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ग्वालियर में पुरानी दर से ही होगी टैक्स वसूली

ग्वालियर. वित्तीय वर्ष 2026-27 में कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार निगम कमिश्नर के संपत्तिकर की दरों के निर्धारण के प्रस्ताव पर शुक्रवार को नगर निगम परिषद की बैठक में चर्चा हुई। सभी पार्षदों ने एकजुट होकर प्रस्ताव का विरोध किया। विरोध को देखते हुए सभापति ने प्रस्ताव को वापस कर दिया और जनता को राहत देते हुए संपत्तिकर को पुरानी गाइड लाइन से ही वसूलने निर्णय लिया। हालांकि, संपत्तियों की बोगस आइडियों को लेकर सत्ता पक्ष व प्रतिपक्ष के पार्षदों में काफी बहस भी हुई और एक दूसरे पर कई तरह के आरोप भी लगाए। यहां तक कि बहस में अमर्यादित शब्दों का भी उपयोग हुआ। नगर निगम परिषद की बैठक शुक्रवार को दोपहर तीन बजे से स्थानीय जलविहार स्थित परिषद भवन में आयोजित हुई। इसकी अध्यक्षता पैनल सभापति गिर्राज कंषाना ने की। बता दें कि 26 फरवरी को हुए परिषद के विशेष सम्मेलन के एजेंडे में कमिश्नर के 2026-27 की कलेक्टर गाइड लाइन के मुताबिक संपत्तिकर की दरों के निर्धारण करने का प्रस्ताव शामिल था, लेकिन 26 फरवरी को इस इस बिंदु पर चर्चा नहीं हो पाई थी और इस पर चर्चा करने के लिए शुक्रवार को विशेष सम्मेलन बुलाया गया। संपत्तियों की ID व राजस्व बढ़ाने पर अधिक चर्चा सम्मेलन में सत्ता पक्ष व प्रतिपक्ष ने एजेंडे के बिंदु पर तो कम चर्चा की, बल्कि शहर की बोगस संपत्तियों की ID हटाने, 40 प्रतिशत शहर जो संपत्तिकर के दायरे में नहीं हैं, उन्हें दायरे में लाने और पुराने ठहरावों पर अमल कराने पर अधिक बहस की। दोनों पक्ष एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहे। यहां तक कि कुछ प्रतिपक्ष के नेताओं ने तो सत्ता पक्ष, महापौर, एमआइसी व अफसरों पर भ्रष्टाचार करने व झूठी जानकारी देने के भी आरोप लगाए। हालांकि, सत्ता पक्ष प्रतिपक्ष के आरोपों का जवाब नहीं दे पाया। ऐसे में प्रतिपक्ष हावी रहा। किसने क्या कहा  – नेता प्रतिपक्ष हरिपाल ने कहा कि संपत्तियों की बोगस आइडियों को हटाने व नई ID बनाने के लिए 20 जुलाई 2023 व 19 जुलाई 2024 की बैठकों में ठहराव हुआ था, लेकिन निगम के अफसरों ने इसका अमल नहीं किया। अब जनवरी में इसका आदेश जारी किया है। ऐसे में निगम को राजस्व की हानि हो रही है। साथ ही शहर की 40 प्रतिशत संपत्तियां ऐसी हैं जिनसे कर वसूल नहीं किया जाता। इन संपत्तियों को वसूली के दायरे में लाया जाए। नई गाइड लाइन के मुताबिक संपत्तिकर वसूलने की जगह पुरानी दरों से ही वसूला जाए।     -भाजपा पार्षद देवेंद्र राठौर ने कहा कि संपत्तियों की ID न बनने से निगम को राजस्व की हानि हो रही है। साथ ही राजस्व वसूली न करने वालों पर सख्ती की जाए, ये संपत्तिकर वसूलने में कोताही बरतते हैं। इनकी तीन-तीन मंजिला कोठी बन गई हैं। राजस्व वसूली में 80 प्रतिशत इनकी जेब में जाता है। आइडी बनाने के भी पांच से दस हजार लेते हैं। पुराने ठहरावों पर अमल किया जाए।     – कांग्रेस पार्षद मनोज राजपूत ने BJP पार्षदों पर आरोप लगाया कि आपकी तानाशाही चल रही है, जबकि शहर में विकास हो रहा है और ग्वालियर बदल रहा है। भाजपा पार्षद विकास की नहीं, बल्कि उलझाने की बात करते हैं। संपत्तिकर को पुरानी गाइड लाइन से ही वसूल किया जाए।     – मदनमोहन सोनी ने कहा कि पुराने ठहराव 56 व 142 के पालन में निगम अफसरों क्या किया। ठहराव होने के दो साल में कितनी बोगस आइडी हटाई और कितनी बनाई, इसका बात का डेटा अफसरों को देना चाहिए। तभी पता चलेगा कितना काम हुआ है। पोर्टल की कमियों को दूर किया जाए, क्योंकि वहां संपत्तिकर दो साल का जमा होना है, लेकिन उस पर निकल छह साल का रहा है। नेता प्रतिपक्ष के अमर्यादित बोल -'…आपको नहीं मिलेगी MIC' कांग्रेस पार्षद मनोज राजपूत के प्रतिपक्ष पर विकास में सहयोग न करने के आरोप पर नेता प्रतिपक्ष हरिलाल ने उनसे अमर्यादित शब्दावली में कहा, 'आपको MIC नहीं मिलेगी।' हालांकि, नेता प्रतिपक्ष के इस कथन के बाद परिषद में अन्य पार्षदों ने थोड़ा हंगामा किया और उन्हें मर्यादित शब्दों का उपयोग करने के लिए कहा।

रामचंद्र छत्रपति मर्डर केस में गुरमीत राम रहीम को राहत, हाईकोर्ट ने दी बरी

चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में गुरमीत राम रहीम सिंह को बरी कर दिया। मुख्य न्यायाधीश शील नागू और जस्टिस विक्रम अग्रवाल की पीठ ने शनिवार को सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा 2019 में दी गई आजीवन कारावास की सजा के फैसले को पलट दिया। दरअसल, रामचंद्र छत्रपति मामले में 11 जनवरी 2019 को डेरा प्रमुख को दोषी करार दिया था और 17 जनवरी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। डेरा प्रमुख और अन्य सह आरोपियों ने स्पेशल सीबीआई कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट का यह निर्णय प्रस्तुत साक्ष्यों की विस्तृत जांच के कुछ सप्ताह बाद आया है। हालांकि, बेंच ने मामले में दो अन्य आरोपियों द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया और उनके खिलाफ दिए गए फैसले को बरकरार रखा। इस मामले की जांच उन गोलियों को लेकर उठे विवाद के कारण शुरू हुई, जिनका कथित तौर पर अपराध को अंजाम देने में इस्तेमाल किया गया था। अदालत द्वारा रिकॉर्ड में दर्ज सामग्री की समीक्षा के दौरान ये गोलियां एक अहम मुद्दा बन गईं। हालांकि हत्या के मामले में बरी होने के बावजूद राम रहीम जेल में ही रहेंगे क्योंकि वे वर्तमान में बलात्कार मामले में सजा काट रहे हैं। 2019 में विशेष अदालत ने पत्रकार छत्रपति की हत्या के मामले में राम रहीम और तीन अन्य को दोषी ठहराया था। फैसला सुनाए जाने से 16 साल से भी अधिक समय पहले यह हत्या घटी थी। अपराध और दोषसिद्धि के बीच लंबे अंतराल के कारण इसने व्यापक ध्यान आकर्षित किया था। राम रहीम 2017 में बलात्कार के एक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद से भी सुर्खियों में रहे हैं। इस दौरान वह कई बार पैरोल और फरलो पर जेल से बाहर आया, जिस पर काफी हो हल्ला भी हुआ। अधिकांश रिहाई के दौरान वह उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्थित डेरा सच्चा सौदा के आश्रम में रहा। सिरसा में मुख्यालय वाले डेरा सच्चा सौदा संगठन के हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और अन्य क्षेत्रों सहित कई उत्तरी राज्यों में बड़ी संख्या में अनुयायी हैं।

मेदिनीपुर कोर्ट में बम की सूचना से दहशत, पूरे परिसर की तलाशी; 3 घंटे ठप रहा कामकाज

संसू, मेदिनीपुर पश्चिम मेदिनीपुर जिले के मेदिनीपुर शहर स्थित जिला अदालत परिसर में शुक्रवार दोपहर उस वक्त दहशत फैल गई, जब कोर्ट में बम रखे होने की सूचना मिली। इस धमकी भरी खबर के बाद पूरे परिसर में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में पुलिस बल को मोर्चा संभालना पड़ा। ईमेल के जरिए दी गई धमाके की धमकी  मिली जानकारी के अनुसार, डिस्ट्रिक्ट जज के कार्यालय में एक धमकी भरा ई-मेल प्राप्त हुआ था, जिसमें अदालत परिसर को बम से उड़ाने की बात कही गई थी। खबर फैलते ही जजों, वकीलों और वादकारियों के बीच अफरा-तफरी मच गई।  सूचना मिलते ही कोतवाली थाने की पुलिस सुबह 11 बजे तक मौके पर पहुंच गई। इसके बाद दोपहर 12 बजे बम निरोधक दस्ता (Bomb Squad) और खोजी कुत्तों (Sniffer Dogs) की टीम ने मोर्चा संभाला।  घंटों चली तलाशी, नहीं मिला कोई संदिग्ध सामान  बम निरोधक दस्ते ने मेटल डिटेक्टर और स्निफर डॉग्स की मदद से करीब तीन घंटे तक सघन तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान अदालत के मुख्य भवनों से लेकर कोने-कोने की जांच की गई।  गहन जांच के बाद जब कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, तब जाकर सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत की सांस ली। इस घटना के कारण अदालत का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया।  जनजीवन और न्यायिक कार्य प्रभावित  सरकारी अधिवक्ता गौतम मल्लिक ने घटना पर रोष जताते हुए कहा कि ऐसी अफवाहें फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि दूर-दराज से आए लोगों को बिना सुनवाई के खाली हाथ लौटना पड़ा, जिससे उन्हें काफी परेशानी हुई।  गौरतलब है कि पिछले महीने भी आईआईटी खड़गपुर, घाटाल और झाड़ग्राम के उप डाकघर में इसी तरह की झूठी खबरें फैलाकर दहशत पैदा करने की कोशिश की गई थी। पुलिस अब ईमेल भेजने वाले की पहचान करने में जुट गई है।   

निशांत कुमार को MLC बनाने की अटकलें, JDU की आज लेंगे सदस्यता

पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत रविवार को दिन में एक बजे जदयू प्रदेश कार्यालय में पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगे। इस मौके पर जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह सहित जदयू के सभी वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी को लेकर अभी संशय है। राजनीतिक गलियारे में ऐसी चर्चा है कि निशांत को नयी सरकार में उप मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। इसके लिए वह आज जदयू की सदस्यता लेंगे। इसके बाद उन्हें विधान परिषद का सदस्य बनाया जाएगा। निशांत के जदयू में शामिल किए जाने का मांग लंबी अवधि से मांग चलती रही है। इस आशय के कई होर्डिंग्स भी कई बार शहर में दिखे हैं। शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में विधायकों के साथ हुई नीतीश कुमार कुमार की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकृति मिली थी कि निशांत राजनीति में आएंगे। उनसे इस संबंध में पार्टी के बड़े नेताओं की बात हो चुकी है। इस निर्णय के बाद जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा के आवास पर जदयू के विधायकों की एक बैठक हुई, जिसमें निशांत भी मौजूद थे। बैठक में निशांत के जदयू में शामिल होने के स्वरूप पर विमर्श हुआ। मंत्री श्रवण कुमार व जदयू नेता संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी जी भी बैठक में शामिल हुए। पूरे बिहार में यात्रा करेंगे निशांत जदयू की योजना यह है कि निशांत को जिलों की यात्रा करायी जाएगी। संभवत: पश्चिमी चंपारण जिले से उनकी यात्रा आरंभ होगी। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के निर्णय के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच जो असमंजस की स्थिति है, उसे निशांत कुमार के दौरे के माध्यम से दूर कराया जाए। वह नियमित रूप से नीतीश कुमार द्वारा किए गए कार्यों की चर्चा नियमित रूप से मीडिया के साथ करते रहे हैं। युवाओं के लिए हुए फैसले की चर्चा करते रहे हैं। एक दिन पहले यह चर्चा थी कि निशांत हरनौत विधानसभा से चुनाव लड़ेंगे। यह लंबी अवधि से जदयू की सीट रही है। हरिनारायण सिंह कई टर्म से वहां से जदयू के विधायक हैं, लेकिन अब कहा जा रहा कि निशांत हरनौत से चुनाव नहीं लड़कर विधान परिषद जाएंगे।

रांधा-पुआ की तैयारी: 10 मार्च को पकवान, 11 मार्च को शीतलाष्टमी व्रत

जयपुर होली के बाद सातवें और आठवें दिन देवी शीतला माता की पूजा की परंपरा है। इन्हें शीतला सप्तमी या शीतलाष्टमी कहा जाता है। शीतला माता का जिक्र स्कंद पुराण में मिलता है। पौराणिक मान्यता है कि इनकी पूजा और व्रत करने से चेचक के साथ ही अन्य तरह की बीमारियां और संक्रमण नहीं होता है। ज्योतिषाचार्या ने बताया कि चैत्र मास में शीतला माता के लिए शीतला सप्तमी  10 मार्च और अष्टमी 11 मार्च का व्रत-उपवास किया जाता है। इस व्रत में ठंडा खाना खाने की परंपरा है। जो लोग ये व्रत करते हैं, वे एक दिन पहले बनाया हुआ खाना ही खाते हैं। 9 और 10 मार्च को रांधा पुआ होगा। जहां पर शीतला सप्तमी मनाई जाएगी। वहां पर 9 मार्च को रांधा पुआ होगा। जहां पर शीतला अष्टमी मनाई जायेगी। वहां पर 10 मार्च को रांधा पुआ होगा। कहीं पर सप्तमी के दिन और कहीं पर अष्टमी के दिन ठंडा भोजन किया जाता है। दरअसल, ये समय शीत ऋतु के जाने का और ग्रीष्म ऋतु के आने का समय है। इस दौरान मौसमी बीमारियां होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। शीतला सप्तमी और अष्टमी पर ठंडा खाना खाने से हमें मौसमी बीमारियों से लड़ने की शक्ति बढ़ती है। ऐसी मान्यता है।  बसौड़ा हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है। शीतला अष्टमी को ’बसौड़ा पूजा’ के नाम से भी जाना जाता है। बसौड़ा पूजा, शीतला माता को समर्पित लोकप्रिय त्योहार है। यह त्योहार चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। आमतौर पर यह होली के आठ दिनों के बाद पड़ता है लेकिन कई लोग इसे होली के बाद पहले सोमवार या शुक्रवार को मनाते हैं। बसौड़ा या शीतला अष्टमी का यह त्योहार उत्तर भारतीय राज्यों जैसे गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में अधिक लोकप्रिय है। राजस्थान राज्य में शीतला अष्टमी का त्यौहार बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस अवसर मेलां व लोक संगीत के कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है। भक्त इस पर्व को बड़े ही हर्षोल्लास और भक्ति के साथ मनाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस चुने हुए दिन पर व्रत रखने से उन्हें कई तरह की बीमारियों से बचाव होता है। बच्चों को बीमारियों से दूर रखने के लिए और उनकी खुशहाली के लिए इस त्योहार को मनाने की परंपरा बरसों से चली आ रही है। कुछ स्थानों पर शीतला अष्टमी को बासौड़ा भी कहा जाता है। इस दिन माता शीतला की बासी भोजन का भोग लगाने की परंपरा है और स्वयं भी प्रसाद के रूप में बासी भोजन ही करना होता है। नाम के अनुसार ही शीतला माता को शीतल चीजें पसंद हैं। मां शीतला का उल्लेख सर्वप्रथम स्कन्दपुराण में मिलता है। इनका स्वरूप अत्यंत शीतल है और कष्ट-रोग हरने वाली हैं। गधा इनकी सवारी है और हाथों में कलश, सूप, झाड़ू और नीम के पत्ते हैं। मुख्य रूप से इनकी उपासना गर्मी के मौसम में की जाती है। शीतला सप्तमी और अष्टमी कुछ जगह शीतला माता की पूजा चैत्र महीने के कृष्णपक्ष की सप्तमी को और कुछ जगह अष्टमी पर होती है। सप्तमी तिथि के स्वामी सूर्य और अष्टमी के देवता शिव होते हैं। दोनों ही उग्र देव होने से इन दोनों तिथियों में शीतला माता की पूजा की जा सकती है। निर्णय सिंधु ग्रंथ के मुताबिक इस व्रत में सूर्योदय व्यापिनी तिथि ली जाती है। शीतला सप्तमी वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि की शुरुआत 09 मार्च को देर रात 11:27 मिनट पर शुरू होगी और 10 मार्च को देर रात 01:54 मिनट पर समाप्त होगी। इस प्रकार यानी उदया तिथि से 10 मार्च को शीतला सप्तमी मनाई जाएगी। शीतला सप्तमी पर पूजा के लिए शुभ समय 10 मार्च को सुबह 06:24 मिनट से लेकर शाम 06:26 मिनट तक है। इस दौरान साधक देवी मां शीतला की पूजा कर सकते हैं।   शीतला सप्तमी शुभ योग चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। इस दिन हर्षण योग का संयोग सुबह 08:21 मिनट तक है। इसके साथ ही रवि योग का भी संयोग है। इन योग में मां शीतला की पूजा करने से शुभ कामों में सफलता एवं सिद्धि मिलेगी। साथ ही आरोग्यता का वरदान मिलेगा। शीतला अष्टमी शुभ मुहूर्त चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 10 मार्च को रात 01:54 मिनट पर हो रही है। वहीं इस तिथि का समापन अगले दिन 12 मार्च को सुबह 04:19 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार इस साल शीतला अष्टमी का व्रत 11 मार्च को रखा जाएगा। इस दिन ही बसौड़ा मनाया जाएगा। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मां शीतला की विशेष पूजा की जाती है। शीतला अष्टमी पर पूजा के लिए शुभ समय 11 मार्च को सुबह 06:03मिनट से लेकर शाम 05:56 मिनट तक है। इस दौरान साधक देवी मां शीतला की पूजा कर सकते हैं। स्कन्द पुराण में माता शीतला की अर्चना का स्तोत्र 'शीतलाष्टक' स्कन्द पुराण में माता शीतला की अर्चना का स्तोत्र 'शीतलाष्टक' के रूप में प्राप्त होता है। ऐसा माना जाता है कि- इस स्तोत्र की रचना स्वयं भगवान शंकर ने की थी। शास्त्रों में भगवती शीतला की वंदना के लिए यह मंत्र बताया गया है। मंत्र है- वन्देऽहंशीतलांदेवीं रासभस्थांदिगम्बराम्।। मार्जनीकलशोपेतां सूर्पालंकृतमस्तकाम्।। अगर आप अपने घर की सुख-समृद्धि बनाये रखना चाहते हैं तो आपको स्नान आदि के बाद शीतला माता के इस मंत्र का 51 बार जप करना चाहिए। मंत्र इस प्रकार है-    ऊँ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः। आज के दिन ऐसा करने से आपके घर की सुख-समृद्धि बनी रहेगी। साथ ही आपके परिवार के सदस्यों की सेहत भी अच्छी रहेगी। अगर आप भय और रोग आदि से छुटकारा पाना चाहते हैं तो आपको देवी शीतला के इस मंत्र का 21 बार जप करना चाहिए। मंत्र है-     वन्देSहं शीतलां देवीं सर्वरोग भयापहम्। यामासाद्य निवर्तेत विस्फोटक भयं महत्।। अगर आप अच्छे स्वास्थ्य की कामना रखते हैं। साथ ही लंबी आयु का वरदान पाना चाहते हैं, तो आपको शीतलाष्टक स्त्रोत में दी गई इन पंक्तियों का जाप करना चाहिए। पंक्तियां इस प्रकार हैं-      मृणाल तन्तु सदृशीं नाभि हृन्मध्य संस्थिताम्। यस्त्वां संचिन्त येद्देवि तस्य मृत्युर्न जायते।। ऐसी प्राचीन … Read more

प्रकृति और आध्यात्म का संगम: जशपुर के चाय बागान व सोगड़ा आश्रम बना रहे खास पहचान

बिलासपुर                                                              चाक पर रखी मिट्टी को सुन्दर सुराही का आकार देने का कार्य एक सिद्धहस्त कुम्हार ही कर सकता  है। मिट्टी से घड़ा बनाने का हुनर सीखते हुए  इस कुम्हार ने न  जाने कितने मिट्टी के घड़े और रोशनी देने वाले दिए तोड़े होंगे लेकिन उसकी भी जिद थी कि मुझे इस चाक पर काम करना है।  लगातार मिट्टी के साथ जुड़े रहकर कुम्हार इतना निपुण हो जाता है कि एक छोटा दिया भी अपनी खूबसूरती के साथ चाक से नीचे उतरने लगता है।  इसी तरह जंगलों पहाड़ों को भगवान मानने वाले आदिवासियों को अपने जंगलों की मिट्टी की पहचान खूब होती है।  पहाड़ों की ढलान पर पथरीली दोमट मिट्टी  की बार-बार खुदाई करके इसे सरस और  भुरभुरी बनाने की जिद ने इसे सोना बना दिया। ऐसी स्थिति में इन मेहनतकश  हाथों को चाय बागानों का  हुनर प्राप्त करने से कौन रोक सकता था। आदिवासी श्रम की पहचान जशपुर की सारुडीह पहाड़ियों के ढलान पर हंसते खिलखिलाते चाय के बगीचे अब छत्तीसगढ़ का हिस्सा बन चुके हैं।  साल वनों के बीच पहाड़ों की ढलान पर फैली चाय बागान की हरियाली पर्यटकों की अब पसंदीदा जगह बनती जा रही हैं।  इसी बगीचे की सारुडीह चाय और उसके बागान का सौंदर्य  यदि आप भी नजदीक से देखना चाहते हैं, तब आपको उत्तरी छत्तीसगढ़ के पूर्वी प्रवेश द्वार जशपुर की यात्रा करनी होगी।                                       जशपुर छत्तीसगढ़ का एक ऐसा जिला है जो झारखंड के गुमला, छत्तीसगढ़ के रायगढ़ एवं अंबिकापुर जिले की सीमा को आपस में साझा करता है।  विशाल भारत के मध्य प्रांत छत्तीसगढ़ के उत्तर पूर्व अंचल में बसा जशपुर ब्रिटिश शासन काल मे ब्रिटिश कमिश्नरी रांची का एक हिस्सा था। झारखंड राज्य से छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक वादियों में प्रवेश करने वालों के लिए जशपुर का यह पूर्वी द्वार स्वागत करता है। ऐतिहासिक विरासत के पन्नों में जशपुर की जानकारी स्पष्ट नहीं है लेकिन जितनी जानकारी उपलब्ध है वह इतनी रोचक है कि आप इसे जरूर जानना चाहेंगे।  कहते हैं कि 18 वीं सदी में डोम राजवंश का यहां शासन था  जिसे राजा सूर्यवंशी के बड़े बेटे सुजन राय ने हरा कर यहां अपना राज्य स्थापित किया।  विद्वान ज्योतिषी ठीक कहते हैं कि जिसके हाथों की भाग्य रेखा में राजयोग लिखा हो वह सन्यासी बनकर भी राजा बन जाएगा। एक छोटे से राज्य बंसवाड़ा में सुजन राय के पिता राज किया  करते थे।   शिकार के लिए निकले  सुजन राय की अनुपस्थिति में उनके पिता की अचानक मृत्यु हो गई। राजा की मृत्यु की सूचना से पहले राजगद्दी सूनी नहीं रहनी चाहिए, ऐसा कह कर वहां के बुजुर्गों ने छोटे भाई को राजगद्दी पर बैठा दिया। शिकार से लौटने के बाद सुजान राय को स्थितियों से अवगत कराया गया और सुजान राय को उनके पिता के राजगद्दी संभालने का प्रस्ताव दिया गया।  सुजन राय ने छोटे भाई को सौंपी सत्ता वापस लेना उचित नहीं है ऐसा सोचकर वे सन्यासी बनकर जंगलों की ओर प्रस्थान कर गए। अपने संन्यासी जीवन में यहां वहां  घूमते हुए वे खुड़िया गांव पहुंचे।  यहां के डोम राजा के कार्यों से वहां के निवासी असंतुष्ट थे और बगावत के लिए पूरी तैयारी कर ली थी।  बगावती लोगों के अनुरोध को मानकर सुजन राय ने इस संगठन का  नेतृत्व करना स्वीकार किया और डोम राजा रायबन को हराकर स्वयं वहां के राजा बन बैठे।  इसी खुड़िया का विस्तार बाद में जशपुर रियासत कहलाया। राज्य और सत्ता का यह खेल समय-समय पर  रियासतों के साथ हमेशा से होता रहा है।  सूजन राय जशपुर रियासत के अंतिम दिनों तक राजा रहे।  1905 तक ब्रिटिश शासन के छोटा नागपुर कमिश्नरी के अधीन रहने वाला जशपुर छत्तीसगढ़ के 14 रियासतों में से एक था।  कुछ छोटी रियासतों के साथ इसे भी सरगुजा ग्रुप में रखा गया था। प्रत्येक रियासत अपनी सुरक्षा के लिए ब्रिटिश सरकार को वार्षिक शुल्क टिकोली, रैयतवाड़ी या खिराज के नाम से देती थी।  यह शुल्क लेकर ब्रिटिश शासन रियासतों को सुरक्षा देने का वादा  करती थी।  अपने रियासत में सत्तारूढ़ रहते हुए स्वतंत्र रूप से राज करने तथा व्यापारियों और किसानों से शुल्क वसूलने की स्वतंत्रता देती थी।                                आजादी के बाद मध्य प्रदेश बनने पर जशपुर  रायगढ़ जिले का हिस्सा था और 25 मई 1998 को  नया जिला घोषित किया गया। सघन साल वनों से घिरा लगभग 6200 वर्ग किलोमीटर का जशपुर जिला अपने क्षेत्रफल का लगभग 900 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र का जंगल समेटे हुए है।  उत्तर से दक्षिण तक डेढ़ सौ किलोमीटर एवं पूर्व पश्चिम में 85 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला यह जिला अपने प्राकृतिक सौंदर्य के साथ झील और झरनों के पर्यटन केंद्र के रूप में उभर रहा है। दो भागों में बंटा हुआ जशपुर भौगोलिक रूप से ऊपरी घाट एवं दक्षिणी भाग को नीच घाट के नाम से जाना जाता है ऊपरी घाट पन्डरा पाठ का हिस्सा ज्यादा ठंडा है। इसी घाट से गुजरते हुए  जशपुर से कुनकुरी और कैलाश गुफा (बगीचा) जाने वाले रास्ते का घुमाव "लोरो घाटी"  कहलाता है। घाट की ऊंचाई से नीचे गुजरते हुए बस से देखने पर ऐसा लगता है मानो किसी बच्चे ने अपनी काले स्लेट पर स्लेट पेंसिल से टेढ़ी-मेढ़ी लकीरें खींच दी हो। प्रकृति के खींचे गए इस तरह के प्राकृतिक दृश्य और बिम्ब एक सिद्ध हस्त कलाकार की ऐसी पेंटिंग है जो बिरले देखने को मिलती है।                              जशपुर के प्राकृतिक स्थलों में रानी दाह झरना, रजपुरी जलप्रपात,  अवधूत भगवान श्री राम का सोगड़ा अघोर आश्रम और सारुडीह चाय बागान जैसे पर्यटन स्थल पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं।  विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग  "मधेसर पहाड़"  भी जशपुर जिले का हिस्सा है। पर्यटन के क्षेत्र में जशपुर जिला अपनी चाय बागानों के कारण पर्यटको की पसंदीदा जगह बनता जा रहा है।   जशपुर जिला  मुख्यालय से  साल वनों के … Read more

रमजान माह हो या श्रवाण माह -इबादत करों या भक्ति एक ही है।

बड़वानी  बड़वानी निवासी पिंकी गुप्ता द्वारा हाल ही में चल रहे रमजान माह के साथ रंगो का त्योहार होली में एक मिशाल पेश करते हुए। रंग ओर रहमत दोनों त्योहार को मनाते हुए हिन्दू मुस्लिम एकता का संदेश दिया। पिंकी गुप्ता मित्रों में जया शर्मा, प्रिया सोनी, निकिता,राजा परिहार,ओर अन्य मित्रगण के साथ मिलकर हम सब एक हैं हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई हम सब भाई भाई तर्ज़ पर संदेश दिया। भाजपा महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष मुनिरा सालिवाला एवं रानी खांन रमजान के पवित्र माह में मुस्लिम धर्म अनुसार प्रतिदिन बिना कुछ खाये पिये रोज़ा रख रहे हैं बड़वानी शहर के सामाजिक संगठनों द्वारा प्रतिदिन अलग अलग संगठन उनका रोज़ा शाम की नमाज़ के बाद फल फ्रुट एवं पेय पदार्थों के साथ खुलवाते। बड़वानी शहर में ज्यादा से ज्यादा यह शुभ कार्य पिंकी गुप्ता अपने मित्रमंडली के साथ कर रहे हैं। उक्त कार्य करने से बड़वानी शहर में सभी धर्मों एवं सभी वर्गों में खुशी का माहौल है।

हरियाणा में फिर शुरू होगी रोडवेज बसों की ऑनलाइन बुकिंग

करनाल. प्रदेश में यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हरियाणा रोडवेज की बसों में एक बार फिर ऑनलाइन सीट बुकिंग की सुविधा शुरू की जाएगी। करीब पांच साल पहले बंद हुई यह व्यवस्था अब दोबारा लागू करने की तैयारी चल रही है। इसके लागू होने के बाद यात्री घर बैठे ही अपनी मनपसंद सीट का चयन कर सकेंगे और बसों में सफर करना पहले से ज्यादा सुविधाजनक हो जाएगा। यह सुविधा मुख्य रूप से लंबे रूटों पर चलने वाली रोडवेज बसों के लिए शुरू की जाएगी। यात्री विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपनी यात्रा की तारीख, रूट और सीट नंबर का चयन कर ऑनलाइन टिकट बुक कर सकेंगे। इससे बस अड्डों पर लगने वाली लंबी कतारों से भी राहत मिलेगी और यात्रियों को पहले से यात्रा की योजना बनाने में आसानी होगी। यह सुविधा कोरोना से पहले रोडवेज बसों में ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन किन्हीं कारणों की वजह से इसे बंद कर दिया था। अब विभाग द्वारा इसे फिर से शुरू करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। अगर करनाल डिपो की बात करें तो यहां वर्तमान में करीब 139 रोडवेज बसें संचालित हो रही हैं, जिनमें से 50 के करीब बसें प्रदेश के साथ-साथ अन्य राज्यों के विभिन्न रूटों पर सेवाएं दे रही हैं। ऑनलाइन बुकिंग शुरू होने से इन बसों में सफर करने वाले यात्रियों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। यदि किसी कारणवश बुक की बस अपने निर्धारित रूट पर नहीं जा पाती है तो रोडवेज विभाग यात्रियों को करीब पांच घंटे पहले ही इसकी सूचना संबंधित वेबसाइट पर दे देगा, ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। यहां चलाई थी डेमो के लिए बुकिंग प्रक्रिया हरियाणा रोडवेज की ओर से ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा प्रदेशभर में चलाने के लिए चंडीगढ़ व यमुनानगर डिपो पर डेमो के लिए चलाई गई थी, जोकि यहां पर सफल रही है, अब यह प्रदेशभर में चलने की तैयारी है। लंबे रूट पर चलने वाली बसों का समय स्थान- पहली बार चलने का समय जम्मू के लिए 7 बजे सुबह बैजनाथ के लिए 5 बजे शाम को शिमला के लिए 5 बजकर 40 पर सुबह को चंडीगढ़ के लिए 5 बजकर 20 मिनट सुबह, 10 बजकर 20 मिनट सुबह, 6 बजकर 40 मिनट शाम, सिरसा के लिए 5 बजकर 10 मिनट पर सुबह हरिद्वार के लिए 6 बजकर 20 मिनट पर सुबह दिल्ली के लिए 5 बजकर 20 मिनट पर सुबह। यमुनानगर के लिए 6 बजे सुबह हिसार के लिए 5 बजकर 20 मिनट सुबह। ऑनलाइन प्रक्रिया नियमानुसार होगी शुरू रोडवेज करनाल के जीएम कुलदीप सिंह ने बताया कि कोरोना से पहले ऑनलाइन बस बुकिंग की सुविधा थी, लेकिन किन्हीं कारणों से यह बंद हो गई थी। अब जब भी पुन: ऑनलाइन बुकिंग प्रक्रिया शुरू होगी तो पूरी तैयारियां करके नियमानुसार ही शुरू होंगी।

वर्ल्ड कप 2026 का टिकट पक्का करने मैदान में उतरेगी भारतीय महिला हॉकी टीम

हैदराबाद.  भारत की महिला नेशनल फील्ड हॉकी टीम रविवार से हैदराबाद, तेलंगाना में शुरू हो रहे एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप क्वालिफायर 2026 में महिला हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में अपनी जगह पक्की करने के लक्ष्य के साथ उतरेगी। इस टूर्नामेंट में मेजबान भारत के अलावा इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, कोरिया, इटली, उरुग्वे, वेल्स और ऑस्ट्रिया शामिल हैं। सभी 8 टीमों को 4-4 के दो ग्रुप में बांटा गया है। ग्रुप ए में इंग्लैंड, कोरिया, इटली और ऑस्ट्रिया हैं, जबकि ग्रुप बी में भारत, स्कॉटलैंड, उरुग्वे और वेल्स हैं। प्रत्येक ग्रुप से 2-2 टीमें सेमीफाइनल में जाएंगी। फाइनल के अलावा एक कांस्य पदक मैच होगा। टूर्नामेंट में पहला, दूसरा और तीसरा स्थान हासिल करने वाली टीमें विश्व कप 2026 के लिए सीधा क्वालिफिकेशन हासिल करेंगी। इसके अलावा, हैदराबाद में चौथे स्थान पर रहने वाली दुनिया की सबसे ऊंची रैंक वाली टीम को भी टूर्नामेंट में जगह मिलेगी। आने वाले वर्ल्ड कप में पुरुषों और महिलाओं दोनों के कॉम्पिटिशन में 16 टीमें होंगी, जिसमें हर कैटेगरी में नौ टीमें पहले ही क्वालिफिकेशन हासिल कर चुकी हैं। भारत हैदराबाद में शानदार प्रदर्शन के लिए मजबूत घरेलू समर्थन पर भरोसा करेगा। टीम हाल ही में नियुक्त मुख्य कोच शोर्ड मारिन के नेतृत्व में खेलेगी। भारत अभी दुनिया में नौवें स्थान पर है और इंग्लैंड के बाद टूर्नामेंट में दूसरी सबसे ऊंची रैंक वाली टीम है, जो दुनिया भर में सातवें स्थान पर है। भारत टूर्नामेंट में विश्व कप में जगह बनाने के इरादे से उतरेगी। इंडियन टीम अपने कैंपेन की शुरुआत 8 मार्च को उरुग्वे के खिलाफ करेगी। 9 मार्च और 11 मार्च को स्कॉटलैंड और वेल्स के खिलाफ मैच होंगे। भारतीय महिला हॉकी टीम अब तक वर्ल्ड कप के आठ एडिशन खेल चुकी है। सबसे अच्छा प्रदर्शन 1974 में रहा था, जब टीम चौथे स्थान पर रही थीं। टूर्नामेंट से पहले, "भारतीय कप्तान सलीमा टेटे ने कहा, "हम अपने फैन्स के सामने अपने घर पर क्वालिफायर खेलने के लिए बहुत उत्साहित हैं। टीम इस टूर्नामेंट के लिए बहुत मेहनत कर रही है क्योंकि हम जानते हैं कि क्या दांव पर लगा है। यहां हर टीम विश्व कप में जगह बनाने के लिए मुकाबला कर रही है। हमें शुरू से ही मुश्किल मैचों की उम्मीद है।" उन्होंने कहा, "हैदराबाद में खेलना हमारे लिए बहुत खास होगा। घरेलू दर्शकों का हमेशा प्रेरणा देता है। हमारा फोकस एक बार में एक ही मैच पर रहने और अपना श्रेष्ठ देने पर होगा ताकि हम अच्छा प्रदर्शन कर सकें और विश्व कप में अपनी जगह पक्की कर सकें।"

सोशल मीडिया पर की गंदी पोस्ट, कटनी में युवती ने बीच सड़क चप्पलों से पीटा मनचला

कटनी स्लीमानाबाद थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां एक युवती ने छेड़छाड़ और सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले 42 वर्षीय युवक की बीच बाजार चप्पलों से धुनाई कर दी। शनिवार को युवती का युवक पर चप्पलों से वार करते वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। फोटो एडिट कर आपत्तिजनक पोस्ट का आरोप जानकारी के मुताबिक, उमरियापान निवासी आरोपी शाकिर मंसूरी (42 वर्ष) पिछले काफी समय से युवती को सोशल मीडिया के माध्यम से परेशान कर रहा था। युवक ने युवती को इंस्टाग्राम पर कई बार फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी, जिसे युवती लगातार अस्वीकार करती रही। इसके बाद युवक ने युवती की प्रोफाइल से उसकी तस्वीरें चोरी कीं और उन्हें एडिट कर अपनी फोटो के साथ जोड़कर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक तरीके से पोस्ट कर दिया। बीच बाजार फूटा युवती का गुस्सा शुक्रवार को जब युवती स्लीमानाबाद बाजार में थी, तभी उसकी नजर आरोपित शाकिर मंसूरी पर पड़ गई। युवती ने तुरंत उसे रोका और विरोध जताया। देखते ही देखते युवती का गुस्सा फूट पड़ा और उसने सरेराह चप्पलों से आरोपी की पिटाई शुरू कर दी। बीच बाजार हुई इस घटना को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई। पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच शुरू घटना के बाद युवती सीधे स्लीमानाबाद थाने पहुंची और मामले की शिकायत दर्ज कराई। स्लीमानाबाद थाना प्रभारी सुदेश समन ने कहा कि युवती की शिकायत के आधार पर युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। आरोपित मजदूरी का काम करता है और पीड़िता ने उस पर लगातार परेशान करने का आरोप लगाया है। पुलिस अब युवक द्वारा सोशल मीडिया पर डाले गए आपत्तिजनक कंटेंट की भी तकनीकी जांच कर रही है।