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ट्राईसिटी में 1463 करोड़ रुपये के रिंग रोड को केंद्र की मंजूरी

चंडीगढ़. ट्राईसिटी को ट्रैफिक की समस्या से राहत मिलने जा रही है। केंद्र की ओर से ट्राईसिटी रिंग रोड परियोजना को मंजूरी दे दी गई। योजना के तहत 1,463.95 करोड़ की लागत से 6-लेन, एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड स्पर बनाया। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर इस की जानकारी दी। भारतीय जनता पार्टी के महासचिव तरुण चुग ने इस स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय मंत्री गडकरी का आभार व्यक्त किया है। चुग ने कहा कि यह निर्णय पंजाब के बुनियादी ढांचे को नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक कदम है। चुग ने कहा कि इस परियोजना से मोहाली, चंडीगढ़ और पंचकूला के प्रमुख जंक्शनों पर वर्षों से बनी ट्रैफिक समस्या में ठोस राहत मिलेगी। एनएच-44, एनएच-205A और एनएच-152 पर दबाव कम होगा और हिमाचल प्रदेश, विशेषकर शिमला क्षेत्र की ओर जाने वाली आवाजाही तेज और सुगम बनेगी। उन्होंने कहा कि यह केवल सड़क निर्माण नहीं, बल्कि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने की व्यापक सोच का हिस्सा है। चुग ने बताया की इस कारिडोर से उद्योग, व्यापार, पर्यटन और लाजिस्टिक्स सेक्टर को बड़ा लाभ होगा। किसानों, व्यापारियों, उद्यमियों और युवाओं को बेहतर परिवहन सुविधाएं मिलेंगी, जिससे समय और ईंधन की बचत के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।

मॉडर्न जेल के ऊपर तंबाकू और सिगरेट लेकर उड़ते ड्रोन को पत्थर मारकर गिराया

कपूरथला. पंजाब के कपूरथला में देर रात मॉडर्न जेल परिसर के ऊपर एक ड्रोन उड़ता हुआ देखा गया। हालांकि, जेल अधिकारियों ने ड्रोन को गिरा दिया। अगली सुबह सर्च करने पर एक सिक्योरिटी टावर के पास भूरे रंग का ड्रोन मिला, और उससे तंबाकू, सिगरेट, रोलिंग पेपर और एक लाइटर बरामद हुआ। पंजाब की जेल में ड्रोन से सामान पहुंचाने का यह पहला मामला है, जिससे जेल प्रशासन की चिंताए बढ़ गई है। बेशक जेल प्रशासन की मुस्तैदी ने ड्रोन से सामान अंदर पहुंचाने के मंसूबे को नाकाम कर दिया है, लेकिन यह जेल प्रशासन के लिए खतरे की घंटी है। एसपी जेल के अनुसार, ड्रोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है और अज्ञात के खिलाफ प्रीजन एक्ट, बीएनएस और एयरक्राफ्ट एक्ट के तहत केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी गई है। सुभानपुर रोड पर थेह कांजला स्थित मॉडर्न जेल कपूरथला के सहायक सुपरिटेंडेंट धीरज कुमार ने थाना कोतवाली की पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 17/18 की दरमियानी रात को वह ड्यूटी पर तैनात थे। रात करीब 11:30 बजे गश्त के दौरान जेल की सीमा के ऊपर एक ड्रोन मंडराता देखा। उन्होंने तुरंत तत्परता दिखाते हुए ड्रोन को गिरा दिया। फिर जेल गार्ड के साथ मिलकर पूरे जेल परिसर की तलाशी शुरू कर दी, लेकिन अंधेरा होने के कारण ड्रोन नहीं मिला। अगली सुबह होने पर उन्होंने जेल गार्ड के साथ फिर से पूरे जेल परिसर की तलाशी ली शुरू कर दी। सुबह करीब आठ बजे सुरक्षा टावर नं.9 के पीछे बैरक नं.3 के पास मिनी 255 कंपनी का एक भूरे रंग का ड्रोन पड़ा मिला। उसके साथ टेप से कुछ सामान लिपटा हुआ था, जिसे खोलने पर उसमें से तंबाकू, सिगरेट, रोलिंग पेपर और पांच लाइटर बरामद हुए। एसपी जेल श्यामल ज्योति ने बताया कि ड्रोन के आपरेटिंग कंट्रोल का पता लगाने के लिए उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। वहां से रिपोर्ट आने पर पता चलेगा कि ड्रोन कहां से आया है। इसके अलावा उन्होंने जेल के अंदर चौकसी बढ़ा दी है। इस तरह की गतिविधियां कतई बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।

शादी का झांसा देकर नवयुवती का शारीरिक शोषण का आरोपी कोतवाली अनूपपुर पुलिस द्वारा गिरफ्तार

 अनूपपुर पुलिस अधीक्षक अनूपपुर मोती उर रहमान जी के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जगन्नाथ मरकाम जी एवं एस.डी.ओ.पी. नवीन तिवारी जी के मार्गदर्शन में कोतवाली अनूपपुर पुलिस द्वारा 19 वर्षीय नवयुवती को शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण करने के अपराध में आरोपी शिवम महरा निवासी ग्राम हथगला थाना बुढार जिला शहडोल को गिरफ्तार किया गया है। थाना कोतवाली अनूपपुर क्षेत्रान्तर्गत निवासी 19 वर्षीय नवयुवती द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि शिवम महरा निवासी ग्राम हथगला जिला शहडोल ने मित्रता की और शादी करने का विश्वास दिलाकर पिछले एक साल से शारीरिक शोषण किया जा रहा है। जो उक्त रिपोर्ट पर तत्काल अपराध क्रमांक 105/26 धारा 69 बी.एन.एस. पंजीबद्ध किया जाकर टी. आई. कोतवाली निरीक्षक अरविन्द जैन के नेतृत्व में उपनिरीक्षक सरिता लकड़ा, प्रधान आरक्षक शेख रसीद , आरक्षक अब्दुल कलीम की टीम के द्वारा आरोपी शिवम महरा पिता विजय महरा उम्र 21 साल निवासी ग्राम हथगला थाना बुढार जिला शहडोल को गिरफ्तार किया गया है।

पंजाब में जल संकट के बीच चार दोस्तों ने लगाए 1500 वर्षा जल संचयन प्लांट

जालंधर. ‘बिन पानी सब सून’, ‘पवन गुरु पानी पिता, माता धरत महत्त’ सरीखे श्लोक। जिनका जिक्र धार्मिक ग्रंथों में किया गया है। यहीं प्रेरणा अध्यात्मिक गुरु श्री श्री रवि शंकर जी ने अपने अनुयायियों को देते है। जिसके तहत श्री श्री रवि शंकर जी ने अपने प्रवचनों में बताया है कि ‘प्रकृति का सम्मान करना और उसकी रक्षा करना ही सच्ची भक्ति है’। उनकी इस सोच को शहर के चार कारोबारियों ने ना केवल जीवन में अपनाया है, बल्कि इसे मिशन बनाकर इस दिशा में कार्य कर रहे है। इसके लिए उन्होंने द वरुण मित्रा कंपनी की शुरूआत की। जिसके बैनर तले वैज्ञानिक तरीके से वर्षा जल संचयन प्रणालियों को डिजाइन तथा इंस्टाल किया जा रहा है। कंपनी के हर प्रोजेक्ट में पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी को प्राथमिकता दी जाती है। यह सफर 2012 में शुरू हुआ था। जिसके तहत 14 वर्षों में अभी तक देश भर में 1500 से अधिक वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाए जा चुके है। यह मिशन केवल वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगवाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि श्री श्री रविशंकर जी द्वारा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को लेकर दी जा रही प्रेरणा के तहत समाज को भी इन चार दोस्तों द्वारा जागरूक किया जा रहा है। 2012 में हुई थी कंपनी की शुरुआत द वरुण मित्रा लेबर एंड कंस्ट्रक्शन कंपनी की शुरुआत 2012 में हुई थी, बाद में इसे द वरुण मित्रा कंपनी के रूप में विकसित किया गया। संस्था द्वारा लगवाए जा रहे प्लांट्स की 1500 से लेकर तीन लाख लीटर तक है, जो वर्षा के पानी को स्टोर करने और भू-जल स्तर को रिचार्ज करने में मदद करते हैं। इन प्लांट्स के जरिए अब तक करोडो़ं लीटर पानी रिचार्ज किया जा चुका है। कंपनी के संचालक रमन कुमार बठला, गुरमीत सिंह गोल्डी, राजेश शर्मा व परमवीर सिंह के मुताबिक वर्षा के पानी को जमीन के नीचे आरसीसी टैंक्स में स्टोर किया जाता है, जो 3 से 4 दिनों में स्थापित हो जाते हैं। सामाजिक जिम्मेदारी का कर रहे निर्वाह रमन कुमार बठला ने कहा कि उनका मकसद आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध करवाना है। जिस रफ्तार के साथ जल स्तर गिर रहा है, समाज में चेतना ना आई तो परिणाम गंभीर होने तय है। उनके सहित चारों दोस्तों का अपना-अपना कारोबार है। ऐसे में वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगवाना व्यावसायिक पहल नहीं सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वाह किया जा रहा है। पर्यावरणीय जागरूकता फैलाने के बीच बिना किसी लाभ के इस प्रोजैक्ट को अंजाम दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि घरेलू प्रोजैक्ट में 50 हजार से लेकर एक लाख लीटर पानी की क्षमता वाले प्लांट लगाए जा रहे है। इसी तरह कमर्शियल प्रोजैक्ट में एक से तीन लाख लीटर पानी क्षमता वाले प्लांट लगाए जा रहे है। देश के कई नामी संस्थानों में लगा चुके है प्लांट द वरुणा मित्रा द्वारा देश के कई नामी संस्थानों पर वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाए जा चुके है। जिसमें विश्व विख्यात पवित्र धार्मिक स्थल श्री दरबार साहिब अमृतसर, पंजाब के एकमात्र सिद्ध शक्तिपीठ श्री, आदमपुर एयरपोर्ट, टाटा कैंसर अस्पताल मोहाली, सोनालिका कंपनी, बस स्टैंड पटियाला, जिला प्रशासकीय परिसर जालंधर, गोरखनाथ मंदिर बठिंडा सहित कई नामी जगहों पर प्लांट लगाकर ना केवल जल संरक्षण की पहल की गई है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। विशेष नीति बनाए जाने की जरूरत इस बारे में रमन कुमार बठला बताते है कि जल संरक्षण परियोजनाओं के लिए विशेष नीति बनाए जाने की जरूरत है। जिसमें सब्सिडी, टैक्स में छूट के साथ प्लांट लगवाने का प्रोत्साहन जरूरी है। जबकि, इस समय इस सामाजिक प्रोजैक्ट पर 18 प्रतिशत टैक्स लगाया गया है। जिसमें राहत की जरूरत है। इसके अलावा नए निर्माणों, खासकर शहरी क्षेत्रों में, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य करने, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) माडल के तहत सहयोग देना चाहिए। इसी तरह डमी प्लांट लगाकर औपचारिकता पूरी करने वाले संस्थानों की तलाश करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार को एक मानिटरिंग एजेंसी बनानी चाहिए, जो प्लांट लगाने को सार्टिफाइट तो करे ही साथ ही इमारतों में लगाए जा रहे प्लांटस को सुनिश्चित किए जाने का काम भी करे। इसके अलावा सोलर की तर्ज पर वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाने पर सब्सिडी तथा एनजीओ या कम्यूनिटी स्तर पर प्लांट लगवाने के लिए पहल किए जाने की अहम जरूरत है।

‘मुझे जवान-हैंडसम लड़के नहीं, औरतें पसंद’: ट्रंप

वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अक्सर अपनी ऊलजलूल टिप्पणियों की वजह से भी चर्चा में रहते हैं। ट्रंप कभी अपनी प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट के होंठों की तारीफ कर देते हैं तो कभी किसी देश पर सिर्फ इसीलिए मोटा टैरिफ लगा देते हैं क्योंकि वहां की राष्ट्रपति के बात करने का तरीका उन्हें पसंद नहीं आता। अब हाल ही में गाजा के पुनर्निर्माण के लिए बनाई गई बोर्ड ऑफ पीस की मीटिंग के दौरान ट्रंप का एक बयान चर्चा में है। बोर्ड ऑफ पीस की गुरुवार की हुई इस पहली बैठक का फोकस जहां गाजा के भविष्य पर होना था, वहां डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी अजीब बातों से गंभीर माहौल को पूरी तरह बदल गई। यहां पैराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो पेना का स्वागत करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक कहा, “जवान और हैंडसम होना अच्छी बात है। इसका मतलब यह नहीं है कि हम आपको पसंद ही करें। मुझे जवान, हैंडसम मर्द पसंद नहीं हैं। औरतें, मुझे पसंद हैं। मर्दों में, मुझे कोई दिलचस्पी नहीं है।” ट्रंप के यह कहते ही हॉल में खूब ठहाके लगे। महज 47 साल के हैं पेना बता दें कि 47 साल के पेना, पैराग्वे के डेमोक्रेटिक दौर के सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति हैं। वह पेशे से एक अर्थशास्त्री थे और इससे पहले देश के फाइनेंस मिनिस्टर भी रह चुके हैं। उन्होंने कोलोराडो पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर प्रेसिडेंसी जीतने के बाद अगस्त 2023 में यह कार्यभार संभाला था। भारत ने भी लिया बैठक में हिस्सा इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप के गाजा के लिए गठित बोर्ड ऑफ पीस की उद्घाटन बैठक में भारत ने भी हिस्सा लिया। भारत ने इसमें एक पर्यवेक्षक देश के रूप में भाग लिया। 'डोनाल्ड जे. ट्रंप इंस्टीट्यूट ऑफ पीस' में आयोजित बैठक में उपस्थित लोगों की सूची के मुताबिक, भारत का प्रतिनिधित्व वॉशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास की प्रभारी राजनयिक नामग्या खम्पा ने किया। बता दें कि भारत 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल नहीं हुआ है। अब तक कुल 27 देशों ने इस समूह में शामिल होने के लिए हामी भर दी है, जिनमें अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, हंगरी, पाकिस्तान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे देशों के नाम शामिल हैं। मीटिंग में ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका इस बोर्ड के लिए 10 अरब अमेरिकी डॉलर देगा।

ट्रंप ने भरी बैठक में शहबाज को खड़ा करवाकर किया जलील

वाशिंगटन. वाशिंगटन में आयोजित 'बोर्ड ऑफ पीस' (Board of Peace) के उद्घाटन सत्र में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसकी चर्चा अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जोर-शोर से हो रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन के दौरान न केवल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना बेहतरीन दोस्त बताया, बल्कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को बीच भाषण में खड़ा कर भारत-पाक शांति का पूरा श्रेय खुद ले लिया। ट्रंप भारत-पाकिस्तान संघर्ष को रोकने के अपने दावे का जिक्र कर रहे थे। उन्होंने शहबाज शरीफ की ओर देखते हुए उन्हें खड़ा होने के लिए कहा। जैसे ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री खड़े हुए, ट्रंप ने अपनी शैली में प्रधानमंत्री मोदी और भारत का गुणगान शुरू कर दिया। ट्रंप ने वहां उपस्थित दुनियाभर के कई नेताओं और मीडिया के सामने कहा, “भारत और पाकिस्तान… वह एक बहुत बड़ा मामला था। मैंने प्रधानमंत्री मोदी से बात की है। वह बहुत उत्साहित हैं और वास्तव में वह अभी इस कार्यक्रम को देख रहे हैं।” ट्रंप ने आगे कहा, "भारत और पाकिस्तान, आप दोनों का बहुत शुक्रिया। मोदी एक महान व्यक्ति हैं और मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं।" यह नजारा काफी दिलचस्प था क्योंकि जहां पाकिस्तान के प्रधानमंत्री प्रोटोकॉल के तहत खड़े होकर यह सब सुन रहे थे, वहीं भारत इस बैठक में केवल एक 'पर्यवेक्षक' के रूप में मौजूद था और पीएम मोदी स्वयं वहां उपस्थित नहीं थे। ट्रंप ने इस दौरान फिर से दोहराया कि उन्होंने पिछले साल भारत-पाक युद्ध को केवल एक फोन कॉल से रोक दिया था। उन्होंने कहा, “जब मुझे पता चला कि दोनों देश लड़ रहे हैं और विमान गिराए जा रहे हैं, तो मैंने फोन उठाया और कहा अगर युद्ध नहीं रुका, तो मैं दोनों देशों पर 200 प्रतिशत का व्यापारिक टैरिफ लगा दूंगा।” ट्रंप ने जिस तरह से सार्वजनिक मंच पर शहबाज शरीफ को खड़ा कर पीएम मोदी का जिक्र किया वह पाकिस्तान के लिए काफी असहज स्थिति थी। एक तरफ जहां पाकिस्तान खुद को ट्रंप का करीबी सहयोगी दिखाने की कोशिश कर रहा है, वहीं ट्रंप बार-बार अपनी बातचीत में भारत और मोदी को अधिक महत्व देते नजर आ रहे हैं।

गली गली घूम रहे पागल इंसानों के लिए कोई नही हैं जिम्मेदार

छबिलाल राजेंद्रग्राम इन दिनों राजेंद्र ग्राम में पागल आवारा घूम रहे इंसानों के देखभाल के लिए कोई जिम्मेदार व्यक्ति दिखाई नहीं दे रहे हैं वा इनको पूछताछ करने वाला कोई जिम्मेदार व्यक्ति ही नहीं है कि ये लोग कहां रहते हैं क्या करते हैं और क्या खाते पीते हैं रात कैसे काटते है इनका ठिकाना वा जानकारी लेने वाले शासन प्रशासन भी नही दिखाई पड़ रहे है। अगर कोई भी घटना होती है तो जिम्मेदार कोन होगा शासन प्रशासन वा पंचायत कर्मचारी कौन होगा  अगर माना  जाए तो राजेंद्र ग्राम में लगभग कम से कम दो या तीन आवारा पागल घूम रहे हैं जो कि ये कहा के है किसी को पता ही नही है इनको कमसे कम पूछ तो लिया जाता की कहां से आए हो क्या नाम है गांव का क्या नाम है माता-पिता का क्या नाम है और जिससे इनको उनके परिजनों तक पहुंचाया जा सके लेकिन पूछने वाला ही नहीं है कोई जबकि कहा जाए तो पूरे पुष्पराजगढ़ के अधिकारी कर्मचारी सहित आम नागरिक  वा दुकानदार पूरे सप्ताह आते जाते इन्हीं का दर्शन करने में लगे रहते हैं ऐसा हो गया है की राजेंद्रग्राम तीर्थ स्थल है जिनके देवता यही पागल ही है ।और आते जाते राहगीर दर्शन करते रहते हैं। इन पागलों का हुलिया देखकर डरावना सा लगता है कोई पागल कपड़ा पहना है कोई पागल नंगा घूम रहा है पर किसी को इन पागल व्यक्तियों के ऊपर एक भी दया  नाम की चीज नहीं है। आते जाते राहगीरों को कहना है की इन सभी पागलों का नाम ठिकाना जानकर ठिकाना लगाने की सख्त जरूरत है

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री की दो टूक- ‘आसिम मुनीर नहीं हैं मेरे बॉस’

इस्लामाबाद. पाकिस्तान की सरकार में सेना की दखल की बातें लंबे समय से चली आ रहीं हैं। अब मुल्क के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस मुद्दे पर खुलकर बात की है। उन्होंने बताया है कि पाकिस्तान में सेना और सरकार कैसे काम करती हैं। उन्होंने इसे हाइब्रिड व्यवस्था कहा है। साथ ही कहा है कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर उनके बॉस नहीं हैं। फ्रांस 24 इंग्लिश से बातचीत में आसिफ से सवाल किया गया कि डोनाल्ड ट्रंप के फेवरेट फील्ड मार्शल आसिम मुनीर क्या पाकिस्तान के असली शासक हैं। इसपर आसिफ ने जवाब दिया, 'मैं आपसे सहमत हूं, कुछ लोग हैं जो ऐसा कहते हैं। एक व्यवस्था है। देखिए पाकिस्तान का इतिहास सरकार पर सेना के नियंत्रण का रहा है। 50 के दशक की बात हो या 60 के दशक की। एक समय था, जब सेना ने दखल दिया और सत्ता की बागडोर अपने हाथ में ले ली।' जब पूछा गया कि क्या अब भी ऐसा ही हो रहा है। उन्होंने कहा, 'ऐसा अब नहीं हो रहा है। क्योंकि जिन हालात का अभी हम सामना कर रहे हैं जैसा कि हमने बात की आतंकवाद, अफगानिस्तान से भारत का खतरा और अर्थव्यवस्था जो 3 साल पहले पूरी तरह कमजोर हो गई थी। तो ऐसे में यह राष्ट्रीय संस्थाओं का आपसी सहयोग है।' उन्होंने कहा, 'पाकिस्तानी सेना या सशस्त्र बल सबसे ज्यादा जरूरी राष्ट्रीय संस्थान हैं। वो राजनीतिक सरकार और चुनी हुई सरकार को सहयोग दे रहे हैं। मैं इसे हाइब्रिड अरेंजमेंट कहूंगा। पाकिस्तान में सेना का शासन नहीं है।' आसिम मुनीर पर कर दिया बड़ा दावा इंटरव्यू के दौरान आसिफ से पूछा गया कि क्या फील्ड मार्शल मुनीर उनके बॉस हैं। उन्होंने इससे इनकार कर दिया। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा, 'नहीं वह मेरे बॉस नहीं हैं। मेरे बॉस प्रधानमंत्री हैं।' पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ हैं।

आईटी और BPO की नौकरियां 4 साल में हो जाएंगी खत्म: खोसला

नई दिल्ली. मशहूर भारतीय अमेरिकी कारोबारी और इन्वेस्टर विनोद खोसला ने बड़ी भविष्यवाणी की है। उनका कहना है कि आईटी और बीपीओ सर्विसेज का भविष्य ज्यादा दिन का नहीं है। उन्होंने कहा कि यह उद्योग 2030 तक समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय आईटी कंपनियों को सलाह दी है कि यदि वे भविष्य में बने रहना चाहते हैं तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर तेजी से काम करें। भविष्य में यदि वे दुनिया भर को AI सर्विसेज मुहैया करा सकेंगी तो उनके लिए बचे रहना आसान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कोई भी भविष्यवाणी करना कठिन है, लेकिन हमारा अनुमान है कि 2030 से 2035 तक आईटी और बीपीओ का बिजनेस समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हम अपने पुराने बिजनेस पर ही नहीं टिके रह सकते। इसकी बजाय हमें उन्हें नई सेवाएं देनी होंगी। खोसला ने कहा कि दुनिया अभी AI के साथ तालमेल बिठाने में उतनी सक्षम नहीं है, जितना भारत है। अहम बात है कि उनके पास या तो पश्चिम से तकनीक लेने का विकल्प है, जो बहुत महंगा है। या फिर अफ्रीका और साउथ ईस्ट एशिया के देश हैं, जिनके पास जानकारी काफी कम है। खोसला वेंचर्स के संस्थापक ने कहा कि भारतीय कंपनियां पूरी दुनिया में AI सर्विसेज दे सकती हैं। यह हमारे लिए सबसे अच्छा अवसर है। मुख्य बात यही है कि जो इस समय में तेजी से आगे बढ़ेंगे या बदलाव को स्वीकार करेंगे, उनके पास ही अवसर होंगे। विनोद खोसला ने इकनॉमिक टाइम्स से बातचीत में इस सवाल का भी जवाब दिया कि यदि AI की स्पीड बढ़ी तो नौकरियां कम होंगी और उससे बचने का रास्ता क्या है। उन्होंने कहा कि हर देश आने वाले समय में इस मामले में गति पकड़ेगा। आप देखेंगे कि एआई के चलते उत्पादकता बढ़ेगी और कम लोगों की जरूरत होगी। अगले 15 साल इस दुनिया के लिए अहम होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में चीजें और मनोरंजन सस्ते हो जाएंगे। यदि देखें तो 2050 तक काफी बदलाव हो जाएंगे। यही नहीं उन्होंने भारत के लोगों की सुविधा को लेकर भी बात की। 'AI से हर भारतीय को मिलेगा पर्सनल डॉक्टर और किसानों को वैज्ञानिक' खोसला ने कहा कि ऐसा भी संभव हो सकता है कि हर भारतीय के पास अपना एक पर्सनल डॉक्टर हो। यह हर वक्त उपलब्ध होगा। इससे नागरिकों के लिए हेल्थकेयर की सुविधा थोड़ी सस्ती हो जाएगी, जो फिलहाल काफी महंगी है। यह सिस्टम आधार से लिंक हो सकता है। इसके अलावा देश में 25 करोड़ बच्चे हैं, जो AI ट्यूटर का ही इस्तेमाल करते हुए पढ़ाई कर सकते हैं। देश में लाखों किसान हैं, जो बेहद छोटी जोत में काम करते हैं। उनके पास ज्यादा समझ नहीं होती। ऐसे लोगों को कृषि वैज्ञानिक जैसी सेवाएं एआई के माध्यम से मिल सकती हैं।

यूपी में ब्रजेश पाठक और राजभर के बीच तेज हुई ब्राह्मण सियासत

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजनीति में 'प्रबुद्ध वर्ग' यानी ब्राह्मणों का झुकाव सत्ता की चाबी माना जाता है। यही कारण है कि मिशन 2027 से पहले सूबे के सभी प्रमुख दल इस वोट बैंक को अपने पाले में करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। हालिया 'शिखा विवाद' के बाद शुरू हुई यह सियासी जंग अब घर-घर पूजन और रैलियों तक पहुंच गई है। ब्रजेश पाठक का 'बटुक पूजन' और डैमेज कंट्रोल सियासत की ताजा लहर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के उस बयान से शुरू हुई, जिसमें उन्होंने प्रयागराज माघ मेले में ब्राह्मण बटुकों की चोटी (शिखा) खींचे जाने की घटना को 'महापाप' करार दिया। भाजपा की ब्राह्मण राजनीति के प्रमुख चेहरे माने जाने वाले पाठक यहीं नहीं रुके; उन्होंने बीते कल अपने सरकारी आवास पर बटुकों को आमंत्रित कर उनका विधि-विधान से पूजन किया, उनके पैर पखारे और आशीर्वाद लिया। इसे प्रयागराज की घटना के बाद ब्राह्मण समाज में उपजे असंतोष को शांत करने के 'डैमेज कंट्रोल' के तौर पर देखा जा रहा है। ओपी राजभर की आजमगढ़ रैली और 'प्रबुद्ध' कार्ड डिप्टी सीएम के इस कदम के तुरंत बाद सुभासपा प्रमुख और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी बड़ा दांव चल दिया है। रविवार को आजमगढ़ में होने वाली अपनी 'सामाजिक समरसता रैली' को सफल बनाने के लिए राजभर ने खास रणनीति बनाई है। उन्होंने इस रैली में दस हजार प्रबुद्ध ब्राह्मणों को विशेष रूप से आमंत्रित किया है। राजभर का यह कदम संकेत दे रहा है कि वे केवल पिछड़ों के नेता बनकर नहीं रहना चाहते, बल्कि सवर्णों, विशेषकर ब्राह्मणों को जोड़कर अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता बढ़ाना चाहते हैं। मायावती को याद आया 2007 का 'सोशल इंजीनियरिंग' बसपा प्रमुख मायावती ने भी इस रेस में खुद को पीछे नहीं रखा है। उन्होंने हाल ही में ब्राह्मणों से खुलकर बसपा का समर्थन करने की अपील करते हुए वादा किया कि उनके शासनकाल में ब्राह्मणों का पूरा सम्मान सुरक्षित रहेगा। मायावती ने याद दिलाया कि 2007 में बसपा ने 'दलित-ब्राह्मण' गठजोड़ (सोशल इंजीनियरिंग) के जरिए ही पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। वे एक बार फिर सतीश चंद्र मिश्रा के जरिए इसी पुराने फॉर्मूले को जिंदा करने की कोशिश में हैं। अखिलेश का 'हाता' और अपमान का आरोप वहीं, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव लगातार योगी सरकार पर ब्राह्मणों के उत्पीड़न का आरोप लगा रहे हैं। अखिलेश अक्सर पूर्वांचल के कद्दावर नेता रहे हरिशंकर तिवारी के गोरखपुर आवास (हाता) का जिक्र करते हुए कहते हैं कि मौजूदा सरकार को 'हाता' नहीं भाता है। वे विकास दुबे एनकाउंटर से लेकर विभिन्न घटनाओं का हवाला देकर यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि भाजपा राज में ब्राह्मण उपेक्षित और असुरक्षित हैं। अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा: नया सियासी मोड़ इस ब्राह्मण राजनीति में सबसे चौंकाने वाला मोड़ बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने दिया है। ब्राह्मणों के सम्मान और स्वाभिमान के मुद्दे पर उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने का ऐलान किया है। एक प्रशासनिक अधिकारी का इस मुद्दे पर कुर्सी छोड़ना यह बताने के लिए काफी है कि पर्दे के पीछे ब्राह्मण अस्मिता की आंच कितनी तेज है। कुल मिलाकर, यूपी में 12 से 13 प्रतिशत की आबादी रखने वाला यह समाज एक बार फिर सत्ता के गलियारों में चर्चा का विषय है। अब देखना यह है कि बटुक पूजन, रैलियों के न्योते और सम्मान के वादों के बीच ब्राह्मण समाज किस पर अपना भरोसा जताता है।