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चैनपुर में ऐतिहासिक भूमि पूजन, जनभागीदारी के साथ विकास का नया अध्याय शुरू

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिले के विकास इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय उस समय जुड़ गया, जब चैनपुर में 3 करोड़ 1 लाख 32 हजार रुपये की लागत से बनने वाले अत्याधुनिक जिला पंचायत भवन का भव्य भूमि पूजन समारोह उत्साह, श्रद्धा और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मुख्य अतिथि के रूप में भूमि पूजन कर इस महत्वपूर्ण परियोजना की नींव रखी। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और बड़ी संख्या में आम नागरिकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को जनभागीदारी का सशक्त उदाहरण बना दिया। भूमि पूजन के बाद राष्ट्र के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय गीत का सामूहिक गायन और छत्तीसगढ़ राज्य गीत की भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई। जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष मती यशवंती सिंह, जिला अध्यक्ष चंपादेवी पावले, नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिमा सरजू यादव, उपाध्यक्ष धर्मेन्द्र पटवा सहित कई जनप्रतिनिधि मंच पर मौजूद रहे। सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया। प्रशासनिक मजबूती का बनेगा केंद्र एसडीएम लिंगराज सिदार ने इसे जिले के लिए गौरवपूर्ण दिन बताते हुए कहा कि 301.32 लाख रुपये की लागत से बनने वाला यह भवन प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करेगा और विकास कार्यों को नई गति देगा। विकास योजनाओं की विस्तृत झलक मुख्य अतिथि श्याम बिहारी जायसवाल ने अपने संबोधन में कहा कि लंबे समय से जिला पंचायत भवन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी, जिसे आज साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि यह भवन प्रशासनिक कार्यों को पारदर्शी और प्रभावी बनाएगा। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के समय अटल बिहारी वाजपेयी के सपनों को याद करते हुए कहा कि एमसीबी जिला प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है और यहां अपार विकास संभावनाएं हैं। कृषि, रोजगार और बुनियादी ढांचे पर फोकस केवई नदी से 50 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा केल्हारी से कठौतिया तक डबल लाइन सड़क निर्माण प्रस्ताव स्वीकृत ‘वीबी रामजी’ योजना के तहत 125 दिनों का रोजगार समय पर भुगतान न होने पर ब्याज सहित राशि देने का प्रावधान गरीबों और किसानों के लिए बड़ी घोषणाएं 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत। हर घर में शौचालय सुविधा सुनिश्चित। दो वर्षों में कच्चे मकानों को पक्के मकानों में बदलने का लक्ष्य। कोदो, कुटकी और रागी जैसे मोटे अनाजों को बढ़ावा शिक्षा और स्वास्थ्य में विस्तार चिरमिरी में हॉर्टिकल्चर और पॉलीटेक्निक कॉलेज नर्सिंग कॉलेज की स्थापना मनेंद्रगढ़ में 220 बिस्तरों वाले अस्पताल की स्वीकृति नेतृत्व की सराहना और भविष्य की उम्मीदें जिला अध्यक्ष चंपादेवी पावले ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि इस भवन के निर्माण से जनसेवा और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनकी नीतियों से गांव-गांव तक विकास पहुंच रहा है। कुल मिलाकर, चैनपुर में बनने वाला यह जिला पंचायत भवन न केवल प्रशासनिक ढांचे को मजबूती देगा, बल्कि ग्रामीण विकास, जनसेवा और पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

जटिल प्रसव के मामले भी अब संभाल रहे छोटे जिलों के अस्पताल

लखनऊ योगी सरकार ने पिछले नौ वर्षों में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बड़े कदम उठाए हैं। आज प्रदेशवासियों को उनके ही जिले में गुणवत्तापूर्ण इलाज की सुविधा मिल रही है। योगी सरकार के प्रयासों का ही नतीजा है कि वर्तमान में जटिल प्रसव वाले मामलों को बड़े शहरों की ओर रेफर करने की प्रवृत्ति अब प्रदेश में कम हो रही है। छोटे शहरों में ही जटिल मामले संभाले जा रहे हैं। इसके साथ ही योगी सरकार ने 76 जिला अस्पतालों के 1,791 डाक्टरों को बीते चार वर्षों में प्रशिक्षण दिया। आरआरटीसी मॉडल से जिलों में मजबूत हो रही मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाएं उत्तर प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम करना आज भी स्वास्थ्य प्रणाली के सामने बड़ी चुनौती है। विशेषकर जिला और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेषज्ञ सेवाओं की कमी, आपात स्थितियों में त्वरित निर्णय की क्षमता का अभाव और समय पर रेफरल की जटिलताओं के कारण कई बार ऐसी स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं, जिन्हें रोका जा सकता है। इन्हीं सवालों का व्यावहारिक और प्रभावी उत्तर बनकर उभरा है रीजनल रिसोर्स एंड ट्रेनिंग सेंटर (आरआरटीसी) मॉडल। प्रदेश में इस वक्त 20 मेडिकल कॉलेज आरआरटीसी के रूप में काम कर रहे हैं।  आरआरटीसी मॉडल: प्रशिक्षण से आगे, एक “सिस्टम स्ट्रेंथनिंग इंजन” आरआरटीसी ने पारंपरिक प्रशिक्षण मॉडल से आगे बढ़ते हुए हब-एंड-स्पोक आधारित मेंटरशिप मॉडल विकसित किया, जिसमें मेडिकल कॉलेज “नॉलेज हब” के रूप में कार्य करता है और जिले “स्पोक” के रूप में उससे निरंतर मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं। इस मॉडल के तहत ऑन-साइट मेंटरिंग, निरंतर क्षमता निर्माण, नर्सिंग स्टाफ का सशक्तीकरण व मल्टी-डिपार्टमेंट सहयोग लिया जाता है। अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज परिसर में स्थापित आरआरटीसी इस मॉडल की मिसाल है। यहां से अलीगढ़, हाथरस व कासगंज जिला अस्पताल के डॉक्टरों व स्टाफ की क्षमतावृद्धि की गई । आज वे जटिल से जटिल मामलों को संभाल रहे हैं। आरआरटीसी की को-ऑर्डिनेटर डॉ. तबस्सुम रहमत बताती हैं कि “हमारा लक्ष्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि हर स्वास्थ्य इकाई को इस स्तर तक सक्षम बनाना है कि वह जटिल परिस्थितियों का सामना आत्मविश्वास के साथ कर सके।” जमीनी बदलाव: कासगंज से उभरती एक मिसाल आरआरटीसी मॉडल का प्रभाव सबसे स्पष्ट रूप से कासगंज जिला महिला अस्पताल में देखा जा सकता है। वर्ष 2017 में जहां इस अस्पताल में पहला सफल सी-सेक्शन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी, वहीं आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। ऑपरेशन थिएटर पूरी तरह सुसज्जित और सक्रिय है। अधिकतर डॉक्टर और स्टाफ प्रशिक्षित हैं। जटिल प्रसव मामलों का स्थानीय स्तर पर ही प्रबंधन संभव हो रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि पहले जिन मामलों को तत्काल बड़े शहरों में रेफर करना पड़ता था, अब उनमें से कई का इलाज जिले में ही हो रहा है। इससे न केवल समय की बचत हुई है, बल्कि माताओं और नवजातों के लिए जीवनरक्षक अंतर भी पैदा हुआ है। संकट के समय भी निरंतरता: कोविड-19 के दौरान अनुकूलन कोविड-19 महामारी के दौरान जब स्वास्थ्य सेवाओं पर अभूतपूर्व दबाव था, तब भी आरआरटीसी की पहल नहीं रुकी। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रशिक्षण जारी रखा गया, विशेष सत्र आयोजित किए गए, और यह सुनिश्चित किया गया कि संस्थागत प्रसव और नवजात देखभाल सेवाएं बाधित न हों। यह दर्शाता है कि यह मॉडल केवल स्थिर परिस्थितियों में ही नहीं, बल्कि संकट के समय भी अनुकूल और प्रभावी है। एक केस, जो बताता है क्षमता का वास्तविक अर्थ जेएन मेडिकल कालेज की डॉ. नसरीन नूर एक जटिल केस को याद करती हैं। 23 वर्षीय एक महिला तेज पेट दर्द के साथ आई। प्रारंभिक जांच में स्थिति सामान्य प्रतीत हो रही थी, लेकिन विस्तृत मूल्यांकन में हेटरोटॉपिक प्रेग्नेंसी का पता चला। एक गर्भाशय में और दूसरा ट्यूब में, जिसमें से ट्यूब वाली प्रेग्नेंसी फट चुकी थी। तत्काल सर्जरी कर मरीज की जान बचाई गई। सावधानीपूर्वक फॉलोअप के बाद उसी महिला ने नौ महीने बाद एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। यह केवल एक सफल केस नहीं, बल्कि यह संकेत है कि अब प्रणाली जटिल और जीवन-जोखिम वाली स्थितियों को पहचानने और संभालने में सक्षम हो रही है।

गोवा के मंत्री रमेश तावड़कर ने CM साय से की सौजन्य भेंट, जनजातीय कल्याण और खेल विकास पर चर्चा

CM साय से गोवा के मंत्री रमेश तावड़कर की सौजन्य भेंट: जनजातीय कल्याण और खेल विकास को लेकर हुई सार्थक चर्चा रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में गोवा के खेल एवं युवा मामले तथा जनजातीय कल्याण मंत्री रमेश तावड़कर ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए तावड़कर का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें बस्तर आर्ट का प्रतीक चिन्ह एवं जशपुर के स्थानीय उत्पाद भेंट किए। मुख्यमंत्री साय ने तावड़कर से जनजातीय कल्याण और खेलों के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार खेलों को प्रोत्साहन देने के लिए निरंतर प्रयासरत है और राज्य में आधुनिक खेल अधोसंरचना विकसित कर प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि देश के प्रथम ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ का आयोजन छत्तीसगढ़ में होना राज्य के लिए गौरव का विषय है। यह आयोजन न केवल जनजातीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान करेगा, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान और आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। उल्लेखनीय है कि रमेश तावड़कर के नेतृत्व में गोवा सरकार का प्रतिनिधिमंडल ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ में सहभागिता हेतु छत्तीसगढ़ प्रवास पर है। यह प्रतिनिधिमंडल खेल आयोजन में भागीदारी के साथ-साथ छत्तीसगढ़ मुक्तांगन, आदिवासी संग्रहालय सहित राज्य की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और विरासत से जुड़े विभिन्न स्थलों का अवलोकन भी करेगा।

अफवाहों पर ध्यान न दें, आवश्यकता पड़ने पर ही पेट्रोल-डीजल लेने जाएं

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि रसोई गैस सिलेंडर लेने के लिए एजेंसी के बाहर लाइन लगाने की आवश्यकता नहीं है, निर्धारित समय पर बुकिंग कराएं, सिलेंडर आपके घर पहुंच जाएगा। इसी तरह आवश्यकता होने पर ही पेट्रोल-डीजल लेने जाएं, फिलिंग सेंटरों पर लाइन लगाने की कोई जरूरत नहीं है। कुछ लोग अफवाहें फैला कर राज्य का माहौल खराब करना चाहते हैं, अव्यवस्था फैलाना चाह रहे हैं। लोगों को अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। मुख्यमंत्री गुरुवार को गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र (गीडा) में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गल्फ वॉर के पहले अगर किसी के घर रसोई गैस का सिलेंडर एक महीने चलता था, तो वह आज पांचवें या छठे दिन ही सिलेंडर लेने क्यों पहुंच रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि निर्धारित समय पर ही बुकिंग कराएं, आपकी बारी आने पर रसोई गैस आपके घर तक पहुंच जाएगी। सरकार ने सभी जिला प्रशासन के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। जैसे पहले गैस सिलेंडरों की होम डिलीवरी होती थी, वैसे ही अब भी होगी। इसके लिए एजेंसी के बाहर लाइन लगाने की कोई जरूरत नहीं है। पेट्रोल-डीजल लेने तभी जाएं, जब आवश्यकता हो, लाइन लगाने की आवश्यकता नहीं है। कुछ लोगों द्वारा साजिश के तहत फैलाई जा रही अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।  मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर हम उतावलेपन में आकर किसी अफवाह में, दुष्प्रचार के चक्कर में पड़ते हैं तो हमारी राष्ट्रभक्ति पर लोग संदेह करेंगे। हमको यह सतर्कता रखनी होगी। हमें अपने राष्ट्रीय नेतृत्व पर विश्वास रखकर धन्यवाद देना चाहिए कि भारत में सबकुछ अच्छा है। उत्साहपूर्वक उत्सव मनाए जा रहे हैं। नवरात्रि के कार्यक्रम हो रहे हैं। कल रामनवमी है, कल 12 बजे रामजन्मभूमि पर सूर्य भगवान भी भगवान श्रीराम का राजतिलक करेंगे। वैश्विक संकट के बीच संयम व सहयोग जरूरी मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ईरान-अमेरिका/इज़राइल युद्ध से पूरी दुनिया प्रभावित है। दुनिया में हाहाकार, अराजकता, अव्यवस्था है, लेकिन भारत के अंदर हम प्रधानमंत्री मोदी जी के यशस्वी नेतृत्व में बेखौफ व सुरक्षित हैं, विकास यात्रा को भी बढ़ा रहे हैं। लेकिन, यह युद्ध लंबा खिंचा तो हर व्यक्ति प्रभावित होगा। हमको भी मानसिक रूप से तैयार होना होगा। अफवाहों पर ध्यान नहीं देना होगा। जब आपत्ति या चुनौती आती है तो उसका मुकाबला करने के लिए हर व्यक्ति को सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना होगा, यही सच्ची राष्ट्रभक्ति होती है। जब हम किसी भी राष्ट्रीय मुद्दे पर सरकार के साथ मिलकर काम करते हैं तो बेहतर परिणाम सामने आएंगे। देशहित में अगर सरकार ने कोई कदम उठाया तो हम उसके लिए खुद को तैयार करेंगे।

योगी सरकार के 9 वर्षों में यूपी ने तोड़े पर्यटन क्षेत्र के सारे रिकार्ड, बना पर्यटन का सिरमौर

लखनऊ उत्तर प्रदेश पर्यटन क्षेत्र में सफलता की जो नई कहानी लिख रहा है, वह केवल पर्यटकों की रिकॉर्ड संख्या तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बन चुकी है। उत्तर प्रदेश में आस्था और अर्थव्यवस्था एक-दूसरे की पूरक बनकर प्रदेश में पर्यटन की विकास यात्रा को नई दिशा दे रही है। इस दिशा में सीएम योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप तैयार की गई पर्यटन नीति- 2022 के सफल क्रियान्वयन के साथ इको टूरिज्म का विकास, पर्यटन सुविधाओं में अवसंरचनात्मक सुधार, बेहतर कनेक्टिविटी, सुदृढ़ कानून व्यवस्था, एयरपोर्ट, एक्सप्रेस-वे और परिवहन सेवाओं के विस्तार ने यूपी में पर्यटन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साथ ही योगी सरकार का ‘टेंपल एंड फेस्टिवल इकॉनामी’ का मॉडल उत्तर प्रदेश को एक वैश्विक स्पिरिचुअल टूरिज्म हब के रूप में विकसित कर रहा है। आईआईएम लखनऊ ने कुछ समय पहले अयोध्या में पर्यटन को लेकर अध्ययन किया था। इसमें उसने योगी सरकार की टेंपल इकॉनामी की सराहना की है।  योगी सरकार के नौ वर्षों के शासनकाल में उत्तर प्रदेश ने पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है, जिसकी गवाही पर्यटन के आंकड़े देते हैं। योगी सरकार के पहले वर्ष 2017 में यूपी में लगभग 23.75 करोड़ पर्यटक आए थे, वहीं 2019 में यह संख्या लगभग दोगुनी बढ़कर 54.06 करोड़ पहुंच गई। हालांकि, इसमें कोविड महामारी के दौरान गिरावट दर्ज की गई, लेकिन योगी सरकार की पर्यटन नीति – 2022 के प्रभावी क्रियान्वयन से तेज रिकवरी हुई। परिणाम यह हुआ कि वर्ष 2024 में 64.91 करोड़ पर्यटकों के साथ यूपी देश में सर्वाधिक घरेलू पर्यटकों वाला राज्य बन गया और विदेशी पर्यटकों के मामले में चौथा। यही नहीं, वर्ष 2025 में महाकुंभ-2025 के आयोजन से पर्यटकों की संख्या अभूतपूर्व रूप से बढ़कर 156.18 करोड़ तक पहुंच गई। गौरतलब है कि पिछले 9 वर्षों में यूपी में आने वाले पर्यटकों की संख्या लगभग सात गुना बढ़ चुकी है। वर्तमान में राष्ट्रीय पर्यटन में यूपी की हिस्सेदारी 21.9 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो यूपी को वैश्विक पर्यटन का केंद्र बनाने की दिशा में उल्लेखनीय संकेत है। प्रदेश में 5 लाख से अधिक रोजगार का सृजन मुख्यमंत्री के विजन को साकार करती उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति-2022 प्रदेश में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन को साकार करने वाली साबित हुई है। इस नीति के तहत होटल, होमस्टे, ईको-टूरिज्म, वेलनेस और एडवेंचर टूरिज्म समेत 22 गतिविधियों को बढ़ावा देते हुए निवेश आधारित सब्सिडी की व्यवस्था की गई है। जिसके तहत अब तक ₹36,681 करोड़ के निवेश लक्ष्य को हासिल किया गया है। साथ ही 1,684 से अधिक पर्यटन इकाइयों को पंजीकरण प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। जिससे प्रदेश में 5 लाख से अधिक रोजगार का सृजन हुआ और महिलाओं का भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।  उत्तर प्रदेश में 12 से अधिक टूरिस्ट सर्किटों का निर्माण धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रदेश में विभिन्न तीर्थ परिषदों का निर्माण कर उनका कायाकल्प किया गया। जिससे एक ओर तो तीर्थों में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा में बढ़ोतरी हुई, साथ ही इन क्षेत्रों में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिला। इसमें अयोध्या, देवीपाटन, ब्रज तीर्थ, विंध्याचल, चित्रकूट, नैमिषारण्य, शुक तीर्थ विकास परिषदों का गठन प्रमुख है। इसके साथ ही प्रदेश में 12 से अधिक टूरिस्ट सर्किटों, रामायण, कृष्ण, बौद्ध, जैन, सूफी, स्वतंत्रता संग्राम सर्किट आदि का निर्माण किया गया है। इसके साथ ही 83 धार्मिक मार्गों के चौड़ीकरण व विकास से श्रद्धालुओं की यात्रा और सुगम हुई है। सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण कर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिया प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण कर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया। इसमें लखनऊ में भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की स्थापना, कौशांबी में संग्रहालय, बाराबंकी में बाबू केडी सिंह संग्रहालय, गोरखा रेजिमेंट सेंटर, मेरठ में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम को समर्पित संग्रहालय और गोरखपुर में शहीद स्मारक जैसे निर्माण कार्य उल्लेखनीय हैं। प्रयागराज में आजाद पार्क और ‘देखो प्रयागराज’ ट्रेल का अनुभव, बुंदेलखंड (महोबा) का विरासत पर्यटन स्थल के रूप में विकास, अयोध्या में अंतर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान, कुशीनगर में बुद्ध थीम पार्क, आगरा स्थित बटेश्वर और श्रावस्ती का समेकित पर्यटन विकास जैसी विभिन्न परियोजनाएं प्रदेश में सांस्कृतिक समृद्धि के साथ पर्यटन विकास की वाहक साबित हो रही हैं। राज्य में 49 इको-टूरिज्म परियोजनाएं शुरू की गईं राज्य में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अगस्त 2022 में यूपी इको टूरिज्म बोर्ड का गठन किया गया। जिसके माध्यम से प्रदेश के प्रमुख इको टूरिज्म केंद्रों दुधवा, कतर्नियाघाट, पीलीभीत टाइगर रिजर्व, अमानगढ़ और सोहगीबरवा वन क्षेत्रों के साथ अन्य प्राकृतिक पर्यावासों में भी नाइट स्टे, वॉच टॉवर, नेचर ट्रेल, कैफेटेरिया, होमस्टे और बर्ड वॉचिंग जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। राज्य में 49 इको-टूरिज्म परियोजनाएं शुरू की गईं हैं, साथ ही ग्रामीण पर्यटन के लिए 234 गांवों का चयन किया गया है। प्रदेश के सभी जिलों में युवा पर्यटन क्लबों का गठन कर स्थानीय सहभागिता को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। ‘टेंपल एंड फेस्टिवल इकॉनामी’ मॉडल सबसे प्रभावशाली कारक सिद्ध हुआ यही नहीं, योगी सरकार का ‘टेंपल एंड फेस्टिवल इकॉनामी’ मॉडल यूपी में पर्यटन विकास का सबसे प्रभावशाली कारक सिद्ध हुआ है। इसका सबसे सशक्त उदाहरण अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के रूप में देखने को मिला। अयोध्या में आने वाले पर्यटकों की संख्या वर्ष 2017 के 2.84 लाख से अविश्वसनीय रूप से बढ़कर वर्ष 2024 में 16.44 करोड़ के पार पहुंच गई। यही नहीं, वर्ष 2025 में भी अयोध्या में 29.95 करोड़ श्रद्धालुओं का आगमन हुआ। इसी क्रम में वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, प्रयागराज में कुंभ और महाकुंभ के आयोजनों ने इन तीर्थक्षेत्रों में पर्यटन को अभूतपूर्व बढ़ावा दिया है। योगी सरकार का यह मॉडल बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि वर्ष 2017 से 2025 तक 197 ऐतिहासिक और पवित्र स्थलों का जीर्णोद्धार हुआ, जिससे प्रदेश में पर्यटनजनित व्यापार और रोजगार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। उत्तर प्रदेश में त्योहार और उत्सव अब दिव्य-भव्य महोत्सव का रूप ले चुके हैं। इसमें अयोध्या का दीपोत्सव, वाराणसी की देव दीपावली और मथुरा के ब्रज और बरसाना के होली उत्सव में देशी-विदेशी पर्यटकों की भीड़ लगती है। यही नहीं, प्रयागराज के महाकुंभ-2025 में … Read more

पुनर्वासित युवाओं के प्रशिक्षण का किया अवलोकन, वेलकम एवं इलेक्ट्रिकल टूल किट का किया वितरण

रायपुर उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने पुनर्वास केंद्र दंतेवाड़ा में युवाओं से की मुलाकात उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने गुरुवार को दंतेवाड़ा स्थित पुनर्वास केंद्र का निरीक्षण कर पुनर्वासित युवाओं से आत्मीय संवाद किया। इस दौरान उन्होंने युवाओं को इलेक्ट्रिकल टूल किट एवं वेलकम किट का वितरण किया। नवरात्रि के अंतिम दिन उपमुख्यमंत्री  शर्मा ने दंतेवाड़ा पहुंचकर उन्होंने माँ दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की।          इसके पश्चात वे पुनर्वास केंद्र पहुंचे, जहां उन्होंने वहां प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं से चर्चा की और उनकी आवश्यकताओं एवं भविष्य की योजनाओं की जानकारी ली। युवाओं ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद वे अपने गृह ग्राम लौटकर खेती-किसानी करना चाहते हैं। इस पर  शर्मा ने आश्वस्त किया कि इच्छुक युवाओं को कृषि संबंधी प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें।          उपमुख्यमंत्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि पुनर्वास नीति का उद्देश्य उन्हें मुख्यधारा से जोड़कर सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है। उन्होंने युवाओं से अपने अन्य साथियों को भी पुनर्वास के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया, ताकि वे भी समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर उज्ज्वल भविष्य बना सकें। उन्होंने पुनर्वास केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं, भोजन व्यवस्था एवं प्रशिक्षण गतिविधियों की समीक्षा की। युवाओं द्वारा स्वयं भोजन बनाने की इच्छा जताने पर उन्होंने अनुमति प्रदान करते हुए कहा कि इच्छुक युवा स्वेच्छा से भोजन बना सकते हैं।             शर्मा ने निर्देश दिए कि सभी पुनर्वासित युवाओं को ड्राइविंग प्रशिक्षण दिया जाए तथा केंद्र से बाहर जाने से पूर्व उनके ड्राइविंग लाइसेंस बनाना भी सुनिश्चित किए जाएं। उपमुख्यमंत्री उनसे अपील की कि यदि उनके परिजन या पहचान के लोग जेल में निरुद्ध हैं तो वे उनसे मिल सकते हैं या वे पुनर्वास केंद्र में आकर साथियों से मुलाकात कर सकते हैं और यदि वे जेल से पुनर्वास करना चाहें तो भी शासन उनकी हर संभव मदद कर जेल से पुर्नवास कराने को तैयार है।         उल्लेखनीय है कि वर्तमान में केंद्र में कुल 107 युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जिनमें 60 बीजापुर एवं 47 दंतेवाड़ा जिले के हैं। यहां इलेक्ट्रिकल, वेल्डिंग, प्लंबिंग, सिलाई और ड्राइविंग जैसे रोजगारपरक प्रशिक्षण प्रदान किए जा रहे हैं। अब तक 7 युवाओं को ड्राइविंग के क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है तथा 75 युवाओं को सिलाई मशीन का वितरण किया गया है।        सीआरपीएफ के जवानों का उपमुख्यमंत्री ने किया प्रोत्साहन         गुरुवार को उपमुख्यमंत्री  शर्मा बस्तर से कभी अति संवेदनशील क्षेत्र माने जाने वाले मारडूम घाटी मार्ग से होते हुए चित्रकूट, लोहंडीगुड़ा और बारसूर के रास्ते दंतेवाड़ा पहुंचे थे। इसके माध्यम से उन्होंने लोगों को संदेश दिया कि कभी दुर्गम माने जाने वाले मार्ग भी अब सुगम हो गए हैं। अब लोग बिना किसी भय के रात हो या दिन निर्भय होकर इन पर सफर कर सकते हैं। उन्होंने दंतेवाड़ा स्थित सीआरपीएफ बटालियन कैंप पहुंच, जवानों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया तथा क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि हमारे सैन्य बलों के शौर्य का ही परिणाम है कि आज बस्तर संभाग में अब तक लोगों की नजरों से छुपे हुए नए नए पर्यटन केंद्रों में पहुंच कर लोग बस्तर के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले रहे हैं और स्थानीय लोगों को इससे रोजगार भी प्राप्त हो रहा है।

गैस नहीं तो सड़क जाम! मुरैना में LPG की किल्लत पर लोगों का उग्र प्रदर्शन

मुरैना मुरैना जिले में गैस एजेंसियों पर सिलिंडर के लिए कतारें लंबी होती जा रही हैं। आज सुबह से सबलगढ़ गैस एजेंसी पर खाली सिलिंडरों के साथ लोगों की लाइन लग गई। एजेंसी संचालक ने 11 बजे एजेंसी की शटर गिरा दी। उपभोक्ताओं को सिलिंडर देने से मना कर दिया। एजेंसी ने कहा कि सिंलिंडरों की कमी है। ऐसे में अब और लोगों को सिलिंडर नहीं दिए जा सकते हैं, जिससे नाराज होकर लोग सड़कों पर उतर आए। खाली सिलिंडरों को एमएम रोड पर रखकर जाम लगा दिया। करीब 20 मिनट तक हंगामा व जाम चलता रहा। मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझाइश दी। लाइन में लगे लोगों को मिला सिलिंडर हंगामे के बाद एजेंसी संचालक ने कहा कि लाइन में लगे लोगों को ही सिलिंडर मिलेंगे। उसके बाद जाम लगा रहे लोग खाली सिलिंडरों को लेकर एजेंसी की तरफ दौड़े।  

जनता दर्शन में 200 लोगों की समस्याएं सुनीं सीएम योगी आदित्यनाथ ने

गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर प्रवास के दौरान गुरुवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनता की हर समस्या का त्वरित समाधान कराएं। किसी भी समस्या से जुड़ी शिकायत को संवेदनशीलता से लेकर उसका संतुष्टिप्रद निस्तारण सुनिश्चित कराने में कोई कोताही नहीं होनी चाहिए। जनता दर्शन में पहुंचे लोगों को मुख्यमंत्री ने आश्वस्त करते हुए कहा, चिंता मत करिए। सरकार आपकी हर समस्या पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित कराएगी।  जनता दर्शन के दौरान सीएम योगी करीब 200 लोगों से मिले। महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक मुख्यमंत्री खुद पहुंचे और एक-एक कर उनकी समस्याओं को विस्तार से सुना। उनके प्रार्थना पत्र लिए और पास में मौजूद अधिकारियों को समस्या समाधान हेतु आवश्यक दिशानिर्देश दिए। अलग-अलग मामलों से जुड़ी समस्याओं के निस्तारण के लिए उन्होंने संबंधित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को प्रार्थना पत्र संदर्भित कर निर्देशित किया कि सभी समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध, निष्पक्ष और संतुष्टिपरक होना चाहिए।  अपराध व जमीन कब्जा किए जाने से संबंधित शिकायतों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यदि कोई दबंग किसी की जमीन पर जबरन कब्जा कर रहा हो तो उसके खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए। गरीबों को उजाड़ने वाले कतई न बख्शे जाएं। गरीबों की संपत्ति पर गरीबों का ही कब्जा सुनिश्चित होना चाहिए। जनता दर्शन में पारिवारिक विवाद के जुड़े मामले भी आए थे। इस पर मुख्यमंत्री ने दोनों पक्षों के बीच पहले संवाद कराने और बात न बनने पर यथोचित विधिक कार्यवाही के निर्देश दिए।   जनता दर्शन में हर बार की तरह कुछ लोग इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर आए थे। मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिया कि धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिया कि जो भी जरूरतमंद हैं, प्रशासन उनके उच्च स्तरीय इलाज का एस्टीमेट शीघ्रता से बनवाकर उपलब्ध कराए। एस्टीमेट मिलते ही सरकार तुरंत धन उपलब्ध कराएगी। जनता दर्शन में कुछ महिलाएं अपने बच्चों को लेकर आई थीं। मुख्यमंत्री ने इन बच्चों को खूब दुलारा और उन्हें चॉकलेट के साथ आशीर्वाद भी दिया।    गोवंश को दुलारकर गुड़ खिलाया सीएम ने गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या परंपरागत रही। उन्होंने प्रातःकाल गोरखनाथ मंदिर में शिवावतार गुरु गोरखनाथ का दर्शन-पूजन किया और अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि स्थल पर जाकर मत्था टेका। सीएम योगी जब भी गोरखनाथ मंदिर में होते हैं तो गोसेवा उनकी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा रहती है। गुरुवार सुबह वह मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए मंदिर की गोशाला पहुंचे और वहां कुछ समय व्यतीत किया। गोशाला में सीएम योगी ने गोवंश के माथे पर हाथ फेरा। उन्हें खूब दुलारा और अपने हाथों से गुड़ खिलाया।

इंडस्ट्रियल बूस्ट: हरियाणा में लीज पर प्लॉट की योजना को CM सैनी की हरी झंडी

चंडीगढ़. नए उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने नव उद्यमियों को लीज पर प्लाट देने का बड़ा निर्णय लिया है। हरियाणा के 23 जिलों में करीब एक दर्जन जिले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पड़ते हैं। यहां जमीन के रेट बहुत अधिक हैं, जिस कारण उद्यमियों के लिए नये उद्यम लगाना आसान नहीं है। प्रदेश सरकार ने उद्यमियों की इस समस्या को समझते हुए नये वित्तीय वर्ष में लैंड आन लीज नीति लागू करने का फैसला किया है। हरियाणा सरकार की लैंड आन लीज नीति के तहत उद्यमियों को लंबी अवधि के लिए लीज पर प्लाट किए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर इन प्लाटों को फ्री-होल्ड में परिवर्तित करने की सुविधा उद्यमियों को मिलेगी। हरियाणा औद्योगिक एवं आधारभूत संरचना विकास निगम (एचएसआइआइडीसी) की और से उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त व सचिव डा. अमित कुमार अग्रवाल की देखरेख में लैंड आन लीज नीति तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने साल 2026-27 के बजट में इस नीति की घोषणा की है। बजट पूर्व परामर्श बैठकों में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को उद्यमियों ने महंगी जमीन होने की समस्या से अवगत कराया था, जिसके बाद सरकार ने लैंड आन लीज नीति तैयार करने का निर्णय लिया है। उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर के प्रस्ताव के अंतर्गत नये उद्योगों की स्थापना और इकाइयों के शीघ्र परिचालन को बढ़ावा देने के लिए एचएसआइआइडीसी द्वारा प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में प्लग एंड प्ले सुविधाओं के साथ औद्योगिक फैक्ट्रियां व शेड भी विकसित होंगे। निवेशकों को 45 कार्यदिवसों के भीतर एक डिजिटल प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया जाएगा। बता दें, कोविड के बाद उपजी कठिनाइयों का अभी तक भी सामना कर रहे एचएसआइआइडीसी के 500 से अधिक प्लाटधारकों पर रिजंपशन की तलवार लटकी हुई है। उन्हें राहत देते हुए हरियाणा सरकार ने निर्माण की समय सीमा 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। हरियाणा में औद्योगिक निवेश की अपार संभावना है। दिल्ली के नजदीक होने के कारण राज्य के शहर काफी उत्पादक श्रेणी में आते हैं। निवेशकों को विभिन्न विभागों के चक्कर काटने से बचाने को सरकार ने फरीदावाद, गुरुग्राम, मानेसर व रेवाड़ी में सभी संबंधित विभागों के संयुक्त औद्योगिक सचिवालय वनाने का फैसला किया है। कामकाजी महिलाओं के लिए औद्योगिक क्षेत्रों में 10 आधुनिक मातृ शक्ति औद्योगिक क्रेच नेटवर्क शुरू करने की योजना है।

पुराना मामला बना फंदा: 8 साल बाद विजिलेंस ने रिटायर्ड JE को किया गिरफ्तार

मानसा. मानसा जिले में नहरी निर्माण कार्य में गड़बड़ी और गबन के मामले में विजिलेंस विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक सेवानिवृत्त कनिष्ठ अभियंता को गिरफ्तार किया है। यह मामला वर्ष 2018 से जुड़ा हुआ है, जिसमें निर्माण कार्य के दौरान घटिया सामग्री के उपयोग और सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि हुई है। विजिलेंस विभाग के निरीक्षक नगिंदर सिंह ने बताया कि गांव बच्छोआना निवासी अमरीक सिंह ने शिकायत दी थी कि गांव में बनाए तीन नहरी मोघों के निर्माण में गुणवत्ता के साथ समझौता किया गया है। शिकायत मिलने के बाद विभाग की तकनीकी टीमों ने मौके पर जाकर जांच की, जिसमें निर्माण कार्य में घटिया सामग्री इस्तेमाल होने की पुष्टि हुई। निर्माण में 5 लाख का गबन किया गया जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इस पूरे प्रकरण में करीब साढ़े पांच लाख रुपये का गबन किया गया है। तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर विजिलेंस विभाग ने 25 मार्च को कार्रवाई करते हुए पंजाब वाटर रिसोर्स मैनेजमेंट डेवलपमेंट से जुड़े दो सेवानिवृत्त अधिकारियों समेत कुल पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। इसी कार्रवाई के तहत विभाग के सेवानिवृत्त कनिष्ठ अभियंता हरचरण सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड लिया जाएगा, ताकि मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की गहराई से जांच की जा सके। अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए छापमारी जारी विजिलेंस विभाग का कहना है कि इस मामले में नामजद किए गए अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में चाहे आरोपी सेवा में हो या सेवानिवृत्त, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। इस कार्रवाई से संदेश देने की कोशिश की गई है कि सरकारी कार्यों में गड़बड़ी करने वालों पर देर-सवेर कार्रवाई जरूर होती है। स्थानीय लोगों ने भी इस कदम का स्वागत कर उम्मीद जताई है कि ऐसे मामलों में सख्ती से कार्रवाई जारी रहनी चाहिए, ताकि विकास कार्यों में पारदर्शिता बनी रहे।