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गोल के बाद पीएम मोदी ने खिलाड़ियों के साथ किया सेलिब्रेशन, फुटबॉल मैदान से खास तस्वीरें

गंगटोक पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार का शोर थम गया है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण की विधानसभा सीटों के लिए चुनाव प्रचार थमने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सबसे बड़े चेहरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब सिक्किम पहुंच चुके हैं. दो दिन के दौरे पर सिक्किम पहुंचे पीएम मोदी मंगलवार की सुबह-सुबह गंगटोक में युवाओं के बीच नजर आए।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फुटबॉल के मैदान में भी उतरे और युवाओं के साथ फुटबॉल भी खेला. फुटबॉल मैदान की तस्वीरें शेयर करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि सिक्किम में अपने युवा मित्रों के साथ गंगटोक की सुहानी सुबह में फुटबॉल खेलने जैसा कुछ नहीं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन तस्वीरों में युवाओं के साथ फुटबॉल खेलते नजर आ रहे हैं।  पीएम मोदी के युवाओं के बीच पहुंच फुटबॉल खेलने और इसकी तस्वीरें शेयर करने को पश्चिम बंगाल साधने की रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है. दरअसल, सिक्किम के साथ ही पश्चिम बंगाल में भी फुटबॉल बहुत ही लोकप्रिय है. पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता भारत में क्लब फुटबॉल का बड़ा केंद्र है. वहीं, गांव स्तर तक फुटबॉल क्लबों का वजूद है।  पीएम मोदी के गोल पर तालियां बजाते खिलाड़ी पश्चिम बंगाल में फुटबॉल किस कदर लोकप्रिय है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फुटबॉल विश्वकप जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के समय सड़कों पर ट्रैफिक मानों थम सा जाता है. चुनाव प्रचार थमने के बाद प्रधानमंत्री मोदी फुटबॉल के मैदान में उतरे, गोल कर सेलिब्रेट करते नजर आए और इसकी तस्वीरें शेयर कीं, तो इसे फुटबॉल की इसी लोकप्रियता को कैश कराने के लिए संकेत की राजनीति की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।  गौरतलब है कि पीएम मोदी दो दिन के दौरे पर सिक्किम में हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सिक्किम दौरे के पहले दिन सोमवार को गंगटोक में मेगा रोड शो किया. पीएम मोदी की एक झलक पाने के लिए बड़ी तादाद में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा. लोग सड़क पर दोनों तरफ खड़े नजर आए. पीए्म मोदी सिक्किम के भारत में विलय के 51 वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में भी शामिल होंगे और करीब चार हजार करोड़ रुपये की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। 

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग की बैठकें शुरू, सैलरी पर नए प्रस्ताव पर चर्चा

 नई दिल्‍ली देश के 45 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारियों और 60 लाख पेंशनर्स के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. आठवें वेतन आयोग के तहत रिपोर्ट तैयार करने का काम तेजी से चल रहा है, आयोग ने अब जमीनी स्‍तर पर काम शुरू कर दिया है, जो अलग-अलग राज्‍यों का दौरा कर कर्मचारी यूनियनों और एसोसिएशन से मुलाकात कर रहा है, ताकि 8वें वेतन आयोग के तहत उनकी मांगों और प्रस्‍तावों पर अच्‍छे से चर्चा कर सके।  मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आठवें वेतन आयोग ने अपनी पहली आमने-सामने की बैठक उत्तराखंड के कर्मचारी संगठनों के साथ शुक्रवार को पूरा किया. इसके बाद आयोग 28 से 30 अप्रैल के बीच दिल्ली में बड़ी बैठक करेगा. साथ ही मई महीने में आयोग की टीम पुणे और महाराष्‍ट्र के अन्‍य ऑर्गनाइजेशन के साथ मिलकर उनका फीडबैक लेगी।  फिटमेंट फैक्‍टर को लेकर क्‍या है मांग? 8वें वेतन आयोग के तहत केंद्र सरकार के सामने कर्मचारी संगठनों के संयुक्त मंच (NC-JCM) की ड्राफ्टिंग कमेटी ने फिटमेंट फैक्‍टर को लेकर बड़ी मांग रखी है. फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.833 करने की मांग की गई है. अगर यह मांग मान ली जाती है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में जबरदस्त उछाल आ सकता है।  5 यूनिट की फैमिली  एक बदलाव 5 यूनिट फैमिली को लेकर है, क्‍योंकि अभी तक 3 यूनिट की फैमिली मानकर भत्ता तय किया जाता है. लेकिन अब यूनियन की मांग 5 यूनिट की फैमिली मानकर किया जा रहा है. इसके साथ ही महंगाई भत्ता का कैलकुलेशन 12 महीने के एवरेज को आधार बनाने का प्रस्‍ताव दिया गया है. इसके अलावा, कुछ स्‍केल पे को आपस में मिलाने का भी प्रस्‍ताव है।  बेसिक सैलरी को लेकर क्‍या है मांग?  वेतन आयोग सिर्फ बेसिक सैलरी ही नहीं, बल्कि ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और अन्य सेवा शर्तों की भी समीक्षा कर रहा है. कर्मचारी आयोग का कहना है कि इन भत्तों में भी सुधार की आवश्‍यकता है. इसके साथ ही बेसिक पे को भी बढ़ाने का प्रस्‍ताव रखा गया है. आयोग ने मिनिमम बेसिक पे को 18000 रुपये से बढ़ाकर 69,000 रुपये करने का प्रस्‍ताव दिया गया है।  कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग?  जनवरी 2025 में सरकार ने आयोग का गठन किया था, जिसे 18 महीने में अपनी रिपोर्ट पेश करनी हैं. अभी 30 अप्रैल तक फीडबैक के लिए विंडो खुला हुआ है. इसके बाद रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी, फिर फिटमेंट फैक्‍टर पर फैसला लिया जाएगा। 

राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए कांग्रेस का दिग्गज नेता को मौका देने पर बढ़ी चर्चा

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजनीति में राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर कांग्रेस के भीतर हलचल तेज हो गई है। आंकड़ों के हिसाब से यह सीट कांग्रेस के लिए सुरक्षित मानी जा रही थी, लेकिन बदले राजनीतिक समीकरणों और संभावित क्रॉस वोटिंग के खतरे ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है कि अब इस सीट पर किसी बड़े और भरोसेमंद चेहरे को उतारने की रणनीति पर गंभीर मंथन चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में तेजी से उभरा है। पार्टी हाईकमान को यह समझ आ रहा है कि अगर कमलनाथ मैदान में उतरते हैं, तो किसी भी विधायक के लिए क्रॉस वोटिंग करना आसान नहीं होगा। उनकी पकड़ संगठन और विधायकों दोनों पर मजबूत मानी जाती है, जिससे तीसरी सीट कांग्रेस के खाते में सुरक्षित जा सकती है। हालांकि, राहुल गांधी की पहली पसंद मीनाक्षी नटराजन को बताया जा रहा है। वे संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और पार्टी के भीतर उनकी मजबूत स्वीकार्यता है। वहीं, दिग्विजय सिंह पीसी शर्मा के नाम पर जोर दे रहे हैं, जबकि सज्जन सिंह वर्मा, कमलेश्वर पटेल और बाला बच्चन जैसे नाम भी चर्चा में बने हुए हैं। दरअसल, मध्यप्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं। दो सीटों पर भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, लेकिन तीसरी सीट के लिए 58 वोटों की जरूरत है। कांग्रेस के पास तकनीकी रूप से 66 विधायक हैं, लेकिन कुछ विधायकों की वोटिंग को लेकर संशय और कुछ संभावित समीकरणों ने यह संख्या प्रभावी रूप से कम कर दी है। ऐसे में पार्टी किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती। हरियाणा में हुई क्रॉस वोटिंग जैसी घटनाएं भी कांग्रेस नेतृत्व के लिए चेतावनी बनी हुई हैं। इसी वजह से दिल्ली दरबार इस बार पूरी सावधानी से फैसला लेना चाहता है। यदि भाजपा आदिवासी कार्ड खेलती है, तो बाला बच्चन जैसे नाम भी अचानक मजबूत हो सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रदेश कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी भी इस चुनाव को प्रभावित कर सकती है। जीतू पटवारी, उमंग सिंघार और दिग्विजय सिंह के अलग-अलग समीकरणों के बीच कमलनाथ ही एक ऐसे नेता माने जा रहे हैं, जिन पर सभी पक्ष सहमति बना सकते हैं। अब सबकी नजर दिल्ली पर टिकी है। फैसला चाहे मीनाक्षी नटराजन के पक्ष में जाए या कमलनाथ के नाम पर मुहर लगे, इतना तय है कि राज्यसभा की यह तीसरी सीट कांग्रेस के लिए सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि संगठनात्मक ताकत और राजनीतिक प्रतिष्ठा की बड़ी परीक्षा बन चुकी है।

मैथिली ठाकुर का पप्पू यादव पर गुस्सा: ‘उसे कभी माफ नहीं कर पाऊंगी’

पटना  बिहार की राजनीति में महिलाओं के सम्मान को लेकर एक नई जंग छिड़ गई है। पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव द्वारा महिलाओं की राजनीति को लेकर दी गई अमर्यादित टिप्पणी पर भाजपा की विधायक मैथिली ठाकुर ने मोर्चा खोल दिया है। रविवार को गया सर्किट हाउस में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अलीनगर विधायक ने पप्पू यादव के बयान को घिनौना करार देते हुए कहा कि इस कृत्य के लिए वह उन्हें कभी माफ नहीं कर पाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति में महिलाओं के संघर्ष को बिस्तर जैसे शब्दों से तौलना पूरी नारी जाति का अपमान है। "पप्पू यादव के अपने घर में भी महिला नेत्री हैं" विधायक मैथिली ठाकुर ने पप्पू यादव को उनके परिवार की याद दिलाते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "पप्पू यादव जी को यह शोभा नहीं देता, क्योंकि उनके अपने परिवार में भी महिला राजनीति में सक्रिय रही हैं। उनकी पत्नी रंजीत रंजन सांसद हैं। फिर भी उन्होंने ऐसा बयान देकर करोड़ों महिलाओं की अस्मिता को ठेस पहुंचाई है।" मैथिली ठाकुर ने सवाल किया कि क्या वह अपनी पार्टी और परिवार की महिलाओं के बारे में भी यही राय रखते हैं? उन्होंने कहा कि इस तरह की अभद्र टिप्पणी केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि पूरे समाज के नैतिक मूल्यों पर चोट है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मैथिली ठाकुर हुई भावुक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मैथिली ठाकुर भावुक भी हुईं। उन्होंने अपने निजी जीवन का उदाहरण देते हुए कहा, "मेरे पिता ने मुझे पूरी समझदारी और भरोसे के साथ राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया। हर परिवार अपनी परंपराओं और मूल्यों के आधार पर निर्णय लेता है। आज की महिलाएं अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर पंचायत से लेकर संसद तक पहुँच रही हैं, लेकिन पप्पू यादव जैसे नेता उनकी सफलता को 'नेताओं के बिस्तर' से जोड़कर उनकी मेहनत पर पानी फेरना चाहते हैं।" उन्होंने कहा कि ऐसे बयान देने वालों को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए, हालांकि यह कृत्य माफी के लायक भी नहीं है। विधायक मैथिली ठाकुर ने केवल विवाद पर ही नहीं, बल्कि विकास के मुद्दों पर भी विपक्ष को घेरा। उन्होंने कहा कि आज का युवा केवल खोखले नारों के पीछे नहीं भागता, बल्कि वह धरातल पर होने वाले कार्यों को देख रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एनडीए सरकार में महिलाओं की भूमिका बढ़ी है और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 'नारी शक्ति' को जो सम्मान मिला है, उसे ऐसे विवादित बयानों से धूमिल नहीं किया जा सकता।

पंजाब में गर्मी से राहत, 30 अप्रैल तक ओरेंज अलर्ट, 1 मई से पारा फिर चढ़ेगा

 अमृतसर पंजाब में अप्रैल महीने में गर्मी चरम तक पहुंच चुकी है। कई जिलों में तापमान 41 डिग्री के पार हो चुका है। लेकिन अब इससे राहत मिलती दिख रही है। वेस्टर्न डिस्टरबेंस के एक्टिव होने के बाद पंजाब के कई इलाकों में बादल छा गए हैं, जबकि अबोहर व फाजिल्का के कुछ गांवों में बारिश भी देखने को मिली है। मौसम विभाग के अनुसार गर्मी से ये राहत 30 अप्रैल तक रहेगी। इस दौरान बारिश के कारण राज्य के अधिकतर जिलों का तापमान 5 डिग्री तक गिरेगा। लेकिन ये राहत कुछ समय के लिए ही है। 1 मई से दोबारा गर्मी जोर पकड़ने लगेगी। मात्र दो दिनों 1 व 2 मई को पारा 2 से 3 डिग्री तक बढ़ जाएगा। आज से मौसम का मिजाज तेजी से बदलने वाला है। मौसम विभाग ने पांच दिनों के लिए जिलावार चेतावनी जारी की है, जिसमें कहीं आंधी और बारिश तो कहीं लू और गर्म रातों का खतरा बताया गया है। मालवा के कई इलाकों में आज होगी बारिश 28 अप्रैल: इस दिन हालात बदलते नजर आएंगे। अमृतसर, तरनतारन, कपूरथला, जालंधर, नवांशहर, होशियारपुर और गुरदासपुर में आंधी, बिजली और तेज हवाओं की संभावना है। वहीं लुधियाना, पटियाला, संगरूर, मानसा और बठिंडा में तेज गर्मी के साथ लू का असर दिख सकता है। इन जिलों के लिए विशेष सतर्क रहने की सलाह दी गई है। 29 अप्रैल: गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन और कपूरथला में मौसम कुछ हद तक सक्रिय रहेगा और आंधी व बारिश की संभावना बनी रहेगी। वहीं फाजिल्का, फिरोजपुर, मुक्तसर, मोगा, बठिंडा और मानसा में मौसम सामान्य रहने के संकेत हैं। अन्य जिलों में हल्की चेतावनी जारी की गई है। 30 अप्रैल: इस दिन उत्तरी जिलों जैसे गुरदासपुर, होशियारपुर और पठानकोट में हल्की चेतावनी जारी है। जबकि दक्षिणी और मध्य जिलों जैसे लुधियाना, संगरूर, बठिंडा, मानसा, फाजिल्का, मुक्तसर और मोगा में किसी प्रकार की चेतावनी नहीं है और मौसम सामान्य रहने की संभावना है। 1 मई: इस दिन पूरे पंजाब में मौसम सामान्य रहने का अनुमान है। सभी जिलों में किसी प्रकार की चेतावनी जारी नहीं की गई है। 60 किमी की रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं मौसम विभाग के अनुसार, 28 और 29 अप्रैल को आंधी और तेज हवाओं की रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। वहीं कुछ जिलों में लू और गर्म रातों का असर भी देखने को मिल सकता है। लोगों को सलाह दी गई है कि खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों से दूर रहें, पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े न हों और लू से बचाव के लिए पर्याप्त पानी पिएं। किसानों को भी फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की सलाह दी गई है।

ट्रंप ने इस देश को भी दिया रूसी तेल खरीदने का तोहफा, भारत के बाद मिली छूट

नई दिल्ली मध्य पूर्व में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच अमेरिका ने फिलीपींस को बड़ी राहत दी है. अमेरिका ने फिलीपींस के अनुरोध पर उसे रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने के लिए अस्थायी छूट दे दी है. बीते हफ्ते में तेल की कीमतों को काबू में रखने के लिए ट्रंप ने रूसी तेल खरीद की छूट बढ़ा दी थी. इसका फायदा खुद भारत को भी हो रहा है लेकिन फिलीपिंस को और भी राहत दी गई है।  फिलीपींस के ऊर्जा विभाग के मुताबिक, यह छूट 17 अप्रैल से 16 मई तक प्रभावी रहेगी. इससे पहले मार्च में भी अमेरिका ने 30 दिन की छूट दी थी, जो 11 अप्रैल को समाप्त हो गई थी. अब नई छूट मिलने से फिलीपींस को कुछ समय के लिए अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में राहत मिलेगी।  ऊर्जा विभाग के अंडरसेक्रेटरी एलेस्सांद्रो सेल्स ने बताया कि यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है. वहीं ऊर्जा सचिव शेरोन गैरीन ने कहा कि देश के पास फिलहाल करीब 54 दिनों का ईंधन भंडार मौजूद है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए अतिरिक्त विकल्प जरूरी थे।  तेल-गैस की सप्लाई प्रभावित हुई संघर्ष का असर पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर पड़ा है. खासकर होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम समुद्री मार्ग पर तनाव की वजह से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है. इसी कारण कई देशों को वैकल्पिक सोर्सेज की तलाश करनी पड़ रही है।  तेल की कीमतों को काबू में रखने की कोशिश? फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने हाल ही में राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल घोषित किया था. इस कदम का मकसद देश में ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना और संभावित संकट से निपटना है।  इस बीच फिलीपींस सरकार ने यह भी साफ किया है कि वह नए कोयला परियोजनाओं पर लगी रोक को नहीं हटाएगी. अब अमेरिका से तेल खरीद की छूट मिलने पर लोगों को और भी राहत मिलने की उम्मीद है. इसके जरिए तेल की कीमतों को काबू में रखा जा सकता है।  साल 2020 में देश ने कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए नई कोयला परियोजनाओं पर प्रतिबंध लगाया था. हालांकि 2019 से पहले मंजूरी प्राप्त परियोजनाएं आगे बढ़ सकती हैं. ऊर्जा मंत्रालय अब पुराने कोयला संयंत्रों की समीक्षा भी कर रहा है, क्योंकि लंबे समय में उनकी लागत ज्यादा है और वे भरोसेमंद भी नहीं माने जा रहे। 

Ganga Expressway: उद्योगों की रफ्तार बढ़ेगी, नए खरीदार मिलेंगे, पर्यटन और व्यापार को मिलेगा फायदा

मेरठ  गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने से मेरठ के उद्यमी उत्साहित हैं। मेरठ से प्रयागराज तक 594 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच दूरी और समय दोनों कम करेगा। इससे न सिर्फ लोगों का सफर आसान होगा, बल्कि किसानों, व्यापारियों और उद्योगों के लिए नए अवसर भी पैदा होंगे। कृषि उत्पादों की तेज आपूर्ति और नए बाजारों तक पहुंच हो सकेगी। मेरठ के धातु व खेल उत्पाद, फूड प्रोसेसिंग, गैस रेगुलेटर उद्योग के लिए नए अवसर पैदा होंगे। आइआइए मेरठ मंडल चैप्टर के अध्यक्ष तनुज गुप्ता का कहना है कि गंगा एक्सप्रेसवे पर्यटन, यातायात, व्यापार, उद्योग समेत सभी क्षेत्रों के लिए लाभकारी साबित होगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश के बाजारों तक पहुंच आसान हो जाएगी। माल ढुलाई में लगने वाले समय और खर्च दोनों कम हो जाएगा। मेरठ की 50 से अधिक गैस रेगुलेटर इकाई, 30 से अधिक धातु उत्पाद इकाई, 80 से अधिक फूड प्रोसेसिंग इकाई, खेल सामग्री, वस्त्र, कृषि आधारित सामग्री को सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा। बड़ी मात्रा में पूर्वी उत्तर प्रदेश में मेरठ से गैस रेगुलेटर की आपूर्ति होती है। सिकंदराबाद और गुलावठी क्षेत्र से औद्योगिक निर्माण के लिए लोहे के पार्ट्स, केमिकल और पैकेजिंग सामग्री व हरदोई से खेल उद्योग के लिए लकड़ी की आपूर्ति आसानी से हो सकेगी। आइआइए मेरठ चैप्टर के अध्यक्ष अंकित सिंघल का कहना है कि गंगा एक्सप्रेसवे पर्यटन, यातायात, व्यापार, उद्योग समेत सभी क्षेत्रों के लिए लाभकारी साबित होगा। पेपर उद्योग से संबंधित सामग्री, खेल उत्पाद, रबर उत्पाद, खाद, स्टील आदि उत्पादों को नया बाजार मिलेगा। मेरठ आने वाले कृषि अपशिष्ट बगास व फल, सब्जी और फूल समेत विभिन्न सामग्री आसानी से मेरठ पहुंच जाएगी। परतापुर औद्योगिक क्षेत्र एसोसिएशन के अध्यक्ष निपुण जैन ने बताया कि गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने से माल ढुलाई में लगने वाले समय और खर्च दोनों कम हो जाएंगे। विशेष रूप से खेल सामग्री, वस्त्र, कृषि आधारित सामग्री और खाद्य सामग्री (पैक्ड अचार) को सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से नए बाजार के द्वार खुलेंगे। आइआइए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अनुराग अग्रवाल ने बताया कि मेरठ के खेल उत्पाद की पूर्वी उप्र में भारी मात्रा में मांग है। खेल उत्पाद इकाइयों को लाभ मिलेगा। सब्जी मंडी एसोसिसेशन नवीन मंडी स्थल के अध्यक्ष पंडित ब्रजभूषण शर्मा का कहना है कि प्रयागराज से भिंडी व काशीफल, हरदोई से जवा मिर्च, बैंगन, शाहजहांपुर से बैंगन, खीरा व लौकी, बदायूं से मिर्च, संभल से आलू व फूलगोभी, बुलंदशहर से टमाटर व गोभी की आपूर्ति हो रही है। सर्दी के दौरान पूर्वी उप्र से बड़ी मात्रा में सब्जियों से भरे ट्रक यहां आते हैं। प्रतापगढ़ के आंवला की यहां काफी मांग है। फल सब्जी एसोसिएशन के अध्यक्ष इरशाद का कहना है कि बदायूं और प्रयागराज के अमरूद की यहां काफी डिमांड रहती है। बड़ी मात्रा में अमरूद वहां से यहां आता है। अब पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच व्यापारिक आदान-प्रदान आसान हो जाएगा।

परंपरागत खेती छोड़ फूलों की खेती अपनाई, कम लागत में मिला ज्यादा मुनाफा

रायपुर, परंपरागत खेती (गेहूं-धान) की तुलना में फूलों की खेती कम लागत में 3-4 गुना तक अधिक मुनाफा दे रही है। गेंदा, गुलाब और गुलदाउदी जैसे फूलों की 12 महीने मांग होने से किसान हर सीजन में बंपर कमाई कर रहे हैं। कम पूंजी से शुरू होकर, यह व्यवसाय प्रति हेक्टेयर लाखों रुपये का शुद्ध लाभ  दे रहा है, जिससे किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रहे हैं।  शादी, पार्टी, त्यौहार और धार्मिक आयोजनों में फूलों की मांग साल भर बनी रहती है, जिससे अच्छी कीमतें मिलती हैं।            राज्य शासन की योजनाओं का लाभ लेकर रायगढ़ जिले के किसान अब परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए उद्यानिकी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी कड़ी में लैलूंगा विकासखंड के ग्राम गमेकेरा निवासी किसान  ईश्वरचरण पैकरा ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन से फूलों की खेती अपनाकर अपनी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि की है। किसान की सफलता आज सबके लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।          पैकरा पहले परंपरागत रूप से धान की खेती किया करते थे, जिसमें मेहनत के मुकाबले आय सीमित थी। वर्ष 2025-26 में उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में 0.400 हेक्टेयर भूमि पर गेंदा फूल की खेती शुरू की। विभाग द्वारा तकनीकी सहयोग एवं आवश्यक मार्गदर्शन मिलने से उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से खेती की, जिसका परिणाम बेहद सकारात्मक रहा। जहां पहले धान की खेती से उन्हें लगभग 11 क्विंटल उत्पादन मिलता था और सीमित आय होती थी, वहीं फूलों की खेती से उन्हें करीब 38 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। इस उत्पादन से उनकी कुल आमदनी लगभग 3 लाख 4 हजार रुपये तक पहुंच गई। लागत निकालने के बाद उन्हें लगभग 2 लाख 59 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ, जो पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना अधिक है।           फूलों की खेती में सफलता मिलने के बाद  पैकरा का आत्मविश्वास बढ़ा है। वे बताते हैं कि कम समय में अधिक लाभ मिलने के कारण अब वे इस खेती को और विस्तार देने की योजना बना रहे हैं। उनके खेत में खिले गेंदा फूलों की रंगीन पंक्तियां आज उनकी मेहनत और सफलता की कहानी बयां करती हैं। उनकी इस उपलब्धि को देखकर गांव के अन्य किसान भी अब उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं और विभाग से संपर्क कर फूलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। इस प्रकार राज्य शासन की योजनाएं न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हो रही हैं, बल्कि कृषि के स्वरूप में भी सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।

FASTag और AI की मदद से अब टोल पर बिना रुकें कटेगा शुल्क, जानें सरकार की योजना

 नई दिल्ली देश के हाईवे पर अब वो दिन खत्म होने वाले हैं जब टोल प्लाजा पर लंबी लाइन में खड़े होकर आपका मूड और माइलेज दोनों खराब होता था. अब गाड़ी दौड़ेगी और टोल अपने आप कट जाएगा. यानी ना रुकना, ना बहस, ना चिल्ल-पों. सरकार एक ऐसा सिस्टम ला रही है जिसमें कैमरा नंबर पढ़ेगा और पैसा सीधे आपके खाते से कटेगा. यदि सबकुछ योजना के मुताबिक रहा तो दिसंबर तक ये बदलाव जमीन पर दिखने लगेगा और आपके सफर का एक्सपीरियंस पूरी तरह बदल जाएगा. आइये विस्तार से जानें क्या है पूरा मामला-  देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर जल्द ही टोल प्लाजा पर रुकने की झंझट खत्म होने वाली है. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि दिसंबर 2026 तक कई हाईवे पर सीमलेस और बैरियर-फ्री (Barrier-Free) टोल सिस्टम लागू कर दिया जाएगा. इससे सफर तेज, आसान और बिना किसी झंझट के आगे बढ़ेगा।  लॉजिस्टिक्स पॉवर समिट एंड अवॉर्ड्स 2026 में बोलते हुए गडकरी ने कहा कि, देश में लॉजिस्टिक्स लागत कम करने के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है. उन्होंने बताया कि सरकार दिसंबर तक कई नेशनल हाईवे पर बिना बैरियर वाला टोल सिस्टम लागू करने की योजना पर काम कर रही है. इससे टोल प्लाजा पर लगने वाला समय बचेगा और ट्रैफिक भी कम होगा।  AI और FASTag से होगा ऑटोमैटिक टोल कट इस नए सिस्टम में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. इसमें ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्ननिशन (ANPR) और RFID बेस्ड FASTag शामिल होंगे. हाई-परफॉर्मेंस कैमरे गाड़ियों की नंबर प्लेट पहचानेंगे और FASTag के जरिए टोल अपने आप कट जाएगा. ड्राइवर को कहीं रुकने की जरूरत नहीं होगी।  अगर कोई वाहन नियमों का पालन नहीं करता है तो उसे ई-नोटिस भेजा जाएगा. समय पर भुगतान नहीं करने पर FASTag को सस्पेंड किया जा सकता है और VAHAN से जुड़े अन्य जुर्माने भी लग सकते हैं. गडकरी ने कहा कि अगर भारत को ग्लोबल पावर बनना है तो लॉजिस्टिक्स लागत को सिंगल डिजिट तक लाना होगा।  इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मद्रास और कानपुर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट बेंगलुरु की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सप्रेसवे और इकोनॉमिक कॉरिडोर बनने से भारत की लॉजिस्टिक्स लागत 16 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत तक आ गई है. उन्होंने बताया कि अमेरिका और यूरोप में यह करीब 12 प्रतिशत है, जबकि चीन में 8 से 10 प्रतिशत के बीच है।  ग्रीन फ्यूल पर जोर गडकरी ने कहा कि भारत अपनी 87 प्रतिशत तेल जरूरत आयात के जरिए पूरी करता है. हर साल करीब 22 लाख करोड़ रुपये का फॉसिल फ्यूल आयात किया जाता है, जिससे प्रदूषण भी बढ़ता है. ऐसे में वैकल्पिक ईंधन और बायोफ्यूल को बढ़ावा देना जरूरी है. उन्होंने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूचर का फ्यूल है, लेकिन इसे किफायती बनाने के लिए हाइड्रोजन स्टेशन की लागत कम करनी होगी।  गडकरी ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है. सरकार का सपना है कि देश को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाया जाए. बेहतर सड़क नेटवर्क और कम लॉजिस्टिक्स लागत इस लक्ष्य को हासिल करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।   

क्रिसिल की रिपोर्ट: भारत में कमर्शियल व्हीकल मार्केट 2027 में 12.4 लाख यूनिट्स की रिकॉर्ड बिक्री के लिए तैयार

मुंबई  क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार, भारत की कमर्शियल व्हीकल इंडस्ट्री फिस्कल साल 2027 में रिकॉर्ड 12.4 लाख यूनिट्स की बिक्री तक पहुंचने वाली है, जो वित्त वर्ष 2019 के पिछले पीक को पार कर जाएगी, लेकिन वित्त वर्ष 2026 में 13 परसेंट की मज़बूत वापसी के बाद ग्रोथ 5-6 प्रतिशत तक कम होने की उम्मीद है।  वित्त वर्ष 2026 में इंडस्ट्री की घरेलू रिकवरी कई वजहों से हुई, जिसमें सितंबर 2025 में GST रेट को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करना भी शामिल है, जिससे परचेज़ इकोनॉमिक्स में सुधार हुआ और डेफर्ड डिमांड अनलॉक हुई. इंटरेस्ट रेट में कमी, बेहतर फ्रेट यूटिलाइजेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर और माइनिंग एक्टिविटी में बढ़ोतरी ने भी वॉल्यूम को सपोर्ट किया।  वित्त वर्ष 2027 में घरेलू डिमांड सपोर्टिव रहने की उम्मीद है, जिसे इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित एक्टिविटी, लगातार रिप्लेसमेंट डिमांड और बेहतर अफोर्डेबिलिटी का सपोर्ट मिलेगा. हालांकि, क्रिसिल ने कहा कि वेस्ट एशिया में चल रहे संकट की वजह से एक्सपोर्ट में जल्द ही रुकावट आ सकती है, जिससे डिमांड खत्म होने के बजाय डिस्पैच में देरी होने की संभावना है।  मार्केट ज़्यादातर घरेलू है, जिसमें लगभग 92 प्रतिशत वॉल्यूम भारत से आता है और बाकी एक्सपोर्ट से आता है. यह इंडस्ट्री मोटे तौर पर हल्के कमर्शियल व्हीकल (LCVs) में बंटी हुई है, जो वॉल्यूम का 60 प्रतिशत हिस्सा हैं, और मीडियम और भारी कमर्शियल व्हीकल (MHCVs) हैं, जिनमें बसें हर एक में एक सब-सेगमेंट के तौर पर हैं।  ई-कॉमर्स और लास्ट-माइल डिलीवरी की मांग की वजह से LCV की ग्रोथ 5-6 प्रतिशत रहने का अनुमान है. इस सेगमेंट में, 2 टन से ज़्यादा ग्रॉस व्हीकल वेट (GVW) वाली गाड़ियां अब LCV सेल्स का 73 प्रतिशथ हिस्सा हैं, जो वित्त वर्ष 2020 में 60 प्रतिशत था, क्योंकि फ्लीट ऑपरेटर ज़्यादा यूनिट जोड़ने के बजाय पेलोड एफिशिएंसी को प्राथमिकता दे रहे हैं।  MHCV वॉल्यूम में 4-5 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने का अनुमान है, जिसे माल ढुलाई और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च से मदद मिलेगी. बेहतर रोड इंफ्रास्ट्रक्चर की मदद से ज़्यादा टन वाले व्हीकल की तरफ़ झुकाव, वॉल्यूम ग्रोथ को कम कर सकता है, भले ही अंदरूनी डिमांड स्थिर रहे।  दोनों डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर – लुधियाना से सोननगर तक पूर्वी DFC और दादरी से JNPT तक पश्चिमी DFC, जो अप्रैल 2026 में पूरी तरह चालू हो जाएंगे – के पूरा होने से लंबी दूरी के माल के लिए रेल से कॉम्पिटिशन भी शुरू होगा, जिससे रिप्लेसमेंट डिमांड पर असर पड़ सकता है।  बस सेगमेंट की बात करें तो इसमें वित्त वर्ष 2027 में 3-4 प्रतिशत की ग्रोथ होने की उम्मीद है, जिसे रिप्लेसमेंट डिमांड और सरकार की तरफ से इलेक्ट्रिक बस खरीदने से सपोर्ट मिलेगा. हालांकि यह अभी भी एक छोटा सब-सेगमेंट है, लेकिन यहां इलेक्ट्रिफिकेशन दूसरी CV कैटेगरी के मुकाबले तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, हालांकि इसकी पहुंच अभी भी कम सिंगल डिजिट में है।  एक्सपोर्ट की बात करें तो, क्रिसिल को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 में ग्रोथ तेज़ी से घटकर 2-4 प्रतिशत हो जाएगी, जो वित्त वर्ष 2026 में 17 प्रतिशत थी. वेस्ट एशिया, जो एक्सपोर्ट का लगभग एक चौथाई हिस्सा है, शिपिंग में रुकावटों की वजह से मुख्य रुकावट है. फिर भी, टॉप MHCV बनाने वाले देशों में से एक के तौर पर भारत की बढ़ती स्थिति एक मज़बूत बेस देती है, और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ ट्रेड एग्रीमेंट को फ़ाइनल करने से मीडियम टर्म में एक्सपोर्ट बढ़ सकता है।  सोच-समझकर कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से रेवेन्यू ग्रोथ, वॉल्यूम ग्रोथ से थोड़ी ज़्यादा रहने की संभावना है. लेकिन जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण स्टील, एल्युमीनियम और फ्यूल की बढ़ती इनपुट कॉस्ट से ऑपरेटिंग मार्जिन वित्त वर्ष 2026 के 12 प्रतिशत से 40-50 बेसिस पॉइंट कम होकर 11.5-11.6 प्रतिशत हो सकता है. अगर एग्रेसिव प्राइस पास-थ्रू से डिमांड पर असर पड़ता है, तो कॉस्ट में ज़्यादा बढ़ोतरी से मार्जिन और खराब हो सकता है।  इंडस्ट्री को बढ़ते कम्प्लायंस कॉस्ट का भी सामना करना पड़ रहा है. नए मॉडल्स के लिए एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम मैंडेट अप्रैल 2026 से और सभी प्रोडक्शन के लिए अक्टूबर 2026 से लागू होंगे, इसके बाद अप्रैल 2027 से कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी-III नॉर्म्स और उसके तुरंत बाद प्रपोज़्ड भारत स्टेज VII लागू होंगे।  R&D, टूलिंग और सर्टिफिकेशन में इन्वेस्टमेंट से वित्त वर्ष 2027 और वित्त वर्ष 2028 तक गाड़ियों की कीमतें बढ़ने की संभावना है, जिससे जल्द ही रिप्लेसमेंट डिमांड बढ़ सकती है. वॉल्यूम और मार्जिन प्रेशर में कमी के बावजूद, क्रिसिल ने कहा कि इंडस्ट्री का क्रेडिट प्रोफ़ाइल स्टेबल बना हुआ है, जिसे मज़बूत कैश फ़्लो और हेल्दी बैलेंस शीट का सपोर्ट मिला है।  इस फ़ाइनेंशियल ईयर में सालाना कैपिटल खर्च 5,500 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है, जो पिछले साल के हिसाब से मॉडर्नाइज़ेशन और रेगुलेटरी कम्प्लायंस पर फ़ोकस करेगा. कैपेक्स-टू-EBITDA रेश्यो 0.3x से नीचे रहने की उम्मीद है. क्रिसिल ने चेतावनी दी है कि कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव, महंगाई, ब्याज दरें और लॉजिस्टिक्स लागत पर असर डालने वाले जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट पर नज़र रखने लायक मुख्य बातें बनी हुई हैं, क्योंकि इनसे डिमांड और मार्जिन के नज़रिए में बड़ा बदलाव आ सकता है।