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महंगाई का असर: दिल्ली में ई-रिक्शा सफर होगा महंगा, नई दरें जल्द लागू

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में ई-रिक्शा से सफर करने वाले यात्रियों को जल्द ही ज्यादा किराया चुकाना पड़ेगा। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स फेडरेशन ने बढ़ती महंगाई और लंबे समय से किराए में कोई बदलाव न होने का हवाला देते हुए न्यूनतम किराया 20 रुपये करने का फैसला लिया है। नई दरें अगले महीने से लागू होने की संभावना है। फेडरेशन के चेयरमैन अनुज शर्मा ने बताया कि दिल्ली में ई-रिक्शा वर्ष 2010 से चल रहे हैं, लेकिन तब से अब तक इनके किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। वहीं, इसी अवधि में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी के किराए दो बार बढ़ चुके हैं। उनका कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई, बैटरी, मेंटेनेंस और अन्य खर्चों में इजाफे के कारण किराया बढ़ाना जरूरी हो गया है, ताकि ड्राइवरों की आय प्रभावित न हो। रिक्शा ड्राइवरों और मैन्युफैक्चरर्स की बैठक में फैसला यह फैसला बुधवार को ई-रिक्शा ड्राइवरों, डीलरों और मैन्युफैक्चरर्स की संयुक्त बैठक में लिया गया, जिसमें दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह भी मौजूद थे। बैठक में किराया बढ़ाने के साथ-साथ सेक्टर से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की गई। कुल 2 लाख ई-रिक्शा चल रहे वर्तमान में दिल्ली में 2 लाख से अधिक ई-रिक्शा आधिकारिक रूप से पंजीकृत हैं, जबकि करीब 1.5 लाख बिना रजिस्ट्रेशन के भी सड़कों पर चल रहे हैं। ये ई-रिक्शा खासकर मेट्रो स्टेशनों और रिहायशी इलाकों में लास्ट माइल कनेक्टिविटी का अहम साधन बने हुए हैं। अभी अधिकांश जगहों पर पहले दो किलोमीटर के लिए 10 रुपये और उसके बाद हर किलोमीटर के लिए 5 रुपये किराया लिया जाता है। 2022 का सर्कुलर लिया वापस इस बीच, दिल्ली सरकार ने 2022 के उस सर्कुलर को वापस लेने का भी फैसला किया है, जिसमें कंपनियों को अपने नाम पर कई ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक कार्ट रजिस्टर कराने की अनुमति दी गई थी। परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य कुछ कंपनियों के हाथों में मालिकाना हक के केंद्रीकरण को रोकना और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के शोषण को कम करना है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से मालिक-ड्राइवर को अधिक अवसर मिलेंगे, आत्मनिर्भर रोजगार को बढ़ावा मिलेगा और ई-रिक्शा सेक्टर में एकाधिकार की संभावना भी कम होगी। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से अधिक से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और लास्ट माइल कनेक्टिविटी का ढांचा भी मजबूत होगा।

अनुपमा में बड़ा ड्रामा: श्रुति और अनुपमा के बीच तीखी बहस, राही का डर बढ़ा

सीरियल अनुपमा की शुरुआत अनु की चिंता से होती है, जहां वह सोचती है कि जैसे ही राही को कैफे के बारे में पता चलेगा, बड़ा तूफान खड़ा हो सकता है. उसे लगता है कि उसने सही किया है, लेकिन राही उसकी भावनाओं को समझ नहीं पा रही. दूसरी तरफ राही से प्रेम अपने व्यवहार के लिए माफी मांगता है और कहता है कि उसे दुख देने का कोई हक नहीं है. वह राही को एक घड़ी गिफ्ट करता है और वादा करता है कि वह हमेशा उसके साथ रहेगा. राही के मन में डर है कि जब प्रेम को अनुपमा के कैफे के बारे में पता चलेगा, तो उसका रिएक्शन क्या होगा. मंदिर में अनुपमा और श्रुति का आमना-सामना कहानी में बड़ा मोड़ तब आता है जब अनुपमा मंदिर जाती है और वहां उसकी मुलाकात श्रुति से होते-होते रह जाती है. श्रुति अपनी बेटी के लिए प्रार्थना कर रही होती है, जिससे मंदिर में भीड़ रुक जाती है. अनुपमा लोगों से अपील करती है कि एक मां की भावना को समझें. इस बीच अनुपमा को एक लॉकेट मिलता है, जिसे वह लौटाने की कोशिश करती है. लेकिन जब वह उसमें अनुज और राही की तस्वीर देखती है, तो चौंक जाती है. तभी श्रुति वहां आ जाती है और दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो जाती है. श्रुति ने अनु को दी चुनौती श्रुति दावा करती है कि वह राही की जिंदगी में उसकी जगह लेगी, क्योंकि राही खुद को अकेला महसूस करती है. अनुपमा इस बात का विरोध करती है और कहती है कि मां-बेटी के रिश्ते को किसी को साबित करने की जरूरत नहीं. दोनों के बीच बहस इतनी बढ़ जाती है कि श्रुति खुलकर चुनौती देती है कि वह राही को अनुपमा से छीन लेगी. उधर राही एक डरावना सपना देखती है, जिसमें प्रेम अनुपमा के कैफे को लेकर गुस्से में होता है. सपना टूटने के बाद भी वह डरी रहती है और सोचती है कि वह अपने रिश्ते को कैसे बचाए.

जनगणना अभियान शुरू: हरियाणा में सिरसा-करनाल ने मारी बाजी, नूंह पिछड़ा

चंडीगढ़. हरियाणा में 77 लाख से अधिक परिवार हैं, पर अभी तक मात्र दो लाख 46 हजार परिवारों ने ही स्वगणना कराई है। गुरुवार को स्वगणना का अंतिम दिन है, शुक्रवार से वास्तविक मकान सूचीकरण और जनगणना कार्य शुरू हो जाएगा। स्वगणना में सिरसा और करनाल सबसे आगे हैं, जबकि नूंह पिछड़ा हुआ है। जनगणना निदेशक ललित जैन ने प्रदेश के लोगों से कहा है कि वे अंतिम दिन अधिक से अधिक स्वगणना के लिए आगे आएं। जनगणना निदेशालय हरियाणा के निदेशक डा. ललित जैन के अनुसार स्वगणना बहुत ही सरल प्रक्रिया है और पोर्टल se.census.gov.in पर जाकर इसे पांच-सात मिनट में पूरा किया जा सकता है। इसके बाद जनगणना करने वाले (एन्यूमरेटर) के साथ केवल वह जारी किया गया आइडी नंबर साझा करना होगा। पूरे राज्य में एक मई से वास्तविक मकान सूचीकरण और जनगणना कार्य शुरू होंगे। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे सभी एन्यूमरेटर और सुपरवाइजर को पूरा सहयोग दें और उन्हें सही, सटीक तथा अद्यतन जानकारी प्रदान करें। इस जानकारी को पूरी तरह से गोपनीय रखा जाएगा और किसी भी व्यक्ति या संस्था के साथ साझा नहीं किया जाएगा। आवश्यक जानकारी देने से इन्कार है दंडनीय अपराध जनगणना निदेशक ने चेतावनी दी कि जनगणना अधिकारियों को जरूरी जानकारी देने से इन्कार करना या उनके साथ असहयोग करना जनगणना अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। यदि किसी एन्यूमरेटर, सुपरवाइजर या नागरिक को किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना करना पड़ता है तो वे अपने संबंधित सुपरवाइजर से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा जनगणना विभाग का हेल्पलाइन नंबर 1855 भी उपलब्ध कराया गया है, जिस पर कोई भी नागरिक, गणनाकार या पर्यवेक्षक अपनी समस्याओं की रिपोर्ट कर सकता है। प्रत्येक शिकायत या समस्या पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। जिला     स्वगणना कराने वाले परिवार सिरसा     22,845 करनाल     22,836 जींद     19,486 फतेहाबाद     14,602 सोनीपत     12,780 महेंद्रगढ़     12,674 गुरुग्राम     12,607 हिसार     11,927 रोहतक     11,366 यमुनानगर     11,348 पंचकूला     10,910 झज्जर     10,560 रेवाड़ी     10,494 फरीदाबाद     9,623 चरखी दादरी     9,586 भिवानी     8,307 हांसी     7,963 कैथल     6,341 कुरुक्षेत्र     4,912 अंबाला     4,846 पानीपत     4,841 पलवल     3,134 नूंह     1,897

भारतीय वनडे टीम में बड़ा बदलाव संभव, पंत की जगह सैमसन पर नजर

नई दिल्ली भारतीय टीम के स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत के लिए मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। आईपीएल 2026 में लखनऊ सुपर जायंट्स की कप्तानी कर रहे ऋषभ पंत भारतीय वनडे टीम से बाहर हो सकते हैं। आगामी वनडे विश्व कप को देखते हुए चनयकर्ता टीम में संजू सैमसन को मौका दे सकते हैं। वनडे में इस समय केएल राहुल विकेटकीपर के रूप में पहली पसंद बने हुए हैं। ऋषभ पंत इस साल की शुरुआत में न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज का हिस्सा थे लेकिन फिर चोट के कारण बाहर हो गए थे। वहीं दूसरी तरफ संजू सैमसन ने टी20 विश्व कप के नॉकआउट मुकाबलों में बेहतरीन प्रदर्शन करके चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा है। टी20 विश्व कप में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे संजू सैमसन ने आईपीएल 2026 में भी अपना फॉर्म बरकरार रखा है और 300 से ज्यादा रन बना चुके हैं। संजू सैमसन ने जारी सीजन में दो शतक भी लगाए हैं। वहीं दूसरी तरफ लखऊ के कप्तान ऋषभ पंत लगातार दूसरे सीजन रन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बतौर कप्तान भी उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है और इस वजह से 50 ओवर के फॉर्मेट में चयनकर्ता संजू सैमसन पर भरोसा कर सकते हैं। संजू सैमसन इस सीजन चेन्नई सुपर किंग्स में शामिल हुए हैं, जहां वह एमएस धोनी के स्थान पर कुछ मैचों में विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। मीडिया  रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय क्रिकेट बोर्ड भारतीय वनडे टीम में ऋषभ पंत की जगह दूसरे विकेटकीपर बल्लेबाज के रूप में संजू सैमसन के नाम पर विचार कर रही है। केएल राहुल टीम के नियमित विकेटकीपर बल्लेबाज बने हुए हैं। ध्रुव जुरेल भी दावेदार हैं। भारत का अगला वनडे सीरीज अफगानिस्तान से है, जोकि 14 जून से शुरू होने वाला है। ऋषभ पंत टी20 इंटरनेशनल में अपनी जगह खो चुके हैं उन्होंने इस फॉर्मेट में अपना पिछला मैच जुलाई 2024 में श्रीलंका के खिलाफ खेला था।

न्यायिक सेवाओं में बड़ा बदलाव, ई-कोर्ट सर्विस ऐप का नया वर्जन 5 मई से होगा लॉन्च

 रांची  न्यायिक सेवाओं को और अधिक सुलभ और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ई-कोर्ट सर्विस मोबाइल प का नया संस्करण 4.0 आगामी पांच मई से लांच किया जाएगा। इस संबंध में झारखंड हाई कोर्ट के केंद्रीय परियोजना समन्वयक द्वारा राज्य के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को पत्र जारी कर आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। पत्र में बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी के निर्देशानुसार एप का यह नया संस्करण कई तकनीकी और उपयोगकर्ता सुविधाओं के साथ अपग्रेड किया गया है। इसमें एंड्रायड 14 सपोर्ट, बेहतर परफार्मेंस, आसान नेविगेशन और नया यूजर फ्रेंडली इंटरफेस शामिल है, जिससे एक हाथ से भी आसानी से उपयोग संभव होगा। नए वर्जन में केस स्टेटस सेक्शन के माध्यम से सीधे आदेश और निर्णय की पीडीएफ डाउनलोड की सुविधा दी गई है। इसके अलावा माई केसेस सेक्शन में बेहतर रिस्पांस, केस कंवर्जन ट्रैकिंग फीचर, ईपे, एनजेडीजी और ईफाइलिंग जैसी सेवाओं को एकीकृत क्विक लिंक में जोड़ा गया है। कोर्ट परिसरों का लोकेशन जानने के लिए भूवन मैप्स का भी इंटीग्रेशन किया गया है। हाई कोर्ट ने सभी न्यायिक पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस संबंध में आम लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए नोटिस को वेबसाइट, ई-सेवा केंद्रों और कोर्ट परिसरों में प्रदर्शित किया जाए। साथ ही, उपयोगकर्ताओं को अपने पुराने डेटा का बैकअप लेने की सलाह दी गई है। ई-कोर्ट मोबाइल एप संस्करण 4.0 की मुख्य विशेषताएं     उन्नत तकनीक: यह ऐप अब पुराने कोर्डोवा हाइब्रिड फ्रेमवर्क से रिएक्ट नेटिव (React Native v0.77.0) पर शिफ्ट हो गया है, जिससे इसकी गति और कार्यक्षमता (Performance) काफी बेहतर हो गई है।     Android 14 सपोर्ट: यह नया संस्करण Android 14 (API स्तर 34) का समर्थन करता है।     बेहतर डेटा हैंडलिंग: उच्च डेटा वॉल्यूम को संभालने में यह पहले से अधिक सक्षम है।     उपयोगकर्ता मैनुअल और प्रशिक्षण: संस्करण 4.0 के लिए उपयोगकर्ता मैनुअल और प्रशिक्षण वीडियो जारी कर दिए गए हैं।  

Sri Guru Granth Sahib सत्कार कानून पर बवाल, चर्च ने उठाई सेक्युलरिज्म पर चिंता

चंडीगढ़. पंजाब सरकार के बहुचर्चित “जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026” के खिलाफ अब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में एक और संवैधानिक चुनौती पहुंच गई है। एंग्लिकन चर्च ऑफ इंडिया (सीआईपीबीसी) ने इस संशोधन कानून को धर्म-विशेष आधारित, भेदभावपूर्ण और संविधान विरोधी बताते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर कर इसके क्रियान्वयन पर तत्काल रोक लगाने तथा इसे रद्द घोषित करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि पंजाब सरकार ने एक विशेष धार्मिक ग्रंथ को पृथक और अधिक कठोर दंडात्मक संरक्षण देकर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 का उल्लंघन किया है। चर्च का तर्क है कि राज्य किसी एक धर्म या उसके पवित्र प्रतीक को ऐसा विशिष्ट विधायी संरक्षण नहीं दे सकता, जिससे अन्य धार्मिक समुदायों के बीच असमानता की भावना उत्पन्न हो। याचिका में इसे संविधान की मूल संरचना में शामिल धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला कदम बताया गया है। अन्य धर्म भी प्रभावित हो सकते हैं इंडियन चर्च एक्ट, 1927 के तहत गठित धार्मिक निकाय होने का दावा करने वाले याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि पंजाब सरकार स्वयं अपने पूर्व प्रस्तावित “पंजाब प्रिवेंशन ऑफ ऑफेंसेज अगेंस्ट होली स्क्रिप्चर्स बिल, 2025” में स्वीकार कर चुकी थी कि पवित्र ग्रंथों के अपमान की घटनाएं केवल श्री गुरु ग्रंथ साहिब तक सीमित नहीं, बल्कि गीता, कुरान और अन्य धार्मिक ग्रंथ भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में 2026 के संशोधन के जरिए केवल एक धार्मिक ग्रंथ के लिए पृथक कठोर आपराधिक ढांचा तैयार करना राज्य की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। प्रावधानों पर विशेष आपत्ति याचिका में संशोधन कानून के उन प्रावधानों पर विशेष आपत्ति जताई गई है, जिनमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों की प्रिंटिंग, प्रकाशन, भंडारण और वितरण पर कड़ा नियामक नियंत्रण, एसजीपीसी के माध्यम से केंद्रीय रजिस्टर, अपराधों को संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-समझौतायोग्य बनाना तथा गंभीर मामलों में आजीवन कारावास तक की सजा शामिल है। चर्च का कहना है कि इस प्रकार का विशेष दंड विधान अन्य धर्मों के पवित्र ग्रंथों को तुलनात्मक रूप से कमतर कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। एसआर बोम्मई, केशवानंद भारती और शायरा बानो जैसे सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया है कि राज्य धार्मिक तटस्थता से विचलित नहीं हो सकता। एक धर्मग्रंथ को कानून संरक्षण साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 सहित मौजूदा केंद्रीय कानून धार्मिक भावनाओं से जुड़े अपराधों से निपटने के लिए पर्याप्त हैं, इसलिए पृथक राज्य कानून विधायी संतुलन और संवैधानिक वैधता दोनों पर सवाल खड़े करता है। चर्च की जनरल काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि वह सभी धर्मग्रंथों के सम्मान और अंतर-धार्मिक सौहार्द के पक्ष में है, लेकिन किसी एक धर्मग्रंथ को विशिष्ट कानूनी संरक्षण देकर अन्य आस्थाओं को अपेक्षाकृत कमतर दर्जा देना संवैधानिक समानता के विरुद्ध है।

बुद्ध पूर्णिमा 2026: अंगुलिमाल डाकू की कहानी से मिलता है जीवन बदलने का संदेश

इस बार बुद्ध पूर्णिमा 1 मई, शुक्रवार को मनाई जाएगी. हिंदू पंचांग के अनुसार, यह वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि को आती है. भगवान गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़ी कई कहानियां आज भी लोगों को सही राह दिखाती हैं. ऐसी ही एक प्रसिद्ध कथा अंगुलिमाल नाम के डाकू से जुड़ी है, जो जीवन बदलने की सीख देती है. कौन था अंगुलिमाल डाकू? कहा जाता है कि मगध राज्य में अंगुलिमाल नाम का एक खतरनाक डाकू रहता था. लोग उससे बहुत ज्यादा डरते थे क्योंकि वह राह चलते लोगों को मार देता था और उनकी उंगलियों की माला पहनता था. इसी वजह से उसका नाम अंगुलिमाल पड़ गया था. गांव के लोग उसके खौफ से डर और परेशानी के माहौल में जी रहे थे. एक दिन गौतम बुद्ध उसी क्षेत्र में पहुंचे. लोगों ने उनका स्वागत बड़े ही सत्कार के साथ तो किया, लेकिन उनके चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था. जब गौतम बुद्ध ने वजह पूछी, तो सभी ने अंगुलिमाल के आतंक की कहानी सुना दी. यह सुनकर गौतम बुद्ध बिना डरे अगले दिन जंगल की ओर चल पड़े. गांव वालों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने किसी की बात नहीं मानी. जब अंगुलिमाल डाकू की हुई गौतम बुद्ध के मुलाकात जंगल में अंगुलिमाल ने गौतम बुद्ध को देखा और उन्हें रोकने के लिए दौड़ा, लेकिन वह जितना तेज भागता, बुद्ध उतनी ही शांति से आगे बढ़ते रहते और उसके हाथ नहीं आए. आखिर थककर उसने जोर से कहा, 'रुक जाओ!' तब गौतम बुद्ध रुके और शांत स्वर में बोले, 'मैं तो रुक गया हूं, लेकिन तुम कब रुकोगे?' यह बात सुनकर अंगुलिमाल डाकू चौंक गया. उसने गौतम बुद्ध को डराने की कोशिश की और खुद को सबसे शक्तिशाली बताया. तब बुद्ध ने उसे एक छोटा सा काम करने को कहा-पेड़ से कुछ पत्ते तोड़कर लाने को. अंगुलिमाल डाकू ने बुद्ध को तुरंत पत्ते तोड़कर ला दिए. फिर बुद्ध ने कहा, 'अब इन्हें वापस उसी तरह जोड़ दो.' अंगुलिमाल डाकू हैरान रह गया और बोला कि यह तो संभव नहीं है. गौतम बुद्ध ने डाकू को दी यह सीख तब गौतम बुद्ध ने समझाया, 'जब तुम किसी चीज को जोड़ नहीं सकते, तो उसे तोड़ने का अधिकार भी तुम्हें नहीं है. किसी का जीवन लेना आसान है, लेकिन जीवन देना सबसे बड़ी शक्ति है.' यह बात अंगुलिमाल डाकू के दिल को छू गई. उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने उसी समय हिंसा का रास्ता छोड़ दिया. वह गौतम बुद्ध का शिष्य बन गया और आगे चलकर लोगों की सेवा करने लगा. कहा जाता है कि बाद में वही अंगुलिमाल एक शांत और ज्ञानी संन्यासी बन गया. इस कहानी से यह सीख मिलती है कि इंसान चाहे कितना भी भटक जाए, अगर वह सही रास्ता चुन ले, तो उसका जीवन बदल सकता है.

EVM में गड़बड़ी के आरोपों से सियासत गरम, चुनाव आयोग ने शुरू की पड़ताल

कोलकाता बंगाल में दूसरे चरण के मतदान दौरान डायमंड हार्बर समेत कई केंद्रों पर ईवीएम की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों के बीच चुनाव आयोग अब एक्शन मोड में आ गया है। चुनाव प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए आयोग ने 'हाई-लेवल' जांच शुरू कर दी है। विशेष रूप से डायमंड हार्बर निर्वाचन क्षेत्र की स्थिति पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं, जहां स्पेशल रोल आब्जर्वर सुब्रत गुप्ता स्वयं स्ट्रांग रूम का मुआयना किया। स्ट्रांग रूम में 'स्पेशल स्क्रूटनी' डायमंड हार्बर विमेंस कालेज स्थित स्ट्रांग रूम, जहां ईवीएम मशीनों को कड़ी सुरक्षा में रखा गया है, वहां सुब्रत गुप्ता की मौजूदगी ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। जानकारी के अनुसार, वे मशीनों की सीलिंग, सुरक्षा मानकों और संरक्षण पद्धति की गहन जांच कर रहे हैं। आयोग का स्पष्ट निर्देश है कि इस जमीनी जांच की रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय किया जाएगा कि क्षेत्र में पुनर्मतदान की आवश्यकता है या नहीं। 77 शिकायतों ने बढ़ाई आयोग की सख्ती केवल डायमंड हार्बर ही नहीं, बल्कि दूसरे चरण के मतदान के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों से ईवीएम से छेड़छाड़ और गड़बड़ी की कुल 77 गंभीर शिकायतें दर्ज की गई हैं। इन शिकायतों पर कड़ा रुख अपनाते हुए चुनाव आयोग ने वेबकास्ट फुटेज और संबंधित बूथ अधिकारियों की रिपोर्ट खंगालना शुरू कर दिया है। बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने इस मामले पर स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि आयोग "जीरो टालरेंस" की नीति पर काम कर रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जहां भी ईवीएम के साथ छेड़छाड़ या तकनीकी धांधली की पुष्टि होगी, वहां बिना किसी देरी के पुनर्मतदान कराया जाएगा। राजनीतिक आरोप और प्रशासनिक सक्रियता मतदान के बाद से ही भाजपा ने ईवीएम के बटन पर टेप लगाने समेत कई गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्ष का दावा है कि दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर क्षेत्र में कई बूथों पर पारदर्शिता के साथ समझौता किया गया। इन आरोपों के बीच, एक विशेष पर्यवेक्षक को भेजने का निर्णय चुनाव आयोग की सक्रियता और निष्पक्षता के प्रमाण के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा आम है कि सुब्रत गुप्ता की रिपोर्ट ही अब इस चुनावी भविष्य का फैसला करेगी। जब तक स्क्रूटनी की यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती और रिपोर्ट जमा नहीं होती, तब तक आयोग किसी भी अंतिम निर्णय पर मुहर नहीं लगाएगा। फिलहाल, पूरी सतर्कता के साथ साक्ष्यों की जांच जारी है।  

जनजातीय क्षेत्रों के लिए बड़ी पहल: नक्सल मुक्त क्षेत्रों में जल्द लागू होगा ‘नियद नेल्ला नार 2.0’

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय, महानदी भवन में आयोजित छत्तीसगढ़ जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक में जनजातीय समुदाय के सर्वांगीण विकास को लेकर व्यापक चर्चा की गई और अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर, जो भौगोलिक रूप से केरल से भी बड़ा क्षेत्र है, दशकों तक विकास से वंचित रहा, लेकिन अब वहां योजनाओं का तीव्र विस्तार हो रहा है और विकास की नई धारा स्थापित हो रही है। देवगुड़ी और सरना स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए देवगुड़ी और सरना स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही अवैध अतिक्रमण को रोकने के लिए प्रभावी और कड़े कदम उठाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि “धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना” के माध्यम से प्रदेश के 6600 गांवों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं सुदृढ़ की जा रही हैं, जबकि पीएम जनमन योजना के अंतर्गत 32 हजार आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं।बैठक में “नियद नेल्ला नार योजना” की उल्लेखनीय सफलता पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री साय ने इसके अगले चरण के रूप में “नियद नेल्ला नार 2.0” को शीघ्र लागू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस उन्नत पहल के माध्यम से सुदूर अंचलों में बिजली, पानी, सड़क और राशन जैसी मूलभूत सुविधाओं का और अधिक विस्तार किया जाएगा। इसके साथ ही “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर योजना” के तहत 36 लाख लोगों की स्वास्थ्य जांच का कार्य निरंतर प्रगति पर है। मुख्यमंत्री ने दिए कई आवश्यक निर्देश मुख्यमंत्री साय ने जनजातीय भूमि के दीर्घकालीन लीज पर दोहन के मामलों की जांच के निर्देश दिए। साथ ही कोरवा और संसारी उरांव जातियों को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल किए जाने के प्रस्ताव को शीघ्र केंद्र सरकार को प्रेषित करने के निर्देश भी दिए। शिक्षा और आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री साय ने छात्रावासों की सीट वृद्धि, उनके बेहतर रखरखाव तथा शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने नक्सल मुक्त क्षेत्रों में बच्चों के लिए त्वरित शिक्षण व्यवस्था विकसित करने और खुले में कक्षाएं संचालित न करने के स्पष्ट निर्देश दिए। अम्बिकापुर नेशनल हाईवे के निर्माण में हो रही धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कार्यों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही बरसात के दौरान कटने वाले मार्गों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया। जनजातीय समुदाय तेजी से विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा – रामविचार नेताम आदिम जाति विकास विभाग के मंत्री एवं परिषद के उपाध्यक्ष रामविचार नेताम ने कहा कि बस्तर, सरगुजा सहित प्रदेश के दूरस्थ जनजातीय अंचलों में लंबे समय तक नक्सलवाद विकास की सबसे बड़ी बाधा बना रहा। चार दशकों की इस चुनौती से मुक्ति मिलने के बाद अब इन क्षेत्रों में जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी एवं तेज क्रियान्वयन संभव हो सका है, जिसका सीधा लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि अब जनजातीय समुदाय तेजी से विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है और उन्हें आगे बढ़ने के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। मंत्री नेताम ने यह भी बताया कि नक्सलवाद के खात्मे के बाद योजनाओं का जमीनी स्तर पर बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित हुआ है। सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए स्वीकृत योजनाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से संवेदनशील मुद्दों का त्वरित एवं प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के बसाहटों तक अब बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंच रही हैं। साथ ही नए छात्रावासों के निर्माण से दूरस्थ क्षेत्रों की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिल रहा है, जिससे उनके समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव, वनमंत्री केदार कश्यप, बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष लता उसेंडी, सरगुजा क्षेत्र विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष गोमती साय, मध्य क्षेत्र विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रणव मरपच्ची, विधायक रायमुनी भगत, विधायक चैतराम अटामी, विधायक विक्रम उसेंडी, विधायक उद्देश्वरी पैकरा, विधायक नीलकंठ टेकाम, विधायक आशाराम नेताम, मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम सहित विभिन्न विभागों के सचिव एवं परिषद के सदस्य उपस्थित थे।

राजस्थान शिक्षा व्यवस्था पर सवाल, नागौर स्कूल में बच्चे कर रहे थे सफाई का काम

 नागौर  राजस्थान के नागौर जिले के एक सरकारी स्कूल से एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां छोटे बच्चों से मिड-डे मील के बर्तन उठवाने और धुलवाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इस घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने संज्ञान लिया है और संबंधित स्कूल के खिलाफ आधिकारिक जांच शुरू कर दी है। यह घटना रियांबी उपखंड के दासावास गांव में स्थित सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में हुई। मिड-डे मील के ब्रेक के दौरान आराम करने या खाना खाने के बजाय, कई बच्चों को भारी स्टील के बर्तन उठाते और एक जगह से दूसरी जगह ले जाते देखा गया। इस फुटेज ने स्कूल में निगरानी और छात्रों के कल्याण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कमरे में सोते दिखें शिक्षक चिंता की बात यह भी है कि उसी समय चार शिक्षक एक कमरे में सोते हुए पाए गए। स्कूल में कुल आठ शिक्षक हैं, जिनमें से घटना वाले दिन सात शिक्षक मौजूद थे। इसके बावजूद, बर्तनों को संभालने की जिम्मेदारी छात्रों पर ही आती दिखी। प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और वीडियो से यह भी पता चलता है कि प्रधानाध्यापक सोहनलाल फडोदा वहां मौजूद थे और अपनी कुर्सी पर बैठे थे, जबकि बच्चे काम कर रहे थे। उन्होंने न तो कोई दखल दिया और न ही कर्मचारियों को बच्चों को रोकने का कोई निर्देश दिया। कुछ बच्चों ने दावा किया कि यह कोई एक बार हुई घटना नहीं है, बल्कि यह उनके रोजाना के काम का ही एक हिस्सा है। मामले की जांच शुरू वीडियो वायरल होने के बाद, स्थानीय अधिकारियों ने इस मामले का संज्ञान लिया है। घटना की जांच करने और दोषियों की पहचान करने के लिए एक जांच समिति का गठन किया गया है। SDM सूर्यकांत शर्मा ने कहा कि हमें एक शिकायत मिली है और पूरे मामले की जांच की जाएगी। मुख्य विकास अधिकारी रामलाल कराड़ी ने बताया कि यह मामला मीडिया रिपोर्टों के जरिए सामने आया है और उन्होंने आश्वासन दिया कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।