samacharsecretary.com

गैस प्रभावित क्षेत्र में डेढ़ फीट जमीन धंसी, बीसीसीएल ने शुरू की जांच

 धनबाद झारखंड के धनबाद जिले के केंदुआडीह कोलियरी के गैस प्रभावित क्षेत्र ओल्ड जीएम बंगला के पास धनबाद केंदुआ मुख्य मार्ग पर बुधवार को कई जगह करीब डेढ़ फीट जमीन धंस गई. घटना से गैस प्रभावित क्षेत्र में भू- धसान का खतरा बढ़ गया है. हालांकि इस घटना में जान माल की क्षति नहीं हुई है. सुरक्षा के मद्देनजर रास्ता किया गया डायवर्ट स्थानीय प्रशासन ने मामले को देखते हुए फिलहाल सुरक्षा के लिए दरार क्षेत्र को बैरिकेडिंग कर आवागमन पुराना थाना के रास्ते डायवर्ट कर दिया है. बीसीसीएल प्रबंधन ने लिया जायजा इधर घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय बीसीसीएल प्रबंधन भी घटना स्थल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया. बीसीसीएल प्रबंधन और प्रशासन मामले की लगातार मॉनिटरिंग करने में जुटी हुई है. सड़क की जमीन धसने वाले जगह को बीसीसीएल ने पहले से ही भू धसान और अग्नि प्रभावित क्षेत्र घोषित कर रखा है. सड़क की दरार के जद में कुछ घर भी आ सकते है, जिसका आकलन करने में बीसीसीएल प्रबंधन जुटा हुआ है. जानकारी के अनुसार बीसीसीएल प्रबंधन गैस प्रभावित क्षेत्र में रहनेवाले दर्जनों घरों के परिवारों को शिफ्टिंग कराने को प्रयासरत है. स्थानीय लोगों में आक्रोश स्थानीय लोगो ने सड़क पर पहुंच बीसीसीएल के कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर विरोध जता रहे है. स्थानीय लोगों का कहना है बीसीसीएल पिछले चार माह से गैस कि समस्या से लोगो निजात दिलाने के लिए वैज्ञानिकों कि टीम के साथ कार्य कर रही है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं निकाल पाई. ऐसे में समय रहते ठोस कदम नहीं उठाया गया तो  बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता है.   अधिकारियों का बयान इधर, पीबी एरिया जीएम जीसी साहा ने कहा कि गैस प्रभावित क्षेत्र में मुख्य मार्ग में सड़क के दोनों ओर दरार के साथ जमीन दब गई है. जमीन के नीचे पुराना गैलरी चला हुआ है, जिसका पिलर भूमिगत आग से ध्वस्त होने के भू धसान का खतरा है. गैलरी के जद में कई घर भी आ सकते है, जिनका आकलन किया जा रहा है. प्रशासन को भी मामले से अवगत करा दिया गया है. फिलहाल सड़क डायवर्ट कर दिया गया है.

ICMR अध्ययन में यूपी को हाई रिस्क जोन घोषित, स्वास्थ्य पर चिंता बढ़ी

 गोरखपुर  भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) के अध्ययन ने उत्तर प्रदेश में हेपेटाइटिस ए के बढ़ते प्रकोप को लेकर गंभीर चिंता जताई है। देश के 21 राज्यों में कराए गए इस व्यापक सर्वेक्षण में क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान केंद्र (आरएमआरसी) गोरखपुर की भी अहम भूमिका रही। अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में संक्रमण की दर अन्य राज्यों की तुलना में कहीं अधिक है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। इसलिए इस प्रदेश को हाई रिस्क जोन में रखा गया है। यहां 97 प्रतिशत नमूने पाजिटिव पाए गए। देश में संक्रमण दर 90 प्रतिशत पाई गई। सभी 21 राज्यों से 14778 नमूने लिए गए, इनमें से 12236 नमूने पाजिटिव मिले। उत्तर प्रदेश के नौ जिलों से कुल 1957 लोगों के नमूने एकत्र कर उनकी जांच की गई। इसमें से 1879 अर्थात 97 प्रतिशत नमूने हेपेटाइटिस ए पाजिटिव पाए गए। यह आंकड़ा राज्य में संक्रमण के व्यापक फैलाव की ओर संकेत करता है। इसके विपरीत, अन्य राज्यों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर पाई गई। सबसे कम केरल में 44.8 प्रतिशत और बंगाल में 63.1 प्रतिशत नमूने पाजिटिव मिले। अन्य राज्यों में संक्रमण दर इससे ज्यादा रही। इस महत्वपूर्ण अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है। इसे दिसंबर 2025 में लंदन के जर्नल द लांसेंट रिजनल हेल्थ ने प्रकाशित किया है। रिपोर्ट के आधार पर आइसीएमआर ने भारत सरकार को सुझाव दिया है कि हेपेटाइटिस ए के टीके को नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया जाए, ताकि भविष्य में इस बीमारी के प्रकोप को रोका जा सके। विशेषज्ञ इसे नान अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) का बड़ा कारण मान रहे हैं। एनएएफएलडी पर आरएमआरसी की एक टीम लखनऊ के नगराम क्षेत्र में अध्ययन कर रही है। दूसरी टीम लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर व महराजगंज के थारू समुदाय में हेपेटाइटिस की जांच कर रही है।

अंगदान में हरियाणा की नई मिसाल: 7940 लोगों ने किया रजिस्ट्रेशन, जींद जिला सबसे आगे

रोहतक. हरियाणा में अंगदान को लेकर लोगों की सोच में तेजी से बदलाव आ रहा है। प्रदेश में कुल 7940 लोगों ने अंगदान का संकल्प लिया है। जबकि हमारे पड़ोसी पंजाब का आंकड़ा हमसे काफी अच्छा है। पंजाब में पंजीकरण 11274 तक पहुंच चुका है। अभी दोनों राज्यों के बीच में पंजीकरण का अंतर 3334 का है। इसलिए इस अभियान को तेजी से गति देने की जरूरत है। हालांकि जिलों के बीच आंकड़ों में बड़ा अंतर भी सामने आया है, जो जागरूकता के असमान स्तर को दर्शाता है। प्रदेश में जींद जिला 1076 पंजीकरण के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद गुरुग्राम के 973 पंजीकरण और फरीदाबाद के 791 पंजीकरण का नंबर आता है। सबसे निचले पायदान पर नूंह के 48, चरखी दादरी के 21 और पलवल के 21 पंजीकरण हैं, जहां जागरूकता अभियान की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निचले पायदान पर खड़े जिलों में जागरूकता बढ़ाई जाए तो हरियाणा इस क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है। फिलहाल आंकड़े यह जरूर संकेत दे रहे हैं कि प्रदेश में अंगदान को लेकर डर से संकल्प की ओर यात्रा शुरू हो चुकी है, लेकिन इसे जनआंदोलन बनाने के लिए अभी और प्रयास जरूरी हैं। नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन के ताजा आंकड़ों के मुताबिक मंगलवार को प्रदेश में केवल 2 नए पंजीकरण हुए, जिनमें गुरुग्राम और अंबाला से एक-एक व्यक्ति शामिल है। यह संख्या बताती है कि शुरुआती उत्साह के बाद अब अभियान को और गति देने की जरूरत है। उम्र के आधार पर देखें तो युवा वर्ग इस अभियान में सबसे ज्यादा सक्रिय है। विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं में जागरूकता और सोशल मीडिया की पहुंच इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण है। खासकर युवा वर्ग और पुलिस-सेना जैसे अनुशासित बलों के परिवार सबसे आगे आ रहे हैं। प्रदेश में सोटो के अनुसार ब्रेन डेड की स्थिति में व्यक्ति की वापसी संभव नहीं होती, ऐसे में अंगदान जीवनदान का सबसे बड़ा माध्यम बन सकता है। यही कारण है कि अब पुलिस और सेना से जुड़े परिवारों के साथ-साथ युवा वर्ग भी बढ़-चढ़कर इस अभियान में भाग ले रहा है। राज्य में अंगदान के मामलों में भी धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल रहा है। वर्ष 2024 में जहां केवल 2 अंगदान हुए थे, वहीं 2026 में यह आंकड़ा 4 से अधिक हो चुका है। साथ ही अब तक करीब 35 किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। इस बदलाव के पीछे स्टेट आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन (सोटो) की अहम भूमिका रही है। सोटो ने पिछले दो वर्षों में गांव-गांव तक पहुंच बनाते हुए नुक्कड़ नाटक, स्कूल-कालेज सेमिनार और पंचायत बैठकों के जरिए लोगों को जागरूक किया है। जिला     कुल पंजीकरण     स्थिति जींद     1076     प्रथम (अग्रणी) गुरुग्राम     973     द्वितीय फरीदाबाद     791     तृतीय भिवानी     516     – रोहतक     506     – महेंद्रगढ़     481     – पंचकूला     437     – हिसार     419     – झज्जर     402     – सोनीपत     375     – रेवाड़ी     350     – सिरसा     287     – अंबाला     268     – पानीपत     182     – फतेहाबाद     174     – कैथल     171     – यमुनानगर     159     – करनाल     150     – कुरुक्षेत्र     133     – नूंह     48     सबसे कम चरखी दादरी     21     सबसे कम पलवल     21     सबसे कम कुल योग     7940       डॉ. एचके अग्रवाल पीजीआइएमएस से मात्र 4 दिन के अंतराल में दो बार ग्रीन कोरिडोर बनाने और आपके समाचारों के सहयोग से लोगों में अंगदान की जागरुकता को लेकर डर कम हो रहा है। पहले जहां लोग भ्रांतियों के कारण इससे दूर रहते थे, वहीं अब वे खुद सोटो कार्यालय में संपर्क कर प्रक्रिया की जानकारी ले रहे हैं। अंगदान एक ऐसा फैसला है, जिससे एक व्यक्ति 8 लोगों की जान बचा सकता है। मौत अटल है, लेकिन अंगदान के जरिए हम किसी के जीवन का आधार बन सकते हैं।

‘नारी शक्ति’ को मिलेगा संसद में स्वर: लक्ष्मी वर्मा ने सीएम साय के पत्र पर जताया समर्थन

पलारी/पटना. छत्तीसगढ़ की राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा ने 16 अप्रैल 2026 से शुरू हो रहे संसद के विशेष सत्र में ‘नारी शक्ति वंदन विधेयक’ को लेकर बड़ा बयान दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उन्हें पत्र लिखकर इस ऐतिहासिक अवसर पर सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया था, जिसके जवाब में लक्ष्मी वर्मा ने कहा, “यह सिर्फ एक विधेयक नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के सशक्तिकरण का संकल्प है। मैं संसद में पूरी ताकत से इसके पक्ष में आवाज उठाऊंगी।” सीएम साय ने पत्र में कहा था कि 2029 के चुनावों से पहले महिला आरक्षण को प्रभावी बनाना समय की मांग है। छत्तीसगढ़ में पहले से ही स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण लागू है और अब देश स्तर पर भी यह बदलाव जरूरी है। इस पर लक्ष्मी वर्मा ने कहा, “मुख्यमंत्री का मार्गदर्शन प्रेरणादायक है। मैं गर्व से कहती हूं कि छत्तीसगढ़ ने महिलाओं को जो सम्मान दिया है, वह पूरे देश के लिए मिसाल है।” अपने पत्र में लक्ष्मी वर्मा ने लिखा, “एक महिला जनप्रतिनिधि होने के नाते मेरे लिए यह गौरव का विषय है कि मेरा पहला संसदीय सत्र इस ऐतिहासिक विधेयक से जुड़ा है। मैं पूरी सक्रियता, गंभीरता और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ अपनी भूमिका निभाऊंगी।” उन्होंने आगे कहा – “आइए, हम सभी मिलकर एक ऐसे भारत का निर्माण करें, जहां महिलाओं को समान अवसर, सम्मान और सशक्त भागीदारी मिले। यही सच्चे लोकतंत्र की कसौटी है।” गौरतलब है कि 16 अप्रैल को होने वाला संसद सत्र महिला आरक्षण को लेकर बेहद अहम माना जा रहा है। लक्ष्मी वर्मा ने सीएम साय को विश्वास दिलाया है कि वह इस दिशा में हर संभव भूमिका निभाएंगी।

पंजाब किंग्स का अजेय अभियान, मुंबई इंडियंस के लिए जीत जरूरी

नई दिल्ली पिछले कुछ मैचों में निराशाजनक प्रदर्शन करने वाली मुंबई इंडियंस की टीम स्टार बल्लेबाज रोहित शर्मा की संभावित गैरमौजूदगी के बावजूद गुरुवार को पंजाब किंग्स से जीतने के लिए जोर लगाएगी। पंजाब की टीम आईपीएल 2026 में अब तक अजेय चल रही है। 5 बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस अभी पॉइंट्स टेबल में नौवें पायदान पर है। पंजाब के खिलाफ मैच में रोहित शर्मा के खेलने पर सस्पेंस बना हुआ है। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) के खिलाफ पिछले मैच के दौरान हैमस्ट्रिंग में खिंचाव के कारण हिटमैन लंगड़ाते हुए मैदान से बाहर चले गए थे। मुंबई को अब हर हाल में जीत की दरकार है और ऐसे में यह देखना होगा कि रोहित इस मैच के लिए उपलब्ध रहते हैं या नहीं। वैसे अगर मुंबई को अगर वापसी करनी है तो उसके सभी खिलाड़ियों को अपना योगदान देना होगा। मुंबई ने पिछले 13 सत्र में पहली बार अपना शुरुआती मैच जीता था लेकिन इसके बाद उसका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। मुंबई इंडियंस का पावरप्ले में प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है और उसे इस क्षेत्र में काम करने की जरूरत है। उसने चार मैचों में पहले छह ओवरों के महत्वपूर्ण चरण में केवल तीन विकेट लिए हैं। इसमें राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ बारिश से प्रभावित मैच भी शामिल है जिसमें पावरप्ले 3.2 ओवर का था। जसप्रीत बुमराह रन रोकने में तो सफल रहे हैं, लेकिन यह स्टार भारतीय तेज गेंदबाज अब तक चार मैचों में विकेट नहीं ले पाया है। ट्रेंट बोल्ट और हार्दिक पांड्या जैसे अनुभवी गेंदबाजों की मौजूदगी के बावजूद मुंबई इंडियंस के गेंदबाज अभी तक प्रभावित नहीं कर पाए हैं। यहां तक की बल्लेबाजी में भी मुंबई इंडियंस ने पावरप्ले का पूरा फायदा नहीं उठा पाया है। इससे उसके मध्यक्रम पर दबाव बन रहा है। उसके मध्यक्रम में सूर्यकुमार यादव और तिलक वर्मा भी शामिल हैं, जिन्होंने काफी हद तक निराश किया है। भारत की टी20 टीम के कप्तान सूर्यकुमार ने एक अर्धशतक लगाया है लेकिन तिलक ने अब तक 20, 00, 14 और 01 रन ही बनाए हैं। टी20 विश्व कप में अच्छा प्रदर्शन करने वाले इंग्लैंड के ऑलराउंडर विल जैक्स की अनुपलब्धता मुंबई इंडियंस के लिए एक और समस्या है। मुंबई इंडियंस को लगातार तीन मैचों में हार का सामना करना पड़ा है। इसके लिए कुछ खिलाड़ियों की गैर मौजूदगी जिम्मेदार नहीं है बल्कि टीम का अपनी क्षमता के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर पाना है। आरसीबी के खिलाफ मैच में मुंबई इंडियंस के गेंदबाजों ने लगातार ऐसी गेंदें फेंकीं जिन्हें बल्लेबाजों ने बाउंड्री के पार पहुंचाया, जबकि उसके बल्लेबाज पावरप्ले में दबाव नहीं बना सके। मुंबई के दोनों स्पिनर मयंक मार्कंडे और मिचेल सैंटनर को हर बार अपनी लेंथ से भटकने के कारण नुकसान उठाना पड़ा। पिछले सत्र की तरह श्रेयस अय्यर की अगुवाई वाली पंजाब किंग्स ने एक बार फिर अपना अच्छा प्रदर्शन जारी रखा है और उसे हराना आसान नहीं होगा। पंजाब किंग्स के बल्लेबाजों ने अभी तक अच्छा प्रदर्शन किया है। इसका एक नमूना सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ पिछले मैच में देखने को मिला जिसमें उसने पावरप्ले में बिना किसी नुकसान के 93 रन बनाए थे। प्रभसिमरन सिंह और प्रियांश आर्य की जोड़ी खतरनाक नजर आ रही है, जबकि अय्यर के आत्मविश्वास और कूपर कोनोली के आने से उसकी टीम और भी मजबूत हो गई है। पंजाब किंग्स की गेंदबाजी की बात करें तो उसके मुख्य गेंदबाज अर्शदीप सिंह अभी तक अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं। उन्होंने अब तक खेले गए चार मैचों में 84 गेंदों पर 149 रन लुटाए हैं और केवल दो विकेट ही लिए हैं। टीम इस प्रकार हैं: मुंबई इंडियंस: हार्दिक पांड्या (कप्तान), क्विंटन डीकॉक (विकेटकीपर), दानिश मालेवार, रॉबिन मिंज (विकेटकीपर), रयान रिकेलटन (विकेटकीपर), शेरफेन रदरफोर्ड, रोहित शर्मा, सूर्यकुमार यादव, तिलक वर्मा, अथर्व अंकोलेकर, राज बावा, कॉर्बिन बॉश, विल जैक्स, मयंक रावत, नमन धीर, मिचेल सैंटनर, शार्दुल ठाकुर, अश्विनी कुमार, ट्रेंट बोल्ट, जसप्रीत बुमराह, दीपक चाहर, एएम गजनफर, मयंक मार्कंडे, मो. इज़हार, रघु शर्मा। पंजाब किंग्स: श्रेयस अय्यर (कप्तान), प्रियांश आर्य, पायला अविनाश, हरनूर सिंह, प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर), विष्णु विनोद (विकेटकीपर), नेहल वढेरा, अजमतुल्लाह उमरजई, कूपर कोनोली, मार्को यानसन, मुशीर खान, मिशेल ओवेन, शशांक सिंह, मार्कस स्टोइनिस, सूर्यांश शेडगे, अर्शदीप सिंह, जेवियर बार्टलेट, युजवेंद्र चहल, प्रवीण दुबे, बेन द्वारशुइस, लॉकी फर्ग्यूसन, हरप्रीत बराड़, विशाल निशाद, विजयकुमार वैशाक, यश ठाकुर। समय: मैच भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे शुरू होगा।

AAP का चौंकाने वाला कदम: राघव चड्ढा की सुरक्षा हटाई, पंजाब में सियासी हलचल तेज

चंडीगढ़. आम आदमी पार्टी (आप) और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बीच चल रहा विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। पहले पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता पद से हटाया और अब पंजाब सरकार ने उनकी सुरक्षा भी वापस ले ली है। इस घटनाक्रम ने सियासी गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। चंडीगढ़ से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुआई वाली पंजाब सरकार ने राघव चड्ढा को दी गई पंजाब पुलिस की सुरक्षा हटा दी है। गौरतलब है कि चड्ढा को पंजाब के सह-प्रभारी और राज्यसभा सांसद होने के नाते यह सुरक्षा मिली हुई थी। सुरक्षा वापसी को पार्टी के अंदर बढ़ती दूरी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले 2 अप्रैल को आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया था। उनकी जगह पंजाब से सांसद अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को भी सूचित कर दिया कि अब चड्ढा को पार्टी कोटे से बोलने का समय न दिया जाए। इस फैसले के बाद से ही चड्ढा और पार्टी नेतृत्व के बीच बयानबाजी तेज हो गई थी। राघव चड्ढा ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा था कि उन्हें “खामोश” करने की कोशिश की गई है, लेकिन वे हार मानने वालों में नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि उनकी खामोशी को कमजोरी न समझा जाए। इसके जवाब में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज, आतिशी और खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान खुलकर सामने आए और चड्ढा पर पार्टी लाइन से हटने के आरोप लगाए। इसी बीच दिल्ली के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर दावा किया कि केंद्र सरकार राघव चड्ढा को जेड प्लस सुरक्षा देने की तैयारी में है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर केंद्र सरकार चड्ढा पर इतनी मेहरबान क्यों दिख रही है। हालांकि, चड्ढा के करीबी सूत्रों का कहना है कि अभी उन्हें केंद्र से कोई सुरक्षा नहीं मिली है, लेकिन जल्द ऐसी संभावना बन सकती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उपनेता पद से हटाने और सुरक्षा वापस लेने जैसे फैसले पार्टी के भीतर गहराते मतभेदों की ओर इशारा करते हैं। वहीं, केंद्र से संभावित सुरक्षा को लेकर उठे सवालों ने इस पूरे विवाद को और पेचीदा बना दिया है। फिलहाल, राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच बढ़ती दूरी ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में यह सियासी टकराव और तेज हो सकता है।

रणधीर वर्मा चौक पर प्रदर्शन, निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ विरोध

 धनबाद धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर झारखंड अभिभावक महासंघ ने एकदिवसीय धरना दिया। धरना मे झारखंड अभिभावक महासंघ के अध्यक्ष पप्पू सिंह ने छौ घंटे का उपवास धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर झारखंड अभिभावक महासंघ के बैनर तले एकदिवसीय धरना का आयोजन किया गया. इस धरना का मुख्य मुद्दा निजी विद्यालयों द्वारा की जा रही अवैध शुल्क वसूली और न्यायालय तथा न्यायाधिकरण के आदेशों की अनदेखी था. बड़ी संख्या में अभिभावक इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और अपनी नाराजगी जाहिर की. महासंघ अध्यक्ष ने रखा छह घंटे का उपवास धरना के दौरान महासंघ के अध्यक्ष पप्पू सिंह ने छह घंटे का उपवास भी रखा. उन्होंने कहा कि अभिभावकों के हितों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उनके उपवास को बाद में झारखंड ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड की सदस्य श्वेता किन्नर ने जूस पिलाकर समाप्त कराया. अवैध शुल्क वसूली पर गंभीर आरोप अभिभावकों का आरोप है कि जिले के अधिकांश निजी विद्यालय झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण के आदेशों का उल्लंघन कर मनमानी फीस वसूल रहे हैं. स्कूल “री-एडमिशन” के नाम पर विभिन्न प्रकार के शुल्क जैसे परीक्षा शुल्क, विकास शुल्क, वार्षिक शुल्क, लाइब्रेरी शुल्क और खेलकूद शुल्क के रूप में भारी रकम वसूल रहे हैं, जो पूरी तरह से नियमों के खिलाफ है. जबरन किताब और सामान खरीदने का दबाव धरना में यह भी आरोप लगाया गया कि कई विद्यालय अभिभावकों को चिन्हित दुकानों से ही किताबें, कॉपियां और स्टेशनरी खरीदने के लिए मजबूर करते हैं. इतना ही नहीं, जूते, मोजे और अन्य सामग्री भी तय दुकानों से खरीदने का दबाव बनाया जाता है. यह प्रथा न केवल अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डालती है, बल्कि नियमों का भी उल्लंघन है. कानूनी प्रावधानों की अनदेखी अभिभावकों ने बताया कि यह सभी गतिविधियां झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम, 2017 के खिलाफ हैं. साथ ही शिकायत वाद संख्या 01/2005, एक्जीक्यूशन केस 1/2005 और शिकायत वाद संख्या 8/2008 में दिए गए निर्देशों की भी अवहेलना हो रही है. इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है. प्रशासन से की गई प्रमुख मांगें झारखंड अभिभावक महासंघ ने जिला प्रशासन से कई मांगें रखीं. इनमें निजी विद्यालयों की शुल्क संरचना की जांच, अवैध वसूली पर रोक, किताब-कॉपी और अन्य सामग्री की जबरन खरीद पर प्रतिबंध और दोषी स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शामिल है. महासंघ का कहना है कि इन मांगों को जल्द पूरा किया जाना चाहिए. चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी धरना के दौरान महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि चार दिनों के भीतर जिला प्रशासन अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन के साथ बैठक कर कोई समाधान नहीं निकालता है, तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो यह आंदोलन व्यापक जनआंदोलन का रूप ले सकता है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी. सैकड़ों अभिभावकों की रही भागीदारी इस धरना में महासंघ के महासचिव मनोज मिश्रा, वरीय उपाध्यक्ष मुकेश पाण्डेय, कोषाध्यक्ष प्रेम ठाकुर, मीडिया प्रभारी रतिलाल महतो सहित कई पदाधिकारी और सैकड़ों अभिभावक शामिल हुए. सभी ने एकजुट होकर निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ आवाज उठाई. इस धरना-प्रदर्शन में दिलीप सिंह, उदय प्रताप सिंह, बॉबी पाण्डेय, पूजा रत्नाकर, पिंकी सिंह, सोहराब खान, जीतेन्द्र अग्रवाल, रवि कुमार, टिंकू सरकार, मिहिर दत्ता, मगधेश कुमार, रविंदरनाथ सोनार, अभिषेक सिंह, भगवान दास शर्मा, तारकेश्वर तिवारी, रोबिन धिवर, श्याम पाण्डेय, मंटू सिंह, गणेश चौरसिया, प्रभात सूरौलिया, अजय वर्मा, शालिनी मिश्रा, प्रवीण गोधा, अविनाश पाण्डेय, कुल्लू चौधरी, प्रेम पाण्डेय, धीरेन्दर ब्रह्मचारी, विनय अग्रवाल, विक्की जायसवाल, श्रीकांत रक्षित, कन्हैया कुमार, सुकुमार कुम्भकार, सचिन ठाकुर, सत्येंदर पाण्डेय, राज गुप्ता,सुरेश यादव आदि भी उपस्थित थे.

किसानों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

किसानों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसानों को सोलर पम्प उपयोग के लिए करें प्रोत्साहित योजनाओं को समयबद्ध कर लाएं परिणाम किसानों को ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने के लिए संभाग एवं जिला स्तर पर हों कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग की योजनाओं की समीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों को निर्बाध रूप से सस्ती बिजली सुलभ कराना हमारी सरकार की प्राथमिकता है। इस काम केलिए सरकार किसानों को हर जरूरी मदद देने को तैयार है। किसानों को सस्ती बिजली मिलेगी, तो वे अपना उत्पादन भी बढ़ा सकेंगे और प्रदेश की प्रगति में भी योगदान दे सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप ऊर्जा प्राप्ति के लिए उन्हें स्वयं ऊर्जा उत्पादक बनाया जाए। इसके लिए किसानों को हरित ऊर्जा उत्पादन से जोड़ा जाए। ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाकर ही हम किसानों का जीवन स्तर बेहतर बना सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के किसानों को सोलर पम्प का उपयोग करने के लिए हर तरीके से प्रोत्साहित किया जाए। किसानों को जो इससे जुड़ना चाहते हैं, विभाग उनका हरसंभव सहयोग और मार्गदर्शन भी करे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मंत्रालय में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग की प्रचलित योजनाओं की अद्यतन प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों से कहा कि राज्य के हित में किसानों और नागरिकों सभी को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लक्ष्य के लिए समर्पित और फोकस्ड होकर आगे बढ़ें। किसानों को सोलर पम्प से जोड़ने के साथ-साथ प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना की प्रगति में भी तेजी लाएं। उन्होंने कहा कि इस वित्तीय वर्ष के अंत तक 2 लाख से अधिक किसानों को सोलर पम्प से जोड़ने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ें। विभाग अपनी योजनाओं के वार्षिक लक्ष्यों की समीक्षा करें और नई जरूरतों के मुताबिक इन लक्ष्यों में वृद्धि करें, ताकि कम समय में अधिकतम लोगों को लाभ मिले। इसके लिए विभाग अपनी योजनाओं को टाइम फ्रेम में लेकर आएं और तय समय सीमा में ही लक्ष्यों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करे। इससे तेज और अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे। निकाय पदाधिकारियों के साथ भोपाल में होगा एक दिन का उन्मुखीकरण कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी नगरीयनिकाय कचरा बेचकर और प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना (रूफ टॉप स्कीम) में तेजी से प्रगति लाकर अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। नगरीय निकायों के पदाधिकारियों एवं अधिकारियों को इस विषय में प्रशिक्षण देने के लिए भोपाल में एक दिन का उन्मुखीकरण कार्यक्रम किया जाए। यह कार्यक्रम जल्दी ही किया जाए, ताकि निकायों को काम करने के लिए अधिकतम समय मिल सके। राज्य के ऊर्जा हितों का रखें विशेष ध्यान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उत्तरप्रदेश सरकार के साथ मिलकर मुरैना में 2 हजार मेगावॉट (2 गीगावॉट) की अल्ट्रा मेगा रिन्यूएबल एनर्जी पावर पार्क की स्थापना की प्रगति की जानकारी लेकर कहा कि इस मेगा परियोजना में राज्य के ऊर्जा हितों का विशेष ध्यान रखा जाए। अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मनु श्रीवास्तव ने बताया कि उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा मात्र पीक पीरियड में ही ग्रीन एनर्जी सप्लाय की मंशा व्यक्त की गई है। इस संबंध में उत्तरप्रदेश सरकार के वरिष्ठतम विभागीय अधिकारियों के साथ समुचित समन्वय किया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) प्रोडक्शन के लिए तय किए गए लक्ष्यों को और भी परिशोधित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना (कुसुम बी) में अब तक 27 हजार 100 सोलर पम्प स्थापित किए जा चुके हैं। अगले दो साल में 4 लाख पम्पों को सौर ऊर्जीकृत करने का लक्ष्य है। इसके क्रियान्वयन के लिए विभाग ने 36 इकाईयां चुन ली हैं। इस योजना के पहले चरण में विभाग को एक लाख आवेदन मिल चुके हैं। अपर मुख्य सचिव श्रीवास्तव ने बताया कि सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना (कुसुम सी) के तहत विभाग ने लगभग 10 लाख किसानों को सौर ऊर्जीकरण से जुड़ने के लिए 493 सब स्टेशनों के जरिए किसानों को दिन के समय भी बिजली उपलब्ध कराने का बड़ा लक्ष्य लिया है। अब तक 2.50 लाख पम्प इंस्टाल कर दिये गये हैं। विभाग का लक्ष्य किसानों को ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक रूप से समर्थ बनाना भी है। सौर ऊर्जीकरण के लिए विभाग ने मासिक प्लान भी तैयार कर लिया है। रूफ टॉप स्कीम पर विभाग ने विशेष ध्यान केन्द्रित किया है। बैठक में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा एवं मुख्यमंत्री कार्यालय) नीरज मंडलोई, वित्त सचिव लोकेश जाटव, मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम के प्रबंध संचालक अमनवीर सिंह बैस सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

आशा भोंसले को मोहन यादव सरकार की बड़ी श्रद्धांजलि, मध्य प्रदेश सरकार शुरू करेगी राष्ट्रीय सम्मान

भोपाल भारतीय संगीत के स्वर्णिम युग की एक और महान आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई है। रविवार, 12 अप्रैल 2026 को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में 92 वर्ष की आयु में सुर सम्राज्ञी आशा भोंसले का निधन हो गया। मध्य प्रदेश सरकार ने इस महान हस्ती की विरासत को संजोने और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देने के लिए उनके नाम पर एक विशेष 'राष्ट्रीय पुरस्कार' शुरू करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। लता मंगेशकर के बाद अब आशा भोंसले के नाम पर सम्मान मध्य प्रदेश के संस्कृति और पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने पुष्टि की है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ इस प्रस्ताव पर अंतिम चर्चा के बाद पुरस्कार की रूपरेखा तय की जाएगी। मंत्री लोधी के अनुसार, 'राज्य में पहले से ही लता मंगेशकर के नाम पर राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया जाता है। अब उनकी छोटी बहन और संगीत जगत की दिग्गज आशा भोंसले के नाम पर पुरस्कार स्थापित करना एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर होगा।' प्रस्तावित आशा भोंसले एक्सीलेंस अवॉर्ड का उद्देश्य न केवल स्थापित कलाकारों को सम्मानित करना होगा, बल्कि इसके जरिए उभरते हुए गायकों को नकद पुरस्कार, प्रदर्शन के अवसर और मेंटरशिप भी प्रदान की जाएगी। यह कदम मध्य प्रदेश सरकार के उस अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत राज्य की सांस्कृतिक विरासत और संगीत प्रतिभाओं को वैश्विक मंच दिया जा रहा है। आठ दशकों का सफर और 12,000 गीतों का जादू आशा भोंसले का संगीत सफर किसी चमत्कार से कम नहीं रहा। 1943 में मात्र 10 साल की उम्र से गायकी शुरू करने वाली आशा ताई ने आठ दशकों के करियर में कई भाषाओं में 12,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए, जिसके लिए उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है। उनकी बहुमुखी आवाज ने फिल्मी गीतों से लेकर गजल, भजन और पॉप संगीत तक, हर विधा को जीवंत किया। साल 2000 में उन्हें दादा साहब फाल्के और 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। आशा भोंसले केवल एक गायिका नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की एक जीवंत संस्था थीं। उनके नाम पर पुरस्कार शुरू करना मध्य प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। यह सम्मान न केवल उनकी यादों को संजोएगा, बल्कि संगीत की दुनिया में नए सितारों को चमकने का मौका देगा। धर्मेंद्र सिंह लोधी, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री, मध्य प्रदेश अधिकारियों का मानना है कि यह पुरस्कार आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बनेगा। जिस तरह आशा ताई ने अपनी मेहनत से एक अलग पहचान बनाई, यह पुरस्कार भी संगीत की नई पौध को उसी ऊंचाई तक पहुंचने का हौसला देगा। हालांकि पुरस्कार की शुरुआत की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन इस पहल ने देशभर के संगीत प्रेमियों के बीच एक सकारात्मक लहर पैदा कर दी है।  

उत्तर प्रदेश में टाटा समूह की उपस्थिति दोगुनी होगी, राज्य बनेगा बड़ा निर्यात हब: एन. चंद्रशेखरन

उत्तर प्रदेश में टाटा समूह की उपस्थिति होगी दोगुनी, राज्य बनेगा बड़ा निर्यात हब: एन. चंद्रशेखरन टाटा संस के चेयरमैन बोले- यूपी में अपार संभावनाएं, अगले पांच वर्षों में तेजी से बढ़ेगा निवेश और रोजगार लखनऊ  टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश के सबसे संभावनाशील औद्योगिक राज्यों में एक है और आने वाले वर्षों में यहां टाटा समूह की उपस्थिति दोगुनी से अधिक होने जा रही है। राज्य में निवेश के लिए अनुकूल माहौल, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत नेतृत्व के कारण उद्योगों के विस्तार के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। एन चंद्रशेखरन ने ये बातें राजधानी में टाटा मोटर्स की 10 लाखवीं बस के फ्लैग ऑफ अवसर पर कहीं। यूपी बनेगा देश का प्रमुख ग्रोथ इंजन एन चंद्रशेखरन ने कहा कि यूपी में तेजी से विकसित हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर, मजबूत नीतिगत समर्थन और निवेश के अनुकूल वातावरण इसे औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बना रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में विकास की गति स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। राज्य सरकार की नीतियों और सहयोग के कारण उद्योगों को विस्तार का बेहतर अवसर मिल रहा है, जिससे बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश में मौजूद अपार संभावनाएं, बढ़ती आर्थिक गतिविधियां और युवा कार्यबल इसे देश का प्रमुख ग्रोथ इंजन बनाने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में प्रदेश न केवल औद्योगिक, बल्कि तकनीकी और सामाजिक विकास के क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयों को छुएगा। अगले पांच वर्षों में 20 लाख वाहनों के उत्पादन का लक्ष्य उन्होंने कहा कि लखनऊ स्थित टाटा प्लांट केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि सप्लायर्स, पार्टनर्स और स्थानीय समुदाय के साथ विकसित एक सशक्त इकोसिस्टम है, जो टाटा समूह और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच विश्वास और साझेदारी का प्रतीक है। 34 वर्षों में 10 लाख वाहनों के उत्पादन का यह माइलस्टोन इस मजबूत संबंध और निरंतर विकास यात्रा को दर्शाता है। एन चंद्रशेखरन ने विश्वास जताया कि जिस प्रकार अब तक की प्रगति हुई है, अगले पांच वर्षों में 20 लाख वाहनों के उत्पादन का लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है। भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले दशकों में वैश्विक स्तर पर सबसे तेज गति से बढ़ेगी और उत्तर प्रदेश इस विकास यात्रा में अग्रणी भूमिका निभाएगा। टीसीएस की यूपी यूनिट्स में अगले 5 वर्षों में होंगे 40 हजार प्रोफेशनल्स एन चंद्रशेखरन ने बताया कि टाटा मोटर्स का पोर्टफोलियो तेजी से विस्तृत हो रहा है, जिसमें पारंपरिक डीजल वाहनों के साथ-साथ सीएनजी, इलेक्ट्रिक और भविष्य में हाइड्रोजन आधारित वाहन भी शामिल होंगे। इससे उत्तर प्रदेश न केवल देश के लिए, बल्कि वैश्विक बाजार के लिए भी एक महत्वपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात केंद्र बन सकता है। टाटा समूह की अन्य कंपनियों के विस्तार का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के वर्तमान में लगभग 20,000 प्रोफेशनल्स लखनऊ, नोएडा और वाराणसी में कार्यरत हैं, जिनकी संख्या अगले पांच वर्षों में 40,000 तक पहुंच सकती है। इसके अलावा पावर, डिफेंस, रिटेल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में भी समूह का तेजी से विस्तार हो रहा है, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। मथुरा व गोरखपुर में भी सक्रिय पहल, सीएम का जताया आभार उन्होंने कहा कि टाटा समूह केवल औद्योगिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक क्षेत्रों में भी सक्रिय योगदान दे रहा है। जल संरक्षण, स्किल डेवलपमेंट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में पहल करते हुए समूह मथुरा में जल स्रोतों के पुनर्जीवन और गोरखपुर में एआई टेक्नोलॉजी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना जैसे कार्य कर रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार के सहयोग और दूरदर्शी नीतियों के कारण ही यह विकास संभव हो पाया है।