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राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना के 20 मार्च तक आवेदन और दो मई को होगी परीक्षा

रायपुर. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत संचालित स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा राष्ट्रीय साधन सह प्रावीण्य छात्रवृत्ति योजना (एनएमएमएसई) 2025-26 की परीक्षा 02 मई 2026 को आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा के माध्यम से कक्षा 8 वीं में अध्ययनरत आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा, जिन्हें कक्षा 9वीं से 12वीं तक अध्ययन के लिए केंद्र सरकार की ओर से प्रतिमाह एक हजार रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। सचिव, माध्यमिक शिक्षा मण्डल रायपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय साधन सह प्रावीण्य छात्रवृत्ति योजना (एनएमएमएसई) परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। विद्यार्थी ऑफलाइन आवेदन पत्र भर सकते हैं। आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 20 मार्च निर्धारित की गई है। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा मण्डल रायपुर द्वारा विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। पात्रता के अनुसार राज्य शासन द्वारा संचालित शासकीय, शासकीय अनुदान प्राप्त एवं स्थानीय निकाय के विद्यालयों में कक्षा 8वीं में अध्ययनरत वे विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं, जिन्होंने कक्षा 7 वीं में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक (एससी/एसटी वर्ग के लिए 5 प्रतिशत की छूट) के साथ उत्तीर्ण किया हो तथा जिनके माता-पिता अथवा पालक की वार्षिक आय सभी स्रोतों से 3.50 लाख रुपये से अधिक न हो। केंद्रीय, नवोदय, निजी एवं आवासीय विद्यालयों के विद्यार्थी इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे। राष्ट्रीय साधन सह प्रावीण्य छात्रवृत्ति योजना (एनएमएमएसई) 2025-26 परीक्षा के लिए आवेदन पत्र का प्रारूप एवं परीक्षा केंद्रों की सूची सभी जिला शिक्षा अधिकारियों एवं 145 परीक्षा केंद्राध्यक्षों को प्रेषित की जा चुकी है। विस्तृत जानकारी मंडल की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है। सचिव, माध्यमिक शिक्षा मण्डल रायपुर पुष्पा साहू ने आशा व्यक्त की है कि अधिक से अधिक विद्यार्थी परीक्षा में सम्मिलित होकर केंद्र सरकार की इस योजना का लाभ उठाएंगे।

16 राजस्व निरीक्षकों का कलेक्टर ने किया तबादला

अंबिकापुर. जिले के प्रशासनिक ढांचे में फेरबदल किया गया है. कलेक्टर अजित बसंत ने विभिन्न तहसीलों में पदस्थ राजस्व निरीक्षकां का तबादला किया है. इस संबंध में आदेश भी जारी किया गया है. सूची में 16 राजस्व निरीक्षकों का नाम शामिल है. जारी आदेश में विश्वनाथ तिवारी का रा.नि.मं. अम्बिकापुर-3 से रा.नि.मं. लखनपुर, रामकुमार राम का रा.नि.मं. अम्बिकापुर-4 से रा.नि.मं. रघुनाथपुर (धौरपुर) ट्रांसफर कर दिया गया है. जारी आदेश में संजय सिंह का रा.नि.मं. अम्बिकापुर-5 से रा.नि.मं. उदयपुर, धर्मेन्द्र कुमार सिंह का रा.नि.मं. अम्बिकापुर-6 से रा.नि.मं. बतौली, सबल साय एक्का का रा.नि.मं. धौरपुर से रा.नि.मं. अम्बिकापुर-3, विकास कुमार सोनपाकर का रा.नि.मं. उदयपुर से रा.नि.मं. अम्बिकापुर-4, राज बहादुर सिंह का रा.नि.मं. खम्हरिया (उदयपुर) से राजस्व निरीक्षक नजूल, संजय कुमार सिंह का रा.नि.मं. लखनपुर से रा.नि.मं. अम्बिकापुर-5 ट्रांसफर कर दिया गया है. इस तरह धर्मेन्द्र कुमार सिंह का रा.नि.मं. सलका (लखनपुर) से रा.नि.मं. अम्बिकापुर-6, छय कुमार पैंकरा का रा.नि.मं. पेटला सीतापुर से राजस्व निरीक्षक नजूल, शिवपूजन तिवारी का रा.नि.मं. बतौली से राजस्व निरीक्षक नजूल, रामदेव यादव का राजस्व निरीक्षक नजूल से रा.नि.मं. लुण्ड्रा, सरयू राम पैंकरा का राजस्व निरीक्षक नजूल से रा.नि.मंखम्हरिया (उदयपुर), आशीष गुहा का राजस्व निरीक्षक नजूल से रा.नि.मं. धौरपुर, विजय कुमार श्रीवास्तव राजस्व निरीक्षक नजूल से रा.नि.मं. सलका (लखनपुर), सत्येन्द्र कुमार मिश्रा से राजस्व निरीक्षक डायवर्सन का रा.नि.मं. पेटला सीतापुर तबादला किया गया है. 

हाईकोर्ट ने 7 साल बाद टीईटी 2018 पास अभ्यर्थियों की नियुक्ति याचिका खारिज की, कहा- लंबा अंतराल न्यायसंगत नहीं

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) 2018 उत्तीर्ण दो महिला अभ्यर्थियों की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि याचिकाकर्ताओं ने सात वर्षों से अधिक समय तक कोई सक्रिय प्रयास नहीं किया।  कटनी निवासी सरस्वती पाटीदार और नरसिंहपुर की रेणुका यादव ने याचिका दायर कर बताया था कि उन्होंने वर्ष 2018 में टीईटी उत्तीर्ण की थी। उनका कहना था कि प्रदेश में मिडिल स्कूल शिक्षकों के पद रिक्त हैं और वर्ष 2024 में नई नियुक्तियों के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। ऐसे में उन्हें वर्ष 2018 के नियमों के तहत नियुक्ति देने के निर्देश राज्य सरकार को दिए जाएं। सरकारी अधिवक्ता ने रखा सरकार का पक्ष मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने की। शासन की ओर से अधिवक्ता अनुभव जैन ने तर्क दिया कि वर्ष 2022 में जारी आम सूचना में सभी इच्छुक अभ्यर्थियों को प्रचलित नियमों के अनुसार आवेदन करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन याचिकाकर्ताओं ने आवेदन नहीं किया। अब नई चयन प्रक्रिया लागू हो चुकी है और नियमों में संशोधन हो चुका है, इसलिए पुराने नियमों के आधार पर नियुक्ति की मांग विधिसम्मत नहीं है। कोर्ट बोला-अधिकार का दावा स्वीकार नहीं कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ताओं ने 7 वर्षों तक नौकरी के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। 29 सितंबर 2022 की सार्वजनिक सूचना के समय भी उन्होंने आवेदन नहीं किया। नियमों में संशोधन के बाद नई चयन प्रक्रिया प्रभावी हो चुकी है। ऐसे में विलंब के बाद अधिकार का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। डिवीजन बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में समय सीमा और सक्रियता अत्यंत महत्वपूर्ण है। लंबी चुप्पी के बाद नियुक्ति का दावा न्यायोचित नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर दोनों याचिकाएं खारिज कर दी गईं।  

कुबेरेश्वर धाम में पं. प्रदीप मिश्रा ने मनाया होलिका दहन, सौ से ज्यादा होलिकाएं जलीं शहरभर में

सीहोर  उत्साह, उमंग और आस्था के रंगों से सराबोर सीहोर में होलिका दहन का पर्व भक्ति और परंपरा के संग मनाया गया। कुबेरेश्वर धाम में पंडित प्रदीप मिश्रा ने मंत्रोच्चार के बीच होलिका दहन कर समस्त श्रद्धालुओं के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।  सीहोर में होली की पूर्व संध्या पर आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। नगर के चौक-चौराहों से लेकर मोहल्लों तक सौ से अधिक स्थानों पर रंगबिरंगी रोशनी और सजावट के बीच होलिकाएं सजाई गईं। देर शाम से लेकर रात्रि तक विधि-विधान से होलिका दहन का क्रम चलता रहा। हर तरफ “हर-हर महादेव” और “होली है” के जयघोष गूंजते रहे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर चेहरे पर उत्साह साफ झलक रहा था। असत्य पर सत्य की विजय का यह पर्व मानो पूरे शहर को एक सूत्र में बांधता नजर आया। कुबेरेश्वर धाम में भक्ति की अलौकिक छटा सीहोर में होली की पूर्व संध्या पर आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। नगर के चौक-चौराहों से लेकर मोहल्लों तक सौ से अधिक स्थानों पर रंगीन रोशनी और सजावट के बीच होलिकाएं सजाई गईं। देर शाम से रात्रि तक विधि-विधान से होलिका दहन का क्रम चलता रहा। हर-हर महादेव और होली है के जयघोष से पूरा शहर गूंज उठा। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर चेहरे पर उत्साह झलक रहा था। असत्य पर सत्य की विजय का यह पर्व पूरे शहर को एक सूत्र में बांधता नजर आया। शहर के प्रसिद्ध कुबेरेश्वर धाम में होलिका दहन का दृश्य विशेष रूप से आकर्षक रहा। कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के साथ होलिका दहन संपन्न कराया। लकड़ियों और कंडों से सजे मंच पर भक्त प्रहलाद की प्रतिमा स्थापित कर अग्नि प्रज्ज्वलित की गई। अग्नि की लपटें उठते ही श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। पंडित मिश्रा ने महादेव से प्रार्थना की कि यह पर्व सभी के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आनंद लेकर आए। होलिका दहन के अवसर पर कुबेरेश्वर धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में, बच्चे रंग-बिरंगी पिचकारियों के साथ और बुजुर्ग श्रद्धा से भरे चेहरों के साथ उपस्थित रहे। पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद लिया और एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं दीं। देर रात तक धाम परिसर में भक्ति और उल्लास का वातावरण बना रहा। शहर के साथ-साथ पूरे जिले में एक हजार से अधिक स्थानों पर होलिका दहन हुआ। गांव-गांव में परंपरागत रूप से लकड़ियां एकत्र कर शुभ मुहूर्त में अग्नि प्रज्ज्वलित की गई। लोगों ने बुराई के अंत और अच्छाई की विजय का संदेश दिया। ग्रामीण क्षेत्रों में भी यह पर्व सामाजिक सौहार्द और भाईचारे के प्रतीक के रूप में मनाया गया। होलिका दहन से पहले शहर के प्रमुख बाजारों में जबरदस्त रौनक देखने को मिली। रंग-गुलाल, पिचकारियां, मावा-मिठाइयों और अन्य सामग्री की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ उमड़ी। शाम तक मुख्य बाजार क्षेत्र में जाम जैसे हालात बन गए। मिठाई दुकानों पर गुजिया, मावा और नमकीन की बिक्री में तेजी रही। 

पेंटागन डील के बाद OpenAI पर संकट, यूजर्स का ChatGPT अकाउंट डिलीट करने का सिलसिला, Claude AI को मिला फायदा

नई दिल्ली दुनिया के सबसे लोकप्रिय एआई चैटबॉट ChatGPT के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. हाल ही में OpenAI द्वारा अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के साथ हाथ मिलाने की खबर ने आम यूजर्स को नाराज कर दिया है. लोग इस कदर गुस्से में हैं कि सोशल मीडिया पर डिलीट चैटजीपीटी (#DeleteChatGPT) ट्रेंड करने लगा है. आलम यह है कि लोग न सिर्फ अपने अकाउंट डिलीट कर रहे हैं, बल्कि ऐप स्टोर पर इसे वन-स्टार की रेटिंग भी दे रहे हैं |  क्या है पूरा विवाद? यह विवाद तब शुरू हुआ, जब OpenAI कंपनी ने अपने नियमों में बदलाव करते हुए अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के साथ हाथ मिला लिया. इससे पहले ChatGPT सैन्य और युद्ध संबंधी कार्यों के लिए इस्तेमाल न होने की बात कह रहा था. अब पेंटागन के साथ समझौते का मतलब है कि OpenAI की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल अमेरिकी सेना अपनी रणनीतियों और साइबर सिक्योरिटी के लिए करेगी. यूजर्स का मानना है कि जो एआई 'मानवता की भलाई' के लिए बनाया गया था, अब उसका इस्तेमाल युद्ध और सैन्य उद्देश्यों के लिए होना इस सिद्धांत के खिलाफ है. इसी डर और नाराजगी के कारण पिछले कुछ दिनों में ChatGPT को डिलीट करने वालों की संख्या में जबरदस्त उछाल आया है |  क्या है पूरा मामला? Sam Altman ने अपनी पोस्ट में बताया कि OpenAI ने Department of Defense के साथ अपने एग्रीमेंट में कुछ अहम बदलाव किए हैं|   उन्होंने बताया की ऐसा इसलिए क्योंकि यह साफ हो सके कि कंपनी के AI सिस्टम का इस्तेमाल अमेरिकी नागरिकों की निगरानी के लिए नहीं किया जाएगा|  उन्होंने साफ लिखा कि कानून के दायरे में रहते हुए AI का इस्तेमाल किया जाएगा और इसे जानबूझकर डोमेस्टिक सर्विलांस के लिए उपयोग नहीं किया जाएगा|  Altman ने यह भी कहा कि सरकार की तरफ़ से अगर कोई असंवैधानिक आदेश आता है तो वे उसका पालन नहीं करेंगे|  उनका कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया सबसे ऊपर है और सरकार को फैसले लेने चाहिए, न कि कोई निजी कंपनी दुनिया का भविष्य तय करे. लेकिन विवाद यहीं से शुरू हुआ|  गुस्सा क्यों बढ़ा? TechCrunch की रिपोर्ट बताती है कि जैसे ही यह खबर फैली कि OpenAI अमेरिकी रक्षा विभाग के साथ काम कर रही है, बड़ी संख्या में लोगों ने ChatGPT ऐप हटाना शुरू कर दिया|   सिर्फ एक दिन में अनइंस्टॉल में 295 प्रतिशत की उछाल दर्ज किया गया . सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाया कि क्या AI अब युद्ध मशीन का हिस्सा बनने जा रहा है|  कुछ यूजर्स का कहना है कि AI कंपनियों को सेना से दूरी बनाकर रखनी चाहिए. वहीं कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि अगर AI इतना शक्तिशाली है तो उसे सरकार के साथ जिम्मेदारी से काम करना चाहिए, ताकि गलत हाथों में न जाए|  Anthropic का नाम क्यों आया बीच में? इस पूरे विवाद में एक और AI कंपनी Anthropic का जिक्र हो रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक Anthropic ने रक्षा विभाग के साथ कुछ शर्तों पर असहमति जताई थी और साफ रुख अपनाया था कि उनकी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल मास सर्विलांस या ऑटोनोमस हथियारों में नहीं होना चाहिए|  इसके बाद OpenAI ने अपनी डील आगे बढ़ाई. इससे यह बहस और तेज हो गई कि आखिर AI कंपनियां किस दिशा में जा रही हैं. क्या वे सरकार के साथ मिलकर सुरक्षा मजबूत कर रही हैं या एक खतरनाक रास्ते की ओर बढ़ रही हैं? Altman ने क्या माना? Sam Altman ने अपनी पोस्ट में यह भी स्वीकार किया कि डील को लेकर कम्युनिकेशन बेहतर हो सकता था. उन्होंने कहा कि यह एक जटिल मुद्दा है और इसे जल्दी में सार्वजनिक करना शायद सही तरीका नहीं था|  उनका कहना है कि टेक्नोलॉजी अभी कई मामलों में पूरी तरह तैयार नहीं है और सुरक्षा को लेकर बहुत सावधानी जरूरी है|  उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में OpenAI सरकार के साथ मिलकर तकनीकी सुरक्षा उपायों और सेफगार्ड पर काम करेगा ताकि AI का गलत इस्तेमाल न हो|  यह सब अभी क्यों अहम है? दुनिया इस वक्त युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के दौर से गुजर रही है. साइबर हमले, ड्रोन टेक्नोलॉजी, डेटा एनालिसिस और इंटेलिजेंस में AI का रोल तेजी से बढ़ रहा है|  ऐसे समय में अगर कोई बड़ी AI कंपनी सीधे रक्षा विभाग के साथ काम करती है तो यह सिर्फ टेक्नोलॉजी की खबर नहीं रहती, यह राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक स्वतंत्रता का मुद्दा बन जाती है|  एक तरफ सरकारें कहती हैं कि AI से देश की सुरक्षा मजबूत होगी. दूसरी तरफ नागरिक अधिकार समूह चेतावनी दे रहे हैं कि निगरानी और डेटा कंट्रोल का दायरा खतरनाक रूप ले सकता है|  असली सवाल क्या है? इस पूरे विवाद का केंद्र एक ही है. AI पर कंट्रोल किसका होगा? सरकार का, निजी कंपनी का या जनता की लोकतांत्रिक निगरानी का? Sam Altman का कहना है कि लोकतंत्र को नियंत्रण में रहना चाहिए और AI को लोगों को ताकत देनी चाहिए, उनसे छीननी नहीं चाहिए. लेकिन जनता का एक हिस्सा आश्वस्त नहीं है. अनइनस्टॉल के आंकड़े यही दिखा रहे हैं|  आने वाले समय में यह मुद्दा और बड़ा हो सकता है, क्योंकि AI अब सिर्फ चैटबॉट नहीं रहा. यह सुरक्षा, युद्ध, साइबर ऑपरेशन और रणनीतिक फैसलों का हिस्सा बन रहा है. ऐसे में हर डील, हर बयान और हर फैसला वैश्विक बहस का विषय बनेगा. और यही वजह है कि Pentagon और OpenAI की यह डील सिर्फ एक कॉन्ट्रैक्ट नहीं, बल्कि AI के भविष्य की दिशा तय करने वाली कहानी बन चुकी है|  Sam Altman ने अपने ट्वीट में क्या-क्या साफ किया? Sam Altman ने अपने लंबे पोस्ट में सबसे पहले यह कहा कि OpenAI और अमेरिकी रक्षा विभाग के बीच जो एग्रीमेंट हुआ है, उसमें खास भाषा जोड़ी गई है ताकि कंपनी के सिद्धांत बिल्कुल साफ रहें|  उन्होंने लिखा कि AI सिस्टम का इस्तेमाल जानबूझकर अमेरिकी नागरिकों की निगरानी के लिए नहीं किया जाएगा. उन्होंने अमेरिकी संविधान, फोर्थ अमेंडमेंट और FISA जैसे कानूनों का जिक्र करते हुए कहा कि सब कुछ कानूनी दायरे में ही होगा|  प्राइवेसी एडवोकेट्स इसे दिखावा मान रहे हैं  Altman ने यह भी साफ किया कि Department of Defense ने यह समझा है कि यह लिमिटेशन … Read more

जबलपुर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: मुख्य सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव को तलब, मामला क्या है?

जबलपुर  हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने सोमवार को राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में चार और जिला उपभोक्ता आयोगों में 35 रिक्त सदस्यों के पदों को भरने से संबंधित अपील पर सुनवाई की। अगली सुनवाई 24 मार्च को होगी, कोर्ट ने इस दौरान मुख्य सचिव और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्रालय के अतिरिक्त मुख्य सचिव को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। दरअसल, एकलपीठ के आदेश के विरुद्ध राज्य सरकार ने अपील दायर की है। राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के पांच सदस्यों के पदों में से चार पद और जिला आयोगों के 102 सदस्यों के पदों में से 35 पद रिक्त हैं। उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने नियुक्ति में देरी को लेकर बताया कि केंद्र सरकार को आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की योग्यता अधिसूचित करनी है। प्रतिवादी की ओर से बताया गया कि 51 जिला मंचों में से केवल 19 ही कार्यरत हैं। राज्य सरकार ने 16 जनवरी के एकल पीठ के आदेश के विरुद्ध अपील दायर की, जिसमें निर्देश दिया गया था कि सदस्यों और अध्यक्षों को सेवानिवृत्ति या कार्यकाल पूरा होने के बाद भी नए नियम अधिसूचित होने और तदनुसार नियुक्तियां होने तक अपने पदों पर बने रहने की अनुमति दी जाएगी।

नायब तहसीलदार पर बगलामुखी मंदिर से चप्पल चोरी का आरोप, शिकायत सोशल मीडिया पर वायरल

आगर मालवा  जिले के नलखेड़ा से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। विश्व प्रसिद्ध बगलामुखी माता मंदिर में दर्शन करने पहुंचे एक शासकीय अधिकारी की चप्पल चोरी हो गई। खास बात यह है कि पूरे घटनाक्रम का खुलासा मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरों से हुआ है। मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक और थाना प्रभारी को लिखित शिकायत भी की गई है। जानकारी के मुताबिक, सोमवार 2 मार्च को दोपहर में नायब तहसीलदार अरुण चंद्रवंशी दर्शन के लिए नलखेड़ा स्थित माँ बगलामुखी मंदिर पहुंचे थे। उन्होंने अपनी चप्पल रसीद काउंटर के पास निर्धारित स्थान पर उतारी थी। करीब दस मिनट बाद जब वे वापस लौटे तो उनकी चप्पल वहां नहीं मिली। इसके बाद मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। फुटेज में एक व्यक्ति चप्पल ले जाते हुए दिखाई दिया। मंदिर प्रबंधन की मदद से संदिग्ध व्यक्ति की पहचान की गई और उससे पूछताछ भी की गई, जिसमें उसने चप्पल ले जाने की बात स्वीकार कर ली। घटना के बाद मंदिर परिसर में कुछ देर के लिए भीड़ भी एकत्रित हो गई, जिससे अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि मंदिर में पहले भी इस तरह की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे श्रद्धालुओं की आस्था प्रभावित होती है। नायब तहसीलदार ने पुलिस से भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। नायब तहसीलदार ने बताया कि मंदिर जैसे आस्था के केंद्र में इस तरह की घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। अब देखना होगा कि पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और मंदिर प्रबंधन सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाता है।  

DGP अरुण देव ने नक्सली खात्मे के लिए बस्तर में की हाई-लेवल बैठक

जगदलपुर. देश में नक्सलवाद के खात्मे की तय समयसीमा 31 मार्च नजदीक आते ही छत्तीसगढ़ पुलिस ने रणनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। इसी कड़ी में दंतेवाड़ा के कारली पुलिस लाइन में बस्तर संभाग स्तर की हाई-लेवल बैठक आयोजित की गई, जहां जमीनी हालात के आधार पर ऑपरेशनों की री-डिज़ाइन पर फोकस रहा। बैठक की अध्यक्षता डीजीपी अरुण देव गौतम ने की। चार घंटे चली समीक्षा में नक्सल विरोधी अभियानों की वर्तमान स्थिति, इंटेलिजेंस इनपुट, संवेदनशील इलाकों की पहचान और टार्गेटेड एक्शन प्लान पर निर्णय लिया गया। सूत्रों के मुताबिक, अब प्राथमिकता फील्ड-आधारित कार्रवाई, त्वरित समन्वय और शेष प्रभाव वाले क्षेत्रों में कंसन्ट्रेटेड ऑपरेशन पर है। केंद्रीय बलों और जिला पुलिस के बीच रियल-टाइम कोऑर्डिनेशन को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि समीक्षा बैठक को बस्तर में रखने का उद्देश्य ग्राउंड रियलिटी को समझना और उसी अनुसार रणनीति तय करना है। साथ ही, नक्सलियों के लिए आत्मसमर्पण का विकल्प खुला बताते हुए कहा गया कि समय सीमित है सरेंडर करने वालों को पुनर्वास नीति के तहत सुरक्षित भविष्य मिलेगा। संकेत साफ हैं आने वाले दिनों में बस्तर में नक्सल विरोधी अभियान अधिक केंद्रित, तेज और निर्णायक रूप से आगे बढ़ेगा।

युवा कलाकारों से संस्कृति विभाग ने मंगाए छात्रवृत्ति के आवेदन

रायपुर. संस्कृति विभाग ने गरीब होनहार युवा कलाकारों व विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजना अंतर्गत प्रविष्टियां आमंत्रित की हैं। प्रविष्टियां निर्धारित प्रारूप में पूर्ण दस्तावेजों सहित पंजीकृत डाक के माध्यम से 20 मार्च तक आमंत्रित की गई हैं। विभाग द्वारा छात्रवृत्ति प्रोत्साहन के लिए विभिन्न विद्याएं व उपविद्याएं निर्धारित की गई हैं। चयनित विद्यार्थियों को नियमानुसार मासिक छात्रवृत्ति प्रोत्साहन राशि 5,000 रुपए से 10,000 रुपए तक प्रदान की जाएगी। यह राशि डीबीटी-ई-पेमेंट के माध्यम से सीधे खाते में अंतरित होगी। विशेष फोटो प्रदर्शनी का आज आखिरी दिन छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर क्लाउड एवं संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित दो दिवसीय विशेष फोटो प्रदर्शनी ‘छत्तीसगढ़ की विभूतियां: पद्म पुरस्कार प्राप्त महान व्यक्तित्वों की प्रेरक यात्रा’ का आज 3 मार्च को अंतिम दिन है। यह प्रदर्शनी महंत घासीदास संग्रहालय परिसर स्थित कला वीथिका में लगाई गई है, जिसे दोपहर 12 बजे से रात 7 बजे तक देखा जा सकता है। बता दें कि इस दो दिवसीय फोटो प्रदर्शनी का शुभारंभ 2 मार्च को किया गया था।

माँ बम्लेश्वरी धाम में चैत्र नवरात्रि मेले के दौरान बढ़ाएं सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था: कलेक्टर

डोंगरगढ़. माँ बम्लेश्वरी मंदिर में 19 मार्च 2026 से प्रारंभ हो रहे चैत्र नवरात्रि मेले को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कलेक्टर जितेन्द्र यादव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में श्रद्धालुओं और पदयात्रियों की सुविधा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा कानून-व्यवस्था को लेकर विस्तृत रणनीति तय की गई। बैठक में विधायक हर्षिता बघेल और पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। कलेक्टर ने कहा कि नवरात्रि के दौरान लाखों श्रद्धालु डोंगरगढ़ पहुंचते हैं, ऐसे में उनकी सुविधा के लिए पेयजल, विद्युत, साफ-सफाई और यातायात की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मेले के दौरान निर्बाध विद्युत आपूर्ति, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और व्यवस्थित पार्किंग पर विशेष जोर दिया गया। अंजोरा से अछोली तक सेवा पंडाल लगाने, जहां श्रद्धालुओं को विश्राम, चाय-नाश्ता और भोजन की सुविधा उपलब्ध हो, इसके निर्देश भी दिए गए। स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर चिकित्सा विभाग को ओआरएस घोल, आवश्यक दवाइयों और मरहम-पट्टी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। मंदिर के ऊपर और नीचे डॉक्टर एवं पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती रहेगी। पदयात्रियों के पैरों में छाले जैसी समस्याओं को देखते हुए प्राथमिक उपचार की व्यवस्था विशेष रूप से रखने के निर्देश दिए गए हैं। कानून-व्यवस्था के मद्देनजर मेला स्थल और मंदिर परिसर में पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहेगा। पुलिस कंट्रोल रूम के माध्यम से सतत निगरानी की जाएगी, साथ ही क्विक रिस्पांस टीम भी सक्रिय रहेगी। दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में संकेतक, रेडियम पट्टी और अस्थायी गति अवरोधक लगाए जाएंगे। असामाजिक तत्वों पर सख्त नजर रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। रोपवे के फिटनेस सर्टिफिकेट और मेंटेनेंस की समीक्षा की गई तथा ट्रस्ट से आवश्यक जानकारी ली गई। खाद्य सुरक्षा विभाग को मिष्ठान्न और अन्य खाद्य पदार्थों की नियमित जांच के निर्देश दिए गए हैं। डोंगरगढ़ को प्लास्टिक मुक्त रखने और मंदिर परिसर व सीढ़ियों पर विशेष साफ-सफाई अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया। मेले की संपूर्ण व्यवस्था के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा, जहां से विभिन्न विभागों के बीच समन्वय कर व्यवस्थाओं की निगरानी की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आस्था के इस महापर्व में श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है।