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सिहोरा में हुए बवाल के बाद जबलपुर पुलिस अलर्ट, 49 गिरफ्तार; ड्रोन से चल रही निगरानी

जबलपुर  सिहोरा में दो पक्षों के बीच विवाद के बाद 49 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, ड्रोन से निगरानी की जा रही है और पुलिस ने अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। यह घटना गुरुवार रात आजाद चौक में हुई थी, जिसके बाद इलाके में तनाव बना रहा और पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई। घटना में शामिल अन्य आरोपियों को चिह्नित कर उनकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है। शुक्रवार को घटना क्षेत्र में तनाव बना रहा। हिंदूवादी संगठनों ने थाना घेरा घटना के विरोध में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने सिहोरा थाना घेरा। हनुमान चालीसा का पाठ कर विरोध जताया। पुलिस के सख्ते पहरे के बीच मस्जिद में जुमे की नमाज हुई। इसके बाद पुराने बस स्टैंड के पास दोनों समुदाय के एकत्रित लोगों की भीड़ में टकराव की स्थिति निर्मित हुई। भीड़ ने एक फल के ठेले को पलटा दिया। तभी मौके पर तैनात पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर दोनों पक्षों को तितर-बितर किया। घटना के बाद क्षेत्र में पुलिस की गश्त और बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। घटना स्थल वाले संवेदनशील क्षेत्र में अब सन्नाटा है। व्यापारियों ने खुद बंद रखी दुकानें सुरक्षा की दृष्टि से शुक्रवार को व्यापारियों ने स्वयं प्रतिष्ठान बंद रखे। पुलिस और प्रशासन ने स्थिति नियंत्रण में होने का दावा किया है। शेष शहर में लोगों का जनजीवन सामान्य रहा। सांप्रदायिक तनाव को फैलने से रोकने के लिए शहर से अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर भेजा गया। उपद्रव वाली जगह पर दोनों समुदायों के धर्मस्थल के कारण यह अतिसंवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। पुलिस ने रात में ही उपद्रव वाले इलाके की बैरीकेडिंग कर दी। वहां, अनावश्यक आवाजाही रोक दी गई। हमने दोनों पक्षों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली है और अब तक 49 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। किसी भी तरह की अफवाह फैलाने या माहौल बिगाड़ने वालों पर एनएसए जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सीसीटीवी से चिह्नित किए चेहरे रात में ही सीसीटीवी कैमरे की फुटेज और घटना के वीडियो को देखकर आरोपियों को चिह्नित किया। नाबालिगों और वृद्धों को चेतावनी देकर छोड़ा। हिरासत में लिए गए अन्य आरोपितों को बस से शहर के पुलिस थाने में ले जाया गया। उनकी गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई है। कैसे बिगड़ी सिहोरा की फिजा 1. सिहोरा के आजाद चौक में गुरुवार रात दुर्गा मंदिर में आरती और मस्जिद में तरावीह की नमाज के दौरान लाउडस्पीकर को लेकर विवाद शुरू हुआ। 2. विवाद इतना बढ़ा कि भीड़ ने पथराव कर दिया और वाहनों में तोड़फोड़ की, जिसके बाद स्थिति को संभालने के लिए 12 थानों की पुलिस बुलानी पड़ी। 3. पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और वीडियो के आधार पर 49 उपद्रवियों को चिह्नित कर गिरफ्तार कर लिया है, जिन्हें बस से थाने ले जाया गया। 4. शुक्रवार को तनावपूर्ण शांति रही, व्यापारियों ने स्वेच्छा से बाजार बंद रखा और पुलिस ने ड्रोन कैमरों से छतों की तलाशी ली। 5. अफवाह रोकने के लिए सोशल मीडिया पर पैनी नजर रखी जा रही है और संवेदनशील इलाकों में पुलिस ने पैदल फ्लैग मार्च निकाला।

विष्णु देव साय का सफर: पंच, सरपंच, सांसद और अब मुख्यमंत्री – जशपुर के लाल की अद्भुत यात्रा

रायपुर  छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 21 फरवरी को अपना 62वां जन्मदिन मना रहे हैं.  आज विष्णु देव साय अपने गृह ग्राम बागिया जाएंगे. यहां वे अपने परिवार के साथ जन्मदिन मनाएंगे और क्षेत्र के लोगों से भी मुलाकात करेंगे. सीएम के 62वें जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने बधाई दी. 1964 में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे विष्णु देव साय ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत गांव की राजनीति से की. उनका राजनीतिक सफर पंच, सरपंच, विधायक, और फिर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बने तक का रहा. उनकी सादगी, संगठन में स्थापित प्रभाव और शांत स्वभाव की राजनीति उन्हें एक अलग पहचान देती है. बीजेपी के आदिवासी चेहरे के तौर पर उभरे साई को जमीनी नेता और संगठन के भरोसेमंद कार्यकर्ता के तौर पर जाना जाता है. 21 फरवरी 1964 में हुआ था जन्म विष्णु देव साय के जन्मदिन के मौके पर आइए जानते हैं, उनके जीवन और राजनीतिक सफर के बारे में. विष्णु देव साय का 21 फरवरी 1964 में किसान परिवार में जन्म हुआ था. उनका जन्म जशपुर जिले के फरसाबहार विकासखंड के ग्राम बगिया में हुआ था. उनके पिता राम प्रसाद साय एक किसान थे और उनकी मां जसमनी देवी गृहिणी थीं. गांव के माहौल में पले-बढ़े साय ने कुनकुरी से हायर सेकेंडरी की पढ़ाई की. उन्होंने 1991 में कौशल्या देवी साय से शादी की. उनके परिवार के पॉलिटिकल रिश्ते भी थे. उनके दादा नरहरि प्रसाद साय, मेंबर ऑफ पार्लियामेंट और यूनियन मिनिस्टर रहे, जबकि परिवार के दूसरे सदस्य भी विधायक रहे. पंच के तौर पर शुरू हुआ पॉलिटिकल करियर साय ने अपना पॉलिटिकल करियर 1989 में बगिया ग्राम पंचायत में पंच के तौर पर शुरू किया था. 1990 में वे बिना किसी विरोध के सरपंच चुने गए यह साल उनके लिए एक बड़ा पॉलिटिकल टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. उसी साल उन्होंने अविभाजित मध्य प्रदेश की तपकारा विधानसभा सीट से बीजेपी कैंडिडेट के तौर पर चुनाव लड़ा और विधायक बने. 1990 से 1998 तक विधायक चुने गए साय 1990 से 1998 तक विधायक के तौर पर लगातार दो कार्यकाल के दौरान, उन्होंने आदिवासी इलाके में अपनी मजबूत पकड़ बनाई और संगठन में खुद को एक भरोसेमंद लीडर के तौर पर स्थापित किया. 1999 से 2014 सांसद रहे विष्णु देव साय विष्णु देव साय पहली बार 1999 में रायगढ़ लोकसभा सीट से सांसद चुने गए. जिसके बाद वो 1999, 2004, 2009 और 2014 में लगातार चार बार सांसद चुने गए. अपने संसदीय कार्यकाल के दौरान, उन्होंने कई महत्वपूर्ण समितियों में काम किया, जिनमें खाद्य और सार्वजनिक वितरण, सूचना प्रौद्योगिकी, जल संसाधन और वाणिज्य समितियां शामिल थीं. 2014 से 2019 तक केंद्रीय मंत्री रहे साय जिसके बाद 2014 में केंद्र में बीजेपी की सरकार आने के बाद उन्हें माइंस और स्टील के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री बनाया गया. 2014 से 2019 के बीच उन्होंने स्टील, माइंस और लेबर एंड एम्प्लॉयमेंट जैसे मंत्रालयों में जिम्मेदारियां संभालीं.  लखीराम अग्रवाल को माना जाता है साय का पॉलिटिकल गुरु अविभाजित मध्य प्रदेश में बीजेपी के सीनियर नेता लखीराम अग्रवाल को साय का पॉलिटिकल गुरु माना जाता है. कहा जाता है कि लखीराम अग्रवाल ने उन्हें आगे बढ़ाया और 1990 में उन्हें विधानसभा का टिकट दिलाने में अहम भूमिका निभाई. उनके अनुशासन, आदिवासी समुदाय में मजबूत असर और विवादों से दूर रहने की पहचान ने साय को बीजेपी के अंदर एक भरोसेमंद नेता बना दिया. 2023 में छत्तीसगढ़ के सीएम बने साय 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने साय को अहम जिम्मेदारियां दीं. उन्होंने मैनिफेस्टो कमेटी, बस्तर और सरगुजा इलाकों में बड़े पैमाने पर जनसंपर्क अभियान में एक अहम भूमिका निभाई. आदिवासी समुदाय के नेता के तौर पर उन्हें स्ट्रेटेजी के साथ आगे बढ़ाया गया. विष्णु देव साई 3 दिसंबर, 2023 को MLA चुने गए और 10 दिसंबर 2023 को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेकर राज्य का नेतृत्व संभाला.    

अगर चाहते हैं शांत मन और कम तनाव, तो सद्‌गुरु से सीखें मेडिटेशन का आसान तरीका

ऑफिस की टेंशन हो या बोर्ड कक्षा के रिजल्ट का तनाव, अगर आपकी रोजमर्रा की लाइफ में तनाव अकसर बना रहता है, दिमाग में स्ट्रेस रहता है, किसी काम को करते समय दिमाग इधर-उधर भटकने लगता है तो आपको आपनी लाइफ में मेडिटेशन को जगह देनी चाहिए। हालांकि कई लोग अकसर इस बात से भी परेशानी रहते हैं कि उन्हें दिमाग को शांत और स्ट्रेस फ्री रखने के लिए मेडिटेशन करने का सही तरीका नहीं मालूम होता है। अगर आप भी ऐसे ही लोगों में से एक हैं तो सद्‌गुरु से सीखें मेडिटेशन करने के लिए क्या है जरूरी टिप्स। नियमित अभ्यास करें सद्‌गुरु के अनुसार ध्यान यानी मेडिटेशन व्यक्ति के लिए उसका दैनिक अभ्यास होना चाहिए। जिसका अभ्यास उसे रोजाना 10-20 मिनट का समय निकालकर जरूर करना चाहिए। शांत जगह बैठे मेडिटेशन करने के लिए हमेशा शांत स्थान का चुनाव करें। ऐसी जगह जहां बैठकर ध्यान करने में आपको किसी तरह का कोई व्यवधान महसूस ना हो। सद्‌गुरु की मानें तो मेडिटेशन के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा होता है। ईशा क्रिया का अभ्यास सद्‌गुरु की 'ईशा क्रिया' एक सरल ध्यान तकनीक है। यह शरीर और मन से परे ध्यान की अवस्था का अनुभव करने के लिए एक सरल और शक्तिशाली प्रक्रिया है। इसमें श्वास पर ध्यान देना और 'मैं मेरे शरीर नहीं, मैं मेरे मन नहीं' का जाप करना शामिल है। इस क्रिया का उद्देश्य मनुष्य को उसके आंतरिक स्रोत से संपर्क करने में सहायता करना है। श्वास पर ध्यान दें सद्‌गुरु के अनुसार, अब अपनी सांसों को गिनें और धीरे-धीरे गहरी सांस लें। ऐसा करने से मन शांत होता है। खुद को समर्पित करें ध्यान के दौरान बाहरी विचारों को छोड़कर पूरी तरह से वर्तमान में रहें। सद्‌गुरु कहते हैं कि यह आत्म-जागरूकता बढ़ाता है। धैर्य रखें सद्‌गुरु कहते हैं कि ध्यान के लाभ समय के साथ मिलते हैं। ऐसे में उनकी सलाह यह है कि ध्यान करते समय जल्दबाजी न करें और प्रक्रिया पर भरोसा रखें।

इंदौर में पानी की गंभीर कमी, 60 क्षेत्रों में पानी बंद; 35 मौतों के बाद हालात चिंताजनक

 इंदौर इंदौर शहर के भागीरथपुरा में हुई 35 मौतों का मामला अभी थमा भी नहीं था कि अब शहर में जल संकट की स्थिति ने लाखों शहरवासियों को परेशान कर दिया है। शुक्रवार के बाद आज यानी शनिवार को भी जल संकट बरकरार रहेगा। नर्मदा परियोजना के तीसरे चरण के तहत जलूद में 1200 एमएम की मुख्य पाइपलाइन बदलने, सोलर प्लांट के कार्यों और राजीव गांधी चौराहे पर 1100 एमएम लाइन के लीकेज सुधारने के चलते 20 फरवरी की सुबह से बंद किए गए पंपों को आज भी शहर के बड़े इलाके के लिए नहीं खोला जाएगा। इससे करीब करीब लाखों लोग प्रभावित होंगे। नर्मदा तीसरे चरण के पंप बंद रहने से शनिवार, 21 फरवरी को सुबह 60 टंकियों से होने वाली जलापूर्ति ठप रहेगी। इस कारण संबंधित क्षेत्रों के निवासियों को पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ेगा। -प्रमुख योजनाएं: स्कीम 54, स्कीम 59, स्कीम 71, स्कीम 74, स्कीम 78 (स्लाइस 1 व 2), स्कीम 94, स्कीम 113, स्कीम 114 (पार्ट 1 व 2) और स्कीम 136। -मध्य एवं उत्तर इंदौर: एमआईजी, तुकोगंज, यशवंत क्लब, एमवायएच, पीडब्ल्यूडी, सीपी शेखर नगर, पागनिसपागा, गाड़ी अड्डा, स्नेह नगर, खातीवाला और काटन अड्डा। -पूर्वी इंदौर और विजयनगर: खजराना, महालक्ष्मी नगर, सुखलिया, वीणा नगर, लवकुश विहार, बर्फानी धाम, बजरंग नगर, नंदा नगर (नई, पुरानी और रोड नं. 13) और जनता क्वार्टर। -दक्षिण एवं पश्चिमी इंदौर: बिलावली, भवरकुआ, रेती मंडी, सूर्यदेव नगर, हवा बंगला, विदुर नगर, ग्रेटर वैशाली, प्रगति नगर, चंदन नगर, अंबिकापुरी, नगीन नगर और मित्रबंधु नगर। -अन्य प्रभावित बस्तियां: मूसाखेड़ी, टूटी प्रेस, शिव नगर, महावीर नगर, कुलकर्णी का भट्टा, अंबेडकर नगर, साईं कृपा, लोहा मंडी, राजीव आवास विहार, भागीरथपुरा, ईंट भट्टा, उर्दू स्कूल और मां विहार।

क्या आप भी सड़क पर गिरी चीज़ों को लांघते हैं? जानिए इससे जुड़ा दुर्भाग्य का रहस्य

अक्सर रास्तों, खासकर चौराहों पर, नींबू-मिर्च, कटा हुआ नारियल, पीले चावल या पूजा सामग्री पड़ी दिखाई देती है। कई लोग इन्हें सामान्य कचरा समझकर अनदेखा कर देते हैं या लांघ जाते हैं। लेकिन वास्तु शास्त्र और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार ऐसी कुछ वस्तुओं को भूलकर भी नहीं लांघना चाहिए। मान्यता है कि ये वस्तुएं कभी-कभी तंत्र-क्रिया या विशेष पूजा के बाद चौराहे पर रखी जाती हैं। इन्हें लांघना नकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करने जैसा माना जाता है। आइए जानते हैं ऐसी पांच चीजों के बारे में जिनसे दूरी बनाए रखना बेहतर बताया गया है। कटा हुआ नारियल अगर रास्ते में कटा हुआ नारियल और उसके आसपास पूजा सामग्री जैसे फूल, अगरबत्ती या लाल कपड़ा दिखाई दे, तो उसे लांघने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नारियल का उपयोग विशेष पूजा या तंत्र अनुष्ठान में किया जाता है। इसे लांघना अशुभ माना जाता है और इससे जीवन में बाधाएं आने की आशंका जताई जाती है। नींबू-मिर्च नींबू और मिर्च का प्रयोग नज़र दोष और नकारात्मक ऊर्जा से बचाव के लिए किया जाता है। कई लोग टोटका करने के बाद इसे चौराहे पर फेंक देते हैं। वास्तु मान्यताओं के अनुसार यदि कोई व्यक्ति गलती से भी नींबू-मिर्च को लांघ देता है, तो उसे मानसिक तनाव, कार्यों में रुकावट या नकारात्मक प्रभाव झेलना पड़ सकता है। धूप-अगरबत्ती और पूजा सामग्री रास्ते में जली या अधजली धूप-अगरबत्ती, कपूर, फूल या अन्य पूजा सामग्री दिखाई दे तो सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसी वस्तुएं अक्सर किसी विशेष अनुष्ठान के बाद छोड़ी जाती हैं। इन्हें लांघना धार्मिक दृष्टि से अनुचित माना जाता है और इससे परेशानियां बढ़ने की आशंका जताई जाती है। लाल सिंदूर, हल्दी और चावल यदि सड़क पर लाल सिंदूर, हल्दी या चावल गिरे हुए दिखाई दें, तो उन्हें भी लांघने से बचने की सलाह दी जाती है। ये वस्तुएं शुभ कार्यों और तांत्रिक अनुष्ठानों में प्रयुक्त होती हैं। मान्यता है कि इन्हें अनदेखा कर पार करने से जीवन में बाधाएं आ सकती हैं। रास्ते में पड़े सिक्के या पैसे कई बार सड़क पर सिक्के या कुछ रुपये पड़े मिलते हैं। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार इन्हें भी लांघना या बिना सोचे-समझे उठाना ठीक नहीं माना जाता। कहा जाता है कि कुछ लोग विशेष उपाय या टोटका करके धन को रास्ते में छोड़ देते हैं। ऐसे में सावधानी रखना बेहतर समझा जाता है। क्या कहता है व्यावहारिक दृष्टिकोण ? हालांकि इन बातों का आधार धार्मिक और पारंपरिक मान्यताएं हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी अनजान वस्तु को छूने या लांघने से पहले सतर्क रहना चाहिए, खासकर स्वच्छता और सुरक्षा के लिहाज से। वास्तु शास्त्र और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार रास्ते में पड़ी कुछ वस्तुओं को लांघना अशुभ माना जाता है। चाहे आप इन मान्यताओं में विश्वास करें या न करें, सावधानी बरतना हमेशा बेहतर है। ध्यान रखें कि यह जानकारी पारंपरिक विश्वासों पर आधारित है। किसी भी तरह की परेशानी या भय की स्थिति में विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित होता है।

तारिक रहमान बने बांग्लादेश PM, भारत से जुड़ा अहम फैसला और यूनुस के फरमान को किया पलट

ढाका  बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने भारत के साथ रिश्ते को बेहतर करने के लिए बड़ा फैसला लिया है. दिल्ली स्थित बांग्लादेश हाई कमीशन ने शुक्रवार (20 फरवरी 2026) को भारत के लोगों के लिए वीजा सेवाएं फिर से बहाल कर दी है, जिन्हें मोहम्मद यूनुस की सरकार ने करीब दो महीने पहले सस्पेंड कर दिया था. भारत-बांग्लादेश वीजा सर्विस बहाल भारतीय नागरिकों के लिए सभी कैटेगरी के वीजा बहाल कर दिए गए हैं, जिनमें मेडिकल और पर्यटन वीजा भी शामिल हैं. पिछले साल दिसंबर में बिजनेस और वर्क वीजा पर रोक नहीं लगाई गई थी. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार (20 फरवरी) सुबह सेवाएं बहाल कर दी गईं. बीएनपी के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के तीन बाद ये फैसला लिया गया, जो दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में सुधार का संकेत है. क्या भारत भी बहाल कर सकता है वीजा सर्विस? बांग्लादेश के सिलहट में भारत के वरिष्ठ कांसुलर अधिकारी अनिरुद्ध दास ने गुरुवार (19 फरवरी 2026) को बताया कि बांग्लादेशी नागरिकों के लिए भी सभी वीजा सेवाएं पूरी तरह बहाल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. बीडी न्यूज24 के अनुसार उन्होंने कहा, 'मेडिकल और डबल-एंट्री वीजा वर्तमान में जारी किए जा रहे हैं. ट्रेवल सहित अन्य कैटेगरी वीजा को फिर से शुरू करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं.' उन्होंने कहा कि भारत-बांग्लादेश संबंध आपसी सम्मान और साझा हितों पर टिकी है.' उन्होंने कहा कि जल्द ही सभी प्रकार के भारतीय वीजा सामान्य रूप से जारी होने लगेंगे. बांग्लादेश में भारतीय हाई कमीशन पर हुआ था हमला तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद बांग्लादेश नए राजनीतिक दौर में प्रवेश कर गया है. बांग्लादेश में कट्टरपंथी राजनीतिक कार्यकर्ता शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या के बाद दोनों देशों के बीच तनाव पैदा हो गया था. दिसंबर 2025 में राजनयिक तनाव के मद्देनजर दोनों देशों के बीच कांसुलर और वीजा सेवाएं रोक दी गई थीं. सिंगापुर में इलाज के दौरान हादी की मौत की सूचना मिलने के बाद 18 दिसंबर की रात प्रदर्शनकारियों के एक ग्रुप ने चटगांव में भारतीय सहायक उच्चायोग के सामने प्रदर्शन किया और पत्थर फेंके थे. इसके बाद भारत ने वहां 21 दिसंबर से अगले आदेश तक कामकाज निलंबित कर दिया.  

CM नायब 2 मार्च को पेश करेंगे सवा लाख करोड़ का बजट

चंडीगढ़. हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र का कैलेंडर तय हो गया है और अब सबकी निगाहें दो मार्च पर टिक गई हैं, जब वर्ष 2026-27 का बजट अनुमान सदन में पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री के नाते मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी करीब सवा लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट पेश करेंगे। सत्र के पहले दिन विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कार्य सलाहकार समिति (बीएसी) की पहली रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत कर संभावित कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया। बीएसी की सिफारिश के अनुसार दो मार्च को प्रातः 11 बजे बजट पेश होगा। पांच मार्च से बजट अनुमानों पर सामान्य चर्चा शुरू होगी, जो चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी। 10 से 13 मार्च तक विभागीय स्थायी समितियां बजट अनुमानों पर विस्तार से विचार करेंगी। इसके बाद 16 मार्च को समितियों की रिपोर्टें सदन में रखी जाएंगी और 17 मार्च को वित्त मंत्री द्वारा जवाब के बाद बजट पर चर्चा व मतदान होगा। इसी दिन विनियोग विधेयक भी पेश किया जाएगा। 23 से 27 फरवरी तक प्रश्नकाल 20 फरवरी को सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से हुई। इसके बाद 23 से 27 फरवरी तक प्रश्नकाल, शून्यकाल और राज्यपाल के अभिभाषण पर सामान्य चर्चा होगी। 27 फरवरी को मुख्यमंत्री द्वारा जवाब और धन्यवाद प्रस्ताव पर मतदान होगा। 26 फरवरी को वर्ष 2025-26 के अनुपूरक अनुमान (तीसरी किस्त) प्रस्तुत किए जाएंगे और उसी दिन उस पर चर्चा व मतदान भी होगा। साथ ही नियम 121 के तहत प्रस्ताव और चार निर्वाचित समितियों के नामांकन भी होंगे। बैठकों का समय और अवकाश बीएसपी की रिपोर्ट के अनुसार अलग-अलग तिथियों पर बैठक के समय में बदलाव रहेगा। कुछ दिन सुबह 11 बजे से शाम पांच बजे तक और कुछ दिन दोपहर दो बजे से शाम छह बजे तक बैठकें चलेंगी। 21, 22 फरवरी, 28 फरवरी, एक मार्च, तीन, चार मार्च, सात, आठ मार्च तथा 14, 15 मार्च को अवकाश रहेगा। विभागीय स्थायी समितियों की 10 से 13 मार्च तक होने वाली बैठकों को भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इन्हीं में विभिन्न विभागों के खर्च और प्रस्तावित आवंटन की गहन समीक्षा होगी। 18 मार्च को प्रश्नकाल के साथ नियम 15 के तहत निरंतर बैठक और नियम 16 के तहत अनिश्चितकालीन स्थगन संबंधी प्रस्ताव पेश किए जाएंगे। इसी दिन विभिन्न समितियों की रिपोर्टें भी रखी जाएंगी।

पंजाब में गेहूं की फसल पर मंडराया खतरा

होशियारपुर. फरवरी 2026 के दूसरे हफ्ते में पिछले साल के मुकाबले तापमान 2 से 4 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रिकॉर्ड किया गया। चंडीगढ़ के मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, अगले पांच दिनों तक मौसम सूखा रहेगा। इसलिए, मौसम की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए, लुधियाना की पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी में एक्सटेंशन एजुकेशन के डायरेक्टर डॉ. मक्खन सिंह भुल्लर ने किसानों को गेहूं की फसल में हल्की सिंचाई करने की सलाह दी है। सिंचाई करते समय हवा की गति पर ध्यान दें, ताकि फसल को नुकसान न हो। पंजाब में मौजूदा रबी सीजन के दौरान, लगभग 95 परसेंट गेहूं के एरिया में 25 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच बुवाई हुई थी, जिसे बुवाई के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है। गेहूं की फसल में दाने भरते समय ज्यादा तापमान का खास तौर पर असर होता है। इस दौरान बढ़े हुए तापमान से दाने के वज़न पर बुरा असर पड़ता है, जिससे पैदावार और क्वालिटी में कमी आती है। ज्यादा तापमान के कारण, हल्की से मीडियम मिट्टी में बोई गई गेहूं की शुरुआती फसलों में बालियां आ जाती हैं और वे जल्दी पक जाती हैं, जिससे दाने कमज़ोर रह जाते हैं। क्रॉप साइंस डिपार्टमेंट के डॉ. हरि राम मुखी ने बताया कि अभी फ्लैग लीफ स्टेज में गेहूं को बढ़ते तापमान से बचाने के लिए 2% पोटैशियम नाइट्रेट (13:0:45) का स्प्रे किया जा सकता है। 200 लीटर पानी में 4 किलोग्राम पोटैशियम नाइट्रेट घोलें। पहला स्प्रे तब करें जब फ्लैग लीफ निकले और दूसरा स्प्रे तब करें जब कलियां निकलें। यह घोल 200 लीटर में तैयार करें, और शाम को स्प्रे करना सबसे अच्छा है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, हल्की सिंचाई और पोटैशियम नाइट्रेट (13:0:45) का स्प्रे करने से फसल को ज़्यादा तापमान के बुरे असर से काफी हद तक बचाया जा सकता है। डॉ. चरणजीत कौर, चीफ एक्सटेंशन साइंटिस्ट और फार्म एडवाइजरी सर्विस सेंटर, गंगियां ने किसानों से कहा कि वे अपनी गेहूं की फसलों को बढ़ते तापमान के बुरे असर से असरदार तरीके से बचाने के लिए यूनिवर्सिटी की इन सलाहों को अपनाएं। किसानों को इन सलाहों को मानना चाहिए ताकि उनकी फसलें सुरक्षित रहें और प्रोडक्शन कम न हो।

बिजली दरों में वृद्धि का विद्युत नियामक आयोग की जनसुनवाई में विरोध

रायपुर. छत्तीसगढ़ मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन ने आज विद्युत नियामक की जनसुनवाई में अपना प्रतिवेदन पेश किया। इसमें एसोसिएशन ने आगामी वर्ष 2026–27 में विद्युत दरों में किसी भी प्रकार की वृद्धि होने के खिलाफ पुरजोर विरोध किया। एसोसिएशन ने 13 बिंदुओं में अपनी मांगें रखी। एसोसिएशन ने विद्युत नियामक आयोग के सचिव को सौंपे अपने प्रतिवेदन में बताया है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश के औद्योगिक विकास में लौह उद्योगों का पारस्परिक सहयोग रहा है। छत्तीसगढ़ के औद्योगिक नीति के वजह से औद्योगिक विकास में अग्रणी बनने जा रहा है। जैसा कि भारत देश में छत्तीसगढ़ राज्य स्टील हब के नाम से जाना जाता है क्योंकि छोटे-छोटे लौह उद्योग जो कम पूंजी में अधिक उत्पादन करते हैं। साथ ही सबसे अधिक मात्रा में छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को रोजगार प्रदान करने में सक्षम है। उल्लेखनीय है कि विगत वर्षों में लौह उद्योगों औद्योगिक वातावरण को विद्युत नियामक आयोग द्वारा गतिशील बनाये रखा। फलस्वरूप प्रदेश में औद्योगिक विकास दर एवं प्रदेश का घरेलू सकल उत्पादन जी.डी.पी. की सर्वोच्च ऊंचाई को छू रहा है। नतीजन लौह उद्योगों का विस्तार एवं नये लौह उद्योग लगते जा रहे है। विदित है कि छत्तीसगढ़ में 100 इकाईयों की 300 मिनी स्टील प्लांट (फर्नेस) उद्योग है जो छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल के कुल उत्पादन के लगभग 30 से 35% के सबसे बड़े उपभोक्ता (power intensive industry) है, जो प्रतिवर्ष लगभग 750 करोड़ यूनिट खपत करने वाले उद्योग है इस उच्च श्रेणी के सबसे अधिक बिजली खपत करने वाले उद्योगों द्वारा छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल को प्रतिवर्ष लगभग 5 से 6 हजार करोड़ का राजस्व देने वाले है। छत्तीसगढ़ का पूरा लौह उद्योग जीएसटी टैक्स के माध्यम से राज्य शासन एवं भारत सरकार को प्रति वर्ष लगभग 9 से 10 हजार करोड़ से अधिक राजस्व प्रदान करते हैं। यह उद्योग लगभग दो लाख परिवारों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान करता है एवं छत्तीसगढ़ के मिनी स्टील प्लांट उद्योग 110 स्पंज आयरन एवं 250 रोलिंग मिलों की बीच की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। ज्ञातव्य है कि वर्तमान विद्युत दर पर मिनी स्टील प्लांट उद्योग बहुत कठिन हो गया है। अतः आपसे निवेदन है कि निम्नलिखित सुझावों एवं मांगों पर त्वरित निर्णय लेने की कृपा करें। ये हैं 13 मांगे मल्टी-ईयर टैरिफ (MYT) 5 वर्ष का होना चाहिए। जो अगले 5 वर्षों के लिए टैरिफ को लगभग स्थिर रखा जाए। कुछ अतिआश्यक पड़ने में उचित सीमा के अंदर बदलाव करे, जिससे उद्योग अपने विस्तार की योजना बना सके। जो अत्यधिक विद्युत उपभोग (Power intensive) (जिनका लोड फैक्टर 50% से ज्यादा एवं कॉन्टैक्ट डिमांड 2500kVA या उससे ज्यादा है) के लिए एक अलग विद्युत श्रेणी (category) बनाया जाये। जिससे उनकी विकास एवं समस्यओं पर आसानी से ध्यान रखा जा सके और राज्य शासन एवं नियामक आयोग कोई रक्षात्मक (protective) पॉलिसी बना सें। अत्यधिक विद्युत उपभोग करने वाले (power intensive) HV4- मिनी स्टील प्लांट उद्योगों के लिए विद्युत दर एवरेज बिलिंग दर लगभग रूपये 5.50 प्रति यूनिट होना चाहिए, जिससे उड़ीसा, झारखंड, दोमादर वेली (DVC) आदि जैसे दूसरे बड़े स्टील बनाने वाले राज्यों के समकक्ष हो। अत्यधिक विद्युत उपभोगक्ता से एवरेज बिलिंग लगभग वोल्टेज-वाइज कॉस्ट ऑफ सप्लाई (वर्ष 25-25 रूपये 5.55 प्रति यूनिट 33 केवी सप्लाई के लिए, जैसा नियामक आयोग ने टैरिफ ऑर्डर 24-25 में तय किया है (पिछले रेवेन्यू गैप को छोड़कर) नियामक आयोग ने टैरिफ ऑर्डर में वर्ष 25-26 के लिए वोल्टेज-वाइज कॉस्ट ऑफ सप्लाई तय नहीं की है) के बराबर होना चाहिए। लोड फैक्टर प्रोत्साहन पूर्व की भांति जारी रखा जाये यानी 50% लोड फैक्टर पर 1% प्रोत्साहन से शुरू करके हर 1% बढ़ोतरी पर प्रोत्साहन 1% बढ़ाया जाए जो ज्यादा से ज्यादा 74% तक हो। शटडाउन एवं साप्ताहिक अवकाश के दिनों को ध्यान में रखते हुए, पॉवर ऑफ के घंटे को बढ़ाकर हर माह औसतन 72 घंटे किए जाए, जिससे उद्योगों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी को भी मेंटेनेंस के काम के लिए काफी समय मिल सके। लोड शेडिंग के दौरान हर महीने नॉर्मल पॉवर ऑफ आवर्स के अलावा, असल लोड शेडिंग पीरियड के आधार पर एक्स्ट्रा पॉवर ऑफ आवर्स दिए जाए। फ्यूल एवं पॉवर परचेस एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPAS) को जीरो पर रीसेट किया जाए क्योंकि वर्ष 25-26 के दौरान एनर्जी चार्ज पर यह 18% तक बढ़ गया है। FCA और FPPA सरचार्ज के कैलकुलेशन की इंडिपेंडेंट चेकिंग के लिए एक ठीक और पारदर्शी तरीका शुरू किया जाये। सोलर पॉवर बैंकिग को एड्रेस करने के लिए सोलर आवर्स के दौरान कॉन्ट्रैक्ट डिमांड को अधिकतम सीमा 20% तक पार करने पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगाया जाये। बिजली बिल विलम्ब भुगतान पर सरचार्ज के बराबर एडवांस पेमेंट पर छूट (APR) (अभी DPS बिल का 1.5% हर महीने या उसके हिस्से के लिए है और APR सिर्फ 1.25% है) दिया जा सकता है ताकि बिजली बिलों का एडवांस पेमेंट बढ़ाया जा सके जिससे छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी का कैश फ्लो बेहतर होगा। उद्योगों को स्मार्ट (प्रीपेमेंट) एनर्जी मीटर लगाने का विकल्प दिया जाए। अत्यधिक विद्युत उपभोग करने वाले (power intensive) उद्योग के लिए विलम्ब भुगतान सरचार्ज को हर दिन के हिसाब से तय किया जाना चाहिए (देरी वाले दिनों की संख्या पर 0.05% हर दिन) क्योंकि उनकी बिजली बिल की राशि बहुत अधिक होती है और थोड़ी सी भी देरी से उन पर बहुत अधिक DPS का बोझ पड़ता है। सभी अत्यधिक विद्युत उपभोग करने वाले (power intensive) उद्योग अपनी डिमांड को अनुमेय सीमाएँ (permissible limits) के अंदर कंट्रोल करने के लिए आटोमेटेड डिमांड सिस्टम लगाती है, लेकिन यह देखा गया है कि कुछ मामलों में ऐसे सिस्टम के थोड़े समय के लिए खराब होने की वजह से डिमांड अनुमेय सीमाएँ से ज्यादा हो जाती है, जिससे ऐसे उपभोक्ता पर पेनल्टी चार्ज के तौर पर भारी पैसे का बोझ पड़ता है, इसलिए ऐसी किसी भी स्थिति को (जैसे साल में एक बार) उन उपभोक्ता के लिए छूट कर दिया जाना चाहिए जिन्होंने आटोमेटेड डिमांड कंट्रोल सिस्टम लगवाया है। सोलर पॉवर प्लांट को लगाने को बढ़ावा देने के लिए प्रोसेस / परमिसेंस को आसान बनाना चाहिए और राज्य में निवेश को आकर्षित करने के लिए सोलर पॉवर पर किसी भी कॉस सब्सिडी सरचार्ज को माफ किया जाना चाहिए। मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन ने निवेदन करते … Read more

AI टेक्नोलॉजी से मरीजों का नेविगेशन आसान, भोपाल एम्स बना देश का पहला स्मार्ट अस्पताल

भोपाल AIIMS भोपाल देश का पहला ऐसा अस्पताल बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मरीजों और उनके परिजनों को खुद सही रास्ता बताएगा। रोजाना यहां 10 हजार से अधिक लोग इलाज, जांच और परामर्श के लिए आते हैं। बड़े और एक जैसे दिखने वाले भवनों के कारण लोगों को अक्सर सही विभाग ढूंढने में दिक्कत होती है। अब इस समस्या का समाधान AI आधारित नेविगेशन सिस्टम से किया जाएगा। QR कोड स्कैन करते ही मिलेगा रास्ता एम्स भोपाल के डिप्टी डायरेक्टर संदेश जैन के अनुसार, परिसर में लगाए गए QR कोड को स्कैन करते ही मरीज को यह जानकारी मिल जाएगी कि कार्डियोलॉजी, अमृत फार्मेसी, न्यूरोसर्जरी, पैथोलॉजी, एमआरआई या डॉक्टर का कक्ष किस दिशा में है। यह सुविधा गूगल मैप की तरह काम करेगी और चरणबद्ध दिशा-निर्देश देगी। एक जैसी बिल्डिंग, इसलिए AI का सहारा एम्स का कैंपस काफी विस्तृत है और भवनों की आंतरिक बनावट लगभग एक जैसी है। अलग-अलग ब्लॉक होने के बावजूद रास्ते मिलते-जुलते हैं। ऐसे में पहली बार आने वाले मरीजों को ओपीडी, वार्ड, पैथोलॉजी या एमआरआई ढूंढने में काफी समय लग जाता है। बार-बार स्टाफ से पूछने की स्थिति बनती है, जिससे समय के साथ तनाव भी बढ़ता है। इसी परेशानी को खत्म करने के लिए AI तकनीक को अपनाया जा रहा है। बिल्डिंग की डिजाइन ऐसी कि एआई का सहारा लेना पड़ा भोपाल एम्स का परिसर काफी बड़ा है। अस्पताल भवनों की अंदरूनी बनावट एक जैसी है। अलग-अलग ब्लॉक हैं, लेकिन सब एक जैसे नजर आते हैं, रास्ते भी एक जैसे हैं। ऐसे में बार-बार आने पर भी मरीजों और उनके परिजन को सही विभाग तक पहुंचने में परेशानी होती है। वहीं, पहली बार आने वाले मरीजों का पैथोलॉजी, एमआरआई, ओपीडी या वार्ड ढूंढ़ने में ही काफी समय लग जाता है। बार-बार स्टाफ या सुरक्षाकर्मियों से रास्ता पूछना पड़ता है। इससे न केवल समय बर्बाद होता है, बल्कि मरीज और परिजन तनाव भी महसूस करते हैं। इसलिए अब इस समस्या को दूर करने के लिए एआई का सहारा लिया जा रहा है। एआई आधारित नेविगेशन सिस्टम बना रहे इसी समस्या को दूर करने के लिए एम्स भोपाल ने आईआईटी इंदौर की दृष्टि टीम के साथ मिलकर स्मार्ट मार्गदर्शन प्रणाली विकसित करने की पहल की है। भोपाल के एक स्टार्टअप की मदद से एआई आधारित नेविगेशन सिस्टम तैयार किया जा रहा है। यह सिस्टम गूगल मैप की तरह काम करेगा। एम्स के मोबाइल एप या परिसर में लगाए गए क्यूआर कोड को स्कैन करने के बाद व्यक्ति जिस स्थान पर जाना चाहता है, उसे सर्च करेगा। इसके बाद एआई उसे चरणबद्ध तरीके से सही रास्ता दिखाएगा। क्यूआर कोड और मोबाइल ऐप से मिलेगा रास्ता इस प्रणाली के दो स्वरूप होंगे। पहला वेब आधारित होगा। एम्स के मुख्य प्रवेश द्वार और प्रमुख स्थानों पर क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। जैसे ही कोई व्यक्ति क्यूआर कोड स्कैन करेगा, उसके मोबाइल पर इंटरैक्टिव मैप खुल जाएगा। दूसरा स्वरूप मोबाइल ऐप आधारित होगा। यूजर ऐप डाउनलोड कर सीधे नेविगेशन का लाभ ले सकेंगे। भवनों के बीच पहुंचने के लिए जीपीएस तकनीक का उपयोग होगा। भवनों के अंदर, जहां जीपीएस की सटीकता कम हो जाती है, वहां हर 15 मीटर पर रिले सिस्टम लगाए जाएंगे। ये उपकरण मोबाइल को सटीक दिशा-निर्देशन देंगे, जिससे व्यक्ति बिना भटके सही जगह पहुंच सकेगा। एक माह का पायलट, फिर पूरे परिसर में लागू इस प्रोजेक्ट को शुरुआत में एक माह के पायलट की तरह लागू किया जाएगा। इस दौरान यह देखा जाएगा कि सिस्टम कितना प्रभावी है और लोगों को कितना फायदा हो रहा है। यदि रिजल्ट संतोषजनक रहे तो इसे पूरे परिसर में लागू किया जाएगा। इससे मरीजों का समय बचेगा, भीड़ का दबाव कम होगा और स्टाफ पर रास्ता बताने का अतिरिक्त बोझ भी घटेगा। IIT इंदौर के सहयोग से विकसित होगा सिस्टम इस परियोजना को विकसित करने के लिए एम्स भोपाल ने Indian Institute of Technology Indore की दृष्टि टीम और भोपाल के एक स्टार्टअप के साथ साझेदारी की है। AI आधारित यह स्मार्ट मार्गदर्शन प्रणाली मोबाइल ऐप और वेब दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। दो तरीकों से काम करेगा नेविगेशन वेब आधारित सिस्टम: मुख्य प्रवेश द्वार और प्रमुख स्थानों पर QR कोड लगाए जाएंगे। स्कैन करते ही मोबाइल पर इंटरैक्टिव मैप खुल जाएगा। मोबाइल ऐप से मिलेगा सटीक दिशा-निर्देशन दूसरा स्वरूप मोबाइल ऐप आधारित होगा। भवनों के बीच जाने के लिए जीपीएस तकनीक का उपयोग किया जाएगा। वहीं भवनों के अंदर, जहां जीपीएस कमजोर होता है, वहां लगभग हर 15 मीटर पर रिले उपकरण लगाए जाएंगे। इससे दिशा-निर्देशन और अधिक सटीक होगा। पहले पायलट, फिर पूरे परिसर में लागू एम्स प्रवक्ता डॉ. केतन मेहरा ने कहा कि आइआइटी इंदौर के साथ मिलकर सिस्टम को विकसित कर रहा है। इसे अप्रेल के अंत में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा। बुजुर्गों, दिव्यांगों और गंभीर मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। सबसे अहम बात, बड़े अस्पताल को लेकर जो झिझक होती है, वह कम होगी। मोबाइल ऐप आधारित सिस्टम: यूजर ऐप डाउनलोड कर सीधे नेविगेशन सुविधा का उपयोग कर सकेंगे। भवनों के बीच दिशा बताने के लिए GPS तकनीक का उपयोग किया जाएगा। वहीं, भवनों के अंदर जहां GPS की सटीकता कम होती है, वहां हर 15 मीटर पर रिले सिस्टम लगाए जाएंगे, जो सटीक दिशा-निर्देशन सुनिश्चित करेंगे। AIIMS भोपाल में बेड क्षमता-     जनरल वार्ड एवं एचडीयू – 816 बेड     आईसीयू वार्ड – 128 बेड     प्राइवेट वार्ड – 34 बेड     इमरजेंसी वार्ड – 56 बेड     डे-केयर वार्ड – 268 बेड डे-केयर सर्विस वार्ड – 87 बेड यह पहल न केवल समय की बचत करेगी, बल्कि मरीजों और उनके परिजनों के तनाव को भी कम करेगी, जिससे अस्पताल सेवाएं और अधिक सुगम बन सकेंगी।