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टोक्यो ओलंपिक रजत पदक विजेता मीराबाई चानू ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स को बताया गेम-चेंजर

रायपुर टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता सेखोम मीराबाई चानू ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के उद्घाटन अवसर पर अपने करियर के सबसे बड़े अधूरे लक्ष्य, एशियन गेम्स पदक का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह सपना अब भी उनके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। पिछले एक दशक से भारतीय वेटलिफ्टिंग की अग्रणी खिलाड़ी रही मीराबाई ने ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ गेम्स में कई पदक जीते हैं, लेकिन एशियाई खेलों में पदक अब तक उनसे दूर रहा है। उन्होंने 2014 इंचियोन एशियन गेम्स में 19 वर्ष की उम्र में पदार्पण किया था, जहां वे नौवें स्थान पर रहीं। इसके बाद 2018 जकार्ता एशियन गेम्स में पीठ की चोट के कारण हिस्सा नहीं ले सकीं, जबकि 2022 हांगझोउ एशियन गेम्स में हिप की चोट ने उनका सपना अधूरा छोड़ दिया। 31 वर्षीय मीराबाई ने कहा कि – “एशियन गेम्स मेरे लिए बेहद खास है। वहां प्रतियोगिता का स्तर बहुत ऊंचा होता है, और यही इसे सबसे चुनौतीपूर्ण बनाता है। मेरा सपना है कि मैं वहां पदक जीतूं।” हालांकि, इस लक्ष्य की राह आसान नहीं है। नियमों में बदलाव के कारण उन्हें 48 किलोग्राम और 49 किलोग्राम वर्ग के बीच संतुलन बनाना होगा। वे 23 जुलाई से 2 अगस्त तक ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में 48 किलोग्राम वर्ग में उतरेंगी, जबकि 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक नागोया (जापान) में आयोजित एशियन गेम्स में 49 किलोग्राम वर्ग में प्रतिस्पर्धा करेंगी। उन्होंने बताया कि कॉमनवेल्थ गेम्स तक मैं 48 किलोग्राम में खेलूंगी, लेकिन एशियन गेम्स के लिए फिर से 49 किलोग्राम वर्ग में आना होगा, जो एक बड़ी चुनौती है। मीराबाई ने हाल ही में राष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए 48 किलोग्राम वर्ग में तीन नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए। उन्होंने स्नैच में 89 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 116 किलोग्राम वजन उठाते हुए कुल 205 किलोग्राम के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया, जो उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इस अवसर पर उन्होंने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की सराहना करते हुए कहा कि यह आयोजन देश के दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों के खिलाड़ियों के लिए बड़ा मंच साबित होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे आने का मौका मिलता है, खासकर उत्तर-पूर्व और जनजातीय इलाकों में जहां बहुत टैलेंट है, लेकिन मंच की कमी रहती है। मीराबाई ने नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (NCOE), खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और साई ट्रेनिंग सेंटर की भी प्रशंसा की। उनके अनुसार, इन संस्थानों में खिलाड़ियों को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण, पोषण और सुविधाएं मिल रही हैं, जो भारतीय खेलों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

वीरता पुरस्कार विजेताओं के लिए सरकार का तोहफा, ट्रेन के AC कोच में मुफ्त सफर की सुविधा

नई दिल्ली देश के वीर सैनिकों और वीरता पुरस्कार विजेताओं के सम्मान में केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने घोषणा की है कि अब सेना के वीरता पुरस्कार प्राप्त करने वाले जवानों और उनके परिवारों को भारतीय रेलवे की ट्रेनों में आजीवन मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाएगी. रक्षा अधिकारियों के अनुसार यह रियायत थल सेना, नौसेना और वायु सेना के उन बहादुर जवानों को दी जाएगी, जिन्हें सेना मेडल, नौसेना मेडल और वायु सेना मेडल (गैलेंट्री) से सम्मानित किया गया है।  किन सुविधाओं का मिलेगा लाभ? सरकार के इस आदेश के तहत पात्र लाभार्थियों को फर्स्ट क्लास, 2AC और AC चेयर कार में मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलेगी. खास बात यह है कि इस सुविधा के साथ एक साथी को भी मुफ्त यात्रा की अनुमति होगी।  परिवार को भी मिलेगा लाभ यह सुविधा सिर्फ पुरस्कार विजेताओं तक सीमित नहीं है. आदेश के मुताबिक यदि पुरस्कार विजेता का निधन हो चुका है, तो उनके जीवनसाथी (पति/पत्नी) को पुनर्विवाह तक यह सुविधा मिलती रहेगी. अविवाहित मरणोपरांत पुरस्कार विजेताओं के माता-पिता भी इस सुविधा के पात्र होंगे. इस फैसले को सैनिकों के प्रति सरकार के सम्मान और आभार के रूप में देखा जा रहा है।  सरकार का मानना है कि देश की रक्षा में असाधारण साहस दिखाने वाले जवानों को विशेष सम्मान मिलना चाहिए. रेलवे यात्रा में यह छूट न केवल उन्हें सुविधा देगी, बल्कि उनके योगदान के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता भी दर्शाएगी. विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की योजनाएं सेना के मनोबल को बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. इससे जवानों और उनके परिवारों को यह संदेश जाता है कि देश उनके बलिदान और सेवा को हमेशा याद रखता है।  केंद्र सरकार का यह निर्णय उन वीरों के प्रति सम्मान का प्रतीक है, जिन्होंने देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगाई. अब वे और उनके परिवार इंडियन रेलवे की ट्रेनों में आरामदायक AC कोच में बिना किसी शुल्क के यात्रा कर सकेंगे। 

30 साल सेवा के बाद भी शून्य पेंशन, 1998 के शिक्षकों का फूटा गुस्सा, अब ‘करो या मरो’ आंदोलन की चेतावनी

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक कल्याण संघ के उपप्रांत अध्यक्ष दिनेश सिंह एवं संभाग अध्यक्ष हजरत अली ने संयुक्त रूप से शासन के खिलाफ तीखी नाराजगी जताते हुए कहा है कि वर्ष 1998 के शिक्षकों के साथ शुरू से ही “सौतेला व्यवहार” किया गया है। संघ नेताओं ने बताया कि वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है, साल 2028 तक लगभग 90-92% शिक्षक सेवानिवृत्त हो जाएंगे, लेकिन उन्हें एक रुपए की भी पेंशन नहीं मिल रही। वहीं 2035 तक सभी शिक्षक रिटायर हो जाएंगे, जिनमें से अधिकांश को बेहद कम या नगण्य पेंशन मिलेगी। उन्होंने सवाल उठाया कि 30 वर्षों तक सेवा देने के बाद 62 वर्ष की उम्र में एक शिक्षक बिना पेंशन के सम्मानजनक जीवन कैसे जी सकता है? नियुक्ति से लेकर सिविलियन तक उठाए सवाल संघ ने बताया कि उनकी नियुक्ति शिक्षा विभाग के रिक्त पदों पर हुई थी, वेतन भी शिक्षा विभाग द्वारा दिया जाता था, लेकिन पंचायत के माध्यम से भर्ती होने के कारण उन्हें पंचायत कर्मचारी माना गया। 2018 में “सिविलियन” किए जाने के बाद भी उनकी पूर्व सेवा को शून्य मान लिया गया, जिससे शिक्षकों को भारी नुकसान हुआ। संघ का कहना है कि जब कार्य और वेतन शिक्षा विभाग का था, तो उन्हें पंचायत कर्मचारी मानना अन्यायपूर्ण है। पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग संघ ने स्पष्ट किया कि वे सभी 2004 से पूर्व नियुक्त शिक्षक हैं, इसलिए उन्हें पेंशन सेवा अधिनियम 1976 के तहत पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिलना चाहिए। नेताओं ने यह भी बताया कि पूर्व में मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थानीय निकाय कर्मचारियों को सिविलियन के बाद नियुक्ति तिथि से पेंशन दी गई थी, उसी आधार पर 1998 से सेवा गणना जोड़कर पुरानी पेंशन लागू करने की मांग की जा रही है। आश्वासन बहुत, समाधान शून्य संघ का आरोप है कि उन्होंने कई बार विधायकों, मंत्रियों और मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी समस्याएं रखीं, ज्ञापन सौंपे और चर्चा की। कई बार आश्वासन भी मिले, लेकिन न तो मामला मंत्रिमंडल में लाया गया, न ही संघ को चर्चा के लिए बुलाया गया, और न ही कोई ठोस निर्णय लिया गया। अब आर-पार की लड़ाई की चेतावनी संघ नेताओं ने कहा कि अब स्थिति “करो या मरो” जैसी हो गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो शिक्षक बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। “हमने कभी हड़ताल या आंदोलन का रास्ता नहीं चुना, लेकिन अब शासन की उदासीनता हमें सड़कों पर उतरने को मजबूर कर रही है।” सम्मानपूर्वक जीवन का अधिकार मांग रहे शिक्षक संघ ने अंत में कहा कि वे छत्तीसगढ़ के मूल निवासी हैं और उन्हें भी समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार है। उनका आरोप है कि शासन की नीतियों के कारण उनके अधिकारों का हनन हो रहा है और अब वे अपने हक के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।

दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में रामलला का दर्शन किया, बोले – “राम मंदिर का विरोध मैंने कभी नहीं किया

भोपाल  वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने आज यानी गुरुवार 26 मार्च को अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन किए। इस अवसर पर उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जब प्रभु का बुलावा आता है तो हर व्यक्ति आ जाता है, इसलिए जब मुझे बुलावा आया, तो मैं उपस्थित हो गया। प्रभु के दर्शन करके अच्छा लगा। दिग्विजय सिंह ने कहा कि प्रभु के दर्शन करके अच्छा लगा। जब उनसे मंदिर के कंस्ट्रक्शन को लेकर प्रश्न पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसमें हम लोगों का भी योगदान है, हमने भी पैसा दिया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में राम लला के दर्शनों के साथ ही उन्होंने हनुमानगढ़ी जाकर भगवान हनुमान का भी आशीर्वाद लिया। जब उनसे कांग्रेस नेताओं के अयोध्या न आने पर प्रश्न किया गया तो उन्होंने कहा, 'कांग्रेस में हर व्यक्ति अपनी आस्था अनुसार धर्म का पालन करता है। हम धर्म का दुरुपयोग ना तो व्यवसाय के लिए करते हैं और ना राजनीति के लिए करते हैं।'उन्होंने कहा हमारी आस्था, जो भी जिस धर्म का व्यक्ति हो चाहे वह हिंदू हो, मुसलमान हो, सिक्ख, ईसाई, पारसी हो, हर व्यक्ति अपने धर्म का अपने अनुसार पालन करता है।इस दौरान दिग्विजय सिंह से वरिष्ठ कांग्रेस नेता, पूर्व पार्टी अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के अयोध्या आने पर भी प्रश्न पूछा गया। इस पर दिग्विजय सिंह ने कहा, 'जब उनको बुलावा आएगा तो वो भी जरूर आएंगे। क्यों नहीं आएंगे? प्रभु का बुलावा आता है तो हर व्यक्ति आता है दर्शन-पूजन के बाद मंदिर प्रांगण से बाहर आए कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि जब प्रभु का बुलावा आता है तो हर व्यक्ति आ जाता है इसलिए जब मुझे बुलावा आया, तो मैं उपस्थित हो गया। उन्होंने कहा कि प्रभु के दर्शन करके अच्छा लगा। कांग्रेस में तो हर व्यक्ति अपनी आस्था अनुसार धर्म का पालन करता है। हम धर्म का दुरुपयोग ना तो व्यवसाय के लिए करते हैं और ना राजनीति के लिए करते हैं। कभी राम मंदिर निर्माण का विरोध नहीं किया नेता दिग्विजय सिंह ने हनुमान गढ़ी मंदिर में भी पूजा-अर्चना की और उन्होंने कहा कि मैंने तो कभी भी राम मंदिर निर्माण का विरोध नहीं किया। मैंने कभी राम मंदिर निर्माण का विरोध नहीं किया है। मैं अयोध्या राजनीति करने नहीं आया हूं। मैंने राम मंदिर निर्माण के दौरान चंदा भी दिया था। सभी पर श्रीराम की कृपा बनी रहे। रामलला के दर्शन करने के बाद उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। दिग्विजय सिंह ने कहा कि रामलला के दर्शन कर बहुत अच्छा लगा। उन्होंने प्रभु राम से कामना की कि पूरे देश में खुशहाली फैले, तरक्की हो और सभी लोगों के बीच सद्भाव बना रहे। राम मंदिर के निर्माण और उसकी भव्यता को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि इस विषय पर तो मैं विस्तार से बाद में चर्चा करूंगा। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद पहली बार कांग्रेस के किसी बड़े नेता ने रामलला का दर्शन कर आशीर्वाद लिया। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह गुरुवार को अयोध्या पहुंचे। उन्होंने हनुमानगढ़ी और राम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन किया। उनसे पहले यूपी कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय भी रामलला का दर्शन कर चुके हैं।  

आंखों को बनाएं और भी खूबसूरत, जानें आई मेकअप का सही तरीका

आंखें चेहरे का सबसे आकर्षक हिस्सा होती हैं। कहा जाता है कि आंखें बिना बोले भी बहुत कुछ कह जाती हैं, और सही आई मेकअप इसे और भी प्रभावशाली बना सकता है। चाहे आप किसी पार्टी के लिए तैयार हो रही हों या ऑफिस के लिए, आंखों का मेकअप आपकी पूरी पर्सनैलिटी को बदल सकता है। लेकिन, परफेक्ट आई मेकअप करना एक कला है। इसलिए अपनी आंखों को और भी खूबसूरत और आकर्षक बनाने के लिए आई मेकअप करते समय आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। बेस तैयार करना आई मेकअप शुरू करने से पहले आंखों के ऊपर आई प्राइमर या हल्का सा कंसीलर जरूर लगाएं। यह आंखों की त्वचा के रंग को एक समान करता है और आईशैडो को लंबे समय तक टिकाए रखता है। इससे रंग भी ज्यादा निखर कर आते हैं। सही आईशैडो और ब्लेंडिंग आईशैडो लगाते समय रंग अपनी ड्रेस और स्किन टोन के हिसाब चुनें। हमेशा क्रीज लाइन पर हल्का ब्राउन या न्यूड शेड लगाएं। आई मेकअप में सबसे जरूरी है ब्लेंडिंग। ब्रश की मदद से रंगों को इतनी अच्छी तरह मिलाएं कि कहीं भी कोई हार्श लाइन नजर न आए। आईलाइनर लगाने का सही तरीका लाइनर आपकी आंखों को शेप देता है। अगर आपकी आंखें छोटी हैं, तो बहुत मोटा लाइनर लगाने से बचें, इससे आंखें और छोटी लग सकती हैं। विंग्ड लाइनर आंखों को थोड़ा बड़ा और लिफ्टेड लुक देता है। अपनी ऊपरी लैश लाइन के अंदर काजल या जेल लाइनर लगाएं, इससे पलकें घनी नजर आती हैं। मस्कारा से दें फिनिशिंग टच बिना मस्कारा के आई मेकअप अधूरा है। मस्कारा लगाने से पहले आईलैश कर्लर का इस्तेमाल करें और फिर मस्कारा के दो कोट लगाएं। पहला लंबाई देने के लिए और दूसरा वॉल्यूम के लिए। ध्यान दें कि मस्कारा के क्लम्प्स न बनें। आइब्रो को न भूलें आपकी आइब्रो आपकी आंखों का फ्रेम होती हैं। अच्छी तरह से डिफाइन की हुई आइब्रो पूरे लुक को साफ-सुथरा और प्रोफेशनल बनाती हैं। आइब्रो पेंसिल या पाउडर का इस्तेमाल करें जो आपके बालों के रंग से एक शेड हल्का हो। इनर कॉर्नर को हाईलाइट करें आंखों के भीतरी कोने और आइब्रो बोन पर थोड़ा सा हाइलाइटर या शिमर शेड लगाएं। यह छोटी सी ट्रिक आपकी आंखों को तुरंत ब्राइट बनाती है। इन सावधानियों का जरूर रखें ध्यान     एक्सपायरी डेट- आंखें बहुत सेंसिटिव होती हैं। इसलिए पुराने या एक्सपायर्ड मस्कारा और लाइनर का इस्तेमाल कभी न करें, इससे इन्फेक्शन हो सकता है।     मेकअप रिमूवल- सोने से पहले आई मेकअप को अच्छी क्वालिटी के मेकअप रिमूवर या मिसेलर वॉटर से साफ करना न भूलें और आंखों को जोर से न रगड़ें।  

दो दिवसीय सड़क सुरक्षा प्रबंधन कोर्स का आयोजन

दो दिवसीय सड़क सुरक्षा प्रबंधन कोर्स का आयोजन सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के हुआ पीटीआरआई में प्रशिक्षण भोपाल सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम एवं यातायात की नवीन तकनीकों से परिचय कराने के लिये इलेक्ट्रॉनिक इनफोर्समेंट इन एमपी एण्ड टाइम बाउंड इनवेस्टीगेशन फोर रोड़ विषय पर आधारित दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विवेक शर्मा के निर्देशानुसार पुलिस परिवहन शोध संस्थान (पीटीआरआई) भोपाल में किया गया। मध्यप्रदेश में सड़क पर होने वाली वाहन दुर्घटनाओं एवं दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु की संख्या में कमी लाने के उद्देश्य से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से उप निरीक्षक स्तर के अधिकारियों को सड़क सुरक्षा प्रबंधन कोर्स के माध्यम से दो दिवसीय प्रशिक्षण सत्र में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु में कमी लाने के लिये पीएम राहत योजना (कैशलेस), राहवीर योजना, हिट एण्ड रन पीड़ित प्रतिकर योजना का व्यापक प्रयोग एवं प्रचार-प्रसार करने पर बल दिया गया। साथ ही यातायात प्रवर्तन की नई तकनीकों जैसे पीओएस, आईटीएमएस, ई-चालन जैसे नव प्रयोगों के बारे में व्यापक अद्यतन रूप से विषय-विशेषज्ञों द्वारा सेमिनार में उपस्थित प्रशिक्षणार्थियों को बताया गया। साथ ही संस्थान के प्रमुख अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विवेक शर्मा द्वारा मोटर व्हीकल एक्ट-1988, सीएमवीआर-1989, मध्यप्रदेश मोटर व्हीकल रूल्स-1994 के अद्यतन नवीन प्रावधान तथा वर्तमान में यातायात प्रबंधन में प्रचलित ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ई-डार प्रणाली के बारे में व्यापक रूप से अवगत कराया गया। सड़क सुरक्षा प्रबंधन का उद्देश्य सड़क उपयोगकर्ताओं को एक सुरक्षित सड़क नेटवर्क उपलब्ध कराना, जिसमें पदयात्रियों तथा साइकिल, वाहन चालकों को प्राथमिकता दी गयी है और भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या एवं सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु की संख्या में कमी लाने के लक्ष्य को प्राप्त करना है। प्रशिक्षण सत्र के शुभारंभ पर उप पुलिस महानिरीक्षक पीटीआरआई टी.के. विद्याथी द्वारा 4-ई के प्रमुख स्तंभ जैसे एजुकेशन ,इंजीनियरिंग, इनफोर्समेंट एवं इमरजेंसी-केयर की तथा सड़क दुर्घटनाओं की भयावहता को प्रशिक्षणार्थियों के समक्ष रखा। उनके द्वारा यातायात प्रवर्तन को दृष्टिगत रखते हुए ई-इनफोर्समेंट पर जोर दिया। साथ ही ओवर स्पीडिंग से निवारण के लिये इंटरसेप्टर व्हीकल की उपयोगिता को बढ़ाए जाने का अनुरोध किया। वर्तमान में भारत सरकार की योजनाओं राहगीर एवं कैशलेस उपचार के साथ-साथ गोल्डन ऑवर की अवधारणा से प्रशिक्षणार्थियों को अवगत कराया गया। सेमिनार में पीटीआरआई के सहायक पुलिस महानिरीक्षक अभिनीत कुमार रंजन, राजेश मिश्रा, विक्रम सिंह रघुवंशी, उप पुलिस अधीक्षक मनोज खत्री, हिमांशु कार्तिकेय एवं प्रशिक्षण टीम के अधिकारी भी उपस्थित रहे। कोर्स के समापन में प्रशिक्षणार्थियों को पीटीआरआई द्वारा प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर प्रमाण-पत्र प्रदान किये गये।  

सरकारी योजना को मिलेगा बूस्ट: झारखंड के सभी जिलों में प्लानिंग फेलो की नियुक्ति

रांची. झारखंड के सभी 24 जिलों में योजनाओं के क्रियान्वयन, अनुश्रवण और मूल्यांकन को लेकर राज्य सरकार संविदा के आधार पर प्लानिंग फेलो तैनात करने जा रही है। इनका मुख्य दायित्व होगा जिलों में प्रशासनिक अधिकारियों का सहयोग करना। आंकड़ों के आधार पर योजनाओं को मूर्त रूप देने में ये अधिकारी जिलों के प्रशासनिक अफसरों को सहयोग प्रदान करेंगे। योजना कार्यालयों में होगी नियुक्ति राज्य में सरकार की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सभी विभागों में पीएमयू बनाने के प्रस्ताव पर भी सहमति प्रदान कर दी गई है। इसके पूर्व सभी जिला योजना कार्यालयों में एक-एक प्लानिंग फेलो की नियुक्ति होगी। इसके माध्यम से जिलास्तर पर योजनाओं के सतत अनुश्रवण और लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप परिणाम के लिए कार्यालयों में एक-एक फेलो की सेवा संविदा के आधार पर उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। योजनाओं की कठिनाइयों को दूर करने में होंगे सहायक विभागीय तैयारियों के अनुसार, ये पदाधिकारी जिला योजना कायालयों में योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही कठिनाइयों को दूर करने में सहायक होंगे। इनके द्वारा जिला स्तर पर अधिकृत डाटा बैंक तैयार होगा जिसके आधार पर जिलाें में अंतर विभागीय समन्वय कर जिलों का डिस्ट्रिक्ट प्रोफाइल तैयार करेंगे। इन कर्मियों की सेवा शर्त आकांक्षी प्रखंड कार्यक्रम के आधार पर तैयार की जाएगी। सरकार ने यह भी तय किया है कि इन कर्मियों की की सेवा बाह्य स्रोत (आउट सोर्सिंग) से ली जाएगी। शीघ्र ही इनकी नियुक्ति को लेकर विभाग के स्तर से दिशानिर्देश तय करते हुए पूरी प्रक्रिया परिभाषित की जाएगी। राज्य सरकार ने इनकी नियुक्ति के लिए 50 लाख रुपये का अनुमानित बजट तैयार किया है, जो योजना विभाग को दिया जा चुका है।

5-5 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा

रायपुर राज्यपाल  डेका से धमतरी के सुदूर वनांचल क्षेत्र के प्रतिभाशाली बच्चों ने की आत्मीय मुलाकात राज्यपाल  रमेन डेका से आज लोकभवन में धमतरी जिले के सुदूर आदिवासी एवं वनांचल  विकासखंड नगरी के विशेष प्रतिभावान स्कूली बच्चों ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान बच्चों की प्रतिभा और उपलब्धियों पर राज्यपाल ने  प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। इस समूह में शामिल 22 बच्चों का चयन नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा 2026 के लिए हुआ है, जबकि पांच बच्चों ने स्पोकन इंग्लिश में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।  क्षेत्र की विशेष प्रतिभा   एआई वीडियो क्रिएटर सातवीं कक्षा की छात्रा कुमारी गरिमा साहू द्वारा तैयार  वीडियो का प्रदर्शन भी किया गया, जिसकी राज्यपाल  डेका ने सराहना की और उसे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। राज्यपाल ने इन बच्चों की सफलता में योगदान देने वाले शिक्षकों को भी सम्मानित किया और कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चों को आगे बढ़ाने में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। राज्यपाल ने बच्चों से बातचीत करते हुए कहा कि जीवन में लक्ष्य निर्धारित करना बहुत आवश्यक है। लक्ष्य को सामने रखकर निरंतर मेहनत और लगन से ही सफलता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने सरकारी स्कूलों के बच्चों की उपलब्धियों पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि यह सफलता अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायी है। राज्यपाल ने उपस्थित सभी  बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए 5-5 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। उन्होंने बच्चों से कहा कि इस राशि का उपयोग अपनी पढ़ाई और आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में करें। साथ ही, उन्हें गुल्लक भी प्रदान किए गए, ताकि उनमें नियमित बचत की आदत विकसित हो सके। इस अवसर पर राज्यपाल की उपसचिव मती निधि साहू सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, ग्राम सरपंच, संबंधित स्कूलों के प्रधान पाठक, शिक्षक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सपत्नीक अंगारेश्वर महादेव का पूजन-दर्शन कर अभिषेक किया

उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरूवार को उज्जैन स्थित अंगारेश्वर महादेव मंदिर में सपत्नीक पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अंगारेश्वर महादेव का पंचामृत से अभिषेक कर प्रदेश की जनता की सुख-समृद्धि की कामना की।  

प्रशासनिक बदलाव: बठिंडा निगम की कमान लवजीत के हाथ, विकास कार्यों में आएगी तेजी

बठिंडा. बठिंडा नगर निगम को नई कमिश्नर मिल गई हैं। पंजाब सरकार ने पीसीए अधिकारी लवजीत क्लसी को नगर निगम का नया कमिश्नर नियुक्त किया है। वह शुक्रवार यानी आज या फिर सोमवार को अपना कार्यभार संभाल सकती हैं। उनकी नियुक्ति को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उन्हें शहर के कामकाज का पहले से अच्छा अनुभव है। लवजीत क्लसी इससे पहले बठिंडा में अतिरिक्त उपायुक्त ग्रामीण और बीडीए में सहायक प्रशासक के रूप में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। इस कारण उन्हें स्थानीय स्तर की प्रशासनिक व्यवस्था, विकास कार्यों और लोगों की समस्याओं की अच्छी समझ है। अधिकारियों का मानना है कि उनके अनुभव का सीधा लाभ नगर निगम के कामकाज को मिलेगा और लंबे समय से लंबित पड़े कार्यों में तेजी आएगी। सरकार ने मौजूदा व्यवस्था में बदलाव करते हुए कंचन से नगर निगम कमिश्नर का अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया है। पिछले कई महीनों से कंचन के पास यह जिम्मेदारी अतिरिक्त रूप से थी और वह अपनी नियमित ड्यूटी के साथ निगम का काम भी देख रही थीं। अब इस बदलाव के बाद प्रशासनिक जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया गया है। स्थायी कमिश्नर की नियुक्ति से योजनाएं जल्द पूरी होंगी नई व्यवस्था के तहत अतिरिक्त उपायुक्त सामान्य और अतिरिक्त उपायुक्त ग्रामीण को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, ताकि प्रशासनिक कार्य सुचारू रूप से चलते रहें और किसी प्रकार की बाधा न आए। अधिकारियों का कहना है कि स्थायी कमिश्नर की नियुक्ति से नगर निगम के कामकाज में स्थिरता आएगी और योजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी। शहर में लंबे समय से स्थायी कमिश्नर की नियुक्ति का इंतजार किया जा रहा था। ऐसे में अब नई नियुक्ति से लोगों को उम्मीद है कि सफाई व्यवस्था, बुनियादी ढांचे के विकास और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि योजनाओं को सही दिशा में लागू किया गया, तो शहर के विकास को नई गति मिल सकती है। अब सभी की नजरें नई कमिश्नर के कार्यभार संभालने और उनकी प्राथमिकताओं पर टिकी हैं।