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एमपी में बारिश का चौथा अलर्ट, सीधी, सिंगरौली सहित 8 जिलों में आंधी और गरज-चमक का अनुमान

भोपाल  मध्य प्रदेश में फरवरी का महीना जाते-जाते भी अपनी रंगत बदल रहा है। प्रदेश के किसानों और आम जनता के लिए राहत और चिंता की मिली-जुली खबर है। मौसम विभाग (IMD) ने सोमवार को राज्य के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में बारिश और गरज-चमक के साथ तेज आंधी का अलर्ट जारी किया है। यह इस महीने में चौथी बार है जब बेमौसम बारिश प्रदेश को भिगोने वाली है। बंगाल की खाड़ी में बना 'लो प्रेशर' बढ़ाएगा मुसीबत मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, वर्तमान में दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) सक्रिय है। इसके साथ ही एक 'ट्रफ लाइन' भी गुजर रही है, जो नमी खींच रही है। इस सिस्टम की वजह से मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से के 8 जिलों, जिसमें सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, मंडला, डिंडौरी और बालाघाट शामिल हैं, में आज जोरदार बारिश होने का अनुमान है। इन इलाकों में बिजली कड़कने के साथ तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। सिस्टम आगे बढ़ा, इसलिए बूंदाबांदी हुई मौसम विभाग ने पहले 22 फरवरी को एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित करने का अलर्ट जारी किया था, लेकिन यह सिस्टम आगे बढ़ गया। इसी बीच लो प्रेशर एरिया और टर्फ की एक्टिविटी शुरू हो गई। इसके चलते सोमवार को बारिश होने का अनुमान है। फरवरी में तीन बार बारिश वाला मौसम बता दें कि फरवरी के शुरुआत में ही प्रदेश में दो बार ओले, बारिश और आंधी का दौर रह चुका है। इससे फसलों को खासा नुकसान हुआ था। इसके बाद सरकार ने प्रभावित फसलों का सर्वे भी कराया था। 18 फरवरी से तीसरी बार प्रदेश भीग गया है। 19, 20 और 21 फरवरी को भी असर रहा। अब चौथी बार बारिश होने के आसार है। 23 फरवरी को फिर से बारिश हो सकती है। रात में सर्दी से राहत, दिन में पारा लुढ़का बारिश की वजह से दिन के तापमान में गिरावट हुई है। रविवार को सर्द हवाओं से थोड़ी राहत मिली। शनिवार-रविवार की रात में पचमढ़ी में ही पारा सबसे कम 10.2 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं, राजगढ़ में 11 डिग्री, कल्याणपुर में 11.2 डिग्री, करौंदी में 11.4 डिग्री और मंदसौर मे 11.5 डिग्री रहा। बाकी में पारा बढ़ा गया। फरवरी में बारिश से फसलों पर संकट इस साल फरवरी का मिजाज काफी अलग रहा है। महीने की शुरुआत में दो बार ओलावृष्टि और बारिश ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया था, जिसका सर्वे अब भी जारी है। 18 से 21 फरवरी के बीच तीसरी बार हुई बारिश के बाद, अब यह चौथी बार है जब मौसम बिगड़ रहा है। पिछले 24 घंटों में उज्जैन और श्योपुर जैसे इलाकों में हुई भारी बारिश और 63 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली आंधी ने खेतों में खड़ी फसलों के लिए नई चिंता पैदा कर दी है। दिन और रात के तापमान में बड़ा अंतर मध्य प्रदेश के तापमान में इन दिनों 'विरोधाभास' देखा जा रहा है। एक तरफ जहां खरगोन में पारा 34.3 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, वहीं पचमढ़ी और राजगढ़ जैसे इलाकों में रातें अभी भी सर्द हैं। राजधानी भोपाल की बात करें, तो यहाँ दिन का पारा 30 डिग्री के पार होने से हल्की गर्मी महसूस हो रही है, लेकिन रात होते ही हल्की ठंडक वापस आ जाती है। 23 फरवरी के बाद रात के तापमान में 1 से 2 डिग्री की और गिरावट आने की संभावना है। अगले 24 घंटों के लिए चेतावनी मौसम विभाग ने आने वाले 24 घंटों के लिए नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और सिवनी जैसे दक्षिणी जिलों में भी बादलों के डेरा डालने की चेतावनी दी है। वहीं उत्तर मध्य प्रदेश के पन्ना, सतना, रीवा और मऊगंज में भी हल्की बौछारें पड़ सकती हैं। राहत की बात यह है कि पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) का जो सिस्टम पहले बहुत शक्तिशाली लग रहा था, वह अब थोड़ा आगे बढ़ गया है, जिससे पश्चिमी मध्य प्रदेश में भारी तबाही की आशंका कम हुई है।

एमपी के 25 जिलों में बारिश से फसलें प्रभावित, सीएम मोहन ने दिए राहत उपायों के निर्देश

भोपाल  मध्य प्रदेश में हाल ही में बारिश से 25 जिलों में फसलों को नुकसान पहुंचा है। मालवा-निमाड़ और ग्वालियर के कुछ जिलों में बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि होने से फसलें खासा प्रभावित हुई हैं। इन क्षेत्रों के जिलों में तेज बारिश के साथ ही 63 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से आंधी चली थी, जिससे कई जिलों में फसलें खेतों में आड़ी हो गईं। सीएम मोहन यादव ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिये कि, वो अपने-अपने जिलों में फसल नुकसान का सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को फसल नुकसान की राहत राशि दिलाए। जनवरी माह में भी इसी तरह मौसम का मिजाज बिगड़ा था। तेज हवाओं से भी नुकसान मध्य प्रदेश के 25 जिलों में बारिश से फसलें बर्बाद हो गई हैं। मालवा-निमाड़ और ग्वालियर के कुछ जिलों में बारिश के साथ ओलावृष्टि ने फसलों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। इन क्षेत्रों में तेज बारिश के साथ 63 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी भी चली थी, जिससे कई जिलों में फसलें खेतों में आड़ी हो गईं। सीएम यादव ने जारी किए निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस स्थिति पर संज्ञान लेते हुए सभी कलेक्टरों को तत्काल निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि वे अपने-अपने जिलों में फसल नुकसान का सर्वे कराएं। सर्वे के आधार पर प्रभावित किसानों को फसल नुकसान की राहत राशि दिलाई जाए। राज्य सरकार ने खराब फसलों का सर्वे कराकर मुआवजा और फसल बीमा आदि का लाभ दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कुछ जिलों को आपदा नियंत्रण में राज्य राहत कोष (एसआरएफ) राशि भी जारी कर दी गई है। सभी कलेक्टर अपने-अपने जिलों में तत्काल फसल नुकसान का सर्वे कराएं। प्रभावित किसानों को राहत राशि और फसल बीमा का लाभ प्राथमिकता के आधार पर दिलाया जाए। डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री (मध्य प्रदेश) कहीं-कहीं प्रथम चरण पूरा फसल नुकसान के जहां-जहां प्रथम चरण का सर्वे हुआ है, वहां राशि वितरण कार्य शुरू हो गया है। यह प्रक्रिया प्रभावित किसानों को तत्काल राहत पहुंचाने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। जनवरी माह में भी इसी तरह मौसम का मिजाज बिगड़ा था और फसलों को नुकसान पहुंचा था। उस समय भी राज्य सरकार ने सर्वे कराकर मुआवजा और फसल बीमा का लाभ दिलाने की प्रक्रिया शुरू की थी। खबर के 5 मुख्य बिंदु 1. मध्यप्रदेश के कुल 25 जिले इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की चपेट में आए हैं, जिससे गेहूं और सरसों की फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान है। 2. मौसम विभाग के अनुसार 63 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं ने फसलों को जमीन पर सुला दिया है। 3.मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि कोई भी प्रभावित किसान सर्वे से छूटना नहीं चाहिए, राहत राशि का वितरण प्राथमिकता पर होगा। 4.जनवरी में हुए नुकसान का सर्वे पूरा हो चुका है और प्रथम चरण की राशि वितरण का काम भी शुरू कर दिया गया है। 5. जहां सरकार 'कृषि वर्ष' मना रही है, वहीं राजस्व विभाग के बड़े अधिकारी जमीनी हकीकत से अनजान बने हुए हैं। SRF राशि जारी राज्य सरकार ने खराब फसलों का सर्वे कराकर मुआवजा और फसल बीमा आदि का लाभ दिलाने की प्रक्रिया शुरू की थी। कुछ जिलों को आपदा नियंत्रण में राज्य राहत कोष (एसआरएफ) राशि जारी कर दी गई है। राशि वितरण कार्य शुरू फसल नुकसान के जहां-जहां प्रथम चरण का सर्वे हुआ हैं वहां राशि वितरण कार्य शुरू हो गया है। इधर, इस मामले में राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव विवेक कुमार पोरवाल से मोबाइल पर संपर्क किया तो उन्होंने पूरी बात सुनी और कहा कि अभी मेरी जानकारी में यह नहीं है, इसके बाद कॉल काट दिया। ऐसे में ये चिंता का विषय है कि, एक तरफ प्रदेश सरकार साल 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मना रही है तो वहीं अधिकारियों का किसानों के प्रति इस तरह लापरवाह रवैया सरकार की मंशा पर पानी फेरता नजर आ रहा है।

BAFTA Awards 2026: मणिपुरी फिल्म ‘बूंग’ ने हॉलीवुड फिल्मों को हराकर जीता अवॉर्ड

लंदन  BAFTA (ब्रिटिश एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन आर्ट्स) अवॉर्ड्स 2026 में मणिपुरी फिल्म बूंग ने इतिहास रचा है. बेस्ट चिल्ड्रन एंड फैमिली फिल्म कैटेगरी में अवॉर्ड जीतने वाली ये पहली इंडियन मूवी है. फरहान अख्तर इस मणिपुरी मूवी के प्रोड्यूसर्स में से एक हैं. इसकी डायरेक्टर लक्ष्मीप्रिया देवी हैं. बूंग के खिलाफ इस कैटेगरी में फ्रेंच एनिमेटेड साइंस फिक्शन फिल्म आर्को, हॉलीवुड की लाइव-एक्शन एनिमेटेड कॉमेडी लिलो एंड स्टिच, हॉलीवुड एनिमेटेड कॉमेडी ज़ूटोपिया 2 नॉमिनेटेड थीं. स्टेज पर ये अवॉर्ड पैडिंगटन बियर ने दिया. बूंग का बाफ्टा में अवॉर्ड जीतना इंडियन सिनेमा के लिए बड़ी उपलब्धि है, खासकर नॉर्थ ईस्ट की फिल्मों के लिए. अवॉर्ड सेरेमनी में डायरेक्टर लक्ष्मीप्रिया देवी के अलावा फरहान अख्तर, शिबानी दांडेकर भी मौजूद थे. अवॉर्ड जीतने के बाद लक्ष्मीप्रिया ने जूरी मेंबर्स और बाफ्टा का शुक्रिया अदा किया. क्या है फिल्म की कहानी? ये फिल्म एक मणिपुरी गांव में रहने वाले छोटे से लड़के की है. वो अपनी मां के साथ रहता है. जो अकेले ही उसे पाल-पोसकर बड़ा कर रही है. उसके पिता जॉयकुमार रहस्यमयी तरीके से गायब हो गए थे. जॉय पहले शहर से बाहर नौकरी करता था. लेकिन अचानक से वो कहीं गायब हो गया. उसके गायब होने का कोई सुराग नहीं मिला है. ऐसे समय में वो लड़का अपने पिता को ढूंढ़कर अपनी मां को उनकी जिंदगी का बेस्ट गिफ्ट देना चाहता है. इस मिशन में वो अपने दोस्त के साथ निकल पड़ता है. इस इमोशनल मूवी की कहानी आंखें नम करती है. मणिपुरी में बूंग का मतलब है- छोटा लड़का. मूवी में गुगुन किपगें ने बूंग का किरदार निभाया है. डायरेक्टर लक्ष्मीप्रिया देवी के काम की काफी सराहना हो रही है. उन्हें गोवा के बुलबुल चिल्ड्रन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट डायरेक्टर अवॉर्ड मिला था. बूंग ने 2024 टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में वर्ल्ड प्रीमियर के वक्त सबका ध्यान खींचा था. बूंग को मेलबर्न इंडियन फिल्म फेस्टिवल, मामी मुंबई फिल्म फेस्टिवल और वारसॉ इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में जबरदस्त सराहना मिली. इसे सिनेमाघरों में पिछले साल सितंबर में रिलीज किया गया था.  बूंग को मिले अवॉर्ड के अलावा  BAFTA 2026 में आलिया भट्ट की भी चर्चा रही. वो इवेंट में प्रेजेंटर बनीं. हिंदी में अवॉर्ड प्रेजेंट करने पर उनकी तारीफ हो रही है. एक्ट्रेस ने रेड कार्पेट पर Gucci के सिल्वर सीक्वेन गाउन में डेब्यू किया. मीडिया से बात करते हुए आलिया ने बेटी राहा को अपनी इंस्पिरेशन बताया. एक्ट्रेस ने कहा कि उनकी बेटी 3 साल की हो चुकी है. उसे अपने गानों पर डांस करता देख वो इमोशनल हो जाती हैं.

होली के दौरान हमले की साजिश, भीड़भाड़ वाली जगहों की रेकी; लश्कर आतंकी मॉड्यूल के खिलाफ बड़ी जांच

नई दिल्ली दिल्ली में पकड़े गए लश्कर-ए-तैयबा के संदिग्ध मॉड्यूल की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की साजिश के तहत बांग्लादेशी मूल के युवकों का नेटवर्क तैयार किया गया। इस नेटवर्क का संचालन बांग्लादेश में बैठा लश्कर का एक कमांडर कर रहा था, जिसने वहीं बैठक कर हमलों की पूरी रूपरेखा बनाई। जांच में सामने आया है कि मॉड्यूल के निशाने पर देश के बड़े मेट्रो शहर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई थे। सूत्रों के मुताबिक कुछ स्थानों की रेकी भी कर ली गई थी और होली के मौके पर हमले की तैयारी थी। खुफिया इनपुट के बाद स्पेशल सेल ने कार्रवाई तेज की और मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर दिया। हाफिज सईद और लखवी से सीधा संपर्क जांच से जुड़े अधिकारियों का दावा है कि बांग्लादेशी हैंडलर शब्बीर अहमद लोन सीधे लश्कर प्रमुख हाफिज सईद और आतंकी सरगना जैकी उर रहमान लखवी के संपर्क में था।पुलिस का कहना है कि आईएसआई भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के जरिए लोकल मॉड्यूल खड़ा कर रही थी। इसके लिए फंडिंग भी की जा रही थी, ताकि बड़े शहरों में समन्वित हमले किए जा सकें। शब्बीर इस नेटवर्क में आईएसआई और बांग्लादेशी मूल के आतंकी सैदुल इस्लाम के बीच कड़ी का काम कर रहा था। सैदुल संदिग्धों को निर्देश देता था और उन्हें टारगेट तय करने में मदद करता था। 2007 में पकड़ा गया, 2018 में फिर सक्रिय स्पेशल सेल के अनुसार शब्बीर अहमद लोन 2007 में आत्मघाती हमले की साजिश में एके-47 और हैंड ग्रेनेड के साथ पकड़ा गया था। सजा पूरी करने के बाद 2018 में जेल से बाहर आया और दोबारा लश्कर से जुड़ गया। उसने अपना बेस बांग्लादेश में बनाया, जबकि कनेक्शन पाकिस्तान से बनाए रखे। अधिकारियों का कहना है कि जेल से रिहाई के बाद उसने पुराने नेटवर्क को फिर सक्रिय किया और सोशल मीडिया के जरिए युवकों को जोड़ना शुरू किया। जांच एजेंसियों को उसके डिजिटल ट्रेल से कई अहम सुराग मिले हैं। सोशल मीडिया से जोड़ा गया मॉड्यूल पुलिस के मुताबिक पकड़े गए संदिग्धों को पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क में लाया गया। इसके बाद उन्हें बांग्लादेश बुलाकर बैठक की गई। कोलकाता से पकड़े गए उमर फारूक को संवेदनशील स्थानों की रेकी का जिम्मा दिया गया था। संदिग्धों को किराए पर अपार्टमेंट लेने और सुरक्षित ठिकाने बनाने के निर्देश भी दिए गए। मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में हथियार जुटाने की कोशिशों से जुड़े वीडियो और चैट सामने आए हैं। सुरक्षा एजेंसियों को पहले ही इनपुट मिला था कि लश्कर होली के दौरान बड़ी वारदात की फिराक में है। ऑपरेशन जारी, कई राज्यों में छापे दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल का ऑपरेशन अभी जारी है। कुछ संदिग्धों के फरार होने की आशंका में कई राज्यों में छापेमारी की जा रही है। सभी आरोपियों को दिल्ली लाकर पूछताछ की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि समय रहते साजिश नाकाम कर दी गई, लेकिन नेटवर्क के बाकी सिरों तक पहुंचना अभी बाकी है। सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं और देश के बड़े शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह मॉड्यूल लंबी योजना का हिस्सा था। अगर समय पर कार्रवाई नहीं होती तो होली के मौके पर बड़ा नुकसान हो सकता था। विवादित पोस्टर से खुला मॉड्यूल का राज स्पेशल सेल के हत्थे चढ़े आठ संदिग्धों में से चार दिल्ली में ‘फ्री कश्मीर’ जैसे विवादित पोस्टर लगाकर तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल लौट गए थे। जांच यहीं से आगे बढ़ी और नेटवर्क का सिरा हाथ लगा। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टरबाजी महज ट्रायल रन थी, असली मकसद बड़े हमले की तैयारी था। खुफिया एजेंसियों ने पहले अलर्ट जारी किया था कि आईएसआई समर्थित लश्कर लोकल मॉड्यूल तैयार कर रहा है। एक अन्य इनपुट में लाल किले के आसपास हमले की आशंका जताई गई थी। सुरक्षा एजेंसियों को पहले ही इनपुट मिला था कि लश्कर होली के दौरान बड़ी वारदात की फिराक में है।

टाटा पंच ईवी फेसलिफ्ट भारत में आई, 355 किमी की रेंज का दावा

मुंबई  भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के सेगमेंट को मजबूत करते हुए Tata Motors ने अपनी सबसे किफायती इलेक्ट्रिक एसयूवी टाटा पंच ईवी का फेसलिफ्ट मॉडल लॉन्च कर दिया है। नई टाटा पंच ईवी की एक्स-शोरूम शुरुआती कीमत 9.69 लाख रुपये रखी गई है। यह मॉडल कंपनी की एंट्री-लेवल ईवी रेंज का पहला बड़ा अपडेट माना जा रहा है, जिसमें हल्के डिजाइन बदलाव, नया बैटरी विकल्प और बेहतर रियल-वर्ल्ड रेंज पर खास ध्यान दिया गया है। वेरिएंट और कीमत की रणनीति नई टाटा पंच ईवी फेसलिफ्ट को स्मार्ट, एडवेंचर और एम्पावर्ड—इन तीन वेरिएंट्स में पेश किया गया है। अलग-अलग वेरिएंट और बैटरी पैक के हिसाब से इसकी कीमत 9.69 लाख रुपये से लेकर 12.59 लाख रुपये एक्स-शोरूम तक जाती है। कंपनी ने इस इलेक्ट्रिक एसयूवी को इस तरह पोजिशन किया है कि यह पारंपरिक पेट्रोल-डीजल कारों की कीमत के ज्यादा करीब नजर आए, जिससे पहली बार ईवी खरीदने वालों के लिए फैसला आसान हो सके। बैटरी सब्सक्रिप्शन से कम होगी शुरुआती कीमत टाटा ने पंच ईवी फेसलिफ्ट के साथ बैटरी-एज़-ए-सर्विस यानी BaaS विकल्प भी उपलब्ध कराया है। इस स्कीम के तहत ग्राहक कार को 6.49 लाख रुपये की शुरुआती कीमत पर खरीद सकते हैं, जबकि बैटरी के लिए प्रति किलोमीटर लगभग 2.6 रुपये का चार्ज देना होगा। इस मॉडल का मकसद शुरुआती खर्च को कम करना है, ताकि इलेक्ट्रिक कार ज्यादा लोगों की पहुंच में आ सके। खास बात यह है कि फेसलिफ्ट का बेस वेरिएंट पहले के मुकाबले करीब 30 हजार रुपये सस्ता भी हो गया है। एक्सटीरियर में हल्के लेकिन साफ बदलाव डिजाइन के मामले में पंच ईवी फेसलिफ्ट को ज्यादा आक्रामक बदलाव नहीं दिए गए हैं, लेकिन इसके फ्रंट में नया बंपर और ज्यादा सादा लुक देखने को मिलता है। हेडलैंप्स को जोड़ने वाली पुरानी ब्लैक स्ट्रिप को हटाया गया है, जिससे फ्रंट फेस ज्यादा क्लीन लगता है। साइड प्रोफाइल में नए 16-इंच के एयरो-ऑप्टिमाइज्ड अलॉय व्हील्स दिए गए हैं, जो बड़े टाटा ईवी मॉडलों से प्रेरित हैं। पीछे की तरफ कनेक्टेड एलईडी टेललैंप्स दिए गए हैं, जो इसे नए पेट्रोल पंच के डिजाइन से जोड़ते हैं। इंटीरियर और फीचर्स में टेक्नोलॉजी पर जोर केबिन के अंदर लेआउट पहले जैसा ही रखा गया है, लेकिन ट्रिम फिनिश में बदलाव किए गए हैं। टॉप वेरिएंट्स में 10.25 इंच का बड़ा टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम और उतना ही बड़ा डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले दिया गया है। इसके अलावा वायरलेस चार्जिंग, वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स, एंबिएंट लाइटिंग, कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी और 360 डिग्री कैमरा जैसे फीचर्स वेरिएंट के अनुसार मिलते हैं। नई बैटरी और बेहतर रेंज फेसलिफ्ट पंच ईवी की सबसे बड़ी खासियत नया 40kWh बैटरी पैक है। यह बैटरी एआरएआई सर्टिफाइड साइकिल में 468 किमी की रेंज और करीब 355 किमी की रियल-वर्ल्ड रेंज का दावा करती है। इसके अलावा 30kWh बैटरी का विकल्प भी जारी रखा गया है, जिसकी रेटेड रेंज 365 किमी है। फास्ट चार्जिंग की सुविधा के तहत 65kW डीसी चार्जर से बैटरी को 20 से 80 प्रतिशत तक सिर्फ 26 मिनट में चार्ज किया जा सकता है। सेफ्टी और पोजिशनिंग सुरक्षा के लिहाज से टाटा पंच ईवी फेसलिफ्ट में सभी वेरिएंट्स में छह एयरबैग्स स्टैंडर्ड दिए गए हैं। इसके साथ इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल, हिल होल्ड असिस्ट, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम और आईएसओफिक्स चाइल्ड सीट माउंट्स जैसी सुविधाएं शामिल हैं। भारतीय बाजार में यह कार सिट्रोएन ईसी3 को टक्कर देती है और टाटा की ईवी लाइन-अप में टियागो ईवी और नेक्सॉन ईवी के बीच अपनी जगह बनाती है।

‘एल मेंचो’ ड्रग माफिया मिलिट्री ऑपरेशन में मारा गया, मेक्सिको में हिंसा के बीच भारत ने दी यात्रा एडवाइजरी

 जलिस्को मैक्सिकन डिफेंस मिनिस्ट्री ने ऐलान किया है कि दुनिया के सबसे वॉन्टेड ड्रग तस्करों में से एक और 'एल मेंचो' के नाम से कुख्यात नेमेसियो रुबन ओसेगुएरा सर्वेंटेस एक सैन्य अभियान में मारा गया है. ओसेगुएरा की मौत के बाद पूरे मैक्सिको में जगह-जगह से हिंसा की खबरें आ रही हैं. यह ऑपरेशन पश्चिमी राज्य जलिस्को में मैक्सिकन सुरक्षा बलों द्वारा चलाया गया था. मंत्रालय के मुताबिक, 59 वर्षीय भगोड़े ड्रग लॉर्ड की मौत मिलिट्री ऑपरेशन के बाद एयर ट्रांसफर (हवाई मार्ग से ले जाने) के दौरान लगी गंभीर चोटों के कारण हुई. एल मेंचो का संगठन 'जलिस्को न्यू जनरेशन कार्टेल' (CJNG) पिछले एक दशक में मेक्सिको का सबसे पावरफुल आपराधिक समूह बन चुका था और अमेरिका में नशीले पदार्थों की तस्करी का प्रमुख स्रोत था.  हालांकि, राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि करने से परहेज किया है. उन्होंने कहा कि इस मामले पर पूरी जानकारी सुरक्षा कैबिनेट द्वारा दी जाएगी. पूरे मेक्सिको में अफ़रा-तफ़री… अधिकारियों ने बताया कि ओसेगुएरा की मौत की ख़बरों से CJNG के मज़बूत गढ़ वाले कई राज्यों में हिंसा फैल गई, जहां बंदूकधारियों ने मिलकर बदले की कार्रवाई में कई गाड़ियां जला दीं और मुख्य सड़कों को ब्लॉक कर दिया. लोकल मीडिया और अधिकारियों ने बताया कि जलिस्को, गुआनाजुआतो, नायरिट, मिचोआकन और तमाउलिपास में बसों, ट्रकों और कारों में आग लगा दी गई, जबकि ग्वाडलहारा में लोग बदले की कार्रवाई के डर से सड़कों और ट्रांसपोर्ट हब से भाग गए. पब्लिक के लिए सलाह जारी… गवर्नर पाब्लो लेमस नवारो ने कहा कि स्टेट में अभी भी 'कोड रेड' सिक्योरिटी अलर्ट है और उन्होंने लोगों से घर के अंदर रहने की अपील की. ​​इलाके के कुछ हिस्सों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट बंद कर दिया गया और चल रही झड़पों की वजह से स्टेट हाईवे पर यात्रा करने से मना कर दिया गया. लेमस ने कहा, "हम कोड रेड में हैं. हम यह सलाह दोहराते हैं कि अपने घरों से बाहर न निकलें. कई फ़ेडरल जगहों पर झड़पें हो रही हैं." लोकल मीडिया ने बताया कि ओसेगुएरा ग्वाडलहारा से करीब 80 मील दक्षिण-पश्चिम में एक पहाड़ी शहर, तपालपा में या उसके पास एक फ़ेडरल ऑपरेशन के दौरान मारा गया. रीजनल मीडिया में चल रहे वीडियो में इलाके में भारी गोलीबारी और सुरक्षा तैनात दिखाई दे रही थी. CJNG की जड़ें लंबे वक्त से ग्रामीण जलिस्को में हैं, जहां ओसेगुएरा (पूर्व पुलिस अफ़सर) एक कार्टेल नेटवर्क को लीड करने के लिए उभरा, जो इलाके पर कब्ज़ा करने और तस्करी के रास्तों को कंट्रोल करने के लिए मिलिट्री-स्टाइल फ़ोर्स और बेरहमी से डराने-धमकाने पर निर्भर था. मेक्सिको में US एम्बेसी ने CJNG कार्टेल के लीडर के मारे जाने के बाद बदले की कार्रवाई से जुड़ा सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. यूएस एंबेसी ने कहा, 'चल रहे सिक्योरिटी ऑपरेशन और उससे जुड़ी सड़कों पर रुकावटों और क्रिमिनल एक्टिविटी की वजह से US नागरिकों को अगली सूचना तक सुरक्षित जगह पर रहना चाहिए.' भारत ने जारी की एडवाइजरी भारत ने भी मेक्सिको के हालात को देखते हुए अपने नागरिकों को एडवाइजरी जारी की है.

अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हाई अलर्ट: 3 दिन तक आवाजाही बंद, परिंदा भी नहीं मार पाएगा पर!

महराजगंज आगामी नेपाली संसदीय चुनावों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने और सीमा पार से होने वाली अवांछनीय गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए भारत और नेपाल के शीर्ष अधिकारियों ने एक निर्णायक समन्वय बैठक की। इस उच्च स्तरीय मंथन में दोनों देशों ने साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने और द्विपक्षीय सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया। बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय नेपाल में प्रस्तावित संसदीय चुनावों को लेकर लिया गया। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत 2 मार्च 2026 की मध्यरात्रि से 5 मार्च 2026 की मध्यरात्रि तक भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा को पूरी तरह सील रखा जाएगा। इसका उद्देश्य चुनाव के दौरान संदिग्ध आवाजाही, अवैध घुसपैठ और सुरक्षा जोखिमों को शून्य करना है। प्रमुख उपस्थिति एवं अध्यक्षता नेपाल के मोरंग जिला स्थित विराटनगर में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता युवराज कटेल ने की। इसमें दोनों देशों के सीमावर्ती जिलों के प्रशासनिक व सुरक्षा प्रमुखों ने हिस्सा लिया। भारत की तरफ से बिहार के सुपौल, किशनगंज और अररिया जिलों के जिला पदाधिकारी तो वहीं नेपाल पक्ष से मोरंग, झापा और सुनसरी जिलों के मुख्य जिला अधिकारी, सशस्त्र पुलिस बल (APF) और राष्ट्रीय जांच विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। अपराध और तस्करी पर 'जीरो टॉलरेंस' बैठक में केवल चुनावी सुरक्षा ही नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सुरक्षा मुद्दों पर भी विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई। दोनों पक्षों ने निम्नलिखित बिंदुओं पर संयुक्त कार्रवाई तेज करने पर सहमति जताई: अवैध नेटवर्क पर प्रहार: सीमा पार आतंकवाद, हथियारों की तस्करी, मादक पदार्थों के अवैध कारोबार और जाली मुद्रा (FICN) के नेटवर्क को ध्वस्त करना। मानव तस्करी: महिलाओं और बच्चों की तस्करी जैसे संवेदनशील अपराधों पर कड़ी निगरानी। अतिक्रमण नियंत्रण: ‘नो मैन्स लैंड’ (दशगजा क्षेत्र) में बढ़ते अतिक्रमण की जांच और अनधिकृत रास्तों से होने वाली आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध। खुफिया सूचनाएं: संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी साझा करने के लिए एक त्वरित सूचना तंत्र को और अधिक सक्रिय करना। शांति और मित्रता की प्रतिबद्धता अधिकारियों ने दोहराया कि भारत और नेपाल के बीच की खुली सीमा पारंपरिक मित्रता का प्रतीक है, लेकिन इसकी पवित्रता बनाए रखने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों का बेहतर तालमेल अनिवार्य है। वर्तमान में दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं, ताकि चुनावी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और भयमुक्त वातावरण में संपन्न कराया जा सके।

मध्य प्रदेश: 10 जिलों में आज से पुलिस आरक्षक भर्ती के लिए शारीरिक परीक्षा का आयोजन

 भोपाल  मध्य प्रदेश में पुलिस आरक्षक भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा (फिजिकल टेस्ट) 23 फरवरी से शुरू हो रही है। परीक्षा 10 जिलों भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर, रीवा, बालाघाट, रतलाम और मुरैना में होगी। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल पुलिस आरक्षक (जीडी) के कुल 7,500 पदों पर भर्ती प्रक्रिया करवा रहा है। इसके लिए 30 अक्टूबर से 15 दिसंबर, 2025 तक ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसका परिणाम 25 जनवरी, 2026 को जारी किया जा चुका है। भोपाल में शारीरिक दक्षता परीक्षा लाल परेड ग्राउंड पर होगी। तैयारी के दौरान सेंसर वाली जैकेट, टाइमिंग सिस्टम और अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरणों की सटीकता परखी गई, ताकि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिरहित रहे। 7,500 पदों के लिए प्रदेश भर में दौड़ेंगे 59 हजार अभ्यर्थी आरक्षक के 7,500 पदों के लिए प्रदेश भर से लगभग 59 हजार अभ्यर्थी शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल होंगे। सभी चयनित प्रतियोगियों को निर्धारित केंद्रों पर पहुंचना होगा, जहां दस्तावेजों की जांच के बाद उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी। मुख्य रूप से तीन स्पर्धाएं होंगी 800 मीटर दौड़, लंबी कूद,गोला फेंक होगा। परीक्षा के दौरान आधार ई-केवाईसी सत्यापन अनिवार्य है, इसलिए सभी अभ्यर्थियों को अपना मूल आधार कार्ड साथ लाना होगा। अभ्यर्थी यह भी सुनिश्चित करें कि उनका आधार नंबर 'लाक' न हो। इसके साथ ही, दस्तावेज परीक्षण के लिए सभी मूल प्रमाण पत्र और उनकी फोटोकापी का सेट साथ लाना अनिवार्य है। आधार सत्यापन के बाद जैकेट के क्यूआर से लिंक होगा रोल नंबर, हर चरण में होगा स्कैन इस बार फर्जीवाड़ा रोकने के लिए कई नवाचार किए गए हैं। क्यूआर कोड वाली जैकेट पहनाई जा रही है। परीक्षा स्थल पर सबसे पहले आधार कार्ड का सत्यापन फिंगरप्रिंट, रेटिना और फोटो के मिलान से होगा। सत्यापन सफल होने के बाद ही क्यूआर कोड वाली अभ्यर्थी को दी जाएगी। इस जैकेट में क्यूआर कोड होगा, जिसे रोल नंबर से लिंक किया जाएगा। हर चरण में इसी क्यूआर कोड को स्कैनर से स्कैन किया जाएगा, तभी प्रवेश मिलेगा। 5500 अभ्यर्थी आजमाएंगे अपनी किस्मत, पुलिस की कड़ी निगरानी ग्वालियर की 14वीं बटालियन में सोमवार को नव आरक्षकों की शारीरिक प्रवीणता परीक्षा (पीपीटी) आयोजित होने जा रही है। इस परीक्षा में तकरीबन 5500 युवा अभ्यर्थी अपनी किस्मत आजमाने पहुंचेंगे। 14वीं बटालियन के मैदान पर यह परीक्षा प्रक्रिया 14 मार्च तक चलेगी, इसमें हर दिन करीब 400 उम्मीदवारों की परीक्षा ली जाएगी। दौड़, गोला फेंक और लंबी कूद का टेस्ट होगा नवआरक्षकों भर्ती प्रक्रिया के लिए एसएएफ के करीब 300 पुलिस जवान और अधिकारियों तैनात रहेंगे। यह पुलिस के जवान और अधिकारी इस परीक्षा में पहुंचने वाले युवाओं की दौड़, गोला फेंक और लंबी कूद का परीक्षण करवाएंगे। इस भर्ती परीक्षा की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बटालियन के ग्राउंड पर दो दर्जन CCTV कैमरे भी लगवाए गए हैं। यह भर्ती प्रक्रिया प्रदेश भर में नवआरक्षकों के करीब 7500 पदों के लिए आयोजित की जा रही है। लिखित परीक्षा के बाद अब शारीरिक प्रवीणता परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है। इस परीक्षा के लिए एक कमेटी का गठन किया है, जिसके अध्यक्ष डीआईजी अमित सांघी हैं। उनकी निगरानी में यह परीक्षा आयोजित की जाएगी। 800 मीटर की पूरी करनी होगी दौड़ 14वीं बटालियन के मैदान पर पीपीटी परीक्षा के लिए रविवार को टैंट, लाइट, CCTV कैमरे और मैदान की साफ-सफाई सहित अन्य सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई है। परीक्षा देने आने वाले युवाओं के लिए चाय-पानी की भी व्यवस्था की गई है। भर्ती परीक्षा की तैयारी का जायजा बटालियन के कमांडेंट संजीव सिंह ने किया था और प्रक्रिया के लिए तैनात जवानों व अधिकारियों से चर्चा की। रविवार को एसएएफ मैदान पर पीपीटी परीक्षा से एक दिन पहले रिहर्सल की गई, जिसमें कमेटी के अध्यक्ष डीआईजी अमित सांघी, कमांडेंट संजीव सिन्हा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। मैदान पर एसएएफ जवानों को उम्मीदवार बनाकर रिहर्सल कराई गई ताकि परीक्षा के दौरान होने वाली किसी भी कमी को पूरी तरीके से पूर्ण किया जा सके। 14वीं बटालियन के मैदान पर पीपीटी परीक्षा में उम्मीदवारों को 800 मीटर की दौड़ पूरी करनी होगी। इसके अलावा, गोला फेंक और लंबी कूद भी शामिल होगी। गोला फेंक और लंबी कूद में प्रत्येक उम्मीदवार को तीन-तीन मौके दिए जाएंगे। 300 जवान और अधिकारी किए तैनात ग्वालियर DIG अमित सांघी ने बताया कि एसएएफ मैदान पर 23 मार्च से पीपीटी परीक्षा शुरू होने जा रही है जिसके लिए पुलिस के 300 जवान और अधिकारी तैनात किए जाएंगे। परीक्षा के दौरान इमरजेंसी के लिए चिकित्सा कैंप भी लगाया है। जिसमें अनुभवी डॉक्टर भी तैनात रहेंगे और भर्ती प्रक्रिया के लिए पूरे इंतजाम कर लिए गए हैं। इन केंद्रों पर होगी परीक्षा     भोपाल : लाल परेड ग्राउंड, जहांगीराबाद     इंदौर : माउंटेड ट्रूप डिपार्टमेंट परिसर, आरएपीटीसी     जबलपुर : परेड ग्राउंड, 6वीं वाहिनी विसबल, रांझी     ग्वालियर : परेड ग्राउंड, 14वीं वाहिनी विसबल, कंपू     उज्जैन : महानंदा एरीना ग्राउंड, देवास रोड     सागर : शासकीय इंदिरा गांधी इंजीनियरिंग कालेज, बहेरिया     रीवा : परेड ग्राउंड, 9वीं वाहिनी विसबल     बालाघाट : फुटबाल/हाकी ग्राउंड, 36वीं वाहिनी विसबल     रतलाम : भगत सिंह शासकीय कालेज बस स्टैंड के पास जावरा रतलाम     मुरैना : परेड ग्राउंड, 05वीं वाहिनी विसबल  

BAFTA अवॉर्ड्स में आलिया भट्ट ने ‘नमस्कार’ से की शुरुआत, हिंदी में दी स्पीच, वीडियो वायरल

लंदन लंदन में कुछ घंटों पहले ब्रिटिश एकेडमी फिल्म अवॉर्ड्स (BAFTA) का आयोजन हुआ, जहां फिल्मी जगत के कई कलाकार शामिल हुए. इंडिया की तरफ से भी फरहान अख्तर और आलिया भट्ट वहां पहुंचे. फरहान के प्रोडक्शन में बनीं मणिपुरी फिल्म 'बूंग' को वहां बेस्ट चिल्ड्रन और फैमिली फिल्म की कैटेगरी में अवॉर्ड भी मिला. वहीं, आलिया ने पहली बार BAFTA में किसी अवॉर्ड को प्रेजेंट किया.  आलिया ने BAFTA में बोली हिंदी आलिया भट्ट को BAFTA में बेस्ट नॉन-इंग्लिश फिल्म प्रेजेंट करने के लिए स्टेज पर बुलाया गया. एक्ट्रेस ने आते ही अपनी स्पीच हिंदी में कही, जिसका बाद में उन्होंने मतलब भी समझाया. उनका ये वीडियो हर तरफ वायरल भी हो रहा है. लोग आलिया की हिंदुस्तानी कल्चर दुनियाभर में फैलाने को लेकर सराहना कर रहे हैं.  आलिया ने कहा, 'नमस्कार, अगला अवॉर्ड एक ऐसी फिल्म के लिए है, जो अंग्रेजी में नहीं है. अभी से आप सबटाइटल की तरफ ना जाएं. मैं हिंदी में ये कह रही थी कि जो हमारा अगला अवॉर्ड है, वो एक ऐसी फिल्म के लिए है जिसकी भाषा अंग्रेजी नहीं है. क्योंकि फिल्में तो ढेर सारी अलग-अलग भाषाओं में बोलती हैं, लेकिन हम हमेशा जिस चीज की तारीफ करते हैं, वो है सिनेमा की भाषा. और वो भाषा तो हम सब बहुत अच्छे से समझते और बोलते हैं.' BAFTA में बेस्ट नॉन-इंग्लिश फिल्म का अवॉर्ड फिल्म 'सेंटिमेंटल वैल्यू' को मिला है, जो इसी साल ऑस्कर के लिए भी नॉमिनेटेड है. फैंस को आलिया का BAFTA लुक भी बेहद पसंद आया है. एक्ट्रेस ने गुच्ची का सिल्वर गाउन पहना था, जिसके साथ उन्होंने एक सफेद स्टॉल भी कैरी किया. रेड कार्पेट पर आलिया का जलवा खूब जोर-शोर से बिखरा.  तीसरी इंडियन एक्ट्रेस बनीं आलिया आलिया से पहले इंडिया की दो और हीरोइन प्रियंका चोपड़ा और दीपिका पादुकोण को भी BAFTA में अवॉर्ड प्रेजेंट करने का मौका मिल चुका है. अब ऐसा करके आलिया तीसरी इंडियन एक्ट्रेस बन चुकी हैं. फैंस उनकी तरक्की देखकर बेहद खुश हैं. बात करें आलिया के वर्क फ्रंट की, तो उनकी दो फिल्में 'अल्फा' और 'लव एंड वॉर' आनी हैं, जिसकी रिलीज का फैंस को बेसब्री से इंतजार है.   

पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का निधन, 71 वर्ष की उम्र में चले गए, ममता बनर्जी के साथ शुरू किया था TMC

कोलकाता पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री और कभी तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी के बाद नंबर दो नेता माने जाने वाले मुकुल रॉय का सोमवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. 71 वर्षीय रॉय को कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां तड़के करीब 1.30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय ने उनके निधन की पुष्टि की है. उन्होंने कहा, 'कल रात कार्डियक अरेस्ट से उनकी मौत हो गई. वह पिछले 600 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे. यह मेरे और मेरे परिवार के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है.'  मुकुल रॉय का जन्म उत्तर 24 परगना के कांचरापाड़ा में 14 मई 1954 को हुआ था. वह राजनीति में आने से पहले वे ट्रेड यूनियन की गतिविधियों से जुड़े रहे. उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से साइंस में बैचलर डिग्री प्राप्त की थी और साल 2006 में मदुरै के कामराज विश्वविद्यालय से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एमए की डिग्री ली थी. जनवरी 1998 में अस्तित्व में आई तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे मुकुल रॉय, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी भी रहे. यूथ कांग्रेस से शुरू की राजनीतिक पारी ममता बनर्जी की तरह ही मुकुल रॉय ने भी बंगाल में यूथ कांग्रेस से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी. तृणमूल कांग्रेस की स्थापना के बाद उन्होंने पार्टी में ममता बनर्जी के साथ मिलकर काम किया और उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया गया. इसके बाद रॉय दिल्ली में पार्टी का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे. वह 2006 में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए और 2009 से 2012 तक राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता के रूप में उन्होंने जिम्मेदारी निभाई. TMC को मजबूत करने में अहम भूमिका यूपीए‑II सरकार में मुकुल रॉय ने पहले शिपिंग मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में काम किया. इसके बाद मार्च 2012 में उन्होंने पार्टी के सहयोगी दिनेश त्रिवेदी की जगह रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली. वह बंगाल व दिल्ली दोनों जगह पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार रहे. 2011 के बाद, जब तृणमूल कांग्रेस ने 34 वर्षों के वाम शासन का अंत किया और ममता बनर्जी बंगाल की मुख्यमंत्री बनीं, तब पार्टी को मजबूत करने में मुकुल रॉय की अहम भूमिका रही. मुकुल रॉय 2015 तक तृणमूल कांग्रेस  के महासचिव रहे. उनके कार्यकाल में सीपीआई(एम) और कांग्रेस से कई बड़े नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा. मुकुल रॉय थोड़े समय के लिए BJP में रहे मुकुल रॉय ने तृणमूल कांग्रेस से दूरी बनाते हुए नवंबर 2017 में औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया. उन्होंने जमीनी स्तर पर काम करते हुए राज्य में भाजपा का आधार मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई और 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी ने राज्य में 18 सीटें जीतीं. रॉय ने तृणमूल कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं को भाजपा में शामिल कराने में मदद की और 2021 के विधानसभा चुनाव में कृष्णानगर उत्तर से भाजपा विधायक चुने गए. कलकत्ता हाई कोर्ट ने रद्द की थी विधायकी हालांकि जल्द ही भाजपा से भी उनकी दूरी बढ़ने लगी और अंततः जून 2021 में वह वापस तृणमूल कांग्रेस में लौट आए. लेकिन तृणमूल में वापसी के बाद वह पार्टी में न तो पहले जैसी राजनीतिक हैसियत में दिखे और न ही राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे. मुकुल रॉय डिमेंशिया समेत कई अन्य बीमारियों से भी पीड़ित थे. 13 नवंबर 2025 को कलकत्ता हाई कोर्ट ने 2021 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर निर्वाचित होने के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के मामले में दलबदल कानून के तहत उनको विधायक पद से अयोग्य घोषित कर दिया था.