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नारी शक्ति से समृद्धि की दिशा में मिसाल पेश करने वाली महिलाओं को मुख्यमंत्री ने प्रदान किए नारी शक्ति अवार्ड

लखनऊ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राजधानी लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘पिंक रोजगार महाकुंभ’ का उद्घाटन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वालीं प्रदेश की महिलाओं को नारी शक्ति अवार्ड से सम्मानित किया। जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नारी सुरक्षा, नारी सम्मान और नारी स्वावलंबन के संकल्प के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम में “शक्ति से समृद्धि” की दिशा में योगदान देने वाली प्रदेश की अग्रणी महिलाओं को नारी शक्ति अवार्ड से सम्मानित किया। इस क्रम में टाइम्स ऑफ इंडिया समूह की सहायक संपादक शैल्वी शारदा को मुख्यमंत्री ने नारी शक्ति अवार्ड प्रदान किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबा अनुभव रखने वाली शैल्वी शारदा प्रदेश के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विषयों पर अपनी गहन रिपोर्टिंग और लेखन के लिए जानी जाती हैं। इसी क्रम में एचसीएल ग्रुप की एसोसिएट डायरेक्टर कीर्ति करमचंदानी को भी नारी शक्ति अवार्ड से सम्मानित किया गया। कीर्ति करमचंदानी पब्लिक पॉलिसी के क्षेत्र में कई वर्षों से उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। उनकी उपलब्धियों और योगदान के लिए मुख्यमंत्री ने उन्हें नारी शक्ति अवार्ड से सम्मानित किया। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के महिला उद्यमी प्रकोष्ठ की अध्यक्षा आनंदी अग्रवाल को नारी शक्ति अवार्ड प्रदान किया। आनंदी अग्रवाल आईआईए के माध्यम से प्रदेश की महिलाओं को उद्यम स्थापित करने एवं आत्मनिर्भर बनने की दिशा में सहयोग प्रदान करतीं हैं। उन्हें प्रदेश में एमएसएमई उद्यम के विकास में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने, क्षमता निर्माण, सरकारी नीतियों के प्रति जागरूकता और मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए नारी शक्ति अवार्ड से सम्मानित किया गया। साथ ही टूरियागंज, लखनऊ के अर्बन सीएचसी की मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज डॉ. गीतांजलि को भी स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए नारी शक्ति अवार्ड प्रदान किया गया।   इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश की आजादी के शताब्दी वर्ष में हमारी सरकार का विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब आधी आबादी इस संकल्प के साथ मजबूती से जुड़ेगी। इसके लिए हमें हर क्षेत्र में नारी की सुरक्षा, गरिमा और सम्मान के साथ उनके सशक्तीकरण के लिए सभी संभव प्रयास करने होंगे।

सरकारी नौकरी का मौका: रेलवे में 5349 वैकेंसी, 10वीं-ITI पास ऐसे करें आवेदन

भोपाल रेलवे में करियर के अच्छे अवसर की तलाश कर रहे उम्मीदवारों के लिए एक अच्छी खबर है। रेलवे रिक्रूटमेंट सेल ने पश्चिमी रेलवे में बिना किसी रिटर्न एग्जाम पांच हजार से ज्यादा अप्रेंटिस के पदों के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और 23 मार्च तक आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट https://www.rrc-wr.com पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। यह ट्रेनिंग सिर्फ एक साल के लिए दी जाएगी। भर्ती से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारी     भर्ती बोर्ड- रेलवे रिक्रूटमेंट सेल (आरआरसी)     पद का नाम- अप्रेंटिसशिप     पदों की संख्या- 5349     आफिशियल वेबसाइट- www.rrc-wr.com     आवेदन शुरू होने की तारीख- 21 फरवरी 2026 सुबह 11 बजे से     आवेदन करने की आखिरी तारीख- 23 मार्च 2026 शाम 5 बजे तक     आयु सीमा- 15 वर्ष की उम्र पूरी कर ली हो, लेकिन 24 वर्ष का न हुआ हो।     रिजर्व कैटेगिरी के उम्मीदवारों को नियमानुसार छूट।     स्टाइपेंड- नियमानुसार     ट्रेनिंग की अवधि- एक वर्ष     चयन प्रक्रिया- मेरिट बेस पर शार्ट लिस्टिंग, डाक्यूमेंट वेरिफिकेशन     भर्ती का नोटिफिकेशन- RRC WR Apprentice Recruitment 2026 Notification PDF     आवेदन करने का लिंक- RRC WR Apprentice Vacancy 2026 Apply Online     आवेदन शुल्क-100 रुपये, एससी/एसटीपीडब्ल्यूबीडी/महिला आवेदक निशुल्क अप्लाई कर सकते हैं। भर्ती के लिए जरूरी योग्यता आवेदकों ने मैट्रिकुलेशन (10वीं) कक्षा 10+2 परीक्षा स्कीम के जरिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ पास की हो। साथ में संबंधित ट्रेड फिटर/ वेल्डर/ टर्नर/ मैकेनिस्ट/ वायरमैन/ पाइप फिटर/ प्लंबर/ स्टेनोग्राफर आदि में एनसीवीटी से मान्यता प्राप्त संस्थान से आइटीआइ सर्टिफिकेट प्राप्त किया हो। जो अभ्यर्थी एसएससी या आइटीआइ रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं, वो आवेदन के योग्य नहीं माने जाएंगे। इंजीनियरिंग ग्रेजुएट और डिप्लोमा होल्डर्स भी आवेदन के योग्य नहीं हैं। एजुकेशनल और टेक्निकल क्वालिफिकेशन के साथ उम्मीदवारों ने कम से कम 15 वर्ष की उम्र पूरी कर ली हो, लेकिन 24 वर्ष का न हुआ हो। ऊपरी उम्र में एससी/एसटी को 5 वर्ष, ओबीसी को 3 वर्ष, पीडब्ल्यूडी उम्मीदवारों (दिव्यांगजन) को 10 वर्ष की नियमानुसार छूट मिलेगी। ऐसे करें आवेदन ऑफिशियल वेबसाइट www.rrc-wr.com पर जाएं। होमपेज पर अप्लाई ऑनलाइन के लिंक पर क्लिक करें। न्यू रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करके मांगी गई डिटेल्स दर्ज करें। रजिस्ट्रेशन होने के बाद लाग इन करें। फीस (यदि लागू हो) जमा करें। फॉर्म का प्रिंटआउट निकालकर रख लें। एक्सपर्ट व्यू   तैयारी के लिए जरूरी टिप्सकरियर काउंसलर अभिषेक खरे बताते हैं कि इस अप्रेंटिस के लिए उम्मीदवारों को किसी भी तरह की परीक्षा नहीं देनी है, लेकिन कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, जो नीचे दी गई हैं। इस भर्ती में कोई लिखित परीक्षा नहीं होती, लेकिन चयन 10वीं आइटीआइ अंकों के औसत (मैरिट लिस्ट) के आधार पर होता है। इसलिए तैयारी का फोकस “पढ़ाई” से ज्यादा “अंक और दस्तावेज” पर होना चाहिए। 10वीं और आइटीआइ के अंक चैक करें। मेरिट इन्हीं अंकों के औसत से बनेगी, जितने ज्यादा अंक, उतनी ज्यादा चयन की संभावना रहती है। 10वीं % आइटीआइ %) ÷ 2 = फाइनल मेरिट प्रतिशत। गलत गणना से भ्रम न रखें। सभी जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखें। जैसे-10वीं मार्कशीट, आइटीआइ प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, जाति प्रमाणपत्र (यदि लागू) और पासपोर्ट साइज फोटो आदि। आवेदन फार्म ध्यान से भरें। नाम, जन्मतिथि, अंक बिल्कुल प्रमाणपत्र के अनुसार भरें। कोई भी गलत जानकारी न दें। डाक्यूमेंट वैरिफिकेशन में छोटी गलती भी रिजेक्शन करा सकती है। सही ट्रेड का चयन करें। जहां सीटें अधिक हों, वहां चयन की संभावना बढ़ सकती है। अंतिम चयन में मेडिकल फिटनेस होता है, इसलिए सामान्य स्वास्थ्य, आंखों की रोशनी आदि ठीक रखें। अंतिम तिथि से पहले आवेदन करें। आखिरी दिन वेबसाइट स्लो हो सकती है। मोबाइल और ईमेल एक्टिव रखें। मेरिट और डीवी की सूचना वहीं आएगी। साफ फोटो और सिग्नेचर अपलोड करें। ब्लर फोटो से आवेदन रिजेक्ट हो सकता है। ओरिजिनल डाक्यूमेंट साथ रखें। वेरिफिकेशन के समय मूल प्रमाणपत्र जरूरी हैं। किसी एजेंट के झांसे में न आएं। चयन पूरी तरह मेरिट आधारित है।

आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को मिला पांच लाख रुपये तक के इलाज का अधिकार

लखनऊ उत्तर प्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर नारी शक्ति की सुरक्षा और सम्मान के लिए आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को आयुष्मान कार्ड का उपहार दिया। उन्होंने पांच आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को मंच पर आयुष्मान कार्ड प्रदान किए। प्रदेश में अब तक कुल 3 लाख 684 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं सहित उनके परिवारजनों को आयुष्मान कार्ड योजना का लाभ प्रदान किया जा चुका है।  आयुष्मान कार्ड का सुरक्षा कवच महिलाओं का सशक्तीकरण और स्वावलंबन योगी सरकार के प्रमुख एजेंडे में है। सीएम योगी ने आज मंच पर लखनऊ की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों गुड़िया सिंह, प्रियंका सिंह, सुधा अवस्थी,  उमा सिंह और लालावती को आयुष्मान कार्ड प्रदान किए। इस पहल के माध्यम से प्रदेश सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आंगनबाड़ी कार्यकत्री गुड़िया सिंह ने कहा- ‘आयुष्मान कार्ड मिलने से हमारा आत्मविश्वास और बढ़ गया है। योगी सरकार का यह तोहफा हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसके माध्यम से हमारे परिवार को इलाज के लिए 5 लाख रुपये तक सुरक्षा गारंटी मिली है जिसके लिए हम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त करते हैं।’ प्रदेश सरकार की इस योजना के अंतर्गत अद्यतन 75 प्रतिशत आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं को आयुष्मान कार्ड प्रदान किए जा चुके हैं। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का इलाज हुआ आसान आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को अपनी सेवा के दौरान कई मोर्चों पर लड़ना पड़ता है। ऐसे में आयुष्मान कार्ड उनको इलाज और सुरक्षा की गारंटी देता है। आयुष्मान कार्ड मिलने से आंगनबाड़ी कार्यकत्री प्रियंका सिंह की खुशी का ठिकाना नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की महिलाओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को सदैव प्राथमिकता दी है। आज हम भयमुक्त होकर कहीं भी आ-जा सकते हैं। सरकार हमारे इलाज के लिए भी व्यवस्था कर रही है। गंभीर बीमारी होने पर इलाज में काफी खर्च हो जाता है। ऐसे में पांच लाख रुपये इलाज के लिए मिलना हम लोगों के लिए संजीवनी से कम नहीं है।  महिला सशक्तीकरण को मिला बल प्रदेश की समस्त आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को आयुष्मान कार्ड के अंतर्गत प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस योजना के तहत आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के साथ उनके परिवारजन भी सूचीबद्ध अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक का निःशुल्क उपचार प्राप्त कर सकते हैं। प्रदेश सरकार इस योजना को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। इससे इन महिलाओं को गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए आर्थिक सुरक्षा मिली है और स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच मजबूत हुई है। यह कदम महिला सशक्तीकरण और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। महिला दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में सरकार ने यह संदेश भी दिया कि प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां केवल पोषण और बाल विकास की जिम्मेदारी नहीं निभा रहीं, बल्कि समाज में बदलाव की मजबूत कड़ी भी हैं। उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित कर सरकार ने नारी शक्ति के सम्मान और सशक्तीकरण के अपने संकल्प को और मजबूत किया है।

Bhopal में बिना परमिशन नहीं होगा धरना या जुलूस, प्रशासन ने दो माह के लिए लागू किया नया आदेश

भोपाल भोपाल में अब धरना-प्रदर्शन, जुलूस, रैली और आमसभा आयोजित करने से पहले पुलिस की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति कार्यक्रम आयोजित करने पर आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत यह प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। यह आदेश अगले दो माह तक प्रभावी रहेगा। अनुमति के बिना आयोजन पर होगी कार्रवाई जारी आदेश के अनुसार किसी भी संगठन, राजनीतिक दल या समूह को धरना, प्रदर्शन, जुलूस, रैली, पदयात्रा, वाहन रैली, पुतला दहन या शासकीय कार्यालय अथवा निवास के घेराव जैसे कार्यक्रम आयोजित करने से पहले पुलिस उपायुक्त (आसूचना एवं सुरक्षा) से अनुमति लेना आवश्यक होगा। बिना अनुमति आयोजित कार्यक्रम के दौरान यदि अव्यवस्था फैलती है या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान होता है, तो उसकी जिम्मेदारी आयोजकों की मानी जाएगी।   हथियार, विस्फोटक और मशाल जुलूस पर रोक पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी रैली या कार्यक्रम में हथियार या विस्फोटक सामग्री लाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इसके अलावा मशाल जुलूस निकालने पर भी रोक लगाई गई है। साथ ही किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले भाषण या प्रकाशन पर भी सख्त प्रतिबंध रहेगा। राजधानी में अक्सर होते हैं प्रदर्शन भोपाल राजधानी होने के कारण यहां कर्मचारी संगठनों, छात्र संगठनों, राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों द्वारा अक्सर विरोध प्रदर्शन किए जाते हैं। सामान्य दिनों में शहर में औसतन प्रतिदिन 3 से 5 छोटे-बड़े धरना-प्रदर्शन होते हैं। इनमें ज्ञापन सौंपना, प्रतीकात्मक प्रदर्शन या धरना शामिल रहता है। बड़े मुद्दों पर बढ़ जाती है संख्या विधानसभा या लोकसभा चुनाव, भर्ती घोटालों या कर्मचारी आंदोलनों जैसे बड़े मुद्दों के दौरान विरोध प्रदर्शनों की संख्या अचानक बढ़ जाती है। ऐसे समय में एक ही दिन में 10 से 15 तक धरना-प्रदर्शन और रैलियां आयोजित होने लगती हैं।

समाज के लिए सामुदायिक भवन हेतु 50 लाख और पारागांव में सीसी रोड निर्माण के लिए 20 लाख रुपये देने की घोषणा

रायपुर समाज के लिए सामुदायिक भवन हेतु 50 लाख और पारागांव में सीसी रोड निर्माण के लिए 20 लाख रुपये देने की घोषणा जब समाज स्वयं अपने बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेता है, तब नई पीढ़ी और अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ती है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज रायपुर जिले के पारागांव में आयोजित चन्द्रनाहू कुर्मी क्षत्रिय समाज के दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन को संबोधित करते हुए यह बात कही।   इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने समाज के विकास के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 50 लाख रुपये देने की घोषणा की। साथ ही पारागांव में सीसी रोड निर्माण के लिए 20 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की। मुख्यमंत्री  साय ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उपस्थित सभी माताओं-बहनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज महतारी वंदन योजना को दो वर्ष पूर्ण हो गए हैं और इस अवसर पर प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं के खातों में योजना की 25वीं किश्त की राशि अंतरित की गई है। उन्होंने कहा कि यह योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि चन्द्रनाहू कुर्मी क्षत्रिय समाज का गौरवशाली इतिहास रहा है और इस समाज ने देश और प्रदेश को अनेक प्रतिभाशाली व्यक्तित्व दिए हैं। उन्होंने समाज द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि समाज के माध्यम से 2000 से अधिक विद्यार्थियों को शिक्षा का अवसर मिल रहा है, जो अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि  राज्य सरकार गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ को देश का धान का कटोरा कहा जाता है और किसानों के हित में राज्य सरकार लगातार निर्णय ले रही है। उन्होंने कहा कि होली पर्व के पूर्व 25.28 लाख किसानों के खातों में कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत 10 हजार 324 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की गई है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि रामलला दर्शन योजना के माध्यम से पिछले दो वर्षों में 42 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या जाकर भगवान राम के दर्शन कर चुके हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना को भी पुनः प्रारंभ किया गया है, जिससे बुजुर्गों और श्रद्धालुओं को विभिन्न तीर्थस्थलों के दर्शन का अवसर मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 के बजट में राज्य के सभी वर्गों के विकास को ध्यान में रखते हुए प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने समाज के युवाओं से आग्रह किया कि जो बेटा-बेटी उद्यम करना चाहते हैं, वे राज्य की नई उद्योग नीति का अध्ययन करें। मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ को लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और इन निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने की दिशा में कार्य प्रारंभ हो चुका है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धि प्राप्त करने वाले प्रतिभावान व्यक्तियों को सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में  दीपक चंद्राकर (सिविल जज में चयनित), कु. लक्ष्मी चंद्राकर (पीएससी में चयनित, वाणिज्यिक कर अधिकारी), डॉ. प्रीति करण चंद्राकर (हेड ऑफ डिपार्टमेंट, कंप्यूटर एंड साइंस, एनआईटी रायपुर), डॉ. करण चंद्राकर (आईआईटी दिल्ली से टेक्सटाइल एवं फाइबर इंजीनियरिंग में पीएचडी), कु. लक्ष्मी चंद्राकर (इंडो-नेपाल टेस्ट सीरीज बॉल बैडमिंटन में गोल्ड मेडल), डॉ. दिव्या चंद्राकर एवं डॉ. राहुल चंद्राकर (एमबीबीएस, शासकीय चिकित्सालय महासमुंद) शामिल हैं। कार्यक्रम को केबिनेट मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब, विधायक  ललित चंद्राकर तथा विधायक  योगेश्वर राजू सिन्हा ने भी संबोधित किया और समाज के संगठन, शिक्षा और सामाजिक विकास में योगदान की सराहना की। इस अवसर पर समाज के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।

चूरू में गौरव सैनानी समारोह: राष्ट्र सेवा में राजस्थान के वीरों की अग्रणी भूमिका : CM भजनलाल शर्मा

चूरू के जिला खेल स्टेडियम का नामकरण लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह राठौड़ के नाम पर करने की घोषणा जयपुर, मुख्यमंत्री  भजनलाल शर्मा ने कहा कि राष्ट्र सेवा में राजस्थान के वीरों की अग्रणी भूमिका रही है। यहां गांवों में कोई न कोई ऐसा परिवार है जिसने सेना की वर्दी पहनी है। उन्होंने कहा कि सैनिक कभी सेवानिवृत्त नहीं होते, वे आजीवन राष्ट्रहित और समाजहित के लिए निरन्तर कार्य करते हैं। उनका त्याग और बलिदान से परिपूर्ण जीवन हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।    शर्मा रविवार को चूरू के जिला खेल स्टेडियम में आयोजित गौरव सेनानी समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि चूरू और शेखावाटी की धरती ने देशप्रेम के भाव को सदैव जीवंत रखा है। परमवीर चक्र विजेता पीरू सिंह, मेजर शैतान सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह राठौड़ जैसे वीर सपूतों ने राजस्थान का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने चूरू के जिला खेल स्टेडियम का नाम 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अद्भुत साहस का प्रदर्शन करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह राठौड़ के नाम पर रखे जाने की घोषणा भी की। रक्षा क्षेत्र में देश बन रहा आत्मनिर्भर  शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत एक प्रमुख विश्व शक्ति बन कर उभर रहा है। भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक, ऑपरेशन पराक्रम, ऑपरेशन रक्षक और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों के माध्यम से दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि आज हमारा देश रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा है। वीरांगनाओं का त्याग हमारे लिए प्रेरणादायी  शर्मा ने कहा कि वीर सपूतों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। वीर नारियों और वीरांगनाओं का त्याग भी हमारे लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि वीर सैनिकों और उनके परिवारों की समस्याओं के समाधान के लिए राज्य सरकार कटिबद्ध है। इसी कड़ी में, घर-घर जाकर पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके परिवारों से संवाद किया गया है। एकीकृत सैनिक कल्याण कॉम्पलेक्सेज में सभी सुविधाएं मिलेंगी एक ही छत के नीचे मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों तथा उनके आश्रितों को विभिन्न सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने के लिए एकीकृत सैनिक कल्याण कॉम्पलेक्स का चरणबद्ध निर्माण कर रही है। इन कॉम्पलेक्सेज में जिला सैनिक कल्याण कार्यालय, युद्ध स्मारक, सैनिक कैंटीन, स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक भवन एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगे। प्रथम चरण में 36 करोड़ रुपये की लागत से जोधपुर, टोंक, शेरगढ़ और झुंझुनूं में इन कॉम्पलेक्स का निर्माण करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जोधपुर में मेजर शैतान सिंह कौशल विकास एवं प्रशिक्षण केंद्र और झुंझुनूं में ‘वॉर म्यूजियम’ की स्थापना भी की जाएगी। विभिन्न विभागों में नियोजित पूर्व सैनिकों के मानदेय में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सैनिक और उनके परिवारों को सुविधाएं एवं सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। आरटीडीसी के होटलों और गेस्ट हाउसों में वीरांगनाओं को 50 प्रतिशत और सेवारत एवं पूर्व सैनिकों को 25 प्रतिशत की छूट देने के साथ ही, नवीन जिला सैनिक कल्याण कार्यालय भी खोले जा रहे हैं। विभिन्न विभागों में रेक्सको के माध्यम से नियोजित पूर्व सैनिकों के मानदेय में पिछले 2 वर्ष में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। वहीं, द्वितीय विश्व युद्ध के पूर्व सैनिकों को मिलने वाली पेंशन 10 हजार से बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रतिमाह की गई है। एक्स सर्विसमैन सैकण्ड लाईन ऑफ डिफेंस – लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह   सप्तशक्ति कमान के सेना कमाण्डर लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने कहा कि फौजी कभी अकेला नहीं रहता, इसी उद्देश्य को लेकर गौरव सैनानी समारोह आयोजित किया जा रहा है। यह समारोह आपसी जुड़ाव और जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि एक्स सर्विसमैन सैकण्ड लाइन ऑफ डिफेंस के रूप में कार्य करते हैं।  शर्मा ने इस दौरान पूर्व सैनिकों का सम्मान किया और जॉब लेटर सौंपे। साथ ही, प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। इस अवसर पर चूरू विधायक  हरलाल सहारण, पूर्व नेता प्रतिपक्ष  राजेंद्र राठौड़, पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष  देवेंद्र झाझड़िया सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, पूर्व सैनिक, वीर नारियां, वीरांगनाएं एवं उनकेे परिवारजन उपस्थित रहे। —

भोपाल का लाजवाब स्वाद: नवाबी दस्तरखान से ‘रसाल’ तक, हर कौर में छिपी विरासत

इंदौर पिछली कड़ी में हमने इंदौर के सर्राफा और होलकर विरासत के चटपटे सफर का आनंद लिया था। इस वीकेंड, हम अपनी यात्रा को मध्य प्रदेश के उस हिस्से की ओर मोड़ते हैं जहां हवाओं में नवाबी तहजीब और शाही दस्तरखानों की महक घुली है। यहां पेश है आपके वीकेंड के लिए एक और विशेष स्टोरी। मध्य प्रदेश के खान-पान की जब भी बात होती है, तो भोपाल और उसके आस-पास के शाही घरानों का जिक्र अनिवार्य हो जाता है। यहाँ का जायका सिर्फ पेट नहीं भरता, बल्कि एक बीते हुए दौर की गवाही देता है।   जहानुमा घराना: अफगानी जड़ें और भोपाली पसंदे भोपाल का 'जहानुमा घराना' अपनी नवाबी मेहमान-नवाजी के लिए मशहूर है। इनकी रसोइयों का सबसे बड़ा तोहफा है- 'भोपाली पसंदे'। वैसे तो पसंदे एक मुगलिया डिश है, लेकिन भोपाल में इसे बनाने का अंदाज बिल्कुल जुदा है। उत्तर भारत के विपरीत, यहां के पसंदे बिना करी (ग्रेवी) के बनाए जाते हैं। अंडर-कट मीट को तली हुई प्याज, भुने चने, खोपरा और बादाम के पेस्ट में रात भर मैरिनेट किया जाता है और फिर धीमी आंच पर पकाया जाता है। दाल-गोश्त: जब मजबूरी बनी लजीज परंपरा भोपाल की एक और मशहूर डिश है 'दाल-गोश्त'। इसके पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प है। कहा जाता है कि दिल्ली सल्तनत और मुगलों के दौर में जब गोश्त महंगा होता था और परिवार बड़ा, तब पेट भरने के लिए गोश्त में दाल मिलाई जाती थी। समय के साथ यह 'जुगाड़' एक शाही डिश बन गया। मांश या मसूर की दाल के साथ कोयले की आंच पर पका यह गोश्त आज भी भोपाल की रसोइयों की जान है। जमींदार घराना: शाकाहारी विरासत और 'रसाल' का जादू इंदौर के करीब 'जमींदार घराना' अपने आप में अनोखा है। जहां देश के अधिकतर राजघरानों में मांसाहार का बोलबाला रहा, इस घराने ने 1704 से अपनी शुद्ध शाकाहारी परंपरा को निभाया है। इनकी रसोइयों की सबसे दुर्लभ डिश है 'रसाल'। ठंड के मौसम में जब गन्ने का ताजा रस निकलता है, तब इसे बड़े कढ़ा में उबाला जाता है। इसमें गलाए हुए चावल डालकर 3-4 घंटे तक इतनी धीमी आंच पर पकाया जाता है कि रस और चावल एक-दूसरे में पूरी तरह समा जाएं। बादाम और पिस्ते से सजी यह डिश मालवा की मिठास का प्रतीक है। रीवा की विरासत: बघेली चिकन और इंदिराहार विंध्य क्षेत्र की ओर बढ़ें तो रीवा रियासत का 'बघेली चिकन' अपनी अलग पहचान रखता है। शिकार के शौकीन बघेल राजाओं ने इसे देसी घी और भुने हुए खड़े मसालों के साथ विकसित किया। वहीं, शाकाहारी व्यंजनों में 'इंदिराहार' (पांच दालों का मिश्रण) गुजरात और राजस्थान की याद दिलाता है, जिसे फर्मेंट करके बड़ी कुशलता से तैयार किया जाता है।   स्वाद जो कहता है इतिहास चाहे वो भोपाल का यखनी पुलाव हो या जमींदार घराने का रसाल, मध्य प्रदेश का हर निवाला एक कहानी कहता है। यह खाना सिर्फ मसालों का मेल नहीं, बल्कि उन राजाओं, नवाबों और किसानों की विरासत है जिन्होंने इस राज्य को 'स्वाद का केंद्र' बनाया।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर 69 लाख 48 हजार महिलाओं के खातों में 25वीं किश्त के रूप में 641 करोड़ 58 लाख रुपये अंतरित

रायपुर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर 69 लाख 48 हजार महिलाओं के खातों में 25वीं किश्त के रूप में 641 करोड़ 58 लाख रुपये अंतरित मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बस्तर के लाल बहादुर शास्त्री मिनी स्टेडियम में आयोजित वृहद महतारी वंदन सम्मेलन–2026 में प्रदेश की माताओं-बहनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति समाज की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि महिलाओं का आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण ही विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव है और राज्य सरकार का हर निर्णय महिलाओं के कल्याण, सम्मान और आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखकर लिया जा रहा है।  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने इस अवसर पर महतारी वंदन योजना की 25वीं किश्त जारी करते हुए प्रदेश की 69 लाख 48 हजार महिलाओं के खातों में 641 करोड़ 58 लाख रुपये अंतरित किए। इसके साथ ही इस योजना के अंतर्गत अब तक महिलाओं को 16 हजार 237 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि माताओं-बहनों के आत्मविश्वास, सम्मान और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने वाला जनकल्याणकारी अभियान बन चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें 10 मार्च 2024 का वह दिन याद है, जब प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने महतारी वंदन योजना का शुभारंभ किया था। उसी समय यह संकल्प लिया गया था कि प्रदेश की प्रत्येक पात्र महिला के खाते में हर महीने निर्धारित तिथि पर एक हजार रुपये की राशि पहुंचेगी। पिछले 25 महीनों से यह संकल्प लगातार पूरा किया जा रहा है और इस किश्त के साथ अब तक प्रत्येक हितग्राही महिला को 25 हजार रुपये की राशि प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने जो वादा किया था, उसे पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभाया है। मुख्यमंत्री  साय ने बताया कि महतारी वंदन योजना को निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए राज्य सरकार ने इस वर्ष के बजट में 8 हजार 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि यह राशि माताओं-बहनों के जीवन में प्रत्यक्ष बदलाव ला रही है। महिलाएं इस सहायता का उपयोग बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य, घरेलू जरूरतों, बचत और स्वरोजगार जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में कर रही हैं। इससे परिवारों में आर्थिक स्थिरता बढ़ रही है और समाज के समग्र विकास को नई दिशा मिल रही है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश की माताएं-बहनें केवल परिवार का संचालन ही नहीं करतीं, बल्कि वे उत्कृष्ट वित्तीय प्रबंधक भी होती हैं। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि का महिलाओं ने अत्यंत समझदारी से उपयोग किया है। किसी ने बेटियों के भविष्य के लिए बचत की, किसी ने स्वरोजगार शुरू किया, किसी ने परिवार के छोटे व्यवसाय को बढ़ाया, तो किसी ने बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च कर घर की स्थिति को मजबूत बनाया। यह इस योजना की सबसे बड़ी सफलता है कि महिलाओं ने इसे स्वयं और परिवार की उन्नति का माध्यम बनाया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के दृढ़ संकल्प तथा सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से नक्सलवाद अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों और आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार ने 15 हजार आवास स्वीकृत किए हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर सहित दूरस्थ अंचलों में शांति, विकास और विश्वास का नया वातावरण बन रहा है, जिसमें महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार अनेक स्तरों पर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत पिछले दो वर्षों में 21 हजार 754 बेटियों के विवाह कराए गए हैं। महिलाओं को सुरक्षित, सुविधाजनक और गरिमापूर्ण कार्यस्थल उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में 368 महतारी सदन बनाने की स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 137 महतारी सदन का निर्माण पूर्ण हो चुका है। ग्राम पंचायत स्तर पर इनका उपयोग महिलाओं की बैठकों, प्रशिक्षण, विपणन और सामुदायिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में किया जाएगा। मुख्यमंत्री  साय ने बताया कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार लगातार पहल कर रही है। प्रदेश में अब तक 8 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाया जा चुका है और अब सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 10 लाख लखपति दीदी बनाने का है। उन्होंने कहा कि महिलाएं अब केवल सहभागी नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई नेतृत्वकारी शक्ति बनकर उभर रही हैं। इसी दिशा में महिला स्वसहायता समूहों के माध्यम से  रेडी टू ईट फूड निर्माण का कार्य पुनः प्रारंभ कराया गया है और इसे चरणबद्ध रूप से प्रदेश के शेष जिलों में भी लागू किया जा रहा है, ताकि स्थानीय स्तर पर महिलाओं को व्यापक रोजगार के अवसर मिल सकें। मुख्यमंत्री ने बस्तर क्षेत्र के संदर्भ में कहा कि नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से नक्सल प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं पुनः प्रारंभ की गई हैं, बंद पड़े स्कूलों को दोबारा शुरू कराया गया है, बिजली पहुंची है, मोबाइल टावर लगाए जा रहे हैं तथा स्वच्छ पेयजल और बेहतर सड़कों की सुविधा दूरस्थ बसाहटों तक पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि केवल सड़कों का निर्माण ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री बस सेवा योजना के माध्यम से बस्तर और सरगुजा अंचल के ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधा भी मजबूत की गई है, जिससे लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों तक पहुंचने में आसानी हो रही है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री  साय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से धमतरी की नीतू साहू, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी की मिथलेश चतुर्वेदी, जांजगीर-चांपा की सरस्वती केंवट, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की अनीता साहू तथा सरगुजा की निधि जायसवाल से संवाद किया।  मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी की मिथलेश चतुर्वेदी ने बताया कि पति के निधन के बाद उनके सामने परिवार चलाने की बड़ी चुनौती थी। शासन से मिली सहायता राशि और महतारी वंदन योजना के संबल से उन्होंने ई-रिक्शा खरीदकर आजीविका का नया साधन शुरू किया, जिससे अब वे अपने परिवार का भरण-पोषण आत्मसम्मान के साथ कर पा रही हैं। धमतरी की नीतू साहू ने बताया कि मजदूरी से होने वाली सीमित आय के कारण बेटियों के भविष्य के लिए बचत करना कठिन था, लेकिन महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि से … Read more

‘प्रगति – आत्मसम्मान से समानता तक एवं अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस’ विषय पर राज्य स्तरीय बाल उत्सव

लखनऊ अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय बाल उत्सव ‘प्रगति – आत्मसम्मान से समानता तक एवं अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस’ में रविवार को शिक्षा, नवाचार और नेतृत्व विकास का अनोखा संगम देखने को मिला। दयाल गेटवे स्थित कार्यक्रम स्थल पर लगाए गए 22 विशेष स्टॉल बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने, जहां जेंडर समानता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सामाजिक-भावनात्मक अधिगम और करियर मार्गदर्शन से जुड़ी गतिविधियों की जीवंत प्रस्तुति हुई। गतिविधि आधारित शिक्षण, संवाद और रचनात्मक प्रयोगों के माध्यम से बच्चों की प्रतिभा, जिज्ञासा और नेतृत्व क्षमता को नया मंच मिला। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय बाल उत्सव ‘प्रगति – आत्मसम्मान से समानता तक एवं अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस’ के दौरान विभिन्न विषयों पर आधारित 22 विशेष स्टॉल लगाए गए, जो पूरे आयोजन के प्रमुख आकर्षण बने। इन स्टॉलों के माध्यम से शिक्षा में नवाचार, जेंडर समानता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सामाजिक-भावनात्मक अधिगम, अभिभावक सहभागिता और करियर मार्गदर्शन से जुड़े विविध आयामों को रोचक और गतिविधि आधारित रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में लगाए गए स्टॉलों को चार प्रमुख जोनों में विभाजित किया गया था। पहले और दूसरे जोन में शिक्षक टीएलएम एवं कठपुतली अनुभाग के अंतर्गत शिक्षकों द्वारा तैयार की गई शिक्षण सामग्री और कठपुतली प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से जेंडर समानता, महिला सशक्तिकरण, बाल अधिकार और जीवन कौशल जैसे विषयों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया। कन्नौज, शामली, सीतापुर, अयोध्या, रायबरेली, बाराबंकी, लखीमपुर, लखनऊ, मेरठ और अमेठी जैसे जनपदों के शिक्षकों द्वारा तैयार किए गए मॉडल और गतिविधियों ने बच्चों को ‘करके सीखने’ (Learning by Doing) की अवधारणा से जोड़ा। इन स्टॉलों में विज्ञान नवाचार, प्रारंभिक साक्षरता एवं संख्यात्मक कौशल विकास, जेंडर-संवेदी शिक्षण सामग्री तथा कॉमिक बुक निर्माण जैसी गतिविधियां भी प्रदर्शित की गईं। इसके साथ ही कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में बालिकाओं के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों को भी प्रस्तुत किया गया, जिनमें बालिकाओं के आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और व्यक्तित्व विकास से जुड़ी पहलें शामिल रहीं। तीसरे जोन में बच्चों के लिए सामाजिक-भावनात्मक अधिगम और नेतृत्व विकास से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की गईं। यहां वैज्ञानिक दृष्टिकोण संवाद मंच, दृश्य अधिगम गतिविधियां, रचनात्मक अभिव्यक्ति मंच, ओरिगामी कला केंद्र और नवाचार आधारित गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में तार्किक सोच, आत्म-अभिव्यक्ति, सहानुभूति और रचनात्मकता विकसित करने का प्रयास किया गया। चौथे जोन में अभिभावक सहभागिता एवं करियर परामर्श अनुभाग के अंतर्गत करियर परामर्श केंद्र, अभिभावक संवाद मंच, नेतृत्व क्षमता विकास गतिविधियां, बाल अधिकार जागरूकता मंच और बाल संसद जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं। इन स्टॉलों के माध्यम से बच्चों को उनके अधिकारों, भविष्य के करियर विकल्पों और नेतृत्व कौशल के बारे में जानकारी दी गई, वहीं अभिभावकों को बच्चों की शिक्षा और व्यक्तित्व विकास में अपनी भूमिका को समझने 

पंजाब बजट में महिलाओं के लिए खास योजना, टैक्स न भरने वाली महिलाओं को मिलेगा ₹1000

चंडीगढ़ पंजाब बजट 2026-27 में महिलाओं के लिए बड़ी घोषणा की गई है। आयकर रिटर्न दाखिल नहीं करने वाली पात्र महिलाओं को हर महीने ₹1000 की आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का लक्ष्य महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाना और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना है। बजट में महिलाओं के लिए बड़ी योजना पंजाब सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए अहम घोषणा की है। सरकार ने प्रस्ताव रखा है कि राज्य की पात्र महिलाओं को हर महीने ₹1000 की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह सहायता विशेष रूप से उन महिलाओं को लक्षित करेगी जो आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल नहीं करतीं, यानी कम आय या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से जुड़ी महिलाएं इस योजना के दायरे में आ सकती हैं। बजट का उद्देश्य आर्थिक सुरक्षा बढ़ाना सरकार का कहना है कि इस योजना का मकसद महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना और उन्हें वित्तीय सुरक्षा देना है। राज्य सरकार इसे सामाजिक कल्याण कार्यक्रम के रूप में लागू करने की तैयारी कर रही है, जिससे बड़ी संख्या में महिलाओं को सीधे बैंक खातों में आर्थिक सहायता मिल सके। इससे परिवारों की आय में सहयोग मिलेगा और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी भी बढ़ेगी। चुनावी वादे को पूरा करने की दिशा यह योजना आम आदमी पार्टी द्वारा 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए प्रमुख वादों में से एक थी। उस समय घोषणा की गई थी कि राज्य की 18 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को मासिक वित्तीय सहायता दी जाएगी। अब 2026-27 के बजट में इस वादे को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। पात्रता और संभावित दायरा सरकारी सूत्रों के अनुसार योजना का लाभ मुख्य रूप से उन महिलाओं को मिल सकता है जो आयकर दाता नहीं हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्ग की महिलाओं को प्राथमिकता मिलने की संभावना है। राज्य में महिला मतदाताओं की संख्या बड़ी होने के कारण यह योजना लाखों महिलाओं को प्रभावित कर सकती है। बजट में सामाजिक योजनाओं पर फोकस पंजाब सरकार के 2026-27 के बजट में सामाजिक कल्याण योजनाओं को प्रमुखता दी गई है। महिलाओं के लिए मासिक सहायता के अलावा शिक्षा, रोजगार, कृषि और बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यक्रमों पर भी जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इन पहलों से राज्य में समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा और कमजोर वर्गों को आर्थिक सहारा मिलेगा। पंजाब बजट 2026 में महिलाओं के लिए प्रस्तावित मासिक सहायता योजना को राज्य की महत्वपूर्ण सामाजिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को सीधा लाभ मिलने की संभावना है और महिला सशक्तिकरण की दिशा में इसे एक बड़ा कदम माना जा रहा है।