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लिवर फेलियर की समय से चेतावनी: एंटीबायोटिक्स पर वैज्ञानिकों की अहम खोज

एंटीबायोटिक्स जीवन रक्षक दवाएं हैं क्योंकि ये जानलेवा संक्रमणों से लड़ती हैं। फिर भी इनके कुछ अनचाहे दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं । डाक्टरों ने लंबे समय से यह देखा है कि कुछ एंटीबायोटिक्स लिवर एंजाइम को बढ़ा देती हैं या सूजन पैदा करती हैं और कुछ मामलों में ये गंभीर क्षति भी पहुंचा सकती हैं, जिससे लिवर फेलियर हो सकता है। इसका कारण ये लिवर कोशिकाओं पर किस स्थान पर स्थित होती हैं और उनकी बाहरी परत के साथ कैसे प्रतिक्रिया करती हैं, यह भी मायने रखता है। दवाओं को लेकर नया नजरिया आईआईटी बांबे के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए नए अध्ययन में जिसमें बायोसाइंसेज और बायोइंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर आशुतोष कुमार ने और मलेशिया के सनवे विश्वविद्यालय के प्रोफेसर वेत्रिसेलवन सुबरामणियन शामिल थे, ने यह दिखाया कि इसका जवाब शायद इस बात में नहीं है कि कोई दवा कितनी तेजी से काम करती है, बल्कि इस बात में है कि यह लिवर सेल्स की बाहरी परत (मेम्ब्रेन) के साथ कहां और कैसे इंटरैक्ट करती है। प्रोफेसर कुमार ने कहा कि परंपरागत रूप से लोगों का मानना था कि दवा का मालिक्यूल सेल्स को कितना नुकसान पहुंचाता है, इससे यह होता है कि यह सेल मेम्ब्रेन को कितना तोड़ता है । हमारे नतीजे इस नजरिए को बदल सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह अंतर्दृष्टि नई और सुरक्षित दवाओं के विकास के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ रखती है। लिवर की चोट चिंता का विषय दवाओं के कोशिका झिल्ली (सेल मेम्ब्रेन) के साथ मालिक्यूलर लेवल पर कैसे जुड़ते हैं, इसका अध्ययन करके वैज्ञानिक विषाक्तता के जोखिमों की भविष्यवाणी कर सकेंगे, इससे पहले कि क्लिनिकल ट्रायल शुरू हो। अध्ययन में यह भी पता चला कि दवा से होने वाली लिवर की चोट मेडिसिन में एक बड़ी चिंता का विषय है और यह एक मुख्य कारण है कि दवाओं को अप्रूवल के बाद मार्केट से वापस ले लिया जाता है या उन पर रोक लगा दी जाती है। चुनौती यह है कि लिवर की चोट की भविष्यवाणी करना कठिन है क्योंकि कई मरीजों में पहले कोई लक्षण नहीं होते, जबकि अन्य कई दवाओं पर होते हैं, जिससे असली दोषी की पहचान करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। यहां तक कि निकटता से संबंधित दवाएं भी अलग व्यवहार कर सकती हैं। पेपर के पहले लेखक आकाश कुमार झा ने कहा कि कोशिका की झिल्ली दवा और लिवर की कोशिकाओं के बीच संपर्क का पहला बिंदु है। रक्त में प्रवाहित होने वाली कोई भी दवा कोशिका में प्रवेश करने या कोशिकीय लक्ष्यों को प्रभावित करने से पहले कोशिका की झिल्ली के साथ इंटरैक्शन करनी चाहिए। विषाक्तता के खतरों का जल्द पता लगेगा इसने शोधकर्ताओं को यह विश्वास दिलाया कि प्रारंभिक विषाक्त प्रभाव अक्सर झिल्ली स्तर पर शुरू होते हैं, जो परिवहन, संकेत भेजने और मेटाबालिज्म के लिए जिम्मेदार कई प्रोटीन भी होते है। ये नतीजे दवा बनाने के प्रोसेस में विषाक्तता के खतरों का जल्दी पता लगाकर दवा की सुरक्षा का अनुमान लगाने का एक नया तरीका बताते हैं, यह ट्रैक करके कि लैब में दवाएं सेल मेम्ब्रेन के साथ कैसे इंटरैक्ट करती हैं। झा ने आगे कहा, इस झिल्ली केंद्रित दृष्टिकोण को लागू करके यह पता लगा सकते हैं कि कुछ उपचार से अप्रत्याशित दुष्प्रभाव क्यों पैदा होते हैं और उस ज्ञान का उपयोग कर कम विषैले यौगिकों को डिजाइन कर सकते हैं। चूंकि ये परीक्षण तेज व स्केलेबल हैं, इन्हें दवा बनाने के दौरान स्टैंडर्ड सेफ्टी चेक में जोड़ा जा सकता है।  

खेल प्रेमियों के लिए खुशखबरी: एमपी में सिंथेटिक टर्फ हॉकी स्टेडियम को मिली मंजूरी, तय समय सीमा में होगा निर्माण

रायसेन औद्योगिक शहर मंडीदीप सहित सम्पूर्ण रायसेन जिले के हॉकी के खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों के लिए खुशखबरी है। राज्य सरकार ने मंडीदीप के हॉकी फीडर सेंटर की उपलब्धियों को देखते हुए 13.71 करोड़ रुपए स्वीकृत की है। यहां एक आधुनिक सिंथेटिक टर्फ वाला हॉकी स्टेडियम बनाया जाएगा, जो ढाई साल में तैयार होगा। हॉकी की नर्सरी माना जाता है मंडीदीप मंडीदीप को "हॉकी की नर्सरी" के रूप में जाना जाता है, जहां के खिलाड़ी वर्षों से प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। खिलाड़ियों की लगातार मांग पर अब यह सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे स्थानीय स्तर पर ही अंतरराष्ट्रीय मानकों का अभ्यास संभव हो सकेगा। इस योजना के साथ प्रदेश में सिंथेटिक टर्फ की कुल संख्या 17 हो जाएगी।   अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिताएं अब केवल सिंथेटिक टर्फ पर ही खेली जाती है। फिलहाल मंडीदीप के खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए भोपाल, नर्मदापुरम या ग्वालियर जाना पड़ता है। नए स्टेडियम के बनने से शहर में ही बेहतर सुविधा मिलेगी, जिससे खिलाडियों का प्रदर्शन और बेहतर होगा। वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखा सकेंगे। ढाई साल में बनकर होगा तैयार सरकार द्वारा राशि स्वीकृत होने के बाद अगले दो महीनों में निर्माण एजेंसी तय कर टेंडर निकाले जाएंगे। टेक्निकल और फाइनेंशियल बिड की प्रक्रिया पूरी होने में करीब डेढ़ महीना लगेगा। इसी माह में विभिन्न टीमों की ओर से स्टेडियम के लिए जरूरी अन्य प्रक्रियाओं को पूरा किया जाएगा। इसके बाद निर्माण कार्य की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें डेढ़ से दो साल का समय लगेगा। इस प्रकार कुल ढाई साल में स्टेडियम तैयार हो जाएगा।   उपलब्ध होंगी अत्याधुनिक सुविधाएं मंडीदीप के नयापुरा गांव में सिंथेटिक टर्फ का लगभग 7 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण होगा। इसके साथ ही टर्फ पर वाटरिंग के लिए स्प्रिंकलर सिस्टम लगाया जाएगा। शुरुआत में 300 दर्शकों की क्षमता वाली दर्शक दीर्घा (स्टैंड) बनेगी, बाद में इसे और बढ़ाया जा सकेगा। इसके अलावा यहां खिलाड़ियों के लिए 5 ड्रेसिंग रूम, एक बड़ा स्टोर और हॉल, जिसमें फिटनेस सेंटर होगा। वहीं एक इलेक्ट्रिक रूम भी बनाया जाएगा। कई खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम के करीब मंडीदीप हॉकी फीडर सेंटर के कई खिलाड़ी, खासकर लड़कियां, राष्ट्रीय टीम का दरवाजा खटखटा रहे हैं। लगभग 10 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं। यह पहल खिलाड़ियों की प्रतिभा निखारने में मदद करेगी।

स्कूल गार्डन बना पोषण का आधार, छात्रों को मिल रही हरी-भरी सेहत

रायपुर बच्चों को मिल रहा पौष्टिक आहार विद्यालय की बगिया से विद्यालय की बगिया से थाली तक एक अनूठी पहल है, जिसमें छात्र स्कूल परिसर में उगी ताजी, जैविक सब्जियां सीधे अपने मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) में खाते हैं। यह न केवल पौष्टिक आहार सुनिश्चित करता है, बल्कि छात्रों को प्रकृति, श्रम और खेती का व्यावहारिक ज्ञान भी देता है, जिससे वे आत्मनिर्भर बनते हैं। बच्चों को मिल रहा पौष्टिक आहार विद्यालय की बगिया से  छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के रामानुजनगर के विद्यालयों में किचन गार्डन की एक अनूठी पहल बच्चों के पोषण और व्यावहारिक शिक्षा दोनों को नई दिशा दे रही है। जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देशन एवं विकास खंड शिक्षा अधिकारी के मार्गदर्शन में संचालित इस योजना के अंतर्गत माध्यमिक शाला पतरापाली का किचन गार्डन पोषण सुदृढ़ीकरण का एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है। विद्यालय परिसर में शिक्षकों के मार्गदर्शन में विकसित इस बगीचे से नियमित रूप से ताज़ी एवं पौष्टिक सब्जियाँ प्राप्त हो रही हैं, जिन्हें मध्यान्ह भोजन में शामिल कर विद्यार्थियों को अतिरिक्त पोषण प्रदान किया जा रहा है। इसी कड़ी में आज विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक किचन गार्डन से लगभग 4 किलोग्राम ताज़ी सेमी (फली) की तुड़ाई की।           बच्चों ने स्वयं पौधों की देखभाल, सिंचाई, निदाई-गुड़ाई और तुड़ाई जैसी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाई, जिससे उन्होंने श्रम का महत्व तो समझा ही, साथ ही कृषि एवं पर्यावरण के प्रति व्यावहारिक ज्ञान भी अर्जित किया। विद्यालय के शिक्षक योगेश साहू ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराना, जैविक खेती के प्रति जागरूकता फैलाना और उन्हें व्यवहारिक शिक्षा से जोड़ना है। ताज़ी सब्जियों के उपयोग से मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता और पौष्टिकता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसका बच्चों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट रूप से दिख रहा है।          विद्यालय परिवार का मानना है कि इस प्रकार की गतिविधियाँ बच्चों में प्रकृति प्रेम, जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करती हैं। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक कृष्णकुमार यादव, अनिता सिंह, योगेश साहू, रघुनाथ जायसवाल सहित अभिभावकगण एवं स्थानीय समुदाय के सदस्य उपस्थित रहे। अभिभावकों ने विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों की इस पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसी योजनाएँ बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। विद्यालय प्रशासन ने संकल्प व्यक्त किया है कि आगे भी किचन गार्डन में विभिन्न मौसमी सब्जियों की खेती जारी रखी जाएगी, ताकि बच्चों को पोषण और ज्ञान दोनों निरंतर मिलते रहें।

Mercedes-Benz CLA इलेक्ट्रिक सेडान आई, 792 किमी रेंज और बुकिंग 10 मार्च से

मुंबई  लग्जरी कार निर्माता कंपनी Mercedes-Benz ने आखिरकार भारत में अपनी बहुप्रतीक्षित Mercedes-Benz CLA इलेक्ट्रिक सेडान को पेश कर दिया है. इसकी बुकिंग 10 मार्च से शुरू होगी, जिसके बाद अप्रैल में इस कार को लॉन्च किया जाएगा. बता दें कि नई Mercedes-Benz CLA, कंपनी के एंट्री-लेवल मॉडल्स की लाइन-अप में ICE A-Class Limousine के साथ-साथ EQA और EQB EVs की जगह लेगी. ऐसा पहली बार है, जब यह नेमप्लेट फुली इलेक्ट्रिक पावरट्रेन के साथ आएगी, क्योंकि साल 2020 की शुरुआत में बंद होने से पहले, यह कम्बशन-पावर्ड थी. फिलहाल कंपनी ने इसकी कीमत का खुलासा नहीं किया है. 2026 Mercedes-Benz CLA Electric की रेंज और स्पेसिफिकेशन नई CLA EV के स्पेसिफिकेशन की बात करें तो इसमें 800-वोल्ट का इलेक्ट्रिकल आर्किटेक्चर इस्तेमाल किया गया है, और इसका बेस 85kWh 250+ वेरिएंट WLTP साइकिल पर 792km की रेंज देने का दावा करता है, जिसे भारतीय बाजार में उतारा जाएगा. इसकी मज़बूत रेंज काफ़ी हद तक CLA इलेक्ट्रिक की 93 प्रतिशत ड्राइवट्रेन एफिशिएंसी की वजह से है, जिसे इसके एयरोडायनामिक डिज़ाइन और ऑप्टिमाइज़्ड एनर्जी कंजम्प्शन से मदद मिलती है. खास बात यह है कि अब इसका ग्राउंड क्लीयरेंस ज़्यादा है, और इसके सस्पेंशन को सड़क की कंडीशन के हिसाब से खास तौर पर ट्यून किया गया है. एक और खास बात यह है कि इसमें दो-स्पीड गियरबॉक्स लगाया गया है, जैसा कि Porsche Taycan जैसे मॉडलों में देखने को मिलता है, जबकि ज़्यादातर EVs में आम तौर पर सिंगल-स्पीड रिडक्शन यूनिट होती है. कार में लगी पीछे वाली इलेक्ट्रिक मोटर 272hp की पावर देती है, जिससे CLA 250+ सिर्फ 6.7 सेकंड में 100kph की स्पीड पकड़ सकती है. वहीं चार्जिंग की बात करें तो, यह सिस्टम 240kW तक की हाई-स्पीड DC फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करता है, और कंपनी का दावा है कि सही हालात में सिर्फ़ 20 मिनट में इसकी बैटरी 400km की रेंज तक चार्ज हो सकती है. 2026 Mercedes CLA Electric का एक्सटीरियर डिजाइन नई CLA के डिजाइन की बात करें तो इसमें लाइटिंग एलिमेंट्स में Mercedes के तीन पॉइंट वाले स्टार लोगो पर खास ध्यान दिया गया है. स्टार मोटिफ हेडलाइट्स, टेल-लाइट्स और 142 छोटे बैकलिट स्टार्स वाली सील्ड-ऑफ फ्रंट ग्रिल में भी मौजूद है. बंपर के डिज़ाइन पर नजर डालें तो यह साफ़ और एयरो-फोकस्ड है, जो इसकी एफिशिएंसी-फर्स्ट अप्रोच के हिसाब से है, और इसमें छोटे एयर इनलेट भी दिए गए हैं, जो कार के कोनों पर एयरफ्लो को आसानी से गाइड करने में मदद करते हैं. साइड प्रोफ़ाइल की बात करें, तो इस सेडान में फ़्लश डोर हैंडल और 18-इंच के व्हील्स के साथ एक स्लीक, कूपे जैसा सिल्हूट दिया गया है. बड़ी पैनोरमिक ग्लास रूफ गर्म मौसम के लिए सही हीट-प्रोटेक्टिव कोटिंग के साथ आती है. अपने पिछले मॉडल से 30mm लंबी, 25mm चौड़ी और 25mm ऊंची होने के बावजूद, स्मूद सरफेसिंग और बेहतर एयरफ़्लो मैनेजमेंट EV को 0.21 का कम ड्रैग कोएफ़िशिएंट पाने में मदद करते हैं. रियर प्रोफाइल की बात करें तो इसमें पीछे की तरफ, टेल-लाइट्स के बीच एक पूरी चौड़ाई वाली लाइट बार लगाई गई है. इसके उपलब्ध एक्सटीरियर शेड्स के तौर पर क्लियर ब्लू, कॉस्मिक ब्लैक, पोलर व्हाइट, एल्पाइन ग्रे और पेटागोनिया रेड कलर शामिल हैं, जिनमें से आखिरी दो मैन्युफ़ैक्चर ऑप्शन हैं. 2026 Mercedes CLA Electric का इंटीरियर और फीचर्स चूंकि भारतीय बाजार में CLA 250+ वेरिएंट उतारा जाएगा, इसलिए इसमें कंपनी का ट्रिपल-डिस्प्ले सुपरस्क्रीन नहीं दिया जाएगा. इसके बजाय, केबिन में 10.25-इंच का ड्राइवर डिस्प्ले और मर्सिडीज़ के लेटेस्ट MB.OS ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलने वाला 14-इंच का सेंट्रल टचस्क्रीन होगा. वहीं पैसेंजर डिस्प्ले की जगह, LED-बैकलिट स्टार लोगो वाला एक ग्लास पैनल लगाया जाएगा, जो एम्बिएंट लाइटिंग के साथ सिंक होगा. यह कार ओवर-द-एयर सॉफ्टवेयर अपडेट को भी सपोर्ट करेगी. इसके अलावा, इसमें वायरलेस चार्जिंग और छह 100W USB-C फास्ट-चार्जिंग पोर्ट स्टैंडर्ड तौर पर दिए गए हैं, और पीछे की सीटें 40:20:40 के अनुपात में बांटी गई हैं. 2026 Mercedes CLA Electric के सेफ्टी फीचर्स वैसे तो Mercedes CLA इलेक्ट्रिक का Bharat NCAP द्वारा क्रैश-टेस्ट अभी बाकी है, लेकिन इसे 2025 में Euro NCAP द्वारा पूरी 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग दी गई थी. फ्रंट और साइड एयरबैग के अलावा, इसमें एक सेंटर एयरबैग, साथ ही कैमरा- और रडार-बेस्ड लेवल 2 ADAS भी होगा.

नई स्टडी से खुलासा: मौत के बाद इंसान क्या-क्या सुन सकता है? जानिए हैरान कर देने वाले तथ्य

न्यूयॉर्क    सोचिए… आपका दिल धड़कना बंद कर देता है. डॉक्टर CPR रोक देते हैं. आपको ‘डेथ’ घोषित कर दिया जाता है,लेकिन आपका दिमाग अब भी जिंदा है,और आपको सब कुछ सुनाई दे रहा है.यहां तक कि डॉक्टर आपकी मौत का समय भी बोल रहे हों! मौत आज भी दुनिया के लिए एक रहस्य बनी हुई है. इंसान के साथ मौत के बाद क्या होता है और आखिरी क्षणों में उसका अनुभव कैसा होता है.इस पर बहुत कुछ कहा जा चुका है. इन विषयों पर कई रिसर्च भी हो चुके हैं, लेकिन हाल ही में आई एक नई रिसर्च ने सभी को चौंका दिया. इसमें दावा किया गया है कि इंसान की मौत के बाद भी उसका दिमाग कुछ समय तक एक्टिव रहता है और वह अपने आसपास की आवाजें सुन सकता है. न्यूयॉर्क में एक डॉक्टर ने ऐसा खुलासा किया है जिसने मौत की परिभाषा को ही बदलकर रख दिया है. दिल की धड़कन रुक जाने के बाद भी इंसानी दिमाग सक्रिय रहता है, और कई बार मरीज डॉक्टरों द्वारा अपनी मौत की घोषणा तक सुन लेते हैं. यह दावा एक भयावह लेकिन महत्वपूर्ण स्टडी में किया गया है, जो Resuscitation में पब्लिश हुई है. मौत के बाद भी सबकुछ सुनाई देता है इस स्टडी का नेतृत्व न्यूयॉर्क के एनवाईयू लैंगोन मेडिकल सेंटर (NYU Langone Medical Center) के डॉक्टर सैम पारनिया ने किया. उन्होंने उन मरीजों से बात की जिन्हें क्लिनिकली मृत घोषित कर दिया गया था-यानी जिनका दिल धड़कना बंद हो चुका था,लेकिन बाद में वे दोबारा जिंदा हो गए. चौंकाने वाली बात यह थी कि कई मरीजों ने अपने कमरे में हो रही घटनाओं को सटीक रूप से याद किया. डॉ. पारनिया के अनुसार, इन मरीजों की याददाश्त इतनी स्पष्ट इसलिए थी क्योंकि दिल रुकने के बाद भी लगभग एक घंटे तक दिमाग में सामान्य और लगभग सामान्य ब्रेन ऐक्टिविटी पाई गई. उन्होंने बताया कि ये अनुभव न तो सपने जैसे होते हैं और न ही भ्रम या मतिभ्रम.ये एक्सपियरेंस खास होते हैं. इस शोध में अमेरिका और ब्रिटेन के 25 अस्पतालों में कार्डियक अरेस्ट से बचे 53 मरीजों की दिमागी गतिविधि और जागरूकता का अध्ययन किया गया. इसमें पाया गया कि 40 फीसदी मरीजों ने यादें या सचेत विचार होने की बात कही. डॉ. पारनिया के अनुसार, मौत के दौरान कई लोगों को लगता है कि वे अपने शरीर से अलग हो चुके हैं और कमरे में घूमकर चीजें देख-पहचान रहे हैं. जैसे कंप्यूटर अचानक रीबूट हो गया इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम (EEG) से पता चला कि मरीजों में दिल रुकने के 35 से 60 मिनट बाद तक gamma, delta, theta, alpha और beta जैसी ब्रेन वेव्स मौजूद थीं, जो सोचने और जागरूकता से जुड़ी होती हैं. यह बताता है कि दिमाग दिल रुकने के बाद भी पूरी तरह बंद नहीं होता, बल्कि कभी-कभी उच्च स्तरीय गतिविधि दिखाता है-मानो कोई बंद कंप्यूटर अचानक रीबूट हो रहा हो. पूरी लाइफ का फ्लेशबैक एकसाथ डॉ. पारनिया का कहना है कि पहले यह माना जाता था कि दिल रुकने के 10 मिनट बाद दिमाग स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो जाता है, लेकिन यह शोध दिखाता है कि दिमाग CPR जारी रहने पर देर तक सक्रिय रह सकता है. यही ऊर्जा का उभार लोगों को अपने पूरे जीवन की यादें एक साथ देखने जैसा अनुभव भी दे सकता है.

घर की तरक्की रोक सकती हैं बालकनी में रखी ये वस्तुएँ

वास्तु शास्त्र में बालकनी को घर की ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना गया है। यहीं से सूर्य प्रकाश, वायु और ब्रह्मांडीय ऊर्जा घर में प्रवेश करती है। मत्स्य पुराण, गरुड़ पुराण और वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि बालकनी में गलत वस्तुएं रख दी जाएं, तो इससे नकारात्मक ऊर्जा, धन हानि, मानसिक तनाव और पारिवारिक कलह बढ़ सकती है। वास्तु शास्त्र केवल निर्माण का नियम नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित करने का विज्ञान है। यदि बालकनी को स्वच्छ, हल्का और सकारात्मक रखा जाए तो घर में सुख, शांति और समृद्धि निश्चित रूप से आती है। आइए जानते हैं कौन-सी चीजें बालकनी में भूलकर भी नहीं रखनी चाहिए। बालकनी में पुराने फर्नीचर, टूटी कुर्सियां, खराब गमले या बेकार सामान रखना दरिद्र योग को जन्म देता है। इससे लक्ष्मी का वास नहीं होता और आर्थिक संकट बढ़ता है। कूड़ेदान या गंदगी बालकनी में कचरा रखना सबसे बड़ा वास्तु दोष माना गया है। यह घर में नकारात्मक ऊर्जा और बीमारियों को आकर्षित करता है। गरुड़ पुराण में गंदगी को दुर्भाग्य का कारण बताया गया है। लोहे के भारी औज़ार या हथियार बालकनी में हथौड़ा, रॉड, एक्सरसाइज़ इक्विपमेंट या लोहे का भारी सामान रखने से झगड़े, क्रोध और मानसिक अशांति बढ़ती है। कांटेदार या सूखे पौधे कैक्टस, सूखे पौधे या मुरझाए फूल वास्तु में अशुभ माने गए हैं। ये रिश्तों में तनाव और नकारात्मक विचार बढ़ाते हैं। बालकनी में हमेशा हरे और जीवित पौधे ही रखें। गीले कपड़े या कपड़ों का ढेर बालकनी में लंबे समय तक गीले कपड़े टांगे रखना चंद्र दोष और मानसिक तनाव को बढ़ाता है। यह घर की सकारात्मक तरंगों को रोकता है। बंद और अंधेरी बालकनी अगर बालकनी हमेशा बंद या अंधेरी रहती है तो सूर्य ऊर्जा का प्रवेश रुक जाता है, जिससे अवसाद और आलस्य बढ़ता है। प्रतिदिन कुछ समय बालकनी खुली रखें। बालकनी में क्या रखें (शुभ वस्तुएं) तुलसी, मनी प्लांट, एलोवेरा, हल्का और साफ फर्नीचर, विंड चाइम, मिट्टी या पीतल का दीपक (शाम को)

रायपुर: सरगुजा में पीएम आवास निर्माण में तेजी, योजनाओं को मिला नया जोश

रायपुर : सरगुजा जिले में पीएम आवास निर्माण ने पकड़ी रफ्तार एक माह में 1628.60 लाख रुपये अंतरित रायपुर सरगुजा जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत आवास निर्माण कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। जिले में स्वीकृत कुल 1,02,210 आवासों में से 80,296 आवास पूर्ण किए जा चुके हैं, जो 50 प्रतिशत से अधिक उपलब्धि को दर्शाता है। इस माह 1,781 आवासों का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ है। निर्माण कार्यों को गति देने के लिए हितग्राहियों को किश्तों की राशि आधार आधारित डीबीटी प्रणाली के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में समय-सीमा के भीतर अंतरित की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2024-26 में स्वीकृत 36,306 आवासों में से 18,782 आवास पूर्ण हो चुके हैं। योजना के तहत प्रत्येक हितग्राही को 1.20 लाख रुपये की राशि स्वीकृति, प्लिंथ एवं पूर्णता चरण में जियो-टैग आधारित सत्यापन के पश्चात प्रदान की जाती है। अब तक 35,125 हितग्राहियों को प्रथम किश्त (40,000 रुपये), 23,419 को द्वितीय किश्त (55,000 रुपये) तथा 10,367 हितग्राहियों को तृतीय किश्त (25,000 रुपये) जारी की जा चुकी है। विगत एक माह में 1,634 आवास पूर्ण करते हुए 1,349.05 लाख रुपये की राशि जारी की गई। साथ ही कुल मिलाकर 1,628.60 लाख रुपये हितग्राहियों के खातों में अंतरित किए गए। इसके अतिरिक्त मनरेगा के अंतर्गत 90 मानव-दिवस का मजदूरी भुगतान तथा स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण उपरांत 12,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जा रही है। पीएम जनमन योजना के तहत जिले में 2,565 पहाड़ी कोरवा हितग्राहियों को स्वीकृति प्रदान की गई है, जिनमें से 1,385 आवास पूर्ण हो चुके हैं। प्रति हितग्राही 2.00 लाख रुपये की सहायता राशि चार चरणों में जारी की जाती है। विगत एक माह में 73 जनमन आवास पूर्ण हुए तथा 217 लाख रुपये की राशि जारी की गई। मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत जिले में 1,024 आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 214 आवास पूर्ण हो चुके हैं। पिछले एक माह में 74 आवास पूर्ण करते हुए 62.55 लाख रुपये की राशि हितग्राहियों के खातों में अंतरित की गई है। आवास निर्माण में प्रगति सुनिश्चित करने के लिए 45 आवास मित्रों एवं 218 रोजगार सहायकों को कुल 61.97 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। वर्तमान में जिले में किसी भी हितग्राही की किश्त भुगतान हेतु लंबित नहीं है, जो प्रशासन की पारदर्शी एवं सक्रिय कार्यप्रणाली को दर्शाता है। आवास निर्माण से संबंधित किसी भी समस्या या सुझाव के लिए हितग्राही राज्य शासन द्वारा जारी निःशुल्क हेल्पलाइन नंबर 1800-233-1290 पर संपर्क कर सकते हैं।

FSSAI की रिपोर्ट ने चौंकाया, दूध में यूरिया, डिटर्जेंट और पानी मिलाने वाले टॉप डेयरी ब्रांड्स जांच में फेल

भोपाल   भारत, जो दुनिया के कुल दूध उत्पादन में 25 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा उत्पादक देश है, अब 'मिलावटी और असुरक्षित' दूध के केंद्र के रूप में उभर रहा है। हाल ही में 'ट्रस्टीफाइड' (एक स्वतंत्र लैब टेस्टिंग प्रोग्राम) द्वारा की गई जांच ने देश के टॉप डेयरी ब्रांडों के दावों की पोल खोल दी है। बैक्टीरिया का स्तर खतरे के निशान से ऊपर ट्रस्टीफाइड की रिपोर्ट के अनुसार, कई नामी ब्रांडों के दूध के नमूनों में कोलीफॉर्म (Coliform) का स्तर FSSAI की निर्धारित सीमा से 98 गुना अधिक पाया गया। इसके अलावा, 'टोटल प्लेट काउंट' (Total Plate Count) भी सुरक्षित सीमा से कहीं ज्यादा था, जो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। हर तीन में से एक नमूना फेल दूध की शुद्धता को लेकर सरकारी आंकड़े भी डराने वाले हैं। FSSAI द्वारा 2025 में की गई जांच में 38 प्रतिशत नमूने मिलावटी पाए गए। पिछले कुछ वर्षों का रुझान देखें तो स्थिति और भी चिंताजनक हुई है:     2015-2018: मिलावटी नमूनों की संख्या में 16.64% का इजाफा हुआ।     2022: कुल 798 नमूनों में से आधे मिलावटी पाए गए।     2025: लगभग हर तीसरा नमूना मानकों पर खरा नहीं उतरा। उत्तर भारत सबसे ज्यादा प्रभावित एफएसएसएआई की 'मिल्क सर्विलांस रिपोर्ट' के अनुसार, मिलावट के मामले में क्षेत्रीय स्तर पर भारी अंतर देखा गया है: क्षेत्र – मानकों में फेल नमूनों का प्रतिशत उत्तर भारत: 47% (सबसे असुरक्षित) पश्चिम भारत: 23% दक्षिण भारत: 18% पूर्वी भारत: 13% क्या मिलाया जा रहा है आपके दूध में? इंडियन जर्नल ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन की एक ताजा स्टडी में 330 नमूनों की जांच की गई, जिसमें से 70.6% में गंभीर मिलावट पाई गई। मिलावट के मुख्य कारक इस प्रकार हैं: पानी: 193 नमूनों में मात्रा बढ़ाने के लिए पानी मिलाया गया। डिटर्जेंट (23.9%): झाग बनाने और दूध को गाढ़ा दिखाने के लिए। यूरिया (9.1%): फैट और प्रोटीन की मात्रा को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए। स्वास्थ्य पर प्रभाव और सावधानी विशेषज्ञों का कहना है कि कोलीफॉर्म और डिटर्जेंट युक्त दूध पीने से पेट में संक्रमण, किडनी की बीमारी और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे दूध खरीदने से पहले ब्रांड की लेटेस्ट लैब रिपोर्ट और FSSAI मार्क की जांच जरूर करें। सोर्स- एफएसएसएआई

अब घर बैठे मिलेगा PF का पूरा हिसाब! EPFO ने आसान किया बैलेंस और पासबुक चेक करना

नई दिल्ली अगर आप किसी कंपनी में काम करते हैं और यह जानना चाहते हैं कि पिछले कुछ सालों में आपके ईपीएफ अकाउंट में कितनी राशि जमा हुई है, तो अब इसके लिए आपको किसी सीए, एजेंट या साइबर कैफे की मदद लेने की जरूरत नहीं है। कई लोग जानकारी के अभाव में दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं, जिससे धोखाधड़ी का खतरा भी बढ़ जाता है। अब कर्मचारी खुद अपने मोबाइल या कंप्यूटर से सुरक्षित तरीके से पीएफ बैलेंस देख सकते हैं। मिस्ड कॉल से तुरंत मिलेगी जानकारी सबसे आसान तरीका मिस्ड कॉल का है। अगर आपके पास इंटरनेट नहीं है, तब भी आप बैलेंस जान सकते हैं। अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 9966044425 पर मिस्ड कॉल दें। दो रिंग के बाद कॉल अपने आप कट जाएगी और कुछ ही सेकंड में आपके मोबाइल पर एसएमएस के जरिए बैलेंस की जानकारी आ जाएगी। इसके लिए जरूरी है कि आपका यूएएन एक्टिव हो और आधार या पैन से लिंक हो। SMS से भी मिल सकती है डिटेल आप एक मैसेज भेजकर भी अपनी पीएफ डिटेल प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए 7738299899 पर EPFOHO UAN ENG लिखकर भेजें। अगर आप हिंदी में जानकारी चाहते हैं तो EPFOHO UAN HIN लिखें। यह सेवा कई भाषाओं में उपलब्ध है। UMANG ऐप से पासबुक देखें और डाउनलोड करें स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए UMANG ऐप एक सुरक्षित और सरकारी माध्यम है। सबसे पहले UMANG ऐप डाउनलोड करें और रजिस्ट्रेशन पूरा करें। इसके बाद ऐप में EPFO विकल्प खोजें और View Passbook पर क्लिक करें। अपना यूएएन दर्ज करें और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी को डालें। इसके बाद आप अपनी पूरी पासबुक देख सकते हैं और उसे पीडीएफ के रूप में डाउनलोड भी कर सकते हैं। EPFO पोर्टल से ऑनलाइन चेक करें बैलेंस अगर आप कंप्यूटर या लैपटॉप का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आधिकारिक वेबसाइट passbook.epfindia.gov.in पर जाकर लॉगिन करें। अपना यूएएन और पासवर्ड दर्ज करें। इसके बाद Member ID चुनें और View Passbook पर क्लिक करें। आपकी पूरी पीएफ डिटेल स्क्रीन पर दिखाई देगी, जिसे आप डाउनलोड भी कर सकते हैं। इन बातों का रखें ध्यान पीएफ बैलेंस देखने के लिए आपका यूएएन एक्टिव होना जरूरी है। साथ ही मोबाइल नंबर ईपीएफओ रिकॉर्ड में दर्ज होना चाहिए और आपके खाते की केवाईसी, जैसे आधार, पैन और बैंक अकाउंट की जानकारी पूरी तरह अपडेट होनी चाहिए। अब कर्मचारी बिना किसी परेशानी और बिना किसी अतिरिक्त खर्च के घर बैठे अपने ईपीएफ खाते की पूरी जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।    

मध्य प्रदेश में नई व्यवस्था: कर्मचारियों को करनी होगी 3 महीने की ट्रेनिंग, वरना लगेगा 5000 रुपए का चालान

भोपाल एमपी में कर्मचारियों के लिए तीन माह के ट्रेनिंग कार्यक्रम की घोषणा की गई है। प्रदेश के लिपिक वर्गीय कर्मचारियों के लिए यह ट्रेनिंग होगी। लेखा प्रशिक्षण-सत्र 1 अप्रैल से प्रारंभ होगा और 30 जून तक चलेगा। स्थानीय निकायों और अर्धशासकीय संस्थाओं के जिन लिपिक वर्गीय कर्मचारियाों की परिवीक्षा अवधि पूर्ण हो चुकी है वे भी लेखा प्रशिक्षण के लिए पात्र होंगे। वित्त विभाग के निर्देशानुसार ऐसे कर्मचारियों को ट्रेनिंग के लिए 5 हजार रुपए का चालान भरना होगा। यह ट्रेनिंग लेने के इच्छुक लिपिक वर्गीय कर्मचारियों को अपने आवेदन-पत्र 16 मार्च तक जमा कराने को कहा गया है। नियमित लेखा प्रशिक्षण सत्र लेखा प्रशिक्षण शाला भोपाल में संचालित होगा। भोपाल और नर्मदापुरम संभाग के अंतर्गत सभी जिलों के लिपिकवर्गीय कर्मचारियों को आवेदन कार्यालय प्रमुख से अभिप्रमाणित कराकर ही जमा कराने के लिए निर्देशित किया गया है। आवेदन लेखा प्रशिक्षण शाला में तीन मूल प्रतियों में जमा कराने होंगे। वित्त विभाग के अनुसार वही लिपिकवर्गीय शासकीय कर्मचारी प्रशिक्षण के पात्र होंगे जिनकी परिवीक्षा अवधि पूर्ण हो चुकी है तथा जिन्होंने सीपीसीटी परीक्षा पास की हो या फिर उन्हें नियमानुसार छूट प्राप्त हो। लेखा प्रशिक्षण शाला के प्राचार्य ने बताया कि आवेदन-पत्र के साथ शैक्षणिक योग्यता प्रमाण-पत्र की कापी अनिवार्य रूप से देना होगी। आवेदन-पत्र पर कर्मचारी को पासपोर्ट साइज फोटो लगाना होगा। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों को जाति प्रमाण-पत्र भी संलग्न करना होगा। वित्त विभाग के निर्देशानुसार ये प्रमाणपत्र कार्यालय प्रमुख से सत्यापित कराने होंगे। 5 हजार रूपए का चालान जमा कराना होगा प्रदेश के स्थानीय निकाय और अर्धशासकीय संस्थाओं के ऐसे लिपिकवर्गीय कर्मचारी भी ट्रेनिंग ले सकेंगे जिनकी परिवीक्षा अवधि पूर्ण हो चुकी है। ऐसे कर्मचारियों को प्रशिक्षण शुल्क के रूप में 5 हजार रूपए का चालान जमा कराना होगा। सत्र में प्रवेश के समय यह चालाना देना होगा।