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भारत की आर्थिक ताकत में तेजी, वैश्विक शांति में अहम भूमिका निभा सकता है: वैश्विक विशेषज्ञ

नई दिल्ली   भारत तेजी से एक आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है और वैश्विक स्तर पर छवि विश्व शांति व्यवस्था को आकार देने वाले, आर्थिक स्थिरता और टेक्नोलॉजी को बढ़ाने वाले देश की बन रही है। यह बयान बुधवार को ग्लोबल एक्सपर्ट्स की ओर से दिया गया। राष्ट्रीय राजधानी में इकोनॉमिस्ट एंटरप्राइज के 'रेजिलिएंट फ्यूचर्स समिट 2026' के साइडलाइन के दौरान आईएएनएस से ​​बातचीत में उन्होंने भू-राजनीतिक अनिश्चितता से निपटने, बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने और एआई और उभरती टेक्नोलॉजी में इनोवेशन को बढ़ावा देने में भारत के बढ़ते प्रभाव का जिक्र किया। सिंगापुर की नेशनल यूनिवर्सिटी के ली कुआन यू स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी में अर्थशास्त्र के ली का शिंग प्रोफेसर डैनी क्वाह ने कहा कि वैश्विक आतंकवाद की बदलती प्रकृति और व्यापारिक गतिशीलता में आए बदलावों ने विश्व अर्थव्यवस्था में काफी अनिश्चितता पैदा कर दी है। क्वाह ने कहा कि व्यापारिक व्यवधानों से परे, एक गहरी चिंता वैश्विक विश्वास में कमी और बहुपक्षीय प्रणालियों का कमजोर होना है, जो पारंपरिक रूप से अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आधार रही हैं। उन्होंने आईएएनएस को बताया,“भारत इसमें बड़ी भूमिका निभा सकता है और अगर भारत कोशिश करे तो शांति कायम होगी। लोग शांति लाने के लिए भारत की ओर देख रहे हैं। मुझे लगता है कि लोग उचित नेतृत्व के लिए भारत की ओर देख रहे हैं। उचित नेतृत्व क्या होगा, यह तय करना अभी भारत पर निर्भर है।” वहीं, लंदन के विज्ञान संग्रहालय के निदेशक इयान ब्लैचफोर्ड ने एआई के प्रति भारत के विशिष्ट और आशावादी दृष्टिकोण का जिक्र किया। ब्लैचफोर्ड ने कहा, “अगर आप अमेरिका और यूरोप के सार्वजनिक सर्वेक्षणों को देखें, तो अधिकांश आबादी एआई को लेकर चिंतित है। भारत में स्थिति इसके विपरीत है। भारत एआई केंद्रों के लिए क्षमता निर्माण कर रहा है और साथ ही इसके प्रभावों पर गहराई से विचार भी कर रहा है।” ब्लैचफोर्ड ने वैश्विक दक्षिण की व्यापक उपलब्धियों, विशेष रूप से भारत की विकास यात्रा की सराहना की। ब्लैचफोर्ड ने आईएएनएस को बताया, “देश आर्थिक विकास और जीवन स्तर में सुधार की आवश्यकता के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रहा है, जबकि वह ऊर्जा की बढ़ती मांग जैसी चुनौतियों से भी जूझ रहा है।”उन्होंने आगे कहा, “यह पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं के विपरीत है, जिन्हें दशकों से समृद्धि का लाभ मिल रहा है।”

महाकाल मंदिर के अन्न क्षेत्र में ऑनलाइन दान की सुविधा, आरती में शामिल होकर प्रसाद चढ़ाने का विकल्प

उज्जैन  विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी सुविधा शुरू होने जा रही है. अब बाबा के भक्त दुनिया के किसी भी कोने से मंदिर के अन्न क्षेत्र में दान कर सकेंगे. मंदिर समिति पहली बार अन्नदान की पूरी व्यवस्था को ऑनलाइन करने जा रही है. मंदिर प्रशासन के अनुसार, यह डिजिटल सेवा संभवतः अगले सोमवार से लागू हो सकती है।  क्या है अन्नक्षेत्र की नई डिजिटल व्यवस्था? अक्सर लोग अपने जन्मदिन, विवाह की वर्षगांठ या अपनों की पुण्यतिथि पर अन्नदान करना चाहते हैं. शास्त्रों में अन्नदान को ‘महादान’ कहा गया है. पहले इसके लिए भक्तों को मंदिर आकर रसीद कटवानी पड़ती थी. लेकिन, अब मंदिर समिति ने इसे डिजिटल बना दिया है. अब भक्त महाकाल मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर किसी विशेष दिन को बुक कर सकेंगे. वहां निर्धारित सहायता राशि जमा करके अन्नदान का पुण्य लाभ लिया जा सकता है।  महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की सहायक प्रशासक सिम्मी यादव के अनुसार, मंदिर का विशाल अन्नक्षेत्र पूरी तरह से जन-सहयोग और दान पर टिका है। इस नई डिजिटल पहल से पारदर्शिता बढ़ेगी और दूर-दराज के भक्त भी सेवा कार्य से जुड़ सकेंगे। सोमवार से लागू होगी नई व्यवस्था     मंदिर प्रशासन के अनुसार, ऑनलाइन दान की यह नई व्यवस्था आगामी सोमवार से विधिवत शुरू हो जाएगी।     श्रद्धालु मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट      http://www.shrimahakaleshwar.mp.gov.in पर जाकर "Donation" सेक्शन के माध्यम से आसानी से राशि जमा कर सकते हैं। अन्नक्षेत्र: प्रतिदिन 10,000 श्रद्धालु ग्रहण करते हैं प्रसादी महाकाल मंदिर का अन्नक्षेत्र अपनी सेवा और शुद्धता के लिए जाना जाता है। यहाँ:     प्रतिदिन दो शिफ्ट में भोजन प्रसादी का वितरण होता है।     रोजाना लगभग 10,000 श्रद्धालु नि:शुल्क भोजन प्रसादी ग्रहण करते हैं।     पहले केवल ऑफलाइन (मंदिर पहुंचकर) दान की सुविधा होने के कारण कई इच्छुक भक्त इस सेवा का लाभ नहीं उठा पाते थे। भोजन प्रसादी और दान राशि  सेवा का प्रकार    निर्धारित दान राशि दोनों समय के भोजन के लिए    ₹1,10,000 एक समय के भोजन के लिए    ₹51,000 मीठे प्रसाद (मिठाई) के लिए    ₹21,000 साल भर पहले से कर सकेंगे एडवांस बुकिंग इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब श्रद्धालु पूरे वर्ष में किसी भी तारीख के लिए अग्रिम (Advance) बुकिंग कर सकेंगे। लोग अपने जन्मदिन, विवाह की वर्षगांठ या परिजनों की पुण्यतिथि जैसे विशेष अवसरों पर पहले से ही भोजन प्रसादी सुरक्षित कर सकते हैं। भगवान को स्वयं लगा सकेंगे भोग डिजिटल दान करने वाले भक्तों के लिए मंदिर समिति ने एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव की भी योजना बनाई है। दानदाताओं को भोग आरती के समय मंदिर में आमंत्रित किया जाएगा और उनके स्वयं के हाथों से भगवान महाकाल को भोग अर्पित कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। प्रतिदिन लगता है विशेष भोग बाबा महाकाल को प्रतिदिन सुबह 10 बजे विशेष भोग लगाया जाता है। इसमें शुद्ध घी की रोटियां, दाल-चावल और दो प्रकार की मौसमी सब्जियां शामिल होती हैं। कई श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर मिठाई भी अर्पित करते हैं। भगवान को भोग लगाने के पश्चात ही अन्नक्षेत्र में आम श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी शुरू की जाती है। बाबा को भोग लगाने का विशेष अवसर इस डिजिटल पहल की सबसे बड़ी विशेषता ‘भोग’ से जुड़ी है. सहायक प्रशासक सिम्मी यादव ने बताया कि ऑनलाइन दान करने वाले भक्तों को बाबा महाकाल को भोग अर्पित करने का अवसर मिलेगा. दानदाता अपने परिवार के साथ मंदिर आ सकते हैं. मंदिर के कर्मचारी उन्हें बाबा महाकाल के पास लेकर जाएंगे. वहां भक्त अपने हाथों से बाबा को भोग लगा सकेंगे और इस अनूठी सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।  दान से चलता अन्न क्षेत्र सिम्मी यादव ने बताया, महाकाल मंदिर का अन्न क्षेत्र पूरी तरह से दानदाताओं के सहयोग से संचालित होता है. यहां प्रतिदिन करीब 8 से 10 हजार श्रद्धालु निशुल्क भोजन प्रसादी ग्रहण करते हैं. भोजन व्यवस्था रोजाना दो अलग-अलग शिफ्ट में चलती है. सहायक प्रशासक के अनुसार, अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को मंदिर के सेवा कार्यों से जोड़ने के उद्देश्य से यह नवाचार किया गया है. जो भक्त किन्हीं कारणों से उज्जैन नहीं आ पाते हैं, वे अब घर बैठे ही अपनी श्रद्धा व्यक्त कर सकेंगे. यह डिजिटल माध्यम उनके खास पलों को और भी यादगार बनाएगा। 

गलवान के बाद पहली बार भारत दौरे पर आएंगे जिनपिंग, ब्रिक्स मंच पर बढ़ रही भारत-चीन की निकटता

नई दिल्ली साल 2020 की हिंसक गलवान झड़प के बाद से भारत और चीन के बीच कूटनीतिक संबंधों में जो बर्फ जमी थी, वह अब धीरे-धीरे पिघलती हुई नजर आ रही है। हालिया घटनाक्रमों और कूटनीतिक वार्ताओं से यह लगभग साफ हो गया है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस साल भारत की मेजबानी में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत का दौरा करेंगे। 2020 के गलवान विवाद के बाद यह शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा होगी, जो कूटनीतिक लिहाज से एक बहुत बड़ा कदम है। भारत इस वर्ष ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। हाल ही में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच हुई बातचीत में चीन ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को अपना पूर्ण समर्थन देने की बात दोहराई है। भारत और चीन ब्रिक्स (BRICS) तंत्र के तहत अपने आपसी सहयोग को मजबूत करने के लिए लगातार एक-दूसरे के संपर्क में हैं। एक तरफ जहां चीन ने ब्रिक्स समूह की वर्तमान अध्यक्षता के लिए भारत का पूरा समर्थन किया है, वहीं भारत सरकार ने भी इस तंत्र के तहत आयोजित विभिन्न गतिविधियों में चीन द्वारा दिए गए सहयोग की सराहना की है। चीनी विशेष दूत झाई जुन का भारत दौरा पश्चिम एशिया से जुड़े मुद्दों पर आयोजित बैठक में हिस्सा लेने के लिए चीन के विशेष दूत झाई जुन पिछले सप्ताह नई दिल्ली में थे। इस दौरान उन्होंने भारतीय विदेश मंत्रालय की सचिव नीना मल्होत्रा से मुलाकात की। झाई ने स्पष्ट किया कि दुनिया के दो प्रमुख विकासशील देशों के रूप में, चीन और भारत ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत और संवाद बनाए रखा है। चीन ने की भारत की भूमिका की तारीफ चीनी दूत झाई जुन ने भारत की अध्यक्षता को लेकर सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा- चीन ब्रिक्स की रोटेटिंग (वर्तमान) अध्यक्षता के रूप में भारत द्वारा निभाई जा रही महत्वपूर्ण भूमिका का सम्मान करता है। हमें उम्मीद है कि पश्चिम एशिया के मुद्दे पर होने वाला यह ब्रिक्स परामर्श क्षेत्रीय स्थिति पर एक मजबूत संदेश देगा और इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता लाने में एक रचनात्मक भूमिका निभाएगा। भारत का रुख और नीना मल्होत्रा का बयान चीन द्वारा जारी किए गए एक बयान के अनुसार, भारतीय विदेश मंत्रालय की सचिव नीना मल्होत्रा ने भी ब्रिक्स तंत्र के भीतर चीन की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत क्षेत्रीय तनावों को जल्द से जल्द कम करने और शांति को बढ़ावा देने के लिए चीन सहित सभी ब्रिक्स देशों के साथ मिलकर काम करने का इच्छुक है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी और राष्ट्रपति का संभावित दौरा ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की आगामी बैठक के लिए चीन के विदेश मंत्री वांग यी के जल्द ही भारत आने की उम्मीद है। यह दौरा दोनों देशों के बीच कूटनीतिक चर्चाओं को और आगे बढ़ाएगा। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम हिस्सा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का संभावित भारत दौरा है। पिछले साल तियानजिन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई एक बैठक में शी जिनपिंग ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए चीन के समर्थन का भरोसा दिया था। इस साल के अंत में होने वाले मुख्य ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए शी जिनपिंग के भारत आने की उम्मीद है। जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक सैन्य झड़प के बाद, यह शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा होगी। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और तनावपूर्ण संबंधों को देखते हुए इस दौरे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह खबर इस बात का संकेत देती है कि सीमा पर तनाव के बावजूद, भारत और चीन ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग और संवाद का रास्ता खुला रखना चाहते हैं। कैसे तैयार हुई इस दौरे की जमीन? भारत और चीन के बीच यह कूटनीतिक नरमी अचानक नहीं आई है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में सिलसिलेवार तरीके से इसके लिए पृष्ठभूमि तैयार की गई है। LAC पर गश्त समझौता (अक्टूबर 2024): दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गश्त की बहाली को लेकर एक अहम समझौता हुआ, जिसने तनाव कम करने की दिशा में पहली बड़ी भूमिका निभाई। रूस में मोदी-शी की मुलाकात (अक्टूबर 2024): इस समझौते के तुरंत बाद, रूस के कजान में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच गलवान के बाद पहली औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता हुई। SCO सम्मेलन में न्योता (अगस्त 2025): प्रधानमंत्री मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के लिए चीन के तियानजिन गए थे। वहीं पर उन्होंने शी जिनपिंग को 2026 के ब्रिक्स सम्मेलन के लिए भारत आने का औपचारिक निमंत्रण दिया था, जिसे चीनी राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया था। 'ब्रिक्स की आड़ में' रिश्ते सुधारने के क्या मायने हैं? सीधे द्विपक्षीय स्तर पर संबंध सुधारना राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण है। ब्रिक्स जैसा मंच दोनों देशों को एक 'ग्लोबल साउथ' के एजेंडे के तहत बातचीत करने का बहाना देता है। अंतरराष्ट्रीय पटल पर अमेरिका की सख्त व्यापारिक नीतियों और टैरिफ आदि के कारण भारत और चीन दोनों ही अपने क्षेत्रीय समीकरणों को संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं। अपनी धीमी होती अर्थव्यवस्था के बीच चीन भारत जैसे विशाल बाजार से तनाव कम करना चाहता है। वहीं, भारत भी चाहता है कि सीमा पर शांति बनी रहे ताकि वह अपने आंतरिक विकास और वैश्विक कूटनीति पर ध्यान केंद्रित कर सके।

सऊदी और यूएई ने होर्मुज को बायपास किया, भारत तक तेल सप्लाई का नया मार्ग तय

  नई दिल्ली ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल का युद्ध शुरू होने के बाद जब होर्मुज स्ट्रेट बंद हुआ तो भारत के लिए तेल और गैस की किल्लत हो गई. तेल और गैस के लिए सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे खाड़ी देशों पर निर्भर भारत के लिए होर्मुज का बंद होना बड़ा झटका साबित हुआ. इस बीच रूसी तेल पर लगे बैन के हटने से भारत को राहत मिली लेकिन सऊदी, यूएई से भारत को तेल सप्लाई कुछ समय के लिए लगभग बंद हो गई. लेकिन दोनों खाड़ी देशों ने इसका तोड़ भी निकाल लिया और होर्मुज को बायपास कर कच्चा तेल अब भारत तक पहुंचाने लगे हैं।  सऊदी अरब से भारत को कच्चे तेल की सप्लाई अब सामान्य हो गई है और यूएई से आने वाली खेप पिछले साल के औसत से काफी ज्यादा चल रही है. ऐसा इसलिए संभव हो सका है क्योंकि दोनों देशों ने होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट के बीच वैकल्पिक बंदरगाहों से लोडिंग बढ़ा दी है।    शिप-ट्रैकिंग फर्म केप्लर के वरिष्ठ रिसर्च एनालिस्ट निखिल दुबे ने इकोनॉमिक टाइम्स से कहा कि सऊदी अरब और यूएई से बढ़ी सप्लाई, ईरान और वेनेजुएला से दोबारा शुरू हुए आयात, और रूस से अधिक खरीद ने खाड़ी क्षेत्र से आई कमी की आंशिक भरपाई की है. इससे अप्रैल में भारत को कच्चे तेल की उपलब्धता बनी रही।  केप्लर के मुताबिक, 1 से 26 अप्रैल के बीच भारत का औसत कच्चा तेल आयात 44 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जो फरवरी के 52 लाख बैरल प्रतिदिन के मुकाबले करीब 15% कम है. इसकी मुख्य वजह यह है कि भारत के दूसरे सबसे बड़े स्रोत इराक से सप्लाई अभी भी बंद है, साथ ही कुवैत और कतर से भी आपूर्ति रुकी हुई है।  अप्रैल में सऊदी अरब ने भारत को 6.97 लाख बैरल प्रतिदिन तेल भेजा, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 का औसत 6.68 लाख बैरल प्रतिदिन था. वहीं, यूएई से सप्लाई 6.19 लाख बैरल प्रतिदिन रही, जो पिछले वित्त वर्ष के 4.33 लाख बैरल प्रतिदिन औसत से काफी ज्यादा है।  सऊदी अरब और यूएई होर्मुज के बंद होने के बीच भारत कैसे पहुंचा रहे अपना तेल? सऊदी अरब ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए भारत तक तेल भेज रहा है. फारस की खाड़ी स्थित रास तनुरा बंदरगाह से भेजी जाने वाली तेल की खेप 70 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली पाइपलाइन के जरिए लाल सागर के यनबू टर्मिनल तक आ रही है।  दूसरी ओर यूएई 17 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली ADCOP पाइपलाइन के जरिए तेल को फुजैरा बंदरगाह तक भेज रहा है, जो ओमान की खाड़ी पर स्थित है. इन दोनों देशों के अलावा खाड़ी के अन्य उत्पादक देश अब भी निर्यात के लिए बड़े पैमाने पर होर्मुज पर निर्भर हैं।  भारत ने ओमान से भी तेल खरीद बढ़ा दी है क्योंकि उसका तेल होर्मुज के जरिए नहीं आता. अप्रैल में भारत को ओमान से 1.01 लाख बैरल प्रतिदिन तेल मिला, जबकि 2025-26 का औसत केवल 18 हजार बैरल प्रतिदिन था।  युद्ध के बाद रूस और ईरान के तेल पर अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील से भारतीय रिफाइनरों को राहत मिली है, जो होर्मुज संकट के बाद विकल्प तलाश रहे थे। अप्रैल में सात साल बाद ईरान से 1.51 लाख बैरल प्रतिदिन और नौ महीने बाद वेनेजुएला से 2.58 लाख बैरल प्रतिदिन सप्लाई फिर शुरू हुई। हालांकि अमेरिका से भारत को तेल सप्लाई कम रही. अप्रैल में यह घटकर 1.15 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई, जबकि 2025-26 का औसत 3.14 लाख बैरल प्रतिदिन था।  रूस से सप्लाई, जो जनवरी-फरवरी में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण घटी थी, मार्च में दोगुनी होकर 20 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गई थी. लेकिन अप्रैल में रूसी तेल की उपलब्धता कम रही जिस कारण यह घटकर 16 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई। 

योगी सरकार के तहत पर्यटन को मिली नई दिशा, यूपी बना आस्था और विकास का केंद्र

योगी सरकार में पर्यटन को नई उड़ान, यूपी बना आस्था और विकास का केंद्र बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, पर्यटन मंत्री ने दिए जनसुझावों पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश पर्यटन बजट 22 गुना, संस्कृति के लिए बजट 20 गुना बढ़ा 1 साल में 156 करोड़ से अधिक पर्यटकों का यूपी आगमन लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पर्यटन और सांस्कृतिक विकास के नए स्वर्णिम दौर में प्रवेश कर चुका है। योगी सरकार की मजबूत नीतियों, पारदर्शी कार्यशैली और विरासत संरक्षण के संकल्प ने प्रदेश को देश के सबसे तेजी से उभरते पर्यटन राज्यों में शामिल कर दिया है। पर्यटन विभाग की स्थायी समिति की बैठक में सामने आए आंकड़ों ने इस सफलता पर मुहर लगा दी, जहां बताया गया कि पर्यटन बजट में 22 गुना और संस्कृति के लिए बजट में 20 गुना वृद्धि हुई है। वर्ष 2025 में 156 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन प्रदेश की लोकप्रियता का प्रमाण है। अयोध्या, काशी, प्रयागराज समेत धार्मिक स्थलों का भव्य विकास योगी सरकार की ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। पर्यटन को रोजगार और अर्थव्यवस्था से जोड़ रही सरकार मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश का पर्यटन क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2017 से पहले जहां पर्यटन विकास सीमित दायरे में था, वहीं आज उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों में शामिल हो चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार पारदर्शिता, सुशासन और योजनाबद्ध विकास के माध्यम से पर्यटन को रोजगार और अर्थव्यवस्था से जोड़ रही है। 156 करोड़ से अधिक पर्यटक आए यूपी अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य अमृत अभिजात ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में पर्यटन विभाग के बजट में लगभग 22 गुना और संस्कृति विभाग के बजट में करीब 20 गुना वृद्धि की गई है। यह बढ़ोतरी मुख्यमंत्री योगी की दूरदर्शी सोच और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनामी बनाने में पर्यटन की अहम भूमिका होगी। बैठक में यह भी बताया गया कि वर्ष 2025 में 156 करोड़ से अधिक पर्यटकों का उत्तर प्रदेश आगमन हुआ, जो अपने आप में ऐतिहासिक उपलब्धि है। महाकुंभ-2025 के आयोजन ने दुनिया भर का ध्यान खींचा महाकुंभ-2025 के सफल आयोजन ने दुनिया भर का ध्यान उत्तर प्रदेश की ओर आकर्षित किया। प्रयागराज, अयोध्या और काशी को जोड़ने वाला स्पिरिचुअल ट्रायंगल श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अनूठा आध्यात्मिक अनुभव दे रहा है। मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि सरकार अब एक्सपीरियंशल टूरिज्म पर फोकस कर रही है, ताकि पर्यटक सिर्फ भ्रमण न करें बल्कि प्रदेश में अधिक समय रुकें और स्थानीय संस्कृति, खानपान तथा परंपराओं को करीब से जान सकें। इससे स्थानीय रोजगार और व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। बैठक में जनप्रतिनिधियों ने झांसी में हेली सेवा, प्रयागराज में वाटर स्पोर्ट्स, सहारनपुर में जंगल सफारी, कानपुर में औद्योगिक पर्यटन और गाजीपुर सहित अन्य क्षेत्रों में पर्यटन विस्तार से जुड़े सुझाव भी दिए हैं।

एक्सप्रेस-वे, मेट्रो और एयरपोर्ट से UP बना देश की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था

लखनऊ राजनीतिक इच्छाशक्ति प्रबल हो तो राज्य को नक्शे की सीमाओं से निकलकर विचार बनते देर नहीं लगती, जैसा कि आज उत्तर प्रदेश में देखने को मिल रहा है। यह राज्य आज जीवंत, स्पंदित और संकल्पशील दिखाई देता है तो इसलिए कि यहां हर मोड़ पर नवाचार और निश्चय की छाप दिखाई देती है। यह परिवर्तन दूरदर्शी सोच और निरंतर प्रयासों का वह सशक्त परिणाम है, जो आने वाली पीढ़ियों की मजबूत आधारशिला बनेगा। जेवर की धरती पर उठता हुआ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, एक्सप्रेस-वे का फैलता हुआ जाल, लखनऊ और कानपुर की धमनियों में दौड़ती मेट्रो ये केवल स्टील और कंक्रीट की संरचनाएं नहीं हैं। ये उस सामूहिक आकांक्षा की अभिव्यक्ति हैं, जो करोड़ों लोगों के भीतर दशकों से दबी पड़ी थी और जो आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी सोच की वजह से अपने साकार रूप में आकर विकसित उत्तर प्रदेश की सशक्त बुनियाद बनने जा रही हैं। उत्तर प्रदेश वह राज्य है जिसकी मिट्टी ने गंगा-यमुना की सभ्यता को सींचा, जिसके आंगन में बुद्ध की करुणा और कबीर की फक्कड़ी एक साथ पली, जिसके खेतों से उठे किसानों ने स्वाधीनता संग्राम की लौ को जलाए रखा। लेकिन स्वतंत्रता के बाद के दशकों में यही राज्य एक विरोधाभास का प्रतीक बन गया। विशाल जनशक्ति और अपार संसाधनों के बावजूद विकास की दौड़ में पिछड़ा, राजनीतिक उठापटक में उलझा और पलायन की पीड़ा को चुपचाप सहता रहा। लेकिन पिछले नौ वर्षों इसी राज्य ने अपने परिदृश्य को बदला है। अपने प्रति देश-दुनिया में गहरे तक धंसी भ्रांतियों से मुक्ति पाई। और इसीलिए इस परिवर्तन को समझना, परखना और उससे सवाल करना, तीनों एक साथ जरूरी हैं। राजनीतिक इच्छाशक्ति ने बदली तस्वीर उत्तर प्रदेश… यह नाम सुनते ही कुछ वर्ष पहले तक जो तस्वीर मन में उभरती थी, वह अव्यवस्था, पलायन, जातीय समीकरणों की राजनीति और विकास की अनंत प्रतीक्षा की थी। लेकिन आज जब इस राज्य की चर्चा होती है, तो बात जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की होती है। गंगा, पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वेज की होती है। लखनऊ और कानपुर मेट्रो की होती है। यह परिवर्तन महज एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि एक ऐसी वास्तविकता है, जो जमीन पर दिख रही है, जो आंकड़ों में प्रकट हो रही है और जो उस आम नागरिक की आंखों में पूरी होती उम्मीदों के रूप में देखी जा सकती है। यह परिवर्तन एक रात में नहीं हुआ। इसकी जड़ें उस राजनीतिक इच्छाशक्ति में हैं, जो केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि क्रियान्वयन तक भी पहुंची। आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं। उत्तर प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद 2017 में 13.30 लाख करोड़ था जो आज 36 लाख करोड़ के करीब है। राज्य ने अपने आप को देश की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया है और वर्ष 2027 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह कोई हवाई महत्वाकांक्षा नहीं, यह उस बुनियाद पर टिकी योजना है जो जेवर से लेकर पूर्वांचल तक बिछाई जा रही है। एक्सप्रेस-वे पर अवसरों की रफ्तार जब किसी राज्य में एक्सप्रेस-वे का जाल बिछता है, तो यह केवल सड़कें नहीं बनतीं, उन सड़कों पर अवसरों की आवाजाही होती है। आज देश के एक्सप्रेस-वे का 55 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेस-वे मेरठ को प्रयागराज से जोड़ने जा रहा है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की 341 किलोमीटर की लंबाई लखनऊ को गाजीपुर से जोड़ती है, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे 296 किलोमीटर में फैला है, और गंगा एक्सप्रेस-वे, जो 594 किलोमीटर लंबा होगा, देश का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे बनने की ओर अग्रसर है। जब एयरपोर्ट का निर्माण होता है, तो केवल रनवे नहीं बनता, एक क्षेत्र की आकांक्षाएं उड़ान भरती हैं। जेवर हवाई अड्डा, जो नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नाम से जाना जाएगा, लगभग 29,560 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित हो रहा है। पूर्णतः निर्मित होने पर यह एशिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा होगा और प्रतिवर्ष सात करोड़ से अधिक यात्रियों को संभालने की क्षमता रखेगा। यह केवल एक अवसंरचना परियोजना नहीं है। यह इस बात का प्रतीक है कि भारत का सबसे बड़ा राज्य अब वैश्विक मानचित्र पर अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने के लिए तत्पर है। आर्थिक शक्ति में बदलती विशाल जनसंख्या किसी भी राज्य की विकास यात्रा को समझने के लिए केवल परियोजनाओं की गणना पर्याप्त नहीं होती। यह समझना भी जरूरी है कि इन परियोजनाओं का सामाजिक और आर्थिक संदर्भ क्या है। उत्तर प्रदेश, जो देश की सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है, जहां 25 करोड़ से अधिक लोग रहते हैं, अपनी जनसांख्यिकीय शक्ति को अब धीरे-धीरे आर्थिक शक्ति में रूपांतरित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। देश-विदेश के निवेशक इसे अब सुरक्षित गंतव्य मानते हैं तो उन्हें यहां की कनेक्टिविटी भी आकर्षित करती है। उद्योगों का बढ़ना रोजगार का सबसे बड़ा आधार है। जब राज्य का युवा पलायन करने के बजाय अपने जिले में ही उद्योग और रोजगार की संभावना देखने लगे, तो यह सबसे बड़ा परिवर्तन है। डिफेंस कॉरिडोर जैसी योजनाएं सिर्फ औद्योगिक परियोजना ही नहीं, बल्कि उस पलायन की त्रासदी का उत्तर है जो दशकों से प्रदेश को खोखला कर रही थी। मेट्रो और एमआरटीएस की बात करें तो यह केवल शहरी सुविधा का विस्तार नहीं, बल्कि एक मानसिकता का परिवर्तन है। मेट्रो और एमआरटीएस केवल यातायात के साधन नहीं, ये उस आधुनिक उत्तर प्रदेश की रीढ़ हैं जो अपने नागरिक को यह अहसास दिलाना चाहता है कि वह किसी महानगर से कम नहीं। किसी शहर में मेट्रो दौड़ती है, तो केवल यातायात की समस्या हल नहीं होती, उस शहर के नागरिक का आत्मसम्मान भी बदलता है। साहस की परीक्षा दे रहा उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश का यह दौर एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां संभावनाएं असीमित हैं और जिम्मेदारियां भी उतनी ही विशाल। इतिहास उन्हीं क्षणों को याद रखता है जब कोई समाज अपनी नियति को स्वयं गढ़ने का साहस करता है। उत्तर प्रदेश आज उसी साहस की परीक्षा दे रहा है। वह केवल वर्तमान को नहीं बदल रहा, आने वाली पीढ़ियों के लिए नींव रच रहा है। यह भारत के उस केंद्र का जागरण है जिसे सदा से शक्ति का स्रोत माना गया है। अब बड़ी चुनौती यह सिलसिला बनाए रखने की है क्योंकि अनवरत … Read more

EPFO में बदलाव: ATM से पेंशन विड्रॉल होगा संभव, पेंशन 7.5 गुना तक बढ़ सकती है

 नई दिल्‍ली कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (EPFO) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आ रहा है. सरकार पीएफ रजिर्स्‍टड कर्मचारियों को लाभ देने के लिए कई चीजों पर विचार कर रही है. खासकर पेंशन में योगदान देने वाले कर्मचारियों को बड़ा लाभ देने पर विचार कर रही है. EPS-95 पेंशन को बढ़ाने पर चर्चा कर रही है।  श्रमिक संगठन मांग कर रहे हैं कि सरकार ईपीएस के तहत पेंशन को 1 हजार रुपये से बढ़ाकर ₹7500 करे. अगर सरकार पेंशन को लेकर इस प्रस्‍ताव को मान लेती है तो पेंशन में 7.5 गुना इजाफा होगा. संसदीय समिति ने भी पेंशन बढ़ाने की सिफारिश की. इसके अलावा, सरकार पीएफ कर्मचारियों के ब्याज को जल्द अकाउंट में डिपॉजिट करने की बात कही है।  पीएम अकाउंट होल्‍डर्स के खाते में 8.25% ब्याज जल्‍द डिपॉजिट हो सकता है, जिसका कर्मचारी इंतजार कर रहे हैं. वित्त मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार मंजूरी मिलते ही खातों में पैसा ट्रांसफर कर दिया जाएगा. ऐसा माना जा रहा है कि मई में पीएफ का ब्‍यजा अकाउंट में आ सकता है।  ATM से PF निकालने की सुविधा  ईपीएफओ पोर्टल के तहत कई तकनीकी बदलाव किए जा रहे हैं, जिसे जल्‍द लागू किया जा सकता है. खासकर एटीएम से PF की निकासी को लेकर सबसे बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है. जल्‍द इसके लागू होने की उम्‍मीद है. एटीएम से पीएफ की निकासी लागू होने के बाद पीएफ के पैसे तक सदस्‍यों की पहुंच आसान हो जाएगी. फिर सेविंग अकाउंट की तरह, पीएफ अकाउंट से भी ATM कार्ड के जरिए पैसा निकाल सकते हैं।  EPFO ने बना दिया नया रिकॉर्ड ईपीएफओ के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में 8.31 करोड़ क्लेम सेटलमेंट किया गया. पिछले साल 6.01 करोड़ क्लेम से तुलना में यह एक बड़ा उछाल है. इसमें से 5.51 करोड़ क्लेम एडवांस या आंशिक विड्रॉल से जुड़े रहे. जानकारी के अनुसार, ईपीएफओ ने 71.11% एडवांस क्लेम 3 दिन में निपटाए, जो पिछले साल यह आंकड़ा 59.19% था।  डिजिटल सुविधा से प्रॉसेस आसान  6.68 करोड़ क्लेम बिना चेक इमेज अपलोड, 1.59 करोड़ खातों में बिना employer मंजूरी बैंक लिंक, 70.55 लाख ट्रांसफर क्लेम ऑटो-प्रोसेस और 29.34 लाख सदस्यों ने खुद प्रोफाइल अपडेट किया. अप्रैल 2026 के दौरान 61.03 लाख क्लेम सेटलमेंट किया गया. वहीं 98.70% क्लेम 20 दिन से कम में निपटाए गए।  नई पहल: E-PRAAPTI पोर्टल  ईपीएफओ की ओर से एक नई पहल की भी शुरुआत की है, जिसके तहत निष्क्रिय PF खातों को सक्रिय करने के लिए नया प्लेटफॉर्म आधार आधारित एक्सेस से पुराने खाते जोड़ना आसान हो जाएगा. इसका फायदा UAN से लिंक न होने वाले खातों को मिलेगा और भविष्‍य में बिना मेंबर ID वाले यूजर्स को भी सुविधा मिलेगी।