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17 जनपदों के 319 परीक्षा केंद्रों पर पूरी हुईं तैयारियां, एआई आधारित सीसीटीवी निगरानी में होगी परीक्षा

प्रयागराज / लखनऊ उ०प्र० शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज द्वारा प्रवक्ता संवर्ग के 18 विषयों के कुल 624 पदों हेतु लिखित परीक्षा का आयोजन 09 एवं 10 मई 2026 को किया जाएगा। परीक्षा प्रतिदिन दो पालियों में आयोजित होगी, जिसमें कुल 4,64,605 पंजीकृत अभ्यर्थी प्रतिभाग करेंगे। योगी सरकार की पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा नीति के अनुकूल सभी तैयारियां की गई हैं।  आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार  ने 17 जनपदों के 319 परीक्षा केंद्रों की तैयारियों की गहन समीक्षा की। उन्होंने बताया कि सभी परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा संबंधी तैयारियां पूर्ण कर ली गईं हैं। परीक्षा केंद्रों के सभी कक्षों एवं महत्वपूर्ण स्थलों को एआई आधारित सीसीटीवी कैमरों से आच्छादित कर जिला कंट्रोल रूम तथा आयोग के अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम से जोड़ा गया है। आयोग द्वारा सभी केंद्रों की कनेक्टिविटी का सफल परीक्षण भी कर लिया गया है। आयोग की ओर से परीक्षा के सघन अनुश्रवण के लिए प्रत्येक जनपद में एक-एक प्रेक्षक नियुक्त किया गया है। जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एवं निगरानी टीमें लगातार परीक्षा केंद्रों का भ्रमण करेंगी। परीक्षा केंद्रों के आसपास निषेधाज्ञा लागू रहेगी तथा पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा की शुचिता प्रभावित करने वाले व्यक्तियों एवं नकल माफियाओं के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  09 मई को प्रथम पाली में भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, गृह विज्ञान, इतिहास एवं शिक्षाशास्त्र सहित 06 विषयों तथा द्वितीय पाली में अंग्रेजी, कृषि, वाणिज्य एवं समाजशास्त्र सहित 04 विषयों की परीक्षा आयोजित की जाएगी। वहीं 10 मई को प्रथम पाली में नागरिक शास्त्र, गणित, अर्थशास्त्र, संस्कृत एवं मनोविज्ञान सहित 05 विषयों तथा द्वितीय पाली में रसायन विज्ञान, भूगोल, हिन्दी एवं कला सहित 04 विषयों की परीक्षा संपन्न कराई जाएगी। अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल फोन सहित किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। साथ ही एआई तकनीक की सहायता से ऐसे संदिग्ध अभ्यर्थियों की पहचान की गई है, जिन्होंने एक ही नाम से अलग-अलग फोटो के साथ अथवा एक ही फोटो के साथ अलग-अलग नामों से आवेदन किया है। ऐसे परीक्षार्थियों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोग द्वारा अभिनव प्रयोग के रूप में लखनऊ मंडल के 10 परीक्षा केंद्रों पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रत्येक पाली की परीक्षा समाप्त होने के तुरंत बाद अभ्यर्थियों द्वारा प्रयुक्त ओएमआर उत्तर पत्रकों की स्कैनिंग परीक्षा कक्ष में ही कक्ष निरीक्षकों एवं परीक्षार्थियों की उपस्थिति में की जाएगी। स्कैन डाटा को तत्काल सुरक्षित किया जाएगा, जिसका आवश्यकता पड़ने पर मूल ओएमआर से मिलान किया जा सकेगा। आयोग अध्यक्ष ने सभी अभ्यर्थियों से समय से परीक्षा केंद्र पर पहुंचने एवं प्रवेश पत्र में अंकित निर्देशों का अक्षरशः पालन करने की अपील की है। उन्होंने अभ्यर्थियों से किसी भी अफवाह अथवा भ्रामक सूचना से बचने तथा आयोग की वेबसाइट यूपीईएसएससी एवं आधिकारिक एक्स हैंडल पर उपलब्ध सूचनाओं पर ही भरोसा करने को कहा। आयोग ने स्पष्ट किया कि परीक्षा को पूर्णतः निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शुचितापूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं। परीक्षा की शुचिता को प्रभावित करने वाले अनुचित साधनों के प्रयोग पर उ०प्र० सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-2024 के अंतर्गत कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी परीक्षार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं ।

प्राचीन मंदिरों के संरक्षण एवं पुनरुद्धार से सशक्त हो रहा सांस्कृतिक वैभव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहरें भावी पीढ़ियों को समृद्ध अतीत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। साथ ही हमारे गौरवशाली इतिहास, ज्ञान, कला और सभ्यता की जीवंत प्रतीक हैं।इन धरोहरों का संरक्षण एवं संवर्धन समय की आवश्यकता है, जिससे भावी पीढ़ियाँ भी अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व का अनुभव कर सकें। राज्य सरकार “विरासत भी-विकास भी” के संकल्प को साकार करते हुए सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के साथ धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा दे रही है।प्रदेश में प्राचीन मंदिरों एवं ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और पुनरुद्धार कार्य निरंतर किया जा रहा है।इन प्रयासों से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं और नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर प्राप्त हो रहा है। प्रदेश अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन स्थापत्य कला और ऐतिहासिक धरोहरों के कारण देश में विशिष्ट पहचान रखता है। संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय द्वारा प्रदेश में बिखरे मंदिर अवशेषों का वैज्ञानिक पद्धति से मूल स्वरूप में पुनर्स्थापन किया जा रहा है। ‘पुनर्संरचना’ एवं ‘एनास्टाइलोसिस’ जैसी तकनीकों के माध्यम से धरोहरों की मौलिकता और ऐतिहासिकता को संरक्षित किया जा रहा है। यह अभियान प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण और पुनर्जीवन का महत्वपूर्ण प्रयास है। देवबड़ला और आशापुरी बने पुरातात्विक पुनरुद्धार के उत्कृष्ट उदाहरण सीहोर जिले का देवबड़ला और रायसेन जिले का आशापुरी क्षेत्र पुरातात्विक पुनरुद्धार के उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में उभरकर सामने आया है। इन स्थानों की विशेषता यह है कि यहाँ मंदिरों का अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका था, किंतु उत्खनन के दौरान प्राप्त बिखरे अवशेषों एवं खंडित प्रतिमाओं को वैज्ञानिक पद्धति से एकत्रित कर पुनर्स्थापित किया गया है। देवबड़ला में परमारकालीन मंदिरों का किया जा रहा है पुनर्स्थापन घने जंगलों के मध्य स्थित सीहोर जिले के देवबड़ला में 11वीं शताब्दी के परमारकालीन मंदिर अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्निर्माण कराया गया है। यहाँ ‘भूमिज शैली’ में निर्मित मंदिरों की ‘पंच-रथ’ योजना तत्कालीन उन्नत स्थापत्य कला का नमूना है। मंदिर क्रमांक-1 एवं 2 के पुनर्संरचना कार्य में मूल पत्थरों का उपयोग कर उनकी प्राचीनता को सुरक्षित रखा गया है। द्वार-शाखाओं पर उकेरी गई गंगा-यमुना की प्रतिमाएँ तथा सूक्ष्म नक्काशी इस स्थल को विशेष बनाती हैं। आशापुरी में किया जा रहा है प्रतिहारकालीन मंदिरों का संरक्षण रायसेन जिले का आशापुरी क्षेत्र अपने प्राचीन मंदिर समूहों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ 9वीं शताब्दी के प्रतिहारकालीन मंदिर क्रमांक-17 का पुनरुद्धार किया गया है। मंदिर के वर्गाकार गर्भगृह एवं मुखमंडप को अत्यंत सावधानीपूर्वक पुनर्स्थापित किया गया है। स्थल से प्राप्त शिव-नटेश, लक्ष्मी-नारायण तथा गजासुर संहारक शिव की प्रतिमाएँ प्रदेश की समृद्ध मूर्तिकला परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। सम्पूर्ण प्रदेश में हो रहे हैं मंदिर संरक्षण एवं पुनरुद्धार कार्य प्रदेश में धरोहर संरक्षण एवं पुनरुद्धार के कार्य व्यापक स्तर पर संचालित किए जा रहे हैं। खंडवा जिले के ओंकारेश्वर में सिद्धेश्वर एवं अन्य मंदिर परिसरों का वैज्ञानिक संरक्षण किया जा रहा है। उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर परिसर में प्राचीन धरोहरों को संरक्षित किया गया है। वहीं रायसेन जिले के धवला क्षेत्र में मंदिरों की संरचनात्मक सुरक्षा एवं विशेष सफाई कार्य संपादित किए गए हैं। इन सभी स्थलों पर ‘एनास्टाइलोसिस’ तकनीक के माध्यम से मूल पत्थरों द्वारा पुनर्गठन सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे ऐतिहासिकता एवं मौलिक स्वरूप सुरक्षित बना रहे। इन समेकित प्रयासों से प्रदेश न केवल अपनी ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण कर रहा है, बल्कि उन्हें नई पहचान भी प्रदान कर रहा है। प्राचीन विरासत को आधुनिक दृष्टिकोण से जोड़ने की यह पहल प्रदेश को सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण सिद्ध हो रही है। गौरवशाली अतीत और आधुनिक तकनीक के समन्वय से संचालित यह अभियान प्रदेश को सांस्कृतिक पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर नई पहचान दिलाने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों और विरासत के संरक्षण का सशक्त संदेश भी दे रहा है।  

सोने के साथ अब कटनी के बड़वारा में डोलोमाइट के भंडार-ब्लॉक्स आरक्षित

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश का कटनी जिला देश के महत्वपूर्ण खनिज एवं औद्योगिक केंद्रों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है। चूना पत्थर, बॉक्साइट, लौह अयस्क, मार्बल और लेटराइट जैसे बहुमूल्य खनिजों से समृद्ध कटनी अब स्वर्ण अयस्क के साथ ही डोलोमाइट के विशाल भंडार खनन के लिये तैयार हैं। कटनी के बड़ेरा एवं बचरबाड़ा में 50 हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में तीन बड़े डोलोमाइट ब्लॉक्स को माइनिंग कॉर्पोरेशन के पक्ष में आरक्षित किया गया है। इस निर्णय से कटनी में खनिज आधारित उद्योगों के विस्तार को नई गति मिलेगी। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहाकि अब कटनी ‘माइनिंग कैपिटल’ के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि कटनी केवल ‘चूना नगरी’ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह खनिज आधारित औद्योगिक विकास, निवेश, रोजगार और आधुनिक खनन प्रबंधन का राष्ट्रीय मॉडल बनेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खनिज संपदा के वैज्ञानिक, पारदर्शी और जनहितकारी उपयोग के माध्यम से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कटनी को ‘कनकपुरी’ अर्थात ‘स्वर्ण नगरी’ के रूप में विकसित करने की परिकल्पना को विशेष महत्व दिया है। उन्होंने कहा कि कटनी की धरती केवल खनिज संपदा का भंडार नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति और आर्थिक शक्ति का नया आधार बन रही है। कटनी की स्लीमनाबाद तहसील के इमलिया गांव, जिसे स्थानीय स्तर पर “सुनाही” के नाम से भी जाना जाता है। यहॉ पर लगभग 3.35 लाख टन से अधिक स्वर्ण अयस्क मिलने का अनुमान व्यक्त किया गया है। यह खोज लगभग 50 वर्षों की लंबी भू-वैज्ञानिक प्रक्रिया और सर्वेक्षण के बाद की गई है। वर्ष 1974 में प्रारंभ हुए भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षणों के आधार पर इस क्षेत्र में स्वर्ण भंडार की संभावना व्यक्त की गई थी, जिसे अब वर्ष 2025-26 में अंतिम रूप दिया गया है। सोने के साथ तांबा, जिंक, लेड और चांदी के भंडार इमलिया क्षेत्र में केवल सोना ही नहीं, बल्कि तांबा, लेड, जिंक और चांदी जैसे बहुमूल्य खनिजों के भंडार भी पाए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज कटनी को देश के प्रमुख बहु-खनिज क्षेत्रों में स्थापित करेगी। इन खनिज संसाधनों का उपयोग प्रदेश की औद्योगिक और आर्थिक क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 50 वर्ष के लिए हुआ खनन समझौता स्वर्ण अयस्क क्षेत्र के विकास के लिए मुंबई की ‘प्रॉस्पेक्ट रिसोर्स मिनरल प्राइवेट लिमिटेड’ कंपनी ने 121 करोड़ रूपये से अधिक की बोली लगाकर 50 वर्षों के लिए खनन लीज प्राप्त की है। लगभग 6.5 हैक्टेयर क्षेत्र में खनन गतिविधियाँ संचालित की जाएंगी। इससे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश, औद्योगिक गतिविधियाँ और रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है। राज्य सरकार का उद्देश्य केवल खनिज उत्खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय स्तर पर खनिज आधारित उद्योगों की स्थापना, वैल्यू एडिशन और रोजगार सृजन सुनिश्चित करना भी है। माइनिंग कॉन्क्लेव 2.0 से मिला वैश्विक निवेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में अगस्त 2025 में आयोजित ‘माइनिंग कॉन्क्लेव 2.0’ ने कटनी को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय निवेश मानचित्र पर नई पहचान दिलाई। कॉन्क्लेव में 56 हजार 414 करोड़ रूपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रमुख उद्योग समूहों और निवेशकों के साथ वन-टू-वन चर्चा कर कटनी की खनिज क्षमता और औद्योगिक संभावनाओं को विस्तार से प्रस्तुत किया था। कॉन्क्लेव में 8 बड़ी कंपनियों ने निवेश में रुचि दिखाई थी। इन निवेश प्रस्तावों से सीमेंट, मिनरल प्रोसेसिंग, ऊर्जा, धातु प्रसंस्करण और निर्माण क्षेत्र में बड़े स्तर पर औद्योगिक विस्तार होने की संभावना है। इससे हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित होंगे। नवाचार और सुशासन से राजस्व में वृद्धि कटनी जिला प्रशासन की सक्रियता, तकनीक आधारित निगरानी और बेहतर खनन प्रबंधन के कारण कटनी के खनिज राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पूर्व में जहां जिले की औसत वार्षिक खनिज आय लगभग 100 करोड़ रूपये थी, वहीं अब यह बढ़कर 160 करोड़ रूपये से अधिक हो गई है। नई खदानों और औद्योगिक इकाइयों के प्रारंभ होने से आने वाले वर्षों में राजस्व में और वृद्धि की संभावना है। राज्य सरकार का लक्ष्य केवल राजस्व वृद्धि नहीं, बल्कि खनिज संपदा से समग्र क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक निवेश के साथ सड़क, बिजली, जल, परिवहन और अन्य आधारभूत सुविधाओं का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है। तकनीक से अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण राज्य सरकार ने कटनी में पारदर्शी और व्यवस्थित खनन व्यवस्था स्थापित करने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाया है। बड़वारा रोड पर स्थापित ई-चेक गेट के माध्यम से खनिज परिवहन करने वाले वाहनों के दस्तावेजों की ऑनलाइन जांच की जा रही है। माइनिंग सर्विलांस सिस्टम के जरिए अवैध उत्खनन और अवैध परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया है। प्रशासन द्वारा लंबित प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण कर वैधानिक खनन गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। पारदर्शिता, तकनीक और सुशासन के माध्यम से खनन क्षेत्र में नई कार्य संस्कृति विकसित की जा रही है। रोजगार और क्षेत्रीय विकास को मिलेगा नया आयाम कटनी में खनिज आधारित उद्योगों के विस्तार से स्थानीय युवाओं, आदिवासी समुदायों और श्रमिकों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। सरकार का प्रयास है कि औद्योगिक विकास का लाभ सीधे स्थानीय नागरिकों तक पहुंचे और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण को नई गति मिले। कटनी आज प्रदेश की औद्योगिक शक्ति, प्राकृतिक संपदा और विकास दृष्टि का प्रतीक बनकर उभर रहा है। “स्वर्ण नगरी” और “माइनिंग कैपिटल” की अवधारणा के साथ कटनी आने वाले समय में न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश के प्रमुख खनिज और औद्योगिक केंद्र के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा।  

6 महीने के नोटिस नियम पर अटकी विनेश की एंट्री, WFI कर रहा UWW के जवाब का इंतजार

नई दिल्ली पहलवान विनेश फोगाट की प्रतिस्पर्धी कुश्ती में वापसी की पात्रता पर गोंडा में होने वाले राष्ट्रीय ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट से पहले संदेह के बादल मंडरा रहे हैं क्योंकि संन्यास के बाद वापसी करने वाले खिलाड़ियों के लिए विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) के अनिवार्य छह महीने के नोटिस के नियम का पालन करने को लेकर अस्पष्टता बनी हुई है। विनेश ने 2024 पेरिस ओलंपिक में मिली निराशा के बाद खेल से संन्यास की घोषणा कर दी थी लेकिन पिछले साल दिसंबर में उन्होंने फिर से प्रतिस्पर्धी कुश्ती में लौटने की इच्छा जताई थी। वाडा नियमों के बीच विनेश की वापसी पर संशय विनेश ने 10-12 मई तक होने वाले ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में 57 किग्रा वर्ग में हिस्सा लेने के लिए प्रविष्टि दी है। हालांकि यह अब भी साफ नहीं है कि विश्व चैंपियनशिप की पूर्व पदक विजेता विनेश ने वाडा के नियम 5.6.1 के तहत तय की गई शर्तों को पूरा किया है या नहीं। यह नियम संन्यास लेने वाले खिलाड़ियों की प्रतियोगिता में वापसी को नियंत्रित करता है। इस नियम के अनुसार पंजीकृत परीक्षण पूल (आरटीपी) में शामिल कोई भी खिलाड़ी अगर संन्यास लेने के बाद फिर से सक्रिय रूप से हिस्सा लेना चाहता है तो उसे संबंधित अंतरराष्ट्रीय महासंघ और राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी को छह महीने पहले लिखित नोटिस देकर खुद को परीक्षण के लिए उपलब्ध कराना होगा। आरटीपी खास खिलाड़ियों का एक चुनिंदा समूह होता है जिन पर बिना किसी पूर्व सूचना के डोपिंग परीक्षण किए जा सकते हैं। नियम उल्लंघन पर अयोग्यता का प्रावधान इस नियम में आगे यह भी कहा गया है कि इस नियम का उल्लंघन करके हासिल किया गया कोई भी प्रतिस्पर्धी नतीजा ’अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा’ जब तक कि खिलाड़ी यह साबित नहीं कर दे कि उसे ’उचित रूप से यह पता नहीं चल सका’ था कि वह प्रतियोगिता अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता थी। इस छह महीने की अवधि का मकसद खिलाड़ियों को परीक्षण प्रणाली से लंबे समय तक बाहर रहने और फिर बिना उचित निगरानी के सीधे प्रतियोगिता में लौटने से रोकना है। हालांकि खिलाड़ी इस छह महीने के नोटिस से छूट का अनुरोध कर सकता है। विनेश की पात्रता पर यूडब्ल्यूडब्ल्यू से जवाब का इंतजार भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा,'आज की तारीख तक हमें यह नहीं पता है कि विनेश ने इस शर्त को पूरा किया है या नहीं। अगर वह पात्र है तभी प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकती हैं, वरना नहीं। हम यूडब्ल्यूडब्ल्यू से पुष्टि का इंतजार कर रहे हैं। अगर विनेश ने छूट का अनुरोध किया होता तो अधिकारियों द्वारा हमें इसकी सूचना दे दी गई होती।' एशियाई खेलों की राह अब भी कठिन विनेश अपने सक्रिय करियर के दौरान आरटीपी का हिस्सा रही थीं। ट्रेनिंग और प्रतियोगिता फिर से शुरू करने का फैसला करने के बाद उन्होंने दोबारा परीक्षण पूल में प्रवेश किया और इस दौरान उनका एक परीक्षण छूट भी गया था जिसे आईटीए ने उनकी रहने के स्थान की जानकारी देने की पहली विफलता के तौर पर दर्ज किया था। यह पता नहीं है कि राष्ट्रीय प्रतियोगिता ढांचे के अंतर्गत आने वाली गोंडा प्रतियोगिता से पहले उन्होंने छह महीने का अनिवार्य नोटिस दिया था या नहीं। विनेश से इस पर टिप्पणी के लिए संपर्क किया गया लेकिन उनके निजी सहायक ने कहा कि वह अभी व्यस्त हैं। भले ही विनेश यह टूर्नामेंट जीत जाएं लेकिन इस जीत से 2026 के एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने की उनकी इच्छा पूरी होने की संभावना कम ही है। इस साल फरवरी में घोषित डब्ल्यूएफआई की चयन नीति के अनुसार राष्ट्रीय ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में किए गए प्रदर्शन को एशियाई खेलों के ट्रायल्स के लिए नहीं माना जाएगा। नीति के मुताबिक केवल 2025 की सीनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप, 2026 के फेडरेशन कप और 2026 की अंडर-20 राष्ट्रीय चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले खिलाड़ी ही एशियाई खेलों के चयन ट्रायल्स में हिस्सा लेने के पात्र होंगे। ये ट्रायल 30 मई (महिलाओं के लिए) और 31 मई (पुरुषों के लिए) को आयोजित किए जाएंगे। इसका सीधा सा मतलब यह है कि विनेश को इसमें हिस्सा लेने का मौका नहीं मिलेगा।  

महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय का भवन 45 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बनेगा

भोपाल  लक्ष्मणबाग परिसर से लगी भूमि में महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के भवन निर्माण का कार्य प्रारंभ हो गया है। उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने निर्माण स्थल पहुंचकर कार्य का अवलोकन कर आवश्यक निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश भवन विकास निगम द्वारा 45.79 करोड़ रूपये की लागत से बनाए जा रहे विश्वविद्यालय भवन के प्रशासनिक ब्लॉक में सेमिनार हॉल के साथ ही ऑफिस, एकाउण्ट सेक्शन, प्लेसमेंट सेक्शन तथा रिकॉर्ड रूम का निर्माण कराया जाएगा। इसी प्रकार अकादमिक ब्लाक में 12 अध्ययन कक्ष, 4 प्रोफेसर कक्ष तथा एक कम्प्यूटर लैब का निर्माण किया जाएगा। साथ ही 50 सीटर कन्या छात्रावास का निर्माण कार्य भी आरंभ हो गया है। विश्वविद्यालय में बालक छात्रावास का निर्माण भी कराया जाएगा। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने निरीक्षण के दौरान कार्ययोजना का निरीक्षण करते हुए गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में कार्यों को पूर्ण कराने के निर्देश दिए। इस अवसर पर विन्ध्य विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. पंचूलाल प्रजापति, उप मुख्यमंत्री  शुक्ल के प्रतिनिधि  राजेश पाण्डेय सहित विभागीय अधिकारी तथा निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

29 लाख से ज्यादा महिलाओं को मिल रहा पेंशन का लाभ, डीबीटी से पारदर्शिता

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित वृद्धावस्था पेंशन योजना प्रदेश की लाखों बुजुर्ग महिलाओं के लिए जीवन का नया आधार बनकर उभरी है। वर्तमान में राज्य सरकार 29,23,364 बुजुर्ग महिलाओं को नियमित पेंशन का लाभ प्रदान कर रही है। आर्थिक रूप से कमजोर और निराश्रित महिलाओं के लिए यह योजना केवल एक सरकारी सहायता नहीं, बल्कि उनके बुढ़ापे की सबसे मजबूत लाठी साबित हो रही है, जिससे उन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान मिला है। पारदर्शिता और डीबीटी: बिचौलियों का खेल खत्म योगी सरकार की इस योजना की सबसे बड़ी ताकत इसकी पारदर्शिता है। समाज कल्याण विभाग के माध्यम से दी जाने वाली 1,000 रुपये प्रति माह की सहायता राशि अब बिचौलियों के बजाय सीधे लाभार्थियों तक पहुँच रही है। डीबीटी (Direct Benefit Transfer) प्रणाली के तहत हर तिमाही 3,000 रुपये सीधे बुजुर्ग महिलाओं के बैंक खातों में जमा किए जा रहे हैं। इस डिजिटल पहल ने भ्रष्टाचार की गुंजाइश को खत्म कर दिया है और पात्र महिलाओं को समय पर आर्थिक संबल सुनिश्चित किया है। पूर्वांचल में सबसे अधिक लाभ: जौनपुर रहा नंबर वन आंकड़ों के नजरिए से देखें तो पूर्वांचल के जिलों में इस योजना का व्यापक असर देखने को मिला है। जौनपुर जिला इस योजना का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभरा है, जहाँ 1,00,820 बुजुर्ग महिलाओं को पेंशन मिल रही है। इसके बाद आजमगढ़ (86,166) और बलिया (79,160) का स्थान है। प्रशासन का विशेष जोर उन महिलाओं की पहचान करने पर है जो अब भी इस दायरे से बाहर हैं, ताकि कोई भी जरूरतमंद महिला सामाजिक सुरक्षा के इस चक्र से वंचित न रहे। आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान में वृद्धि नियमित आर्थिक सहायता ने बुजुर्ग महिलाओं के जीवन स्तर में गुणात्मक बदलाव लाया है। अब उन्हें दवा, राशन और छोटे-मोटे खर्चों के लिए परिवार के अन्य सदस्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। इस आत्मनिर्भरता ने परिवारों के भीतर भी उनकी स्थिति को मजबूत किया है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाएं अब अधिक आत्मविश्वास के साथ अपना जीवन जी रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का लक्ष्य इस योजना का दायरा बढ़ाकर प्रदेश की हर निराश्रित बुजुर्ग महिला को सशक्त और स्वावलंबी बनाना है।  

राजस्थान SI भर्ती में बड़ा अपडेट: परीक्षा निरस्त, सितंबर 2026 में फिर से एग्जाम संभव

जयपुर राजस्थान लोक सेवा आयोग ने राज्य सरकार की अनुशंसा के बाद उप निरीक्षक/प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा-2021 को निरस्त कर दिया है. भर्ती परीक्षा फिर से होगी, जिसकी रूपरेखा भी तय हो गई है. आरपीएससी अध्यक्ष उत्कल रंजन साहू के मुताबिक, परीक्षा में केवल वे 3 लाख 83 हजार 97 अभ्यर्थी ही शामिल हो सकेंगे, जिन्होंने पहले आयोजित लिखित परीक्षा के दोनों प्रश्नपत्र दिए थे. 16 मई से अभ्यर्थियों को फॉर्म में सुधार का अवसर दिया जाएगा. इस दौरान जानकारी में आवश्यक सुधार के अलावा अपडेट भी कर सकेंगे. संशोधन प्रक्रिया 30 मई 2026 तक चलेगी, जिसमें मोबाइल नंबर, ईमेल एड्रेस और एड्रेस में बदलाव किया जा सकेगा. यह अपडेट भी जानना है जरूरी परीक्षा ओटीआर और पात्रता संशोधन से पहले वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) की केवाईसी प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य होगा. एसएसओ आईडी बदलने वाले अभ्यर्थी फेच एप्लीकेशन फॉर्म विकल्प से पुराना डेटा नए प्रोफाइल में ट्रांसफर कर सकेंगे. फॉर्म में बदलाव नहीं फिर भी करना होगा ये काम आयोग ने साफ किया है कि आयु, आरक्षण और शैक्षणिक योग्यता का निर्धारण 2021 के आवेदन के समय की स्थिति के आधार पर ही होगा. परीक्षा और प्रक्रिया में अगर किसी अभ्यर्थी को आवेदन में कोई बदलाव नहीं करना है. तब भी उसे एडिट मोड में जाकर ‘संशोधन की आवश्यकता नहीं' वाली घोषणा और बायोमेट्रिक उपयोग की सहमति देनी होगी. इसके बाद ओटीपी सत्यापन के जरिए आवेदन सबमिट होगा. निर्धारित प्रक्रिया का पालन न करने पर आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा. सितंबर में हो सकती है परीक्षा एसआई भर्ती 2021 परीक्षा के लिए 3 फरवरी 2021 को नोटिफिकेशन जारी हुआ. 859 पदों के लिए 13 से 15 सितंबर 2021 को भर्ती परीक्षा आयोजित हुई. इसमें 3 लाख 80 हजार अभ्यर्थी लिखित परीक्षा के बाद 20 हजार 359 अभ्यर्थी फिजिकल टेस्ट के लिए पास हुए. 3 हजार 291 अभ्यर्थी इंटरव्यू के लिए चयनित हुए. 1 जून 2023 को फाइनल रिजल्ट जारी किया गया. परीक्षा में बड़े स्तर पर धांधली के बाद मामला कोर्ट पहुंच गया था. हाल ही में 4 मई को सुप्रीम कोर्ट ने एसआई भर्ती 2021 को रद्द रखने का फैसला बरकरार रखा था. भर्ती परीक्षा का आयोजन सितंबर-2026 में होने की संभावना है.

छत्तीसगढ़ सिंचाई परियोजना मंडल की कार्यकारिणी समिति की बैठक संपन्न

रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव  विकासशील ने राज्य में स्वीकृत विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को कार्यों में गति लाने के सख्त निर्देश दिए हैं। मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित छत्तीसगढ़ सिंचाई परियोजना मंडल की कार्यकारिणी समिति की बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि भू-अर्जन और फारेस्ट क्लीयरेंस जैसी प्रक्रियाओं को समय-सीमा में पूर्ण किया जाए ताकि परियोजनाओं का लाभ किसानों को जल्द मिल सके। बैठक की प्रमुख उपलब्धियां और परियोजनाएं            पैरी-कोडार लिंक नहर (गरियाबंद) सिकासार जलाशय से कोडार जलाशय तक पाइपलाइन लिंक नहर का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना से महानदी की सहायक पैरी नदी के अतिरिक्त जल का उपयोग पेयजल, निस्तारी और औद्योगिक कार्यों के लिए होगा। इससे गरियाबंद और महासमुंद जिले के 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में नई सिंचाई सुविधा विकसित होगी।              मोहमेला-सिरपुर बैराज (रायपुर)-आरंग विकासखंड में महानदी पर प्रस्तावित इस बैराज से 1800 हेक्टेयर क्षेत्र में उद्वहन सिंचाई सुनिश्चित होगी। यह क्षेत्र में पर्यटन, नौका विहार और सुगम आवागमन को भी बढ़ावा देगा।              मटनार बहुउद्देशीय परियोजना (बस्तर) इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित यह योजना बस्तर के लिए मील का पत्थर साबित होगी। उद्वहन प्रणाली पर आधारित होने के कारण इसमें कोई विस्थापन या पुनर्वास की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे स्थानीय पारिस्थितिकी सुरक्षित रहेगी। देउरगांव उद्वहन बैराज (बस्तर) जगदलपुर के समीप इंद्रावती नदी पर बनने वाली यह परियोजना बस्तर के आर्थिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी। निविदा और प्रशासनिक अनुमोदन           बैठक में विभिन्न परियोजनाओं के निविदा प्रारूपों  पर विस्तार से चर्चा कर उन्हें अनुमोदित किया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए। बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव  राजेश सुकुमार टोप्पो, ऊर्जा सचिव  सारांश मित्तर, वित्त विभाग की विशेष सचिव मती शीतल शाश्वत वर्मा सहित विभिन्न परियोजनाओं के मुख्य अभियंता और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मानवता की सेवा में रेडक्रॉस की भूमिका सराहनीय- मुख्यमंत्री साय

रायपुर विश्व रेडक्रॉस दिवस के अवसर पर आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, छत्तीसगढ़ शाखा के चेयरमेन  तोमन साहू जी चेयरमेन एवं अन्य पदाधिकारियों ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय को रेडक्रॉस का बैज पहनाकर एवं  स्मृति चिन्ह भेंट कर विश्व रेडक्रॉस दिवस की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने सभी पदाधिकारियों एवं स्वयंसेवकों को इस अवसर पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मानवता की सेवा के साथ ही आपदा के समय में रेडक्रॉस संस्था की भूमिका सराहनीय है। इस अवसर पर वाइस चेयरमेन  रुपेश पाणिग्रही,कोषाध्यक्ष  संजय पटेल,राज्य प्रबंध समिति सदस्य  प्रदीप साहू, संरक्षक सदस्य  दिनेश तापड़िया उपस्थित थे।

सपा सरकार में हर दिन होते थे 19 दंगे और 33 अपहरण

लखनऊ  उत्तर प्रदेश जिसे वर्ष 2017 से पहले ‘दंगा प्रदेश’ कहा जाता था, जहां सपा सरकार में वर्ष 2012 से 2017 के बीच एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार प्रतिदिन 19 दंगे होते थे, उसी उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में एक भी दंगा नहीं हुआ। इस अवधि में कुछ अराजक तत्वों द्वारा जरूर दंगा भड़काने की कोशिश की गई, लेकिन योगी सरकार में सख्त कानून व्यवस्था ने दंगाइयों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। स्थिति बिगड़ने से पहले ही दंगा विरोधी सख्त कार्रवाई करते हुए ऐसे अराजक तत्वों को सलाखों के पीछे धकेला गया। इतना ही नहीं, जिस उत्तर प्रदेश में कभी व्यापारियों को आए दिन फिरौती के लिए अगवा कर लिया जाता था, उसी प्रदेश में वर्ष 2024 की एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार फिरौती के लिए अपहरण की एक भी घटना नहीं हुई। प्रदेश में दो वर्षों में फिरौती के लिए अपहरण की एक भी घटना नहीं वर्ष 2012 से 2017 के बीच प्रदेश में हर दिन अपहरण की 33 घटनाएं दर्ज की गईं। एनसीआरबी की वर्ष 2024 रिपोर्ट के अनुसार फिरौती के लिए अपहरण के मामले में उत्तर प्रदेश की अपराध दर (क्राइम रेट) शून्य दर्ज की गई है। देश के अन्य राज्यों की तुलना में उत्तर प्रदेश इस मामले में सबसे बेहतर स्थिति में दिखाई देता है। रिपोर्ट के अनुसार नगालैंड में यह अपराध दर 0.7, मणिपुर में 0.6, अरुणाचल प्रदेश में 0.3 और मेघालय में 0.2 दर्ज की गई, जबकि उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा शून्य रहा। रिपोर्ट यह भी बताती है कि वर्ष 2023 में भी यूपी में इस श्रेणी में क्राइम रेट शून्य था। यह बदलाव योगी सरकार की अपराध एवं अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति, सक्रिय पुलिसिंग और संगठित अपराधों पर लगातार कार्रवाई से संभव हुआ है। पुलिस द्वारा गैंगस्टर एक्ट, माफिया की संपत्तियों की जब्ती और अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ने जैसे सख्त कदमों का असर धरातल पर दिखाई दे रहा है।  योगी सरकार ने दंगााइयों के मंसूबों पर फेरा पानी उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में दंगे की एक भी घटना नहीं हुई। कुछ अराजक तत्वों द्वारा दंगा भड़काने की कोशिश जरूर की गई, लेकिन योगी सरकार में सख्त कानून व्यवस्था ने दंगाइयों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। मामूली हिंसक घटनाओं के उग्र रूप लेने से पहले ही अराजक तत्वों के खिलाफ दंगा विरोधी सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें सलाखों के पीछे धकेल दिया गया। एनसीआरबी की 2024 रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में बलवा की अपराध दर 1.1 दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह दर 2.2 रही। यहां यूपी में बलवा की अपराध दर 1.1 दर्ज होने का आधार वही मामले हैं, जिनमें दंगा भड़काने की कोशिशों को योगी सरकार ने समय रहते विफल कर दिया और अराजक तत्वों के खिलाफ दंगा भड़काने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी सार्वजनिक मंचों से कहते हैं, ‘नो कर्फ्यू-नो दंगा, यूपी में सब चंगा।‘ एनसीआरबी रिपोर्ट में मणिपुर में बलवा की अपराध दर 8.4, महाराष्ट्र में 6.4, कर्नाटक में 5.4, हरियाणा में 5.3 और हिमाचल प्रदेश में 4.7 दर्ज की गई है।  सपा सरकार के समय प्रदेश में 25 हजार से अधिक दंगे उत्तर प्रदेश में एक समय ऐसा था जब दंगे, अपहरण और फिरौती जैसी घटनाएं आम चर्चा का विषय बन चुकी थीं। विशेष रूप से वर्ष 2012 से 2017 के बीच सपा सरकार के दौरान प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे। उस दौरान एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 25 हजार से अधिक दंगे हुए। उस समय औसतन हर दिन करीब 19 दंगे और अपहरण की 33 घटनाएं सामने आती थीं।