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राशिफल 28 मार्च 2026: मेष से मीन तक, जानें किसका होगा शुभ दिन और कौन सा राशी हो सकता है प्रभावित

मेष राशि- मेष राशि वालों के लिए दिन ठीक-ठाक रहेगा। सुबह से काम का दबाव रह सकता है, लेकिन धीरे-धीरे स्थिति आपके पक्ष में आती दिखेगी। नौकरी करने वालों को किसी जरूरी काम में सफलता मिल सकती है। अगर लंबे समय से कोई फाइल या प्रोजेक्ट अटका हुआ है तो उसमें आज प्रगति हो सकती है। घर के माहौल में भी सुधार रहेगा। पैसों को लेकर राहत मिलने के संकेत हैं। वृषभ राशि- वृषभ राशि वालों के लिए आज का दिन सामान्य रहेगा। काम में जल्दबाजी से बचें। ऑफिस में किसी बात को लेकर चर्चा हो सकती है। कारोबार करने वालों को छोटा लेकिन जरूरी लाभ मिल सकता है। परिवार में किसी सदस्य की बात को गंभीरता से सुनना बेहतर रहेगा। खर्च थोड़ा बढ़ सकता है, इसलिए पैसे सोच-समझकर खर्च करें। मिथुन राशि- मिथुन राशि के लोगों के लिए दिन अच्छा रहने वाला है। नौकरी और कारोबार दोनों में कुछ नए मौके सामने आ सकते हैं। किसी पुराने जानने वाले से संपर्क बन सकता है, जिससे आगे फायदा हो सकता है। परिवार में माहौल हल्का और सामान्य रहेगा। अगर किसी नई योजना पर काम शुरू करना चाहते हैं तो समय ठीक है। कर्क राशि- कर्क राशि वालों के लिए आज का दिन थोड़ा भावुक रह सकता है। घर और परिवार की बातों में समय ज्यादा जा सकता है। ऑफिस में काम बढ़ सकता है, लेकिन आप उसे संभाल लेंगे। आर्थिक मामलों में कोई बड़ा फैसला आज टालना बेहतर रहेगा। शाम तक मन हल्का महसूस होगा। सिंह राशि- सिंह राशि वालों के लिए आज का दिन अच्छा संकेत दे रहा है। नौकरी में आपकी मेहनत नोटिस की जा सकती है। वरिष्ठ अधिकारी आपकी बात सुन सकते हैं। कारोबार में भी फायदा होने के आसार हैं। परिवार में खुशी का माहौल रहेगा। किसी शुभ समाचार से दिन बेहतर हो सकता है। कन्या राशि- कन्या राशि वालों को आज मेहनत का फायदा मिल सकता है। लंबे समय से जिस काम को पूरा करने की कोशिश कर रहे थे, उसमें आज सफलता मिल सकती है। छात्रों के लिए भी दिन अच्छा है। परिवार में किसी जरूरी विषय पर बातचीत हो सकती है। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, लेकिन थकान महसूस हो सकती है। तुला राशि- तुला राशि के लोगों के लिए आज का दिन संतुलन बनाए रखने का है। कामकाज में स्थिति बेहतर रहेगी। ऑफिस में किसी जरूरी जिम्मेदारी को पूरा करने का मौका मिल सकता है। परिवार और जीवनसाथी का सहयोग रहेगा। पैसों को लेकर राहत मिल सकती है, लेकिन अनावश्यक खर्च से बचना होगा। वृश्चिक राशि- वृश्चिक राशि वालों के लिए दिन व्यस्त रह सकता है। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिलने के संकेत हैं। कारोबार करने वालों को पुराने निवेश से फायदा हो सकता है। परिवार में किसी सदस्य की सलाह काम आ सकती है। शाम के समय थोड़ा आराम करने की जरूरत महसूस होगी। धनु राशि- धनु राशि वालों के लिए आज भाग्य का साथ मिल सकता है। नया काम शुरू करने या किसी जरूरी फैसले के लिए दिन अच्छा माना जा सकता है। यात्रा का योग भी बन रहा है। आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं। परिवार के साथ समय अच्छा बीतेगा। मकर राशि- मकर राशि वालों के लिए आज का दिन कामकाज के लिहाज से अच्छा है। ऑफिस में आपकी मेहनत का असर दिखेगा। कारोबार में लाभ हो सकता है। घर में सामान्य माहौल रहेगा। किसी पुराने काम को पूरा करने का मौका मिल सकता है। कुंभ राशि- कुंभ राशि वालों के लिए दिन नए अवसर लेकर आ सकता है। नौकरी में बदलाव या नई जिम्मेदारी की बात हो सकती है। कारोबार में भी स्थिति बेहतर रहेगी। घर के लोगों के साथ समय अच्छा बीतेगा। खर्च पर थोड़ा नियंत्रण रखने की जरूरत है। मीन राशि- मीन राशि वालों के लिए आज का दिन राहत भरा रह सकता है। लंबे समय से रुका काम पूरा हो सकता है। नौकरी और कारोबार दोनों में लाभ के संकेत हैं। परिवार में शांति बनी रहेगी। मन भी आज पहले से बेहतर रहेगा।

ईंधन पर टैक्स घटा, आम लोगों को राहत: पेट्रोल ₹10 और डीजल ₹10 तक सस्ता – बिंदल

शिमला शिमला भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि 26 मार्च 2026 को जारी भारत सरकार के आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन के माध्यम से पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में ऐतिहासिक कमी की गई है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय वैश्विक संकट और पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के बीच लिया गया है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मजबूत और जनहितकारी नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है। डॉ. बिंदल ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना (Notification No. 05/2026-Central Excise एवं संबंधित संशोधन नियम 02/2026) के अनुसार पेट्रोल (Motor Spirit) पर उत्पाद शुल्क को ₹13 प्रति लीटर से घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि डीजल (High Speed Diesel) पर उत्पाद शुल्क ₹10 प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया गया है। इससे देश के 140 करोड़ नागरिकों को सीधी राहत मिलेगी और महंगाई पर नियंत्रण में मदद मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि केंद्र सरकार ने दूरदर्शिता दिखाते हुए ईंधन की देश में उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक कदम भी उठाए हैं। डीजल पर ₹21.5 प्रति लीटर तथा एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर ₹29.5 प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लगाया गया है, ताकि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद देश में ईंधन की कमी न हो और कीमतें नियंत्रित रहें। डॉ. बिंदल ने कहा कि यह निर्णय स्पष्ट करता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हर परिस्थिति में “जनहित सर्वोपरि” के सिद्धांत पर कार्य करती है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत सरकार ने आम नागरिक को राहत देने का कार्य किया है, जो ‘ईज ऑफ लिविंग’ को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके विपरीत, डॉ. बिंदल ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जहां एक ओर केंद्र सरकार टैक्स घटाकर जनता को राहत दे रही है, वहीं प्रदेश की कांग्रेस सरकार पेट्रोल और डीजल पर ₹5 प्रति लीटर तक सेस लगाने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पूरी तरह जनविरोधी है और प्रदेश की जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार पहले ही डीजल पर ₹10.40 प्रति लीटर टैक्स लगाकर हजारों करोड़ रुपये जनता से वसूल चुकी है और अब ₹5 अतिरिक्त सेस लगाकर आम आदमी, किसान, बागवान, व्यापारी और परिवहन क्षेत्र को और अधिक प्रभावित करने की तैयारी कर रही है। डॉ. बिंदल ने कहा कि यह स्पष्ट अंतर है – एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार है जो टैक्स कम कर राहत देती है, और दूसरी ओर कांग्रेस की सरकार है जो नए-नए कर लगाकर जनता की जेब पर बोझ डालती है। उन्होंने अंत में कहा कि भाजपा इस जनविरोधी सेस का कड़ा विरोध करेगी और हिमाचल प्रदेश की जनता के हितों की रक्षा के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी।

बंगाल में सख्त संदेश—बुलडोजर पॉलिटिक्स की कोई जगह नहीं: Abhishek Banerjee

कोलकाता तृणमूल कांग्रेस के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की बुलडोजर शैली की राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है। अपने एक्स हैंडल का इस्तेमाल करते हुए बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा राज्य में कई प्रशासनिक बदलाव किए जाने के बाद शुक्रवार को राम नवमी के जुलूस के दौरान मुर्शिदाबाद जिले के रघुनाथगंज में हिंसा हुई। बनर्जी ने कहा कि भाजपा बंगाल की धरती पर इसी तरह का 'परिवर्तन' थोपना चाहती है। चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद चुनाव आयोग ने व्यापक प्रशासनिक बदलाव शुरू कर दिए और मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी, एडीजी, आईजी, एसपी, डीएम, कोलकाता पुलिस कमिश्नर और यहां तक ​​कि केएमसी कमिश्नर को भी बदल दिया। इस तरह के अभूतपूर्व हस्तक्षेप से इरादे और समय को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने आगे कहा कि इसके बाद जो हुआ है वह और भी चिंताजनक है। इन बदलावों की आड़ में, धमकियों की घटनाएं बढ़ रही हैं, दुकानों में तोड़फोड़ हो रही है, धर्म के नाम पर तनाव भड़काया जा रहा है और आम लोगों को परेशान किया जा रहा है। हमें 'बुलडोजर मॉडल' की जरूरत नहीं है। हमें नफरत और हिंसा की आयातित राजनीति की जरूरत नहीं है। तृणमूल कांग्रेस नेता के अनुसार हमारी पहचान हमारी साझी संस्कृति, हमारे मिलजुल कर मनाए जाने वाले कार्यक्रम, एक-दूसरे की मान्यताओं के प्रति हमारा सम्मान है। उन्होंने समाज में सांप्रदायिक सद्भाव के महत्व पर भी प्रकाश डाला और बताया कि पश्चिम बंगाल ने इस दिशा में किस प्रकार अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि कई पीढ़ियों से बंगाल दुर्गा पूजा, दिवाली, पोइला बोइशाख, ईद, गुरु नानक जयंती, बुद्ध पूर्णिमा और क्रिसमस बिना किसी भय, विभाजन या हिंसा के एक साथ मनाता आया है। फिर भी पिछले कुछ दिनों में हमें क्रांतिकारियों की इस भूमि पर थोपे जा रहे 'परिवर्तन' की एक भयावह झलक देखने को मिल रही है। बनर्जी ने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर और स्वामी विवेकानंद की भूमि हमेशा से सहिष्णुता, सद्भाव और सहअस्तित्व की प्रतीक रही है। दशकों से बंगाल विविधता में एकता का जीता-जागता उदाहरण रहा है। बनर्जी ने अपनी पोस्ट में कहा कि इस तरह की राजनीति से किसी को भी लाभ नहीं मिलना चाहिए। आज, वही सामाजिक ताना-बाना तनाव में दिखाई दे रहा है। सवाल यह है कि इस व्यवधान से किसे लाभ हो रहा है और बंगाल की जनता को इसकी कितनी कीमत चुकानी पड़ रही है? चुनाव आयोग और भाजपा पर शर्म आती है!

गूगल पर घिरा विवाद: एपस्टीन केस के पीड़ितों ने डेटा दिखाने का लगाया आरोप

वॉशिंगटन सीएनबीसी के मुताबिक जेफरी एपस्टीन के पीड़ित एक समूह ने गूगल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। गूगल पर आरोप है कि कंपनी के एआई टूल्स और सर्च इंजन ने उनकी पर्सनल पहचान और कॉन्टैक्ट जानकारी ऑनलाइन दिखा दी। इसकी वजह से उन्हें शोषण, धमकियां और फिर से मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा। जाने डोई नामक एक पीड़ित ने अपनी तरह अन्य पीड़ितों के हवाले से अमेरिका के फेडरल कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि गूगल प्लेटफॉर्म के जरिए नाम, ईमेल एड्रेस और फोन नंबर समेत बहुत ही संवेदनशील जानकारी दिखा दी गई है। हालांकि, इसे हटाने के लिए कई बार अपील भी की गई थी। शिकायत के मुताबिक ये खुलासे तब हुए जब पीड़ितों ने अपनी जानकारी प्राइवेट रखने की कोशिश की थी। मुकदमे में इस मामले का पता 2025 के आखिर और 2026 की शुरुआत में अमेरिकी न्यायिक विभाग द्वारा बड़ी संख्या में डॉक्यूमेंट्स जारी करने के बाद लगाया गया है। जारी किए गए रिकॉर्ड में लगभग 100 एपस्टीन पीड़ितों की अनजाने में पहचान हो गई थी। हालांकि सरकार ने बाद में गलती को पहचाना और मटीरियल वापस लेने की कोशिश की, लेकिन संवेदनशील डेटा पहले ही ऑनलाइन फैल चुका था। पीड़ितों का आरोप है कि गूगल ने इस समस्या के बारे में अलर्ट किए जाने के बाद भी अपने सर्च रिजल्ट्स और एआई-जेनरेटेड रिस्पॉन्स के जरिए यह जानकारी दिखाना जारी रखा। शिकायत में कहा गया है कि लगातार इस खुलासे से पीड़ितों को नया तनाव हो गया है। मुकदमे में कहा गया है, “अजनबी उन्हें कॉल करते हैं, ईमेल करते हैं, उनकी फिजिकल सेफ्टी के लिए खतरा पैदा करते हैं और उन पर एपस्टीन के साथ मिलकर साजिश करने का आरोप लगाते हैं जबकि असल में वे (पीड़ित शिकायतकर्ता) एपस्टीन के शिकार हैं।” यह कानूनी कार्रवाई एआई तकनीक, प्राइवेसी और उन प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर बढ़ती चिंताओं को दिखाती है जो संवेदनशील जानकारी इकट्ठा करते हैं और दिखाते हैं। दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक का नाम लेकर, मुकदमा बिना फिल्टर वाले एआई रिस्पॉन्स और सर्च रिजल्ट के संभावित नतीजों को दिखाता है जो पहले से ही संवेदनशील या नुकसानदायक डेटा को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि इस केस के नतीजे का असर टेक कंपनियों के पर्सनल डेटा को संभालने के तरीके पर पड़ सकता है, खासकर उन मामलों में जब अपराध के शिकार या संवेदनशील सरकारी रिकॉर्ड शामिल हों। पीड़ित ऐसे उपाय ढूंढ रहे हैं जो आगे के खुलासे को रोक सकें और उनकी पहचान के बार-बार सामने आने से होने वाली परेशानी के लिए गूगल को जिम्मेदार ठहरा सकें।

रामनवमी झड़पों से भड़के संत, केंद्र से बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करने की अपील

अयोध्या शुक्रवार को रामनवमी की शोभायात्रा के दौरान पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के कुछ हिस्सों में दो समुदायों के बीच झड़प हुई। हिंसा में एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। मामले को शांत करते हुए पुलिस ने प्रभावित जांगीपुर और रघुनाथगंज इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी है। इस घटना को लेकर अब अयोध्या के संतों ने विरोध दर्ज कराया है और ममता सरकार पर जमकर निशाना साधा है। महामंडलेश्वर विष्णु दास ने शोभा यात्रा पर हुई पत्थरबाजी की घटना को निंदनीय बताया। उन्होंने आईएएनएस से खास बातचीत में कहा, "ममता बनर्जी कट्टर समुदाय को पाल कर रखती हैं और एक ही समुदाय को खुश करने की कोशिश करती हैं, लेकिन अब उनकी सत्ता जाने वाली है क्योंकि उन्होंने हमारे भगवान श्री राम की शोभा यात्रा पर पथराव किया है। इन्होंने गैंग बना रखी है, जिसका काम सिर्फ पथराव करना और हमारे समुदाय को नुकसान पहुंचाना है। ममता जैसे लोग ही हैं, जो भारत में रहकर शरिया कानून लाना चाहते हैं।" उन्होंने कहा, "पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश जैसे हालात हैं, जहां हिंदुओं पर अत्याचार होता रहा है, और इसके पीछे ममता सरकार का बड़ा हाथ है, लेकिन अब समय आ गया है कि वहां के हिंदू और सनातनी लोग उन्हें जवाब देने वाले हैं और सत्ता से बेदखल करने वाले हैं। वहीं, जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने भी रामनवमी के दिन पश्चिम बंगाल में हुई घटना को पीड़ादायक बताया। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार को पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की जरूरत है क्योंकि अब बात हाथ से निकल चुकी है। ममता बनर्जी आतंकवादियों के साथ मिलकर पश्चिम बंगाल को भारत से अलग करना चाहती हैं। जैसा हाल पहले बांग्लादेश का हुआ था, अब उसी नक्शेकदम पर पश्चिम बंगाल पहुंच चुका है। वहां भी हिंदुओं को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हो रही है और अगर स्थिति को संभाला नहीं गया तो हालात और अधिक बिगड़ सकते हैं।" जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने आरोप लगाया कि बंगाल की पुलिस भी सरकार और आतंकियों के इशारे पर काम करती है और हिंदूओं की किसी मामले में सुनवाई नहीं होती है।

ममता की छांव और उम्मीद की नई किरण : अनामिका जैन के सेवा संकल्प की अनकही दास्तान

भोपाल समाज में अक्सर जिन्हें हम 'विक्षिप्त' कहकर अनदेखा कर देते हैं, उनके पीछे छिपी पीड़ा और खोई हुई पहचान को वापस लौटाने का बीड़ा मंदसौर की एक बेटी ने उठाया है। संजीत (मंदसौर) की रहने वाली मती अनामिका जैन आज उन बेसहारा महिलाओं के लिए 'मसीहा' बन चुकी हैं, जिनका अपना कोई ठिकाना नहीं था। एक छोटे से विचार से शुरू हुआ बदलाव का सफर अनामिका जी का सेवा का सफर 17-18 साल पहले उनके पिता के साथ शुरू हुआ था। मास्टर ऑफ सोशल वर्क (MSW) की पढ़ाई कर चुकीं अनामिका ने जब समाज के सबसे उपेक्षित तबके—निराश्रित और विक्षिप्त महिलाओं—की स्थिति देखी, तो उनका मन पसीज गया। शुरुआत में वे सात वर्षों तक इन महिलाओं की देखरेख कर उन्हें इंदौर या उज्जैन के अनाथालयों में भेजती थीं। लेकिन कई बार जगह की कमी के कारण जब उन्हें वहां से वापस लौटा दिया जाता, तो वह बेबसी अनामिका जी को सोने नहीं देती थी। इसी पीड़ा ने 'अनामिका जनकल्याण सेवा समिति विक्षिप्त आश्रय गृह' की नींव रखी। रेवास देवड़ा रोड पर बना 'अपना घर' वर्ष 2018 में प्रशासन के सहयोग से उन्होंने एक शासकीय भवन (500 क्वार्टर, रेवास देवड़ा रोड) में इस आश्रय गृह की स्थापना की। यह मध्य प्रदेश का ऐसा पहला आश्रम बना, जो न केवल महिलाओं को छत देता है, बल्कि उनके पुनर्वास (Rehabilitation) पर केंद्रित है।इन महिलाओं को दवा से ज्यादा एक परिवार और प्यार की जरूरत होती है," अनामिका जी कहती हैं। उनके आश्रम में त्यौहार केवल रस्म नहीं, बल्कि खुशियों का संगम होते हैं, जहाँ इन महिलाओं को पूरी तरह पारिवारिक माहौल दिया जाता है। तकनीक और ममता का मेल: गूगल से मिलाते हैं बिछड़े परिवार अनामिका जी का कार्य केवल आश्रय देने तक सीमित नहीं है। पुलिस विभाग द्वारा लाई गई महिलाओं का वे इलाज करवाती हैं और उनकी याददाश्त वापस लाने के लिए खेल-खेल में गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। • सफलता का आँकड़ा: अब तक 54 महिलाओं को ठीक कर उनके अपनों से मिलवाया जा चुका है। • डिजिटल मदद: गूगल मैप्स और ऑनलाइन माध्यमों से वे उन महिलाओं के पते ढूंढती हैं जो वर्षों से अपने घर का रास्ता भूल चुकी थीं। चुनौतियों को बनाया ताकत: मिला 'रानी अवंती बाई राज्य स्तरीय पुरस्कार' इस कठिन मार्ग में अनामिका जी को अपने पति का भी भरपूर सहयोग मिला। उनके कार्यों की गूंज शासन तक भी पहुंची। महिला उत्पीड़न को रोकने, बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ लड़ने और वंचितों के पुनर्वास के लिए उन्हें राज्य सरकार द्वारा 'रानी अवंती बाई राज्य स्तरीय वीरता पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। भविष्य का सपना: आत्मनिर्भरता का केंद्र अनामिका जैन केवल आश्रय ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का सपना देखती हैं। वे कुष्ठ बस्ती और गाडोलिया बस्ती में स्कूल चलाने, महिलाओं की शराब छुड़वाने और विधवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने का कार्य भी कर रही हैं। उनका लक्ष्य एक ऐसा विशाल पुनर्वास केंद्र बनाना है, जहाँ हर महिला को शिक्षा और रोजगार मिल सके।"महिलाओं की संवेदनशीलता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। अगर हम एक-दूसरे का हाथ थाम लें, तो कोई भी समाज असहाय नहीं रहेगा।"  

मुख्यमंत्री ने जशपुर में मल्टीपरपज इंडोर बास्केटबॉल स्टेडियम का किया शुभारंभ : खिलाड़ी बास्केटबॉल शतरंज कैरम और टेबल टेनिस खेल का करेंगे अभ्यास

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज जशपुर में 3 करोड़ 52 लाख रुपए की लागत से निर्मित मल्टीपरपज इंडोर बास्केटबॉल स्टेडियम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि खेल अधोसंरचना का सुदृढ़ीकरण युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने के बेहतर अवसर प्रदान करता है और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। मुख्यमंत्री  साय ने स्टेडियम का अवलोकन किया और वहां उपस्थित खिलाड़ियों के साथ खेल का आनंद भी लिया।उन्होंने खिलाड़ियों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया और कहा कि सरकार प्रदेश में खेल सुविधाओं के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को भी उचित मंच मिल सके। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि खेल केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, टीमवर्क और आत्मविश्वास विकसित करने का सशक्त साधन है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराकर उन्हें नई ऊंचाइयों तक पहुंचने का अवसर दिया जाए। मल्टीपरपज इंडोर बास्केटबॉल स्टेडियम में खिलाड़ियों को बास्केटबॉल के साथ-साथ शतरंज, कैरम और टेबल टेनिस जैसे खेलों का अभ्यास करने की आधुनिक सुविधा उपलब्ध होगी। यह स्टेडियम न केवल खेल गतिविधियों को बढ़ावा देगा, बल्कि जशपुर क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को विकसित करने का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी बनेगा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष  रामप्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष  सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष  अरविन्द भगत,  कृष्णा राय, नगर पालिका उपाध्यक्ष  यश प्रताप सिंह जुदेव, जिला पंचायत अध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष  गंगाराम भगत,  विजय आदित्य सिंह जुदेव, सरगुजा कमिश्नर  नरेन्द्र दुग्गा, आईजी  दीपक कुमार झा, कलेक्टर  रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  लाल उमेद सिंह, डीएफओ  शशि कुमार, जिला पंचायत सीईओ  अभिषेक कुमार, खिलाड़ी और कोच उपस्थित थे।

फ्यूल मैनेजमेंट फेलियर पर थाई पीएम ने मानी गलती, देश से मांगी माफी

बैंकॉक थाइलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नवीराकुल ने ईंधन संकट की जिम्मेदारी लेते हुए देश से माफी मांगी है। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दोनों हाथ जोड़कर कहा कि मिस मैनेजमेंट के चलते आम लोगों को तकलीफ उठानी पड़ी, जिसका उन्हें कष्ट है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के साथ हुए अहम समझौते की भी जानकारी दी। बैंकॉक स्थित गवर्नमेंट हाउस में पश्चिम एशिया में एक महीने से जारी संघर्ष के बाद के हालात पर चर्चा करने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई गई। उन्होंने बताया कि थाईलैंड ने ईरान के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत उसके तेल टैंकर अब होर्मुज से सुरक्षित गुजर सकेंगे। पीएम ने बताया कि इस समझौते से देश में ईंधन को लेकर बनी चिंता कम होगी। मीडिया के सामने ही प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नविराकुल ने थाईलैंड में ईंधन कुप्रबंधन के लिए माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व संकट की वजह से हुई दिक्कतें सोच से ज्यादा लंबी चलीं। उन्होंने प्राइस कैपिंग के विचार का उल्लेख भी किया। 'बैंकॉक पोस्ट' के अनुसार, प्रेस के सामने वो हाथ जोड़कर खड़े हुए और कहा, "फ्यूल मैनेजमेंट से हुई गड़बड़ी के लिए मैं लोगों से माफी मांगता हूं।" अपने फैसले को सही करार देते हुए कहा कि पंपों पर प्राइस कैप खत्म करने से पड़ोसी देशों में तेल की स्मगलिंग रोकने और फ्यूल की कमी को कम करने में मदद मिलेगी। दरअसल, बुधवार रात, थाई लोग छह-बहत (टीएचबी/थाई मुद्रा) प्रति लीटर की कीमत बढ़ने से हैरान थे। इसके बाद स्टेट ऑयल फ्यूल फंड की घोषणा के बाद गुरुवार सुबह 5 बजे नई कीमतें लागू होने से पहले पेट्रोल भरवाने की होड़ मच गई, जिससे देश भर में सर्विस स्टेशनों पर लंबी लाइनें लग गईं। अचानक हुई बढ़ोतरी को लेकर सरकार की बहुत आलोचना हुई। हालांकि ऑयल फ्यूल फंड ऑफिस ने बाद में इस तेज बढ़ोतरी को कई वजहों का नतीजा बताया, पीएम अनुतिन शनिवार तक इस फैसले पर चुप थे। 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ यूएस-इजरायल संघर्ष शुरू होने के बाद पहले 15 दिनों में, सरकार ने जनता पर बोझ कम करने के लिए फ्यूल की कीमतों पर कैप लगाने की कोशिश की, यह अनुमान लगाते हुए कि युद्ध ज्यादा दिन नहीं चलेगा। युद्ध के पहले तीन हफ्तों में ऑयल फंड ने कीमतों पर सब्सिडी देने में 20 बिलियन बहत खर्च किए, और एक बार जब रोजाना की सब्सिडी की लागत 2 बिलियन बहत तक पहुंच गई तो परेशानी शुरू हो गई। अनुतिन ने कहा, "जैसे हालात है उसमें ये सब जल्द खत्म नहीं होने वाला, इसलिए सरकार को कुछ उपायों में बदलाव करना पड़ा है, और कम आय वाले मजदूरों, किसानों और (ट्रांसपोर्ट) ऑपरेटर्स पर ध्यान देना पड़ा है।" उन्होंने बताया कि प्राइस-कैप खत्म करने का मतलब पूरी तरह से फ्लोटिंग कीमतें नहीं हैं, बल्कि सब्सिडी रेट को कम करना है—24 बहत प्रति लीटर से 16 बहत तक। यह ग्लोबल मार्केट की स्थितियों को बेहतर ढंग से दिखाएगा। पीएम ने कहा कि 77 मिलियन लीटर रोजाना की रिफाइनिंग कैपेसिटी के साथ, थाईलैंड के पास 67 मिलियन लीटर के औसत फ्यूल कंजम्पशन को पूरा करने के लिए काफी आपूर्ति है, लेकिन हाल ही में पैनिक बाइंग ने रोजाना की डिमांड को 82 मिलियन लीटर तक बढ़ा दिया है—जो औसत से 22 फीसदी ज्यादा है। अनुतिन के मुताबिक अब हालात काबू में हैं, लेकिन जनता से अपील की गई कि वे रोज एक लीटर बचाने की कोशिश करें।

प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की कला सिखाने शिक्षकों को दी गई प्रकृति शिक्षा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार प्रकृति संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी दिशा में प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित मध्यप्रदेश प्रकृति संरक्षण शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम (एमपीटीटीएनसी 2025–2028) के अंतर्गत शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा वर्ष 2021 में हुए कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़-26 में प्रारंभ किए गए मिशन LiFE (लाइफ स्टायल फॉर एनवारनमेंट) के उद्देश्यों से प्रेरित यह प्रशिक्षण डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया, वन विहार राष्ट्रीय उद्यान (भोपाल) और पीसीपीसी के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया गया। इसका लक्ष्य प्रकृति के अविवेकपूर्ण उपभोग के स्थान पर सचेत और विचारशील उपयोग को बढ़ावा देना है। शिक्षक प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को प्रकृति संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवनशैली के संबंध में प्रशिक्षित कर विद्यार्थियों को जिम्मेदार और जागरुक नागरिक के रूप में विकसित करना है। पन्ना नेचर कैंप्स के अनुभव से मिली प्रेरणा शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम की परिकल्पना पूर्व में आयोजित पन्ना नेचर कैंप्स की सफलता से प्रेरित हो कर की गई है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के सहयोग से संचालित इन शिविरों ने पन्ना टाइगर पुनर्स्थापन परियोजना की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लगभग 15 वर्षों तक चले इस प्रयास ने यह सिद्ध कर दिया कि संरक्षण कार्यों में समाज और समुदाय की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। पर्यावरण संरक्षण के संवैधानिक दायित्व पर फोकस शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम में इस तथ्य पर विशेष जोर दिया गया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 48(क) राज्यों को पर्यावरण की रक्षा और सुधार का दायित्व देता है, जबकि अनुच्छेद 51A(ग) प्रत्येक नागरिक को प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करने और सभी जीवों के प्रति करुणा रखने का मौलिक कर्तव्य सौंपता है। इसके अंतर्गत वन, झील, नदियाँ और वन्यजीवों की सुरक्षा को सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में रेखांकित किया गया है। प्रकृति संरक्षण की चुनौतियों पर चर्चा शिक्षक प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम में प्रकृति संरक्षण से जुड़ी वर्तमान चुनौतियों पर भी विस्तृत चर्चा की गई है। इसमें तेजी से बढ़ती जनसंख्या, आर्थिक विकास की तीव्र गति और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव को प्रमुख कारण बताया गया। विकास की प्रक्रिया में पारिस्थितिकी सुरक्षा के उपायों को शामिल करना भी आवश्यक है, जिससे प्रकृति स्वयं को पुनर्जीवित कर सके। ‘ईको-सिटीजन’ तैयार करने में शिक्षकों की भूमिका शिक्षक प्रशिक्षण में बताया गया कि विद्यार्थी समाज में सकारात्मक परिवर्तन के सबसे प्रभावी वाहक होते हैं। शिक्षक उनके साथ सबसे अधिक समय बिताते हैं और उन्हें सही दिशा में प्रेरित कर सकते हैं। प्रशिक्षित शिक्षक विद्यार्थियों में भी प्रकृति संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित कर सकेंगे और ये विद्यार्थी भविष्य में जिम्मेदार और संवेदनशील ईको-सिटीजन के रूप में समाज में योगदान दे सकेंगे।

अगले 3 दिन यूपी में मौसम की करवटें जारी, बारिश का सिलसिला रहेगा बरकरार

लखनऊ मौसम का मिजाज हर दिन करवट बदल रहा है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव की वजह से एक बार फिर से 29 मार्च से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर शुरू होने की संभावना बढ़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार, बारिश का यह दौर एक अप्रैल तक जारी रहने की संभावना जताई जा रही है जो 30 और 31 मार्च को प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी अपना प्रभाव डालेगा। मौसम विभाग के अनुसार, 29 मार्च को 3 से 5 डिग्री तक तापमान में बढ़ोतरी की संभावना है और देर शाम या रात को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश हो सकती है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि बारिश का यह क्रम 30 व 31 मार्च को तीव्र हो सकता है और लखनऊ समेत बाकी हिस्सों में भी प्रभाव डाल सकता है। इस वजह से कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश हो सकती है। बारिश की वजह से 31 मार्च तक तापमान में 3 से 5 डिग्री की ही गिरावट के बाद फिर से अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री की क्रमिक बढ़ोतरी हो सकती है। रविवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कहीं-कहीं मेघगर्जन के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने के आसार हैं। मौसम विभाग के अनुसार, 30 मार्च को हवा के झोंकों की रफ्तार बढ़कर 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक होने के भी आसार जताए जा रहे हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 29 मार्च को कोई खास परिवर्तन नहीं होगा लेकिन 30 मार्च को संभाग में कहीं-कहीं मेघगर्जन के साथ झोंकेदार हवा 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने के आसार हैं। शनिवार को झांसी में अधिकतम तापमान सबसे अधिक 38.6 डिग्री दर्ज किया गया।