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आज का राशिफल (28 फरवरी 2026): मेष से मीन तक, जानें किसकी किस्मत पर होगी रोशनी

मेष राशि- मन थोड़ा बेचैन रह सकता है। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आ सकता है, इसलिए रिएक्शन देने से पहले एक बार सोच लेना बेहतर रहेगा। काम में ध्यान भटकेगा, लेकिन अगर एक काम पकड़ लिया तो पूरा करके ही छोड़ोगे। पैसों में ठीक-ठाक बैलेंस बना रहेगा, फालतू खर्च से बचो। घर में किसी की बात बुरी लग सकती है, बात को दिल पर मत लो। सेहत में सिर दर्द या आंखों में जलन हो सकती है, पानी ज्यादा पिएं। वृषभ राशि- माहौल आपके फेवर में रहेगा। काम में पॉजिटिव फील आएगी और लोगों से सपोर्ट मिलेगा। बिजनेस या नौकरी में कोई पुराना अटका काम आगे बढ़ सकता है। घर-परिवार में बातचीत से गलतफहमी दूर हो सकती है। पैसों को लेकर थोड़ी टेंशन रहेगी, लेकिन दिन के आखिर तक बात संभल जाएगी। खाने-पीने में लापरवाही मत करो, पेट से जुड़ी दिक्कत हो सकती है। मिथुन राशि- दिमाग तेज चलेगा। नए आइडिया आएंगे और लोगों से बात करके चीजें क्लियर होंगी। ऑफिस या काम की जगह पर किसी से हेल्प मिल सकती है। अधूरे काम निपटाने का अच्छा दिन है। फोन, मैसेज या कॉल से कोई अच्छी खबर मिल सकती है। खर्च सोच-समझकर करना ठीक रहेगा। थोड़ी थकान या नींद की कमी महसूस हो सकती है, आराम के लिए टाइम निकालें। कर्क राशि- भावनाएं थोड़ी ज्यादा हावी रहेंगी। किसी अपने की बात दिल को लग सकती है। बेवजह सोचने से बचो और जो जरूरी है उसी पर ध्यान दो। काम में मन कम लगेगा, लेकिन जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी। पैसों को लेकर कोई छोटा फैसला लेना पड़ सकता है। घर का माहौल ठीक रहेगा अगर आप शांत रहोगे। सेहत में गैस या पेट भारी लग सकता है। सिंह राशि- कॉन्फिडेंस अच्छा रहेगा। लोग आपकी बात सुनेंगे और आपकी इमेज मजबूत होगी। काम में लीड लेने का मौका मिल सकता है। अगर किसी से नाराजगी चल रही है तो बात करके सुलझ सकती है। पैसों के मामले में थोड़ा संभलकर चलो, उधार या बेकार की खरीदारी से बचो। शरीर में एनर्जी रहेगी, लेकिन थकान भी जल्दी हो सकती है। कन्या राशि- कामकाज में फोकस बना रहेगा। जो ठान लोगे, उसे पूरा करने का मन रहेगा। सीनियर या बड़े लोगों से फायदा मिल सकता है। घर में किसी जरूरी काम की जिम्मेदारी मिल सकती है। पैसों में स्थिरता रहेगी, लेकिन किसी को उधार देने से पहले सोच लो। सेहत में घुटनों या पैरों में दर्द हो सकता है, ज्यादा भागदौड़ से बचें। तुला राशि– काम का प्रेशर ज्यादा रह सकता है। छोटी-छोटी बातों में उलझने से दिन खराब हो सकता है, इसलिए प्रैक्टिकल रहो। ऑफिस या बिजनेस में कोई पुराना काम फिर से सामने आ सकता है। घर में किसी बड़े की बात मान लेना ही सही रहेगा। पैसों को लेकर प्लान बनाना फायदेमंद रहेगा। सेहत में कमर या पैरों में हल्का दर्द हो सकता है। वृश्चिक राशि- दिमाग में कई बातें चलेंगी। नए प्लान बनेंगे, लेकिन सब एक साथ करने की कोशिश मत करना। काम में थोड़ा कन्फ्यूजन रहेगा, किसी भरोसे वाले से सलाह ले लो। पैसों में ठीक-ठाक स्थिति रहेगी। दोस्तों से बातचीत से मन हल्का होगा। सेहत में नींद पूरी न होने से सिर भारी लग सकता है। धनु राशि- रिश्तों में बैलेंस बनाकर चलना जरूरी है। किसी से बहस हो सकती है, लेकिन समझदारी से बात संभल जाएगी। काम में टीमवर्क से फायदा होगा। पैसों में स्थिरता रहेगी, लेकिन फालतू खर्च मन को ललचाएगा। किसी दोस्त से मिलना या बात करना अच्छा फील देगा। सेहत ठीक रहेगी, बस ज्यादा देर तक मोबाइल देखने से आंखों में दर्द हो सकता है। मकर राशि- मन थोड़ा भारी रह सकता है। पुरानी बातें याद आ सकती हैं या किसी की कमी महसूस हो सकती है। काम में मन कम लगेगा, लेकिन जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी। पैसों में अचानक खर्च सामने आ सकता है। घर में किसी से खुलकर बात करोगे तो मन हल्का होगा। सेहत में थकान या बॉडी पेन हो सकता है, आराम जरूरी है। कुंभ राशि- मूड बेहतर रहेगा। बाहर निकलने या कुछ नया करने का मन बनेगा। काम में नई जिम्मेदारी मिल सकती है या कोई नया मौका दिख सकता है। दोस्तों से बातचीत से मन खुश होगा। पैसों में सुधार दिखेगा, लेकिन सेविंग पर भी ध्यान देना जरूरी है। सेहत में हल्की थकान के अलावा कुछ खास दिक्कत नहीं दिखती। मीन राशि- मन शांत रहेगा। अपने काम में लगे रहोगे और बेवजह की बातों से दूरी बनाकर रखोगे। काम में धीरे-धीरे सही दिशा बनेगी। घर-परिवार का साथ मिलेगा। पैसों में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं रहेगा। सेहत ठीक रहेगी, बस पानी कम पीने से कमजोरी महसूस हो सकती है।

धर्मांतरण रोकने के लिए कानून की मांग तेज, बिहार विधानसभा में 18 विधायकों का जोरदार उठान

पटना बिहार में 'धर्मांतरण' के खिलाफ सख्त कानून बनाने की मांग उठी है। इस संबंध में बजट सत्र के आखिरी दिन शुक्रवार को विधानसभा में सत्तारूढ़ दल के कई सदस्यों ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव दिया। मैथिली ठाकुर, मिथिलेश तिवारी, वीरेंद्र कुमार, जनक सिंह, संजय कुमार सिंह, जीवेश कुमार, तार किशोर प्रसाद और बैद्यनाथ प्रसाद समेत सत्ताधारी गठबंधन के 18 विधायकों ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने दूसरे राज्यों की तरह ही बिहार में 'धर्मांतरण' के खिलाफ कानून बनाने की मांग की। विधायकों ने कहा कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों ने धर्म बदलने के खिलाफ कानून लागू किए हैं। इन कानूनों में धोखाधड़ी से धर्मांतरण, बाल विवाह या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने के मामलों में एक से 10 वर्ष या कुछ मामलों में 20 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। सत्तापक्ष के विधायकों ने यह भी दावा किया कि बिहार के कुछ हिस्सों में डेमोग्राफी बदली है, जिसे देखते हुए कानूनी दखल की जरूरत है। उन्होंने सीमावर्ती जिलों के हालात पर चिंता जताई और आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन हो रहा है। भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने कहा, "उत्तर प्रदेश में सख्त कानून हैं और बिहार में भी ऐसा ही कानून बनना चाहिए। अकेले बक्सर में 1,000 दलित परिवारों ने धर्म परिवर्तन किया है। इसलिए, इस धर्मांतरण विरोधी कानून की जरूरत है। सरकार को इस पर सोचना चाहिए।" कुछ विधायकों ने बिहार में आबादी बढ़ने और चर्च बनने के आंकड़ों का हवाला दिया। इसके साथ ही आरोप लगाया कि लालच देकर धर्म परिवर्तन हो रहे हैं। कुछ सदस्यों ने धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण के फायदों पर भी सवाल उठाए और अपनी दलीलों में संवैधानिक नियमों का जिक्र किया। पर्यटन और कला एवं संस्कृति मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने विधानसभा में जवाब दिया कि बिहार सरकार के पास अभी धर्म परिवर्तन से जुड़ा कानून लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। मंत्री ने सदन में कहा, "इस समय इससे जुड़ा कोई कानून बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।" वहीं, विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा कि ध्यानाकर्षण प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया है और जरूरत पड़ने पर सरकार मामले की समीक्षा करेगी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर आगे कोई चर्चा नहीं होगी।

वन भवन में विधिक प्रकोष्ठ का हुआ शुभारंभ

भोपाल प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  व्ही.एन. अम्बाडे ने शुक्रवार 27 फरवरी को वन भवन मुख्यालय में वन विभाग विधिक प्रकोष्ठ का शुभारंभ किया गया। विधिक प्रकोष्ठ वन विभाग मध्यप्रदेश की केन्द्रीय संस्थागत इकाई के रूप में कार्य करेगा। प्रकोष्ठ उन समस्त न्यायिक एवं अर्द्ध न्यायिक कार्यवाहियों का प्रबंधन, समन्वय एवं अनुश्रवण करेगा जिनमें विभाग पक्षकार है। साथ ह़ी यह विवादों के रोकथाम के लिये विभागीय कार्यों को सक्रिय कानूनी सहायता प्रदान करेगा। इस अवसर पर समस्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक उपस्थित रहे।  

गांधी परिवार पर गंभीर आरोप, विदेशी फंडिंग-जासूसी मामले में भाजपा का हमला

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने शुक्रवार को भाजपा मुख्यालय पर प्रेसवार्ता कर कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के दौर को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि कुछ विदेशी लेखकों और अभिलेखों में ऐसे उल्लेख हैं, जिन पर कांग्रेस को जवाब देना चाहिए। राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि पॉल मैगॉर की किताब ‘स्पाइंग इन साउथ एशिया’ में यह लिखा गया है कि उस समय भारत की व्यवस्था का शायद ही कोई हिस्सा रहा हो जो अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए की पहुंच से बाहर रहा हो। उन्होंने आरोप लगाया कि पुस्तक में यह भी उल्लेख है कि पोलित ब्यूरो की ओर से कांग्रेस पार्टी को दो मिलियन की राशि दी गई थी। उन्होंने कहा कि ये बातें संबंधित देशों के पूर्व अधिकारियों द्वारा दर्ज की गई हैं। सुधांशु त्रिवेदी ने ‘मित्रोखिन आर्काइव्ज़’ का हवाला देते हुए कहा कि उसमें केजीबी संपर्कों का जिक्र है और दावा किया गया है कि वर्ष 1976 में कांग्रेस पार्टी को दो मिलियन रुपए और बाद में दस लाख रुपए दिए गए थे। उन्होंने कहा कि पचास साल पहले यह रकम बहुत बड़ी मानी जाती थी। भाजपा सांसद ने सवाल किया कि इन पुस्तकों में दर्ज सीधे दावों पर कांग्रेस की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जवाब क्यों नहीं आया है। उन्होंने कच्चातीवू द्वीप को श्रीलंका को सौंपे जाने और 1971 के युद्ध के बाद की परिस्थितियों का भी उल्लेख किया। त्रिवेदी ने कहा कि 93 हजार पाकिस्तानी युद्धबंदियों की रिहाई और 54 भारतीय सैनिकों की वापसी न होने जैसे मुद्दों पर भी देश जवाब चाहता है कि उस समय किन आधारों पर फैसले लिए गए। वहीं, दिल्ली की एक अदालत द्वारा आम आदमी पार्टी के नेताओं अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को कथित आबकारी नीति मामले में बरी किए जाने पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। त्रिवेदी ने कहा कि यदि कोई सबूत नहीं था, तो अदालत ने आरोप तय करने की अनुमति कैसे दी? उन्होंने इसे तकनीकी विषय बताते हुए कहा कि अदालत का विस्तृत फैसला पढ़ने के बाद पार्टी संरचित प्रतिक्रिया देगी। उन्होंने यह भी कहा कि करीब 100 सिम कार्ड और मोबाइल फोन नष्ट होने की बात सामने आई है, जिससे साक्ष्यों की कमी की स्थिति उत्पन्न हुई होगी। त्रिवेदी ने कहा कि मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा और पार्टी निर्णय का विस्तार से अध्ययन करने के बाद अपना पक्ष रखेगी।

सरकार की उपलब्धियों और भविष्य की रूपरेखा का दस्तावेज हुआ जारी

भोपाल  मध्यप्रदेश वन विभाग एवं मध्यप्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा प्रदेश में एशियन वॉटरबर्ड सेंसस-2026 के अंतर्गत की गई पक्षी गणना की राज्य स्तरीय रिपोर्ट का विमोचन शुक्रवार 27 फरवरी को प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  व्ही.एन. अम्बाडे ने किया। एशियन वॉटरबर्ड सेंसस-2026 अंतर्गत पक्षी गणना 3 से 8 जनवरी में प्रदेश में आयोजित की गई, जिसमें जिला स्तर पर वनमंडलाधिकारी के निर्देशन में वन विभाग के मैदानी अमले के साथ स्थानीय स्वयं सेवी संगठन, पक्षीप्रेमी एवं विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रदेश स्तर पर पक्षियों का सर्वेक्षण किया गया। एशियन वॉटरबर्ड सेंसस-2026 की राज्य स्तरीय रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 45 जिलों के कुल 360 स्थलों में पक्षी सर्वेक्षण का कार्य किया गया, जिसके अंतर्गत सूचीबद्ध 412 चेकलिस्टों का विस्तृत अध्ययन किया गया। इसके आधार पर सर्वेक्षण अवधि में प्रदेश में कुल 308 पक्षियों की प्रजातियाँ तथा कुल 96 हजार 495 की संख्या दर्ज की गई। सर्वेक्षण में 24 दुर्लभ, संकटग्रस्त एवं लुप्तप्राय (RET) प्रजातियों- को देखा गया, जिनमें –इंडियन स्कीमर, सारस क्रेन, व्हाइट-रम्प्ड वल्चर, रेड-हेडेड वल्चर, पेंटिड स्टॉर्क, तथा ब्लैक-हेडेड आइबिस जैसी प्रजातियाँ शामिल हैं। साथ ही प्रवासीय पक्षियों की भी कई प्रजातीयां रिपोर्ट में सम्मिलित की गई हैं। राज्य स्तरीय रिपोर्ट में 5 से 15 फरवरी तक हुए वार्षिक चम्बल पक्षी सर्वेक्षण को भी सम्मिलित किया गया है, जिसमें चम्बल क्षेत्र में कुल 141 पक्षी प्रजातियाँ देखी गई हैं। एडब्ल्यूसी-2026 की रिपोर्ट राज्य में पक्षियों की जैव विविधता, आर्द्रभूमियों के उच्च संरक्षण एवं नवीन पहचाने गए संभावित पक्षियों के हॉट स्पॉट के महत्व को दर्शाती है। वन विभाग एवं मध्यप्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा संयुक्त रूप से तैयार यह प्रतिवेदन राज्य में वैज्ञानिक आर्द्रभूमि प्रबंधन, दीर्घकालिक पक्षी मॉनिटरिंग तथा संरक्षण नियोजन के लिए महत्वपूर्ण आधार सिद्ध होगा। इस अवसर पर वन विभाग के समस्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक, समस्त अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, मध्यप्रदेश राज्य जैवविविधता बोर्ड के सदस्य सचिव, एडब्ल्यूसी राज्य समन्वयक, बोर्ड के सहायक सदस्य सचिव एवं तकनीकी विशेषज्ञ और अधिकारी उपस्थित रहे। 

आसमान गिर जाए तो भी न्याय जरूरी — कोर्ट ने केजरीवाल को दी राहत

नई दिल्ली कथित शराब घोटाले में पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल को आरोप मुक्त करते हुए जज जितेंद्र सिंह ने लैटिन कहावत को कोट किया, जिसका मतलब था- न्याय होना चाहिए, चाहे आसमान ही क्यों न गिर जाए। इसके अतिरिक्त उन्होंने अपने फैसले में मार्टिन लूथर किंग जूनियर का भी जिक्र किया है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत अन्य को कथित शराब घोटाला मामले में आरोप मुक्त करते हुए जज जितेंद्र सिंह ने अहम टिप्पणी की है। उन्होंने लैटिन की मशहूर कहावत को कोट करते हुए कहा कि न्याय होना चाहिए, भले ही आसमान क्यों न गिर जाए। साथ ही, मार्टिन लूथ किंग जूनियर को भी कोट किया और कहा कि कहीं भी अन्याय हर जगह न्याय के लिए खतरा है। जज ने कहा कि ये सिद्धांत लगातार याद दिलाते हैं कि अदालत का काम न तो कोई आसान नतीजा निकालना है और न ही किसी हावी कहानी का समर्थन करना है, बल्कि कानून का राज बनाए रखना है। इन आदर्शों पर टिके रहने से ही न्याय के प्रशासन में नागरिकों का भरोसा बना रहता है। इस भरोसे के साथ, और इस जिम्मेदारी को समझते हुए, फाइल को भेजने का निर्देश दिया जाता है। 598 पेज के ऑर्डर में, स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने कहा, "यह कोर्ट एक गंभीर और बार-बार आने वाली दुविधा का सामना कर रहा है, जिसमें PMLA के तहत शुरू किए गए केस की वजह से किसी व्यक्ति की आज़ादी खतरे में पड़ जाती है, यह इस अनुमान पर आधारित है कि कथित रकम एक तय (प्रिडिकेट) अपराध से होने वाली अपराध की कमाई है।" उन्होंने कहा कि यह मुद्दा तब और भी अहम हो जाता है जब एक आरोपी को मनी लॉन्ड्रिंग के जुर्म में गिरफ्तार किया जाता है और उसके बाद उसे बेल देने के लिए तय की गई दो सख्त शर्तों को पार करना होता है, जिसके कारण प्री-ट्रायल स्टेज में भी उसे लंबे समय तक जेल में रहना पड़ता है। जज ने कहा, "यह देखा गया है कि कई मामलों में, एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट मुख्य रूप से बेल डिफॉल्ट के कानूनी नतीजे से बचने के लिए प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट फाइल करता है, जबकि तय जुर्म की जांच पूरी नहीं हुई होती है।" उन्होंने कहा कि अक्सर यह देखा गया है कि पहले जुर्म की जांच अधूरी रहती है, और यहां तक ​​कि फाइनल रिपोर्ट का भी इंतजार किया जाता है। 'आरोपी लोग काफी समय से कस्टडी में थे' जज ने कहा, "यह कोर्ट खुद एक ऐसे मामले का गवाह है जहां मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी कार्रवाई आरोप पर बहस के आखिरी स्टेज पर पहुंच गई है, जबकि पहले से तय अपराध में, यह पता लगाने के लिए जांच अभी भी चल रही है कि कोई अपराध हुआ भी है या नहीं।" उन्होंने कहा कि यह ध्यान देने वाली बात है कि PMLA केस में आरोपी लोग काफी समय से कस्टडी में थे। जज सिंह ने कहा, "यह अजीब स्थिति गंभीर कानूनी और संवैधानिक चिंताओं को जन्म देती है, क्योंकि PMLA के तहत कार्रवाई जारी रहना तय अपराध के बने रहने पर निर्भर करता है।" उन्होंने कहा कि इस तय कानूनी स्थिति के बावजूद कि मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध अलग से नहीं चल सकता और इसके लिए कानूनी रूप से टिकाऊ अपराध की बुनियादी नींव की जरूरत होती है, मौजूदा प्रैक्टिस एक परेशान करने वाली उलटी बात दिखाती है। स्पेशल जज सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि जांच एजेंसी की पावर और जीवन और निजी आजादी के अधिकार के बीच बैलेंस कानूनी कृपा का मामला नहीं है, बल्कि एक संवैधानिक आदेश है। उन्होंने कहा कि इस बैलेंस को बनाए रखने में कोई भी नाकामी कानून के राज और क्रिमिनल जस्टिस के एडमिनिस्ट्रेशन में जनता के भरोसे, दोनों को कमजोर कर सकती है।  

डीके शिवकुमार ने मानी सच्चाई, कहा- पांच योजनाओं का बोझ झेल रही सरकार

कर्नाटक कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की पांच योजनाओं को लेकर उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने स्वीकार किया है कि यह सरकारी खजाने के ऊपर बोझ हैं। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं को इस गारंटी के साथ तैयार किया गया था कि पैसा नागरिकों के हाथों में रहे, ताकि कठिन समय में उनका आत्मविश्वास कम न हो। उपमुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि भले ही सरकार पर बोझ पड़ता हो, लेकिन वह इन योजनाओं को जारी रखेंगे। बेंगलुरू में मीडिया से बात करते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि राज्य की इन पांच गारंटी योजनाओं का मुख्य उद्देश्य राज्य की जनता को मानसिक रूप से मजबूत बनाना है। हालांकि उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इन योजनाओं में से अपात्र और मृत लोगों को हटाए जाने की जरूरत है। सरकार लगातार इस संबंध में काम कर रही है। गौरतलब है कि उप मुख्यमंत्री जिन योजनाओं का जिक्र कर रहे थे उनमें गृह ज्योति योजना, जिसके अंतर्गत हर परिवार को 200 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाती है। इसके अलावा, गृह लक्ष्मी, अन्न भाग्य, युवा निधि और शक्ति योजना जैसी योजनाएं शामिल हैं। यह योजनाएं मुख्यतः जनता को सीधा लाभ देती हैं। शिवकुमार ने स्वीकार कहा, "यह योजनाएं सरकार पर भले ही वित्तीय बोझ डाल सकती हैं, लेकिन सार्वजनिक कल्याण से समझौता नहीं किया जाएगा।" इसी बीच, परिवहन और मुजरा मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि विभाग ने आगामी राज्य बजट में 3,000 नई बसों की मांग की है ताकि बेड़े को मजबूत किया जा सके। यह मांग ‘शक्ति’ योजना के लागू होने के बाद बसों में यात्रियों की संख्या में तेज वृद्धि के बीच की गई है। रेड्डी ने सुझावों को खारिज किया कि मुफ्त यात्रा कार्यक्रम परिवहन कंपनियों के घाटे का कारण है। उन्होंने कहा, “शक्ति योजना परिवहन कंपनियों के घाटे का कारण नहीं है। परिवहन कंपनी भाजपा सरकार के दौरान भी घाटे में थी।” उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन को लाभ कमाने के बजाय सेवा के रूप में चलाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा, “हम 35% लाभ कमा रहे हैं। अगर घाटा भी होगा तो हम बसें चलाएंगे। यहां लाभ कमाने का कोई उद्देश्य नहीं है। निजी कंपनियां लाभ न होने पर बसें नहीं चलातीं।” आपको बता दें, कर्नाटक सरकार द्वारा कई लाभकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। मुख्य तौर पर शक्ति जैसी योजनाएं, जिसमें गैर लग्जरी सरकारी बसों में महिलाओं को फ्री टिकट की व्यवस्था है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार की इस स्कीम से राज्य परिवहन विभाग को घाटा हुआ है।  

बदलते पुलिसिंग परिदृश्य में तकनीक और साइबर दक्षता की आवश्यकता – डीजीपी

भोपाल भौंरी स्थित मध्‍यप्रदेश पुलिस अकादमी के परेड ग्राउंड में शुक्रवार को मध्‍यप्रदेश पुलिस के 43 वे बैच के 17परिवीक्षाधीन उप पुलिस अधीक्षकों के दीक्षांत समारोह का आयोजन हुआ। राष्‍ट्रगीत एवं राष्‍ट्रगान के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मध्‍यप्रदेश पुलिस के महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने बतौर मुख्‍य अतिथि सलामी ली। पुलिस महानिदेशक  कैलाशमकवाणा ने सभी प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में पुलिसिंग का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए अधिकारियों को निरंतर साइबर फील्ड में अपनी स्किल डेवलपमेंट पर ध्यान देना होगा तथा तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग में दक्ष बनना होगा।  मकवाणा ने ‘सिंहस्‍थ 2028’ के परिप्रेक्ष्य में आने वाली संभावित सुरक्षा, साइबर एवं संगठित अपराध संबंधी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए अधिकारियों से आह्वान किया कि वे भविष्य की परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को तैयार रखें तथा बदलते अपराध परिदृश्य के प्रति सजग एवं सक्षम बनें। उन्होंने कहा कि आज धार्मिक आयोजन से संबंधित या सामुदायिक मुद्दे तथा  कानून-व्यवस्था से जुड़ा कोई भी विषयहो , सोशल मीडिया के माध्यम से तुरंत व्यापक रूप ले लेता है। जनता की अपेक्षा रहती है कि पुलिस द्वारा तत्काल और निष्पक्ष कार्रवाई की जाए। अतः प्रत्येक अधिकारी को अपने चरित्र, अनुशासन और निर्णय क्षमता को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “सेवा काल में की गई एक छोटी सी लापरवाही भी पूरे जीवन पर दाग बन सकती है, इसलिए नियमों के अनुरूप ही कार्य करें।”सोशल मीडिया की सक्रियता के इस दौर में छोटी सी घटना भी वायरल हो सकती है, इसलिए सजगता, संवेदनशीलता और त्वरित प्रतिक्रिया अत्यंत आवश्यक है। डीजीपी ने कहा कि एक अधिकारी में संवेदनशीलता, सुनने की क्षमता तथा तकनीक के प्रभावी उपयोग की योग्यता होनी चाहिए। प्रत्येक अधिकारी को सीखने की प्रवृत्ति बनाए रखते हुए स्वयं को समयानुकूल निरंतर विकसित करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा किवर्तमान समय में मादक पदार्थों की समस्या एक गंभीर चुनौती के रूप में सामने आई है, जिसे नियंत्रित करना अत्यंत आवश्यक है। यह केवल अपराध का विषय नहीं, बल्कि समाज और युवाओं के भविष्य से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है। जिस प्रकार संगठित प्रयासों और दृढ़ संकल्प से नक्सल प्रभाव को समाप्त करने की दिशा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है, उसी प्रकार नारकोटिक्स के विरुद्ध भी सुनियोजित रणनीति, कड़ी कार्रवाई और सतत अभियान चलाकर इसे जड़ से समाप्त करना समय की आवश्यकता है। उन्‍होंने अपने 37 साल की पुलिस सेवा के अनुभव से सभी को अवगत कराते हुए बताया कि यदि आप अच्छा कार्य करेंगे वो कहीं न कहींअच्‍छे कर्म आपकी सहायता करते ही हैं, अतः आप ईमानदारी एवं पूर्ण कर्तव्यनिष्ठा से अपने कार्य को करते हुए एक कुशल पुलिस अधिकारी एवं एक अच्छे नागरिक बनें जिससे कि पुलिस विभाग एवं आपके परिजनों को गर्व की अनुभूति हो। डीजीपी  मकवाणा ने अधिकारियों से कहा कि वे अपनी वर्दी पर गर्व करें तथा गरीब, पीड़ित, भयभीत और असहाय लोगों की सहायता को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। दूसरों की सहायता करने में ही वास्तविक आनंद है। उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा केवल नौकरी नहीं, बल्कि उत्तरदायित्वपूर्ण सेवा है। इस मार्ग में चुनौतियाँ आएँगी, किन्तु निराश हुए बिना दृढ़ निश्चय, अनुशासन एवं सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना ही सफलता का मूल मंत्र है। अधिकारियों को सदैव एक अच्छा एवं संवेदनशील इंसान बने रहने का प्रयास करना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान 43वें उप पुलिस अधीक्षक बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों ने प्रशिक्षण काल के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी, भोपाल में प्राप्त कठोर शारीरिक प्रशिक्षण, विधिक ज्ञान, तकनीकी दक्षता एवं नेतृत्व विकास से उन्हें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने हेतु आत्मविश्वास एवं संकल्प शक्ति प्राप्त हुई है। मध्‍यप्रदेश पुलिस अकादमी के उप निदेशक  संजय कुमार अग्रवाल ने प्रशिक्षण का प्रतिवेदन प्रस्‍तुत किया।उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी वर्ष 2013 में स्थापित राज्य की शीर्ष प्रशिक्षण संस्था है, जहाँ उप पुलिस अधीक्षकों एवं उप निरीक्षकों के लिए फाउंडेशन कोर्स संचालित किया जाता है। अब तक सात बैच प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं तथा 43वाँ बैच आठवाँ पासआउटबैच है।इस बैच में कुल 17 उप पुलिस अधीक्षक प्रशिक्षु अधिकारी (10 पुरुष, 7 महिला) शामिल हैं। प्रशिक्षण अवधि में अधिकारियों को नवीन आपराधिक कानून, साइबर अपराध, अपराध विवेचना, फॉरेंसिक साइंस, लॉ एंड ऑर्डर, आधुनिक पुलिसिंग, नैतिकता, सॉफ्ट स्किल्स एवं इमोशनल इंटेलिजेंस के साथ ड्रिल, दंगा नियंत्रण, योग एवं शारीरिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षुओं को प्रयागराज महाकुंभ की अध्ययन यात्रा कराई गई, जो वर्ष 2028 में उज्जैन में प्रस्तावित सिंहस्थ आयोजन की दृष्टि से उपयोगी सिद्ध होगी।कार्यक्रम में 43वें बैच की प्रशिक्षण यात्रा पर आधारित एक विशेष फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। अंत में पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने प्रशिक्षण में उत्कृष्ट रहे प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों को शील्ड व प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया। समारोह में विशेष पुलिस महानिदेशक  रवि कुमार गुप्‍ता, पुलिस आयुक्‍त  संजय कुमार, पीएसओटू डीजीपी  विनीत कपूर सहित अन्‍य पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।  इन श्रेष्‍ठ प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षकों को मिले पुरस्‍कार पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने संपूर्ण परीक्षा के लिए  आनंद कुमार राय को प्रथम व सु रोशनी कुर्मी को द्वितीय स्‍थान की शील्‍ड व प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। आंतरिक परीक्षा में संपूर्ण विषयों मेंसर्वोच्‍च अंक प्राप्‍त करने पर  आनंद कुमार राय को प्रथम तथा  ऋषभ छारी को द्वितीय स्‍थानप्राप्‍त करने परशील्‍ड प्रदान की गई। 

वानखेड़े की मुश्किलें बढ़ीं: कॉर्डेलिया क्रूज केस में हाई कोर्ट से कार्रवाई को मंजूरी

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने 2021 के कॉर्डेलिया क्रूज ड्रग्स मामले में तत्कालीन आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी रखने की मंजूरी दे दी है। अदालत ने केंद्र सरकार की उस याचिका को स्वीकार कर लियाए जिसमें केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के पुराने फैसले को चुनौती दी गई थी। वानखेड़े पर आरोप है कि उन्होंने एनसीबी में रहते हुए अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को फंसाने की धमकी दी और उनके परिवार से रुपये की मांग की। उन पर जांच को गलत दिशा में मोड़ने का भी आरोप है। अनुशासनात्मक कार्रवाई को मंजूरी जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल एवं जस्टिस अमित महाजन की पीठ ने साल 2021 के कॉर्डेलिया क्रूज मादक पदार्थ मामले के संबंध में आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ शुक्रवार को अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी रखने की अनुमति प्रदान कर दी। केंद्र सरकार ने कैट के आदेश को दी थी चुनौती जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल एवं जस्टिस अमित महाजन की पीठ ने केन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के उस आदेश के खिलाफ केन्द्र की याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें इस मामले में वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को रद्द कर दिया गया था। केन्द्र सरकार ने कैट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर व सीमा शुल्क बोर्ड द्वारा 18 अगस्त, 2025 को वानखेड़े को जारी किए गए आरोपपत्र को रद्द कर दिया गया था। क्या हैं समीर वानखेड़े पर आरोप? साल 2008 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारी समीर वानखेड़े उस समय सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने 2021 में मुंबई के नारकोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) में अपने कार्यकाल के दौरान अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को कॉर्डेलिया क्रूज मादक पदार्थ कांड में फंसाने की धमकी देकर उनके परिवार से कथित तौर पर 25 करोड़ रुपये की मांग की थी। शुरू की गई थी अनुशासनात्मक जांच कैट के समक्ष वानखेड़े ने केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर व सीमा शुल्क बोर्ड द्वारा उनके खिलाफ की गई अनुशासनात्मक जांच को चुनौती देते हुए एक मूल आवेदन दायर किया। एनसीबी से कार्यमुक्त होने के बाद भी कथित रूप से उसके कानूनी विभाग से गोपनीय जानकारी मांगने के लिए अनुशासनात्मक जांच शुरू की गई थी। सिंगल बेंच ने दखल से किया था इनकार यह भी आरोप लगाया गया कि उन्होंने एनसीबी के विधिक अधिकारी से जांच की दिशा मोड़ने का आश्वासन भी मांगा था। उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने 12 जनवरी को वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने वाले कैट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद यह मामला उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष पहुंचा। खंडपीठ ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की मंजूरी दे दी है।

बैंक और बाजार पर ब्रेक: मार्च में कब-कब रहेगी छुट्टी, पूरी लिस्ट देखें

नई दिल्ली फरवरी का महीना अपनी समाप्ति की ओर है और मार्च 2026 की शुरुआत होने वाली है। ऐसे में अगर आप मार्च में बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाने की योजना बना रहे हैं, तो पहले बैंक छुट्टियों की सूची जरूर देख लें। कई बार जरूरी काम के लिए बैंक शाखा में जाना पड़ता है, लेकिन छुट्टी होने पर काम अटक सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की आधिकारिक हॉलिडे लिस्ट के अनुसार, मार्च 2026 में अलग-अलग राज्यों में कुल 18 दिन बैंक बंद रहेंगे। इनमें साप्ताहिक अवकाश, दूसरे और चौथे शनिवार के अलावा विभिन्न राज्यों के त्योहार भी शामिल हैं। मार्च की शुरुआत 1 मार्च (रविवार) से होगी, जो देश भर में साप्ताहिक अवकाश रहेगा। 2 मार्च (सोमवार) को होलिका दहन के अवसर पर उत्तर प्रदेश में बैंक बंद रहेंगे। 3 मार्च (मंगलवार) को होली के मौके पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और पंजाब समेत लगभग 15 राज्यों में बैंकिंग सेवाएं बंद रहेंगी। वहीं, 4 मार्च (बुधवार) को कुछ राज्यों और शहरों में होली के दूसरे दिन भी बैंक बंद रहेंगे। इसके बाद, 8 मार्च (रविवार) को साप्ताहिक अवकाश रहेगा। 13 मार्च (शुक्रवार) को मिजोरम में चापचर कुट पर्व के कारण बैंक बंद रहेंगे। 14 मार्च को दूसरे शनिवार और 15 मार्च को रविवार होने से देश भर में बैंक बंद रहेंगे। 17 मार्च (मंगलवार) को जम्मू और श्रीनगर में शब-ए-कद्र के अवसर पर बैंक बंद रहेंगे। 19 मार्च (गुरुवार) को महाराष्ट्र सहित 11 राज्यों में गुड़ी पड़वा, उगादी और नवरात्रि की शुरुआत के चलते अवकाश रहेगा। 20 मार्च (शुक्रवार) को ईद-उल-फितर पर देश भर में बैंक बंद रहेंगे। 21 मार्च (शनिवार) को रमजान ईद और सरहुल पर्व के अवसर पर भी बैंक बंद रहेंगे। 22 मार्च (रविवार) को साप्ताहिक अवकाश रहेगा। 26 मार्च (गुरुवार) को श्रीराम नवमी के कारण बैंक बंद रहेंगे, जबकि 27 मार्च (शुक्रवार) को कुछ राज्यों में राम नवमी के बाद दशमी के उपलक्ष्य में अवकाश रहेगा। 28 मार्च को चौथा शनिवार और 29 मार्च को रविवार होने से देश भर में बैंक बंद रहेंगे। महीने के अंत में 31 मार्च (मंगलवार) को श्री महावीर जयंती के अवसर पर लगभग 15 राज्यों में बैंक बंद रहेंगे। हालांकि शाखाएं बंद रहेंगी, लेकिन ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है। नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और एटीएम सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहेंगी। इन माध्यमों से आप पैसे का लेन-देन, फंड ट्रांसफर और अन्य डिजिटल सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं। मार्च में बैंक छुट्टियों के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार भी कुल 12 दिन बंद रहेगा। 3 मार्च (होली), 26 मार्च (श्रीराम नवमी) और 31 मार्च (श्री महावीर जयंती) को बाजार में कारोबार नहीं होगा। इसके अलावा शनिवार और रविवार को साप्ताहिक अवकाश के चलते कुल 9 दिन ट्रेडिंग बंद रहेगी। ऐसे में, मार्च महीने में बैंक या बाजार से जुड़े किसी भी जरूरी काम की योजना बनाते समय छुट्टियों की सूची अवश्य जांच लें, ताकि आपका काम समय पर और बिना किसी परेशानी के पूरा हो सके।