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उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने दी निर्देश, लंबित भर्तियों की नियुक्ति प्रक्रिया जल्द पूरी हो

लंबित भर्तियों में नियुक्ति प्रक्रिया को शीघ्र करें पूर्ण: उप मुख्यमंत्री शुक्ल भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विभागीय भर्ती प्रक्रियाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी लंबित भर्तियों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में मानव संसाधन की कमी को शीघ्र दूर किया जा सके। उन्होंने कर्मचारी चयन बोर्ड (ईएसबी) एवं मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (पीएससी) के साथ निरंतर संपर्क एवं समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए, ताकि भर्ती प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो। साथ ही, सभी आवश्यक प्रशासनिक एवं तकनीकी औपचारिकताओं को समय पर पूर्ण करने को कहा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने अस्पताल सहायक के रिक्त पदों की भर्ती के संबंध में प्रस्ताव को शीघ्र कर्मचारी चयन बोर्ड को भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अस्पताल सहायक के पद स्वास्थ्य संस्थानों के सुचारू संचालन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, इसकी पदपूर्ति प्रक्रिया में विलंब न किया जाए। मेडिकल कॉलेजों एवं स्वास्थ्य विभाग में नर्सिंग टीचरों की नियुक्ति प्रक्रिया की भी समीक्षा की और प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित एवं योग्य नर्सिंग स्टॉफ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक एवं अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए योजनाबद्ध एवं चरणबद्ध कार्यवाही करने के निर्देश दिए। बैठक में आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा धनराजू एस, अपर संचालक मनोज कुमार सरियाम उपस्थित रहे।  

चुनावी दौरे पर असम गए कांग्रेस नेता रूपेश ठाकुर का निधन, राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर

बलौदा बाजार असम में चुनाव की गहमागहमी के बीच एक दुखद खबर सामने आई है. चुनाव प्रचार के लिए छत्तीसगढ़ से गए बलौदा बाजार के पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रूपेश ठाकुर का निधन हो गया. जानकारी के अनुसार, कांग्रेस के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय के साथ चुनाव प्रचार के लिए रूपेश ठाकुर असम गए थे. इस दौरान तबीयत खराब होने से उन्हें गुवाहाटी के हास्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां आज सुबह हार्ट अटैक आने से निधन हो गया. युवा नेता और युवाओं में लोकप्रिय रुपेश ठाकुर के निधन की खबर आते ही नगर में शोक की लहर दौड़ गई. राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने रूपेश ठाकुर के असामायिक निधन पर शोक व्यक्त किया है.

जदयू की कमान फिर संभालेंगे नीतीश कुमार, चौथी बार निर्विरोध चुने जाने की तैयारी

पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर से जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए हैं। आज शाम बाद प्रदेश कार्यालय में इसकी आधिकारिक घोषणा की जाएगी। मुमकिन है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी आज समृद्धि यात्रा से लौटने के बाद प्रदेश कार्यालय में आएं ताकि कार्यकर्ता और नेता उनको चौथी बार राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने बधाई दे सकें। इस वजह से बनेंगे राष्ट्रीय अध्यक्ष मुख्यमंत्री नीतीश कुमार वर्तमान में भी जनता दल यूनाईटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। अब एक बार फिर चौथी बार भी वह निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए हैं। 22 मार्च को जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए नामांकन किया गया था और आज 24 मार्च तक नामांकन वापस लिए जाने का दिन था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावे किसी अन्य ने इस पद के लिए अपना नामांकन पर्चा नहीं भरा, इस वजह से यह साफ़ हो चुका है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। अगर इनके अलावे कोई अन्य नामांकन दाखिल करता तो 27 मार्च चुनाव होता, लेकिन ऐसी कोई स्थिति नहीं बनी। अब राज्यसभा सदस्य रहते हुए वह पार्टी की बागडोर अपने ही हाथ में रखेंगे। इस बात की आधिकारिक घोषणा कुछ ही देर में कर दी जाएगी। निर्वाचन अधिकारीजारी करेंगे निर्वाचन प्रमाण पत्र जनता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष पद की उम्मीदवारी के लिए नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि आज. मंगलवार 24 मार्च, 2026 को सुबह 11 बजे थी। नामांकन वापस लेने का समय समाप्त होने के बाद, निर्वाचन अधिकारी के पास केवल नीतीश कुमार का नामांकन ही शेष है, इसलिए निर्वाचन अधिकारी और राज्यसभा के पूर्व सांसद अनिल प्रसाद हेगडे आज दोपहर 2:30 बजे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्वाचित होने का निर्वाचन प्रमाण पत्र जारी करेंगे। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्य सभा में संसदीय दल के नेता संजय कुमार झा, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेतागण उपस्थित रहेंगे। संजय झा ने भी जमा कराया था अपना नामांकन बताया जाता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रस्तावकों में से एक संजय झा ने भी पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में अपना नामांकन जमा कराया था। बिहार के मुख्यमंत्री नामांकन दाखिल करने के लिए दिल्ली नहीं आए थे। इस पद के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 22 मार्च थी, जबकि उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच 23 मार्च को की गई थी। राजीव रंजन सिंह के दिसंबर 2023 में पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद कुमार ने 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले जेडीयू की कमान संभाली। क्या कहा था संजय झा और विजय चौधरी ने? इधर, पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और मंत्री विजय चौधरी ने कई बार कहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्यसभा जाने की इच्छा हुई। इसलिए वह जा रहे हैं। यह नीतीश कुमार के खुद का फैसला है। हालांकि इस दौरान उनका मार्गदर्शन हमें मिलता रहेगा और पार्टी भी उनकी छाया में ही काम करेगी। मुख्यमंत्री ने पार्टी को क्या कहा? दरअसल, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए चुनाव दिसंबर 2025 में ही होना था। लेकिन, विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव नहीं हो पाया। इसी बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस महीने में राज्यसभा जाने की घोषणा कर दी। ऐसे में कयास लगने लगे कि सीएम नीतीश कुमार अब बिहार और पार्टी की बागडोर संभालना नहीं चाहते हैं। हालांकि, सीएम नीतीश कुमार ने अपने कार्यकर्ताओं से स्पष्ट कहा था कि आपलोग चिंता नहीं करें। मैं अब भी सक्रिय हूं और दिल्ली जाने के बाद भी आप सभी का मार्गदर्शन करता रहूंगा।

दिव्या दत्ता ने कहा, ‘सपनों को उड़ान देने के लिए पंख जरूरी हैं, और ये पंख हमारे अपने होते हैं

मुंबई  सपनों को पूरा करने की दौड़ में कड़ा संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे में अगर किसी का सहारा मिले तो संघर्ष कुछ हद तक आसान लगने लगता है। यही बात बॉलीवुड अभिनेत्री दिव्या दत्ता ने आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में कही। उन्होंने कहा कि टैलेंट के साथ-साथ अगर किसी का साथ मिल जाए तो इंसान कामयाबी हासिल कर सकता है। दिव्या दत्ता ने कहा, ''हर इंसान के अंदर टैलेंट जरूर होता है, लेकिन उसे पहचानने के लिए किसी अपने का साथ जरूरी होता है। जब किसी व्यक्ति को परिवार का साथ मिलता है तो उसका आत्मविश्वास और हौसला दोगुना हो जाता है। सपनों को उड़ान देने के लिए पंख चाहिए होते हैं, और ये पंख हमारा अपना परिवार और अपने ही लोग ही होते हैं।''  दिव्या दत्ता ने अपना अनुभव भी साझा किया। उन्होंने कहा, ''मैंने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए लोगों को देखा है कि वे किस तरह अपनी पहचान बना रहे हैं। कोई गृहिणी अपने कुकिंग टैलेंट को दुनिया के सामने ला रही है, तो कोई ट्रैवल ब्लॉग के जरिए लोगों के बीच अपनी पहचान बना रहा है। इन सभी कहानियों में एक चीज समान है, और वो है अपने परिवार और करीबियों का साथ… इस साथ के जरिए उन्हें आगे बढ़ने की हिम्मत मिलती है।'' उन्होंने कहा, ''मैंने अक्सर देखा है कि लोग अपनी ही दुनिया में सिमटे रहते हैं और ये मानकर बैठे रहते हैं कि उनकी परेशानियां और संघर्ष सबसे बड़े हैं, लेकिन जब हम दूसरों की कहानियों को देखते हैं, तब पता चलता है कि हर किसी की अपनी-अपनी लड़ाई है, जिसे लड़कर वह आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में अगर किसी को थोड़ा सा भी सहारा मिल जाए तो वह बड़ी से बड़ी मुश्किल को पार कर सकता है।' इस बातचीत में फिल्ममेकर सशांत शाह ने भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, ''आज के समय में सोशल मीडिया एक बड़ा प्लेटफॉर्म बन चुका है। यहां हर किसी के टैलेंट को मौका मिलता है, लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि टैलेंट को सही समर्थन भी मिले। अगर किसी के अंदर काबिलियत है तो उसे आगे लाने के लिए किसी का साथ मिलना बहुत जरूरी है।'

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा का बड़ा बयान, पापाराव के आत्मसमर्पण से नक्सलवाद पर लगा पूर्ण विराम

कवर्धा उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि नक्सली पापाराव के आत्मसमर्पण के साथ छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद खत्म हुआ. अब छत्तीसगढ़ में एक भी नक्सली नहीं बचा है. दरअसल, लाल आतंक का बड़ा चेहरा रहा पापा राव आज सरेंडर कर सकता है. सूत्रों के मुताबिक, अगले कुछ घंटों में उसके बीजापुर पहुंचने की संभावना है, जहां वह अपने 17 साथियों के साथ AK-47 समेत कई अत्याधुनिक हथियारों के साथ सरेंडर करेगा. उसके बाद उसे जगदलपुर ले जाया जाएगा, जहां वह बस्तर रेंज के आईजी पी. सुंदरराज के सामने औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण करेगा. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पापा राव को लेने के लिए पुलिस बल की टीम पहले ही इंद्रावती नेशनल पार्क क्षेत्र के एक गोपनीय ठिकाने के लिए रवाना हो चुकी है. लंबे समय से चल रही बातचीत के बाद अब उसके सरेंडर की स्थिति बनी है. करीब 25 लाख रुपये के इनामी पापा राव वेस्ट बस्तर डिवीजन का सचिव और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) का सदस्य रहा है. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, बस्तर में नक्सली गतिविधियों की कमान लंबे समय तक उसी के हाथ में रही है. उसका नाम कई बड़े हमलों में सामने आ चुका है, जिनमें कुटरू-बेदरे रोड पर हुआ आईईडी ब्लास्ट भी शामिल है, जिसमें 8 जवान शहीद हुए थे. इस हमले का मास्टरमाइंड भी पापा राव को माना गया. इसके अलावा कई एंबुश और सुरक्षाबलों पर हमलों की रणनीति बनाने में उसकी अहम भूमिका रही है. पापा राव पीएलजीए (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) का एक प्रमुख चेहरा माना जाता रहा है और संगठन के ऑपरेशनल से लेकर रणनीतिक फैसलों में उसकी सीधी भागीदारी रही. उसकी पत्नी उर्मिला भी पीएलजीए बटालियन की सदस्य थी, जो एक मुठभेड़ में मारी जा चुकी है.

चंडीगढ़ में टीबी के मामलों में इजाफा, रोज़ 18 नए मामले, 6000 लोग प्रभावित

चंडीगढ़  टीबी मुक्त भारत बनाने के लिए भले ही केंद्र सरकार व स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार अभियान चलाए जा रहे हो। इसके बावजूद भी चंडीगढ़ में टीबी घातक रूप धारण करती जा रही है। शहर में बीते चार वर्ष से लगातार 6 हजार से अधिक लोगों को टीबी अपनी चपेट में ले रहा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से लोकसभा में पेश एक रिपोर्ट के अनुसार, चंडीगढ़ में हर दिन टीबी के 18 नए मामले दर्ज किए जा रहे है। चंडीगढ़ में वर्ष 2025 में टीबी के 6534 मामले सामने आए थे। इसके साथ वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 6960 था। वर्ष 2023 में 6721 मामले सामने आएं थे। वहीं, वर्ष 2023 में टीबी से ग्रसित लोगों की संख्या 6066 दर्ज की गई थी। स्वास्थ्य मंत्रालय की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों में टीबी का खतरा सबसे अधिक है। वहीं, 46 से 60 आयु वर्ग में भी तेजी से यह खतरा बढ़ रहा है। इसके साथ शून्य में 14 वर्ष आयु के 3.2 प्रतिशत बच्चे टीबी से जूझ रहे है। डॉक्टरों के अनुसार, दो सप्ताह से अधिक समय तक अगर खांसी की दिक्कत बनी रहती है और कफ या खून आता है, सीने में दर्द, कमजोरी या थकान की समस्या रहती है तो ये टीबी का संकेत हो सकता है। इस तरह के संकेतों पर गंभीरता से ध्यान देना और उपचार प्राप्त करना बहुत जरूरी हो जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि टीबी से मौत होने का कारण लोगों में जानकारी का अभाव होना है। टीबी के लक्षणों की अनदेखी कर लोग जांच की जगह लोग सामान्य दवाई खाकर समय बिताते रहते है। अंत में अधिक तकलीफ होने पर जांच करवाते हैं, तब तक बीमारी लाइलाज हो चुकी है। प्रदूषित एरिया में लोगों को टीबी की चपेट में आने का अधिक खतरा रहता है। चंडीगढ़ में तेजी से बढ़ रहे प्रदूषण के कारण भी टीबी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। टीबी से जूझ रहे मरीजों की स्थिति वर्ष     टीबी से ग्रसित मरीजों की संख्या 2021     4720 2022     6066 2023     6721 2024     6960 2025     6534 टीबी से बचाव के लिए अपने यह उपाय     बच्चों को जन्म के एक महीने के अंदर बीसीजी का टीका लगवाना चाहिए।     टीबी से पीड़ित व्यक्ति को दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए।     रोगी को हंसते-छींकते या खांसते समय मुंह पर रुमाल रखना चाहिए।     टीबी से पीड़ित व्यक्ति से मिलने पर सर्जिकल मास्क जरूर लगाना चाहिए।     टीबी से पीड़ित व्यक्ति को जगह-जगह नहीं थूकना चाहिए।     स्वस्थ आहार और नियमित योग से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।     हाथों को साफ रखना और समय-समय पर हाथ धोना चाहिए।     अगर आपको टीबी के संकेत दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।  

“बच्चे नींव हैं” जो इतने valuable है वो vulnerable क्यों:- डॉ वर्णिका शर्मा

रायपुर  राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा बच्चों के अधिकारों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर राज्यस्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े ने कार्यशाला का उद्घाटन किया। इस एक दिवसीय कार्यशाला को दो सत्रों में आयोजित किया गया, जिसमें प्रथम सत्र राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग से आईं शाइस्ता शाह ने लिया व द्वितीय सत्र कमिश्नरेट रायपुर के संजीव शुक्ला ने लिया, जिसमें सभी जिलों से जिला शिक्षा अधिकारी, जिला बाल कल्याण अधिकारी, बाल गृह अधीक्षक, SJPU (Special Juvenile Police Unit) शामिल हुए। स्वागत उद्बोधन सचिव प्रतीक खरे ने दिया। आयोग अध्यक्षा डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि केवल चिंता या चिंतन नहीं होगा, बल्कि मंथन होगा और आप सभी को इस मंथन को सार्थक करना है। बच्चे जो राष्ट्र का भविष्य हैं, जो राष्ट्र की नींव हैं। सोचिए, जो इतने Valuable हैं, वे vulnerable क्यों हैं। उन्होंने कहा कि हमें इस दिशा में गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है, ताकि यह नींव कमजोर न पड़े। अपने 19 जिलों के दौरे का उल्लेख करते हुए उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की आवश्यकता पर भी जोर देते हुए कहा कि हम अक्सर कहते हैं कि बच्चे राष्ट्र की नींव हैं, लेकिन छोटी-छोटी जिम्मेदारियों से हम बचते हैं। बच्चों से अपराध नहीं होता, बल्कि उनसे गलतियां होती हैं। बाल गृह एवं बालिका गृह में रह रहे CNCP बच्चों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि बाल गृह विकल्प नहीं, बल्कि उनका घर है, इसलिए उनके साथ परिवार जैसा व्यवहार किया जाना चाहिए। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े ने कहा कि हम बच्चों को ऊंचाइयों पर पहुंचते देखना चाहते हैं, लेकिन उन्हें सही दिशा देना भी उतना ही आवश्यक है। यह कार्यशाला बच्चों के भविष्य को सही दिशा देने के उद्देश्य से आयोजित की गई है। उन्होंने कहा कि जब तक हम दूसरों के बच्चों को अपने बच्चों की तरह नहीं देखेंगे, तब तक समग्र विकास संभव नहीं है। कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के प्रतिनिधि द्वारा शालाओं में बच्चों की सुरक्षा एवं संरक्षण तथा NCPCR के पॉक्सो ट्रैकिंग पोर्टल पर विस्तार से जानकारी दी गई। किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 2(14), 2(9), धारा 77 एवं 78 के तहत बच्चों में मादक द्रव्यों के प्रयोग एवं उनके व्यापार से उन्मूलन पर चर्चा की गई। संयुक्त कार्य योजना, एनसीपीसीआर की गाइडलाइन तथा छत्तीसगढ़ में नशामुक्ति केंद्रों की स्थापना की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया, जिसमें राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, पुलिस मुख्यालय, मिशन वात्सल्य एवं समाज कल्याण विभाग के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके साथ ही सत्र में रायपुर कमिश्नर संजीव शुक्ला ने बच्चों से जुड़े विभिन्न मामलों को समझाते हुए Law and Force Department की संवेदनशील भूमिका पर बल दिया। बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ बनाने के लिए शपथ भी ली और छत्तीसगढ़ में बाल तस्करी के परिदृश्य एवं उसके उन्मूलन के लिए आवश्यक सुझावों पर चर्चा भी की गई।किशोर न्याय अधिनियम की धारा 46 सहपठित नियम 25 के अंतर्गत प्रदेश में पश्चातवर्ती देखभाल (After Care) के प्रयासों पर चर्चा की गई तथा जिलेवार एवं बाल गृहवार कार्ययोजना तैयार करने पर विचार किया गया।  इस अवसर पर माननीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी रजवाड़े, बाल अधिकार संरक्षण आयोग अध्यक्षा डॉ. वर्णिका शर्मा, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग से मती शाइस्ता शाह, रायपुर कमिश्नर संजीव शुक्ला, SJPU हेड रश्मीत कौर, एडिशनल कमिश्नर पुलिस रायपुर कांबले, आयोग सचिव प्रतीक खरे सहित सभी जिलों के SJPU, DEO, DCPO एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे कार्यशाला का उद्देश्य विभिन्न विभागों के समन्वय से बच्चों के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करना एवं उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करना रहा।

कलेक्टर ने जनदर्शन सुनी आमलोगों की समस्याएं संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्यवाही के निर्देश

बिलासपुर जिला कार्यालय में आयोजित साप्ताहिक जनदर्शन में आज कलेक्टर  संजय अग्रवाल ने भी लोगों की समस्याएं सुनी। शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों से आए सैकड़ों लोगों ने कलेक्टर से मिलकर निजी एवं सामुदायिक शिकायत संबंधी आवेदन दिया। कलेक्टर ने अधिकांश मामलों में मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस दौरान नगर निगम कमिश्नर  प्रकाश कुमार सर्वे एवं जिला पंचायत सीईओ  संदीप अग्रवाल ने भी लोगों की समस्याएं सुनी।          जनदर्शन में ग्राम कछार के सुरेश कुमार बंजारे ने आवेदन देकर बताया कि गांव के ही राधेश्याम द्वारा घर के सामने गली में दीवार खड़ी कर रास्ता संकीर्ण कर दिया गया है, जिससे आवागमन के लिए काफी परेशानी हो रही है। कलेक्टर ने एसडीओ को प्रकरण भेजते हुए परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। बिलासपुर की उत्तरा यादव के द्वारा विधवा पेंशन का लाभ दिलाने की मांग कलेक्टर के समक्ष रखी गई। इस संबंध में संयुक्त संचालक समाज कल्याण विभाग को जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। ग्राम जरोंधा निवासी परमानंद कौशिक ने कलेक्टर से मुलाकात कर आवेदन दिया कि उनकी निजी भूमि पर गांव के ही गोपाल मेहर द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर दीवार खड़ी कर दी गई है और रास्ते में कीचड़युक्त पानी बहाकर आवागमन में बाधा उत्पन्न कर रहा है। इससे खेती-किसानी के कार्यों में भारी परेशानी हो रही है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पहले भी शिकायत की जा चुकी है और न्यायालय से कब्जा हटाने का आदेश भी मिला था, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने प्रशासन से पुनः हस्तक्षेप कर अवैध कब्जा हटाने की मांग की है। देवरीखुर्द निवासी पुरुषोत्तम दास ने प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के तहत स्वामित्व कार्ड जारी करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि वे पिछले 50 वर्षों से निवास कर रहे हैं और उनकी पत्नी के नाम पर पट्टा भी है, लेकिन अब तक उन्हें स्वामित्व कार्ड नहीं मिला है। उन्होंने प्रशासन से शीघ्र कार्ड जारी करने की अपील की है ताकि उन्हें अपने अधिकारों का लाभ मिल सके। कलेक्टर ने एसडीओ मस्तुरी को मामले पर उचित कार्यवाही के निर्देश दिए।           सकरी तहसील अंतर्गत ग्राम चिचिरदा निवासी धनीराम कौशि ने कलेक्टर को दिए आवेदन में बताया कि उन्होंने अपनी भूमि के सीमांकन के लिए आवेदन किया था। तहसीलदार द्वारा राजस्व निरीक्षक को सीमांकन करने का आदेश भी जारी किया गया, लेकिन आज तक सीमांकन नहीं किया गया है। इससे उन्हें लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कलेक्टर ने एसडीओ तखतपुर को प्रकरण की जांच कर निराकरण करने के निर्देश दिए है। बिल्हा ब्लॉक के ग्राम नगपुरा निवासी रूचि नेताम ने बताया कि उन्होंने जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए वर्ष 2024-25 में आवेदन किया था। काफी समय बीत जाने के बाद भी प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ। दस्तावेज की कमी के अभाव में उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारी को मामले को सौंपा। 

वन विभाग की सख्ती से खुला बड़ा गिरोह, तेंदुए की खाल के साथ 9 गिरफ्तार

रायपुर, वन्यजीव संरक्षण को लेकर राज्य में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में 19 मार्च 2026 को केशकाल वनमंडल और राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए तेंदुए की खाल की तस्करी में शामिल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया।           वन्य जीव संरक्षण का अर्थ जंगली जानवरों, पक्षियों और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा करना है, ताकि जैव विविधता बनी रहे और पारिस्थितिक संतुलन न बिगड़े। भारत में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत अवैध शिकार, व्यापार और आवास विनाश को रोकना और वन्य प्रजातियों की रक्षा करना अनिवार्य है। यह पारिस्थितिक तंत्र के लचीलेपन और भावी पीढ़ियों के लिए प्रकृति के संरक्षण हेतु महत्वपूर्ण है।          यह कार्रवाई मुखबिर की सूचना के आधार पर की गई। वन विभाग की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया, जिसमें एक कर्मचारी ने खरीदार बनकर तस्करों से संपर्क किया। जैसे ही आरोपी मोटरसाइकिल और एक वाहन में तेंदुए की खाल लेकर रसगांव-बड़ेडोंगर मार्ग स्थित ग्राम बैलगांव पहुंचे, टीम ने उन्हें घेरकर पकड़ लिया। मौके से 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उन्होंने बताया कि तेंदुए का शिकार लगभग 7 महीने पहले अवैध हथियार (भरमार बंदूक) से किया गया था। आरोपियों की निशानदेही पर मुख्य आरोपी को अगले दिन नारायणपुर जिले के ग्राम बोरावण्ड से गिरफ्तार किया गया तथा शिकार में प्रयुक्त बंदूक भी जब्त की गई। बरामद तेंदुए की खाल की लंबाई 195 सेंटीमीटर और चौड़ाई 45 सेंटीमीटर पाई गई।          वनमंडलाधिकारी दिव्या गौतम के निर्देशन में आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 (संशोधित 2022) के तहत मामला दर्ज किया गया है। गिरफ्तार आरोपी कोंडागांव, दंतेवाड़ा, बस्तर और नारायणपुर जिलों के निवासी हैं। इस अभियान में राज्य स्तरीय टीम के अधिकारियों एवं वन विभाग के कर्मचारियों की सक्रिय भूमिका रही। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों के शिकार और अवैध व्यापार को रोकने के लिए आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। राज्य शासन की वन एवं वन्यजीव संरक्षण संबंधी योजनाओं के तहत जैव विविधता संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय कल लगभग 5 लाख भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को 500 करोड़ रुपये की सौगात देंगे

रायुपर दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना, छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य के भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को आर्थिक रूप से संबल बनाने के लिए शुरू की गई एक प्रमुख योजना है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के भूमिहीन कृषि श्रमिकों को सशक्त बनाना है। इस योजना से सर्वाधिक रायपुर जिला के 53 हजार 338 भूमिहीन कृषि मजदूर शामिल हैं। सरकार ने इन्हें मुख्यधारा से जोड़कर यह संदेश दिया है कि 'अंत्योदय' की कतार में खड़ा आखिरी पंक्ति के व्यक्ति भी शासन की प्राथमिकता में सबसे ऊपर है।         दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजनाके तहत 4.95 लाख से अधिक पात्र परिवारों के लिए राज्य सरकार की ओर से 495 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हजार रूपए की वित्तीय सहायता सीधे हितग्राही के बैंक खाते में दी जाती है। 25 मार्च 2026 को बलौदाबाजार से जब मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय राशि अंतरित करेंगे, तो वह छत्तीसगढ़ के न्याय और सुशासन की गूंज होगी। दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना ने यह साबित कर दिया है कि जब सरकार की नीयत साफ और नीति स्पष्ट हो, तो विकास की किरण हर झोपड़ी तक पहुंचती है।           दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की घोषणा के अनुरूप भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हज़ार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। संकल्प बजट 2026-27 में 600 करोड़ रूपए का प्रावधान के साथ भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को आर्थिक सुरक्षा का सशक्त संबल मिलेगा। यह सहायता सीधे जरूरतमंदों तक पहुँचकर उन्हें स्थिरता, सम्मान और आत्मविश्वास प्रदान करेगी। सशक्त श्रमिकों के माध्यम से सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य सुनिश्चित करना छत्तीसगढ़ सरकार का संकल्प है।           दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत रायपुर जिला के सर्वाधिक 53 हजार 338 भूमिहीन कृषि मजदूर, बिलासपुर जिला के 39 हजार 401 भूमिहीन कृषि मजदूर, महसमुंद जिला के 37 हजार 11 भूमिहीन कृषि  मजदूरों को लाभ मिलेगा, जिनका ई केवायसी हो चुका है।       मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना को शुरू करने के पीछे हमारा उद्देश्य भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों के शुद्ध आय में वृद्धि कर उन्हें आर्थिक रूप से संबल प्रदान करना है। इस योजना में भूमिहीन कृषि मजदूरों के साथ वनोपज संग्राहक भूमिहीन परिवार, चरवाहा, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी आदि पौनी-पसारी व्यवस्था से संबद्ध भूमिहीन परिवार भी शामिल हैं। इनके अलावा अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों के देवस्थल में पूजा करने वाले पुजारी, बैगा, गुनिया, माँझी परिवारों को भी शामिल किया गया है। लाभार्थी सूची में 22,028 बैगा और गुनिया परिवार भी शामिल हैं, जो राज्य की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत के रक्षक हैं। सरकार का प्राथमिक लक्ष्य इन परिवारों को सालाना एक निश्चित आर्थिक सहायता प्रदान करना है, ताकि वे अपनी बुनियादी जरूरतों, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक आवश्यकताओं को बिना किसी कर्ज के पूरा कर सकें। इन्हें पूर्व में दी जाने वाली 7,000 रुपये की राशि को बढ़ाकर अब 10,000 रुपये प्रति वर्ष कर दिया गया है, जो सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचती है।