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क्रिकेट वर्ल्डकप की खुशी में हिंसा: उज्जैन में लाठी-डंडे चले

उज्जैन चिमनगंज थाना क्षेत्र की राजरायल कॉलोनी में रविवार रात को जमकर बवाल हो गया। भारतीय क्रिकेट टीम के टी-20 वर्ल्डकप जीतने से उत्साहित कुछ लोग पटाखे फोड़ रहे थे। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने उन्हें पटाखे फोड़ने से मना कर दिया। इसे लेकर दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हो गई। 10 लोग घायल हो गए। मारपीट का वीडियो भी इंटरनेट मीडिया पर बहुप्रसारित हुआ है। पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस ने बताया कि भारतीय क्रिकेट टीम के रविवार रात को टी-20 वर्ल्डकप जीतने पर राजरायल कॉलोनी में कुछ लोग जीत का जश्न मनाने के लिए पटाखे फोड़ रहे थे, जिसको लेकर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने आपत्ति जताते हुए पटाखे दूसरी जगह फोड़ने को कहा था। दोनों पक्षों में विवाद की स्थिति बन गई।    बताया जा रहा है कि कुछ लोगों ने लाठी, पाइप से हमला कर दिया, जिसमें रविंद्र हाड़ा, दृष्टि हाड़ा, मनीष मेहरले, अनिता मेहरले, विमला मालवीय, लैलासिंह, मानवेंद्र हाड़ा, विशला मालवीय घायल हो गए। दूसरे पक्ष से शादाब खान, वाहिद खान व एक महिला को भी चोट लगी है। सूचना मिलने पर चिमनगंज पुलिस मौके पर पहुंची थी। हिंदूवादी संगठन के लोग भी पहुंचे     राजरायल कालोनी में विवाद की जानकारी लगने पर हिंदूवादी संगठन के रितेश माहेश्वरी व अन्य लोग भी मौके पर पहुंचे थे। लोगों ने बताया कि कालोनी में असामाजिक तत्वों ने माता प्रतिमा बैठाने को लेकर भी कुछ माह पूर्व आपत्ति जताई थी। पुलिस ने संजय नामदेव की शिकायत पर वाहिद खान, जाकिर, सुल्तान, शादाब व अन्य साथियों के खिलाफ धारा 331, 296, 115, 351 व 3 बीएनएस के तहत केस दर्ज किया है। जबकि दूसरे पक्ष की ओर से वाहिद खान की शिकायत पर रविंद्र, पंकज व अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

मलावी को राहत पहुंचाई भारत ने, अल नीनो से प्रभावित इलाकों में भेजा 1,000 मीट्रिक टन चावल

नई दिल्ली अफ्रीकी देश मलावी में अल नीनो की वजह से भारी सूखा पड़ा है। ऐसे हालात में भारत ने मलावी को 1,000 मीट्रिक टन चावल की मानवीय मदद भेजी है। भारत ने इस कदम के साथ ही ग्लोबल साउथ में साझेदारों का समर्थन करने और साउथ-साउथ सहयोग की भावना को आगे बढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा, "खाद्य सुरक्षा के लिए भारत-मलावी साझेदारी। अल नीनो के असर से आए सुखाड़ के बाद खाद्य सुरक्षा के लिए मलावी की कोशिशों का समर्थन करने के लिए, भारत ने न्हावा शेवा पोर्ट से मलावी के लोगों के लिए 1,000 मीट्रिक टन चावल की मानवीय खेप भेजी है। यह ग्लोबल साउथ में पार्टनर्स को सपोर्ट करने और साउथ-साउथ सहयोग की भावना को आगे बढ़ाने के लिए भारत की लगातार प्रतिबद्धता को दिखाता है।" बता दें, मलावी में 40 लाख से ज्यादा लोग (आबादी का 20 प्रतिशत) खाने की बहुत ज्यादा कमी का सामना कर रहे हैं, जिससे कुपोषण बढ़ रहा है और परिवार खाना छोड़ रहे हैं। अल नीनो की वजह से मलावी में अनियमित बारिश हो रही है और चिलवा झील जैसे बड़े पानी के स्रोत सूख गए हैं। वहीं, मलावी सरकार ने आपदा की स्थिति घोषित कर दी है। बता दें, पिछले साल अक्टूबर में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने जॉर्ज चापोंडा को मलावी के विदेश मंत्री के तौर पर उनकी नियुक्ति पर बधाई दी थी। जयशंकर ने कहा कि वह भारत और मलावी के बीच द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा, "जॉर्ज चापोंडा को मलावी रिपब्लिक के विदेश मंत्री के तौर पर उनकी नियुक्ति पर बधाई। भारत के साथ उनके करीबी संबंध को देखते हुए, हम अपने द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं।" मलावी के नए राष्ट्रपति पीटर मुथारिका की डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (डीपीपी) के पुराने सदस्य जॉर्ज चापोंडा को वहां का विदेश मंत्री नियुक्त किया गया था। भारत और मलावी के बीच अच्छे द्विपक्षीय संबंध हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक नियमित उच्चस्तरीय बातचीत से भारत और मलावी के द्विपक्षीय संबंध और मजबूत हुए हैं। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु भी 2024 में मलावी के राजकीय दौरे पर गई थीं।राष्ट्रपति भवन की एक विज्ञप्ति में कहा गया कि अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने तत्कालीन मलावी समकक्ष लाजरस मैकार्थी चकवेरा से मुलाकात की और भारत-मलावी संबंधों को और गहरा करने के लिए कई मुद्दों पर चर्चा की थी। इसके साथ ही उन्होंने कला और संस्कृति, युवा मामलों, खेल और फार्मास्यूटिकल सहयोग पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी किए थे। इस दौरान राष्ट्रपति मुर्मु ने लिलोंग्वे में नेशनल वॉर मेमोरियल का दौरा किया और पहले और दूसरे विश्व युद्ध और दूसरे सैन्य अभियानों के दौरान अपनी जान देने वाले सैनिकों और नागरिकों को पुष्पांजलि अर्पित की थी।

भजनलाल शर्मा सरकार का स्वच्छता और पर्यावरण बचाने की ओर बड़ा अभियान

राजस्थान में “प्लास्टिक कचरा मुक्त अभियान-2026” को मिला अभूतपूर्व जनसमर्थन- 18 लाख से अधिक लोगों ने अभियान में की भागीदारी- लगभग 39 हजार किलोग्राम प्लास्टिक कचरा संग्रहित जयपुर, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व और स्वच्छता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के परिणामस्वरूप राज्य सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत 16 फरवरी से 28 फरवरी तक “प्लास्टिक कचरा मुक्त अभियान-2026” का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री द्वारा पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को जनआंदोलन बनाने की सोच ने इस अभियान को नई ऊर्जा प्रदान की, जिसके चलते प्रदेश के लाखों लोगों ने उत्साहपूर्वक अभियान में भागीदारी निभाई तथा अभियान को राज्यभर में अभूतपूर्व जनसमर्थन मिला। अभियान के दौरान 18 लाख 61 हजार प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई तथा राज्यभर से लगभग 39 हजार किलोग्राम प्लास्टिक कचरा एकत्रित किया गया। एकत्रित प्लास्टिक के पुनर्चक्रण एवं वैज्ञानिक निस्तारण से लगभग 2 लाख रुपये का राजस्व भी प्राप्त हुआ, जो इस अभियान की प्रभावशीलता को दर्शाता है। विद्यालयों, महिला समूहों और स्वयंसेवी संगठनों ने लिया बढ़-चढ़कर हिस्सा मुख्यमंत्री ने प्रदेश को स्वच्छ, स्वस्थ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए लगातार जनभागीदारी पर बल दिया है। उनके नेतृत्व में राज्य सरकार स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए ठोस कदम उठा रही है। यही कारण है कि इस अभियान में ग्राम पंचायतों से लेकर विद्यालयों, स्वयंसेवी संगठनों, महिला समूहों और आम नागरिकों तक ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ एवं प्लास्टिक कचरा मुक्त बनाना तथा आमजन में सिंगल यूज़ प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। इस अभियान को व्यापक जनआंदोलन का रूप मिला और लोगों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूती मिली।   राज्यभर की ग्राम पंचायतों में विविध गतिविधियों का आयोजन अभियान के तहत राज्यभर की ग्राम पंचायतों में विविध गतिविधियों का आयोजन किया गया। ग्राम पंचायतों, विद्यालयों, सार्वजनिक स्थलों, जल स्रोतों, धार्मिक स्थलों और बाजार क्षेत्रों में विशेष स्वच्छता गतिविधियाँ संचालित की गईं। इसके साथ ही चौपाल, स्वच्छता रैलियाँ, श्रमदान, विद्यालयों में पोस्टर एवं निबंध प्रतियोगिताएँ, दुकानदारों के साथ संवाद, महिलाओं को कचरा पृथक्करण के प्रति जागरूक करने के कार्यक्रम तथा बर्तन बैंक को प्रोत्साहित करने जैसी गतिविधियाँ आयोजित की गईं। आमजन ने प्लास्टिक कचरा मुक्त वातावरण बनाए जाने की ली शपथ अभियान के दौरान कई स्थानों पर सिंगल यूज़ प्लास्टिक के उपयोग को रोकने के लिए जागरूकता के साथ-साथ जुर्माने की कार्रवाई भी की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने प्लास्टिक कचरा मुक्त वातावरण बनाए रखने और कचरा पृथक्करण अपनाने की शपथ ली। जिससे ‘प्लास्टिक मुक्त राजस्थान‘ का संकल्प धरातल पर साकार हो सके। मुख्यमंत्री की पहल पर चलाए जा रहे ऐसे जनहितकारी अभियानों से प्रदेश में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता को नई मजबूती मिल रही है तथा राजस्थान स्वच्छ और हरित भविष्य की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है।

योगी सरकार का सख्त निर्देश, राज्य विश्वविद्यालय तय शासनादेश के अनुसार ही लें परीक्षा शुल्क

शासनादेश के विपरीत फीस वसूली पर ऑडिट कराकर कार्रवाई करने की चेतावनी छात्रहित को सर्वोपरि रखते हुए विश्वविद्यालयों को लेने चाहिए निर्णय शिक्षा को सर्वसुलभ और पारदर्शी बनाने के लिए योगी सरकार प्रतिबद्ध लखनऊ,  शिक्षा व्यवस्था को सुलभ, सस्ता और पारदर्शी बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार सख्त कदम उठा रही है। इसी क्रम में उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने राज्य विश्वविद्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे परीक्षा शुल्क केवल शासनादेश में निर्धारित दरों के अनुसार ही लें। शासनादेश के विपरीत अधिक शुल्क वसूलने वाले विश्वविद्यालयों के ऑडिट कराने और आवश्यक कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी गई है। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने सोमवार को विधानसभा स्थित अपने कार्यालय कक्ष में लखनऊ विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों द्वारा शासनादेश के विपरीत फीस लिए जाने के संबंध में समीक्षा बैठक की। बैठक में विश्वविद्यालयों की शुल्क संरचना, परीक्षा शुल्क और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री ने निर्देश दिए कि राज्य विश्वविद्यालयों को निर्धारित शासनादेश के अनुसार ही परीक्षा शुल्क लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई विश्वविद्यालय निर्धारित शुल्क से अधिक परीक्षा शुल्क वसूलता है तो उसकी ऑडिट कराई जा सकती है और उचित कार्रवाई की जाएगी। मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार शिक्षा को सुलभ, सस्ता, पारदर्शी व छात्र हितैषी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि फीस में अनावश्यक वृद्धि से आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाई होती है, इसलिए विश्वविद्यालयों को छात्रहित को सर्वोपरि रखते हुए निर्णय लेने चाहिए। शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार राज्य विश्वविद्यालयों में परीक्षा शुल्क की समानता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न पाठ्यक्रमों हेतु प्रति सेमेस्टर परीक्षा शुल्क निर्धारित किया गया है। इसके तहत बीए, बीएससी, बीकॉम, बीबीए, बीसीए, बीएड, बीपीएड, बीजेएमसी, बीएफए और बीवोक जैसे पाठ्यक्रमों के लिए 800 रुपये, एलएलबी, बीएससी एग्रीकल्चर (ऑनर्स), बीटेक, बायोटेक जैसे पाठ्यक्रमों के लिए 1000 रुपये तथा बीडीएस, नर्सिंग, बीएएमएस और बीयूएमएस जैसे पाठ्यक्रमों के लिए 1500 रुपये प्रति सेमेस्टर परीक्षा शुल्क निर्धारित किया गया है। उच्च शिक्षा मंत्री ने राज्य विश्वविद्यालयों को निर्देशित किया कि वे शासनादेशों का पूर्ण रूप से पालन सुनिश्चित करें और वित्तीय अनुशासन बनाए रखें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को अपने संसाधनों को मजबूत करने, नए पाठ्यक्रम शुरू करने और वित्तीय प्रबंधन को बेहतर बनाने की दिशा में भी प्रयास करने चाहिए, ताकि संस्थान आत्मनिर्भर बन सकें। बैठक में अधिकारियों और विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्थिति, परीक्षा संचालन से जुड़ी चुनौतियों और संभावित समाधानों पर भी अपने सुझाव प्रस्तुत किए। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि योगी सरकार विश्वविद्यालयों की वास्तविक आवश्यकताओं पर विचार करते हुए आवश्यक सहयोग प्रदान करने के लिए तैयार है, लेकिन शासनादेशों का पालन सभी संस्थानों के लिए अनिवार्य है। बैठक में एमएलसी उमेश द्विवेदी, अवनीश कुमार सिंह, प्रमुख सचिव एम. पी. अग्रवाल, सचिव अमृत त्रिपाठी,  कुलपति लखनऊ विश्वविद्यालय प्रो. जय प्रकाश सैनी सहित विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।

टोबैको फ्री यूथ कैंपेन 3.0 के तहत चलाया गया ‘नो टोबैको प्लेज’ अभियान, यूपी लगातार दूसरे वर्ष प्रथम

लखनऊ,  तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने और युवाओं को तंबाकू के सेवन से दूर रखने के उद्देश्य से चलाए जा रहे राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (एनटीसीपी) के अंतर्गत उत्तर प्रदेश ने एक बार फिर देश में पहला स्थान हासिल किया। केंद्र सरकार के टोबैको फ्री यूथ कैंपेन 3.0 के तहत आयोजित ऑनलाइन ‘नो टोबैको प्लेज’ अभियान में वर्ष 2025-26 के दौरान उत्तर प्रदेश ने पूरे देश में सबसे ज्यादा भागीदारी दर्ज की । इस सूची में उत्तर प्रदेश के बाद हरियाणा दूसरे, राजस्थान तीसरे और दिल्ली चौथे स्थान पर रही। राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण के इस अभियान में उत्तर प्रदेश की यह उपलब्धि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा निर्देशों के सफल क्रियान्वयन का परिणाम है। उत्तर प्रदेश ने पिछले वर्ष 2024-25 में भी टोबैको फ्री यूथ कैंपेन 2.0 के दौरान ऑनलाइन ‘नो टोबैको प्लेज’ में देश में शीर्ष स्थान हासिल किया था। लगातार दूसरे वर्ष यह उपलब्धि राज्य के युवाओं, स्कूलों, स्वास्थ्य विभाग और तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम की टीम के संयुक्त प्रयासों से संभव हुई है। टोबैको फ्री यूथ कैंपेन 3.0 की शुरुआत 09 अक्टूबर 2025 से हुई थी। यह राष्ट्रीय अभियान शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त प्रयास से संचालित किया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं को तंबाकू के हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूक करना, उन्हें तंबाकू का उपयोग न करने की शपथ लेने के लिए प्रेरित करना और तंबाकू मुक्त पीढ़ी का निर्माण करना है। इस अभियान के तहत स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम, शिक्षकों का प्रशिक्षण, तंबाकू मुक्त संस्थानों की घोषणा और ऑनलाइन शपथ जैसी कई गतिविधियां आयोजित की गईं। उत्तर प्रदेश में इस अभियान को व्यापक जनभागीदारी के साथ सफल बनाया गया। एनसीसी, एनएसएस, स्काउट-गाइड तथा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भागीदारी कर ऑनलाइन शपथ ली। इसके अलावा लोगों को तंबाकू की लत छोड़ने में सहायता देने के लिए भी विभिन्न सेवाएं संचालित की गईं। केंद्र सरकार के तंबाकू मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में उत्तर प्रदेश की यह उपलब्धि मील का पत्थर साबित हो रही है।

जीविका दीदीयों को सहकारी संघ देगा 2 लाख तक का लोन

बांका. स्वरोजगार और छोटे कारोबार के लिए अब जीविका दीदियों को माइक्रो फाइनेंस या नॉन बैंकिंग कंपनियों से ऋण लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अब उन्हें जीविका के माध्यम से ही सप्ताह भर के अंदर लोन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए जिला परियोजना विभाग (जीविका) की ओर से स्थानीय स्तर पर तैयारी शुरू कर दी गई है। सुलभ तरीके से ऋण उपलब्ध कराने के लिए बिहार राज्य जीविका निधि साख सहकारी संघ का गठन किया गया है। इससे जिले की करीब तीन लाख से अधिक जीविका दीदियों को लाभ मिलेगा। बांका में 3 लाख महिलाओं को होगा फायदा जिले में लगभग 26 हजार से अधिक जीविका समूह संचालित हैं, जिनसे तीन लाख से अधिक महिलाएं जुड़कर विभिन्न प्रकार के कारोबार कर रही हैं। जिला परियोजना प्रबंधक राकेश कुमार ने बताया कि लोन लेने के लिए एप के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। लोन देने से लेकर उसे वापस करने तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। कम राशि को भी किया जाएगा फाइनेंस बैंकिंग व्यवस्था के संचालन के लिए जिले में 13 सीएलएफ का चयन किया गया है, जिन्हें प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। नई वित्तीय वर्ष से इस योजना पर काम शुरू कर दिया जाएगा। जीविका अधिकारियों के अनुसार समूह से जुड़ी महिलाओं को पहले एकमुश्त राशि दी जाती है, लेकिन कई बार स्वरोजगार के लिए अतिरिक्त पूंजी की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में जीविका निधि के माध्यम से आसानी से ऋण उपलब्ध कराया जा सकेगा, जिससे महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगी। आवेदन से लेकर ऋण वापसी तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, जिसकी निगरानी प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक की जाएगी। तीन तरह का मिलेगा ऋण जीविका बैंक से ऋण लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन में तीन विकल्प दिए जाएंगे। अल्पकालीन ऋण 15 हजार रुपये तक, सूक्ष्म ऋण 15 हजार से 75 हजार रुपये तक तथा लघु ऋण 75 हजार से लेकर दो लाख रुपये तक मिल सकेगा। अल्पकालीन ऋण की अवधि अधिकतम 12 महीने, सूक्ष्म ऋण की 24 महीने और लघु ऋण की 36 महीने तक निर्धारित की गई है। जीविका दीदियों को सुलभ तरीके से ऋण उपलब्ध कराने के लिए जीविका निधि का गठन किया गया है। इससे जिले की तीन लाख से अधिक महिलाओं को लाभ मिलेगा। -राकेश कुमार, जिला परियोजना प्रबंधक, जीविका माइक्रो फाइनेंस के दबाव से राहत दिलाएगी जीविका ऋण योजना माइक्रो फाइनेंस और नॉन बैंकिंग कंपनियों की ओर से लोन वसूली के लिए किए जाने वाले दबाव और प्रताड़ना से लोगों को अब राहत मिलने की उम्मीद है। पिछले वर्ष अमरपुर क्षेत्र में कर्ज के दबाव से तंग आकर एक दंपती समेत तीन लोगों ने आत्महत्या कर ली थी। ऐसी कई घटनाओं के बाद प्रशासन और समाज में चिंता बढ़ी थी। अब जीविका के माध्यम से सुलभ और पारदर्शी तरीके से ऋण उपलब्ध होने से महिलाओं को निजी कंपनियों के चंगुल में फंसने से बचाव मिलेगा। इससे स्वरोजगार को बढ़ावा मिलने के साथ कर्ज के दबाव से होने वाली परेशानियों में भी कमी आने की संभावना है।  

प्रेरणा कैंटीन से जुड़कर 10 हजार से अधिक महिलाएं बनीं लखपति

2100 से अधिक प्रेरणा कैंटीन बन रहीं हैं ग्रामीण महिलाओं की तरक्की का आधार जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और विकासखंड कार्यालय के साथ ही पीएचसी-सीएचसी में किया जा रहा संचालन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से आत्मनिर्भर बन रहीं प्रदेश की महिलाएं हर महिला को कैंटीन से औसतन 10 हजार रुपए से अधिक की हो रही मासिक आय लखनऊ, उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में शुरू की गई प्रेरणा कैंटीन के बड़े सकारात्मक नतीजे सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से शुरू हुई इस योजना से अब तक 10 हजार से अधिक महिलाएं लखपति बन चुकी हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित इन कैंटीन से न केवल महिलाओं की आय बढ़ी है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने का मजबूत अवसर भी मिल रहा है। प्रदेश भर में 2100 से अधिक प्रेरणा कैंटीन का संचालन किया जा रहा है, जो ग्रामीण महिलाओं की तरक्की का मजबूत आधार बन रही हैं। इन कैंटीनों का संचालन स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं कर रही हैं, जिससे उन्हें नियमित आय के साथ-साथ रोजगार का स्थायी साधन भी मिल रहा है। कर्मचारियों, मरीजों और उनके परिजनों को मिल रहा स्वच्छ और किफायती भोजन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहन, रोजगार के नए अवसर और सरकारी योजनाओं का लाभ देकर महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। प्रेरणा कैंटीन का संचालन जिलाधिकारी कार्यालय, मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय, विकासखंड कार्यालय के साथ-साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में किया जा रहा है। सरकारी कार्यालयों और स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाले कर्मचारियों, मरीजों और उनके परिजनों को यहां स्वच्छ और किफायती भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इससे जहां लोगों को बेहतर सुविधा मिल रही है, वहीं महिलाओं की आय भी लगातार बढ़ रही है। ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल रहा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर विशेष अभियान चलाकर स्वास्थ्य केंद्रों पर भी प्रेरणा कैंटीन की स्थापना की गई है। इसी कड़ी में अब तक 832 प्रेरणा कैंटीन पीएचसी और सीएचसी में स्थापित की जा चुकीं हैं। इन कैंटीनों के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रहीं हैं। महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार प्रेरणा कैंटीन से जुड़ी हर महिला को औसतन करीब 10 हजार रुपये से अधिक की मासिक आय हो रही है। इससे महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार आया है और वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहीं हैं।

15 मार्च के बाद नहीं बजेगी शहनाई, जानिए कब से फिर शुरू होगा शादी-विवाह का सीजन

ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि जब ग्रहों के राजा सूर्य गुरु की धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तो खरमास की शुरुआत होती है. हिंदू धर्म में खरमास को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. ये एक मास की अशुभ अवधि होती है. साल में दो बार ऐसा होता है, जब खरमास लगता है. खरमास के दौरान शादी-विवाह, गृह प्रवेश, सगाई, मुंडन संस्कार और नामकरण जैसे शुभ और मांगलिक काम नहीं किए जाते हैं. खरमास की शुरुआत 15 मार्च से होने वाली है. इस दिन से एक माह तक शादी-विवाह, गृह प्रवेश, सगाई, मुंडन संस्कार जैसे शुभ काम रोक दिए जाएंगे. ऐसे में आइए जानते हैं कि खरमास के बाद फिर से कब शहनाइयों की गूंज सुनने को मिलेगी. यानी फिर कब से विवाह शुरू होंगे? सूर्य देव कब करेंगे मीन राशि में प्रवेश? इस साल 14 मार्च की देर रात 01 बजकर 08 मिनट पर ग्रहों के राजा सूर्य देव कुंभ राशि से मीन राशि में प्रवेश कर जाएंगे. अंग्रेजी कैलेंडर में रात को 12 बजे के बाद अगला दिन माना जाता है. ऐसे में देखें तो रात 01 बजकर 08 मिनट 15ं मार्च का दिन माना जाएगा. इसलिए खरमास की शुरुआत इस साल 15 मार्च से होगी. वहीं 14 अप्रैल को इसका समापन हो जाएगा. 15 अप्रैल से फिर शुरू होंगे विवाह 14 अप्रैल को खरमास खत्म होने के बाद 15 अप्रैल से एक बार फिर से विवाह शुरू हो जाएंगे. इसके बाद जुलाई में चातुर्मास शुरू होने के पहले तक विवाह जारी रहेंगे. विवाह के शुभ मुहूर्त     अप्रैल: इस माह में 15, 16, 20, 21, 25, 26, 27, 28, 29 और 30 तारीख को विवाह होंगे.     मई: इस माह में 01, 03, 04, 05, 06, 07, 08, 12, 13 और 14 तारीख को विवाह होंगे.     जून: इस माह में 19, 20, 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 28, 29 तारीख को विवाह होंगे.     जुलाई: इस माह में 01, 02, 06, 07, 8, और 11 तारीख को विवाह होंगे. खरमास में क्यों नहीं होते विवाह और अन्य शुभ काम? वैदिक ज्योतिष के अनुसार, सूर्य के गुरु की राशि में होने पर गुरु और सूर्य दोनों ग्रहों की ताकत कम हो जाती है. शादी-विवाह में शुभता के लिए और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए सूर्य, गुरु और शुक्र का उत्तम स्थिति में होना आवश्य है. सूर्य और गुरु की ताकत कम होने से इस दौरान किए गए मांगलिक कामों का शुभ फल नहीं मिलता. यही कारण है खरमास के दौरान विवाह समेत तमाम शुभ काम वर्जित होते हैं.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ग्रीन एनर्जी हब के रूप में उभर रहा उत्तर प्रदेश

यूपी के गोरखपुर और रामपुर जिले में स्थापित हो रही ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाएं गोरखपुर में टोरेंट पॉवर का 0.5 मेगावाट ग्रीन हाइड्रोजन पायलट प्रोजेक्ट, 9 किलोग्राम प्रति घंटा उत्पादन क्षमता रामपुर में जीरो फ्रूटप्रिंट इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड का ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट, 22.5 किलोग्राम प्रति घंटा उत्पादन क्षमता लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश को ग्रीन एनर्जी हब बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में प्रदेश के गोरखपुर और रामपुर जनपदों में ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाएं स्थापित की जा रही हैं, जिससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। यूपी नेडा के निदेशक इंद्रजीत सिंह ने बताया कि गोरखपुर में टोरेंट पॉवर द्वारा 0.5 मेगावाट क्षमता का ग्रीन हाइड्रोजन पायलट प्रोजेक्ट स्थापित किया जा रहा है। इस परियोजना की उत्पादन क्षमता लगभग 9 किलोग्राम प्रति घंटा होगी। यह पायलट प्रोजेक्ट प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक के उपयोग और उसके व्यावसायिक विस्तार की संभावनाओं को परखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी तरह रामपुर जिले में जीरो फ्रूटप्रिंट इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन परियोजना स्थापित की जा रही है। इस संयंत्र की उत्पादन क्षमता लगभग 22.5 किलोग्राम प्रति घंटा होगी। इस परियोजना से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ ही क्षेत्र में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य का स्वच्छ ईंधन माना जाता है। इसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पानी की इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया के माध्यम से तैयार किया जाता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य होता है। इसका उपयोग परिवहन, उद्योग और ऊर्जा भंडारण जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। इन जनपदों में स्थापित हो रही ये परियोजनाएं उत्तर प्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इससे प्रदेश में हरित ऊर्जा निवेश बढ़ेगा और आने वाले समय में ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े उद्योगों के विकास की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।

तीन साल की बच्ची के कान में डॉक्टरों ने फिट किया AI-बेस्ड डिवाइस

नई दिल्ली. राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। यहां राज्य के सरकारी अस्पताल में पहली बार तीन साल की बच्ची के कान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-बेस्ड स्मार्ट कॉक्लियर इम्प्लांट किया गया है। ENT डिपार्टमेंट के सीनियर प्रोफेसर डॉ. मोहनीश ग्रोवर ने बताया, 'लगभग तीन घंटे की सफल सर्जरी के बाद बच्ची की हालत स्थिर है और उम्मीद है कि वह लगभग 21 दिनों में सुनना और बोलना शुरू कर देगी।' राजस्थान में तीन साल की बच्ची का सफल ऑपरेशन डॉ. मोहनीश ग्रोवर ने कहा, 'यह राज्य के सरकारी अस्पताल में किया गया पहला ऐसा एडवांस्ड कॉक्लियर इम्प्लांट प्रोसीजर है और इससे कम सुनने वाले बच्चों के इलाज में नई संभावनाएं खुल सकती हैं। डॉ. ग्रोवर ने आगे बताया, 'बच्ची को जन्म से सुनने में दिक्कत थी, जो सामान्य सुनने और बोलने के विकास के लिए एक बड़ी चुनौती थी। वह जन्म से पूरी तरह बहरी नहीं थी और आवाज को महसूस कर सकती थी। लेकिन दो साल की उम्र के बाद उसने धीरे-धीरे पूरी तरह से सुनना बंद कर दिया।' क्या है कॉक्लियर इम्प्लांट? डॉ. ग्रोवर ने बताया, 'इम्प्लांट में एक हाई-स्पीड प्रोसेसिंग चिप है जो साउंड क्वालिटी को बेहतर बनाती है। कान के अंदर लगाया गया इंटरनल इम्प्लांट लगभग 30 साल तक काम कर सकता है, जबकि एक्सटर्नल साउंड प्रोसेसर की बैटरी तीन साल तक ही चल सकती है। डॉ. ग्रोवर के मुताबिक, 'इम्प्लांट एक स्मार्ट नर्व टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है, जो सर्जरी के दौरान सही जगह तय करने में मदद करती है। इसमें मरीज की मैपिंग और डेटा स्टोर करने के लिए इंटरनल मेमोरी भी है और इसे स्मार्टफोन की तरह समय-समय पर अपडेट किया जा सकता है।' मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट के कमिश्नर नरेश कुमार गोयल ने कहा,  'यह सफलता राज्य में एडवांस्ड मेडिकल सर्विस देने की दिशा में एक जरूरी कदम है और इससे राजस्थान में मरीजों को मॉडर्न हेल्थकेयर सुविधाएं देने की कोशिशों को मजबूत करने में मदद मिलेगी।'