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6 साल पुरानी फाइल बनी नई मुसीबत, अभिषेक बनर्जी पर कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी?

जबलपुर /कोलकाता मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर लगी अंतरिम रोक को निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश की प्रति तत्काल ट्रायल कोर्ट को भेजने के निर्देश भी दिए हैं।यह मामला नवंबर 2020 में कोलकाता की एक राजनीतिक रैली के दौरान भाजपा नेता आकाश विजय वर्गीय को कथित रूप से 'गुंडा' कहे जाने से जुड़ा है। इस टिप्पणी के खिलाफ आकाश विजयवर्गीय ने एमपी-एमएलए कोर्ट का रुख किया था। एमपी/एमएलए कोर्ट ने 12 नवंबर 2025 को अभिषेक बनर्जी की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई थी। अब हाईकोर्ट ने उस राहत को समाप्त करते हुए अंतरिम स्थगन आदेश रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने जानें क्यों जताई नाराजगी? गौरतलब है कि आठ मई को हुई सुनवाई के दौरान भी उनके वकील की अनुपस्थिति पर अदालत ने नाराजगी जताई थी और स्पष्ट चेतावनी दी थी कि अगली तारीख पर बहस नहीं होने की स्थिति में अंतरिम राहत जारी नहीं रहेगी।बीते दिनहुई सुनवाई में भी अभिषेक बनर्जी की ओर से कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुआ। पासओवर के बाद भी जब कोई पक्षकार अदालत में पेश नहीं हुआ तो हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए गिरफ्तारी वारंट पर लगी रोक समाप्त कर दी। कोर्ट नाराज क्यों हुआ? मामले की सुनवाई करते हुए एमपी-एमएलए कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसके बाद अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि वह एक सांसद हैं, ऐसे में उनके फरार होने की कोई संभावना नहीं है। इसी आधार पर हाई कोर्ट की बेंच ने 12 नवंबर 2025 को गिरफ्तारी वारंट पर रोक लगा दी थी। हालांकि, बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान अभिषेक बनर्जी की ओर से कोई भी प्रतिनिधि या वकील उपस्थित नहीं हुआ। इसे गंभीरता से लेते हुए बेंच ने अपने आदेश में कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता खुद ही इस याचिका को आगे बढ़ाने में विशेष रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसलिए गिरफ्तारी वारंट पर लगाई गई अंतरिम रोक हटाई जाती है। ईडी की अभिषेक से सुनवाई वहीं, इस मामले के अलावा अभिषेक बनर्जी से ईडी भी पूछताछ कर रही है। बंगाल के कथित शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर 16 जून को उनसे 11 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई थी। इसके अलावा अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दो अन्य मामले भी दर्ज बताए जा रहे हैं। अभिषेक बनर्जी को अपने संसदीय क्षेत्र डायमंड हार्बर में भी कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, अभिषेक बनर्जी ने साफ कहा है कि वह इन मामलों से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह बीजेपी के सामने कभी भी सरेंडर नहीं करेंगे। अभिषेक ने दावा किया कि अगर उनका गला भी काट दिया जाए, तब भी वह डरकर पीछे नहीं हटेंगे। अभिषेक बनर्जी की हो सकती है गिरफ्तारी अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ जारी अरेस्ट वारंट पर लगी रोक को हटा दिया है। इससे बनर्जी की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है। माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश पुलिस जल्द ही पश्चिम बंगाल जाकर उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। यह भी संभव है कि एमपी पुलिस के ऐक्शन से पहले वह सुप्रीम कोर्ट जाकर राहत की मांग करें। 6 साल पहले कोलकाता में दिया था बयान सांसद अभिषेक बनर्जी के अरेस्ट वारंट से स्टे हटाते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि आदेश की कॉपी तुरंत ट्रायल कोर्ट को भेजी जाए। यह मामला 6 साल पुराना है, जब नवंबर 2020 में एक चुनावी रैली के दौरान अभिषेक बनर्जी ने आकाश विजयवर्गीय के लिए कथित तौर पर 'गुंडा' वाला बयान दिया था। आकाश विजयवर्गीय ने एमपी-एमएलए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। एमपी-एमएलए की विशेष अदालत ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे, जिसके बाद अभिषेक बनर्जी ने हाई कोर्ट की शरण ली थी। याचिका में कहा गया था कि वह वर्तमान में एक सांसद हैं, ऐसे में उनके फरार होने की संभावना नहीं है। इस बीच पश्चिम बंगाल में भाजपा के नेता अभिजीत दास की शिकायत पर अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दक्षिण 24 परगना जिले में दो एफआईआर दर्ज की गई है। बंगाल में ताबड़तोड़ एक्शन जानकारी के लिए बता दें कि जब से पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार बनी है, टीएमसी के कई नेताओं के खिलाफ एक्शन हुआ। कई मामलों में आरोपियों की सार्वजनिक परेड भी निकाली गई। बात चाहे पुष्पा उर्फ जहांगीर खान की हो या फिर शाहीन मोल्ला की, प्रशासन की ओर से कार्रवाई की गई। सरकार की ओर से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। हालांकि, इस तरह की सार्वजनिक परेड को लेकर टीएमसी ने भी विरोध दर्ज कराया है। मामला हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है जहां राज्य सरकार से इस संबंध में जवाब मांगा गया है।

पश्चिम बंगाल में फिर गरमाया स्कूल भर्ती घोटाला, ED ऑफिस पहुंचेंगे अभिषेक बनर्जी

कोलकाता तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और पार्टी के लोकसभा सदस्य अभिषेक बनर्जी को पश्चिम बंगाल में स्कूल में नौकरी के लिए करोड़ों रुपये नकद मामले में सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय के सामने पेश होना है।  वह केंद्रीय एजेंसी की चल रही जांच के संबंध में पूछताछ के लिए दिन में कोलकाता के उत्तरी बाहरी इलाके में ईडी के साल्ट लेक कार्यालय में होंगे. ईडी अधिकारियों ने जून में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे बनर्जी को पूछताछ के लिए नोटिस दिया था।  उन्हें 3 जून को आज के लिए यानी 15 जून को दोपहर तक ईडी कार्यालय में उपस्थित होने के लिए कहा गया. संयोग से अभिषेक बनर्जी का नाम केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दायर आरोप पत्र में था, जो स्कूल-नौकरी मामले में समानांतर जांच कर रहा है. हालाँकि, उन्हें वहां आरोपी के रूप में नामित नहीं किया गया था।  मामले की जांच में ईडी द्वारा दायर आरोप पत्र में उनका नाम भी सामने आया था. ईडी सूत्रों के मुताबिक अभिषेक को उनकी संलिप्तता के बारे में जांच में तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए फिर से ईडी कार्यालय में बुलाया गया है. उनका बयान दर्ज किया जाएगा।  स्कूल नौकरी मामले में ईडी के कार्यालय में अभिषेक से पूछताछ हस्ताक्षर बेमेल मामले में चल रही जांच के संबंध में पश्चिम बंगाल पुलिस के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) के अधिकारियों द्वारा रविवार को साढ़े आठ घंटे तक मैराथन पूछताछ का सामना करने के ठीक एक दिन बाद हो रही है।  फिर, 16 जून यानी मंगलवार को उन्हें दक्षिण कोलकाता के भबानी भवन में सीआईडी के मुख्यालय में उपस्थित होना होगा. उनके खिलाफ दर्ज एक एफआईआर के संबंध में पूछताछ के लिए जहां उन पर राज्य में हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों से पहले हिंसा भड़काने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकी देने का आरोप लगाया गया था. सीआईडी ​​अधिकारियों ने उन्हें 12 जून की शाम को नोटिस दिया था. अभिषेक बनर्जी ने पहले ही कहा था कि वह किसी भी मामले में किसी भी जांच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करेंगे, जैसा कि वह करते रहे हैं। 

TMC सांसद अभिषेक बनर्जी पर राहत राशि में अनियमितता के गंभीर आरोप, CID जांच भी तेज

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल में सियासी घमासान के बीच भाजपा के एक नेता ने शनिवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी पर अम्फान चक्रवात राहत कोष में 200 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. भाजपा नेता अभिजीत दास बॉबी ने डायमंड हार्बर के बिष्णुपुर थाने में 17 पन्नों की शिकायत सौंपी. इस बीच पश्चिम बंगाल सीआईडी ने जाली हस्ताक्षर करने के मामले में अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए एक और नोटिस जारी किया है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2020 में आए सुपर साइक्लोन अम्फान के पीड़ितों के लिए जारी राहत राशि के वितरण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां की गईं. इसमें डुप्लीकेट और संदिग्ध एंट्री, एक ही मोबाइल नंबर और बैंक खाते के जरिए कई लाभार्थियों को भुगतान और एक ही आवासीय भवन से कई लोगों को लाभार्थी दिखाने जैसे आरोप शामिल हैं. अभिजीत दास बॉबी ने कहा, 'आज की शिकायत में मैंने विशेष रूप से डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत बिष्णुपुर के दो ब्लॉकों का उल्लेख किया है, जहां लगभग 57 हजार लाभार्थियों के बीच 57.86 करोड़ रुपये वितरित किए गए थे.' डायमंड हार्बर लोकसभा सीट से दो बार अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ चुके बॉबी ने आरोप लगाया कि राहत राशि का बड़ा हिस्सा कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व द्वारा हड़प लिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय सांसद अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में यह खेल हुआ और इसमें ब्लॉक विकास अधिकारियों (BDO) और तत्कालीन अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (विकास) सहित कई सरकारी अधिकारी भी शामिल थे. 2020 में आया था अम्फान चक्रवात बता दें कि 20 मई 2020 को आए अम्फान चक्रवात ने पश्चिम बंगाल के कई जिलों में भारी तबाही मचाई थी. पूर्वी मेदिनीपुर और उत्तर एवं दक्षिण 24 परगना जिलों में व्यापक नुकसान हुआ था और 96 लोगों की मौत हुई थी. भाजपा नेता ने दावा किया कि पूरे डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के आंकड़ों के आधार पर करीब 238 करोड़ रुपये के राहत घोटाले की आशंका है. उन्होंने मामले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) गठित करने की मांग की है. अभिजीत दास बॉबी ने कहा कि जल्द ही डायमंड हार्बर क्षेत्र के अन्य थानों में भी इसी तरह की शिकायतें दर्ज कराई जाएंगी. साथ ही उन्होंने पूरे खर्च का फॉरेंसिक ऑडिट कराने और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराने की मांग की. अभिषेक बनर्जी की भूमिका पर क्यों उठे सवाल? शिकायत में कहा गया है कि सार्वजनिक राहत पोर्टल से डाउनलोड किए गए आधिकारिक दस्तावेजों में हजारों स्वीकृत आवेदनों के 'Recommended By' कॉलम में अभिषेक बनर्जी और उनके कार्यालय का नाम बार-बार दिखाई देता है. इससे यह सवाल उठता है कि राहत वितरण प्रक्रिया में उनकी भूमिका कितनी व्यापक थी और क्या उनके कार्यालय से जारी सिफारिशों ने सामान्य प्रशासनिक और भौतिक सत्यापन प्रक्रिया को प्रभावित किया. ममता बनर्जी सरकार ने अम्फान प्रभावित लोगों के लिए 6,250 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की थी और पीड़ितों के खातों में सीधे धनराशि भेजने का वादा किया था. इसके लिए अम्फान साइक्लोन राहत कोष भी बनाया गया था. वहीं केंद्र सरकार ने नेशनल डिजास्टर​ रिलीफ फंड (NDRF) से अम्फान राहत और पुनर्वास के लिए 3,077 करोड़ रुपये मंजूर किए थे. राज्य सरकार ने पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 20,000 रुपये और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 5,000 रुपये की सहायता देने की व्यवस्था की थी. हालांकि आरोप है कि घरों के पुनर्निर्माण के लिए जारी राशि का कुछ हिस्सा पंचायत प्रतिनिधियों और उनके करीबी लोगों के खातों में पहुंच गया. अम्फान राहत वितरण को लेकर वर्ष 2020 में राज्य के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन भी हुए थे. इसके बाद ममता सरकार ने तृणमूल से जुड़े कुछ पंचायत पदाधिकारियों को निलंबित किया था और सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया था. एक मोबाइल नंबर से कई लाभार्थियों को भुगतान भाजपा नेता ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि भ्रष्टाचार एक सुनियोजित और संस्थागत तंत्र के जरिए किया गया. उन्होंने ऐसे दस्तावेज भी संलग्न किए हैं, जिनमें कथित तौर पर एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल 14 लाभार्थियों के लिए किया गया और उन सभी को मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने के आधार पर 20-20 हजार रुपये दिए गए. इसके अलावा चार अन्य मोबाइल नंबरों के जरिए भी 6 से 9 लाभार्थियों को राहत राशि मिलने का आरोप लगाया गया है. बॉबी ने कहा, 'एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल अलग-अलग गांवों के लाभार्थियों के लिए किया गया. ये सभी विसंगतियां सरकारी धन के दुरुपयोग की ओर इशारा करती हैं.' वहीं तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है. पार्टी के एक सूत्र ने कहा, 'यह हमारे नेता के खिलाफ भाजपा की राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई है. हम इसका कानूनी तरीके से मुकाबला करेंगे.'

सोनारपुर में Abhishek Banerjee के काफिले पर हमला, कपड़े फाड़ने तक पहुंची हिंसा

सोनारपुर  पश्चिम बंगाल के सोनारपुर इलाके में उस समय भारी राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर कथित तौर पर जानलेवा हमला कर दिया गया। मिली जानकारी के अनुसार, अभिषेक बनर्जी सोनारपुर में हाल ही में हुई चुनावी हिंसा में घायल हुए टीएमसी कार्यकर्ताओं से मुलाकात करने और उनका हालचाल जानने पहुंचे थे। लेकिन उनके वहां पहुंचते ही माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया और देखते ही देखते हिंसक झड़प शुरू हो गई। भाजपा कार्यकर्ताओं पर मारपीट का आरोप तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि जैसे ही अभिषेक बनर्जी का काफिला सोनारपुर पहुंचा, वहां पहले से मौजूद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। प्रदर्शनकारियों ने उनके खिलाफ तीखी नारेबाजी शुरू कर दी, जो कुछ ही पलों में हिंसक मारपीट में बदल गई। उग्र भीड़ ने टीएमसी सांसद पर अंडे फेंके और उनके साथ धक्का-मुक्की की, जिसमें अभिषेक बनर्जी की शर्ट तक फट गई। स्थिति इतनी बेकाबू हो गई थी कि सुरक्षाकर्मियों को अभिषेक बनर्जी के सिर को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें आनन-फानन में हेलमेट पहनाना पड़ा और किसी तरह सुरक्षित बाहर निकाला गया। घटना के दौरान, स्थानीय लोगों ने ने कथित तौर पर बनर्जी के खिलाफ चोर चोर के नारे लगाए। घटनास्थल से मिले दृश्यों में तनाव बढ़ने पर सुरक्षाकर्मी उन्हें घेरते और उनकी सुरक्षा करते हुए दिखाई दिए। इस हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए बनर्जी ने आरोप लगाया कि यह घटना भाजपा द्वारा प्रायोजित है। उन्होंने कहा, “यह सब भाजपा द्वारा प्रायोजित है। देखिए उन्होंने क्या किया है। यही उनका लोकतंत्र का उदाहरण है। अभी एक महीना भी नहीं बीता है और पुलिस का नामोनिशान नहीं है।” टीएमसी सांसद ने आगे कहा, “वे मुझे मार डालना चाहते थे। यह पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई है। हम निश्चित रूप से हाई कोर्ट को इस बारे में जानकारी देंगे। हम राज्यपाल को भी इस बारे में अवगत कराएंगे। मैं निश्चित रूप से कोर्ट का रुख करूंगा। ये लोग मुझे जान से मारना चाहते थे: अभिषेकइस भीषण हमले के बाद पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने मीडिया के सामने आकर अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने अत्यंत आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, "ये लोग पूरी तैयारी के साथ आए थे और मुझे जान से मारना चाहते थे। भीड़ ने हमला करके मेरी शर्ट तक फाड़ दी। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इतने संवेदनशील मौके पर वहां एक भी पुलिसकर्मी तैनात नहीं था।" उन्होंने आगे कहा कि हेलमेट की वजह से आज उनका सिर बच गया, वरना कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी। अभिषेक बनर्जी ने विपक्षी दलों को ललकारते हुए साफ किया कि टीएमसी इस तरह के कायराना हमलों से डरने वाली नहीं है और वे जनता के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। स्थानीय लोगों ने क्या कहा? स्थानीय लोगों ने कहा कि हम लोग मजदूर आदमी हैं. हम लोग कोई पार्टी के नहीं हैं. हम लोगों का रास्ता कभी नहीं बना. जितना पैसा आया, सब खा लिया. हम लोग आज भी परेशान हैं, इसलिए गुस्सा है. एक और शख्स ने कहा कि हम कोई बीजेपी नहीं करते. हम यहीं के रहने वाले हैं. हम दीघा के आदमी हैं. यहां दो कट्ठा जमीन लेकर रहते हैं।  अभिषेक के खिलाफ क्यों फूटा लोगों का गुस्सा? इस इलाके के सड़क का हाल बुहत खराब है. इस इलाके में करीब एक किलोमीटर तक सड़क की स्थिति बेहद खराब है. बारिश के दौरान यहां पानी भर जाता है।  लोगों का कहना है कि जब ममता बनर्जी मुख्यमंत्री थीं, तब कई बार उनसे गुजारिश की गई, आवेदन दिए गए कि सड़कें ठीक कराई जाएं और पानी की सप्लाई व्यवस्था सुधारी जाए. लेकिन लोगों का आरोप है कि उनकी समस्याओं पर कभी ध्यान नहीं दिया गया. उनके मुताबिक, किसी ने उनके बारे में नहीं सोचा।  इसी वजह से जब सांसद होने के नाते अभिषेक बनर्जी यहां पहुंचे, तो लोगों ने सवाल उठाया कि पंद्रह साल से सत्ता में रहने के बावजूद इस इलाके का विकास क्यों नहीं हुआ. इन्हीं मुद्दों को लेकर लोगों में गुस्सा था. उनके खिलाफ लगातार नारेबाजी की गई और उन पर अंडे भी फेंके गए।  'यह बीजेपी का प्रायोजित हमला, पुलिस गायब थी' इस हमले और तीखे विरोध के बाद उन्होंने विपक्ष पर सीधा निशाना साधा है. उन्होंने अपनी स्थिति दिखाते हुए मीडिया से कहा, "यह सब पूरी तरह से बीजेपी द्वारा प्रायोजित है. आप खुद देख सकते हैं कि आज मेरा क्या हाल किया गया है. यह इनके लोकतंत्र का असली नमूना है. सबसे बड़ी बात यह है कि मौके पर कहीं भी पुलिस दिखाई नहीं दे रही थी।  इस घटना के बाद पूरे सोनारपुर इलाके में भारी राजनीतिक तनाव पैदा हो गया है. टीएमसी जहां इसे विपक्षी दल की सोची-समझी साजिश बता रही है, वहीं दूसरी तरफ से इसे स्थानीय लोगों का गुस्सा कहा जा रहा है. फिलहाल इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और दोनों पार्टियों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। 

43 संपत्तियों के मामले में अभिषेक बनर्जी घिरे, नोटिस के बाद बढ़ी सियासी हलचल

 कोलकाता पश्चिम बंगाल BJP ने तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी से कथित रूप से जुड़ी 43 संपत्तियों की एक विस्तृत लिस्ट सार्वजनिक कर दी है. इनमें कई संपत्तियां अभिषेक बनर्जी के परिवार के सदस्यों और करीबी दोस्तों जैसे ममता बनर्जी, अमृता बनर्जी, सबिता बनर्जी, मिनाती बनर्जी, बाणानी बनर्जी और सायानी घोष के साथ संयुक्त रूप से मालिकाना हक (स्वामित्व)वाली बताई गई हैं।  इसके अलावा अर्पिता बनर्जी, सुदेष्णा बनर्जी, आकाश बनर्जी, सोमनथ बनर्जी और प्रियंका दास जैसे कई अन्य नाम भी अलग-अलग संपत्तियों के मालिकों या पर्सन लायबल टैक्स के रूप में सूची में शामिल हैं।  बीजेपी ने इन संपत्तियों की लिस्ट जारी करते हुए आरोप लगाया है कि इनका सीधा या अप्रत्यक्ष संबंध अभिषेक बनर्जी से जुड़ा हुआ है. सूची में शामिल संपत्तियों के स्वामित्व, स्थान और अन्य विवरणों को सार्वजनिक किया गया है, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।  इस सामने आए डॉक्यूमेंट्स के अनुसार, कोलकाता के विभिन्न स्ट्रीट और वॉर्डों में दर्ज ये संपत्तियां अलग-अलग लोगों के साथ ज्वाइंट ओनरशिप में हैं. लिस्ट में साफ तौर पर 58/3 बैरकपुर ट्रंक रोड पर स्थित ऑर्बिट ल्यूमियर, गरियाहाट रोड पर स्थित समिरन को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी और बेहला के बेचराम चटर्जी रोड स्थित 'साईं भवन' जैसी अचल संपत्तियों के असेसी नंबर और पते दर्ज दिखाई दे रहे हैं।  कोलकाता के कई पॉश इलाकों में फैली हैं संपत्तियां असेसमेंट विभाग की इस लिस्ट में कोलकाता के कई महत्वपूर्ण इलाकों जैसे डी गुप्ता लेन, धर्मतला रोड, देवेन्द्र घोष रोड, सर्वे पार्क, कालीपद मुखर्जी रोड और मोतीलाल गुप्ता रोड की संपत्तियों को 'एक्टिव' स्टेटस में दिखाया गया है. इनमें से अधिकांश संपत्तियों के साथ अलग-अलग मोबाइल नंबर भी दर्ज हैं, जिन्हें अब जांच और राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में लाया जा रहा है।  सूत्रों के अनुसार, शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार इन सभी 43 संपत्तियों के स्वामित्व विवरण की गहन जांच कराएगी. जांच में ये पता लगाया जाएगा कि इन संपत्तियों का वास्तविक स्वामित्व कौन है, इनकी खरीदारी के स्रोत क्या हैं और इनमें कोई अनियमितता तो नहीं है।  मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को कहा कि नगर मामलों के विभाग और कोलकाता नगर निगम की संपत्ति रिपोर्टों से पता चला है कि तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी की कथित तौर पर स्वामित्व वाली 24 संपत्तियों में से 14 उनकी कथित कंपनी 'लीप्स एंड बाउंड्स' के नाम पर, 4 सांसद के नाम पर और छह उनके पिता के नाम पर पंजीकृत हैं।  भवानीपुर में एक धन्यवाद सभा में बंगाल के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री ने तृणमूल के तीन और नेताओं या उनके करीबी सहयोगियों की संपत्तियों के बारे में विवरण का खुलासा किया और फिर जोर देकर कहा कि उनकी सरकार सभी भ्रष्ट व्यक्तियों को सलाखों के पीछे भेज देगी।  'मैंने संपत्ति खोजने का दिया था निर्देश' शुभेंदु ने लोगों को बताते हुए कहा कि मैंने नगर मामलों के विभाग के सचिव और कोलकाता नगर निगम के आयुक्त से 4 व्यक्तियों की संपत्ति का विवरण प्राप्त करने के लिए कहा था. क्या आप उनके नाम जानना चाहते हैं? सीएम ने बताया, 'पहले नंबर पर बेलेघाटा के राजू नस्कर हैं, जिनके पास 18 संपत्तियां हैं. दूसरे नंबर पर कस्बा की सोना पप्पू हैं, जिनके पास 24 संपत्तियां हैं. तीसरे नंबर पर भतीजा अभिषेक बनर्जी हैं. इनमें से 14 संपत्तियां 'लीप्स एंड बाउंड्स' कंपनी के नाम पर, चार उनके अपने नाम पर और छह उनके पिता के नाम पर पंजीकृत हैं. चौथे नंबर पर जावेद (अहमद) खान (तृणमूल के कस्बा विधायक) के बेटे हैं, जिनके पास 90 संपत्तियां हैं।  'सभी भ्रष्ट लोगों को भेजेंगे जेल' उन्होंने आगे कहा, 'जनता को लूटने वाले लुटेरे हैं. (पुलिस अधिकारी) शांतनु सिन्हा बिस्वास और (पूर्व मंत्री) सुजीत बोस की तरह, जिन्हें जेल भेजा गया था, बीजेपी सरकार निकट भविष्य में ये सुनिश्चित करेगी कि ऐसे सभी भ्रष्ट लोगों को सलाखों के पीछे भेजा जाए।  वहीं, सोमवार को अभिषेक बिधाननगर पुलिस द्वारा हाल ही में उनके खिलाफ दर्ज किए गए एक मामले में सुरक्षा की मांग करने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचे। 

बंगाल की राजनीति में नया विवाद, अभिषेक बनर्जी के साइन वाला MLA पत्र रिजेक्ट

कलकत्ता पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष कौन होगा? यह अब तक साफ नहीं हो सका है। इसी बीच खबर है कि विधानसभा सचिवालय ने तृणमूल कांग्रेस की तरफ से नामित विधायक सोहनदेव चट्टोपाध्याय से 80 सदस्यों का समर्थन पत्र मांगा है। वहीं, पार्टी के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी की तरफ से साइन किए लेटर को खारिज कर दिया है। ऐसे में विधायक ने RTI यानी सूचना का अधिकार दाखिल किया है। क्या है विवाद दरअसल, टीएमसी की तरफ से चट्टोपाध्याय को नामित किया गया है। टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने इस संबंध में सचिवालय में लेटर भेजा था, जिसमें उन्हें विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता देने की मांग की गई थी। अब इस पत्र पर अभिषेक बनर्जी ने साइन किए थे। जबकि, सचिवालय का कहना है कि 80 विधायकों के साइन किया हुआ पत्र लाया जाए। इसके बाद बालीगंज विधायक ने RTI दाखिल की है। इसमें मांग की गई है कि 2011, 2016 और 2021 में विपक्ष के नेता को चुनने के लिए किन नियमों का पालन किया गया था। दफ्तर पर लगा है ताला रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, 'विधानसभा में विपक्ष का नेता चुनने के लिए आमतौर पर ऐसी कोई चिट्ठी नहीं भेजी जाती। विधानसभा का सचिवालय सीधे उस व्यक्ति को बता देता है कि उन्हें विपक्ष का नेता चुन लिया गया है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। यहां तक कि विपक्ष के नेता के दफ्तर में भी ताला लटका हुआ है।' सचिवालय भड़का रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेजरी बेंच के एक सदस्य ने कहा, 'वह (अभिषेक) यह पत्र जारी करने वाले कौन होते हैं? वह सांसद हैं और तथाकथित महासचिव हैं। उनके पास तृणमूल विधायक दल में औपचारिक रूप से कोई पद नहीं है। इस मामले में उनके साइन क्यों चलेंगे।' साथ ही कहा, 'ये बकवास अब रुकनी ही चाहिए।' पत्र में क्या 13 मई को तृणमूल की तरफ से विधानसभा सचिव समरेंद्र नाथ दास को पत्र सौंपा गया था। इस पत्र पर अभिषेक बनर्जी ने साइन किए थे। साथ ही फिरहाद हाकिम को विपक्ष का चीफ व्हिप बनाया गया था। जबकि, नयन बंदोपाध्याय और आशिमा पात्रा को उपनेता बनाने की बात कही गई थी। चट्टोपाध्याय का कहना है, 'मैं आरटीआई दाखिल करने के लिए मजबूर हो गया था। उसमें मैंने पूछा है कि बीते तीन सालों में सचिवालय ने नेता प्रतिपक्ष की भूमिका के लिए किन नियमों का पालन किया है।' उन्होंने नियमों का पालन करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया विपक्ष में सबसे बड़े दल को महज 30 सीटों की जरूरत होती है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सचिवालय ने चट्टोपाध्याय की नियुक्ति के तरीके पर सवाल उठाए हैं। इसमें कहा गया है कि विधायकों एक आंतरिक मीटिंग में अपना नेता चुनना चाहिए। सूत्रों ने यह भी कहा कि सचिवालय ने बैठक के नतीजों का ब्योरा मांगा है।

बंगाल में सख्त संदेश—बुलडोजर पॉलिटिक्स की कोई जगह नहीं: Abhishek Banerjee

कोलकाता तृणमूल कांग्रेस के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की बुलडोजर शैली की राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है। अपने एक्स हैंडल का इस्तेमाल करते हुए बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा राज्य में कई प्रशासनिक बदलाव किए जाने के बाद शुक्रवार को राम नवमी के जुलूस के दौरान मुर्शिदाबाद जिले के रघुनाथगंज में हिंसा हुई। बनर्जी ने कहा कि भाजपा बंगाल की धरती पर इसी तरह का 'परिवर्तन' थोपना चाहती है। चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद चुनाव आयोग ने व्यापक प्रशासनिक बदलाव शुरू कर दिए और मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी, एडीजी, आईजी, एसपी, डीएम, कोलकाता पुलिस कमिश्नर और यहां तक ​​कि केएमसी कमिश्नर को भी बदल दिया। इस तरह के अभूतपूर्व हस्तक्षेप से इरादे और समय को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने आगे कहा कि इसके बाद जो हुआ है वह और भी चिंताजनक है। इन बदलावों की आड़ में, धमकियों की घटनाएं बढ़ रही हैं, दुकानों में तोड़फोड़ हो रही है, धर्म के नाम पर तनाव भड़काया जा रहा है और आम लोगों को परेशान किया जा रहा है। हमें 'बुलडोजर मॉडल' की जरूरत नहीं है। हमें नफरत और हिंसा की आयातित राजनीति की जरूरत नहीं है। तृणमूल कांग्रेस नेता के अनुसार हमारी पहचान हमारी साझी संस्कृति, हमारे मिलजुल कर मनाए जाने वाले कार्यक्रम, एक-दूसरे की मान्यताओं के प्रति हमारा सम्मान है। उन्होंने समाज में सांप्रदायिक सद्भाव के महत्व पर भी प्रकाश डाला और बताया कि पश्चिम बंगाल ने इस दिशा में किस प्रकार अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि कई पीढ़ियों से बंगाल दुर्गा पूजा, दिवाली, पोइला बोइशाख, ईद, गुरु नानक जयंती, बुद्ध पूर्णिमा और क्रिसमस बिना किसी भय, विभाजन या हिंसा के एक साथ मनाता आया है। फिर भी पिछले कुछ दिनों में हमें क्रांतिकारियों की इस भूमि पर थोपे जा रहे 'परिवर्तन' की एक भयावह झलक देखने को मिल रही है। बनर्जी ने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर और स्वामी विवेकानंद की भूमि हमेशा से सहिष्णुता, सद्भाव और सहअस्तित्व की प्रतीक रही है। दशकों से बंगाल विविधता में एकता का जीता-जागता उदाहरण रहा है। बनर्जी ने अपनी पोस्ट में कहा कि इस तरह की राजनीति से किसी को भी लाभ नहीं मिलना चाहिए। आज, वही सामाजिक ताना-बाना तनाव में दिखाई दे रहा है। सवाल यह है कि इस व्यवधान से किसे लाभ हो रहा है और बंगाल की जनता को इसकी कितनी कीमत चुकानी पड़ रही है? चुनाव आयोग और भाजपा पर शर्म आती है!

कविता बनी सियासी हथियार: बंगाल SIR के खिलाफ अभिषेक बनर्जी का तीखा प्रहार

कोलकाता तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सोमवार को पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर एक कविता लिखी, जिसमें उन्होंने लोगों पर इसके असर को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया। राजनीतिक लामबंदी या दूसरे तरीकों से विरोध करने के बजाय, बनर्जी ने चुनाव आयोग के कदम के खिलाफ लोगों की तरफ से बोलने के लिए अपनी कलम की ताकत का इस्तेमाल किया। कविता की हर लाइन केंद्र सरकार द्वारा लोगों पर किए जा रहे अत्याचार को दिखाती है। कविता का नाम 'आमी अस्वीकार कोरी' (मैं मानने से इनकार करता हूं) है। सोशल मीडिया पोस्ट पर कविता शेयर करते हुए बनर्जी ने कहा, "एक खतरनाक प्रक्रिया को लेकर मेरे अंदर बहुत उथल-पुथल मची हुई है, जिसने लोगों की जिंदगी तबाह कर दी है, और हमारे लोगों के सामूहिक दुख, दर्द और गुस्से को आवाज देते हुए, मैंने इन भावनाओं को एक छोटी सी कविता में ढाला है।" कविता की शुरुआती लाइनें हैं—'मैं 'मानने से इनकार करता हूं, यह लापरवाही, यह लिस्टों का राज, यह डर का राज। मैं मानने से इनकार करता हूं, राज्य के नाम पर खून का कर्ज। मैं मानने से इनकार करता हूं, खून पर स्याही का राज।' कविता में, हर शब्द और वाक्यांश एसआईआर से पैदा हुई हाल की स्थिति के डर और दर्द को दिखाता है। यह कविता एसआईआर प्रक्रिया के दौरान लोगों पर थोपे गए नियमों के खिलाफ विरोध की आवाज उठाती है। अब तक, राज्य में एसआईआर अभ्यास शुरू होने के बाद से लगभग 150 लोगों की मौत हो चुकी है। उस संख्या का जिक्र करते हुए, बनर्जी ने दावा किया, "यह सिर्फ एक संख्या नहीं है; यह राज्य द्वारा लगाई गई आग में लोगों की चीख है।" उन्होंने एसआईआर तरीके की व्यर्थता को निशाना बनाते हुए लिखा, "राज्य के रिकॉर्ड में, आंकड़े जिंदगी की जगह ले लेते हैं। जमीर, सच्चाई और सम्मान शासक के जूतों के नीचे कुचल दिए जाते हैं।" बनर्जी ने अपनी कविता में इतिहास का भी जिक्र किया। उनकी पंक्तियां कहती हैं, "इतिहास- वह माफ नहीं करता, वह लिस्टें नहीं पढ़ता। इतिहास याद रखता है कि किसने विरोध किया, किसने लड़ाई लड़ी, कौन अपनी जगह पर डटा रहा, किसने आग लगाई। इतिहास उन्हें कभी माफ नहीं करता जो लोगों को छोटा समझते हैं।" इस कविता के जरिए, उन्होंने एक बार फिर एसआईआर अभ्यास के खिलाफ आवाज उठाई है। इससे पहले, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस अभ्यास के विरोध में 26 कविताएं लिखी थीं। अब, अभिषेक बनर्जी भी इस लिस्ट में शामिल हो गए हैं।

फ्लाइट परमिशन में देरी पर भड़के अभिषेक बनर्जी, केंद्र पर राजनीतिक षड्यंत्र का आरोप

कोलकाता तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी के बीरभूम दौरे को लेकर मंगलवार को काफी अनिश्चितता बनी रही। नागरिक उड्डयन मंत्रालय से अनुमति न मिलने के कारण उन्हें काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि भाजपा उनके कार्यक्रमों में रुकावट पैदा कर रही है। मिली जानकारी के अनुसार, अभिषेक को मंगलवार दोपहर दक्षिण 24 परगना के बेहाला से बीरभूम जिले में 'रण संकल्प सभा' में शामिल होने के लिए कोलकाता के बेहाला फ्लाइंग क्लब से हेलीकॉप्टर से रवाना होना था। उसी दौरान नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने हेलीकॉप्टर उड़ाने की परमिशन नहीं दी, जिसके चलते उन्होंने काफी देर तक इंतजार किया, इसके बाद परमिशन मिली। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि भाजपा के लोग डर रहे हैं, इसलिए हमारे कार्यक्रम में भी रुकावट पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग तृणमूल कांग्रेस से इतने डर गए हैं कि अब हमारे कार्यक्रमों में भी रोक लगाने लगे हैं। तृणमूल कांग्रेस के पदाधिकारियों ने बताया कि जिस हेलीकॉप्टर से उन्हें आज उड़ान भरनी थी, उसे झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बातचीत के बाद और झारखंड सरकार के सहयोग से इंतजाम किया गया था। अभिषेक का बुधवार को बीरभूम में 'रण संकल्प सभा' ​​का कार्यक्रम है। रामपुरहाट के बिनोदपुर मैदान में सभा आयोजित करने की योजना थी। वहीं, एक सूत्र के अनुसार सांसद ने हेलीकॉप्टर उड़ाने के लिए आवश्यक अनुमति प्राप्त नहीं की थी। नतीजतन, वह दोपहर तक बेहाला फ्लाइंग क्लब में हेलीकॉप्टर का इंतजार करते रहे। उनका दावा है कि जिस तरह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बांगांव दौरे से पहले समस्याएं खड़ी की गईं, उसी तरह भाजपा अभिषेक के दौरे से पहले ‘साजिश’ रच रही थी। टीएमसी के नेताओं ने कहा कि अभिषेक के बढ़ते प्रभाव और पार्टी की सभाओं से भाजपा डरी हुई है, इसलिए इस तरह की रुकावटें पैदा की जा रही हैं। ममता बनर्जी ने भी इसी तरह की शिकायत की है कि वे खुद कई महीनों से हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल नहीं कर पा रही हैं। हालांकि अभिषेक बनर्जी काफी देर के बाद अपने हेलीकॉप्टर से बीरभूम के लिए रवाना हुए। टीएमसी का दावा है कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने उनके चॉपर को क्लीयरेंस नहीं दिया था।

SIR मीटिंग में अभिषेक बनर्जी का हंगामा, CEC से हुई तीखी बहस

नई दिल्ली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग (ECI) के साथ करीब ढाई घंटे चली बैठक के बाद केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए. बनर्जी ने आरोप लगाया कि देश में अब EVM के बजाय 'सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम' के जरिए वोटर लिस्ट (Electoral Rolls) में हेरफेर कर वोट चोरी की जा रही है.  अभिषेक बनर्जी ने कहा कि TMC के 10 सांसदों और पश्चिम बंगाल सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से करीब ढाई घंटे तक मुलाकात की, लेकिन आयोग उनके उठाए गए सवालों का कोई ठोस जवाब नहीं दे सका. उन्होंने आरोप लगाया कि 28 नवंबर को भी आयोग से सवाल पूछे गए थे, लेकिन न तब जवाब मिला और न अब. उल्टा, चयनित लीक मीडिया को दिए गए. 'हम निर्वाचित हैं, आप मनोनीत' बैठक के दौरान हुए घटनाक्रम का जिक्र करते हुए अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनसे उंगली उठाकर बात करने की कोशिश की. लेकिन मैंने उनसे साफ कहा कि उंगली नीचे करके बात करो. आप मनोनीत (Nominated) हैं, जबकि हम निर्वाचित (Elected) प्रतिनिधि हैं. हम किसी के दास या गुलाम नहीं हैं. उन्होंने CEC को चुनौती दी कि यदि उनमें हिम्मत है, तो वे बैठक की CCTV फुटेज सार्वजनिक करें और मीडिया के सवालों का सामना करें. वोटर लिस्ट में ‘सॉफ्टवेयर खेल’ TMC नेता का दावा है कि SIR के तहत 1.36 करोड़ मामलों में ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ बताई जा रही है, लेकिन आयोग ने अब तक इसकी सूची सार्वजनिक नहीं की. उन्होंने आरोप लगाया कि ECI ऐप में गड़बड़ी है, जहां दस्तावेज जमा होने के बावजूद नोटिस जारी नहीं हो रहे और नाम सॉफ्टवेयर के ज़रिए हटाए जा रहे हैं, वह भी AERO की जानकारी के बिना. उन्होंने कहा कि 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों, दिव्यांगों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को घंटों फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए बैठाया जा रहा है, जो अमानवीय है. बंगाल को बदनाम करने की कोशिश? अभिषेक बनर्जी ने सवाल उठाया कि रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम पर बंगाल को बदनाम किया जा रहा है. उन्होंने कहा, “अगर 58 लाख लोगों की सूची बनाई गई है, तो साफ बताया जाए कि उनमें कितने अवैध प्रवासी हैं. अगर कोई अवैध है तो हम भी उन्हें बाहर करने के पक्ष में हैं, लेकिन झूठा प्रचार बर्दाश्त नहीं करेंगे.” उन्होंने यह भी कहा कि अन्य 11 राज्यों में SIR चल रहा है, लेकिन बंगाल में सबसे कम डिलीशन होने के बावजूद यहां सबसे ज्यादा सख्ती की जा रही है. विपक्ष को दिया संदेश अभिषेक बनर्जी ने कांग्रेस, AAP और RJD सहित विपक्षी दलों से अपील की कि वे समझें कि वोट चोरी ईवीएम से नहीं, वोटर लिस्ट और सॉफ्टवेयर के जरिए हो रही है. उन्होंने दावा किया कि बीजेपी महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली और बिहार में इसी तरीके से जीत हासिल कर रही है. अंत में उन्होंने कहा, “पहले मतदाता तय करते थे कि सरकार कौन बनाएगा, अब सरकार तय कर रही है कि वोट डालने कौन जाएगा. लेकिन याद रखिए बीजेपी हमेशा सत्ता में नहीं रहेगी, संविधान रहेगा. 2026 में बंगाल की जनता फिर बीजेपी को हराएगी.”