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रेगाकठेरा जलाशय योजना के कार्यों के लिए 2.07 करोड़ रूपए स्वीकृत

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग द्वारा मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के विकासखण्ड-अम्बागढ़ चौकी की रेगाकठेरा जलाशय जीर्णोद्धार एवं नहर लाईनिंग कार्य के लिए 2 करोड़ 7 लाख 82 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। प्रस्तावित कार्यों के पूर्ण होने के उपरांत रूपांकित सिंचाई क्षमता 80 हेक्टेयर के विरुद्ध 60 हेक्टेयर की हो रही कमी की पूर्ति सहित पूर्ण रूपांकित क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। मुख्य अभियंता महानदी गोदावरी कछार जल संसाधन विभाग रायपुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।

सीतारामपुर जलाशय निर्माण कार्य के लिए 6.33 करोड़ रुपये स्वीकृत

रायपुर  छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग द्वारा, बलरामपुर रामानुजगंज जिले के विकासखण्ड-बलरामपुर जलाशय (बांध) निर्माण कार्य के लिए 6 करोड़ 33 लाख 89 हजार रुपये की राशि स्वीकृत किये गये हैं। योजना के निर्माण से 150 हेक्टेयर में खरीफ और 50 हेक्टेयर में रबी सहित कुल 200 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। मुख्य अभियंता हसदेव गंगा कछार जल संसाधन विभाग अम्बिकापुर को प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है।

हरमनप्रीत कौर का बयान: टीम को फिर से एकजुट होने की जरूरत

पिछले साल वनडे विश्व कप की चैंपियन बनी भारतीय महिला क्रिकेट टीम को आने वाले टी20 विश्व कप 2026 से पहले एक बड़ा झटका लगा है। साउथ अफ्रीका से भारतीय टीम को 4-1 से करारी हार मिली है। इस हार को लेकर कप्तान हरमनप्रीत कौर ने कहा है कि टी20 विश्व कप से पहले दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मिली निराशाजनक हार के बाद भारत को फिर से एकजुट होकर आगे का रास्ता खोजना होगा। भारत ने आखिरी टी20 इंटरनेशनल मैच में 156 रनों के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा करते हुए एक बार फिर बल्लेबाजी में खराब प्रदर्शन किया और उसे 23 रन से हार का सामना करना पड़ा। इंग्लैंड में होने वाले टी20 विश्व कप से ठीक दो महीने पहले मिली यह हार एक बड़ा झटका साबित होगी। हरमनप्रीत ने मैच के बाद कहा, ''हमें एक समूह के तौर पर साथ बैठकर सोचना होगा कि आगे कैसे बढ़ना है। यह हमारे लिए निराशाजनक है, लेकिन इसमें हमारे लिए बहुत सी सकारात्मक बातें और सीखने के लायक चीजें भी हैं।'' भारत की शुरुआत खराब रही और शुरुआती चार ओवर के भीतर ही शेफाली वर्मा और जेमिमा रोड्रिग्स के विकेट गिर गए और टीम फिर कभी संभल नहीं पाई, क्योंकि दक्षिण अफ्रीका नियमित अंतराल पर विकेट लेता रहा। हरमनप्रीत ने आगे कहा, ''आज हमने बीच-बीच में अच्छा प्रदर्शन किया। बल्लेबाजी में, पावरप्ले ही वह चीज थी जिसकी हमें कीमत चुकानी पड़ी। हमें अधिक रन नहीं मिले और दो विकेट भी गंवा दिए। यह निराशाजनक है। हमें कड़ी मेहनत करते रहने की जरूरत है।'' दक्षिण अफ्रीका के लिए कप्तान लॉरा वोलवार्ट ने एक बार फिर मोर्चे से अगुआई करते हुए 56 गेंद पर नाबाद 92 रन बनाए और नियमित अंतराल पर विकेट गिरने के बावजूद पारी को संभाले रखा। वोलवार्ट ने पांच मैच की श्रृंखला में कुल 330 रन बनाए और वह अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में हैं। उन्होंने अपनी पिछली सात अंतरराष्ट्रीय पारियों में छह बार 50 से अधिक रन बनाए हैं। टूर्नामेंट की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनीं वोलवार्ट ने कहा, ''हालांकि, पिछले कुछ महीनों में हमने सभी विभागों में जबरदस्त सुधार किया है। इस लिहाज से यह एक बहुत अच्छा सत्र रहा है।'' पिच के बारे में वोलवार्ट ने कहा कि यह एक चुनौतीपूर्ण सतह थी। उन्होंने कहा, ''आज विकेट थोड़ा मुश्किल था लेकिन पावरप्ले शानदार रहा। मुझे यह पसंद आया कि हमने पावरप्ले में कितनी आक्रामक बल्लेबाजी की। हमें लगा था कि यह एक सपाट विकेट होगा लेकिन जब यह धीमा और कम उछाल वाला निकला तो हमें कोई हैरानी नहीं हुई। पहले बल्लेबाजी करना सही फैसला था। हमेशा कुछ ना कुछ ऐसा होता है जिस पर ध्यान दिया जा सकता है और सुधार किया जा सकता है, और कैचिंग उनमें से एक है।''

प्रोजेक्ट धड़कन’ ने 2 साल की पारूल को दिया नया जीवन, जानें पूरी कहानी

‘प्रोजेक्ट धड़कन’ से 2 साल की पारूल को मिला नया जीवन  ब्रेहबेड़ा की नन्हीं बच्ची की सफल हार्ट सर्जरी, अबूझमाड़ से रायपुर तक पहुंची उम्मीद की धड़कन रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ ने नारायणपुर के दूरस्थ ब्रेहबेड़ा गांव की 2 वर्षीय पारूल दुग्गा को नया जीवन दिया है। जन्मजात हृदय रोग से ग्रस्त पारूल की रायपुर के सत्य साईं संजीवनी अस्पताल में सफल सर्जरी के बाद वह स्वस्थ होकर घर लौट चुकी है।‘प्रोजेक्ट धड़कन’ अब नारायणपुर जिले में योजना भर नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए उम्मीद का नाम बन चुका है जिनके लिए हर नन्हीं धड़कन सबसे कीमती है। थकान से जूझती थी नन्हीं पारूल             अबूझमाड़ अंचल के ब्रेहबेड़ा गांव की पारूल कुछ समय पहले तक जल्दी थक जाती थी और सामान्य बच्चों की तरह खेल नहीं पाती थी। सीमित संसाधनों के बीच माता-पिता को उसकी गंभीर बीमारी का पता ही नहीं था। फरवरी 2026 में शुरू हुआ ‘प्रोजेक्ट धड़कन’             नारायणपुर जिले में बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए फरवरी 2026 में ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ की शुरुआत की गई। इसका उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में बच्चों की हृदय संबंधी जांच कर गंभीर मामलों की शुरुआती पहचान करना है। यह पहल उन सुदूर क्षेत्रों तक पहुंची जहां विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं बेहद सीमित थीं। 3000 बच्चों की स्क्रीनिंग, तीन में मिली बीमारी             अभियान के पहले चरण में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने गांव-गांव जाकर 3000 से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग की। तीन बच्चों में हृदय रोग के लक्षण मिले, जिनमें पारूल भी शामिल थी। जानकारी मिलते ही प्रशासन ने तुरंत इलाज की व्यवस्था की। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने इन बच्चों को रायपुर स्थित सत्य साईं संजीवनी अस्पताल के लिए रवाना किया। 10 अप्रैल को हुई सफल सर्जरी            रायपुर में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने जांच के बाद पारूल के हृदय में गंभीर समस्या की पुष्टि की। 10 अप्रैल 2026 को उसकी सफल हार्ट सर्जरी की गई। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों की निगरानी में देखभाल हुई। आज पारूल स्वस्थ है, खेल रही है और परिवार की गोद में नई ऊर्जा के साथ पल रही है।  मील का पत्थर साबित हो रही पहल ‘प्रोजेक्ट धड़कन’               कलेक्टर नारायणपुर ने कहा कि ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ का उद्देश्य सिर्फ बीमारी की पहचान नहीं, बल्कि जरूरतमंद बच्चों को समय पर जीवनरक्षक उपचार दिलाना है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों के किसी भी बच्चे को स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में कठिनाई न हो, इसके लिए प्रशासन लगातार प्रयासरत है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सकों और मैदानी कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल बाल स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है। आने वाले समय में और अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग की जाएगी। बदलाव की कहानी               पारूल की कहानी सिर्फ एक सफल ऑपरेशन नहीं है। यह उस बदलाव की कहानी है जहां जंगलों-पहाड़ों के बीच बसे गांवों तक संवेदनशील शासन पहुंच रहा है। यह उस भरोसे की कहानी है जिसमें दूरस्थ परिवारों को भी विश्वास है कि उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।

ओवरलोड ट्रांसफार्मर से हाहाकार,लखनऊ के कई इलाके बिजली कटौती से जूझे

लखनऊ भीषण गर्मी में बिजली कटौती कोढ़ में खाज बनती जा रही है। सोमवार को शहर से गांव तक विभिन्न इलाके के लोग बिजली संकट से जूझे। सबसे ज्यादा परेशानी अंबेडकर उपकेंद्र से आपूर्ति पाने वाले इलाके लोगों को हुई। इन्हें करीब 20 घंटे तक बिन बिजली-पानी गुजारा करना पड़ा। इसके अलावा जिले की करीब एक लाख की आबादी ने दो से 10 घंटे तक बिजली संकट झेला। अंबेडकर उपकेंद्र के पंचमखेड़ा, चरण भट्ठा रोड, रॉयल सिटी सहित आसपास के उपभोक्ताओं ने बताया कि बीते रविवार रात 11 बजे 100 केवीए के ट्रांसफार्मर से एक फेज की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। उपकेंद्र पर शिकायत दर्ज कराई गई मगर रात को समस्या का समाधान नहीं किया। इसके विरोध में यहां के लोगों ने ट्रांसफार्मर के पास हंगामा और प्रदर्शन किया। लोगों का आरोप है कि आबादी बढ़ने के बाद भी यहां ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि नहीं की गई। इससे आए दिन ट्रांसफार्मर ओवरलोड होता है और जंपर उड़ने की घटनाएं होती हैं। लोगों के प्रदर्शन की जानकारी मिलने पर सुबह 11 बजे के बाद 250 केवीए के ट्रांसफार्मर को लगाने की प्रक्रिया शुरू हुई जो सोमवार रात 8 बजे के बाद पूरी हो सकी। रविवार रात से सोमवार रात तक करीब 20 घंटे तक 700 से ज्यादा लोग बिन बिजली छटपटाते रहे और जिम्मेदार अपनी ही रफ्तार से काम करते रहे। 40 डिग्री तापमान में परिवार के लोगों को बिजली नहीं मिली, उल्टे दूर से पेयजल के लिए 100 मीटर तक की दौड़ लगानी पड़ी। एसडीओ महेंद्र कुमार ने बताया कि ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ने से अब लोगों को राहत मिलेगी। 50 हजार की आबादी बिजली को तरसी काकोरी। एफसीआई उपकेंद्र के बुद्धेश्वर, नरौना, वादर खेड़ा, सलेमपुर पतौरा और शांति नगर कॉलोनी की 50 हजार की आबादी सोमवार को सुबह से तीन राउंड बिजली को तरस गई। एसडीओ संदीप वर्मा ने बताया कि सुबह 6 से 7:30 बजे के बीच 33 केवी लाइन में फॉल्ट आने से 21 हजार उपभोक्ताओं की बिजली गुल हो गई। इसके बाद लाइन व पावर ट्रांसफार्मर के ओवरलोड होने के कारण सुबह 11:30 से दोपहर 12:30 बजे तक बिजली आपूर्ति बंद हो गई। इसके बाद नई लाइन को उपकेंद्र से जोड़ने के लिए शाम को भी बिजली आपूर्ति को बंद किया गया था। नई लाइन के चालू होने से ओवरलोडिंग की समस्या हल होगी और संकट दूर होगा। मांग का आंकड़ा 1700 मेगावाट पार प्रचंड गर्मी के चलते राजधानी में सोमवार को बिजली की मांग का आंकड़ा 1700 मेगावाट पार कर गया। 10 दिन के भीतर बिजली की मांग में करीब 500 मेगावाट की बढ़ोतरी हो चुकी है। बिजली की यह मांग एसी, कूलर आदि के इस्तेमाल बढ़ने से हुई है।   तारीख     खपत (मेगावाट) 18 अप्रैल     1425 19 अप्रैल     1443 20 अप्रैल     1546 21 अप्रैल     1552 22 अप्रैल     1595 23 अप्रैल     1600 24 अप्रैल     1625 25 अप्रैल     1655 26 अप्रैल     1660 27 अप्रैल     1705 इन इलाकों में भी रहा बिजली संकट – राजाजीपुरम के मीना बेकरी के पास सुबह 9:30 से दोपहर 1:30 बजे तक। – नादरगंज, सैनिक विहार, नटकुर सहित 20 गांव में सुबह से रात तक व्यवधान। – माल में अनुरक्षण कार्य के कारण कस्बे व 150 गांवों की बिजली बंद रही। – यहियागंज, नादान महल रोड, बावर्ची टोला में बिजली की आंखमिचौली चली। – नक्खास बाजार, खोखी टोला में एक फेज बिजली न आने से 200 दुकानें प्रभावित। – जानकीपुरम, जानकीपुरम विस्तार, आईआईएम रोड, इंदिरानगर में आपूर्ति बंद रही। – आशियाना, कानपुर रोड, आलमबाग, चारबाग, हुसैनगंज में बिजली को तरसे लोग। इन इलाकों में आज रहेगा संकट राजधानी के कई इलाकों में मंगलवार को सुधार कार्य के कारण बिजली आपूर्ति बंद रहेगी। जीपीआरए उपकेंद्र के आदिल नगर, जानकीपुरम गार्डन, सेक्टर-जे, मिश्रपुर, रसूलपुर, गुडंबा, फूलबाग, नहर रोड, तिवारी चौराहा, गायत्रीपुरम, सहारा गेट नंबर-2, ज्ञान डेयरी के आसपास सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक बिजली बाधित रहेगी। न्यू कैंपस उपकेंद्र के कमलबाद बड़ौली, न्याय विहार, आईआईएम रोड, रायपुर, महर्षिनगर, मुक्तकीपुर, बालाजी एन्क्लेव, नौवा खेड़ा, कमलानगर, मुस्लिमनगर, तिवारीपुर, सुंदर विहार, शुक्ला चौराहा, सैदपुर जागीर, नवीकोट नंदना, कोटवा, चंद्रकोदर इलाके की बिजली सुबह 10 से 11 बजे तक बाधित रहेगी। जानकीपुरम में सेक्टर 1 से 9 तक, साठ फीटा रोड, सुल्तानपुर गांव, खरगापुर गांव, शिवम सिटी, पिंक सिटी, केंद्रीय विहार, आयुष विहार, भगवती देवी विहार, देवी मंदिर, शौर्य विहार, सरस्वतीपुरम, जानकी विहार, सनसिटी की बिजली दोपहर 12 से 1:30 बजे बाधित होगी।

वैशाख पूर्णिमा का महत्व: बुद्ध पूर्णिमा पर पूजा और दान का विशेष फल

 बौद्ध धर्म में भगवान बुद्ध का जन्मोत्सव बुद्ध पूर्णिमा के रूप में बड़े श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है. यह दिन न सिर्फ उनके जन्म का प्रतीक है, बल्कि ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण से भी जुड़ा माना जाता है. इसलिए बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए यह तिथि अत्यंत पवित्र मानी जाती है. इस दिन लोग भगवान बुद्ध के बताए मार्ग पर चलकर मोक्ष और शांति की कामना करते हैं. हिंदू धर्म में इस दिन वैशाख पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है. इसलिए, इस दिन स्नान-दान करना भी शुभ माना जाता है. क्योंकि, यह पूर्णिमा हिंदू धर्म में भी बहुत ही खास मानी जाती है. इस शुभ दिन गौतम बुद्ध के साथ श्रीहरि और मां लक्ष्मी की पूजा-उपासना करना भी शुभ माना जाता है. आइए जानते हैं कि बुद्ध पूर्णिमा  की क्या तिथि रहेगी और क्या स्नान-दान का मुहूर्त रहेगा. द्रिक पंचांग के अनुसार, बुद्ध पूर्णिमा की तिथि 30 अप्रैल को रात 9 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 1 मई को रात 10 बजकर 52 मिनट पर होगा. इस दिन चंद्रोदय का समय शाम 6 बजकर 52 मिनट पर होगा. बुद्ध पूर्णिमा के दिन स्नान-दान का मुहूर्त सुबह 4 बजकर 15 मिनट से शुरू होकर 4 बजकर 58 मिनट तक रहेगा. इस दौरान किया गया स्नान-दान शास्त्रों में बहुत ही शक्तिशाली बताया गया है और इसके बाद किया गया स्नान राक्षस स्नान कहलाता है. इसलिए, कोशिश करें कि इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में ही स्नान करें. बुद्ध पूर्णिमा ऐसे करें पूजन बुद्ध पूर्णिमा के दिन स्नान और दान का विशेष महत्व होता है. भगवान बुद्ध को खीर का भोग अर्पित किया जाता है. इसके बाद प्रसाद को लोगों में बांटना शुभ माना जाता है. ध्यान, शांति और सेवा भाव पर विशेष जोर दिया जाता है. बुद्ध पूर्णिमा का महत्व मान्यता है कि इसी दिन भगवान बुद्ध को बोधि प्राप्त हुआ था, इसलिए इसे उनका 'आध्यात्मिक पुनर्जन्म' भी कहा जाता है. इस दिन स्नान, दान और ध्यान करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और पापों से मुक्ति मिलती है. बुद्ध पूर्णिमा की कथा पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान बुद्ध का जन्म सिद्धार्थ के रूप में एक राजघराने में हुआ था. राजसी जीवन त्यागकर उन्होंने सत्य की खोज के लिए कठिन तपस्या की. वर्षों की साधना के बाद वैशाख पूर्णिमा के दिन उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और वे “बुद्ध” कहलाए. क्या दान करना चाहिए? इस दिन जरूरतमंदों को दान करने से कई गुना पुण्य प्राप्त होता है. – चावल, दाल, आटा, नमक – सब्जियां और भोजन सामग्री – वस्त्र या जरूरत की चीजें अगर संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान कर पूजा करने के बाद दान करना और भी फलदायी माना जाता है.

महेंद्र सिंह यादव अपेक्स बैंक के प्रशासक बने

भोपाल मनोज पुष्प, पंजीयक सहकारी संस्थाएं, मध्य प्रदेश, भोपाल ने अपने आदेश क्रमांक साख /एपी 276/2026/752, भोपाल, दिनांक 25 अप्रैल 2026 से ग्वालियर निवासी महेंद्र सिंह यादव सुपुत्र बाबूसिंह यादव, मोहनपुर , मुरार, ग्वालियर को अपेक्स बैंक के प्रशासक के पद पर नियुक्त करने के आदेश प्रसारित किये हैं. यादव बड़ागॉव सोसाइटी के सदस्य हैं। उल्लेखनीय है कि दिनांक 14 जुलाई 2025 से प्रमुख सचिव सहकारिता डी.पी.आहूजा इस पद पर पदस्थ थे। 

विपरीत राजयोग से मिथुन, तुला और धनु राशि को अचानक लाभ के संकेत

 ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों की स्थिति में बदलाव का असर सभी राशियों पर पड़ता है. इस समय शुक्र ग्रह वृषभ राशि में गोचर कर चुके हैं और 14 मई 2026 तक इसी राशि में रहेंगे. शुक्र के इस गोचर से वृषभ राशि में खास व दुर्लभ संयोग बना हुआ है, जिसे विपरीत राजयोग कहा जाता है. ज्योतिष शास्त्र में विपरीत राजयोग बहुत ही अद्भुत, लाभकारी और शुभ योग माना जाता है. ज्योतिषियों के मुताबिक, यह योग कुछ राशियों के लिए अचानक लाभ और तरक्की के मौके लेकर आ सकता है. खासतौर पर 3 राशियों के लिए यह समय भाग्य बदलने जैसा साबित हो सकता है. आइए जानते हैं उन लकी राशियों के बारे में. मिथुन राशि इस समय मिथुन राशि वालों को धन से जुड़े अच्छे व बड़े अवसर प्राप्त हो सकते हैं. अचानक आर्थिक लाभ होने के योग हैं. जीवन में सुख-सुविधाएं बढ़ सकती हैं. परिवार के साथ अच्छा समय बिता सकते हैं. विदेश से जुड़े काम भी पूरे हो सकते हैं. हालांकि, खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा. तुला राशि तुला राशि वालों की आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिल सकता है. लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिल सकता है. नौकरी में प्रमोशन या कारोबार में बढ़ोतरी के शुभ योग बन रहे हैं. परिवार में चल रहे मतभेद खत्म हो सकते हैं, जिससे माहौल बेहतर होगा. इस दौरान आपकी पर्सनैलिटी भी सकारात्मक चेंज आएगा. लेकिन सेहत का ध्यान जरूर रखें. धनु राशि यह समय आपके लिए नए अवसर लेकर आ सकता है. नौकरी और बिजनेस में तरक्की के योग बन रहे हैं. आप मुश्किल परिस्थितियों में भी फायदा निकाल सकते हैं. विदेश से लाभ मिलने की संभावना है. समाज में मान-सम्मान बढ़ सकता है. हालांकि स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहना जरूरी है. शुक्र को मजबूत करने के उपाय अगर आपकी कुंडली में शुक्र कमजोर है, तो इस समय कुछ आसान उपाय करके इसे मजबूत किया जा सकता है. रोजाना 'ऊं शुं शुक्राय नमः' या 'ऊं द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः' का जाप करें. शुक्रवार के दिन श्री सूक्तम स्तोत्र का पाठ करें. भगवान विष्णु का ध्यान और पूजा करना भी लाभकारी माना जाता है.

बागपत का दिल दहला देने वाला हादस,सोहित चौहान की मौत, भाई बना पुलिस अफसर

बागपत उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया है. यह कहानी सिर्फ एक परिवार के दर्द की नहीं, बल्कि उस विडंबना की भी है, जिसमें खुशियां और गम एक ही दिन, एक ही घर में टकरा गए. जिस दिन एक बेटे ने अपने सपनों को साकार करते हुए पुलिस सेवा में कदम रखा, उसी दिन दूसरे बेटे ने देश सेवा करते हुए अपनी जान गंवा दी. बागपत जिले के छपरौली क्षेत्र के लूम्ब गांव के निवासी अग्निवीर सोहित चौहान की अरुणाचल प्रदेश में ड्यूटी के दौरान दर्दनाक मौत हो गई. जानकारी के अनुसार, रविवार को आए बर्फीले तूफान के दौरान एक पेड़ अचानक गिर पड़ा, जिसकी चपेट में आकर सोहित गंभीर रूप से घायल हो गए. हादसा इतना भयानक था कि उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया. इस घटना ने न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरे गांव को शोक में डुबो दिया. सोहित 2023 में अग्निवीर के तहत हुआ था भर्ती सोहित चौहान वर्ष 2023 में अग्निवीर योजना के तहत भारतीय सेना की 3 ग्रेनेडियर यूनिट में भर्ती हुए थे. वह अपने परिवार के सबसे छोटे सदस्य थे. परिवार में माता-पिता, एक बड़ा भाई और एक बहन है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाले सोहित ने कठिन परिश्रम और लगन के दम पर सेना में जगह बनाई थी. उनके परिवार को उन पर गर्व था और गांव के युवाओं के लिए वे प्रेरणा बन चुके थे. लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. जिस दिन सोहित की मौत की खबर आई, उसी दिन उनके बड़े भाई मोहित चौहान उत्तर प्रदेश पुलिस में शामिल हो रहे थे. उस दिन उनकी पासिंग आउट परेड थी, जिसे देखने के लिए उनके पिता मोहर सिंह भी गए हुए थे. घर में जश्न का माहौल था, हर कोई खुश था कि परिवार का एक बेटा पुलिस में भर्ती हो गया है. लेकिन इसी खुशी के बीच अचानक आई दुखद खबर ने सब कुछ बदल दिया. जैसे ही परिवार को सोहित की मौत की सूचना मिली, खुशी का माहौल मातम में बदल गया. पिता, जो बड़े बेटे की सफलता पर गर्व महसूस कर रहे थे, अचानक छोटे बेटे की मौत की खबर सुनकर टूट गए।. मां का रो-रोकर बुरा हाल हो गया. एक ही दिन में परिवार ने जीवन का सबसे बड़ा सुख और सबसे बड़ा दुख दोनों देख लिया. सोहित की अंतिम विदाई में हर आंख हुई नम जब सोहित चौहान का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई. गांव की गलियों, सड़कों और घरों की छतों पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. हर कोई अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देने के लिए पहुंचा. अंतिम संस्कार के दौरान सेना के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ सोहित को विदाई दी. उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और सलामी दी गई.यह दृश्य इतना भावुक कर देने वाला था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों से आंसू छलक पड़े. गांव के बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, सभी ने अपने इस वीर बेटे को नम आंखों से विदा किया. इस दुखद घटना के बाद कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता भी परिवार से मिलने पहुंचे. उन्होंने परिवार को सांत्वना दी और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया. स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि सोहित चौहान को शहीद का दर्जा दिया जाए और उनके परिवार को उचित मुआवजा तथा पेंशन दी जाए. ग्रामीणों का कहना है कि सोहित ने देश सेवा करते हुए अपनी जान गंवाई है, इसलिए उन्हें पूरा सम्मान मिलना चाहिए. सांसद बोले परिवार देश परिवार के साथ सोहित के पिता मोहर सिंह ने बताया कि उनका बेटा बहुत मेहनती और जिम्मेदार था. वह परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारना चाहता था और इसी उद्देश्य से सेना में भर्ती हुआ था. उन्होंने कहा कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है, लेकिन उसका इस तरह चले जाना असहनीय है. उन्होंने सरकार से मांग की कि उनके परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए ताकि वे आगे का जीवन सम्मानपूर्वक जी सकें. वहीं दुख की इस घड़ी में परिवार से मिलने पहुंचे सांसद राजकुमार सांगवान ने कहा कि सोहित के परिवार के साथ पूरा देश खड़ा है. सरकार उनके साथ है. जो भी मदद होगी हर संभव मदद दिलाई जाएगी. उनकी अंतिम यात्रा में हर दल का आदमी शामिल हुआ. उनका योगदान देश याद रखेगा.

कनाडा में 16 मौतों के आरोपी ट्रक-ड्राइवर को नहीं होगी डिपोर्ट, जसकीरत को 8 साल की सजा

 संगरूर  कनाडा के मशहूर हंबोल्ट ब्रोंकोस बस हादसे के गुनहगार पंजाब मूल के ट्रक ड्राइवर जसकीरत सिंह सिद्धू को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सोमवार सुबह उन्हें भारत डिपोर्ट किया जाना था, लेकिन रवानगी से 2 दिन पहले फेडरल कोर्ट ने इस पर इमरजेंसी रोक लगा दी है। कनाडा की मीडिया रिपोट्स के अनुसार जस्टिस जोसलिन गाग्ने ने यह आदेश तब दिया जब जसकीरत सिंह सिद्धू के वकील ने कनाडा बॉर्डर सर्विस एजेंसी के फैसले को कोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने अगले आदेशों तक जसकीरत सिंह की डिपोर्टेशन पर रोक लगा दी। दरअसल मूल रूप से संगरूर के रहने वाले ट्रक ड्राइवर के कारण कनाडा के हंबोल्ट ब्रोंकेस में एक रोड एक्सीडेंट हुआ, जिसमें 16 लोगों की मौत हो गई थी और 13 गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस मामले में जसकीरत सिंह को 8 साल की सजा हुई, जिसके बाद कनाडा बॉर्डर सर्विस एजेंसी ने उसे डिपोर्ट करने का आदेश जारी किया था। 25 अप्रैल को फेडरल कोर्ट में हुई सुनवाई में दोनों पक्षों के बीच बहस हुई। कोर्ट इस बात की समीक्षा कर रहा है कि क्या जसकीरत को 'मानवीय आधार' पर रुकने का मौका दिया जाना चाहिए। दरअसल सिद्धू के वकील माइकल ग्रीन ने कोर्ट में सबसे बड़ी दलील उनके एक साल के बेटे की सेहत को लेकर दी। बच्चे को दिल और फेफड़ों की गंभीर बीमारी है। वकील ने कहा कि भारत की खराब हवा बच्चे के स्वास्थ्य के लिए जानलेवा हो सकती है। वकील ने तर्क दिया कि हादसे से पहले जसकीरत का रिकॉर्ड एकदम बेदाग था और उन्होंने जेल में अपने किए का गहरा पश्चाताप किया है। सरकारी पक्ष और कानून की दलील: सरकारी वकील ने कोर्कट में दलील दी है कि कि कनाडा के कानून के मुताबिक, अगर किसी पीआर (PR) होल्डर को 6 महीने से ज्यादा की जेल होती है, तो वह देश में रहने का हक खो देता है। जसकीरत को 8 साल की सजा हुई है, इसलिए उन्हें डिपोर्ट करना अनिवार्य है। सरकारी वकील ने दलील दी है कि जिसकी लापरवाही से 16 लोगों की जान चली गई और 13 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। उसे कनाडा में रहने का कोई हक नहीं है। यहीं नहीं सरकारी वकील ने ये भी दलील दी है कि अगर जसकीरत सिंह सिद्धू को अपने बच्चों से अलग नहीं होना तो वो उन्हें लेकर भी जा सकता है। अगर भारत में उन्हें परेशानी है तो वो यहां रह सकते हैं। मृतकों के परिजनों की कोर्ट से गुहार… टोबी बाउलेट ने कोर्ट में स्पष्ट कहा— "जसकीरत सिंह सिद्धू को डिपोर्ट करना कोई अतिरिक्त सजा नहीं है, बल्कि यह कनाडा के कानून का हिस्सा है। कानून स्पष्ट है कि यदि आप अपराधी हैं, तो आप इस देश में रहने का हक खो देते हैं। हर बार नई अपील और नई तारीख हमारे जख्मों को फिर से कुरेद देती है।" क्रिस जोसेफ ने भावुक होते हुए कोर्ट से पूछा— "अदालत में बार-बार सिद्धू के परिवार और उनके बच्चों की दुहाई दी जा रही है। लेकिन उन 16 पिताओं के बारे में किसने सोचा जिन्होंने अपने जवान बेटों के जनाजे उठाए? मेरे बेटे का भविष्य छीन लिया गया। सिद्धू का परिवार उनके साथ है, लेकिन हमारे बच्चे कभी वापस नहीं आएंगे। हम सिर्फ यह चाहते हैं कि कानून अपना काम करे।" लापरवाही ने ले ली थी रोड एक्सीडेंट में 16 लोगों की जान ट्रक ड्राइवर जसकीरत सिंह की लापरवाही के कारण 6 अप्रैल 2018 को रोड एक्सीडेंट हुआ। जसकीरत सिंह ने 'स्टॉप साइन' को नजरअंदाज किया और ट्रक की रफ्तार कम नहीं की। ट्रक सीधे 'हंबोल्ट ब्रोंकोस' जूनियर हॉकी टीम की बस से टकरा गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस के तीन टुकड़े हो गए। इस हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई और 13 लोग घायल हुए। पूरे कनाडा में शोक की लहर दौड़ गई थी। जसकीरत ने अपना गुनाह कबूल किया और उसे 8 साल जेल की सजा सुनाई गई। 2023 में उन्हें जेल से पैरोल मिली। जसकीरत का पंजाब से कनाडा तक का सफर जसकीरत मूल रूप से पंजाब के संगरूर जिले के रहने वाला है। उसके पिता पंजाब में किसान हैं और परिवार के पास करीब 50 एकड़ खेती की जमीन है। जसकीरत ने पंजाब से बी.कॉम की डिग्री ली और साल 2014 में अपनी पत्नी के साथ स्थायी निवासी (PR) के तौर पर कनाडा शिफ्ट हुए थे। जसकीरत सिंह ट्रक चलाता था। केस की टाइम लाइन 6 अप्रैल 2018: भीषण बस हादसा हुआ। 16 घरों के चिराग बुझ गए। 22 मार्च 2019: कोर्ट ने जसकीरत को 8 साल जेल की सजा सुनाई। जनवरी 2023: अच्छे बर्ताव के कारण उन्हें जेल से पैरोल पर रिहा किया गया। 24 मई 2024: इमिग्रेशन बोर्ड ने उनका पीआर स्टेटस रद्द कर डिपोर्ट करने का आदेश दिया। 4 फरवरी 2026: सरकार ने उनकी अंतिम अपील ठुकरा दी और 27 अप्रैल का दिन रवानगी के लिए तय किया। 25 अप्रैल 2026: रवानगी से दो दिन पहले फेडरल कोर्ट ने डिपोर्टेशन पर 'स्टे' (रोक) लगा दिया। अब आगे क्या? जसकीरत के वकील के मुताबिक, यह रोक 1 से 8 महीने तक रह सकती है। अब फेडरल कोर्ट विस्तार से इस बात की जांच करेगा कि क्या मानवीय आधार पर उनके निर्वासन को टाला जा सकता है। फिलहाल, जसकीरत की भारत रवानगी पर ब्रेक लग गया है। एक संघीय न्यायाधीश ने हंबोल्ट ब्रोंकोस (Humboldt Broncos) बस दुर्घटना के लिए जिम्मेदार ट्रक ड्राइवर को आखिरी क्षणों में बड़ी राहत दी है, जिससे उनकी भारत वापसी पर फिलहाल रोक लग गई है। जसकीरत सिंह सिद्धू के वकीलों ने शुक्रवार को फेडरल कोर्ट में अपील की थी ताकि सोमवार सुबह होने वाले उनके निर्वासन (deportation) को रोका जा सके। मामले का विवरण दुर्घटना: अप्रैल 2018 में, कैलगरी के नौसिखिया ट्रक ड्राइवर सिद्धू ने सास्काचेवान के टिस्डेल के पास एक ग्रामीण चौराहे पर स्टॉप साइन की अनदेखी की थी। उनका ट्रक जूनियर हॉकी टीम को ले जा रही बस के रास्ते में आ गया था। परिणाम: इस भीषण हादसे में 16 लोगों की मौत हुई और 13 अन्य घायल हुए, जिससे पूरे कनाडा में शोक की लहर दौड़ गई थी। सजा: सिद्धू ने खतरनाक ड्राइविंग के अपराधों के … Read more