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उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा: चिकित्सा छात्रों को समय पर छात्रवृत्ति का भुगतान सुनिश्चित करें

भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में चिकित्सा शिक्षा छात्रों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत दी जा रही छात्रवृत्ति एवं अन्य लाभों के भुगतान की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अंतर्विभागीय समन्वय से छात्रवृत्ति एवं संबंधित हितलाभों का समयबद्ध एवं सुचारू भुगतान सुनिश्चित किया जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि छात्रों को उनकी पात्रता अनुसार मिलने वाले सभी लाभ बिना किसी विलंब के प्राप्त हों। उन्होंने निर्देशित किया कि भुगतान प्रक्रिया में किसी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक बाधा उत्पन्न न हो तथा यदि ऐसी कोई समस्या आती है तो उसका त्वरित निराकरण किया जाए। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को प्रदान की जा रही छात्रवृत्ति योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। साथ ही संबल योजना एवं मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना के अंतर्गत हितलाभ वितरण की अद्यतन स्थिति की भी समीक्षा की। बैठक में अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ अरुणा कुमार सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

निर्माण कार्यों पर सख्ती: एम्स दरभंगा और ई-पैक्स की समीक्षा, समयसीमा में देरी पर चेतावनी

पटना. बिहार में केंद्र प्रायोजित प्रमुख परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप (पीएमजी) और प्रगति योजनाओं की संयुक्त समीक्षा करते हुए सभी विभागों को डेडलाइन के भीतर काम पूरा करने के निर्देश दिए गए। बैठक में एम्स दरभंगा परियोजना पर विशेष फोकस रहा। 400 केवीए हाई टेंशन लाइनों को 15 मई 2026 तक हर हाल में शिफ्ट करने को कहा गया। साथ ही, कैंपस में मिट्टी भराई और रिंग बांध निर्माण के लिए प्रस्ताव शीघ्र केंद्र को भेजने के निर्देश दिए गए। औद्योगिक विकास के मोर्चे पर गया स्थित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर ग्रुप गया को लेकर भी सरकार गंभीर दिखी। इस परियोजना से करीब 1.10 लाख रोजगार सृजन की उम्मीद जताई गई है। डोभी में औद्योगिक थाना और हेलीपैड निर्माण के साथ-साथ बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। जल मार्ग विकास परियोजना की प्रगति 76.78 प्रतिशत बताई गई। संबंधित विभागों को आईडब्ल्यूटी उत्कृष्टता केंद्र के लिए भूमि हस्तांतरण जल्द पूरा करने का निर्देश मिला। सहकारिता क्षेत्र में राज्य ने लगभग शत-प्रतिशत उपलब्धि हासिल कर ली है। 4477 में से 4476 पैक्स को ई-पैक्स में बदला जा चुका है और शेष को भी सप्ताह भर में ऑनलाइन करने का लक्ष्य रखा गया है। सभी पैक्स में ई-आरपी सॉफ्टवेयर के पूर्ण उपयोग पर जोर दिया गया। शहरी स्वच्छता के तहत 45 डंपसाइट में से नौ का निस्तारण पूरा हो चुका है, जबकि 13 पर काम जारी है। पटना में वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट और पटना-मुंगेर में वेस्ट-टू-वंडर पार्क विकसित करने की दिशा में भी पहल तेज करने को कहा गया। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा और लापरवाही पर जवाबदेही तय की जाएगी। भूमि अधिग्रहण, वन क्लीयरेंस और बिजली शिफ्टिंग जैसे मामलों में विभागीय समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए गए। साथ ही, नगर निकायों में जीपीएस आधारित निगरानी और रीयूज-रिसाइकिल मॉडल को सख्ती से लागू कर कचरा मुक्त शहरों की रैंकिंग सुधारने पर बल दिया गया।

अरबपति परिवार की महिला जिम ट्रेनर बनी शिकार, आरोपी की गिरफ्तारी

 सूरत ये हैरान कर देने वाली कहानी सूरत के एक जिम की है. यहां अरबपति फैमिली की एक महिला काफी समय से वर्कआउट के लिए जा रही थी. जिम के ट्रेनर ने महिला से नजदीकियां बढ़ानी शुरू कीं और धीरे-धीरे अपनी बातों में उलझाकर प्रेमजाल में फंसा लिया. यह सब करीब सात साल तक चलता रहा. ट्रेनर ने तस्वीरें लेकर ब्लैकमेलिंग का खेल शुरू कर दिया. यह मामला तब सामने आया, जब पीड़िता के पति ने हिम्मत दिखाते हुए पुलिस से शिकायत की. अब आरोपी पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है।  दरअसल, सूरत के एक अरबपति परिवार की महिला सिटीलाइट इलाके के एक जिम में कसरत करने जाती थी. वहां जिम ट्रेनर के रूप में शब्बीर असगर ट्रंकवाला नाम का व्यक्ति काम कर रहा था. उसने महिला को अपनी बातों में बहला-फुसलाकर प्रेमजाल में फंसा लिया. यह युवक पिछले 7 साल से महिला के संपर्क में था. जब महिला के पति को अपना वैवाहिक रिश्ता टूटता दिखा, तो उन्होंने जिम ट्रेनर से संपर्क किया।  पिछले सात महीनों के दौरान उन्होंने जिम ट्रेनर से बातचीत भी की थी, लेकिन वह ब्लैकमेलिंग पर उतर आया था. आरोपी शब्बीर ने महिला के साथ कुछ निजी तस्वीरें खींच ली थीं. इसके बाद वह फोटो वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करने लगा था. जब महिला के पति ने शब्बीर से बात की, तो उसने तस्वीरों को वायरल करने की धमकी दी. इसके बदले में उसने महिला के पति से 5 लाख रुपये की मांग की और पति को जान से मारने की धमकी भी दी।  कुछ दिनों पहले ही सूरत पुलिस की SOG टीम ने जिम ट्रेनरों के साथ बैठक कर उन्हें महिलाओं से बिना काम के दूर रहने और मैसेज न करने के निर्देश दिए थे. महिला के पति ने इस मीटिंग की खबरें देखीं तो उन्होंने तुरंत SOG पुलिस से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई. सूरत पुलिस ने एक्शन लेते हुए आरोपी शब्बीर असगर ट्रंकवाला को अरेस्ट कर लिया।  शिकायत में महिला के पति ने बताया कि उन्होंने बार-बार जिम ट्रेनर शब्बीर से मुलाकात कर उससे तस्वीरें वायरल न करने को कहा था. इसके बावजूद ट्रेनर ने एक बार उनके ही मोपेड का कांच तोड़कर महिला के पति के गले पर लगा दिया और जान से मारने की धमकी दी. इसी के साथ पांच लाख रुपये मांगे।  सूरत पुलिस की एसओजी टीम के डीसीपी राजदीप सिंह नकुम ने बताया कि कुछ दिनों पहले एसओजी ने जिम ट्रेनर और संचालकों की मीटिंग बुलाई थी. उन्हें चेतावनी दी गई थी कि जो भी ट्रेनर नियुक्त करते हैं, उनकी कैरेक्टर जांच जरूर करवाएं, उसके बाद ही काम पर रखें. साथ ही, ट्रेनर के रूप में कार्य करने वाले व्यक्तियों के लिए यह निर्देश था कि वे जिम में आने वाली महिलाओं के साथ किसी भी प्रकार का संबंध न बनाएं, यह न केवल गलत है, बल्कि आचार संहिता के भी विरुद्ध है।  आरोपी ने महिला के पति से कहा- मैं तुम्हारी पत्नी को नहीं छोड़ूंगा इसके बाद एक पीड़ित पुलिस के पास पहुंचे और उन्होंने शिकायत में कहा कि उनकी पत्नी लगभग सात साल से सैटेलाइट क्षेत्र के जिम में जा रही थी. वहां शब्बीर असगर ट्रंकवाला नाम के व्यक्ति से उसका अफेयर हो गया था. शब्बीर अब पत्नी को छोड़ने को तैयार नहीं है।  पीड़ित के अनुसार, आरोपी ने धमकी दी थी कि मैं तुम्हारी पत्नी को नहीं छोड़ूंगा, मेरे पास तुम्हारी पत्नी के आपत्तिजनक फोटो और वीडियो हैं, जिन्हें वायरल कर दूंगा. अगर तुमने 5 लाख नहीं दिए. इसके बाद आरोपी दोबारा मिला और पैसों को लेकर दबाव बनाया. आरोपी शब्बीर कांच का व्यवसाय करता है, उसने कांच का टुकड़ा पीड़ित की गर्दन पर रखकर डराते-धमकाते हुए 50,000 रुपए ऐंठ लिए. इसके बाद से पीड़ित दहशत में था. हालिया मीटिंग देखकर पीड़ित ने हिम्मत जुटाई और पुलिस ने मामले की शिकायत की। 

अजनाला केस में बड़ा अपडेट: अमृतपाल सिंह की NSA हटते ही गिरफ्तारी, डिब्रूगढ़ से शिफ्ट नहीं होंगे

चंडीगढ़. खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह के मामले में पंजाब सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट रणनीति तय कर ली है। सूत्रों के अनुसार, 22 अप्रैल को समाप्त हो रही राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत को आगे बढ़ाने की संभावना नहीं है, लेकिन इसके साथ ही अमृतपाल की रिहाई भी नहीं होगी। राज्य पुलिस अजनाला थाना हमले के मामले में उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार करेगी, जिसके बाद वह असम की डिब्रूगढ़ जेल में ही बंद रहेगा। पंजाब गृह विभाग ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर साफ किया है कि कानून-व्यवस्था और सुरक्षा कारणों से अमृतपाल को एनएसए समाप्त होने के बाद भी डिब्रूगढ़ जेल में ही रखा जाए। राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के संयुक्त आकलन के बाद यह निर्णय लिया गया है। हालांकि, अधिकारियों ने अंतिम समय में किसी भी बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया है। फरवरी 2023 में अमृतसर के अजनाला थाने पर हुए हमले के मामले में अमृतपाल सिंह को मुख्य आरोपित बनाते हुए कुल 41 लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की कई गंभीर धाराओं में आरोप तय किए गए हैं। इनमें धारा 307 (हत्या का प्रयास), 353 (लोक सेवक पर हमला), 186 (सरकारी कार्य में बाधा), 506 (आपराधिक धमकी), 332 और 333 (लोक सेवक को चोट व गंभीर चोट पहुंचाना), 120बी (आपराधिक साजिश), 427 (नुकसान), 148 (दंगा), 149 (गैरकानूनी जमावड़ा) और 201 (साक्ष्य मिटाना) शामिल हैं। इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 25 भी लगाई गई है। जांच के अनुसार, अमृतपाल अपने समर्थकों के साथ हथियारों से लैस होकर अजनाला थाने पहुंचा था। आरोप है कि भीड़ ने पुलिस बैरिकेड तोड़े, थाने में घुसकर पुलिसकर्मियों से टकराव किया और एक साथी को जबरन छुड़ाने की कोशिश की। इस घटना के बाद राज्यभर में व्यापक सुरक्षा अभियान चलाया गया था। मामले की सुनवाई अब तक शुरू नहीं हो सकी है, क्योंकि अमृतपाल एनएसए के तहत निरुद्ध था। अब आरोप तय होने के बाद ट्रायल प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है। पुलिस ने डिब्रूगढ़ जेल जाकर गिरफ्तारी की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए टीम तैयार कर ली है। इसी मामले में सरकार पहले ही अमृतपाल के नौ करीबी सहयोगियों की एनएसए हिरासत समाप्त कर उन्हें पंजाब ला चुकी है। इनमें पापलप्रीत सिंह (मीडिया सलाहकार), कुलवंत सिंह राउके, हरजीत सिंह चाचा, गुरिंदर पाल सिंह उर्फ गुरी, गुरमीत सिंह बुक्कनवाला, भगवंत सिंह, दलजीत सिंह कालसी, बसंत सिंह और वरिंदर सिंह उर्फ फौजी शामिल हैं। सभी आरोपित वर्तमान में पंजाब की विभिन्न जेलों में बंद हैं और पुलिस कस्टडी में हैं। अमृतपाल सिंह को अप्रैल 2023 में मोगा के रोड़े गांव से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद से वह डिब्रूगढ़ जेल में निरुद्ध है। 2024 के लोकसभा चुनाव में उसने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में 1.9 लाख मतों से जीत दर्ज की थी। उसने 5 जुलाई 2024 को शपथ ली, लेकिन इसके बाद किसी संसदीय कार्यवाही में भाग नहीं ले सका। संसद सत्र में शामिल होने के लिए दायर उसकी पैरोल याचिकाएं भी अदालत ने कानून-व्यवस्था के आधार पर खारिज कर दी थीं। 22 अप्रैल के बाद की कार्रवाई इस पूरे मामले में निर्णायक होगी। मौजूदा संकेत यही हैं कि एनएसए हटेगा, लेकिन अमृतपाल की हिरासत समाप्त नहीं होगी और अजनाला कांड में गिरफ्तारी के साथ कानूनी शिकंजा ढीला नहीं पड़ेगा और अजनाला कांड में गिरफ्तारी के साथ मामला अगले चरण में प्रवेश करेगा।

वैराग्य का अर्थ और मनुष्य की द्वंद्वात्मक भाषा का भ्रम

वैराग्य का अर्थ, जहां न राग रह गया, न विराग रह गया। जहां न किसी चीज का आकर्षण है, न विकर्षण है। न किसी चीज के प्रति खिंचाव है, न विपरीत भागना है। जहां न किसी चीज का बुलावा है, न विरोध है। जहां व्यक्ति थिर हुआ, सम हुआ, जहां पक्ष और विपक्ष एक से हो गए, वहां वैराग्य फलित होता है। लेकिन इसे विराग या वैराग्य क्यों कहते हैं? जहां वैराग्य भी नहीं है, वहां वैराग्य क्यों कहते हैं? क्योंकि कोई उपाय नहीं है। शब्द की मजबूरी है, और कोई बात नहीं है। आदमी के पास सभी शब्द द्वंद्वात्मक हैं, डायलेक्टिकल हैं। आदमी की भाषा में ऐसा शब्द नहीं है जो नॉन-डायलेक्टिकल हो, द्वंद्वात्मक न हो। मनुष्य ने जो भाषा बनाई है, वह मन से बनाई है। मन द्वंद्व है। इसलिए मनुष्य जो भी भाषा बनाता है, उसमें विपरीत शब्दों में भाषा को निर्मित करता है। मजे की बात है कि हमारी भाषा बन ही नहीं सकती विपरीत के बिना। क्योंकि बिना विपरीत के हम परिभाषा नहीं कर सकते। अगर कोई आपसे पूछे कि अंधेरा यानी क्या? तो आप कहते हैं, जो प्रकाश नहीं है। कोई पूछे, प्रकाश क्या? तो आप कहते हैं, जो अंधेरा नहीं है। न आपको अंधेरे का पता है कि क्या है, न प्रकाश का पता है कि क्या है? अंधेरे को जब पूछते हैं, तो कह देते हैं, प्रकाश नहीं है। जब पूछते हैं, प्रकाश क्या है? तो कह देते है, अंधेरा नहीं है। यह कोई परिभाषा हुई? परिभाषा तो तभी हो सकती है, जब कम से कम एक का तो पता हो! एक आदमी एक अजनबी गांव में गया। उसने पूछा कि 'अ' नाम का आदमी कहां रहता है? तो लोगों ने कहा, 'ब' नाम के आदमी के पड़ोस में। पर उसने कहा, मुझे 'ब' का भी कोई पता नहीं, 'ब' कहां रहता है? उन्होंने कहा, 'अ' के पड़ोस में। ऐसे ही आदमी से पूछो, चेतना क्या है? वह कहता है, जो पदार्थ नहीं है। उससे पूछो, पदार्थ क्या है? वह कहता है, जो चेतना नहीं। माइंड क्या है? मैटर नहीं। मैटर क्या है? माइंड नहीं। बड़े से बड़ा दार्शनिक भी इसको परिभाषा कहता है। यह डेफिनिशन हुई? यह तो धोखा हुआ, डिसेप्शन हुआ- परिभाषा न हुई। क्योंकि इसमें से एक का भी पता नहीं है। आदमी को कुछ भी पता नहीं है, लेकिन काम तो चलाना पड़ेगा। इसलिए आदमी बेईमान शब्दों को रखकर काम चलाता है। उसके सब शब्द डिसेप्टिव हैं। उसके किसी शब्द में कोई भी अर्थ नहीं है। क्योंकि अपने शब्द में वह जिस शब्द से अर्थ बताता है, उस शब्द में भी उसको कोई अर्थ पता नहीं है। उसकी सब परिभाषाएं सर्कुलर हैं, वर्तुलाकार हैं। वह कहता है, बाएं यानी क्या? वह कहता है, जो दाएं नहीं है। और दाएं? वह कहता है, जो बाएं नहीं है। लेकिन इनमें से किसी को पता है कि बायां क्या है? यह आदमी की भाषा डायलेक्टिकल है। डायलेक्टिकल का मतलब यह कि जब आप पूछें 'अ' क्या, तो वह 'ब' की बात करता है। जब पूछें 'ब' क्या, तो वह 'अ' की बात करने लगता है। इससे भ्रम पैदा होता है कि सब पता है। पता कुछ भी नहीं है, सिर्फ शब्द पता हैं। लेकिन बिना शब्दों के काम नहीं चल सकता। राग है तो विराग है। लेकिन तीसरा शब्द कहां से लाएं? और तीसरा शब्द ही सत्य है। वह कहां से लाएं?- ओशो

मुंगेली में बड़ा घोटाला: धान स्टॉक जांच में 2.54 करोड़ की अनियमितता, केंद्र प्रभारी के खिलाफ केस

मुंगेली. जिले में धान खरीदी को लेकर बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। जिले के हथनीकला धान खरीदी केंद्र में पदस्थ प्रभारी विक्रम सिंह राजपूत पर करीब ₹2.54 करोड़ के धान गबन का आरोप लगा है। मामले में सिटी कोतवाली थाना में FIR दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। बता दें कि जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित शाखा मुंगेली में पदस्थ पर्यवेक्षक भरत लाल कौशिक ने इस पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने लिखित आवेदन में आरोप लगाया है कि आरोपी द्वारा कुल 8216.30 क्विंटल धान की हेराफेरी कर अमानत में खयानत की गई है, जिसकी कुल कीमत ₹2,54,70,530 है। हथनीकला धान खरीदी केंद्र. कलेक्टर के निर्देश पर गठित हुई जांच टीम भरत लाल कौशिक ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर (सहकारिता शाखा) मुंगेली द्वारा 30 मार्च 2026 को संयुक्त जांच दल गठित किया गया था। इस जांच दल में नायब तहसीलदार चंदन दुबे, सहकारिता विस्तार अधिकारी मिथलेश साहू, खाद्य निरीक्षक भानूप्रिया नंदकर, जिला सहकारी बैंक सरगांव के पर्यवेक्षक सुनील यादव और मंडी निरीक्षक शुभम पैकरा शामिल थे। टीम ने 8 अप्रैल 2026 को अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की। भौतिक सत्यापन में सामने आई गड़बड़ी जांच रिपोर्ट में भौतिक सत्यापन के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई। ऑनलाइन रिकॉर्ड में 9798.70 क्विंटल धान दर्शाया गया था, जबकि मौके पर केवल 7534 क्विंटल (18835 बोरी) धान ही मिला। इसके अलावा 682.30 क्विंटल का वजन शॉर्टेज पाया गया। इस प्रकार कुल 8216.30 क्विंटल धान की कमी सामने आई, जिसकी कीमत प्रति क्विंटल ₹3100 के हिसाब से ₹2,54,70,530 आंकी गई है। धान की किस्म में भी बड़ा अंतर जांच में यह भी पाया गया कि धान की किस्म में भारी अंतर है। ऑनलाइन रिपोर्ट के अनुसार मोटा धान 261.60 क्विंटल और सरना धान 9537.10 क्विंटल दर्ज था, जबकि मौके पर मोटा धान 1260.40 क्विंटल और सरना धान मात्र 322 क्विंटल पाया गया। इस तरह मोटा धान 998.80 क्विंटल अधिक और सरना धान 9215.10 क्विंटल कम मिला। नियमों का उल्लंघन, सिस्टम से छेड़छाड़ के मिले संकेत जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं भी सामने आईं। कंप्यूटर ऑपरेटर की अनुपस्थिति में डेटा एंट्री की गई, जबकि बारदाना प्रभारी की गैरमौजूदगी में धान की लोडिंग और रख-रखाव किया गया। साथ ही आरोपी और उसके पिता द्वारा अनियमित तरीके से कार्य संचालन किए जाने की बात भी सामने आई है। जांच के दौरान जवाब नहीं देने पर दर्ज हुई FIR जांच के दौरान आरोपी विक्रम सिंह राजपूत पिछले 3-4 दिनों से अनुपस्थित पाया गया। उसका मोबाइल फोन बंद मिला और घर पर नोटिस चस्पा करने के बाद भी वह उपस्थित नहीं हुआ। इससे जानबूझकर गड़बड़ी करने की आशंका और मजबूत हो गई है। सहायक आयुक्त सहकारिता द्वारा आरोपी को 10 अप्रैल 2026 को अंतिम अवसर देकर जवाब मांगा गया था, लेकिन निर्धारित समय सीमा में कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद नोडल अधिकारी के निर्देश पर 13 अप्रैल 2026 को सिटी कोतवाली थाना मुंगेली में FIR दर्ज कराई गई। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा जिले में लोक निर्माण विभाग के विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा जिले में लोक निर्माण विभाग के आधारभूत संरचना विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की कमिश्नर बंगला से ढेकहा तिराहे तक 700 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा फ्लाइओवर लक्ष्मण बाग, संस्‍कृत विश्‍वविद्यालय तक सहज एवं सुगम पहुंच मार्ग के लिये बिछिया नदी में बनेगा पुल भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय, भोपाल में रीवा जिले में लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत प्रस्तावित सड़क एवं आधारभूत संरचना विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी प्रस्तावों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र अंतिम रूप देकर टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ की जाए जिससे विकास कार्य समयबद्ध रूप से शुरू हो सकें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा में कमिश्नर बंगला से ढेकहा तिराहे तक 700 करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित फ्लाइओवर निर्माण कार्य पर विशेष चर्चा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि यह फ्लाइओवर वर्तमान यातायात दबाव को कम करने के साथ भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आधुनिक एवं दूरदर्शी ट्रैफिक मैनेजमेंट प्रणाली विकसित करेगा। इसके निर्माण से शहर में सुगम एवं व्यवस्थित आवागमन सुनिश्चित होगा तथा यातायात बाधाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने लक्ष्मण बाग से कुठुलिया मार्ग में बिछिया नदी पर प्रस्तावित पुल निर्माण कार्य की भी समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि कुठुलिया मार्ग का विकास लक्ष्मण बाग सहित संस्‍कृत विश्‍वविद्यालय तक सहज एवं सुगम पहुंच का मार्ग प्रशस्त करेगा। इससे विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं स्थानीय नागरिकों को आवागमन में विशेष सुविधा प्राप्त होगी। उन्होंने रिवर फ्रंट के सौंदर्यीकरण कार्य को भी परियोजना में शामिल करने के निर्देश दिए। बैठक में लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने प्रस्तावित परियोजनाओं की प्रगति एवं कार्ययोजना की जानकारी प्रस्तुत की।

परिसीमन में कोई बदलाव नहीं, दक्षिण राज्यों को नहीं होगा नुकसान, जानें किस राज्य को कितनी सीटें मिलेंगी

नई दिल्ली लोकसभा में सीटें बढ़ने की तैयारी है। गुरुवार को संसद में महिलाओं को आरक्षण देने के लिए बिल पेश होने जा रहा है। इसी बीच खबरें हैं कि सभी राज्यों में लोकसभा में हिस्सेदारी 50 फीसदी बढ़ जाएगी। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। विधेयकों में सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव दिया गया था, जिसे लेकर दक्षिण के कुछ राज्यों में सीटों की संख्या को लेकर चिंताएं बनी हुईं थीं। सरकार जो तीन विधेयक लाने जा रही है उनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 व केंद्र शासित कानून (संशोधन) विधेयक 2026 शामिल हैं। न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार के सूत्र बताते हैं कि लोकसभा में सभी राज्यों की हिस्सेदारी में 50 प्रतिशत का इजाफा होगा। सरकार महिलाओं के आरक्षण के लिए संविधान में संशोधन बिल ला रही है। इसके लिए सत्र 16 अप्रैल से शुरू हो रहा है, जो 18 अप्रैल तक चलेगा। दक्षिण राज्यों को क्या मिलेगा रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया, '2011 की जनगणना अब कोई जरूरी शर्त नहीं होगी। इसका मतलब है कि अनुपात के हिसाब से कुछ भी नहीं बदलेगा। इससे दक्षिण भारतीय राज्यों की यह चिंता दूर हो जाएगी कि संसद में उनकी हिस्सेदारी या सीटें कम हो सकती हैं।' उन्होंने कहा, 'दक्षिण भारतीय राज्यों के लिए कुछ भी नुकसान नहीं है। जो अनुपात आज है, वो बरकरार रहेगा।' दक्षिणी राज्यों की चिंता दक्षिणी राज्यों के कई नेता, खासकर तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश के नेताओं ने परिसीमन को लेकर चिंता जताई थी. उनका कहना था कि जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों को राजनीतिक रूप से नुकसान नहीं होना चाहिए. सरकारी सूत्रों का यह बयान इन चिंताओं का जवाब माना जा रहा है. सूत्रों ने स्पष्ट किया कि परिसीमन का उद्देश्य किसी राज्य को लाभ या नुकसान पहुंचाना नहीं है, बल्कि लोकसभा की क्षमता बढ़ाना और लोकतंत्र को और अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाना है. हालांकि, अंतिम रूप से सीटों का आवंटन और नए क्षेत्रों का निर्धारण परिसीमन आयोग द्वारा किया जाएगा. सरकार ने कहा है कि आयोग को भी मौजूदा अनुपात बनाए रखने के निर्देश दिए जाएंगे. यह फैसला संसद के विशेष सत्र में चर्चा के दौरान सामने आया है, जहां परिसीमन और महिलाओं के आरक्षण से संबंधित विधेयक पेश किए जाने की तैयारी है. सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह व्यवस्था संघीय ढांचे को मजबूत रखते हुए लोकसभा को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास है. दक्षिणी राज्यों को आश्वासन दिया गया है कि उनकी राजनीतिक आवाज कम नहीं होगी।  तमिलनाडु सीएम ने दी थी चेतावनी मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने मंगलवार को चेतावनी दी थी कि अगर परिसीमन प्रक्रिया में राज्य के हित को नुकसान पहुंचाने वाला कोई कदम उठाया गया या उत्तरी राज्यों की राजनीतिक ताकत में अनुचित वृद्धि की गई, तो तमिलनाडु में बड़े पैमाने पर आंदोलन होंगे, 'पूरी ताकत से विरोध प्रदर्शन' होंगे जिससे राज्य ठप पड़ सकता है। स्टालिन ने कहा कि देश को एक बार फिर '1950 और 1960 के दशक की द्रमुक देखने को मिल सकती है।' पहले भी लगाए थे आरोप स्टालिन ने 14 अप्रैल को आरोप लगाया था कि महिला आरक्षण पर मसौदा विधेयक से पता चलता है कि यह एक 'षड्यंत्र' है, जो परिसीमन लागू होने पर तमिलनाडु और उत्तरी राज्यों के बीच अंतर को बढ़ाएगा। तेलंगाना भी सक्रिय मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने दक्षिणी राज्यों और पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर एक 'हाइब्रिड मॉडल' का प्रस्ताव रखा है। जिसके तहत प्रस्तावित अतिरिक्त सीट में से 50 प्रतिशत सीट आनुपातिक आधार पर आवंटित की जाएंगी और शेष सीट GSDP (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) और अन्य मानदंडों के आधार पर आवंटित की जाएंगी।

पुलिस-एसटीएफ की संयुक्त छापेमारी, दो तस्कर गिरफ्तार

सुलतानपुर जिले में पुलिस व एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में दो तस्करों से 15 कुंतल 20 किलो गांजा बरामद हुआ है। इसे ट्रक में 50 बोरियों में लादकर लखनऊ ले जाया जा रहा था। तस्करों की पहचान मुजफ्फरनगर जिले के सिखरेड़ा के नासिर पुत्र अली हसन तथा लखनऊ के फतेहगंज पारा मोहन रोड निवासी वर्ष आर्या पुत्र जय नारायण के रूप में हुई है। सीओ सौरभ सावंत ने बताया कि पुलिस टीम को उड़ीसा से लखनऊ की ओर जा रहे एक ट्रक में भारी मात्रा में गांजा रखे होने की जानकारी मिली थी। इस पर कुड़वार व बंधुआकला पुलिस तथा एसओजी टीम ने लखनऊ-वाराणसी राजमार्ग पर रवनिया के पास बैरियर लगाकर ट्रक को राेक कर तलाशी ली। ट्रक में 50 बोरी में 15.20 कुंतल गांजा रखा हुआ था। ट्रक में सवार दोनों आरोपितों ने पूछताछ में बताया कि वे इसे लखनऊ में किसी व्यक्ति को देने जा रहे थे। उनके पास से दो मोबाइल फोन व 4150 रुपये नकद बरामद किया गया। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपितों के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत केस दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है। सड़क हादसे से खुला था गांजा तस्करी का राज सुलतानपुर: 11 अप्रैल को लंभुआ के बेदूपारा बाईपास पर दुर्घटनाग्रस्त कार से सात पैकेटों में रखा साढ़े छह किलो गांजा बरामद किया गया था। इस मामले में लखनऊ के ही दो युवक हर्ष यादव व अभिषेक अग्निहोत्री पकड़े गए थे। पूछताछ में दोनों ने बताया था कि वे अपने साथियों रुद्रा और मनिया के साथ जौनपुर के बदलापुर से गांजा खरीदकर लखनऊ ले जा रहे थे। वहां वे पैकेट बनाकर दो से ढाई सौ रुपये में नशेड़ियों को बेचते थे।  

अंजलि भाभी का गुस्स,फर्जी अकाउंट बनाने वालों को दी सख्त चेतावनी

मशहूर एक्ट्रेस नेहा मेहता को पॉपुलर टीवी शो 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' से घर-घर में पहचान मिली. वो शो में अंजलि भाभी के किरदार में दिखी थीं. इन दिनों एक्ट्रेस टीवी सीरियल 'इत्ती सी खुशी' में दिखाई दे रही हैं. बीते कुछ समय से उनका लुक भी काफी ज्यादा बदल गया है. वहीं, उनके नाम से कई फेक आईडी भी बन गई हैं, जिसपर अब एक्ट्रेस ने रिएक्ट किया है. एक्ट्रेस ने किसे दी वॉर्निंग? एक्ट्रेस नेहा मेहता ने 'बजोका स्पॉटलाइट' संग बातचीत में बताया कि कई लोग उनके नाम से सोशल मीडिया पर फेक आईडी चला रहे हैं. उन्होंने ऐसे लोगों को चेतावनी भी दी. उन्होंने कहा कि उनसे पंगा न लें, वरना वो हालत खराब कर देंगी. दरअसल, एक्ट्रेस से इंटरव्यू के दौरान पूछा गया कि आपको रील पसंद या एल्बम? इसपर उन्होंने कहा- रील तक तो हम पहुंचे ही नहीं हैं. हमारा सोशल मीडिया देख लीजिए. हमसे ज्यादा हमारी फेक आईडी और फैन आईडी… पता नहीं क्या-क्या बनी हुई हैं. वही, लोग हमारे नाम से कमा रहे हैं और मिलियन्स में कमा रहे हैं. लेकिन जिस दिन रेड पड़ेगी ना…इंस्पेक्टर की बेटी हूं, जिस दिन रेड मारूंगी उस दिन सभी का हाल खराब हो जाएगा. बदल गया लुक वहीं, बीते कुछ सालों में एक्ट्रेस का लुक भी काफी ज्यादा बदल गया है. उनका बदला लुक देख फैंस हैरान नजर आ रहे हैं. कई लोग उनके पोस्ट पर कमेंट करके उनके बदले लुक पर भी सवाल कर रहे हैं. नेहा मेहता की बात करें तो 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' शो छोड़ने के बाद उन्होंने इंडस्ट्री से ब्रेक ले लिया था. करीब पांच साल बाद उन्होंने टीवी शो 'इत्ती सी खुशी' से कमबैक किया है. इस शो में उनके किरदार को काफी पसंद किया जा रहा है. उन्हें फैंस को पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिला है.