अनिल अंबानी ने कहा, भारत छोड़ने की अनुमति के बिना नहीं जाऊंगा

मुंबई  देश के प्रमुख उद्योगपति अनिल अंबानी ने सुप्रीम कोर्ट में एक औपचारिक हलफनामा दायर किया है कि वे सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना भारत छोड़कर नहीं जाएंगे। अंबानी ने यह भी आश्वासन दिया है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) और उसकी समूह संस्थाओं द्वारा कथित तौर पर किए गए बड़े पैमाने के बैंक फ्रॉड मामले की जांच में वे जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करना जारी रखेंगे। यह मामला ईएएस सरमा बनाम भारत सरकार के तहत चल रहा है। अंबानी फिलहाल प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच के घेरे में हैं। अंबानी द्वारा यह हलफनामा ईएएस सरमा द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) के जवाब में आया है। इससे पहले 4 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने अंबानी के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी के उस बयान को रिकॉर्ड में लिया था कि अंबानी अदालत की अनुमति के बिना विदेश यात्रा नहीं करेंगे। अपने हलफनामे में अनिल अंबानी ने इस आश्वासन को औपचारिक रूप से रिकॉर्ड पर रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब से मौजूदा जांच शुरू हुई है वे जुलाई 2025 से भारत से बाहर नहीं गए हैं और फिलहाल उनकी विदेश यात्रा की कोई योजना नहीं है। उन्होंने अंडरटेकिंग दी है कि यदि विदेश यात्रा की आवश्यकता पड़ती है, तो वे ऐसा करने से पहले अदालत से अनुमति लेंगे। जांच एजेंसियों के साथ सहयोग का वादा हलफनामे में इस बात पर जोर दिया गया है कि अंबानी जांच एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। उन्होंने बताया कि उन्हें प्रवर्तन निदेशालय द्वारा समन भेजा गया है और उन्होंने निर्धारित तिथि पर जांच में शामिल होने का आश्वासन दिया है। हलफनामे में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट में कार्यवाही लंबित रहने के दौरान धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) की धारा 50 के तहत उनकी जांच चल रही है। 31,580 करोड़ रुपये के फ्रॉड का आरोप अदालत के समक्ष दायर याचिका के अनुसार, RCOM और उसकी सहायक कंपनियों रिलायंस इन्फ्राटेल और रिलायंस टेलीकॉम ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के नेतृत्व वाले बैंकों के कंसोर्टियम से 2013 और 2017 के बीच 31,580 करोड़ रुपये का ऋण प्राप्त किया था। याचिका के अनुसार, SBI की एक फोरेंसिक ऑडिट से पता चला कि फंडा का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया था। इसमें हजारों करोड़ रुपये का उपयोग असंबंधित ऋणों को चुकाने, संबंधित पक्षों को हस्तांतरण, म्यूचुअल फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश और ऋणों को छिपाने के लिए पैसे का जटिल सर्कुलर रूटिंग शामिल है। SIT जांच का आदेश याचिका में दावा किया गया है कि CBI द्वारा 21 अगस्त, 2025 को दर्ज की गई FIR और संबंधित ED की कार्यवाही कथित गलत कामों के केवल एक अंश को कवर करती है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि जांच एजेंसियां विस्तृत फोरेंसिक ऑडिट और स्वतंत्र रिपोर्टों के बावजूद बैंक अधिकारियों और नियामकों की भूमिका की जांच नहीं कर रही हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, केवल न्यायिक निगरानी ही यह सुनिश्चित कर सकती है कि सार्वजनिक धन से जुड़े ऐसे बड़े मामले की गहन जांच हो। 4 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय को आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया था। अदालत ने CBI को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि कथित घोटाले में बैंक अधिकारियों की किसी भी संभावित मिलीभगत की जांच की जाए।

किसानों को बड़ा तोहफा: जमीन की रजिस्ट्री फ्री, सरकार भरेगी शुल्क और स्टांप ड्यूटी, CM मोहन की घोषणा

 ग्वालियर किसान सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पट्टाधारी किसानों के लिए बड़ी घोषणा की है। सीएम मोहन ने कहा कि, जिन किसानों के पास पट्टे की जमीन है, जल्द ही उन जमीनों की रजिस्ट्री उन किसानों के नाम कराई जाएगी, इससे वो अपनी कर्मभूमि की गारंटी पर लोन भी ले सकेंगे। सीएम ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए कहा, रजिस्ट्री शुक्ल के खर्च को लेकर घबराने की जरूरत नहीं, क्योंकि रजिस्ट्री का पूरा खर्च भी राज्य सरकार वहन करेगी, जिसपर करीब 3500 करोड़ रुपए खर्च होंगे। कार्यक्रम में 87 करोड़ 21 लाख रुपए के विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण हुआ। सीएम मोहन यादव ने मुख्यमंत्री मोहन यादव ने  कुलैथ गांव में आयोजित किसान सम्मेलन के दौरान कहा कि, प्रदेश सरकार पट्टे वाली जमीन की रजिस्ट्री किसान के नाम करेगी।। इससे किसानों को अपनी जमीन पर बैंक से लोन लेने में सुविधा होगी। उन्होंने बताया कि रजिस्ट्री पर होने वाला पूरा खर्च सरकार वहन करेगी और इस योजना पर करीब 3500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बजट MP Budget 2026 को समृद्ध, सुखद और सम्पन्न मध्यप्रदेश के सपने को पूरा करनेवाला करार दिया है। बजट में जरूरतमंदों के लिए अनेक घोषणाएं की गई हैं। सीएम मोहन यादव ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में जमीन के मालिकाना अधिकार के लिए नवाचार किया गया है। इसके अंतर्गत मुद्रांक एवं पंजीयन शुल्‍क राज्‍य सरकार वहन करेगी। प्रदेश के बजट में उज्जैन में होनेवाले सिंहस्‍थ 2028 महापर्व के लिए बड़ी राशि रखी गई है। सिंहस्थ से संबंधित 13 हजार 851 करोड़ के कार्य स्‍वीकृत किए गए हैं, जिसके लिए वर्ष 2026-27 के बजट में 3 हजार 60 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। बच्चों को बेहतर पोषण मिले, इसके लिए यशोदा दुग्‍ध प्रदाय योजना बनाई गई है बजट में इसके लिए 700 करोड़ रूपए का प्रावधान है। इस योजना के अंतर्गत आगामी पांच वर्षों में 6 हजार 600 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। बजट में विकसित भारत-गांरटी फॉर रोजगार एण्ड आजीविका मिशन (ग्रामीण) के लिए 10 हजार 428 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। मुद्रांक एवं पंजीयन शुल्‍क वहन करेगा राज्‍य शासन बजट के संबंध में सीएम मोहन यादव ने अहम योजना का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में आबादी भूमि पर मालिकाना अधिकार के लिए नई योजना बनाई गई है। इसमें मुद्रांक एवं पंजीयन का समस्‍त शुल्‍क राज्‍य शासन वहन करेगा। सीएम मोहन यादव ने कहा कि यह देश में अपने तरह का पहला नवाचार है। इसके लिए प्रदेश के बजट में 3 हजार 800 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। गरीब कल्याण योजनाओं पर खासा फोकस प्रदेश सरकार ने बजट में गरीब कल्याण योजनाओं पर खासा फोकस किया है। इसके लिए 15 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि का प्रावधान है। असंगठित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए मुख्यमंत्री जन कल्याण (संबल 2.0) योजना में 600 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसी तरह से प्रदेश में गरीबों को आवास देने की प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी एवं ग्रामीण) के लिए वित्त मंत्री ने 4500 करोड़ रुपए रखे हैं। विकास कार्यों का भूमिपूजन सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने 87 करोड़ 21 लाख रुपये की लागत के विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया। कार्यक्रम में सांसद भारत सिंह कुशवाह, प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट, विधायक मोहन सिंह राठौर सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कुलैथ के लोगों द्वारा प्रस्तुत मांग पत्र को भी स्वीकार करते हुए सभी कार्यों को पूरा कराने ता वादा किया। प्रोत्साहन राशि की घोषणाएं कार्यक्रम स्थल पर कन्हैया गायन करने वाली प्रत्येक टीम को पांच-पांच हजार रुपये देने की घोषणा की गई। साथ ही बैलगाड़ी दौड़ में शामिल प्रत्येक किसान को भी पांच-पांच हजार रुपये दिए जाने की बात कही गई। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले किसान को 21 हजार रुपये और द्वितीय स्थान पर रहने वाले किसान को 11 हजार रुपये देने की घोषणा की गई। कुलैथ के लिए ये घोषणाएं भी हुईं -महेश्वरा खदान को चालू करने के लिए भारत सरकार से अनुमति दिलाने का प्रयास करेंगे। -डांडेवाले बाबा मंदिर तक सड़क को बनाया जाएगा व ट्रांसफार्मर लगाया जाएगा। -जगन्नाथ भगवान मंदिर पर आने वाले यात्रियों के रुकने के लिए भवन बनाया जाएगा और सड़क भी बनाई जाएगी। -गांव में खेल का मैदान भी बनाया जाएगा। -गांव के आसपास के क्षेत्र में उद्योग भी लगाए जाएंगे।

सुरक्षाबलों के रडार पर चार शीर्ष कमांडर समेत 300 माओवादी

रायपुर. नरेंद्र मोदी सरकार 31 मार्च 2026 तक पूर देश से नक्सलवाद पूरी तरह से खत्म करने की तिथि निर्धारित की थी। नक्सलवाद खात्मे की डेडलाइन अब करीब आ गई है। इसे देखते हुए सरकार ने वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ एक बार फिर से बड़ा अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। सभी नक्सल प्रभावित राज्यों में सघन अभियान चलाय़ा जा रहा है। सुरक्षाबलों के रडार पर चार शीर्ष कमांडर समेत 300 नक्सली हैं। सुरक्षाबलों के निशाने पर प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की शीर्ष चार केंद्रीय समिति (सीसी) के सदस्यों में मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर, देवजी उर्फ कुंभा दादा उर्फ चेतन, राममन्ना उर्फ गणपति उर्फ लक्ष्मण राव और मल्लाह राजा रेड्डी उर्फ सागर शामिल हैं। इधर गृह मंत्रालय (Ministry Of Home Affairs) ने एक बयान में कहा है कि वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित जिलों की संख्या 18 से घटकर 11 हो गई है। चार शीर्ष कमांडर समेत 300 नक्सलियों की तलाश सुरक्षाबलों को इन चार शीर्ष कमांडर समेत करीब 300 नक्सलियों की तलाश है. अधिकारियों ने कहा कि या तो वे आत्मसमर्पण कर दें, अन्यथा मार्च 2026 की समयसीमा तक नक्सलवाद को खत्म करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए सघन अभियानों के दौरान सुरक्षाबल उन्हें खत्म कर देंगे. नक्सलवाद से प्रभावित जिलों की संख्या घटी गृह मंत्रालय ने अक्टूबर 2025 में कहा था कि नक्सलवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों की संख्या घटकर छत्तीसगढ़ के तीन रह गई है, जिसमें बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर शामिल हैं. मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित जिलों की संख्या 18 से घटकर 11 हो गई है. मंत्रालय ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खतरे को पूरी तरह से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है. मंत्रालय ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार 31 मार्च 2026 तक पूर देश से नक्सलवाद पूरी तरह से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। देवजी और उसके सहयोगी केसा सोढ़ी के इलाके में मौजूद होने की खुफिया जानकारी मिलने के बाद मंगलवार को छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर एक सघन अभियान चल रहा है। अधिकारियों ने बताया कि रेड्डी को छोड़कर बाकी सभी शीर्ष कमांडर इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। रेड्डी के बारे में कहा जाता है कि वह ओडिशा में छिपा हुआ है। सुरक्षाबलों को इन चार शीर्ष कमांडर समेत करीब 300 नक्सलियों की तलाश है। अधिकारियों ने कहा कि या तो वे आत्मसमर्पण कर दें, अन्यथा मार्च 2026 की समयसीमा तक नक्सलवाद को खत्म करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए सघन अभियानों के दौरान सुरक्षाबल उन्हें खत्म कर देंगे। नक्सलवाद से प्रभावित जिलों की संख्या घटी गृह मंत्रालय ने अक्टूबर 2025 में कहा था कि नक्सलवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों की संख्या घटकर छत्तीसगढ़ के तीन रह गई है। जिसमें बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर शामिल हैं। मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित जिलों की संख्या 18 से घटकर 11 हो गई है।

व्यापमं घोटाला: हाईकोर्ट ने कोर्ट में दी कड़ी टिप्पणी, अधिकारियों पर जताई नाराजगी

भोपाल  हाईकोर्ट की एक सुनवाई में ऐसा मोड़ आया जिसने सबको चौंका दिया। अदालत में दाखिल एक याचिका पर अचानक उठे सवालों ने पूरे मामले की दिशा बदल दी। जजों की सख्त टिप्पणी और नाराजगी ने माहौल गरमा दिया। दरअसल, फर्जी लोगों से परीक्षा दिलवाने वाले और व्यापमं घोटाले के मुख्य आरोपी डॉ. जगदीश सगर और उनकी पत्नी सुनीता सगर को हाईकोर्ट ने फटकार लगाई है। सगर दंपती ने एमपी हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में अपनी अपील लंबित होने की बात छिपाते हुए याचिका दायर की थी। बुधवार को सुनवाई के दौरान यह बात सामने आने पर जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की कोर्ट ने नाराजगी जताई।  याचिका पर कोर्ट ने जताई नाराजगी डॉ. जगदीश सगर और उनकी पत्नी की संपत्तियां प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सीज की थी, जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई शुरू होते ही सगर दंपती के वकील ने याचिका वापस लेने की गुजारिश की। इस दौरान ईडी की ओर से पेश हुए वकीलों ने कोर्ट को बताया कि इस याचिका में उनकी संपत्ति अटैच करने को चुनौती दी गई थी, लेकिन याचिका में यह बात छिपाई गई कि इस अटैचमेंट के खिलाफ उनकी अपील ट्रिब्यूनल में लंबित है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए जवाब तलब किया तो सगर दंपती के वकील ने बताया कि याचिका किसी अन्य वकील ने ड्रॉफ्ट कर हाईकोर्ट में दायर की थी, इसलिए इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाई। दंपत्ति का व्यवहार गलत- हाईकोर्ट कोर्ट ने अपने आदेश में भी लिखा है कि दूसरे वकील द्वारा पीटिशन ड्रॉफ्ट करने की दलील अपील के पेंडिंग होने के बारे में न बताने पर विचार करने का आधार नहीं हो सकती। कोर्ट ने सगर दंपती के व्यवहार को गलत बताते हुए टिप्पणी में इसकी बुराई भी की है। कोर्ट ने लिखा है कि याचिका वापस लेने की याचना की गई है, इसलिए हम याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई प्रोसिडिंग शुरू नहीं कर रहे हैं। कोर्ट ने उनकी याचिका को वापस मानकर खारिज कर दिया।