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योगी सरकार ने गंगा किनारों का विकास कर 90 हजार परिवारों को बनाया आत्म निर्भर

गंगा के किनारे 26 जिलों में ऑर्गेनिक क्लस्टर से बदल रही यूपी की तस्वीर योगी सरकार ने गंगा किनारों का विकास कर 90 हजार परिवारों को बनाया आत्म निर्भर गंगा किनारे प्रदेश में अब आस्था के साथ बह रही है समृद्धि की नई धारा ऑर्गेनिक विलेज डेवलप कर रही योगी सरकार, रसायन-मुक्त खेती को बनाया मिशन नमामि गंगे के तहत 3,370 जैविक क्लस्टर संचालित, जैविक और प्राकृतिक खेती से किसान बन रहे समृद्ध लखनऊ मां गंगा के किनारे उत्तर प्रदेश में अब आस्था के साथ समृद्धि की नई धारा भी बह रही है। योगी सरकार ने गंगा के तटवर्ती 26 जिलों में जैविक खेती का ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो न सिर्फ किसानों की आय बढ़ा रहा है बल्कि प्रदेश की कृषि व्यवस्था को भी नई दिशा दे रहा है। नमामि गंगे योजना के तहत गंगा के दोनों किनारों पर 5-5 किलोमीटर क्षेत्र में 3,370 जैविक क्लस्टर विकसित किए गए हैं, जिनसे करीब 90 हजार किसान परिवार आत्मनिर्भर बने हैं। योगी सरकार इन क्षेत्रों में ऑर्गेनिक विलेज विकसित कर रसायन-मुक्त खेती को मिशन मोड में आगे बढ़ा रही है।       कम लागत और ज्यादा मुनाफा जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाने से किसानों की उत्पादन लागत घटी है। रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होने से जहां लागत घटी है, लाख ही बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पादों से बाजार में अधिक कीमत मिल रही है। यह पहल केवल खेती सुधार तक सीमित नहीं है। इससे गंगा की स्वच्छता, मिट्टी की गुणवत्ता,  भूजल संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था सभी को लाभ मिल रहा है। गांव-गांव प्रशिक्षण, तकनीक और प्रोत्साहन केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और प्रोत्साहन उपलब्ध कराया जा रहा है। प्राकृतिक उर्वरक और पारंपरिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देकर टिकाऊ खेती का मॉडल तैयार किया जा रहा है। वहीं, वर्ष 2024-25 में नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत राज्य स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा अब तक 35 जनपदों में जिला स्तर पर प्राकृतिक खेती की कार्यशालाएं आयोजित की जा चुकी हैं। आगामी वित्तीय वर्ष में बाकी जनपदों में भी कार्यशालाएं प्रस्तावित हैं। ऑर्गेनिक विलेज में मिल रहे ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थ प्रदेश के 26 गंगा तटवर्ती जिलों में चल रहे इस अभियान के तहत अब तक 3,370 जैविक क्लस्टर स्थापित किए जा चुके हैं, जिनसे किसान परिवार सीधे जुड़ चुके हैं और आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। गंगा के दोनों किनारों पर ऑर्गेनिक बेल्ट को इस मॉडल के लिए विकसित किया गया है, जहां गांव स्तर पर ऑर्गेनिक विलेज तैयार किए जा रहे हैं। जिससे लोगों को ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।  रसायन-मुक्त उत्पादन से उपभोक्ताओं के बीच बढ़ी डिमांड इस योजना की खास बात ये है कि एक ओर जहां किसानों की आय बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर लोग कीटनाशकों से प्रभावित वस्तुओं से होने वाली बीमारियों से भी बच रहे हैं। किसानों का रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों पर खर्च घटा है, वहीं दूसरी ओर  मिट्टी की उर्वरता बेहतर हुई है। इसके चलते  जैविक उत्पादों को बाजार में प्रीमियम रेट मिल रहा है और रसायन-मुक्त उत्पादन से उपभोक्ताओं के बीच मांग भी बढ़ी है।

छात्र-आश्रमों में अनुशासन और राष्ट्रभक्ति को बढ़ावा देने मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिए निर्देश

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित छात्रावासों और आश्रमों में अध्ययनशीलता और देशभक्ति के सकारात्मक वातावरण को प्रोत्साहित किया जाए। छात्रावासों और आश्रमों के प्रबंधन में जन अभियान परिषद और गायत्री परिवार जैसी संस्थाओं से भी सहयोग लिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को जनजातीय कार्य विभाग की मंत्रालय में हुई समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिए। बैठक में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह वर्चुअल शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि छात्रावासों और आश्रमों में खाना बनाने, सफाई और सुरक्षा व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा जाए। छात्रावासों के संवेदनशील प्रबंधन के लिए आवश्यक प्रशिक्षण और मॉनिटरिंग की व्यवस्था हो। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में जनजातीय कार्य विभाग के लगभग 3000 आश्रम/ छात्रावास और अनुसूचित जाति विकास विभाग के लगभग 2000 आश्रम/ छात्रावास संचालित हैं। मुख्य सचिव अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य विभाग गुलशन बामरा तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

रांची में हड़कंप,ट्रेजरी गड़बड़ी की जांच के लिए हाई लेवल कमेटी गठित

रांची झारखंड में ट्रेजरी से अवैध निकासी के मामले की वजह से राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है. सरकार इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की तैयारी में है. वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने प्रोजेक्ट भवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि इस घोटाले की जड़ तक पहुंचने के लिए दो स्तरों पर जांच कराई जाएगी. वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की अध्यक्षता में एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया जा रहा है, जिसकी फाइल मुख्यमंत्री को भेज दी गई है. इसके साथ ही मामले के आपराधिक पहलुओं को उजागर करने की जिम्मेदारी सीआईडी (CID) को सौंपी गई है. वेतन के नाम पर हुई गड़बड़ियों की होगी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ वित्त मंत्री ने विशेष रूप से हजारीबाग, बोकारो और रांची में वेतन मद में हुई अवैध निकासी का जिक्र किया है. उन्होंने कहा है ”शुरुआती जांच में सामने आया है कि नियमों को ताक पर रखकर मोटी रकम निकाली गई है”. आईएएस अधिकारियों की कमेटी यह जांच करेगी कि तकनीकी स्तर पर चूक कहां हुई और किन अधिकारियों की मिलीभगत से ट्रेजरी के सुरक्षा तंत्र को तोड़ा गया. वहीं, सीआईडी उन चेहरों को बेनकाब करेगी जिन्होंने साजिश रचकर सरकारी राशि का गबन किया है. राज्य के सभी 33 कोषागारों की ऑनलाइन निगरानी सरकार ने केवल तीन जिलों तक ही अपनी जांच सीमित नहीं रखी है. वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि राज्य के सभी 33 कोषागारों (Treasuries) का विस्तृत ऑडिट और जांच कराई जाएगी. उन्होंने बताया कि विभाग के वेब पोर्टल के माध्यम से सभी कोषागारों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा रही है. यदि कहीं भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन या डाटा में हेरफेर पाया जाता है, तो वहां तत्काल विशेष टीम भेजकर कार्रवाई की जाएगी. दोषियों के लिए कोई रियायत नहीं सरकार के कड़े रुख से यह स्पष्ट है कि इस बार दोषियों को बचाने का कोई रास्ता नहीं छोड़ा जाएगा. वित्त मंत्री ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि रिपोर्ट आने के बाद संलिप्त अधिकारियों और कर्मियों पर न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि उन पर सख्त कानूनी मुकदमा भी चलाया जाएगा. सरकार का लक्ष्य इस कार्रवाई के जरिये एक ऐसी उदाहरण पेश करना है जिससे भविष्य में सरकारी सुरक्षा के साथ कोई खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके.

डेजर्ट नेशनल पार्क में नई स्पाइडर प्रजाति मिली, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा

 जैसलमेर राजस्थान के जैसलमेर में स्थित डेजर्ट नेशनल पार्क से एक बड़ी खोज सामने आई है. इस क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने जंपिंग स्पाइडर की नई प्रजाति ‘मोग्रस शुष्का' को खोजा है. इस खोज ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है. यह शोध European Journal of Taxonomy और Zootaxa जैसे प्रतिष्ठित जर्नल्स में प्रकाशित हुआ है. इससे यह स्पष्ट है कि यह खोज वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. चार नई प्रजातियों की पहचान इस अध्ययन में सिर्फ ‘मोग्रस शुष्का' ही नहीं बल्कि तीन अन्य नई प्रजातियों की भी पहचान की गई है. इनमें मोग्रस पुणे लैंगेलुरिलस सह्याद्री और लैंगेलुरिलस उदयपुरीन्सिस शामिल हैं. यह खोज दर्शाती है कि रेगिस्तान में अभी भी कई अनदेखे जीव मौजूद हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार ‘मोग्रस शुष्का' अत्यधिक गर्मी कम नमी और रेतीले माहौल में आसानी से खुद को ढाल लेती है. यह प्रजाति Rajasthan और Gujarat के शुष्क इलाकों में पाई जाती है. पुरानी प्रजातियों की भी नई जानकारी शोध में कुछ पहले से ज्ञात प्रजातियों की अधूरी जानकारी भी पूरी की गई. मोग्रस राजस्थानेंसिस के नर का पहली बार वैज्ञानिक विवरण मिला जबकि कुछ अन्य प्रजातियों की मादाओं का भी पहली बार वर्णन किया गया. एक और चौंकाने वाली बात यह रही कि मोग्रस लारिसाए नामक मकड़ी जो पहले केवल कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान में पाई जाती थी उसे पहली बार भारत में दर्ज किया गया. पारिस्थितिकी में मकड़ियों की बड़ी भूमिका विशेषज्ञों का कहना है कि मकड़ियां कीटों की संख्या नियंत्रित कर फसलों की रक्षा करती हैं और फूड चेन को संतुलित बनाए रखती हैं. दुनिया भर में मकड़ियां हर साल लगभग 300 मिलियन टन कीट खा जाती हैं. रेगिस्तानी जैव विविधता का नया आयाम डेजर्ट नेशनल पार्क अब सिर्फ गोडावण जैसे बड़े जीवों के लिए नहीं बल्कि सूक्ष्म जीव विविधता के लिए भी महत्वपूर्ण बनता जा रहा है. यहां करीब 120 प्रकार की स्पाइडर प्रजातियां पाई जाती हैं जो इसकी समृद्ध पारिस्थितिकी को दर्शाती हैं.

धमतरी में ‘STREE’ परियोजना का शुभारंभ: 300 ग्रामीण महिलाओं को मिलेगा आत्मनिर्भरता का नया रास्ता

रायपुर.  ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में धमतरी जिले में एक ऐतिहासिक पहल की गई है। कलेक्टोरेट परिसर में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) रायपुर, जिला प्रशासन धमतरी और बीआरपी शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज के बीच ‘STREE’ (Skill Development through Technological Resources for Empowering Economic Growth of Women) परियोजना के सफल क्रियान्वयन हेतु त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस महत्वपूर्ण अवसर पर NIT रायपुर के निदेशक डॉ. एन. वी. रमणा राव, कलेक्टर अबिनाश मिश्रा तथा पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्राचार्य ने संयुक्त रूप से MoU पर हस्ताक्षर कर परियोजना का विधिवत शुभारंभ किया।कार्यक्रम में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सहित अनेक शिक्षाविद् एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। यह परियोजना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) के TDUPW-A2K+ कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग 90 लाख रुपये की सहायता से संचालित होगी। 36 माह की अवधि में 300 ग्रामीण महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।परियोजना के तहत महिलाओं को कोसा रेशम प्रसंस्करण, फाइबर निष्कर्षण, आधुनिक बुनाई, उत्पाद डिजाइन, उद्यमिता विकास एवं मार्केट लिंकेज जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। विशेष रूप से आदिवासी एवं वंचित वर्ग की महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग और मूल्य संवर्धन संभव हो सके। ज्ञात हो कि धमतरी में हैंडलूम और कृषि आधारित आजीविका की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें इस परियोजना के माध्यम से तकनीकी सहयोग से सशक्त किया जाएगा। वहीं, NIT रायपुर के निदेशक डॉ. रमणा राव ने इसे समावेशी नवाचार और जमीनी विकास की दिशा में एक मजबूत कदम बताते हुए महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा देने की बात कही। यह पहल न केवल महिलाओं को कौशल विकास का अवसर देगी, बल्कि उन्हें स्वरोजगार और लघु उद्योगों की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग भी प्रशस्त करेगी। STREE परियोजना धमतरी में महिला सशक्तिकरण का एक प्रभावी मॉडल स्थापित करते हुए आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती प्रदान करेगी।

नेहा धूपिया की हॉलीवुड डेब्यू फिल्म ‘52 ब्लू’ का ट्रेलर रिलीज

अभिनेत्री नेहा धूपिया अपनी अपकमिंग फिल्म '52 ब्लू' को लेकर चर्चा में हैं। इस फिल्म से वह हॉलीवुड में डेब्यू कर रही हैं। फिल्म के मेकर्स ने इसका पहला लुक और ट्रेलर जारी किया है। नेहा धूपिया इसमें एक अलग लुक में नजर आ रही हैं। यह फिल्म फीफा वर्ल्ड कप 2022 के बैकग्राउंड में एक भारतीय प्रवासी मजदूर की जिंदगी पर आधारित है। ट्रेलर में क्या है? 2 मिनट 11 सेकंड के ट्रेलर में दिखाया गया है कि नेहा धूपिया ने उस व्यक्ति (यादव शशिधर) की मां का किरदार निभाया है, जो लियोनेल मेस्सी का बहुत बड़ा फैन है। वो लियोनेल मेस्सी से मिलने विदेश जाता है। वहां जाकर वह फंस जाता हैं। भारत में आशीष का परिवार पहले तो उनके विदेश जाने पर खुश होता है, बाद में जब वह वापस नहीं आता है, तो परिवार के लोग परेशान होते हैं। बेटे के दूर हो जाने पर नेहा धूपिया भी परेशान होती हैं  मां के किरदार में नेहा धूपिया इस फिल्म में नेहा धूपिया पहली बार एक मां का किरदार निभाएंगी। उनके साथ आदिल हुसैन भी हैं, जो उनके पति का किरदार निभा रहे हैं। यह इन दोनों की पहली ऑन-स्क्रीन जोड़ी है। कौन है फिल्म का निर्देशक? फिल्म का ज्यादातर हिस्सा कोच्चि में फिल्माया गया है, जहां के तटीय और द्वीपीय नजारे कहानी को बेहतर तरीके से पेश करते हैं। यह फिल्म मिस्र के फिल्ममेकर अली अल-अरबी के निर्देशन में बनी है। नेहा धूपिया का वर्कफ्रंट आपको बता दें कि नेहा धूपिया ने 2003 में फिल्म 'कयामत' से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। आखिरी बार वह फिल्म 'बैड न्यूज' 2024 में नजर आई थीं। अब वह हॉलीवुड फिल्म '52 ब्लू' में नजर आएंगी।  

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसल,आरएएस चयनित हनुमाना राम की जमानत खारिज

 जयपुर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान लोक परीक्षा घोटाले से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने आरएएस चयनित हनुमाना राम की जमानत याचिका खारिज कर दी. अदालत ने पहले नोटिस जारी किया था लेकिन राजस्थान सरकार की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराया गया. सरकार ने साफ कहा कि आरोपी का आचरण बेहद गंभीर है और उसे जमानत नहीं मिलनी चाहिए. अदालत ने राज्य के तर्कों को गंभीरता से लेते हुए राहत देने से मना कर दिया. डमी अभ्यर्थी बनकर दी कई परीक्षाएं जांच में सामने आया कि हनुमाना राम ने तीन लोगों के लिए डमी अभ्यर्थी बनकर परीक्षा दी. इसके अलावा उसने कई अन्य परीक्षाओं में भी प्रॉक्सी के तौर पर हिस्सा लिया. इनमें पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2021 और पटवार भर्ती परीक्षा 2021 शामिल हैं. आरोपी हनुमाना राम पढ़ाई में तेज माना जाता था. उसने आरएएस 2018 में 22वीं रैंक हासिल की थी और एक अन्य परीक्षा में दूसरी रैंक भी लाई थी. इसके बावजूद उस पर संगठित पेपर लीक गिरोह से जुड़े होने के आरोप लगे हैं. जांच में सामने आई गहरी संलिप्तता शुरुआती एफआईआर में आरोपी का नाम नहीं था लेकिन जांच के दौरान उसकी भूमिका सामने आई. इससे संकेत मिलता है कि वह किसी बड़े परीक्षा रैकेट का हिस्सा था और लगातार ऐसे अपराधों में शामिल रहा. अदालत ने बताए गंभीर प्रभाव राज्य सरकार ने तर्क दिया कि ऐसे कृत्य से प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सीधा असर पड़ता है. अगर जिम्मेदार पद पर चयनित व्यक्ति ही ऐसा करें तो यह पूरे सिस्टम के लिए खतरा बन जाता है. साथ ही राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि यदि याचिकाकर्ता आरएएस अधिकारी नियुक्त हुआ है तो वह राज्य को बेच देता. आगे अदालत ने कहा कि आरोपी का व्यवहार एक बार की गलती नहीं बल्कि लगातार किया गया अपराध है. ऐसे में आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं है.

हर छात्र बनेगा बच्चों के अधिकारों का प्रहरी – डॉ. वर्णिका शर्मा

रायपुर.  छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, रायपुर द्वारा “रक्षक (RAKSHAK) पाठ्यक्रम” को राज्य में प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में सतत प्रयास किए जा रहे हैं। “रक्षक” पाठ्यक्रम एक विशेष शैक्षणिक पहल है, जिसका उद्देश्य महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के माध्यम से बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा समाज में बाल संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना है। इस पाठ्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु पूर्व में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े तथा उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा के सहयोग से एमओयू संपन्न किया गया था। यह एमओयू राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में “रक्षक” पाठ्यक्रम को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा है, जिससे विद्यार्थियों को बाल अधिकारों और सुरक्षा संबंधी विषयों में प्रशिक्षित किया जा सके। इसी क्रम में आज दिनांक 15 अप्रैल 2026 को रायपुर स्थित होटल बेबिलोन में “रक्षक” पाठ्यक्रम के अंतर्गत तैयार उप-इकाइयों (सब-यूनिट्स) को अंतिम रूप प्रदान करने हेतु विश्वविद्यालयीन परामर्श बैठक का आयोजन किया गया।  कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसके पश्चात आयोग के सचिव श्री प्रतीक खरे एवं आयोग की डायरेक्टर श्रीमती संगीता बिंद द्वारा उपस्थित कुलपतियों, कुलसचिवों एवं प्रतिनिधियों का स्वागत किया गया। जिसके पश्चात आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि रक्षक पाठ्यक्रम केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक सशक्त सामाजिक अभियान है। हम सभी का सामूहिक प्रयास है कि इस पहल को अंतिम स्वरूप देकर इसे प्रभावी रूप से लागू किया जाए, जिससे आने वाली पीढ़ी सुरक्षित एवं जागरूक बन सके। इस बैठक में राज्य के तीन शासकीय और तीन प्राइवेट विश्वविद्याल शामिल हुए जिसमें पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय (सरगुजा), श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (भिलाई), एमिटी यूनिवर्सिटी एवं अंजनेय यूनिवर्सिटी के कुलपति, कुलसचिव और अधिकृत प्रतिनिधि एवं विषय विशेषज्ञों की गरिमामयी उपस्थिति रही। बैठक का मुख्य उद्देश्य रक्षक पाठ्यक्रम के अंतर्गत तैयार किए गए उप-इकाइयों पर विस्तृत चर्चा कर उन्हें अंतिम स्वरूप प्रदान करना रहा, ताकि पाठ्यक्रम को आगामी शैक्षणिक सत्र से प्रभावी रूप से लागू किया जा सके। इस दौरान सभी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों को अपने सुझाव एवं विचार साझा करने हेतु आमंत्रित किया गया तथा पाठ्यक्रम का गहन मूल्यांकन किया गया। विभिन्न विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए पाठ्यक्रम की उपयोगिता, संरचना एवं व्यवहारिक पहलुओं पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए।  बैठक में उपस्थित सभी कुलपतियों, कुलसचिव, एवं प्रतिनिधि प्रोफेसर्स ने आयोग की इस पहल की सराहना करते हुए इसे समय की आवश्यकता बताया और इसके सफल क्रियान्वयन हेतु पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। आयोग को विश्वास है कि “रक्षक” पाठ्यक्रम को शीघ्र ही राज्य के महाविद्यालयों में लागू किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों के माध्यम से बाल अधिकारों के संरक्षण को मजबूती मिलेगी और बच्चों के सुरक्षित एवं बेहतर भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान सुनिश्चित किया जा सकेगा।

नर्मदापुरम-टिमरनी मार्ग बनेगा हाईटेक: सीएम डॉ. यादव करेंगे 972.16 करोड़ के प्रोजेक्ट की शुरुआत

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार 16 अप्रैल को सिवनी मालवा में नर्मदापुरम-टिमरनी मार्ग (राज्य राजमार्ग-67) का इंटरमीडिएट से 2-लेन पक्के शोल्डर सहित हाइब्रिड एन्यूटी  मॉडल (एच ए एम) का उन्नयन एवं पुनर्निर्माण कार्य का भूमि-पूजन करेंगे। नर्मदापुरम से टिमरनी मार्ग की लंबाई 72.18 किलोमीटर है तथा इसकी लागत 972,16 करोड़ रुपए है। निर्माण कार्य एमपीआरडीसी द्वारा किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव पहले दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर में पूजन-अर्चन कर रोड शो करेंगे। रोड शो रेंज ऑफिस चौराहा, कल्लू चौक, नर्मदा मंदिर चौक, सराफा बाजार, गांधी चौक, जय स्तंभ चौक होते हुए पुराना बस स्टैंड पर समाप्त होगा। कृषि उपज मंडी सिवनी मालवा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव 106,34 करोड़ के विभिन्न कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन करेंगे। इनमें 48.65 करोड़ के 45 तथा 57.69 करोड़ के 51 कार्यों का भूमि-पूजन शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण भी करेंगे।

पारदर्शी डिजिटल प्रक्रिया से शिक्षा के अधिकार को मिला नया विस्तार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर.  छत्तीसगढ़ में समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सशक्त आधार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अंतर्गत निजी विद्यालयों में प्रवेश हेतु ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से 14,403 बच्चों का चयन सुनिश्चित किया। मंत्रालय महानदी भवन से वर्चुअल माध्यम से प्रारंभ हुई यह प्रक्रिया पारदर्शिता, समान अवसर और डिजिटल सुशासन की प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है। राज्यभर से प्राप्त कुल 38,439 आवेदनों में से 27,203 आवेदन निर्धारित मानकों के अनुरूप पात्र पाए गए, जिनमें से ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से 14,403 बच्चों को निजी विद्यालयों में प्रवेश प्रदान किया गया। यह पूरी प्रक्रिया पूर्व निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार राज्य स्तर पर सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुई, जिसमें शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है और राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि किसी भी बच्चे की प्रगति आर्थिक अभाव के कारण बाधित न हो। हमारी प्राथमिकता है कि हर बच्चे को समान अवसर के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो। उल्लेखनीय है कि आरटीई प्रावधानों के तहत निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित की गई हैं। इस योजना के माध्यम से राज्य सरकार समाज के अंतिम छोर पर खड़े बच्चों तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाने का सतत प्रयास कर रही है। वर्तमान में इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के 3 लाख 63 हजार से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना के अंतर्गत शुल्क प्रतिपूर्ति राशि को बढ़ाकर 300 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिससे अधिक से अधिक बच्चों को इस योजना का लाभ मिल सके और निजी विद्यालयों में उनके प्रवेश की प्रक्रिया और सुदृढ़ हो। पूरी प्रवेश प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित किया जा रहा है, जिसमें आवेदन से लेकर दस्तावेज सत्यापन और चयन तक के सभी चरण पूर्णतः पारदर्शी और तकनीक आधारित हैं। अभिभावक स्वयं या चॉइस सेंटर के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के दौरान ही सिस्टम द्वारा निवास क्षेत्र से 1.5 किलोमीटर के दायरे में स्थित निजी विद्यालयों की जानकारी एवं उपलब्ध सीटों का विवरण प्रदर्शित किया जाता है, जिससे अभिभावकों को सूचित एवं सहज चयन का अवसर प्राप्त होता है। पात्रता के अनुसार 5.5 से 6.5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को कक्षा पहली में प्रवेश दिया जाएगा, जबकि अनुसूचित जाति, जनजाति, दिव्यांग एवं अन्य कमजोर वर्गों को प्राथमिकता प्रदान की जाती है। जिन विद्यालयों में सीटें रिक्त रह जाती हैं, वहाँ जिला स्तर पर ऑफलाइन लॉटरी प्रक्रिया आयोजित की जाएगी, जिसकी जानकारी आरटीई पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी। यह पहल न केवल हजारों बच्चों के शिक्षा के सपनों को साकार कर रही है, बल्कि छत्तीसगढ़ में एक समावेशी, पारदर्शी और उत्तरदायी शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूत आधार प्रदान कर रही है। राज्य सरकार का यह प्रयास शिक्षा के क्षेत्र में एक सशक्त और दूरदर्शी परिवर्तन का संकेत है।