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डेढ़ साल से फरार नकल गिरोह का मुख्य आरोपी चढ़ा पुलिस के हत्थे, हाई कोर्ट एलडीसी और ईओ-आरओ भर्ती में की थी धांधली

जयपुर राजस्थान पुलिस के विशेष अभियान दल (एसओजी) ने दो सार्वजनिक परीक्षाओं में ब्लूटूथ् डिवाइस से नकल करने का आरोपी राजेश कुमार रेवाड़ को गिरफ्तार कर लिया है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एसओजी) विशाल बंसल ने शनिवार को बताया कि इस मामले में आरोपी राजेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है। बंसल ने बताया कि राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा लिपिक ग्रेड द्वितीय के पदों पर सीधी भर्ती के लिए संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा 2022, 12 मार्च एवं 19 मार्च 2023 को आयोजित की गई थी और संगठित नकल गिरोह के मुख्य अभियुक्त राजेश कुमार निवासी रुखासर रतनगढ चुरु का परीक्षा 19 मार्च को परीक्षा केंद्र नेहरु ज्योति सीनीयर सेकेंडरी स्कूल जयपुर था। प्रश्न पत्र के उत्तरों की नकल करवाई गिरोह के मुख्य अभियुक्त पौरव कालेर द्वारा सालासर से मोबाइल फोन से राजेश कुमार को परीक्षा केंद्र में ब्लूटूथ डिवाइस के माध्यम से प्रश्न पत्र के उत्तरों की नकल करवाई थी। राजस्व अधिकारी ग्रेड द्वितीय एवं अधिशाषी अधिकारी (ईओ एवं आरओ) वर्ग चतुर्थ (स्वायत शासन विभाग ) प्रतियोगी परीक्षा वर्ष 2022 में भी राजेश कुमार वांछित है। ब्लूटूथ डिवाइस के माध्यम से नकल यह परीक्षा 14 मई को आयोजित की गई थी और इसमें भी ब्लूटूथ डिवाइस के माध्यम से नकल की थी। इन दोनों मामलों में राजेश कमार डेढ़ वर्ष से फरार चल रहा था और इसकी गिरफ्तारी के लिए एसओजी जयपुर द्वार 25 हजार रुपए का ईनाम घोषित किया हुआ था।

फेमस होने का खतरनाक जुनून, पेट्रोल पंप पर डीजल से नहलाई कार, राजस्थान के दो युवक गिरफ्तार

सिरोही लिस का कहना है कि आरोपियों ने सोशल मीडिया पर मशहूर होने के इरादे से इस हरकत को अंजाम दिया था। पुलिस ने चेतावनी दी है कि ऐसी खतरनाक हरकतों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। लापरवाही की हद! डीजल से धोई स्कॉर्पियो, फेमस होने की चाहत में बनाई रील; गिरफ्तार राजस्थान के सिरोही का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक युवक पेट्रोल पंप पर अपनी स्कॉर्पियो कार को डीजल से धोता नजर आ रहा है। इस घटना के बाद लोगों ने ईंधन की बर्बादी और पब्लिक सेफ्टी को लेकर काफी नाराजगी जताई है। हालांकि ऐसी हरकत करने वालों को इसका कतई अंदाजा नहीं था कि उनकी यह हरकत उनके लिए ही मुसीबत बन जाएगी। पुलिस ने इस मामले में महिपाल सिंह समेत दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है और उनकी गाड़ी भी जब्त कर ली है। अधिकारियों का कहना है कि यह स्टंट शायद सोशल मीडिया पर 'रील' बनाने के लिए किया गया था। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने सोशल मीडिया पर मशहूर होने के इरादे से इस हरकत को अंजाम दिया था। पुलिस ने चेतावनी दी है कि ऐसी खतरनाक हरकतों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। तुरंत जांच और कार्रवाई आपको बता दें कि वीडियो वायरल होने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा, जिसके बाद आरोपियों की पहचान के लिए जांच शुरू की गई। वायरल वीडियो पर कड़ा संज्ञान लेते हुए सिरोही के पुलिस अधीक्षक (एसपी) पुष्पेंद्र सिंह ने तुरंत जांच और कार्रवाई के निर्देश दे दिए थे। छीबा गांव के रहने वाले हैं आरोपी सिरोही पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। आरोपी छीबा गांव के रहने वाले हैं। उन पर सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप लगाया गया है। रील में देखा जा सकता है कि एक शख्स पेट्रोल पंप पर बैखोफ खड़ा है और अपने हाथ से ही डीजल को कार पर कुछ ऐसे डाल रहा है जैसे पानी हो। गनीमत रही की कोई गड़बड़ नहीं हुई डीजल बेहद ही ज्वलनशील पदार्थ होता है अगर गलती से भी एक चिंगारी उसपर पड़ जाती तो कितना भयावह नजारा देखने को मिल सकता था। हालांकि कि गनीमत रही की ऐसा कुछ नहीं हुआ। पुलिस ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की।

दुश्मन के ठिकानों पर बरसेगी स्वदेशी ‘धमक’, रक्षा मंत्रालय खरीदेगा 1000 किलो वाले 600 हवाई बम

नई दिल्ली भारत ने हाल के वेस्ट एशिया युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर से बहुत बड़ी सीख ली है. इन दोनों घटनाओं ने दिखाया कि लड़ाई के समय हथियारों की उपलब्धता और उनकी ताकत कितनी जरूरी होती है. इसी वजह से रक्षा मंत्रालय ने अब भारतीय वायु सेना को और मजबूत बनाने का फैसला किया है. रक्षा मंत्रालय स्वदेशी 1000 किलो के हवाई बम खरीदने की तैयारी में है. ये बम अमेरिका के MK-84 बम जैसे होंगे जो 2000 पाउंड यानी लगभग 907 किलो विस्फोटक ले जा सकते हैं. इसका मतलब है कि ये बम दुश्मन के बड़े-बड़े टारगेट को पूरी तरह तबाह कर सकते हैं. अब भारत खुद इन बमों को बनाएगा ताकि विदेश से खरीदने की जरूरत कम हो और वायु सेना हमेशा तैयार रहे. कितने 1000 किलो के हवाई बम खरीदे जाएंगे? रक्षा मंत्रालय ने इन स्वदेशी बमों के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट यानी EOI जारी कर दिया है. इसके तहत 600 ऐसे 1000 किलो के हवाई बम बनाए और खरीदे जाएंगे. इनके साथ टेल यूनिट यानी पूंछ वाला हिस्सा और दूसरे जरूरी उपकरण भी शामिल होंगे. यह पूरा प्रोजेक्ट बाय इंडियन कैटेगरी में चलेगा यानी सब कुछ भारत में ही बनेगा. इससे भारतीय कंपनियां आगे बढ़ेंगी और देश की रक्षा व्यवस्था मजबूत होगी. बम की खासियतें क्या हैं और ये कितने खतरनाक होंगे? ये नए हवाई बम खुद-ब-खुद टुकड़ों में बंटकर फैलेंगे. ये उच्च कैलिबर के हथियार हैं जो बहुत तेज विस्फोट पैदा करते हैं. दुश्मन के टारगेट पर भारी प्रभाव डालते हैं. ये बम रूसी और पश्चिमी दोनों तरह के विमानों पर लगाए जा सकेंगे जो भारतीय वायु सेना के पास हैं. अभी तक भारतीय वायु सेना ऐसे एमके-84 क्लास के बम विदेशी कंपनियों से खरीदती थी. अब स्वदेशी बम आने से वायु सेना को ज्यादा विश्वास होगा और लॉजिस्टिक्स भी आसान हो जाएंगे. ये बम दुश्मन के बड़े ठिकानों, पुलों, रनवे या गोदामों को एक झटके में नष्ट कर सकते हैं. दो चरणों में होगी पूरी खरीद प्रक्रिया इस प्रोजेक्ट को दो चरणों में पूरा किया जाएगा. पहले चरण में छह प्रोटोटाइप बनाए जाएंगे जिनमें लाइव वाले और इनर्ट यानी बिना विस्फोटक वाले दोनों तरह के बम शामिल होंगे. इनके साथ टेल यूनिट और दूसरे उपकरण भी विकसित किए जाएंगे. इस चरण में सिंगल स्टेज कंपोजिट ट्रायल्स होंगे और उसके बाद एयर स्टाफ क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट्स यानी एएसक्यूआर की जांच की जाएगी. पहले चरण में कम से कम 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल जरूरी है. दूसरे चरण में योग्य कंपनियों को कमर्शियल रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल यानी आरएफपी जारी किया जाएगा और कुल 600 बम खरीदे जाएंगे. यह खरीद बाय इंडियन-आईडीडीएम कैटेगरी में होगी जो डीएपी 2020 के हिसाब से सबसे ज्यादा स्वदेशी वाला रास्ता है. बम कब तक भारतीय वायु सेना में शामिल होंगे? पूरे प्रोजेक्ट को पूरा होने में करीब ढाई साल का समय लगेगा. ईओआई जारी होने से लेकर कॉन्ट्रैक्ट साइन होने तक यह समय लगेगा. इसमें प्रोटोटाइप बनाना, यूजर ट्रायल्स करना, मूल्यांकन, कॉमर्शियल प्रोसे और अंत में कॉन्ट्रैक्ट फाइनल करना शामिल है. भारतीय वायु सेना इस प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ा रही है ताकि स्वदेशी विकास हो सके. आगे चलकर बड़े स्तर पर उत्पादन किया जा सके. ट्रायल्स भारत में ही आईएएफ यूनिट्स या तय जगहों पर होंगे और तय आईएएफ विमान पर ही इनकी टेस्टिंग की जाएगी. इससे लॉजिस्टिक एंड्योरेंस यानी लंबे समय तक हथियारों की सप्लाई आसान हो जाएगी. ये स्वदेशी 1000 किलो के बम भारतीय वायु सेना को भारी फायर पावर देंगे. अब वायु सेना को विदेशी बमों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. भारतीय निजी कंपनियां भी इसमें हिस्सा ले सकती हैं. विदेशी सहयोग की भी अनुमति है लेकिन शर्त यह है कि डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग ज्यादातर भारत में ही हो. कंपनियों को फाइनेंशियल और टेक्निकल दोनों तरह से जांचा जाएगा. उनकी इंजीनियरिंग क्षमता, इंफ्रास्ट्रक्चर, इंटीग्रेशन क्षमता, स्वदेशी सामग्री का प्रतिशत और जरूरी स्टैंडर्ड का पालन देखा जाएगा.

पंचायत प्रोत्साहन योजना में 14 जिलों ने किया बेहतर प्रदर्शन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से मध्यप्रदेश की पंचायतों को केन्द्र सरकार का भरपूर सहयोग मिल रहा है। वे निरंतर सशक्त बन रही हैं। केन्द्र सरकार कीयोजनाओं का लाभ उठाते हुए प्रदेश की पंयायतों विकास की गतविधियों को बेहतर क्रियान्वित कर रही हैं। मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान और पंचायतों का प्रोत्साहन देने की योजना में अच्छा प्रदर्शन किया है। पंचायतों को प्रोत्साहन देने की योजना का उद्देश्य पंचायतों के बीच प्रतिस्पर्धात्मक भावना को प्रोत्साहित करना है। इसके तहत सर्वोत्तम प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को उनके अच्छे विकासात्मक कार्यों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन सहित पुरस्कार दिए जा रहे हैं। भोपाल, नरसिंहपुर, सागर, छतरपुर, सीधी, पूर्वी निमाड़, हरदा, उज्जैन, जबलपुर, इंदौर, नीमच, गुना, ग्वालियर और झाबुआ पंयायतों ने प्रोत्साहन योजना में अच्छा प्रदर्शन किया है। ग्राम पंचायत विकास योजना और परियोजना क्रियान्वयन एक सतत प्रक्रिया है। प्रदेश की ग्राम पंचायतों में केंद्रीय वित्त आयोग के अनुदानों का उपयोग करते हुए कुल 16,773 परियोजना कार्य पूरे किए गए हैं। राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान का प्राथमिक उद्देश्य निर्वाचित प्रतिनिधियों और उनके पदाधिकारियों की क्षमता निर्माण कर पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत बनाना, ग्राम पंचायत भवन और कम्प्यूटरीकरण जैसी अधोसंरचनात्मक सहायता प्रदान करना है। ई-पंचायतों पर मिशन मोड परियोजना (एमएमपी-ईपंचायत) में पंचायतों के डिजिटलीकरण की दिशा में ई-गवर्नेंस परियोजनाओं को वित्तपोषित किया जाता है। इससे पीआरआई के कामकाज में कार्यदक्षता, जवाबदेही और पारदर्शिता आई है। वर्तमान में पंद्रहवें वित्त आयोग (एफएफसी) के तहत, राज्यों के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं को केन्द्रीय वित्त आयोग की हस्तांतरित निधि आवंटित की जाती है। आयोग के अनुदान के दो घटक हैं—टाइड और अनटाइड। अनटाईड अनुदान कुल अनुदान का 40% है। इसका उपयोग वेतन या अन्य स्थापना व्यय को छोड़कर संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में निहित 29 विषयों में स्थान-विशिष्ट की जरूरतों के लिए किया जा सकता है। टाइड अनुदान कुल अनुदान का 60% है। इसका उपयोग बुनियादी सेवाएं प्रदान करने के लिए किया जा सकता है जैसे स्वच्छता और खुले में शौच से मुक्ति, घरेलू कचरे का प्रबंधन और उपचार, मल और गाद प्रबंधन, पेयजल की आपूर्ति, वर्षा जल संचयन जैसे कार्य शामिल है। यदि किसी स्थानीय निकाय ने एक श्रेणी की जरूरतों को पूरी तरह से पूरा कर दिया है, तो वह अन्य श्रेणी की धनराशि का उपयोग कर सकता है। उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्रदेश में पीआरआई के निर्वाचित प्रतिनिधियों और उनके पदाधिकारियों को मिलाकर 9 लाख पदाधारियों को भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), ग्रामीण प्रबंधन संस्थान आनंद जैसे उत्कृष्टता संस्थानों के सहयोग से नेतृत्व/प्रबंधन विकास कार्यक्रम में प्रशिक्षण दिया गया है। मुख्य उद्देश्य संचार, निर्णय लेने, वित्तीय प्रबंधन और टकराव समाधान सहित आवश्यक नेतृत्व कौशल को निखारना है। वर्तमान में पंचायती राज संस्थाओं की क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि वे स्वयं के राजस्व स्रोतों को जुटा सकें। अब तक प्रदेश के 3,275 प्रतिभागियों को ओएसआर मॉड्यूल का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ई-गवर्नेंस पंचायतों में ई-गवर्नेंस को मजबूत बनाने और बढ़ावा देने के लिए, डिजिटल इंडिया पहल के तहत, स्थानीय ग्रामीण शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यदक्षता लाने के लिए विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऐप विकसित किए हैं। सिंगल साइन ऑन डिजिटल प्लेटफॉर्म, ईग्रामस्वराज ऐप पंचायत स्तर पर योजना, लेखांकन, निगरानी और ऑनलाइन भुगतान की सुविधा प्रदान करने के लिए बनाया गया है। इस ऐप को सार्वजनिक निधि प्रबंधन प्रणाली, सरकारी ई-मार्केटप्लेस और ऑडिट ऑनलाइन ऐप के साथ एकीकृत किया गया है ताकि भुगतान में कोई परेशानी न हो, खरीद प्रक्रिया पारदर्शी हो और पंचायतों के खातों की लेखापरीक्षा की जा सके। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान मध्यप्रदेश में 23,011 ग्राम पंचायतों में से 22,978 ग्राम पंचायतों (99.85%) ने अपने ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (जीपीडीपी) को ईग्रामस्वराज पर अपलोड किया है और 21,950 ग्राम पंचायतों (95.5%) ने ईग्रामस्वराज-पीएफएमएस इंटरफेस के माध्यम से विक्रेताओं को 2156.10 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए हैं।  

12000 करोड़ का तोहफा, राजाजी नेशनल पार्क के बीच से गुजरेगा देश का आधुनिक कॉरिडोर, वन्यजीवों के लिए खास इंतजाम

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 अप्रैल को बहुप्रतीक्षित दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करने वाले हैं। इसके लिए पीएम मोदी का देहरादून दौरा प्रस्तावित है। इस एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद दिल्ली से देहरादून का सफर सिर्फ ढाई घंटे में पूरा हो सकेगा। अभी तक दिल्ली से देहरादून पहुंचने में करीब 6.5 घंटे लगते हैं। यह हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर के पास से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के बागपत, बड़ौत, शामली और सहारनपुर जैसे प्रमुख शहरों से होते हुए देहरादून तक जाएगा। यह रूट उत्तर भारत के कई व्यस्त इलाकों को सीधे और तेज कनेक्शन देगा। हाईटेक और सुरक्षित सफर करीब 213 किलोमीटर लंबा यह 6-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे आधुनिक सुविधाओं से लैस है। कारों के लिए 100 किमी/घंटा स्पीड लिमिट तय की गई है। 7 इंटरचेंज और 2 रेलवे ओवरब्रिज बनाए गए हैं। 10 बड़े पुल और 14 वे-साइड सुविधाएं यात्रियों को मिलेंगी। जंगल के बीच खास इंतजाम एक्सप्रेसवे का 12 किमी लंबा हिस्सा राजाजी नेशनल पार्क से होकर गुजरता है, जहां वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एलिवेटेड रोड, हाथी अंडरपास और एनिमल क्रॉसिंग बनाई गई हैं। यह एक्सप्रेसवे हरिद्वार लिंक और चारधाम हाईवे से भी जुड़ेगा, जिससे उत्तराखंड के धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच और आसान हो जाएगी। कितना खर्च, क्या फायदा करीब ₹12,000 करोड़ की लागत से बने दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे से यात्रा समय में भारी कमी आएगी, ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी और साथ ही पर्यटन व स्थानीय कारोबार को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। टोल कितना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अनुसार, दिल्ली से देहरादून जाने के लिए कार का एक तरफ का टोल करीब ₹675 तय किया गया है। अगर कोई यात्री 24 घंटे के भीतर वापसी करता है, तो उसे दोनों तरफ का टोल ₹1,010 देना होगा, यानी एक दिन के सफर में करीब ₹340 की बचत होगी। प्राधिकरण का अनुमान है कि इस एक्सप्रेसवे से हर साल लगभग ₹900 से ₹950 करोड़ की टोल आय होगी। इस हिसाब से करीब ₹12,000 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट की भरपाई में लगभग 13 साल का समय लग सकता है।

अप्राकृतिक कृत्य के प्रयास में मासूम की हत्या, कोरबा में दिल दहला देने वाला मामला

कोरबा ग्राम पंचायत डोंगानाला के आश्रित ग्राम गणेशपुर में दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। नशे में धुत एक युवक ने सात साल के मासूम की हत्या कर दी। आरोपित ने बच्चे को बहला-फुसलाकर सुनसान इलाके में ले जाकर अप्राकृतिक कृत्य करने की कोशिश की। बच्चे के विरोध करने पर पत्थर से सिर पर वार कर उसकी जान ले ली। तालाब से घर नहीं लौटा आयान, स्वजनों की बढ़ी चिंता पाली थाना अंतर्गत ग्राम गणेशपुर निवासी शिवकुमार खुरसेंगा का सात साल का बेटा आयान दो अप्रैल की दोपहर अपने साथियों के साथ गांव के तालाब में नहाने गया था। रोज की तरह अन्य बच्चे साथ गए थे, लेकिन नहाने के बाद बाकी बच्चे घर लौट आए, जबकि आयान वापस नहीं पहुंचा। देर शाम तक उसके घर नहीं आने पर स्वजन चिंतित हो उठे। आसपास और रिश्तेदारों के यहां तलाश की गई, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। इसी बीच स्वजन को जानकारी मिली कि आयान को गांव में ही रहने वाले रंजीत कुमार 19 वर्ष के साथ अंतिम बार देखा गया था। पुलिस की सख्ती के बाद खुला राज इसके बाद परिवार ने पुलिस को सूचना दी। इसके साथ ही दूसरे दिन भी लगातार खोजबीन जारी रही, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। स्थिति गंभीर होने पर गांव में बैठक बुलाई गई, जिसमें ग्रामीणों और स्वजन ने मिलकर जानकारी जुटाने की कोशिश की। बैठक के दौरान शक के आधार पर रंजीत से पूछताछ की गई, लेकिन वह लगातार गोलमोल जवाब देता रहा। इससे ग्रामीणों का संदेह और गहरा गया। मामले की सूचना मिलने पर थाना प्रभारी नागेश तिवारी मौके पर पहुंचे और युवक से सख्ती से पूछताछ की, तब पुलिस के दबाव में आरोपित टूट गया और उसने वारदात कबूल कर ली। अप्राकृतिक कृत्य का विरोध करने पर पत्थर से सिर कुचला आरोपित रंजीत ने बताया कि वह नशे की हालत में तालाब पहुंचा था। वहीं उसकी नजर आयान पर पड़ी और वह उसे बहला-फुसलाकर सुनसान जगह पर ले गया। वहां उसने बच्चे के साथ अप्राकृतिक कृत्य करने की कोशिश की। विरोध करते हुए बच्चा चिल्लाने लगा, इससे घबराकर उसने (रंजीत) पास पड़े पत्थर से उसके सिर पर कई बार वार कर दिया। गंभीर चोट लगने से मौके पर ही बच्चे की मौत हो गई। घटना के बाद शव को पड़ोसी गांव करतली के एक खेत में बने करीब 12 फीट गहरे कुएं में फेंक दिया और वापस गांव लौट आया। पुलिस ने आरोपित की निशानदेही पर कुएं से बच्चे का शव बरामद कर लिया। मामले में आरोपित के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। नशे में आ जाती है दबी हुई विकृति बाहर गणेशपुर की घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। मनोविज्ञान के जानकार मानते हैं कि नशे की हालत में व्यक्ति का नियंत्रण कम हो जाता है और दबे हुए विकृत व्यवहार सामने आ सकते हैं। इस तरह की घटनाएं अकसर अचानक नहीं होतीं, बल्कि मानसिक असंतुलन, सामाजिक नियंत्रण की कमी और नशे की आदत का संयुक्त परिणाम होती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, गांव और कस्बों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। बच्चों को यह सिखाना जरूरी है कि वे किसी भी व्यक्ति के साथ अकेले न जाएं, चाहे वह परिचित ही क्यों न हो। वहीं अभिभावकों को भी बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने और देर होने पर तुरंत सतर्क होने की सलाह दी जाती है।  

दिल्ली जल बोर्ड का अलर्ट,जलाशयों की सफाई के चलते कल से बाधित रहेगी सप्लाई, पहले से स्टोर कर लें पानी

नई दिल्ली दिल्ली के कई इलाकों में रहने वाले लोगों को सोमवार और मंगलवार का पानी की कमी से जूझना होगा। इस बात की जानकारी दिल्ली जल बोर्ड की तरफ से दी गई है। बोर्ड ने बताया कि भूमिगत जलाशय (UGR) और बूस्टर पंपिंग स्टेशन (BPS) के हर साल होने वाले फ्लशिंग के काम (सफाई) की वजह से 6 और 7 अप्रैल को शहर के करीब 11 से ज्यादा इलाकों में पानी की आपूर्तिं प्रभावित रहेगी। जल बोर्ड के अनुसार इस काम की वजह से 6 अप्रैल (सोमवार) को शहर के 5 इलाकों सुल्तानपुरी एरिया, मंगोलपुरी, सेक्टर-2 पॉकेट-4 रोहिणी, फिलिंग प्वाइंट, कराला गांव और उसके आसपास के क्षेत्रों में पानी नहीं आएगा। वहीं 7 अप्रैल (मंगलवार) को सुल्तानपुरी क्षेत्र, सेक्टर-3 पॉकेट-F 23 रोहिणी, सेक्टर-3 पॉकेट-A-1 रोहिणी फिलिंग पॉइंट, कराला गांव और आसपास के क्षेत्रों, सेक्टर-3 पॉकेट-B 10 रोहिणी, सेक्टर-3 पॉकेट-C 12 रोहिणी में जल आपूर्ति बाधित रहेगी। पर्याप्त मात्रा में पानी स्टोर करके रखने की दी सलाह इस दौरान लोगों को होने वाली परेशानी को देखते हुए दिल्ली जल बोर्ड ने खेद जताते हुए क्षमा भी मांगी है, साथ ही लोगों को इस बात की सलाह भी दी है कि वे पर्याप्त मात्रा में अपनी जरूरत का पानी पहले से ही स्टोर करके रख लें। 6 अप्रैल (सोमवार) को जिन इलाकों में नहीं आएगा पानी (1) सुल्तानपुरी एरिया (2) मंगोलपुरी (3) सेक्टर-2 पॉकेट-4 रोहिणी (4) फिलिंग प्वाइंट (5) कराला गांव व उसके आसपास के क्षेत्र। 7 अप्रैल (मंगलवार) को जिन क्षेत्रों में नहीं आएगा पानी (1) सुल्तानपुरी क्षेत्र (2) सेक्टर-3 पॉकेट-F 23 रोहिणी (3) सेक्टर-3 पॉकेट-A-1 रोहिणी फिलिंग पॉइंट (4) कराला गांव और आसपास का क्षेत्र (5) सेक्टर-3 पॉकेट-B 10 रोहिणी (6) सेक्टर-3 पॉकेट-C 12 रोहिणी पानी के टैंकर मंगवाने हेतु जारी किए नंबर हालांकि नागरिकों की दिक्कतों को थोड़ा कम करने के लिए जल बोर्ड ने पानी के टैंकर मंगवाने के लिए कुछ नंबर्स भी जारी किए हैं। जल बोर्ड के अनुसार पानी के टैंकर्स नीचे दिए गए इन नंबरों पर उपलब्ध होंगे। सेंट्रल कंट्रोल रूम DJB: 1916, 23527679, 23538495 मंगोलपुरी ओवरहेड टैंक (OHT): 27294132, 27915531

उज्जैन के बाद अब बाबा विश्वनाथ के धाम में गूंजेगी भारतीय कालगणना

भोपाल कालगणना की पावन नगरी और 'महाकाल' के केंद्र उज्जैन से निकली भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा अब बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में भी जीवंत हो उठी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विशेष पहल पर, भारतीय कालगणना पर आधारित विश्व की प्रथम 'विक्रमादित्य वैदिक घड़ी' को उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर प्रांगण में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 3 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ को बाबा काशी विश्वनाथ को अर्पित यह घड़ी भेंट की थी। इसके बाद विक्रम संवत् 2083, वैशाख कृष्ण पक्ष की द्वितीया (4 अप्रैल, 2026) को इसे मंदिर परिसर में पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान के साथ स्थापित किया गया। यह मध्यप्रदेश सरकार के उस संकल्प की ओर एक बड़ा कदम है, जिसके तहत देश के सभी ज्योतिर्लिंग और अयोध्या के श्रीराम मंदिर में भी वैदिक घड़ी की स्थापना की जानी है। परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम उज्जैन के 'महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ' द्वारा विकसित यह घड़ी केवल समय बताने वाला यंत्र नहीं, बल्कि भारत के प्राचीन वैज्ञानिक ज्ञान का डिजिटल पुनर्जागरण है। यह घड़ी सूर्योदय से परिचालित होती है और एक पूर्ण दिवस को 30 मुहूर्तों में विभाजित करती है। इसकी विशेषता यह है कि यह स्थान-विशिष्ट सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर सटीक समय की गणना करती है। इस घड़ी के माध्यम से श्रद्धालु और युवा पीढ़ी न केवल भारतीय मानक समय (IST) जान सकेंगे, बल्कि पंचांग, तिथि, योग, नक्षत्र, भद्रा स्थिति और ग्रहों के गोचर जैसी सूक्ष्म जानकारियों से भी रूबरू हो सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार अपनी सांस्कृतिक धरोहर को आधुनिक तकनीक के साथ सहेजने के लिए निरंतर प्रयासरत है। यह वैदिक घड़ी हमारे गौरवशाली अतीत को वर्तमान से जोड़ते हुए युवाओं को अपनी जड़ों की ओर लौटने की प्रेरणा देगी। मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, उज्जैन द्वारा भारतीय कालगणना पर आधारित विश्व की प्रथम विक्रमादित्य वैदिक घड़ी उज्जैन में स्थापित की गई है। यह घड़ी भारत की प्राचीन कालगणना परंपरा को आधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से पुनर्स्थापित करने का एक अभिनव प्रयास है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का लोकार्पण 29 फरवरी 2024 को फाल्गुन 2080, कृष्ण पक्ष, पंचमी, वरुण मुहूर्त (13वाँ मुहूर्त) में किया गया था।  

भोपाल मेट्रो की लागत आसमान छू रही, भूमिगत कॉरिडोर में देरी पर अफसरों की चुप्पी

भोपाल राजधानी में मेट्रो के भूमिगत कॉरिडोर के निर्माण को लेकर मेट्रो प्रबंधन के दावों और हकीकत के बीच बड़ा अंतर नजर आ रहा है। एक तरफ भोपाल रेलवे स्टेशन से पुल पातरा तक ट्विन टनल के निर्माण के लिए जिस टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) का उद्घाटन 30 मार्च को बड़ी धूमधाम से किया गया था, वह अब तक एक इंच भी आगे नहीं बढ़ सकी है। ऐसा इसलिए क्योंकि टीबीएम के पीछे लगाए जाने वाले बूस्टिंग के पार्ट अब तक इंस्टॉल नहीं हुए हैं। जबकि उद्घाटन के समय मेट्रो के अफसरों ने मशीन चालू कर फोटो खिंचवाए थे, लेकिन तकनीकी खामियों और प्रशासनिक चुप्पी ने पूरी परियोजना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह देखकर कहना गलत नहीं होगा कि जब तैयारी पूरी नहीं थी, तो जल्दबाजी में उद्घाटन का दिखावा क्यों किया गया। हालांकि, इस सवाल का जवाब भी मेट्रो के अधिकारी देने से कतरा रहे हैं। मशीन से बूस्टिंग सिस्टम गायब: 6 दिन बाद भी प्रगति शून्य सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, टीबीएम को आगे धकेलने वाली सबसे महत्वपूर्ण प्रणाली यानी बूस्टिंग सिस्टम अब तक सक्रिय नहीं हो पाया है। बताया जा रहा है कि इस प्रणाली से जुड़े कुछ अनिवार्य कलपुर्जे अभी तक मशीन में फिट ही नहीं किए गए हैं। उद्घाटन के समय प्रबंधन ने दावा किया था कि मशीन प्रतिदिन 5 से 7 मीटर की खुदाई करेगी, लेकिन छह दिन बीत जाने के बाद भी प्रगति शून्य है। बिना बूस्टिंग सिस्टम के मशीन का आगे बढ़ना तकनीकी रूप से संभव नहीं है, जिससे प्रोजेक्ट की समयसीमा पर असर पड़ना तय है। जर्जर इमारतें और सुरक्षा चिंताएं बनीं रोड़ा खुदाई शुरू न होने के पीछे तकनीकी कारणों के अलावा सुरक्षा के पहलू भी अहम हैं। हमीदिया रोड स्थित शालीमार ट्रेड सेंटर की हालत अत्यंत जर्जर है। टनल का मार्ग इसी क्षेत्र से होकर गुजरना है। विशेषज्ञों का मानना है कि खुदाई के दौरान होने वाले कंपन के कारण किसी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए काम को आगे बढ़ाने की हिम्मत नहीं जुटाई जा पा रही है। जर्जर इमारतों को सुरक्षित करना या उन्हें खाली कराना प्रबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है। इंदौर पर फोकस, भोपाल की रफ्तार सुस्त परियोजना से जुड़े सूत्रों का यह भी कहना है कि एमपी मेट्रो का पूरा ध्यान फिलहाल इंदौर मेट्रो पर केंद्रित है, जहां दूसरे चरण के कॉरिडोर के उद्घाटन की जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं। इस प्राथमिकता के चक्कर में भोपाल मेट्रो की रफ्तार प्रभावित हो रही है। संसाधनों और तकनीकी टीम का बड़ा हिस्सा इंदौर प्रोजेक्ट में व्यस्त होने के कारण भोपाल के भूमिगत कार्य में अपेक्षित गति नहीं आ पा रही है। लागत में वृद्धि: सरकारी खजाने पर बढ़ेगा बोझ पुल पातरा से सिंधी कॉलोनी तक के 3.39 किलोमीटर लंबे भूमिगत कॉरिडोर के लिए ट्विन टनल का निर्माण रीढ़ की हड्डी के समान है। अगले दो महीनों में 400 मीटर खुदाई का जो लक्ष्य रखा गया था, वह अब नामुमकिन नजर आ रहा है। प्रोजेक्ट में हो रही हर दिन की देरी से निर्माण लागत लाखों रुपये बढ़ रही है, जिसका सीधा बोझ सरकारी खजाने पर पड़ेगा। देरी से न केवल बजट प्रभावित होगा बल्कि शहरवासियों को भी लंबे समय तक निर्माण जनित असुविधाओं का सामना करना पड़ेगा। टीबीएम चालू है, लेकिन बूस्टिंग का काम शुरू नहीं हुआ है। जल्द ही बूस्टिंग का काम शुरू होगा। जमीन के नीचे कितनी खुदाई हो चुकी है, इसकी जानकारी बाद में बताएंगे। – धीरज शुक्ला, पीआरओ, एमपी मेट्रो

हरियाणा में कर्मचारियों का दबाव बढ़ा, OPS और भत्तों को लेकर सरकार से करेंगे मांग

लुधियाना. कर्मचारियों की वित्तीय मांगों को हल करने से मना कर रही पंजाब सरकार के खिलाफ संघर्ष के अगले पड़ाव की प्लानिंग के लिए पुराने स्केल, पेंशन एंड भत्ते बहाली मोर्चे लुधियाना की एक मीटिंग सुरिंदरपाल सिंह की चेयरमैनशिप में हुई। इस मौके पर 15 फरवरी 2026 को संगरूर में स्टेट रैली के बाद 5 मार्च को चीफ मिनिस्टर के जॉइंट सेक्रेटरी और फाइनेंस डिपार्टमेंट के अधिकारियों के साथ मीटिंग में किए गए वादों और बाकी संघर्षों का रिव्यू किया और तय किया कि कर्मचारियों की वित्तीय मांगों के प्रति पंजाब की AAP सरकार की बेरुखी का बड़े संघर्षों के जरिए मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। मीटिंग में 8 मार्च को चंडीगढ़ की ओर बढ़ रहे कर्मचारियों और 12 मार्च को चंडीगढ़ में टीचरों पर पुलिस टॉर्चर की भी कड़ी निंदा की गई। फाइनेंस मिनिस्टर हरपाल चीमा ने विधानसभा में 'पुरानी पेंशन बहाल करने में जल्दबाजी न दिखाने' के अपने बयान के ज़रिए अपनी ही सरकार के 4 साल पहले के कागजी नोटिफिकेशन को लागू करने से साफ इनकार करने की कड़ी निंदा की और पंजाब सरकार को कर्मचारियों के संघर्ष का सामना करने के लिए तैयार रहने की चेतावनी भी दी। फ्रंट के नेताओं रमनजीत सिंह संधू, अरमिंदर सिंह, वीरपाल कौर, जसविंदर सिंह ऐतियाना, कुलदीप सिंह ने कहा कि नए केंद्रीय स्केल पर आधारित 17-7-2020 का नोटिफिकेशन शुरू से रद्द किया जाए और वेतन छठे पंजाब वेतन आयोग के अनुसार +15% बढ़ोतरी तय की जाए, डॉ. सौरव शर्मा और ऐसे ही अन्य अदालती मामलों में, सेवा नियमों के अनुसार सही मायने में पंजाब वेतनमान लागू करने, समग्र शिक्षा अभियान से शिक्षा विभाग में वेतन कटौती करते हुए वर्ष 2018 से नए स्केल में रेगुलर हुए नॉन-टीचिंग कर्मचारियों को पंजाब वेतनमान के सभी लाभ बहाल करने, 1-1-2004 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों पर लागू कॉरपोरेट नई पेंशन प्रणाली (एनपीएस) को रद्द करके पुरानी पेंशन प्रणाली (ओपीएस) को बहाल करने और कर्मचारियों से काटे गए 37 प्रकार के भत्ते लागू करने की मांगों को लेकर संघर्षों को गति देने के लिए राज्य कमेटी के फैसले अनुसार 21 अप्रैल 2026 को पेंशनर भवन लुधियाना में कन्वेंशन की जाएगी। जिसमें रूरल एरिया अलाउंस, बॉर्डर एरिया अलाउंस, ACP बेनिफिट और पेंडिंग 16% महंगाई भत्ता शामिल है। कन्वेंशन के बाद पेंशनर भवन लुधियाना में एक कन्वेंशन होगा और कन्वेंशन के बाद सैकड़ों कर्मचारियों के साथ कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के घर की तरफ मार्च निकाला जाएगा और वित्तीय मांगें न पूरी होने पर 'चेतावनी' पत्र दिया जाएगा। लेबर डे के मौके पर 1 मई को मुख्यमंत्री निवास चंडीगढ़ में बड़ा डेप्युटेशन के रूप में पहुंच कर 17 मई को राज्य रैली और विरोध मार्च का नोटिस देने और मांग पत्र देने और 17 मई को चंडीगढ़ रैली में लुधियाना जिले से सैकड़ों कर्मचारी शामिल होंगे। इस मौके पर रूपिंदर पाल सिंह गिल, हरप्रीत सिंह, राजवंत कौर, सुखविंदर सिंह लील, अवतार सिंह खालसा, कुलदीप सिंह, लखवीर सिंह, रोहित कंबोज, सुखचैन सिंह वालिया आदि भी मौजूद थे।