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योगी सरकार में एमएसएमई, स्टार्टअप और स्वरोजगार से आत्मनिर्भर बने प्रदेश के युवा

9 वर्षों में रोजगार, निवेश और आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा मॉडल बना उत्तर प्रदेश योगी सरकार में एमएसएमई, स्टार्टअप और स्वरोजगार से आत्मनिर्भर बने प्रदेश के युवा रोजगार क्रांति के जरिए नौकरी मांगने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बन चुके हैं युवा महिलाओं और युवाओं को सरकारी नौकरी से लेकर स्वरोजगार तक मिल रहा खूब मौका लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार ने पिछले 9 वर्षों में रोजगार और स्वरोजगार के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किये हैं। योगी सरकार ने रोजगार के मामले को मिशन के रूप में लिया है। इसके तहत प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर बनाने के लक्ष्य के साथ युवाओं और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। सरकार, सरकारी क्षेत्र में नौकरी के अवसर देने के साथ निजी क्षेत्रों में भी युवाओं के लिए मौके उपलब्ध करा रही है।  उत्तर प्रदेश, देश में सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला राज्य बन चुका है। इसी क्रम में बीते 9 वर्षों में योगी सरकार ने 9 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दी हैं। यूपी पुलिस में ही इस दौरान 2.19 लाख भर्ती पूरी हो चुकी हैं। वहीं वर्ष 2026 में 80 हजार से अधिक पदों पर भर्ती होनी है। शिक्षा विभाग में करीब 1.65 लाख से अधिक नियुक्तियां की गई हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के द्वारा वर्ष 2017 से 2025 तक 53 हजार से ज्यादा,  उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के द्वारा 47 हजार से ज्यादा भर्तियां पारदर्शी तरीके से पूरी की गईँ। उत्तर प्रदेश में आज कारखानों की संख्या 31 हजार से अधिक हो गई है। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में मात्र 14 हजार कारखाने ही पंजीकृत थे। नौजवानों के नए रोजगार की संभावनाएं भी पैदा हुईं। सरकारी नौकरी की जगह अपना रोजगार करने वाले नौजवान को एमएसएमई सेक्टर से बड़ा लाभ मिला है। केवल एमएसएमई सेक्टर से ही प्रदेश में 3 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। योगी सरकार की विभिन्न योजनाओं से युवाओं और महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने का सपना भी साकार हुआ। खादी एंव ग्रामोद्योग क्षेत्र में विस्तार से 4.63 लाख रोजगार सृजित किए गए हैं। विगत 9 वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव से 1 करोड़ से ज्यादा युवाओं के लिए रोजगार और सेवायोजन के अवसर उपलब्ध होने की संभावना है। बीते 9 वर्षों में 4 ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के माध्यम से 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव को जमीन पर उतारा गया है, जिनसे 60 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।  मुख्यमंत्री युवा रोजगार योजना के अंतर्गत अब तक 38 हजार से ज्यादा लाभार्थियों को 1,09,710 लाख से अधिक की मार्जिन मनी वितरित की गई। इस तरह योगी सरकार ने केवल रोजगार ही नहीं बल्कि स्वरोजगार के भी मौके प्रदेशवासियों के हित में उपलब्ध कराए हैं। प्रदेश में शिक्षित एवं प्रशिक्षित युवाओं को सूक्ष्म उद्योग स्थापित करने के लिए ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ शुरू किया गया। वर्ष 2024-25 से अब तक 1.47 लाख युवाओं को इस योजना का लाभ दिया गया, जिससे 4.51 लाख लोगों को रोजगार मिला है। योगी सरकार ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में उत्कष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को राजपत्रित पदों पर सेवायोजित करने की नीति घोषित की है। इसके तहत अब तक 500 से अधिक खिलाड़ियों को विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी दी जा चुकी है। प्रदेश में महिलाओं के लिए रोजगार के रास्ते खुले बीसी सखी योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र की महिला को आत्मनिर्भर बनाने का काम किया गया। इसके तहत ग्रामीण महिलाओं ने बैंकिंग प्रतिनिधि के रूप में 42,711 करोड़ का लेन-देन किया और 116 करोड़ का लाभांश कमाया। खेती में तकनीक को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं को ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। वहीं, स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की वार्षिक आय 1 लाख रुपये से ऊपर ले जाने का लक्ष्य लखपति दीदी के जरिए पूरा किया जा रहा है। इससे प्रदेश में 18.55 लाख महिलाएं लखपति श्रेणी में पहुंच गईं हैं। एक करोड़ से ज्यादा महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर रोजगार कर रही हैं। कृषि आजीविका संवर्धन गतिविधियों से 64.34 लाख महिला किसान परिवारों को जोड़ा गया है। इन आंकड़ों को देखकर कहा जा रहा है कि आज उत्तर प्रदेश का युवा केवल नौकरी की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर नहीं देख रहा, बल्कि अपने ही प्रदेश में रोजगार और व्यवसाय के अवसर प्राप्त कर रहा है। योगी सरकार की योजनाओं ने युवाओं और महिलाओं में आत्मविश्वास पैदा किया है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश आज रोजगार, निवेश, उद्यमिता और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में देश के सामने एक सफल मॉडल बनकर उभरा है।

फिरौती के लिए अपहरण तथा डकैती के मामलों में यूपी देश में सबसे निचले पायदान पर

एनसीआरबी रिपोर्ट: अपराध के मामलों में यूपी की स्थिति काफी बेहतर फिरौती के लिए अपहरण तथा डकैती के मामलों में यूपी देश में सबसे निचले पायदान पर महिलाओं के प्रति अपराधियों को सजा दिलाने में उत्तर प्रदेश देश में नंबर-1 लखनऊ  राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के वर्ष 2024 के आंकड़ों ने राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की बेहतर स्थिति को दर्शाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में देश में कुल 35,44,608 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। राष्ट्रीय क्राइम रेट 252.3 के सापेक्ष उत्तर प्रदेश का क्राइम रेट 180.2 रहा। कुल अपराधों में उत्तर प्रदेश का देश में 18वां स्थान है, जबकि देश की 17 फीसदी जनसंख्या यूपी में निवास करती है। गौरतलब है कि किसी भी राज्य में अपराध की स्थिति को समझने के लिए क्राइम रेट सबसे बेहतर एवं विश्वसनीय माध्यम है। प्रति एक लाख जनसंख्या के सापेक्ष अपराधों की संख्या को अपराध दर (Crime Rate) के रूप में परिभाषित किया जाता है। यह एक स्थापित वास्तविक संकेतक है, जो राज्य के आकार और जनसंख्या में वृद्धि के प्रभाव को संतुलित करता है। क्राइम रेट ही अपराधों की सही स्थिति समझने के लिए प्रामाणिक संकेतक है। एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 28 राज्यों एवं 8 केन्द्रशासित प्रदेशों में उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की मजबूत स्थिति इस प्रकार समझी जा सकती है। हत्या के मामलों में देश में यूपी का स्थान 29वां है, जबकि हत्या के प्रयास के मामलों में यह 26वें स्थान पर है। शीलभंग के मामलों में प्रदेश 20वें स्थान पर है, जबकि फिरौती हेतु अपहरण के मामलों में राज्य पूरे देश में सबसे नीचे 36वें नंबर पर है। दुष्कर्म के मामलों में यूपी देश में 24वें स्थान पर है, जो राज्य में बेहतर कानून-व्यस्था को इंगित करता है। इसी प्रकार बलवे के मामलों में उत्तर प्रदेश 19वें स्थान पर है। इसी प्रकार डकैती के मामलों में उत्तर प्रदेश देश में सबसे निचले पायदान यानी 36वें स्थान पर है। लूट के मामलों में प्रदेश 28वें स्थान पर और पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में यूपी का स्थान 23वां है। महिलाओं के प्रति अपराधों में यूपी 17वें नंबर पर है, जबकि बच्चों के विरुद्द अपराध के मामले में प्रदेश का स्थान 27वां है। ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि देश के अन्य राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में उत्तर प्रदेश की स्थिति अपराध नियंत्रण के मामले में काफी बेहतर है। आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि योगी सरकार लगातार अपराध व अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही है, जिसके ठोस परिणाम भी सामने आ रहे हैं। महिला न्याय (Conviction Rate): यूपी देश का शीर्ष राज्य अपराधियों को सजा दिलाने (दोषसिद्धि) में उत्तर प्रदेश पूरे देश के लिए एक मानक स्थापित कर चुका है। महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में अदालतों द्वारा सजा सुनाने की दर इस प्रकार है- उत्तर प्रदेश: दोषसिद्धि दर 76.6% (शीर्ष) पश्चिम बंगाल: यहां दर मात्र 1.6% है। कर्नाटक: यहां मात्र 4.8% मामलों में सजा होती है। तेलंगाना: यहां दर 14.8% है। केरल: यहां दर मात्र 17.0% है। पंजाब: यहां दर 19.0% है। तमिलनाडु: यहां दर 23.4% है। उपरोक्त आंकड़े बताते हैं कि यूपी में महिला अपराध करने वाले अपराधी के बचने की संभावना न्यूनतम है, जबकि अन्य राज्यों में अपराधियों के छूटने की दर 75% से 98% तक है। इसी प्रकार राज्य में मर्यादा भंग के अपराधों की दर मात्र 18.6 है, जबकि तेलंगाना में 52.8, पश्चिम बंगाल में 39.5, केरल में यह 23.9 है। गंभीर अपराधों पर नियंत्रण यूपी में हत्या के मामलों की दर प्रति लाख जनसंख्या मात्र 1.3 है, जो तेलंगाना (2.7),  झारखण्ड (3.7) और पंजाब (2.5) की तुलना में काफी कम है। यूपी के महानगर जांच पूरी करने में देश के अन्य बड़े मेट्रो शहरों से कहीं अधिक तेज हैं। कानपुर में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में चार्जशीट दर 84.4%, लखनऊ में 83.7% है। जेलों में क्षमता और अनुशासन के मामले में भी यूपी का प्रशासन अन्य राज्यों से बेहतर है। यूपी में महिला जेलों में अधिभोग दर (Occupancy Rate) मात्र 36.7% है, जो महिला कैदियों को सुव्यवस्थित वातावरण प्रदान करता है। यूपी की केंद्रीय जेलों की अधिभोग दर 74.3% है, जो पंजाब (118.4%) और केरल (149.9%) की तुलना में बहुत बेहतर है। एनसीआरबी रिपोर्ट का सांख्यिकीय डेटा स्पष्ट करता है कि उत्तर प्रदेश न केवल महिलाओं के प्रति अपराध करने वालों को दंडित करने (76.6% दोषसिद्धि) में देश में अग्रणी है, बल्कि गंभीर अपराधों (हत्या, धोखाधड़ी) और महिला सुरक्षा के मानकों पर दक्षिण भारतीय राज्यों और पंजाब/पश्चिम बंगाल की तुलना में कहीं अधिक बेहतर स्थिति में है।

हनीट्रैप और सुरक्षा खतरे पर अलर्ट, IPL टीमों के लिए नई गाइडलाइन जारी

नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 का सीजन जारी है, इसी बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने सभी फ्रेंचाइजियों के लिए नई और सख्त एडवाइजरी जारी की है. खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने होटल में आने-जाने वाले मेहमानों और विजिटर्स को लेकर कड़े नियम लागू किए हैं. BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने फ्रेंचाइजियों को भेजे गए आधिकारिक कम्युन‍िकेशन में कहा है कि IPL ऑपरेशंस टीम समय-समय पर जांच करेगी कि एडवाइजरी का पालन हो रहा है या नहीं. साथ ही टीम मैनेजरों को सभी स्वीकृत गेस्ट विजिट और होटल मूवमेंट का रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए गए हैं. बोर्ड ने अपनी एडवाइजरी में साफ कहा है कि कुछ मामलों में खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ ने बिना टीम मैनेजर की जानकारी या अनुमति के बाहरी लोगों को होटल रूम तक पहुंच दी. कई मामलों में टीम मैनेजर को विजिटर्स की मौजूदगी की जानकारी तक नहीं थी. BCCI ने इस प्रथा को तुरंत प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया है. नई गाइडलाइन के मुताबिक अब कोई भी व्यक्ति चाहे उसका खिलाड़ी या स्टाफ सदस्य से कोई भी रिश्ता क्यों न हो, टीम मैनेजर की पूर्व जानकारी और लिखित मंजूरी के बिना होटल रूम में प्रवेश नहीं कर सकेगा. BCCI ने यह भी स्पष्ट किया है कि खिलाड़ियों या सपोर्ट स्टाफ से मिलने आने वाले मेहमानों को केवल होटल की सार्वजनिक जगहों जैसे लॉबी या रिसेप्शन लाउंज में ही मिलने की अनुमति होगी. किसी भी गेस्ट को निजी होटल रूम तक ले जाने के लिए टीम मैनेजर की लिखित अनुमति जरूरी होगी. बोर्ड ने फ्रेंचाइजियों को हनीट्रैप और सुरक्षा जोखिमों को लेकर भी आगाह किया है. एडवाइजरी में कहा गया कि हाई-प्रोफाइल स्पोर्ट्स वातावरण में टारगेटेड कॉम्प्रोमाइज और हनीट्रैप जैसी घटनाओं का खतरा बना रहता है. इसके अलावा यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर कानूनी आरोपों की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता. BCCI ने सभी IPL फ्रेंचाइजियों से खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर लगातार सतर्क और सक्रिय रहने को कहा है ताकि किसी भी तरह के विवाद या सुरक्षा संकट से बचा जा सके.

स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल की मौजूदगी में समाधान शिविर में सैकड़ों मुद्दों का तुरंत निवारण

संवाद से संपूर्ण समाधान शिविर बना जनविश्वास का केंद्र, स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल की मौजूदगी में सैकड़ों समस्याओं का त्वरित निराकरण मनेन्द्रगढ़/एमसीबी छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी पहल “सुशासन तिहार 2026” के अंतर्गत विकासखंड खड़गवां के ग्राम मझौली में आयोजित “गांव-गांव, द्वार-द्वार सुशासन तिहार जनसमस्या निवारण शिविर संवाद से संपूर्ण समाधान कार्यक्रम में जनसैलाब उमड़ पड़ा। प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने वाले इस विशाल शिविर में ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही निराकरण कर शासन ने संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासन की मिसाल पेश की। ग्राम पंचायत अखराडांड, बरमपुर, मझौली, भूकभूकी, दुबछोला, ठग्गांव, दुग्गी, सिंघत, खड़गवां और पोडीडीह सहित कुल 10 ग्राम पंचायतों को शामिल करते हुए आयोजित इस शिविर में सुबह से ही बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याएं और आवेदन लेकर पहुंचे। शिविर ने “समाधान आपके द्वार” की अवधारणा को साकार करते हुए लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत दिलाई। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, जिला पंचायत सदस्य प्रिया मसराम, जनपद सदस्य श्यामबाई मरकाम, उपाध्यक्ष बीरेन्द्र सिंह करियाम, जनपद सदस्य इंद्रावती सिंह, धर्मपाल सिंह, सोनमती उर्रे सहित जनप्रतिनिधियों द्वारा छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। शुभारंभ के साथ ही पूरे शिविर परिसर में उत्साह, जनभागीदारी और भरोसे का वातावरण देखने को मिला। शिविर में एसडीएम विज्येन्द्र सारथी, जनपद सीईओ हेमंत बंजारे, तहसीलदार सिद्धि गबेल, सीपीएस दीपिका मिंज, सीएचएमओ अविनाश खरे सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी ने यह संदेश दिया कि शासन अब जनता की समस्याओं के समाधान के लिए गांव-गांव पहुंच रहा है। शिविर स्थल पर स्वास्थ्य, राजस्व, ग्रामीण यांत्रिकी, समाज कल्याण, कृषि, उद्यानिकी, वन, खाद्य, पुलिस, बिजली, लोक निर्माण, आयुष्मान कार्ड, महिला एवं बाल विकास, पशु चिकित्सा, पेयजल, बैंकिंग सेवाएं, आधार सेवा, मनरेगा और सामाजिक सुरक्षा सहित विभिन्न विभागों के आकर्षक एवं सुव्यवस्थित स्टॉल लगाए गए थे। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सभी स्टॉलों का निरीक्षण कर अधिकारियों को आमजन की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक संवेदनशीलता की झलक भी देखने को मिली, जब जनप्रतिनिधियों द्वारा गर्भवती महिलाओं बबीता, कदम कुंवर, रजंती, रोशनी, पप्पी, ममता, मानसी, सविता और उर्मिला की गोद भराई की रस्म संपन्न कराई गई। इससे शिविर केवल प्रशासनिक आयोजन न रहकर सामाजिक सरोकार का भी केंद्र बन गया। जनसमस्या निवारण शिविर में कुल 392 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। स्वास्थ्य मंत्री द्वारा छह हितग्राहियों को राशन कार्ड, आठ हितग्राहियों को वन अधिकार पट्टा, पांच लोगों को जाति प्रमाण पत्र, अठारह किसानों को किसान किताब, पांच हितग्राहियों को आवास की चाबी, पांच लोगों को आयुष्मान कार्ड तथा सात लोगों को नवीन जॉब कार्ड वितरित किए गए। इसके अलावा दो क्षय रोगियों को फूड बास्केट भी प्रदान किया गया। कई आवेदनों का मौके पर ही निराकरण कर ग्रामीणों को तत्काल राहत दी गई, जबकि शेष आवेदनों को समय-सीमा में समाधान हेतु संबंधित विभागों को सौंपा गया। अपने संबोधन में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में सुशासन की नई संस्कृति विकसित हुई है। उन्होंने कहा कि अब सरकार केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और मौके पर समाधान कर रही है। उन्होंने “सुशासन तिहार 2026” को जनहित, जवाबदेही और संवेदनशील प्रशासन की मिसाल बताते हुए कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गरीबों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए लगातार ऐतिहासिक फैसले ले रही है। स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पेयजल, राशन, आवास और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है। स्वास्थ्य मंत्री ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सरल व्यक्तित्व, संवेदनशील कार्यशैली और जनसेवा के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आने वाले समय में सुशासन और विकास का आदर्श राज्य बनकर उभरेगा। कार्यक्रम के अंत में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व विज्येन्द्र सारथी ने बताया कि शिविर में प्राप्त 392 से अधिक आवेदनों में से कई का मौके पर ही निराकरण कर हितग्राहियों को राहत प्रदान की गई है, जबकि शेष लंबित मामलों के त्वरित समाधान के लिए संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया है। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप प्रत्येक आवेदन का गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। कार्यक्रम में हृदय सिंह, रमेश जायसवाल, अशोक खरे, शंकर प्रताप गुप्ता, रामलाल साहू, हरबंस साहू, सतेन्द्र साहू, मनोज साहू, अंगद, सरपंच सुश्री जया सिंह मरावी, श्रीमती तुला, कुन्ती सिंह, सोनिया सिंह, सुनीता, रामबाई, संत कुमार सिंह, सुखीत लाल अगरिया, हरि सिंह, सचिव श्रीमती सुन्दर लली, उर्मिला, यशोदा, अनुराग दुबे, अशोक पाण्डेय, सीता सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

स्मार्ट मीटर अब पोस्टपेड मोड में, संचालन के आदेश जारी

स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड मोड में संचालित करने के आदेश जारी प्रदेश में समाप्त हुई स्मार्ट प्री-पेड मीटर व्यवस्था: ऊर्जा मंत्री   आरडीएसएस योजना के अंतर्गत लगे स्मार्ट मीटर तत्काल प्रभाव से होंगे पोस्टपेड उपभोक्ताओं को जून से मिलेगी पोस्टपेड बिलिंग सुविधा, स्मार्ट पोस्टपेड बिल हर माह 10 तारीख तक जारी होंगे अब सभी नए बिजली कनेक्शन स्मार्ट पोस्टपेड मोड में होंगे जारी 15 मई से 30 जून तक लगाए जाएंगे स्मार्ट मीटर शिकायत निस्तारण कैंप उपभोक्ता हित में लगातार फैसले ले रही योगी सरकार: ए.के. शर्मा लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश भर में लगे सभी स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड मोड में संचालित करने के आदेश जारी कर दिए हैं। ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने बताया कि आरडीएसएस योजना के तहत लगाए गए सभी स्मार्ट मीटर तत्काल प्रभाव से पोस्टपेड प्रणाली में बदले जा रहे हैं। इसके बाद उपभोक्ताओं को बिजली इस्तेमाल करने के बाद बिल मिलेगा। मई 2026 की खपत का बिल जून 2026 में पोस्टपेड प्रणाली के तहत जारी किया जाएगा। ऊर्जा मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने आम विद्युत उपभोक्ताओं की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रदेश में संचालित स्मार्ट प्री-पेड मीटर व्यवस्था को समाप्त कर सभी स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड मोड में संचालित करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं। पूर्वांचल, मध्यांचल, दक्षिणांचल, पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगमों और केस्को कानपुर में लागू यह व्यवस्था उपभोक्ताओं को बड़ी राहत प्रदान करेगी।  ऊर्जा मंत्री ने कहा कि उपभोक्ताओं को बिल एसएमएस और व्हाट्सएप के जरिये उपलब्ध कराया जाएगा। स्मार्ट पोस्टपेड बिल प्रत्येक माह की 10 तारीख तक जारी किए जाएंगे। जिन क्षेत्रों में नेटवर्क अथवा संचार संबंधी समस्या के कारण स्मार्ट मीटर की ऑटोमैटिक रीडिंग प्राप्त नहीं होगी, वहां एएमआईएसपी एजेंसियों के माध्यम से मैनुअल रीडिंग लेकर समय से बिल उपलब्ध कराया जाएगा। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि जिन उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबर सिस्टम में पंजीकृत नहीं हैं या गलत दर्ज हैं, उनके लिए डिस्कॉम स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। साथ ही उपभोक्ता संबंधित विद्युत वितरण निगम के व्हाट्सएप चैटबॉट एवं 1912 हेल्पलाइन के माध्यम से भी अपना बिल प्राप्त कर सकेंगे। प्रदेश में अब सभी नए विद्युत संयोजन स्मार्ट पोस्टपेड मोड में ही जारी किए जाएंगे। पूर्व में प्री-पेड व्यवस्था लागू होने के दौरान समायोजित की गई सुरक्षा धनराशि को अब विद्युत प्रदाय संहिता-2005 एवं कॉस्ट डाटा बुक-2026 के प्रावधानों के अनुसार चार समान मासिक किस्तों में उपभोक्ताओं के बिलों में जोड़ा जाएगा। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि पोस्टपेड उपभोक्ताओं को पूर्व की भांति बिल जारी होने की तारीख से 15 दिन का भुगतान समय और उसके बाद 7 दिन की डिस्कनेक्शन अवधि प्रदान की जाएगी। निर्धारित समय तक भुगतान न होने पर विद्युत प्रदाय संहिता एवं टैरिफ आदेश के अनुसार विलंब अधिभार लागू होगा। घरेलू उपभोक्ताओं को विशेष राहत देते हुए 30 अप्रैल 2026 तक के बकाया विद्युत बिल को 10 आसान किस्तों में जमा करने की सुविधा प्रदान की गई है। जबकि अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं को 40, 30 और 30 प्रतिशत की तीन किस्तों में भुगतान की सुविधा मिलेगी। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि स्मार्ट मीटर एवं बिजली बिलों से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए 15 मई 2026 से 30 जून 2026 तक अधिशासी अभियंता एवं उपखंड अधिकारी कार्यालयों पर विशेष कैंप एवं सहायता केंद्र लगाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त 1912 हेल्पलाइन पर भी विशेष व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है, ताकि उपभोक्ताओं की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके।

वर्षों से लापता लोगों की तलाश में जुटी एमसीबी पुलिस, आमजन से मांगा सहयोग

वर्षों से लापता लोगों की तलाश में जुटी एमसीबी पुलिस, आमजन से मांगा सहयोग बुजुर्ग महिला से लेकर युवाओं तक के कई मामलों में अब तक नहीं मिला सुराग, पुलिस ने जारी किए संपर्क नंबर मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिले में वर्षों से लापता लोगों की तलाश को लेकर मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर पुलिस ने अभियान तेज कर दिया है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा आम नागरिकों से अपील की गई है कि यदि किसी भी गुमशुदा व्यक्ति के संबंध में कोई जानकारी मिले तो तत्काल पुलिस को सूचित करें, ताकि उन्हें सुरक्षित उनके परिजनों तक पहुंचाया जा सके। पुलिस के अनुसार थाना चिरमिरी क्षेत्र से वर्ष 2020 में लापता हुई 75 वर्षीय श्रीमती कुसुमनी पति संतोष कुमार राय निवासी गोदरीपारा, चालिस घोड़ा का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। बताया गया कि 24 नवंबर 2020 की रात वे घर से बिना बताए कहीं चली गई थीं। परिजनों ने आसपास के क्षेत्रों एवं रिश्तेदारों के यहां काफी तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी। इसी तरह वर्ष 2019 में थाना चिरमिरी में दर्ज एक अन्य मामले में 20 वर्षीय विक्रम पिता सची शंकर निवासी छोटी बाजार, दलगंजन दफाई भी अचानक घर से लापता हो गया था। परिवार द्वारा लगातार खोजबीन किए जाने के बावजूद युवक का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। वहीं तीसरे मामले में 26 वर्षीय श्रीमती जयमती सारथी पति बहादुर सारथी निवासी परसिया थाना ओड़गी जिला सूरजपुर वर्ष 2020 से लापता हैं। जानकारी के अनुसार पारिवारिक विवाद के बाद वे घर से निकल गई थीं, जिनकी तलाश लगातार जारी है। इसी कड़ी में थाना चिरमिरी क्षेत्र से वर्ष 2020 में लापता हुई 82 वर्षीय वृद्ध महिला खिरो नायक का मामला भी पुलिस के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। गुम इंसान क्रमांक 15/2020 के तहत दर्ज मामले में खिरो नायक, पति स्वर्गीय धनु नायक निवासी हरीनगर ईवाई हल्दीबाड़ी थाना चिरमिरी, 19 अगस्त 2020 को दोपहर करीब 12 बजे घर से बिना बताए कहीं चली गई थीं। परिजनों द्वारा काफी खोजबीन के बाद 21 अगस्त 2020 को थाना चिरमिरी में गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। एमसीबी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि गुमशुदा व्यक्तियों की तलाश उनकी प्राथमिकता में शामिल है और सभी थाना एवं चौकी प्रभारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। पुलिस प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को इन गुमशुदा लोगों के संबंध में कोई भी जानकारी प्राप्त होती है तो तत्काल पुलिस को सूचित करें। संपर्क हेतु पुलिस अधीक्षक एमसीबी – 9479194855, सीएसपी चिरमिरी – 9479193703, थाना चिरमिरी – 9479193709 तथा कंट्रोल रूम – 9479160180 पर जानकारी दी जा सकती है।

डीजीपी ने एनसीआरबी आंकड़ों को बताया यूपी की मजबूत कानून-व्यवस्था का प्रमाण

एनसीआरबी के आंकड़े यूपी की मजबूत कानून-व्यवस्था की गवाही: डीजीपी राष्ट्रीय क्राइम रेट से काफी कम रहा यूपी का क्राइम रेट अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति धरातल पर उतरी लखनऊ  पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने कहा है कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की वर्ष 2024 रिपोर्ट निर्विवाद रूप से स्थापित करती है कि क्राइम रेट ही विभिन्न राज्यों के बीच अपराध की तुलना का एकमात्र वैज्ञानिक और सांख्यिकीय दृष्टि से उचित आधार है। राष्ट्रीय क्राइम रेट 252.3 के मुकाबले उत्तर प्रदेश का क्राइम रेट मात्र 180.2 है। यह सुधार सतत और सुविचारित प्रयासों का प्रतिफल है। यह साबित करता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में अपराध व अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति कागज़ों से निकलकर धरातल पर उतरी है।  कठोर कार्रवाई से स्थापित किया कानून-व्यवस्था का राज पुलिस महानिदेशक ने कहा कि गत 9 वर्षों में आधुनिक पुलिस स्टेशन, सतर्क एंटी-रोमियो स्क्वॉड, हर थाने पर समर्पित महिला हेल्प डेस्क, कमज़ोर वर्गों को त्वरित न्याय दिलाने वाले फास्ट-ट्रैक कोर्ट और संगठित अपराधों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई ने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था का राज स्थापित किया है। एनसीआरबी के आंकड़े इसी की गवाही देते हैं। छोटी से छोटी शिकायत का संज्ञान लेती है यूपी पुलिस पुलिस महानिदेशक ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कोई भी व्यक्ति बिना किसी भय-संकोच के पुलिस थाने जाकर शिकायत दर्ज करा सकता है। उत्तर प्रदेश पुलिस इसके प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। हम डिजिटल माध्यमों पर भी आई छोटी से छोटी शिकायत का संज्ञान लेते हैं और जहां भी उचित हो, उसे एफआईआर में परिवर्तित करते हैं। अधिक पंजीकरण एक अधिक संवेदनशील, सुलभ और पारदर्शी पुलिस बल की पहचान है। यही वह संस्कृति है, जिसका निर्माण उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विज़न के तहत कर रही है।

रायपुर कार्यक्रम के दौरान अनूपपुर में हुआ राष्ट्रीय अध्यक्ष का हुआ स्वागत

रायपुर कार्यक्रम के दौरान अनूपपुर में हुआ राष्ट्रीय अध्यक्ष का हुआ स्वागत अनूपपुर  राष्ट्रीय स्वर्णकार समाज राजनीतिक एवं भागीदारी मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जीतेंद्र वर्मा स्वर्णकार जी का रायपुर से कार्यक्रम वापस के दौरान अनूपपुर स्टेशन पहुंचने पर काफी संख्या में स्वर्णकार समाज के लोगों द्वारा स्वागत वंदन अभिनंदन कर स्वर्णकार समाज को आगे बढ़ाने की दिशा में चर्चा की गई इस दौरान स्वर्णकार समाज के काफी संख्या में लोग मौजूद थे जिसमें मुख्य रूप से श्री डल्लू कुमार सोनी राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति ने मुलाकात की इस दौरान विनय कुमार सोनी एडवोकेट जिला अध्यक्ष अनूपपुर,ओमप्रकाश सोनी वरिष्ठ समाजसेवी एवं जिला अध्यक्ष अनूपपुर अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति के साथ अन्य पदाधिकारी ने की राष्ट्रीय अध्यक्ष का पुष्पकुंज से स्वागत कर उनसे मुलाकात की.

KL Rahul बनाम Sunil Narine: अरुण जेटली में कौन मारेगा बाजी?

नई दिल्ली साउथ-ईस्ट दिल्ली के सरिता विहार इलाके में बीती रात पुलिस और बदमाशों के बीच एकनाउंटर हुआ। दोनों ओर से 6 राउंड गोलियां चलीं। हालांकि गोली किसी को नहीं लगी। इसके बाद पुलिस ने 6 बदमाशों को पकड़ा। ये सभी बांग्लादेशी हैं। जो यहां डकैती की वारदात करते थे। खबर लिखे जाने तक आरोपियों से पूछताछ की जा रही थी। पुलिस सूत्र ने बताया कि क्राइम ब्रांच की एंटी एक्सटॉर्शन किडनैपिंग सेल टीम को सूचना मिली थी कि सरिता विहार इलाके में कुछ बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहे हैं। सूचना के आधार पर क्राइम ब्रांच की टीम उन्हें पकड़ने पहुंची थी। टीम ने मौके पर घेराबंदी कर बदमाशों को पकड़ने की कोशिश की तो उन्होंने आत्मसमर्पण करने के बजाय पुलिस पार्टी पर फायरिंग शुरू कर दी। 6 बांग्लादेशी बदमाशों को दबोचा बदमाशों की ओर से कुल तीन राउंड फायर किए गए। आत्मरक्षा और अपराधियों को काबू करने के लिए पुलिस टीम ने भी जवाबी कार्रवाई में तीन राउंड गोलियां चलाईं। गनीमत रही कि इस गोलाबारी में पुलिस टीम का कोई भी सदस्य या आरोपी घायल नहीं हुआ। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए सभी छह बांग्लादेशी बदमाशों को दबोच लिया। बड़ी संभावित वारदात को टली तलाशी के दौरान बदमाशों के पास से तीन देसी कट्टे, 1 देसी 12 बोर की बंदूक, पांच कारतूस और एक बटनदार चाकू बरामद हुआ। पकड़े गए सभी आरोपी मूल रूप से बांग्लादेश के रहने वाले बताए जा रहे हैं। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि ये लोग कब से दिल्ली में रह रहे थे और इनके तार किन-किन वारदातों से जुड़े हैं। साथ ही, इनके अवैध रूप से सीमा पार करने और स्थानीय संपर्कों की भी जांच की जा रही है। दावा किया जा रहा है कि सफल ऑपरेशन ने इलाके में एक बड़ी संभावित वारदात को टाल दिया है।  

उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा का रिजल्ट जारी, योगी सरकार में भर्ती प्रक्रिया रही पारदर्शी

योगी सरकार में पारदर्शी भर्ती, उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा का परिणाम जारी 15 लाख से अधिक अभ्यर्थियों का इंतजार खत्म, 12,333 अभ्यर्थी अगले चरण के लिए सफल घोषित डीवी/पीएसटी की प्रक्रिया मई के तीसरे सप्ताह में होगी आयोजित  14 और 15 मार्च 2026 को चार पालियों में आयोजित हुई थी परीक्षा लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया का एक और बड़ा उदाहरण सामने आया है। गुरुवार को उप निरीक्षक नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया गया है। 4543 पदों के लिए आयोजित इस भर्ती प्रक्रिया में 15,75,760 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। परिणाम जारी होने के साथ ही लाखों युवाओं का इंतजार खत्म हो गया है। 12,333 अभ्यर्थी अगले चरण के लिए सफल घोषित उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने नियमावली और निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा परिणाम घोषित किया है। परीक्षा 14 और 15 मार्च 2026 को चार पालियों में आयोजित की गई थी। पूरी प्रक्रिया अपनाते हुए प्रत्येक विषय में न्यूनतम 35 प्रतिशत और कुल 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों में से मेरिट और आरक्षण के आधार पर 12,333 अभ्यर्थियों को अभिलेख सत्यापन एवं शारीरिक मानक परीक्षण (डीवी/पीएसटी) के लिए सफल घोषित किया गया है। निष्पक्ष और समयबद्ध भर्ती से युवाओं में बढ़ा भरोसा योगी सरकार में भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी, तकनीकी रूप से मजबूत और समयबद्ध बनाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। यही वजह है कि युवाओं का सरकारी भर्तियों के प्रति भरोसा मजबूत हुआ है। भर्ती बोर्ड के मुताबिक, डीवी/पीएसटी की प्रक्रिया मई के तीसरे सप्ताह में आयोजित की जाएगी। इसकी पूरी जानकारी जल्द ही बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी।