samacharsecretary.com

मुख्यमंत्री ने नालंदा परिसर निर्माण कार्य का लिया जायजा, कार्य की गुणवत्ता और गति पर दिया जोर

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज बलरामपुर जिला मुख्यालय में 4 करोड़ 48 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन नालंदा परिसर का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति एवं गुणवत्ता का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि निर्माण कार्य को निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए, क्योंकि यह परिसर जिले के विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण अध्ययन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री  साय ने परिसर में उपयोग की जा रही निर्माण सामग्री, कार्य की प्रगति तथा प्रस्तावित सुविधाओं की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को आगाह किया कि निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और गुणवत्ता के सभी मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है, ताकि वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी प्रभावी ढंग से कर सकें। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि नालंदा परिसर में आधुनिक ई-लाइब्रेरी, प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित पुस्तकें, समृद्ध अध्ययन सामग्री एवं पत्र-पत्रिकाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे युवाओं को एक समग्र और अनुकूल अध्ययन वातावरण मिल सकेगा। उन्होंने निर्देशित किया कि कार्य में तेजी लाते हुए परिसर को शीघ्र पूर्ण किया जाए, ताकि जिले के विद्यार्थियों को इसका लाभ जल्द से जल्द मिल सके। उन्होंने निरीक्षण के दौरान परिसर में प्रस्तावित अन्य सुविधाओं की जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए और कहा कि नालंदा परिसर राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके तहत युवाओं को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।  मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह परिसर जिले के विद्यार्थियों के लिए ज्ञान और अवसर का एक सशक्त केंद्र बनेगा तथा उनके भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सिराज-होल्डर हैट्रिक से चूके, फिर भी गुजरात के सामने 164 का टारगेट

नरेंद्र मोदी स्टेडियम  पंजाब किंग्स ने रविवार को नरेंद्र मोदी स्टेडियम में पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 9 विकेट खोकर 163 रन बनाए। आईपीएल 2026 के 46वें मुकाबले में पहले बैटिंग करने उतरी पंजाब किंग्स की टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम ने पहले ही ओवर में दो विकेट गंवा दिए। प्रियांश आर्या दो और कूपर कोनली बिना खाता खोले आउट हुए। मोहम्मद सिराज पहले ओवर में हैट्रिक से चूक गए। छठे ओवर में प्रभसिमरन सिंह 14 गेंद में 15 रन बनाकर आउट हुए। नेहल वढेरा भी खाता नहीं खोल सके। कप्तान श्रेयस अय्यर 21 गेंद में 19 रन बनाकर पवेलियन लौटे। सूर्यांश शेडगे ने 29 गेंद में 57 रन की पारी खेली। इस दौरान सूर्यांश ने तीन चौके और पांच छक्के मारे। मार्कस स्टायनिस ने 31 गेंद में 40 रन का योगदान दिया। जेवियर का खाता नहीं खुला। गुजरात टाइटंस और पंजाब किंग्स की टीमें रविवार को आईपीएल 2026 के डबल हेडर के दूसरे मुकाबले में आमने-सामने हैं। गुजरात के कप्तान शुभमन गिल ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है। टाइटंस ने निशांत सिंधू को पदार्पण का मौका दिया है, जबकि पंजाब किंग्स की शुरुआती एकादश में जेवियर बार्टलेट की वापसी हुई है। श्रेयस अय्यर के नेतृत्व में पंजाब किंग्स की टीम लगातार मुकाबले जीतते हुए आ रही है और अब तक टीम ने सिर्फ एक मुकाबला गंवाया है। पंजाब ने 8 मैच खेलते हुए 6 मैच जीते हैं और पॉइंट्स टेबल में टॉप पर हैं। दूसरी तरफ गुजरात टाइटंस की टीम में निरंतरता की कमी दिखी है। शुभमन गिल के नेतृत्व में टीम ने 9 मैच खेलते हुए 5 मैच जीते हैं, जबकि 4 गंवाए हैं। गुजरात टेबल में 5वें स्थान पर है। GT vs PBKS मैच में किसने जीता टॉस गुजरात टाइटंस के कप्तान शुभमन गिल ने रविवार को नरेंद्र मोदी स्टेडियम में पंजाब किंग्स के खिलाफ टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है। गुजरात-पंजाब प्लेइंग इलेवन गुजरात टाइटंस (प्लेइंग इलेवन): शुभमन गिल (कप्तान), साई सुदर्शन, जोस बटलर (विकेट कीपर), वॉशिंगटन सुंदर, निशांत सिंधु, जेसन होल्डर, राशिद खान, अरशद खान, कागिसो रबाडा, मोहम्मद सिराज, मानव सुथार पंजाब किंग्स (प्लेइंग इलेवन): प्रभसिमरन सिंह (विकेट कीपर), प्रियांश आर्य, कूपर कोनोली, श्रेयस अय्यर (कप्तान), मार्कस स्टोइनिस, सूर्यांश शेडगे, नेहाल वढेरा, मार्को जेनसन, जेवियर बार्टलेट, अर्शदीप सिंह, युजवेंद्र चहल

प्रेमिका के इनकार से आहत युवक का हाई-वोल्टेज ड्रामा, 120 फीट ऊंचे टावर पर चढ़कर मचाया हंगामा

इटारसी रविवार को आदिवासी विकासखंड केसला के ग्राम जामुनडोल गांव के निवासी एक प्रेमी युवक ने अपनी प्रेमिका से हुए विवाद के बाद हाईवोल्टेज ड्रामा कर पूरे प्रशासन को हिलाकर रख दिया। प्रेमी युवक ने लोगों को 1975 के दशक में आई चर्चित फिल्म शोले के किरदार वीरू की याद दिला दी, जिसमें वीरू यानी धर्मेंद्र अपनी प्रेमिका बसंती (हेमा मालिनी) से शादी की जिद में एक पानी की टंकी पर चढ़ गए थे। केसला थाना प्रभारी मदन पवार के अनुसार रविवार सुबह गांव का युवक कमल पुत्र संतोष धुर्वे प्रेम प्रसंग में प्रेमिका से हुए विवाद में 125 केवी हाईटेंशन लाइन के करीब 120 फीट ऊंचे एनटीपीसी के टॉवर पर चढ़ गया था। ग्रामीणों से मिली सूचना के बाद केसला पुलिस, एनटीपीसी और एसडीईआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। करीब 5 घंटे की मशक्कत और प्रेमिका से बातचीत कराने के बाद टीम ने युवक को सुरक्षित नीचे उतार लिया। पांच घंटे चले इस घटनाक्रम की वजह से मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई थी।

ट्रंप का जर्मनी पर दोहरा हमला: सैनिकों की वापसी और कारों पर 25% टैरिफ का कड़ा फैसला

वाशिंगटन जर्मनी को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख एक बार फिर सख्त दिख रहा है. उन्होंने साफ कहा है कि जर्मनी में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या सिर्फ 5 हजार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे कहीं ज्यादा कटौती की जाएगी. यानी जो शुरुआत 5 हजार सैनिकों की वापसी से हो रही है, वो आगे और बड़ी हो सकती है. इससे पहले ट्रंप ने यूरोपीय यूनियन की कारों और ट्रकों पर 25% टैरिफ लगाने का भी ऐलान किया था, जिसका असर खासतौर पर जर्मनी पर पड़ सकता है।  देखा जाए तो ट्रंप की नाराजगी की वजह व्यापारिक समझौतों का सही से पालन न होना है. न्यूज एजेंसी एपी के मुताबिक, उन्होंने खुलेआम कहा है कि यूरोपीय संघ ने वादों को निभाया नहीं है, इसलिए अब अगले हफ्ते से वहां बनने वाली कारों और ट्रकों पर 25% टैक्स लगाया जाएगा. जर्मनी, जो गाड़ियों के निर्माण के लिए जाना जाता है, उसके लिए यह फैसला बड़ा झटका माना जा रहा है. असल में सारा मामला फ्लोरिडा में खुला, जहां पत्रकारों के सवाल पर ट्रंप ने दो-टूक कहा, '5 हजार का आंकड़ा तो बहुत छोटा है, हम इससे कहीं ज्यादा सैनिकों की छुट्टी करने वाले हैं और सेना में बड़ी कटौती करेंगे।  हैरानी की बात ये है कि खुद पेंटागन ने पहले सिर्फ 5 हजार सैनिकों की बात कही थी, लेकिन ट्रंप के इस ताजा बयान ने सबको सोच में डाल दिया है. अमेरिका के भीतर भी इस फैसले का विरोध शुरू हो गया है. कई बड़े नेताओं का मानना है कि अगर अमेरिकी सैनिक जर्मनी छोड़कर चले गए, तो रूस के राष्ट्रपति पुतिन को अपनी ताकत दिखाने का खुला मौका मिल जाएगा. खासकर तब, जब यूक्रेन और रूस की जंग को 5 साल पूरे होने वाले हैं।  क्या अकेले पड़ जाएंगे यूरोपीय देश? जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने इस पर बहुत ही शांत तरीके से जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि सैनिकों को वापस बुलाने की बात तो ट्रंप सालों से कर रहे थे, इसलिए ये कोई नई बात नहीं है. उनका मानना है कि अब यूरोप के देशों को खुद अपनी सुरक्षा के लिए आगे आना होगा और अपनी जिम्मेदारी खुद संभालनी होगी. हालांकि, उन्होंने ये भी याद दिलाया कि अमेरिकी सैनिकों का जर्मनी में होना सिर्फ हमारे लिए नहीं, बल्कि खुद अमेरिका के फायदे के लिए भी है।  पेंटागन की मानें तो इन सैनिकों की वापसी अगले 6 से 12 महीनों में पूरी कर ली जाएगी. फिलहाल जर्मनी में करीब 36,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जो वहां के बड़े मिलिट्री बेस और एयर बेस की सुरक्षा संभालते हैं. जानकारों का कहना है कि सैनिकों का जाना एक अलग बात है, लेकिन इससे जो दुनिया को मैसेज जाएगा वो काफी गंभीर हो सकता है. ट्रंप की ये नाराजगी ईरान के मामले में भी देखी जा रही है, जहां उन्हें लगता है कि यूरोपीय देशों ने उनका साथ नहीं दिया।  अब हर किसी की नजर इस बात पर है कि ट्रंप का ये 'हंटर' जर्मनी की तिजोरी और उसकी सुरक्षा पर कितना भारी पड़ता है. एक तरफ सैनिकों की घर वापसी का दबाव और दूसरी तरफ कारों पर 25% का तगड़ा टैक्स, ट्रंप ने साफ मैसेज दे दिया है कि अब वो 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति के लिए किसी भी समझौते के मूड में नहीं हैं. अब देखना ये होगा कि क्या इस फैसले के बाद यूरोप अपने दम पर अपनी सुरक्षा कर पाएगा या फिर उसे अमेरिका के आगे झुकना पड़ेगा?  

भारत की आत्मा बचाने में आदिवासी-सूचित समुदायों की अहम भूमिका: मोहन भागवत

नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत  ने कहा है कि जिस तरह से दुनिया इस समय डावांडोल हो रही है, वैश्विक उथल-पुथल मची है, ऐसे में सुदृढ़ एवं सबल भारत ही विश्व का आधार बन सकता है। इसके लिए भारत को सभी समाजों को साथ लेकर चलना होगा और आदिवासी और अनुसूचित जाति समुदायों ने भारत की आत्मा बचाई है. इन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास की मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी है. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि विदेशी आक्रमणों और तमाम कठिनाइयों के बावजूद आदिवासी समुदायों और अनुसूचित जातियों ने भारत की पहचान और उसकी आत्मा को संरक्षित रखा. संघ प्रमुख भागवत आज मुंबई के गेट वे ऑफ इंडिया पर आयोजित ‘कर्मयोगी एकल शिक्षक मेला’ में वनवासी इलाकों में शिक्षा का प्रसार करने वाले शिक्षकों को सम्मानित करने के अवसर पर बोल रहे थे। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अस्थिर विश्व में सुदृढ़ भारत ही आधार बन सकता है, जिसके लिए आदिवासी समाज को मुख्यधारा में लाना आवश्यक है। भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि मानव जीवन का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को वापस देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. उन्होंने आगे कहा कि भारतीय समाज की मूल भावना और मूल्य प्रणाली हजारों वर्षों से कायम है, जिसे अक्सर हिंदू समाज की पहचान के रूप में देखा जाता है. विदेशी आक्रमणकारियों ने भारत की असली ताकत उसकी सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को निशाना बनाया जो इन मूल्यों को जीवित रखे हुए थे. इसके बावजूद आदिवासी और अनुसूचित जाति समुदायों ने देश की आत्मा को बचाए रखा. भागवत शनिवार को मुंबई में आयोजित कर्मयोगी पुरस्कार समारोह में बोल रहे थे. इस कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी राज्य के आदिवासी विकास मंत्री प्रो. अशोक उइके और महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर भी मौजूद थे। उन्होंने आगे कहा कि वर्षों से आदिवासी समाज ने हमारी संस्कृति को संभाल कर रखा है और आदिवासी समाज हमें बहुत कुछ देता रहा है। उनकी यही प्रवृति भारत की सनातन संस्कृति की पहचान है और आदिवासियों ने सबका कल्याण करने की इसी प्रवृति को सहेज कर रखा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज में शिक्षा का यह प्रसार संवेदना से किया जाने वाला कार्य है। यह दया से नहीं, जी तोड़ मेहनत से संभव है। डॉ. भागवत ने कहा कि सामान्य तौर पर देश के आम लोगों को जो सुविधाएं मिलती है वो आदिवासी समाज को नहीं मिल पातीं। उन्हें देश के मुख्य प्रवाह में लाए बिना समाज का विकास नहीं हो सकता। समारोह में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि अब राजनीति की व्याख्या बदलने की जरूरत है। पावर पालिटिक्स या सत्ता पाना अब राजनीति नहीं है। राजनीति का अर्थ अब विकास और सामाजिक सेवा है। नागपुर स्थित ‘स्वर्गीय लक्ष्मणराव मानकर स्मृति संस्था’  अब तक विदर्भ में चलाए जा रहे एकल विद्यालयों को अब पूरे महाराष्ट्र में विस्तारित करने जा रही है। यह संस्था नितिन गडकरी के मार्गदर्शन और मुंबई के जाने-माने व्यवसायी अतुल शिरोडकर की अध्यक्षता में काम करती है।

स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा देने राज्य सरकार सदैव तत्पर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य शासन स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। राज्य में 10 हजार स्टार्टअप धारकों ने अपना पंजीयन कराया है। स्टार्टअप शुरू करने वालों को राज्य सरकार प्रतिमाह स्टाइफंड भी दे रही है। प्रदेश में चारों ओर उद्योगों का फैलाव हो, इसके लिए लगातार नवाचार किए जा रहे हैं। बाहर की कम्पनियों को निवेश के लिए औद्योगिक समिट के माध्यम से प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे युवाओं को रोजगार मिले और प्रदेश विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ता रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इंदौर जिले के महू में एक निजी कॉलेज में आयोजित प्लेसमेंट प्रोग्राम में युवाओं को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कॉलेज के उन युवाओं को प्लेसमेंट के प्रमाण-पत्र वितरित किए, जिनका प्लेसमेंट विभिन्न कम्पनियों में हुआ। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, विधायक सु उषा ठाकुर, कॉलेज के सेक्रेटरी  सुनील बंसल और  शरद त्रिवेदी विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों को आह्वान किया कि यदि हम किसी विषय को मन लगाकर गहराई से पढ़ते हैं, तो उसकी याददाश्त लम्बे समय तक बनी रहती है। अत: एकाग्रचित होकर अध्ययन करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिक्षक बनकर विद्यार्थियों से प्रश्न किए, तो वहीं विद्यार्थियों ने भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव से प्रश्न किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों से विज्ञान और राजनीति से जुड़े प्रश्न किए, तो वहीं विद्यार्थियों ने उद्योग और नवाचार को लेकर प्रश्न किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केवल पाठ्यक्रम तक ही विद्यार्थी स्वयं को सीमित न रखें, वह आगे भी अपना मनन और चिंतन जारी रखे। नये-नये नवाचार करें और स्वयं को भी परखें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्टार्टअप, गुरूत्वाकर्षण, ब्रह्माण्ड, नवाचार, निवेश आदि को विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने सुशीला देवी बंसल कॉलेज परिसर में आयोजित विज्ञान परियोजना प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विभिन्न वैज्ञानिक मॉडलों और प्रोजेक्ट के बारे में विद्यार्थियों से जानकारी प्राप्त की। साथ ही सामूहिक चित्र भी खिंचवाये। कार्यक्रम में कॉलेज के सचिव  सुनील बंसल ने बताया कि संस्था के इंदौर के अलावा भोपाल और मंडीदीप में भी कॉलेज है। अधिकांश विद्यार्थियों का प्लेसमेंट मध्यप्रदेश की कम्पनियों में ही हुआ है। इसका श्रेय राज्य सरकार को जाता है कि यहाँ लगातार नये उद्योग खुल रहे है और प्रदेश दिनों-दिन विकसित हो रहा है।  

शिक्षा में बड़ा बदलाव: मॉडल संस्कृति स्कूलों से फीस हटाने की योजना तैयार

चंडीगढ़. हरियाणा सरकार शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य के सभी 1638 मॉडल संस्कृति स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए निशुल्क शिक्षा लागू करने की तैयारी है। शिक्षा विभाग ने दाखिला शुल्क और मासिक फीस पूरी तरह समाप्त करने का प्रस्ताव तैयार करके सरकार को मंजूरी के लिए भेज दिया है। मंजूरी मिलते ही आगामी शैक्षणिक सत्र 2027-28 से बिना किसी शुल्क के प्रवेश और पढ़ाई की सुविधा मिलेगी। अब तक ली जाती है फीस इन स्कूलों में पहली से पांचवीं तक प्रवेश के लिए 500 रुपये व छठी से 12वीं तक 1000 रुपये शुल्क लिया जाता है। कक्षा के अनुसार हर महीने 200 रुपये से 500 रुपये तक फीस भी देनी पड़ती है। सेकेंडरी मॉडल संस्कृति स्कूल चल रहे हैं। इन स्कूलों में आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और भाषा पर विशेष ध्यान दिया जाता है। फीस समाप्त होने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ा लाभ मिलेगा। मॉडल संस्कृति स्कूलों की है अलग पहचान हरियाणा में मॉडल संस्कृति स्कूल योजना की शुरुआत वर्ष 2020 में की गई थी। ये स्कूल सामान्य सरकारी स्कूलों की तुलना में आधुनिक शिक्षा व्यवस्था, बेहतर आधारभूत सुविधाओं और भारतीय संस्कृति आधारित पाठ्यक्रम के लिए खास माने जाते हैं। यहां स्मार्ट कक्षाएं, अंग्रेजी माध्यम शिक्षा, गतिविधि आधारित पढ़ाई और भाषा-संस्कृति पर विशेष जोर दिया जाता है। इन स्कूलों में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ अनुशासन और संस्कार भी दिए जाते हैं। इन स्कूलों में पढ़ाने के लिए सरकारी शिक्षकों को भी टेस्ट पास करना पड़ता है।

यूपी में मौसम का कहर: 5 दिन तक बारिश के साथ तेज हवाएं और वज्रपात का अलर्ट, IMD ने दी चेतावनी

उतर प्रदेश उत्तर भारत में कई राज्यों में बारिश और आंधी का दौर चल रहा है। उत्तराखंड समेत तमाम राज्यों में तेज बारिश से मौसम बदला हुआ नजर आ रहा। उत्तर प्रदेश में पांच दिनों तक यानी कि तीन से सात मई और दिल्ली में तीन से पांच मई तक बारिश, आंधी, बिजली कड़कने का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने बताया है कि तीन से पांच मई के दौरान उप हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, पूर्वोत्तर भारत में गरज, बिजली कड़कने और तेज हवाओं जिनकी स्पीड 60 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है के साथ काफी भारी बारिश होने वाली है। इसमें से कुछ जगहों पर बहुत भारी बरसात होगी। इसके अलावा, तीन से पांच मई के दौरान उत्तर पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में छिटपुट से बिखरी हुई गरज, बारिश, बिजली कड़कने और 60 की स्पीड से हवाएं, व ओले गिरने की चेतावनी जारी की गई है। इस हफ्ते के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, केरल, माहे में छिटपुट से लेकर बिखरी हुई बारिश, बिजली कड़कने की संभावना है। पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय में तीन और चार मई को, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में तीन से पांच मई के दौरान, गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश होगी। इसके अलावा, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश में पांच से सात मई के दौरान, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में छह मई को बिजली गिरने की चेतावनी है। यूपी, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, हर जगह होगी बारिश उत्तर भारत के लिए मौसम विभाग ने कहा, 'तीन से पांच मई के दौरान, जम्मू कश्मीर में, तीन से सात मई के दौरान हिमाचल प्रदेश, तीन से आठ मई के दौरान उत्तराखंड में गरज, बिजली कड़कने और तेज हवाओं के साथ कहीं-कहीं बारिश और बर्फबारी होने वाली है। तीन से छह मई को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली में बारिश, बिजली कड़कने की संभावना है। इसके अलावा, 50 की स्पीड से हवाएं भी चलेंगी। तीन से सात मई के दौरान उत्तर प्रदेश में, तीन मई और पांच से सात मई के दौरान राजस्थान में गरज, बिजली कड़कने और आंधी के साथ मध्यम स्तर की बारिश होगी। चार मई को राजस्थान में, चार और पांच मई को पंजाब हरियाणा, चंडीगढ़ में गरज के साथ तेज हवाओं जिनकी स्पीड 70 किमी तक हो सकती है, की संभावना है। तीन और चार मई को जम्मू कश्मीर, तीन से पांच मई के दौरान हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में, तीन और चार मई को उत्तर प्रदेश में कहीं-कहीं ओले गिरने वाले हैं। बिहार-झारखंड में भी बारिश का अलर्ट चार मई को राजस्थान में धूलभरी आंधी चलने की भी संभावना है। इसके अलावा, चार मई को उत्तराखंड में भारी बारिश होगी। पूर्वी भारत के लिए IMD के अनुसार, छह और सात मई को पश्चिम बंगाल, सिक्किम में गरज, बिजली और तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश होगी। छह से नौ मई के दौरान बिहार, ओडिशा, तीन, छह और सात मई को झारखंड में गरज, बिजली और तेज हवाओं की संभावना है। तीन से पांच मई के दौरान पश्चिम बंगाल, सिक्किम, बिहार और ओडिशा में, चार और पांच मई को झारखंड में तूफानी हवाओं के साथ आंधी चलने की संभावना है।  

झारखंड में ट्रेन देरी पर सियासत गरम: हेमंत सोरेन ने रेल मंत्री को घेरा

 सरायकेला सरायकेला-खरसावां के चांडिल-टाटा रेल सेक्शन में ट्रेनों की लगातार हो रही लेट-लतीफी के मुद्दे को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उठाया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर सीधे रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को संबोधित करते हुए इस स्थिति को पूरी तरह ‘अस्वीकार्य’ बताया है. मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि पिछले दो वर्षों से इस महत्वपूर्ण रेल खंड पर यात्री ट्रेनें घंटों विलंब से चल रही हैं, जिससे आम जनता का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. मालगाड़ियों और पैसेंजर ट्रेनों के बीच भेदभाव का आरोप मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रेलवे की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए लिखा कि एक ही ट्रैक पर यात्री ट्रेनों को घंटों रोक कर रखा जाता है, जबकि मालगाड़ियों की आवाजाही बिना किसी बाधा के निर्बाध रूप से जारी रहती है. उन्होंने तीखा सवाल पूछते हुए एक्स पर लिखा कि क्या रेलवे के हिसाब से झारखंड के लोगों का समय भी उतना ही मूल्यवान है, जितना देश की अर्थव्यवस्था के लिए माल परिवहन?” आम जनता और श्रमिकों पर पड़ रहा बुरा असर ट्रेनों के समय पर न चलने के कारण सबसे अधिक परेशानी उन श्रमिकों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को हो रही है जो प्रतिदिन रोजगार और शिक्षा के लिए इस रेल खंड का उपयोग करते हैं. सीएम ने कहा कि यह केवल परिचालन से जुड़ा एक तकनीकी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश के नागरिकों की सुविधा और उनकी गरिमा से जुड़ा प्रश्न है. हजारों यात्रियों को घंटों स्टेशन पर इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनके काम के घंटे और शिक्षा दोनों प्रभावित हो रहे हैं. रेल मंत्री से तत्काल समाधान का आग्रह हेमंत सोरेन ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मांग की है कि चांडिल-टाटा सेक्शन में यात्री ट्रेनों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए. इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्र में लंबित रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरा करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया है. सीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि झारखंड के नागरिकों की सुविधा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और रेलवे को ट्रेन लेट होने की समस्या का तत्काल स्थायी समाधान सुनिश्चित करना चाहिए.

राजद की सीट बचाने की चुनौती, एनडीए 8–9 सीटों पर बढ़त के दावे में

पटना राज्य में होने वाले 9 विधान परिषद सदस्यों (एमएलसी) के चुनाव में क्या महागठबंधन तोड़फोड़ के जरिए नया गुल खिलाएगा? क्या कुछ समीकरण ऐसा बनेगा जिसके सहारे महागठबंधन के विधायक राजद के दो एमएलसी की पारी खत्म होने के बरक्स दो एमएलसी की सीटें हासिल कर सकें? क्या कुछ गणित बनने की संभावना है? क्या विपक्ष के बचे 16 विधायक अपने वोट का बलिदान करेंगे या फिर समीकरण की जद में कोई खेल रच पाएंगे? ऐसे कई सवाल एमएलसी की 9 सीटों के लिए होने वाले चुनाव के संदर्भ में उठने लगे हैं। राजद के लिए खोने का चुनाव ! जून 2026 में होने वाले बिहार विधान परिषद के आगामी चुनावों में राष्ट्रीय जनता दल के मौजूदा 2 एमएलसी मोहम्मद फारुक और सुनील कुमार सिंह का कार्यकाल समाप्त होने वाला है। 9 सीटों के होने वाले चुनाव के संदर्भ में माना जा रहा है कि एक सीट के लिए 25 विधायक की जरूरत होगी। वैसे में राजद के हिस्से में केवल एक सीट बचाने की क्षमता है। ऐसा इसलिए कि राजद के पास एक्यूरेट 25 विधायक हैं। लेकिन इन 25 विधायकों के अलावा विपक्ष के 16 विधायक शेष रह जाएंगे। अब सवाल उठता है कि राजद का हाल कहीं राज्यसभा चुनाव वाला न हो जाए? 41 विधायकों के रहते राजद के एडी सिंह चुनाव हार गए और एनडीए राज्यसभा की सभी पांचों सीटें जीत गई। एनडीए के निशाने पर 9 MLC सीटें? तोड़फोड़ के जरिए जीत के आदी हो चुके एनडीए के रणनीतिकार क्या कुछ राज्यसभा वाला गेम खेलने की रणनीति पर काम कर रहे हैं? वैसे अभी तक के गणित के अनुसार एनडीए आठ सीटों पर जीत के प्रति आश्वस्त है। एनडीए सूत्रों के अनुसार विधायकों की संख्या के अनुरूप वह विधान परिषद की रिक्त हो रही आठ सीटों का हकदार है। एक एमएलसी के लिए लगभग 25 विधायकों के वोट की जरूरत पड़ेगी। इस जोड़ से 8 एमएलसी की सीटें जीतने के लिए 200 विधायकों की जरूरत पड़ेगी। एनडीए के पास फिर भी 2 शेष रह जाएंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तीन-तीन एमएलसी सीटें जदयू और बीजेपी के हिस्से आएंगी। एक सीट लोजपा और एक सीट रालोमो के हिस्से में जाने की बात कही जा रही है। क्या 9 वीं सीट को लेकर मचेगा धमाल? राज्यसभा चुनाव में सेंधमारी करने में सफल एनडीए के रणनीतिकार क्या कोई गुल खिला सकते हैं। राजद की बात करें तो राज्यसभा चुनाव में एक विधायक बागी हो गए थे। कांग्रेस के तीन विधायकों ने भी अलग राह पकड़ी थी। क्या एआईएमआईएम के 5, कांग्रेस के छह, वाम दल के तीन बसपा के एक और आईपी गुप्ता कुल 16 विधायकों की भूमिका में कुछ उलट पुलट की संभावना है? या एनडीए किसी धनपशु के बहाने 9 वीं सीट के लिए कोई बाजी खेल जाए? क्या राजद को समर्थन देने वाले एआईएमआईएम को वादे के अनुसार एमएलसी की एक सीट देगी या फिर दूसरी सीट का गणित उलझाने के लिए एआईएमआईएम कोई उम्मीदवार खड़ा करेगा? ऐसे कई अनुत्तरित सवाल हैं। राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं कब कौन किसका साथ दे, कौन साथ छोड़ दे, कोई नहीं कह सकता है!