samacharsecretary.com

रवि योग का संयोग: 27 फरवरी को आमलकी एकादशी का विशेष पर्व

27 फरवरी को फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इसे आमलकी यानी आंवला एकादशी कहते हैं। फाल्गुन महीने में आने के कारण ये हिंदी कैलेंडर की आखिरी एकादशी होती है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा के साथ ही आंवले का दान करने का भी विधान है। जिससे कई यज्ञों का फल मिलता है। श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन अजमेर की निदेशिका ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि इस साल फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का प्रारंभ 27 फरवरी 2026 को तड़के 12:33 से होगा। तिथि का समापन 27 फरवरी 2026 की रात 10:32 पर होगा। इसलिए आमलकी एकादशी 27 फरवरी को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु के साथ आंवले के पेड़ को भी खासतौर पूजा जाएगा। तभी ये एकादशी व्रत पूरा माना जाता है, क्योंकि आंवले के पेड़ को हिंदू धर्म में बेहद पवित्र और पूजनीय माना जाता है। इस दिन आंवला खाने से बीमारियां खत्म होती हैं। एकादशी पर किए गए व्रत-उपवास और पूजन से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और सफलता मिलती है। ये व्रत भगवान विष्णु के लिए किया जाता है। आमलकी एकादशी पर विष्णु जी के साथ आंवले की और माता अन्नपूर्णा की पूजा करने की परंपरा है। आमलकी एकादशी की शाम तुलसी के पास दीपक अनिवार्य रूप से जलाना चाहिए। भगवान विष्णु की पूजा के साथ ही विष्णु जी के मंत्र ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करते रहें। श्रीकृष्ण का अभिषेक करें और कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें। श्रीकृष्ण के साथ गौ माता की भी पूजा जरूर करें। किसी गौशाला में गायों की देखभाल के लिए दान-पुण्य करें। किसी मंदिर में पूजन सामग्री का सामान जैसे कुमकुम, चंदन, मिठाई, तेल-घी, हार-फूल, भगवान के वस्त्र आदि का दान करें। आमलकी एकादशी पर खाने में आंवले का सेवन जरूर करें। आंवले का रस भी पी सकते हैं। आंवले का दान भी करें। माता अन्नपूर्णा अन्न की देवी है। इस तिथि पर देवी की पूजा करें और जरूरतमंद लोगों अन्न का दान करें। शुभ योग आमलकी एकादशी पर काफी शुभ योग बन रहे हैं। आमलकी एकादशी के दिन सर्वार्थ सिद्धि, रवि, आयुष्मान और सौभाग्य योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा के लिए शुभ समय सुबह 6:48 से 11:08 तक रहेगा। रंगभरी और आमलकी एकादशी होली से चार दिन पहले आने से इसे रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन से बनारस में बाबा विश्वनाथ को होली खेलकर इस पर्व की शुरुआत की जाती है। ब्रह्मांड पुराण के मुताबिक इस दिन आंवले के पेड़ और भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है। इस दिन शुभ ग्रह योगों के प्रभाव से व्रत और पूजा का पुण्य और बढ़ जाएगा। मिलता है यज्ञों का पुण्य पद्म और विष्णु धर्मोत्तर पुराण का कहना है कि आंवले का वृक्ष भगवान विष्णु को बहुत प्रिय होता है। इस पेड़ में भगवान विष्णु के साथ ही देवी लक्ष्मी का भी निवास होता है। इस वजह से आमलकी एकादशी के दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन आंवले के पेड़ को पूजन और आंवले का दान करने से समस्त यज्ञों और 1 हजार गायों के दान के बराबर फल मिलता है। आमलकी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को मोक्ष मिल जाता है।  तिल, गंगाजल और आंवले से नहाने की परंपरा इस एकादशी पर सूर्योदय से पहले उठकर पानी में गंगाजल की सात बूंद, एक चुटकी तिल और एक आंवला डालकर उस जल से नहाना चाहिए। इसे पवित्र या तीर्थ स्नान कहा जाता है। ऐसा करने से जाने-अनजाने में हुए हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं। इसके बाद दिनभर व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करना चाहिए। इससे एकादशी व्रत का पूरा पुण्य फल मिलता है। सूर्यास्त के बाद जलाएं दीपक विष्णु जी की पूजा में तुलसी का इस्तेमाल खासतौर पर किया जाता है। मान्यता है कि तुलसी के पत्तों के बिना विष्णु जी भोग स्वीकार नहीं करते हैं, इसलिए भोग के साथ ही तुलसी जरूर रखी जाती है। एकादशी विष्णु जी की तिथि है, लेकिन इस दिन विष्णु प्रिया तुलसी की भी विशेष पूजा करनी चाहिए। सुबह तुलसी को जल चढ़ाएं और शाम को सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास दीपक जलाएं। ध्यान रखें शाम को तुलसी को स्पर्श न करें। दीपक जलाकर दूर से ही परिक्रमा करें।  पूजा विधि सुबह उठकर भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत का संकल्प करें। संकल्प लेने के बाद स्नान से निवृत्त होकर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। दीपक जलाकर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। पूजा के बाद आंवले के पेड़ के नीचे नवरत्न युक्त कलश स्थापित करें। आंवले के वृक्ष का धूप, दीप, चंदन, रोली, फूल और अक्षत से पूजन कर किसी गरीब या ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए। अगले दिन स्नान कर स्नान कर पूजन के बाद कलश, वस्त्र और आंवला का दान करना चाहिए। इसके बाद भोजन ग्रहण कर व्रत खोलना चाहिए।

विद्युत सुरक्षा के लिए ग्रामीणजन सावधानियाँ बरतें, खतरे से बचें

विद्युत से सुरक्षा के लिये ग्रामीणजन सावधानियॉ जरूर बरतें भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने ग्रामीणजनों को आगाह किया है कि वे अपने खेत-खलिहानों में विद्युत से सुरक्षा के लिये सावधानियां जरूर बरतें। अक्सर देखा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में असावधानीवश विद्युत से कई बार अप्रिय घटनाएं घट जाती हैं। यह दुर्घटनाएं कईं बार जान-माल का नुकसान भी कर देती हैं। इनसे बचने के लिए ग्रामीणजनों से सावधानी बरतने की अपील करते हुए कंपनी ने कहा है कि कभी भी विद्युत लाइनों, उपकरणों एवं खंभों से छेड़खानी न करें क्योंकि ऐसा करना विद्युत अधिनियम 2003 के अंतर्गत दण्डनीय अपराध है।  कंपनी ने कहा किजरा भी असावधानी या छेड़खानी से बड़े-बड़े खतरे पैदा हो सकते हैं। इसलिए ऐसी लाइनें जिनमें विद्युत शक्ति प्रवाहित होती है उन्हें आँधी तूफान या अन्य किसी कारण से टूटने वाले तारों को अकस्मात छूने का प्रयास न करें। इस दौरान जरूरी होगा कि लाइन टूटने की सूचना तत्काल निकटस्थ बिजली कंपनी के अधिकारी को अथवा विद्युत कर्मचारी को दें। संभव हो तो किसी आदमी को उस जगह अन्य यात्रियों को चेतावनी देने के लिये भी बिठा दें।  किसानों को सलाह है कि वे खेतों खलिहानों में ऊॅंची-ऊँची घास की गंजी, कटी फसल की ढेरियां, झोपड़ी, मकान अथवा तंबू आदि विद्युत लाइनों के नीचे अथवा अत्यंत समीप न बनायें। साथ ही विद्युत लाइनों के नीचे से अनाज, भूसे आदि की ऊँची भरी हुई गाड़ियॉं न निकालें, इससे आग लगने एवं जान जाने का खतरा है। कंपनी ने कहा कि बहुत से स्थानों पर बच्चे पतंग अथवा लंगर का खेल खेलते तरह-तरह के धागे और डोर विद्युत लाइनों में फंसा देते हैं। ऐसा करने से उन्हें रोकें। लाइनों में फंसी पतंग निकालने के लिए बच्चों को कभी भी खंभे पर न चढ़ने दें। इससे एक ओर जहां दुर्घटना को टाला जा सकेगा वहीं दूसरी ओर आप होने वाली आर्थिक हानि से भी बच सकेंगे।  

कृषक कल्याण 2026: पीएमएफएमई योजना ने प्रेमलता को गृहिणी से सफल उद्यमी बनाया

कृषक कल्याण वर्ष-2026: पीएमएफएमई योजना से प्रेमलता गृहिणी से बनी सफल उद्यमी भोपाल  कभी घर की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली नीमच जिले के ग्राम बमोरा की श्रीमती प्रेमलता पाटीदार आज एक सफल उद्यमी के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना ने उनके सपनों को पंख देकर आत्मनिर्भरता की नई राह दिखाई है। श्रीमती प्रेमलता बताती हैं कि वे हमेशा कुछ अपना करना चाहती थीं, लेकिन संसाधनों की कमी और मार्गदर्शन के अभाव में आगे बढ़ना आसान नहीं था। इसी दौरान उन्हें उद्यानिकी विभाग के माध्यम से पीएमएफएमई योजना की जानकारी मिली। योजना के तहत उन्होंने 23.61 लाख रुपये की लागत से ‘बालाजी उद्योग’ नाम से खाद्य तेल प्रसंस्करण इकाई स्थापित की। उद्योग की स्थापना के लिए उन्होंने नीमच जिले में भारतीय स्टेट बैंक की जीरन शाखा से 20 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया। शासन की ओर से उन्हें 8.26 लाख रुपये का अनुदान भी मिला, जिससे उनका आत्मविश्वास और मजबूत हुआ। श्रीमती प्रेमलता ने ‘गोपाल कृष्ण’ नाम के ब्रांड से कोकोनट ऑयल का पंजीयन कराया और अपने उत्पाद को बाजार में उतारा। गुणवत्तापूर्ण उत्पाद और निरंतर मेहनत के बल पर उनका व्यवसाय तेजी से आगे बढ़ा। आज उनका मासिक टर्नओवर लगभग 8 से 10 लाख रुपये है और वे प्रतिमाह 2 से 3 लाख रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं। सालाना लाभ लगभग 30 लाख रुपये से अधिक पहुंच चुका है। प्रेमलता की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। उन्होंने अपने उद्योग में 7 स्थानीय लोगों को रोजगार देकर गांव में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया है। वे कहती हैं, “सरकार की योजना ने मुझे हिम्मत दी, लेकिन सफलता मेहनत और विश्वास से मिली।” नीमच जिले में पीएमएफएमई योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। जिले में अब तक 210 हितग्राहियों को योजना से लाभान्वित किया गया है, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 125 नए उद्योग स्थापित हुए हैं। इस उपलब्धि के साथ नीमच जिला प्रदेश और संभाग के अग्रणी जिलों में शामिल हो गया है। प्रेमलता पाटीदार की यह कहानी बताती है कि आत्म विश्वास के साथ सही मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग मिल जाये तो एक गृहिणी भी सफल उद्योगपति बन सकती है। यह कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि ग्रामीण आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण का सशक्त उदाहरण है।  

Royal Enfield की BS3 और BS4 बाइक्स के लिए आई E20 कंवर्जन किट, पुराने मॉडल्स को मिलेगा अपडेट

मुंबई  भारतीय मोटरसाइकिल निर्माता कंपनी Royal Enfield ने पुरानी मोटरसाइकिलों के लिए E20 रेट्रोफिट किट पेश की है, जिससे 20 प्रतिशत इथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल के साथ कम्पैटिबिलिटी की समस्याओं को ठीक किया जा सके. जानकारी के अनुसार यह किट BS3 और BS4 कार्बोरेटेड UCE मॉडल के लिए हैं, जिनमें Royal Enfield Classic 350, Bullet 350 और Thunderbird जैसे मॉडल शामिल हैं. 350cc और 500cc इंजन के लिए मिलेगी Royal Enfield की रेट्रो किट Royal Enfield ने पहले जानकारी दी थी कि साल 2020 में BS6 नॉर्म्स लागू होने के बाद से उसका पूरा पोर्टफोलियो E20-कम्प्लायंट रहा है. इसलिए, मौजूदा समय में जो कन्वर्ज़न किट बाजार में बेची जा रही है, वह BS3 और BS4 मोटरसाइकिलों के लिए है, खासकर उन 350cc UCE इंजनों के लिए जिनमें कार्बोरेटर का इस्तेमाल किया गया था. बता दें कि मौजूदा समय के फ्यूल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ने से इन मोटरसाइकिलों के रबर और कुछ मेटल पार्ट्स जल्दी घिसने की समस्या सामने आ रही है, और इसके लिए इस किट में रिप्लेसमेंट पार्ट्स शामिल हैं. इस किट में कंपनी ने एक O-रिंग, ट्यूब और सील दिए हैं, जो लंबे समय तक ज़्यादा रेसिस्टेंट होते हैं. कीमत की बात करें तो डीलरशिप से मिली जानकारी के अनुसार, BS4 मॉडल के लिए E20 कन्वर्ज़न किट को 1,700 रुपये की कीमत पर उतारा गया है. हालांकि कंपनी ने 500cc इंजन के लिए कोई खास किट पेश नहीं की है, लेकिन कंपनी ने लंबे समय में होने वाली रुकावटों से बचने के लिए कुछ फ्यूल सिस्टम पार्ट्स को अपग्रेड करने की सलाह दी है. ध्यान देने वाली बात यह है कि यह किट ऑथराइज़्ड Royal Enfield सर्विस सेंटर पर उपलब्ध कराई गई है, हालांकि उपलब्धता को लेकर अभी कोई जानकारी नहीं मिली है. अगर किसी ग्राहकों को अपनी BS3 और BS4 Royal Enfield बाइक्स में इस किट को लगवाना है, तो वह अपने नजदीकी Royal Enfield सर्विस सेंटर से संपर्क सकते हैं.

उज्जैन सिंहस्थ 2028 की चुनौतियों से निपटने के लिए पुलिस का नया ‘ब्रह्मास्त्र’, 4S मॉडल से होगी मदद

उज्जैन   सिंहस्थ 2028 को लेकर पुलिस की तैयारियां अभी से तेज हो गई हैं. उज्जैन के एक निजी होटल में डीजीपी कैलाश मकवाना की अध्यक्षता में मध्य प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों विशेष बैठक आयोजित हुई. इसमें 4S मॉडल के साथ रणनीति तैयार की गई. पुलिस का फोकस रोजाना लाखों तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और सुगम यातायात पर है. शिप्रा के घाटों तक आसान होगी पहुंच उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया "एक रिपोर्ट सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए तैयार की जा रही है. जल्द ही पीटीएस और उज्जैन पुलिस फोर्स की ट्रेनिंग शुरू होगी. हम AI का उपयोग, गूगल ट्रैफिक मैनेजमेंट, ड्रोन, फेस रिकॉग्निशन, पार्किंग L1, L2, L3 स्तर की स्मार्ट पार्किंग सभी मूल विषयों पर लगातार चर्चा और नवाचार कर रहे हैं." इसके अलाावा "शिप्रा के घाटों तक श्रद्धलुओ का आसानी से आवागमन के लिए रणनीति बनाई जा रही है. उज्जैन के आसपास के जिलों से समन्वय बनाकर सड़क मार्ग, पार्किंग व अन्य पर विषयों पर चर्चा की जाएगी. श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देने के लिए लगातार काम कर रहे हैं." क्या है 4s मॉडल, कैसे काम करता है एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया "अनुभव, संवेदनशीलता, समन्वय और भविष्य की रणनीति तैयार करना 4s मॉडल है, जिसमे sharing of experience, sensitization with the development, synergy in the team, strategy for the future है. सिंहस्थ के दौरान चुनौतियां, तैयारियां, भीड़ एवं यातायात प्रबंधन, बल और सामग्री प्रबंधन (लॉजिस्टिक्स) को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मंथन किया गया है." सेमिनार का उद्घाटन DG EOW उपेंद्र जैन द्वारा किया गया. उन्होंने अलग-अलग व्यवस्थाओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए अत्याधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की आवश्यकता पर बल दिया. प्रयागराज कुंभ के अनुभवों पर चर्चा बैठक में प्रयागराज कुंभ के अनुभवों पर चर्चा हुई. बैठक में मध्यप्रदेश पुलिस के एडीजी, आईजी, डीआईजी और अलग-अलग जिलों के पुलिस अधीक्षक सहित कुल 52 वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हुए. सभी ने प्रयागराज कुंभ मॉडल को भी आगामी सिंहस्थ 2028 के लिए समझा. स्थानीय संसाधन और लोगों भूमिका भी इसमें अहम विषय है. बैठक में पैनल डिस्कशन आयोजित किए गए, जिनमें 2004 एवं 2016 के सिंहस्थ की चुनौतियों एवं व्यवस्था पर चर्चा की गई. वरिष्ठ पुलिस अफसरों ने अनुभव साझा किए मीटिंग में आईजी राकेश गुप्ता के साथ ही सेवानिवृत्त आईजी मनोहर वर्मा, सिवनी एसपी सुनील मेहता और इंदौर के एडिशनल सीपी राजेश सिंह ने अपने सुझाव रखे. इस दौरान टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुंबई की डीन प्रो. मधुश्री शेखर द्वारा सॉफ्ट स्किल्स की आवश्यकता पर प्रेजेंटेशन दिया गया. 

कृषि उत्पादन में मध्यप्रदेश ने मारी बाजी, खाद्यान्न, दलहन और तिलहन में पहला स्थान

कृषि उत्पादन में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल मध्यप्रदेश खाद्यान्न, दलहन और तिलहन उत्पादन में है प्रदेश का अग्रणी स्थान भोपाल  मध्यप्रदेश एक कृषि- प्रधान राज्य है और कृषि राज्य की अर्थव्यवस्था का मूल आधार हैं। कृषि क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय योगदान प्रदान करता है, साथ ही व्यापक स्तर पर रोजगार, खाद्य एवं पोषण तथा आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मध्यप्रदेश राष्ट्रीय खाद्यान्न उत्पादन में विशेष रूप से अनाज और दलहनों के उत्पादन में महत्वपूर्व योगदान प्रदान करता है। राज्य सरकार द्वारा कृषकों की आय को बढ़ाने एवं कृषकों के समग्र कल्याण के उद्देश्य से वर्ष 2026 को "किसान कल्याण वर्ष" के रूप में घोषित किया गया है। मध्यप्रदेश ने वर्ष 2024-25 में कृषि उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज की है। केंद्र सरकार द्वारा जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार राज्य खाद्यान्न, दलहन तथ तिलहन फसलों के उत्पादन में शीर्ष तीन राज्यों में शामिल रहा है। मध्यप्रदेश ने कुल खाद्यान्न उत्पादन में 46.63 मिलियन टन उत्पादन के साथ देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया, जो राष्ट्रीय उत्पादन का लगभग 13.04 प्रतिशत है। राज्य कुल दलहन फसल उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर हैं। तिलहन फसलों के उत्पादन में देश में दूसरा स्थान हासिल किया। कुल खाद्यान्न उत्पादन में देश में दूसरा स्थान राज्य ने गेहूं उत्पादन में राज्य ने 24.51 मिलियन टन उत्पादन किया और लगभग 20.78 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ देश में दूसरा स्थान हासिल किया। राज्य मक्का उत्पादन में भी अग्रणी रहा। 6.64 मिलियन टन उत्पादन के साथ मध्यप्रदेश का राष्ट्रीय हिस्सेदारी में लगभग 15.30 प्रतिशत योगदान रहा, जिससे यह देश का प्रमुख उत्पादक राज्य बना। मोटे अनाज (न्यूट्री/कोर्स सीरियल्स) के उत्पादन में भी राज्य ने 7.78 मिलियन टन उत्पादन करते हुए लगभग 12.17 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की और देश में तृतीय स्थान हासिल किया। कुल दलहन उत्पादन शीर्ष स्थान बरक़रार दलहन क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कुल दलहन उत्पादन में 5.24 मिलियन टन उत्पादन किया और 20.40 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ देश में पहला स्थान प्राप्त किया। चना उत्पादन में राज्य 2.11 मिलियन टन उत्पादन और लगभग 19.01 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष तीन राज्यों में दूसरे स्थान पर रहा। तिलहन फसलों के उत्पादन में देश में अग्रणी राज्य तिलहन क्षेत्र में भी राज्य की स्थिति मजबूत रही। कुल तिलहन उत्पादन में मध्यप्रदेश ने 8.25 मिलियन टन उत्पादन करते हुए लगभग 19.19 प्रतिशत राष्ट्रीय हिस्सेदारी दर्ज की एवं देश से दूसरा स्थान हासिल किया। विशेष रूप से सोयाबीन उत्पादन में राज्य ने 5.38 मिलियन टन उत्पादन किया, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 35.27 प्रतिशत है और इसे देश के प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में स्थापित करता है। राज्य में मूंगफली का उत्पादन 1.55 मिलियन टन रहा जो कि देश के कुल उत्पादन का 12.99 प्रतिशत रहा। मूंगफली उत्पादन में राज्य देश में तीसरे स्थान पर है। मध्यप्रदेश में केंद्र एवं राज्य सरकार की कृषि विकास योजनाओं रासायनिक उर्वरकों का वितरण, पौध संरक्षण कार्यक्रम, मांग आधारित कृषि के लिए फसलों का विविधीकरण, एक जिला-एक उत्पाद योजना, मध्यप्रदेश राज्य मिलेट मिशन, कृषि उत्पादक संगठनों का गठन एवं संवर्धन, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, भावांतर भुगतान, रानी दुर्गावती अन्न प्रोत्साहन योजना आदि का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया। परिणामस्वरूप राज्य को कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की है। कुल उत्पादन में वृद्धि हुई है। कृषि आधारित नीतियों के परिणाम स्वरूप मध्यप्रदेश देश की कृषि अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण राज्य के रूप में स्थापित है।  

मध्य प्रदेश: सरकारी अस्पताल में पहली बार मोटापा क्लिनिक, मरीजों को मिलेगा फ्री इलाज

इंदौर   मध्य प्रदेश के आर्थिक शहर इंदौर के शासकीय एमवाय अस्पताल में सोमवार से बेरियेट्रिक (मोटापा) और मेटाबोलिक क्लिनिक की शुरुआत की गई। ये प्रदेश के सरकारी क्षेत्र में अपनी तरह की पहली सुविधा है, जिससे अब मोटापे के मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने क्लिनिक का शुभारंभ करते हुए कहा कि, मोटापा तेजी से गंभीर सामाजिक समस्या बनता जा रहा है। इसके कारण मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य बीमारियां बढ़ रही हैं। बदलती जीवनशैली और गलत खान-पान इसकी बड़ी वजह हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र मरीजों का इलाज निशुल्क किया जाएगा। जहां निजी अस्पतालों में इस सर्जरी का खर्च 4 से 5 लाख रुपए तक आता है। वहीं, अब ये सुविधा एमवाय में मुफ्त उपलब्ध होगी। क्लिनिक में मरीजों की जांच, काउंसलिंग और जरूरत पड़ने पर सर्जरी की सुविधा एक ही स्थान पर मिलेगी। लोगों को बड़ी राहत शहर के खजराना में रहने 30 वर्षीय गुल अफशां के अनुसार, सर्जरी के बाद उनका वजन 120 किलोग्राम से घटकर डेढ़ महीने में 97 किलोग्राम हो गया है। इससे डायबिटीज में राहत मिली और अब वो पहले से अधिक स्वस्थ महसूस कर रही हैं। इसी तरह सुषमा भिलवारे का कहना है कि, उनका वजन 103 किलोग्राम से घटकर 70 किलोग्राम हो गया है, जिससे बीपी और अन्य समस्याओं में सुधार हुआ है।

छतरपुर का हाईटेक अस्पताल, 32.50 करोड़ में बनेगा, केंद्रीय AC के साथ मिलेगा बेहतर इलाज

छतरपुर  जिला अस्पताल के इतिहास में एक नया अध्याय जुडऩे जा रहा है। अब मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए ग्वालियर, भोपाल या दिल्ली के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। केंद्र सरकार की योजना के तहत करीब 32.50 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से तैयार 200 बेड का अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर ब्लॉक पूरी तरह बनकर तैयार हो गया है। यह पांच मंजिला भवन न केवल छतरपुर बल्कि आसपास के जिलों के लिए भी जीवनदायिनी साबित होगा। 18 हजार वर्ग फीट में फैला आधुनिक चिकित्सा का केंद्र यह भव्य पांच मंजिला अस्पताल करीब 18 हजार वर्ग फीट के विशाल क्षेत्र में निर्मित किया गया है। पूरी तरह से सेंट्रलाइज्ड एसी युक्त इस भवन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यहां आने वाले मरीजों को किसी निजी कॉर्पोरेट अस्पताल जैसी सुविधाएं मिल सकें। जिला प्रशासन ने आगामी 30 सितंबर को मुख्यमंत्री द्वारा इस ब्लॉक के संभावित उद्घाटन की तैयारियां युद्ध स्तर पर तेज कर दी हैं। इस ब्लॉक के शुरू होते ही जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की सूरत पूरी तरह बदल जाएगी। सेंट्रल ऑक्सीजन और मॉड्यूलर ओटी इस नए क्रिटिकल केयर ब्लॉक की सबसे बड़ी ताकत यहां की अत्याधुनिक तकनीक है। भवन में कुल 200 बेड स्थापित किए गए हैं और प्रत्येक पलंग तक सेंट्रल ऑक्सीजन गैस पाइपलाइन पहुंचाई गई है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि आपातकालीन स्थिति में ऑक्सीजन सिलेंडरों की भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी। भवन में कुल 5 अत्याधुनिक मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर (ओटी) और 2 माइनर ओटी बनाए गए हैं। खास रणनीतिक डिजाइन के तहत ग्राउंड फ्लोर पर ही एक माइनर और एक मॉड्यूलर ओटी रखा गया है। इसका उद्देश्य यह है कि यदि कोई मरीज सडक़ दुर्घटना, हार्ट अटैक या अन्य गंभीर स्थिति में आता है, तो उसे ऊपरी मंजिल पर ले जाने में वक्त गंवाए बिना तत्काल सर्जरी की सुविधा मिल सके। आईसीयू, कार्डियो और डायलिसिस की एकीकृत सुविधाएं भवन के भीतर सुविधाओं का व्यापक विस्तार किया गया है। इसमें महत्वपूर्ण सेवाएं एक ही छत के नीचे मिलेंगी। इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू)- गंभीर मरीजों के लिए उन्नत लाइफ सपोर्ट सिस्टम। कार्डियो यूनिट- हृदय रोगियों के लिए त्वरित उपचार और मॉनिटरिंग। डायलिसिस केंद्र- गुर्दा रोगियों के लिए आधुनिक मशीनों के साथ डायलिसिस की सुविधा। महिला एवं शिशु स्वास्थ्य- बच्चों के लिए विशेष एसएनसीयू और पीएनसी वार्ड के साथ उच्च स्तरीय लेबर रूम। मरीजों की सुविधा के लिए 5 लिफ्ट और विशाल रैंप अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है। भवन में कुल 5 लिफ्ट लगाई गई हैं, ताकि आवाजाही में भीड़ न हो। साथ ही, एक विशाल स्ट्रेचर रैंप भी बनाया गया है ताकि बिजली गुल होने या तकनीकी खराबी की स्थिति में मरीजों को स्ट्रेचर के माध्यम से सुरक्षित ऊपर-नीचे ले जाया जा सके। रेफर केस घटेंगे सिविल सर्जन डॉ. शरद चौरसिया ने बताया कि प्रारंभ में भवन की अनुमानित लागत 29.81 करोड़ रुपए थी, लेकिन मरीजों के हित में जोड़ी गई अतिरिक्त आधुनिक सुविधाओं और उपकरणों के कारण यह लागत बढकऱ 32.50 करोड़ रुपए तक पहुंची है। इस ब्लॉक के संचालन से जिला अस्पताल के पास पहले से उपलब्ध करोड़ों रुपए की हाईटेक मशीनों का पूर्ण सदुपयोग हो सकेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिले से होने वाले रेफर केसों में भारी कमी आएगी, जिससे गरीब परिवारों का आर्थिक बोझ भी कम होगा।

CSBC पुलिस कॉन्स्टेबल ऑपरेटर भर्ती के 1 मार्च से स्टार्ट होंगे आवेदन

पटना/नई दिल्ली. केंद्रीय चयन पर्षद सिपाही भर्ती (CSBC) की ओर से राज्य में पुलिस कॉन्स्टेबल ऑपरेटर के रिक्त पदों को भरने के लिए भर्ती निकाली गई है। अधिसूचना के मुताबिक इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 1 मार्च से स्टार्ट की जाएगी जो निर्धारित अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 तक जारी रहेगी। जो भी उम्मीदवार पुलिस विभाग में सरकारी नौकरी पाने का सपना देख रहे हैं और भर्ती के लिए पात्रता पूरी करते हैं वे इसमें शामिल होने के लिए ऑनलाइन माध्यम से फॉर्म भर सकेंगे। योग्यता एवं मापदंड इस भर्ती में भाग लेने के लिए उम्मीदवार ने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10+2 (इंटरमीडिएट/ विज्ञान) या इसके समकक्ष उत्तीर्ण किया है। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों ने गणित, भौतिक विज्ञान एवं रसायन विज्ञान में न्यूनतम 50%, एससी/ एसटी ने न्यूनतम 45 फीसदी अंक प्राप्त किये हों। शारीरिक मापदंड एसआई पदों के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम लंबाई सामान्य एवं पिछड़ा वर्ग की न्यूनतम लंबाई 165 सेमी और सीना बिना फुलाए 81 एवं फुलाकर 86 सेमी होना चाहिए। अत्यंत पिछड़ा वर्ग, एससी, एसटी वर्ग की न्यूनतम लंबाई 160 सेमी और सीना बिना फुलाए 81 एवं फुलाकर 86 सेमी होना चाहिए। एससी/ एसटी के लिए सीना बिना फुलाए 79 एवं फुलाकर 84 सेमी होना चाहिए। महिला उम्मीदवारों की न्यूनतम लंबाई 155 सेमी एवं न्यूनतम वजन 48 किलोग्राम होना आवश्यक है। चयन प्रक्रिया इस भर्ती में आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को प्रथम चरण में लिखित परीक्षा से होकर गुजरना होगा। रिटेन टेस्ट में निर्धारित कटऑफ अंक प्राप्त करने वाले उमीदवारो को द्वितीय चरण शारीरिक दक्षता परीक्षण (PET) से गुजरना होगा। इसके बाद तृतीय चरण में डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन किया जायेगा। सभी चरणों के संपन्न होने के बाद अभ्यर्थियों की फाइनल लिस्ट जारी की जाएगी। इस भर्ती के माध्यम से कुल 993 रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। वेतन बिहार पुलिस कॉन्स्टेबल ऑपरेटर पदों पर चयनित होने वाले युवाओं को वेतनमान लेवल 3 के अनुसार 21,700— 69,100 रुपये प्रतिमाह सैलरी प्रदान की जाएगी भर्ती से जुड़ी विस्तृत डिटेल के लिए अभ्यर्थी ऑफिशियल नोटिफिकेशन का अवलोकन कर सकते हैं।

मप्र में 34.25 लाख मतदाता हटे, भाजपा और कांग्रेस दोनों कराएंगी सत्यापन

भोपाल  Madhya Pradesh में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान एसआइआर के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची ने सियासी दलों की चिंता बढ़ा दी है। अंतिम सूची से 34.25 लाख मतदाताओं के नाम हटने के बाद खासतौर पर Bharatiya Janata Party सक्रिय हो गई है। पार्टी को आशंका है कि इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कमी आगामी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में भाजपा ने बूथ स्तर पर रणनीति बनाते हुए अपने बूथ लेवल एजेंट बीएलए को सक्रिय करने का निर्णय लिया है। बूथवार सत्यापन का अभियान भाजपा अब बूथवार उन मतदाताओं की तलाश करेगी, जो या तो स्थानांतरित हो गए हैं या अनुपस्थित दर्ज किए गए हैं। यह संख्या 31.50 लाख से अधिक बताई जा रही है। पार्टी का कहना है कि यदि ये मतदाता पात्र हैं तो उनके नाम दोबारा सूची में जुड़वाने का प्रयास किया जाएगा। भाजपा प्रदेश एसआइआर टोली के सहसंयोजक एएस उप्पल ने अभियान चलाने की घोषणा की है। कांग्रेस भी करेगी घर घर मिलान Indian National Congress ने भी अपने बीएलए के माध्यम से हटाए गए मतदाताओं का सत्यापन कराने का फैसला किया है। कांग्रेस का कहना है कि वह पुरानी, प्रारूप और अंतिम मतदाता सूची का मिलान कराएगी। यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई गई तो न्यायालय का रुख किया जाएगा। आंकड़ों में बदलाव की तस्वीर     एसआइआर से पहले कुल मतदाता 5,74,06,143 थे। प्रारूप सूची के बाद यह संख्या घटकर 5,31,31,983 रह गई। अंतिम सूची में कुल मतदाता 5,39,81,065 दर्ज किए गए, यानी प्रारूप के बाद 8,49,082 की शुद्ध वृद्धि हुई। पूर्व सूची के अनुरूप 34,25,078 नाम हटाए गए।     श्रेणीवार देखें तो 8।46 लाख नाम मृतक श्रेणी में हटे, 31।50 लाख अनुपस्थित या स्थानांतरित पाए गए और 2।77 लाख नाम दो या अधिक स्थानों पर दर्ज थे। पुरुष मतदाता 2,93,91,548 से घटकर 2,79,04,975 और महिला मतदाता 2,80,13,362 से घटकर 2,60,75,186 रह गए।     राजनीतिक दलों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर नाम कटने से चुनावी गणित प्रभावित हो सकता है, इसलिए अब दोनों प्रमुख दल बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने में जुट गए हैं।