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सिंगापुर के निवेशकों के लिए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास विशेष रूप से नियोजित सिंगापुर सिटी की अवधारणा पर कार्य जारी: योगी आदित्यनाथ

सीएम योगी के सिंगापुर दौरे का दूसरा दिन उत्तर प्रदेश में निवेश पूरी तरह सुरक्षित और संभावनाओं से परिपूर्ण: सीएम योगी सिंगापुर के निवेशकों के लिए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास विशेष रूप से नियोजित सिंगापुर सिटी की अवधारणा पर कार्य जारी: योगी आदित्यनाथ सिंगापुर का हर इंडस्ट्री लीडर आज भारत में ड्रीम डेस्टिनेशन के रूप में उत्तर प्रदेश की भूमिका को समझ रहा: मुख्यमंत्री आज उत्तर प्रदेश टेक्नोलॉजी और ट्रस्ट के साथ ही ट्रांसफॉर्मेशन के रूप में भी पहचान बना रहा: सीएम योगी सिंगापुर में इन्वेस्ट यूपी मेगा रोड शो में बोले मुख्यमंत्री, आज उत्तर प्रदेश केवल संभावनाओं की भूमि नहीं, बल्कि परफॉर्मेंस की भूमि बन चुका है सिंगापुर/लखनऊ  सिंगापुर दौरे के दूसरे दिन ‘इन्वेस्ट यूपी मेगा रोड शो’ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के ‘ट्रिपल एस’ (सेफ्टी, स्टेबिलिटी और स्पीड) मॉडल को निवेश की सबसे बड़ी गारंटी बताते हुए प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में हो रहे प्रयासों का विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश केवल संभावनाओं की नहीं, बल्कि परफॉर्मेंस की भूमि बन चुका है। हमने पिछले 9 वर्ष के अंदर उत्तर प्रदेश में केवल सुरक्षा का ही माहौल नहीं दिया, बल्कि स्केल को स्किल और स्पीड के साथ कैसे जोड़ा जाता है, इसको भी करके दिखाया है। आज उत्तर प्रदेश ने केवल टेक्नोलॉजी और ट्रस्ट में ही नहीं, बल्कि भारत के अंदर ट्रांसफॉर्मेशन के भी एक नए युग में आगे बढ़ने वाले प्रदेश के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि अगले तीन से चार वर्षों में उत्तर प्रदेश 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में निर्णायक छलांग लगाएगा। उन्होंने सिंगापुर के उद्योग जगत को आमंत्रित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में निवेश पूरी तरह सुरक्षित है और संभावनाओं से परिपूर्ण है। जेवर के पास ‘सिंगापुर सिटी’ का प्रस्ताव मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास एक डेडिकेटेड “सिंगापुर सिटी” विकसित करने की योजना प्रस्तुत की है। यदि सिंगापुर के निवेशक एनसीआर क्षेत्र में आना चाहते हैं तो उनके लिए एक विशेष रूप से नियोजित सिंगापुर सिटी की अवधारणा पर कार्य किया जा रहा है। इसके लिए यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास भूमि की व्यवस्था की गई है, ताकि एयरपोर्ट कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स और वर्ल्ड-क्लास इन्फ्रास्ट्रक्चर का पूरा लाभ निवेशकों को मिल सके। मुख्यमंत्री ने निवेशकों को आमंत्रित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में उनका निवेश पूरी तरह सुरक्षित रहेगा और यहां उन्हें अपनी व्यावसायिक संभावनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए अनुकूल वातावरण मिलेगा।  हर इंडस्ट्री लीडर के लिए यूपी एक ड्रीम डेस्टिनेशन मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगापुर व उत्तर प्रदेश कैसे एक साथ आगे बढ़ सकते हैं, सिंगापुर विजिट के दौरान इन संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। दो दिन में जीआईसी (GIC), टेमासेक (Temasek),  सैट्स, जीएसएस ग्रीन्स और ब्लैकस्टोन सहित प्रमुख संस्थाओं के चेयरमैन और सीईओ से चर्चा करने का अवसर मिला। सिंगापुर के उद्योग जगत के साथ बहुचरणीय बैठकों में सार्थक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें यह देखकर खुशी हुई कि सिंगापुर का हर इंडस्ट्री लीडर आज भारत में एक ड्रीम डेस्टिनेशन के रूप में उत्तर प्रदेश की भूमिका को समझ रहा है। उत्तर प्रदेश केवल भारत की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन ही नहीं है, बल्कि निवेश के लिए सबसे सुरक्षित और संभावनाओं से भरा प्रदेश बनकर उभरा है। यूपी ने तय की पोटेंशियल से परफॉर्मेंस की यात्रा मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 10–11 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने जो प्रगति की है, उसी विजन को उत्तर प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू किया गया है। उत्तर प्रदेश ने ‘लैंड ऑफ पोटेंशियल’ से ‘लैंड ऑफ परफॉर्मेंस’ तक की यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की है। 9 वर्षों में प्रदेश की जीएसडीपी 13 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 36 लाख करोड़ रुपये होने जा रही है। पर कैपिटा इनकम लगभग तीन गुना बढ़ी है और भारत की अर्थव्यवस्था में यूपी का योगदान लगभग 9.5 प्रतिशत है। प्रदेश डी-रेगुलेशन रैंकिंग में प्रथम स्थान पर है, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में टॉप अचीवर है और 99 प्रतिशत आपराधिक प्रावधानों को समाप्त कर डी-क्रिमिनलाइजेशन की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। पिछले पांच वर्षों से उत्तर प्रदेश रेवेन्यू सरप्लस राज्य बना हुआ है। इन्फ्रास्ट्रक्चर और लैंड बैंक की ताकत मुख्यमंत्री ने बताया कि 75,000 एकड़ का लैंड बैंक एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के आसपास उपलब्ध है। भारत के कुल एक्सप्रेसवे का 55 प्रतिशत उत्तर प्रदेश में है। 16,000 किलोमीटर का विशाल रेलवे नेटवर्क और 7 शहरों में मेट्रो संचालन प्रदेश की कनेक्टिविटी को मजबूत बनाता है। प्रदेश में 16 एयरपोर्ट संचालित हैं, जिनमें 4 अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट हैं, जबकि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट शीघ्र ही राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि वाराणसी से हल्दिया तक भारत का पहला राष्ट्रीय जलमार्ग संचालित है और मल्टी-मोडल टर्मिनल विकसित किए गए हैं। पिछले 9 वर्षों में राज्य में कारखानों की संख्या 14,000 से बढ़कर 31,000 से अधिक हो चुकी है। भारत की मात्र 11 प्रतिशत कृषि भूमि उत्तर प्रदेश में है,  लेकिन देश का 21 प्रतिशत से अधिक खाद्यान्न उत्पादन यहीं होता है। इसीलिए यूपी भारत का ‘फूड बास्केट’ है। यहां फूड प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के क्षेत्र में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। यूपी में ट्रेंड मैनपॉवर उपलब्ध मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि उत्तर प्रदेश में बड़ा निवेश करना इसलिए भी आसान है, क्योंकि आज राज्य के पास प्रशिक्षित और स्किल्ड मैनपावर की भरपूर उपलब्धता है। 25 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में 56 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या वर्किंग फोर्स है, जो उद्योग, सेवा क्षेत्र और अन्य सभी सेक्टरों में कार्य करने के लिए तैयार है। राज्य ने स्किल को स्पीड और एम्प्लॉयमेंट से जोड़ने की दिशा में ठोस प्रयास किए हैं, लेबर रिफॉर्म, स्किल डेवलपमेंट, शिक्षा और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत किया है। साथ ही 96 लाख एमएसएमई इकाइयां पहले से कार्यरत हैं, जो 3 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार से जोड़ रही हैं।  सिंगल विंडो और पारदर्शी व्यवस्था मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में निवेश करना अब बहुत आसान है। निवेश मित्र, निवेश सारथी और उद्यमी मित्र पोर्टल के माध्यम से सिंगल विंडो क्लियरेंस, टाइम-बाउंड अनुमोदन और ऑनलाइन डीबीटी के जरिए … Read more

मुख्यमंत्री ने कहा, 2029-30 तक 1 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य की ओर यूपी बढ़ा रहा निर्णायक कदम

सीएम के सिंगापुर दौरे का दूसरा दिन, सीएम की प्रेसवार्ता सिंगापुर में मिले ₹1 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव, ₹60 हजार करोड़ के हुए एमओयू: सीएम योगी मुख्यमंत्री ने कहा, 2029-30 तक 1 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य की ओर यूपी बढ़ा रहा निर्णायक कदम सीएम योगी ने दूसरे दिन सिंगापुर के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उपप्रधानमंत्री, गृहमंत्री समेत शीर्ष नेतृत्व से की मुलाकात एमआरओ, कार्गो, सेमीकंडक्टर, डाटा सेंटर, स्किलिंग और लॉजिस्टिक्स में व्यापक सहयोग पर बनी सहमति: मुख्यमंत्री दुनिया हुई पारदर्शी, निवेशकों को यूपी की हर गतिविधि की जानकारी: सीएम आज भारत और उत्तर प्रदेश की छवि विश्व स्तर पर अत्यंत सकारात्मक रूप में देखी जा रही है: योगी आदित्यनाथ सिंगापुर/लखनऊ  उत्तर प्रदेश को वर्ष 2029-30 तक 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के साथ सिंगापुर दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सिंगापुर में टीम यूपी को लगभग ₹1 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से ₹60 हजार करोड़ के एमओयू ‘इन्वेस्ट यूपी’ द्वारा संपन्न किए जा चुके हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह निवेश प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया आज पूरी तरह पारदर्शी हो चुकी है। निवेशकों को उत्तर प्रदेश में हो रही प्रत्येक गतिविधि की जानकारी है। यही कारण है कि कम समय में ही यूपी को इतना बड़ा निवेश प्राप्त हुआ है।  नौ वर्षों में यूपी ने तेजी से किया विकास मीडियाकर्मियों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके साथ एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल सिंगापुर व जापान की यात्रा पर आया है। सिंगापुर पहुंचने के बाद सुबह 8:30 बजे से देर रात तक लगातार बैठकें चलीं और दूसरे दिन भी प्रातःकाल से ही कार्यक्रम जारी रहे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजनरी नेतृत्व में पिछले 11 वर्षों में भारत ने समग्र विकास के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उसी विजन को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश ने बीते साढ़े आठ-नौ वर्षों में इन्फ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, सर्विस सेक्टर और जन-कल्याण के क्षेत्रों में तेज गति से विकास किया है। आज भारत और उत्तर प्रदेश की छवि विश्व स्तर पर अत्यंत सकारात्मक रूप में देखी जा रही है। 100 से अधिक शीर्ष प्रतिनिधियों से मुलाकात मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले दो दिनों में उन्होंने 100 से अधिक प्रतिनिधियों से भेंट की है। सिंगापुर के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उपप्रधानमंत्री, गृहमंत्री और ऊर्जा मंत्री के साथ भी उनकी सकारात्मक व सार्थक वार्ता हुई। इसके अतिरिक्त प्रमुख फिनटेक कंपनियों के अध्यक्ष व सीईओ के साथ भी बैठकें की गईं। कई कंपनियां पहले से भारत और उत्तर प्रदेश में निवेश कर रही हैं। सीएम योगी ने उल्लेख किया कि देश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित हो रहे गंगा एक्सप्रेसवे में भी कुछ कंपनियों ने पहले से निवेश किया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के प्रति निवेशकों की धारणा में 360 डिग्री का सकारात्मक परिवर्तन आया है। जेवर में एमआरओ और कार्गो हब की दिशा में पहल मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने उन अत्याधुनिक स्थलों का भी दौरा किया, जहां सामान्य लोगों का प्रवेश कठिन होता है। विशेष रूप से शीघ्र शुरू होने वाले जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के साथ कार्गो सुविधा और एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉलिंग) विकसित करने के लिए सिंगापुर की दक्षता का अध्ययन किया गया। सीएम योगी ने कहा कि वर्तमान में भारत सहित विश्व के अनेक विमान अपने एमआरओ कार्यों के लिए सिंगापुर आते हैं। यह सुविधा भारत में, विशेषकर जेवर में विकसित की जा सकती है। निवेशकों ने इस विषय पर गंभीर तैयारी कर रखी है और वे उत्तर प्रदेश के साथ संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं। स्किलिंग मॉडल से ‘एम्प्लॉयमेंट जोन’ तक मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने सिंगापुर के विश्वस्तरीय स्किलिंग सेंटर (आईटीई) का भी दौरा किया। उन्होंने कहा कि मुझे प्रसन्नता है कि हमने यूपी के अंदर हर जिले में स्केल को स्किलिंग में बदलने के लिए और स्किलिंग को रोजगार से जोड़ने के लिए लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट जोन डेवलप करने की जो कार्रवाई शुरू की है, उसका यहां भी एक मॉडल देखने को हमें मिला है। सीएम ने उम्मीद जताई कि इस सेंटर के साथ भी हम इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाएंगे।  टीम यूपी की सराहना, उच्चायुक्त को धन्यवाद मुख्यमंत्री ने वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, उद्योग मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ सहित प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्यों और अधिकारियों की सराहना की, जो लगातार बैठकों में सक्रिय हैं। उन्होंने भारतीय उच्चायुक्त और उनकी टीम का भी विशेष आभार व्यक्त किया, जिन्होंने ट्रेड, टेक्नोलॉजी, टूरिज्म, लॉजिस्टिक्स, इन्फ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, एमआरओ और स्किलिंग जैसे क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश की संभावनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि सिंगापुर में हुए निवेश समझौते और प्राप्त प्रस्ताव उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की ओर तेज गति से अग्रसर करेंगे।

यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा सर्वोपरि, उत्कृष्ट कर्मचारियों को 3600 से 4500 रुपये तक प्रोत्साहन राशि

योगी सरकार का इंतजाम, होली पर 28 फरवरी से नौ मार्च तक चलेंगी अतिरिक्त बसें यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा सर्वोपरि, उत्कृष्ट कर्मचारियों को 3600 से 4500 रुपये तक प्रोत्साहन राशि दिल्ली एवं गाजियाबाद सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बसों और कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या पहले से सुनिश्चित की जाएगी लखनऊ योगी सरकार ने होली पर्व पर यात्रियों की सुगम और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्था की है। इसके तहत 28 फरवरी से नौ मार्च तक अतिरिक्त बसों का संचालन किया जाएगा । इसके साथ ही, उत्कृष्ट कर्मचारियों को 3600 से 4500 रुपये तक प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। अनुबंधित बसों के कर्मियों को नहीं मिलेगा अवकाश प्रदेश के परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने कहा कि दिल्ली एवं गाजियाबाद सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश से यात्रा का दबाव अधिक रहता है। इसलिए इन क्षेत्रों में बसों और कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या पहले से सुनिश्चित की जाएगी। यदि प्रारंभिक प्वाइंट से 60 प्रतिशत यात्री लोड मिलता है तो प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी अतिरिक्त बसें चलाई जाएंगी। उन्होंने निर्देश दिए कि शत-प्रतिशत निगम बसों को ऑनरोड रखा जाए और अनुबंधित बसों के कर्मियों को पर्व अवधि में अवकाश न दिया जाए। वाहन स्वामी समय से मरम्मत कार्य पूर्ण कर बसें संचालन हेतु उपलब्ध कराएं। सुरक्षा और गुणवत्ता पर विशेष जोर योगी सरकार ने यात्रा के दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। जाम या दुर्घटना की स्थिति को काबू कर संचालन सुचारु बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रवर्तन दल लगातार ड्यूटी पर रहेंगे तथा चालकों और परिचालकों का ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट किया जाएगा। बसों की तकनीकी स्थिति दुरुस्त रहे, सीटें ठीक हों, खिड़कियों के शीशे सही हों और फायर सेफ्टी उपकरण उपलब्ध हों, यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। बस स्टेशनों और बसों में स्वच्छता व्यवस्था भी सुदृढ़ रखने को कहा गया है। कर्मचारियों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना पर्व अवधि में उत्कृष्ट कार्य करने वाले चालक-परिचालकों (संविदा एवं आउटसोर्सिंग सहित) को विशेष प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। प्रतिदिन औसतन 300 किमी संचालन करने पर 360 रुपये प्रतिदिन की दर से 3600 रुपये मिलेंगे । 10 दिन की पूर्ण ड्यूटी और निर्धारित मानक पूरा करने पर 450 रुपये प्रतिदिन की दर से 4500 रुपये और निर्धारित मानक से अधिक किलोमीटर पर प्रति किमी 55 पैसे अतिरिक्त मानदेय प्रदान किया जाएगा। डिपो एवं क्षेत्रीय कार्यशालाओं में कार्यरत कर्मचारियों को भी 10 दिन लगातार ड्यूटी पर 2100 रुपये तथा नौ दिन की ड्यूटी पर 1800 रुपये एकमुश्त दिए जाएंगे। उत्कृष्ट प्रदर्शन पर अतिरिक्त सम्मान प्रोत्साहन अवधि में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों एवं अधिकारियों को क्षेत्रीय समिति की संस्तुति पर अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सर्वाधिक आय प्रति बस प्राप्त करने वाले तीन क्षेत्रों के क्षेत्रीय प्रबंधकों एवं सेवा प्रबंधकों तथा 10 डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे।

ऑपरेशन सिंदूर में चली ब्रह्मोस’, योगी का संदेश- यूपी बनेगा डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब

‘ऑपरेशन सिंदूर में जो ब्रह्मोस चली थी न…’, योगी का संदेश- डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग यूपी का नया ब्रांड सिंगापुर में इन्वेस्ट यूपी मेगा रोड शो इवेंट में माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का संबोधन लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिंगापुर और जापान की यात्रा पर हैं। अपनी यात्रा के पहले दिन उन्होंने सिंगापुर में भारतीय प्रवासी समुदाय को संबोधित किया। CM योगी आदित्यनाथ ने मंच से एक ऐसी बात कही जिसने उत्तर प्रदेश की डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग के उद्देश्य को वैश्विक पटल पर स्पष्ट शब्दों में बयान किया।  CM योगी ने कहा- ‘ऑपरेशन सिंदूर के अंदर जो ब्रह्मोस मिसाइल दागी गई थी ना, वह लखनऊ की ही है।’ सिंगापुर की धरती पर योगी का यह एक वाक्य पूरी दुनिया के लिए संदेश है। यह भारत की रक्षा क्षमता, आत्मनिर्भरता और उत्तर प्रदेश के उभरते औद्योगिक सामर्थ्य का वैश्विक मंच पर प्रदर्शन भी था। उन्होंने जिस आत्मविश्वास के साथ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और ब्रह्मोस मिसाइल का जिक्र किया, उसने इस चर्चा को स्थानीय सीमाओं से निकालकर अंतरराष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बना दिया। ब्रांड यूपी की दबंग दस्तक आज के बदलते भू-राजनीतिक माहौल में रक्षा क्षेत्र केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह किसी भी राष्ट्र की तकनीकी क्षमता, आर्थिक ताकत और रणनीतिक प्रभाव का भी सूचक बन चुका है। ऐसे समय में, जब सिंगापुर में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ब्रह्मोस जैसी मिसाइल अब लखनऊ में बन रही है, तो यह केवल एक वक्तव्य नहीं था, बल्कि ‘ब्रांड यूपी’ की दबंग दस्तक की स्प्ष्ट उद्घोषणा थी। ब्रह्मोस इसलिए है 'ब्रह्मास्त्र' ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को यूं ही ‘भारत का देसी ब्रह्मास्त्र’ नहीं कहा जाता। लगभग 3 मैक की रफ्तार से उड़ने वाली यह मिसाइल करीब 800 किलोमीटर की दूरी तक सटीक वार करने में सक्षम है। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी अचूक निशाना, हवा में मार्ग बदलने की क्षमता और दुश्मन के रडार को चकमा देने की तकनीक है। यही वजह है कि इसे दुनिया की सबसे खतरनाक और प्रभावी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिना जाता है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संदर्भ में इसका जिक्र इस बात को रेखांकित करता है कि भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का आयातक देश नहीं रहा, बल्कि वह उन्नत हथियार प्रणालियों का निर्माता और निर्यातक बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। योगी आदित्यनाथ के बयान में जब यह कहा गया कि इस मिसाइल ने पाकिस्तान में आतंकियों और एयरबेस को नेस्तनाबूद कर दिया, तो यह संदेश भी स्पष्ट था कि भारत की सैन्य क्षमता अब निर्णायक और सटीक कार्रवाई करने में सक्षम है।  ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जिक्र के मायने  इस पूरी चर्चा का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू उत्तर प्रदेश का डिफेंस कॉरिडोर है। योगी आदित्यनाथ ने सिंगापुर में जिस तरह से यूपी के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर को प्रमोट किया, वह राज्य को रक्षा उत्पादन के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा है। छह नोड्स में विकसित हो रहा यह कॉरिडोर लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, चित्रकूट और अलीगढ़ जैसे शहरों को रक्षा उत्पादन के नक्शे पर ला रहा है। लखनऊ में ब्रह्मोस का निर्माण केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि यह उस बदलाव का प्रतीक है जिसमें उत्तर प्रदेश ‘बीमारू राज्य’ की छवि से निकलकर ‘डिफेंस इंडस्ट्रियल हब’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इससे न केवल निवेश आकर्षित होगा, बल्कि उच्च कौशल वाले रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।सिंगापुर में इस मुद्दे को उठाने के पीछे एक स्पष्ट रणनीति दिखाई देती है।  सिंगापुर में ब्रह्मोस और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की चर्चा के जरिए योगी आदित्यनाथ ने जहां भारत की सैन्य ताकत को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का प्रयास किया, वहीं एमओयू के माध्यम से उन्होंने यह भी दिखाया कि उत्तर प्रदेश निवेश, विकास और रोजगार के नए युग में प्रवेश कर चुका है। यह ‘दबंग दस्तक’ केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि समग्र विकास की कहानी कहती है- जिसके मूल में ब्रह्मोस की रफ्तार के साथ-साथ तीव्र गति से हो रहा विकास भी समाहित है। सिंगापुर में इन्वेस्ट यूपी मेगा रोड शो इवेंट में माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का संबोधन मुझे प्रसन्नता है कि कल से अब तक हम लोगों ने यहां पर टेमासेक, GIC, USC, सेट्स, UBPN, GSS ग्रीन्स, शेपकोर, ब्लैकस्टोन इत्यादि संस्थाओं के चेयरमैन एंड CEOs के साथ हमारी बड़ी सार्थक चर्चा हुई है और अन्य बिजनेस लीडर के साथ भी अलग-अलग चरणों में हमारी यहां पर बातचीत हुई।  यह कल से लेकर के अब तक के इस बिजी शेड्यूल के बीच यह हमारे कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है जब पूरे सिंगापुर के आप सभी इंडस्ट्री लीडर्स के साथ में मुझे और मेरी टीम को संवाद करने का एक अवसर प्राप्त हो रहा है : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

पाकिस्तान के खिलाफ सुपर-8 में धमाल मचाने वाले हैरी ब्रूक ने तोड़े कई रिकॉर्ड, T20 वर्ल्ड कप में पहली बार बना ये कीर्तिमान

 पल्लेकेले क्या खूब खेले अंग्रेज कप्तान हैरी ब्रूक!!! एक समय टॉम बेंटन के आउट होने पर इंग्लैंड का स्कोर 58/4 था, फ‍िर सैम करन के आउट होने के बाद स्कोर 103/5 हो गया. लेकिन ब्रूक ने इस मुकाबले में प‍िच पर ऐसा बल्ला गाढ़ा, वो टीम को जीत द‍िलवाने से पहले कुछ देर पहले आउट हुए, लेकिन तब तक इंग्लैंड की जीत मुकर्रर हो चुकी थी.  इस जीत के साथ इंग्लैंड की टीम ने इस टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में सबसे पहले अपनी बर्थ स‍िक्योर कर ली. वहीं हैरी ब्रूक ने भी कई रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए. वहीं एक कीर्तिमान तो ऐसा बना, जो किसी टी20 वर्ल्ड कप में पहली बार बना… ये था किसी कप्तान द्वारा शतक बनाने का. यह 2007 से शुरू हुए टी20 वर्ल्ड कप में कोई भी नहीं कर पाया था, लेकिन ब्रूक ने इसे मंगलवार (24 फरवरी) को कर द‍िखाया.   T20  में किसी कप्तान का सबसे अध‍िकतम स्कोर 100 – हैरी ब्रूक बनाम पाकिस्तान, पल्लेकेले, 2026* 98 – क्रिस गेल बनाम भारत , ब्रिजटाउन, 2010 94* – लोर्कन टकर बनाम ओमान, कोलंबो SSC, 2026 92 – रोहित शर्मा बनाम ऑस्ट्रेल‍िया , ब्रिजटाउन, 2024 T20Is में हैरी ब्रूक का बल्ला पाकिस्तान के ख‍िलाफ खूब चलता है, एक बानगी नीचे आंकड़ों में देख लीज‍िए इनिंग्स: 10, रन: 376, एवरेज: 62.66, SR: 159.32, 100s/50s: 1/1 इस र‍िकॉर्ड के अलावा भी इंग्लैंड की ओर से हैरी ब्रूक ने कुछ ऐसे र‍िकॉर्ड बनाए, जो गजब के रहे, आइए उन पर भी नजर डाल लेते हैं.  T20 वर्ल्ड कप में रनचेज में सेंचुरी 116* – एलेक्स हेल्स vs श्रीलंका, 2014 100* – क्रिस गेल vs इंग्लैंड, 2016 100* – पथुम न‍िसंका बनाम ऑस्ट्रेल‍िया, 2026 100 – हैरी ब्रूक बनाम पाकिस्तान , 2026* T20 वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के लिए सबसे अध‍िकतम इंडिविजुअल स्कोर 116* – एलेक्स हेल्स बनाम श्रीलंका , चटगांव, 2014 101* – जोस बटलर बनाम श्रीलंका, शारजाह, 2021 100 – हैरी ब्रूक बनाम पाकिस्तान, पल्लेकेले, 2026* 99* – ल्यूक राइट बनाम अफगान‍िस्तान, कोलंबो RPS, 2012 इंग्लैंड के लिए तीनों फ़ॉर्मेट में शतक: जोस बटलर, डेविड मलान और अब हैरी ब्रूक इस ल‍िस्ट में आ गए है. वहीं इंग्लैंड ने T20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के ख‍िलाफ अपने सभी चार मैच जीते हैं और T20Is में अपने पिछले छह हेड-टू-हेड भी जीते हैं.  T20 वर्ल्ड कप में लगातार सबसे ज्यादा सेमीफाइनल में पहुंचे वाली टीम  5 – इंग्लैंड (2016-26)* 4 – पाकिस्तान (2007-12) 4 – श्रीलंका (2009-14) इस वर्ल्ड कप में स्पिन के खिलाफ इंग्लैंड के बल्लेबाज  इनिंग्स: 6, रन: 590, बॉल्स: 420,  एवरेज: 23.6, SR: 140.5 डॉट%: 28.4 डिसमिसल्स: 25 — किसी भी टीम द्वारा सबसे ज्यादा, यानी साफ है कि  इंग्लैंड की टीम स्प‍िन के ख‍िलाफ कमजोर है.  पाकिस्तान vs इंग्लैंड सुपर8 टी20 वर्ल्ड कप मैच में क्या हुआ? इस मुकाबले में इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक ने शानदार शतक लगाकर अकेले दम पर इंग्लैंड को सुपर 8 मैच में पाकिस्तान के खिलाफ दो विकेट से जीत दिलाई, जिससे इंग्लैंड T20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की करने वाली पहली टीम बन गई.  ब्रूक ने 51 गेंदों में 10 चौकों और चार छक्कों की मदद से 100 रन बनाए. उनकी इस पारी की बदौलत इंग्लैंड ने पाकिस्तान के नौ विकेट पर 164 रन के टारगेट को पांच गेंद बाकी रहते हासिल कर लिया और सुपर 8 स्टेज में अपनी लगातार दूसरी जीत दर्ज की. विल जैक्स (28) ने  भी ब्रूक का बहुत अच्छा साथ दिया. पाकिस्तान के लिए शाहीन शाह अफरीदी (4/30) और उस्मान तारिक (2/31) ने विकेट लिए. इससे पहले पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए साहिबजादा फरहान के 45 गेंदों में 63, बाबर आजम और फखर ज़मां 25-25 रन बनाकर बनाए. इंग्लैंड के लिए लियाम डॉसन (3/24), जेमी ओर्वटन (2/26) और जोफ्रा आर्चर (2/32) सबसे सफल गेंदबाज रहे.   

सीएम योगी ने सिंगापुर के शीर्ष नेताओं से मुलाकात, एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लिए निवेश का किया आह्वान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सिंगापुर यात्रा का दूसरा दिन सिंगापुर के उप-प्रधानमंत्री व गृह मंत्री से मिले सीएम योगी एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य के लिए निवेश का दिया आमंत्रण सिंगापुर/लखनऊ अपने आधिकारिक दौरे के दूसरे दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को सिंगापुर के उप-प्रधानमंत्री एवं व्यापार और उद्योग मंत्री गान किम योंग तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के समन्वय मंत्री और गृह मंत्री के. शनमुगम से मुलाकात की। उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी में हुई इन चर्चाओं का केंद्र उत्तर प्रदेश में शहरी नियोजन, आंतरिक सुरक्षा ढांचे और डिजिटल गवर्नेंस में सिंगापुर की विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रहा। औद्योगिक निवेश पर हुई चर्चा गान किम योंग के साथ बातचीत में मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश के 'प्रो-बिजनेस' वातावरण पर जोर दिया। उन्होंने राज्य के विशाल लैंड बैंक और शीघ्र ही नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर से मिलने वाली कनेक्टिविटी को रेखांकित किया। बैठक में दिल्ली एनसीआर में सिंगापुर की कंपनियों द्वारा औद्योगिक टाउनशिप स्थापित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई, जिसमें सेमीकंडक्टर निर्माण और ग्रीन हाइड्रोजन मॉड्यूल पर विशेष फोकस रहा। सुरक्षा एवं प्रबंधन पर जोर के. शनमुगम के साथ संवाद में मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश में बेहतर होती कानून-व्यवस्था के आधुनिकीकरण पर चर्चा की, जिसमें सिंगापुर के तकनीक-एकीकृत पुलिसिंग मॉडल और आपदा प्रबंधन प्रोटोकॉल पर विशेष ध्यान दिया गया। इन बैठकों के दौरान उपस्थित सिंगापुर के कारोबारी समुदाय को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने स्वतंत्र वित्तीय कोषों और निजी निवेशकों को राज्य के लॉजिस्टिक्स और डेटा सेंटर क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि नियामक प्रक्रियाओं के सरलीकरण और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस प्रणाली से उत्तर प्रदेश में बड़े प्रोजेक्ट्स के पूरे होने की समय-सीमा में उल्लेखनीय कमी आई है।

सीएम योगी के नेतृत्व में सिंगापुर में मिली बड़ी सफलता, सिंगापुर कोऑपरेशन एंटरप्राइज (एससीई) के साथ हुआ करार

सिंगापुर के साथ यूपी की बड़ी रणनीतिक साझेदारी, इन्वेस्ट यूपी व एससीई के बीच एमओयू सीएम योगी के नेतृत्व में सिंगापुर में मिली बड़ी सफलता, सिंगापुर कोऑपरेशन एंटरप्राइज (एससीई) के साथ हुआ करार संस्थागत क्षमता, नीतिगत ढांचे और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर साथ मिलकर करेंगे काम सिंगापुर/लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सिंगापुर दौरे के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की निवेश प्रोत्साहन एजेंसी इन्वेस्ट यूपी और सिंगापुर सरकार के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था सिंगापुर कोऑपरेशन एंटरप्राइज (एससीई) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता उत्तर प्रदेश में संस्थागत क्षमता व नीतिगत ढांचे को सुदृढ़ बनाने और इकोसिस्टम के विकास के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी स्थापित करने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है। सतत विकास और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा पर फोकस एमओयू के तहत दोनों पक्ष विषयगत ज्ञान के आदान-प्रदान, तकनीकी सहयोग और परामर्श सेवाओं के माध्यम से उत्तर प्रदेश में सतत आर्थिक विकास, औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और आधुनिक अवसंरचना के विकास को गति देने के लिए मिलकर कार्य करेंगे। इन क्षेत्रों में होगा सहयोग समझौते के अनुसार, दोनों पक्ष न सिर्फ स्टडी विजिट्स व लीडरशिप डेलिगेशन का आयोजन करेंगे, बल्कि ट्रेनिंग व कैपेसिटी बिल्डिंग कार्यक्रमों का खाका तैयार कर उसे लागू भी कराएंगे। इससे लोगों की कार्यक्षमता व कौशल, दोनों को बेहतर किया जा सकेगा। इसके अलावा सलाह व मार्गदर्शन उपलब्ध कराना, साथ मिलकर तकनीकी सहयोग की परियोजनाएं तैयार करना और उन्हें लागू करना, सरकारी व निजी क्षेत्र से जुड़े संबंधित लोगों व संस्थाओं का सहयोग हासिल करना भी एमओयू के प्रावधानों में शामिल है। आवश्यकता पड़ने पर विशिष्ट परियोजनाओं के लिए अलग से लिखित समझौते किए जाएंगे, जिनमें कार्यक्षेत्र, समयसीमा और वित्तीय प्रावधान स्पष्ट किए जाएंगे। दो माह के भीतर विस्तृत परियोजना समझौतों पर बातचीत शुरू की जाएगी और छह माह के भीतर उन्हें अंतिम रूप देने का प्रयास किया जाएगा।  वैश्विक अनुभव का मिलेगा लाभ इस साझेदारी से उत्तर प्रदेश को सिंगापुर के प्रशासनिक अनुभव, शहरी नियोजन, औद्योगिक क्लस्टर विकास, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में अनुभव का लाभ मिलेगा। इस समझौते को उत्तर प्रदेश की वैश्विक सहभागिता और लॉन्ग टर्म विजन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

सीएम योगी के सिंगापुर दौरे के दूसरे दिन भी सफलताओं का सिलसिला जारी

सीएम के सिंगापुर दौरे का दूसरा दिन  जेवर एयरपोर्ट पर दो प्रोजेक्ट्स में 4458 करोड़ रुपये निवेश करेगी एआई सैट्स सीएम योगी के सिंगापुर दौरे के दूसरे दिन भी सफलताओं का सिलसिला जारी एविएशन सर्विस सेक्टर की दिग्गज कंपनी एआई सैट्स ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ एमओयू पर किए हस्ताक्षर जेवर एयरपोर्ट पर आधुनिक कार्गो कैंपस बनेगा और एयर कैटरिंग किचेन की स्थापना होगी, जिससे नॉर्थ इंडिया के सभी एयरपोर्ट्स पर की जाएगी फूड सप्लाई सिंगापुर/लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सिंगापुर दौरे के दूसरे दिन उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश का एक और तोहफा मिला है। सीएम योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने एविएशन सर्विस सेक्टर की अग्रणी कंपनी एआई सैट्स (AISATS) के साथ एक महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत कंपनी गौतमबुद्ध नगर स्थित जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर दो प्रमुख परियोजनाएं स्थापित करेगी। एक अत्याधुनिक कार्गो कैंपस और दूसरा विश्वस्तरीय एयर कैटरिंग किचेन। इन दोनों प्रोजेक्ट्स पर एआई सैट्स 4458 करोड़ रुपये निवेश करेगी।  जेवर एयरपोर्ट बनेगा नॉर्थ इंडिया का कार्गो हब एमओयू के अनुसार, एआई सैट्स जेवर एयरपोर्ट परिसर में एक अत्याधुनिक कार्गो कैंपस का निर्माण करेगी। यह कार्गो कैंपस न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे उत्तर भारत के लिए एयर फ्रेट और लॉजिस्टिक्स का प्रमुख केंद्र बनेगा। इस परियोजना से निर्यात-आयात गतिविधियों को गति मिलेगी, विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, कृषि उत्पाद जैसे क्षेत्रों को बड़ा लाभ होगा। जेवर एयरपोर्ट को मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी के साथ विकसित किया जा रहा है, जिससे यह कार्गो कैंपस अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक रणनीतिक हब के रूप में उभरेगा। स्थापित की जाएगी अत्याधुनिक एयर कैटरिंग किचेन एमओयू के दूसरे प्रमुख निवेश के तहत नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ही एक अत्याधुनिक विश्वस्तरीय एयर कैटरिंग किचेन की स्थापना की जाएगी। यह किचेन नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से संचालित होने वाली उड़ानों के लिए उच्च गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध कराएगा। विशेष बात यह है कि यहां तैयार किया गया भोजन केवल जेवर एयरपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसकी सप्लाई पूरे उत्तर भारत के विभिन्न एयरपोर्ट्स पर भी की जाएगी। इससे क्षेत्र में फूड प्रोसेसिंग और सप्लाई चेन नेटवर्क को मजबूती मिलेगी तथा हजारों प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। सिंगापुर दौरे का रणनीतिक महत्व मुख्यमंत्री के सिंगापुर दौरे का उद्देश्य वैश्विक निवेशकों को उत्तर प्रदेश की संभावनाओं से जोड़ना है। दूसरे दिन हुए इस एमओयू को राज्य के एविएशन, लॉजिस्टिक्स और सर्विस सेक्टर के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। जेवर एयरपोर्ट के चालू होने के साथ ही यह कार्गो कैंपस और एयर कैटरिंग सुविधा उत्तर भारत के आर्थिक परिदृश्य को नई दिशा देंगे और प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर और मजबूत स्थिति में स्थापित करेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- म.प्र. को मिल रही है नई रेल सुविधाओं की निरंतर सौगात

म.प्र. को नई रेल और रेल सुविधाओं की मिल रही है निरंतर सौगात : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नई ट्रेन भोपाल-धनबाद-चौपन एक्सप्रेस को दिखाई हरी झंडी फ्रेट कॉरिडोर में मध्यप्रदेश के लाभ और एलाइनमेंट पर चर्चा के लिये केन्द्रीय रेल मंत्री  वैष्णव आयेंगे भोपाल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश को नई रेलों और रेल सुविधाओं की निरंतर सौगात मिल रही है। प्रदेश की राजधानी भोपाल से ऊर्जा राजधानी सिंगरौली तक सप्ताह के सातों दिन सीधी रेल की सुविधा प्रारंभ हो रही है, जो मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों के यात्रियों के लिये भी महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार की शाम भोपाल के मुख्य रेलवे स्टेशन से भोपाल-धनबाद-चौपन एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना कर रहे थे। यह ट्रेन सप्ताह में 3 दिन सीधी-सिंगरौली तक, 3 दिन धनबाद तक और एक दिन चौपन तक जायेगी। इस ट्रेन का रूट बीना-सागर-मुड़वारा होकर रहेगा। प्रदेश में निरंतर बढ़ रही रेल सुविधाएं, नई रेल भविष्य के विकास का नया रास्ता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज ही प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय कैबिनेट जबलपुर-गोंदिया रेल लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दी गई है। इसके पहले मध्यप्रदेश को इंदौर-मनमाड रेल लाइन सहित सिंहस्थ के दृष्टिगत अनेक सौगातें मिली हैं। वंदे भारत और मेट्रो ट्रेन की स्पीड भी बढ़ रही है। मध्यप्रदेश में विदेशों की तरह आधुनिक रेल सुविधाएं विकसित हो रही हैं। रेल बजट में भी 24 गुना अधिक बजट मिला है। छह अमृत भारत स्टेशन कटनी साउथ, नर्मदापुरम ओरछा, सिवनी शाजापुर और धाम के पुनर्विकास का कार्य हो रहा है। प्रदेश के 80 स्टेशनों का कायाकल्प हो रहा है। करीब पौने तीन हजार करोड़ रूपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं का लाभ यात्रियों को दिया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव ने आज के दिन को भी यादगार बना दिया है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश के पिछड़े माने गये सीधी-सिंगरौली क्षेत्र को भोपाल से प्रतिदिन की रेल कनेक्टिविटी का लाभ मिल रहा है। यह ट्रेन सातों दिन चलेगी, भले गंतव्य 3 हों। यह युक्ति और बुद्धि का खेल ही नहीं बल्कि भविष्य के विकास का नया रास्ता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नई ट्रेन से राज्यों के पर्यटन विकास में सहयोग मिलेगा। मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड के बीच सीधा संपर्क स्थापित होगा। धनबाद तक जाने वाली त्रि-साप्ताहिक ट्रेन 30 स्टेशनों को और चौपन तक जाने वाली साप्ताहिक ट्रेन 15 प्रमुख स्टेशनों को जोड़ेगी। व्यापार, खनन और उद्योग क्षेत्र को नई गति मिलेगी। रेल लाइन का दोहरीकरण विकास में होगा सहायक, महाकौशल क्षेत्र का महत्व बढ़ेगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यदि जबलपुर से गोंदिया रेल लाइन के दोहरीकरण के व्यापक फायदों की चर्चा करें तो पर्यटन, धार्मिक गतिविधियों और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दृष्टि से प्रभाव दिखाई देंगे। वन क्षेत्र जहां कभी नक्सलवाद का ग्रहण लगा था, वहां सुगम यातायात सुविधा से विकास को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक समय नक्सलवादियों ने निर्वाचित जनप्रतिनिधि की सरेआम हत्या कर लोकतंत्र को लजाया था। अनेक वर्ष ऐसी घटनाओं पर सभी मौन रहते थे। प्रधानमंत्री  मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री  अमित शाह की दृढ़ इच्छा शक्ति से दरिंदगों से निपटने का कार्य किया गया है। मध्यप्रदेश में केन्द्रीय सरकार द्वारा निर्धारित डेड लाइन के पहले नक्सली समाप्त किये गये। महाकौशल क्षेत्र का महत्व दिनोंदिन बढ़ता जायेगा। बहुप्रतिक्षित थी भोपाल से सीधी-सिंगरौली के लिये सीधी रेल सुविधा : केन्द्रीय रेल मंत्री  वैष्णव केन्द्रीय रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव ने कहा कि स्वतंत्रता के पश्चात से भोपाल से सीधी-सिंगरौली क्षेत्र तक रेल सुविधा की मांग चल रही थी। मध्यप्रदेश में रेल सुविधाओं का विस्तार जारी रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश में रेल सुविधाएं बढ़ाने के लिये निरंतर ध्यान आकर्षित करते हैं। आने वाले समय में मध्यप्रदेश की तीव्र औद्योगिक विकास में नई रेल सुविधाएं उपयोगी सिद्ध होंगी, जहां 18 हजार करोड़ रूपये से अधिक लागत की इंदौर-मनमाड रेल लाइन अर्थव्यवस्था बदलेगी, वहीं 5200 करोड़ लागत से जबलपुर-गोदिंया रेल लाइन का दोहरीकरण कान्हा राष्ट्रीय उद्यान, धुआंधार जल प्रपात और अन्य स्थानों के पर्यटन महत्व में वृद्धि करेगा। नागरिकों को समृद्धि का भरपूर लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री  मोदी के विजन से फ्रेट कॉरिडोर का क्रियान्वयन  वैष्णव ने कहा कि दानकुनी-सूरत डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर 2 हजार किलोमीटर से अधिक लंबाई का रेल प्रोजेक्ट है जो पश्चिम बंगाल से गुजरात को जोड़ेगा। इस वर्ष के बजट के बाद इस पर तेजी से कार्य प्रारंभ हो गया है। देश का पश्चिम क्षेत्र भी मध्यप्रदेश से बेहतर कनेक्ट होगा, यह प्रधानमंत्री जी का विजन है। हजीरा सहित अन्य पोर्ट विकसित होंगे। नये पोर्ट भी बनेंगे। औद्योगिक प्रगति की दृष्टि से मध्यप्रदेश के उद्योगों को अधिक से अधिक लाभ मिलेगा। मध्यप्रदेश इस प्रोजेक्ट से लाभांवित होगा। आयात-निर्यात भी आसान होगा।  वैष्णव ने कहा कि मालगाड़ियों की गति बढ़ाने, मौजूदा लाइनों से भीड़ कम करने और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी लाने के उद्देश्य से क्रियान्वित किये जाने वाले इस प्रोजेक्ट के एलाइनमेंट पर वे मुख्यमंत्री डॉ. यादव से विस्तृत चर्चा के लिये मध्यप्रदेश आयेंगे। रेल मंत्री ने मध्यप्रदेश के लिये उपयोगी करीब 48 हजार करोड़ लागत की रेल परियोजनाओं की जानकारी भी दी। कार्यक्रम को भोपाल के सांसद  आलोक शर्मा ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा, उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल, पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्य मंत्री मती कृष्णा गौर, पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री मती राधा सिंह, सांसद सीधी  राजेश मिश्रा, विधायक  कुंवर सिंह टेकाम,  शरद कोल,  विश्वमित्र पाठक, भोपाल के अनेक जनप्रतिनिधि और नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। प्रारंभ में भोपाल रेल मंडल, पश्चिम मध्य रेलवे के मंडल प्रबंधक  पंकज त्यागी ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव और सभी अतिथियों का स्वागत किया।  

भारत ने दिखाई मजबूती, रूस के साथ खड़े होकर दुश्मनों को किया पीछे

नई दिल्ली रूस-यूक्रेन के बीच जब युद्ध शुरू हुआ था, तो पश्चिमी देशों ने कसम खा ली थी कि वे रूस को दुनिया में बिल्कुल अकेला कर देंगे. उस पर पाबंदियों की ऐसी झड़ी लगाई गई कि लगा रूस की अर्थव्यवस्था ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगी. लेकिन आज तस्वीर बिल्कुल उलट चुकी है. रूस को अलग-थलग करने चले देश आज खुद बंटे हुए नजर आ रहे हैं और रूस की तो मानो चांदी हो गई है. इस पूरी कहानी में गेमचेंजर बना है भारत. भारत ने जिस तरह पश्चिमी देशों के भारी दबाव के बावजूद रूस से सस्ता तेल खरीदना जारी रखा, उसने दुनिया के कई अन्य देशों को भी हिम्मत दी है. अब भारत की तरह ही कई और देश रूस के साथ डटकर खड़े हो गए हैं. स्थिति यह आ गई है कि जो देश कल तक रूस के पक्के दुश्मन बने हुए थे और हर दिन नई पाबंदियां लगाने की वकालत करते थे, वे भी अब पीछे हटते दिख रहे हैं. भारत का दांव- हम वहीं से खरीदेंगे, जहां फायदा होगा रूस-यूक्रेन युद्ध के शुरुआत से ही अमेरिका और यूरोपीय देशों ने भारत पर भारी दबाव बनाया था कि वह रूस से तेल न खरीदे. उनका तर्क था कि रूस से तेल खरीदकर भारत एक तरह से इस युद्ध को फंड कर रहा है. लेकिन भारत ने अपनी विदेश नीति को बिल्कुल साफ रखा. भारत सरकार का सीधा सा स्टैंड था, हमारे लिए हमारे देश की 140 करोड़ की आबादी सबसे पहले है. अगर हमें कहीं से सस्ता तेल मिलेगा, जिससे हमारे देश में पेट्रोल-डीजल के दाम काबू में रहें और महंगाई न बढ़े, तो हम वहीं से तेल खरीदेंगे. आज भी यही खबर आ रही कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद नहीं कर रहा है. भारत के इस नेशन फर्स्ट वाले रवैये ने दुनिया को एक बड़ा संदेश दिया. दुनिया को समझ आ गया कि एनर्जी स‍िक्‍योर‍िटी किसी भी देश का पहला अधिकार है और इसके लिए किसी महाशक्ति के आगे झुकने की जरूरत नहीं है. भारत का यही स्टैंड अब दुनिया के कई देशों के लिए रोल मॉडल बन गया है. अब हंगरी बोला- दबाव के आगे नहीं झुकेंगे भारत ने जो रास्ता दिखाया, अब यूरोपीय देश हंगरी भी उसी पर पूरी ताकत से चल पड़ा है. हंगरी ने यूरोपीय यूनियन की आंखों में आंखें डालकर साफ कह दिया है कि वह रूस से तेल खरीदने के मामले में किसी के दबाव में नहीं आएगा. हंगरी के विदेश मंत्री पीटर सिज्जार्टो ने दो टूक कहा, हम मौजूदा विकल्पों से ज्यादा महंगे और कम भरोसेमंद ऊर्जा स्रोत खरीदने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हैं. उनका सीधा सा मतलब था कि जब रूस हमें सस्ता और भरोसेमंद तेल और गैस दे रहा है, तो हम सिर्फ यूरोप की राजनीति के चक्कर में कहीं और से महंगा तेल क्यों खरीदें? सिज्जार्टो ने इसे देश का अध‍िकार बताया. यानी यह हंगरी का अपना फैसला है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतें कैसे पूरी करे, इसमें कोई दूसरा देश दखल नहीं दे सकता. हंगरी के इस रुख ने यूरोप के उन देशों की नींद उड़ा दी है जो रूस की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ना चाहते थे. हंगरी यह बात अच्छे से जानता है कि अगर उसने रूस से तेल और गैस लेना बंद कर दिया, तो उसके देश में हाहाकार मच जाएगा, महंगाई आसमान छूने लगेगी और इंडस्ट्रीज बंद होने की कगार पर आ जाएंगी. इसलिए उसने कूटनीति से ज्यादा अपने देश की अर्थव्यवस्था को चुना है. यूरोपीय यूनियन में फूट: पाबंदियों पर नहीं बन पा रही बात एक समय था जब यूरोपीय यूनियन रूस के खिलाफ पाबंदियों का नया पैकेज लाने के लिए बस एक इशारे का इंतजार करता था. लेकिन अब हालात बदल गए हैं. खुद यूरोपीय यूनियन ने मान लिया है कि फिलहाल रूस पर नई पाबंदियां लगाने के मामले में कोई फैसला नहीं हो पाएगा. ईयू की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने सोमवार को ब्रसेल्स में अपनी बेबसी जाहिर की. उन्होंने कहा, यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में रूस के खिलाफ प्रस्तावित नए पाबंदियों के पैकेज पर सहमति नहीं बन पाएगी. इसका सबसे बड़ा कारण हंगरी का लगातार विरोध है. नियम के मुताबिक, यूरोपीय यूनियन में कोई भी बड़ा फैसला तभी लागू होता है जब सभी सदस्य देश उस पर सहमत हों. हंगरी ने वीटो पावर का इस्तेमाल करके ईयू के मंसूबों पर पानी फेर दिया है. जर्मनी की छटपटाहट: ‘हंगरी को मनाएंगे’ हंगरी के इस कड़े रुख से जर्मनी जैसे बड़े यूरोपीय देश काफी नाराज और परेशान हैं. जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने अपनी भड़ास निकालते हुए कहा कि वे हंगरी से अपनी जिद छोड़ने की अपील करेंगे. वाडेफुल ने कहा, मुझे नहीं लगता कि हंगरी के लिए अपनी आजादी और यूरोपीय संप्रभुता के संघर्ष को धोखा देना सही है. हम एक बार फिर से बुडापेस्ट और ब्रसेल्स में हंगरी के सामने अपनी दलीलें रखेंगे और उनसे अपने रुख पर पुनर्विचार करने को कहेंगे. लेकिन कूटनीति के जानकार मानते हैं कि जर्मनी की यह अपील शायद ही कोई असर दिखाए. यूरोप के कई देश अब अंदर ही अंदर यह समझ चुके हैं कि बिना रूसी ऊर्जा के उनका गुजारा मुश्किल है. ऊपर से वे आदर्शवाद की बातें करते हैं, लेकिन अंदर से उनकी अर्थव्यवस्थाएं भी सस्ते ईंधन के लिए तरस रही हैं. ट्रंप फैक्टर ने यूरोप को भारत के करीब ला दिया इस पूरी कहानी में एक और बहुत बड़ा और दिलचस्प एंगल है, और वो है अमेरिका का ट्रंप फैक्टर. डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां हमेशा से अमेरिका फर्स्ट की रही हैं. उनका अंदाज मनमानी भरा रहा है. वे कब किस देश से कैसा व्यवहार करेंगे, यह कोई नहीं जानता. ट्रंप कई बार यूरोपीय देशों को धमका चुके हैं कि वे अपनी सुरक्षा का खर्च खुद उठाएं, अमेरिका हमेशा उनका बिल नहीं भरेगा. ट्रंप की इसी मनमानी और अनिश्चितता ने यूरोपीय देशों को डरा दिया है. यूरोप को अब लगने लगा है कि अमेरिका के भरोसे बैठकर रूस से पूरी तरह दुश्मनी मोल लेना अक्लमंदी नहीं है. अगर कल को अमेरिका ने हाथ खींच लिया, तो यूरोप बीच मझधार में फंस जाएगा. यही वजह है कि अब … Read more