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10वीं 12वीं का रिजल्ट घोषित बच्चों ने मारी बाजी

बड़वानी. आज घोषित माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक परीक्षा परिणाम में शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक 1, बड़वानी ने एक बार फिर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अपनी परंपरा को कायम रखा है। सत्र 2025-26 में कक्षा 10वीं का परीक्षा परिणाम 100% रहा। कुल 190 छात्र-छात्राओं में से 189 छात्र-छात्राएं प्रथम श्रेणी में तथा 1 छात्र द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण हुआ। इसी प्रकार कक्षा 12वीं का परीक्षा परिणाम 93% रहा। कक्षा 12वीं में 189 छात्र-छात्राएं प्रथम श्रेणी में तथा 4 छात्र-छात्राएं द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण हुए। इस वर्ष 115 छात्र-छात्राओं ने 75% से अधिक अंक प्राप्त किए, जिससे वे शासन की लैपटॉप योजना का लाभ प्राप्त करने हेतु पात्र बने हैं। संस्था के विज्ञान संकाय के छात्र आर्यन मनोहर कानासे ने शासकीय विद्यालयों में जिले में प्रथम स्थान प्राप्त करते हुए 92.2 प्रतिशत अंक अर्जित किए, जो विद्यालय के लिए गौरव का विषय है। संस्था के प्राचार्य अनिल मिश्रा ने सभी सफल छात्र-छात्राओं, उनके अभिभावकों एवं शिक्षकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह सफलता विद्यार्थियों की लगन, अनुशासन एवं शिक्षकों के समर्पित मार्गदर्शन का परिणाम है। विद्यालय परिवार ने इस उत्कृष्ट उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार श्रेष्ठ परिणाम देने का संकल्प लिया है।

सियासी बयानबाजी तेज: अनिल विज ने राहुल गांधी पर किया तीखा पलटवार

अंबाला. हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने राहुल गांधी पर जुबानी हमला करते हुए कहा कि राहुल गांधी कई चुनाव हार चुके हैं। अगर राहुल गांधी बब्बर शेर होते तो ढेर न होते। इस दौरान नगर निगम चुनावों को लेकर कहा कि विपक्षी पार्टियां केवल चुनावों के समय ही सक्रिय होती हैं, जबकि बीजेपी कार्यकर्ता 365 दिन जनता के बीच रहता है। वही परिसीमन के मुद्दे को लेकर भी उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी है। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा है कि उन्हें प्रधानमंत्री मोदी से डर नहीं लगता, बल्कि मोदी जी को कांग्रेस से डर लगता है क्योंकि बब्बर शेर उन्हें पकड़ लेगा और कार्रवाई होगी, जिस पर तंज कसते हुए कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने कहा कि यही कारण है कि राहुल गांधी जी हर प्रदेश में ढेर हो रहे हैं, राहुल गांधी कई चुनाव हार चुके हैं। विज बोले कि अगर राहुल गांधी बब्बर शेर होते तो ढेर न होते। नगर निगम चुनावों की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए अनिल विज ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा चुनाव के लिए तैयार रहती है। विज ने तंज कसते हुए कहा कि विपक्षी पार्टियां केवल चुनावों के समय ही सक्रिय होती हैं, जबकि बीजेपी का कार्यकर्ता 365 दिन जनता के बीच रहता है। अनिल विज ने दावा किया कि जिस तरह प्रदेश की जनता ने विधानसभा और पिछले स्थानीय निकाय चुनावों में पीएम मोदी की नीतियों और राज्य सरकार के विकास कार्यों पर मुहर लगाई थी, उसी तरह आगामी नगर निगम चुनावों में भी कमल खिलेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंबाला समेत प्रदेश के सभी नगर निगमों में विकास कार्यों की गति को और तेज किया जाएगा और जनता विपक्ष के झूठे वादों में आने वाली नहीं है। हरियाणा के कैबिनेट मंत्री विज ने परिसीमन के मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया बताया है। उन्होंने कहा कि परिसीमन का उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर क्षेत्रों का संतुलन बनाना है, ताकि हर नागरिक को समान प्रतिनिधित्व मिल सके। अनिल विज ने यह भी स्पष्ट किया कि यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है और इसे निष्पक्ष तरीके से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि परिसीमन से लोकतांत्रिक व्यवस्था और मजबूत होगी तथा विकास कार्यों में भी संतुलन आएगा। हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज के विभागो में तबादलों को लेकर एक चिट्ठी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। इस पत्र में विभाग के भीतर हुए सीधे तबादलों पर कड़ी आपत्ति जताई गई थी। अब इस पूरे मामले पर खुद अनिल विज ने सामने आकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। विज ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियम के मुताबिक, विभाग में किसी भी स्तर पर होने वाले तबादले विभागीय मंत्री के संज्ञान में होने चाहिए और उनके कार्यालय के माध्यम से ही आगे बढ़ने चाहिए। अनिल विज ने कहा बताया कि उन्हें कुछ ऐसी शिकायतें मिली थीं जहाँ नियमों को ताक पर रखकर सीधे तबादले किए गए थे। इसी को देखते हुए उन्होंने लिखित निर्देश जारी किए हैं कि भविष्य में सभी प्रक्रियाएं तय सिस्टम के तहत ही हों। विज ने साफ कर दिया कि व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था।

क्रेडा विभाग की योजनाओं से दो वर्षों में आमजन के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव

रायपुर.  अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में क्रेडा विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों ने आमजन के जीवन में उल्लेखनीय और सकारात्मक परिवर्तन लाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में सौर ऊर्जा आधारित प्रणालियों के बेहतर उपयोग पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे विकास की गति को नई दिशा मिली है। विभाग की विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप अब लोगों को बुनियादी सुविधाएं अधिक सरलता और सहजता से उपलब्ध हो रही हैं। सौर ऊर्जा के उपयोग से जहां एक ओर स्वच्छ पेयजल और सिंचाई व्यवस्थाएं सुदृढ़ हुई हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिना बिजली बिल के निरंतर रोशनी सुनिश्चित हो रही है। इससे न केवल लोगों का दैनिक जीवन अधिक सुविधाजनक हुआ है, बल्कि उनके जीवन स्तर में स्थायी और सकारात्मक सुधार लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 114 सोलर ड्यूल पंप से पेयजल और सिंचाई सुविधा सुदृढ़ ग्रामीण एवं कस्बाई क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के अंतर्गत भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की पहल पर प्रत्येक परिवार तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।  क्रेडा विभाग द्वारा पिछले दो वर्षों में जल जीवन मिशन अंतर्गत जशपुर जिले में 114 सोलर ड्यूल पंप स्थापित किए गए हैं। इनसे पेयजल आपूर्ति के साथ-साथ सिंचाई के लिए सस्ती एवं सुलभ ऊर्जा उपलब्ध हो रही है। सोलर पंपों के उपयोग से किसानों की डीजल एवं बिजली पर निर्भरता कम हुई है, जिससे उनकी लागत में कमी आई है और आय में वृद्धि हुई है। पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसान वर्षभर खेती कर पा रहे हैं, जिससे उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। वहीं घर के समीप जल उपलब्ध होने से महिलाओं को दूर से पानी लाने की परेशानी से राहत मिली है।       80 सोलर हाई मास्ट से रोशन हुए गांव और शहर जशपुर जिले में सार्वजनिक स्थलों पर बेहतर प्रकाश व्यवस्था के लिए सोलर हाई मास्ट योजना के तहत ग्रामों, कस्बों और शहरी क्षेत्रों के प्रमुख चौक-चौराहों पर संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। पिछले दो वर्षों में 80 सोलर हाई मास्ट लगाए जा चुके हैं। इन सौर ऊर्जा आधारित लाइटों से रात्रिकालीन आवागमन अधिक सुरक्षित और सुगम हुआ है। साथ ही, दुर्घटनाओं और अपराधों में भी कमी आई है। जहां बिजली आपूर्ति सीमित या बाधित रहती है वहां भी ये हाई मास्ट निर्बाध रूप से रोशनी प्रदान कर रहे हैं। 800 सोलर पंप से किसानों को मिली बड़ी राहत कृषि प्रधान छत्तीसगढ़ में सौर सुजला योजना किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना के अंतर्गत जशपुर जिले में पिछले दो वर्षों में  800 सोलर पंप स्थापित किए गए हैं, जिनसे सिंचाई सुविधाओं का व्यापक विस्तार हुआ है। सोलर पंपों के उपयोग से किसानों को बिजली बिल से मुक्ति मिली है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है। साथ ही कृषि उत्पादन में वृद्धि, भू-जल संरक्षण एवं संवर्धन, तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने जैसे सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

कैब ड्राइवरों का सरकार से आग्रह: एग्रीगेटर पॉलिसी 2025 और फेयर नोटिफिकेशन जल्द लागू हो

चंडीगढ़. चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला के हजारों कैब और ऑटो ड्राइवरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर चंडीगढ़ प्रशासन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। ट्राइसिटी ड्राइवर यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि 25 अप्रैल तक एग्रीगेटर पॉलिसी रूल्स-2025 और किराया नोटिफिकेशन को सख्ती से लागू नहीं किया गया, तो वे चंडीगढ़ के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय और स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के बाहर बड़ा आंदोलन करेंगे। यूनियन के प्रधान अमनदीप सिंह ने बताया कि ड्राइवर पिछले कई महीनों से 7 जुलाई 2025 को जारी किराया दरों के नोटिफिकेशन को लागू करवाने के लिए प्रशासन से लगातार मांग कर रहे हैं, लेकिन ओला, उबर, रैपिडो और इनड्राइवर जैसी कंपनियां नियमों की अनदेखी कर मनमाने तरीके से काम कर रही हैं। यूनियन ने चंडीगढ़ के प्रशासक से की अपील ड्राइवरों का आरोप है कि प्रशासन की ढिलाई के कारण इन कंपनियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे उनमें भारी रोष और निराशा है। उनका कहना है कि लगातार आर्थिक शोषण के कारण परिवार का पालन-पोषण, रोजमर्रा के खर्च और बच्चों की फीस भरना भी मुश्किल हो गया है। यूनियन ने चंडीगढ़ के प्रशासक से अपील की है कि वह तुरंत ड्राइवरों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर इस समस्या का समाधान करें, ताकि उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर न होना पड़े। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो हजारों ड्राइवर सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

कॉलेजों में शुरू होगी ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम की पढ़ाई, बाल सुरक्षा को मिलेगा मजबूत आधार

रायपुर.  छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा राज्य में “रक्षक (RAKSHAK) पाठ्यक्रम” को प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इस विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम का उद्देश्य महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के माध्यम से बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और समाज में बाल संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना है। इस पाठ्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए पूर्व में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी रजवाड़े तथा उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा के सहयोग से एमओयू संपन्न किया गया था। यह समझौता राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में “रक्षक” पाठ्यक्रम लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है। इसी क्रम में बुधवार को रायपुर स्थित होटल बेबिलोन में “रक्षक” पाठ्यक्रम के अंतर्गत तैयार उप-इकाइयों (सब-यूनिट्स) को अंतिम रूप देने हेतु विश्वविद्यालय स्तरीय परामर्श बैठक आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई, जिसके बाद आयोग के सचिव प्रतीक खरे और डायरेक्टर श्रीमती संगीता बिंद ने अतिथियों का स्वागत किया। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि “रक्षक पाठ्यक्रम केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक सशक्त सामाजिक अभियान है। हमारा प्रयास है कि इसे प्रभावी रूप से लागू कर आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित और जागरूक बनाया जाए।” बैठक में राज्य के प्रमुख विश्वविद्यालयों—पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय (सरगुजा), शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (भिलाई), एमिटी यूनिवर्सिटी और अंजनेय यूनिवर्सिटी—के कुलपति, कुलसचिव, प्रतिनिधि एवं विषय विशेषज्ञ शामिल हुए। परामर्श बैठक का मुख्य उद्देश्य पाठ्यक्रम की उप-इकाइयों पर विस्तृत चर्चा कर उन्हें अंतिम स्वरूप प्रदान करना था, ताकि आगामी शैक्षणिक सत्र से इसे प्रभावी रूप से लागू किया जा सके। इस दौरान विशेषज्ञों ने पाठ्यक्रम की संरचना, उपयोगिता और व्यवहारिक पहलुओं पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए। सभी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने इस पहल को समय की आवश्यकता बताते हुए आयोग की सराहना की और इसके सफल क्रियान्वयन में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। आयोग को विश्वास है कि “रक्षक” पाठ्यक्रम जल्द ही राज्य के महाविद्यालयों में लागू होगा, जिससे विद्यार्थियों के माध्यम से बाल अधिकारों की सुरक्षा को मजबूती मिलेगी और बच्चों के सुरक्षित भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान सुनिश्चित होगा।

कोरबा जिले के तीन उचित मूल्य दुकानों में राशन वितरण में अनियमितताएं पाए जाने पर एफआईआर दर्ज

रायपुर.  कोबरा जिले में राशन वितरण कार्य में अनियमितता को लेकर प्राप्त शिकायतों पर प्रशासन ने गंभीरता से कार्रवाई करते हुए कई उचित मूल्य दुकानों के संचालकों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही शुरू कर दी गई है। शिकायतों पर खाद्य विभाग द्वारा जांच कराई गई। जांच में ग्राम पंचायत कोरकोमा, खोड्डल एवं पटपरा की शासकीय उचित मूल्य दुकानों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। जिन शासकीय उचित मूल्य की दुकानों में अनियमितताएं पाई गई है उन संचालकों के विरूद्ध प्रथम सूचना प्रतिवेदन दर्ज कराया गया है।  कोरकोमा स्थित दुकान में संचालक संस्था द्वारा लगभग 197.45 क्विंटल चावल एवं 22.82 क्विंटल नमक का व्यपवर्तन किया जाना सामने आया है। साथ ही लगभग 435 राशन कार्डधारियों को निर्धारित अवधि में राशन वितरण नहीं किया गया। इस मामले में संबंधित संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर प्रकरण दर्ज किया गया है। इसी प्रकार खोड्डल की उचित मूल्य दुकान में 334.98 क्विंटल चावल एवं 6 क्विंटल शक्कर के व्यपवर्तन का मामला सामने आया है। यहां दुकान का नियमित संचालन नहीं होने एवं सीमित दिनों में ही वितरण किए जाने की शिकायतें भी सही पाई गईं। इस पर छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश 2016 के तहत कार्रवाई की जा रही है। वहीं पटपरा (विकासखंड पाली) की दुकान में भी गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। जांच में पाया गया कि लगभग 422 हितग्राहियों का बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण होने के बावजूद उन्हें राशन वितरित नहीं किया गया। इस प्रकरण में संचालकों के विरुद्ध थाना पाली में एफआईआर दर्ज कराई गई है । विभागीय जांच में यह भी सामने आया कि मार्च 2026 में भंडारण में विलंब एवं एई-पीडीएस सर्वर मेंटेनेंस के कारण कुछ स्थानों पर समय पर वितरण प्रभावित हुआ। खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवितरित राशन के वितरण के लिए अप्रैल माह में आवश्यक प्रावधान किए जा रहे हैं तथा बैकलॉग वितरण शीघ्र सुनिश्चित किया जाएगा। जिला प्रशासन ने कहा है कि राशन वितरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

बिलासपुर में पीडीएस के तहत राशन का 70 प्रतिशत से अधिक भंडारण, 37 प्रतिशत हितग्राहियों को मिला राशन

रायपुर. बिलासपुर जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन के संबंध में खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में खाद्यान्न भंडारण एवं वितरण कार्य सुचारू रूप से संचालित हो रहा है। खाद्य नियंत्रक, जिला बिलासपुर द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 तक तीन माह के खाद्यान्न के भंडारण एवं वितरण की व्यवस्था की गई है। इसके तहत जिले में संचालित 695 शासकीय उचित मूल्य दुकानों में आबंटन के विरुद्ध 70 प्रतिशत से अधिक खाद्यान्न का भंडारण किया जा चुका है। विभाग ने बताया कि किसी भी उचित मूल्य दुकान में तीन माह के खाद्यान्न भंडारण हेतु स्थान की कोई समस्या नहीं आई है। साथ ही, एपीएल मद के चावल का बीपीएल मद में समायोजन या वितरण नहीं किया जा सकता, जिसका पालन किया जा रहा है। राशन वितरण प्रक्रिया के तहत हितग्राहियों को तीन माह का राशन प्राप्त करने के लिए ई-पॉस मशीन में छह बार फिंगरप्रिंट सत्यापन करना पड़ रहा है। विभाग के अनुसार, जिले में अब तक 37 प्रतिशत हितग्राहियों को तीन माह का खाद्यान्न वितरित किया जा चुका है तथा वितरण कार्य निरंतर जारी है। खाद्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि ई-पॉस मशीन में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या नहीं है तथा एपीएल राशनकार्डधारियों के लिए मासिक आबंटन नियमित रूप से प्राप्त हो रहा है। जिले में राशन वितरण कार्य पूर्णतः व्यवस्थित एवं सुचारू रूप से संचालित हो रहा है।

मिसिर बेसरा दस्ते से एनकाउंटर, कोबरा और झारखंड जगुआर का ऑपरेशन जारी

 सारंडा झारखंड के सारंडा जंगल में बुधवार को एक बार फिर सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ शुरू हो गई. यह मुठभेड़ कुख्यात इनामी माओवादी नेता मिसिर बेसरा के दस्ते के साथ हो रही है. जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बल इलाके में लंबे समय से चल रहे सर्च ऑपरेशन के तहत जंगल में तलाशी अभियान चला रहे थे. इसी दौरान नक्सली अचानक सामने आ गए और उन्होंने सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी. अचानक हुई इस गोलीबारी के बाद सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की. कोबरा बटालियन और झारखंड जगुआर की संयुक्त कार्रवाई मौके पर सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन, झारखंड जगुआर और जिला पुलिस बल के जवान मौजूद हैं. ये सभी यूनिट्स नक्सल विरोधी ऑपरेशन में विशेष रूप से प्रशिक्षित हैं. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षाबलों को खुफिया सूचना मिली थी कि कुख्यात नक्सली कमांडर मिसिर बेसरा अपने दस्ते के साथ सारंडा के जंगलों में सक्रिय है. इसी सूचना के आधार पर सर्च ऑपरेशन तेज किया गया था. कैंप शिफ्ट कर रहे नक्सलियों से टकराव बताया जा रहा है कि मुठभेड़ उस समय शुरू हुई जब नक्सली जंगल के अंदर अपने ठिकाने को बदल रहे थे. इसी दौरान सुरक्षाबलों की टीम वहां पहुंच गई और दोनों का आमना-सामना हो गया. पुलिस को देखते ही नक्सलियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. इसके बाद जवानों ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए उन्हें घेरने की कोशिश की. कई नक्सलियों के मारे जाने की आशंका, पुष्टि नहीं सूत्रों के अनुसार, इस मुठभेड़ में कई नक्सलियों के मारे जाने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि, अभी तक किसी भी नक्सली का शव बरामद नहीं हुआ है और न ही सर्च ऑपरेशन में जुटे सुरक्षा बलों के अधिकारियों की ओर से इसकी पुष्टि ही की गई है. जंगल का घना इलाका और लगातार फायरिंग के कारण सुरक्षाबलों को सटीक स्थिति का आकलन करने में समय लग रहा है. इलाके में हाई अलर्ट, ऑपरेशन जारी फिलहाल पूरे इलाके को घेर लिया गया है और अतिरिक्त बलों को भी तैनात कर दिया गया है. सुरक्षाबल लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं, ताकि नक्सलियों को पूरी तरह से खत्म किया जा सके. अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन तब तक जारी रहेगा जब तक इलाके को पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं कर दिया जाता. बीच-बीच में फायरिंग कर रहे नक्सली: एसपी जिले के एसपी अमित रेणू ने बताया कि कोबरा जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ जारी है. नक्सलियों की ओर से बीच-बीच में फायरिंग हो रही है, जिसका सुरक्षा बल सतर्कता के साथ जवाब दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और ऑपरेशन खत्म होने के बाद ही विस्तृत जानकारी सामने आ पाएगी. फिलहाल पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है और सुरक्षा बलों द्वारा सघन सर्च अभियान जारी है. नक्सल गतिविधियों का गढ़ है सारंडा सारंडा का घना जंगल लंबे समय से नक्सलियों के लिए सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा है. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाई से नक्सल गतिविधियों में कमी आई है, लेकिन बीच-बीच में इस तरह की मुठभेड़ की घटनाएं सामने आती रहती हैं.

हिसार में महिला आयोग अध्यक्ष का ऐलान,सोशल मीडिया कंटेंट पर लगेगी सख्त रोक

हिसार  हरियाणा महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया ने समाज में बढ़ती अश्लीलता और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री पर कड़ा रुख अपनाया है। हिसार के कबीर छात्रावास में नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि अब केवल माफी मांगने से काम नहीं चलेगा, बल्कि गलत काम करने वालों के खिलाफ ठोस कानूनी कार्रवाई की जाएगी। रेणु भाटिया ने सिंगर बादशाह प्रकरण का उदाहरण देते हुए कहा कि अक्सर देखा जाता है कि लोग महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करते हैं या आपत्तिजनक गाने गाते हैं और फिर माफी मांगकर बच निकलते हैं। बार-बार माफी मांगने वाला सिस्टम खत्म हो उन्होंने जोर देकर कहा कि हम प्रयास करेंगे कि यह बार-बार माफी मांगने वाला सिस्टम खत्म हो। जो गलती करे, उसके खिलाफ सख्त एक्शन होना चाहिए। इसको लेकर महिला आयोग ने हरियाणा के मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर एक विशेष महकमा बनाने या एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का अनुरोध किया है। इस कदम का उद्देश्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, रील्स और गानों पर नजर रखना है। मनोरंजन के नाम पर परोसी जा रही अश्लीलता अध्यक्ष रेणु भाटिया ने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऐसे कई गाने और रील्स वायरल होते हैं जो न केवल महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि समाज को भी भारी हानि पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि हमें एक ऐसे तंत्र की आवश्यकता है जिससे जैसे ही कोई समाज को हानि पहुंचाने वाला कंटेंट सामने आए, हम उस पर तुरंत संज्ञान लेकर एक्शन ले सकें। रेणु भाटिया का मानना है कि इस तरह के विभाग के गठन से हरियाणा में मनोरंजन के नाम पर परोसी जा रही अश्लीलता और भ्रामक जानकारी पर नकेल कसी जा सकेगी। महिला आयोग अब समाज में सुधार के लिए कड़े फैसले लेने से पीछे नहीं हटेगा। पानीपत के एक गांव में सर्वे करवाया महिला आयोग की चेयरपर्सन ने कहा कि पानीपत के एक गांव में उन्होंने सर्वे करवाया है। इसमें सर्वे में बच्चों ने अच्छे और बुरे अनुभव बताए हैं। भाटिया ने बताया कि बच्चों ने बताया कि गांव के कौने में बैठकर बूढ़े-बुजुर्ग जुआ खेलते हैं। गांव के बूड़े बुजुर्ग और पिता शराब पीने ठेकों पर जाते हैं तो बच्चों को बताने की जरूरत नहीं। बच्चों ने जो देखा वो कर रहे हैं। इसलिए कहते हैं कि संगत का असर होता है। इसलिए परिवार में बच्चों को जो शिक्षा देंगे वो सामने आएगी। परिवारों को चाहिए कि बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़कर रखें।  

बार्सिलोना का सफर खत्म, एटलेटिको मैड्रिड 3-2 एग्रीगेट से आगे

नई दिल्ली  यूईएफए चैंपियंस लीग क्वार्टर फाइनल में बार्सिलोना का सफर खत्म हो गया। दूसरे लेग में शानदार शुरुआत और 2-1 की जीत के बावजूद स्पेनिश क्लब कुल एग्रीगेट स्कोर में पीछे रह गया। पहले लेग में मिली 2-0 की हार आखिरकार निर्णायक साबित हुई और एटलेटिको मैड्रिड 3-2 के कुल स्कोर के साथ सेमीफाइनल में पहुंच गया। यह एटलेटिको मैड्रिड की 2017 के बाद पहली चैंपियंस लीग सेमीफाइनल एंट्री है। टीम ने दबाव में संयम, रक्षात्मक मजबूती और सही समय पर गोल कर दिखाया कि बड़े मुकाबलों में अनुभव कितना मायने रखता है। अब अगले दौर में उसका सामना आर्सेनल या स्पोर्टिंग लिस्बन में से किसी एक से हो सकता है। शुरुआती 24 मिनट में बार्सिलोना का दमदार प्रदर्शन मैच की शुरुआत से ही बार्सिलोना ने आक्रामक रुख अपनाया। घरेलू दर्शकों के सामने टीम ने तेज पासिंग, विंग अटैक और हाई प्रेसिंग से एटलेटिको की डिफेंस लाइन को लगातार दबाव में रखा। चौथे मिनट में ही बार्सिलोना को पहली सफलता मिल गई। युवा स्टार लेमिन यमल ने एटलेटिको के डिफेंडर की गलती का फायदा उठाते हुए शानदार गोल किया। इस गोल ने स्टेडियम का माहौल पूरी तरह बदल दिया और बार्सिलोना के खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ा दिया। इसके बाद 24वें मिनट में फेरान टोरेस ने दानी ओल्मो के सटीक पास पर गोल कर स्कोर 2-0 कर दिया। इस समय ऐसा लग रहा था कि बार्सिलोना मुकाबले पर पूरी तरह हावी है और सेमीफाइनल में पहुंचने की मजबूत दावेदार बन चुकी है। लुकमैन के गोल ने बदला मैच का रुख जब बार्सिलोना पूरी लय में दिख रही थी, तभी एटलेटिको मैड्रिड ने वापसी की। 31वें मिनट में मार्कोस लोरेंटे ने शानदार मूव बनाया और गेंद एडमोला लुकमैन तक पहुंचाई। लुकमैन ने मौके को भुनाते हुए अहम गोल दाग दिया। यह गोल मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस गोल के बाद एग्रीगेट स्कोर का समीकरण बदल गया और बार्सिलोना पर दबाव बढ़ गया। एटलेटिको ने इसके बाद रक्षात्मक अनुशासन बनाए रखा और बार्सिलोना को खुलकर खेलने से रोका। दूसरे हाफ में बार्सिलोना ने किए कई प्रयास दूसरे हाफ में बार्सिलोना ने बराबरी और एग्रीगेट बढ़त हासिल करने के लिए लगातार हमले किए। टीम ने कई मौके बनाए, लेकिन फिनिशिंग में चूक और एटलेटिको की मजबूत डिफेंस उसके रास्ते में खड़ी रही। फेरान टोरेस ने एक बार फिर गेंद जाल में पहुंचाई, लेकिन रेफरी ने इसे ऑफसाइड करार दिया। यह फैसला बार्सिलोना के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। एटलेटिको के गोलकीपर ने भी कुछ शानदार बचाव किए, जिससे बार्सिलोना को तीसरा गोल नहीं मिल सका। मिडफील्ड में भी दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। कोच के फैसलों पर उठे सवाल मैच के बाद बार्सिलोना के कोच हांसी फ्लिक की रणनीति चर्चा का विषय बनी रही। उन्होंने अनुभवी खिलाड़ियों रॉबर्ट लेवांडोव्स्की और मार्कस रैशफोर्ड को शुरुआती एकादश में शामिल नहीं किया। फ्लिक ने युवा खिलाड़ियों और तेज अटैकिंग विकल्पों पर भरोसा जताया। शुरुआती मिनटों में यह फैसला सही साबित होता दिखा, लेकिन मैच के निर्णायक दौर में अनुभव की कमी साफ नजर आई। विश्लेषकों का मानना है कि इतने बड़े नॉकआउट मुकाबले में अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी टीम के लिए फायदेमंद हो सकती थी। रेड कार्ड ने बढ़ाई मुश्किल मैच के अंतिम चरण में बार्सिलोना की मुश्किलें और बढ़ गईं। डिफेंडर एरिक गार्सिया को रेड कार्ड दिखाया गया। उन्होंने गोल की ओर बढ़ रहे एटलेटिको के खिलाड़ी को रोकने के लिए फाउल किया, जिसके बाद रेफरी ने उन्हें सीधे मैदान से बाहर भेज दिया। 10 खिलाड़ियों के साथ खेल रही बार्सिलोना ने आखिरी मिनटों तक संघर्ष किया, लेकिन टीम जरूरी गोल नहीं कर सकी। 2015 के बाद से जारी है यूरोपीय खिताब का इंतजार बार्सिलोना ने आखिरी बार 2015 में चैंपियंस लीग ट्रॉफी जीती थी। इसके बाद से क्लब कई बार नॉकआउट चरण में पहुंचा, लेकिन खिताब तक नहीं पहुंच सका। इस हार के बाद भी टीम के प्रदर्शन में कुछ सकारात्मक संकेत दिखे। युवा खिलाड़ियों ने दबाव में अच्छा खेल दिखाया और टीम ने वापसी की मानसिकता भी दिखाई। हार के बाद मिडफील्डर फ्रेंकी डी जोंग ने कहा कि टीम ने पूरी कोशिश की, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। उनके मुताबिक, टीम सही दिशा में आगे बढ़ रही है और आने वाले सीजन में और मजबूत होकर लौटेगी। एटलेटिको के लिए बड़ी उपलब्धि एटलेटिको मैड्रिड के लिए यह जीत सिर्फ सेमीफाइनल में पहुंचने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्लब के आत्मविश्वास को भी मजबूत करेगी। टीम ने दिखाया कि बड़े मैचों में धैर्य, अनुशासन और मौके का सही इस्तेमाल जीत दिला सकता है। अब सेमीफाइनल में एटलेटिको की नजर फाइ