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मिडिल ईस्ट तनाव का असर: पीएम मोदी ने बुलाई उच्च स्तरीय बैठक, ऊर्जा मुद्दों पर फोकस

नई दिल्ली  पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार शाम को उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें उन्होंने मिडिल ईस्ट में बदलती स्थिति के मद्देनजर पेट्रोलियम, बिजली और उर्वरक क्षेत्रों की समीक्षा की और बरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों से चर्चा की। न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इस बैठक का मुख्य उद्देश्य देश में तेल, गैस, खाद समेत सभी जरूरी चीजों की आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना है और सरकार इस दिशा में सक्रिय कदम उठा रही है। उपभोक्ताओं और उद्योगों के हितों की रक्षा के लिए वैश्विक घटनाक्रमों की निरंतर निगरानी करना सरकार का मुख्य केंद्र बिंदु है। दुनिया भर में ऊर्जा संकट 12 मार्च को पीएम मोदी ने कहा था कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। यह राष्ट्रीय चरित्र की एक कठिन परीक्षा है और इससे निपटने के लिए शांति, धैर्य और जन-जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी सरकार अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में उत्पन्न बाधाओं को दूर करने के लिए निरंतर काम कर रही है। उन्होंने कहा, "आपूर्ति श्रंखलाओं में आई बाधाओं को हम कैसे दूर कर सकते हैं, यह पता लगाने के लिए भी लगातार प्रयास जारी हैं।" खाड़ी देशों के नेताओं से पीएम मोदी कर रहे बात 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री ने कई वैश्विक नेताओं से बात की है। संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी ने सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, फ्रांस, मलेशिया, इजरायल और ईरान के नेताओं के साथ फोन पर बातचीत की है। होर्मुज से बहुत कम जहाजों को गुजरने की अनुमति ईरान ने इजरायल और कई खाड़ी पड़ोसी देशों पर हमला करके जवाबी कार्रवाई की है। ईरान होर्मुज स्ट्रेट को नियंत्रित करता है, जो एक प्रमुख शिपिंग मार्ग है और जिसके जरिए दुनिया की 20 प्रतिशत ऊर्जा का परिवहन होता है। संघर्ष शुरू होने के बाद से ईरान ने बहुत कम जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी है।  

राहत या नया बोझ? भोपाल में प्रॉपर्टी टैक्स स्थिर, सीवेज और जल कर बढ़ने के संकेत

भोपाल आईएसबीटी स्थित निगम मुख्यालय में 23 मार्च को होने वाली नगर निगम परिषद की बैठक में शहर सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपना बजट पेश करेगी। महापौर मालती राय के कार्यकाल का यह चौथा बजट है। सूत्रों की मानें तो इस बार का बजट चार हजार करोड़ रुपये से अधिक का होगा। वहीं, बैठक में सीवेज और जल कर बढ़ाया जा सकता है, जिससे शहरवासियों पर एक बार फिर आर्थिक बोझ बढ़ने की संभावना है। जबकि राहत की बात यह है कि निगम इस बार संपत्ति कर में बढ़ोतरी करने नहीं जा रहा है। टैक्स में 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि की तैयारी जानकारी के अनुसार, योजना आयोग ने आमदनी बढ़ाने के लिए हर साल टैक्स बढ़ाने की सलाह दी है। निगम प्रबंधन योजना आयोग की अनुशंसा को आधार बनाकर इस बजट में भी जल और सीवेज जैसे मदों के कर में 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि करने की तैयारी में है। अब नगर परिषद की बैठक में बहुमत के आधार पर फैसला होगा। निगम प्रशासन का दावा है कि वर्तमान में निगम को सीवेज प्रबंधन पर होने वाले खर्च की तुलना में वसूली काफी कम हो रही है, जिसकी भरपाई इस वृद्धि के जरिए करने की योजना है। बढ़ते खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार के लिए यह जरूरी कदम है। शादी गार्डन और अस्पतालों पर बढ़ेगा बोझ सीवेज टैक्स में बढ़ोतरी से शादी गार्डन और अस्पतालों पर अधिक बोझ डाले जाने की संभावना है। बता दें कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में करों में बढ़ोतरी कर जनता पर भारी बोझ डाला गया था, जिसमें संपत्ति कर में 10 प्रतिशत और जल एवं कचरा शुल्क में 15-15 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी। इस बार भी इंफ्रास्ट्रक्चर और अमृत 2.0 पर विशेष फोकस रहेगा। अमृत 2.0 में बड़े प्रोजेक्ट्स को इस योजना के तहत गति दी जाएगी। राजधानी के एंट्री पॉइंट्स पर हेरिटेज गेट, मुख्य सड़कों का सौंदर्यीकरण और पार्कों के विकास कार्य के साथ ही सड़क, बिजली, पानी, नाला निर्माण और तालाबों के संरक्षण की योजना भी शामिल है। इसके अलावा गीता भवन का निर्माण और नए कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के निर्माण की योजना भी शामिल है। आदमपुर खंती और कचरा निष्पादन का प्रस्ताव बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा शहर के गले की फांस बने आदमपुर खंती का "लेगेसी वेस्ट" (पुराना कचरा) है। इसमें आदमपुर खंती के करीब 33 एकड़ में फैले लगभग 6,47,825 मीट्रिक टन कचरे के निष्पादन का प्रस्ताव है। इसे खत्म करने के लिए जारी किए टेंडर में मेसर्स सौराष्ट्र इनवायरो प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने 55 करोड़ 54 लाख रुपये की न्यूनतम दर दी है। शहर में 14 नए पार्किंग स्थल और कंडम वाहनों की विदाई ट्रैफिक के दबाव और राजस्व बढ़ाने के लिए निगम शहर में 14 नए पार्किंग स्थल शुरू करने जा रहा है। इसमें सुभाष नगर, केंद्रीय विद्यालय, बोर्ड ऑफिस चौराहा, डीआरएम ऑफिस और अलकापुरी जैसे मेट्रो स्टेशनों के आसपास की जगहों को पार्किंग के लिए चिह्नित किया गया है। इसके अलावा न्यू मार्केट और मनीषा मार्केट जैसे व्यस्त इलाकों में भी पार्किंग शुरू होगी। साथ ही, निगम अपने बेड़े से 145 कंडम वाहनों को हटाने की तैयारी में है। इनमें से 143 वाहन 15 साल की समय सीमा पूरी कर चुके हैं, जबकि दो वाहन खराब स्थिति के कारण कंडम किए जा रहे हैं।

मौत के मुंह से बची बच्ची: दूसरी मंजिल से गिरते ही 17 साल के लड़के ने थामा, वीडियो वायरल

इस्तांबुल इस्तांबुल के फातिह जिला में एक दिल छू लेने वाली घटना सामने आई है, जहां एक 2 साल की बच्ची की जान बाल-बाल बच गई। जानकारी के अनुसार, छोटी बच्ची दोहा मुहम्मद अपने घर की दूसरी मंजिल की खिड़की के पास खेल रही थी। उसी दौरान वह संतुलन खोकर नीचे गिरने लगी। लेकिन ठीक उसी समय पास में मौजूद 17 वर्षीय युवक  ने स्थिति को भांप लिया। वह तुरंत खिड़की के नीचे आकर खड़ा हो गया और जैसे ही बच्ची गिरी, उसने उसे हवा में ही पकड़ लिया। हालांकि घटना काफी पुरानी है लेकिन इसका वीडियो वर्तमान में फिर से तेजी से वायरल हो रहा है।   पास लगे एक सिक्योरिटी कैमरे के वीडियो में दिखता है कि एक छोटी बच्ची नीचे गिर रही है और लड़का ज़बात उसे हवा में ही लपक लेता है। इसके बाद, जब वह बच्ची को अपनी बाहों में थामे होता है, तो आस-पास खड़े लोग उसे घेर लेते हैं। फ़्यूज़ी ज़बात ने बताया कि "मैं सड़क के ऊपरी हिस्से से नीचे की ओर जा रहा था। मैंने देखा कि एक आदमी ऊपर की ओर देख रहा है; इस बात ने मेरा ध्यान खींचा," चश्मदीद इज़्ज़त बायर ने DHA को बताया। "और मैंने देखा कि वह छोटी बच्ची बस गिरने ही वाली थी। और इस 'शेर' जैसे इंसान ने उस बच्ची को हवा में ही लपक लिया और उसे उसके परिवार से मिला दिया।" इस साहसिक कदम के कारण बच्ची को एक भी चोट नहीं आई और वह पूरी तरह सुरक्षित बच गई। यह पूरी घटना पास लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। बताया जा रहा है कि उस समय बच्ची की मां रसोई में खाना बना रही थीं और बच्ची खेलते-खेलते खिड़की तक पहुंच गई थी।बच्ची के परिवार ने युवक को “हीरो” बताते हुए उसका धन्यवाद किया और आभार स्वरूप 200 तुर्की लीरा का इनाम भी दिया। वहीं, युवक ने बेहद सादगी से कहा कि उसने सिर्फ इंसानियत के नाते और “अल्लाह के लिए” यह काम किया। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि सही समय पर उठाया गया एक छोटा कदम किसी की जिंदगी बचा सकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी को दी बधाई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी को आज भारत में सर्वाधिक समय तक शासन प्रमुख के रूप में सेवा का कीर्तिमान स्थापित करने पर बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत के नागरिक प्रधानमंत्री  मोदी के प्रति निरंतर स्नेह, विश्वास और समर्थन की भावना को अभिव्यक्त कर रहे हैं। प्रधानमंत्री  मोदी ने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री  पवन कुमार चामलिंग के 8,930 दिनों के शासन करने के रिकार्ड को पीछे छोड़ा है। उनके सार्वजनिक जीवन के 8931 दिन गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के रूप में दर्शाते हैं कि उन्होंने राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत पर कार्य करते हुए अपनी भूमिका को यादगार बनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत के ध्येय के साथ गरीब कल्याण से लेकर वैश्विक मंच पर हर क्षेत्र में देश की प्रतिष्ठा बढ़ी है। प्रधानमंत्री  मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व ने देश को विकास और सुशासन की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया है कि मां भगवती प्रधानमंत्री  मोदी को ऊर्जावान बनाए रखें। संपूर्ण विश्व में भारत की साख बढ़ाने वाले हमारे प्रधानमंत्री  मोदी जी के नेतृत्व में हमारा राष्ट्र निरंतर प्रगति, समृद्धि और वैभव के पथ पर अग्रसर बना रहेगा। प्रधानमंत्री  मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री पद के दायित्व की वर्षवार अवधि की चर्चा करें तो वे वर्ष 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे। वर्ष 2002 में गुजरात विधानसभा के निर्वाचन के बाद वे दूसरी बार, वर्ष 2007 में तीसरी बार और वर्ष 2012 में चौथी बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने।  मोदी वर्ष 2014 के लोक सभा चुनाव में पूर्ण बहुमत प्राप्त कर प्रधानमंत्री बने। वर्ष 2019 में पहले से भी बड़े जनादेश के साथ उनकी वापसी हुई और वे दूसरी बार प्रधानमंत्री बने।  मोदी ने वर्ष 2024 में तीसरी बार प्रधानमंत्री बन कर इतिहास रचा। 

जिले में शिक्षा का बड़ा आयोजन: 22 मार्च को होगी साक्षरता परीक्षा, हजारों शिक्षार्थी तैयार

बिलासपुर जिलेभर में उल्लास साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत आकलन परीक्षा आयोजित की जाएगी, इस परीक्षा के सफल संचालन के लिए जिले में 961 परीक्षा केंद्र  बनाए गए हैं, जिसमें 10705 पुरुष एवं 29348 महिला तथा 12 ट्रांसजेंडर शामिल* परीक्षा का समय प्रातः 10 बजे से शाम 05 बजे तक  निर्धारित किया गया है।     जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण के अनुसार, यह परीक्षा उन 15 वर्ष से अधिक आयु  के शिक्षार्थियों के लिए आयोजित की जा रही है, जिन्होंने उल्लास साक्षरता केंद्रों  में पढ़ना-लिखना तथा सामान्य गणित (जोड़, घटाव, गुणा, भाग) का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। जिला परियोजना अधिकारी ने बताया कि शिक्षार्थियों के नियमित कार्य को ध्यान में रखते हुए परीक्षा के समय को लचीला बनाया गया है। प्रतिभागी अपने रोजी मजदूरी कार्य से समय निकालकर सुबह 10 बजे से शाम 05 बजे के बीच किसी भी समय परीक्षा केन्द्रों में पहुँच कर परीक्षा देकर अपनी साक्षर होने का आकलन करा सकते हैं।जिला प्रशासन ने सभी परीक्षा केन्द्रों में आवश्यक व्यवस्थाओं के साथ केंद्राध्यक्षों तथा पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए ब्लॉक और ग्राम स्तर पर समन्वय समितियाँ सक्रिय की गई हैं।इस हेतु सयुंक्त संचालक शिक्षा , ने विशेष ऑब्जर्वर की नियुक्ति की है तथा जिला स्तर पर भी जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी विकासखंडों के लिये निरिक्षण दल बनाए है |    जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि इस परीक्षा का उद्देश्य शिक्षार्थियों के बुनियादी पढ़ाई-लिखाई और संख्यात्मक  ज्ञान का मूल्यांकन करना है, ताकि उन्हें साक्षर होने का प्रमाण पत्र दिया जा सके मूल्यांकन परीक्षा में पढ़ना लिखना एवं सामान्य गणित का आकलन किया जाता है  | सभी परीक्षा केन्दों में प्रश्न पत्रों का सील बंद पैकेट केंद्राध्यक्षों की निगरानी में रखवाई जा चुकी है | परीक्षा में अधिक से अधिक उपस्थिति के लिये चयनित ग्राम पंचायतों के सचिव आँगन वाडी कार्यकर्ता मितानिन पंच सरपंच सभी से कलेक्टर बिलासपुर ने अपील की है कि अधिक से अधिक परीक्षा केन्द्रों में ले जाकर आकलन परीक्षा में शामिल कराएं कोटवार द्वारा दो दिन मुनादी और प्रभात फेरी तथा गांव के दीवारों में नारा लेखन के माध्यम से आकलन परीक्षा के लिये वातावरण निर्माण किया गया है कलेक्टर बिलासपुर ने आम नागरिकों से अपील की है कि जिले के समस्त असाक्षरों को परीक्षा केन्द्र में ले जाकर परीक्षा में शामिल करने प्रेरित करें।

नवरात्रि में कन्या पूजन का खास महत्व: इन चीजों का दान दिलाएगा माता रानी का आशीर्वाद

हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है, और इसमें भी महाष्टमी यानी आठवें दिन का अपना एक अलग आध्यात्मिक वजन होता है. यह दिन शक्ति स्वरूपा मां महागौरी को समर्पित है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से कन्या पूजन करने पर मां दुर्गा का साक्षात आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन से दरिद्रता का नाश होता है. साल 2026 में दुर्गा अष्टमी 26 मार्च, गुरुवार के दिन मनाई जाएगी. अगर आप भी मां महागौरी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो कन्या पूजन के दौरान कुछ विशेष चीजों का दान करना आपके भाग्य के द्वार खोल सकता है क्यों किया जाता है कन्या पूजन? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी कन्याओं में देवी शक्ति का वास माना जाता है. कन्या पूजन के दौरान 2 से 10 वर्ष तक की बच्चियों को नवदुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है. उन्हें सम्मानपूर्वक भोजन कराना और दान देना बहुत ही शुभ फलदायी माना जाता है. कन्या पूजन में क्या खिलाना चाहिए? कन्या पूजन में पारंपरिक रूप से ये चीजें परोसी जाती हैं जैसे, पूड़ी, काले चने और सूजी का हलवा. इसे भोग प्रसाद माना जाता है. कन्या पूजन में किन चीजों का दान करना शुभ होता है? लाल वस्त्र या चुनरी लाल रंग मां दुर्गा का प्रिय माना जाता है. कन्याओं को लाल चुनरी या कपड़े दान करने से विशेष पुण्य मिलता है. फल और मिठाई फल और मिठाइयों का दान करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. कंघी, रिबन और चूड़ियां कन्याओं को श्रृंगार की चीजें देना बहुत शुभ माना जाता है. इससे मां महागौरी की कृपा प्राप्त होती है. पैसे (दक्षिणा) कन्या पूजन के बाद श्रद्धानुसार दक्षिणा देना आवश्यक माना गया है. यह पूजा को पूरा करता है. खिलौने और स्टेशनरी छोटी बच्चियों को खिलौने, कॉपी, पेंसिल आदि देना भी पुण्यदायी माना जाता है. नारियल नारियल को शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. कन्याओं को नारियल देने से घर में खुशहाली आती है. कन्या पूजन का महत्व कन्या पूजन को नवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना गया है. यह न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज में बेटियों के सम्मान और महत्व को भी दर्शाता है. मान्यता है कि सच्चे मन से किया गया कन्या पूजन जीवन की सभी बाधाओं को दूर करता है और घर में सुख-शांति बनाए रखता है.

व्यासपीठ की पूजा-अर्चना कर लिया आशीर्वाद, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना

रायपुर  चैत्र नवरात्रि की पावन चतुर्थी तिथि पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय कबीरधाम जिले के ग्राम जुनवानी नर्मदा धाम में आयोजित पंच कुंडीय  रुद्र महायज्ञ एवं  शिव महापुराण कथा में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ विधि-विधान से यज्ञ की परिक्रमा की तथा व्यासपीठ की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री  साय ने इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान प्रदेशवासियों की सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए ईश्वर से प्रार्थना की। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं का आत्मीय अभिवादन किया और सभी को चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि जिला साहू संघ द्वारा आयोजित पंच कुंडीय  रुद्र महायज्ञ एवं  शिव महापुराण कथा में शामिल होकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने कहा कि आज इस पावन यज्ञ में शामिल होने का अवसर मिलना उनके लिए बड़े सौभाग्य की बात है। मुख्यमंत्री  साय ने अपने संबोधन में कहा कि साहू समाज एक विशाल, शिक्षित और समृद्ध समाज है, जो सदैव समाज को दिशा देने का कार्य करता रहा है। उन्होंने दानवीर भामाशाह का उल्लेख करते हुए कहा कि वे इसी समाज से थे, जिन्होंने अपने त्याग और दान से इतिहास में अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने आगे कहा कि रायगढ़ में पूज्य  सत्यनारायण बाबा भी इसी समाज से हैं, जो पिछले 28 वर्षों से खुले आसमान के नीचे तपस्या में लीन हैं। ऐसे महान संत समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई समाज संगठित होकर कार्य करता है, तो उसका लाभ केवल उस समाज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उससे पूरे राष्ट्र का विकास होता है। उन्होंने कहा कि साहू समाज इसी तरह संगठित और सशक्त होकर निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता रहेगा।  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि यहां आयोजित रुद्र महाशिव यज्ञ एवं कथा से छत्तीसगढ़ के श्रद्धालुओं को विशेष आशीर्वाद प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ संत-महात्माओं की तपोभूमि रही है। यह माता कौशल्या का मायका और प्रभु राम का ननिहाल है। भगवान राम ने अपने वनवास का अधिकांश समय इसी धरती पर बिताया है, वहीं माता शबरी का पावन स्थान भी छत्तीसगढ़ में स्थित है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि व्यासपीठ पर विराजमान संत-महात्माओं की कृपा से प्रदेश में सवा लाख शिवलिंग स्थापना का पावन कार्य भी किया जा रहा है, जो आध्यात्मिक चेतना को और सशक्त करेगा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा “रामलला दर्शन योजना” संचालित की जा रही है। छत्तीसगढ़ के लोग भगवान राम को अपना भांचा मानते हैं, इसलिए उन्हें अयोध्या धाम में रामलला के दर्शन कराने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की गई है। अब तक 40 हजार से अधिक रामभक्त अयोध्या जाकर दर्शन कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि “मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना” के तहत प्रदेश के बुजुर्गों को देशभर के प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा कराई जा रही है, ताकि वे अपने जीवन में धार्मिक आस्था के इन पवित्र स्थलों का दर्शन कर सकें। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में सरकार ने कई महत्वपूर्ण विधेयक प्रस्तुत किए हैं। इनमें छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक प्रमुख है, जिसे समाज में बढ़ती संवेदनशील परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लाया गया है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि पिछले कुछ समय से समाज के कमजोर वर्गों को निशाना बनाकर प्रलोभन, दबाव और भ्रम फैलाकर धर्मांतरण कराने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे सामाजिक ताने-बाने पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस गंभीर विषय को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सख्त और स्पष्ट प्रावधानों के साथ यह विधेयक लागू करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि इस कानून के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी प्रकार के छल, प्रलोभन या दबाव के जरिए धर्म परिवर्तन न हो सके। साथ ही विवाह के माध्यम से धर्मांतरण की आड़ में हो रहे दुरुपयोग पर भी अब पूर्ण विराम लगेगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि धर्म की रक्षा और समाज की सुरक्षा ही सरकार का संकल्प है, और इसी उद्देश्य के साथ यह विधेयक लाया गया है, ताकि प्रदेश में सामाजिक सद्भाव और शांति बनी रहे। उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि जुनवानी स्थित नर्मदा धाम के नर्मदा कुंड में स्नान करना, पूजा-अर्चना करना और ऐसे धार्मिक आयोजनों में शामिल होना क्षेत्रवासियों के लिए हमेशा से आस्था और प्रतीक्षा का विषय रहा है। उन्होंने कहा कि इस पवित्र स्थल से लोगों की गहरी भावनात्मक और धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को सशक्त करते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मकता, एकता और सद्भाव का संदेश भी देते हैं।  पंडरिया विधायक मती भावना बोहरा ने अपने संबोधन में कहा कि जब भी मद्भागवत, शिव महापुराण कथा एवं यज्ञ जैसे आयोजन होते हैं, तो सभी को इसमें अवश्य शामिल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अक्सर घर के बुजुर्ग ही कथा सुनने आते हैं, लेकिन बच्चों और युवाओं की सहभागिता भी उतनी ही जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ी हमारी सनातन संस्कृति और परंपराओं से परिचित हो सके और उसे आगे बढ़ा सके। इस अवसर पर पूर्व सांसद  अभिषेक सिंह, पूर्व विधायक डॉ. सियाराम साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी पंच कुंडीय  रुद्र महायज्ञ की परिक्रमा कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया।

होर्मुज में बढ़ा तनाव: ईरान ने F-15 फाइटर जेट को बनाया टारगेट

तेहरान अमेरिका के एफ-35 फाइटर जेट को निशाना बनाने के बाद ईरान ने रविवार को एक और फाइटर जेट पर हमला किया है। ईरान का दावा है कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के पास उड़ रहे दुश्मन देश के F-15 फाइटर जेट को निशाना बनाया है। हालांकि, अभी यह देखा जा रहा है कि जेट को कितना नुकसान पहुंचा है। ईरान के ज्वाइंट एयर डिफेंस हेडक्वार्टर के अनुसार, ईरान के दक्षिणी तटों के पास, होर्मुज स्ट्रेट के आसपास एक दुश्मन F-15 फाइटर जेट का पता लगाया गया और उस पर नजर रखी गई। इसके बाद, सेना की वायु रक्षा प्रणालियों द्वारा दागी गई सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल से इस विमान को निशाना बनाया गया। सामने आए वीडियो में एक फाइटर जेट को निशाना बनाया जाते देखा जा सकता है। हालांकि, अभी ईरान ने ही यह हमले का दावा किया है, लेकिन अमेरिका की ओर से पुष्टि नहीं हुई है। पिछले दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी दी थी कि वह अगले 48 घंटे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोल दे, वरना अमेरिका उसके बिजली संयत्रों पर हमला करके उसे तबाह कर देगा। ईरान के हवाई क्षेत्र में एक लड़ाकू अभियान के दौरान, अमेरिका के एक स्टील्थ फाइटर जेट एफ-35 को ईरान ने निशाना बनाया था, जिससे उसे काफी नुकसान पहुंचा। विमान को मिडिल ईस्ट स्थित एक सैन्य ठिकाने पर आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी। यह घटना मौजूदा क्षेत्रीय संघर्ष में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। हवा में हुई गंभीर घटना के बावजूद, सैन्य पायलट ने क्षतिग्रस्त विमान को सफलतापूर्वक वापस बेस तक पहुंचा दिया। पायलट इस मुश्किल हालात से सुरक्षित निकल आया है और मेडिकल जांच के दौरान उसकी हालत स्थिर बनी हुई है। एफ-35 फाइटर जेट पांचवीं पीढ़ी का 'लाइटनिंग II' स्टील्थ फाइटर है, जिसकी हर यूनिट की कीमत 100 मिलियन डॉलर से भी ज्यादा है। इन जेट्स को रडार की पकड़ से बचने और दुश्मन के भारी सुरक्षा वाले हवाई क्षेत्र के काफी अंदर तक जाकर काम करने के लिए डिजाइन किया गया है।

धार्मिक आस्था के अनुरूप उपवास एवं पूजा-अर्चना हेतु की गई व्यवस्था

रायपुर नवरात्रि पर जेलों में आध्यात्मिक माहौल, बंदियों को मिली विशेष सुविधाएं छत्तीसगढ़ की सभी जेलों में नवरात्रि पर्व को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर परिरुद्ध बंदियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, जिससे वे धार्मिक आस्था के अनुरूप उपवास एवं पूजा-अर्चना कर सकें।          प्रदेश की जेलों में कुल 2397 बंदी नवरात्रि का उपवास कर रहे हैं, जिनमें 2125 पुरुष एवं 272 महिला बंदी शामिल हैं। यह आंकड़ा न केवल आस्था की गहराई को दर्शाता है, बल्कि जेलों में सकारात्मक और आध्यात्मिक वातावरण के सृजन का भी परिचायक है। इसमें रायपुर संभाग के 1140 बंदी, दुर्ग संभाग में 243 बंदी, बिलासपुर संभाग में 407 बंदी, सरगुजा संभाग में 361 बंदी, बस्तर संभाग में 246 बंदी अपनी आस्था अनुसार उपवास का पालन कर रहे हैं।        नवरात्रि के दौरान जेल प्रशासन द्वारा बंदियों को फलाहार, स्वच्छ पेयजल, पूजा सामग्री एवं निर्धारित समय पर आरती-पूजन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही, धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से बंदियों के मनोबल को सुदृढ़ करने और उनमें सकारात्मक सोच विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। यह पहल न केवल बंदियों की धार्मिक आस्था का सम्मान है, बल्कि उनके मानसिक एवं आध्यात्मिक पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।          विगत दिनों विधानसभा में उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री  विजय शर्मा ने बताया था कि जेलों को अब सजा घर नहीं बल्कि सुधार एवं पुनर्वास गृह के रूप में विकसित किया जा रहा है। जिसमें उन्हें विभिन्न कलाओं को सिखाकर आत्मनिर्भर बनाने के साथ समाज से जोड़ने और बेहतर जीवन के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है।

क्या आप भी कर रहे हैं ये वास्तु भूलें? पैसों की कमी का बन सकती हैं बड़ी वजह

वास्तु शास्त्र को भारतीय संस्कृति में घर और जीवन की ऊर्जा को संतुलित करने का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है. मान्यता है कि घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह व्यक्ति की तरक्की, सुख-समृद्धि और आर्थिक स्थिति को मजबूत करता है. वहीं, अनजाने में की गई कुछ छोटी-छोटी गलतियां आर्थिक तंगी, कर्ज और मानसिक तनाव का कारण बन सकती हैं. आइए वास्तु के अनुसार जानते हैं ऐसी ही आम गलतियों के बारे में, जिन्हें समय रहते सुधारना बेहद जरूरी होता है. मेन दरवाजे पर अंधेरा रहना घर का मुख्य द्वार मां लक्ष्मी का प्रवेश द्वार माना जाता है. यदि आपके घर के मेन गेट पर शाम के समय अंधेरा रहता है, तो यह नकारात्मकता को निमंत्रण देता है. किचन में रात को जूठे बर्तन छोड़ना आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर रात के बर्तन सुबह धोने के लिए छोड़ देते हैं. वास्तु के अनुसार, रसोई में जूठे बर्तन छोड़ने से मां अन्नपूर्णा नाराज होती हैं और घर में दरिद्रता का वास होने लगता है. नल से पानी का टपकना अगर आपके घर के किसी भी हिस्से का नल टपकता है, तो इसे वास्तु में बेहद अशुभ माना गया है. टपकता हुआ पानी धीरे-धीरे धन की बर्बादी का प्रतीक माना जाता है. उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में गंदगी घर की उत्तर-पूर्व दिशा को देवताओं का स्थान माना जाता है. इस दिशा में भारी सामान, कबाड़ या जूते-चप्पल रखना तरक्की के रास्तों को बंद कर देता है. बंद घड़ियां और टूटे शीशे घर में बंद पड़ी घड़ियां आपके समय (भाग्य) को भी रोक देती हैं. इसी तरह टूटा हुआ शीशा या दरार वाले बर्तन घर में नकारात्मक ऊर्जा फैलाते हैं, जिससे आर्थिक हानि होती है. शाम के समय झाड़ू लगाना धार्मिक और वास्तु मान्यताओं के अनुसार, सूर्यास्त के समय या उसके बाद घर में झाड़ू नहीं लगानी चाहिए. माना जाता है कि ऐसा करने से घर की लक्ष्मी बाहर चली जाती है.