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सुशासन तिहार और जनगणना के लिए प्रशासन ने पूरी की तैयारियां

सुशासन तिहार और जनगणना को लेकर प्रशासन पूरी तरह तैयार  30 अप्रैल तक लंबित प्रकरण निपटाने के निर्देश 1 मई से दो बड़े अभियान शुरू : 73 शिविरों के साथ सुशासन तिहार टीएल बैठक में कलेक्टर संजय अग्रवाल की समीक्षा, प्रशासनिक तैयारियों को दिया अंतिम रूप बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने टीएल बैठक लेकर आगामी 1 मई से शुरू हो रहे सुशासन तिहार और जनगणना कार्य की तैयारियों की गहन समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को 30 अप्रैल तक सभी लंबित मामलों के निराकरण के निर्देश देते हुए दोनों महत्वपूर्ण अभियानों को सफल बनाने के लिए पूरी मुस्तैदी से कार्य करने को कहा।       कलेक्टर संजय अग्रवाल ने मंगलवार को आयोजित टीएल बैठक में जिले में शुरू होने जा रहे दो बड़े अभियानों—सुशासन तिहार और जनगणना—की तैयारियों को अंतिम रूप दिया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सुशासन तिहार प्रारंभ होने से पहले सभी लंबित प्रकरणों का निराकरण कर लिया जाए, ताकि शिविरों में आमजन को त्वरित राहत मिल सके। कलेक्टर ने बताया कि जिले में सुशासन तिहार के दौरान कुल 73 शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनमें 31 शिविर ग्रामीण क्षेत्रों और 42 शिविर शहरी क्षेत्रों में लगाए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में शिविरों के संचालन की जिम्मेदारी जनपद पंचायत के सीईओ तथा शहरी क्षेत्रों में निगम आयुक्त एवं संबंधित सीएमओ को सौंपी गई है। शिविर प्रतिदिन सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक निर्धारित स्थलों पर आयोजित होंगे। उन्होंने अधिकारियों को समय पर उपस्थित रहने तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित कर शिविरों की जानकारी देने के निर्देश दिए।           बैठक में 1 मई से शुरू हो रही जनगणना की भी विस्तृत समीक्षा की गई। कलेक्टर ने नागरिकों से 30 अप्रैल तक स्व-गणना फॉर्म भरने की अपील करते हुए कहा कि जनगणना में जानकारी देना प्रत्येक व्यक्ति के लिए अनिवार्य है। जानकारी न देने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना से प्राप्त जानकारी का उपयोग केवल नीति निर्माण के लिए किया जाएगा तथा जनगणना अधिनियम 1948 के तहत डेटा की गोपनीयता पूर्णतः सुरक्षित रखी जाएगी। 1 मई से प्रगणक घर-घर जाकर 34 बिंदुओं पर जानकारी एकत्रित करेंगे। कलेक्टर ने जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) मद के अंतर्गत आगामी 5 वर्षों की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने अधिकारियों से 30 अप्रैल तक ऑनलाइन माध्यम से प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा। ऐसे कार्यों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया, जिनसे अधिक से अधिक लोगों को लाभ मिल सके और जिनके लिए अन्य स्रोतों से पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं है।           प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने शेष पात्र किसानों को योजना से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि जिले में वर्तमान में 1.02 लाख किसान इस योजना का लाभ ले रहे हैं, जबकि लगभग 25 हजार और किसानों को इससे जोड़ा जा सकता है। इसके अलावा, खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए खाद और बीज की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अग्रिस्टेक पोर्टल में पंजीकृत किसानों को ही खाद उपलब्ध कराया जाएगा और 1 मई से सॉफ्टवेयर शुरू होने पर वितरण प्रक्रिया प्रारंभ होगी। बैठक में आगामी 9 मई को आयोजित होने वाली लोक अदालत में अधिक से अधिक प्रकरण प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए। कलेक्टर ने टीएल, जनदर्शन, मुख्यमंत्री घोषणाओं, पीएम पोर्टल तथा उच्च न्यायालय से संबंधित लंबित मामलों की भी समीक्षा कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

कांग्रेस ने किया बड़ा कदम, पदस्थ बड़े नेता को सस्पेंड किया, गंभीर आरोप लगे; पूरी कहानी जानें

रायपुर  छत्तीसगढ़ के इस जिले में कांग्रेस ने बड़ी कार्रवाई की है। पार्टी ने अपने ही नेता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। बिरगांव के कांग्रेसी पार्षद ओम प्रकाश साहू पर चोरी का पैसा छिपाने का आरोप लगा है। मामले की जानकारी पर जिला कांग्रेस कमेटी रायपुर ने उन्हें पार्टी से बाहर निकाला है। कहा- कानून से ऊपर कोई नहीं है।   जानकारी के अनुसार, एक कारोबारी से करीब 50 लाख रुपये की लूट हुई थी। आरोपी चालक कृष्णा साहू कारोबारी से लाखों रूपए लेकर फरार हो गया था। मामले में कारोबारी ने पुलिस को शिकायत सौंपी गई। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी चालक कृष्णा साहू द्वारा चोरी के पैसों को छिपाने में ओम प्रकाश साहू की भूमिका सामने आई है। ओम प्रकाश साहू की पहचान बिरगांव के कांग्रेसी पार्षद के रूप में हुई है। जिसके बाद पार्टी ने सख्त कार्रवाई करते हुए पार्षद को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बिरगांव के अध्यक्ष योगेंद्र सोलंकी द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर जिला अध्यक्ष राजेंद्र पप्पू बंजारे ने यह कार्रवाई की। वहीं, पुलिस ने बिरगांव के कांग्रेसी पार्षद ओम प्रकाश साहू को चोरी का पैसा छिपाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। ऐसे में मामला केवल आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। इधर, जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इस पूरे मामले की रिपोर्ट छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रभारी महामंत्री (संगठन) मलकीत सिंह गेंदू को भेज दी गई है, ताकि आगे जरूरी कार्रवाई की जा सके। इससे साफ है कि पार्टी इस मामले को गंभीरता से ले रही है और इसमें कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती।

MSME टेक्नोलॉजी सेंटर से बिहार को नई रफ्तार, मांझी ने विपक्ष को घेरा

बिहटा/पटना. बिहटा के सिकंदरपुर में मंगलवार को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME), भारत सरकार के नए प्रौद्योगिकी केंद्र का शुभारंभ किया गया। मुख्‍यमंत्री सम्राट चौधरी और विभागीय मंत्री जीतन राम मांझी ने दीप प्रज्‍जवलन के बाद श‍िलापट का अनावरण किया। इसके साथ ही मुजफ्फरपुर, रोहतास, दरभंगा और मुंगेर में एक्सटेंशन सेंटर भी खोले गए।  बिहार के लाेगों के लिए होगा फायदेमंद उद्धाटन समारोह स्‍थल पर कई स्‍टॉल लगाए गए। सीएम और केंद्रीय मंत्री ने इनका निरीक्षण किया। इस केंद्र के बारे में बताया गया कि बिहार के युवाओं को रोजगार से जोड़ने में मदद मिलेगी। खासकर एससी एवं एसटी वर्ग के लोगाें को अपने कारोबार को शुरू करने एवं बढ़ावा देने में इससे मदद मिलेगी। उन्‍हें सरकारी लाभ के बारे में भी जानकारी मिलेगी।  विपक्ष पर मांझी ने क‍िया जोरदार हमला  एक दिन पहले केंद्रीय मंत्री मांझी ने इसकी सूचना साझा करते हुए विपक्ष पर तंज कसा था। अपने एक्‍स हैंडल पर उन्‍होंने लिखा, हमेशा अपने गया जी के लिए ख़ुशख़बरी सुनाते थे तो विरोधिया सब पूछता था बिहार को का मिला? लिजिए भाई अब बिहार के लिए भी खुशखबरी सुन लीजिए। 28 अप्रैल को दिन के 11 बजे, मतलब परसों सुबह 11 बजे पटना के बिहटा(सिकंदरपुर) में अपने मंत्रालय द्वारा अरबों की लागत से टेक्नॉलॉजी सेंटर का उदघाटन किया जा रहा है। इसके साथ ही मुजफ्फरपुर, दरभंगा, रोहतास और सीएम के विशेष आग्रह पर मुंगेर में बना एक्सटेंशन सेंटर का उद्घाटन किया जा रहा है। मांझी ने आम जन से अपील की क‍ि आप सब भी आईए आउर दोनों हाथ उठाकर कहिए, नरेंद्र मोदी संग चल पड़ा बिहार,जय हो मोदी सरकार।  

15 साल बाद उसलापुर रेलवे साइडिंग फिर शुरू, ट्रक मालिकों में उत्साह

15 साल बाद उसलापुर रेलवे साइडिंग फिर शुरू, ट्रक मालिकों में उत्साह आंधी-तूफान के बीच सैकड़ों ट्रक मालिकों की ऐतिहासिक बैठक, संचालन तत्काल शुरू करने का निर्णय वरिष्ठ नेताओं ने संभाला संरक्षक दायित्व, 1 मई को श्रमिक दिवस भव्य रूप से मनाने का ऐलान बिलासपुर  उसलापुर गुड्स शेड वेलफेयर ट्रक ओनर एसोसिएशन की एक महत्वपूर्ण बैठक उसलापुर रेलवे साइडिंग में आयोजित हुई, जिसमें खराब मौसम और धूल भरी आंधी के बावजूद सैकड़ों ट्रक मालिकों एवं श्रमिकों ने भाग लेकर एकजुटता का परिचय दिया। बैठक में 15 वर्षों से बंद पड़ी रेलवे साइडिंग को पुनः शुरू करने का सर्वसम्मति से ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। बैठक में वरिष्ठ नेता नरेश अग्रवाल, गुलशन ऋषि, प्रशांत नारंग एवं अशोक श्रीवास्तव ने एसोसिएशन के संरक्षक का दायित्व स्वीकार करते हुए संगठन को मजबूती प्रदान करने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि ट्रक मालिकों और श्रमिकों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। निर्णय अनुसार, उसलापुर रेलवे साइडिंग पर कार्य तत्काल प्रभाव से प्रारंभ किया जाएगा। सभी ट्रक मालिक एवं श्रमिक अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए नियमित संचालन शुरू करेंगे। यह पहल क्षेत्र के व्यापार और परिवहन व्यवस्था को नई गति देने वाली मानी जा रही है। बैठक के दौरान वक्ताओं ने कहा कि ट्रक मालिक, ड्राइवर और श्रमिक देश की आपूर्ति श्रृंखला की रीढ़ हैं, जो दिन-रात सेवाएं देकर अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हैं। इसके साथ ही, एसोसिएशन द्वारा आगामी 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस को भव्य रूप से मनाने का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर श्रमिकों के योगदान को सम्मानित करते हुए एकजुटता का प्रदर्शन किया जाएगा। बैठक में नरेश अग्रवाल, गुलशन ऋषि, प्रशांत नारंग, अशोक श्रीवास्तव, ईश्वर सिंह चंदेल, तेजिंदर सिंह बाली, राशिद अली, जीत सिंह, शाहनवाज, इस्माइल, महावीर सिंह, हरजिंदर सिंह, गुरमीत सिंह राणा, समीम, गुड्डू झा, बलजीत सिंह, विनोद पांडे, धीरज यादव, मनजीत सिंह, शिवकुमार, गुरजीत सिंह बाली एवं लेबर अध्यक्ष राजेश टंडन सहित बड़ी संख्या में ट्रक मालिक एवं श्रमिक उपस्थित रहे।

गेटमैन की कमी बनी चुनौती, सरपंच रोज संभालते हैं रेलवे फाटक और देते हैं हरी झंडी

होशियारपुर. पंजाब के होशियारपुर जिले के गांव बसियाला में रेलवे फाटक पर कोई कर्मचारी नहीं है। लेकिन दिन में दो बार जब ट्रेन आती है, वहां एक शख्स मौजूद होता है- गांव का सरपंच गुरदेव सिंह। गढ़शंकर तहसील के बसियाला गांव से गुजरने वाली रेलवे लाइन से रोजाना सैकड़ों लोग गुजरते हैं। यह रास्ता राहों से जैजों दोआबा को जोड़ता है। इस क्रॉसिंग पर फाटक है, पर उसे चलाने वाला सिस्टम नहीं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, रेलवे ने पहले इस रास्ते को बंद कर दिया था। विरोध के बाद रास्ता खोल दिया गया, लेकिन रेलवे ने फाटक नहीं लगाया। तब गांव वालों ने चंदा कर फाटक लगवाया। ग्रामीणों ने रेल अधिकारियों को फाटक पर कर्मचारी तैनात करने के आवेदन दिए, नेताओं से भी मांग की। लेकिन कोई नियुक्ति नहीं हुई। इसलिए अब सरपंच गुरदेव सिंह रोज ट्रेन के समय से पहले फाटक पर पहुंचते हैं। उसे बंद करते हैं और हाथ में हरी झंडी लेकर ट्रेन को गुजरने का संकेत देते हैं। यह उनकी आधिकारिक ड्यूटी नहीं है, लेकिन वे इसे नैतिक ड्यूटी मानते हैं। कोई तैयार नहीं हुआ- सरपंच डर लगता है कि कहीं कोई हादसा न हो जाए। मैं अपनी दुकान छोड़कर दिन में दो बार यहां आता हूं। आने से पहले फोन पर मुबारकपुर के रेलवे स्टाफ से ट्रेन के आने का पता करता हूं। हम गांव वालों ने एक व्यक्ति को 10 हजार रुपए महीने पर रखा था। वह काम छोड़ गया। उसके बाद से यह जिम्मेदारी मैंने खुद ले ली।

शरीर के वजन के अनुसार दैनिक जल आवश्यकता कैसे निर्धारित करें

देश में गर्मी ने अपना रूप दिखाना शुरू कर दिया है और कई हिस्सों में तापमान मई शुरू होने से पहले ही 40-42 डिग्री के करीब पहुंच चुका है. ऐसे में गर्मी का दौर शुरू होते ही सबसे पहली सलाह यही मिल रही है कि खूब पानी पियो. लेकिन खूब पानी का मतलब क्या है? वैसे हम सालों से सुनते आ रहे हैं कि दिन में 8-10 गिलास पानी पीना चाहिए लेकिन मॉडर्न साइंस इस नियम से अलग बताता है. असल में पानी की जरूरत हर इंसान की बॉडी, एक्टिविटी और उसके वजन आदि के हिसाब से अलग-अलग होती है. यदि आप जरूरत से कम पानी पीते हैं तो थकान और सिरदर्द होगा और अगर बिना सोचे-समझे बहुत ज्यादा पी लेते हैं तो यह किडनी पर बोझ डाल सकता है. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि किसे कितना पानी पीना चाहिए? आज हम आपको कितना पानी पीना चाहिए, इस बारे में एक नया फॉर्मूला बताएंगे जो आपके वजन से कैलकुलेट होता है. वजन के हिसाब से कैसे तय करें पानी की मात्रा? यूनिवर्सिटी ऑफ मिसूरी की रिपोर्ट के मुताबिक, हाइड्रेशन के लिए कोई 'वन साइज फिट्स ऑल' नियम नहीं होता और यह पूरी तरह आपके बॉडी मास पर निर्भर करता है. रिसर्च एक बेहद सरल फॉर्मूला बताती हैं जिससे आप घर बैठे जान सकते हैं कि आपके शरीर को कितने लीटर पानी की जरूरत है. अपना वजन (किलोग्राम में) ÷ 30 = कुल लीटर. उदाहरण के लिए, यदि आपका वजन 60 किलो है, तो उसे 30 से भाग देने पर 2 आता है. यानी आपको दिन भर में कम से कम 2 लीटर पानी पीना चाहिए. वहीं अगर किसी का वजन 90 किलो है, तो उसे कम से कम 3 लीटर पानी की जरूरत होगी. गर्मी में बढ़ जाती है पानी की जरूरत मायो क्लिनिक के मुताबिक, यह फॉर्मूला एक बेसलाइन यानी बुनियादी जरूरत बताता है. लेकिन जब पारा 40 डिग्री के पार हो, तो गणित थोड़ा बदल जाता है. मेयो क्लिनिक की रिसर्च के अनुसार, अगर आप धूप में बाहर निकलते हैं या एक्सरसाइज करते हैं, तो पसीने के जरिए निकलने वाले इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई के लिए आपको हर आधे घंटे की एक्टिविटी पर करीब 350 मिली एक्स्ट्रा पानी पीना चाहिए. साथ ही यदि आप कैफीन (चाय-कॉफी) ज्यादा लेते हैं तो आपको और भी ज्यादा पानी की जरूरत पड़ सकती है क्योंकि कैफीन शरीर को डिहाइड्रेट करता है. सिर्फ प्यास लगने का इंतजार न करें अक्सर लोग तब पानी पीते हैं जब गला सूखने लगता है. लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स इसे एक 'चेतावनी' मानते हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) की एक स्टडी बताती है कि प्यास लगना इस बात का संकेत है कि आपका शरीर पहले ही 1-2 प्रतिशत डिहाइड्रेट हो चुका है. इससे बचने के लिए जरूरी है कि आप थोड़े-थोड़े समय पर पानी पीते रहें. सही हाइड्रेशन न केवल आपकी एनर्जी लेवल को बनाए रखता है, बल्कि यह वजन घटाने और स्किन को ग्लोइंग बनाने में भी मददगार साबित होता है.

विनेश फोगाट vs WFI: नेशनल ओपन रजिस्ट्रेशन विवाद पर गरमाई सियासत

नई दिल्ली रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) के अध्यक्ष संजय सिंह ने स्टार पहलवान विनेश फोगाट के उन दावों को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि WFI उन्हें अगले महीने होने वाले नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में खेलने से रोक रहा है। संजय सिंह ने कहा कि विनेश का रजिस्ट्रेशन पहले ही पूरा हो चुका है और सवाल उठाया कि वह बेवजह मुद्दा क्यों बना रही हैं। Vinesh Phogat के आरोपों को WFI चीफ ने किया खारिज दरअसल, पेरिस ओलंपिक 2024 में 50 किग्रा कुश्ती वर्ग के गोल्ड पदक मैच से पहले विनोश फोगाट को अयोग्य घोषित किया गया था, क्योंकि फाइनल मैच की सुबह उनका वजह सीमा से 100 ग्राम ज्यादा पाया गया था। एक दिन पहले वो वजन सीमा के भीतर थी, लेकिन दूसरे दिन 100 ग्राम वजन में बढ़ोत्तरी के चलते उन्हें अयोग्य घोषित किया गया। दिल तोड़ देने वाली इस घटना के बाद भारतीय पहलवान विनेश ने कुश्ती से संन्यास की घोषणा की थी, लेकिन पिछले दिसंबर में उन्होंने अपने रिटायरमेंट से यू-टर्न लिया और कुश्ती में वापसी का एलान किया। इसके बाद विनेश ने ये खुलासा किया कि वह अगले महीने होने वाले नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में हिस्सा लेने की प्लानिंग कर रही थीं, लेकिन रजिस्ट्रेशन नहीं कर सकीं। उन्होंने WFI अधिकारियों से इसको लेकर संपर्क किया, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाह नहीं मिला। उन्होंने संघ पर उनकी कुश्ती में वापसी जानबूझकर रोकने का आरोप लगाया है, जिसे WFI के चीफ संजय सिंह ने खारिज कर दिया।   इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए विनेश ने कहा, "मैं नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में वापसी करने की उम्मीद कर रही हूं। इसके लिए पंजीकरण 30 अप्रैल तक खुला था। हालाँकि, जब मैंने पंजीकरण करने की कोशिश की, तो पोर्टल पर लिखा आ रहा था कि ये अब बंद हो चुका है। मैं महासंघ के प्रशासनिक कर्मचारियों से संपर्क करने की कोशिश कर रही हूं, लेकिन उन्होंने मेरे कॉल्स का कोई जवाब नहीं दिया है।" विनेश ने कहा कि उन्हें फेडरेशन कप में भी इसी तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा था, उन्होंने आगे कहा कि चयन मानदंड आखिरी मिनट में बदल दिए गए थे। उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है कि WFI जानबूझकर उन्हें वापसी करने से रोक रहा है।   विनेश के दावों पर WFI चीफ का बयान इस कड़ी में WFI के अध्यक्ष संजय सिंह ने विनेश फोगाट द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि बाकी पहलवानों ने भी इसी तरह की समस्याओं का सामना किया था और उनका समाधान तुरंत कर दिया गया था। सिंह ने न्यूज एजेंसी IANS से बातचीत करते हुए कहा, "विनेश फोगट का रजिस्ट्रेशन पहले ही पूरा हो चुका है। वह बेवजह हंगामा क्यों कर रही है? हमने किसी भी पहलवान को भाग लेने से नहीं रोका है, उन सभी का स्वागत है। मीडिया से बात करने के बजाय, उसे कुश्ती पर ध्यान देना चाहिए। अब तक, 800 पहलवानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, और किसी ने भी किसी समस्या की रिपोर्ट नहीं की है।

छत्तीसगढ़ ने बनाया रिकॉर्ड: मनरेगा श्रमिकों की 97.11% ई-केवाईसी पूरी, देश में अव्वल

रायपुर. छत्तीसगढ़ महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (एमजीएनआरईजीए) के तहत श्रमिकों के ई-केवाईसी (इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर) सत्यापन में भारत में पहले स्थान पर है, जिससे डिजिटल शासन और ग्रामीण पारदर्शिता को बढ़ावा मिल रहा है। भारत सरकार द्वारा 27 अप्रैल (सोमवार) को जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, राज्य ने सक्रिय श्रमिकों के लिए 97.11 प्रतिशत की शानदार पूर्णता दर हासिल की है।  इस प्रदर्शन ने तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे औद्योगिक दिग्गजों के साथ-साथ केरल जैसे उच्च साक्षरता दर वाले राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया, जो 97.06% के साथ दूसरे स्थान पर रहा। छत्तीसगढ़ ने छोटे और बड़े दोनों राज्यों को पछाड़कर यह उपलब्धि हासिल की। छत्तीसगढ़ में एमएनआरईजीए के तहत 56.87 लाख से अधिक श्रमिकों का डिजिटल सत्यापन (ई-केवाईसी) सफलतापूर्वक पूरा हो गया है, जो मजदूरी भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। डिजिटल प्रक्रिया फर्जी जॉब कार्डों को खत्म करने में मदद करती है और यह सुनिश्चित करती है कि मजदूरी सीधे वास्तविक लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित हो। इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ में वर्तमान सरकार द्वारा प्रभावी निगरानी, ​​रणनीतिक योजना और नेतृत्व के परिणाम के रूप में देखा जा रहा है। सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि एक सुनियोजित राज्यव्यापी अभियान के माध्यम से ई-केवाईसी प्रक्रिया को तेज किया गया, जिससे बड़ी संख्या में श्रमिकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर सिस्टम से जुड़ने में मदद मिली। मुख्यमंत्री विष्णु देव ने कहा, “राज्य सरकार गरीब और श्रमिक समुदायों के हितों की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि उन्हें कल्याणकारी योजनाओं का पारदर्शी लाभ मिले। ई-केवाईसी समय पर वेतन भुगतान और श्रमिकों को सीधे लाभ पहुंचाने में मदद कर रहा है।” “यह उपलब्धि अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्राम स्तर पर काम करने वाली टीमों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। ई-केवाईसी ने न केवल हाजिरी रजिस्टरों में फर्जी उपस्थिति को रोकने में मदद की है, बल्कि वास्तविक लाभार्थियों तक लाभ पहुंचाने में अधिक पारदर्शिता भी लाई है,” उपमुख्यमंत्री और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने दावा किया। राज्य सरकार ने आगे निर्देश दिया कि लंबित मामलों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि राज्य 100 प्रतिशत ई-केवाईसी कवरेज हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सके। अधिकारियों ने कहा कि यह उपलब्धि राज्य भर में चलाए गए विशेष अभियानों, ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता कार्यक्रमों और तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग का परिणाम है।

चांदी के भाव में ₹5000 की गिरावट, सोने के रेट में भी बड़ी गिरावट, जानिए आज का 10 ग्राम गोल्ड प्राइस

इंदौर   शादियों के सीजन में बड़ी खबर सोने-चांदी के भाव को लकर आ रही है। आज सर्राफा बाजारों में सोना-चांदी के रेट में भारी गिरावट है। 28 अप्रैल को 24 कैरेट गोल्ड का भाव 1629 रुपये सस्ता हो गया है। आज यह 159557 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। चांदी 5381 रुपये सस्ती होकर 238339 रुपये प्रति किलो पर आ गई है। 22 कैरेट गोल्ड और 18 कैरेट के रेट आईबीजेए के मुताबिक आज 10 ग्राम 22 कैरेट गोल्ड के भाव 1492 रुपये सस्ता होकर 136994 रुपये पर आ गया है। इस पर 3 प्रतिशत जीएसटी नहीं लगा है। जीएसटी समेत यह 141103 रुपये का पड़ेगा। 18 कैरेट गोल्ड का रेट भी आज 1222 टूटकर बिना जीएसटी 112168 रुपये हो गया है। जीएसटी के साथ इसका भाव 115533 रुपये हो जाएगा। 14 और 23 कैरेट गोल्ड के रेट सर्राफा बजारों में आज 23 कैरेट गोल्ड की कीमत 1623 रुपये गिरकर 148958 रुपये पर पहुंच गई है। जबकि, 14 कैरेट गोल्ड की कीमत 953 रुपये कम होकर 87491 रुपये प्रति 10 ग्राम है। आईबीजेए दिन में दो बार रेट जारी करता है। एक बार दोपहर 12 या सवा 12 बजे के करीब दूसरा 5 बजे के आसपास। अभी यह रेट दोपहर सवा 12 बजे वाला है। IBJA रेट के मुताबिक अब सोना सर्राफा मार्केट के अपने ऑल टाइम हाई 176121 से 26564 रुपये सस्ता हो गया है। जबकि, चांदी के भाव में ऑल टाइम हाई से 1447594 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है। अगर युद्ध के बीच की बात करें तो सोना अबतक 9540 रुपये और चांदी 29561 रुपये गिर चुकी है। क्यों गिरे सोने-चांदी के दाम युद्ध के बीच सर्राफा बाजार में सोने-चांदी गिरती की कीमतों के कारणों के बारे में केडिया कमोडिटिज के प्रेसीडेंट अजय केडिया ने बताया कि बाजार नियामकों ने सोने के कारोबार में मार्जिन की दरें बढ़ा दी हैं, जिसका सीधा असर छोटे निवेशकों पर पड़ा है। ऊंची मार्जिन के चलते सट्टेबाजी करने वालों की संख्या में कमी आई है। कीमतों में अब नरमी है। शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव का सीधा असर जिन निवेशकों को शेयरों में नुकसान उठाना पड़ता है, वे अक्सर अपने दूसरे निवेश को बेचकर पैसा निकालने लगते हैं। सोना-चांदी उनकी पहली पसंद बनता है, क्योंकि यह मुनाफे में होता है। इस बिकवाली के दबाव ने भी सोने और चांदी की कीमतों को नीचे लाने में अहम भूमिका निभाई है। दूसरी ओर अब गोल्ड में इन्वेस्टमेंट की रफ्तार ठंडी पड़ गई है। यही वजह है कि बाजार में अब बड़ी तेजी के आसार फिलहाल नहीं दिख रहे। डॉलर की मजबूती ने डाला दबाव अमेरिकी डॉलर में हालिया मजबूती ने भी सोने की कीमतों को कमजोर करने में अहम भूमिका निभाई है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो दूसरी मुद्राओं वाले देशों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग घट जाती है।

झारखंड के 14 कोषागारों में फर्जी निकासी, 200 से ज्यादा कर्मचारी जांच के घेरे में

 रांची  झारखंड में वेतन निकासी के नाम पर एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है. महालेखाकार (AG) की ऑडिट रिपोर्ट में राज्य के 33 में से 14 कोषागारों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पकड़ी गई है. जांच में पुष्टि हुई है कि 200 से अधिक पुलिसकर्मियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों ने सिस्टम की तकनीकी खामियों का सहारा लेकर एक ही महीने में दो-दो बार वेतन और एरियर की निकासी की. इस फर्जीवाड़े से सरकारी खजाने को कुल 31.47 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जिसमें से केवल दोहरा वेतन भुगतान ही 7.67 करोड़ रुपये का है. डीएसपी स्तर के अधिकारी भी शामिल घोटाले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें कानून के रखवाले ही आरोपी पाए गए हैं. महालेखाकार द्वारा जारी सूची में डीएसपी स्तर के अधिकारी- नौशाद आलम, राजेश यादव, मणिभूषण प्रसाद और मुकेश कुमार महतो के नाम शामिल हैं. इन अधिकारियों ने अपनी विभिन्न पदस्थापनाओं के दौरान नियम विरुद्ध तरीके से दोहरा वेतन और एरियर उठाया है. इनके अलावा बड़ी संख्या में सिपाही, सहायक शिक्षक और चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी भी इस फेहरिस्त में शामिल हैं. इन 14 जिलों के कोषागारों में हुई गड़बड़ी महालेखाकार ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर जिन 14 कोषागारों में फर्जी निकासी की पुष्टि की है, उनमें हजारीबाग, बोकारो, रांची, देवघर, पलामू, गोड्डा, जमशेदपुर, तेनुघाट, गुमला, चाईबासा, महेशपुर, खूंटी, सरायकेला और रामगढ़ शामिल हैं. ऑडिट के अनुसार, कुल 614 कर्मचारियों ने इस पूरे खेल को अंजाम दिया है. सिपाही से लेकर शिक्षक तक ने की लूट जांच रिपोर्ट में सिपाही बिरसा राकेश कुमार चौधरी, अशोक संजय, चंदन कुमार तिवारी, अरविंद यादव, शंकर राम और सुरेंद्र राम के नाम प्रमुखता से दर्ज हैं. इन्होंने तकनीकी लूपहोल का फायदा उठाकर दोहरा भुगतान प्राप्त किया. महालेखाकार ने इस मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और राशि की वसूली की सिफारिश की है.