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जिंदगी में रंगों की दस्तक, हर एहसास को मिलता नया अर्थ

रायपुर विशेष लेख : रंगों से बदलते जीवन के रंग होली का त्यौहार रंगों की उमंग और खुशियों का संदेश लेकर आता है। इस बार छत्तीसगढ़ की बिहान दीदियां प्राकृतिक रंगों से न केवल होली को सुरक्षित बना रही हैं, बल्कि अपने जीवन में खुशहाली के नए रंग भी भर रही हैं। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ी महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर स्व-सहायता समूहों के माध्यम से हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं। प्राकृतिक फूलों, सब्जियों से बने ये रंग पूरी तरह सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल हैं। सुगंध के लिए गुलाबजल और प्राकृतिक इत्र का उपयोग किया जाता है, जिससे रंगों की महक भी मन को भा जाती है।      कांकेर जिले में आत्मसमर्पित माओवादियों के समूह ने भी पुनर्वास नीति के तहत हर्बल गुलाल निर्माण का कार्य शुरू किया है। पुनर्वास शिविर में मानकी नेताम, सामको नुरूटी और डाली सलाम जैसे सदस्य पूरे उत्साह से गुलाल तैयार कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह कार्य उन्हें आत्मसम्मान और स्थायी आजीविका दोनों दे रहा है। शासन की पुनर्वास नीति से भटके युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में यह सराहनीय पहल है।       प्रदेश के रायपुर, कबीरधाम, गरियाबंद, जांजगीर-चांपा, नारायणपुर और कांकेर सहित अनेक जिलों में स्व-सहायता समूह हर्बल गुलाल का उत्पादन कर रहे हैं। कई समूह मंदिरों में अर्पित फूलों को एकत्र कर सुगंधित गुलाल बना रहे हैं। अबुझमाड़ जैसे आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं ने इसे अपनी पहचान बना ली है। बिहान योजना के तहत महिलाएं सरस मेला एवं क्षेत्रीय मेलों में स्टॉल लगाकर उत्पादों की बिक्री कर रही हैं। इससे उन्हें 40 से 60 हजार रुपये तक का सीधा लाभ मिल रहा है। कई महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल गढ़ रही हैं।   हर्बल गुलाल के अनेक लाभ हैं। यह त्वचा और आंखों के लिए सुरक्षित है, एलर्जी या जलन की आशंका नहीं होती। यह बायोडिग्रेडेबल है और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाता। हल्दी में एंटी-बैक्टीरियल गुण और पलाश में रक्त-शोधक विशेषताएं होती हैं, जो इसे और भी उपयोगी बनाती हैं। बाजार में इसकी कीमत 80 से 250 रुपये प्रति किलो तक है, जिससे यह आमजन के लिए भी सुलभ है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार वर्ष 2026 को महिला गौरव वर्ष के रूप में मना रही है। राज्य सरकार के प्रयास से 5 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। महिलाओं को आर्थिक संबल देने के लिए चलाई जा रही महतारी वंदन योजना से लगभग 69 लाख से अधिक महिलाओं को हर माह एक-एक हजार रूपए की राशि भी दी जा रही है। चालू बजट में लखपति दीदीयों को एक्सपोजर विजिट के लिए नई योजना भी लाई गई है। महिलाओं के सशक्तिकरण का यह प्रयास विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को पूरा करने में सार्थक भूमिका निभाएगा। 

नक्सलियों को तगड़ा झटका: सुरक्षाबलों को मिली बड़ी सफलता, हथियारों का जखीरा हाथ लगा

नारायणपुर नारायणपुर जिले में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है. सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों द्वारा डंप किए गए भारी मात्रा में हथियार के साथ दैनिक उपयोग की सामग्री तथा मेडिकल वस्तुएं बरामद की है. नारायणपुर एसपी रॉबिंसन विकास गुड़िया ने बताया कि विश्वसनीय सूचना पर त्वरित एवं एवं सुनियोजित एडीपी ऑपरेशन संचालित करने के दौरान ग्राम कुमुराडी क्षेत्र में नक्सली ठिकाना से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री, आधुनिक एवं इंप्रोवाइज्ड हथियार तथा मेडिकल सामग्री एवं अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएं बरामद हुए हैं. 25 फरवरी को विश्वसनीय सूचना प्राप्त होने पर कार्रवाई करते हुए सीओबी मंदोडा, 53 वीं बटालियन आईटीबीपी और पुलिस बल के जवानों की एरिया डॉमिनेशन पेट्रोलिंग पार्टी ग्राम कुमुराडी के जंगल पहाड़ की ओर रवाना हुई थी. इस दौरान सघन सर्च ऑपरेशन में जवानों ने नक्सलियों के एक ठिकाने में छिपाकर रखे गए डंप को बरामद किया. नक्सलियों के डंप में मिली सामग्रियां जप्त सामग्रियों में प्राइमा कॉर्ड, सेफ्टी फ्यूज, ऑरेंज फ्यूज, लगभग 35 किलोग्राम सुतली बम, 38 किलोग्राम उर्वरक पाउडर (भूरा), 18 किलोग्राम इम्प्रोवाइज्ड विस्फोटक, 2.5 किलोग्राम चारकोल, 5 एएमएन पाउच, 1 इम्प्रोवाइज्ड रॉकेट लॉन्चर, 13 रॉकेट लॉन्चर सेल, 19 मोर्टार सेल (भारी), 11 मोर्टार सेल (हल्का), 1 बीजीएल लॉन्चर (इम्प्रोवाइज्ड – बड़ा), 1 बीजीएल लॉन्चर (इम्प्रोवाइज्ड – छोटा), 8 बीजीएल कारतूस (मध्यम), 15 बीजीएल कारतूस (छोटा), 12 बीजीएल कारतूस (बड़ा), 70 लंबी दूरी बीजीएल राउंड, 55 छोटी दूरी बीजीएल राउंड, 2 इम्प्रोवाइज्ड हैंड ग्रेनेड और चिकित्सकीय सामग्री एवं दवाइयां शामिल है.

शादी जा रहे चार भाइयों की बाइक दुर्घटना में तीन की दुखद मौत, फतेहपुर से रिपोर्ट

 फतेहपुर  यूपी के फतेहपुर जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया. ऐरायां मशायक गांव के पास स्थित एक कोल्ड स्टोर के समीप दो मोटरसाइकिलों की आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई. इस भीषण भिड़ंत में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हैं. हादसे की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया और गांव में मातम पसर गया. खुशी के सफर का अंत मातम में जानकारी के अनुसार हुसैनगंज थाना क्षेत्र के पतरहा गांव निवासी श्याम सिंह (45) अपने भाई मनथाल सिंह (40), गोरेलाल (32) और चचेरे भाई राजेंद्र सिंह (30) के साथ एक ही मोटरसाइकिल पर सवार होकर सुल्तानपुर घोष क्षेत्र के एक गांव में शादी समारोह में शामिल होने जा रहे थे. परिवार में उत्सव का माहौल था. शाम ढल रही थी और वे समय से पहुंचने की जल्दी में थे. इसी दौरान ऐरायां मशायक गांव के पास सामने से आ रही दूसरी मोटरसाइकिल से उनकी सीधी भिड़ंत हो गई. दूसरी बाइक पर मोतीलाल पासवान (50) निवासी गौती, थाना सुल्तानपुर घोष सवार थे. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों बाइकों के परखच्चे उड़ गए और सवार कई फीट दूर जा गिरे. मौके पर बिखरा खून और चीख-पुकार टक्कर के बाद कुछ पल के लिए सड़क पर सन्नाटा छा गया, फिर चीख-पुकार मच गई. आसपास के ग्रामीण दौड़कर मौके पर पहुंचे. दृश्य बेहद भयावह था. तीन लोगों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया था, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हालत में तड़प रहे थे. ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी. पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर शवों को कब्जे में लिया और घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हथगांव भिजवाया. प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने दोनों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया, जहां उनका इलाज जारी है. मृतकों की पहचान और गांव में शोक हादसे में जिन तीन लोगों की मौत हुई, वे एक ही परिवार से थे. श्याम सिंह, मनथाल सिंह और गोरेलाल की मौके पर ही जान चली गई. राजेंद्र सिंह और मोतीलाल पासवान गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं. जैसे ही यह खबर पतरहा गांव पहुंची, घरों से रोने की आवाजें आने लगीं. शादी में शामिल होने की तैयारी कर रहे परिवार को अचानक अंतिम संस्कार की तैयारी करनी पड़ी.  पुलिस की प्रारंभिक जांच पुलिस के अनुसार प्रथम दृष्टया मामला तेज रफ्तार और ओवरलोडिंग का प्रतीत होता है. एक मोटरसाइकिल पर चार लोग सवार थे, जिससे संतुलन बिगड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि सड़क पर मोड़ या दृश्यता की कोई समस्या तो नहीं थी. थाना प्रभारी ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है. दुर्घटना के कारणों की स्पष्ट जानकारी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगी. सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल यह हादसा एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा की स्थिति पर सवाल खड़े करता है. अक्सर लोग छोटी दूरी समझकर हेलमेट नहीं पहनते और एक ही बाइक पर तीन-चार लोग सवार हो जाते हैं. तेज रफ्तार और लापरवाही मिलकर जानलेवा साबित होती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐरायां मशायक के पास वाली सड़क पर भारी वाहनों की आवाजाही रहती है और शाम के समय दृश्यता भी कम हो जाती है. ऐसे में थोड़ी सी चूक बड़ा हादसा बन जाती है. परिजनों की आंखों में सवाल मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. घर के आंगन में जहां शादी में जाने की तैयारी थी, वहां अब शोक की चादर बिछी है. महिलाएं बेसुध हैं और बच्चे सहमे हुए. परिवार के एक सदस्य ने बताया कि हम लोग खुशी में जा रहे थे, किसे पता था रास्ते में ऐसा हो जाएगा.  घायलों की हालत नाजुक बताई जा रही है. डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी कर रही है. परिजन जिला अस्पताल के बाहर दुआ कर रहे हैं कि कम से कम बाकी दो जिंदगियां बच जाएं. प्रशासन की अपील हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यातायात नियमों का पालन करें, बाइक पर निर्धारित संख्या से अधिक सवारी न बैठाएं और हेलमेट का अनिवार्य रूप से उपयोग करें. पुलिस ने कहा कि सड़क दुर्घटनाएं अक्सर छोटी लापरवाही के कारण होती हैं, जिनकी कीमत पूरी जिंदगी चुकानी पड़ती है.

झज्जर की 32 कॉलोनियों और 11 गांवों को मिलेगा स्वच्छ पानी

झज्जर. हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल में झज्जर क्षेत्र में पेयजल की किल्लत और पानी की गुणवत्ता का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। पूर्व शिक्षा मंत्री और विधायक गीता भुक्कल ने क्षेत्र के गांवों में गंदे पानी की आपूर्ति और बढ़ते टीडीएस स्तर को लेकर सरकार को घेरते हुए चिंता भी जताईं। गौरतलब है कि इन समस्याओं को लेकर दैनिक जागरण ने हाल ही में एक विस्तृत अभियान चलाकर टीडीएस के खतरनाक स्तर और बदहाल जलघरों की स्थिति को प्रमुखता से प्रकाशित किया था, जिसका असर भी सदन की कार्यवाही में भी देखने को मिला। चर्चा के दौरान बोतलबंद पानी से होने वाले नुकसान पर भी बात की गईं। जिस पर सीएम नायब सिंह सैनी ने सदन के माध्यम से आमजन से अपील की कि बीमारियों से बचने के लिए प्लास्टिक का उपयोग बंद करें और जल संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ें। इसी कड़ी में कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा ने विश्वास दिलाया कि अगस्त 2026 तक साल्हावास और आसपास के क्षेत्रों में मरम्मत और शुद्धिकरण का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। इन गांवों में पेयजल संकट का मुद्दा उठा विधायक गीता भुक्कल ने कालियावास, खानपुर कलां, मुंदसा, खोरड़ा, बहु, नौगांव, साल्हावास, मातनहेल, ढाणा, धनीरवास और झज्जर शहर के वाटर वर्क्स की बदहाली का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि कई जलघरों की चारदीवारी टूटी हुई है और नहरों से आने वाला पानी बिना उचित शुद्धिकरण के सप्लाई किया जा रहा है। विशेष रूप से नौगांव में वर्षों पुरानी पाइपलाइनों के कारण लीकेज और गंदे पानी के मिक्स होने की शिकायत दर्ज कराई गई। टीडीएस और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं विधायक ने टीडीएस स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के विपरीत कई क्षेत्रों में खारा पानी सप्लाई हो रहा है, जिससे कैंसर, हड्डियों की बीमारी और किडनी से संबंधित समस्याएं बढ़ रही हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि जल भंडारण टैंकों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए। पेयजल पाइपलाइनों में रिसाव को तुरंत रोका जाए। इसके अलावा पैक्ड वॉटर और प्लास्टिक बोतलों की गुणवत्ता की भी जांच की जाए। करोड़ों रुपये के बजट और नई योजनाओं का एलान कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा ने विधायक के सवालों का विस्तार से जवाब देते हुए बताया कि सरकार हर घर स्वच्छ जल पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्री ने सदन को निम्नलिखित आश्वासन दिए- नौगांव के लिए नई योजना: नौगांव में नहर आधारित पानी की आपूर्ति के लिए विस्तार से एस्टीमेट तैयार किया गया है, जिसकी प्रशासनिक स्वीकृति जल्द मिल जाएगी। मरम्मत कार्य: खानपुर कलां के लिए 233 लाख, बहु के लिए 402 लाख, मुंदसा के लिए 178 लाख और साल्हावास के लिए 282 लाख रुपये की राशि टैंकों की मरम्मत और पाइपलाइनों के लिए स्वीकृत की गई है। टीडीएस निगरानी: मंत्री ने बताया कि विभाग की लैब नियमित रूप से टीडीएस चेक करती है और जहां स्तर 500 से अधिक होता है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था की जाती है। झज्जर शहर: शहर की 32 नई स्वीकृत कालोनियों में पाइपलाइन बिछाने का काम जल्द शुरू किया जाएगा। 32 कालोनियों को मिलेगा स्वच्छ पेयजल पेयजल समस्याओं की चर्चाओं के बीच शहर के निवासियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। विधायक गीता भुक्कल द्वारा विधानसभा में उठाए गए प्रश्न के उत्तर में सरकार ने स्पष्ट किया है कि झज्जर शहर की 32 नव-स्वीकृत कॉलोनियों में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विशेष योजना तैयार की गई है। इन कॉलोनियों में बुनियादी ढांचे और जल आपूर्ति के लिए आवश्यक बजट आवंटित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। आश्वस्त किया कि विभाग पाइपलाइन नेटवर्क बिछाने के लिए तकनीकी सर्वेक्षण पूरा कर चुका है और निविदा प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।

उत्तरी बस्तर समिति को झटका: कांकेर में तीन नक्सलियों ने किया सरेंडर, माओवादी संगठन बिखरने के संकेत

कांकेर छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त करने की डेड लाइन में अब केवल महीनेभर का वक्त बचा है. जंगलों में भटक रहे नक्सली मुख्याधारा में लौट रहे हैं. 3 दिन में 25 लाख रुपये के 3 नक्सली AK-47 हथियार के साथ आत्मसमर्पण चुके हैं. उत्तर बस्तर के जंगल में अभी भी 21 नक्सली शेष हैं. पुलिस का अनुमान है कि जल्द ये नक्सली भी आत्मसमर्पण कर उत्तर बस्तर इलाके को नक्सल मुक्त करने में अपनी अहम रोल अदा करेंगे. नक्सलियों के लिए पुलिस ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी कर दिया है. AK-47 हथियार के साथ लौटे नक्सली, 25 लाख के इनामी उग्रवादियों ने छोड़ी हिंसा दशकों से उत्तर बस्तर का इलाका नक्सलवाद का दंश झेलता आ रहा है. नक्सलियों के दहशत के कारण आज भी अंदरूनी इलाके विकास से कोसो दूर है. केंद्र और राज्य सरकार ने नक्सलवाद की समाप्ति के लिए मार्च 2026 की डेडलाइन तय की है. तय डेडलाइन के आधार पर चलाये जा रहे ऑपरेशन में पुलिस और सुरक्षा बल के जवानों को सफलता मिलती जा रही है. नक्सली मारे जा रहे हैं. बड़ी संख्या में नक्सली हथियारों के साथ मुख्यधारा में लौटकर आत्मसमर्पण कर रहे हैं. कांकेर में बचे हैं करीब 60 लाख के 21 इनामी नक्सली बीते 3 दिनों में दो डिवीसीएम व एक पार्टी सदस्य सहित 25 लाख रुपये के 3 नक्सलियों ने AK-47 हथियार के साथ आत्मसमर्पण किया है. उत्तर बस्तर के भिहड़ में अभी भी 21 नक्सली बचे हैं. पुलिस को उम्मीद है कि ये भी जल्द आत्मसमर्पण कर सकते हैं. पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने लल्लूराम डॉट कॉम से बात करते हुए बताया कि उत्तर बस्तर कांकेर में 60 लाख रुपये के आसपास के लगभग 21 नक्सली शेष बचे हुए हैं. बीते कुछ दिनों में कुछ नक्सली मुख्यधारा में लौटे हैं. बड़े कैडर के आत्मसमर्पण के बाद अब बचे हुए नक्सलियों के पास कोई आधार नहीं बचा है. उम्मीद है कि बचे हुए नक्सली भी जल्द आत्मसमर्पण कर सकते हैं. नक्सलियों के लिए हेल्पलाइन जारी पुलिस अधीक्षक ने आगे बताया कि शेष बचे हुए नक्सलियों के लिए मोबाइल नंबर 9479194119 जारी किया गया है, जिससे वह बिना किसी भय के संपर्क कर सकते हैं. उन्हें सुरक्षित मुख्यधारा में लाने प्रयास किया जाएगा. सूत्र बताते हैं कि आगमी समय में उत्तर बस्तर के इलाके में शेष बचे 21 नक्सली भी जल्द आत्मसमर्पण कर सकते हैं. इससे यह कयास लगाए जा रहे हैं सरकार की डेड लाइन के पूर्व ही उत्तर बस्तर कांकेर जिला जल्द नक्सल मुक्त हो जाएगा, जो सरकार और पुलिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी. इससे आम लोगों के लिए विकास की राह आसान होगा.  

राज्यपाल डेका ने वीर विनायक दामोदर सावरकर को किया नमन, दी भावभीनी श्रद्धांजलि

रायपुर राज्यपाल  डेका ने वीर विनायक दामोदर सावरकर को श्रद्धांजलि दी राज्यपाल  रमेन डेका ने आज महान सेनानी, विचारक और क्रांतिकारी विनायक दामोदर सावरकर  “वीर सावरकर” जी  की पुण्यतिथि पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने राष्ट्रनिर्माण में उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि वीर सावरकर भारत माता के उन वीर सपूतों में से एक हैं जिनकी बौद्धिक क्षमता, क्रांतिकारी उत्साह और भारत के भविष्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता अतुलनीय रही। वीर सावरकर जी महज एक क्रांतिकारी से कहीं अधिक थे, वे एक गहन विचारक थे जिनके बौद्धिक योगदान को देश भूल नहीं सकता। इस अवसर पर राज्यपाल के विधिक सलाहकार  भीष्म प्रसाद पाण्डेय, उप सचिव सु निधि साहू एवं अधिकारियों-कर्मचारियों ने भी सावरकर जी के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

जेफ्री एपस्टीन केस: वायरल फोटो में स्टीफन हॉकिंग नजर आने पर उठे सवाल

वाशिंगटन जब से एपस्टीन फाइल जारी हुई हैं, तब से अमेरिका समेत दुनियाभर में हड़कंप मचा हुआ है। कई नामी-गिरामी लोगों के नाम सामने आ चुके हैं। अब स्टीफन हॉकिंग की एक तस्वीर सामने आई है, जिसने हंगामा खड़ा कर दिया है। जेफरी एपस्टीन की फाइलों से सामने आई इस फोटो में स्टीफन हॉकिंग दो बिकिनी पहनी महिलाओं के बीच में हैं। हॉकिंग के बगल में लेटीं दोनों महिलाओं की पहचान उजागर नहीं हुई है। एक महिला हॉकिंग के दाएं ओर है, तो दूसरी बाएं ओर लेटी है। तीनों के हाथों में पेय पदार्थ है और स्टीफन हॉकिंग वाला ग्लास उनके अलावा महिला ने भी पकड़ रखा है। दोनो महिलाओं के चेहरे को काले रंग से ढक दिया गया है, ताकि पहचान सामने न आए। दोनों ने ब्लैक कलर की बिकिनी पहन रखी है। जेफरी एपस्टीन की फाइलों के नए बैच से सामने आई इस तस्वीर के बारे में यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो सका कि तस्वीर कब और कहां ली गई थी, लेकिन इसका खुलासा होने के बाद यह सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैलने लगी। स्टीफन के परिवार ने द पोस्ट को एक बयान में बताया, “प्रोफेसर हॉकिंग ने 20वीं सदी में फिजिक्स में सबसे बड़ा योगदान दिया, साथ ही वे मोटर न्यूरॉन बीमारी से सबसे लंबे समय तक बचने वाले व्यक्ति भी थे। यह एक ऐसी बीमारी थी जो उन्हें कमजोर कर देती थी और जिसके कारण उन्हें वेंटिलेटर, वॉइस सिंथेसाइज़र, व्हीलचेयर और चौबीसों घंटे मेडिकल केयर पर निर्भर रहना पड़ता था।” साल 2018 में हुई थी हॉकिंग की मौत बयान में आगे कहा कि उनकी तरफ से गलत व्यवहार का कोई भी इशारा गलत और बहुत दूर की कौड़ी है। हॉकिंग की 50 साल तक बीमारी से लड़ने के बाद साल 2018 में 76 साल की उम्र में मौत हो गई। वह दुनिया भर में मशहूर साइंटिस्ट्स के एक ग्रुप में शामिल थे, जिन्होंने मार्च 2006 में एपस्टीन द्वारा फंडेड और होस्ट किए गए एक कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया था- यह उस बदनाम फाइनेंसर पर फ्लोरिडा में प्रॉस्टिट्यूशन के लिए लालच देने का आरोप लगने से पांच महीने पहले की बात है। कैरिबियन आइलैंड सेंट थॉमस पर हुई थी कॉन्फ्रेंस यह कॉन्फ्रेंस कैरिबियन आइलैंड सेंट थॉमस पर हुई थी, जो एपस्टीन के बदनाम प्राइवेट आइलैंड के पास है। बता दें कि हॉकिंग का नाम एपस्टीन की फाइलों में तब भी आया था, जब वर्जीनिया गिफ्रे ने आरोप लगाया था कि साइंटिस्ट ने एक बार वर्जिन आइलैंड्स में एक नाबालिग ग्रुप पार्टी में हिस्सा लिया था। फाइलों में मौजूद ईमेल के मुताबिक, एपस्टीन ने गिफ्रे के दोस्तों को कैश इनाम देने की पेशकश की थी, अगर वे उसके दावे को गलत साबित करने में मदद कर सकें। हालांकि, हॉकिंग पर कभी भी किसी गलत काम का ऑफिशियली आरोप नहीं लगाया गया और उनकी मौत 2019 में एपस्टीन के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार होने से पहले हुई थी।

हफ्ते में कितनी बार बाल धोना चाहिए? जानिए ऑयली, ड्राई और नॉर्मल हेयर के सही नियम

अच्छे और चमकदार बाल न केवल आपकी सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि ये आपकी पर्सनल हाइजीन का भी हिस्सा हैं। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि बालों को कितनी बार धोना चाहिए? सच तो यह है कि इसका कोई एक तय नियम नहीं है। यह पूरी तरह से आपके बालों के प्रकार, आपकी लाइफस्टाइल और आपके वातावरण पर निर्भर करता है। आइए जानें इन फैक्टर्स को ध्यान में रखते हुए आपको हफ्ते में कितनी बार बाल धोने चाहिए? बालों को धोने की फ्रीक्वेंसी आपकी स्कैल्प की कंडीशन पर निर्भर करती है-     ऑयली स्कैल्प- अगर आपकी जड़ें जल्दी चिपचिपी हो जाती हैं, तो आपको हफ्ते में 3 से 4 बार बाल धोने की जरूरत पड़ सकती है। बहुत ज्यादा तेल जमने से डैंड्रफ और बाल झड़ने की समस्या हो सकती है।     ड्राई या कर्ली बाल- सूखे और घुंघराले बालों को कम धोने की सलाह दी जाती है. क्योंकि नेचुरल ऑयल इन बालों के लिए जरूरी होता है। ऐसे लोगों के लिए हफ्ते में 1 या 2 बार बाल धोना काफी है।     नॉर्मल बाल- अगर आपके बाल न ज्यादा ऑयली हैं और न ही ड्राई, तो हफ्ते में 2 से 3 बार धोना सबसे अच्छा बैलेंस है।     एक्सरसाइज और पसीना- अगर आप जिम जाते हैं या धूल-मिट्टी वाले वातावरण में काम करते हैं, तो आपको बालों को ज्यादा बार धोने की जरूरत हो सकती है, ताकि पसीना और गंदगी साफ हो सके। इसके लिए हफ्ते में 4-5 बार बाल धोने पड़ सकते हैं। बाल धोते समय ध्यान रखने वाली बातें सिर्फ बाल धोना काफी नहीं है, उन्हें सही तरीके से धोना भी जरूरी है। पानी का तापमान- बालों के लिए कभी भी बहुत गर्म पानी का इस्तेमाल न करें। गर्म पानी बालों की नमी छीन लेता है और उन्हें बेजान बना देता है। हमेशा गुनगुने या ठंडे पानी का इस्तेमाल करें।     सही शैम्पू चुनें- हमेशा अपने बालों के टाइप के अनुसार सल्फेट-फ्री शैम्पू चुनें। शैम्पू को सीधे बालों पर लगाने के बजाय, उसे थोड़े पानी में घोलकर इस्तेमाल करें। ध्यान रहे कि शैम्पू का मुख्य काम स्कैल्प की सफाई करना है, इसलिए इसे जड़ों पर ज्यादा फोकस करें।     कंडीशनर है जरूरी- शैम्पू के बाद कंडीशनर लगाना कभी न भूलें। कंडीशनर बालों को हाइड्रेटेड रखता है और उन्हें टूटने से बचाता है। याद रखें, कंडीशनर को सिर्फ बालों के सीरों पर लगाएं, जड़ों में नहीं।     सुखाने का सही तरीका- गीले बाल सबसे कमजोर होते हैं। उन्हें तौलिये से जोर-जोर से न रगड़ें। इसके बजाय, माइक्रोफाइबर तौलिये या पुरानी सूती टी-शर्ट से हल्के हाथों से पानी थपथपाकर सुखाएं। हेयर ड्रायर का इस्तेमाल कम से कम करें।     कंघी कैसे करें- गीले बालों में कंघी न करें। बाल सूखने के बाद चौड़े दांतों वाली लकड़ी की कंघी का इस्तेमाल करें।  

वीर सावरकर की पुण्यतिथि पर CM विष्णुदेव साय का नमन, कहा– राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा रहेंगे अमर

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में महान क्रांतिकारी, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक एवं स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर की पुण्यतिथि पर उनके छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धापूर्वक नमन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि वीर सावरकर केवल एक स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी विचारक, समाज सुधारक, ओजस्वी लेखक-कवि और प्रखर इतिहासकार भी थे। उन्होंने भारतीय स्वाधीनता संग्राम को नई वैचारिक ऊर्जा प्रदान की तथा राष्ट्रभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए सावरकर जी का त्याग, संघर्ष और अदम्य साहस भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। कालापानी की अमानवीय यातनाओं के बावजूद उनका राष्ट्र के प्रति समर्पण अडिग रहा। उनका संपूर्ण जीवन देशसेवा, आत्मबल और राष्ट्र गौरव का प्रेरणास्रोत है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि वीर सावरकर के विचार आज भी युवाओं को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं। हमें उनके आदर्शों को आत्मसात करते हुए एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष  सौरभ सिंह, छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष  भूपेंद्र सवन्नी,  मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी  आलोक सिंह,  राम गर्ग सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

विश्व कप से श्रीलंका की विदाई पर संगाकारा का बड़ा बयान– ‘हम बेकार हो जाएंगे’

कोलंबो टी20 विश्व कप 2026 की सह-मेजबान श्रीलंका टूर्नामेंट से बाहर हो गई है। बुधवार को कोलंबो में खेले गए सुपर-8 के अपने दूसरे मुकाबले में श्रीलंका को न्यूजीलैंड के खिलाफ 61 रन से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ ही श्रीलंका विश्व कप से बाहर हो गई। सुपर-8 के पहले मैच में भी श्रीलंका को इंग्लैंड के हाथों 51 रन से हार का सामना करना पड़ा था। श्रीलंका के विश्व कप से बाहर होने के बाद पूर्व कप्तान कुमार संगाकारा निराश नजर आए। उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी निराशा व्यक्त की। संगकारा ने कहा कि 2014 में टी20 विश्व कप जीतने के बाद से श्रीलंका का लगातार पांचवीं बार सेमीफाइनल में न पहुंच पाना बेहद निराशाजनक है। कुमार संगाकारा ने एक्स पर लिखा, “हर तरफ बहुत दुख है। फैंस दुखी, निराश और गुस्से में हैं। खिलाड़ी भी बहुत दुखी हैं। मैं भी ऐसे ही ड्रेसिंग रूम में रहा हूं। यह आसान नहीं है, लेकिन यह जिम्मेदारी मैदान के साथ आती है। अपने देश और अपने लोगों का प्रतिनिधित्व करना एक बोझ के साथ ही बहुत बड़ा सौभाग्य है। सही रास्ते पर आने के लिए हर स्तर पर बहुत काम करना है। हम एक ही चीज बार-बार नहीं कर सकते और अलग नतीजों की उम्मीद नहीं कर सकते, जब हमारे आस-पास क्रिकेट की दुनिया इतनी तेजी से बदल गई है। हमने खुद को नहीं बदला है और खतरा यह है कि हम बेकार हो जाएंगे।” श्रीलंका टी20 विश्व कप 2026 के सुपर-8 स्टेज से बाहर होने वाली पहली टीम बनी है। 2014 में विजेता बनने के बाद यह लगातार पांचवां मौका है, जब श्रीलंका सेमीफाइनल में नहीं पहुंची है। 2014 में भारत को हराकर टी20 विश्व कप का खिताब जीतने वाली टीम का संगाकारा हिस्सा थे। वे 2009 से 2014 के बीच टीम के स्वर्णिम दौर का हिस्सा रहे, जब श्रीलंका चार लगातार संस्करणों में कम से कम सेमीफाइनल तक पहुंचा, 2009 और 2012 में फाइनल खेला, और 2014 में खिताब जीता।