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T20 World Cup: दो मैच जीतने पर भी भारत के लिए सेमीफाइनल की राह कठिन, सुपर-8 के समीकरण में बड़ा उलटफेर

 नई दिल्ली आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 का रोमांच अब धीरे-धीरे निर्णायक मोड़ पर पहुंच रहा है. पहला चरण खत्म हो चुका है और अब टूर्नामेंट सुपर-8 दौर में जारी है. जहां समीकरण तेजी से बदल रहे हैं. 20 टीमों से शुरू हुआ ये महासमर अब 8 टीमों के बीच चल रहा है. जहां मैच दर मैच काफी कुछ बन बिगड़ रहा है. पहले पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के रद्द हुए मैच ने कहानी को पलटा तो अब रविवार को साउथ अफ्रीका की भारत के खिलाफ जीत ने पूरी तस्वीर ही बदल दी है. अब आलम ये है कि टी20 वर्ल्ड कप में पिछले 12 मैचों से अजेय रही टीम इंडिया को एक हार के चलते सेमीफाइनल से हाथ धोना पड़ा सकता है. यानी साउथ अफ्रीका की अहमदाबाद में 76 रनों की जीत भारत के टाइटल डिफेंड करने के सपने को तोड़ सकती है. ऐसा क्यों है आइए आपको समझाते हैं…  पहले सुपर-8 के बारे में जान लीजिए दो ग्रुप में 4-4 टीमें हैं. हर टीम अपने ग्रुप में बाकी तीन टीमों से एक-एक मैच खेलेगी. जीत पर 2 अंक, नो रिजल्ट पर 1 अंक और हार पर 0 अंक मिलते हैं. अगर अंक बराबर होते हैं तो नेट रन रेट (NRR) से फैसला होता है. यानी आसान भाषा में कहें तो नेट रन रेट का रोल भी काफी निर्णायक होने वाला है. अब सुपर-8 में ग्रुप 1 की स्थिति ग्रुप 1 में फिलहाल दक्षिण अफ्रीका पहले स्थान पर है. उसने अपना पहला मैच जीतकर 2 अंक हासिल किए हैं और उसका नेट रन रेट +3.800 तक पहुंच गया है. क्योंकि उसने टीम इंडिया को 76 रनों के बड़े अंतर से मात दी है. पहले बल्लेबाजी करते हुए उसने 188 रन बनाए और फिर भारत को 111 के स्कोर पर समेट दिया. अब भारत को अपने पहले मैच में हार का सामना करना पड़ा है, वो भी बुरे तरीके से, जिसके कारण वह फिलहाल चौथे स्थान पर है. भारत के 0 अंक हैं. लेकिन उससे ज्यादा बुरी खबर ये है कि उसका नेट रन रेट -3.800 हो गया है. यानी बहुत बुरी स्थिति में. वहीं, जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज ने अभी तक कोई मैच नहीं खेला है, इसलिए दोनों के 0-0 अंक हैं और नेट रन रेट 0.000 है. अब भारत के लिए क्या है मुश्किल इस ग्रुप से दो ही टीम का चयन सेमीफाइनल के लिए होना है. यानी भारत को अपने अगले दोनों मैच यानी जिम्बॉब्वे और वेस्टइंडीज के खिलाफ बड़े अंतर से जीत हासिल करनी होगी. साथ ही उम्मीद करनी होगी की बाकी टीमों का रन रेट भी अच्छा न रहे. क्योंकि अगर तीन टीमें 2-2 जीत के साथ पहुंची तो फैसला रन रेट से होगा. ऐसे में भारत का ये खराब रन रेट उसे नुकसान पहुंचा सकता है.  सुपर-8 ग्रुप 2 की स्थिति ग्रुप 2 में इंग्लैंड ने जीत के साथ शुरुआत की है. 2 अंकों और +2.550 नेट रन रेट के साथ वह टॉप पर है. पाकिस्तान और न्यूजीलैंड का मैच बारिश के कारण बेनतीजा रहा, इसलिए दोनों को 1-1 अंक मिला है और उनका नेट रन रेट 0.000 है. श्रीलंका को अपने पहले मुकाबले में हार मिली और वह 0 अंक तथा -2.550 नेट रन रेट के साथ चौथे स्थान पर है. सेमीफाइनल और फाइनल का कार्यक्रम सुपर-8 के दोनों ग्रुप से टॉप-2 टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी. पहला सेमीफाइनल 4 मार्च को खेला जाएगा (ग्रुप 1 की नंबर-1 टीम बनाम ग्रुप 2 की नंबर-2 टीम). दूसरा सेमीफाइनल 5 मार्च को Wankhede Stadium में होगा (ग्रुप 2 की नंबर-1 टीम बनाम ग्रुप 1 की नंबर-2 टीम). फाइनल मुकाबला 8 मार्च को अहमदाबाद में प्रस्तावित है. हालांकि, यह तभी होगा जब पाकिस्तान फाइनल के लिए क्वालिफाई नहीं करता.

आधार कार्ड अपडेट कराना हुआ आसान! भोपाल में 35 से ज्यादा सेंटर एक्टिव, जानें कहां जाएं

भोपाल शहर में आधार से जुड़े कार्यों के लिए नागरिकों को अब भटकना नहीं पड़ेगा। नए नामांकन, मोबाइल-ईमेल अपडेट, पता परिवर्तन, बायोमेट्रिक और फोटो सुधार जैसी सुविधाएं 35 से अधिक सक्रिय केंद्रों पर उपलब्ध हैं। ये केंद्र डाकघरों, प्रमुख बैंक शाखाओं और अधिकृत आधार सेवा केंद्रों में संचालित हो रहे हैं। अधिकांश केंद्र सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुले रहते हैं, जिससे कामकाजी लोगों को भी सहूलियत मिल रही है। जीपीओ भोपाल, एमपी नगर डाकघर, न्यू मार्केट, कोलार रोड, बैरागढ़ और गोविंदपुरा डाकघर में आधार सेवाएं दी जा रही हैं। इसके अलावा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और केनरा बैंक की चयनित शाखाओं में भी अधिकृत आधार केंद्र संचालित हैं।   नगर निगम और कलेक्ट्रेट परिसर में भी केंद्र नगर निगम परिसर, कलेक्ट्रेट कार्यालय और विभिन्न कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) पर भी आधार अपडेट की सुविधा उपलब्ध है। यहां नाम, पता, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर और बायोमेट्रिक सुधार कराए जा सकते हैं। जरूरी दस्तावेज और शुल्क पता परिवर्तन के लिए वोटर आईडी, बिजली बिल या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे वैध दस्तावेज साथ लाना अनिवार्य है। निर्धारित शुल्क डेमोग्राफिक अपडेट के लिए 50 रुपये और बायोमेट्रिक अपडेट सहित सुधार के लिए 100 रुपये है। नागरिकों से अपील है कि तय शुल्क से अधिक राशि न दें और अपॉइंटमेंट के लिए यूआईडीएआई की आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करें।

अमेरिका ट्रेड समझौते पर घमासान: भोपाल में कांग्रेस का पहला किसान सम्मेलन, राहुल गांधी और खरगे होंगे शामिल

भोपाल अमेरिका के साथ ट्रेड डील के विरोध में कांग्रेस पहला किसान सम्मेलन मध्य प्रदेश में 24 फरवरी को करने जा रही है। इसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सम्मिलित होंगे। दोनों नेता दोपहर 12 बजे के करीब भोपाल पहुंचेंगे और तीन घंटे से अधिक समय तक रहेंगे। इस दौरान वे प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों व जिलाध्यक्षों की बैठक कर सकते हैं। किसान सम्मेलन अटल पथ अथवा लाल परेड मैदान में कराने की तैयारी है। इसमें प्रदेश भर से किसान आएंगे। राहुल का एक वर्ष में यह पांचवां प्रदेश दौरा राहुल गांधी का एक वर्ष में यह पांचवां प्रदेश दौरा है। इसके पहले वह इंदौर आए थे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ट्रेड डील से सबसे अधिक नुकसान मध्य प्रदेश को होने वाला है, इस कारण किसान सम्मेलनों की शुरुआत मध्य प्रदेश से की जा रही है। भारत नहीं अमेरिका के किसानों की आय दोगुनी होगी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने चिंता की है कि यह डील देश हित में नहीं है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2014 में कहा था कि देश के किसानों की आय दोगुनी होगी, लेकिन ट्रेड डील से अमेरिका के किसानों की आय दोगुनी करना चाहते हैं। इसमें चिंतन करने की जरूरत है। देश में इतना सोयाबीन उत्पादित हो रहा है कि बाहर से लाने की जरूरत ही नहीं है। इस डील से भारत के लोगों की रोजी-रोटी पर अमेरिका अतिक्रमण करेगा।

MP में बढ़ेगी चीतों की संख्या, 28 फरवरी को बोत्सवाना से आएंगे 8 नए मेहमान

भोपाल मध्य प्रदेश में चीतों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। चीतों की संख्या में वृद्धि के लिए 28 फरवरी को बोत्सवाना से आठ और चीते लाए जाएंगे। राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष-2032 तक लगभग 17 हजार वर्ग किलो मीटर क्षेत्र में 60–70 चीतों की आत्मनिर्भर आबादी स्थापित करना है। इसके लिए गुजरात के बन्नी घास के मैदानों में संरक्षण प्रजनन केंद्र स्थापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में मध्य प्रदेश में चीता पुनर्स्थापन प्रोजेक्ट विश्व का सबसे सफल अभियान है। यह परियोजना ‘प्रकृति से प्रगति’ का संदेश है। सितंबर 2022 में शुरू हुई वन्य जीव संरक्षण की इस यात्रा ने सफलता के तीन साल पूरे कर लिए। 2023 से 2026 के बीच 39 शावकों का जन्म 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को प्रधानमंत्री मोदी ने कूनो अभयारण्य के संरक्षित बाड़ों में छोड़ कर पुनर्स्थापना परियोजना का शुभारंभ किया। 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़े गए। वर्ष 2023 से 2026 के बीच यहां 39 शावकों का जन्म हुआ, जिनमें से 27 शावक कूनो में स्वस्थ और जीवित हैं। राष्ट्रपति के साथ बोत्सवाना के राष्ट्राध्यक्ष मौजूद रह सकते हैं बताया जा रहा है कि इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु के साथ बोत्सवाना के राष्ट्राध्यक्ष डुमा बोका भी मौजूद रह सकते हैं। कार्यक्रम केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव की मौजूदगी में होगा। अति विशिष्ट अतिथियों के संभावित आगमन को लेकर कूनो पार्क में पांच हेलीपैड बनाए गए हैं। नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए जा चुके हैं चीते एयरफोर्स के अधिकारियों की देखरेख में यहां हेलीकॉप्टर उतारने का ट्रायल भी किया गया है। बता दें कि भारत में चीता संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से आठ और 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए जाने के बाद अब बोत्सवाना से दो वयस्क मादा चीते और उनके छह शावक लाए जा रहे हैं।

यात्रियों को राहत! ट्रेन छूटने से ठीक पहले तक बदलें बोर्डिंग स्टेशन, रेलवे ने बदले नियम

नई दिल्ली भारतीय रेलवे यात्रियों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। अब ट्रेन छूटने के चंद मिनटों पहले तक आप अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकेंगे। रेलवे बोर्ड द्वारा तैयार किए गए इस नए प्रस्ताव से उन यात्रियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, जो अंतिम समय में किसी कारणवश अपना स्टेशन बदलना चाहते हैं। अब दूसरे चार्ट तक बदलें अपना बोर्डिंग स्टेशन भारतीय रेलवे अपने सिस्टम को और अधिक 'पैसेंजर फ्रेंडली' बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रहा है। रेलवे बोर्ड के एक नए प्रस्ताव के अनुसार, यात्री अब ट्रेन का दूसरा आरक्षण चार्ट (Second Reservation Chart) तैयार होने तक अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकेंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि ट्रेन प्रस्थान करने के लगभग 30 मिनट पहले तक यात्रियों के पास अपना स्टेशन बदलने का विकल्प मौजूद रहेगा।   क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत? वर्तमान नियमों के तहत, बोर्डिंग पॉइंट में बदलाव केवल पहला चार्ट बनने तक ही किया जा सकता है। लंबी दूरी की ट्रेनों के मामले में, पहला चार्ट ट्रेन छूटने से 8 से 20 घंटे पहले ही बन जाता है। ऐसे में यदि किसी यात्री को अंतिम समय में शहर के किसी दूसरे स्टेशन से ट्रेन पकड़नी हो, तो उसके पास कानूनी रूप से कोई विकल्प नहीं बचता था। नए नियम से यात्रियों की यह 'लास्ट मिनट' की चिंता दूर हो जाएगी। तकनीकी जांच और क्रियान्वयन रेलवे बोर्ड के निदेशक (पैसेंजर मार्केटिंग-द्वितीय) संजय मनोचा ने 19 फरवरी को क्रिस (CRIS) को पत्र लिखकर इस प्रस्ताव की तकनीकी व्यवहार्यता (Technical Feasibility) पर रिपोर्ट मांगी है।     सॉफ्टवेयर अपडेट: बोर्ड यह समझना चाहता है कि इस बदलाव से रेलवे के रिजर्वेशन सॉफ्टवेयर पर क्या प्रभाव पड़ेगा।     चरणबद्ध शुरुआत: रिपोर्ट सकारात्मक आने पर इस सुविधा को पहले कुछ चुनिंदा ट्रेनों में 'पायलट प्रोजेक्ट' के तौर पर शुरू किया जाएगा, जिसके बाद इसे सभी ट्रेनों के लिए लागू कर दिया जाएगा। क्या हुआ मुख्य बदलाव     पुराना नियम : केवल प्रथम चार्ट (आठ-20 घंटे पहले) तक बदलाव संभव।     नया प्रस्ताव : द्वितीय चार्ट (ट्रेन प्रस्थान से 30 मिनट पहले) तक बदलाव की सुविधा।     उद्देश्य : यात्रियों को अंतिम समय में स्टेशन बदलने का विकल्प देना। यात्रियों को क्या मिलेगा?     अचानक योजना बदलने पर भी सीट सुरक्षित रहेगी।     बिना बोर्डिंग पॉइंट बदले दूसरे स्टेशन से चढ़ने पर होने वाले जुर्माने का डर खत्म होगा।     यात्री IRCTC ऐप या वेबसाइट के जरिए आसानी से यह बदलाव कर पाएंगे।

कच्चे तेल के आयात में बड़ा बदलाव: भारत ने रूस की जगह इस देश पर बढ़ाया भरोसा, इराक तीसरे स्थान पर

 नई दिल्ली भारत की क्रूड ऑयल की आयात रणनीति अब एक नए बदलाव के दौर में प्रवेश कर रही है। आयातित खेप के आंकड़े और एक्सपर्ट्स बताते हैं कि सऊदी अरब के नेतृत्व में पश्चिम एशिया के आपूर्तिकर्ता अपनी बाजार हिस्सेदारी फिर से हासिल कर रहे हैं। वहीं, रूसी तेल की आवक अब भी महत्वपूर्ण बनी हुई है, लेकिन जियो पॉलिटिक्स और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते इसमें कमी आ रही है। भारत अब रूस से कितना तेल खरीद रहा है? रूस से होने वाली आपूर्ति में कमी आने के कारण एक से 18 फरवरी के दौरान भारत का कुल कच्चा तेल आयात गिरकर औसतन 48.5 लाख बैरल प्रति दिन (बीपीडी) रह गया। यह जनवरी के 5.25 लाख बीपीडी के मुकाबले आठ प्रतिशत कम है। पिछले महीने प्रमुख रूसी निर्यातकों पर अमेरिकी प्रतिबंधों और यूरोपीय संघ के 18वें प्रतिबंध पैकेज के प्रभावी होने के बाद वहां से आने वाले तेल के प्रवाह में यह गिरावट देखी गई है। जहाजों की आवाजाही के निगरानी आंकड़ों से पता चलता है कि भारत को होने वाली रूसी आपूर्ति दिसंबर, 2025 के 12.8 लाख बीपीडी से घटकर जनवरी में 12.2 लाख बीपीडी रह गई और फरवरी की शुरुआत में यह लगभग 10 प्रतिशत और घटकर 10.9 लाख बीपीडी पर आ गई। मार्च में और होगी कटौती वैश्विक जिंस आंकड़े एक्सपर्ट्स कंपनी 'केपलर' के चीफ रिसर्च हेड सुमित रितोलिया ने कहा, “फरवरी में भारत का रूसी कच्चा तेल आयात लगभग 10-12 लाख बीपीडी रहने का अनुमान है, जिसके मार्च में घटकर करीब 8-10 लाख बीपीडी तक आने की संभावना है।” वर्ष 2022 में यूक्रेन युद्ध के बाद भारी छूट पर मिलने के कारण भारत ने रूसी तेल की खरीद बड़े पैमाने पर शुरू की थी, लेकिन अब यह आवक बढ़ने के बजाय स्थिर होती दिख रही है। उन्होंने कहा, “हालांकि, हम इसे एक अल्पकालिक स्थिरता के रूप में देख रहे हैं, न कि 2025 के मध्य में देखे गए उच्चतम स्तर पर वापसी के रूप में। हमारा अनुमान है कि व्यावसायिक और नीतिगत बाधाओं के कारण, 2024-2025 की तुलना में 2026 में भारत के कुल आयात में रूस की हिस्सेदारी धीरे-धीरे कम होकर एक निचले स्तर पर स्थिर हो जाएगी।” वर्तमान आकलन के अनुसार, अमेरिका और भारत के बीच एक व्यावहारिक समझ बनी है जो भारत को अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए रूसी आयात की अनुमति देती है, लेकिन इसे और अधिक बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित नहीं करती। सऊदी अरब से जमकर हो रही खरीदारी जैसे-जैसे रूसी तेल की मात्रा कम हो रही है, पश्चिम एशिया खाड़ी देश इस कमी को पूरा कर रहे हैं। रितोलिया ने बताया कि सऊदी अरब से होने वाली आपूर्ति फरवरी में 10 लाख से 11 लाख बीपीडी तक पहुंचने की उम्मीद है, जो नवंबर, 2019 के बाद का उच्चतम स्तर है। महीने की शुरुआत से अब तक सऊदी अरब से आने वाले तेल का प्रवाह लगभग 14 लाख बीपीडी दर्ज किया गया है। हालांकि, मार्च की शुरुआत में इसमें कुछ नरमी आने की संभावना है। वर्तमान रुझानों के आधार पर, सऊदी अरब फरवरी में भारत के शीर्ष आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा है, जिसके बाद रूस और इराक का नंबर आता है।

मध्यप्रदेश में उपग्रह टेलीमेट्री जैसे नवाचारों से बढ़ रही है गद्धों की संख्या

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज सोमवार को हलाली डेम क्षेत्र में लुप्तप्राय प्रजाति के 5 गिद्धों को प्राकृतिक आवास में मुक्त करेंगे। इनमें चार भारतीय गिद्ध (जिप्स इंडिकस) और एक सिनेरियस गिद्ध (एजिपीयस मोनाकस) शामिल हैं। उच्च परिशुद्धता वाले जीपीएस-जीएसएम उपग्रह ट्रांसमीटरों से सुसज्जित पाँच दुर्लभ प्रजाति के गिद्धों को भोपाल स्थित गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र में व्यवस्थित अनुकूलन और अवलोकन अवधि के बाद मुक्त किया जा रहा है। टैगिंग प्रक्रिया सभी संबंधित संस्थाओं एवं वन विभाग के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में वाइल्डलाइफ एसओएस के वन्यजीव पशु चिकित्सक की देखरेख में हुई। यह पहल मध्यभारत के विकसित होते ‘गिद्ध परिदृश्य’ को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जहाँ भारतीय गिद्ध सामान्यतः एक ही क्षेत्र में रहते हैं, वहीं सिनेरियस गिद्ध मध्य एशियाई फ्लाईवे के अंतर्गत लंबी दूरी का प्रवास करते हैं, जो 30 से अधिक देशों तक फैला विश्व का एक प्रमुख प्रवासी पक्षी गलियारा है। पक्षी संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मध्यप्रदेश वन विभाग ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के सहयोग से गिद्धों की गतिविधियों और निगरानी के लिए उपग्रह टेलीमेट्री कार्यक्रम प्रारंभ किया है। टेलीमेट्री से प्राप्त आंकड़ों के माध्यम से गिद्धों के भूदृश्य उपयोग, आवागमन पैटर्न और मानव-जनित दबावों के प्रति उनकी प्रतिक्रिया के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है। इससे प्रमुख पड़ाव स्थलों और भोजन क्षेत्रों की पहचान, संरक्षित एवं मानव-प्रधान क्षेत्रों में उनकी पारिस्थितिकी को समझने तथा बिजली के झटके, विषाक्तता और आवास क्षरण जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करने में सहायता मिल रही है। इस प्रक्रिया में संग्रहित वैज्ञानिक प्रमाण अधिक प्रभावी खतरा-निवारण रणनीतियाँ विकसित करने और सीमा-पार सहयोग सहित भूदृश्य स्तर पर संरक्षण योजनाओं को सशक्त बनाने में सहायक होंगे। मध्यप्रदेश में उपग्रह टेलीमेट्री से गिद्ध संरक्षण की एकीकृत डेटा-आधारित एवं भूदृश्य-स्तरीय संरक्षण का पारस्थितिकी तंत्र विकसित हुआ है। इससे लुप्तप्राय गिद्ध प्रजातियों का संरक्षण होगा और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के प्रहरी के रूप में उनकी भूमिका भी दीर्घकालिक रूप से सुनिश्चित होगी। भारतीय परंपरा में गिद्धों को शक्ति और सम्मान का प्रतीक माना गया है। रामायण में उल्लेख है कि जटायु ने रावण से माता सीता की रक्षा के प्रयास में आत्मोत्सर्ग कर दिया। रामायण में ही उसके भाई सम्पाती की भी कथा है, जिसने अपने छोटे भाई जटायु को सूर्य की तपन से बचाते हुए बलिदान दे दिया था। पर्यावरण पारिस्थितिकी तंत्र में गिद्ध प्रकृति के सफाईकर्मी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गिद्ध पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायक हैं, साथ ही बीमारियों के प्रसार को रोकने में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। मध्यप्रदेश लंबे समय से देश में गिद्धों की समृद्ध आबादी का केंद्र रहा है। प्रदेश में भारतीय गिद्ध (लॉन्ग-बिल्ड वल्चर), सिनेरियस गिद्ध (ब्लैक वल्चर), मिस्र गिद्ध (व्हाइट स्कैवेंजेर वल्चर) और हिमालयन ग्रिफॉन जैसी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। हाल ही में वल्चर एस्टिमेशन-2026 के पहले दिन दक्षिण पन्ना वन प्रभाग में एक हजार से अधिक गिद्धों का अवलोकन किया गया, जो हाल के वर्षों में सर्वाधिक संख्या है।  

साउथ अफ्रीका के खिलाफ हार के बाद कप्तान सूर्या का गुस्सा, डगआट में सपोर्ट स्टाफ से भिड़े

 अहमदाबाद आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय टीम को सुपर-8 मुकाबले में साउथ अफ्रीका के खिलाफ 76 रनों से करारी हार झेलनी पड़ी. इस हार के साथ ग्रुप-1 की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है और अब भारत के लिए अगले दोनों मैच 'करो या मरो' बन गए हैं. लीग स्टेज में लगातार चार जीत ने भले ही कमियों पर पर्दा डाल दिया था, लेकिन थोड़ा धीमी और काली मिट्टी वाली पिच पर भारतीय बल्लेबाजों की पोल खुल गई. टीम 188 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए 18.5 ओवर में सिर्फ 111 रनों पर ढेर हो गई. जसप्रीत बुमराह ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट झटके, जिसने साउथ अफ्रीका को 187/7 पर रोकने में अहम भूमिका निभाई थी. शुरुआती ओवरों में उन्होंने दो विकेट लेकर प्रोटियाज को 20/3 कर दिया था. हालांकि, भारतीय बल्लेबाजों की नाकामी के चलते उनकी मेहनत बेकार चली गई. मुकाबले में साउथ अफ्रीका के लिए डेविड मिलर ने 35 गेंदों पर 63 रनों की आक्रामक पारी खेली. उन्हें युवा बल्लेबाज डेवाल्ड ब्रेविस (45 रन) और ट्रिस्टन स्टब्स (44*) का शानदार साथ मिला. भारतीय स्पिनर वरुण चक्रवर्ती को खास सफलता नहीं मिली और वे 4 ओवर में 47 रन दे बैठे. गंभीर की रणनीति काम नहीं आई मुकाबले में हार के बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव काफी खफा दिखे. कप्तान सूर्या डगआउट में सपोर्ट स्टाफ के साथ लंबी बहस करते दिखे. इस मैच के लिए हेड कोच गौतम गंभीर के नेतृत्व में टीम मैनेजमेंट ने जो रणनीति बनाई थी, वो कारगर साबित नहीं हुई. ऐसे में सूर्या का गुस्सा होना स्वाभिवक था. सूर्या ने गंभीर से भी बात की, जिन्होंने गौर से उनकी बातों को सुना. रनचेज में भारत ने लगातार विकेट खोए. कप्तान एडेन मार्करम ने फॉर्म में चल रहे ईशान किशन (0 रन) को आउट कर भारत को शुरुआती झटका दिया. तिलक वर्मा (1 रन) का गलत शॉट चयन और डीआरएस की बर्बादी टीम पर भारी पड़ा. अभिषेक शर्मा (15 रन) भी लय में नहीं दिखे और मार्को जानसेन की धीमी गेंद पर आउट हो गए. कप्तान सूर्यकुमार यादव (18 रन) संघर्ष करते नजर आए. हार्दिक पंड्या (18 रन) और शिवम दुबे (42 रन) ने 35 रनों की साझेदारी जरूर की, लेकिन  साउथ अफ्रीका के गेंदबाज़ों की सटीक योजना के आगे टिक नहीं सके. मार्को जानसेन (4/22), केशव महाराज (3/24) और कॉर्बिन बॉश (2/12) ने मिलकर भारतीय बल्लेबाजी को तहस-नहस कर दिया. इस हार के बाद भारत के लिए जिम्बाब्वे (26 फरवरी) और वेस्टइंडीज (1 मार्च) के खिलाफ मुकाबले बेहद अहम हो गए हैं. सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए दोनों मैच जीतना जरूरी होगा. भारत की यह हार 2022 टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में इंग्लैंड से मिली हार के बाद पहली बड़ी पराजय है.अब देखना होगा कि टीम इस झटके से कैसे उबरती है.

भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में मप्र का दबदबा, 15 नेताओं को मिला अवसर

भोपाल भाजपा संगठन की राष्ट्रीय टीम में मध्य प्रदेश के कई चेहरे दिखाई दे सकते हैं। प्रदेश संगठन ने राज्य के ऐसे 15 नेताओं के नाम केंद्रीय नेतृत्व को भेजे हैं, जो अलग- अलग अंचलों से हैं और अभी सत्ता या संगठन के किसी पद पर नहीं हैं। भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम का गठन होना है और अन्य मोर्चे भी गठित किए जाने हैं। केंद्रीय नेतृत्व ने इस बारे में प्रदेश संगठन से सुझाव मांगे थे। वर्तमान में मध्य प्रदेश से सत्यनारायण जटिया (संसदीय बोर्ड सदस्य), ओम प्रकाश धुर्वे (राष्ट्रीय सचिव) और लाल सिंह आर्य (राष्ट्रीय अध्यक्ष, एससी मोर्चा) जैसे नेता राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। पार्टी 2029 के लोकसभा चुनाव और संगठन की मजबूती को ध्यान में रखकर अनुभवी नेताओं के साथ-साथ युवा और महिला चेहरों को भी वरीयता देना चाहती है। पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा की टीम में मध्य प्रदेश से कैलाश विजयवर्गीय सहित चार नेताओं को स्थान मिला था। उस दौरान कैलाश विजयवर्गीय राष्ट्रीय महासचिव थे।   बाद में वर्ष 2023 में वह राज्य में मंत्री बना दिए गए। पार्टी नेताओं का मानना है कि चूंकि पूर्व में राष्ट्रीय संगठन में एक ही समय में मध्य प्रदेश से दो-दो महासचिव थावरचंद गहलोत और नरेंद्र सिंह तोमर रहे हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि नितिन नवीन की टीम में भी मध्य प्रदेश का प्रभाव बढ़ सकता है। इस बार भी चार से पांच नेताओं को नितिन नवीन की टीम में स्थान मिलने की संभावना है। इसमें एक या दो महिलाएं भी हो सकती हैं। इसके साथ ही युवा नेताओं को भी अवसर मिल सकता है। बाकी अन्य को मोर्चा- प्रकोष्ठ में शामिल किया जा सकता है। दरअसल, मध्य प्रदेश हमेशा से ही भाजपा के लिए एक प्रयोगशाला की तरह रहा है। हिंदू महासभा हो या जनसंघ, दोनों की जड़ें मध्य प्रदेश में मजबूत रही हैं। यही कारण है कि भाजपा यहां लंबे समय से सत्ता में है। संगठन की मजबूती की दूसरी वजह यहां के कुशल संगठनकर्ता भी माने जा सकते हैं। जिनकी वजह से राष्ट्रीय संगठन के स्तर पर भी यहां के भाजपा कार्यकर्ताओं का दबदबा रहा है।

मध्य प्रदेश में खून की सुरक्षा पर बड़ा फैसला, अस्पतालों में लागू होगा ‘NAT’ टेस्ट

भोपाल प्रदेश के अस्पतालों में अब रोगियों को नैट (न्यूक्लिक एसिड टेस्ट) मशीन से जांचा हुआ रक्त ही चढ़ाने के लिए ब्लड बैंक से दिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने यह व्यवस्था पिछले वर्ष दिसंबर में सतना के जिला अस्पताल में थैलेसीमिया पीड़ित चार बच्चों को एचआइवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने की घटना से सबक लेते हुए शुरू की है। इंदौर-भोपाल के शासकीय मेडिकल कालेज में पहले से यह मशीन लगी है। अब सभी संभागीय मुख्यालयों में नैट मशीनें स्थापित करने की तैयारी है। मशीन स्थापना और संचालन की कार्ययोजना बता दें कि नैट मशीनें सरकारी मेडिकल कालेजों या ज्यादा रक्त संग्रहण वाले जिला अस्पतालों में लगाई जाएंगी, जहां से रक्त अन्य अस्पतालों के ब्लड बैंकों में पहुंचाया जाएगा। मशीनें सरकार नहीं बल्कि निजी कंपनी लगाएंगी, इसके बदले में उन्हें प्रति टेस्ट के मान से भुगतान किया जाएगा। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा जिला अस्पताल में सभी ग्रुप का ब्लड उपलब्ध रहे, ताकि इमरजेंसी में भी नैट से बिना जांचे रक्त चढ़ाने की नौबत न आए।   रक्त में पांच बीमारियों की होगी सूक्ष्म जांच रक्तदान से मिलने वाले ब्लड में एचआइवी, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, मलेरिया और वीडीआरएल (यौन संक्रामक रोग) सहित पांच प्रकार की बीमारियों की जांच की जाती है। एचआइवी जांच कहीं रैपिड किट से तो कहीं एचआइवी का एक्लिया टेस्ट से की जाती है। एक्लिया टेस्ट में बीमारी आसानी से पकड़ में आ जाती है। सतना में एक्लिया की किट खत्म होने के कारण कुछ टेस्ट रैपिड किट से किए गए। नैट का लाभ यह है कि इसमें एचआइवी का विंडो पीरियड घटकर 15 दिन रह जाता है। विंडो पीरियड का लाभ और भविष्य की चुनौतियां विंडो पीरियड वह अवधि है, जिसमें बीमारी के विरुद्ध शरीर में एंटी बाडी नहीं बनने से वह पकड़ में नहीं आती। नई व्यवस्था में यह होगी चुनौती अधिकतर मामलों में स्वजन या परिचित द्वारा रक्तदान करने पर ही बदले में उसे ब्लड दिया जाता है। नैट से जांचा ब्लड ही रोगियों को उपलब्ध कराया जाए इसमें बड़ी चुनौती यह रहेगी कि ब्लड बैंक में सभी ब्लड ग्रुप का रक्त उपलब्ध रहे।