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डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन उत्कृष्ट, हम उन श्रेष्ठ परंपराओं को लागू करेंगे: हरविंदर कल्याण

चंडीगढ़. हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण का कहना है कि कई राज्यों की विधानसभाओं का दौरा किया। उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, केरल सहित 13 राज्यों की विधानसभाओं का अध्ययन किया। इसेक अलावा पटना तथा लखनऊ में आयोजित अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलनों में भी भाग लिया, जिसकी अध्यक्षता ओम बिरला ने की। हर राज्य में कुछ न कुछ श्रेष्ठ है। कहीं समिति प्रणाली मजबूत है, कहीं डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन उत्कृष्ट है। हम उन श्रेष्ठ परंपराओं को हरियाणा में लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं। कल्याण ने कहा कि नई दिल्ली में राष्ट्रमंडल स्पीकर सम्मेलन में भाग लेने का अवसर मिला। इसके बाद सीपीए सम्मेलन के तहत ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया। सिडनी और मेलबर्न की संसदों में डिजिटल कार्यप्रणाली, ई-ऑफिस और मजबूत समिति तंत्र देखने को मिला। हम भी हरियाणा विधानसभा में ई-गवर्नेंस, डिजिटल आर्काइव और क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। मेरा मानना है कि तकनीक से कार्यवाही तेज और पारदर्शी दोनों बनती है। कल्याण ने कहा कि ‘युवा संसद-2025’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए हम छात्रों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ रहे हैं। जब युवा संसदीय परंपराओं को समझेंगे, तभी भविष्य का नेतृत्व तैयार होगा। लोकतंत्र केवल वोट देने तक सीमित नहीं है, यह संवाद और भागीदारी की संस्कृति है। महिलाओं को राजनीति में 33 प्रतिशत आरक्षण देने के निर्णय पर कल्याण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। इससे संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। नीतियों में संवेदनशीलता और व्यापक दृष्टिकोण आएगा। यह निर्णय भारतीय लोकतंत्र को और मजबूत करेगा। कल्याण ने कहा कि सदन की कार्यवाही को अधिक प्रभावी बनाने के लिए हमारा प्रयास है कि चर्चा केवल औपचारिकता न रहे। कानून बनने से पहले उसकी गुणवत्ता पर गंभीर विमर्श हो। इसके लिए विधायी ड्राफ्टिंग कार्यशालाएं करवाई जा रही हैं। विधायकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए गए हैं ताकि वे आर्थिक, तकनीकी और सामाजिक मुद्दों पर तथ्यपूर्ण ढंग से बोल सकें। हम अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भी क्षमता निर्माण कार्यक्रम चला रहे हैं। लोकतंत्र की मजबूती विधायिका की मजबूती से ही संभव है। कल्याण ने कहा कि नई विधानसभा भवन की योजना के लिए हम ऐसी आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और तकनीकी रूप से सक्षम नई विधानसभा की परिकल्पना कर रहे हैं, जो भविष्य की जरूरतों को पूरा कर सके। लोकतांत्रिक संस्था की गरिमा के अनुरूप भवन निर्माण हमारी प्राथमिकता होगी।परिसीमन राष्ट्रीय प्रक्रिया है। यदि सीटें बढ़ती हैं तो अधोसंरचना का विस्तार आवश्यक होगा। इस दिशा में प्रारंभिक विचार-विमर्श चल रहा है। कल्याण मानते हैं कि विधानसभा को जनता के प्रति और अधिक जवाबदेह, सहभागी व आधुनिक बनाना का मेरा प्रयास है। समिति प्रणाली को मजबूत करना और शोध आधारित चर्चा को बढ़ावा देना मेरी प्राथमिकताएं हैं। मैं चाहता हूं कि हरियाणा विधानसभा देश की अग्रणी विधानसभाओं में शामिल हो तथा प्रभावी विधायिका के माध्यम से हरियाणा प्रदेश नई ऊँचाइयों को छूते हुए विकसित राष्ट्र के सफर में महत्वपूर्ण योगदान दे। कल्याण कहते हैं कि विधानसभा को देश की अग्रणी विधायिकाओं में शुमार करना उनका लक्ष्य है। सदन की कुर्सी सिर्फ ऊंची नहीं होती, वह जिम्मेदारियों का सबसे कठिन आसन भी होती है। करनाल जिले के घरौंडा से लगातार तीसरी बार विधायक बने हरविन्द्र कल्याण जब 2024 में हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष चुने गए, तो यह केवल राजनीतिक पदोन्नति नहीं थी, यह संसदीय परिपक्वता की परीक्षा भी थी। छात्र राजनीति से लेकर 2004 की लंबी पदयात्रा, 2014 में पहली जीत, हैफेड के चेयरमैन, लोक लेखा समिति के अध्यक्ष और अब स्पीकर। हर पड़ाव ने उन्हें सत्ता और व्यवस्था के भीतर की कार्यप्रणाली को गहराई से समझने का अवसर दिया। आज वे सदन को अधिक जवाबदेह, तकनीकी रूप से आधुनिक और शोध आधारित बहसों का मंच बनाने के मिशन पर हैं। 

हिलाओं की आर्थिक मजबूती के लिए बढ़ेंगी योजनाएं, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का बड़ा बयान

रायपुर महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए महिला कोष की योजनाओं का विस्तार जरूरी : मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ में रोजगार और स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं और महिला कोष की योजनाएं महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिविरों और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से अधिक से अधिक जरूरतमंद महिलाओं तक इन योजनाओं की जानकारी पहुंचाई जाए, ताकि वे इसका लाभ लेकर आत्मनिर्भर बन सकें। मंत्री  राजवाड़े अटल नगर, नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में छत्तीसगढ़ महिला कोष के शासी बोर्ड एवं आमसभा की बैठक की अध्यक्षता कर रही थीं। बैठक में महिला कोष की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। बैठक में वित्तीय वर्ष 2024-25 में ऋण योजना के तहत 1500 महिला स्व-सहायता समूहों को 30 करोड़ रुपये तथा सक्षम योजना के तहत 1000 पात्र महिलाओं को 14 करोड़ रुपये के ऋण वितरण की साख योजना के कार्योत्तर अनुमोदन एवं उपलब्धियों की जानकारी दी गई। साथ ही सक्षम योजना, ऋण योजना और स्वावलंबन योजना के लक्ष्यों एवं उपलब्धियों पर भी चर्चा की गई। बैठक में यह जानकारी दी गई कि महिला स्व-सहायता समूहों को वर्तमान में द्वितीय बार अधिकतम 6 लाख रुपये तक ऋण दिए जाने का प्रावधान है। इसी प्रकार सक्षम योजना के अंतर्गत महिलाओं को अधिकतम 2 लाख रुपये तक का ऋण प्रदान किया जाता है। इन प्रावधानों में आवश्यकता अनुसार संशोधन किए जाने के संबंध में भी विचार-विमर्श किया गया। सितंबर 2025 की स्थिति में जिलों में कुल 8 लाख 2 हजार 843 रुपये की राशि ब्याज के रूप में जमा होने की जानकारी दी गई, जिसका उपयोग महिला कोष के सॉफ्टवेयर निर्माण के लिए किए जाने पर विचार किया गया। बैठक में कार्यरत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को भी पात्रता के आधार पर सक्षम योजना से लाभान्वित करने तथा योजना में महिलाओं की आयु सीमा 25 से 50 वर्ष करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक  शम्मी आबिदी ने बताया कि महिलाओं को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ महिला कोष का गठन किया गया है। इसके तहत महिलाओं को मात्र 3 प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे स्वरोजगार और छोटे व्यवसाय प्रारंभ कर आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। बैठक में महिला एवं बाल विकास, वाणिज्य एवं उद्योग, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास, समाज कल्याण, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, ग्रामोद्योग, कृषि, नगरीय प्रशासन, वन तथा कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों के साथ ही नेहरू युवा केन्द्र, नाबार्ड, छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक, भारतीय स्टेट बैंक तथा यूनिसेफ के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

बड़े घोटाले पर कार्रवाई: चंडीगढ़ ब्रांच फ्रॉड में IDFC फर्स्ट बैंक ने 645 करोड़ का क्लेम सेटल किया

नई दिल्ली आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने मंगलवार को बताया कि उसने अपनी चंडीगढ़ शाखा में हुए धोखाधड़ी मामले से जुड़े दावों के रूप में 645 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया है। यह राशि बैंक के शुरुआती अनुमान से लगभग 55 करोड़ रुपए ज्यादा है। बैंक ने यह भी कहा कि जांच के दौरान अब तक कोई नई गड़बड़ी सामने नहीं आई है। बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में कहा कि पहले 590 करोड़ रुपए की मूल राशि का अनुमान लगाया गया था, लेकिन बाद में मिले दावों के आधार पर कुल 645 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। बैंक के अनुसार, यह सभी दावे उसी घटना और उसी चंडीगढ़ शाखा से जुड़े हैं; कोई नया मामला सामने नहीं आया है। बैंक ने यह भी बताया कि सभी संबंधित खातों का मिलान पूरा कर लिया गया है और 25 फरवरी 2026 के बाद से देश भर में कोई नया दावा नहीं मिला है। बैंक ने कहा कि उसने अपने सिद्धांतों के अनुसार प्रभावित ग्राहकों को यह भुगतान किया है और आगे भी धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा ताकि नुकसान की राशि की वसूली की जा सके। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने बताया कि इस घटना के बावजूद बैंक की जमा राशि (डिपॉजिट बेस) स्थिर बनी हुई है। 28 फरवरी तक बैंक का कुल डिपॉजिट 2,92,381 करोड़ रुपए था, जबकि दिसंबर के अंत में यह 2,91,133 करोड़ रुपए था। बैंक ने अपने ग्राहकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह सिर्फ चंडीगढ़ की एक शाखा से जुड़ी अलग घटना है। बैंक का लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (एलसीआर) भी मौजूदा तिमाही में 114 प्रतिशत के आरामदायक स्तर पर है। बैंक को उम्मीद है कि भविष्य में भी डिपॉजिट और लोन की वृद्धि पहले की तरह जारी रहेगी। इससे पहले बैंक ने बताया था कि हरियाणा सरकार के खातों से जुड़े लगभग 590 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का मामला सामने आया था, जिसमें बैंक के कुछ कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। मामले की जांच के लिए बैंक ने केपीएमजी को फॉरेंसिक ऑडिट सौंपा है, जिसकी अंतिम रिपोर्ट चार से पांच सप्ताह में आने की उम्मीद है। साथ ही जांच पूरी होने तक बैंक ने चार अधिकारियों को निलंबित भी कर दिया है। घटना के बाद हरियाणा सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को सरकारी कामकाज से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है।

12वीं गणित पेपर लीक की खबरों पर CBSE का स्पष्टीकरण, कहा– प्रश्नपत्र असली और सुरक्षित

नई दिल्ली सीबीएसई के कक्षा 12 के गणित प्रश्नपत्र को लेकर सोशल मीडिया पर कई शंकाएं साझा की जा रही हैं। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई ने मंगलवार को इन शंकाओं पर स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि बोर्ड परीक्षा के प्रश्नपत्र पूरी तरह असली और सुरक्षित हैं। बोर्ड के मुताबिक परीक्षा पत्र की सुरक्षा में किसी प्रकार की कोई कमी या सेंध नहीं लगी है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब प्रश्नपत्र पर दिए गए एक क्यूआर कोड को स्कैन करने पर वह यूट्यूब वीडियो से जुड़ने लगा। इसके कारण प्रश्नपत्र की प्रामाणिकता पर सवाल उठने लगे। सीबीएसई ने मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान में बताया कि प्रश्नपत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बोर्ड द्वारा कई सुरक्षा व्यवस्था की जाती हैं। इन सुरक्षा उपायों में क्यूआर कोड भी शामिल हैं। क्यूआर कोड का उपयोग किसी संभावित सुरक्षा उल्लंघन की स्थिति में प्रश्नपत्र की सत्यता की पुष्टि करने के लिए किया जाता है। गौरतलब है कि 9 मार्च को कक्षा 12 के छात्रों की गणित विषय की परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद कुछ छात्रों और अभिभावकों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई कि प्रश्नपत्र पर दिए गए एक क्यूआर कोड को स्कैन करने पर वह यूट्यूब वीडियो से जुड़ रहा है। इस घटना के बाद कुछ लोगों ने प्रश्नपत्र की प्रामाणिकता (असली होने) पर सवाल उठाए। यही वह कारण है जिससे छात्रों और उनके अभिभावकों के बीच प्रश्न पत्र को लेकर चिंता उत्पन्न हो गई। हालांकि सभी प्रश्नपत्र की प्रामाणिकता को लेकर बोर्ड ने स्पष्ट कहा है कि प्रश्नपत्र पूरी तरह से सही व असली है। सीबीएसई ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि परीक्षा में वितरित किए गए सभी प्रश्नपत्र पूरी तरह असली हैं। प्रश्नपत्रों की सुरक्षा में कोई समझौता नहीं हुआ है। बोर्ड के अनुसार, क्यूआर कोड से जुड़े इस मामले के कारण जो संदेह उत्पन्न हुआ था, उसे अब दूर कर दिया गया है। बोर्ड का कहना है कि उन्होंने इस मामले को पूरी गंभीरता से लिया गया है। बोर्ड ने कहा कि इस घटना को गंभीरता से लिया गया है और सीबीएसई ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में इस प्रकार की स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जा रही है। सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक डॉ संयम भारद्वाज ने कहा कि छात्रों और अभिभावकों को किसी भी तरह की अफवाह पर विश्वास नहीं करना चाहिए, क्योंकि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और व्यवस्थित है। कुछ प्रश्नपत्रों के क्यूआर कोड स्कैन करने पर यूट्यूब वीडियो खुलने की बात सामने आई। भविष्य में ऐसी समस्या न हो, इसके लिए बोर्ड कदम उठा रहा है। हालांकि सीबीएसई ने स्पष्ट किया कि प्रश्नपत्र असली हैं और सुरक्षा में कोई सेंध नहीं लगी।

भोजशाला सर्वे में सामने आई बड़ी बात, शिलालेखों के अक्षर मिटाने के प्रमाण मिलने का दावा

धार ऐतिहासिक भोजशाला एक बार फिर इतिहास के सबसे संवेदनशील सवालों के केंद्र में है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की मैसूर स्थित एपिग्राफी (उत्कीर्णित लेखों का अध्ययन) शाखा ने वर्ष 2024 के सर्वे के दौरान यहां 244 शिलालेखों का विस्तृत अध्ययन किया था। ये शिलालेख 12वीं से 16वीं शताब्दी के बीच के माने जा रहे हैं। इन पर नागरी लिपि में संस्कृत, प्राकृत तथा स्थानीय बोली में रचनाएं अंकित हैं। सर्वे की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कई शिलालेखों के अक्षर जानबूझकर छेनी से मिटाए गए और उन्हें भवन के अलग-अलग हिस्सों में पुनः इस्तेमाल कर लिया गया। मध्यकालीन धरोहर पर आघात और नए साक्ष्य ये जानकारियां मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में प्रस्तुत एएसआइ की सर्वे रिपोर्ट में दर्ज हैं। रिपोर्ट पर 16 मार्च को सुनवाई होनी है। याचिकाकर्ता आशीष गोयल के अनुसार अभिलेखविदों ने रिपोर्ट में बताया है कि ये खंड कभी बड़े शिलालेखों का हिस्सा थे, जिनमें साहित्यिक रचनाएं अंकित थीं। अक्षरों को जानबूझकर मिटाना मध्यकालीन सांस्कृतिक धरोहर पर गंभीर आघात रहा। हालिया सर्वे में 50 नए शिलालेख खंड और एक टूटी हुई प्रतिमा के आसन के टुकड़े का भी परीक्षण किया गया है। पारिजातमंजरी से नागबंध तक: सम्राट भोज का वैभव सर्वे में तीन शिलालेख विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताए गए हैं। पहला, 'पारिजातमंजरी नाटिका शिलालेख' बताता है कि इस नाटक की रचना धार के राजा अर्जुनवर्मन के गुरु मदन ने की थी और इसका पहला मंचन 'शारदा देवी के सदन' में हुआ था। दूसरा, 'अवनिकूर्मशतम शिलालेख' में प्राकृत भाषा के दो काव्य हैं, जिनमें प्रत्येक में 109 श्लोक हैं और दोनों की रचना सम्राट भोजदेव द्वारा की गई। तीसरा, 'नागबंध शिलालेख' व्याकरण और शिक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, जिसमें परमार वंश के राजा नरवर्मन का उल्लेख है। इतिहास की धूल से निकले सदियों पुराने शिल्पकारों के नाम सर्वे में 34 छोटे उत्कीर्ण नाम भी सामने आए। 13वीं सदी के शिल्पकारों में मदन, माधव और जकिजु के नाम हैं, जबकि 16वीं सदी में मोहिला, कामदेव, सोमदेव, रणपाल और परमार सहित डेढ़ दर्जन से अधिक शिल्पकारों के नाम मिले हैं। ये नाम उन कारीगरों की जीवित गवाही हैं जो सदियों से इतिहास की धूल में दबे थे। बता दें, भोजशाला से जुड़े शिलालेखों का पहला अध्ययन वर्ष 1951 में हुआ था।  

युवक की सीट के नीचे छिपे जहरीले सांप ने चलती बाइक में डसा

कोटा. शहर से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई, जहां चलती बाइक पर बैठे युवक को जहरीले सांप ने डंस लिया। बाद में पता चला कि करीब 2 फीट लंबा 'सॉ-स्केल्ड वाइपर' बाइक की सीट के नीचे छिपकर बैठा हुआ था। सांप के काटने के बाद युवक को तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां उसका इलाज जारी है। घटना कोटा के नयागांव रोड इलाके की है। जानकारी के अनुसार योगेश नाम का युवक अपने दोस्त मोहित के साथ लाइट का काम करने के लिए जा रहा था। बाइक मोहित चला रहा था जबकि योगेश पीछे बैठा हुआ था और उसके हाथ में लाइट व वायर थे। रास्ते में अचानक योगेश को कमर के पास तेज चुभन महसूस हुई। पहले उसे लगा कि शायद किसी मच्छर ने काट लिया। कुछ ही देर बाद जब योगेश ने उस जगह पर हाथ लगाया तो सांप ने उसकी उंगली पर भी काट लिया। तभी उसे बाइक में सांप होने का पता चला और वह घबरा गया। यह देखकर मोहित ने तुरंत बाइक रोकी और बिना देर किए योगेश को मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल लेकर पहुंचा जहां उसे इमरजेंसी में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। इस घटना की सूचना मिलने के बाद मोहित के पिता ने स्नेक कैचर गोविंद शर्मा को बुलाया। मौके पर पहुंचे गोविंद शर्मा ने बाइक की जांच की तो सीट के नीचे एक जहरीला सॉ-स्केल्ड वाइपर छिपा हुआ मिला। उन्होंने सांप को सुरक्षित तरीके से पकड़कर जंगल में छोड़ दिया। काफी जहरीला होता है सॉ-स्केल्ड वाइपर स्नेक कैचर गोविंद शर्मा ने बताया कि यह सांप करीब 2 फीट लंबा था। सॉ-स्केल्ड वाइपर बेहद जहरीली प्रजाति में गिना जाता है। इसका जहर काफी खतरनाक होता है। सांप के काटने के तुरंत बाद युवक को अस्पताल पहुंचा दिया था, जिससे समय रहते उसका इलाज शुरू हो सका और युवक की जान बच गई।

IIT रुड़की ने जारी किया JEE Advanced का कार्यक्रम, 17 मई को होगी देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग परीक्षा

लुधियाना इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी (आई.आई.टी.) रुड़की ने जे.ई.ई. एडवांस्ड से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सांझा करते हुए परीक्षा की तारीख का ऐलान कर दिया है। इस साल यह परीक्षा 17 मई को ली जाएगी। परीक्षा के लिए इच्छुक उम्मीदवार 23 अप्रैल से लेकर 2 मई तक ऑफिशियल वैबसाइट jeeadv.ac.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। विदेशी उम्मीदवारों के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 6 अप्रैल से ही शुरू हो जाएगी। परीक्षा एक ही दिन में 2 अलग-अलग सत्रों में होगी। पहला पेपर सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक होगा, जबकि दूसरा पेपर बाद दोपहर 2.30 से शाम 5.30 बजे तक आयोजित किया जाएगा। कौन दे सकेगा परीक्षा जे.ई.ई. एडवांस्ड में शामिल होने के लिए कैंडिडेट का जे.ई.ई. मेन के पेपर-1 में पास होना जरूरी है। केवल वही कैंडिडेट आवेदन कर सकते हैं जिन्होंने टॉप 2.5 लाख में अपनी जगह बनाई हो। इसके अलावा जिसने पहली बार 12वीं कक्षा की परीक्षा साल 2025 में दी हो और 12वीं में फिजिक्स, कैमिस्ट्री और मैथ्स विषय होना अनिवार्य है। जिन उम्मीदवारों को पहले ही किसी आई.आई.टी. में एडमिशन मिल चुका है, वे इस परीक्षा के लिए एलिजिबल नहीं होंगे। परीक्षा कम्प्यूटर आधारित टैस्ट (सी.बी.टी.) मोड में देशभर के निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। प्रश्न पत्र हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक छात्र आसानी से परीक्षा दे सकें।

नौरादेही में बसेंगे चीते: रानी दुर्गावती अभयारण्य बनेगा देश का तीसरा चीता होम, सीएम डॉ. यादव का ऐलान

भारतीय क्रिकेट टीम ने बढ़ाया देश का मान मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंत्रीगण से चर्चा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नौरादेही का रानी दुर्गावती अभयारण्य चीतों का तीसरा घर बनने जा रहा है। जल्द ही वहाँ भी चीते छोड़े जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतकर भारतीय क्रिकेट टीम ने एक बार फिर सफलता का परचम लहराया है। खेलने वाले कुल 20 देश, 55 मैच और विजेता- भारत, यह आंकड़े बताते हैं कि भारतीय क्रिकेट टीम ने दृढ़ संकल्प, साहस और पराक्रम से यह उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे खिलाड़ियों ने पूरे विश्व में देश का मान-सम्मान बढ़ाया है। मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश सरकार और पूरी मंत्रि-परिषद् की ओर से भारतीय क्रिकेट टीम को बधाई और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संघ लोक सेवा आयोग-2026 के हालिया घोषित रिजल्ट में मध्यप्रदेश के 2 होनहार अभ्यर्थियों द्वारा टॉप टेन अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट में स्थान प्राप्त करने पर दोनों ही अभ्यर्थियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष प्रदेश के कई विद्यार्थियों का यूपीएससी की परीक्षा में आईएएस, आईपीएस, आईआरएस इत्यादि कई पदों पर चयन हुआ है। हमारे विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में चयनित होकर प्रदेश का नाम रौशन कर रहे हैं। रानी दुर्गावती अभयारण्य (नौरादेही) में भी छोड़ेंगे चीते मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में चीते तेजी से फल-फूल रहे हैं। हाल ही में 5 नये शावकों की आमद से चीतों का परिवार और भी समृद्ध हुआ है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार करीब 2 महीने बाद रानी दुर्गावती अभयारण्य (नौरादेही) में भी चीते छोड़ने जा रही है। इससे मध्यप्रदेश में चीतों के 3 घर तैयार हो जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम मगर/घड़ियाल और कछुए भी विभिन्न जल क्षेत्रों में मुक्त करेंगे, ताकि हमारी जैव सम्पदा और भी समृद्ध हो सके। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री को भायी मध्यप्रदेश की जल संचय पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण से कहा कि मध्यप्रदेश में जल संचयन के लिए चलाए गए जल गंगा संवर्धन अभियान की केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सीआर पाटिल द्वारा सराहना की गई है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने 5 मार्च को हुई वीडियो काँफ्रेंसिंग में कहा था कि मध्यप्रदेश सामुदायिक सहभागिता से जल संरक्षण और सतत् जल प्रबंधन देश के सामने श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। मध्यप्रदेश में 250 से अधिक नदियां हैं। मध्यप्रदेश बांधों की संख्या के मामले में देश में दूसरे स्थान पर है। उन्होंने कहा था कि जल संचयन के प्रोत्साहन के लिए भारत सरकार भी जल इस दिशा में जनभागीदारी से ऐसा ही कदम बढ़ाने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि केंद्र से मिली सराहना हमारी जल संचय नीति की सफलता का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि इस अभियान के प्रथम चरण में 2.79 लाख से अधिक जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण कर महत्वपूर्ण योगदान दिया गया। दूसरे चरण में भी मध्यप्रदेश में 72 हजार 647 जल संग्रहण संरचनाओं के निर्माण कार्य पूरे कर लिए गए हैं और 64 हजार 395 जल संरचना निर्माण कार्य फिलहाल प्रगति पर हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में इस साल 19 मार्च 2026 से जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण से कहा कि वे भी अपने-अपने क्षेत्रों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के काम बढ़ाएं। डिजिटल पंजीयन में मध्यप्रदेश ने रचा इतिहास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में दस्तावेजों के डिजिटल पंजीयन का काम शुरू हो गया है। मध्यप्रदेश में प्रति वर्ष करीब 16 लाख से अधिक दस्तावेजों का पंजीयन किया जाता है। यह एक बड़ा काम है पर हम इसे समय-सीमा में ही पूरा करेंगे। उन्होंने बताया कि संपदा 2.0 प्रणाली से दस्तावेजों का पूर्णत: पेपरलेस ई- पंजीयन शुरु कर दिया है। यह व्यवस्था नागरिकों को त्वरित सेवाएं देने के साथ-साथ प्रशासन में पारदर्शिता और सुगमता सुनिश्चित करेगी। संपदा प्रणाली से ई-पंजीयन और ई-स्टाम्पिंग की सुविधा प्रदान कर पूरी प्रक्रिया को इलेक्ट्रॉनिक बनाया गया है। इस प्रणाली में कोई भी व्यक्ति कहीं से भी ई-स्टॉम्प तैयार कर सकता है। यह व्यवस्था लागू करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। गेहूं उपार्जन 2026 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि मध्यप्रदेश सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं उपार्जन पर 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने जा रही है। साथ ही दलहन उत्पादन को प्रोत्साहन के लिए उड़द की खरीद पर भी 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने जा रही है। उड़द की खरीद पर बोनस देने के मामले में मध्यप्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है, जिसने यह कदम उठाया है। उन्होंने बताया कि गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन की अवधि 10 मार्च 2026 रखी गई थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को समय पर भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। पचमढ़ी को बनाएंगे बेस्ट इन्वायरमेंटल मॉडल मुख्यमंत्री ने बताया कि पचमढ़ी को जर्मनी की एक अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण संस्था द्वारा ग्रीन डेस्टिनेशन के रूप में प्रमाणित किया गया है। यह मध्यप्रदेश में पर्यटन क्षेत्र के विकास के लिए हो रहे प्रयासों का प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि पचमढ़ी देश का ऐसा पहला स्थल है, जिसे इस तरह का प्रमाणन मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम पचमढ़ी को देश के अनुकरणीय और बेस्ट इन्वायरमेंटल मॉडल के रूप में विकसित करेंगे। खाड़ी देशों में वर्तमान स्थिति के मद्देनजर हेल्पलाइन/कंट्रोल रूम स्थापित मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों) में उपजी विषम परिस्थितियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खाड़ी देशों में रह रहे मध्यप्रदेश के निवासियों की सहायता के लिए मध्यप्रदेश भवन नई दिल्ली में एवं भोपाल के वल्लभ भवन (मंत्रालय) में 24×7 हेल्पलाइन/कंट्रोल रूम की स्थापना कर दी गई है। मध्यप्रदेश के निवासी जो खाड़ी देशों में अध्ययन, नौकरी, व्यवसाय, पर्यटन, इत्यादि के लिए गए मध्यप्रदेश के निवासी वर्तमान परिस्थतियों में किसी प्रकार की सहायता की अपेक्षा करते हों तो वे कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकते हैं। मध्यप्रदेश के लोगों की सकुशल स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने के लिए हम सभी … Read more

मोजाम्बिक में भीषण बाढ़ के बीच भारत का मानवीय कदम, राहत और चिकित्सा सहायता पहुंचाई

नई दिल्ली पूर्वी अफ्रीका के देश मोजाम्बिक के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में आई भीषण बाढ़ का जनजीवन पर बुरा असर पड़ा है। हजारों लोग प्रभावित हुए हैं, और कई इलाकों में राहत एवं पुनर्वास की तत्काल जरूरत महसूस की जा रही है। इस कठिन परिस्थिति में भारत ने मानवीय सहायता का हाथ बढ़ाते हुए बड़े पैमाने पर राहत सामग्री भेजी है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने विभिन्न सोशल प्लेटफॉर्म्स पर इसकी सूचना दी है। इसमें बताया है कि अपनी ह्यूमनिटेरियन असिस्टेंस और डिजास्टर रिलीफ (एचएडीआर) कोशिशों के तहत, भारत ने मोजाम्बिक को सहायता सामग्री पहुंचाई है। इस सहायता में 500 मीट्रिक टन चावल, अस्थायी आश्रय के लिए टेंट, हाइजीन किट और पुनर्वास कार्यों में उपयोगी कई अन्य आवश्यक सामान शामिल हैं। इसके अलावा आपदा प्रभावित लोगों की तात्कालिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 10 मीट्रिक टन आवश्यक राहत सामग्री भी भेजी गई है। राहत अभियान के तहत भारतीय नौसेना के एक जहाज के माध्यम से लगभग 3 टन आवश्यक दवाइयां भी मोजाम्बिक पहुंचाई जा रही हैं, ताकि बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों से निपटने में स्थानीय प्रशासन को मदद मिल सके। भारत पहले ही समुद्री मार्ग के जरिए 86 मीट्रिक टन जीवन रक्षक दवाइयों की खेप मोजाम्बिक भेज चुका है। इन दवाइयों का उद्देश्य आपदा-प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना और पीड़ितों को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है। बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बाद खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाएं सबसे बड़ी चुनौती बन जाती हैं। ऐसे में भारत द्वारा भेजी गई खाद्य सामग्री, स्वच्छता किट और दवाइयां राहत कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। भारत ने हमेशा प्राकृतिक आपदाओं के समय अपने मित्र देशों की सहायता की है। हिंद महासागर क्षेत्र और अफ्रीकी देशों के साथ भारत के मजबूत संबंध रहे हैं, और आपदा के समय दी जाने वाली मानवीय सहायता इन संबंधों को और मजबूत करती है। भारत मानवीय, चिकित्सीय और लॉजिस्टिक सहायता देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस पहल के माध्यम से भारत न केवल संकट के समय मदद पहुंचा रहा है, बल्कि हिंद महासागर और अफ्रीका क्षेत्र में एक भरोसेमंद और जिम्मेदार साझेदार के रूप में अपनी भूमिका को भी मजबूत कर रहा है।

नए शहरों के विकास को रफ्तार, 8 शहरों को पहले चरण के लिए ₹425 करोड़

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत प्रदेश के आठ शहरों के विकास के लिए ₹425 करोड़ की धनराशि स्वीकृत करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस योजना का उद्देश्य तेजी से बढ़ रही शहरी आबादी को ध्यान में रखते हुए नए शहरों का सुनियोजित और सुव्यवस्थित विकास करना तथा लोगों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार बरेली, वाराणसी, उरई, चित्रकूट, बांदा, प्रतापगढ़, गाजीपुर और मऊ में नए शहरों के समग्र विकास के लिए सीड कैपिटल के रूप में यह धनराशि जारी की जाएगी। योजना के तहत भूमि अर्जन में आने वाले खर्च का अधिकतम 50 प्रतिशत तक राज्य सरकार सीड कैपिटल के रूप में उपलब्ध कराती है, जिसे अधिकतम 20 वर्ष की अवधि के लिए दिया जाता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस योजना के लिए कुल ₹3000 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसमें से पहले चरण में ₹425 करोड़ जारी किए जाएंगे।