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तोमर ने उप नगर ग्वालियर के वार्ड 17, 6 और 7 में किया सफाई व्यवस्था का निरीक्षण

भोपाल ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने रविवार को उप नगर ग्वालियर के वार्ड 17, 6 तथा 7 में विभिन्न गली-मोहल्लों की सफाई, सीवर, स्ट्रीट लाइट, कचरा प्रबंधन तथा अन्य समस्याओं के निराकरण के लिए स्थल निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्वच्छता, स्वास्थ्य और जनसुविधा से जुड़ी क्षेत्रवासियों की समस्याओं को गंभीरतापूर्वक सुना तथा संबंधित अधिकारियों को शीघ्र एवं गुणवत्तापूर्ण सुधार कार्य सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने हिदायत दी कि सीवर की सफाई, कचरा संग्रहण और सड़कों के रखरखाव के कार्य में किसी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाए, लापरवाही बरतने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने आमजन की सीवर, पानी, बिजली तथा सड़क से सम्बन्धित समस्याओं का मौके पर ही निराकरण करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्वालियर विधानसभा मेरा परिवार है और परिवार को कोई भी असुविधा न हो मूलभूत सुविधाओ में जो कमी है, उसको तुरंत दुरस्त किया जाए। उन्होंने रविवार की सुबह 6 बजे उप नगर ग्वालियर के वार्ड 17 स्थित विभिन्न गली, मोहल्लों में पेयजलापूर्ति, सीवर सफाई, बिजली व्यवस्था सहित अन्य समस्याओं के सम्बन्ध में स्थानीय नागरिकों से सीधा संवाद किया। उप नगर ग्वालियर के वार्ड 06 स्थित जहाँगीर कटरा,मेवाती मोहल्ला, लधेडी, जगना पुरा, हथियापौर तथा वार्ड 7 के कृष्ण नगर में भी पहुंचे तथा यहां चल रही सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के सम्बन्ध में स्थानीय नागरिकों से जानकारी ली। उन्होंने लोगों से पूछा कि उन्हें राशन मिल रहा है, पेंशन मिल रही है, आयुष्मान कार्ड बन गया है। इसके जबाव में लोगों अपनी सहमति जताई। उन्होंने बहनों तथा बुजुर्ग माताओं से बातचीत कि और उनसे कुशलक्षेम पूछी। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने कहा कि हर कदम पर एक ही भावना रहनी चाहिए, हम बदलेंगे, तो हमारा ग्वालियर बदलेगा। यह राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि एक संकल्प है, अपने शहर, अपनी पीढ़ी और अपनों के भविष्य के लिए। उन्होंने आव्हान किया कि ग्वालियर को स्वच्छ, स्वस्थ और नशा मुक्त बनाने के अपने संकल्प को जनसहभागिता के साथ सफलता की सीढ़ी तक पहुंचाना है। स्वच्छता, स्वास्थ्य और जनसुविधा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। जनता की सेवा और समस्याओं का समयबद्ध समाधान आपके सेवक की प्राथमिकता है।  

रसोई गैस किल्लत से स्ट्रीट फूड महंगा, रेट में 10–12% तक बढ़ोतरी

पटना  बिहार की राजधानी पटना में होटल, ढाबा और स्ट्रीट फूड व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। मार्च महीने की शुरुआत से ही व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर अब शहर की रसोई पर दिखने लगा है। होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं की मुश्किलें बढ़ गई है। कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में बढ़ने से कोयला-लकड़ी के सहारे रेस्टोरेंट होटल होने लगे हैं। जो होटल, रेस्टोरेंट ईरान-अमेरिका जंग शुरू होने के पहले से व्यावसायिक गैस सिलेंडर का उठाव कर रहे थे। इनको भी उनके पूर्व की मांग का 70% ही आपूर्ति की जा रही है। मतलब 30% सिलेंडर के बदले उन्हें वैकल्पिक ऊर्जा साधनों लकड़ी- कोयला भट्टी, इंडक्शन का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। पॉकेट पर सीधा वार, खानपान की नई कीमतें गैस की कीमत बढ़ने से 5 रुपए की रोटी 7 रुपए की हो गई है। छोटी दुकानों में 10 रुपए का समोसा अब 15 से 20 रुपए पीस मिल रहा है। एलपीजी की कीमत बढ़ने और नहीं मिलने से स्ट्रीट वेंडरों पर दोहरी मार पड़ी है। चाय की कीमतों में इजाफा हुआ है। चाउमीन वाले 5 से 10 कीमत बढ़ा दिए हैं। इनका कहना है कि ब्लैक में खरीदना नहीं चाहते और गैस खत्म होने के बाद नया सिलेंडर मिलने तक दुकान बंद करनी पड़ती है।     रोटी: पहले 5 रुपए में मिलने वाली रोटी अब 7 रुपए की     समोसा: 10 रुपए वाला समोसा अब बाजार में 15-20 रुपए की     चाय: 10 रुपए से बढ़कर 15-20 रुपए तक पहुंच गई     चाउमीन: दाम में 5-10 रुपए तक का इजाफा देखा जा रहाकु     खाने-पीने की चीजों में औसतन 10-12 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी छोटे कारोबारियों की हालत को और भी खराब इस क्राइसिस से छोटे कारोबारियों की हालत तो और भी खराब है। एक चाय विक्रेता ने बताया कि चाय की कीमत पहले ही दस रुपए से बढ़कर 15 रुपए की गई। कुछ दुकानदार 20 रुपए भी कर रहे हैं। लेकिन इससे ग्राहकों की संख्या में कमी आने लगी है। अगर ग्राहकों की संख्या में कमी आई तो कारोबार समेटने या कोई दूसरा रोजगार करने पर विचार करेंगे। इससे खाने-पीने के सामानों की कीमतों में कम से कम 10 से 12 प्रतिशत तक इजाफा तय है। मिठाइयों से लेकर रेस्टोरेंटों के मैन्यू की कीमतों, हॉस्टल के मेस के मैन्यू से लेकर स्ट्रीट फूड तक सब कुछ महंगा लग रहा है। कोयले की मांग बढ़ने से कीमत में इजाफा एलपीजी किल्लत से कोयले की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। 18 से 20 रुपए किलो बिकने वाला कोयला की कीमत 30 से 40 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। अच्छे और गुणवत्ता वाले कोयले की कीमत इससे भी अधिक लगाई जा रही है। कोयले को लेकर दुकानदार कोयले के थोक व्यापारियों के यहां एडवांस बुकिंग तक करने लगे है। लकड़ी के कोयले की कीमत 40 से 50 रुपए किलो के बीच पहुंच गई है। स्ट्रीट वेंडरों के रोजी-रोजगार पर असर पटना के ढाबों और स्ट्रीट वेंडरों के पास पांच किलोग्राम के छोटा गैर सब्सिडी प्राप्त गैस सिलेंडरों के साथ-साथ घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर है। स्ट्रीट वेंडरों द्वारा घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग करना अवैध है। लेकिन, पटना की छोटी दुकानों में सड़कों पर घरेलू गैस सिलेंडरों का धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है। कंकड़बाग में चाउमिन विक्रेता ने बताया कि छोटा गैस सिलेंडर महंगा भी पड़ता है। इसमें वैसा ताव नहीं मिलता है जैसा ताव 14.2 किलोग्राम गैस सिलेंडर में मिलता है। इसलिए हम मजबूरी में घरेलू गैस सिलेंडर का ही उपयोग ठेला पर कर रहे है। ईरान-अमेरिका युद्ध के पहले पटना में लगभग 5 हजार व्यावसायिक गैस सिलेंडर की खपत थी। ये फिलहाल 3000-3500 के बीच रह गई है। ईरान-अमेरिका युद्ध का साइड इफेक्ट बिहार एलपीजी वितरक संघ के महासचिव रामनरेश सिन्हा के मुताबिक ईरान-अमेरिका युद्ध के पहले पटना में लगभग 5 हजार व्यावसायिक गैस सिलेंडर की खपत थी। ये फिलहाल 3000-3500 के बीच रह गई है। पटना के होटलों- रेस्टोरेंटों में एक बार फिर से लकड़ी, कोयला की खपत में इजाफा हो गया है। पटना के रेस्टोरेंट कोयले और लकड़ी का इस्तेमाल करने लगे हैं।  

दिनदहाड़े वारदात: गेहूं लदा ट्रक उड़ा ले गया चोर, लाखों का अनाज गायब

कुरुक्षेत्र. कुरुक्षेत्र जिले के लाडवा की अनाज मंडी से गेहूं से भरा ट्रक चोरी होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ट्रक में करीब 438 कट्टे गेहूं के लोड थे, जिसकी कीमत लगभग साढ़े 5 लाख रुपये बताई जा रही है। चोर सुबह-सुबह आढ़ती की दुकान के सामने से ही ट्रक लेकर फरार हो गया। जानकारी के अनुसार आढ़ती नरेश कुमार की मंडी में दुकान नंबर 88 है। गेहूं सीजन के चलते उन्होंने सफाई, तुलाई और ढुलाई के लिए लेबर लगा रखी थी। 2 मई की रात लेबर ने ट्रांसपोर्टर के ट्रक (HR55H-4229) में 438 कट्टे गेहूं लोड किए थे। उस समय ट्रक चालक कमल लाल भी मौके पर मौजूद था। सुबह करीब 7 बजे जब आढ़ती दुकान पर पहुंचे तो ट्रक मौके से गायब मिला। शुरुआत में उन्होंने सोचा कि ड्राइवर ट्रक को वजन कराने ले गया होगा, लेकिन करीब एक घंटे बाद भी वजन नहीं हुआ तो उन्होंने ड्राइवर कमल को फोन किया। ड्राइवर ने बताया कि वह रात को ट्रक लोड होने के बाद अपने घर यमुनानगर चला गया था और सुबह आकर ट्रक लेकर जाने वाला था। इस पर आढ़ती को शक हुआ और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। नरेश कुमार के अनुसार, सुबह करीब साढ़े 6 बजे के आसपास किसी अज्ञात व्यक्ति ने ट्रक चोरी कर लिया। ट्रक में लोड गेहूं की कीमत करीब साढ़े 5 लाख रुपये है। घटना की सूचना ट्रांसपोर्टर को भी दे दी गई है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस द्वारा मार्केट कमेटी कार्यालय के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि आरोपी का सुराग लगाया जा सके। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और जल्द ही आरोपी को पकड़ने का दावा कर रही है।

तेज हवाओं ने बढ़ाई मुश्किलें: लुधियाना में सड़क पर गिरा शेड, बिजली सप्लाई प्रभावित

लुधियाना. रविवार को शहर में तेज बारिश और तेज हवाओं के बीच एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। फिरोजपुर रोड स्थित वेव मॉल के पास सड़क किनारे लगा एक भारी शेड अचानक गिरकर सड़क पर आ गया, जिससे सड़क का एक हिस्सा पूरी तरह बंद हो गया। जानकारी के अनुसार, सुबह मौसम बेहद खराब था और तेज हवाओं के चलते यह शेड अपनी जगह से उखड़ गया। घटना के समय आसपास आवाजाही भी थी, लेकिन गनीमत रही कि कोई व्यक्ति इसकी चपेट में नहीं आया और कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि शेड गिरते ही इलाके में हलचल मच गई। खास बात यह रही कि गिरा हुआ ढांचा बिजली की तारों के ऊपर भी जा गिरा, जिससे स्थिति और भी जोखिम भरी हो गई थी। शेड के सड़क पर गिरने के कारण उस हिस्से से आवाजाही पूरी तरह रुक गई है और लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। फिलहाल मौके पर शेड हटाने और रास्ता साफ करने के प्रयास जारी हैं, ताकि जल्द से जल्द स्थिति सामान्य की जा सके।

खाट में बैठकर ग्रामीणों से किया संवाद: सुनी समस्याएं, समाधान के दिए निर्देश

रायपुर  प्रदेशव्यापी ‘सुशासन तिहार 2026’ के अंतर्गत मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड के ग्राम पंचायत सिलमा के शांतिपारा पहुंचे, जहां उन्होंने जन चौपाल के माध्यम से ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने न केवल योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति का जायजा लिया, बल्कि आम नागरिकों की समस्याओं को सुनकर उनके त्वरित निराकरण के निर्देश भी दिए। जन चौपाल में उपस्थित ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री  साय के समक्ष अपनी समस्याएं और मांगें रखीं, जिन पर मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता के साथ संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक आवेदन का समयसीमा में समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। इस दौरान ग्राम सुआरपारा निवासी  राजेश शुक्ला ने अपनी आर्थिक कठिनाइयों का जिक्र करते हुए बिजली बिल माफी और आर्थिक सहायता के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने तत्काल मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए मामले पर संज्ञान लिया और आश्वस्त किया कि उनकी स्थिति को देखते हुए बिजली बिल माफी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, साथ ही आवश्यक आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री के इस त्वरित निर्णय से भावुक हुए राजेश शुक्ला ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी समस्या को लेकर परेशान थे, लेकिन आज मुख्यमंत्री ने स्वयं उनकी बात को गंभीरता से सुना और समाधान का भरोसा दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह चौपाल उनके लिए राहत और विश्वास का माध्यम बनी है। जन चौपाल को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि ‘सुशासन तिहार’ शासन की कार्यप्रणाली में बेहतर और सकारात्मक बदलाव का संकल्प है। उन्होंने बताया कि 40 दिनों तक चलने वाले इस अभियान के माध्यम से अब प्रशासन स्वयं जनता के द्वार तक पहुंचेगा और उनकी समस्याओं का मौके पर समाधान सुनिश्चित करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले नागरिकों को अपने कार्यों के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब शासन स्वयं गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनेगा और उनका निराकरण करेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जन चौपाल में प्राप्त प्रत्येक आवेदन को गंभीरता से लेते हुए निर्धारित समयसीमा के भीतर उसका समाधान सुनिश्चित किया जाए। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी भी ग्रामीणों से ली तथा हितग्राहियों से संवाद कर योजनाओं के प्रभाव का फीडबैक प्राप्त किया।  इस अवसर पर पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल, लूण्ड्रा विधायक  प्रबोध मिंज, महापौर मती मंजूषा भगत, कलेक्टर  अजीत वसंत  सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

PM आवास योजना लाभुकों को मिली राहत की उम्मीद, विधायक ने दिया पूरा साथ

जमशेदपुर  जमशेदपुर के बिरसानगर में प्रधानमंत्री आवास योजना (PRAW) के सैकड़ों लाभुक रविवार सुबह जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय के बिष्टुपुर स्थित आवास पर जमा हुए. लाभुकों ने व्यथा सुनाते हुए कहा कि पूरा पैसा जमा करने के बावजूद उन्हें पिछले 6 साल से चाबी नहीं मिल रही है. थक-हारकर लाभुकों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि वे आगामी 6 मई को शुभ मुहूर्त में अपने-अपने घरों में सामूहिक गृह प्रवेश पूजा करेंगे. विधायक सरयू राय ने इस फैसले का न केवल समर्थन किया, बल्कि पूजा सामग्री और पंडाल की व्यवस्था स्वयं करने का एलान किया. दोहरी आर्थिक मार और बदतर हालात लाभुकों ने बताया कि वे वर्तमान में ‘दोहरी मार’ झेल रहे हैं. एक तरफ बैंकों से लिए गए लोन की EMI कट रही है, तो दूसरी तरफ घर न मिलने के कारण वे 4,000 से 6,000 रुपये तक प्रति माह किराया देने को मजबूर हैं. कई परिवारों की माली हालत इतनी खराब हो गई है कि उनके पास खाने तक के लाले पड़ रहे हैं. योजना के तहत ब्लॉक नंबर 8 और 23 में 95% काम पूरा होने के बावजूद बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं का काम अब भी अधूरा है. भ्रष्टाचार और निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल विधायक सरयू राय ने निर्माण कार्य में भारी लापरवाही और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है. उन्होंने बताया कि 21 ब्लॉक में से मात्र 2 ब्लॉक ही तैयार हो सके हैं. लाभुकों ने विधायक को ऐसी तस्वीरें और वीडियो दिखाए, जिनमें नवनिर्मित मकानों की दीवारों में दरारें और प्लास्टर गिरते हुए स्पष्ट दिख रहे हैं. राय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि घर मिलने से पहले ही आशियाने टूटने लगे हैं. सरकार और जुडको के बीच पिस रही जनता परियोजना का जिम्मा जुडको (JUIDCO) को दिया गया था, जिसने छह अलग-अलग कंपनियों को काम सौंपा है. जिस योजना को मार्च 2021 तक पूरा होना था, वह मई 2026 तक भी फिनिशिंग स्टेज में ही अटकी हुई है. सरयू राय ने कहा कि वे सोमवार को मुख्यमंत्री और विभागीय सचिव से मिलकर इस समस्या के समाधान का अंतिम प्रयास करेंगे ताकि लाभुकों को आधिकारिक रूप से चाबी मिल सके. परियोजना एक नजर में     कुल फ्लैट्स (संशोधित): 7372 (24 ब्लॉक में)     कुल लागत: 653 करोड़ रुपये     प्रति फ्लैट लागत: 6.81 लाख रुपये     लाभुकों का अंशदान: 4.31 लाख रुपये     कारपेट एरिया: 313 वर्ग फीट     संरचना: G+8 (ग्रुप हाउसिंग)     सुविधाएं: जलापूर्ति, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट, ड्रेनेज, पार्क और पार्किंग  

नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में बोले सीएम, भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हुई

लखनऊ यूपी में पिछले नौ वर्षों में 9 लाख से अधिक नौजवानों को सरकारी नौकरी दी गई है। यह किसी भी राज्य में सर्वाधिक नियुक्तियों की प्रक्रिया को सकुशल एवं पारदर्शी तरीके से संपन्न करने का रिकॉर्ड है। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लोक भवन में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के लिए नवचयनित 357 कनिष्ठ विश्लेषकों (औषधि) तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के नवचयनित 252 दंत स्वास्थ्य विज्ञानियों को नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में कहीं। सीएम योगी ने कहा, सिर्फ अधीनस्थ चयन आयोग इस वर्ष 32 हजार से अधिक नियुक्तियों की प्रक्रिया संपन्न करेगा। शिक्षा चयन आयोग हजारों शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी करेगा। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को लगभग 15 हजार भर्तियां करनी है। इस प्रकार चालू वित्तीय वर्ष (2026-27) में डेढ़ लाख से अधिक सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया संपन्न होनी है। प्रक्रिया में किसी प्रकार की सेंध न लगे, इसके लिए सख्त कानून भी बनाया है, जिसके तहत सेंधमारी करने वालों को आजीवन कारावास की सजा और उसकी पूरी संपत्ति को जब्त किया जाता है। युवाओं के सपने का टूटना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ धोखा मुख्यमंत्री ने कहा कि हर माता-पिता की इच्छा होती है कि उनका बच्चा अच्छी शिक्षा प्राप्त कर एक सुरक्षित और बेहतर भविष्य की ओर आगे बढ़े। इसके लिए वे हरसंभव प्रयास करते हैं, लेकिन जब अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते, तो न केवल उस युवा के सपने टूटते हैं, बल्कि उसके माता-पिता और परिवार से जुड़े अन्य लोगों की उम्मीदें भी चकनाचूर हो जाती हैं। किसी युवा के सपनों का टूटना केवल एक व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ धोखा है। उत्तर प्रदेश की ‘बीमारू राज्य’ के रूप में पहचान बनाने में चयन प्रक्रियाओं में भेदभाव, बेईमानी और भ्रष्टाचार की भूमिका थी। भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताएं इतनी अधिक थीं कि न्यायालय को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ता था। फर्जी डिग्री वाले लोग करते थे चयन प्रक्रिया का नेतृत्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले लगभग हर नियुक्ति प्रक्रिया पर कहीं न कहीं कोर्ट स्टे लगते थे, न्यायालय से कड़ी टिप्पणियां मिलती थीं। स्थिति यह थी कि जो व्यक्ति पात्र नहीं था, वह भी आयोग का चेयरमैन बन जाता था। यहां तक कि फर्जी डिग्री वाले लोग चयन प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहे थे। पैसे के लेनदेन के कारण भर्तियां प्रभावित होती थीं और योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिल पाता था। वर्तमान समय में कई युवा उस दौर से अनभिज्ञ हैं, क्योंकि वे तब नाबालिग थे। वर्ष 2017 के बाद भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया गया है। इसका परिणाम यह है कि अब तक पुलिस विभाग में 2,20,000 से अधिक भर्तियां सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं। गत 9 वर्षों में हम लोगों ने निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से रिकॉर्ड 9 लाख से अधिक युवाओं की भर्तियां कीं। आज औषधि विभाग के पास जांच के लिए मंडल स्तर पर ए ग्रेड की लैब मौजूद सीएम ने कहा कि अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा 4 और 6 मई को नियुक्त पत्र वितरिण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। ये लगातार चलेगा। सरकार बिना भेदभाव पिछले नौ वर्षों में कोरोना महामारी के बावजूद प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय तीन गुना करने में सफल रही है। प्रदेश में आज देश का सबसे अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेसवे, हाइवे आदि मौजूद हैं। आज वे विभाग अच्छा काम कर रहे हैं, जिन्हें पहले लोग जानते तक नहीं थे। लगभग हर जनपद में मेडिकल कॉलेज हैं, दो एम्स कार्यरत हैं। 2017 से पहले सब भगवान भरोसे था, परिणाम भी उसी प्रकार से आते थे। उस दौरान पूरा सिस्टम ही बीमारू था। खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग के पास दवा की क्वालिटी एवं खाद्य पदार्थों में मिलावट जांचने के उपकरण व लैब्स नहीं थीं। अब विभाग के पास जांच के लिए मंडल स्तर पर ए-ग्रेड की लैब हैं। प्रशिक्षित मैनपॉवर है, जो समय-सीमा में जांच के नतीजे बता देंगे। वर्ष 2017 से पहले पांच प्रयोगशालाएं थीं, आज आधुनिक उपकरणों के साथ 18 प्रयोगशालाएं हैं। कनिष्ठ विश्लेषकों (खाद्य) की भर्ती भी जल्द सीएम ने कहा कि पहले 5 प्रयोगशालाओं में 12,000 नमूने प्रतिवर्ष लिए जाते थे। अब इनकी संख्या बढ़कर 55,000 हो गयी है। आज 357 कनिष्ठ विश्लेषकों (औषधि) की भर्ती प्रक्रिया संपन्न हुई है, जिसके साथ ही इनकी संख्या 44 से बढ़कर 401 हो गयी है। वर्तमान में कनिष्ठ विश्लेषकों (खाद्य) की संख्या अभी केवल 58 है। हमने 417 पदों के लिए अधियाचन भेजा है, जो उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में विचाराधीन है। जल्द ही भर्ती प्रक्रिया संपन्न होगी। वर्तमान में 36 हजार खाद्य नमूने प्रतिवर्ष लिये जाते हैं। भर्ती प्रक्रिया संपन्न होने से इनकी संख्या बढ़कर प्रतिवर्ष 1,08,000 से अधिक हो जाएगी। आज 252 डेंटल हाइजीनिस्ट को भी नियुक्ति पत्र वितरित किए गए हैं।

शादी के मौसम में सोने की कीमत में 26,778 रुपये की गिरावट, चांदी भी सस्ती हुई

इंदौर  शादियों के इस सीजन में सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली है। आल टाइम हाई से सोने का रेट 26778 रुपये के स्तर पर लुढ़क चुका है। वहीं, चांदी 143106 रुपये सस्ता हो गया है। आइए डीटेल्स में जानते हैं कि सोने और चांदी का क्या रेट चल रहा है? आज सोने का क्या है रेट? (Gold price today) इंडियन बुलियंस ज्वैलर्स एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार गुरुवार को 24 कैरेट 148652 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। 23 कैरेट गोल्ड का रेट 148057 रुपये प्रति 10 ग्राम, 22 कैरेट गोल्ड का रेट 136165 रुपये प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट गोल्ड का रेट 111489 रुपये 10 ग्राम के स्तर पर था। वहीं, 14 कैरेट गोल्ड का रेट 86961 रुपये प्रति 10 ग्राम था। चांदी दाम कितना गिरा? (Silver Rate Today) ibjarates के अनुसार गुरुवार को चांदी का रेट 236882 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर था। बता दें, शुक्रवार को छुट्टी थी। इस वजह से नए रेट जारी नहीं किए गए थे। वहीं, शनिवार और रविवार को सप्ताहिक की होने की वजह से अब सोमवार को नए रेट जारी किए जाएंगे। सोने की कीमतों में गिरावट की क्या वजह? (Why Gold price falling) मौजूदा समय में वैश्विक स्तर ईरान युद्ध की वजह से काफी उथल-पुथल मचा हुआ है। जिसकी वजह से निवेशक सोने की जगह डॉलर में इनवेस्टमेंट कर रहे हैं। मौजूदा समय में डॉलर काफी मजबूत हो चुका है। डॉलर की कीमतों में जारी तेजी की वजह से भी सोने पर बुरा असर पड़ा है। बढ़ती महंगाई ने भी स्थिति को बिगाड़ा सोने के रेट में गिरावट के पीछे की वजह महंगाई को भी माना जा रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में जारी बढ़ोतरी की वजह से दुनिया भर में महंगाई बढ़ रही है। इसकी वजह से भी कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। महंगा होने की वजह से भी बनाई दूरी सोने की कीमतों में अचानक से एक साल के दौरान बहुत तेजी आई है। जिसके बाद आम-आदमी की पहुंच से सोना दूर होने लगा। निवेशकों ने इसकी वजह से भी दूरी बनाई है। गिरावट के पीछे एक वजह यह भी है। (यह निवेश की सलाह नहीं है। सोने और चांदी की कीमतों में जारी तेजी के पीछे कई कारण होते हैं। यहां प्रस्तुत जानकारी के आधार पर लाइव हिन्दुस्तान गोल्ड और सिल्वर में इनवेस्टमेंट की सलाह नहीं देता है।)

US-चीन टकराव बढ़ा: 5 कंपनियों पर प्रतिबंध, ड्रैगन ने आदेश मानने से किया इनकार

वाशिंगटन ईरानी तेल खरीद को लेकर अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव अब और बढ़ गया है. अमेरिका ने ईरानी तेल खरीद करने वाली चीन की 5 कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया है. अमेरिका ने इन कंपनियों को अपनी “स्पेशली डिज़िग्नेटेड नेशनल्स (SDN)” सूची में डाल दिया है, जिसके तहत उनकी संपत्तियां फ्रीज की जा सकती हैं और उनके साथ लेन-देन पर रोक लगाई जाती है. वहीं इस फैसले के जवाब में चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अपने देश की कंपनियों को अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन न करने का आदेश दिया है. यह कदम खास तौर पर उन चीनी पेट्रोकेमिकल कंपनियों को बचाने के लिए उठाया गया है, जिन पर अमेरिका ने ईरान के तेल कारोबार से जुड़े होने का आरोप लगाया है. अमेरिका को जवाब देने चीन का ‘ब्लॉकिंग स्टैच्यूट’ लागू चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को एक आधिकारिक आदेश जारी कर घरेलू कंपनियों को अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन करने से रोक दिया है. यह पहली बार है जब चीन ने अपने “ब्लॉकिंग स्टैच्यूट” यानी ऐसा कानूनी हथियार इस्तेमाल किया है, जो विदेशी कानूनों के असर को अपने देश में निष्प्रभावी करने के लिए बनाया गया है. इस कदम को सिर्फ कूटनीतिक विरोध से आगे बढ़कर कानूनी जवाबी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है. इन 5 बड़ी चीनी कंपनियों को मिला संरक्षण चीनी सरकारी मीडिया शिन्हुआ के मुताबिक, जिन कंपनियों को इस आदेश से सुरक्षा दी गई है, उनमें शामिल हैं:     हेंगली पेट्रोकेमिकल (डालियान) रिफाइनिंग कंपनी लिमिटेड     शेडोंग शौगुआंग लुकिंग पेट्रोकेमिकल कंपनी लिमिटेड     शेडोंग जिनचेंग पेट्रोकेमिकल ग्रुप कंपनी लिमिटेड     हेबेई शिनहाई केमिकल ग्रुप कंपनी लिमिटेड     शेडोंग शेंगशिंग केमिकल कंपनी लिमिटेड अमेरिका के कदम पर चीन की सख्त प्रतिक्रिया चीन के वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि 2025 से अमेरिका लगातार अपने कार्यकारी आदेशों के जरिए चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगा रहा है, यह आरोप लगाते हुए कि वे ईरान के तेल कारोबार में शामिल हैं. प्रवक्ता ने इन कदमों की आलोचना करते हुए कहा कि इससे चीनी कंपनियों और तीसरे देशों के बीच सामान्य व्यापारिक गतिविधियों पर गलत तरीके से रोक लग रही है. उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक संबंधों के बुनियादी नियमों का उल्लंघन बताया.

हब एंड स्पोक मॉडल से प्रदेशभर में स्किल और उद्योग को मिलेगा बढ़ावा

लखनऊ योगी सरकार प्रदेश के युवाओं को रोजगारपरक कौशल से जोड़ने के लिए ‘सरदार पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन्स के तहत 12 मेगा स्किल हब और 63 जिला स्किल केंद्र स्थापित करेगी। यह मेगा स्किल हब और जिला स्किल केंद्र प्रदेश की आर्थिक प्रगति के साथ-साथ युवाओं के भविष्य को भी मजबूत आधार देंगे। इसके लिए योगी सरकार करीब 14,760 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसके जरिये योगी सरकार ने हर साल 10 लाख से अधिक युवाओं को एडवांस स्किलिंग देने का लक्ष्य रखा है।  हब एंड स्पोक मॉडल से बदलेगी तस्वीर योगी सरकार की योजना ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल पर आधारित होगी। इसमें 12 बड़े शहरों क्रमश: लखनऊ, गौतमबुद्धनगर, कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर, आगरा, मेरठ, सहारनपुर, झांसी, बरेली, मुरादाबाद और गाजियाबाद में मेगा स्किल हब बनाए जाएंगे। इनके साथ जुड़े 63 जिला स्किल केंद्र ‘स्पोक’ के रूप में काम करेंगे। इस मॉडल के जरिए हर जिले तक कौशल विकास और उद्योगों की पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। मेगा स्किल हब जहां बड़े स्तर पर प्रशिक्षण और उद्योगों को आकर्षित करेंगे, वहीं जिला केंद्र स्थानीय युवाओं को उनकी जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण देंगे। इसकी विशेषता है कि इसमें स्किलिंग और औद्योगिक विकास को एक साथ जोड़ा गया है। योगी सरकार का उद्देश्य हर जिले में ऐसे औद्योगिक जोन विकसित करना है, जहां युवाओं को प्रशिक्षण के साथ-साथ रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी मिलें। इन केंद्रों में तकनीकी कौशल के साथ-साथ सॉफ्ट स्किल, भाषा प्रशिक्षण, डिजिटल साक्षरता और आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसके अलावा उद्योगों के लिए ‘प्लग एंड प्ले’ सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा।   रोबोटिक्स, डेटा एनालिटिक्स, इंडस्ट्रियल ऑटोमशन का दिया जाएगा प्रशिक्षण स्किल हब और जिला केंद्रों में प्रशिक्षण की विविध श्रेणियां होंगी। इसमें पारंपरिक कौशल के साथ-साथ आधुनिक और भविष्य आधारित कौशल जैसे रोबोटिक्स, डेटा एनालिटिक्स, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन, डिजिटल मार्केटिंग आदि शामिल होंगे। स्थानीय जरूरतों के अनुसार कौशल चयन किया जाएगा, जिससे ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) जैसी योजनाओं को भी मजबूती मिलेगी। इससे न केवल स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि युवाओं को अपने ही जिले में रोजगार के अवसर मिल सकेंगे। योजना में सरकार के साथ निजी क्षेत्र की भी अहम भूमिका होगी। सरकार बुनियादी ढांचा और प्रारंभिक निवेश उपलब्ध कराएगी जबकि संचालन और प्रशिक्षण का काम निजी साझेदारों के जरिए किया जाएगा। शुरुआती पांच वर्षों तक वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) के जरिए इन संस्थानों को सहयोग दिया जाएगा। इससे स्किलिंग सेंटर और उद्योग इकाइयां आत्मनिर्भर बन सकेंगी और लंबे समय तक टिकाऊ विकास सुनिश्चित होगा। इन मेगा स्किल हब और जिला केंद्रों में आधुनिक बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इनमें बिजली, पानी, सड़क, इंटरनेट, सुरक्षा, आवास, खेल और मनोरंजन जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इसके साथ ही स्टार्टअप सपोर्ट सेंटर, प्लेसमेंट एजेंसियां, रिसर्च और डिजाइन सेंटर भी स्थापित किए जाएंगे, जिससे युवाओं को प्रशिक्षण के बाद सीधे रोजगार या स्वरोजगार के अवसर मिल सकें।