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आबकारी आरक्षक के 200 पदों पर भर्ती का अंतिम चयन परिणाम जारी

रायपुर आबकारी विभाग के अंतर्गत आबकारी आरक्षक के रिक्त 200 पदों की पूर्ति हेतु सीधी भर्ती के माध्यम से छत्तीसगढ़ व्यवसायिक परीक्षा मण्डल रायपुर (व्यापम) द्वारा 27 जुलाई 2025 को लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। उक्त भर्ती परीक्षा का अंतिम उत्तर तथा परीक्षा परिणाम व्यापम की वेबसाइट पर 19 सितम्बर 2025 को प्रदर्शित किया गया। आबकारी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विभाग को उपलब्ध कराये गये परीक्षा परिणाम की प्राप्तांक सूची एवं परीक्षा से संबंधित अन्य अभिलेखों के आधार पर विज्ञापन में उल्लेखित वर्गवार, प्रवर्गवार रिक्तियों की संख्या के लगभग तीन गुना अभ्यर्थियों को मेरिट क्रम में चिन्हांकित किया गया। उनके मूल प्रमाण पत्रों (दस्तावेजों) का सत्यापन एवं शारीरिक मापदण्ड की जॉच के लिए बुलाया गया, किन्तु पर्याप्त अवसर दिये जाने के बाद भी सत्यापन में अनुपस्थित एवं शारीरिक मापदण्ड में अपात्र पाये गये कुल 128 अभ्यर्थियों के नामों पर चयन प्रक्रिया में विचार नहीं करने संबंधी 12 मार्च 2026 को पत्र  जारी किया गया। शेष पात्र अभ्यर्थियों में से व्यापम द्वारा जारी मेरिट क्रम के आधार पर वर्गवार, प्रवर्गवार आबकारी आरक्षक पद के कुल 200 पदों के विरूद्ध 200 पदों पर अभ्यर्थियों की उपलब्धता अनुसार चयन सूची तथा 43 अनुपूरक (प्रतीक्षा) सूची जारी गई है।  अधिकारियों ने बताया कि आबकारी आरक्षक पद हेतु छत्तीसगढ़ व्यापम द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षा में व्यापम द्वारा जारी मेरिट सूची के आधार पर विभाग में दस्तावेज सत्यापन एवं शारीरिक मापदण्ड में पात्र पाये गये अभ्यर्थियों में से चयन हेतु उपयुक्त पाये गये अभ्यर्थियों की सूची मंडल की वेबसाईट  https://vyapamcg.cgstate.gov.in/ पर अपलोड कर दी गई है। 

फेक कंटेंट पर सख्त हुए गौतम गंभीर, किनके खिलाफ पहुंचे कोर्ट? जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली इंडियन क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने अपने पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा के लिए दिल्ली हाई कोर्ट से गुहार लगाई है। उन्होंने अपने नाम और तस्वीरों का अनधिकृत इस्तेमाल कर अपना प्रचार करने वालों के साथ-साथ एआई वीडियो और डीपफेक के जरिए फर्जी सूचनाएं फैलाने वालों से हर्जाने की भी मांग की है। गंभीर ने अदालत से ऐसे ऑनलाइन कंटेंट को हटाने का निर्देश देने की भी गुहार लगाई है। उन्होंने कुल 16 व्यक्तियों या संस्थानों को पार्टी बनाया है। गौतम गंभीर से पहले अनिल कपूर, अमिताभ बच्चन, सुनील गावस्कर जैसी हस्तियां भी पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटा चुकी हैं। इन हस्तियों ने अपनी आवाज, वीडियों या तस्वीर के अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ अदालत का रुख किया था और पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा की थी। दो बार के विश्व कप विजेता गौतम गंभीर ने दिल्ली हाई कोर्ट में सिविल वाद दाखिल किया है। उसमें उन्होंने अपने नाम, वीडियो, तस्वीरों का इस्तेमाल कर प्रचार करने वालों या इनका इस्तेमाल कर दुष्प्रचार करने वालों से 2.5 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग की है। साथ में ये भी गुहार लगाई है कि उनकी उनकी पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन करने वाले कंटेंट को हटाया जाए। वाद में कॉपीराइट ऐक्ट 1957, ट्रेड मार्क्स ऐक्ट 1999 और कमर्शन कोर्ट्स ऐक्ट 2015 के प्रावधानों का जिक्र करते हुए हाई कोर्ट से गुहार की गई है। इसके साथ ही उन्होंने अमिताभ बच्चन बनाम रजत नागी, अनिल कपूर बनाम सिंपली लाइफ इंडिया और सुनील गावस्कर बनाम क्रिकेट तक एवं अन्य मामले में हाई कोर्ट के दिए ऐतिहासिक आदेश का भी हवाला दिया है। एआई जैसी तकनीक से फर्जी वीडियो बना प्रचारित करने का आरोप गौतम गंभीर की लीगल टीम की तरफ से कहा गया है कि इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब और फेसबुक पर तमाम ऐसे अकाउंट्स हैं जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फेस-स्वैपिंग, वॉइस क्लोनिंग टेक्नॉलजी का इस्तेमाल करके गौतम गंभीर के असली से दिखने वाले वीडियो बना रहे हैं। उन फर्जी वीडियो में गंभीर के कथित बयानों को दिखाते, सुनाते हैं जो असल में उन्होंने कभी कहा ही नहीं होता है। ऐसे ही एक वीडियो में फर्जी तरीके से उनके कोच पद से इस्तीफा देने के ऐलान की बात रखी गई थी जिसने 29 लाख व्यूज बटोरे। इसके अलावा उन्होंने ईकॉमर्स प्लेफॉर्म्स को भी पक्ष बनाया है। गंभीर का दावा है कि ये ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म उन पोस्टर्स या सामानों को बिकने दे रहे ही हैं जिन पर अनधिकृत रूप से उनका यानी गौतम गंभीर के नाम का इस्तेमाल किया गया है। गौतम गंभीर ने किन लोगों के खिलाफ किया है मुकदमा जानकी फ्रेम्स, भूपेंद्र पैंटोला, लिजेंड्स रिवोलूशन, गुस्ताख एडिट्स, क्रिकेट मीमर 45, जेम्स ऑफ क्रिकेट, क्रिकएथ, सन्नी उपाध्याय, @imRavY_, ऐमजॉन, फ्लिपकार्ट, मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक, एक्स कॉर्प, गूगल/यूट्यूब, मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलजी और डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्यूनिकेशंस। क्या होता है पर्सनैलिटी राइट? पर्सनैलिटी राइट किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व की रक्षा से जुड़े हैं। भारतीय संविधान में अलग से इस तरह के किसी अधिकार की व्यवस्था नहीं है बल्कि यह अनुच्छेद 21 के तहत मिले निजता के अधिकार के तहत ही आता है। पर्सनैलिटी राइट्स में दो तरह के अधिकार शामिल होते हैं- राइट ऑफ पब्लिशिटी और राइट टु प्राइवेसी। राइट ऑफ पब्लिशिटी किसी व्यक्ति को अपनी तस्वीर, आवाज, वीडियो या उससे जुड़ी किसी भी चीज का बिना उसकी इजाजत या करार के बिना व्यावसायिक इस्तेमाल किए जाने से रक्षा का अधिकार है।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और उज्बेकिस्तान के पांच विश्वविद्यालयों के मध्य उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान में सहयोग हेतु हुए समझौते

रायपुर उज्बेकिस्तान के विद्यार्थी कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए छत्तीसगढ़ आएंगे उज्बेकिस्तान के विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी आगामी शैक्षणिक वर्ष से कृषि के क्षेत्र में उच्च शिक्षा तथा अनुसंधान हेतु छत्तीसगढ़ आएंगे और छत्तीसगढ़ के विद्यार्थी अध्ययन एवं अनुसंधान हेतु उज्बेकिस्तान जाएंगे। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर तथा उज्बेकिस्तान के पांच विश्वविद्यालयों के मध्य कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में आपसी सहयोग हेतु समझौते किये गए हैं। उज्बेकिस्तान के विद्यार्थी कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए छत्तीसगढ़ आएंगे इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल के नेतृत्व वाले प्रतिनिधि मंडल के विगत दिनों उज्बेकिस्तान प्रवास के दौरान ताशकंद स्टेट एग्रेरियन यूनिवर्सिटी, बुखारा स्टेट यूनिवर्सिटी, समरकंद स्टेट वेटेरिनरी, तेरमेज़ इंस्टीट्यूट तथा देनोव इंस्टीट्यूट के बीच शिक्षा, अनुसंधान, जैव प्रौद्योगिकी एवं उद्यमिता विकास आदि क्षेत्रों में सहयोग हेतु अनेक समझौते हस्ताक्षरित किए गए। इन समझौतों से छात्र और संकाय विनिमय कार्यक्रमों संयुक्त अनुसंधान पहलों, शैक्षणिक गतिशीलता और अंतर्राष्ट्रीय इंटर्नशिप को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है जिससे इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की वैश्विक भागीदारी बढ़ेगी।  कुलपति डॉ. चंदेल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल ने उज्बेकिस्तान के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भी तलाशी जिनमें चांवल अनुसंधान, औषधीय फसलों की खेती, जैव प्रौद्योगिकी और कृषि उद्यमिता प्रमुख हैं। प्रतिनिधिमंडल ने उज्बेकिस्तान में कृषि आधारित उद्योगों के विकास में भारतीय किसान उत्पादक संगठनों की भागीदारी की संभावनाओं पर भी चर्चा की। उज्बेकिस्तान के विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा प्राप्त करने हेतु काफी रूचि दिखाई। डॉ. चंदेल ने आशा व्यक्त की कि जिस प्रकार बड़ी संख्या में भारतीय छात्र मेडिकल शिक्षा के लिए उज्बेकिस्तान जाते हैं उसी प्रकार भविष्य में उज्बेकिस्तान के विद्यार्थी कृषि शिक्षा प्राप्त करने लिए छत्तीसगढ़ आएंगे। उल्लेखनीय है कि उच्च शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के विस्तार के परिप्रेक्ष्य में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर का एक प्रतिनिधिमंडल कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल के नेतृत्व में 28 फरवरी से 10 मार्च 2026 तक उज्बेकिस्तान के दौरे पर गया था। यह भ्रमण भारतीय एवं उज्बेक संस्थानों के बीच शैक्षणिक संबंधों को सुदृढ़ करने तथा कृषि विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, संरक्षित खेती, कृषि उद्यमिता एवं प्रमुख फसलों की मूल्य श्रृंखला विकास में सहयोग की संभावनाओं का अन्वेषण करने हेतु किया गया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने विभिन्न विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों एवं शासकीय प्रतिनिधियों से भेंट कर संयुक्त शैक्षणिक कार्यक्रमों, अनुसंधान सहयोग एवं संस्थागत साझेदारी के अवसरों की पहचान की। प्रतिनिधि मंडल में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर अंतरराष्ट्रीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रो. हुलास पाठक भी शामिल थे। इस यात्रा का उद्देश्य कृषि शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना था साथ ही भारत और उज्बेकिस्तान के बीच दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारी का निर्माण करना था। यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने उजबेकिस्तान के प्रमुख विश्वविद्यालयों अनुसंधान संस्थानों और नीति संगठनों के साथ जुड़कर कृषि विज्ञान जैव प्रौद्योगिकी कृषि उद्यमिता संरक्षित खेती और मूल्य श्रृंखला विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग के अवसरों का पता लगाया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने पाँच प्रमुख सस्थानो, तेरमेज़ पेडागोजिकल इंस्टीट्यूट, डेनोव इंस्टीट्यूट ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप एक पेडागोजी, ताशकंद स्टेट एग्रेरियन यूनिवर्सिटी, बुखारा स्टेट यूनिवर्सिटी और समरकंद स्टेट वेटरनरी यूनिवर्सिटी के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। प्रतिनिधिमंडल ने ताशकंद में प्रत्यायन और रेटिंग अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी के साथ भी एक विस्तृत बैठक की। इस यात्रा ने उज्बेकिस्तान की तेजी से विस्तार कर रही उच्च शिक्षा प्रणाली के बारे में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान की और कौशल विकास, संकाय प्रशिक्षण और डिजिटल शिक्षण समाधानों में सहयोग के नए रास्ते खोले। तेरमेज पेडागोजिकल इंस्टीट्यूट में एक एमओयू को औपचारिक रूप दिया गया और शैक्षणिक सहयोग तथा पाठयक्रम विकास पर चर्चा हुई। डेनोव इंस्टीट््यूट ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप एंड पेडागोजी में प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों और सरकारी प्रतिनिधियों के साथ उच्च्य स्तरीय बातचीत में भाग लिया जिसमें उद्यमिता शिक्षा जैव प्रौद्योगिकी और कृषि मूल्य श्रृंखलाओं में सहयोग की संभावनाओं का पता लगाया गया। उच्च शिक्षा में उनके शैक्षणिक योगदान और नेतृत्व के सम्मान में डॉ गिरीश चंदेल और प्रो हुलास पाठक को उनकी यात्रा के दौरान विजिटिंग प्रोफेसरशिप सम्मान से सम्मानित किया गया। ताशकंद स्टेट एथेरियन यूनिवर्सिटी में कृषि जैव प्रौद्योगिकी खारा प्रौद्योगिकी और उद्यमिता विकास में सहयोग पर बर्चा हुई, जिसके बाद एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। बुखारा स्टेट यूनिवर्सिटी के दौरे से उन्नत स्मार्ट प्रयोगशाला सुविधाओं और किसान-समूह-आधारित मूल्य श्रृंखला मॉडलों विशेष रूप से कपास और डेयरी क्षेत्रों में देखने का अवसर मिला।  प्रतिनिधिमंडल ने कृषि मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने के इन अभिनव दृष्टिकोणों की सराहना की। समरकंद स्टेट वेटरनरी यूनिवर्सिटी में प्रतिनिधिमंडल ने चांवल अनुसंधान औषधीय पौधों और कृषि उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में सहयोग के साथ साथ संयुक्त अनुसंधान और शैक्षणिक आदान प्रदान के अवसरों पर चर्चा की। इस दौरे में नवाचार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया जिसमें इनक्यूबेशन के अवसर कृषि आधारित उद्योगों का विकास और किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा देना शामिल है।  हल्दी, अदरक, लहसुन, लेवेंडर और औषधीय पौधों जैसी फसलों के लिए मूल्य श्रृंखला विकास पर विशेष चर्चा हुई साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त ब्रांडिंग पहलों की संभावनाओं पर भी बात हुई। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने ताशकंद में भारतीय दूतावास के साथ भी बातचीत की जहाँ राजदूत सु स्मिता पंत के साथ की गई चर्चा कृषि और शिक्षा के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित थी। प्रतिनिधि मंडल ने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में केसर लैवेंडर, हींग, बेरी और उन्नत कृषि प्रौद्योगिकियों की पहचान की। इस दौरे ने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच दीर्घकालिक शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग के लिए एक मजबूत नींव रखी है, जो सतत कृषि, नवाचार और वैश्विक ज्ञान के आदान-प्रदान की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।  

ईरान के हमलों पर खाड़ी देशों की आपात अपील, UN से तत्काल चर्चा की मांग

वाशिंगटन अमेरिका और ईरान युद्ध अब भीषण जंग में तब्दील हो गया है। ईरान अमेरिका से बदला लेने के लिए खाड़ी देशों में मौजूद उसके ठिकानो पर हमले कर रहा है। इसके साथ ही, वह कच्चे तेल की प्लांट को भी निशाना बना रहा है, जिससे दुनिया में ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है। इन सबसे घबराए खाड़ी देश आनन-फानन में यूनाइटेड नेशन (UN) पहुंचे हैं और तुरंत ही बहस करने की मांग की है। डॉक्युमेंट्स से पता चलता है कि खाड़ी देशों ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में, मिडिल ईस्ट में नागरिकों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर ईरान के हमलों को लेकर एक तत्काल बहस का अनुरोध किया है। खाड़ी देशों द्वारा भेजा गया एक राजनयिक नोट में बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बताता है, जिसके मानवाधिकारों पर गंभीर प्रभाव पड़ते हैं। ईरान पर अमेरिकी-इजरायल युद्ध का विस्तार, जो अब अपने तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, ने खाड़ी देशों में ऊर्जा और नागरिक बुनियादी ढांचे पर ड्रोन और मिसाइल हमलों के रूप में बड़े पैमाने पर ईरानी जवाबी कार्रवाई को जन्म दिया है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बंद करने और पूरे क्षेत्र में ऊर्जा सुविधाओं पर हमलों ने ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल ला दिया है और विश्व स्तर पर मुद्रास्फीति में वृद्धि के डर को हवा दी है। राजनयिक नोट में कहा गया है कि खाड़ी देशों पर किए गए ये बिना किसी उकसावे के हमले – ईरान को दिए गए उनके इस आश्वासन के बावजूद कि उनके क्षेत्र ईरान-विरोधी हमलों के लिए इस्तेमाल नहीं किए जाएंगे – तत्काल ध्यान दिए जाने की मांग करते हैं। खाड़ी देशों द्वारा प्रस्तावित मसौदा प्रस्ताव इन हमलों की कड़ी निंदा करता है और ईरान से तत्काल नागरिक बुनियादी ढांचे और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले रोकने का आह्वान करता है। साथ ही यह नागरिकों, बुनियादी ढांचे और पर्यावरण को हुए नुकसान के लिए मुआवजे की भी मांग करता है। परिषद को यह अनुरोध प्राप्त हो गया है और वह इस बहस को आयोजित करने के लिए एक तारीख पर विचार कर रही है। ईरान के हमले के बाद तेल, प्राकृतिक गैस की कीमतों में उछाल वहीं, ईरान के कतर में एक प्रमुख प्राकृतिक गैस सुविधा और कुवैत की दो तेल रिफाइनरी पर हमले के बाद वैश्विक तेल एवं प्राकृतिक गैस की कीमतों में बृहस्पतिवार को तेज उछाल आया। कतर की यह गैस सुविधा दुनिया की करीब पांचवें हिस्से की गैस आपूर्ति करती है। इन हमलों से यह आशंका बढ़ गई है कि टैंकर यातायात के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से उत्पन्न ऊर्जा संकट अपेक्षा से अधिक लंबा एवं व्यापक हो सकता है जिससे तेल एवं गैस उत्पादन को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत बढ़कर करीब 114 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जो युद्ध से पहले 73 डॉलर प्रति बैरल से कम थी।

बढ़ती ईंधन कीमतों पर लगाम: Italy ने पेट्रोल-डीजल टैक्स कम कर दी बड़ी राहत

मुंबई ग्लोबल लेवल पर बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच इटली सरकार ने आम नागरिकों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। ब्लूमबर्ग की खबर के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों से बढ़ते दबाव को कम करने के लिए सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले एक्साइज ड्यूटी में कटौती की घोषणा की है। यह फैसला मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण बढ़ी ऊर्जा लागत के प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है। फ्यूल महंगा होने पर सरकार का एक्शन इटली के उप प्रधानमंत्री माटेओ साल्विनी ने बताया कि हाल के हफ्तों में ग्लोबल ऑयल प्राइस में आई तेजी का सीधा असर देश के नागरिकों पर पड़ा है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कर में राहत देने का फैसला किया है, ताकि आम लोगों के खर्च का बोझ कम किया जा सके। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है , जब ऊर्जा कीमतों में उछाल ने पूरे यूरोप में महंगाई को बढ़ा दिया है। कैबिनेट बैठक में राहत पैकेज पर चर्चा प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सैकड़ों करोड़ यूरो के राहत पैकेज पर विचार किया गया। यह पैकेज सीमित समय के लिए लागू किया जाएगा और इसका मकसद परिवारों और उपभोक्ताओं को ऊर्जा लागत के झटके से बचाना है। सरकार का मानना है कि यह कदम घरेलू खर्च को नियंत्रित करने और आर्थिक दबाव को कम करने में मदद करेगा। तेल कंपनियों से कीमतें नियंत्रित रखने की अपील सरकार ने कर कटौती के साथ-साथ तेल कंपनियों से भी सहयोग मांगा है। उप प्रधानमंत्री साल्विनी ने बताया कि सरकार ने डीजल के लिए अधिकतम कीमत करीब 1.90 यूरो (करीब ₹203.28) प्रति लीटर तय करने का सुझाव दिया है, ताकि बाजार में अनियंत्रित बढ़ोतरी को रोका जा सके। इसके जरिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कर राहत का फायदा सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचे। ईंधन कीमतों में क्यों आया उछाल? मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के बाद वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में तेजी आई है। इटली के उद्योग मंत्रालय के अनुसार यहां डीजल की औसत कीमत 2.10 यूरो प्रति लीटर और पेट्रोल 1.87 यूरो प्रति लीटर पर पहुंच गया है। यह स्तर आम लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है। निगरानी और सट्टेबाजी पर नजर सरकार ने फ्यूल सप्लाई चेन पर निगरानी भी तेज कर दी है। एनी एसपीए और तमोइल इटालिया जैसी प्रमुख तेल कंपनियों के साथ बैठक में यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि कीमतों में बढ़ोतरी का कारण वास्तविक लागत हो, न कि सट्टेबाजी। इसके साथ ही सरकार कीमतों की नियमित समीक्षा कर रही है, ताकि किसी तरह की अनियमितता को रोका जा सके। अतिरिक्त मुनाफे पर टैक्स की तैयारी सरकार ऊर्जा कंपनियों के अतिरिक्त मुनाफे पर टैक्स लगाने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। हालांकि, फिलहाल उम्मीद जताई जा रही है कि स्थिति नियंत्रण में रहेगी और इस कदम की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्यों ज्यादा प्रभावित है इटली? इटली यूरोप के उन देशों में शामिल है जहां फ्यूल पर टैक्स पहले से ही ज्यादा है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो इसका असर यहां ज्यादा तेजी से दिखता है। यही वजह है कि सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा। कुल मिलाकर, इटली सरकार का यह फैसला बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच आम लोगों को राहत देने की दिशा में अहम कदम है। वैश्विक तनाव और महंगे तेल के दौर में ऐसे उपाय अन्य देशों के लिए भी उदाहरण बन सकते हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह कदम महंगाई को काबू में रखने में सफल होता है या नहीं।

जगदलपुर में एथलेटिक्स और अंबिकापुर में कुश्ती की प्रतियोगिताएं होंगी

रायपुर  छत्तीसगढ़ में आयोजित हो रहे खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स में देशभर के जनजातीय खिलाड़ी सात खेलों में अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। इसमें देश के 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के करीब 3000 खिलाड़ी भागीदारी करेंगे। आयोजन के दौरान पुरूष एवं महिला वर्गों में राजधानी रायपुर में पांच खेलों तथा बस्तर संभागीय मुख्यालय जगदलपुर और सरगुजा संभागीय मुख्यालय अंबिकापुर में एक-एक खेल होंगे। इसमें छत्तीसगढ़ के कुल 164 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें 86 पुरूष और 78 महिला खिलाड़ी शामिल हैं। तीनों शहरों में नेशनल ट्राइबल गेम्स के लिए चिन्हांकित खेल स्थलों व मैदानों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार तैयार करने का काम जोरों पर है। रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय फुटबॉल मैदान और स्वामी विवेकानंद एथलेटिक्स स्टेडियम कोटा में फुटबॉल की प्रतियोगिताएं होंगी। रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में हॉकी की स्पर्धाएं होंगी। वहीं रायपुर के अंतरराष्ट्रीय स्वीमिग पूल में तैराकी, खेल एवं युवा कल्याण विभाग संचालनालय के ओपन मैदान में तीरंदाजी तथा पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय ओपन ग्राउंड में वेट-लिफ्टिंग की प्रतियोगिताएं संपन्न होंगी। जगदलपुर के धरमपुरा क्रीड़ा परिसर में एथलेटिक्स और अंबिकापुर के गांधी स्टेडियम में कुश्ती की प्रतियोगिताएं होंगी। खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स में देश के दो परंपरागत खेलों कबड्डी और मलखंब को भी डेमो गेम्स के रूप में शामिल किया गया है। कबड्डी की स्पर्धाएं रायपुर के सरदार बलबीर सिंह इंडोर स्टेडियम और मलखंब का प्रदर्शन अंबिकापुर के गांधी स्टेडियम में होगा।

अगले 24 घंटे भारी! पंजाब के इन शहरों में तेज बारिश-आंधी की चेतावनी

चंडीगढ़ पंजाब के कई जिलों में अगले 24 घंटों के दौरान मौसम अचानक बिगड़ने की संभावना है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि राज्य के अलग-अलग इलाकों में तेज आंधी, गरज-चमक के साथ बारिश और बिजली गिरने की घटनाएं हो सकती हैं। जारी अलर्ट के अनुसार बरनाला, फतेहगढ़ साहिब, जालंधर, कपूरथला, लुधियाना, मलेरकोटला, मानसा, मोगा, पटियाला और संगरूर जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके साथ ही गरज-चमक और बिजली गिरने का भी खतरा बना रहेगा। प्रशासन ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें और खुले स्थानों से दूर रहें। किसानों को भी अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा गया है। किसी भी आपात स्थिति में लोग तुरंत हेल्पलाइन नंबर 112 पर संपर्क कर सकते हैं। पंजाब राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

एक अटैक और मचा हड़कंप: यूरोप में गैस 35% महंगी, वैश्विक चिंता बढ़ी

 मुंबई मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। खाड़ी देशों की ऊर्जा इकाइयों पर ईरान के हमलों के मद्देनजर वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में भारी उछाल आया। गुरुवार को यूरोपीय गैस के बेंचमार्क फ्यूचर्स में करीब 35% तक की तेजी देखने को मिली, जिससे बाजार में हड़कंप मच गया। बता दें कि तेल के अंतरराष्ट्रीय मानक 'ब्रेंट क्रूड' की कीमत युद्ध शुरू होने के बाद से लगभग 60 प्रतिशत बढ़ गई है। क्या है ताजा उछाल की वजह? दरअसल, ईरान ने कतर के रास लाफान औद्योगिक क्षेत्र सहित पड़ोसी देशों के ऊर्जा केंद्रों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किये, जिससे वहां की एलएनजी यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस फैसलिटीज को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। यह प्लांट वैश्विक एलएनजी आपूर्ति का लगभग 20% उत्पादन करता है, इसलिए इसका प्रभावित होना पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है। इससे पहले भी इसी महीने ड्रोन हमले के बाद इस प्लांट से सप्लाई रोक दी गई थी लेकिन ताजा हमलों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। आपको बता दें कि रास लाफान, कतर का प्रमुख एलएनजी उत्पादन केंद्र है, जहां गैस प्रसंस्करण, शोधन एवं बिजली उत्पादन की प्रमुख फैसलिटीज स्थित हैं। इसका बंदरगाह विश्व के सबसे बड़े औद्योगिक ऊर्जा परिसरों में से एक है और दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यात टर्मिनल शामिल है। इसके अलावा, अबुधाबी के हबशान गैस प्लांट भी एक हमले में मलबे के गिरने से क्षतिग्रस्त हो गए और उन्हें बंद करना पड़ा। इससे आपूर्ति पर और दबाव बढ़ गया है। यूरोप के लिए टेंशन विशेषकर यूरोप के लिए, यह तनाव ऐसे समय में आया है जब इसके स्टोरेज टैंक खाली हो चुके हैं। इसका मतलब है कि उसे इन टैंकों को फिर से भरने के लिए इस गर्मी में और अधिक एलएनजी कार्गो खरीदना होगा, जिससे उसे कम उपलब्ध आपूर्ति के लिए एशिया के खरीदारों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ेगी। ग्लोबल रिस्क मैनेजमेंट के मुख्य विश्लेषक अर्ने लोहमान रासमुसेन ने कहा- कतर से एलएनजी की आपूर्ति सैद्धांतिक रूप से महीनों तक और सबसे खराब स्थिति में, वर्षों तक बंद रह सकती है। गैस बाजार के लिए संकट केवल युद्ध समाप्त होने और होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने से खत्म नहीं हो जाएगा। ट्रंप की चेतावनी ताजा हमलों के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर कतर पर दोबारा हमला हुआ तो वे उसका पूरा गैस फील्ड को उड़ा देंगे जो ईरान ने कभी सोचा नहीं होगा। ट्रंप ने कहा-मैं इस पैमाने की हिंसा और विनाश की अनुमति नहीं देना चाहता क्योंकि इसका ईरान के भविष्य पर लॉन्ग टर्म में असर पड़ेगा। इस बीच, खबर है कि ट्रंप प्रशासन तेल आपूर्ति बढ़ाने के उपाय तलाश रहा है। इसी कड़ी में अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने वेनेजुएला पर लगे प्रतिबंधों में ढील देते हुए कहा कि अमेरिकी कंपनियों को वेनेजुएला की सरकारी तेल एवं गैस कंपनी के साथ कारोबार करने की अनुमति होगी।  

सम्राट विक्रमादित्य की गाथा केवल इतिहास नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत: मंत्री टेटवाल

भोपाल  गुड़ी पड़वा एवं वर्ष प्रतिपदा विक्रम संवत 2083 के शुभ अवसर पर प्रदेश में विक्रमोत्सव का आयोजन किया गया। इसी क्रम में कौशल विकास एवं रोजगार तथा उज्जैन के प्रभारी मंत्री  गौतम टेटवाल ने उज्जैन के पावन रामघाट पर विक्रमोत्सव 2026 के अंतर्गत सृष्टि आरंभ दिवस के शुभ अवसर पर कोटि सूर्योपासना कार्यक्रम में सहभागिता की। साथ ही माँ शिप्रा का पूजन-अर्चन कर प्रदेश में सुख, शांति, समृद्धि कि कामना की। विक्रम संवत केवल एक काल गणना नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सभ्यता और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रमाण मंत्री  टेटवाल ने कहा कि यह पावन अवसर हमें हमारी महान परंपरा और गौरवशाली इतिहास की याद दिलाता है। चैत्र नववर्ष (विक्रम संवत) का प्रारंभ उज्जैन के महान सम्राट  विक्रमादित्य महाराज द्वारा किया गया था, जो भारतीय संस्कृति, ज्ञान और स्वाभिमान का प्रतीक है। विक्रम संवत केवल एक काल गणना नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सभ्यता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रमाण है। उज्जैन नगरी उसी गौरव को आगे बढ़ाते हुए निरंतर विकास की ओर अग्रसर है, जो हम सभी के लिए गर्व का विषय है। सम्राट विक्रम की गाथा केवल इतिहास नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्त्रोत भी है मंत्री  टेटवाल ने कहा कि विक्रम संवत, आज भी हमारे पर्व-त्योहारों और धार्मिक अनुष्ठानों का आधार है, यह केवल एक कैलेंडर नहीं, बल्कि भारतीय अस्मिता और स्वाभिमान का जीवंत प्रतीक है। इसकी स्थापना लगभग 57 ईसा पूर्व महान सम्राट विक्रमादित्य द्वारा की गई थी। सम्राट विक्रमादित्य का नाम आते ही हमारे मन में वीरता, पराक्रम और अद्भुत नेतृत्व की छवि उभरती है। उनका शासनकाल भारतीय इतिहास का स्वर्णिम युग माना जाता है। उनकी गाथा केवल इतिहास नहीं बल्कि हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। महाकाल लोक हमारी विरासत और आधुनिक विकास का अद्भुत संगम मंत्री  टेटवाल ने कहा कि मध्यप्रदेश की पावन धरती, विशेष रूप से उज्जैन, सम्राट विक्रमादित्य की कर्मभूमि रही है। उज्जैन को उस समय भारत की सांस्कृतिक और खगोलीय राजधानी माना जाता था। आज भी यह नगरी हमारे लिए आस्था, इतिहास और गौरव का केंद्र है। उज्जैन विश्व के प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों में से एक है। यहां स्थित  महाकालेश्वर मंदिर और विकसित होता हुआ महाकाल लोक न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि हमारी विरासत और आधुनिक विकास का अद्भुत संगम भी है। इस अवसर पर सांसद  अनिल फिरोजिया, विधायक  अनिल जैन कालुहेड़ा, महापौर  मुकेश टेटवाल, सभापति मती कलावती यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं प्रशासनिक अधिकारी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित रहे।  

विक्रम दुरईस्वामी की चीन में तैनाती, क्या भारत-चीन रिश्तों में आएगी नई गर्माहट?

चीन चीन के साथ संबंधों के फिर से धीरे-धीरे पटरी पर लौटने के बीच भारत ने गुरुवार को अनुभवी राजनयिक विक्रम दोराईस्वामी को भारत का नया राजदूत नियुक्त किया है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि नए राजदूत जल्द ही अपना कार्यभार संभालेंगे। गौरतलब है कि चीन के साथ द्विपक्षीय संबंधों में लंबे समय तक चले तनाव के बाद दुरईस्वामी की राजदूत के रूप में नियुक्ति को काफी अहम माना जा रहा है। भारतीय विदेश सेवा के 1992 बैच के वरिष्ठ अधिकारी दुरईस्वामी, प्रदीप कुमार रावत का स्थान लेंगे। वे इससे पहले भी बीजिंग में भारतीय दूतावास में काम कर चुके हैं और उन्हें विदेश मामलों का खासा अनुभव है। बता दें कि दोराईस्वामी इस समय ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त के रूप में कार्यरत हैं। कौन हैं दुरईस्वामी? विक्रम के. दुरईस्वामी 23 सितंबर, 2022 से ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने 1992 में भारतीय विदेश सेवा (IFS) में शामिल होने से पहले एक वर्ष तक पत्रकार के रूप में काम कर चुके हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री प्राप्त की थी। उनके करियर की शुरुआत 1994 में हांगकांग में सचिव के रूप में हुई, जहां उन्होंने चीनी विश्वविद्यालय के न्यू एशिया येल-इन-एशिया भाषा स्कूल से चीनी भाषा सीखी और इसके बाद 1996 से उन्होंने बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास में लगभग चार वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं। 2000 में नई दिल्ली लौटने पर, उन्हें उप प्रोटोकॉल प्रमुख (औपचारिक) नियुक्त किया गया और बाद में उन्होंने प्रधानमंत्री के निजी सचिव के रूप में भी कार्य किया। लंबा अनुभव प्राप्त दुरईस्वामी 2011 में विदेश मंत्रालय (MEA) में सार्क (SAARC) प्रभाग के प्रमुख के रूप में लौटे और 2012 में नई दिल्ली में चौथे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समन्वयक रहे। इसके बाद उन्होंने 2012 से 2014 तक विदेश मंत्रालय के अमेरिका प्रभाग के संयुक्त सचिव का पद संभाला। ब्रिटेन आने से पहले, दुरईस्वामी ने अक्टूबर 2020 से सितंबर 2022 तक बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त के रूप में कार्य किया। जैज संगीत में रुचि अपनी आधिकारिक जिम्मेदारियों के अलावा उनकी रुचि पढ़ने, खेल, फिटनेस, यात्रा, इतिहास और जैज संगीत में है। वे चीनी, फ्रांसीसी और कुछ हद तक कोरियाई भाषा भी बोलते हैं। उनकी पत्नी संगीता एक शिक्षिका हैं और दोनों का एक 23 वर्षीय पुत्र भी है।