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स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल की मौजूदगी में समाधान शिविर में सैकड़ों मुद्दों का तुरंत निवारण

संवाद से संपूर्ण समाधान शिविर बना जनविश्वास का केंद्र, स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल की मौजूदगी में सैकड़ों समस्याओं का त्वरित निराकरण मनेन्द्रगढ़/एमसीबी छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी पहल “सुशासन तिहार 2026” के अंतर्गत विकासखंड खड़गवां के ग्राम मझौली में आयोजित “गांव-गांव, द्वार-द्वार सुशासन तिहार जनसमस्या निवारण शिविर संवाद से संपूर्ण समाधान कार्यक्रम में जनसैलाब उमड़ पड़ा। प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने वाले इस विशाल शिविर में ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही निराकरण कर शासन ने संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासन की मिसाल पेश की। ग्राम पंचायत अखराडांड, बरमपुर, मझौली, भूकभूकी, दुबछोला, ठग्गांव, दुग्गी, सिंघत, खड़गवां और पोडीडीह सहित कुल 10 ग्राम पंचायतों को शामिल करते हुए आयोजित इस शिविर में सुबह से ही बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याएं और आवेदन लेकर पहुंचे। शिविर ने “समाधान आपके द्वार” की अवधारणा को साकार करते हुए लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत दिलाई। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, जिला पंचायत सदस्य प्रिया मसराम, जनपद सदस्य श्यामबाई मरकाम, उपाध्यक्ष बीरेन्द्र सिंह करियाम, जनपद सदस्य इंद्रावती सिंह, धर्मपाल सिंह, सोनमती उर्रे सहित जनप्रतिनिधियों द्वारा छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। शुभारंभ के साथ ही पूरे शिविर परिसर में उत्साह, जनभागीदारी और भरोसे का वातावरण देखने को मिला। शिविर में एसडीएम विज्येन्द्र सारथी, जनपद सीईओ हेमंत बंजारे, तहसीलदार सिद्धि गबेल, सीपीएस दीपिका मिंज, सीएचएमओ अविनाश खरे सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी ने यह संदेश दिया कि शासन अब जनता की समस्याओं के समाधान के लिए गांव-गांव पहुंच रहा है। शिविर स्थल पर स्वास्थ्य, राजस्व, ग्रामीण यांत्रिकी, समाज कल्याण, कृषि, उद्यानिकी, वन, खाद्य, पुलिस, बिजली, लोक निर्माण, आयुष्मान कार्ड, महिला एवं बाल विकास, पशु चिकित्सा, पेयजल, बैंकिंग सेवाएं, आधार सेवा, मनरेगा और सामाजिक सुरक्षा सहित विभिन्न विभागों के आकर्षक एवं सुव्यवस्थित स्टॉल लगाए गए थे। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सभी स्टॉलों का निरीक्षण कर अधिकारियों को आमजन की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक संवेदनशीलता की झलक भी देखने को मिली, जब जनप्रतिनिधियों द्वारा गर्भवती महिलाओं बबीता, कदम कुंवर, रजंती, रोशनी, पप्पी, ममता, मानसी, सविता और उर्मिला की गोद भराई की रस्म संपन्न कराई गई। इससे शिविर केवल प्रशासनिक आयोजन न रहकर सामाजिक सरोकार का भी केंद्र बन गया। जनसमस्या निवारण शिविर में कुल 392 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। स्वास्थ्य मंत्री द्वारा छह हितग्राहियों को राशन कार्ड, आठ हितग्राहियों को वन अधिकार पट्टा, पांच लोगों को जाति प्रमाण पत्र, अठारह किसानों को किसान किताब, पांच हितग्राहियों को आवास की चाबी, पांच लोगों को आयुष्मान कार्ड तथा सात लोगों को नवीन जॉब कार्ड वितरित किए गए। इसके अलावा दो क्षय रोगियों को फूड बास्केट भी प्रदान किया गया। कई आवेदनों का मौके पर ही निराकरण कर ग्रामीणों को तत्काल राहत दी गई, जबकि शेष आवेदनों को समय-सीमा में समाधान हेतु संबंधित विभागों को सौंपा गया। अपने संबोधन में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में सुशासन की नई संस्कृति विकसित हुई है। उन्होंने कहा कि अब सरकार केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और मौके पर समाधान कर रही है। उन्होंने “सुशासन तिहार 2026” को जनहित, जवाबदेही और संवेदनशील प्रशासन की मिसाल बताते हुए कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गरीबों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए लगातार ऐतिहासिक फैसले ले रही है। स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पेयजल, राशन, आवास और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है। स्वास्थ्य मंत्री ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सरल व्यक्तित्व, संवेदनशील कार्यशैली और जनसेवा के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आने वाले समय में सुशासन और विकास का आदर्श राज्य बनकर उभरेगा। कार्यक्रम के अंत में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व विज्येन्द्र सारथी ने बताया कि शिविर में प्राप्त 392 से अधिक आवेदनों में से कई का मौके पर ही निराकरण कर हितग्राहियों को राहत प्रदान की गई है, जबकि शेष लंबित मामलों के त्वरित समाधान के लिए संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया है। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप प्रत्येक आवेदन का गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। कार्यक्रम में हृदय सिंह, रमेश जायसवाल, अशोक खरे, शंकर प्रताप गुप्ता, रामलाल साहू, हरबंस साहू, सतेन्द्र साहू, मनोज साहू, अंगद, सरपंच सुश्री जया सिंह मरावी, श्रीमती तुला, कुन्ती सिंह, सोनिया सिंह, सुनीता, रामबाई, संत कुमार सिंह, सुखीत लाल अगरिया, हरि सिंह, सचिव श्रीमती सुन्दर लली, उर्मिला, यशोदा, अनुराग दुबे, अशोक पाण्डेय, सीता सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

स्मार्ट मीटर अब पोस्टपेड मोड में, संचालन के आदेश जारी

स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड मोड में संचालित करने के आदेश जारी प्रदेश में समाप्त हुई स्मार्ट प्री-पेड मीटर व्यवस्था: ऊर्जा मंत्री   आरडीएसएस योजना के अंतर्गत लगे स्मार्ट मीटर तत्काल प्रभाव से होंगे पोस्टपेड उपभोक्ताओं को जून से मिलेगी पोस्टपेड बिलिंग सुविधा, स्मार्ट पोस्टपेड बिल हर माह 10 तारीख तक जारी होंगे अब सभी नए बिजली कनेक्शन स्मार्ट पोस्टपेड मोड में होंगे जारी 15 मई से 30 जून तक लगाए जाएंगे स्मार्ट मीटर शिकायत निस्तारण कैंप उपभोक्ता हित में लगातार फैसले ले रही योगी सरकार: ए.के. शर्मा लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश भर में लगे सभी स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड मोड में संचालित करने के आदेश जारी कर दिए हैं। ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने बताया कि आरडीएसएस योजना के तहत लगाए गए सभी स्मार्ट मीटर तत्काल प्रभाव से पोस्टपेड प्रणाली में बदले जा रहे हैं। इसके बाद उपभोक्ताओं को बिजली इस्तेमाल करने के बाद बिल मिलेगा। मई 2026 की खपत का बिल जून 2026 में पोस्टपेड प्रणाली के तहत जारी किया जाएगा। ऊर्जा मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने आम विद्युत उपभोक्ताओं की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रदेश में संचालित स्मार्ट प्री-पेड मीटर व्यवस्था को समाप्त कर सभी स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड मोड में संचालित करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं। पूर्वांचल, मध्यांचल, दक्षिणांचल, पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगमों और केस्को कानपुर में लागू यह व्यवस्था उपभोक्ताओं को बड़ी राहत प्रदान करेगी।  ऊर्जा मंत्री ने कहा कि उपभोक्ताओं को बिल एसएमएस और व्हाट्सएप के जरिये उपलब्ध कराया जाएगा। स्मार्ट पोस्टपेड बिल प्रत्येक माह की 10 तारीख तक जारी किए जाएंगे। जिन क्षेत्रों में नेटवर्क अथवा संचार संबंधी समस्या के कारण स्मार्ट मीटर की ऑटोमैटिक रीडिंग प्राप्त नहीं होगी, वहां एएमआईएसपी एजेंसियों के माध्यम से मैनुअल रीडिंग लेकर समय से बिल उपलब्ध कराया जाएगा। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि जिन उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबर सिस्टम में पंजीकृत नहीं हैं या गलत दर्ज हैं, उनके लिए डिस्कॉम स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। साथ ही उपभोक्ता संबंधित विद्युत वितरण निगम के व्हाट्सएप चैटबॉट एवं 1912 हेल्पलाइन के माध्यम से भी अपना बिल प्राप्त कर सकेंगे। प्रदेश में अब सभी नए विद्युत संयोजन स्मार्ट पोस्टपेड मोड में ही जारी किए जाएंगे। पूर्व में प्री-पेड व्यवस्था लागू होने के दौरान समायोजित की गई सुरक्षा धनराशि को अब विद्युत प्रदाय संहिता-2005 एवं कॉस्ट डाटा बुक-2026 के प्रावधानों के अनुसार चार समान मासिक किस्तों में उपभोक्ताओं के बिलों में जोड़ा जाएगा। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि पोस्टपेड उपभोक्ताओं को पूर्व की भांति बिल जारी होने की तारीख से 15 दिन का भुगतान समय और उसके बाद 7 दिन की डिस्कनेक्शन अवधि प्रदान की जाएगी। निर्धारित समय तक भुगतान न होने पर विद्युत प्रदाय संहिता एवं टैरिफ आदेश के अनुसार विलंब अधिभार लागू होगा। घरेलू उपभोक्ताओं को विशेष राहत देते हुए 30 अप्रैल 2026 तक के बकाया विद्युत बिल को 10 आसान किस्तों में जमा करने की सुविधा प्रदान की गई है। जबकि अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं को 40, 30 और 30 प्रतिशत की तीन किस्तों में भुगतान की सुविधा मिलेगी। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि स्मार्ट मीटर एवं बिजली बिलों से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए 15 मई 2026 से 30 जून 2026 तक अधिशासी अभियंता एवं उपखंड अधिकारी कार्यालयों पर विशेष कैंप एवं सहायता केंद्र लगाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त 1912 हेल्पलाइन पर भी विशेष व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है, ताकि उपभोक्ताओं की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके।

वर्षों से लापता लोगों की तलाश में जुटी एमसीबी पुलिस, आमजन से मांगा सहयोग

वर्षों से लापता लोगों की तलाश में जुटी एमसीबी पुलिस, आमजन से मांगा सहयोग बुजुर्ग महिला से लेकर युवाओं तक के कई मामलों में अब तक नहीं मिला सुराग, पुलिस ने जारी किए संपर्क नंबर मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिले में वर्षों से लापता लोगों की तलाश को लेकर मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर पुलिस ने अभियान तेज कर दिया है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा आम नागरिकों से अपील की गई है कि यदि किसी भी गुमशुदा व्यक्ति के संबंध में कोई जानकारी मिले तो तत्काल पुलिस को सूचित करें, ताकि उन्हें सुरक्षित उनके परिजनों तक पहुंचाया जा सके। पुलिस के अनुसार थाना चिरमिरी क्षेत्र से वर्ष 2020 में लापता हुई 75 वर्षीय श्रीमती कुसुमनी पति संतोष कुमार राय निवासी गोदरीपारा, चालिस घोड़ा का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। बताया गया कि 24 नवंबर 2020 की रात वे घर से बिना बताए कहीं चली गई थीं। परिजनों ने आसपास के क्षेत्रों एवं रिश्तेदारों के यहां काफी तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी। इसी तरह वर्ष 2019 में थाना चिरमिरी में दर्ज एक अन्य मामले में 20 वर्षीय विक्रम पिता सची शंकर निवासी छोटी बाजार, दलगंजन दफाई भी अचानक घर से लापता हो गया था। परिवार द्वारा लगातार खोजबीन किए जाने के बावजूद युवक का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। वहीं तीसरे मामले में 26 वर्षीय श्रीमती जयमती सारथी पति बहादुर सारथी निवासी परसिया थाना ओड़गी जिला सूरजपुर वर्ष 2020 से लापता हैं। जानकारी के अनुसार पारिवारिक विवाद के बाद वे घर से निकल गई थीं, जिनकी तलाश लगातार जारी है। इसी कड़ी में थाना चिरमिरी क्षेत्र से वर्ष 2020 में लापता हुई 82 वर्षीय वृद्ध महिला खिरो नायक का मामला भी पुलिस के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। गुम इंसान क्रमांक 15/2020 के तहत दर्ज मामले में खिरो नायक, पति स्वर्गीय धनु नायक निवासी हरीनगर ईवाई हल्दीबाड़ी थाना चिरमिरी, 19 अगस्त 2020 को दोपहर करीब 12 बजे घर से बिना बताए कहीं चली गई थीं। परिजनों द्वारा काफी खोजबीन के बाद 21 अगस्त 2020 को थाना चिरमिरी में गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। एमसीबी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि गुमशुदा व्यक्तियों की तलाश उनकी प्राथमिकता में शामिल है और सभी थाना एवं चौकी प्रभारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। पुलिस प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को इन गुमशुदा लोगों के संबंध में कोई भी जानकारी प्राप्त होती है तो तत्काल पुलिस को सूचित करें। संपर्क हेतु पुलिस अधीक्षक एमसीबी – 9479194855, सीएसपी चिरमिरी – 9479193703, थाना चिरमिरी – 9479193709 तथा कंट्रोल रूम – 9479160180 पर जानकारी दी जा सकती है।

डीजीपी ने एनसीआरबी आंकड़ों को बताया यूपी की मजबूत कानून-व्यवस्था का प्रमाण

एनसीआरबी के आंकड़े यूपी की मजबूत कानून-व्यवस्था की गवाही: डीजीपी राष्ट्रीय क्राइम रेट से काफी कम रहा यूपी का क्राइम रेट अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति धरातल पर उतरी लखनऊ  पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने कहा है कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की वर्ष 2024 रिपोर्ट निर्विवाद रूप से स्थापित करती है कि क्राइम रेट ही विभिन्न राज्यों के बीच अपराध की तुलना का एकमात्र वैज्ञानिक और सांख्यिकीय दृष्टि से उचित आधार है। राष्ट्रीय क्राइम रेट 252.3 के मुकाबले उत्तर प्रदेश का क्राइम रेट मात्र 180.2 है। यह सुधार सतत और सुविचारित प्रयासों का प्रतिफल है। यह साबित करता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में अपराध व अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति कागज़ों से निकलकर धरातल पर उतरी है।  कठोर कार्रवाई से स्थापित किया कानून-व्यवस्था का राज पुलिस महानिदेशक ने कहा कि गत 9 वर्षों में आधुनिक पुलिस स्टेशन, सतर्क एंटी-रोमियो स्क्वॉड, हर थाने पर समर्पित महिला हेल्प डेस्क, कमज़ोर वर्गों को त्वरित न्याय दिलाने वाले फास्ट-ट्रैक कोर्ट और संगठित अपराधों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई ने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था का राज स्थापित किया है। एनसीआरबी के आंकड़े इसी की गवाही देते हैं। छोटी से छोटी शिकायत का संज्ञान लेती है यूपी पुलिस पुलिस महानिदेशक ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कोई भी व्यक्ति बिना किसी भय-संकोच के पुलिस थाने जाकर शिकायत दर्ज करा सकता है। उत्तर प्रदेश पुलिस इसके प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। हम डिजिटल माध्यमों पर भी आई छोटी से छोटी शिकायत का संज्ञान लेते हैं और जहां भी उचित हो, उसे एफआईआर में परिवर्तित करते हैं। अधिक पंजीकरण एक अधिक संवेदनशील, सुलभ और पारदर्शी पुलिस बल की पहचान है। यही वह संस्कृति है, जिसका निर्माण उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विज़न के तहत कर रही है।

रायपुर कार्यक्रम के दौरान अनूपपुर में हुआ राष्ट्रीय अध्यक्ष का हुआ स्वागत

रायपुर कार्यक्रम के दौरान अनूपपुर में हुआ राष्ट्रीय अध्यक्ष का हुआ स्वागत अनूपपुर  राष्ट्रीय स्वर्णकार समाज राजनीतिक एवं भागीदारी मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जीतेंद्र वर्मा स्वर्णकार जी का रायपुर से कार्यक्रम वापस के दौरान अनूपपुर स्टेशन पहुंचने पर काफी संख्या में स्वर्णकार समाज के लोगों द्वारा स्वागत वंदन अभिनंदन कर स्वर्णकार समाज को आगे बढ़ाने की दिशा में चर्चा की गई इस दौरान स्वर्णकार समाज के काफी संख्या में लोग मौजूद थे जिसमें मुख्य रूप से श्री डल्लू कुमार सोनी राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति ने मुलाकात की इस दौरान विनय कुमार सोनी एडवोकेट जिला अध्यक्ष अनूपपुर,ओमप्रकाश सोनी वरिष्ठ समाजसेवी एवं जिला अध्यक्ष अनूपपुर अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति के साथ अन्य पदाधिकारी ने की राष्ट्रीय अध्यक्ष का पुष्पकुंज से स्वागत कर उनसे मुलाकात की.

KL Rahul बनाम Sunil Narine: अरुण जेटली में कौन मारेगा बाजी?

नई दिल्ली साउथ-ईस्ट दिल्ली के सरिता विहार इलाके में बीती रात पुलिस और बदमाशों के बीच एकनाउंटर हुआ। दोनों ओर से 6 राउंड गोलियां चलीं। हालांकि गोली किसी को नहीं लगी। इसके बाद पुलिस ने 6 बदमाशों को पकड़ा। ये सभी बांग्लादेशी हैं। जो यहां डकैती की वारदात करते थे। खबर लिखे जाने तक आरोपियों से पूछताछ की जा रही थी। पुलिस सूत्र ने बताया कि क्राइम ब्रांच की एंटी एक्सटॉर्शन किडनैपिंग सेल टीम को सूचना मिली थी कि सरिता विहार इलाके में कुछ बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहे हैं। सूचना के आधार पर क्राइम ब्रांच की टीम उन्हें पकड़ने पहुंची थी। टीम ने मौके पर घेराबंदी कर बदमाशों को पकड़ने की कोशिश की तो उन्होंने आत्मसमर्पण करने के बजाय पुलिस पार्टी पर फायरिंग शुरू कर दी। 6 बांग्लादेशी बदमाशों को दबोचा बदमाशों की ओर से कुल तीन राउंड फायर किए गए। आत्मरक्षा और अपराधियों को काबू करने के लिए पुलिस टीम ने भी जवाबी कार्रवाई में तीन राउंड गोलियां चलाईं। गनीमत रही कि इस गोलाबारी में पुलिस टीम का कोई भी सदस्य या आरोपी घायल नहीं हुआ। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए सभी छह बांग्लादेशी बदमाशों को दबोच लिया। बड़ी संभावित वारदात को टली तलाशी के दौरान बदमाशों के पास से तीन देसी कट्टे, 1 देसी 12 बोर की बंदूक, पांच कारतूस और एक बटनदार चाकू बरामद हुआ। पकड़े गए सभी आरोपी मूल रूप से बांग्लादेश के रहने वाले बताए जा रहे हैं। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि ये लोग कब से दिल्ली में रह रहे थे और इनके तार किन-किन वारदातों से जुड़े हैं। साथ ही, इनके अवैध रूप से सीमा पार करने और स्थानीय संपर्कों की भी जांच की जा रही है। दावा किया जा रहा है कि सफल ऑपरेशन ने इलाके में एक बड़ी संभावित वारदात को टाल दिया है।  

उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा का रिजल्ट जारी, योगी सरकार में भर्ती प्रक्रिया रही पारदर्शी

योगी सरकार में पारदर्शी भर्ती, उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा का परिणाम जारी 15 लाख से अधिक अभ्यर्थियों का इंतजार खत्म, 12,333 अभ्यर्थी अगले चरण के लिए सफल घोषित डीवी/पीएसटी की प्रक्रिया मई के तीसरे सप्ताह में होगी आयोजित  14 और 15 मार्च 2026 को चार पालियों में आयोजित हुई थी परीक्षा लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया का एक और बड़ा उदाहरण सामने आया है। गुरुवार को उप निरीक्षक नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया गया है। 4543 पदों के लिए आयोजित इस भर्ती प्रक्रिया में 15,75,760 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। परिणाम जारी होने के साथ ही लाखों युवाओं का इंतजार खत्म हो गया है। 12,333 अभ्यर्थी अगले चरण के लिए सफल घोषित उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने नियमावली और निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा परिणाम घोषित किया है। परीक्षा 14 और 15 मार्च 2026 को चार पालियों में आयोजित की गई थी। पूरी प्रक्रिया अपनाते हुए प्रत्येक विषय में न्यूनतम 35 प्रतिशत और कुल 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों में से मेरिट और आरक्षण के आधार पर 12,333 अभ्यर्थियों को अभिलेख सत्यापन एवं शारीरिक मानक परीक्षण (डीवी/पीएसटी) के लिए सफल घोषित किया गया है। निष्पक्ष और समयबद्ध भर्ती से युवाओं में बढ़ा भरोसा योगी सरकार में भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी, तकनीकी रूप से मजबूत और समयबद्ध बनाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। यही वजह है कि युवाओं का सरकारी भर्तियों के प्रति भरोसा मजबूत हुआ है। भर्ती बोर्ड के मुताबिक, डीवी/पीएसटी की प्रक्रिया मई के तीसरे सप्ताह में आयोजित की जाएगी। इसकी पूरी जानकारी जल्द ही बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी।

योगी सरकार की कड़ी नीतियों से पर्यटन परियोजनाओं में होगी तेजी, नवंबर तक मिलेंगे ठोस नतीजे

योगी सरकार की सख्ती से पर्यटन परियोजनाओं में आएगी तेजी, नवंबर तक धरातल पर दिखेंगे परिणाम पर्यटन विकास को नई रफ्तार, अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं में बढ़ी जवाबदेही  ऐतिहासिक स्थलों और हेलीपोर्ट परियोजनाओं पर विशेष फोकस, पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को दिए निर्देश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में उत्तर प्रदेश में पर्यटन और संस्कृति क्षेत्र तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में लखनऊ स्थित पर्यटन भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी स्वीकृत परियोजनाओं की टेंडर प्रक्रिया 20 मई 2026 तक पूरी कर स्वीकृत पत्र जारी किए जाएं। साथ ही निर्माणाधीन परियोजनाओं को 20 नवंबर 2026 तक हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप विकास कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि फाइलों को लटकाने और काम में लापरवाही की संस्कृति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को समय से पूरा करने पर जोर पर्यटन मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को तय समय सीमा के भीतर पूरा करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि नवंबर 2026 तक प्रदेश में चल रही परियोजनाओं का परिणाम जमीन पर दिखाई देना चाहिए, ताकि इनका लोकार्पण कर जनता को समर्पित किया जा सके। बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि मुख्यालय से अधिकारी समय-समय पर स्थलीय निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण टीम फोटोग्राफर के साथ मौके पर जाकर कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता का भौतिक सत्यापन करेगी। इससे परियोजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और कार्यों में तेजी आएगी। मंत्री ने कहा कि सरकार केवल कागजी कार्रवाई नहीं बल्कि धरातल पर परिणाम चाहती है। उन्होंने अधिकारियों को पत्राचार के बजाय समाधान आधारित कार्यशैली अपनाने के निर्देश दिए। पर्यटन स्थलों के विकास से बढ़ेगा प्रदेश का गौरव समीक्षा बैठक में आगरा और मथुरा में हेलीपोर्ट परियोजनाओं को क्रियान्वित करने के निर्देश भी दिए गए। वहीं भारत सरकार स्तर पर लंबित योजनाओं की समीक्षा करते हुए स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत नैमिषारण्य में प्रस्तावित कार्यों को जल्द शुरू करने पर जोर दिया गया। इसके अलावा ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के स्थलों के इतिहास लेखन और शिलालेख संबंधी कार्यों को स्थापित प्रक्रिया के अनुसार संचालित करने के निर्देश दिए गए। जिला महोत्सवों को जनपद स्थापना दिवस के अवसर पर भव्य रूप से आयोजित करने पर भी विशेष बल दिया गया। वहीं वर्ष 2017 से अब तक पर्यटन और संस्कृति विभाग द्वारा कराए गए कार्यों, उनकी लागत, स्वीकृत धनराशि और प्रगति की जनपदवार रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिससे विकास कार्यों की प्रभावी निगरानी हो सके। पारदर्शिता और जवाबदेही पर योगी सरकार का फोकस बैठक में अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कार्यदायी संस्थाओं को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि परियोजनाओं को पूरा करने में किसी प्रकार की हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने भुगतान प्रक्रिया के लिए समय सारिणी तय करने के निर्देश दिए, ताकि कार्यदायी संस्थाओं को समय पर भुगतान हो सके और परियोजनाएं प्रभावित न हों। पर्यटन मंत्री ने नकारा और कार्य में रुचि न लेने वाले ठेकेदारों को सिस्टम से बाहर करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि योगी सरकार की प्राथमिकता पारदर्शी व्यवस्था, जवाबदेही और तेज विकास है।  बैठक में विशेष सचिव पर्यटन मृदुल चौधरी, प्रबंध निदेशक यूपीएसटीडीसी आशीष कुमार, निदेशक इको पर्यटन पुष्प कुमार के., विशेष सचिव संस्कृति संजय कुमार सिंह, पर्यटन सलाहकार जे.पी. सिंह, क्षेत्रीय पर्यटक अधिकारी अंजू चौधरी, संयुक्त निदेशक प्रीति श्रीवास्तव, प्रचार अधिकारी कीर्ति एवं कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

ममता कैबिनेट बर्खास्त, विधानसभा पर राज्यपाल का वीटो प्रभाव

कलकत्ता पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा संवैधानिक संकट तब खड़ा हो गया, जब राज्यपाल आर.एन. रवि ने अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए मंत्रिमंडल को बर्खास्त कर दिया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफ़ा देने से इनकार करने के बीच, राज्यपाल ने अपनी संवैधानिक वीटो शक्ति का प्रयोग करते हुए राज्य विधानसभा को भंग करने की अधिसूचना जारी कर दी। यह ऐतिहासिक निर्णय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत लिया गया। राज्यपाल के निर्देश पर मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला द्वारा जारी इस आदेश के बाद, राज्य सरकार का अस्तित्व प्रभावी रूप से समाप्त हो गया है। राज्यपाल के इस कड़े कदम से बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में हलचल मच गई है, जिसके परिणामस्वरूप मंत्रिमंडल और विधानसभा, दोनों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय बड़ा संवैधानिक संकट खड़ा हो गया, जब राज्यपाल आर. एन. रवि ने अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कैबिनेट को बर्खास्त कर दिया. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार के बीच राज्यपाल ने संवैधानिक वीटो का इस्तेमाल करते हुए 7 राज्य विधानसभा को भंग करने की अधिसूचना जारी कर दी है. यह ऐतिहासिक निर्णय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत लिया गया है. मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला द्वारा राज्यपाल के निर्देशों पर जारी इस आदेश के बाद राज्य सरकार का वजूद समाप्त हो गया है. राज्यपाल के इस कड़े कदम ने बंगाल की सियासत में खलबली मचा दी है, जिससे कैबिनेट और विधानसभा दोनों तत्काल प्रभाव से भंग कर दी गई हैं।  अनुच्छेद 174(2)(b) और बंगाल का अभूतपूर्व संकट यह पूरी कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के इर्द-गिर्द घूमती है. यह अनुच्छेद राज्यपाल को राज्य विधानसभा को भंग करने की शक्ति प्रदान करता है. आमतौर पर राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर ऐसा करते हैं लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में जब सरकार और राजभवन के बीच टकराव चरम पर था, राज्यपाल ने इस वीटो जैसी शक्ति का इस्तेमाल कर ममता सरकार के अस्तित्व को ही समाप्त कर दिया. मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला द्वारा जारी अधिसूचना स्पष्ट करती है कि यह निर्णय राजभवन के सीधे आदेश पर लिया गया है जो राज्य में गहरे राजनीतिक और प्रशासनिक गतिरोध का संकेत है।  पश्चिम बंगाल गवर्नर के आदेश के मुख्‍य प्‍वाइंट्स · ऐतिहासिक बर्खास्तगी: राज्यपाल आर. एन. रवि ने ममता बनर्जी की कैबिनेट को बर्खास्त कर 7 मई, 2026 से विधानसभा भंग करने की घोषणा की है।  · संवैधानिक आधार: इस पूरी कार्रवाई को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत अंजाम दिया गया है, जो राज्यपाल को विधानसभा भंग करने का अधिकार देता है।  · अधिसूचना जारी: मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला ने आधिकारिक आदेश जारी कर बताया कि यह निर्णय राज्यपाल के निर्देशों पर तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।  · संवैधानिक संकट: ममता बनर्जी द्वारा पद छोड़ने से इनकार के बाद यह कदम उठाया गया, जिससे राज्य में निर्वाचित सरकार का शासन समाप्त हो गया है।  · आगे का रास्ता: विधानसभा भंग होने के बाद अब राज्य में राष्ट्रपति शासन या जल्द चुनाव की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं।  सवाल-जवाब राज्यपाल ने किस संवैधानिक शक्ति के तहत पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग किया है? राज्यपाल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग किया है।  पश्चिम बंगाल गवर्नर का आदेश किस तारीख से प्रभावी माना जाएगा? मुख्य सचिव द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, विधानसभा भंग करने और कैबिनेट बर्खास्त करने का यह निर्णय 7 मई, 2026 से प्रभावी हो गया है।  क्या मुख्यमंत्री की सलाह के बिना विधानसभा भंग की जा सकती है? सामान्यतः राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर काम करते हैं, लेकिन असाधारण परिस्थितियों या संवैधानिक विफलता की स्थिति में राज्यपाल अनुच्छेद 174 के तहत स्वविवेक का प्रयोग कर सकते हैं।  मुख्य सचिव की पश्चिम बंगाल के गवर्नर के आदेश में क्या भूमिका रही? मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला ने राज्यपाल के निर्देशों को प्रशासनिक रूप से लागू किया और विधानसभा भंग करने की आधिकारिक अधिसूचना जारी की। 

गर्मी और औद्योगिक गतिविधियों से बिजली की मांग बढ़ी, इक्रा ने जताई 5-5.5% वृद्धि की संभावना

नई दिल्ली   औद्योगिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों के निरंतर बढ़ने से 2026-27 में बिजली की मांग 5.0-5.5 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। 2025-26 में यह वृद्धि केवल एक प्रतिशत रही थी. साख निर्धारण करने वाली एजेंसी इक्रा ने यह बात कही।  इक्रा ने बयान में कहा कि संभावित ‘एल नीनो’ के बीच सामान्य से कम वर्षा के आसार से वित्त वर्ष 2026-27 में कृषि एवं घरेलू क्षेत्रों से भी मांग को समर्थन मिलने की संभावना है. साथ ही उद्योगों तथा इलेक्ट्रिक वाहनों एवं डाटा सेंटर जैसे उभरते स्रोतों से भी मांग बढ़ेगी।  देश में तापीय बिजली संयंत्रों का ‘प्लांट लोड फैक्टर’ (पीएलएफ या क्षमता उपयोग) 2025-26 में मांग में कमी के कारण घटकर 65-66 प्रतिशत रह गया. यह 2026-27 में करीब 65 प्रतिशत पर आ सकता है. नवीकरणीय स्रोतों से उत्पादन में अच्छी वृद्धि और तापीय क्षेत्र में छह गीगावाट क्षमता वृद्धि की संभावना इसकी मुख्य वजह रहेगी।  इक्रा के उपाध्यक्ष एवं सह-समूह प्रमुख (कॉरपोरेट रेटिंग्स) अंकित जैन ने कहा कि भारत में तापीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश पर फिर से जोर दिया जा रहा है जबकि नवीकरणीय क्षमता तेजी से बढ़ती जा रही है।  उन्होंने साथ ही बताया कि आठ अप्रैल 2026 तक घरेलू बिजली संयंत्रों के वास्ते कोयला भंडार लगभग 19 दिन के लिए पर्याप्त था।  समूचे भारत में वितरण कंपनियों के बही-खाता घाटे में 2024-25 में 2023-24 की तुलना में सुधार हुआ. मार्च 2025 तक राज्य-स्वामित्व वाली बिजली वितरण कंपनियों का सकल ऋण घटकर 7.1 लाख करोड़ रुपये रह गया जो मार्च 2024 में 7.4 लाख करोड़ रुपये था।  वर्तमान राजस्व और लाभप्रदता को देखते हुए हालांकि इतना उच्च ऋण स्तर कंपनियों के लिए टिकाऊ नहीं है।  अप्रैल 2026 तक 28 में से 17 राज्यों में 2026-27 के लिए शुल्क आदेश जारी किए जा चुके हैं।  बिजली वितरण कंपनियों के घाटे में काम करने के बावजूद अधिकतर राज्यों में 2026-27 के लिए स्वीकृत शुल्क वृद्धि सीमित रही है।  इक्रा का अनुमान है कि सीमित शुल्क वृद्धि और अपेक्षाकृत अधिक शुल्क वाली क्षमताओं के जुड़ने से बिजली खरीद लागत बढ़ने की स्थिति में 2026-27 में प्रति इकाई नकद अंतर 30-33 पैसे के उच्च स्तर पर बना रह सकता है।  इक्रा ने कहा कि सीमित शुल्क वृद्धि और लगातार घाटे के कारण बिजली वितरण क्षेत्र के लिए उसका दृष्टिकोण नकारात्मक बना हुआ है।