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राज्यपाल ने ‘गुड़ी पड़वा’ और ‘भारतीय नव वर्ष’ के मौके पर नागरिकों को दी बधाई

राज्यपाल ने नागरिकों को 'गुड़ी पड़वा' और 'भारतीय नव वर्ष' पर दी हार्दिक बधाई नागरिकों से एकता और खुशहाली के लिए स्वयं को समर्पित करने का किया आहृवान भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने प्रदेश के समस्त नागरिकों को 'गुड़ी पड़वा' और 'भारतीय नव वर्ष' के पावन अवसर पर हार्दिक बधाई एवं आत्मीय शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने प्रार्थना की है कि शक्ति की उपासना का यह पर्व सभी के जीवन में नई ऊर्जा, सकारात्मकता और उत्तम स्वास्थ्य का संचार करे। राज्यपाल  पटेल ने अपने संदेश में भारतीय कालगणना के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा है कि चैत्र नवरात्रि के साथ प्रारंभ होने वाला हमारा नव वर्ष प्रकृति के नव-श्रृंगार, उमंग और भारत की गौरवशाली परंपरा का जीवंत प्रतीक है। यह पर्व हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और उसे नई पीढ़ी तक पहुँचाने का अवसर है। राज्यपाल पटेल ने समस्त प्रदेशवासियों का आह्वान किया है कि वे नव वर्ष के इस शुभ अवसर पर प्रदेश की एकता, अखंडता और खुशहाली के लिए स्वयं को समर्पित करने का संकल्प लें।  

कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटे 555 श्रद्धालुओं को सीएम योगी ने दी ₹1-1 लाख की सहायता

कैलाश मानसरोवर की यात्रा से लौटे 555 श्रद्धालुओं को सीएम योगी ने प्रदान की ₹1-1 लाख की सहायता राशि तीर्थ यात्राओं से मजबूत हो रहा ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का संकल्प: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री ने कहा, तीर्थ यात्राएं सिर्फ आस्था नहीं, समाज व राष्ट्र को जोड़ने का माध्यम, तीर्थ स्थलों पर सुविधाओं का किया जा रहा विस्तार काशी, अयोध्या और मथुरा-वृंदावन जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों पर बढ़ती भीड़ चुनौती भी और अवसर भी: सीएम योगी धार्मिक पर्यटन से विकास और रोजगार को बढ़ावा, महाकुंभ बना आस्था के साथ आर्थिक मजबूती का बड़ा उदाहरण: मुख्यमंत्री महाकुंभ में श्रद्धालुओं ने अफवाहों को नकारा, आस्था को रखा सर्वोपरि: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटे 555 श्रद्धालुओं को ₹1-1 लाख की सहायता राशि वितरित करते हुए आस्था, संस्कृति और विकास के समन्वय का स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ जैसे आयोजनों में उमड़ी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था न केवल भारत की सांस्कृतिक शक्ति को दर्शाती है, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी नई गति देती है। इसी दृष्टि के साथ सरकार तीर्थ यात्राओं को सुविधाजनक, सुरक्षित और व्यापक बनाकर ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को मजबूत कर रही है। तीर्थ यात्रा आस्था के साथ एकता व संस्कारों की परंपरा कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटे श्रद्धालुओं का अभिनंदन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कठिनाइयों, चुनौतियों और विषम प्राकृतिक परिस्थितियों के बीच इस यात्रा को पूर्ण करना एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव है। भारतीय सनातन परंपरा में तीर्थ यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोने का सशक्त माध्यम रही है। पूर्वकाल में लोग अपने परिश्रम से अर्जित संसाधनों का उपयोग यात्रा व सेवा में करते थे, जिससे उन्हें पुण्य के साथ-साथ समाज को समझने की नई दृष्टि मिलती थी। भारत के धर्मस्थलों की स्थापना के पीछे भी यही भावना रही है। आदि शंकराचार्य द्वारा चारों दिशाओं में पीठों की स्थापना इस सांस्कृतिक एकता का प्रमाण है, जब अलग-अलग शासन व्यवस्थाओं के बावजूद भारत एक सांस्कृतिक राष्ट्र के रूप में स्थापित था। आज भी यह परंपरा जीवित है और आवश्यक है कि धार्मिक यात्राओं में श्रद्धा को सर्वोपरि रखते हुए उनकी पवित्रता व गरिमा को बनाए रखा जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां इन मूल्यों से प्रेरित होती रहें। बढ़ती आस्था के बीच तीर्थ स्थलों पर सुविधाओं का विस्तार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए वर्ष 2017-18 में गाजियाबाद में कैलाश मानसरोवर भवन का निर्माण कराया गया, जो यात्रा का पहला पड़ाव है और जहां विदेश मंत्रालय की आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होती हैं। बदलते समय के साथ तीर्थ यात्राओं का स्वरूप भी बदला है। अब श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2025 में प्रदेश में करीब 164 करोड़ श्रद्धालुओं का आगमन हुआ, जिनमें 66 करोड़ केवल प्रयागराज महाकुंभ में पहुंचे। काशी, अयोध्या और मथुरा-वृंदावन जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या एक ओर चुनौती है तो दूसरी ओर अवसर भी। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार आवागमन, ठहरने और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लगातार सुदृढ़ कर रही है। कैलाश यात्रा और तीर्थ स्थलों पर सरकार का फोकस मुख्यमंत्री ने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा विदेश में होने के कारण वहां की भौगोलिक और प्रशासनिक चुनौतियां बनी रहती हैं, ऐसे में भारत सरकार और प्रदेश सरकार देश के भीतर ही बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करा सकती हैं, जबकि आगे की यात्रा में अन्य देशों के सहयोग की आवश्यकता होती है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद श्रद्धालु अपनी आस्था के बल पर भगवान शिव के दर्शन के लिए यह यात्रा पूर्ण करते हैं। सीएम योगी ने बताया कि डबल इंजन सरकार का फोकस धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाओं को आगे बढ़ाते हुए विकास व रोजगार के अवसर सृजित करना है। पिछले आठ-नौ वर्षों में अयोध्या, काशी, प्रयागराज, चित्रकूट, विंध्याचल, नैमिषारण्य और मथुरा-वृंदावन सहित कई तीर्थस्थलों पर व्यापक विकास कार्य किए गए हैं। साथ ही, यात्रियों द्वारा बताई गई मेडिकल और अन्य सुविधाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय कर गाजियाबाद में अतिरिक्त व्यवस्थाएं विकसित करने के प्रयास किए जाएंगे। सरकार का यह भी जोर है कि निर्मित सुविध…

Tele ICU Service: झारखंड के हर जिले में नई सुविधा, अब दूर बैठे विशेषज्ञ देंगे मरीजों को सलाह

रांची. राज्य के सभी मेडिकल कालेजों व जिला सदर अस्पतालों में टेली आइसीयू की स्थापना की जाएगी। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने सभी जिलों के सिविल सर्जन तथा सदर अस्पतालों के पदाधिकारियों व चिकित्सकों के साथ वर्चुअल माध्यम से बैठक की। इस क्रम में उन्होंने इसके लिए आवश्यक उपकरणों और मानव संसाधन की तत्काल व्यवस्था करने को कहा। उन्होंने बताया कि फिलहाल राज्य के पांच जिले गुमला, सिमडेगा, चतरा और रांची के सदर अस्पताल टेली आइसीयू से जुड़े हुए हैं। इन अस्पतालों का मेंटर राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) है, जहां से सुपर स्पेशलिस्ट डाक्टर टेली आइसीयू एवं एआइ तकनीक के माध्यम से गंभीर मरीजों की निगरानी कर उन्हें परामर्श दे रहे हैं। सभी जिलों में लागू होगी व्यवस्था अपर मुख्य सचिव ने कहा कि इस व्यवस्था को सभी जिलों में लागू किया जाएगा, जिससे मरीजों को इलाज के लिए बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह मिल सकेगी। बैठक में संभावित चुनौतियों पर भी चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी को दूर करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) द्वारा नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त नियुक्तियां भी की जाएंगी। वहीं, पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को आउटसोर्सिंग के माध्यम से पूरा करने का निर्देश दिया गया। बैठक में मेडिकल उपकरणों की खरीद पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया। जिन अस्पतालों में उपकरणों की खरीद लंबित है, उनकी निगरानी की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर राज्य स्तर से उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। अस्पताल रखरखाव योजना की भी समीक्षा बैठक में एसएनए स्पर्श और मुख्यमंत्री अस्पताल रखरखाव योजना की भी समीक्षा की गई। इस दौरान अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने जिलों से अद्यतन जानकारी ली। अधिसंख्य जिलों द्वारा 90 प्रतिशत से अधिक राशि खर्च किए जाने पर संतोष व्यक्त किया गया और शेष राशि भी शीघ्र खर्च करने के निर्देश दिए गए।

नवरात्रि 2026: पंचक और खरमास के कारण सीमित समय में होगी कलश स्थापना

कल यानी 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि शुरू होने जा रही है. नवरात्रि की शुभ शुरुआत पहले दिन कलश स्थापना के साथ होगी. फिर 27 मार्च को महानवमी के साथ चैत्र नवरात्रि की समाप्ति हो जाएगी. इस नवरात्रि की शुरुआत बड़े ही दुर्लभ संयोग में होगी. इस समय खरमास लग चुका है. पंचक भी लगा हुआ है. नवरात्रि की कलश स्थापना पंचक और खरमास में होगी. खरमास 15 मार्च से लगा है, जोकि 14 अप्रैल तक रहेगा. जबकि पंचक 16 मार्च से लगा है और ये 20 मार्च तक रहेगा. चैत्र नवरात्रि तिथि नवरात्रि के पहले दिन चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन कलश स्थापना होती है. इस साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर शुरू होगी. ये तिथि 20 मार्च को सुबह 04 बजकर 25 मिनट तक रहेगा. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, नवरात्रि की कलश स्थापना कल की जाएगी. कलश स्थापना शुभ मुहूर्त     चैत्र नवरात्रि की कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर शुरू होगी. ये मुहूर्त सुबह 07 बजकर 43 मिनट तक रहेगा.     अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा. अगर किसी वजह से सुबह कलश स्थपना न कर पाएं तो इस मुहूर्त में करें. खरमास और पंचक से कलश स्थापना में विघ्न नहीं ज्योतिषविदों के अनुसार, खरमास में शुभ और मांगलिक काम नहीं किए जाते हैं, लेकिन इसमें देवी की पूजा, धार्मिक अनुष्ठान या फिर कलश स्थापना जैसे शुभ कार्यों को लेकर कोई मनाही नहीं होती. आप निश्चिंत होकर तय मुहूर्त में कलश स्थापना करें. बता दें कि कलश स्थापना करके माता दुर्गा का आवाहन किया जाता है. फिर पूजन शुरू होता है. इस विधि से करें कलश स्थापना     ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में कलश स्थापना करें.     चैत्र नवरात्रि के पहले दिन स्नान कर लें.     इसके बाद एक चौकी रखें. उस पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा रखें.     मिट्टी के बर्तन में मिट्टी डालकर जौ बोएं.     इसके बाद एक मिट्टी या तांबे का कलश लें. उसमें जल भरकर सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें.     कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते बांधें और ऊपर से एक नारियल रख दें.     इसके बाद इस कलश को देवी की चौकी के पास स्थापित कर दें.  

MS धोनी ने छोड़ा अपना नंबर 7, क्या जडेजा से जुड़ा है इस फैसले का राज?

चेन्नई  इंडियन प्रीम‍ियर लीग (IPL) 2026 से पहले चेन्नई सुपर किंग्स (Chennai Super Kings) के पूर्व कप्तान महेंद्र स‍िंह धोनी ( MS Dhoni) ने अपने जर्सी नंबर में बदलाव कर क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी है. लंबे समय तक नंबर 7 के साथ पहचान बना चुके धोनी अब नंबर 8 में नजर आ सकते हैं. हालांकि यह जर्सी चेन्नई टीम के येलो कलर में नहीं है। धोनी ने सोशल मीडिया पर एक रहस्यमयी पोस्ट शेयर करते हुए लिखा- कुछ नंबर आपके साथ रहते हैं… लेकिन आज, मैं 8 पर स्विच कर रहा हूं, आपको जल्द ही पता चल जाएगा क्यों. इस मैसेज ने फैन्स  और एक्सपर्ट्स के बीच कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह बदलाव महज एक प्रमोशनल स्टंट है या इसके पीछे कोई भावनात्मक या रणनीतिक कारण छिपा है. वहीं ऐसा भी अनुमान है कि यह बदलाव टीम के अंदर जर्सी नंबर मैनेजमेंट से जुड़ा हो सकता है। एक थ्योरी यह भी सामने आई है कि यह फैसला रवींद्र जडेजा से जुड़ा हो सकता है, जो पहले नंबर 8 पहनते थे. पर अब वो राजस्थान रॉयल्स का हिस्सा बन चुके हैं, जिससे यह नंबर खाली हो गया था. ऐसे में धोनी का इस नंबर को अपनाना एक तरह का ट्रिब्यूट भी माना जा रहा है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, कुछ क्रिकेट एक्सपर्ट्स इसे एक ब्रांडिंग और मार्केटिंग मूव भी मान रहे हैं.IPL जैसे बड़े मंच पर जर्सी नंबर बदलना फैन्स  की दिलचस्पी बढ़ाने और मर्चेंडाइज सेल्स को बूस्ट करने का जरिया भी हो सकता है। यह भी संभव है कि CSK टीम मैनेजमेंट आने वाले सीजन के लिए नई रणनीति पर काम कर रहा हो, जिसमें सीनियर खिलाड़ियों के रोल और पहचान को नए तरीके से पेश किया जा रहा है। फिलहाल, धोनी या फ्रेंचाइजी की ओर से इस बदलाव की असली वजह पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. लेकिन एक बात तय हैधोनी का हर कदम सोच-समझकर उठाया गया होता है, और इस बार भी इसके पीछे कोई बड़ा कारण जरूर होगा, जिसका खुलासा जल्द हो सकता है 2023 में धोनी की जर्सी BCCI ने की थी र‍िटायर  महेंद्र‍ सिंह धोनी की 7 नंबर की जर्सी को BCCI ने साल 2023 में रिटायर करने का फैसला किया था. इससे पूर्व 2017 में भी महान बल्लेबाज सच‍िन तेंदुलकर की सिग्नेचर 10 नंबर जर्सी को भी हमेशा के लिए र‍िटायर कर दिया गया था. धोनी का जन्म 7 जुलाई 1981 को हुा था, ऐसे में उनकी जन्म की तारीख की वजह से ही उन्होंने इस नंबर को अपनाया था।

Wildlife Crime: डिप्टी रेंजर की साजिश का खुलासा, बाघ और तेंदुए के शिकार के बाद खाल बेचने जाते पकड़ा गया

जगदलपुर. बस्तर के इंद्रावती और बीजापुर के जंगलों से जो कहानी सामने आई है. वो सिर्फ शिकार नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी की चीख है. यहां बाघ और तेंदुए की मौत हुई. लेकिन गोली से नहीं. बल्कि एक धीमी, दर्दनाक साजिश से. तार के फंदों में फंसे दोनों वन्य जीव 2-3 दिनों तक तड़पने के बाद आखिरकार दम तोड़ दिया. इस पूरे खेल में एक ऐसा नाम सामने आया. जिस पर जंगल बचाने की जिम्मेदारी थी. दंतेवाड़ा वन विभाग का डिप्टी रेंजर देवी प्रसाद कोयाम भी इस शिकारी गिरोह का हिस्सा निकला. वन विभाग की उड़नदस्ता टीम ने जब कार्रवाई की तो 9 आरोपी पकड़ में आए, जो बाघ और तेंदुए की खाल को बाइक के जरिए रायपुर ले जाकर बेचने की फिराक में थे. बरामद खाल और हालात इस ओर इशारा कर रहे हैं कि शिकार हाल ही में हुआ और मारे गए बाघ की उम्र महज 3 साल थी, यानी एक युवा दहाड़ को हमेशा के लिए खामोश कर दिया गया. विशेषज्ञ बताते हैं कि शिकारियों ने पुराने लेकिन बेहद क्रूर तरीके अपनाए. मांस के लालच में फंसाकर तार के फंदे गले में कस दिए और फिर उन्हें तड़पने के लिए छोड़ दिया गया. सवाल अब सिर्फ शिकार का नहीं है सवाल उस भरोसे का है जो जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा पर टिका है. जब जिम्मेदार ही शिकारी बन जाएं तो जंगल की सुरक्षा आखिर किसके भरोसे? बस्तर के जंगल आज खामोश हैं लेकिन इस खामोशी में एक सवाल लगातार गूंज रहा है, क्या अब भी जंगल सुरक्षित हैं या शिकार का खेल सिस्टम के भीतर तक फैल चुका है?

UP Board 10वीं-12वीं आंसरशीट चेकिंग आज से, त्रिस्तरीय मूल्यांकन लागू, जानें कब आएगा रिजल्ट

लखनऊ यूपी बोर्ड 10वीं 12वीं परीक्षा की कॉपियों की चेकिंग आज 18 मार्च से राज्य के 250 केंद्रों पर शुरू होगी। 2.5 करोड़ उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए आज से 1.5 लाख से अधिक परीक्षकों ने काम शुरू किया है। हाईस्कूल उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य में 4300 अंकेक्षक, 8550 डीएचई व 83800 परीक्षक लगाए गए हैं। यूपी बोर्ड इंटर उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य में 2590 अंकेक्षक, 5300 डीएचई व 48990 परीक्षक लगे हैं। उत्तरपुस्तिकाओं की पूरी गंभीरता से त्रिस्तरीय जांच की जाएगी। यूपी बोर्ड ने इस साल पहली बार राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और वरिष्ठ शिक्षकों की अंकेक्षण में ड्यूटी लगाई है ताकि किसी प्रकार की लापरवाही न रह जाए। बोर्ड की कॉपियों का पहले परीक्षक मूल्यांकन करते हैं और उसके बाद उप मुख्य नियंत्रक या डिप्टी हेड एग्जामिनर (डीएचई) रैंडम 45 या 50 कॉपियों में से कम से कम पांच कॉपियों की जांच करते हैं कि कहीं कोई कमी तो नहीं रह गई। 15 प्रतिशत की जांच अंकेक्षक करेंगे तीसरे चरण में डीएचई के अधीन जांची जांची गई कुल कॉपियों में से 15 प्रतिशत की जांच अंकेक्षक करते हैं। अंकेक्षण का नियम तो है लेकिन मूल्यांकन केंद्रों पर उसका गंभीरता से पालन नहीं होता। पिछले साल तक मूल्यांकन केंद्र स्तर पर ही अंकेक्षकों की नियुक्ति कर ली जाती थी लेकिन हकीकत में खानापूरी ही होती थी। कई केंद्रों पर अनुभवहीन शिक्षकों को भी अंकेक्षण की जिम्मेदारी सौंप दी जाती थी जो परीक्षक या डीएचई की कमियां इंगित तक नहीं कर पाते थे। इसकी शिकायत मिलने पर यूपी बोर्ड ने इस साल पहली बार अपने स्तर से अंकेक्षकों की नियुक्ति की है। 31 मार्च तक मूल्यांकन पूरा हो, रिजल्ट अप्रैल अंत तक दस परीक्षक पर एक डीएचई और दो डीएचई पर एक अंकेक्षक की व्यवस्था की गई है। बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने निर्देशित किया है कि अंकेक्षक प्रतिदिन अपनी रिपोर्ट उप-नियंत्रक और जिला विद्यालय निरीक्षक को सौंपेंगे। अंकेक्षक यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी उत्तर अमूल्यांकित न रह गया। सचिव ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक, जिला विद्यालय निरीक्षक और मूल्यांकन केंद्र के उपनियंत्रक (प्रधानाचार्य) को पत्र लिखा है कि कार्यभार को देखते हुए एक मूल्यांकन केन्द्र पर एक से अधिक अंकेक्षकों की तैनाती की जाएगी। 31 मार्च तक मूल्यांकन पूरा किया जाना है। अप्रैल अंत तक रिजल्ट जारी कर दिया जाएगा। ओवरराइटिंग या कटिंग को रिजेक्ट कर देगा कंप्यूटर बोर्ड अधिकारियों ने बताया है कि इस बार बोर्ड ने शिक्षकों को चेतावनी दी है कि वे यह पक्का करें कि वे सही नंबर ही डाल रहे हैं, क्योंकि कंप्यूटर सिस्टम किसी भी ऐसी एंट्री को रिजेक्ट कर देगा जिसमें ओवरराइटिंग या कटिंग दिखेगी। इस बात को फिर से दोहराया गया है, क्योंकि बोर्ड का दावा है कि पहले भी कई छात्रों ने रीचेकिंग के लिए अप्लाई किया था और पाया कि आंसर शीट पर दिए गए नंबर और सिस्टम में अपडेट किए गए नंबर अलग-अलग थे। शिक्षकों की लापरवाही पर लगाम यह सुनिश्चित करने के लिए कि मूल्यांकन प्रक्रिया में कोई गलती न हो, यूपी बोर्ड रैंडम तरीके से जांची गई उत्तर पुस्तिकाओं को चुनेगा ताकि यह पक्का हो सके कि विषय विशेषज्ञों द्वारा गणना में कोई चूक न हुई हो। यदि दोबारा जांच के बाद भी गलतियां पाई जाती हैं, तो जिस शिक्षक ने संबंधित उत्तर पुस्तिका को जांचा था, उसे बोर्ड के नियमों और 'उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024' के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। सॉफ्टवेयर के माध्यम से 6980 अंकेक्षक नियुक्त उत्तरपुस्तिकाओं के गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन के लिए पहली बार सॉफ्टवेयर के माध्यम से 6980 अंकेक्षक नियुक्त किए हैं। इनमें प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक व वरिष्ठ शिक्षक शामिल हैं, जो 15 प्रतिशत कॉपियों का रेंडम परीक्षण करेंगे। परिषद सचिव भगवती सिंह के अनुसार यह निर्णय मूल्यांकन को त्रुटिरहित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। इससे न केवल परीक्षा प्रणाली की साख बढ़ेगी, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। प्रधानाचार्यों की ड्यूटी लगाने पर जताया रोष प्रयागराज। यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य में प्रधानाचार्यों की ड्यूटी को लेकर प्रदेशभर में असंतोष व्याप्त है। राजकीय शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश ने इस संबंध में अपर मुख्य सचिव (माध्यमिक शिक्षा), उत्तर प्रदेश शासन को ज्ञापन भेजकर आपत्ति दर्ज कराई है। संघ के प्रांतीय संरक्षक रामेश्वर पांडेय और प्रांतीय महामंत्री अरुण यादव ने बताया कि परिषद के क्षेत्रीय कार्यालयों प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, बरेली एवं मेरठ की ओर से प्रधानाचार्यों को उनके पद की गरिमा के विपरीत अंकेक्षण कार्य में लगाया गया है। इससे प्रदेश के हाईस्कूलों के प्रधानाचार्यों में व्यापक रोष है।

Jharkhand HC Decision: CISF असिस्टेंट कमांडेंट भर्ती जारी रहेगी, कोर्ट ने रोक लगाने से मना किया

रांची. हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में सीआईएसएफ असिस्टेंट कमांडेंट नियुक्ति नियमावली को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया। कोर्ट यह निर्देश दिया कि असिस्टेंट कमांडेंट की विज्ञापन के आधार पर नियुक्ति इस केस के अंतिम निर्णय से प्रभावित होगी। इसकी जानकारी अभ्यर्थियों को भी दे दी जाए। प्रार्थी ने कहा कि नियमावली के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई लंबित रहने के दौरान ही यूपीएससी ने असिस्टेंट कमांडेंट पद के लिए विज्ञापन निकाला है, इसलिए इस पर रोक लगाई जाए। प्रार्थी ने सीआईएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट नियुक्ति नियमवाली को चुनौती देते हुए कहा कि डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ट्रेंनिंग की गाइडलाइन के तहत हर पांच साल में इस नियुक्ति नियमावली की समीक्षा होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। प्रार्थी का यह भी कहना था कि सीआईएसएफ के अन्य विंग में असिस्टेंट कमांडेंट के शत प्रतिशत पद इंस्पेक्टर पद से प्रोन्नति के माध्यम से भरे जाते हैं। जबकि उक्त नियमावली के तहत केवल 30 प्रतिशत पद ही इंस्पेक्टर पद से असिस्टेंट कमांडेंट पद पर प्रोन्नति देने का प्रविधान है। इसलिए वर्ष 2009 की नियुक्ति नियमावली और असंवैधानिक और गलत है।

Congress Action Mode: राज्यसभा चुनाव में ‘धोखेबाज’ विधायकों की पहचान, जल्द होगा नोटिस जारी

चंडीगढ़. कांग्रेस प्रभारी बी के हरिप्रसाद ने प्रेस वार्ता की और उन विधायकों के नाम बताए जिन्होंने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की। उन्होंने कहा कि नारायणगढ़ से शैली चौधरी, पुनहाना से मोहम्मद इलियास, हथीन से मोहम्मद इसराइल, सदौरा से रेणु बाला ने क्रॉस वोट किया है, हमारी पार्टी ने डिसिप्लिनरी कमेटी को जानकारी दे दी है, आज इन सभी विधायकों को शोकॉज नोटिस भेजा जाएगा। पांचवा नाम जरनैल सिंह का है। हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस में लगातार घमासान मचा हुआ है। पार्टी के कई विधायकों पर क्रॉस वोटिंग के आरोप लग रहे था। कांग्रेस के पांच विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी और 4 वोट रिजेक्ट हुए थे। विधायक गोकुल सेतिया पर क्रॉस वोटिंग के आरोप लगे थे मगर उन्होंने इसे फेक न्यूज बताया और चंडीगढ़ में कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने मांग की कि जिन्होंने भी पार्टी को धोखा दिया है उन पांचों विधायकों के नाम सार्वजनिक होने चाहिए और उनपर उचित कार्रवाई होनी चाहिए। मगर धरने पर बैठे गोकुल सेतिया और मंजू चौधरी को भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मना लिया और उन्हें क्लीन चिट दे दी।

Punjab-Haryana Water Crisis: हाईकोर्ट की चेतावनी—मुफ्त बिजली और अत्यधिक दोहन ने बढ़ाई परेशानी

चंडीगढ़. राज्य में कृषि ट्यूबवेलों को 24 घंटे मुफ्त बिजली देने और इसके कारण भूजल के अत्यधिक दोहन के मुद्दे पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड को चार हफ्ते में रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। एक याचिका की सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि जब भूजल की उपलब्धता से अधिक उसका दोहन हो रहा है, तो यह स्थिति आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत खतरनाक है। मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि राज्य की नीति के अनुसार किसानों को केवल धान के सीजन में सीमित समय के लिए मुफ्त बिजली दी जानी चाहिए, लेकिन जमीनी स्तर पर कई स्थानों पर 24 घंटे मुफ्त बिजली का उपयोग किया जा रहा है। अदालत को बताया गया कि तरनतारन जिले के पट्टी क्षेत्र में लगभग 300 ऐसे कृषि कनेक्शन हैं, जहां 24 घंटे मुफ्त बिजली का उपयोग हो रहा है। यह बिजली का उपयोग केवल ट्यूबवेल तक सीमित नहीं है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि इस अनियंत्रित मुफ्त बिजली के कारण दोहरा नुकसान हो रहा है। एक तरफ बिजली की खपत बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 में पंजाब में कुल भूजल रिचार्ज 18.84 बीसीएम था, जबकि दोहन 27.8 बीसीएम तक पहुंच गया, जो स्पष्ट रूप से अधिक है। राज्य की ओर से जवाब देते हुए बताया गया कि लंबे समय से नए कृषि ट्यूबवेल कनेक्शन जारी नहीं किए गए हैं।