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बिना ATM कार्ड के भी मिल जाएगा कैश! UPI से पैसे निकालने का नया तरीका समझें

नई दिल्ली आपको पता है कि आप ATM से UPI के जरिए भी पैसे निकाले जा सकते हैं। इसका मतलब है कि ATM से पैसे निकालने के लिए डेबिट कार्ड का पास होना जरूरी नहीं है। दरअसल अब ज्यादातर बैंकों ने अपने ATM में QR Code Scan या UPI Money का ऑप्शन देना शुरू कर दिया है। UPI के जरिए ATM से पैसा निकालना न सिर्फ आसान है बल्कि यह कार्ड क्लोनिंग और स्किमिंग जैसे बड़े साइबर खतरों से भी सुरक्षित रखता है। ऐसे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसका पता होना चाहिए। UPI से कैश निकालने के फायदे UPI से कैश निकालने के कई फायदे हैं। अगर आपके पास कार्ड न हो या आप उसे घर भूल गए हों, तो भी आप जरूरत पड़ने पर आसानी से ATM से कैश निकाल सकते हैं। यह प्रोसेस न सिर्फ तेज है बल्कि आसान भी है, क्योंकि आपको बार-बार कार्ड डालने या पिन छुपाकर टाइप करने का झंझट नहीं रहता। बस एक QR कोड स्कैन करते ही आपका काम हो जाता है। इसकी वजह से आपको फिजिकल डेबिट कार्ड साथ रखने की जरूरत नहीं रहती। इससे कार्ड के खोने या चोरी होने का डर भी खत्म हो जाता है। यह नई तकनीक आपको 'कार्ड क्लोनिंग' और 'स्किमिंग' जैसे खतरनाक साइबर फ्रॉड से भी बचाती है। कैसे निकालें UPI से कैश     इसके लिए सबसे पहले एटीएम मशीन के पास जाएं और वहां स्क्रीन पर दिख रहे 'UPI Cash Withdrawal' के ऑप्शन को चुनें।     अब ATM मशीन पर वह राशि टाइप करें जिसे आप निकालना चाहते हैं।     इसके बाद ATM मशीन पर एक QR कोड दिखाई देगा, उसे UPI ऐप के जरिए स्कैन करें। याद रहे कि इस QR कोड का इस्तेमाल एक ही बार किया जा सकता है।     अपब अपने फोन पर UPI PIN डालें।     PIN डालते ही आपको ATM मशीन से पैसे मिल जाएंगे। ध्यान रखने वाली बातें ATM से UPI के जरिए कैश निकालते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:     ATM में UPI फीचर उपलब्ध हो। इसे आप मशीन में कैश निकालने के लिए दिए गए ऑप्शन से समझ सकते हैं।     इसके अलावा, आपके पास अपना फोन और फोन में कोई चालू UPI ऐप होनी चाहिए। इसके साथ ही ऐप अपडेटेड भी हो।     आपके फोन का इंटरनेट काम कर रहा हो।     आपको अपना UPI PIN याद हो।     इस फीचर का इस्तेमाल कर आप 5000 से 10000 रुपये तक ही निकाल सकते हैं।

स्पेस में प्रेग्नेंसी: क्या अंतरिक्ष में बच्चे का जन्म हो सकता है?

जैसे-जैसे इंसान मंगल और चंद्रमा पर बस्तियां बसाने की योजना बना रहा है, एक बड़ा सवाल वैज्ञानिकों के सामने खड़ा है- 'क्या अंतरिक्ष में गर्भधारण और बच्चे का जन्म सुरक्षित है?' अब तक की रिसर्च इशारा करती है कि तकनीकी रूप से यह संभव तो है, लेकिन बिना पृथ्वी के सुरक्षा कवच (गुरुत्वाकर्षण और वायुमंडल) के, एक नए जीवन का विकास किसी बड़े खतरे से कम नहीं होगा। हड्डियों और मांसपेशियों पर संकट पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण हमारे शरीर की हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूती देने में प्राथमिक भूमिका निभाता है। अंतरिक्ष की माइक्रोग्रैविटी में भ्रूण (Fetus) के विकास के दौरान उसकी हड्डियों के घनत्व (Density) में भारी कमी आ सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जीरो ग्रेविटी के कारण बच्चे का ऊपरी शरीर तो विकसित हो सकता है, लेकिन निचले हिस्से और पैरों की मांसपेशियां बेहद कमजोर रह सकती हैं।   ब्रेन और विजन पर असर अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण की कमी के कारण शरीर के तरल पदार्थ (Body Fluids) सिर की ओर शिफ्ट हो जाते हैं। इससे गर्भ में पल रहे शिशु की खोपड़ी के अंदर दबाव बढ़ सकता है। यह असामान्य दबाव बच्चे के मस्तिष्क विकास (Brain Development) और आंखों की रोशनी को प्रभावित कर सकता है, जिससे भविष्य में न्यूरोलॉजिकल समस्याएं पैदा होने का खतरा रहता है। 

थाइरॉएड में शुगर और सोया से दूरी क्यों जरूरी है

थाइरॉएड, गर्दन के सामने वाले हिस्से में तितली के आकार की ग्रंथि है। इससे निकलने वाले हार्मोंस शरीर की भोजन को ऊर्जा में बदलने की क्षमता को काबू में रखते हैं। इस ग्रंथि में गड़बड़ी आने पर हाइपो या हाइपर थाइरॉएडिज्म होता है और वजन तेजी से कम या बढ़ने लगता है। हृदय, बाल, नाखून व नींद पर भी इसका असर होता है। दवाओं के अलावा थाइरॉएड पीड़ितों के लिए खान-पान का ध्यान रखना भी जरूरी है। आयोडीन शरीर में थाइरॉएड हार्मोन बनने के लिए आयोडीन की जरूरत होती है। चूंकि शरीर स्वयं आयोडीन नहीं बनाता, इसलिए उसे डाइट में लेना जरूरी हो जाता है। आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करें। ध्यान रखें कि समुद्री नमक या डिब्बा बंद खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले नमक में आयोडीन नहीं होता। नमक या उत्पाद खरीदते समय इसका ध्यान रखें। समुद्री भोजन मछली, झींगा आदि तमाम तरह के समुद्री भोजन में आयोडीन प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है। यदि हाइपर थाइरॉएडिज्म की शिकायत है, तो समुद्री भोजन अधिक मात्रा में नहीं लेना चाहिए। अगर थाइरॉएड ग्रंथि अधिक मात्रा में हार्मोन बनाती है तो अतिरिक्त आयोडीन स्थिति को और गंभीर बना देता है। उदाहरण के लिए समुद्री घास में आयोडीन बहुत अधिक मात्रा में होता है। हरी पत्तेदार सब्जियां, मेवे और बीज मैग्नीशियम की कमी से हाइपो थाइरॉएडिज्म होता है, जिससे थकावट व मांसपेशियों में खिंचाव रहने लगता है। इसके लिए पालक, लेट्यूस, हरी पत्तेदार सब्जियां, काजू, बादाम और सीताफल के बीज खाएं। ब्राजील मेवों में मैग्नीशियम के साथ सेलेनियम भी होता है। सोयाबीन विशेषज्ञों के अनुसार सोयाबीन लेना हाइपोथाइरॉएडिज्म की आशंका बढ़ाता है। यदि पर्याप्त आयोडीन नहीं ले रहे हैं तो सोया उत्पाद जैसे दूध व टोफू आदि में पाए जाने वाले रसायन थाइरॉएड की हार्मोन बनाने की क्षमता को प्रभावित करते हैं। चीनी हाइपोथाइरॉएडिज्म में वजन तेजी से बढ़ता है। इसके लिए शुगर की मात्रा को कम रखना चाहिए। खासतौर पर ऐसे उत्पाद जिनमें कैलोरी अधिक व पोषक तत्व कम होते हैं, खाने से बचना चाहिए। दवाएं कुछ दवाएं थाइरॉएड दवाओं के असर को कम करती हैं। खासतौर पर अगर वे लगभग एक ही समय ली जा रही हों। मल्टी विटामिंस, आयरन कैल्शियम सप्लीमेंट्स, एंटासिड, अल्सर या कोलेस्ट्रॉल को कम करने वाली दवाएं इनमें प्रमुख हैं। यदि आप ऐसी ही दवाएं ले रहे हैं तो थाइरॉएड व अन्य दवाओं में कुछ घंटे का अंतर अवश्य रखें। गोभी व ब्रोकली गाइट्रोजेंस, तत्व का असर थाइरॉएड ग्रंथि के आकार बढ़ने के रूप में दिखायी देता है जैसे गॉइटर। शरीर में आयोडीन की कमी से यह समस्या होती है। ऐसी स्थिति में गोभी, ब्रोकली, बंद गोभी खाना आयोडीन ग्रहण करने की क्षमता को कम करता है। जरूरी है तो इन्हें पकाकर ही खाएं। ग्लुटेन ग्लुटेन, गेहूं व जौ में पाया जाने वाला प्रोटीन है। ग्लूटेन की एलर्जी वालों को छोड़ दें तो ग्लूटन थाइरॉएड पर असर नहीं डालता। हां, अगर गेहूं आदि से एलर्जी है तो ग्लूटेन छोटी आंत को नुकसान पहुंचा कर थाइरॉएड ग्रंथि की प्रक्रिया को तेज या धीमा कर सकता है।  

एक गोली में लंबी जिंदगी का राज! क्या सच में रुक सकता है बुढ़ापा?

जुटे वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता मिलने का दावा किया गया है। चीन के शेनझेन स्थित एक स्टार्टअप ने एक ऐसी प्रयोगात्मक दवा विकसित करने का दावा किया है, जो इंसानी शरीर की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर उसे 150 वर्ष तक जीवित रहने में मदद कर सकती है। यह शोध मुख्य रूप से शरीर के भीतर मौजूद उन 'घातक' कोशिकाओं को निशाना बनाता है, जो बुढ़ापे और बीमारियों की जड़ मानी जाती हैं। क्या है 'जॉम्बी सेल्स' का रहस्य? वैज्ञानिक भाषा में इन्हें सेनेसेंट सेल्स कहा जाता है, लेकिन अपनी प्रकृति के कारण ये 'जॉम्बी सेल्स' के नाम से मशहूर हैं। ये वे कोशिकाएं हैं जो बूढ़ी हो चुकी हैं और अब विभाजित नहीं होतीं। ये खत्म होने के बजाय शरीर में जमा रहती हैं और जहरीले रसायनों का स्राव करती हैं, जिससे सूजन बढ़ती है। यही कोशिकाएं हृदय रोग, गठिया और अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारियों को जन्म देती हैं। अंगूर के बीज से निकलेगा 'जवानी का अर्क' रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रयोगात्मक दवा में अंगूर के बीज से निकाले गए विशेष तत्वों का उपयोग किया गया है। यह दवा 'सेनोलिटिक' (Senolytic) श्रेणी की है, जिसका मुख्य कार्य शरीर को स्कैन करके इन 'जॉम्बी कोशिकाओं' को चुन-चुनकर नष्ट करना है। कैसे काम करेगी यह गोली? कंपनी का दावा है कि जब शरीर से खराब कोशिकाएं हट जाएंगी, तो:     ऊतकों (Tissues) को होने वाला नुकसान कम होगा।     शरीर की आंतरिक सूजन में भारी गिरावट आएगी।     अंगों की कार्यक्षमता फिर से युवा जैसी होने लगेगी। शुरुआती जानवरों के परीक्षण में इसके उत्साहजनक परिणाम मिले हैं, जहां जीवों की शारीरिक शक्ति में सुधार और उम्र के लक्षणों में कमी देखी गई है। विशेषज्ञों की चेतावनी: अभी राह लंबी है भले ही यह खबर सुनने में क्रांतिकारी लगे, लेकिन वैश्विक विशेषज्ञ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। लैब के नतीजों को इंसानों पर प्रभावी साबित करने के लिए कई चरणों के कड़े परीक्षणों की जरूरत है। यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि ये दवाएं स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान न पहुंचाएं। किसी भी ऐसी दवा को आम जनता के लिए उपलब्ध होने में अभी कई वर्षों का समय लग सकता है।

बस्तर के 125 नक्सलियों ने तेलंगाना में दिए हथियार, 4.18 करोड़ का पुनर्वास पैकेज मिलेगा; IG का खुलासा

जगदलपुर नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षाबल के जवानों को बड़ी सफलता मिली है। शनिवार को तेलंगाना में 130 माओवादियों ने हथियारों के साथ सरेंडर कर दिया है। सरेंडर करने वाले ज्यादातर नक्सली छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। तेलंगाना के डीजीपी के सामने आत्मसमर्पण करने वाले 130 माओवादियों में से 125 छत्तीसगढ़ के, 4 तेलंगाना के और एक आंध्र प्रदेश का रहने वाला है। तेलंगाना में सरेंडर करने वाले नक्सली सीपीआई (माओवादी), दंडकारण्य विशेष जोनल कमेटी और तेलंगाना राज्य कमेटी क्षेत्र के मेंबर हैं। इनमें से ज्यादातर नक्सली बस्तर इलाके में एक्टिव थे। हथियार भी सुरक्षाबलों को सौंपे हिंसा का मार्ग त्यागकर मुख्यधारा में लौटे इन कैडरों ने 124 हथियारों के साथ बड़ी मात्रा में गोला-बारूद भी सुरक्षा बलों के सामने जमा कराया, जो माओवादी संगठन को लगे बड़े झटके को दर्शाता है। अधिकारियों ने कहा कि यह घटनाक्रम पिछले कई महीनों से छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड तथा अन्य नक्सल प्रभावित राज्यों में संचालित लगातार और समन्वित सुरक्षा अभियानों का परिणाम है। अभियान के कारण पड़ा असर बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने कहा-लगातार चलाए जा रहे अभियान, सुरक्षा तंत्र के विस्तार, फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस की स्थापना से माओवादी कैडरों की आवाजाही पर प्रभाव पड़ा है। बस्तर क्षेत्र और उससे सटे वन क्षेत्रों में सुरक्षा बलों द्वारा किए जा रहे सतत और केंद्रित अभियानों ने माओवादी गढ़ों को धीरे-धीरे ध्वस्त किया है तथा उनके संगठनात्मक नेटवर्क को बाधित किया है, जिससे कैडरों पर हिंसा का मार्ग छोड़ने का दबाव लगातार बढ़ रहा है। सरेंडर के बाद मुख्यमंत्री A. Revanth Reddy ने कहा कि Mahatma Gandhi के देश में हिंसक और सशस्त्र आंदोलन किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि जो लोग मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए सरकार पुनर्वास और बेहतर जीवन की व्यवस्था कर रही है. केंद्र सरकार ने देश से नक्सलवाद खत्म करने के लिए 31 मार्च 2026 तक की समय सीमा तय की है. जैसे-जैसे यह तारीख करीब आ रही है, वैसे-वैसे नक्सलियों के सरेंडर की घटनाएं भी तेजी से सामने आ रही हैं. हाल ही में नक्सल संगठन के टॉप नेताओं में शामिल देवजी के आत्मसमर्पण की खबर भी सामने आई थी. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि अब संगठन के गिने-चुने नेता ही बचे हैं, जो लगातार दबाव के चलते इधर-उधर छिपते फिर रहे हैं. जीवन में बदलाव से आया परिवर्तन उन्होंने कहा कि भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार ने सुरक्षा प्रयासों के साथ-साथ दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के उद्देश्य से विभिन्न विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं को लागू कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सड़क संपर्क, स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा, आजीविका के अवसरों तथा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर दिए गए विशेष ध्यान के कारण पहले से अलग-थलग पड़े गांवों तक धीरे-धीरे शासन की पहुंच बढ़ी है। इन प्रयासों ने स्थानीय समुदायों का लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति विश्वास मजबूत किया है तथा जनसामान्य के बीच माओवादी प्रचार के प्रभाव को कम किया है। देवजी की टीम के माओवादी भी शामिल इन 130 माओवादी कैडर्स में नक्सल संगठन के कई अहम सदस्य भी शामिल हैं। हाल ही में आत्मसमर्पण कर चुके माओवादी संगठन के चीफ देवजी की PLGA कमांडर टीम के सदस्य भी इस सरेंडर में शामिल हैं। ICCC सेंटर में हुआ कार्यक्रम माओवादियों ने यह आत्मसमर्पण 7 मार्च को हैदराबाद के बंजारा हिल्स स्थित ICCC सेंटर में किया। कार्यक्रम में तेलंगाना सरकार के सीनियर अधिकारी और पुलिस विभाग के उच्च अधिकारी भी मौजूद रहे। सुरक्षाबलों के दबाव के कारण सरेंडर जारी सुरक्षाबलों के लगातार दबाव और सरकार की पुनर्वास नीति के कारण माओवादी कैडरों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। बड़ी संख्या में हुए इस सामूहिक आत्मसमर्पण को सुरक्षा एजेंसियां माओवादी संगठन के लिए एक बड़ा झटका मान रही हैं। सरकार ने कहा है कि जो भी उग्रवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए पुनर्वास और नई शुरुआत के सभी रास्ते खुले हैं। क्या कहा बस्तर रेंज के आईजी ने बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक ने कहा कि नक्सलियों का सरेंडर दूरस्थ क्षेत्रों में शासन की बढ़ती पहुंच तथा सुरक्षा बलों के लगातार चलाए जा रहे अभियानों के प्रयास को दिखाता है। उन्होंने कहा कि बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बलों के निरंतर प्रयासों से माओवादी संगठनात्मक ढांचा काफी कमजोर हुआ है। उनके संचालन क्षेत्र में उल्लेखनीय कमी आई है। जैसे-जैसे विकास और कल्याणकारी योजनाएं आंतरिक गांवों तक पहुँचती जाएंगी, वैसे-वैसे क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास का मार्ग और सुदृढ़ होगा।  

भवि‍ष्‍य में उज्जैन में भी राष्‍ट्रीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर के हॉकी खिलाड़ी होंगे तैयार: मुख्यवमंत्री डॉ. यादव

उज्‍जैन खेलों का हब बनने की ओर है अग्रसर : मुख्यवमंत्री डॉ. यादव स्‍व. राजमाता विजयाराजे सिंधिया खेल परिसर नानाखेडा में बनेगा अन्तर्राष्ट्रीय स्‍तर का हॉकी सिन्‍थेटिक टर्फ भवि‍ष्‍य में उज्जैन में भी राष्‍ट्रीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर के हॉकी खिलाड़ी होंगे तैयार प्रयास करेंगे कि 2030 में होने वाले कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स के मैच हो उज्जैन में मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने नानाखेडा स्‍टेडियम में 48.71 करोड़ रुपए की लागत के सिन्थेटिक हॉकी टर्फ एवं अन्‍य निर्माण कार्यों का किया भूमि-पूजन उज्जैन मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भगवान  महाकालेश्‍वर और  गोपाल कृष्‍ण की हम सभी पर विशेष कृपा है। उनके आशीर्वाद से आज उज्‍जैन और पूरे प्रदेश के खिलाडियों को सौगात मिलने जा रही है। स्‍पोर्टस कॉम्‍प्‍लेक्‍स में निरंतर उज्‍जैन में विकास के कार्य हो रहे है। खेल केवल मनोरंजन नहीं बल्कि शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास का सशक्त माध्यम है। खेल अनुशासन, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता और सकारात्मक प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करते हैं। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को उज्जैन में स्‍व. राजमाता विजयाराजे सिंधिया खेल परिसर नानाखेडा स्‍टेडियम परिसर में 48.71 करोड रुपए की लागत से बनने वाले अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर के सिन्‍थेटिक हॉकी टर्फ और पवेलियन दर्शक दीर्घा के निर्माण कार्य के भूमि- पूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ये बातें कही। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में खेल अधोसंरचना के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है एवं विभिन्न जिलों में नए स्टेडियम, खेल परिसर एवं प्रशिक्षण सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। इससे खिलाड़ियों को आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उक्त निर्माण कार्य से उज्जैन धीरे-धीरे खेलों का हब बनने की ओर अग्रसर है एवं भविष्य में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार होंगे। स्‍व. राजमाता विजयाराजे सिंधिया खेल परिसर नानाखेडा स्‍टेडियम को देखकर विदेशों में स्थित सर्वसुविधायुक्‍त स्‍टेडियम का स्‍मरण होता है। क्षीर सागर स्‍टेडियम में देश के अन्‍य शहरों के हॉकी खिलाडी आकर प्रदर्शन करते थे। अंतर्राष्‍ट्रीय मानकों के अनुसार यहां हॉकी सिन्‍थेटिक टर्फ की आवश्‍यकता थी जो निकट भवि‍ष्‍य में शीघ्र ही पूर्ण होने जा रही है। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा प्रयास रहेगा कि वर्ष 2030 में आयोजित होने वाले कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स में इस स्‍टेडियम में अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर के मैच का आयोजन करवाया जाए। हम सभी ने यह संकल्‍प लिया था कि प्रतिभाशाली खिलाडियों को उनके हुनर के प्रदर्शन के लिए सर्वसुविधायुक्‍त स्‍टेडियम बनाकर दिया जाए। हॉकी पेवेलियन, एथलेटिक्स पेवेलियन, हॉकी फील्ड के निर्माण साथ-साथ नानाखेडा स्‍टेडियम परिसर में सड़क निर्माण, पार्किंग, कंपाउंड वॉल इत्यादि कार्य भी सम्मिलित होंगे। उज्जैन को खेल मैदानों की सौगाते मिल रही है। इसमें सबसे पहले खेल मैदान हेतु 8.71 हेक्टयर (21.77 एकड़) भूमि खेल विभाग एवं खिलाड़ियों की दिलवाई गई। उसके बाद एथलेटिक सिंथेटिक्स ट्रैक जो 7.22 करोड़, लॉब टेनिस सिन्‍थेटिक मैदान एवं ग्रास से निर्मित फुटबॉल मैदान, राशि रू. 11.43 करोड़ से निर्मित स्व. राजमाता सिंधिया बहुउद्देशीय खेल परिसर जिसमें आधुनिक रूप से निर्मित शूटिंग रेंज, बेडमिंटन हॉल, मल्लखंब, जिम्नेशियम हॉल जिसमें 1.50 करोड़ के उपकरण की सौगात शहरवासियों को दी गयी हैं। प्रदेश में 18 खेलों की 11 खेल अकादमियाँ स्थापित की गई हैं। इसी का परिणाम है कि जहां पूर्व वर्षों में एशियन गेम्स और ओलंपिक गेम्स में मध्यप्रदेश के खिलाड़ी मात्र सहभागिता कर पाते थे, किन्तु वर्तमान में हमारे खिलाड़ी न केवल एशियन गेम्स बल्कि ओलंपिक गेम्स में भी पदक अर्जित कर प्रदेश को गौरवान्वित कर रहे हैं। उज्‍जैन से निकलने वाले खिलाडी राष्‍ट्रीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर प्रदर्शन करेंगे। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आने वाले समय में हासामपुरा में भी स्‍टेडियम बनकर तैयार होगा। यहां कनेक्टिविटी के लिए फोर लेन मार्ग भी बनाए जा र‍हे है जिससे गांव-गांव के प्रतिभाशाली खिलाडियों को अपनी खेल प्रतिभा दिखाने का अवसर प्राप्‍त होगा। वर्तमान में नजरअली कंपाउंड में बनाए गए स्‍वीमिंग पूल और अन्‍य प्रमुख स्‍वीमिंग पूल के रख-रखाव के लिए खेल विभाग को हस्‍तांतरित किया जाएगा। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने सभी को नए सिन्‍थेटिक टर्फ की बधाई दी। साथ ही सभी को रंगपंचमी पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हम सभी मिलकर हर्षोल्‍लास और आनंद के साथ पर्व मनाए। सांसद  अनिल फिरोजिया ने कहा कि हम सबके लिए आज बड़े हर्ष का विषय है कि नानाखेड़ा स्‍टेडियम खेल परिसर में एक और नई सौगात शहरवासियों को मिलने वाली है। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव खेल के क्षेत्र में भी उज्‍जैन का निरंतर विकास कर रहे है। प्रधानमंत्री  नरेन्‍द्र मोदी ने खेलों को बढ़ावा देने के लिए खेलों इंडिया कार्यक्रम प्रारंभ किया है। पहले छोटे शहरों, कस्‍बों और गांवों के खिलाडियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर कम ही मिला करते थे। खेलों इंडिया कार्यक्रम ने इन्‍हें अपनी प्रतिभा को सभी के समक्ष प्रदर्शित करने का एक सशक्‍त प्‍लेटफॉर्म प्रदान किया है। हमारे खिलाडी अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर उत्‍कृष्‍ट प्रदर्शन कर मेडल ला रहे है। हॉकी हमारा राष्‍ट्रीय खेल है। इसके साथ अन्‍य खेलों जैसे बास्‍केटबॉल, फुटबॉल, तिरंदाजी को भी बढ़ावा देने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने हॉकी विश्‍वकप में उत्‍कृट प्रदर्शन करने वाली प्रदेश की महिला खिलाडियों को एक-एक करोड़ रुपए की राशि से पुरस्‍कृत किया है। सांसद  फिरोजिया ने बतौर जिला हॉकी ऐसोसिएशन के अध्‍यक्ष के रूप में मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव के प्रति आभार व्‍यक्‍त किया। राज्‍यसभा सांसद  बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज ने कहा कि मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव के विशेष प्रयासों से आज यह कार्य प्रारंभ होने जा रहा है। हॉकी के खिलाडियों के लिए निश्चित रूप से यह एक बहुत बडी सौगात है। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव की मंशा है कि हॉकी के खिलाडी राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर अग्रणी बने। खेलों के माध्‍यम से प्रतिभाशाली खिलाडी देश का नाम विश्‍व में रौशन करें। पूर्व विधायक  राजेन्द्र भारती ने कहा कि खिलाडियों की अपेक्षाओं और सपनों को साकार करने का कार्य मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव के विशेष प्रयासों से संपन्‍न हुआ है। निश्चित रुप से उज्‍जैन से भी मेजर ध्‍यानचंद जैसे खिलाडी निकलेंगे। उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव के प्रति‍आभार व्‍यक्‍त किया। इस अवसर पर नगर निगम अध्‍यक्ष मती कलावती यादव जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में खेलप्रेमी एवं नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन  ज्‍वलंत शर्मा ने किया और आभार प्रदर्शन संचालक खेल एवं युवा कल्‍याण  अंशुमन यादव द्वारा किया गया। … Read more

राष्ट्रपति के हाथों होगा राम नाम मंदिर का शिलान्यास, 19 मार्च को भव्य समारोह

अयोध्या रामनगरी में नव संवत्सर – समारोह को ऐतिहासिक बनाने की तैयारियां तेज हो गई हैं। राम मंदिर परिसर में आयोजित होने वाले इस विशेष कार्यक्रम के लिए करीब पांच हजार विशिष्ट मेहमानों की सूची तैयार कर ली गई है। समारोह की मुख्य अतिथि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू होंगी। वह राम मंदिर परिसर में लगभग चार घंटे तक रहेंगी। साथ ही राम मंदिर के दूसरे तल पर श्रीराम यंत्र व श्रीराम नाम मंदिर स्थापना भी करेंगी। पहली बार किसी बड़े कार्यक्रम में दर्शन सुचारु रखने की योजना भी बनी है। 19 मार्च को सुबह नौ बजे से अनुष्ठानों का शुभारंभ हो जाएगा। दक्षिण भारत, काशी व अयोध्या के 51 वैदिक आचार्य अनुष्ठानों को संपन्न कराएंगे। काशी के आचार्य पद्मभूषण पंडित गणेश्वर शास्त्री के नेतृत्व में समस्त अनुष्ठान होंगे। समारोह में केरल की आध्यात्मिक गुरु मां अमृता मरी, कर्नाटक के धर्माधिकारी पद्मभूषण वीरेंद्र हेगड़े और सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले भी शामिल होंगे। मां अमृता के साथ 100 से अधिक अनुयायी भी अयोध्या आ रहे हैं, उनके ठहरने के लिए कमरे बुक कराए जा रहे हैं। मेहमानों में उत्तराखंड के भी कारसेवक शामिल हैं। इसके अलावा अयोध्या जिले से करीब एक हजार लोगों को मेहमान के रूप में आमंत्रित किया जाएगा। कार्यक्रम की व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही अतिथियों के स्वागत, बैठने की व्यवस्था, पार्किंग और आवागमन की सुचारु व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। समारोह की तैयारी की समीक्षा करने के लिए राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा भी अयोध्या पहुंचे हैं और वह ट्रस्ट के पदाधिकारी और प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक कर कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। वहीं, राम मंदिर में लगातार श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। शनिवार को पंजाब से 1500 श्रद्धालुओं का जत्था विशेष ट्रेन से अयोध्या पहुंचा।. सभी ने रामलला के दर्शन किए और राम मंदिर की व्यवस्था को सराहा। साथ ही अयोध्या के विकास के लिए मुख्यमंत्री योगी की सराहना भी की।

खरमास की शुरुआत 15 मार्च से, एक महीने तक नहीं होंगे शुभ कार्य

सनातन धर्म में खरमास का विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व माना जाता है। यह एक ऐसी अवधि होती है जिसे परंपरागत रूप से अशुभ समय माना जाता है। इस दौरान शादी-विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। मार्च 2026 में भी खरमास लगने जा रहा है, लेकिन कई लोगों के मन में यह सवाल है कि खरमास 14 मार्च से शुरू होगा या 15 मार्च से। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इसका सही समय स्पष्ट हो गया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि खरमास कब से शुरू होगा और इस दौरान शुभ कार्य क्यों नहीं किए जाते। 2026 में खरमास कब से शुरू होगा? ज्योतिष गणना के अनुसार सूर्य देव 15 मार्च 2026 को कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य का यह राशि परिवर्तन रात 01 बजकर 08 मिनट पर होगा। सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही खरमास की शुरुआत हो जाएगी। इस दिन मीन संक्रांति का पर्व भी मनाया जाएगा। खरमास प्रारंभ: 15 मार्च 2026 समाप्ति: 14 अप्रैल 2026 इस पूरे एक महीने की अवधि को ज्योतिष में शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। इसलिए इस दौरान शादी-विवाह समेत कई मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। खरमास में कौन-कौन से काम नहीं किए जाते? खरमास के दौरान परंपरागत रूप से कई शुभ कार्यों को टाल दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में निम्न कार्य नहीं किए जाते: शादी-विवाह, सगाई या रोका, गृह प्रवेश, नामकरण संस्कार, मुंडन संस्कार, नया व्यापार या बिजनेस शुरू करना और किसी बड़े प्रोजेक्ट की शुरुआत। हालांकि इस समय पूजा-पाठ, दान-पुण्य और आध्यात्मिक कार्यों को बहुत शुभ माना जाता है। खरमास में शुभ कार्य क्यों नहीं किए जाते? धर्म शास्त्रों और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब खरमास की अवधि शुरू होती है। इन दोनों राशियों का स्वामित्व गुरु बृहस्पति के पास होता है। ज्योतिष के अनुसार इस दौरान सूर्य की ऊर्जा और प्रभाव थोड़ा मंद हो जाता है, जिससे उनकी शुभता कम हो जाती है। किसी भी शुभ और मांगलिक कार्य को सफल बनाने के लिए सूर्य और गुरु दोनों ग्रहों का मजबूत और शुभ होना जरूरी माना जाता है। लेकिन जब सूर्य इन राशियों में प्रवेश करते हैं, तो गुरु का प्रभाव भी कमजोर हो जाता है। यही कारण है कि इस अवधि में विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। खरमास में क्या करना होता है शुभ? खरमास को भले ही मांगलिक कार्यों के लिए अशुभ माना जाता हो, लेकिन धार्मिक दृष्टि से यह समय पूजा-पाठ और दान-पुण्य के लिए बहुत शुभ माना जाता है। इस दौरान इन कार्यों को करना लाभकारी माना जाता है। ऐसा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक लाभ मिलने की मान्यता है। भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा। गरीबों को दान देना। गीता या धार्मिक ग्रंथों का पाठ। तीर्थ यात्रा। ध्यान और साधना। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 15 मार्च 2026 से खरमास की शुरुआत होगी, जो 14 अप्रैल 2026 तक चलेगा। इस दौरान शादी-विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों को टालना शुभ माना जाता है। हालांकि यह समय पूजा-पाठ, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में भगवान की भक्ति और सेवा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।

Android और iPhone के लिए 5 शानदार ऐप्स जो आपको ज़रूर इस्तेमाल करने चाहिए

यदि आप बोरिंग एप्स की लिस्ट से अलग कुछ चाहते हैं तो पेश है कुछ ऐसे ही शानदार एप्स, इनमें सें कुछ गेम्स के लिए हैं और बाकि के आपके मनोरंजन के लिए। एंड्रायड के लिए चीजबर्गर चीजबर्गर एप के साथ आप फनी इमेज, जिफ, वीडियोज को फॉलो कर सकते हैं। ये कूल और फनी इमेज डिवाइस में सेव भी किए जा सकते हैं और दोस्तों के साथ शेयर भी कर सकते हैं। रिंगड्रोईड एंड्रायड के लिए रिंगड्रोईड एक ओपन सोर्स रिंगटोन एडिटर है, इसकी मदद से आप डिवाइस में मौजूद मयुजिकध्ऑडियो फाइल्स और नया रिकार्ड कर पर्सनल रिंगटोंस, अलार्म और नोटिफिकेशन साउंट बना सकते हैं। स्काई मैप अपने एंड्रायड फोन का उपयोग कर गूगल स्काई मैप की मदद से आप यूनिवर्स को खंगाल सकते हैं। इस एप की मदद से आप तारों, ग्रहों और अन्य खगोलिय पिंडों के सटीक स्थिति का पजा लगा पाएंगे। इसके लिए बस आपको आसमान की तरफ अपने फोन को प्वाइंट करना होगा और इसके बाद आसमान में मौजूद सभी चीजों को आप गूगल स्काई मैप पर आसानी से देख सकेंगे। मोविज बाय फ्लिक्स्टर मोविज बाय फ्लिक्स्टर एक सरल और शानदार एप है जिससे कौन सी मूवी चल रही है इसका पता लग जाएगा। इसमें मीडिया स्ट्रीमिंग और न्यूज जैसे कई रोचक टूल्स भी हैं, जो काफी शिक्षाप्रद है। ड्रोप कांटैक्स्ट एंड डिलर्स यह एप आपके पुराने फोनबुक एप की जगह ले सकता है। यह एप कंटैक्ट्स व कम्युनिकेशन एप्स को एक साथ लाता है, जो आपके स्क्रीन से एक्सेस किया जा सकता है। अब आईओएस एप्स फिश फूड फ्रैंजी फन यह काफी साधारण गेम है और कभी कभी यह चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है। इस गेम में ज्यादा से ज्यादा बराबर या अपने से छोटी मछलियों को खाना है। जितनी अधिक मछलियों को खाएंगे आप बड़े होते जाएंगे। हाॅरिजोन कैमरा वीडियो लवर्स के लिए यह पसंदीदा एप साबित होगा। हाॅरिजोन कैमरा हमेशा पोट्रेट रिकार्डिंग लेता है। एप में आयताकार इंडिकेटर है जो हमेशा स्क्रीन के केंद्र में होता है और रिकार्ड वीडियोज को क्लिक करना आसान बनाता है। अमेरिकन इंटीरियर अमेरिकन इंटीरियर एप को पेंगुइन ने बनाया है। यह एक ऐसा एप है जो कहानी सुनाता है। इस एप में 100 अलग अलग एंट्री हैं, इसमें आर्टवर्क, एनिमेशन, कहानियां, फिल्म क्लिप और ऑरिजिनल म्युजिक है। हेज कई वेदर एप्स में से हेज भी एक है। इस एप के साथ आप अपने फोरकास्ट में कुछ रंग डाल सकते हैं। आप इसमें तापमान, बारिश आदि देख सकते हैं और मौसम के विवरण का हाल भी ले सकते हैं। स्लीप बैटर स्लीप बैटर एप के साथ आप अपनी नींद को ट्रैक कर सकते हैं, सपनों को मॉनिटर कर सकते हैं, अपने बेडटाइम आदतों को और अच्छा बना सकते हैं।