samacharsecretary.com

लखनऊ के बड़े विकास प्रोजेक्ट्स को कैबिनेट से मिली मंजूरी, नई पहचान के लिए बनेगा कन्वेंशन सेंटर और फ्लाईओवर

लखनऊ में बड़े विकास प्रोजेक्ट्स को मिली कैबिनेट मंजूरी, कन्वेंशन सेंटर, हेरिटेज संरक्षण और फ्लाईओवर निर्माण से मिलेगी नई पहचान इंटरनेशनल एक्जीबिशन-सह-कन्वेंशन सेंटर के लिए पुनरीक्षित लागत को कैबिनेट स्वीकृति, लखनऊ में बनेगा अंतरराष्ट्रीय स्तर का आयोजन स्थल  रोशन-उद-दौला भवन और छतर मंजिल को पर्यटन की दृष्ट से किया जाएगा विकसित, दुबग्गा चौराहे पर फ्लाईओवर निर्माण को कैबिनेट मंजूरी   लखनऊ लोकभवन में सोमवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुनियादी ढांचे,  हेरिटेज संरक्षण और यातायात व्यवस्था को सशक्त बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं में लखनऊ के वृन्दावन योजना सेक्टर-15 में प्रस्तावित इंटरनेशनल एक्जीबिशन-सह-कन्वेंशन सेंटर के निर्माण के लिए पुनरीक्षित लागत को स्वीकृति प्रदान की गई है। साथ ही कैबिनेट फैसलों में राजधानी के ऐतिहासिक घरोहर के संरक्षण के उद्देश्य से रोशन-उद-दौला भवन और छतर मंजिल को ‘एडाप्टिव रि-यूज’ के तहत पीपीपी  मॉडल पर विकसित करने और परिवहन सुविधा के लिए दुबग्गा चौराहे पर फ्लाईओवर निर्माण करने की परियोजना की स्वीकृति शामिल हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में राजधानी लखनऊ में नागरिक सुविधाओं के विकास के लिए इंटरनेशनल एक्जीबिशन-सह-कन्वेंशन सेंटर की पुनरीक्षित लागत को स्वीकृति प्रदान की  गई है। कैबिनेट ने लखनऊ की वृन्दावन योजना, सेक्टर-15 में प्रस्तावित इंटरनेशनल एक्जीबिशन-सह-कन्वेंशन सेंटर के निर्माण के लिए पहले 1297.42 करोड़ रुपये की लागत को स्वीकृत किया था, लेकिन निविदा प्रक्रिया के दौरान लागत अधिक आने के कारण इसे संशोधित कर 1435.25 करोड़ रुपये को मंजूर दी गई है। इस लागत में जीएसटी, लेवी, कंटीजेंसी और सुपरविजन चार्ज सहित अन्य खर्च भी शामिल हैं। ईपीसी मोड पर बनने वाले इस अत्याधुनिक कन्वेंशन सेंटर में 10,000 लोगों की क्षमता वाला विशाल कन्वेंशन हॉल और 2,500 लोगों की क्षमता का ऑडिटोरियम बनाया जाएगा। साथ ही बड़े स्तर पर पार्किंग की सुविधा और सुरक्षा मानकों के अनुरूप भीड़ नियंत्रण व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।   इंटरनेशनल एक्जीबिशन-सह-कन्वेंशन सेंटर का निर्माण प्रदेश की राजधानी, लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय स्तर के डिफेंस एक्सपों जैसे आयोजनों के स्थल के रूप में की जा रही है। कन्वेंशन सेंटर के आसपास 5-स्टार और बजट होटल विकसित करने की भी योजना है, जिससे देश-विदेश से आने वाले आगंतुकों को बेहतर आवास सुविधाएं मिल सकें। साथ ही, यहां आयोजित होने वाले आयोजनों के दौरान भारी उपकरणों, मॉडलों के प्रदर्शन की भी व्यवस्था होगी। यह परियोजना लखनऊ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख आयोजन स्थल के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसी क्रम में योगी सरकार की ने लखनऊ की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रोशन-उद-दौला भवन और छतर मंजिल को ‘एडाप्टिव रि-यूज’ के तहत सार्वजनिक-निजी सहभागिता (पीपीपी) मॉडल पर विकसित करने को कैबिनेट ने मंजूर प्रदान की है। इसके लिए इन भवनों से संबंधित भूमि का स्वामित्व पर्यटन विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित करने का प्रस्ताव किया गया है। इन ऐतिहासिक इमारतों को हेरिटेज पर्यटन इकाइयों के रूप में विकसित कर राज्य में पर्यटन को नई दिशा देने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह भूमि हस्तांतरण अपवादस्वरूप किया जा रहा है और इसे भविष्य के लिए उदाहरण नहीं माना जाएगा। साथ ही लखनऊ की यातायात समस्या के समाधान के लिए भी एक महत्वपूर्ण परियोजना को मंजूरी दी गई है। इस क्रम में लखनऊ-हरदोई मार्ग पर स्थित दुबग्गा चौराहे पर 1,811.72 मीटर लंबा तीन लेन का फ्लाईओवर बनाया जाएगा। इस परियोजना की कुल लागत 305.31 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है, जिसे कैबिनेट द्वारा अनुमोदन प्राप्त हो चुका है। दुबग्गा चौराहा लखनऊ शहर का एक प्रमुख यातायात केंद्र है, फ्लाईओवर के निर्माण से इस क्षेत्र में ट्रैफिक जाम की समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि ये सभी परियोजनाएं लखनऊ को आधुनिक, सुव्यवस्थित और पर्यटन के दृष्टिकोण से आकर्षक शहर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

58 जिला मुख्यालयों के नगरीय निकायों का होगा समग्र विकास

नवयुग पालिका योजना को योगी कैबिनेट की मंजूरी 58 जिला मुख्यालयों के नगरीय निकायों का होगा समग्र विकास स्मार्ट सॉल्यूशन्स से डिजिटल गवर्नेन्स को मिलेगा बढ़ावा क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने की दिशा में बड़ा कदम लखनऊ  प्रदेश में स्मार्ट सिटी मिशन के विस्तार और संतुलित शहरी विकास को गति देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में “नवयुग पालिका योजना” को मंजूरी दे दी गई है। इस योजना के तहत 58 जिला मुख्यालयों के नगरीय निकायों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। राज्य सरकार ने पहली बार नगर निगमों से बाहर के नगरीय निकायों, विशेषकर जिला मुख्यालय स्थित नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों को प्राथमिकता देते हुए विकास की नई रूपरेखा तैयार की है। योजना के अंतर्गत 55 नगर पालिका परिषदों, 3 नगर पंचायतों तथा गौतमबुद्धनगर की दादरी नगर पालिका परिषद को शामिल किया गया है। 5 वर्षों में 2916 करोड़ रुपये का निवेश योजना के तहत प्रत्येक वर्ष 583.20 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की जाएगी, इस तरह 5 वर्षों (2025-26 से 2029-30) में कुल 2916 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। यह पूरी तरह राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित योजना है, जिसमें केंद्र सरकार की कोई भागीदारी नहीं होगी। नवयुग पालिका योजना के माध्यम से स्मार्ट सिटी की तर्ज पर डिजिटल गवर्नेन्स, ई-सेवाओं और तकनीकी समाधान को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे नागरिक सेवाएं अधिक पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी बनेंगी। आधारभूत ढांचे का उन्नयन और जीवन स्तर में सुधार योजना का मुख्य उद्देश्य नगरीय निकायों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, स्वच्छ एवं सुव्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराना तथा नागरिकों के जीवन स्तर (ईज ऑफ लिविंग) में सुधार लाना है। इसके तहत सड़कों, जल निकासी, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और अन्य नागरिक सुविधाओं का व्यापक विकास किया जाएगा। जिला मुख्यालयों को विकसित करने से विभिन्न मंडलों के बीच विकास असमानताओं को कम करने में मदद मिलेगी। इससे नगर निगमों से बाहर के क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और संतुलित शहरी विकास सुनिश्चित होगा। चयन और क्रियान्वयन की स्पष्ट व्यवस्था परियोजनाओं के चयन के लिए जनपद स्तर पर समितियों का गठन किया जाएगा, जबकि राज्य स्तरीय तकनीकी समिति द्वारा परीक्षण के बाद सक्षम स्तर से अनुमोदन दिया जाएगा। इसके बाद ही विकास कार्यों का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। जनसंख्या के आधार पर दो श्रेणियों में विभाजित किया निकाय प्रदेश के नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार शहरों के समग्र और संतुलित विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार बड़े नगर निगमों में स्मार्ट सिटी योजना के तहत आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, उसी तर्ज पर अब जिला मुख्यालय स्तर के नगर पालिका क्षेत्रों को भी विकसित किया जाएगा। “नवयुग पालिका योजना” इसी सोच का परिणाम है। इसके अंतर्गत उत्सव भवन, ऑडिटोरियम, प्रदर्शनी केंद्र, पार्कों का विकास तथा विद्युत व्यवस्था के आधुनिकीकरण जैसे कार्य कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि निकायों को उनकी जनसंख्या के आधार पर दो श्रेणियों (डेढ़ लाख से अधिक और डेढ़ लाख से कम आबादी) में विभाजित किया गया है, ताकि उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जा सके।

छत्तीसगढ़ में इतिहास रचा: पहली नौकायान स्पर्धा में 52 टीमों ने दिखाया जलवा, विजेता बना लाखपति

धमतरी प्रदेश में पहली बार गंगरेल बांध की शांत और मनोरम जलधारा पर ‘गंगरेल नौकायान उत्सव’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भव्य महानदी रिवर बोट चैंपियनशिप का सफल आयोजन हुआ, जिसमें मचान हाट प्वाइंट से गंगरेल ब्लू एडवेंचर स्पोर्ट्स प्वाइंट तक 1000 मीटर की चुनौतीपूर्ण दूरी तय करते हुए प्रतिभागियों ने अद्भुत संतुलन, गति और टीम वर्क का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता स्थल पर दर्शकों में उत्साह और रोमांच का अद्वितीय संगम देखने को मिला। धमतरी, कांकेर और बालोद के कुल 52 टीमों ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया, जिससे यह आयोजन क्षेत्रीय स्तर पर एक बड़े खेल महोत्सव के रूप में उभरा। प्रतियोगिता का शुभारंभ विधायक ओमकार साहू, महापौर रामू रोहरा और पूर्व विधायक रंजना साहू द्वारा हरी झंडी दिखाकर किया गया। इस दौरान कलेक्टर अविनाश मिश्रा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गजेन्द्र ठाकुर और अन्य गणमान्य नागरिक भी मौजूद थे। महिला प्रतिभागियों ने बढ़ाया आयोजन का गौरव इस प्रतियोगिता की सबसे खास विशेषता ग्रामीण अंचलों की महिला प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी रही। ग्राम तिर्रा की चयन बाई, सुमन और दिनेश्वरी निधार ने पारंपरिक लकड़ी की नाव में प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। उन्होंने न केवल प्रतिस्पर्धा को रोमांचक बनाया, बल्कि महिला सशक्तिकरण का भी संदेश दिया। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनका साहस और आत्मविश्वास सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टीमों को प्रदान किए गए पुरस्कार और ट्रॉफी प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टीमों को पुरस्कार और ट्रॉफी प्रदान किए गए:     प्रथम स्थान: बोट क्रमांक 4 (रोमार निषाद तिरी एवं जीतु निषाद) – ₹1,00,000     द्वितीय स्थान: बोट क्रमांक 1 (सत्वंत मंडावी एवं मिथलेश मंडावी, कोलियारी) – ₹50,000     तृतीय स्थान: बोट क्रमांक 10 (कोमल निषाद एवं महेश्वर कुरेटरी, तिर्रा) – ₹25,000 इसके अतिरिक्त, बोट क्रमांक 6 (पवनबाई निषाद एवं देवनबती निषाद, तिर्रा) को वेशभूषा पुरस्कार दिया गया, जबकि बोट क्रमांक 8 (रामनारायण नेताम एवं रिशीराम निषाद, सटी यारा) को सजावट पुरस्कार के रूप में सम्मानित किया गया, और दोनों के लिए ₹11,000 का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं, जिला प्रशासन ने महिला प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए उनके लिए ₹15,000, ₹10,000 और ₹5,000 के सांत्वना पुरस्कार की घोषणा की। विधायक ओमकार साहू ने कहा कि यह आयोजन क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और जल पर्यटन को नई पहचान देगा। महापौर रामू रोहरा ने इसे जिले के लिए गौरवपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि यह स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने कहा कि ऐसे आयोजनों से युवाओं में खेल और साहसिक गतिविधियों के प्रति रुचि बढ़ेगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। कार्यक्रम की शुरुआत में अतिथियों ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। मत्स्य विभाग ने 8 मछुआ समितियों को आइस बॉक्स वितरित किए, जिससे मत्स्य व्यवसाय में सहायता मिलेगी। इसके अलावा, वॉटर एंबुलेंस का शुभारंभ भी किया गया। पर्यटन और विकास को मिलेगी नई दिशा गौरतलब है कि ‘गंगरेल नौकायान उत्सव’ धमतरी जिले में पर्यटन, संस्कृति और खेल गतिविधियों के समन्वय का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है। यह आयोजन न केवल स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि गंगरेल क्षेत्र को राज्य के प्रमुख पर्यटन और एडवेंचर स्पोर्ट्स हब के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने ग्राम बद्दो में किया भोरमदेव सकरी फीडर नहर विस्तारीकरण कार्य का भूमिपूजन

11.49 करोड़ रुपए की नहर परियोजना से 6 गांवों के किसानों को मिलेगा सीधा लाभ 770 हेक्टेयर भूमि होगी सिंचित, किसानों की आय में होगी वृद्धि      रायपुर,  चैत्र नवरात्रि पंचमी की पावन तिथि के अवसर पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड अंतर्गत वनांचल ग्राम बद्दो में किसानों को बड़ी सौगात दी। उन्होंने 11.49 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले भोरमदेव सकरी फीडर नहर विस्तारीकरण कार्य का विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भूमिपूजन किया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूर्ण होने पर क्षेत्र के 6 गांवों के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। नहर विस्तारीकरण के माध्यम से लगभग 770 हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे किसानों की उत्पादन क्षमता में वृद्धि के साथ-साथ उनकी आय में भी बढ़ोतरी होगी। कार्यक्रम में पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण सदस्य भगत पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, नितेश अग्रवाल, उपाध्यक्ष जनपद पंचायत नन्द श्रीवास, राम किंकर वर्मा, लोकचंद साहू सहित जनप्रतिनिधि और ग्रामवासी उपस्थित रहे।     इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि भोरमदेव सकरी फीडर नहर के विस्तार से क्षेत्र के हजारों किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा। इस नहर से खेतों तक पानी आसानी से पहुंचेगा और खेती में सुधार होगा। उन्होंने बताया कि 770 हेक्टेयर जमीन को स्थायी सिंचाई की सुविधा मिलेगी, जिससे फसल अच्छी होगी और किसानों की आमदनी बढ़ेगी। इससे गांव की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि सरकार का मकसद सिर्फ निर्माण करना नहीं, बल्कि ऐसे काम करना है जिससे किसानों का जीवन बेहतर हो। उन्होंने कहा कि इस बड़ी परियोजना की शुरुआत यह दर्शाती है कि वर्तमान सरकार वनांचल क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता दे रही है। सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि दूरस्थ और पिछड़े क्षेत्रों तक भी विकास की योजनाएं पहुंचे और वहां के लोगों को इसका पूरा लाभ मिल सके।      उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि भोरमदेव सकरी फीडर नहर के विस्तारीकरण कार्य को सफल बनाने के लिए जन सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इस तरह की बड़ी परियोजनाएं तभी समय पर और बेहतर तरीके से पूरी हो पाती हैं, जब स्थानीय लोगों, विशेषकर किसानों का पूरा सहयोग मिलता है। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि यह नहर उनके ही हित में बनाई जा रही है। सभी गांवों के किसानों की सहभागिता और सहयोग से ही इस परियोजना को तेजी से पूरा किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि जब जनभागीदारी के साथ विकास कार्य होते हैं, तो उनका लाभ भी लंबे समय तक और प्रभावी रूप से मिलता है। उन्होंने अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण समय सीमा में निर्माण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने जिले में चल रहे विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्यों की विस्तृत जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में सड़क, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि हर क्षेत्र में संतुलित विकास हो और गांव-गांव तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचें। इसके लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं और अनेक कार्य तेजी से प्रगति पर हैं। योजना से बहुउद्देशीय लाभ        इस योजना से 635 हे. क्षेत्र में सिंचाई की कमी की पूर्ति सहित 770 हेक्टेयर रूपांकित क्षेत्र में खरीफ फसलों की सिंचाई होगी। असिंचित क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने पर कृषि भूमि की दरों में उन्नयन होगा। नहरों के सर्विस बैंक निर्माण से ग्रामीणों को आवागमन की सुविधा प्राप्त होगी। साथ ही, सिंचाई सुविधा मिलने से किसान अब एक से अधिक फसल लेने में सक्षम होंगे, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी होगी और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। यह योजना क्षेत्र के किसानों के लिए दीर्घकालीन रूप से लाभकारी साबित होगी और ग्रामीण विकास को नई दिशा मिलेगी। योजना से लाभन्वित ग्राम परियोजना के पूर्ण होने पर बाघुटोला, लाटा, खिरसाली, बद्दो, रघ्घुपारा एवं छपरी सहित कुल 6 ग्रामों के किसानों को सीधा लाभ प्राप्त होगा। इस नहर विस्तारीकरण के माध्यम से लगभग 770 हेक्टेयर कृषि भूमि में खरीफ सिंचाई की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इससे इन गांवों के किसानों को समय पर पानी उपलब्ध होगा, जिससे फसलों की पैदावार में वृद्धि होगी।    

रहमान डैकत की मय्यत पर रोने का था कठिन पल, सौम्या ने अक्षय को किया याद

मुंबई  फिल्म धुरंधर 2 बॉक्स ऑफिस पर गर्दा उड़ा रही है. आदित्य धर के निर्देशन में बनी फिल्म के सेकंड पार्ट में सौम्या टंडन का छोटा सा रोल है. उन्होंने अक्षय खन्ना की ऑनस्क्रीन पत्नी उल्फत का रोल प्ले किया है. सेकंड पार्ट में वो चंद मिनटों के सीन्स में दिखीं. एक्ट्रेस का कहना है उन्हें धुरंधर 2 में अक्षय खन्ना की कमी खली।  सौम्या को आई अक्षय खन्ना की याद वैरायटी इंडिया संग बातचीत में सौम्या ने बताया कि बतौर ऑडियंस जब उन्होंने धुरंधर 2 देखी, तो अपने ऑनस्क्रीन पति रहमान डकैत यानी अक्षय खन्ना को बेहद मिस किया. अपने सीन्स के बारे में बोलते हुए वो कहती हैं- वो इंटेंस सीन हैं. खासतौर पर रहमान डैकत की मय्यत वाला सीक्वेंस. वो बहुत कॉम्पलिकेटेड सीन था. क्योंकि मेरा किरदार उल्फत काफी गुस्से में है. वो सवाल उठा रही है. वो बेहद निराश है. मैं बस इतना कहना चाहूंगी कि धुरंधर में कई सीन्स ऐसे थे जहां सिर्फ आंखों से अपनी फीलिंग्स को बयां करना था।   सौम्या ने अक्षय खन्ना को लेकर कहा- धुरंधर के सेकंड पार्ट में मुझे उनकी कमी खली. एक दर्शक होने के नाते मैंने अक्षय खन्ना को मिस किया क्योंकि पहले पार्ट में वो आइटस्टैंडिंग थे. लेकिन यही फिल्म की स्टोरी थी. सेकंड पार्ट में कहानी रहमान डकैत की मौत के बाद आगे बढ़ती है।  सौम्या ने फिल्म की सक्सेस को लेकर कहा कि इसने नया बेंचमार्क सेट किया है. मूवी ने स्क्रीनप्ले राइटिंग और फिल्ममेकिंग को लेकर अभी तक के सेट अप्रोच को तोड़ा है. मूवी में दिखाई गई हिंसा अलग है. बैकग्राउंड म्यूजिक मजेदार है. हर सिंगल कैरेक्टर को सम्मान दिया गया है. फिल्म का सब्जेक्ट काफी पावरफुल है।  धुरंधर में अक्षय खन्ना और सौम्या की ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री को लोगों ने पसंद किया. दोनों जब-जब स्क्रीन पर आए, अपनी दमदार अपीयरेंस और एक्टिंग से ऑडियंस को तालियां बजाने पर मजबूर किया. सौम्या की बात करें तो उन्होंने कई टीवी शो में काम किया है. सुपरहिट शो 'भाभीजी घर पर हैं' में वो अनीता भाभी के रोल में थीं. इसके अलावा सौम्या ने रियलिटी शो डांस इंडिया डांस, एंटरटेनमेंट की रात को होस्ट किया है।   

योगी सरकार की नीतियों ने खोली युवा शक्ति के लिए उद्यमिता की राह

नव निर्माण के 9 वर्ष: एमएसएमई क्षेत्र में 3 करोड़ 11 लाख से अधिक को रोजगार योगी सरकार की नीतियों ने खोली युवा शक्ति के लिए उद्यमिता की राह  देश में सबसे ज्यादा 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां उत्तर प्रदेश में 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों के धरातल पर आने से सृजित हुए 60 लाख रोजगार के अवसर लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में यूपी सरकार ने गत 9 वर्षों में युवा शक्ति के लिए उद्यमिता की राह प्रशस्त की है। इसके लिए सीएम युवा जैसी योजनाओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ एमएसएमई सेक्टर को मजबूत किया गया, जिसका परिणाम यह है कि आज यह सेक्टर न सिर्फ अधिकाधिक युवाओं को रोजगार दे रहा है, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था की धुरी भी बना है। इसके अतिरिक्त राज्य में निवेश आमंत्रण के लिए योगी सरकार द्वारा उठाए गए ठोस कदमों ने भी युवाओं के लिए रोजगार के लाखों अवसर सुनिश्चित किए हैं। योगी सरकार की उद्योग समर्थित नीतियों का असर है कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में लगभग 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए हैं, जिनसे 1 करोड़ 10 लाख से अधिक युवाओं के लिए रोजगार और सेवायोजन के अवसर सृजित होने की संभावना बनी है। इनमें से लगभग 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं, जिनसे करीब 60 लाख रोजगार के अवसर तैयार हुए हैं। बड़े पैमाने पर निवेश आने से प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियां तेज हुई हैं, जिसका सीधा लाभ युवाओं को रोजगार के रूप में मिल रहा है। निवेश के साथ उद्योगों के विस्तार से प्रदेश में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। एमएसएमई बना रोजगार का मजबूत आधार प्रदेश में सूक्ष्म लघु और मध्यम (एमएसएमई) उद्यम क्षेत्र रोजगार सृजन का एक मजबूत आधार बनकर उभरा है। वर्तमान में प्रदेश में 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां हैं जो देश में सर्वाधिक हैं। एमएसएमई क्षेत्र के माध्यम से प्रदेश में 3 करोड़ 11 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। सरकार द्वारा इस क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराने जैसे कई कदम उठाए गए हैं। ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट) योजना को एमएसएमई से जोड़ने से छोटे उद्योगों को विस्तार मिला, जिससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है बल्कि ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर बढ़े हैं। स्वरोजगार योजनाओं से युवाओं को नई दिशा युवाओं को रोजगार देने के साथ साथ उन्हें स्वरोजगार की ओर प्रेरित करने के लिए भी कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के अंतर्गत अब तक 38 हजार से अधिक युवाओं को लाभान्वित किया गया है और 1097.10 करोड़ रुपये से अधिक की मार्जिन मनी वितरित की गई है। इसी तरह प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के अंतर्गत 32,936 लाभार्थियों को 1105.49 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी दी गई, जिससे 2 लाख 63 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के अंतर्गत 4 लाख 20 हजार से अधिक कारीगरों और पारंपरिक श्रमिकों को लाभान्वित किया गया है, जिससे उन्हें अपना हुनर आगे बढ़ाने में मदद मिली है।

योगी सरकार की योजना: अगले तीन सालों में 57,000 इंश्योरेंस सखियों का होगा निर्माण

योगी सरकार अगले तीन साल में तैयार करेगी 57 हजार बीमा सखी  – प्रदेश की सभी 57 हजार ग्राम पंचायतों में लागू होगी योजना, बीसी और बैंक सखी को बीमा सखी बनने में दी जा रही प्राथमिकता – बीमा सखी को हर माह स्टाइपेंड के साथ पॉलिसी कराने पर मिलेगा कमीशन लखनऊ  योगी सरकार ने पिछले नौ वर्षों में प्रदेश की महिलाओं को सशक्त करने की दिशा में अनेक बड़े कदम उठाए हैं। उन्हें आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं को लागू किया गया है। इसी क्रम में एलआईसी बीमा सखी योजना के जरिये अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाओं को जोड़ने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। योगी सरकार ने अगले तीन वर्षों में प्रदेश की सभी 57 हजार ग्राम पंचायतों में एलआईसी बीमा सखी को नियुक्त करने का निर्णय लिया है। इसके लिए उन्हें ट्रेनिंग के साथ स्टाइपेंड और पॉलिसी कराने पर कमीशन दिया जाएगा। इससे जहां प्रदेश की आधी आबादी आत्मनिर्भर होगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी संबल मिलेगा।  एलआईसी और दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के बीच हुआ एमओयू  उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की डायरेक्टर दीपा रंजन ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए एलआईसी बीमा सखी योजना चलाई जा रही है। इसके लिए भारतीय जीवन बीमा निगम और दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के बीच त्रिपक्षीय समझौता किया गया। इसके तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षित कर “बीमा सखी” के रूप में नियुक्त किया जा रहा है, जो ग्राम पंचायत स्तर पर बीमा उत्पादों का प्रचार-प्रसार, बिक्री और सेवा प्रदान कर रहीं हैं। उन्होंने बताया कि योगी सरकार ने अगले तीन वर्षों में 57 हजार ग्राम पंचायतों में एक-एक एलआईसी बीमा सखी तैयार करने का निर्णय लिया है, जिसे चरणबद्ध तरीके से धरातल पर उतारा जाएगा। योजना का उद्देश्य न केवल ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ना है, बल्कि गांव-गांव तक बीमा सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना भी है। अब तक 3 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए डायरेक्टर दीपा रंजन ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए यूपीएसआरएलएम ने 5,000 बीमा सखियों की नियुक्ति का लक्ष्य तय किया है। ऐसे में अब तक प्रदेश के 75 में से 65 जिलों से 3,397 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इनमें से 672 महिलाओं ने 25 घंटे का भर्ती-पूर्व प्रशिक्षण (आईसी-38) सफलतापूर्वक पूरा किया है। इसके अलावा 469 अभ्यर्थियों ने एनएसईटी के माध्यम से आयोजित आईआरडीएआई लाइसेंसिंग परीक्षा पास कर ली है और उन्हें आधिकारिक रूप से बीमा सखी नियुक्त किया जा चुका है। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं में लगभग 70 प्रतिशत की सफलता दर इस योजना की प्रभावशीलता को दर्शाती है। भर्ती, प्रशिक्षण और परीक्षा की प्रक्रिया लगातार जारी है, और मार्च 2026 तक अधिकतम नियुक्तियां सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। शेष 10 जिलों में भी भर्ती अभियान शुरू कर 75 जिलों में 100 प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित किया जाएगा। ब्लॉक स्तर पर मासिक भर्ती लक्ष्य तय किए जाएंगे, जिससे प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और तेज हो सके। वहीं योजना की निगरानी के लिए मिशन डायरेक्टर की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति गठित की गई है, जो नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा कर रही है। साथ ही एलआईसी के राज्य और जिला कार्यालयों तथा एसआरएलएम टीमों के बीच निरंतर समन्वय के माध्यम से प्रक्रिया को गति दी जा रही है। बीमा सखी की ट्रेनिंग के लिए तैयार किया जा रहा प्रशिक्षण कैलेंडर योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026–27 में 20,000 नई बीमा सखियों की नियुक्ति का लक्ष्य रखा है। अगले तीन वर्षों में प्रदेश की 57 हजार ग्राम पंचायतों में एक-एक बीमा सखी तैनात करने की योजना है। लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई रणनीतिक कदम उठाए जा रहे हैं। योजना में बीसी सखी, बैंक सखी और एफएल-सीआरपी जैसे कैडर को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे प्रशिक्षित और अनुभवी महिलाओं को तुरंत बीमा सखी के रूप में जोड़ा जा सकेगा। यह रणनीति ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाती है। प्रशिक्षण के लिए एलआईसी के एजेंट ट्रेनिंग सेंटर (एटीसी) और डिविजनल ट्रेनिंग सेंटर (डीटीसी) के साथ मिलकर जिला स्तर पर प्रशिक्षण कैलेंडर तैयार किए जा रहे हैं, जो अभ्यर्थी परीक्षा में असफल हो जाते हैं, उनके लिए रिफ्रेशर ट्रेनिंग की भी व्यवस्था की जा रही है। साथ ही ब्लॉक और जिला स्तर पर अस्थायी एनएसईआईटी परीक्षा केंद्र स्थापित करने की योजना है, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं परीक्षा दे सकें। बीमा सखी को पहले साल हर माह दिया जाएगा 7 हजार स्टाइपेंड बीमा सखी बनने वाली महिलाओं को पहले साल हर महीने 7 हजार स्टाइपेंड दिया जाएगा, साथ ही बीमा पॉलिसी कराने पर उन्हें कमीशन भी मिलेगा। इसके अलावा दूसरे साल 6 हजार और तीसरे साल हर माह 5 हजार स्टाइपेंड दिया जाएगा। इससे उनकी आय में स्थायी वृद्धि होगी। इसके अलावा डिजिटल उपकरण, नियमित मेंटरिंग और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली बीमा सखियों को जिला और राज्य स्तर पर सम्मानित करने की भी योजना है, जिससे अन्य महिलाओं को प्रेरणा मिलेगी और प्रतिस्पर्धात्मक माहौल बनेगा। योजना की पारदर्शिता और प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए इसे यूपीएसआरएलएम के मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (एमआईएस) से जोड़ा जा रहा है। इससे राज्य स्तर पर सभी बीमा सखियों की नियुक्ति, कार्य और प्रदर्शन की निगरानी आसान होगी।

योगी कैबिनेट ने सेफ रि-यूज ट्रीटेड वाटर पॉलिसी को दी मंजूरी

यूपी में ‘री-यूज वाटर’ का पीने के अतिरिक्त कामों में होगा इस्तेमाल योगी कैबिनेट ने सेफ रि-यूज ट्रीटेड वाटर पॉलिसी को दी मंजूरी घरों और उद्योगों में उपयोग किए गए पानी का शोधन कर हो सकेगा दोबारा उपयोग निर्माण, बागवानी और सिंचाई में बढ़ेगा उपयोग, ड्यूल पाइप सिस्टम से घरों तक पहुंचेगा नॉन-ड्रिंकिंग वॉटर लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए शोधित जल (ट्रीटेड वॉटर) के सुरक्षित पुनः उपयोग के लिए नई नीति लागू करने की तैयारी कर ली है। इस नीति का उद्देश्य घरों और उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट जल को शोधित कर दोबारा उपयोग में लाना है, जिससे पेयजल संसाधनों पर दबाव कम हो सके। प्रदेश में सिंचाई,  घरेलू,  औद्योगिक और ऊर्जा क्षेत्रों में पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सरकार ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) के जरिए शोधित जल के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। नीति के तहत शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में निकलने वाले अपशिष्ट जल को ट्रीट कर पहले चरण में नगर निकाय उपयोग, निर्माण कार्य, बागवानी और सिंचाई में इस्तेमाल किया जाएगा। दूसरे चरण में उद्योग, कृषि और रेलवे जैसे क्षेत्रों में इसका विस्तार होगा। वहीं तीसरे चरण में ड्यूल पाइप सिस्टम के जरिए घरों तक गैर-पीने योग्य उपयोग के लिए पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। योगी सरकार का लक्ष्य है कि तकनीक और नवाचार के माध्यम से जल प्रबंधन को मजबूत बनाया जाए। इस पहल से जहां एक ओर स्वच्छ पेयजल की बचत होगी, वहीं दूसरी ओर जल निकायों में प्रदूषण भी कम होगा। इससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और ऊर्जा खपत में भी कमी आएगी।

कठिन राह, अटूट विश्वास: 282 सीढ़ियां चढ़कर होते हैं चिलाय माता के पावन दर्शन

कोटपूतली-बहरोड़ कोटपूतली-बहरोड़ जिले के सरूंड गांव में स्थित चिलाय माता मंदिर स्थानीय श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर लगभग 650 फीट ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है, जहां तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 282 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। मुख्य प्रवेश के बाद सात द्वारों को पार कर भक्त माता के दर्शन करते हैं।  पांडवों से जुड़ी मान्यता स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान की थी। यहां विराजमान चिलाय माता को ग्रामीण क्षेत्रों में रोगों और संकटों से रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है।   इतिहास और मान्यताओं का उल्लेख मंदिर के महंत नंदकिशोर शर्मा के अनुसार, मुगल काल में सम्राट अकबर ने इस प्रतिमा की शक्ति की परीक्षा लेने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो सके। बाद में यहां एक गुंबद का निर्माण करवाया गया।   परिसर में अन्य देवस्थल और परंपराएं मंदिर परिसर में एक पीपल का पेड़ स्थित है, जिस पर श्रद्धालु कलावा बांधकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इसके अलावा चौंसठ योगिनियां, भैरू बाबा और शनिदेव के मंदिर भी यहां स्थापित हैं, जिन्हें मुख्य मंदिर की रक्षा करने वाला माना जाता है। यहां माता को मदिरा का भोग लगाने की परंपरा भी प्रचलित है। नवरात्र और मेलों का विशेष महत्व नवरात्र के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। अष्टमी और नवमी के दिन विशेष मेला आयोजित होता है, जिसमें दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए आते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि सरूंड माता करीब 100 गांवों की रक्षा करती हैं। ग्रामीणों के अनुसार, माता की कृपा से गांव में बीमारियों का प्रभाव नहीं पड़ता। कोरोना काल के दौरान जनहानि नहीं होने को भी इसी आस्था से जोड़ा जाता है। दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सीढ़ियों पर फाइबर शेड और रेलिंग लगाई गई है। पहाड़ी तक सामग्री पहुंचाने के लिए रोप-वे ट्रॉली की व्यवस्था भी की गई है। सरूंड माता को कई समाजों द्वारा कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है। जयपुर, दिल्ली, सीकर, अलवर, नारनौल, पाटन और कोलकाता सहित विभिन्न स्थानों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मंदिर में मुंडन, जात, जलवा और भंडारे जैसे धार्मिक आयोजन भी आयोजित किए जाते हैं।

किराना दुकान के बाहर झगड़ा बना गोलीकांड: पामगढ़ में रिटायर्ड फौजी की पिस्टल से युवक जख्मी

जांजगीर-चांपा जांजगीर-चांपा जिले के थाना पामगढ़ क्षेत्र में सोमवार सुबह करीब 10 बजे एक मामूली विवाद ने अचानक हिंसक रूप ले लिया। विकास नगर निवासी शैलेंद्र साहू अपने कुछ साथियों के साथ हिमांशु किराना स्टोर के पास पहुंचे और वहां कथित रूप से गाली-गलौज करने लगे। दुकान संचालक हिमांशु श्रीवास ने इसका विरोध किया तो दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और इसी दौरान हिमांशु श्रीवास के भाई रिटायर्ड फौजी गुलशन श्रीवास ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल से फायरिंग कर दी। गोली पंकज कश्यप के जांघ के पास पैर में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायल पंकज कश्यप को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पामगढ़ ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बिलासपुर रेफर कर दिया गया। फिलहाल उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। सूचना मिलते ही पामगढ़ पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी गुलशन श्रीवास, जो रिटायर्ड आर्मी सिग्नल कोर का हवलदार बताया जा रहा है, उसके भाई के साथ हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस ने मामले में हत्या के प्रयास का प्रकरण दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है।