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कन्फ्यूजन दूर करें: 3 मार्च को सरकारी छुट्टी, धुलेंडी 4 को, जानें सही जानकारी

होलिका दहन और होली की तारीख को लेकर इस साल लोगों में कन्फ्यूजन बना हुआ है। इस साल यह कन्फ्यूजन है कि होलिका दहन 2 मार्च को होगा या 3 मार्च को और रंगों वाली होली किस दिन मनाई जाएगी। वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग और ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार इस साल होलिका पूजन और दहन 2 मार्च 2026, सोमवार की रात को किया जाएगा। वहीं, रंगभरी होली 4 मार्च 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। 2 मार्च को कब से कब तक है पूर्णिमा तिथि- पंचांग के अनुसार 2 मार्च को सुबह 6 बजकर 16 मिनट पर सूर्योदय होगा। इस दिन चतुर्दशी तिथि शाम 5 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। इसके बाद पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी। नक्षत्र की बात करें तो सुबह 7 बजकर 24 मिनट तक आश्लेषा नक्षत्र रहेगा, इसके बाद मघा नक्षत्र लग जाएगा। योग की स्थिति में दिन में 12 बजकर 6 मिनट तक अतिगंड योग रहेगा, उसके बाद सुकर्मा योग बनेगा। औदायिक योग सौम्य रहेगा। अगले दिन यानी 3 मार्च को पूर्णिमा तिथि शाम 4 बजकर 33 मिनट तक रहेगी। होलिका दहन रात में ही क्यों होता है- शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन हमेशा रात में और पूर्णिमा तिथि में ही किया जाता है। दिन में होलिका जलाने की परंपरा नहीं है। यही वजह है कि होलिका दहन के लिए रात का समय ही शुभ माना गया है। इस बार पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम से शुरू हो रही है, इसलिए होलिका दहन भी 2 मार्च की रात में ही होगा। होलिका दहन 2026 तिथि और तारीख हिंदू शास्त्रों के अनुसार, होलिका दहन फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को प्रदोष काल यानि की सूर्यास्त के बाद भद्रा रहित शुभ मुहूर्त में करते हैं. भद्रा रहित मुहूर्त का अर्थ है कि सूर्यास्त के बाद भद्रा नहीं होनी चाहिए. यदि भद्रा होगी, तो होलिका दहन नहीं होगा. भद्रा के बाद किया जाएगा. दृक पंचांग के आधार पर देखते हैं तो फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च को शाम 5:55 से शुरू होकर 3 मार्च को शाम 5:07 बजे खत्म हो रही है. अब 2 मार्च को भद्रा पूर्णिमा तिथि के साथ ही यानि शाम 05:55 बजे से लग जाएगी और 3 मार्च को सुबह में 05:28 ए एम तक रहेगी. भद्रा की वजह से 2 मार्च को प्रदोष या रात्रि के समय में होलिका दहन नहीं हो पाएगा. इस वजह से होलिका दहन 3 मार्च को ब्रह्म मुहूर्त में किया जाना सही है. भद्रा की पूंछ 3 मार्च को 01:25 ए एम से 02:35 ए एम तक है और भद्रा मुख 02:35 ए एम से 04:30 ए एम तक है.     होलिका दहन मुहूर्त: 3 मार्च, मंगलवार, ब्रह्म मुहूर्त 05:05 ए एम से 05:55 ए एम के बीच. सुकर्मा योग और मघा नक्षत्र में होलिका दहन इस साल होलिका दहन पर सुकर्मा योग और मघा नक्षत्र का संयोग बना है. 3 मार्च को सुकर्मा योग सुबह में 10:25 बजे तक है, उसके बाद से धृति योग बनेगा. वहीं मघा नक्षत्र सुबह में 07:31 बजे तक है, फिर पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र है. 3 मार्च की शाम क्यों न करें होलिका दहन? 3 मार्च को पूर्णिमा तिथि शाम को 5:07 बजे खत्म हो जा रही है और उसके बाद से चैत्र कृष्ण प्रतिपदा की शुरूआत होगी. 3 मार्च को प्रदोष काल प्रतिपदा तिथि का हो जाएगा क्योंकि सूर्यास्त का समय 06:22 पी एम है. होली 2026 की तारीख होलिका दहन के अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है. उस समय में चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि होती है. दृक पंचांग के अनुसार, प्रतिपदा तिथि 3 मार्च को शाम 05:07 बजे से शुरू होकर 4 मार्च को शाम 04:48 बजे तक रहेगी. उदयातिथि के आधार पर चैत्र कृष्ण प्रतिपदा 4 मार्च को है. इसलिए इस साल होली का त्योहार 4 मार्च बुधवार को मनाना शास्त्र सम्मत है. भद्रा का साया और दहन का सही समय– इस साल होलिका दहन पर भद्रा का प्रभाव भी है। पंचांग के अनुसार 2 मार्च को शाम 5 बजकर 18 मिनट से लेकर 3 मार्च की सुबह 4 बजकर 56 मिनट तक भद्रा रहेगी। यानी पूरी रात भद्रा का साया रहेगा। शास्त्रों में कहा गया है कि भद्रा के समय होलिका दहन नहीं किया जाता, लेकिन अगर पूरी रात भद्रा हो तो भद्रा के पुच्छ भाग में दहन करना शुभ माना जाता है। इस साल भद्रा का पुच्छ भाग रात 12 बजकर 50 मिनट से रात 2 बजकर 2 मिनट तक रहेगा। यही समय होलिका दहन के लिए सबसे अच्छा माना गया है। यानी 2 मार्च की रात 12:50 से 2:02 के बीच होलिका दहन करना शुभ रहेगा। यह करीब 1 घंटा 12 मिनट का समय है। इन तारीखों को जान लीजिए     2 को पूर्णिमा का आगमन, भद्रा भी रहेगी     भद्रा 3 मार्च को ब्रहम मुहूर्त तक रहेगी     3 मार्च को ही सुबह से चंद्रग्रहण का सूतक रहेगा, शाम को ग्रहण समाप्त होगा     4 मार्च को धुलेंडी पर्व 3 मार्च को क्या है खास- 3 मार्च को पूर्णिमा तिथि शाम तक रहेगी। इस दिन स्नान-दान का महत्व माना जाता है। कई लोग इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और पूजा-पाठ करते हैं। हालांकि, रंग खेलने की परंपरा इस दिन नहीं होती है। रंगों वाली होली अगले दिन मनाई जाएगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है। यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा जिस वजह से सूतक काल मान्य होगा। इस दिन किसी भी तरह के मांगलिक कार्य नहीं किए जाएंगे। 4 मार्च को होली- रंगों वाली होली 4 मार्च, बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर होली का त्योहार मनाएंगे। क्यों हो रहा है लोगों में कन्फ्यूजन- तिथि और वार के बदलने की वजह से हर साल होली की तारीख को लेकर भ्रम रहता है। कुछ लोग सिर्फ कैलेंडर देखकर तारीख मान लेते हैं, जबकि त्योहार तिथि के हिसाब से मनाए जाते हैं। इस बार पूर्णिमा तिथि पर चंद्र ग्रहण लग रहा है, जिस वजह से कन्फ्यून की स्थिति बनी हुई है। पंचांग के अनुसार शास्त्रीय नियमों को देखें तो होलिका दहन 2 मार्च की रात को ही होगा और … Read more

मध्यप्रदेश में 1.50 लाख कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, होली से पहले एरियर की एकमुश्त राशि मिलेगी

भोपाल   होली से पहले प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। श्रम आयुक्त कार्यालय इंदौर द्वारा जारी आदेश के बाद दैनिक वेतन भोगी, श्रमिक और आउटसोर्स कर्मचारियों को 12 माह का एरियर मिलने का रास्ता साफ हो गया है। कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि यह राशि त्योहार से पहले जारी की जाए, ताकि कर्मचारी और उनके परिवार होली का त्योहार बेहतर तरीके से मना सकें। किन कर्मचारियों को मिलेगा लाभ? जानकारी के अनुसार इस आदेश से विभिन्न विभागों के 60 हजार से अधिक दैनिक वेतन भोगी (दैवेभो), 35 हजार से अधिक निगम-मंडल कर्मियों के साथ-साथ डेढ़ लाख से ज्यादा आउटसोर्स और निजी क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को लाभ मिलने की संभावना है। बताया जा रहा है कि प्रत्येक कर्मचारी को 20 से 24 हजार रुपए तक की अंतर राशि एकमुश्त एरियर के रूप में मिल सकती है, जो उनके लिए बड़ी आर्थिक राहत साबित होगी। हाईकोर्ट में आपत्ति के कारण रुका था लाभ मध्य प्रदेश कर्मचारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष अशोक पांडे के अनुसार मार्च 2024 में दैनिक वेतन भोगी, श्रमिक और आउटसोर्स कर्मचारियों का वेतन 2,000 रुपए प्रतिमाह बढ़ाया गया था। यह वृद्धि 1 अप्रैल 2024 से लागू होना थी। हालांकि, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट इंदौर खंडपीठ में एक एसोसिएशन द्वारा आपत्ति दायर किए जाने के कारण इसका लाभ समय पर नहीं मिल पाया। बाद में वेतनवृद्धि का लाभ अप्रैल 2025 से मिलना शुरू हुआ, लेकिन एरियर का भुगतान लंबित रहा। श्रम आयुक्त कार्यालय ने दिया स्पष्ट निर्देश अब 18 फरवरी को श्रम आयुक्त कार्यालय इंदौर ने स्पष्ट आदेश जारी कर विभागों को निर्देश दिए हैं कि 2024 में बढ़ाई गई न्यूनतम वेतन की अंतर राशि का भुगतान एरियर के रूप में तत्काल किया जाए। उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद जिन विभागों ने भुगतान नहीं किया था, उन्हें भी अब कार्रवाई करनी होगी। भोपाल सहित प्रदेश के विभिन्न विभागों और निगम-मंडलों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए यह फैसला बड़ी राहत लेकर आया है। यदि आदेश का समय पर पालन होता है, तो होली से पहले हजारों परिवारों के घरों में आर्थिक खुशहाली की रंगत देखने को मिल सकती है।

लाड़ली लक्ष्मी योजना की कड़वी सच्चाई: 21 साल में 58 हजार पंजीयन, 12 ही ग्रेजुशन तक पहुंची

भोपाल  मध्य प्रदेश में साल 2007 में शुरू की गई लाड़ली लक्ष्मी योजना को मॉडल मानकर कई राज्यों ने इसे अपनाया, लेकिन मध्य प्रदेश की लाड़ली लक्ष्मियां ही इस योजना का पूरा लाभ नहीं उठा पा रही हैं. साल 2007 में जिन 58 हजार 73 बच्चियों ने पंजीयन कराया था. कांग्रेस द्वारा विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में खुलासा हुआ. योजना के तहत राज्य सरकार अलग-अलग शैक्षणिक स्तर के हिसाब से बच्चियों को कुल 1 लाख 43 हजार रुपए देती है, लेकिन सिर्फ 20 फीसदी छात्राएं ही ग्रेजुएशन के अंतिम साल तक पहुंच पा रही हैं. हालांकि विभागीय मंत्री ने कहा कि इसमें बढोत्तरी हो रही है. क्या है लाड़ली लक्ष्मी योजना, कैसे मिलता है लाभ मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सरकार ने 2007 में मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना शुरू की थी. योजना के तहत 1 जनवरी 2006 और इसके बाद जन्मी बच्चियों का पंजीयन कराया गया. शर्त रखी गई कि माता-पिता दोनों मध्य प्रदेश के मूल निवासी हों, उनकी दो संतानें हों और दो संतानों के बाद परिवार द्वारा नियोजन कराया गया हो. इसके साथ ही वे आयकरदाता न हों. इस योजना में पंजीयन कराने वाली बालिकाओं को कक्षा 6वीं, 9वीं, 11वीं और 12वीं में प्रवेश लेने पर सरकार स्कॉलरशिप देती है. कक्षा 12 वीं के बाद स्नातक में प्रवेश पर 25 हजार रुपए और 21 साल की आयु पूरी होने पर 1 लाख रुपए दिए जाने का प्रावधान है. इसके लिए लाड़ली लक्ष्मी को वेबसाइट पर ग्रेजुएशन में प्रवेश हेतु ऑनलाइन आवेदन करना जरूरी है. 2007 में पंजीयन कराने वाली 12 बच्चियां ही ग्रेजुएट जब योजना शुरू हुई, उस दौरान 2007 में 58 हजार 73 लाड़ली लक्ष्मियों का पंजीयन कराया गया. इनमें से सिर्फ 12 लाड़लियों को ही स्नातक अंतिम साल पूरा करने पर राशि उपलब्ध कराई जा सकी. कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने लिखित जवाब दिया है. इसमें बताया गया कि इस योजना में पंजीयन कराने वाले लाड़लियों में से सिर्फ 52.33 फीसदी बच्चियां ही 6वीं तक पढ़ाई पूरी कर सकी हैं. इनमें से सिर्फ 19.97 फीसदी बच्चियों ने 12 वीं कक्षा में एडमिशन लिया. लेकिन इसके आगे की पढ़ाई करने वाली लाड़िलयों की संख्या लगातार घटती गई. कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल कहते हैं कि स्नातक तक पहुंचने वाली लाड़ली लक्ष्मियों की संख्या सिर्फ 5.83 फीसदी और पोस्ट ग्रेजुएट तक सिर्फ 0.33 फीसदी बच्चियां ही पहुंच पाईं. बेटियों के उच्च शिक्षित होने की दशा में ये आंकड़े चिंताजनक हैं. 52.35 लाख में से 19.97 लाख पहुंची 12वीं में विधानसभा में दी गई जानकारी में पताचला कि 2007 से 2025 के दौरान लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत प्रदेश में 52.35 लाख लाड़ली लक्ष्मियों का पंजीयन कराया गया. लेकिन साल-दर-साल बच्चियां जैसे-जैसे बड़ी हुईं और उनकी क्लास बढ़ती गई तो इन बच्चियों की संख्या कम होती चली गई. योजना में पंजीयन कराने वाली बच्चियों में से वर्ष 2025 तक के दौरान जब 26.13 लाख बच्चियां ने कक्षा छठी में जाने की उम्र पूरी की तो इनमें से सिर्फ 13.68 लाख ने ही प्रवेश किया. यानी सिर्फ 52.35 फीसदी लक्ष्मियों ने ही एडमिशन लिया. क्लास बढ़ते ही ऐसे घटती गई संख्या इसके बाद कक्षा 9 कक्षा में प्रवेश लेने वाली छात्राओं का प्रतिशत घटकर 42.21 फीसदी रह गया. 11 वीं क्लॉस में एडमिशन लेने वाली छात्राओं की संख्या 24.72 फीसदी रह गई. 12 वीं क्लास में एडमिशन लेने वाली छात्राओं की संख्या 19.97 फीसदी रहा गई. स्नातक में एडमिशन लेने वाली छात्राओं का प्रतिशत सिर्फ 5.38 फीसदी रह गया. स्नातकोत्तर तक पहुंचने वाली सिर्फ 0.33 फीसदी लाड़ली लक्ष्मियां ही रह गईं. सत्ता पक्ष व विपक्ष के अपने-अपने तर्क कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल कहते हैं "लाड़ली लक्ष्मी की शर्तों के अनुसार जिन बच्चियों ने कक्षा 12वीं में प्रवेश लिया है, उन्हीं को एक लाख की राशि 21 वर्ष पूर्ण करने पर दी जाएगी. आंकड़ों से पता चलता है कि साल 2027 में करीबन 5 हजार और 2028 में सिर्फ 40 हजार लाड़ली लक्ष्मियां को ही लाभ मिल सकेगा. सरकार ने इस योजना में बच्चियों की शैक्षणिक स्थिति पर ध्यान नहीं दिया." वहीं, महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया कहती हैं "इस योजना का बेहत सकारात्मक असर दिखाई दिया है. बड़ी क्लास तक पहुंचने वाली बच्चियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. आने वाले समय में इसके और सकारात्मक परिणाम दिखाई देंगे." 

मध्य प्रदेश में चतुर्भुज फ्लाईओवर का आगाज, सागर में बढ़ेगी कनेक्टिविटी और सफर होगा आसान

सागर  एक महानगर की तरह आकार ले रहे सागर शहर में मध्य प्रदेश के पहले चतुर्भुज फ्लाईओवर की उम्मीद को अब पंख लग गए हैं. दरअसल, केंद्र सरकार के भूतल परिवहन मंत्री नितिन गड़करी ने सेतुबंधन योजना के तहत सागर के उपनगर मकरोनिया के यातायात दबाव को कम करने के लिए 155 करोड़ की लागत से फ्लाईओवर का डीपीआर बनाने के लिए टेंडर के लिए स्वीकृति दे दी है. खास बात ये है कि इसके साथ ही मकरोनिया से जबलपुर और कानपुर रोड को जोड़ने के लिए फोरलेन की स्वीकृति भी मिल गयी है. इसके पहले भी मकरोनिया फ्लाईओव्हर के लिए स्वीकृति मिल गयी थी, लेकिन स्थानीय व्यापारियों के विरोध के चलते प्रोजेक्ट रुक गया था. सागर में बनेगा मध्य प्रदेश का पहला चतुर्भुजी फ्लाईओवर आखिरकार सागर शहर के उपनगर मकरोनिया में यातायात दबाव कम करने के लिए केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय ने चार भुजाओं वाले फ्लाईओवर के डीपीआर बनाने के लिए टेंडर की प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी है. पिछले करीब तीन सालों से मकरोनिया पर चार दिशाओं में चार भुजाओं वाले फ्लाईओवर के लिए प्रयासरत स्थानीय विधायक प्रदीप लारिया के प्रयासों से ये प्रोजेक्ट स्वीकृति की ओर बढ़ रहा है. जल्द ही इस फ्लाईओवर का डीपीआर बनाने के लिए टेंडर बुलाए जाएंगे. डीपीआर बनने के बाद फ्लाईओवर के लिए अंतिम स्वीकृति मिलेगी. चार भुजाओं वाले फ्लाईओवर में क्या खास है दरअसल, सागर का मकरोनिया चौहारा एक ऐसा चौराहा है, जहां से कानपुर, जबलपुर, नागपुर, झांसी मार्ग जुड़ते हैं. यहीं से छतरपुर, रीवा, जबलपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, झांसी, ललितपुर और सभी मार्ग जुड़ते हैं. इसके साथ ही सागर के उपनगर के रूप में विकसित हो रहे इस इलाके में बड़ी-बड़ी कंपनियों के शोरूम और आउटलेट्स आने के कारण काफी ट्रैफिक का दबाव रहता है. बाहर और स्थानीय यातायात के दबाव के चलते इस चौराहे पर हमेशा जाम की स्थिति रहती है. इसलिए विधायक प्रदीप लारिया द्वारा यहां पर चार भुजाओं वाला एक चतुर्भुजी फ्लाईओवर का प्रस्ताव सेतुबंधन योजना के तहत केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी के समक्ष रखा गया था. चतुर्भुज फ्लाईओवर की खासियत     मकरोनिया चौराहा सागर पर बनेगा फ्लाईओवर     2.2 किमी लंबा होगा फ्लाईओवर     155 करोड़ रुपए आयेगी फ्लाईओवर की लागत     कानपुर, नागपुर, झांसी मार्ग और सागर शहर की कनेक्टिविटी कानपुर-जबलपुर रोड के लिए फोरलेन इसके अलावा मकरोनिया चौराहे से कानपुर रोड और जबलपुर रोड को कनेक्ट करने के लिए फोरलेन के लिए भी लगभग हरी झंडी मिल गयी है. फिलहाल ये मार्ग मकरोनिया से लेकर बहेरिया तक टू-लेन है. जिस पर कानपुर और जबलपुर तरफ से आने वाले भारी वाहनों का दबाव रहता है. दूसरी तरफ नेशनल हाइवे 44 से भी इसी मार्ग के जरिए कनेक्टिविटी है, जो आगे जाकर भोपाल, बीना और दूसरे मार्गों से जुड़ता है. अब ये फोरलेन बन जाने के कारण यातायात की रफ्तार बढ़ेगी. क्या कहना है स्थानीय विधायक का नरयावली विधायक प्रदीप लारिया ने बताया कि "आए दिन मकरोनिया में जाम की स्थिति बनी रहती है. यहां पर फ्लाईओव्हर की आवश्यकता थी. उसके लिए सेतुबंधन योजना के जरिए 2022 में फ्लाईओवर स्वीकृत कराया था, लेकिन व्यापारियों के विरोध के कारण फ्लाईओवर नहीं बन पाया. फिर से इसके लिए प्रयास के बाद फ्लाईओवर की हमें प्रारंभिक स्वीकृति मिली है. अभी डीपीआर के टेंडर के लिए स्वीकृति मिली है. हमें 155 करोड़ के फ्लाईओवर और साथ ही मकरोनिया से बहेरिया तक 15 करोड़ के फोरलेन की सौगात मिली है. कुल मिलाकर 180 करोड़ के डीपीआर की स्वीकृति मिली है. साथ ही छतरपुर तक के पुल पुलिया, सागर कानपुर मार्ग बनने के दौरान छूटे हैं, उनको भी इस डीपीआर में समाहित किया है. बहुत जल्दी डीपीआर के लिए टेंडर होंगे, फिर डीपीआर बनेगी और डीपीआर से बाद अंतिम स्वीकृति मिलेगी. कुल मिलाकर फ्लाईओवर का मार्ग अब खुल गया है और मकरोनिया अब इस फ्लाईओव्हर के कारण तेज गति से विकास करेगा. "

व्हाइट हाउस का बयान: ‘भारत टेक्नोलॉजी का पावरहाउस’, लेकिन AI पर दी चेतावनी

वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रमुख विज्ञान सलाहकार ने कहा है कि भारत एक ‘तकनीकी महाशक्ति’ है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को आगे बढ़ाने की व्हाइट हाउस की योजना में उसकी अहम भूमिका है. उन्होंने भारत की इंजीनियरिंग क्षमता और तेजी से बढ़ते इकोसिस्टम की सराहना की. राष्ट्रपति के सहायक और व्हाइट हाउस के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति कार्यालय के निदेशक माइकल क्रैटसिओस ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ‘भारत एक तकनीकी महाशक्ति है.’ विकासशील देशों को क्या चेतावनी दे रहे? हाल ही में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में शामिल होकर लौटे टॉप अमेरिकन साइंटिफिक एडवाइजर ने कहा, ‘भारत हर साल बड़ी संख्या में इंजीनियर तैयार करता है, उसके पास मजबूत घरेलू प्रतिभा है और वह अच्छे उत्पाद और एप्लिकेशन विकसित कर रहा है.’ उन्होंने कहा कि विकसित और विकासशील देशों के बीच AI अपनाने की रफ्तार में अंतर हर दिन बढ़ रहा है. उनके मुताबिक दुनिया को मोटे तौर पर दो श्रेणियों में देखा जा सकता है और दोनों के लिए अलग तरह के उपायों की जरूरत है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर विकासशील देश स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा ढांचा, कृषि और आम नागरिकों से जुड़ी सरकारी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में AI को प्राथमिकता नहीं देंगे, तो वे एक अहम मोड़ पर पीछे छूट सकते हैं. व्हाइट हाउस इस दिशा में ‘अमेरिकन AI एक्सपोर्ट्स प्रोग्राम’ को आगे बढ़ा रहा है. क्रैटसिओस ने कहा कि अब तक विकासशील देशों के सामने एक कठिन विकल्प होता था, लेकिन यह कार्यक्रम उन्हें बेहतर तकनीक, वित्तीय सहायता और लागू करने में सहयोग का नया रास्ता देता है. उन्होंने ‘वास्तविक AI स्वायत्तता’ का मतलब समझाते हुए कहा कि इसका अर्थ है सर्वोत्तम तकनीक का अपने लोगों के हित में उपयोग करना और वैश्विक बदलावों के बीच अपने देश की दिशा खुद तय करना. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह रणनीति किसी एक प्रतिस्पर्धी देश के खिलाफ नहीं है. उन्होंने कहा, ‘यह इस बात के बारे में है कि यूनाइटेड स्टेट्स के पास दुनिया की सबसे अच्छी एआई टेक्नोलॉजी है और कई देश इसे अपने इकोसिस्टम में चाहते हैं.’ भारत को बताया मजबूत पार्टनर मानकों के बारे में उन्होंने कहा कि एआई के अगले चरण में ‘एजेंट’ महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. ये एजेंट किस तरह आपस में संवाद करें और मिलकर काम करें, इसके लिए एक समान मानकों की जरूरत होगी. इसके लिए अमेरिकी संस्थान NIST ने पहल शुरू की है, ताकि ये सिस्टम्स सुरक्षित और प्रभावी तरीके से साथ काम कर सकें. वित्तीय संसाधन भी एक बड़ी चुनौती हैं, खासकर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए. क्रैटसिओस ने कहा कि एआई का पूरा ढांचा महंगा होता है. इसमें ‘डेटा सेंटर्स, सेमीकंडक्टर्स, पावर जेनरेशन’ जैसी बुनियादी सुविधाएं जरूरी होती हैं. उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन यूएस इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन, एक्सपोर्ट इंपोर्ट बैंक और दूसरी एजेंसियों के ज़रिए सपोर्ट जुटा रहा है. उन्होंने एक यूएस टेक कॉर्प्स की भी घोषणा की. उन्होंने कहा, ‘ये पीस कॉर्प्स वॉलंटियर्स की तरह होंगे, बस फोकस टेक्नोलॉजी पर होगा. हम टेक्निकल बैकग्राउंड वाले ऐसे लोगों की तलाश कर रहे हैं जो एआई सॉल्यूशन्स को इम्प्लीमेंट करने में मदद करना चाहते हैं.’ क्रैट्सियोस ने कहा कि भारत ‘लंबे समय से इस मामले में एक मजबूत पार्टनर रहा है कि यूनाइटेड स्टेट्स विदेशों में टेक्नोलॉजी कैसे शेयर करता है.’ उन्होंने बताया कि अमेरिकी बड़ी तकनीकी कंपनियों के भारत में डाटा सेंटर और शोध केंद्र मौजूद हैं, जिससे दोनों देशों के बीच एआई क्षेत्र में सहयोग और गहरा हो रहा है.

टैरिफ विवाद के बीच भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर नए सिरे से होगी चर्चा, सरकार ने बदला रुख

नई दिल्ली.  केंद्र सरकार अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर दोबारा विचार करने की योजना बना रही है. यूएस सुप्रीम कोर्ट द्वारा डोनाल्ड ट्रंप के मनमाने टैरिफ को अवैध बताकर खत्म किए जाने के बाद अब भारत डील रीनेगोशिएट करने के लिए मजबूत स्थिति में पहुंच गया है. मनीकंट्रोल ने एक सरकारी अधिकारी के हवाले से लिखा है कि सरकार अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के हर पहलू को परख रही है इसलिए दोनों देशों के बीच अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क पर बात भी टाल दी गई थी. वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, अमेरिका के टैरिफ सिस्टम में आए बदलावों के कारण मौजूदा डील के फायदे खत्म हो गए हैं, इसलिए अब भारत नई रणनीति के साथ बातचीत करने की तैयारी में है ताकि दूसरे देशों के मुकाबले बढ़त हासिल की जा सके. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत का यू टर्न सरकारी अधिकारी ने बताया कि फिलहाल यह साफ नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बातचीत पर क्या असर पड़ेगा, लेकिन सरकार सभी पहलुओं का मूल्यांकन कर रही है. एक अन्य सूत्र के अनुसार, भारत कुछ प्रावधानों पर नए सिरे से बातचीत करना चाहता है ताकि उसे दूसरे देशों पर प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सके. पहले 18 प्रतिशत टैरिफ रेट भारत को मामूली बढ़त देता था, लेकिन अब जब अमेरिका ने ग्लोबल टैरिफ 15 प्रतिशत कर दिया है, तो यह फायदा खत्म हो गया है. इसी वजह से सरकार उन सेक्टरों की पहचान कर रही है जहां ट्रेड डील के जरिए ज्यादा रियायत या छूट हासिल की जा सकती है. टली भारत अमेरिका ट्रेड मीटिंग, डील पर फिर से मंथन भारत और यूएस के अधिकारियों के बीच तीन दिन की ट्रेड मीटिंग 23 फरवरी से शुरू होने वाली थी, जिसमें अंतरिम ट्रेड डील की शर्तों को अंतिम रूप दिया जाना था. इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताई थी और दोनों देशों ने आगे व्यापक समझौते की दिशा में रोडमैप जारी किया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, जिसने ट्रंप प्रशासन के रेसिप्रोकल टैरिफ को अवैध करार दिया, भारत सरकार अब पूरी बातचीत की समीक्षा कर रही है. 18 प्रतिशत से शून्य तक का खेल सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने रेसिप्रोकल टैरिफ को खत्म कर दिया, जिससे 18 प्रतिशत वाला प्रस्तावित रेट भी प्रभावी रूप से शून्य हो गया. इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 24 फरवरी से सभी देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लागू किया, जिसे एक दिन बाद 15 प्रतिशत तक बढ़ाने की घोषणा की गई. फिलहाल भारत के लगभग 55 प्रतिशत निर्यात पर 15 प्रतिशत टैरिफ लागू है, जिसकी कुल वैल्यू करीब 48.4 अरब डॉलर है. हालांकि, स्टील और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टरों पर सेक्शन 232 के तहत अलग से टैरिफ लागू है, जिसकी वैल्यू 8 से 9 अरब डॉलर के बीच है. 34 अरब डॉलर के निर्यात पर छूट का प्लान अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क के तहत करीब 34 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात को टैरिफ से छूट मिलने की संभावना है. ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 के तहत प्रस्तावित टैरिफ में फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम उपकरणों को छूट दी गई है और सिविल एविएशन प्रोडक्ट्स को नए कैटेगरी के रूप में जोड़ा गया है. इन छूटों पर बातचीत मार्च तक पूरी होनी थी, लेकिन अब इसे दोबारा समीक्षा के लिए खोल दिया गया है. छूट वाले सेक्टरों में फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम उपकरण, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, इंजीनियरिंग गुड्स और सिविल एविएशन कंपोनेंट्स शामिल हैं. भारत की बड़ी कमिटमेंट, अमेरिका से खरीद बढ़ाने का वादा यूएस इंडिया अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क के फैक्टशीट के अनुसार, भारत अमेरिकी इंडस्ट्रियल गुड्स और कई कृषि उत्पादों पर टैरिफ घटाने या खत्म करने की योजना बना रहा है. इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स, रेड सोरघम, ट्री नट्स, फ्रेश और प्रोसेस्ड फ्रूट, सोयाबीन ऑयल, वाइन और अन्य कृषि उत्पाद शामिल हैं. भारत ने अमेरिका से 500 अरब डॉलर से ज्यादा एनर्जी, आईसीटी, कोयला और अन्य उत्पाद खरीदने की भी मंशा जताई है.