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MP में टोल वसूली का बड़ा घोटाला: आदेश से पहले करोड़ों रुपये वसूले गए, PWD मंत्री का बयान

  भोपाल मध्य प्रदेश में टोल वसूली को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) ने कई सड़कों पर राज्यपाल की अधिसूचना जारी होने से 6 माह से लेकर एक साल पहले तक टोल वसूली शुरू कर दी थी. यानी जिस तारीख से टोल वसूली कानूनी रूप से लागू होनी थी, उससे पहले ही जनता की जेब से पैसा निकाला जाता रहा. यह खुलासा विधानसभा में PWD की ओर से जारी जवाब से हुआ है |  कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने विधानसभा में सवाल पूछा था कि प्रदेश की कौन-कौन सी सड़कों पर टोल वसूली की अधिसूचना कब-कब जारी हुई और इन पर टोल वसूली कब से शुरू हुई? इसका जवाब जब सदन में रखा गया तो हैरान करने वाली जानकारी सामने आई |   कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने आरोप लगाया कि लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की ओर से शेयर की गई जानकारी के अनुसार कई सड़क परियोजनाओं में अधिसूचना और टोल वसूली की तारीखों में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है जो ना सिर्फ नियमों के विरुद्ध है बल्कि सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है |     प्रताप ग्रेवाल का कहना है कि इंडियन टोल एक्ट के तहत शासन अपने स्तर पर किसी भी सड़क पर टोल नहीं ले सकता है. सड़क जनता की संपत्ति है , तथा शासन ट्रस्टी है. ट्रस्टी उस संपत्ति से बेजा लाभ नहीं कमा सकता है |  सुप्रीम कोर्ट ने मंदसौर पुलिया के टोल प्रकरण में आदेश दिया कि कोई भी निवेशक, लागत उस पर ब्याज तथा रखरखाव के अतिरिक्त टोल नहीं वसूल कर सकता है |  अधिसूचना बाद में, वसूली पहले? कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने सदन में पेश आंकड़ों के आधार पर आरोप लगाया कि कई सड़कों पर अधिसूचना जारी होने के पहले से टोल टैक्स वसूली शुरू कर दी गई, जिनमें के कुछ सड़कें हैं:- भोपाल बायपास – अधिसूचना: 8 दिसंबर 2020 | टोल वसूली शुरू: 12 दिसंबर 2019 इंदौर–उज्जैन मार्ग – अधिसूचना: 30 दिसंबर 2022 | टोल वसूली शुरू: 21 जनवरी 2022 सागर–दमोह मार्ग – अधिसूचना: 8 दिसंबर 2021 | टोल वसूली शुरू: 28 फरवरी 2021 भिंड–गोपालपुरा मार्ग – अधिसूचना: 4 जनवरी 2022 | टोल वसूली शुरू: 19 मार्च 2021 गुना–ईसागढ़ मार्ग – अधिसूचना: 10 अक्टूबर 2024 | टोल वसूली शुरू: 2 जून 2023 महू–घाटाबिल्लौद मार्ग – अधिसूचना: 24 दिसंबर 2021 | टोल वसूली शुरू: 28 फरवरी 2021 बीना–खिमलासा मार्ग – अधिसूचना: 8 दिसंबर 2021 | टोल वसूली शुरू: 19 मार्च 2021 43 सड़कों से 603 करोड़ का ‘शुद्ध लाभ’? प्रताप ग्रेवाल का आरोप है कि प्रदेश की 43 सड़कों पर अधिसूचना जारी होने से पहले कथित अवैध टोल वसूली के जरिए एमपीआरडीसी ने दिसंबर 2025 तक 603.66 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है जिसकी जांच होनी चाहिए |  पूरा पैसा सरकारी खजाने में गया, कोई भ्रष्टाचार नहीं PWD मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि सदन में जो जानकारी दी गई हैए उसमें स्पष्ट उल्लेख है कि टोल वसूली शासकीय खजाने में ही जमा हुई हैए इसलिए इसमें भ्रष्टाचार का कोई मामला बनता ही नहीं है. जहां तक अधिसूचना जारी होने की बात है तो वो कई बार बैकडेट में भी जारी होती है, इसलिए यह कहना गलत है कि विभाग ने अवैध रूप से टोल वसूली की है |   

राज्यसभा चुनाव के लिए प्रदेश में हलचल, होली बधाई के दौरान नेता कर रहे दावेदारी, बायोडाटा सौंप रहे

रायपुर   छतीसगढ़ में राज्यसभा कि 2 सीटों पर होने वाले चुनावों के लिए हलचल तेज है। भाजपा और कांग्रेस ने चुनाव के लिए कमर कस ली है। राज्यसभा की दोनो सीट पर 16 मार्च को चुनाव होगा,जिसके लिए हलचल तेज हो गई है। वहीं  अब होली के बहाने राज्यसभा दावेदारों ने अपनी सक्रियता बढ़ानी शुरु कर दी है। होली  बधाई देने के बहाने पार्टी वरिष्ठ नेताओं से कर रहे  मुलाकात छत्तीसगढ़ के कोटे की दो राज्यसभा सीट पर 16 मार्च को चुनाव होगा। वर्तमान में दोनों सीट कांग्रेस के खाते में हैं, लेकिन इस बार के चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के खाते में एक-एक सीट जाएगी। इसे देखते हुए कांग्रेस-भाजपा के दावेदारों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। दरसअल राज्यसभा जाने के लिए लालयित  कुछ दावेदारों ने होली के बहाने अपनी दावेदारी पेश करने के लिए कोशिश शुरु कर दी है। दावेदार होली की बधाई देने के बहाने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करके अपनी मौजूदगी औऱ सक्रियता दिखा रहे है। यही नहीं  इस दौरान वे अपना बायोडाटा भी सौंप रहे हैं और माहौल को अपने पक्ष में करने की जुगत कर रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए महत्वपूर्ण है ये चुनाव वही राज्यसभा का ये चुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए यह काफी अहम माना जा रहा है। इस फैक्ट के ध्यान में रखते हुए पार्टी दावेदारों के साथ-साथ उनका क्षेत्रीय के साथ जातिगत  समीकरणों को भी गौर से देखा जा रहा है। जहां भाजपा बस्तर या फिर दुर्ग संभाग से अपने किसी नेता को राज्यसभा का भेज सकती है,वहीं, कांग्रेस में सरगुजा संभाग से कई दावेदारों सामने आ रहे हैं। हालांकि बीजेपी कुछ नाम आलाकमान को भेज चुकी है तो वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज स्थानीय प्रत्याशी को मौका देने की बात बोल चुके है। लेकिन अभी देखने में आ रहा है  कि नेता लोग होली की शुभकामनाओं के बहाने भी अपनी दावेदारी पेश करके ताल ठोंक रहे है।

मध्य प्रदेश में मत्स्यपालकों के लिए अच्छी खबर, सरकार ला रही है मत्स्य नीति, किसान कल्याण वर्ष में कैबिनेट बैठक हर अंचल में

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसान कल्याण वर्ष में मध्यप्रदेश के हर अंचल में कैबिनेट की बैठक आयोजित की जाएगी। जनजातीय अंचल नागलवाड़ी (निमाड़) में आज सोमवार को कृषि कैबिनेट आयोजित की जा रही है। बीते वर्ष भी निमाड़ क्षेत्र के महेश्वर में अहिल्या माता की 300वीं जयंती पर कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई थी। मत्स्य नीति की सौगात देगी प्रदेश सरकार-मोहन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में कृषि सहित बागवानी, सहकारिता, मत्स्य उत्पादन आदि से संबंधित 17 विभागों को जोड़कर हम कार्य कर रहे हैं। नर्मदा के किनारे मत्स्य पालन की बड़ी संभावनाएं हैं। इसे देखते हुए मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और मत्स्यपालकों के कल्याण के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं का समावेश करते हुए मत्स्य नीति की सौगात हम देने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि-पशुपालन से जुड़े क्षेत्रों के साथ मत्स्य उत्पादन में भी आत्मनिर्भरता से बढ़कर और बेहतर स्थिति पाने का हमारा प्रयास है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले हुए वंदे-मातरम के सामूहिक गान के बाद मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजाति अंचल बड़वानी-निमाड़ नर्मदा जलप्रदाय योजना से पहले सूखा और आमजन के पलायन वाला क्षेत्र हुआ करता था। अब यहां हालात बदल चुके हैं। यहां सिंचाई का रकबा बढ़ा है और कृषि के क्षेत्र में नई संभावनाएं बनी हैं। नर्मदा वैली से खेती संबंधी बेहतरीन प्रयोग एवं कार्य इस अंचल में किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहां सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने से सामान्य तापमान में भी 2-3 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नर्मदा जी के किनारे हमारी आध्यात्मिक संस्कृति फली-फूली है। यहां भगवान भीलट देव का अद्भुत स्थान है, उनका चरित्र और इतिहास प्रेरणादायी है। इस अंचल में ऐसे महापुरुषों की एक पूरी शृंखला है। यहां संत सिंगा जी महाराज का स्थान है, खंडवा में दादाजी धूनीवाले का स्थान है, समाजसेवी संत एक रोटी वाले बाबा की कृपा भी यहां प्राप्त होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक छोटे से परिवार में जन्म लेने वाले भीलट देव जी ने साधना के बलबूते पर भक्तिभाव के साथ,  सही अर्थ में आध्यात्म के लिए सभी को प्रेरित किया। वे सनातन धर्म के सबसे बड़े देवता और जीवित भगवान के रूप में पूजे जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय पर्व भगोरिया को राजकीय पर्व के रूप में प्रदेश में मनाया जा रहा है। यहां होली से 7 दिन पहले से ही यह पर्व मनाया जाता है, जनजातीय भाई-बंधु टोलियों में परम्परागत वाद्य यंत्रों के साथ नृत्य-गायन से होली की अनूठी प्रस्तुति देते हैं। इसे बढ़ावा देने के लिए भगोरिया हाट का आयोजन भी किया जा रहा है।

2026 का पहला चंद्र ग्रहण आज , सूतक काल की टाइमिंग अभी से नोट कर लें

इंदौर  Chandra Grahan 2026 Rashifal: 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. यह ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. खास बात यह है कि यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य होगा और धार्मिक नियमों का पालन किया जाएगा. मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-पाठ नहीं किया जाता. ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों की सफाई कर गंगाजल का छिड़काव किया जाता है और फिर नियमित पूजा-अर्चना शुरू होती है. भारत में कब लगेगा चंद्र ग्रहण? साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को दोपहर को 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होगा और 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. बता दें, कि सूतक काल ग्रहण लगने से 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है और ऐसे में 3 मार्च को सूतक काल 6 बजकर 20 मिनट से शुरू होगा. इस समय मूर्ति स्पर्श और भोजन बनाने या खाने की मनाही होती है. दिल्ली से लेकर बेंगलुरु तक, कितने बजे दिखेगा ब्लड मून? 1. दिल्ली- शाम 06:26 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 20 मिनट) 2. प्रयागराज– शाम 06:08 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 38 मिनट) 3. कानपुर- शाम 06:14 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 32 मिनट) 4. वाराणसी– शाम 06:04 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 43 मिनट) 5. पटना- शाम 05:55 से लेकर शाम 06:46 तक ( कुल 51 मिनट) 6. रांची– शाम 05:55 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 51 मिनट) 7. कोलकाता- शाम 05:43 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 1 घंटा 03 मिनट) 8. भुवनेश्वर- शाम 05:54 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 52 मिनट) 9. गुवाहाटी– शाम 05:27 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 1 घंटा 19 मिनट) 10. चेन्नई-  शाम 06:21 से लेकर शाम 06:46 तक ( कुल 26 मिनट) 11. हैदराबाद– शाम 06:26 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 20 मिनट) 12. बेंगलुरु– शाम 06:32 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 14 मिनट) ज्योतिष के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में लग रहा है. इसका प्रभाव खासतौर पर कुछ राशियों पर अधिक देखने को मिल सकता है.  चंद्र ग्रहण 2026 सूतक काल टाइमिंग (Chandra Grahan 2026 Sutak kaal Timing) इस पूर्ण चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले सुबह 6 बजकर 20 मिनट से शुरू हो जाएगा.  कहां कहां दिखाई देगा ये चंद्र ग्रहण?  यह चंद्र ग्रहण भारत के पूर्वी हिस्सों में ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, जबकि अन्य क्षेत्रों में आंशिक रूप से नजर आ सकता है. भारत के अलावा यह ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी दिखाई देगा. किन राशियों के लिए शुभ संकेत? ज्योतिषीय गणना के आधार पर यह ग्रहण कुछ राशियों के लिए सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। वृषभ राशि- वृषभ राशि वालों के लिए करियर के क्षेत्र में अच्छी खबर मिल सकती है। लंबे समय से रुकी हुई पदोन्नति या जिम्मेदारी बढ़ने के संकेत हैं। कार्यक्षेत्र में आपके प्रयासों को पहचान मिल सकती है। मिथुन राशि- मिथुन राशि के जातकों को आर्थिक मोर्चे पर राहत मिल सकती है। अचानक धन लाभ या रुका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना है। बैंक बैलेंस मजबूत हो सकता है। तुला राशि- तुला राशि वालों के लिए यह समय पुराने प्रयासों का फल देने वाला हो सकता है। अटके हुए काम पूरे हो सकते हैं और पारिवारिक वातावरण में खुशी का माहौल रहेगा। मकर राशि- मकर राशि के लिए यह अवधि अपेक्षाकृत स्थिर और संतुलित रहेगी। कामकाज में शांति बनी रहेगी और मानसिक दबाव कम हो सकता है। किन राशियों को बरतनी होगी सावधानी? जहां कुछ राशियों को लाभ के संकेत मिल रहे हैं, वहीं कुछ राशि वालों को संयम और सतर्कता रखने की सलाह दी जा रही है। मेष राशि- मेष राशि वालों को मान-सम्मान से जुड़े मामलों में सावधानी रखनी होगी। किसी विवाद या बहस में पड़ने से बचें। कर्क और कन्या राशि- इन दोनों राशियों के लिए आर्थिक मामलों में सतर्कता जरूरी है। बिना सोचे-समझे निवेश न करें। धन हानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। सिंह राशि- ग्रहण सिंह राशि में लग रहा है, इसलिए इस राशि के जातकों को स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। थकान, बदन दर्द या ऊर्जा में कमी महसूस हो सकती है। वृश्चिक राशि- वृश्चिक राशि वालों को मानसिक तनाव से बचने की सलाह दी जाती है। काम का दबाव या पारिवारिक जिम्मेदारियां मन पर असर डाल सकती हैं। धनु राशि– धनु राशि के जातकों को बच्चों की पढ़ाई या सेहत को लेकर चिंता हो सकती है। धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखें। कुंभ और मीन राशि- इन राशियों के लिए वैवाहिक जीवन में थोड़ी अनबन के संकेत हैं। संवाद बनाए रखना और जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने से बचना बेहतर रहेगा। ग्रहण काल में क्या करें?- ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के समय मंत्र जाप, ध्यान और प्रार्थना करना शुभ माना जाता है। सूतक काल के नियमों का पालन करना परंपरागत रूप से महत्वपूर्ण समझा जाता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर दान-पुण्य करने की भी सलाह दी जाती है। चंद्र ग्रहण का प्रभाव ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इस चंद्र ग्रहण का असर सबसे पहले मन और भावनाओं पर पड़ेगा. इस दौरान व्यक्ति को मानसिक अस्थिरता, चिंता या निर्णय लेने में भ्रम महसूस हो सकता है. इसलिए इस समय शांत रहना और बड़े फैसलों से बचना बेहतर माना जाता है. तो आइए जानते हैं कि चंद्रग्रहण किन राशियों के लिए अशुभ रहेगा. कर्क राशि  कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा होते हैं, इसलिए इस राशि के जातकों पर ग्रहण का प्रभाव अधिक महसूस हो सकता है. आर्थिक मामलों, निवेश और प्रॉपर्टी से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी से बचें. परिवार, खासकर माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें और वाणी में संयम बनाए रखें. उपाय: भगवान शिव को जल अर्पित करें और ''ऊं नमः शिवाय'' मंत्र का जाप करें. सिंह राशि यह ग्रहण सिंह राशि में ही लग रहा है, इसलिए इस राशि के लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. आने वाले 15 दिनों तक बड़े फैसले … Read more

चंद्र ग्रहण के बावजूद महाकाल के दरबार में खुलेंगे पट, बाबा महाकाल खेलेंगे रंग-गुलाल

उज्जैन 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. चंद्र ग्रहण के दौरान सभी मंदिरों और शिवालयों के पट बंद रहते हैं. यहां तक की घरों में भी भगवान के मंदिर के पर्दे लगा दिए जाते हैं और पूजा-पाठ नहीं होती है. फिर ग्रहण खत्म होने पर शुद्धिकरण के बाद ही पट खुलते हैं. ये बातें तो सभी जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दौरान भगवान महाकालेश्वर मंदिर के पट सामान्य दिनों की तरह खुले रहते हैं. भक्त बाबा के दर्शन कर सकते हैं. जानिए बाबा महाकाल मंदिर में क्यों ग्रहण पर भी पट खुले रहते हैं. महाकाल के आगे ग्रह, नक्षत्र का कोई दुष्प्रभाव नहीं अवंतिका नगरी उज्जैन में भगवान महाकालेश्वर मंदिर में हर दिन की तरह 3 मार्च यानि चंद्र ग्रहण पर भी बाबा के दर्शन का क्रम सुबह भस्म आरती से देर रात शयन आरती तक चलता रहेगा. इसके पीछे की वजह को लेकर मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने  चर्चा में बताया कि "बाबा महाकालेश्वर का मंदिर दक्षिण मुखी है. भगवान का मुख दक्षिण की और होने से वे कालों के काल महाकाल कहलाते हैं. दक्षिण दिशा काल का है, काल पर जिसका नियंत्रण हो वह महाकाल है. बाबा महाकाल के कारण कोई भी ग्रह, नक्षत्र या कोई बाधा किसी को प्रभावित नहीं कर पाता. इसलिए ग्रहण के दौरान भी कोई दुष्प्रभाव मंदिर क्षेत्र में नहीं पड़ेगा. लिहाजा चंद्रग्रहण के दौरान भी भगवान का पूजा-अर्चन और सभी आरती समय पर जारी रहेगी. इसके साथ ही भक्त बाबा के दर्शन हर दिन की तरह कर सकेंगे. मंदिर सुबह भस्म आरती से लेकर देर रात शयन आरती तक खुला रहेगा. मंदिर में 2 मार्च यानि सोमवार को होलिका दहन हुआ . इसके बाद 3 मार्च को ही होली पर्व मनाया जाएगा. वेद परंपरा का अपना महत्व है. उसका निर्वहन करने के लिए कुछ नियमों का पालन जरूर किया जाएगा." 14 मिनट का ग्रहण जानिए क्या रहेगा पूजन का क्रम मंगलवार को फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा का दिन है. शासकीय पुजारी पं. घनश्याम शर्मा ने बताया कि "सुबह की दद्योदक और भोग आरती में भगवान को केवल शक्कर का भोग अर्पित किया जाएगा. ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर में शुद्धिकरण, भगवान का स्नान पूजन के बाद भगवान को भोग अर्पित कर संध्या आरती संपन्न की जाएगी. ग्रहण 3 मार्च को शाम 6:32 से 6:46 तक यानि 14 मिनट का रहने वाला है. ग्रहण का वेद काल सुबह सूर्योदय से ही प्रारंभ हो जाएगा. भगवान महाकालेश्वर की ऊर्जा के आगे सब कुछ क्षीण महेश पुजारी ने कहा कि " ग्रहण के दिन मंदिर की सारी व्यवस्थाएं हर दिन की तरह तो रहेगी, लेकिन ग्रहण के चलते कोई भी यानि पुजारी हो या श्रद्धालु भगवान को स्पर्श नहीं करेगा. इस दौरान गर्भ गृह में पुजारी मंत्रोच्चार करते हैं. जब ग्रहण खत्म हो जाता है, तो पुजारी स्नान करने के बाद भगवान का जलाभिषेक करेंगे, मंदिर परिसर में विराजमान सभी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का जलाभिषेक होगा. मंदिर शुद्धिकरण होगा. दूसरे मंदिरों की तरह महाकाल मंदिर का पट बंद नहीं होंगे. दक्षिण मुखी ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से सारे दुष्प्रभाव खत्म हो जाते हैं. भगवान महाकालेश्वर की ऊर्जा के आगे सब कुछ क्षीण है. जैसे सूर्य की ऊर्जा है, उससे कई गुना अधिक बाबा की ऊर्जा है." महाकाल मंदिर समिति ने क्या कहा? मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने जानकारी देते हुए बताया कि "पुजारी-पुरोहितों से चर्चा के बाद तय हुआ है कि होली पर्व 3 मार्च को ही मनाया जाएगा. ग्रहण में भी भगवान के दर्शन पूजन का क्रम हर रोज की तरह रहेगा. दर्शन करने आने वाले सभी दर्शनार्थियों को कोई परेशानी नहीं आए, इसका ध्यान रखा जाएगा. ग्रहण के कारण जो सामान्य जो बदलाव हुए हैं, जैसे मंदिर शुद्धिकरण हो या ग्रहण के दौरान गर्भ गृह के अंदर मंत्रोच्चार तमाम व्यवस्थाएं मंदिर समिति की ओर से की गई है.

भोजशाला परिसर में कब्रों पर उठे नए विवाद, एएसआई सर्वे रिपोर्ट के बाद मुस्लिम पक्ष का कोर्ट जाने का ऐलान

धार  धार के भोजशाला परिसर में लंबे समय से शवों को दफनाने का विवाद चला आ रहा है। यहाँ कुछ परिवारों के सदस्यों की मौत होने पर उन्हें परिसर के भीतर ही दफनाया जाता था। हालांकि, हिंदू समाज द्वारा इसका लगातार विरोध किया गया। विवाद बढ़ता देख साल 1997 में तत्कालीन कलेक्टर ने एक आदेश जारी कर भोजशाला में शव दफनाने पर रोक लगा दी थी। इस आदेश के बाद वहां अंतिम संस्कार बंद हुआ, लेकिन मस्जिद के सामने वाले हिस्से में आज भी कई पुरानी कब्रें मौजूद हैं।  जांच में यह बात भी सामने आई है कि इन कब्रों को बनाने में उन पत्थरों का इस्तेमाल किया गया जो भोजशाला के हिस्सों को तोड़ने के बाद मलबे के रूप में वहां पड़े थे। एएसआई ने सर्वे के दौरान इन कब्रों के पास के इलाके की भी जांच की है। हालांकि इनके बारे में अभी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन यह साफ है कि शहर में अलग कब्रिस्तान होने के बावजूद कुछ लोग शवों को दफनाने के लिए भोजशाला परिसर का ही इस्तेमाल करते थे। भोजशाला के उस हिस्से में जहाँ मस्जिद बनी है, वहां के पत्थरों और गुंबदों पर ऐसी आकृतियां मिली हैं जो आमतौर पर मस्जिद निर्माण में नहीं होतीं। कुछ शिलालेखों पर पशुओं की आकृतियां बनी हुई हैं। वहीं, परिसर के 50 से ज्यादा शिलालेखों पर अरबी और फारसी में आयतें भी लिखी मिली हैं। दूसरी तरफ, मुस्लिम समाज ने एएसआई की इस सर्वे रिपोर्ट को गलत बताते हुए इसे कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है। इसके लिए धार के मुस्लिम प्रतिनिधियों ने वकीलों से मशविरा शुरू कर दिया है। कोर्ट ने इस रिपोर्ट पर दावे और आपत्तियां दर्ज करने के लिए 16 मार्च तक का समय दिया है। परिसर के उस हिस्से में, जहां मस्जिद निर्मित है, पत्थरों और गुंबदों पर ऐसी आकृतियां मिली हैं जो सामान्यतः मस्जिद निर्माण में नहीं देखी जातीं। कुछ शिलालेखों पर पशु आकृतियां उकेरी गई हैं, जबकि 50 से अधिक शिलालेखों पर अरबी और फारसी में आयतें लिखी पाई गई हैं। नींव में मिला परमारकालीन ‘शारदा सदन’ रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान ढांचे के नीचे बेसाल्ट पत्थरों की 10वीं–11वीं शताब्दी की नींव पाई गई। इन पत्थरों पर ‘शारदा सदन’ शब्द अंकित है, जो देवी सरस्वती या वाग्देवी के निवास का संकेत देता है। साथ ही सुप्रसिद्ध साहित्यिक कृति ‘पारिजात मंजरी’ के उल्लेख वाले शिलालेख भी मिले हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि यह स्थान पूजा का केंद्र होने के साथ ही शिक्षा और नाट्य गतिविधियों का प्रमुख स्थल भी था। तीन चरणों में निर्माण, अंतिम चरण में मस्जिद स्वरूप वैज्ञानिक परीक्षणों से एएसआई ने निष्कर्ष निकाला है कि परिसर का निर्माण तीन चरणों में हुआ। सबसे प्राचीन परत मंदिर की है। इसके ऊपर क्षतिग्रस्त संरचना के अवशेष और फिर अंतिम चरण में मस्जिदनुमा ढांचा निर्मित किया गया। रिपोर्ट कहती है कि मस्जिद निर्माण के दौरान मंदिर के स्तंभों, शिलाखंडों और सजावटी पत्थरों का पुनः उपयोग किया गया। जिसमें कि निर्माण में समरूपता का अभाव स्पष्ट दिखता है। कई पत्थर उल्टे या आड़े-तिरछे लगाए गए, जिन पर संस्कृत शिलालेख खुदे थे। कुछ अक्षरों को घिसकर मिटाने के प्रयास भी मिले हैं। इससे यह संदेह प्रबल होता है कि मूल पहचान को छिपाने की कोशिश की गई। 106 स्तंभ, 82 अर्धस्तंभ और कीर्तिमुख सर्वे में पाया गया कि पूरी संरचना 106 मुख्य स्तंभों और 82 अर्धस्तंभों पर आधारित है। अधिकांश स्तंभ चूना पत्थर के हैं, जिनका रंग हल्का लाल और धूसर है। इन पर कीर्तिमुख, नागबंध, चैत्य गवाक्ष और उल्टे पत्तों की नक्काशी उकेरी गई है। कीर्तिमुख भारतीय मंदिर वास्तुकला की विशिष्ट आकृति है, जिसे सिंहमुख रूप में दर्शाया जाता है और जिसे दुष्ट शक्तियों से रक्षा का प्रतीक माना जाता है। स्तंभों के शीर्ष पर गोलाकार अभाकस, अष्टकोणीय पट्ट और त्रिकोणीय आधार स्पष्ट रूप से मध्यकालीन मंदिर शैली को दर्शाते हैं। 150 से अधिक संस्कृत शिलालेख, 56 अरबी-फारसी अभिलेख रिपोर्ट में 150 से अधिक संस्कृत और प्राकृत भाषा के शिलालेख दर्ज किए गए हैं। इसके विपरीत 56 शिलालेख अरबी और फारसी में पाए गए। यह अनुपात भी मूल संरचना के मंदिर और शैक्षणिक केंद्र होने की ओर संकेत करता है। फर्श और दीवारों में लगे कई पत्थरों पर खुदे अक्षरों को जानबूझकर घिसा गया या उल्टा लगा दिया गया ताकि उन्हें पढ़ा न जा सके। एएसआई के अनुसार यह ‘आइकॉनोग्राफिक इरेजर’ का स्पष्ट उदाहरण है। मूर्तियों के साक्ष्य: गणेश से अर्धनारीश्वर तक सर्वे रिपोर्ट में 94 मूर्तियों और उनके अवशेषों का उल्लेख है। इनमें गणेश, ब्रह्मा, नृसिंह और चार भुजाओं वाले अन्य देवताओं की आकृतियां शामिल हैं। परिसर से पूर्व में प्राप्त अर्धनारीश्वर, कुबेर और नायिका की मूर्तियों को भी साक्ष्य के रूप में जोड़ा गया है। ये प्रतिमाएं वर्तमान में संग्रहालयों में सुरक्षित हैं। खिड़की फ्रेम पर देवी-देवताओं की अपेक्षाकृत सुरक्षित मूर्तियां और एक स्तंभ पर कटी-फटी आकृतियां इस बात की ओर संकेत करती हैं कि मूल प्रतिमाओं को क्षति पहुंचाई गई। 1455 ईस्वी का शिलालेख और ऐतिहासिक संदर्भ परिसर में स्थित मकबरे के प्रवेश द्वार पर लगे शिलालेख का उल्लेख रिपोर्ट के खंड चार, पृष्ठ 260 पर किया गया है। यह शिलालेख मालवा सल्तनत के शासक महमूद खिलजी के काल (हिजरी 859/1455 ईस्वी) का है। एएसआई द्वारा किए गए अनुवाद के अनुसार उसमें उल्लेख है कि एक पुराने आश्रम को ध्वस्त कर मूर्तियों को नष्ट किया गया और उसे नमाज की जगह में परिवर्तित किया गया। इस संदर्भ में उल्‍लेखित है कि रिपोर्ट इस अभिलेख को ऐतिहासिक परिवर्तन का प्रत्यक्ष साक्ष्य मानती है। कारीगरों के 139 निशान और युद्ध दृश्य स्तंभों पर 139 से अधिक प्रकार के चिह्न जैसे त्रिशूल, स्वास्तिक और अन्य प्रतीक मिले हैं। इन्हें कारीगरों के सिग्नेचर या कोड के रूप में देखा गया है। दीवारों पर हाथी और सैनिकों के युद्ध दृश्य भी उकेरे गए हैं। एक स्थान पर बच्चे के हाथ का निशान भी मिला है, जो निर्माणकालीन गतिविधियों का मानवीय संकेत देता है। 98 दिन का सर्वे और 2189 पृष्ठों की रिपोर्ट उल्‍लेखनीय है कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के निर्देश पर 22 मार्च से 27 जून 2024 तक 98 दिनों तक परिसर का वैज्ञानिक सर्वे किया गया। 4 जुलाई 2024 को एएसआई ने 10 … Read more

गंगा-यमुना की पवित्रता दूषित नहीं होने देगी योगी सरकार, राज्य में प्रतिदिन 4500 मिलियन लीटर से ज्यादा गंदा पानी किया जा रहा ट्रीट

यूपी बना 85 फीसदी सीवेज का शोधन करने में सक्षम राज्य गंगा-यमुना की पवित्रता दूषित नहीं होने देगी योगी सरकार, राज्य में प्रतिदिन 4500 मिलियन लीटर से ज्यादा गंदा पानी किया जा रहा ट्रीट नदियों की स्वच्छता में योगी सरकार ने रचा नया अध्याय, 2035 तक 100% अपशिष्ट जल उपयोग का लक्ष्य नमामि गंगे मिशन फेज-2 से यूपी के सीवरेज सिस्टम को मिल रही बड़ी मजबूती, अपशिष्ट जल से बनेगा विकास का नया मॉडल लखनऊ, उत्तर प्रदेश को स्वच्छ प्रदेश बनाने की मुहिम समय के साथ तेज होती जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार अपशिष्ट जल को ‘आर्थिक संपत्ति’ में बदलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। प्रतिदिन 4500 मिलियन लीटर से अधिक सीवेज का शोधन किया जा रहा है। इस तरह प्रदेश अब लगभग 85 प्रतिशत गंदे पानी को उपचारित करने में सफल है। सरकार गंगा-यमुना समेत राज्य की तमाम नदियों की पवित्रता को बनाए रखने के लिए हरसंभव कदम उठा रही है। नमामि गंगे मिशन से मिली सीवरेज सिस्टम को मजबूती उल्लेखनीय है कि नमामि गंगे मिशन के दूसरे चरण ने प्रदेश के सीवरेज सिस्टम को नई मजबूती दी है। उत्तर प्रदेश में अब तक 74 सीवर शोधन परियोजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं, जिनमें से 41 पूरी होकर संचालन में भी आ चुकी हैं। शेष परियोजनाओं पर तेजी से कार्य जारी है। राज्य भर में 155 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) क्रियाशील हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यप्रणाली ने नदियों के संरक्षण के प्रयासों को नई गति दी है। हर परियोजना की मॉनीटरिंग की जा रही है, जिससे न केवल गंगा-यमुना की पवित्रता सुनिश्चित हुई है, बल्कि नगरों में जल प्रबंधन की व्यवस्था भी मजबूत हो रही है।  अपशिष्ट जल से विकास का नया मॉडल   योगी सरकार अब उपचारित जल के सुरक्षित पुन: उपयोग की नीति तैयार कर रही है। योजना तीन चरणों में लागू होगी।  1. नगरपालिका- पार्कों की सिंचाई, सड़क सफाई, सार्वजनिक उद्यानों में इस्तेमाल।  2. उद्योग और कृषि- औद्योगिक प्रक्रियाओं व खेतों की सिंचाई के लिए। 3. घरेलू गैर-पेय उपयोग- निर्माण कार्य समेत अन्य कार्यों में पुनर्चक्रण।   सीएम योगी कर रहे स्वच्छ नदियों के सपने को साकार जहां एसटीपी चालू हैं और क्षमता मौजूद है, वहां वर्ष 2030 तक 50 फीसदी और 2035 तक 100 फीसदी अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह कदम केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और स्वच्छ नदियों के सपने को साकार करने की दिशा में निर्णायक साबित हो रहा है।