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बालिका सुरक्षा और सशक्तीकरण को बल, केजीबीवी वार्डनों का विशेष प्रशिक्षण शुरू

प्रतापगढ़, गाजियाबाद तथा अयोध्या में केजीबीवी वार्डनों के लिए शुरू किया गया विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन तथा भारत सरकार के सहयोग से हो रहा आयोजन वार्डनों की भूमिका, दायित्वों और छात्रावास प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर हो रहा मंथन कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अध्ययनरत बेटियों के लिए सुरक्षित, अनुशासित और प्रेरक आवासीय वातावरण सुनिश्चित करना है उद्देश्य लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार बालिका शिक्षा को सुरक्षित और सशक्त बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में अध्ययनरत बेटियों के लिए सुरक्षित, अनुशासित और प्रेरक आवासीय वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रतापगढ़, गाजियाबाद और अयोध्या में वार्डनों का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके तहत छात्रावास प्रबंधन, बालिका सुरक्षा और नेतृत्व क्षमता से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण एनआईईपीए (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन) तथा भारत सरकार के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। वार्डनों की नेतृत्व क्षमता, प्रबंधन कौशल में आएगा निखार प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र में वार्डनों की भूमिका, दायित्वों और छात्रावास प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई। इस दौरान शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार से अंडर सेक्रेटरी रामनिवास ऑनलाइन माध्यम से जुड़े रहे। उन्होंने कहा कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय केवल शिक्षा के केंद्र नहीं, बल्कि उन बेटियों के लिए अवसर का मंच हैं जो सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित पृष्ठभूमि से आती हैं। ऐसे में वार्डनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे छात्राओं के लिए सुरक्षित, संवेदनशील और अनुशासित वातावरण सुनिश्चित करने की अग्रिम पंक्ति में होती हैं। यह प्रशिक्षण वार्डनों की नेतृत्व क्षमता, प्रबंधन कौशल और बालिका संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता को और सुदृढ़ करेगा। बालिका सुरक्षा, बाल संरक्षण, जीवन कौशल, नेतृत्व विकास का प्रशिक्षण इस अवसर पर एनआईईपीए की ट्रेनिंग कोऑर्डिनेटर एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सांत्वना मिश्रा तथा उनकी टीम भी प्रशिक्षण सत्र में शामिल हुई। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान वार्डनों को बालिका सुरक्षा, बाल संरक्षण, जीवन कौशल, नेतृत्व विकास, परामर्श, मानसिक-सामाजिक सहयोग, छात्रावास प्रबंधन तथा संवेदनशील विद्यालय वातावरण के निर्माण से जुड़े विषयों पर व्यावहारिक और नीतिगत दृष्टिकोण के साथ प्रशिक्षित किया जाएगा। 1 अप्रैल तक आयोजित होंगे बैच प्रशिक्षण कार्यक्रम विभिन्न बैच में आयोजित किया जा रहा है। गाजियाबाद और अयोध्या में प्रथम बैच 9 मार्च से 13 मार्च 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसके बाद क्रमशः 16 से 20 मार्च, 23 से 27 मार्च तथा 28 मार्च से 1 अप्रैल 2026 तक अन्य बैच आयोजित किए जाएंगे। इसी प्रकार अन्य केंद्रों पर भी चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जनपदों से वार्डन प्रतिभाग कर रही हैं। शिक्षा विभाग के अनुसार यह प्रशिक्षण केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को बालिका सुरक्षा, संवेदनशीलता और नेतृत्व विकास के सशक्त केंद्रों के रूप में विकसित करना है। इससे विद्यालयों में अध्ययनरत बालिकाओं को एक सुरक्षित, आत्मविश्वासपूर्ण और प्रेरक वातावरण मिलेगा, जो उनके समग्र व्यक्तित्व के विकास और उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला बनेगा।

सीमा पार बहाल: ड्रोन हमले के बाद बंद रूट अब अजरबैजान में फिर से खुला

बाकू अजरबैजान ने ईरान के साथ अपनी सीमा को फिर से माल ढुलाई (कार्गो) के लिए खोल दिया है। यह जानकारी रूसी समाचार एजेंसी टीएएसएस की एक रिपोर्ट में दी गई है। पिछले हफ्ते अजरबैजान ने यह सीमा बंद कर दी थी। उसका कहना था कि नखचिवन स्वायत्त गणराज्य में कथित ईरानी ड्रोन हमले की घटना हुई थी, जिसके बाद यह कदम उठाया गया। नखिचेवन अजरबैजान का एक अलग क्षेत्र है, जो ईरान के रास्ते उसके सहयोगी रूस से जुड़ता है और यह सबसे छोटा जमीनी रास्ता माना जाता है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से फोन पर बात की थी। अजरबैजान के राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक, पेजेशकियान ने भरोसा दिलाया कि नखिचेवन की घटना में ईरान का कोई हाथ नहीं है और तेहरान इस मामले की जांच कर रहा है। 5 मार्च को अजरबैजान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर हमले की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा, “एक ड्रोन ने नखचिवन स्वायत्त गणराज्य में हवाई अड्डे की टर्मिनल बिल्डिंग पर हमला किया, जबकि दूसरा ड्रोन शकराबाद गांव में एक स्कूल बिल्डिंग के पास गिरा।” इस हमले को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया गया था। अजरबैजान ने ईरान से जल्द इस मामले को स्पष्ट करने और भविष्य में ऐसी घटनाएं न होने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की थी। बाकू ने यह भी कहा कि अजरबैजान इस मामले में जवाबी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है। साथ ही ईरान के राजदूत को बुलाकर इस घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया था। अजरबैजान, ने मिडिल ईस्ट संघर्ष में न्यूट्रल रुख अपनाया है। लेकिन इसने हाल ही में इजरायल और ट्रंप प्रशासन के साथ करीबी संबंध बनाए, जबकि धीरे-धीरे काकेशस में पारंपरिक सहयोगी रहे मास्को से दूरी बनाई। देश में कोई अमेरिकी मिलिट्री बेस भी नहीं है। ईरान और अजरबैजान दोनों में ही बहुसंख्यक शिया मुस्लिम हैं, और ईरान लाखों अजेरी लोगों का घर है—अनुमान है कि यह संख्या लगभग डेढ़ से 2 करोड़ से भी अधिक है—जिनमें से कई अजरबैजान की सीमा से लगे उत्तर-पश्चिमी प्रांतों में रहते हैं।

योगी सरकार में डेटा सेंटर पॉलिसी से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मिल रही नई मजबूती

डेटा इकॉनामी की नई राजधानी बनने की राह पर उत्तर प्रदेश वर्ष 2030 तक प्रदेश में 5 गीगावाट क्षमता वाले बड़े डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने का लक्ष्य ई-गवर्नेंस, क्लाउड सर्विस और टेक स्टार्टअप्स के लिए अवसरों का विस्तार लखनऊ, उत्तर प्रदेश तेजी से देश की उभरती डेटा इकॉनामी का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। योगी सरकार की डेटा सेंटर नीति और हालिया घोषणाओं के चलते प्रदेश में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का दायरा लगातार बढ़ रहा है। फरवरी 2026 में विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सरकार ने राज्य में बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने और स्टेट डेटा सेंटर अथॉरिटी के गठन की घोषणा की। इसका उद्देश्य डेटा सेंटर उद्योग के विकास को संस्थागत ढांचा प्रदान करना और निवेश प्रक्रिया को और अधिक तेज करना है। योगी सरकार ने वर्ष 2030 तक प्रदेश में 5 गीगावाट क्षमता वाले 4 से 5 बड़े डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख डेटा स्टोरेज और क्लाउड सेवाओं के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। तेजी से बढ़ते डिजिटल उपयोग, क्लाउड सेवाओं की मांग और डेटा लोकलाइजेशन की नीति के बीच डेटा सेंटर उद्योग का महत्व लगातार बढ़ रहा है। प्रदेश सरकार की योजना के अनुसार लगभग 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश से 8 डेटा सेंटर पार्क विकसित किए जाएंगे, जिनकी कुल क्षमता करीब 900 मेगावाट होगी। इनमें से कई परियोजनाओं पर काम भी आगे बढ़ चुका है। सरकार की ओर से अब तक 8 परियोजनाओं को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किया जा चुका है, जिनमें 6 डेटा सेंटर पार्क और 2 डेटा सेंटर इकाइयां शामिल हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में 21,342 करोड़ रुपये के निवेश और 644 मेगावाट की क्षमता सुनिश्चित हो चुकी है। यह प्रगति इस बात का संकेत है कि उत्तर प्रदेश में में डेटा सेंटर सेक्टर तेजी से गति पकड़ रहा है और बड़ी टेक कंपनियां यहां निवेश को लेकर रुचि दिखा रहीं हैं। आईटी विशेषज्ञ प्रदीप यादव का कहना है कि डेटा सेंटर उद्योग के विस्तार से केवल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ही मजबूत नहीं होगा, बल्कि इससे आईटी, क्लाउड सेवाओं, नेटवर्किंग और तकनीकी सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इसके साथ ही यूपी में स्टार्टअप और डिजिटल सेवाओं के लिए भी मजबूत आधार तैयार होगा।  यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में कोई डेटा सेंटर स्थापित नहीं था। योगी सरकार के सत्ता में आने के बाद पिछले कुछ वर्षों में स्थिति तेजी से बदली है। प्रदेश में नीति आधारित प्रोत्साहन, बेहतर कनेक्टिविटी और निवेश अनुकूल माहौल के कारण डेटा सेंटर मामले में लगातार प्रगति हो रही है, जबकि कई परियोजनाएं निर्माण और प्रस्तावित चरण में हैं। सरकार का मानना है कि डेटा सेंटर क्लस्टर और स्टेट डेटा सेंटर अथॉरिटी के गठन से निवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति आएगी। इसके साथ ही प्रदेश को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी और उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में देश की डेटा इकॉनामी का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

बिहार में चिराग पासवान के लिए जोरदार प्रदर्शन, पोस्टरों में उठी मुख्यमंत्री बनने की आवाज

पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नामांकन करने के बाद सोमवार को पटना की सड़कों पर चिराग पासवान को अगला मुख्यमंत्री बनाने की मांग वाले पोस्टर दिखे। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के जिलाध्यक्ष इमाम गजाली ने ये पोस्टर लगाए। पोस्टरों में चिराग पासवान के सिर पर ताज पहने दिखाया गया था और उन पर नारे छपे थे कि उन्हें ताज पहनाओ, तभी बिहार का स्वर्ण युग आएगा। मोदी ने उन्हें आशीर्वाद दिया है। चिराग बिहार के नए नेता बनेंगे और बिहार को चिराग की ज़रूरत है। अब समय आ गया है कि एक युवा मुख्यमंत्री नियुक्त किया जाए। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन सरकार बनाएगा और चिराग मुख्यमंत्री बनेंगे। बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब पार्टी समर्थकों ने चिराग पासवान को बिहार का मुख्यमंत्री बनाने की मांग की है। इससे पहले, जमुई से सांसद और चिराग पासवान के बहनोई अरुण भारती ने भी चिराग को बिहार का नेतृत्व करते देखने की इच्छा व्यक्त की थी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पर अंतिम निर्णय एनडीए द्वारा लिया जाएगा। इससे पहले चिराग पासवान की माता राजकुमारी देवी ने भी सार्वजनिक रूप से उन्हें बिहार का मुख्यमंत्री बनते देखने की इच्छा जताई थी। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा था कि चिराग पासवान मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार से बेहतर प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने अपने बेटे को आशीर्वाद देते हुए और लोगों से उनका समर्थन करने का आग्रह किया था। नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नामांकन के बाद राजनीतिक गलियारों में दिग्गज नेता के संभावित उत्तराधिकारियों के रूप में कई नामों की चर्चा शुरू हो गई है। ऐसी अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि राज्य में किसी महिला को मुख्यमंत्री बनाने पर विचार-विमर्श चल रहा है। नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री हो गई है। निशांत रविवार को जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल हो गए। राजनीति में उनके आने के बाद, कुछ पार्टी कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री पद के लिए उनके नाम पर विचार करने की मांग भी की है। चिराग पासवान का नाम अब इस सूची में जुड़ जाने से बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर बहस और भी तेज हो गई है।

बिना बीमा दौड़ रहे 1 करोड़ वाहन, हादसे के पीड़ितों को मुआवजा मुश्किल; संसद के आंकड़ों पर हाईकोर्ट में अर्जी

चंडीगढ़ चंडीगढ़ में करीब 14.27 लाख वाहन पंजीकृत हैं, जिनमें से दो लाख से अधिक वाहन बिना वैध बीमा के सड़कों पर चल रहे हैं। वहीं हरियाणा में करीब 1.3 करोड़ वाहनों में से 41 लाख से अधिक वाहन बिना इंश्योरेंस के हैं।  पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में करीब एक करोड़ वाहन बिना वैध बीमा के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इस गंभीर मुद्दे को लेकर मोटर वाहन अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान नई अर्जी पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल की गई है। मामले पर हाईकोर्ट 10 मार्च को सुनवाई करेगा। वाहनों का बीमा न होने से दुर्घटना की स्थिति पीड़ितों को मुआवजा मिलने में समस्या आ रही है। मोहाली निवासी एडवोकेट कुंवर पाहुल सिंह द्वारा दाखिल अर्जी में संसद में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों का हवाला दिया गया है। अर्जी में बताया गया है कि ट्राइसिटी और दोनों राज्यों में बड़ी संख्या में वाहन बिना थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के सड़कों पर चल रहे हैं, जो न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों के लिए भी गंभीर समस्या पैदा कर रहा है। जानिए… क्या है वाहनों की स्थिति अदालत को दिए गए आंकड़ों के अनुसार चंडीगढ़ में करीब 14.27 लाख वाहन पंजीकृत हैं, जिनमें से दो लाख से अधिक वाहन बिना वैध बीमा के सड़कों पर चल रहे हैं। वहीं हरियाणा में करीब 1.3 करोड़ वाहनों में से 41 लाख से अधिक वाहन बिना इंश्योरेंस के हैं। पंजाब की स्थिति इससे भी अधिक चिंताजनक बताई गई है, जहां लगभग 1.3 करोड़ वाहनों में से 56 लाख से ज्यादा वाहन बिना वैध बीमा के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। प्रतिशत के लिहाज से देखा जाए तो चंडीगढ़ में लगभग 15 प्रतिशत, हरियाणा में 32 प्रतिशत और पंजाब में करीब 42 प्रतिशत वाहन बिना बीमा के चल रहे हैं। दुर्घटनाओं के मामलों में पीड़ितों को समय पर नहीं मिल रहा मुआवजा अर्जी में कहा गया है कि ऐसी स्थिति में सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को समय पर मुआवजा दिलाने का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। सामान्यतः किसी सड़क दुर्घटना के बाद पीड़ित या उसके आश्रित मुआवजे के लिए मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल) में याचिका दाखिल करते हैं। अधिकरण मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए मुआवजे की राशि तय करता है और यह निर्धारित करता है कि भुगतान की जिम्मेदारी किसकी होगी। यदि वाहन का बीमा होता है तो पीड़ित परिवार को बीमा कंपनी से मुआवजा मिलना अपेक्षाकृत आसान होता है। लेकिन यदि वाहन बिना बीमा के होता है तो मुआवजे की जिम्मेदारी सीधे वाहन चालक या मालिक पर आ जाती है। ऐसे मामलों में मुआवजा राशि की वसूली बेहद कठिन हो जाती है। कई बार चालक या मालिक के नाम पर पर्याप्त संपत्ति नहीं होती, जिससे पीड़ित परिवारों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है और कई मामलों में उन्हें मुआवजा मिल भी नहीं पाता। पीड़ितों को समय पर नहीं मिल रहा मुआवजा अर्जी में यह भी कहा गया है कि दुर्घटनाओं के मामलों में कई बार पुलिस द्वारा एक्सीडेंट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट समय पर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में दाखिल नहीं की जाती, जिससे मुआवजा प्रक्रिया और भी लंबी हो जाती है। इसमें हाल ही में हाईकोर्ट द्वारा जारी प्रशासनिक आदेश का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को निर्देश दिया गया है कि मोटर दुर्घटना मामलों में मुआवजा राशि सीधे पीड़ितों के बैंक खातों में ट्रांसफर होने की निगरानी करें। हालांकि अर्जी में सवाल उठाया गया है कि यदि बड़ी संख्या में वाहन बिना वैध बीमा के सड़कों पर चलते रहेंगे तो पीड़ितों को समय पर मुआवजा देने का उद्देश्य कैसे पूरा होगा।

मुंबई में LPG किल्लत से बढ़ी चिंता: कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई रुकी, डीलर्स ने बताए कारण

मुंबई ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले की वजह से मुंबई में एलपीजी कुकिंग गैस की कमी हो गई है। जंग के चलते मुंबई में एलपीजी सप्लाई में रुकावट आई है, जिस वजह से लोगों को कुकिंग गैस की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। शहर में रिफिल बुक करने के बाद इंतजार का समय अब दो से लेकर आठ दिनों तक हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डीलरों का कहना है कि होटल और रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाले कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह से रुक गई है। इस वजह से अब खाने-पीने की जगहों पर मुश्किलें आ सकती हैं। मुंबई में सोमवार सुबह से ही बुकिंग में कई गुना बढ़ोतरी होने से पैनिक बाइंग पहले से ही दिख रही थी। इसके साथ ही जिन परिवारों के पास दो सिलेंडर थे, वे तुरंत डीलर आउटलेट पर रीफिल बुकिंग कराने के लिए दौड़ पड़े। ‘25 दिन बाद ही बुक होगा नया रिफिल’ एक डीलर ने बताया कि केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय के एक नए नोटिफिकेशन में कहा गया है कि घरेलू ग्राहक एक सिलेंडर मिलने के 25 दिन बाद ही नया रिफिल बुक कर सकते हैं। डीलर ने बताया कि यह पिछले हफ्ते जैसा नहीं है, जब आप एक या दो दिन में अगला सिलेंडर बुक कर सकते थे। उन्होंने बताया कि कम से कम घरेलू 14.2 किलोग्राम का सिलेंडर अभी भी उपलब्ध है। उन्होंने आगे बताया कि रविवार से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह से बंद कर दी गई है। इससे उन होटलों और रेस्टोरेंट के लिए संकट पैदा हो जाएगा जो ये बड़े सिलेंडर खरीदते हैं। लोगों को करना पड़ रहा सिलेंडर के लिए इंतजार     ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले के चलते मुंबई में एलपीजी कुकिंग गैस की कमी     रिफिल बुक करने के बाद अब लोगों को करना पड़ रहा दो से लेकर आठ दिन तक का इंतजार     होटल और रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाली कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह से रुकी डीलर्स ने बताया- बढ़ सकती है ब्लैक मार्केटिंग एलपीजी डीलर्स का कहना है कि होटल और दूसरी कमर्शियल जगहों को ब्लैक मार्केट से घरेलू सिलेंडर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि यह गैर-कानूनी होने के साथ-साथ खतरनाक भी है। एक डीलर ने बताया कि मेरा सुझाव है कि अगर जरूरी हो तो सरकार होटल के मालिकों से ज्यादा कीमत ले, लेकिन कमर्शियल सिलेंडर देना जारी रखे। उन्होंने आगे बताया कि वैसे भी रविवार को कमर्शियल और घरेलू दोनों सिलेंडर की कीमतों में एक के बाद एक 115 रुपये और 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी।

14 मार्च को होगा राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन

राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजन के प्रचार प्रसार हेतु जागरूकता रथ को दिखाई गई हरी झंडी   अनूपपुर,  आमजन को त्वरित, सुलभ एवं किफायती न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 14 मार्च 2026 को जिला न्यायालय परिसर अनूपपुर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। इसके व्यापक प्रचार-प्रसार एवं जनजागरूकता के लिए जिला न्यायालय परिसर से जागरूकता रथ (प्रचार वाहन) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अनूपपुर  माया विश्वलाल ने जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर अभियान का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारीगण, अधिवक्तागण तथा न्यायालयीन कर्मचारी उपस्थित रहे। जागरूकता रथ जिले के विभिन्न ग्रामों, कस्बों और दूरस्थ अंचलों में भ्रमण कर लाउडस्पीकर तथा बैनर-पोस्टर के माध्यम से नागरिकों को राष्ट्रीय लोक अदालत के लाभों की जानकारी देगा। इसके माध्यम से लोगों को बताया जाएगा कि वे आपसी सुलह और समझौते के आधार पर अपने छोटे-मोटे विवादों तथा लंबित न्यायालयीन मामलों का त्वरित निराकरण करा सकते हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव विनोद कुमार वर्मा ने बताया कि इस लोक अदालत में मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के सहयोग से विद्युत अधिनियम की धारा 126 एवं 135 से संबंधित प्रकरणों में विशेष छूट प्रदान की जाएगी। प्री-लिटिगेशन स्तर के मामलों में सिविल दायित्व (मूल राशि) पर 30 प्रतिशत तथा ब्याज पर 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी। वहीं न्यायालय में लंबित प्रकरणों के निराकरण पर सिविल दायित्व पर 20 प्रतिशत तथा ब्याज पर 100 प्रतिशत छूट का प्रावधान रहेगा।   प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश माया विश्वलाल ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि लोक अदालत ऐसा मंच है जहाँ आपसी सहमति से विवादों का समाधान होता है, जिससे दोनों पक्षों के बीच आपसी सौहार्द बना रहता है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे लोक अदालत में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर अपने प्रकरणों का निराकरण कराएं। सचिव विनोद कुमार वर्मा ने बताया कि लोक अदालत में पारित निर्णय अंतिम होता है तथा इसके विरुद्ध किसी उच्च न्यायालय में अपील नहीं की जा सकती। साथ ही यदि किसी प्रकरण में न्यायालयीन शुल्क जमा किया गया है तो लोक अदालत में निराकरण होने पर वह शुल्क नियमानुसार वापस भी किया जाता है। राष्ट्रीय लोक अदालत में आपराधिक शमनीय प्रकरण, चेक बाउंस (एनआई एक्ट) से संबंधित मामले, पारिवारिक एवं वैवाहिक विवाद, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण तथा नगरीय निकायों के जलकर एवं संपत्ति कर से संबंधित मामलों का भी निराकरण किया जाएगा। जिला न्यायालय प्रशासन एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अनूपपुर ने सभी नागरिकों, पक्षकारों, बैंक अधिकारियों, बीमा कंपनियों तथा अधिवक्ताओं से अपील की है कि वे 14 मार्च 2026 को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर इस अवसर का लाभ उठाएं।

ओडीओपी योजना से मिला संबल, 10 लाख के ऋण से खड़ा किया डिजिटल लॉक का व्यवसाय

आपदा में अवसर: अलीगढ़ की महिला उद्यमी ने शुरू की डिजिटल लॉक यूनिट कोविड के दौर में शुरू हुआ स्टार्टअप, आज 20 से अधिक लोगों को दे रहा रोजगार लखनऊ,  उद्योगों को प्रोत्साहन देने वाली योगी सरकार की नीतियों से प्रेरित होकर अलीगढ़ की महिला उद्यमी नीलम सिंह ने कठिन समय को सफलता की नई शुरुआत में बदल दिया। ताला नगरी के नाम से मशहूर अलीगढ़ में उन्होंने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के तहत एक डिजिटल लॉक यूनिट की स्थापना की। यह यूनिट न केवल लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ रही है, बल्कि कई लोगों के लिए रोजगार का बेहतर माध्यम भी बन गई है। दरअसल, नीलम ने वर्ष 2019 में इस स्टार्टअप की शुरुआत की थी। उसी समय देश कोविड महामारी के संकट से जूझ रहा था। आर्थिक गतिविधियां लगभग ठप थीं। बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार छिन गया था। ऐसे कठिन समय में नीलम ने अपने सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति के साथ मिलकर एक ऐसा व्यवसाय शुरू करने के बारे में सोचा, जिससे स्थानीय लोगों को उनके ही क्षेत्र में रोजगार मिल सके। 10 लाख का ऋण मिला तो व्यवसाय का आधार हुआ मजबूत अलीगढ़ पहले से ही ताला उद्योग के लिए प्रसिद्ध रहा है। नीलम ने पारंपरिक ताले को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने का फैसला किया। इसी सोच के साथ उन्होंने “ओव्लॉक्स इंडिया” के नाम से डिजिटल लॉक बनाने की यूनिट शुरू की। इसकी शुरुआत आसान नहीं थी क्योंकि आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। ओडीओपी योजना के तहत उद्योग विभाग के माध्यम से बैंक ऑफ़ बड़ौदा से उन्हें 10 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इसमें लगभग ढाई लाख रुपये की सब्सिडी भी प्राप्त हुई। योगी सरकार की इस योजना के सहयोग से उनके सपनों को साकार करने के लिए मजबूत नींव तैयार हो गई। आज उनका यह व्यवसाय 10 करोड़ रुपये के पार जा चुका है। कोविड के दौर में शुरू हुआ, आज 20 से अधिक लोगों को दे रहा रोजगार जब इस यूनिट की शुरुआत हुई थी, तब यहां केवल पांच-छह कर्मचारी काम करते थे। धीरे-धीरे कारोबार बढ़ता गया और आज यहां 20 से 25 लोग काम कर रहे हैं। इस यूनिट से जुड़े कर्मचारी अपने काम के अनुसार हर महीने लगभग 15 हजार से 35 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ा है, बल्कि कई परिवारों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। इस यूनिट में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स को असेंबल कर आधुनिक डिजिटल लॉक तैयार किए जाते हैं। इन लॉक को आरएफआईडी कार्ड, मोबाइल फोन और सामान्य चाबी के माध्यम से संचालित किया जा सकता है। यही आधुनिक तकनीक इन्हें पारंपरिक तालों से अलग बनाती है। कई देशों तक पहुंच रहे नीलम के स्मार्ट लॉक सबसे खास बात यह है कि ओव्लॉक्स इंडिया के डिजिटल लॉक केवल भारत में ही नहीं, बल्कि कई देशों में सप्लाई किए जा रहे हैं। इससे अलीगढ़ की पारंपरिक ताला उद्योग की पहचान को एक नई तकनीकी दिशा मिल रही है। नीलम का कहना है कि पहले अलीगढ़ में अधिकतर हैंडमेड और की-बेस्ड लॉक बनाए जाते थे। इनमें मजदूरों को काफी मेहनत करनी पड़ती थी और आय भी सीमित होती थी लेकिन डिजिटल लॉक के इस नए उद्योग ने काम के स्वरूप को बदल दिया है। आज यहां काम करने वाले कर्मचारियों को बेहतर आय मिल रही है और उन्हें गर्व महसूस होता है कि उनके हाथों से बने उत्पाद देश-विदेश तक लोकप्रिय हो रहे हैं। यह कहानी केवल एक व्यवसाय की सफलता नहीं, बल्कि उस सोच की मिसाल है जो कठिन परिस्थितियों में भी अवसर तलाशती है। नीलम की यह पहल बताती है कि जब परंपरा और तकनीक साथ मिलती हैं, तो स्थानीय उद्योग भी वैश्विक पहचान बना सकते हैं।

बम से उड़ाने की धमकी, नागौर कोर्ट में हर कोना छाना गया

नागौर राजस्थान के नागौर कोर्ट को बम धमकी मिलने के बाद सोमवार को पुलिस और सुरक्षा अधिकारियों ने पूरे परिसर को खाली करवा कर जांच शुरू कर दी। कोर्ट परिसर में तकनीक और डॉग स्क्वाड की मदद से हर एरिया की जांच की जा रही है ताकि जान और संपत्ति पर खतरा कम से कम हो। पुलिस ने बताया कि धमकी भरा ईमेल कहां से आया, इसकी भी पुष्टि की जा रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, ईमेल सीधे कोर्ट में आया था और उसके बाद बाकी कोर्ट को अलर्ट कर दिया गया। पुलिस के मुताबिक, धमकियां ज्यादातर ईमेल के जरिए आ रही हैं और अभी तक उनका सोर्स पता नहीं चल पाया है। कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला कि धमकी कहां से आ रही है और क्यों दी जा रही है। जब भी ऐसे थ्रेट्स आते हैं तो पूरी सुरक्षा को हाई अलर्ट पर रखा जाता है। ऐसे में हमारा फोकस यही रहता है कि अगर थ्रेट एक्टिव भी हो जाए तो नुकसान को मिनिमम किया जा सके। एक वकील ने बताया कि धमकियों का सिलसिला पिछले एक महीने से चल रहा है। यह दूसरी बार है जब नागौर कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। इस दौरान कोर्ट की कार्यवाही प्रभावित हुई है और जमानत और अन्य मामलों में देरी हुई है। सुरक्षा के लिए पुलिस फोर्स कोर्ट परिसर में हर गतिविधि पर नजर रख रही है। उनका कहना है कि असली चुनौती है इस धमकी के सोर्स का पता लगाना। सरकार और संबंधित एजेंसियों को चाहिए कि मेल का सोर्स जल्दी से जल्दी पता करे। पिछले कुछ समय में ऐसी धमकियां जोधपुर, जयपुर, बीकानेर में भी मिली हैं। ऐसी धमकियों से कोर्ट और प्रशासन पर बहुत असर पड़ रहा है। पुलिस और कोर्ट स्टाफ पूरी मेहनत कर रहे हैं कि सुरक्षा में कोई कमी न आए और प्रशासनिक काम प्रभावित न हो, लेकिन बिना सोर्स का पता चले, ये धमकियां लगातार चिंता का कारण बन रही हैं। वकील और कोर्ट स्टाफ का कहना है कि प्रशासन और एजेंसियों को मिलकर इस सोर्स की पहचान करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी धमकियों से बचा जा सके।

स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन और हिंदुजा ग्रुप की कंपनी वनओटीटी एंटरटेनमेंट लिमिटेड के बीच हुआ एमओयू

ग्रामीण क्षेत्रों में 8–10 हजार स्थानीय युवाओं को मिलेगा डिजिटल उद्यमी बनने का मौका, 50% महिलाओं को मिलेगा अवसर गांव में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचने से ऑनलाइन व्यवसाय, शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं के खुलेंगे नए अवसर: सुरेश कुमार खन्ना ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी और महिला उद्यमिता को भी मिलेगा बढ़ावा लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार डिजिटल कनेक्टिविटी के साथ रोजगार सृजन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल कर रही है। इसी क्रम में ‘प्रोजेक्ट गंगा’ के तहत प्रदेश में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के विस्तार के लिए स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन और हिंदुजा ग्रुप की सहायक कंपनी वनओटीटी एंटरटेनमेंट लिमिटेड के बीच एमओयू साइन किया गया। इस परियोजना के तहत अगले 2–3 वर्षों में 20 लाख से अधिक घरों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि न्याय पंचायत स्तर पर 8,000 से 10,000 स्थानीय युवाओं को डिजिटल सेवा प्रदाता के रूप में विकसित किया जाएगा। इनमें महिलाओं की लगभग 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने की योजना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं का विस्तार होने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी सृजित होंगे। इसके साथ ही परियोजना के माध्यम से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से एक लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रोजेक्ट गंगा बदलेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था का स्वरूप कार्यक्रम में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि आज का यह एमओयू उत्तर प्रदेश में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कभी तकनीक के क्षेत्र में पीछे रहने के कारण भारत को विकासशील देश के रूप में देखा जाता था, लेकिन पिछले एक दशक में देश और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में हुए परिवर्तन ने दुनिया की धारणा बदल दी है। आज सबसे बड़ी आवश्यकता अधिक से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करने की है और यदि रोजगार तकनीक के माध्यम से मिलता है तो वह और अधिक प्रभावी और स्थायी होता है। प्रोजेक्ट गंगा (गवर्नमेंट असिस्टेड नेटवर्क फॉर ग्रोथ एंड एडवांसमेंट) के तहत लगभग 20 लाख घरों तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड पहुंचाने का लक्ष्य है, जिससे करीब एक करोड़ लोगों को लाभ मिलेगा। इसके साथ ही 8 से 10 हजार युवाओं को डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर के रूप में प्रशिक्षित कर रोजगार से जोड़ा जाएगा, जबकि महिलाओं की भागीदारी को भी विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। युवाओं को मिलेगा तकनीक आधारित रोजगार वित्त मंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचने से डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन व्यवसाय, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के नए अवसर खुलेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि ब्रॉडबैंड सुविधा गांव-गांव तक पहुंचे और युवाओं को तकनीक आधारित रोजगार मिल सके। युवाओं को डिजिटल उद्यमिता से जोड़ने के लिए सरकार आर्थिक सहयोग भी दे रही है। जनवरी 2024 में शुरू की गई योजना के तहत युवाओं को ₹5 लाख तक का ऋण बिना ब्याज और बिना गारंटी उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसका लाभ अब तक एक लाख से अधिक लोग ले चुके हैं। उन्होंने आग्रह किया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हिंदी भाषा को भी प्रमुख स्थान दिया जाए, ताकि प्रदेश के अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें। वित्त मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले दो से तीन वर्षों में प्रोजेक्ट गंगा उत्तर प्रदेश में डिजिटल सशक्तिकरण और रोजगार सृजन का बड़ा आधार बनेगा। विकास की दिशा तय कर रहा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह ने कहा कि आज के दौर में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल हाईवे का महत्व कई मामलों में भौतिक एक्सप्रेसवे से भी अधिक हो गया है, क्योंकि यही विकास की नई दिशा तय कर रहा है। यह एमओयू डिजिटल डिवाइड और संभावित एआई डिवाइड को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जिसके माध्यम से गांवों तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी, ओटीटी सेवाएं और हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचेगा। इससे ग्रामीण युवाओं के लिए डिजिटल सेवाओं, यूट्यूब और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से आय अर्जित करने के नए अवसर बनेंगे, वहीं टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन शिक्षा, ई-कॉमर्स और डिजिटल स्किलिंग के क्षेत्र भी तेजी से विकसित होंगे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार पिछले कई वर्षों से इस दिशा में प्रयास कर रही थी और अब हिंदुजा ग्रुप के सहयोग से यह पहल साकार हो रही है। विशेष रूप से श्रावस्ती, बहराइच और बलरामपुर जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंचने से लोगों के लिए नए आर्थिक अवसर खुलेंगे और ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी। एक लाख रोजगार का लक्ष्य हिंदुजा ग्लोबल सॉल्यूशन लि. के डायरेक्टर विंसले फर्नांडीज ने कहा कि जिस तरह मां गंगा केवल आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि हिमालय से बंगाल की खाड़ी तक करोड़ों लोगों के जीवन और रोजगार का आधार भी हैं, जिससे कृषि, उद्योग और पेयजल जैसे कई आयाम जुड़े हैं। इसी सोच के साथ इस पहल को ‘प्रोजेक्ट गंगा’ नाम दिया गया है। परियोजना के दो प्रमुख स्तंभ युवा एवं महिला सशक्तीकरण हैं। इसके तहत प्रदेश में लगभग एक लाख रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। हिंदुजा ग्रुप की सहायक कंपनी वनओटीटी एंटरटेनमेंट लिमिटेड के चीफ बिजनेस ऑफिसर सत्य प्रकाश सिंह ने कहा कि ‘प्रोजेक्ट गंगा’ का उद्देश्य दूर-दराज के अंडर-सर्व्ड और अनसर्व्ड क्षेत्रों तक डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंचाना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं का विस्तार हो और रोजगार के नए अवसर तैयार हो सकें। हाई-स्पीड इंटरनेट उपलब्ध होने से टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल स्किलिंग, ई-कॉमर्स और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं खुलेंगी। कार्यक्रम में स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन (एसटीसी) के सीईओ मनोज कुमार सिंह, श्रम विभाग के प्रमुख सचिव शन्मुगा सुंदरम, एसटीसी के एसीईओ अक्षत वर्मा, हिंदुजा ग्रुप के प्रतिनिधि डॉ. एस.के. चड्ढा, हिंदुजा ग्लोबल सॉल्यूशन लि. के डायरेक्टर विंसले फर्नांडीज और ओआईएल के चीफ बिजनेस ऑफिसर सत्यप्रकाश सिंह तथा परियोजना से जुड़े अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।