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केरल हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: ‘द केरला स्टोरी 2’ की कल होने वाली रिलीज पर रोक

तिरुवनंतपुरम केरल स्टोरी 2 टीजर रिलीज के बाद से ही काफी विवादों में घिरी हुई है. फिल्म 27 फरवरी को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली थी, लेकिन केरल हाईकोर्ट फिल्म की रिलीज पर ब्रेक लगा दिया है. केरल हाई कोर्ट ने विवादित फिल्म केरल स्टोरी 2 की स्क्रीनिंग पर 15 दिनों की अंतरिम रोक लगा दी है. जानकारी के मुताबिक, केरल हाईकोर्ट ने एक याचिका के बाद रिलीज पर रोक लगा दी है और कहा है कि फिल्म में राज्य को गलत तरीके से दर्शाया गया है. केरल हाई कोर्ट ने सभी पक्षों की डिटेल्ड दलीलें सुनने के बाद ‘द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड’ की रिलीज अपना फैसला सुनाया है. बुधवार को फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की अर्जी पर सुनवाई की थी. सुनवाई के दौरान, पिटीशनर, फिल्ममेकर्स और केंद्र सरकार के बीच तीखी बहस हुई थी. ‘कोर्ट को घेरने’ की कोशिश न करें कोर्ट ने साफ कर दिया है कि लोगों की भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. इस मामे में मेकर्स में अर्जेंट रूलिंग की रिक्वेस्ट की थी, क्योंकि फिल्म 27 फरवरी को दुनियाभर में रिलीज होनी थी. कोर्ट ने कल (25 फरवरी) हुई सुनवाई में भी चेतावनी दी कि वे जल्दबाजी में फैसला देने के लिए ‘कोर्ट को घेरने’ की कोशिश न करें. कोर्ट ने साफ कहा था कि सभी दलीलें पूरी तरह सुना जाएगा और ऑर्डर पास करने से पहले कोर्ट जरूरी समय लेगा. CBFC पर खड़े किए सवाल कोर्ट ने फिल्म को दिए गए क्लासिफिकेशन को लेकर सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) पर भी सवाल उठाए थे. बेंच ने सर्टिफिकेशन के फैसले पर हैरानी जताते हुए कहा, ‘आपने फिल्म को ‘A’ सर्टिफिकेट भी नहीं दिया. आपने U/A दिया है.’ फिल्म को लेकर क्यों हुआ विवाद ‘द केरल स्टोरी 2’ साल 2023 में आई फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ का सीक्वल है. ‘द केरल स्टोरी’ को सुदीप्तो सेन ने डायरेक्ट किया था. उस वक्त भी इस फिल्म को लेकर काफी बवाल मचा था. अब सीक्वल के निर्देशन की कमान कामाख्या नारायण सिंह ने संभाली है. इस बार कहानी में जबरदस्ती धर्म बदलने और हिंदू लड़कियों को प्यार के नाम पर फंसाने जैसे मुद्दों को दिखाया जा रहा है. इसी के चलते सियासी और सामाजिक बहस छिड़ गई है कि जैसा फिल्म में दिखाया जा रहा है, वैसा कुछ नहीं है. सीएम पिनाराई विजयन ने सीक्वल को ‘झूठा प्रोपेगैंडा’ और ‘जहरीला’ बताया था.

तीन दिन सीमांचल में अमित शाह, सियासी एजेंडे पर होगा मंथन

पटना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीन दिवसीय बिहार दौरे पर बुधवार शाम पहुंच चुके। पूर्णिया एयरपोर्ट पर डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी मंत्री लेशी सिंह और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उनका स्वागत किया। यहां से वह सड़क मार्ग से किशनगंज पहुंचे। यहां पर लैंड पोर्ट अथॉरिटी की समीक्षा बैठक में शामिल हुए। किशनगंज में ही रात्रि विश्राम किया। आज यानी गुरुवार को गृह मंत्री अररिया में रहेंगे, जहां वह सुबह 11 बजे लेट्टी सीमा चौकी पर आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसके बाद कलेक्ट्रेट में पुलिस अधीक्षकों और सीमावर्ती क्षेत्रों के जिला अधिकारियों के साथ भारत-नेपाल सीमा से संबंधित मुद्दों का आकलन करने के लिए एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक करेंगे, जिसमें सुरक्षा को लेकर बातचीत होगी। आज ही वह दूसरे चरण की वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के तहत आयोजित एक कार्यक्रम में भी भाग लेंगे और फिर रात रुकने के लिए पूर्णिया लौटेंगे। शुक्रवार यानी 27 फरवरी को गृह मंत्री शाह पूर्णिया में सीमावर्ती जिलों से संबंधित मामलों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक बार फिर अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। समीक्षा बैठकों के अंतिम दौर के समापन के बाद वे नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे। यह तो थी अमित शाह के कार्यक्रम की जानकारी आगे आपको बताते हैं अमित शाह के कार्यक्रम का एजेंडा क्या है? 'यह यात्रा मुख्य रूप से सीमा सुरक्षा को लेकर है' वरिष्ठ पत्रकार गिरिंद्र नाथ झा ने कहा कि गृह मंत्री की यह यात्रा मुख्य रूप से सीमा सुरक्षा को लेकर है। इसमें सिलिगुड़ी कॉरिडोर का मुद्दा प्रमुख है। दूसरी जो महत्वपूर्ण बात है वह यह कि केंद्र सरकार वाइब्रेंट विलेज के कार्यक्रम पर भी काम कर रही है। गृह मंत्री का इस कार्यक्रम पर काफी फोकस है। अररिया में वह वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के तहत आयोजित एक कार्यक्रम में भी भाग लेंगे। इसके साथ ही वह सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा उपायों, प्रशासनिक तैयारियों और चल रही विकास पहलों की समीक्षा करेंगे। इस दौरान वे भारत-नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। 'बंगाल के कुछ प्रमुख नेता मुलाकात करने आएंगे' गृह मंत्री अमित शाह के इस दौरे का बंगाल चुनाव से जोड़कर देखा जाए या नहीं? इस सवाल पर वरिष्ठ पत्रकार गिरिंद्र नाथ झा ने कहा कि बंगाल चुनाव से इसे नहीं जोड़ना उचित नहीं होगा। अगर बंगाल चुनाव मुद्दा रहता तो वह बंगाल में ही प्रवास करते हैं। वह सीमा सुरक्षा पर बातचीत करने आए हैं। हां, सीमावर्ती जिले जैसे उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर या अन्य जिलों के कुछ नेता गृह मंत्री से मुलाकात करने जरूर आएंगे। 'सीमांचल दौरे के दो मायने निकाले जा रहे' वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी कहते हैं कि अमित शाह के सीमांचल दौरे के दो मायने निकाले जा रहे हैं। पहला यह कि भारत सरकार सीमांचल को घुसपैठियों से मुक्त बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है। गृह मंत्री शाह ने हाल के वर्षों में कई बार सीमांचल का दौरा किया है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी वह कई बार घुसपैठियों का मुद्दा उठा चुके हैं। उन्होंने आरोप भी लगाया था कि क्षेत्र में अवैध प्रवासियों के माध्यम से वोट बैंक बनाने के प्रयास चल रहे हैं। सभी अवैध गतिविधियों को पूरी तरह से रोक लगाने की बात कही थी। 'इन चीजों पर भी मंथन करेंगे अमित शाह' वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने कहा कि दूसरी बात यह है कि सीमांचल के जिलों की सीमा पश्चिम बंगाल से सटती है। इस सीमवर्ती गांवों में सैकड़ों ऐसे लोग हैं जिनका संबंध बंगाल से भी है। उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण दिनाजपुर के विधानसभा सीटों पर भाजपा फोकस कर रही है। किशनगंज और पूर्णिया में रात्रि विश्राम के दौरान वह सीमावर्ती जिलों के कुछ प्रमुख नेताओं से मिलकर रणनीति बना सकते हैं। इसके अलावा घुसपैठियों का मुद्दा भी है। यह कॉमन मुद्दा है जो कि सीमांचल और बंगाल में दोनों जगहों पर है। इसके अलावा बार्डर पर सुरक्षा को कैसे मजबूत किया जाए? इन चीजों पर भी मंथन करेंगे। गृह मंत्री के दौरे पर भाजपा ने क्या कहा? भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से हमलोग गृह मंत्री का स्वागत करते हैं। गृह मंत्री का घुसपैठ के मुद्दे पर सख्त रूख है। वह घुसपैठियों को हर हाल में देश के बाहर करना चाहते हैं। आतंकवाद और आतंरिक सुरक्षा पर भी उनका काफी फोकस है। तीन दिवसीय दौरे पर वह इन्हीं मुद्दों पर फोकस करेंगे। तेजस्वी यादव गृह के सीमांचल दौरे पर क्या बोले? तेजस्वी यादव ने गृह मंत्री अमित शाह के सीमांचल दौरे पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर की जा रही राजनीतिक कवायद है। उन्होंने कहा कि घुसपैठ कोई वास्तविक मुद्दा नहीं है और इससे पहले भी झारखंड व बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान इस मुद्दे को उठाया गया था। अब बंगाल चुनाव में इस मुद्दे को उठाकर जनता को भटकाने की कोशिश की जा रही है।

भारतीय पहलवान सुजीत कलकल ने अल्बानिया में लहराया तिरंगा, रैंकिंग सीरीज में स्वर्ण पदक हासिल

तिराना अंडर-23 विश्व चैंपियन सुजीत कलकल ने मुहामेट मालो 2026 कुश्ती टूर्नामेंट में पुरुषों की 65 किग्रा फ्रीस्टाइल कैटेगरी में स्वर्ण पदक जीता। 23 साल के भारतीय पहलवान ने फाइनल में अजरबैजान के राशिद बाबाजादे को 10-0 से हराया। उन्होंने क्वार्टर फाइनल में जॉर्जिया के नीका जकाशविली को 10-0 से हराने और अल्बानिया के एंड्रियो अवदली पर 16-4 की जीत के साथ अपने कैंपेन की शुरुआत करने के बाद सेमीफाइनल में अमेरिका के दो बार के पैन अमेरिकन चैंपियन जोसेफ मैककेना पर 11-0 से शानदार जीत हासिल की। इस महीने की शुरुआत में क्रोएशिया में जाग्रेब ओपन जीतने के बाद, यह 2026 यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग रैंकिंग सीरीज में उनका लगातार दूसरा स्वर्ण पदक है। सुजीत ने एंड्रियो अवदली पर 16-4 से जीत के साथ वार्म अप किया, जिन्होंने बाउट की शुरुआत में भारतीय खिलाड़ी को चार अंक पर पटक दिया था। नीका जकाशविली (जॉर्जिया) अगले 10-0 से हार गए, इससे पहले सुजीत ने जोसेफ मैककेना (अमेरिका) को 11-0 से हराया, यह स्कोर जाग्रेब ओपन के सेमीफाइनल जैसा ही था। राशिद, जिन्होंने सेमीफाइनल में विटाली अरुजाउ (अमेरिका) के खिलाफ 16-13 से जीत हासिल की थी, वे फाइनल में मुकाबला नहीं कर पाए। सुजीत ने उन्हें 10-0 से हराकर लगातार दूसरा रैंकिंग सीरीज स्वर्ण पदक जीता। कुल मिलाकर, यह यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग रैंकिंग सीरीज सर्किट में सुजीत का चौथा स्वर्ण पदक था। इससे पहले उन्होंने 2022 जैहैर शघायर और 2025 पोलाक इमरे और वर्गा जानोस मेमोरियल में टॉप स्थान हासिल किया था। इसी कैटेगरी में हिस्सा ले रहे भारत के मोहित कुमार क्वालिफाइंग राउंड से आगे नहीं बढ़ पाए। 57 किग्रा श्रेणी में अंकुश और आतिश टोडकर ने कांस्य पदक तक पहुंचने के लिए रेपेचेज में मुकाबला किया, लेकिन अपने-अपने मैचों में हार गए। इस बीच, सुमित (57 किग्रा), राहुल (61 किग्रा), सिद्धार्थ (70 किग्रा), परविंदर (74 किग्रा), और आर्यन (86 किग्रा) अपने-अपने वेट डिवीजन में मेडल राउंड तक पहुंचने में नाकाम रहे। भारत ने मुहामेट मालो 2026 के लिए 48 सदस्यों की कुश्ती टीम भेजी थी, जिसमें पुरुषों की फ्रीस्टाइल, महिलाओं की डिवीजन और ग्रीको-रोमन कैटेगरी में 16-16 लोग शामिल थे।  

आश्रम में त्रासदी: 250 बच्चों में से 11 की मौत, गंभीर हालत में 50+ बच्चे; हाईकोर्ट ने की कार्रवाई

उज्जैन  उज्जैन के अंबोदिया स्थित अंकित सेवाधाम आश्रम में 20 नवंबर 2025 से 10 जनवरी 2026 के बीच डेढ़ माह में 11 बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। मृतकों में अधिकांश बच्चे बहु-दिव्यांग थे और 10 से 18 वर्ष आयु वर्ग के थे। सभी बच्चों को गंभीर हालत में इलाज के लिए जिला अस्पताल उज्जैन लाया गया था, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हुई। हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, अधिकारियों को नोटिस जारी सेवाधाम आश्रम में बीते एक साल में कुल 17 बच्चों की मौत की जानकारी सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने मामले में संज्ञान लिया। कोर्ट ने मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास प्रमुख सचिव, आयुक्त, कलेक्टर उज्जैन, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी और आश्रम अधीक्षक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है। कोर्ट ने आश्रम की निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को निर्धारित की गई है। दिसंबर और जनवरी में लगातार हुई मौतें शासकीय चरक अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार दिसंबर 2025 में 8 बच्चों और जनवरी 2026 में अब तक 2 बच्चों की मौत दर्ज की गई है। सभी मामलों में पोस्टमॉर्टम कराया गया और पुलिस की मौजूदगी में प्रक्रिया पूरी की गई। चरक भवन अस्पताल में कराया गया पोस्टमॉर्टम मृत सभी बच्चों का पोस्टमॉर्टम शासकीय चरक भवन अस्पताल के पोस्टमॉर्टम रूम में थाना भैरवगढ़ पुलिस की मौजूदगी में कराया गया। अस्पताल के आरएमओ डॉ. चिन्मय चिंचोलेकर ने बताया कि बच्चों को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। कुछ बच्चों को मृत अवस्था में लाया गया, जबकि कुछ की इलाज के दौरान मौत हुई। अधिकांश मौतों में एनीमिया बीमारी सामने आई है। आश्रम में 250 बच्चे, 50 से अधिक की हालत गंभीर अंकित सेवाधाम आश्रम में वर्तमान में करीब 250 निराश्रित और दिव्यांग बच्चे रह रहे हैं। आश्रम संचालक सुधीर भाई गोयल ने बताया कि इनमें से 50 से अधिक बच्चों की हालत गंभीर है। उन्होंने कहा कि आश्रम में आने वाले अधिकांश बच्चे पहले से ही गंभीर बीमारियों से पीड़ित होते हैं। कई बच्चे ऐसे हैं जो चलने, उठने या स्वयं भोजन करने में सक्षम नहीं हैं। इंदौर के युग पुरुष धाम आश्रम से 86 बच्चों को किया गया था शिफ्ट करीब 1.5 साल पहले इंदौर के युग पुरुष धाम आश्रम में बच्चों की मौत और बीमारी के मामले के बाद प्रशासन ने आश्रम की मान्यता रद्द कर दी थी। इसके बाद वहां रह रहे 86 दिव्यांग बच्चों को उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में शिफ्ट किया गया था। मृतकों में अधिकांश बच्चे उसी आश्रम से लाए गए थे। आश्रम संचालक ने बताया पहले से बीमार थे बच्चे आश्रम संचालक सुधीर भाई गोयल ने बताया कि जिन बच्चों की मौत हुई, वे पहले से गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे। कई बच्चों को सांस लेने में परेशानी, खून की कमी और अन्य बीमारियां थीं। उन्होंने बताया कि आश्रम में आने वाले बच्चों का इलाज पहले से विभिन्न स्थानों पर चल रहा होता है और उनकी गंभीर स्थिति के कारण उन्हें आश्रम में रखा जाता है।

श्रीलंका की हार के बाद कप्तान दासुन शनाका की अनोखी अपील, बोले- सरकार करे हस्तक्षेप

कोलंबो श्रीलंका के कप्तान दासुन शनाका ने कहा कि उनकी टीम के टी20 विश्व कप से बाहर होने के लिए केवल फिटनेस और फॉर्म ही एकमात्र कारण नहीं थे, बल्कि इसके लिए 'बाहर का नकारात्मक माहौल' भी जिम्मेदार रहा। इसके अलावा उन्होंने सरकार से खिलाड़ियों को आलोचना से बचाने के लिए हस्तक्षेप करने की अजीबोगरीब मांग की। शनाका ने टी20 विश्व कप के सुपर आठ के मैच में न्यूजीलैंड से हारकर बाहर होने के बाद अपने देशवासियों से माफी मांगी और कहा कि वे उन्हें खुशी देने में असफल रहे। सह मेजबान श्रीलंका करो या मरो मुकाबले में न्यूजीलैंड से 61 रन से हार गया। इससे पहले वह इंग्लैंड से 51 रन से हार गया था, जिससे पाकिस्तान के खिलाफ उसका आखिरी मैच उसके लिए औपचारिक रह गया है। शनाका ने मैच के बाद संवाददाताओं से कहा, ''खिलाड़ी होने के कारण हमारे लिए बाहर हो रही बातों को नियंत्रित करना मुश्किल होता है। हम अधिकतर समय नकारात्मक बातें ही सुनते हैं। चाहे हम खिलाड़ी कितने भी सकारात्मक क्यों न हों, बाहर से नकारात्मक माहौल बन ही जाता है।'' उन्होंने कहा, ''यह श्रीलंका में क्रिकेट के लिए बड़ा नुकसान है। इस तरह की नकारात्मकता क्यों फैलाई जा रही है। ठीक है हम वर्ल्ड कप हार गए। हमें कारण पता हैं। हम सभी चिंतित हैं।'' शनाका ने कहा, ''मुझे लगता है कि हम खेलेंगे और आगे बढ़ेंगे। लेकिन कम से कम भविष्य के खिलाड़ियों के लिए अगर सरकार हस्तक्षेप करके इन्हें (नकारात्मक बातों को) रोक सकती है तो मुझे लगता है कि यह खिलाड़ियों के बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत मददगार साबित होगा।'' श्रीलंका के कप्तान ने हालांकि टीम के लचर प्रदर्शन के लिए अपने देशवासियों से माफी मांगी। उन्होंने कहा, ''हमें इसका बहुत अफसोस है। इंग्लैंड के खिलाफ मैच भी ऐसा ही था जिसे हम जीत सकते थे। अगर हम थोड़ा और समझदारी से खेलते तो वह मैच भी जीत सकते थे। यह मैच एकतरफा था। प्रशंसकों के लिए मेरे पास कहने को कुछ नहीं है। हमने उन्हें ऐसी कोई जीत नहीं दी जिस पर वे खुश हो सकें।'' उन्होंने कहा, '' हमारा एक मैच बाकी है और मुझे उम्मीद है कि कप्तान के तौर पर मैं कम से कम टूर्नामेंट का अच्छा समापन करूंगा।'' शनाका ने कहा कि यहां की पिचें उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहीं। उन्होंने कहा, ''टूर्नामेंट शुरू होने से पहले मैंने यह भी कहा था कि मुझे उम्मीद है कि विकेट अच्छे होंगे। श्रीलंका के पास जो सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज हैं, वे टीम में हैं। घरेलू क्रिकेट से उन खिलाड़ियों को चुना गया है जिनका स्ट्राइक रेट अच्छा है और जिनमें खेलने की क्षमता है। यहां किसी को भी क्रिकेट खेलने के लिए मजबूर नहीं किया जा रहा है। हम भी देश के लिए कुछ करना चाहते हैं।'' शनाका ने कहा, '' जो कुछ हुआ उसके लिए हमें बहुत खेद है। कोई हारना नहीं चाहता। हर कोई अच्छा खेलने और टीम को जीत दिलाने के इरादे से मैदान पर उतरता है। कभी-कभी हम उन छोटी-छोटी गलतियों की वजह से मैच हार जाते हैं जिनके बारे में हम सोचते भी नहीं। इसलिए हमें इसका बहुत अफसोस है, एक खिलाड़ी के तौर पर हमें हारने पर बहुत दुख होता है।'' शनाका को लगता है कि श्रीलंकाई खिलाड़ियों की फिटनेस विश्व क्रिकेट के मानकों के अनुरूप नहीं है। इसके अलावा कुछ खिलाड़ियों के चोटिल होने से भी टीम को नुकसान हुआ। उन्होंने कहा, ''हमारे लगभग चार से पांच खिलाड़ी चोटिल हैं, हमारे सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बाहर हैं। इसलिए हमें फिटनेस को लेकर कुछ समस्याएं हैं। मेरा मानना ​​है कि देश के लिए खेलते समय फिटनेस सर्वोपरि होनी चाहिए। इस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।'' शनाका को पक्का भरोसा नहीं है कि इस हार के बाद वह अपनी कप्तानी बरकरार रख पाएंगे या नहीं। उन्होंने कहा, ''मैं नहीं जानता कि मैं कितने समय तक कप्तान बना रहूंगा। इसका फैसला श्रीलंका क्रिकेट और चयनकर्ताओं को करना है लेकिन मुझे खुशी है कि मुझे इतने लंबे समय तक कप्तानी करने का अवसर मिला। मुझे खुशी है कि मुझे कप्तान के रूप में विश्व कप में खेलने का मौका मिला।''  

MDMA निर्माण का बड़ा नेटवर्क फटा मंदसौर में, जब्त 1886 किलो केमिकल, 100 किलो ड्रग्स बनने से बचाई गईं जानें

मंदसौर  वायडी नगर पुलिस ने विजय हाउसिंग सोसायटी के एक किराए के मकान में चल रही एमडी ड्रग्स बनाने की बड़ी साजिश का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मौके से 1886.6 किलो घातक केमिकल जब्त किया है। जांच में टीसीएसए, एमएमए और एसिटोलोन जैसे रसायनों की पुष्टि हुई. प्रतापगढ़ निवासी आरोपी श्रेयांस मोगरा ने 1 जनवरी 2026 को खुद को लहसुन-प्याज का व्यापारी बताकर यह मकान लिया था। आरोपी वर्तमान में तस्करी के एक अन्य मामले में प्रतापगढ़ जेल में बंद है। मामला तब खुला जब मकान मालकिन ललिता जैन ने मकान खाली कराने के लिए पुलिस को आवेदन दिया। एसपी विनोद कुमार मीना के निर्देशन में टीम ने ताला तोड़ा तो 10 ड्रमों में केमिकल का स्टॉक मिला। पुलिस आरोपी को प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार करेगी। एमडीएमए के खिलाफ 3 साल में दर्जनों कार्रवाई ड्रग तस्करों ने अफीम, हीरोइन, ब्राउन शुगर और डोडा चूरा की तस्करी के अलावा अब नए और खतरनाक ड्रग एमडीएमए को स्थानीय तौर पर बनाने की छोटी-छोटी फैक्ट्रियां तैयार कर ली हैं. तस्कर इसे दुनिया भर के बाजारों में खपाने की कोशिश कर रहे हैं. पिछले 3 सालों के दौरान मध्य प्रदेश के मालवा इलाके के मंदसौर, नीमच और रतलाम जिलों के अलावा राजस्थान के झालावाड़, चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ जिलों में एमडीएमए बनाने की दर्जनभर से ज्यादा फैक्ट्रियां पकड़ी गई. हाल ही में रतलाम जिले के ग्राम चिकलाना में भारी मात्रा में एमडीएमए की ड्रग बनाने की एक बड़ी फैक्ट्री पर कार्रवाई हुई. यहां चंदन और राष्ट्रीय पक्षी मोर की तस्करी करने का भी खुलासा किया गया. इसके पहले भोपाल में एमडीएमए बनाने की फैक्ट्री पकड़ी गई थी. उसके कनेक्शन भी मंदसौर जिले से मिलने की बात सामने आई थी. इसी तरह नीमच जिले में भी पिछले 2 सालों के दौरान 4 बड़ी कार्रवाई हुई है. जिनमें पुलिस ने 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया था. 2025 में 448 आरोपियों की गिरफ्तारी 6 अक्टूबर 2024 को भोपाल में 1814 करोड़ की एमडीएमए बनाने की फैक्ट्री जब्त कर आरोपी को गिरफ्तार किया था. इस मामले के कनेक्शन मंदसौर से जुड़े हुए होने की बात सामने आई थी. पिछले साल 2025 अफीम, हीरोइन, ब्राउन शुगर, स्मैक और डोडा चूरा की तस्करी के मामलों में एनडीपीएस एक्ट की धाराओं के तहत 166 प्रकरण दर्ज किए. जिसमें 448 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई. 295 करोड़ की संपत्ति फ्रिज पुलिस ने इन मामलों में 13273 किलो डोडा चूरा, 61 किलो अफीम, 7 किलो एमडीएमए ड्रग, 2011 किलो गांजा, 55 ग्राम स्मैक, 2 किलो अल्फा झेलम केमिकल जब्त करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया. जिनके कानूनी प्रकरण अभी देश की विभिन्न न्यायालय में चल रहे हैं. इस मुहिम में मंदसौर पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए इन तस्करों की अवैध संपत्तियों पर कानून के तहत कार्रवाई करते हुए 295 करोड़ की संपत्ति फ्रीज की है. साथ ही इस कानून के अंतर्गत बड़े तस्करों पर नकेल कसने के लिए पुलिस ने अभी 7 तस्करों के खिलाफ देश की विभिन्न कोर्ट में प्रकरण प्रस्तुत किए हैं.

कैमरा फिल्टर की जरूरत नहीं! इन 5 मेकअप ट्रिक्स से आंखें लगेंगी बड़ी और अट्रैक्टिव

बड़ी और चमकदार आंखें हर चेहरे की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देती हैं। ऐसी आंखें न सिर्फ अट्रैक्टिव दिखती हैं, बल्कि पर्सनेलिटी में एक अलग ही निखार लाती हैं। हर किसी की आंखें नेचुरली बड़ी नहीं होतीं। अगर आपकी आंखें छोटी हैं या थकी हुई दिखती हैं, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। कुछ आसान और स्मार्ट मेकअप ट्रिक्स अपनाकर आप अपनी आंखों को बड़ा, ब्राइट और अधिक डिफाइन्ड लुक दे सकती हैं। यहां कुछ असरदार मेकअप हैक्स, की जानकारी दी गई है जो आपकी आंखों को देंगे इंस्टेंट बिग-आई इफेक्ट।  आइए जानते हैं इनके बारे में वॉटरलाइन पर न्यूड या व्हाइट काजल लगाएं काले काजल की जगह वॉटरलाइन पर न्यूड या सफेद काजल पेंसिल का इस्तेमाल करें। इससे आंखें खुली-खुली और ज्यादा बड़ी लगती हैं। यह ट्रिक खासकर तब बहुत असरदार होती है जब आपकी आंखें थकी हुई या छोटी दिख रही हों। इनर कॉर्नर को हाइलाइट करें आंखों के अंदरूनी कोने यानी इनर कॉर्नर पर शिमर या हाइलाइटर लगाने से आंखों को ब्राइटनेस मिलती है और वे ज्यादा ओपन दिखाई देती हैं। यह मेकअप ट्रिक आंखों को तुरंत जगमगाहट देती है। आईलैश कर्ल करें और मस्कारा लगाएं आईलैश कर्लर का इस्तेमाल करें और फिर अच्छी क्वालिटी का मस्कारा लगाएं। यह न केवल पलकों को लंबा और घना दिखाता है, बल्कि आंखों को भी बड़ा लुक देता है। स्मार्ट आईलाइनर का इस्तेमाल करें आईलाइनर को पूरा आंखों के चारों ओर लगाने से आंखें छोटी लग सकती हैं। बेहतर होगा कि आप विंग्ड लाइनर या स्मज्ड लाइन का इस्तेमाल करें। इससे आंखें लंबी और खुली नजर आती हैं। क्रीज एरिया पर मीडियम टोन आईशैडो लगाएं क्रीज एरिया पर मीडियम टोन आईशैडो लगाने के लिए, पहले एक साफ और तैयार पलक पर आईशैडो प्राइमर लगाएं। इसके बाद ब्राउन, टॉपी या मीडियम टोन शेड्स का इस्तेमाल क्रीज लाइन पर करें और अच्छी तरह ब्लेंड करें। यह आंखों को डेप्थ देता है, जिससे वे ज्यादा बड़ी और डीप लगती हैं। आईब्रो को सही शेप दें आईब्रो का अच्छा आर्च शेप आंखों को उठे हुए लुक में मदद करता है। साफ-सुथरी, घनी और संतुलित आईब्रो आंखों की फ्रेमिंग को बेहतर बनाती हैं। कंसीलर से डार्क सर्कल छुपाएं डार्क सर्कल्स आंखों को छोटा और थका हुआ दिखाते हैं। अच्छे कंसीलर से अंडरआई एरिया को ब्राइट करें, जिससे आंखें फ्रेश और बड़ी लगें। फॉल्स लैशेज का सहारा लें (ऑप्शनल) अगर किसी खास मौके पर ड्रमैटिक लुक चाहिए, तो नेचुरल लुक वाली फाल्स आईलैशेज लगाएं। इससे आपकी आंखें इंस्टेंटली बड़ी और ग्लैमरस दिखेंगी।

भगोरिया हाट में मची उत्सव की रौनक, युवा और बुजुर्ग पारंपरिक अंदाज में हुए शामिल

धूलकोट  जिले के धूलकोट में  आदिवासी लोक संस्कृति के प्रमुख पर्व भगोरिया हाट का आयोजन उत्साह और उल्लास के साथ किया गया। मेले में आसपास के ग्रामीण अंचलों से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के महिला-पुरुष, युवा और बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में सजे-धजे पहुंचे। रंग-बिरंगे परिधानों और पारंपरिक आभूषणों से सुसज्जित युवक-युवतियों की छटा देखते ही बन रही थी। कई युवा और बालिकाएं एक समान वेशभूषा में समूह बनाकर मेले की रौनक बढ़ाते नजर आए।  मेले में खानपान की दुकानों पर भी अच्छी-खासी भीड़ रही। जलेबी, गुड़, सेव, भजिया सहित पारंपरिक व्यंजनों का लोगों ने परिवार सहित आनंद लिया। वहीं कुल्फी, लस्सी और बर्फ के गोले का स्वाद लेते युवाओं की टोलियां खासा उत्साहित दिखीं। परिवार और मित्रों के साथ पहुंचे लोगों ने मेले के पलों को मोबाइल कैमरों में कैद किया और जमकर सेल्फी ली। होली पर्व को ध्यान में रखते हुए हार, कंकण, खजूर, चना और रंग-गुलाल की दुकानों पर भी खरीदारों की भीड़ उमड़ी। महिलाओं ने पारंपरिक आभूषणों की खरीदारी की, जबकि बच्चों ने खिलौनों की दुकानों पर मोलभाव किया। मेले में मिकी माउस झूला, आकाश झूला, जहाज झूला और जंपिंग झूलों का बच्चों व युवाओं ने भरपूर आनंद उठाया। कई बालिकाएं हाथों में अपना नाम गुदवाती नजर आईं, वहीं परिवारों ने फोटो स्टूडियो में समूह फोटो खिंचवाकर इस दिन को यादगार बनाया। मादल और ढोल-मांडल की थाप पर बच्चे, युवा, बुजुर्ग और महिलाएं पारंपरिक नृत्य में थिरकते दिखाई दिए। पूरे हाट परिसर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा। समाजजनों ने एक-दूसरे को भगोरिया हाट और होली पर्व की शुभकामनाएं दीं। उल्लेखनीय है कि गुरुवार को सतपुड़ा के वनांचल ग्राम काबरी में भी भगोरिया हाट का आयोजन होगा, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीणों के पहुंचने की संभावना है। 

मार्च में टेट परीक्षा करवाएगी पंजाब सरकार

चंडीगढ़. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर देश भर में 2011 टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टैट) ज़रूरी होने से पहले भर्ती हुए टीचरों को अब अपनी नौकरी बचाने टैट की परीक्षा पास करना अनिवार्य है। कई राज्यों ने परीक्षा ले भी ली है। वहीं, पंजाब इसके लिए कानूनी विकल्प की तलाश कर रहा है। पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस का कहना हैं, सरकार टीचरों के साथ खड़ी है। इसके लिए कानूनी विकल्प ढूंढे जा रहे हैं। क्योंकि इस फैसले के कारण पंजाब के 50 फीसदी स्कूलों में प्रिंसिपलों को नहीं लगाया जा सकता है। क्योंकि शिक्षकों की तरक्की प्रभावित हुई है। वहीं सीधी भर्ती पर भी प्रभाव पड़ा है।  पंजाब भवन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए हरजोत बैंस ने कहा कि सरकार टैट परीक्षा करवाने के लिए तैयार है। इसे मार्च माह में करवाया जा सकता है। साथ की सरकार रिव्यू पिटीशन डालने के कानूनी प्रावधानों की भी तलाश कर रही है। 40 हजार के करीब टीचर प्रभावित बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से राज्य के 19,000 से ज्यादा सरकारी स्कूलों में काम कर रहे एक लाख से अधिक टीचरों में से करीब 40,000 टीचर प्रभावित होंगे। रिटायरमेंट से पहले जिनकी सर्विस पांच साल से कम बची है, उन्हें इससे छूट दी गई है। यह आदेश उन लोगों के प्रमोशन पर भी रोक लगाता है जो टेस्ट पास नहीं कर पाते हैं। सरकार कानूनी विकलप ढूंढ रही मंत्री ने कहा कि वह नहीं चाहते कि 20-25 साल से पढ़ाने वाले शिक्षकों की नौकरी जाए। इसलिए सरकार कानूनी विकल्प ढूंढ रही है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पहले पंजाब सरकार ने भी फरवरी माह में टैट की परीक्षा करवाने की तैयारी की थी लेकिन अब इसे मार्च माह में करवाया जा सकता है। बता दें कि कई राज्यों में टैट परीक्षा की प्रक्रिया या तो पूर्ण हो गई है या अंतिम चरण में हैं। बता दें कि कोर्ट के आदेश के मुताबिक 2011 से पहले भर्ती हुए टीचरों को 31 अगस्त, 2027 तक यह टेस्ट पास करना होगा। अन्यथा उन्हें सेवा मुक्त कर दिया जाएगा।

आचार्य चाणक्य का रहस्य: जो माता-पिता अपनाते हैं ये 5 काम, उनकी संतान बनती है महान

हर माता-पिता चाहते हैं कि उनकी संतान जीवन में सफल बने, सम्मान पाए और एक मजबूत इंसान के रूप में अपनी पहचान बनाए। इसके लिए केवल अच्छी पढ़ाई या पैसा ही काफी नहीं होता, बल्कि सही परवरिश, मजबूत संस्कार और सही मार्गदर्शन की जरूरत होती है। आचार्य चाणक्य ने सदियों पहले संतान के पालन-पोषण को ले कर ऐसे स्पष्ट और व्यवहारिक सूत्र बताए, जो आज भी उतने ही उपयोगी हैं। यदि आप इन बातों को अपने जीवन में अपनाते हैं तो आप अपने बच्चे को केवल सफल ही नहीं बल्कि एक बेहतर इंसान भी बना सकते हैं। चलिए जानते है आचार्य चाणक्य द्वारा बताए गए ये सूत्र क्या है। शुरुआत से ही संस्कार और अनुशासन सिखाएं आचार्य चाणक्य के अनुसार बच्चे के जीवन के पहले पांच वर्ष बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इस समय आपको उसे भरपूर प्रेम देना चाहिए। प्यार से बच्चा भावनात्मक रूप से मजबूत बनता है और उसके अंदर आत्मविश्वास बढ़ता है। इसके बाद अगले दस वर्षों में उसे अनुशासन सिखाएं। उसे सही और गलत का अंतर समझाएं। नियमों का महत्व बताएं और जिम्मेदारी लेना सिखाएं। जब बच्चा सोलह वर्ष का हो जाए, तो उसके साथ मित्र जैसा व्यवहार करें। उस पर हुक्म चलाने के बजाय उसे समझें, उसकी बात सुनें और मार्गदर्शन दें। इससे वह आपसे खुलकर बात करेगा और गलत रास्ते पर जाने की संभावना कम होगी। शिक्षा को सबसे बड़ा धन मानें चाणक्य कहते हैं कि ज्ञान सबसे बड़ा धन है, जिसे कोई चुरा नहीं सकता। इसलिए केवल स्कूल की पढ़ाई पर ध्यान देना काफी नहीं है। अपने बच्चे को जीवन से जुड़ी बातें भी सिखाएं। उसे समझाएं कि कैसे सही निर्णय लेना है, कैसे लोगों से व्यवहार करना है और कठिन परिस्थिति में कैसे शांत रहना है। उसे सवाल पूछने दें और उसकी सोचने की क्षमता बढ़ाएं। जब बच्चा समझदारी से फैसले लेना सीख जाता है, तब वह जीवन में आगे बढ़ता है और गलतियों से भी सीखता है। बच्चे के चरित्र निर्माण पर ध्यान दें धन, पद और शोहरत समय के साथ बदल सकते हैं लेकिन चरित्र जीवनभर साथ रहता है। इसलिए बचपन से ही बच्चे में सच्चाई, ईमानदारी और मेहनत की आदत डालें। उसे बताएं कि गलत रास्ते से मिली सफलता टिकाऊ नहीं होती। जब बच्चा सच बोलने और सही काम करने की आदत डाल लेता है, तो वह हर परिस्थिति में मजबूत बना रहता है। आप खुद भी अपने व्यवहार से उदाहरण पेश करें क्योंकि बच्चे वही सीखते हैं जो वे घर में देखते हैं। संगति पर नजर रखें बच्चा किन लोगों के साथ समय बिताता है, इसका उसके स्वभाव और सोच पर गहरा असर पड़ता है। इसलिए उसकी संगति पर ध्यान देना जरूरी है। उसे अच्छे दोस्तों का महत्व समझाएं। यदि आप देखें कि वह गलत संगति में जा रहा है, तो डांटने के बजाय प्यार से समझाएं। उसके मित्रों को जानने की कोशिश करें और ऐसा माहौल बनाएं कि वह आपसे हर बात साझा कर सके। अच्छी संगति बच्चे को आगे बढ़ाती है और उसे सही दिशा देती है। आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है अत्यधिक लाड़-प्यार बच्चे को कमजोर बना सकता है। आप अपने बच्चे को हर छोटी समस्या से बचाने के बजाय उसे समस्याओं का सामना करना सिखाएं। उसे छोटे-छोटे निर्णय खुद लेने दें। जब वह गलती करे तो उसे समझाएं, लेकिन हर बार उसकी जगह खुद फैसला ना लें। इससे उसका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वह जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार होगा। आत्मनिर्भर बच्चा ही आगे चलकर मजबूत और सफल इंसान बनता है।