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विपरीत राजयोग से मिथुन, तुला और धनु राशि को अचानक लाभ के संकेत

 ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों की स्थिति में बदलाव का असर सभी राशियों पर पड़ता है. इस समय शुक्र ग्रह वृषभ राशि में गोचर कर चुके हैं और 14 मई 2026 तक इसी राशि में रहेंगे. शुक्र के इस गोचर से वृषभ राशि में खास व दुर्लभ संयोग बना हुआ है, जिसे विपरीत राजयोग कहा जाता है. ज्योतिष शास्त्र में विपरीत राजयोग बहुत ही अद्भुत, लाभकारी और शुभ योग माना जाता है. ज्योतिषियों के मुताबिक, यह योग कुछ राशियों के लिए अचानक लाभ और तरक्की के मौके लेकर आ सकता है. खासतौर पर 3 राशियों के लिए यह समय भाग्य बदलने जैसा साबित हो सकता है. आइए जानते हैं उन लकी राशियों के बारे में. मिथुन राशि इस समय मिथुन राशि वालों को धन से जुड़े अच्छे व बड़े अवसर प्राप्त हो सकते हैं. अचानक आर्थिक लाभ होने के योग हैं. जीवन में सुख-सुविधाएं बढ़ सकती हैं. परिवार के साथ अच्छा समय बिता सकते हैं. विदेश से जुड़े काम भी पूरे हो सकते हैं. हालांकि, खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा. तुला राशि तुला राशि वालों की आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिल सकता है. लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिल सकता है. नौकरी में प्रमोशन या कारोबार में बढ़ोतरी के शुभ योग बन रहे हैं. परिवार में चल रहे मतभेद खत्म हो सकते हैं, जिससे माहौल बेहतर होगा. इस दौरान आपकी पर्सनैलिटी भी सकारात्मक चेंज आएगा. लेकिन सेहत का ध्यान जरूर रखें. धनु राशि यह समय आपके लिए नए अवसर लेकर आ सकता है. नौकरी और बिजनेस में तरक्की के योग बन रहे हैं. आप मुश्किल परिस्थितियों में भी फायदा निकाल सकते हैं. विदेश से लाभ मिलने की संभावना है. समाज में मान-सम्मान बढ़ सकता है. हालांकि स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहना जरूरी है. शुक्र को मजबूत करने के उपाय अगर आपकी कुंडली में शुक्र कमजोर है, तो इस समय कुछ आसान उपाय करके इसे मजबूत किया जा सकता है. रोजाना 'ऊं शुं शुक्राय नमः' या 'ऊं द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः' का जाप करें. शुक्रवार के दिन श्री सूक्तम स्तोत्र का पाठ करें. भगवान विष्णु का ध्यान और पूजा करना भी लाभकारी माना जाता है.

बागपत का दिल दहला देने वाला हादस,सोहित चौहान की मौत, भाई बना पुलिस अफसर

बागपत उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया है. यह कहानी सिर्फ एक परिवार के दर्द की नहीं, बल्कि उस विडंबना की भी है, जिसमें खुशियां और गम एक ही दिन, एक ही घर में टकरा गए. जिस दिन एक बेटे ने अपने सपनों को साकार करते हुए पुलिस सेवा में कदम रखा, उसी दिन दूसरे बेटे ने देश सेवा करते हुए अपनी जान गंवा दी. बागपत जिले के छपरौली क्षेत्र के लूम्ब गांव के निवासी अग्निवीर सोहित चौहान की अरुणाचल प्रदेश में ड्यूटी के दौरान दर्दनाक मौत हो गई. जानकारी के अनुसार, रविवार को आए बर्फीले तूफान के दौरान एक पेड़ अचानक गिर पड़ा, जिसकी चपेट में आकर सोहित गंभीर रूप से घायल हो गए. हादसा इतना भयानक था कि उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया. इस घटना ने न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरे गांव को शोक में डुबो दिया. सोहित 2023 में अग्निवीर के तहत हुआ था भर्ती सोहित चौहान वर्ष 2023 में अग्निवीर योजना के तहत भारतीय सेना की 3 ग्रेनेडियर यूनिट में भर्ती हुए थे. वह अपने परिवार के सबसे छोटे सदस्य थे. परिवार में माता-पिता, एक बड़ा भाई और एक बहन है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाले सोहित ने कठिन परिश्रम और लगन के दम पर सेना में जगह बनाई थी. उनके परिवार को उन पर गर्व था और गांव के युवाओं के लिए वे प्रेरणा बन चुके थे. लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. जिस दिन सोहित की मौत की खबर आई, उसी दिन उनके बड़े भाई मोहित चौहान उत्तर प्रदेश पुलिस में शामिल हो रहे थे. उस दिन उनकी पासिंग आउट परेड थी, जिसे देखने के लिए उनके पिता मोहर सिंह भी गए हुए थे. घर में जश्न का माहौल था, हर कोई खुश था कि परिवार का एक बेटा पुलिस में भर्ती हो गया है. लेकिन इसी खुशी के बीच अचानक आई दुखद खबर ने सब कुछ बदल दिया. जैसे ही परिवार को सोहित की मौत की सूचना मिली, खुशी का माहौल मातम में बदल गया. पिता, जो बड़े बेटे की सफलता पर गर्व महसूस कर रहे थे, अचानक छोटे बेटे की मौत की खबर सुनकर टूट गए।. मां का रो-रोकर बुरा हाल हो गया. एक ही दिन में परिवार ने जीवन का सबसे बड़ा सुख और सबसे बड़ा दुख दोनों देख लिया. सोहित की अंतिम विदाई में हर आंख हुई नम जब सोहित चौहान का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई. गांव की गलियों, सड़कों और घरों की छतों पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. हर कोई अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देने के लिए पहुंचा. अंतिम संस्कार के दौरान सेना के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ सोहित को विदाई दी. उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और सलामी दी गई.यह दृश्य इतना भावुक कर देने वाला था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों से आंसू छलक पड़े. गांव के बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, सभी ने अपने इस वीर बेटे को नम आंखों से विदा किया. इस दुखद घटना के बाद कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता भी परिवार से मिलने पहुंचे. उन्होंने परिवार को सांत्वना दी और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया. स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि सोहित चौहान को शहीद का दर्जा दिया जाए और उनके परिवार को उचित मुआवजा तथा पेंशन दी जाए. ग्रामीणों का कहना है कि सोहित ने देश सेवा करते हुए अपनी जान गंवाई है, इसलिए उन्हें पूरा सम्मान मिलना चाहिए. सांसद बोले परिवार देश परिवार के साथ सोहित के पिता मोहर सिंह ने बताया कि उनका बेटा बहुत मेहनती और जिम्मेदार था. वह परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारना चाहता था और इसी उद्देश्य से सेना में भर्ती हुआ था. उन्होंने कहा कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है, लेकिन उसका इस तरह चले जाना असहनीय है. उन्होंने सरकार से मांग की कि उनके परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए ताकि वे आगे का जीवन सम्मानपूर्वक जी सकें. वहीं दुख की इस घड़ी में परिवार से मिलने पहुंचे सांसद राजकुमार सांगवान ने कहा कि सोहित के परिवार के साथ पूरा देश खड़ा है. सरकार उनके साथ है. जो भी मदद होगी हर संभव मदद दिलाई जाएगी. उनकी अंतिम यात्रा में हर दल का आदमी शामिल हुआ. उनका योगदान देश याद रखेगा.

कनाडा में 16 मौतों के आरोपी ट्रक-ड्राइवर को नहीं होगी डिपोर्ट, जसकीरत को 8 साल की सजा

 संगरूर  कनाडा के मशहूर हंबोल्ट ब्रोंकोस बस हादसे के गुनहगार पंजाब मूल के ट्रक ड्राइवर जसकीरत सिंह सिद्धू को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सोमवार सुबह उन्हें भारत डिपोर्ट किया जाना था, लेकिन रवानगी से 2 दिन पहले फेडरल कोर्ट ने इस पर इमरजेंसी रोक लगा दी है। कनाडा की मीडिया रिपोट्स के अनुसार जस्टिस जोसलिन गाग्ने ने यह आदेश तब दिया जब जसकीरत सिंह सिद्धू के वकील ने कनाडा बॉर्डर सर्विस एजेंसी के फैसले को कोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने अगले आदेशों तक जसकीरत सिंह की डिपोर्टेशन पर रोक लगा दी। दरअसल मूल रूप से संगरूर के रहने वाले ट्रक ड्राइवर के कारण कनाडा के हंबोल्ट ब्रोंकेस में एक रोड एक्सीडेंट हुआ, जिसमें 16 लोगों की मौत हो गई थी और 13 गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस मामले में जसकीरत सिंह को 8 साल की सजा हुई, जिसके बाद कनाडा बॉर्डर सर्विस एजेंसी ने उसे डिपोर्ट करने का आदेश जारी किया था। 25 अप्रैल को फेडरल कोर्ट में हुई सुनवाई में दोनों पक्षों के बीच बहस हुई। कोर्ट इस बात की समीक्षा कर रहा है कि क्या जसकीरत को 'मानवीय आधार' पर रुकने का मौका दिया जाना चाहिए। दरअसल सिद्धू के वकील माइकल ग्रीन ने कोर्ट में सबसे बड़ी दलील उनके एक साल के बेटे की सेहत को लेकर दी। बच्चे को दिल और फेफड़ों की गंभीर बीमारी है। वकील ने कहा कि भारत की खराब हवा बच्चे के स्वास्थ्य के लिए जानलेवा हो सकती है। वकील ने तर्क दिया कि हादसे से पहले जसकीरत का रिकॉर्ड एकदम बेदाग था और उन्होंने जेल में अपने किए का गहरा पश्चाताप किया है। सरकारी पक्ष और कानून की दलील: सरकारी वकील ने कोर्कट में दलील दी है कि कि कनाडा के कानून के मुताबिक, अगर किसी पीआर (PR) होल्डर को 6 महीने से ज्यादा की जेल होती है, तो वह देश में रहने का हक खो देता है। जसकीरत को 8 साल की सजा हुई है, इसलिए उन्हें डिपोर्ट करना अनिवार्य है। सरकारी वकील ने दलील दी है कि जिसकी लापरवाही से 16 लोगों की जान चली गई और 13 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। उसे कनाडा में रहने का कोई हक नहीं है। यहीं नहीं सरकारी वकील ने ये भी दलील दी है कि अगर जसकीरत सिंह सिद्धू को अपने बच्चों से अलग नहीं होना तो वो उन्हें लेकर भी जा सकता है। अगर भारत में उन्हें परेशानी है तो वो यहां रह सकते हैं। मृतकों के परिजनों की कोर्ट से गुहार… टोबी बाउलेट ने कोर्ट में स्पष्ट कहा— "जसकीरत सिंह सिद्धू को डिपोर्ट करना कोई अतिरिक्त सजा नहीं है, बल्कि यह कनाडा के कानून का हिस्सा है। कानून स्पष्ट है कि यदि आप अपराधी हैं, तो आप इस देश में रहने का हक खो देते हैं। हर बार नई अपील और नई तारीख हमारे जख्मों को फिर से कुरेद देती है।" क्रिस जोसेफ ने भावुक होते हुए कोर्ट से पूछा— "अदालत में बार-बार सिद्धू के परिवार और उनके बच्चों की दुहाई दी जा रही है। लेकिन उन 16 पिताओं के बारे में किसने सोचा जिन्होंने अपने जवान बेटों के जनाजे उठाए? मेरे बेटे का भविष्य छीन लिया गया। सिद्धू का परिवार उनके साथ है, लेकिन हमारे बच्चे कभी वापस नहीं आएंगे। हम सिर्फ यह चाहते हैं कि कानून अपना काम करे।" लापरवाही ने ले ली थी रोड एक्सीडेंट में 16 लोगों की जान ट्रक ड्राइवर जसकीरत सिंह की लापरवाही के कारण 6 अप्रैल 2018 को रोड एक्सीडेंट हुआ। जसकीरत सिंह ने 'स्टॉप साइन' को नजरअंदाज किया और ट्रक की रफ्तार कम नहीं की। ट्रक सीधे 'हंबोल्ट ब्रोंकोस' जूनियर हॉकी टीम की बस से टकरा गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस के तीन टुकड़े हो गए। इस हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई और 13 लोग घायल हुए। पूरे कनाडा में शोक की लहर दौड़ गई थी। जसकीरत ने अपना गुनाह कबूल किया और उसे 8 साल जेल की सजा सुनाई गई। 2023 में उन्हें जेल से पैरोल मिली। जसकीरत का पंजाब से कनाडा तक का सफर जसकीरत मूल रूप से पंजाब के संगरूर जिले के रहने वाला है। उसके पिता पंजाब में किसान हैं और परिवार के पास करीब 50 एकड़ खेती की जमीन है। जसकीरत ने पंजाब से बी.कॉम की डिग्री ली और साल 2014 में अपनी पत्नी के साथ स्थायी निवासी (PR) के तौर पर कनाडा शिफ्ट हुए थे। जसकीरत सिंह ट्रक चलाता था। केस की टाइम लाइन 6 अप्रैल 2018: भीषण बस हादसा हुआ। 16 घरों के चिराग बुझ गए। 22 मार्च 2019: कोर्ट ने जसकीरत को 8 साल जेल की सजा सुनाई। जनवरी 2023: अच्छे बर्ताव के कारण उन्हें जेल से पैरोल पर रिहा किया गया। 24 मई 2024: इमिग्रेशन बोर्ड ने उनका पीआर स्टेटस रद्द कर डिपोर्ट करने का आदेश दिया। 4 फरवरी 2026: सरकार ने उनकी अंतिम अपील ठुकरा दी और 27 अप्रैल का दिन रवानगी के लिए तय किया। 25 अप्रैल 2026: रवानगी से दो दिन पहले फेडरल कोर्ट ने डिपोर्टेशन पर 'स्टे' (रोक) लगा दिया। अब आगे क्या? जसकीरत के वकील के मुताबिक, यह रोक 1 से 8 महीने तक रह सकती है। अब फेडरल कोर्ट विस्तार से इस बात की जांच करेगा कि क्या मानवीय आधार पर उनके निर्वासन को टाला जा सकता है। फिलहाल, जसकीरत की भारत रवानगी पर ब्रेक लग गया है। एक संघीय न्यायाधीश ने हंबोल्ट ब्रोंकोस (Humboldt Broncos) बस दुर्घटना के लिए जिम्मेदार ट्रक ड्राइवर को आखिरी क्षणों में बड़ी राहत दी है, जिससे उनकी भारत वापसी पर फिलहाल रोक लग गई है। जसकीरत सिंह सिद्धू के वकीलों ने शुक्रवार को फेडरल कोर्ट में अपील की थी ताकि सोमवार सुबह होने वाले उनके निर्वासन (deportation) को रोका जा सके। मामले का विवरण दुर्घटना: अप्रैल 2018 में, कैलगरी के नौसिखिया ट्रक ड्राइवर सिद्धू ने सास्काचेवान के टिस्डेल के पास एक ग्रामीण चौराहे पर स्टॉप साइन की अनदेखी की थी। उनका ट्रक जूनियर हॉकी टीम को ले जा रही बस के रास्ते में आ गया था। परिणाम: इस भीषण हादसे में 16 लोगों की मौत हुई और 13 अन्य घायल हुए, जिससे पूरे कनाडा में शोक की लहर दौड़ गई थी। सजा: सिद्धू ने खतरनाक ड्राइविंग के अपराधों के … Read more

लखनऊ में सीएम योगी देंगे 936 पुलिस हेड ऑपरेटरों को नियुक्ति पत्र, जानें कार्यक्रम की तारीख

लखनऊ उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए मंगलवार का दिन खास रहने वाला है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित एक कार्यक्रम में 936 हेड ऑपरेटर और हेड ऑपरेटर (मैकेनिकल) को नियुक्ति पत्र सौंपेंगे। इस कार्यक्रम में प्रदेश के वित्त और संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना भी मौजूद रहेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर बताया, "उत्तर प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था को तकनीकी दक्षता और त्वरित संचार की नई शक्ति प्रदान करने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण अवसर है। उत्तर प्रदेश पुलिस दूरसंचार विभाग के लिए चयनित 936 प्रधान परिचालक/प्रधान परिचालक (यांत्रिक) को आज नियुक्ति-पत्र प्रदान करने का गौरव प्राप्त होगा।" राज्य सरकार पुलिस भर्ती को लेकर काफी एक्टिव है। अभी पिछले रविवार को ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में आयोजित 60,244 आरक्षी नागरिक पुलिस सीधी भर्ती वर्ष-2025 बैच के पुलिस आरक्षियों के दीक्षांत परेड समारोह में हिस्सा लिया था। इस अवसर पर परेड का निरीक्षण करने के साथ ही विभिन्न श्रेणी में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली आरक्षियों को पुरस्कार का वितरण भी किया गया था। अब 28 अप्रैल को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में होने वाला ये कार्यक्रम खास तौर पर पुलिस दूरसंचार विभाग के लिए है। इसमें चुने गए 936 उम्मीदवारों को सीएम योगी के औपचारिक तौर पर नियुक्ति दी जाएगी। ये पद तकनीकी रूप से काफी अहम माने जाते हैं, क्योंकि आज के समय में पुलिसिंग सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि तेज और मजबूत कम्युनिकेशन सिस्टम पर भी निर्भर करती है। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नए भर्ती हुए कर्मियों को संबोधित भी करेंगे और उनसे पूरी ईमानदारी, मेहनत और जिम्मेदारी के साथ अपनी ड्यूटी निभाने का आग्रह करेंगे। अधिकारियों का कहना है कि इस कार्यक्रम के जरिए सरकार अपनी पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया प्रकाश डालेगी कि बिना किसी पक्षपात के योग्य उम्मीदवारों को मौका दिया जा रहा है। साथ ही कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए जो कदम उठाए जा रहे हैं, उन पर भी फोकस रहेगा।

10 मेडल के साथ हरियाणा चमका, 5वीं जूनियर एथलेटिक्स एशियन चैंपियनशिप में बनाई जगह

फतेहाबाद. एथलेटिक्स फेडरेशन आफ इंडिया द्वारा आयोजित 24वीं नेशनल जूनियर फेडरेशन एथलेटिक्स प्रतियोगिता में हरियाणा के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार स्वर्ण, चार रजत और दो कांस्य पदक सहित कुल 10 पदक जीतकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। एथलेटिक्स हरियाणा के अध्यक्ष दिलबाग सिंह ने जानकारी दी कि इस प्रदर्शन के दम पर राज्य के पांच एथलीट खिलाड़ियों ने एशियन जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया है। इनमें मुस्कान (सोनीपत) ने 5 किलोमीटर दौड़, अमन (झज्जर) ने हैमर थ्रो, निश्चय (रोहतक) ने डिस्कस थ्रो, पूजा (फतेहाबाद) ने हाई जंप और सुमित राठी (झज्जर) ने 3000 मीटर स्टेपल चेज इवेंट में जगह बनाई है। वहीं योगिता (हिसार) ने 5 किलोमीटर रेस वाक में नया राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित किया है, योगिता ने 2025 के भुवनेश्वर में बनाए गए राजस्थान की मनीषा का रिकार्ड तोड़ा। एशियन जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप का आयोजन 28 से 31 मई तक हांगकांग (चीन) में किया जाएगा, जिसमें ये खिलाड़ी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। महासचिव प्रदीप मलिक ने बताया कि प्रतियोगिता के अंतिम दिन फतेहाबाद की पूजा ने हाई जंप में 1.80 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीतते हुए एशियन चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया। वहीं सुमित राठी ने 3000 मीटर स्टेपल चेज में 9:28.04 के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। इसके अलावा 800 मीटर दौड़ में गीतिका दहिया ने कांस्य पदक हासिल किया। मीडिया प्रभारी सत्यवीर धनखड़ ने बताया कि हरियाणा के खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।

कक्षा 5वीं और 8वीं की पुन:परीक्षा 1 जून से, अतिरिक्त शिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित

कक्षा 5वीं, 8वीं की पुन:परीक्षा 1 जून से, परीक्षा से पूर्व अतिरिक्त शिक्षण की व्यवस्था कराई जाएगी सुनिश्चित राज्य शिक्षा केन्द्र ने परीक्षा को लेकर जारी की समय सारिणी, सत्र 2025-26 की मुख्य परीक्षा में अनुत्तीर्ण/अनुपस्थित विद्यार्थी होंगे शामिल परीक्षा से पूर्व अतिरिक्त शिक्षण की व्यवस्था कराई जाएगी सुनिश्चित भोपाल शिक्षण सत्र 2025-26 की मुख्य परीक्षा में अनुत्तीर्ण/अनुपस्थित कक्षा 5वीं एवं 8वीं के विद्यार्थियों के लिए पुन: परीक्षा होगी। यह परीक्षा 1 से 6 जून 2026 के बीच होगी। इसमें प्रदेश के समस्त शासकीय, मान्यता प्राप्त अशासकीय एवं अनुदान प्राप्त शालाओं और पंजीकृत मदरसों में अध्ययनरत कक्षा 5वीं व 8वीं के विद्यार्थी शामिल होंगे। इस संबंध में राज्य शिक्षा केंद्र ने दिशा निर्देश भी जारी कर दिए हैं। राज्य शिक्षा केंद्र के पोर्टल से डाउनलोड कर सकेंगे प्रवेश पत्र कक्षा 5वीं एवं 8वीं की दोबारा परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थी अपना प्रवेश पत्र राज्य शिक्षा केन्द्र के परीक्षा पोर्टल www.rskmp.in के माध्यम से डाउनलोड कर सकेंगे। पुन: परीक्षा के लिए शाला प्रमुख/जनशिक्षा केन्द्र प्रभारी/बी.आर.सी.सी., डी.पी.सी. के लॉगिन अंतर्गत परीक्षा पोर्टल से परीक्षार्थियों के प्रवेश पत्र डाउनलोड करने की सुविधा रहेगी। सभी बी.आर.सी.सी. को निर्देशित किया गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनके ब्लॉक के सभी विद्यार्थियों को संबंधित शाला के प्रधान पाठक के माध्यम से 25 मई तक प्रवेश पत्र अनिवार्य रूप से प्राप्त हो जाएं। संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र श्री हरजिंदर सिंह ने बताया कि जारी निर्देश में स्पष्ट कहा गया है कि पुन: परीक्षा में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों के लिए परीक्षा आयोजन से पूर्व शाला स्तर पर विषयवार अतिरिक्त शिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए। परीक्षार्थियों द्वारा पूर्व में प्रोजेक्ट कार्य पूर्ण नहीं करने अथवा प्रोजेक्ट कार्य में 7 से कम अंक होने की स्थिति में छात्रों से अनुत्तीर्ण अथवा अनुपस्थित रहे विषयों के प्रोजेक्ट कार्य पूर्ण करवाकर शाला स्तर पर मूल्यांकन किया जाए एवं प्रोजेक्ट के प्राप्तांकों की प्रविष्टि परीक्षा पोर्टल पर कराई जाएगी। जन शिक्षा केन्द्र स्तर पर होंगे परीक्षा केन्द्र कक्षा 5वीं व 8वीं की पुन: परीक्षा के लिए परीक्षा केन्द्र केवल जनशिक्षा केन्द्र स्तर पर बनाए जाएंगे। अगर किसी जिले में किसी परीक्षा केन्द्र पर 500 से अधिक परीक्षार्थी सम्मिलित हो रहे हों तो उस स्थिति में राज्य शिक्षा केन्द्र से अनुमति उपरांत दूसरा परीक्षा केन्द्र निर्धारित किया जा सकेगा। परीक्षा केन्द्र निर्धारण उपरांत शाला की मैपिंग संबंधित बी.आर.सी.सी. द्वारा 15 मई तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रश्न पत्रों का परीक्षा केन्द्रों पर ही होगा स्थल मुद्रण दोबारा परीक्षा के लिए प्रश्नपत्रों की ऑन स्पॉट प्रिंटिंग निर्धारित परीक्षा केन्द्रों पर ही की जाएगी। परीक्षा पोर्टल से प्रश्नपत्रों को डाउनलोड एवं प्रिंट करने के लिए जिला परियोजना समन्वयक नोडल अधिकारी होंगे। इस सबंध में संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र ने निर्देशित किया है कि, निर्धारित परीक्षा केन्द्र पर न्यूनतम 2 कम्प्यूटर/लैपटॉप, 2 कार्यशील प्रिंटर, इंटरनेट, पर्याप्त ए-4 साईज पेपर, टोनर की उपलब्धता एवं सुगम विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। पुन: परीक्षा में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों की परीक्षा में उपस्थिति एवं परीक्षा केन्द्र तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संबंधित शाला प्रमुख/शिक्षक को दी गई है। गर्मी से सुरक्षा के लिए होंगी आवश्यक व्यवस्थाएं राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा प्रत्येक परीक्षा केन्द्र पर शीतल पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ ही नियमित अंतराल पर बच्चों को पानी पिलाये जाने, लू-लपट व डिहाईड्रेशन से सुरक्षित रखने के लिए परीक्षा केन्द्रों में ओरल रिहाईड्रेशन साल्यूशन (ओ.आर.एस.) की उपलब्धता, पंखों की व्यवस्था एवं स्वास्थ्य संबंधी विषय स्थिति परिलक्षित होने की स्थिति में निकटस्थ स्वास्थ्य केन्द्र अथवा अस्पताल ले जाने की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए हैं।  

पंजाब में बड़ा हादसा टला: पटियाला में ट्रैक ब्लास्ट, शंभू-राजपुरा रेल लाइन क्षतिग्रस्त

राजपुरा. शंभू-राजपुरा रेलवे ट्रैक पर देर रात करीब 9:30 बजे तेज धमाका हुआ। धमाके से पटरी क्षतिग्रस्त हो गई। सूत्रों के अनुसार इसी रेलवे ट्रैक पर एक अज्ञात शव भी मिला है, जिसके चीथड़े उड़े हुए थे। हालांक पुलिस की तरफ से किसी शव मिलने की पुष्टि नहीं का जा रही। सुरक्षा के मद्देनजर रेलवे ने शंभू-राजपुरा रूट की सभी ट्रेनों, चाहे वह यात्री हैं या मालगाड़ी को एहतियातन नजदीकी स्टेशनों पर रोक दिया है। यह धमाका राजपुरा और शंभू रेलवे स्टेशन के बीच गांव बठोनिया के नजदीक डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर की रेलवे ट्रैक पर हुआ है। सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल, जीआरपी और स्थानीय पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए। फॉरेंसिक विशेषज्ञों की ली जा रही मदद घटना के असली कारणों का पता लगाने के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। पटियाला के एसएसपी वरुण शर्मा ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच जांच में जुट गई हैं। धमाका किस वस्तु से हुआ, इसकी जांच की जा रही है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले 23 जनवरी 2026 को भी फतेहगढ़ साहिब ज़िले के सरहिंद रेलवे स्टेशन के पास भी डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर के रेलवे ट्रैक पर रात लगभग 9:50 बजे भी धमाका हुआ था। एक रेलवे कर्मचारी हुआ जख्मी मालगाड़ी का इंजन पटरी से उतर गया और इसमें सवार एक रेलवे कर्मचारी इंजन के शीशे टूटने से जख्मी हो गया था जबकि लोको पायलट बाल-बाल बच गया था। इस धमाके में ट्रैक भी क्षतिग्रस्त हुआ था। इस मामले की जांच अब तक जारी है। बीती रात शंभू बॉर्डर के नजदीक रेलवे लाइन पर हुए धमाके के मामले में एसएसपी पटियाला आईपीएस वरुण शर्मा ने मंगलवार सुबह बताया कि बीती रात धमाके के बारे में सूचना मिलते ही डीआईजी सहित वह पूरी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे थे। घटना स्थल की जांच के दौरान पता चला कि यह धमाका प्लांड था और जो व्यक्ति धमाका करने के लिए विस्फोटक लग रहा था वह इसी धमाके में मारा गया। मरने वाला व्यक्ति जगरूप सिंह है जो तरनतारन के गांव पंजखड़ का रहने वाला था। मौके से एक सिम कार्ड भी मिला है। इस सिम कार्ड को तकनीकी टीम के जरिए जांचा जा रहा है। इसके अलावा फॉरेंसिक की टीम में भी मौके पर जांच कर रही है। फिलहाल घटना को अंजाम देने वाले मुख्य आरोपितों की पहचान के लिए पुलिस टीम काम कर रही है।

RTE में बड़ा बदलाव: EWS बच्चों को प्राथमिकता, पारदर्शिता के लिए डिजिटल सिस्टम लागू करेगी सरकार

रायपुर. डिजिटल सुशासन का सशक्त मॉडल से शिक्षा के अधिकार को एक नया आसमान मिल रहा है। भारत में शिक्षा को मौलिक अधिकार का दर्जा मिलने के बाद से लगातार यह प्रयास किए जा रहे हैं कि हर बच्चे तक शिक्षा का उजाला पहुंच सके। हमारे देश मे एक लंबे समय तक यह देखा गया कि नीतियां तो जरूर बनाई जाती रही मगर जमीन पर उसके क्रियान्वयन में पारदर्शिता और पहुंच की कमी बनी रहती थी। ऐसे समय में छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने जो करके दिखाया है आज उसकी मिसाल दी जा रही है। प्रदेश भर मे मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में डिजिटल सुशासन के जरिए शिक्षा के अधिकार (RTE) को वास्तविक रूप में लागू किया जा रहा है। यह कदम तकनीकी सुधार ही नई बल्कि सामाजिक न्याय, समान अवसर और पारदर्शिता की दिशा में भी एक क्रांतिकारी पहल है। RTE और डिजिटल बदलाव से पैदा हो रही एक नई सोच शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित किया गया है। पहले यही प्रक्रिया जटिल, समय लेने वाली और कई बार विवादों से घिरी रहने वाली होती थी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस चुनौती को समझा और पूरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित कर दिया। अब आवेदन करने से लेकर चयन तक स्टेप ऑनलाइन और औटोमेटिक हो गया है, जिससे मानवीय हस्तक्षेप स्वयमेव कम हो गया है। पक्षपात की संभावना पूरी तरह से समाप्त हो गई है साथ ही पारदर्शिता और भरोसा बढ़ा है। निष्पक्षता की गारंटी बन रही है ऑनलाइन लॉटरी डिजिटल प्रक्रिया का सबसे इम्पॉर्टन्ट पार्ट है ऑनलाइन लॉटरी सिस्टम। उदाहरण के तौर पर शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कुल 38,439 आवेदन प्राप्त हुए थे जिनमे 27,203 आवेदन पात्र पाए गए और इन पात्र आवेदन से 14,403 बच्चों का ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से चयन किया गया। पूरी तरह कंप्यूटर आधारित और रैंडमाइज्ड होने वाली इस प्रक्रिया से किसी भी प्रकार की सिफारिश या पक्षपात की गुंजाइश अपने आप समाप्त हो जाती है। राज्य सरकार का यह कदम सुनिश्चित करता है कि हर बच्चे को समान अवसर मिले जो लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना है। सटीकता और भरोसे का आधार है डिजिटल सत्यापन डिजिटल प्रणाली में चयन के साथ डिजिटल सत्यापन को भी शामिल किया गया है। इस प्रणाली मे आवेदन के दौरान दस्तावेजों की ऑनलाइन जांच,पात्रता की स्वचालित पुष्टि, गलत जानकारी की तत्काल पहचान कर ली जाती है। जिससे यह पूरी प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय और त्रुटिरहित बन जाती है। अभिभावकों के लिए भी बनी सरल और सुविधाजनक प्रक्रिया डिजिटल प्रणाली का बड़ा लाभ आम नागरिकों को भी मिल रहा है। अब अभिभावकों को स्कूलों या कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते क्योंकि वे अब घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। मोबाइल नंबर के जरिए सत्यापन और अपडेट प्राप्त कर सकते हैं। आवेदन करते समय सिस्टम के द्वारा 1.5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले निजी स्कूलों की सूची और उपलब्ध सीटों की जानकारी भी उपलब्ध हो जाती है। इस सुविधा से अभिभावकों को सही निर्णय लेने में मदद मिलती है। कमजोर वर्ग के बच्चों को मिल रही प्राथमिकता इस योजना के उद्देश्य के मूल मे ही समाज के उन कमजोर वर्गों को मुख्यधारा में लाना है जो अब तक अपने पिछड़ेपन की वजह से ज्ञान और शिक्षा से वंचित रहे। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए इस योजना मे अनुसूचित जाति (SC),अनुसूचित जनजाति दिव्यांग और अन्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को प्राथमिकता दी जाती है। छत्तीसगढ़ की साय सरकार की यह पहल सामाजिक समावेशन को मजबूत करने वाली और समानता की दिशा में ठोस कदम साबित हो रही है। योजना के व्यापक प्रभाव से हो रहा लाखों बच्चों को लाभ वर्तमान मे छत्तीसगढ़ में इस योजना से 3 लाख 63 हजार से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त राज्य की साय सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए 300 करोड़ रुपये की शुल्क प्रतिपूर्ति का प्रावधान किया है, जिससे और भी अधिक बच्चों को लाभ मिल सकेगा और निजी विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया और मजबूत होगी। यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि यह कदम केवल कागजों तक ही सीमित नहीं होगा बल्कि जमीनी स्तर पर इसके प्रभाव को देखा जा सकेगा। जिलेवार सफलता प्रमाण है की योजना राज्य के हर कोने तक पहुंच रही है। इस डिजिटल प्रक्रिया की सफलता इस बात से ही साबित हो जाती है कि छत्तीसगढ़ के लगभग सभी जिलों में हजारों बच्चों को इसका लाभ मिल रहा है। रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, दुर्ग, सरगुजा, जशपुर, बस्तर जैसे क्षेत्रों से बड़ी संख्या में बच्चों का चयन हुआ है। सुदूर प्रांतों से बच्चों का चयन यह दर्शाता है कि यह योजना केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों तक भी सफलता पूर्वक पहुंची है। छत्तीसगढ़ मे हुई डिजिटल सुशासन की व्यापक पहल RTE के अलावा भी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में कई डिजिटल सुधार किए जा चुके हैं जैसे e-Office प्रणाली,CMO पोर्टल, स्मार्ट क्लासरूम, विद्या समीक्षा केंद्र इत्यादि इन सभी कदमों का उद्देश्य छत्तीसगढ़ प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाना ही रहा है। APAAR ID से और संवरेगा राज्य का डिजिटल भविष्य शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल बदलाव को और मजबूत करने के लिए छात्रों को 12 अंकों की एक विशिष्ट पहचान देने वाली APAAR ID जैसी पहल भी महत्वपूर्ण है। यह ID उनके पूरे शैक्षणिक रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने का कम करती है, जिससे भविष्य में बच्चों को स्कूल बदलने में आसानी होगी, रिकॉर्ड की पारदर्शिता बनी रहेगी और शिक्षा प्रणाली की दक्षता बढ़ेगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शिता से संभव हो पाया यह बदलाव इस महा परिवर्तन के पीछे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की स्पष्ट सोच और प्रतिबद्धता साफ दिखाई देती है क्योंकि वे दृढ़ता से इस बात के पक्षधर हैं कि “कोई भी बच्चा केवल आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए।” उनकी यही सोच इस डिजिटल RTE मॉडल की नींव है। समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की ओर एक मजबूत कदम डिजिटल प्रक्रिया ने शिक्षा को अधिक समावेशी, अधिक सुलभ और अधिक पारदर्शी बनाने का कम किया है परिणामस्वरूप … Read more

पंजाब में ‘मिशन अन्वेषण’ की शुरुआत, गैस और तेल की खोज के लिए सर्वेक्षण कार्य शुरू

 चंडीगढ़  पंजाब में पोटाश की संभावनाओं के बाद अब प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल की खोज के लिए नई पहल शुरू की गई है। खनन एवं भू-विज्ञान मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने सोमवार को बताया कि हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज से राज्य के आर्थिक विकास में नया आयाम जुड़ सकता है। मंत्री गोयल ने एमजीएसआइपीए में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन डायरेक्टर जनरल आफ हाइड्रोकार्बन (डीजीएच) और आयल इंडिया लिमिटेड (ओआइएल) के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की, जिसमें राज्य में प्रस्तावित सर्वेक्षण के लिए सहयोग मांगा गया। अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल में डीजीएच के एचओडी अजय कुमार शर्मा, डीजीएम सुरेंद्र कुमार दास और ओआइएल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनुप कुमार समेत अन्य विशेषज्ञ शामिल रहे। बैठक में पंजाब के विभिन्न क्षेत्रों में तेल और गैस की संभावनाओं पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार के निर्देश पर ओआइएल राज्य में 2डी सिस्मिक सर्वे करेगा, जिससे जमीन के नीचे मौजूद तेल और गैस भंडारों का वैज्ञानिक आकलन किया जा सकेगा। इस परियोजना का नाम ‘मिशन अन्वेषण’ रखा गया है। सर्वे में श्री मुक्तसर साहिब, बठिंडा, फरीदकोट, मोगा, जालंधर और कपूरथला जिलों को शामिल किया गया है। पंजाब सब-बेसिन में लगभग 169 लाइन किलोमीटर क्षेत्र में सिस्मिक सर्वे किया जाएगा, जिससे सटीक भू-वैज्ञानिक डाटा तैयार किया जा सकेगा। मंत्री गोयल ने कहा कि इस पहल से ऊर्जा संसाधनों की खोज को गति मिलेगी और देश की विदेशी ऊर्जा पर निर्भरता कम होगी। साथ ही, राज्य में उद्योगों को बढ़ावा मिलने और रोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव जसप्रीत तलवार, निदेशक खनन अभिजीत कापलिश और मुख्य अभियंता हरदीप सिंह मेंदिरत्ता समेत अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। पंजाब के खनन और भूविज्ञान मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि राज्य अपने जलकार्बन भंडार का दोहन करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इससे पहले, जलकार्बन महानिदेशालय और ऑयल इंडिया लिमिटेड के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने प्रस्तावित सर्वेक्षणों के लिए समर्थन मांगने के लिए उनसे मुलाकात की थी। केंद्रीय टीम ने श्री मुक्तसर साहिब, बठिंडा, फरीदकोट, मोगा, जालंधर और कपूरथला सहित जिलों में प्राकृतिक तेल और गैस भंडार की संभावना पर प्रकाश डाला। अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रव्यापी अन्वेषण अभियान के तहत जलकार्बन भंडार की पहचान करने के लिए बड़े पैमाने पर 2डी भूकंपीय सर्वेक्षण किया जाएगा। केंद्र सरकार की “मिशन अन्वेषण” पहल के तहत किए जाने वाले इस सर्वेक्षण में पंजाब उप-बेसिन के लगभग 169 किलोमीटर क्षेत्र को शामिल किया जाएगा। इस अभ्यास का उद्देश्य सटीक भूवैज्ञानिक डेटा जुटाना और अनछुए क्षेत्रों में मौजूद खनिज और पेट्रोलियम संसाधनों का आकलन करना है। अधिकारियों ने कहा कि यह पहल पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के उन निर्देशों के बाद की गई है, जिसमें पंजाब, राजस्थान और गंगा बेसिन सहित प्रमुख बेसिनों में अन्वेषण प्रयासों का विस्तार करना शामिल है। इस कदम के महत्व पर जोर देते हुए गोयल ने कहा कि यह अन्वेषण अभियान एक व्यापक भूवैज्ञानिक डेटाबेस बनाने, आयातित ऊर्जा पर भारत की निर्भरता कम करने और आर्थिक विकास के नए रास्ते खोलने में सहायक होगा। उन्होंने आगे कहा, “इस तरह की पहल ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करेगी, रोजगार के अवसर पैदा करेगी और पंजाब में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देगी।” मंत्री जी ने समय पर सर्वेक्षण पूरा करने के लिए पंजाब सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया और कहा कि भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार राज्य के समग्र विकास के लिए प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करने के लिए प्रतिबद्ध है। बैठक के दौरान राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें अतिरिक्त मुख्य सचिव जसप्रीत तलवार और खनन निदेशक अभिजीत कपलीश शामिल थे, भी उपस्थित थे।  

‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ कहने वाले रिंकू सिंह राही ने चुपचाप लिया यू-टर्न

लखनऊ यूपी कैडर के 2023 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने अपना तकनीकी इस्तीफा आधिकारिक तौर पर वापस ले लिया है. उन्होंने 26 मार्च 2026 को राष्ट्रपति और डीओपीटी को अपना त्यागपत्र भेजकर प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया था. राजस्व परिषद से अटैच राही ने बिना काम के वेतन लेने को अनैतिक बताते हुए यह कदम उठाया था. इसके साथ ही उन्होंने संवैधानिक व्यवस्था के समानांतर एक अलग सिस्टम चलने का गंभीर आरोप लगाया था. अब शासन स्तर पर हुई चर्चा के बाद उन्होंने गोपनीय तरीके से इस्तीफा वापसी की अर्जी दी है. इस्तीफा वापसी की प्रक्रिया रही बेहद गोपनीय रिंकू सिंह राही का इस्तीफा 30 मार्च को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद यूपी की ब्यूरोक्रेसी में तूफान आ गया था. हालांकि, अब उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया को बेहद गोपनीय रखा गया. शासन के सूत्रों के अनुसार, इस्तीफा वापसी का मामला अभी उच्च स्तर पर लंबित है. सरकार से औपचारिक अनुमति मिलने के बाद उनकी बहाली और नई तैनाती के संबंध में आदेश जारी किया जाएगा. फिलहाल रिंकू सिंह ने इस विषय पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है. आखिर क्यों नाराज थे IAS अधिकारी? जुलाई 2025 में शाहजहांपुर में जॉइंट मजिस्ट्रेट रहते हुए वकीलों के साथ हुए विवाद और उठक-बैठक के वीडियो के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया था. तब से वे राजस्व परिषद में अटैच थे. राही का तर्क था कि उन्हें वेतन तो मिल रहा है, लेकिन जनसेवा के लिए कोई सार्थक कार्य नहीं सौंपा गया. उन्होंने 'काम नहीं तो वेतन नहीं' का सिद्धांत देते हुए कहा था कि एक ईमानदार अधिकारी के लिए बिना काम के पैसे लेना स्वीकार्य नहीं है. समानांतर सिस्टम पर उठाए थे सवाल अपने इस्तीफे वाले पत्र में रिंकू सिंह ने प्रशासनिक कार्यशैली पर तीखा हमला किया था. उन्होंने लिखा था कि मौजूदा समय में संवैधानिक व्यवस्था के समानांतर एक अलग ही सिस्टम काम कर रहा है, जहां अच्छे काम के बावजूद अधिकारियों को दरकिनार किया जा रहा है. उन्होंने समाज कल्याण अधिकारी के पुराने पद पर वापस भेजे जाने की भी मांग की थी.