samacharsecretary.com

आयुक्त जनसंपर्क मनीष सिंह ने बताया: प्रभावी प्रचार के लिए रचनात्मक कंटेंट की भूमिका

प्रभावी प्रचार-प्रसार के लिए रचनात्मक कंटेंट क्रिएशन महत्वपूर्ण : आयुक्त जनसंपर्क मनीष सिंह लेखन कौशल में पारंगत अधिकारियों का होता है विशिष्ट स्थान : कुलगुरू तिवारी एमसीयू में जनसंपर्क अधिकारियों का दो दिवसीय प्रशिक्षण हुआ संपन्न भोपाल आयुक्त जनसम्पर्क मनीष सिंह ने कहा है कि जनसंपर्क विभाग में प्रभावी तौर से प्रचार-प्रसार के लिए रचनात्मक कंटेंट क्रिएशन महत्वपूर्ण होता है। समाचार को प्रभावी बनाने के लिये कंटेट की हर क्षेत्र में मांग है। समाचार, फीचर, आलेख या एडवर्टोरियल जैसे फार्मेट के लिए उपयुक्त कंटेट आवश्यक है। भाषा की विशिष्टता का ध्यान रखना भी आवश्यक है। प्रेस विज्ञप्तियों की भाषा की अपनी शैली होती है। अधिकारियों को भाषा पर भी विशेष कार्य करना चाहिए। आयुक्त सिंह शुक्रवार को एमसीयू में जनसंपर्क अधिकारियो का 2 दिवसीय प्रशिक्षण के समापन-सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जनसंपर्क के सभी जिला कार्यालयों में ई-ऑफिस सॉफ्टवेयर पर कार्य करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। इसके साथ ही वित्तीय प्रबंधन बेहतर ढंग से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं को किस तरह बेहतर ढंग से जनता तक पहुंचाया जा सकता है इस दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है। जनसंपर्क के क्षेत्र में लेखन कार्य बेहद महत्वपूर्ण इस अवसर पर सत्र में विश्वविद्यालय के कुलगुरू विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि जनसंपर्क के क्षेत्र में लेखन कार्य बेहद महत्वपूर्ण है। लेखन कौशल में पारंगत अधिकारियों का अपना विशिष्ट स्थान होता है। उन्होंने कहा कि जनसंपर्क अधिकारियों को लेखन में रूचि लेकर समाचारों को लिखना चाहिए। एक छोटे से विषय पर भी बेहतर ढंग से लिखे हुए समाचार को प्रकाशनों में अच्छा कवरेज मिलता है। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर जनसंपर्क अधिकारी किसी भी सकारात्मक आइडिया को लेकर सक्सेस स्टोरीज लिख सकते हैं। इस तरह की स्टोरीज को शेयर करने से उनके विभागों के बेहतर कार्यों को मीडिया में बेहतर स्थान मिलता है। पूर्व संचालक जनसम्पर्क लाजपत आहूजा ने जनसम्पर्क के अनुभवों को साझा करते हुए शासकीय विज्ञापनों की नीति के संबंध में चर्चा की। उन्होंने कुशल जनसम्पर्क के लिए विभिन्न विधाओं के उपयोग से परिचित कराया। जनसंपर्क विभाग की विविध शाखाओं में एमसीयू के विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप कार्यक्रम पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम में विभागीय बजट, भंडार नियमों की जानकारियों पर सत्र भी आयोजित हुए। इसके अलावा पत्रकारों के लिए संचालित विविध योजनाओं की जानकारी भी अधिकारियों को दी गई। अंतिम सत्र में जनसंपर्क विभाग के पोर्टल प्रबंधन पर प्रतिभागी अधिकारियों को जानकारी दी गई। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के जिला जनसंपर्क कार्यालयों से तथा निदेशालय से जनसंपर्क अधिकारी एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इस प्रशिक्षण का आयोजन जनसंपर्क विभाग एवं एमसीयू की प्रशिक्षण शाखा के तत्वावधान में हुआ। प्रशिक्षण का समन्वय डॉ. शलभ श्रीवास्तव ने किया। प्रशिक्षण के दोनों दिन संगठन प्रबंधन, डिजिटल नवाचार, ई-ऑफिस, ई-एचआरएमएस, एआई, कंटेंट मैंनेजमेंट, आरटीआई, प्रेस के नियम, जनसंपर्क की नीतियों और उनके क्रियान्वयन के व्यवहारिक पहलुओं सहित वित्तीय प्रबंधन आदि विषयों पर विविध सत्र आयोजित हुए। दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों को अन्य विशेषज्ञों के साथ विभागीय अपर संचालक जी.एस. वाधवा, संजय जैन, उप संचालक संतोष मिश्रा, सुनील वर्मा, सहायक संचालक राजेश पाण्डेय, सहायक जनसम्पर्क अधिकारी शिवम शुक्ल, प्रोजेक्ट मैनेजर वेबसाइट एमपीइन्फो डॉट ओआरजी अमकेश्वर मिश्रा ने भी महत्वपूर्ण जानकारियां दी। सत्र का संचालन जनसंपर्क विभाग के सहायक जनसम्पर्क अधिकारी अनिल वशिष्ठ ने किया। प्रशिक्षण का समन्वय एमसीयू के डॉ. शलभ श्रीवास्तव ने किया।  

68 प्रदेशीय कॉलेजों में एआई कोर्सेस की शुरुआत, आईआईटी दिल्ली के सहयोग से छात्रों को मिलेगा बड़ा फायदा

भोपाल   मध्यप्रदेश में कॉलेजों के स्टूडेंट के लिए बड़ी पहल की गई है। यहां परंपरागत विषयों से पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अंतर्गत प्रदेश के 68 महाविद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानि एआई एवं फिनटेक विथ एआई कोर्स प्रारंभ किए जा रहे हैं। ये ऑनलाइन सर्टिफिकेट होंगे जिससे स्टूडेंट आसानी से रोजगार से जुड़ सकेंगे। प्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र में 68 महाविद्यालयों में एआई आधारित पाठ्यक्रम संचालित किया जाएगा। इनमें प्रदेश के प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के साथ स्वायत्त महाविद्यालय भी शामिल हैं। एआई एवं फिनटेक विथ एआई कोर्स प्रदेश के इन कॉलेजों में आईआईटी दिल्ली के सहयोग से संचालित किए जाएंगे। प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में परंपरागत पाठ्यक्रमों की पढ़ाई तो चल ही रही है, इसके साथ ही यहां के विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए भी कई कवायदें की जा रही हैं। इसके लिए महाविद्यालयों में रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम प्रारंभ करने को लेकर महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा दिल्ली आईआईटी के सहयोग से यह काम किया जा रहा है। प्रदेश के 68 शासकीय महाविद्यालयों में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा एआई एवं फिनटेक विथ एआई के ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स प्रारंभ किए जा रहे हैं। इनमें 55 प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस तथा 13 स्वायत्त महाविद्यालय शामिल हैं। यह कोर्स आईआईटी दिल्ली के सहयोग से संचालित किया जाएगा। विद्यार्थियों को इसकी सुविधा नवीन शैक्षणिक सत्र 2026-27 से मिलना शुरू होगी। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा पाठ्यक्रम प्रारंभ करने को लेकर तैयारी पूर्ण कर ली गई है। बता दें कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार प्रदेश के कॉलेजों में रोजगारोन्मुखी शिक्षा की बात लगातार कहते रहे हैं। उनका मानना है कि यहां ऐसे कोर्सेस की पढ़ाई कराई जाए जिनकी उद्योगों को जरूरत है। इससे स्टूडेंट को आसानी से नौकरियां मिल सकेंगी। 2000 विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य उच्च शिक्षा विभाग द्वारा इस वर्ष 2000 विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एवं फिनटेक विथ आई के ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स के माध्यम से प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रथम चरण में यह लक्ष्य 1000 विद्यार्थियों का था, जिसे इस वर्ष बढ़ाकर दोगुना कर दिया गया है। नवीन शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थियों को मिलेगा पाठ्यक्रमों का लाभ अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन ने बताया कि महाविद्यालयों में परंपरागत विषयों से पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे वे आसानी से रोजगार से जुड़ सकेंगे। प्रदेश के 68 महाविद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं फिनटेक विथ एआई के ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स प्रारंभ किए जा रहे हैं। प्रथम चरण की सफलता को देखते हुए छात्र संख्या को दोगुना कर दिया गया है। प्रमुख बिंदु मध्यप्रदेश के 68 महाविद्यालयों में संचालित होगा एआई आधारित पाठ्यक्रम नवीन शैक्षणिक सत्र 2026-27 में होंगे प्रारंभ आईआईटी दिल्ली के सहयोग से संचालित होगा पाठ्यक्रम प्रदेश के 55 प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में प्रारंभ होगा कोर्स 13 स्वायत्त महाविद्यालयों में पाठ्यक्रम संचालित होगा

सरकार समाज के सभी वर्गों के कल्याण और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

भोपाल.  उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने “गांव चलो अभियान” के अंतर्गत जिले के विभिन्न ग्रामों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने ग्राम धुंधड़का, धमनार, गुलियाना, हतुनिया, जोगीखेड़ा, रातीखेड़ी, खजूरी फंटा, झिरकन, सिखेड़ी फंटा, बडवन फंटा, भाटरेवास, अफजलपुर, राणखेड़ा, बिलांत्री, चिरमोलिया, रठाना, लोध, सूरी, बोरखेड़ा एवं गारियाखेड़ा में पहुंचकर ग्रामीणों से संवाद किया। इस अवसर पर जिला योजना समिति सदस्य राजेश दीक्षित, जनपद पंचायत अध्यक्ष बसंत शर्मा सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने गांव, बस्ती एवं चौपाल पर पहुंचकर ग्रामीणों से भेंट की तथा केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंच रहा है और लगातार विकास कार्य किए जा रहे हैं। एक कार्य पूर्ण होने से पहले ही नए विकास कार्यों की सौगात क्षेत्र को मिल रही है। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि दूरदर्शी नीतियों के परिणामस्वरूप आज भारत विश्व पटल पर एक सशक्त राष्ट्र के रूप में स्थापित हुआ है। केंद्र सरकार की योजनाएं जैसे आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला गैस योजना, स्वच्छ भारत मिशन, हर घर जल योजना एवं किसान सम्मान निधि से गरीब, किसान, महिला एवं वंचित वर्ग के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि राज्य सरकार भी सभी वर्गों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लाड़ली बहना योजना, बेटियों के लिए लाड़ली लक्ष्मी योजना, किसानों की आय बढ़ाने हेतु कृषि योजनाएं तथा युवाओं के लिए कौशल विकास एवं स्वरोजगार योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं से समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना सरकार का लक्ष्य है। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना में गरीबों को पक्के मकान, प्रधानमंत्री सड़क योजना से गांव-गांव तक सड़कों का जाल, उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन तथा आयुष्मान योजना में गरीबों को 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा लाड़ली बहना योजना में महिलाओं को प्रतिमाह आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि सरकार द्वारा संचालित योजनाओं से गरीब, युवा, महिला एवं किसानों का समग्र विकास सुनिश्चित हो रहा है और प्रदेश निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।  

गुवाहाटी में राजस्थान का दमदार प्रदर्शन, वैभव-जुरेल की मदद से आरसीबी को दी शिकस्त

गुवाहाटी रियान पराग की कप्तानी वाली राजस्थान रॉयल्स टीम को आईपीएल 2026 में रोकना मुश्किल साबित हो रहा है. आईपीएल 2026 के 16वें मुकाबले में राजस्थान की टक्कर डिफेंडिंग चैंपियंस रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु से हुई, जिसमें पहले सीजन की विजेता टीम ने 6 विकेट से जीत दर्ज की. वैभव सूर्यवंशी और ध्रुव जुरेल ने तूफानी बैटिंग करते हुए एकतरफा अंदाज में यह मुकाबला राजस्थान की झोली में डाल दिया. गुवाहाटी के बरसापारा क्रिकेट स्टेडियम में पहले बल्लेबाजी करते हुए आरसीबी ने 8 विकेट खोकर 201 रन का अच्छा टोटल बोर्ड पर लगाया, लेकिन वैभव और जुरेल की आतिशी पारियों ने लक्ष्य को बौना बना दिया. राजस्थान ने दो ओवर रहते 4 विकेट खोकर 202 रन बनाए और सीजन की लगातार चौथी जीत हासिल कर ली. इस जीत से राजस्थान रॉयल्स के 8 अंक हो गए हैं. वहीं, आरसीबी की सीजन में पहली हार है. इससे पहले खेले दो मुकाबलों में आरसीबी ने जीत दर्ज की थी।  वैभव-जुरेल के तूफान में आरसीबी का काम-तमाम लक्ष्य का पीछा करने उतरी राजस्थान रॉयल्स की शुरुआत अच्छी नहीं रही. यशस्वी जायसवाल बल्ले से कुछ खास कमाल नहीं दिखा सके और 8 गेंदों में 13 रन बनाकर आउट हुए. हालांकि, इसके बाद 15 वर्षीय बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी और ध्रुव जुरेल ने मोर्चा संभाला. दोनों ने मिलकर दूसरे विकेट के लिए सिर्फ 37 गेंदों में 108 रनों की विस्फोटक साझेदारी की. वैभव ने सिर्फ 26 गेंदों का सामना करते हुए 78 रनों की धमाकेदार पारी खेली. अपनी इस पारी में उन्होंने 300 के स्ट्राइक रेट से खेलते हुए 8 चौके और 7 छक्के लगाए।  हालांकि, उनके आउट होने के बाद राजस्थान की पारी लड़खड़ाई जरूर, जब जल्दी-जल्दी दो-तीन विकेट गिरे, लेकिन जुरेल ने एक छोर संभालते हुए टीम की नैया पारी लगा दी. शिमरन हेटमायर फ्लॉप रहे और वह बिना खाता खोले पवेलियन लौटे. कप्तान रियान पराग भी सिर्फ 3 रन ही बना सके. जुरेल एक छोर पर खड़े रहे और उन्होंने 43 गेंदों में 81 रनों की नाबाद पारी खेली. अपनी इस पारी में जुरेल ने 8 चौके और 3 छक्के लगाए. वहीं, रवींद्र जडेजा ने भी बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए 24 रनों की नाबाद पारी खेली. जुरेल और जडेजा ने पांचवें विकेट के लिए 50 गेंदों में 68 रनों की अटूट साझेदारी निभाई. गेंदबाजी में जोश हेजलवुड और क्रुणाल पांड्या ने दो-दो विकेट निकाले।  आरसीबी को मिली पहली हार इससे पहले, आरसीबी ने 20 ओवर में 8 विकेट गंवाकर स्कोरबोर्ड पर 201 रन लगाए. टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और फिल साल्ट बिना खाता खोले पवेलियन लौटे. देवदत्त पडिक्कल भी 7 गेंदों में 14 रन बनाने के बाद जोफ्रा आर्चर का शिकार बने. विराट कोहली ने 16 गेंदों में 32 रनों का योगदान दिया. क्रुणाल पांड्या सिर्फ एक रन ही बना सके, तो जितेश शर्मा को 5 रनों के स्कोर पर बृजेश शर्मा ने चलता किया. टिम डेविड भी फ्लॉप रहे और वह 9 गेंदों में 13 रन ही बना पाए।  कप्तान रजत पाटीदार ने एक छोर संभाले रखा और 40 गेंदों में 63 रनों की दमदार पारी खेली. रोमारियो शेफर्ड ने 11 गेंदों में 22 रन बनाए. वहीं, अंत के ओवरों में वेंकटेश अय्यर ने 15 गेंदों में नाबाद 29 रन बनाए, जबकि भुवनेश्वर कुमार 9 रन बनाकर नाबाद रहे. गेंदबाजी में राजस्थान की ओर से जोफ्रा आर्चर, रवि बिश्नोई और बृजेश शर्मा ने दो-दो विकेट चटकाए. संदीप शर्मा और जडेजा ने एक-एक विकेट निकाला. यह राजस्थान रॉयल्स की इस सीजन में लगातार चौथी जीत है, जबकि आईपीएल 2026 में आरसीबी को पहली हार का मुंह देखना पड़ा है। 

स्वच्छता के सारथियों के स्वास्थ्य और सम्मान को समर्पित स्वच्छता स्वाभिमान कार्यशाला

भोपाल.  मध्यप्रदेश के नगरीय क्षेत्रों को स्वच्छ और सुंदर बनाने में 'स्वच्छता के प्रहरियों' के स्वास्थ्य संरक्षण एवं कार्य स्थल पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा प्रदेश के समस्त नगरीय निकायों के सफाई मित्रों के लिए “स्वच्छता स्वाभिमान कार्यशाला” का आयोजन किया गया। वर्चुअली आयोजित कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सफाई मित्रों को उनके दायित्व निर्वहन के दौरान स्वास्थ्य के प्रति सजग करना और सुरक्षा मानकों के पालन हेतु प्रशिक्षित करना रहा। स्वास्थ्य ही वास्तविक पूँजी कार्यशाला के मुख्य वक्ता गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल के प्रख्यात विशेषज्ञ डॉ. प्रो. एस.के. पटने (एमडी पीएसएम)उपस्थित रहे। उन्होंने “कार्य के दौरान सावधानियां एवं व्यक्तिगत स्वास्थ्य” विषय पर अपना सारगर्भित और व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया। डॉ. पटने ने रेखांकित किया कि सफाई मित्र हमारी शहरी व्यवस्था की रीढ़ हैं और उनका सुरक्षित रहना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रमुख बिंदु सुरक्षा उपकरणों का अनिवार्य उपयोग: कार्य के दौरान दस्ताने, मास्क और गमबूट (PPE) जैसे उपकरणों को केवल औपचारिकता न मानकर जीवन रक्षक कवच के रूप में अपनाने की सलाह दी गई। संक्रमण से बचाव के लिये कचरा संग्रहण और निस्तारण के दौरान संक्रमण के संभावित खतरों और उनसे बचाव के वैज्ञानिक तरीकों पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों द्वारा सफाई मित्रों को समय-समय पर अपनी स्वास्थ्य जांच कराने हेतु प्रेरित किया गया। संवाद से समाधान की ओर कार्यशाला की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसका संवादात्मक स्वरूप रहा। प्रदेश के विभिन्न निकायों से जुड़े सफाई मित्रों ने अपनी कार्यशैली और स्वास्थ्य संबंधी शंकाओं को डॉ. पटने के समक्ष रखा। डॉ . पटने ने अत्यंत सहजता से उनकी समस्याओं का समाधान किया और उन्हें कार्य के पश्चात व्यक्तिगत स्वच्छता के नियमों से अवगत कराया गया। विभाग की प्रतिबद्धता और भविष्य का लक्ष्य विभागीय अधिकारियों ने इस अवसर पर कहा कि “स्वच्छ भारत मिशन (शहरी)” की सफलता केवल साफ गलियों से नहीं, बल्कि उन गलियों को साफ करने वाले हाथों की मजबूती और सुरक्षा से भी मापी जाती है। यह कार्यशाला सफाई मित्रों के जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार लाने और उन्हें एक भयमुक्त एवं स्वस्थ्य कार्य वातावरण उपलब्ध कराने की हमारी निरंतर प्रतिबद्धता का प्रमाण है। कार्यक्रम के समापन पर समस्त प्रतिभागियों से आह्वान किया गया कि वे कार्यशाला में अर्जित ज्ञान को अपने दैनिक जीवन और कार्य प्रणाली का अभिन्न अंग बनाएं, जिससे स्वस्थ सफाई मित्र—स्वच्छ प्रदेश का संकल्प सिद्ध हो सके।  

नया रेलवे ट्रैक 100 किमी की दूरी घटाएगा, भोपाल के करीब पहुंचेगा यह महानगर

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल और राजस्थान के कोचिंग महानगर कोटा के बीच की दूरी जल्द ही सिमट जाएगी। भोपाल रामगंज मंडी रेलवे ट्रैक के चालू होने से यह सुविधा मिलेगी। नए ट्रैक से भोपाल एवं कोटा के बीच लगभग 100 किमी की दूरी कम हो जाएगी। नई रेलवे लाइन जल्द ही बनकर तैयार हो जाएगी। पिछले 3 साल से चल रहा यह प्रोजेक्ट दिसंबर 2026 के अंत तक पूरा करने की तैयारी है। भोपाल रामगंज मंडी नई रेल लाइन परियोजना के लिए हाल ही में कोटा मंडल के अंतर्गत खिलचीपुर राजगढ़ सिटी स्टेशन के बीच 17.8 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक पर रेलवे सुरक्षा कमिश्नर ने सुरक्षा का जायजा लिया। इस क्षेत्र में यात्री ट्रेन को 130 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ाकर स्पीड ट्रायल लिया गया। ये स्टेशन आएंगे रेल नेटवर्क में मध्यप्रदेश के राजगढ़ और सीहोर जिले के कई स्टेशन इस परियोजना के तहत पहली बार रेल नक्शे पर आएंगे। इनमें पिपलहेड़ा, सोनकच्छ, नरङ्क्षसहगढ़, जमुनियागंज, कुरावर, श्यामपुर, दुराहा, झारखेड़ा, मुगलियाहाट शामिल हैं। इन क्षेत्रों के लोग अब तक सड़क मार्ग पर निर्भर थे, लेकिन रेल सेवा शुरू होने के बाद भोपाल और राजस्थान के शहरों तक पहुंच आसान हो जाएगी। दूरी 100 किमी घटेगी, समय में 2-3 घंटे की बचत नई रेल लाइन शुरू होने के बाद मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल और राजस्थान के महानगर कोटा के बीच करीब 100 किलोमीटर दूरी कम होगी और यात्रियों का 2 से 3 घंटे समय बचेगा। राजगढ़ और सीहोर के कई इलाके पहाड़ी और ग्रामीण हैं, जहां रेल सुविधा नहीं थी। नई लाइन इन क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ेगी, जिससे रोजगार, व्यापार और शिक्षा के नए अवसर खुलेंगे। 276 किमी का लंबा ट्रेक: करीब 276 किमी लंबी रेल परियोजना में अब तक 187 किमी का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसमें शेष 89 किलोमीटर का कार्य मार्च 2026 तक वित्तीय वर्ष 2026-27 से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया कि भोपाल रामगंजमंडी प्रोजेक्ट का काम तेजी से खत्म किया जा रहा है। इसके शुरू होते ही कई नए स्टेशन बनेंगे। कोटा से भोपाल की दूरी कम हो जाएगी। ट्रेनें निरस्त होने से बढ़ी समस्या, पहले था कन्फर्म, अब हर ट्रेन में वेटिंग इधर गर्मी के मौसम और छुट्टियों के सीजन में लंबी दूरी की ट्रेनें निरस्त होने से लोगों के सामने संकट खड़ा हो गया है। कंफर्म टिकट निरस्त करवाने के बाद अब जब दोबारा अन्य तारीख पर टिकट लेने का प्रयास कर रहे हैं तो लंबी वेटिंग मिल रही है। कई तारीख पर रिग्रेट की स्थिति बन रही है। रेलवे मेंटेनेंस के चलते पंजाब, छत्तीसगढ़, ओडिशा रूट पर भोपाल से गुजरने वाली आधा दर्जन गाडिय़ों को निरस्त किया गया है एवं अलग-अलग तारीख पर रीशेड्यूल कर दिया गया है। रेलवे ने दावा किया, सभी प्रभावित यात्रियों को रिफंड कर दिया जाएगा। भोपाल रेल मंडल पर इस प्रकार अनावश्यक कैंसिलेशन के चलते लगभग 50 लाख का आर्थिक बोझ भी रिफंड के रूप में आ गया है। ये ट्रेनें निरस्त: कोरबा-अमृतसर एक्सप्रेस- 25 अप्रैल अमृतसर- बिलासपुर एक्सप्रेस 27 अप्रैल तक रद्द। 12410- 8, 9, 11, 13, 14, 15, 16, 18, 20, 21, 22 अप्रैल। 12409- 8, 9, 10, 11, 13, 15, 16, 17, 18, 20, 22, 23, 24 अप्रैल। 12807- 8, 9, 11, 12, 14, 15, 16, 18, 19, 21, 22, 23 अप्रैल 12808 – 9, 10, 11, 13, 14, 16, 17, 18, 20, 21, 23, 24, 25 अप्रैल तक रद्द।

प्रदेश में 6500 से अधिक बैंक शिकायतें, उपभोक्ताओं का सबसे ज्यादा गुस्सा इस बैंक पर

भोपाल  मध्यप्रदेश में बैंकिंग व्यवस्था और उपभोक्ताओं के बीच तालमेल बिगड़ता नजर आ रहा है। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की ताजा रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि 10 मार्च 2026 तक सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर बैंकों के खिलाफ कुल 6544 शिकायतें लंबित हैं। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) से लोग सबसे ज्यादा खफा हैं जोकि शिकायतों के मामले में पहले स्थान पर है। चिंताजनक बात यह है कि आम जनता की शिकायतों को निपटाने में प्रदेश की राजधानी भोपाल ही सबसे फिसड्डी साबित हो रही है। यह आंकड़े बैंकिंग सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। जब डिजिटल इंडिया के दौर में बैंकिंग सेवाओं के सरल होने का दावा किया जा रहा है, तब हजारों लोगों का अपनी छोटी- छोटी समस्याओं के लिए मुख्यमंत्री की चौखट तक पहुंचना प्रशासन के लिए आत्ममंथन का विषय है। भोपाल के लोग सबसे ज्यादा परेशान, रीवा और ग्वालियर भी पीछे नहीं जिलों की बात करें तो भोपाल 434 लंबित शिकायतों के साथ सूची में टॉप पर है। इसके बाद रीवा (287), ग्वालियर (279) और इंदौर (241) का नंबर आता है। छोटे जिलों में अलीराजपुर सबसे बेहतर स्थिति में है, जहां मात्र 10 शिकायतें लंबित हैं। आम आदमी की सबसे बड़ी मुसीबत- खाता संचालन और सरकारी योजनाएं रिपोर्ट के मुताबिक, जनता सबसे ज्यादा परेशान अपने बैंक खाते के संचालन को लेकर है। कुल 6544 शिकायतों में से लगभग 49 फीसदी मामले (3191) केवल खाता खोलने, बंद करने या खातों को बिना सूचना होल्ड करने से संबंधित हैं। इसके साथ ही एटीएम कार्ड जारी करने, एटीएम कार्ड से राशि कटने (230 शिकायतें), आधार कार्ड लिंक/खाते में केवायसी/इ-केवायसी (337 शिकायतें), पासबुक जारी करना/पासबुक ​प्रिंटिंग एवं चेक बुक से संबंधित (113 शिकायतें), शासकीय ऋण एवं अनुदान/ब्याज अनुदान से संबंधित (1454 शिकायतें) शामिल हैं। लोकपाल में कर सकते शिकायत… आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार, बैंकों को ग्राहक शिकायतों का निपटारा एक निश्चित समय सीमा में करना अनिवार्य है। लेकिन सीएम हेल्पलाइन का यह डेटा बताता है कि धरातल पर बैंक अधिकारियों और जनता के बीच क्युनिकेशन गैप गहराता जा रहा है। यदि आपका बैंक आपकी सुनवाई नहीं कर रहा है, तो आप सीएम हेल्पलाइन (181) के अलावा आरबीआई के लोकपाल से भी संपर्क कर सकते हैं। बैंकों में स्टाफ की कमी भी बड़ा कारण सेवानिवृत्त एसबीआइ अधिकारी हेमंत गोस्वामी बताते हैं कि काम के बोझ के कारण कई बार सेवाओं में कमी आती है। इसका एक बड़ा कारण बैंकों में स्टाफ की कमी का होना भी है। फिर भी समय-समय पर बैंककर्मी ग्राहकों का समस्या का समाधान करते रहते हैं। ग्राहकों की अपेक्षाएं और त्वरित सेवा की आशा अधिक रहती है। एमपी में बैंकिंग सेक्टर में अधिक कार्य क्षेत्र स्टेट बैंककर्मियों पर होने के कारण उनकी शिकायतेें भी अधिक हैं। किस बैंक से जनता को कितनी शिकायत? सरकारी बैंकों में शिकायतों का ग्राफ काफी ऊंचा है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) 1418 शिकायतों के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (817) और बैंक ऑफ इंडिया (746) का नंबर आता है। निजी क्षेत्र में एचडीएफसी बैंक (346) के खिलाफ सबसे अधिक मामले दर्ज हैं। अधिकारियों के स्तर पर अटकी फाइलें शिकायतों के निराकरण की सुस्ती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अधिकांश शिकायतें एल1 (रीजनल मैनेजर) और एल3 (अग्रणी जिला प्रबंधक) के स्तर पर अटकी हुई हैं। ■ एल1 स्तर पर : 2,941 मामले ■ एल2 स्तर पर : 2,446 मामले कुल लंबित शिकायतें : 6544 सबसे ज्यादा शिकायतों वाला शहर : भोपाल (434 मामले) सबसे बड़ी समस्या : बैंक खाता खोलने, बंद करने या होल्ड होने से जुड़ी (3191 मामले)

प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में पेट्रोलियम पदार्थ उपलब्ध : मंत्री राजपूत

भोपाल. खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्त संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया कि प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में पेट्रोलियम पदार्थ उपलब्ध है। प्रदेश में आवश्यक वस्तु अधिनियम के अन्तर्गत एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिये निरंतर कार्यवाही की जा रही है, अभी तक 2864 स्थानों पर जांच की गई, 4283 एलपीजी सिलेण्डर जब्त किये गए तथा 11 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज कराई गई। प्रदेश के 736 रिटेल आउटलेट (पेट्रोल पंप) की जांच कराई गई है। इसमें 1 प्रकरण में एफ.आई.आर. दर्ज कराई गई है। प्रदेश के समस्त जिला आपूर्ति नियंत्रक/अधिकारी एवं ऑयल कंपनी के अधिकारियों को सतत रूप से पेट्रोल पंपों की जांच करने के निर्देश दिये गये हैं। भारत में कच्चे तेल (Crude Oil) का पर्याप्त भण्डार है देश एवं प्रदेश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं जिससे पेट्रोलियम पदार्थों की निरंतर सप्लाई हो सके एवं सप्लाई में कोई रुकावट न आए। मध्यप्रदेश और पूरे देश में एलपीजी (LPG) पेट्रोल] डीजल] पीएनजी एवं सीएनजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। रसोई गैस की स्थिति रसोई गैस के संबंध में प्रदेश के बॉटलिंग प्लांटों में घरेलू एवं कॉमर्शियल एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखा गया है। घरेलू गैस उपभोक्ताओं द्वारा की गई बुकिंग के विरूद्ध एलपीजी सिलेण्डर का प्रदाय निरंतर रूप से किया जा रहा है। साथ ही कॉमर्शियल उपभोक्ताओं को शासन द्वारा तय किये गये प्राथमिकता क्रम अनुसार आवंटन प्रतिशत के आधार पर कमर्शियल गैस सिलेण्डरों की सप्लाई सतत रूप से की जा रही है। घरेलू एवं कॉमर्शियल की सप्लाई में किसी प्रकार का अवरोध नहीं है। घरेलू एवं कॉमर्शियल सिलेण्डर की सप्लाई एवं वितरण सामान्य है। खाद्य मंत्री राजपूत ने भारत सरकार द्वारा निर्धारित 70% सीमा के अधीन संस्थाओं एवं प्रतिष्ठानों को तय किये गये प्राथमिकता क्रम अनुसार सप्लाई निरंतर जारी रखने के निर्देश दिये हैं। यह भी ध्यान रखा जाये कि सड़क पर कारोबार कर रहे छोटे व्यवसायी (स्ट्रीट वेण्डर) को भी उक्त अनुसार कमर्शियल सिलेण्डर प्रदाय किये जायें। ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी प्लांट अतिरिक्त समय (Extended Hours) तक काम कर रहे हैं। प्रदेश के जिलों में स्थित बॉटलिंग प्लांट तथा वितरकों के पास उपलब्धता एवं प्रदाय की सतत रूप से समीक्षा की जा रही है। साथ ही माईग्रेन्ट लेबर, छात्रों आदि के लिए खाना पकाने के लिये 05kg के सिलेण्डर ऑयल कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आम जनता से अपील की गई है कि वह वैकल्पिक साधनों, जैसे इंडक्शन,सोलर कुकर, बायो गैस, गोबर धन तथा स्वसहायता समूहों द्वारा उत्पादित गो-काष्ठ का उपयोग करें। पीएनजी गैस सीजीडी संस्थाओं तथा ऑयल कंपनियों के अधिकारियों के साथ प्रतिदिन समीक्षा बैठक आयोजित की जा रही है। अपर मुख्य सचिव श्रीमती रश्मि अरूण शमी द्वारा विशेष अभियान चलाकर जिन घरों में पाईपलाईन की अधोसंरचना उपलब्ध है, एवं सप्लाई प्राप्त नहीं कर रहे है, ऐसे 1.5 लाख घरों को आगामी 03 माह में पीएनजी से कनेक्ट करने के लिये निर्देशित किया गया। इस हेतु सभी सीजीडी संस्थाएं शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में कैम्प लगायें, जिसमें जिला प्रशासन, खाद्य विभाग नगर निगम/नगर पालिका के अधिकारी, ऑयल कंपनी और सीजीडी संस्थाओं के जिला अधिकारी उपस्थित रहें। ऐसे सभी घरों एवं व्यवसाईयों की सूची सीजीडी संस्था को उपलब्ध कराई जाये। अपर मुख्य सचिव द्वारा निर्देशित किया गया कि जिन स्थानों पर पूर्व से पीएनजी की पाइप लाईन है, सर्वप्रथम उन्हें प्राथमिकता से कनेक्शन दिए जाएं। साथ ही नई पाइन लाईन डालकर कनेक्शन का कार्य भी साथ-साथ किया जाए। सीजीडी संस्थाओं द्वारा अवगत कराया गया कि उन्होंने जिला कलेक्टर्स के माध्यम से आवश्यक मैन पॉवर प्राप्त करने की कार्यवाही कर ली है तथा आगामी माहों में लक्ष्य के अनुसार नये पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध करा दिए जाएंगे। भारत सरकार के निर्देशनुसार जिन स्थानों से पीएनजी की पाइन लाईन गई है, उसके आस पास के घरेलू एवं कमर्शियल उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन प्राप्त कर लें क्योंकि पीएनजी कनेक्शन प्राप्त न करने की स्थिति में आगामी 03 माह में एलपीजी की सप्लाई बंद की जा सकती है। समस्त सीजीडी संस्थाओं द्वारा प्रतिदिन किये जा रहे आवेदन एवं उसके विरूद्ध दिये जा रहे पीएनजी कनेक्शन की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है। राज्य शासन द्वारा पीएनजी कनेक्शन प्रदाय करने के लिए सीजीडी संस्थाओं को उनके आवेदन किये जाने के 24 घंटे के अंदर पाइपलाइन बिछाने की ROU स्वीकृतियां जारी की जा रही हैं। अभी तक प्राप्त सभी स्वीकृतियां जारी की जा चुकी है तथा कोई भी आवेदन शेष नहीं है। गृह विभाग के अधीन आने वाले संस्थाओं/सुधार ग़ृ़हों के साथ-साथ पुलिस, सीएपीएफ, डिफेंस इस्टेब्लिशमेंट, ऑफिसर्स कॉलोनी, सामान्य प्रशासन पूल के घरों, पुलिस मुख्यालय, पुलिस कॉलोनी, आदि में जहां से आस-पास पाईपलाईन बिछी हुई है, उनको प्राथमिकता के आधार पर पीएनजी कनेक्शन प्रदाय करने के निर्देश दिये गये हैं। प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में जहां आस-पास पाईपलाईन गई है, उन क्षेत्रों की औद्योगिक इकाईयों की पहचान की जाकर पीएनजी पर शिफ्ट करने के निर्देश सीजीडी संस्थाओं को दिये गये। कालाबाजारी के विरूद्ध कार्यवाही सीजीडी संस्थाओं को घरेलू एवं व्यावसायिक पीएनजी के आवेदनकर्ताओं को पीएनजी कनेक्शन प्राप्त करने के लिये सीजीडी संस्थाओं के कन्ट्रोल रूम नं. निम्नानुसार प्रदाय किये गये है – अवंतिका गैस लिमिटेड – इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर (9424098887) गैल गैस लिमिटेड – देवास, रायसेन, शाजापुर, सीहोर (7880001788) नवेरिया गैस लिमिटेड – धार (07292-223311) थिंक गैस – भोपाल, राजगढ़, शिवपुरी (1800-5727-107) IOCL – गुना (9425991090), मउगंज, रीवा(9424836488), अशोकनगर(9425119522), मुरैना(7223982333) BPCL – महैर, सतना, शहडोल(9424738607), सीधी, सिंगरौली(9424341954) गुजरात गैस लि. – रतलाम (7412230292) प्रदेश के उक्त शहरों में जिन स्थानों से पाईपलाईन गई है, उस पाईपलाईन के आस-पास के घरेलू एवं व्यावसायिक उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते है। प्रदेश के अन्य जिलों में पाईपलाईन का विस्तार होने के उपरांत पीएनजी कनेक्शन प्रदाय किये जा सकेंगे।  

चित्रकूट में 500 साल से पुरानी पांडुलिपियों का हुआ खुलासा, उर्दू में है ‘कालिया मर्दन’ का अनोखा विवरण

चित्रकूट  मध्य प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण नगरी चित्रकूट में किए गए सर्वेक्षण के दौरान 500 से अधिक प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान की गई है। इन पांडुलिपियों का अध्ययन वर्तमान में तुलसी शोध संस्थान में किया जा रहा है। यह खोज भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक इतिहास के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।  देवनागरी, संस्कृत और उर्दू में मिली पांडुलिपियां इस सर्वेक्षण में मिली पांडुलिपियों की खास बात यह है कि ये विभिन्न भाषाओं और लिपियों में लिखी गई हैं। अधिकांश पांडुलिपियां देवनागरी और संस्कृत में हैं, जबकि कुछ दुर्लभ पांडुलिपियां उर्दू भाषा में भी प्राप्त हुई हैं यह विविधता भारतीय समाज में भाषाई और सांस्कृतिक समन्वय की गहरी परंपरा को दर्शाती है। उर्दू पांडुलिपि में श्रीकृष्ण के कालिया मर्दन का वर्णन इन पांडुलिपियों में एक अत्यंत रोचक तथ्य सामने आया है। उर्दू लिपि में लिखी एक पांडुलिपि में श्रीकृष्ण द्वारा कालिया नाग के दमन, जिसे 'कालिया मर्दन' कहा जाता है, का चित्रण किया गया है। आमतौर पर यह प्रसंग संस्कृत, ब्रजभाषा या अवधी साहित्य में मिलता है, लेकिन उर्दू में इसका वर्णन भारतीय सांस्कृतिक समावेश का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है। तुलसीदास जी और भगवान गणेश का भी उल्लेख उर्दू पांडुलिपि में गोस्वामी तुलसीदास का चित्र और उल्लेख भी दर्ज है।  साथ ही भगवान गणेश का भी चित्रण इसमें देखने को मिला है। यह पांडुलिपि धार्मिक ग्रंथ “पोथी सतनाम” का हिस्सा बताई जा रही है। इसे ऐतिहासिक रूप से मुंशी नवल किशोर प्रेस द्वारा प्रकाशित किया गया था। इसमें मंगलाचरण, दोहा और चौपाई जैसे पारंपरिक काव्य रूप भी सम्मिलित हैं।  रामायण और महाभारत कालीन परंपराओं से जुड़ी सामग्री चित्रकूट में हुई खोज में तुलसी शोध संस्थान के प्रबंधक ओम प्रकाश पटेल ने बताया कि चित्रकूट क्षेत्र में रामचरितमानस की हस्तलिखित पांडुलिपियों के अंश भी सुरक्षित मिले हैं और इसके साथ ही रामायण और महाभारत कालीन परंपराओं से संबंधित देवनागरी लिपि में लिखी गई पांडुलिपियां भी आज तक संरक्षित हैं। हालांकि, इनमें से कई पांडुलिपियां आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हैं और उनका वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण व अध्ययन किया जा रहा है। 350 पांडुलिपियां संस्थान में जमा, विशेषज्ञ कर रहे अध्ययन मध्यप्रदेश संस्कृत विभाग द्वारा लगभग 350 पांडुलिपियां चित्रकूट स्थित तुलसी शोध संस्थान में जमा कराई गई हैं। यहां विशेषज्ञ इनकी भाषा, लिपि, विषयवस्तु और ऐतिहासिक महत्व को समझने में जुटे हैं। इन पांडुलिपियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, धर्म और साहित्य के कई अनछुए पहलुओं के सामने आने की संभावना जताई जा रही है।   ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत चल रहा राष्ट्रीय अभियान केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के अंतर्गत देशभर में प्राचीन पांडुलिपियों की खोज, पहचान और दस्तावेजीकरण का अभियान 16 मार्च से प्रारंभ किया गया है। यह अभियान तीन माह तक चलेगा। अभियान से जुड़े शोधकर्ताओं ने बताया कि इसका उद्देश्य भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा को पुनः प्रकाश में लाना और उसे आम जनमानस तक पहुंचाना है। इन तीन चरणों में होगा संरक्षण और डिजिटलीकरण का कार्य सरकार द्वारा इस मिशन को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में पांडुलिपियों की खोज, पहचान व दस्तावेजीकरण का कार्य होगा। दूसरे चरण में एकत्रित पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जाएगा। वहीं, तीसरे चरण में विशेषज्ञों द्वारा अध्ययन, संरक्षण और अर्थ स्पष्ट करने कार्य पूर्ण होगा। तीन माह बाद इन पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।   आम नागरिक भी कर सकते हैं योगदान संस्कृति मंत्रालय द्वारा ‘ज्ञान भारतम’ एप भी लॉन्च किया गया है, जिसके माध्यम से आम लोग भी इस अभियान में भाग ले सकते हैं। जिनके पास प्राचीन पांडुलिपियां हैं, वे एप पर लॉगिन कर उनकी फोटो, भाषा और स्थान की जानकारी अपलोड कर सकते हैं। भारतीय सांस्कृतिक समन्वय का जीवंत उदाहरण उर्दू भाषा में श्रीकृष्ण के कालिया मर्दन, तुलसीदास जी और भगवान गणेश का उल्लेख इस बात का प्रमाण है कि भारत की सांस्कृतिक विरासत केवल एक भाषा या परंपरा तक सीमित नहीं है। यह विविधता और एकता का अद्भुत संगम है, जो देश की साझा विरासत को दर्शाता है। डिजिटल रूप में भी कर सकते है इस्तेमाल भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय दिल्ली में पदस्थ चंद्रमौली त्रिपाठी ने जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने पहले चरण में ज्ञान भारतम एप को आम जनमानस के लिए खोल दिया है जिनके पास भी ऐसी पांडुलिपियां हैं, वह एप में लाागिन कर लोकेशन बताते हुए उसकी भाषा बताकर फोटो अपलोड कर सकता है और आसानी से इस एप के जरिए ज्ञान को सहेजने का काम कर सकते है और इससे लोगों को एक नया तरीका भी उपलब्ध हो गया है का  

7th Pay Commission: DA का इंतजार क्यों बढ़ा, अप्रैल के 10 दिन भी हो गए, किस वजह से फंसा मामला?

नई दिल्ली अप्रैल 2026 आधा बीतने को है लेकिन अभी तक केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए डीए बढ़ोतरी का ऐलान नहीं हुआ है. आमतौर पर हर साल मार्च के अंत या अप्रैल की शुरुआत में यह फैसला सामने आ जाता है, लेकिन इस बार देरी ने कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ा दी है. खासकर इसलिए क्योंकि 31 दिसंबर 2025 के बाद 7वां वेतन आयोग खत्म हो चुका है और 8वां वेतन आयोग अभी लागू नहीं हुआ है।  पिछले वर्षों के ट्रेंड को देखें तो 2025 में डीए बढ़ोतरी का ऐलान 28 मार्च को हुआ था और आदेश 2 अप्रैल को जारी हुआ था. वहीं 2024 में भी 3 अप्रैल तक आदेश जारी हो गया था. यहां तक कि कोविड के समय 2020 में भी अप्रैल में औपचारिक आदेश जारी किया गया था. ऐसे में 2026 में यह देरी असामान्य मानी जा रही है।  क्या इस बार डीए बढ़ोतरी नहीं होगी विशेषज्ञों का कहना है कि डीए बढ़ोतरी रुकने की संभावना बेहद कम है. डीए का निर्धारण महंगाई के आंकड़ों के आधार पर होता है और यह प्रक्रिया 7वें वेतन आयोग की अवधि खत्म होने के बाद भी जारी रहती है. यानी कर्मचारियों को उनका हक मिलना तय माना जा रहा है।  कितनी बढ़ सकती है डीए एआईसीपीआई इंडेक्स के आंकड़ों के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार करीब 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है. इससे डीए 58 प्रतिशत से बढ़कर करीब 60 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. हालांकि अंतिम फैसला सरकार की मंजूरी के बाद ही सामने आएगा।  देरी की वजह क्या है एक्सपर्ट्स के मुताबिक, देरी की सबसे बड़ी वजह प्रशासनिक प्रक्रिया हो सकती है. फाइल अप्रूवल, आंतरिक मंजूरी और फैसलों की टाइमिंग इस बार थोड़ा आगे खिसक गई है. बैंक बाजार के सीईओ अधिल शेट्टी का कहना है कि यह देरी इंटरनल प्रोसेस के कारण हो सकती है. वहीं, आईएसएफ की सुचिता दत्ता का कहना है कि संभवत: सरकार डीए बढ़ाने से पहले मंहगाई के आंकड़ों की बारीकी से समीक्षा कर रही है. कर्मा मैनेजमेंट के प्रतीक वैद्या का कहना है कि इस देरी की तुलना कोविड-19 के समय से करना ठीक नहीं है।  8वें वेतन आयोग से जुड़ी टाइमिंग सरकार फिलहाल अगले वेतन आयोग की दिशा में काम कर रही है. माना जा रहा है कि डीए बढ़ोतरी के ऐलान को इस बड़े बदलाव के साथ जोड़कर देखा जा रहा है, ताकि एक साथ व्यापक नीति का संकेत दिया जा सके।  सरकार का फिस्कल बैलेंस भी अहम महंगाई, सरकारी खर्च और बजट संतुलन को ध्यान में रखते हुए भी सरकार फैसला ले रही है. डीए बढ़ोतरी का सीधा असर लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स पर पड़ता है, इसलिए इसे सोच-समझकर तय किया जाता है।  कब तक आ सकता है ऐलान रिपोर्ट्स के मुताबिक अप्रैल के दूसरे हफ्ते से लेकर मिड अप्रैल के बीच कभी भी डीए बढ़ोतरी का ऐलान हो सकता है. यानी कर्मचारियों को ज्यादा लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।  देरी से होगा क्या नुकसान सबसे अहम बात यह है कि देरी से कर्मचारियों को कोई नुकसान नहीं होगा. डीए 1 जनवरी 2026 से लागू माना जाएगा और बीच के समय का पैसा एरियर के रूप में दिया जाएगा. यानी घोषणा चाहे देर से हो, लेकिन फायदा पूरा मिलेगा।