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पश्चिम बंगाल फतह के बाद अमित शाह का बड़ा बयान, कार्यकर्ताओं को दी श्रद्धांजलि; ममता पर भी साधा निशाना

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी भाजपा की पहली सरकार के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। विधायक दल के नेता के रूप में उनके चयन की घोषणा के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में भाजपा के संघर्ष को याद किया और उन 321 कार्यकर्ताओं को श्रेय दिया जिन्होंने राज्य में भगवा पार्टी को मजबूत करने के लिए अपनी जान गंवाई। उन्होंने कहा कि यह जीत जितनी आनंददायक है, उसका रास्ता असहनीय पीड़ा से भरा हुआ है। शाह ने भवानीपुर से ममता बनर्जी की हार पर भी चुटकी ली और कहा कि शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें घर में हराया है। अमित शाह ने कहा कि पश्चिम बंगाल में मत की अभिव्यक्ति लगभग असंभव थी। सैकड़ों उदाहरण हिंसा और क्रूरता के, उसके बीच में भाजपा और हमारे नेता नरेंद्र मोदी पर जो भरोसा करके बंगाल की जनता ने जो प्रचंड विजय हमें दी है उसके लिए जनता का आभार है। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता ने जो अपेक्षाएं रखी हैं, पूरा प्रयास होगा कि विश्वास को तनिक भी ठेस ना पहुंचे। शाह ने कहा कि बंगाल की संस्कृति और बंगाल की परंपरा को 5 दशक से विदेशी विचाराधारा से प्रेरित शासन से मुक्त करके फिर से एक बार रामकृष्ण ठाकुर, विवेकानंद, महर्षि अरविंद और कविगुरु टैगोर की कल्पना का बंगाल बनाने की दिशा में काम करेंगे। शाह ने कहा कि जिन श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में जिस विचारधारा की शुरुआत 1950 में हुई, 2026 में उनकी जन्मभूमि में उनकी पार्टी की सरकार बनी है। जब धारा 370 हटी तो देशभर के कार्यकर्ताओं के मन में खुशी की लहर थी। कई वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने कहा कि कसक बाकी है। उन्होंने कहा था कि बंगाल में भाजपा का झंडा लहराना बाकी है। श्यामा प्रसाद जी जहां भी होंगे मुक्त मन से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को आशीर्वाद देते होंगे कि उनके नृत्व ने भाजपा को गंगोत्री से गंगासागर तक पहुंचाया। इस जीत के लिए 321 कार्यकर्ताओं ने जान गंवाई: अमित शाह बंगाल में भाजपा के खाता खुलने से सरकार बनने तक की यात्रा को याद करते हुए अमित शाह ने उनक कार्यकर्ताओं को भी नमन किया जो राजनीतिक हिंसा का शिकार हो गए। उन्होंने कहा, ‘2014 के उपचुनाव में समिक भट्टाचार्य ने उपचुनाव जीतकर हमारा खाता खोला। 16 में तीन हुए। 21 में 77 हुए और 2026 में 207 के साथ हमारा मुख्यमंत्री है। यह यात्रा जितनी भव्य है, आनंददायक है, यात्रा का मार्ग असहनीय पीड़ा से भरा हुआ है। मैं भूल नहीं सकता कि भाजपा के 321 देवतुल्य कार्यकर्ताओं ने अपनी जान इस जीत के लिए गंवाई है। केरल और बंगाल के अलावा कहीं हिंसा का क्रूर तांडव नहीं देखा। मैं हृदय के भाव के साथ उन सभी कार्यकर्ताओं के परिवार को भाजपा के करोड़ों कार्यकर्ताओं की तरफ से भावपूर्वक नमन करता हूं। आपके परिवार के स्वजन ने बलिदान करके हमारी विचारधारा को तो मजबूत किया ही है, पश्चिम बंगाल की सीमा को मजबूत करके पूरे भारत को मजबूत किया है।’ अब घुसपैठ असंभव: अमित शाह शाह ने घुसपैठ और गो तस्करी को असंभव बनाने का वादा करते हुए कहा, ‘त्रिपुरा में हमारी सरकार है, असम में सरकार है और बंगाल में भी हमारी सरकार बनी है, घुसपैठ असंभव होने वाली है। गो तस्करी असंभव होने वाली है। बंगाल सरकार और भारत सरकार सीमा को राष्ट्र की सुरक्षा के अभेद्य किले के रूप में परिवर्तित करेगी।’ गृहमंत्री ने शांतिपूर्वक चुनाव के लिए चुनाव आयोग, सुरक्षाबलों और बंगाल पुलिस की तारीफ की। ममता बनर्जी की हार पर ली चुटकी भाजपा के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि 9 जिले ऐसे हैं जहां सभी सीटें भाजपा ने जीतीं और टीएमसी का पूरी तरह सूपड़ा साफ हो गया। 23 जिलों में से 20 में भाजपा नंबर एक पार्टी है। एक भी जिला ऐसा नहीं जहां हमारा विधायक नहीं है। उन्होंने भवानीपुर से ममता बनर्जी की हार पर चुटकी ली। शाह ने कहा, 'मैं भवानीपुर की जनता का भी मैं बहुत बहुत धन्यवाद करना चाहता हूं। शुभेंदु दा ने पिछले चुनाव में दीदी को नंदीग्राम में हराया था। मैंने दीदी का एक इंटरव्यू देखा था, वह कहती थीं कि मैं उनके घर में लड़ने के लिए चली गई। दीदी इस बार तो शुभेंदु दा ने आपके घर में आकर हराया है। मैं भवानीपुर की जनता का भी हृदयपूर्वक धन्यवाद करना चाहता हूं।'

तेज हवाओं और बारिश से पटना में तबाही, पेड़ गिरे और गाड़ियां क्षतिग्रस्त, मौसम विभाग की चेतावनी

 पटना बिहार की राजधानी पटना में मौसम एक बार फिर खराब हो गया है। शुक्रवार 8 मई को दोपहर में अचानक शहर के आसमान में काले बादलों ने डेरा डाल दिया। दिन में 4 बजे ही अंधेरा छा गया और तेज हवाओं के साथ शाम को बारिश शुरू हो गई। आंधी से जगह-जगह पेड़ गिर गए। मौसम विभाग ने तात्कालिक पूर्वानुमान जारी करते हुए बिहार के 6 जिलों में शाम को आंधी, बारिश, वज्रपात का रेड अलर्ट जारी किया है। इनमें मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, शिवहर और सीतामढ़ी जिले शामिल हैं। इससे पहले औरंगाबाद, गयाजी, पटना, जहानाबाद और अरवल जिले में भी रेड अलर्ट की चेतावनी जारी की गई। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के भीतर राज्य भर में मौसम खराब रहने की आशंका जताई है। शनिवार 9 मई को राज्य के अधिकांश जिलों में मेघगर्जन, आकाशीय बिजली गिरने, बारिश के साथ आंधी और ओलावृष्टि का खतरा बना रहेगा। लोगों से खराब मौसम में सावधान रहने की अपील की गई है। पटना में बारिश पटना में गिरे पेड़, गाड़ियां दबीं राजधानी में शुक्रवार दोपहर बाद आई आंधी से कई जगहों पर नुकसान की खबर है। हार्डिंग रोड सिंचाई भवन के पास तेज हवा से एक पेड़ गिर गया, इससे ठेला और बाइक उसके नीचे दब गई। हज भवन के पास भी सड़क किनारे पेड़ गिरने से एक गाड़ी उसके नीचे दब गई। फिलहाल किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। पटना में आंधी से गिरे पेड़ बिहार में जारी है आंधी, बारिश का दौर बिहार में इस सप्ताह मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है। इससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत तो मिली है, लेकिन आंधी, ओलावृष्टि और वज्रपात से विभिन्न जिलों में पिछले कुछ दिनों में दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है। पटना स्थित मौसम विज्ञान केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार को दक्षिण बिहार, पूर्वी बिहार और सीमांचल के कुछ जिलों में बरसात हुई। किशनगंज, अररिया, गयाजी, मधेपुरा, नवादा, रोहतास, नालंदा, कैमूर जैसे जिलों में कुछ जगहों पर पानी गिरा। पटना में दो दिन बारिश के आसार राजधानी में अगले दो दिनों तक आंधी-बारिश के आसार हैं। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक 9 और 10 मई को पटना में बादल छाए रहेंगे और मेघगर्जन के साथ बारिश के एक-दो दौर चल सकते हैं। अधिकतम और न्यूनतम तापमान में भी दो से तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने की संभावना है। कब तक खराब रहेगा बिहार का मौसम? मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिमी यूपी में एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इसके अलावा दक्षिण-पश्चिमी यूपी और उससे सटे बिहार के इलाकों में भी हवा का एक चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है। इसका असर मौसम पर दिख रहा है। 9 मई को बिहार के अधिकांश हिस्सों में बरसात की संभावना जताई जा रही है। अगले सप्ताह से मौसम के सामान्य होने के आसार हैं। आंधी-बारिश का दौर खत्म होने के बाद राज्य में तापमान में अचानक बढ़ोतरी होगी। साथ ही भीषण गर्मी का दौर फिर शुरू हो जाएगा।

जल जीवन मिशन घोटाला: मास्टरमाइंड संजय बड़ाया थाईलैंड फरार, जांच तेज

 जयपुर राजस्थान की पूर्व कांग्रेस सरकार के दौरान हुए 960 करोड़ रुपये के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई तेज हो गई है. दिल्ली से पूर्व रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद, अब पूर्व मंत्री महेश जोशी एसीबी की गिरफ्त में हैं और 5 दिन की पुलिस रिमांड पर हैं. एसीबी की पूछताछ में इस घोटाले के तार विदेश तक जुड़ते नजर आ रहे हैं. सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड और मुख्य दलाल संजय बड़ाया (Sanjay Badaya) गिरफ्तारी के डर से थाईलैंड भाग गया है. संजय बड़ाया क्या करता था? सूत्रों के मुताबिक, संजय बड़ाया इस पूरे घोटाले की अहम कड़ी है. वह पूर्व मंत्री महेश जोशी और रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल, दोनों का बेहद करीबी माना जाता है. एसीबी की जांच में सामने आया है कि बड़ाया के जिम्मे पैसों के लेन-देन का प्रबंधन करना, अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग में दलाली खाना, अपने चहेते लोगों को PWD विभाग में लगवाना और टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी करवाकर ठेके दिलवाना जैसे काम थे. एसीबी की टीम को भनक लगने से पहले ही वह एक शादी में शामिल होने के बहाने थाईलैंड भाग गया. अब एसीबी उसके भारत लौटते ही उसे गिरफ्तार करने की तैयारी में है. कैसे हुआ 960 करोड़ का फर्जीवाड़ा? साल 2023 में दर्ज हुए इस मुकदमे में जांच एजेंसियों ने पाया कि मंत्री रहते हुए महेश जोशी ने टेंडर प्रक्रिया में जमकर नियमों की धज्जियां उड़ाईं. 'मैसर्स गणपति ट्यूबवेल' और 'मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवेल' को नियमों के विपरीत जाकर करोड़ों के टेंडर बांटे गए. इन दोनों कंपनियों ने इरकॉन इंटरनेशनल (Ircon International) के फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर गैर-कानूनी तरीके से ये टेंडर हासिल किए थे. एसीबी इन दोनों कंपनियों के मालिकों सहित अब तक 11 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है. महेश जोशी से ACB पूछ रही ये सवाल एसीबी के डीजी गोविंद गुप्ता के अनुसार, महेश जोशी से गहन पूछताछ जारी है. एसीबी की टीम मुख्य रूप से इन तीन सवालों के जवाब तलाश रही है. पहला सवाल- घोटाले का पैसा कहां गया और उसे कहां ठिकाने लगाया गया है? दूसरा सवाल- टेंडर प्रक्रिया में किस प्रकार की शिकायतें थीं और पद का दुरुपयोग कैसे किया गया? तीसरा सवाल- संजय बड़ाया और अन्य फरार आरोपियों के साथ वित्तीय लेन-देन की क्या व्यवस्था थी?

अवैध कॉलोनियों पर सख्ती की तैयारी, मध्यप्रदेश में 10 साल की सजा और भारी जुर्माने का प्रस्ताव

भोपाल प्रदेश में अवैध कॉलोनियों का जाल लगातार फैलता जा रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि सरकार के पास अब तक इनकी वास्तविक संख्या का अद्यतन रिकॉर्ड ही मौजूद नहीं है। वहीं, दूसरी ओर नगरीय प्रशासन विभाग अवैध कॉलोनियों पर सख्त कार्रवाई के लिए नया कानून तैयार कर रहा है, जिसमें अवैध कॉलोनाइजरों पर जुर्माना और सजा कई गुना बढ़ाने की तैयारी है। वर्ष 2016 के पुराने आंकड़े वर्ष 2016 में नगरीय प्रशासन विभाग ने प्रदेश में 7,981 अवैध कॉलोनियों की पहचान की थी। इनमें से 3,155 कॉलोनियां केवल प्रदेश के 16 नगर निगम क्षेत्रों में चिह्नित की गई थीं। उस समय ग्वालियर नगर निगम में सबसे अधिक 696 अवैध कॉलोनियां दर्ज की गईं। उसके बाद इंदौर नगर निगम था, जहां 636 कॉलोनियां चिह्नित हुईं थीं। इसके अलावा खंडवा में 338, भोपाल में 320 और जबलपुर में 224 अवैध कॉलोनियां सामने आई थीं।  

मोबाइल एप के जरिए होगा प्रतिदिन चार लाख लीटर से ज्यादा दूध का कारोबार

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गांव की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम अब तकनीक के नए दौर में प्रवेश करने जा रही है। अवध क्षेत्र और आसपास के 10 जिलों में कार्यरत ‘सामर्थ्य दुग्ध उत्पादक कंपनी’ के जरिए ग्रामीण महिलाएं अब आधुनिक तकनीक और मोबाइल एप के माध्यम से दुग्ध उत्पादन, संग्रह और भुगतान व्यवस्था को संचालित कर सकेंगी। इस पहल से प्रतिदिन चार लाख लीटर से अधिक दूध के व्यापार को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। योगी सरकार के कार्यकाल में गांव की महिलाओं के लिए तैयार किया गया पारदर्शी दुग्ध नेटवर्क अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ताकत बनता जा रहा है। अवध और आसपास के जिलों में सवा लाख से अधिक महिलाओं को इससे जोड़ा जा चुका है, जिनके हाथों में अब केवल दुग्ध उत्पादन ही नहीं बल्कि तकनीकी प्रबंधन की जिम्मेदारी भी होगी। गांव-गांव बने दुग्ध संग्रह केंद्र सामर्थ्य दुग्ध उत्पादक कंपनी द्वारा गांव गांव दुग्ध संग्रह केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां किसानों के यहां से दूध को उचित मूल्य पर खरीदा जा रहा है। इसे महिलाएं ही संचालित करती हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला है, वहीं पशुपालकों को भी बाजार की अनिश्चितताओं से राहत मिली है। योगी सरकार की प्राथमिकता केवल खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि भुगतान व्यवस्था को भी पूरी तरह पारदर्शी बनाया गया है। महिला किसानों को महीने में तीन बार, दस-दस दिन के अंतराल पर सीधे उनके बैंक खातों में भुगतान किया जाता है। इससे बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हो गई है। इन जिलों में तैयार हुआ नेटवर्क लखनऊ, अयोध्या, रायबरेली, अमेठी सुल्तानपुर, बाराबंकी, उन्नाव, प्रतापगढ़ कानपुर नगर और फतेहपुर में ग्रामीण महिलाओं का विशाल नेटवर्क तैयार किया गया है। ‘सामर्थ्य साथी’ एप से मिलेगा हर दिन का हिसाब दुग्ध कारोबार को पूरी तरह डिजिटल बनाने के लिए ‘सामर्थ्य साथी’ नाम से मोबाइल एप शुरू किया गया है। इस एप के जरिए दुग्ध उत्पादकों को रियल टाइम दूध बिक्री, भुगतान, गुणवत्ता जांच और अन्य आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। ग्रामीण महिलाओं को तकनीक से जोड़ना केवल सुविधा नहीं बल्कि आर्थिक सशक्तीकरण का बड़ा माध्यम है। इसी उद्देश्य से गांव स्तर पर महिलाओं को डिजिटल प्रशिक्षण और तकनीकी जागरूकता भी की जा रही है। पारदर्शिता से बढ़ा महिलाओं का भरोसा दूध की गुणवत्ता जांच से लेकर पैसे के भुगतान तक पूरी प्रक्रिया तकनीक आधारित होने से दुग्ध उत्पादकों का भरोसा तेजी से बढ़ा है। ग्रामीण महिलाएं अब केवल पशुपालन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डेटा, भुगतान और डिजिटल रिकॉर्ड की निगरानी भी स्वयं कर रहीं हैं। योगी सरकार की यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को नई पहचान देने के साथ ही ‘आत्मनिर्भर गांव’ मॉडल को भी मजबूत करती दिखाई दे रही है। दुग्ध क्रांति अब गांव की चौपाल से मोबाइल स्क्रीन तक पहुंच रही है।

कोलकाता के गेंदबाजों का कमाल, दिल्ली को 142 रन पर रोका

दिल्ली दिल्ली कैपिटल्स को केएल राहुल और पथुम निसांका ने अच्छी शुरुआत दिलाई। दोनों के बीच पहले विकेट के लिए 49 रन की साझेदारी हुई। सलामी बल्लेबाज केएल राहुल 14 गेंद में 23 रन बनाकर आउट हुए। कार्तिक त्यागी ने उन्हें आउट किया। नितीश राणा 8 रन बनाकर ग्रीन का शिकार बने। समीर रिजवी 7 गेंद में तीन रन ही बना सके। ट्रिस्टन स्टब्स 4 गेंद में दो रन बनाकर आउट हुए। दिल्ली कैपिटल्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच शुक्रवार को आईपीएल मुकाबला अरुण जेटली स्टेडियम में खेला जा रहा है। कोलकाता के कप्तान अजिंक्य रहाणे ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है। दिल्ली टीम में दो बदलाव किये गए हैं । टी नटराजन की जगह मुकेश कुमार और करूण नायर की जगह विपराज निगम खेलेंगे। केकेआर ने टीम में कोई बदलाव नहीं किया है। दोनों ही टीमें जीतने से ज्यादा मुकाबले गंवा चुकी हैं। दिल्ली कैपिटल्स की टीम ने आईपीएल 2026 में 10 मैच खेलते हुए 4 में जीत हासिल की है, जबकि 6 गंवाए हैं। वहीं कोलकाता नाइट राइडर्स ने 9 मैच खेले हैं और तीन जीते हैं, जबकि पांच गंवाए हैं। अजिंक्य रहाणे के नेतृत्व वाली कोलकाता की टीम ने लगातार पांच मुकाबले गंवाए थे लेकिन पिछले तीन मैचों में टीम ने वापसी की है और सभी मैच जीते हैं। दिल्ली-कोलकाता प्लेइंग इलेवन दिल्ली कैपिटल्स (प्लेइंग इलेवन): पथुम निसांका, केएल राहुल (विकेट कीपर), नीतीश राणा, समीर रिजवी, ट्रिस्टन स्टब्स, अक्षर पटेल (कप्तान), आशुतोष शर्मा, विप्रज निगम, मिशेल स्टार्क, लुंगी एनगिडी, मुकेश कुमार कोलकाता नाइट राइडर्स (प्लेइंग इलेवन): अजिंक्य रहाणे (कप्तान), अंगकृष रघुवंशी (विकेट कीपर), कैमरून ग्रीन, रोवमैन पॉवेल, मनीष पांडे, रिंकू सिंह, सुनील नरेन, अनुकूल रॉय, कार्तिक त्यागी, वैभव अरोड़ा, वरुण चक्रवर्ती

इंदौर के डायल 112 हीरोज संवेदनशीलता और तत्परता से भटके बालक को सुरक्षित परिजनों से मिलाया

भोपाल  इंदौर जिले के थाना किशनगंज क्षेत्र में डायल-112 जवानों की सजगता और संवेदनशील कार्यवाही से घर का रास्ता भटक गए 11 वर्षीय बालक को सुरक्षित उसके परिजनों से मिलाया गया। समय पर की गई इस कार्रवाई से बालक को सुरक्षित संरक्षण मिला और परिजनों की चिंता दूर हो सकी। 07 मई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना किशनगंज क्षेत्र अंतर्गत रॉयल रेसीडेंसी के पास एक 11 वर्षीय बालक अकेला मिला है, जो घर का रास्ता भटक गया है। पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही किशनगंज थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को तत्काल मौके के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्‍टॉफ उप निरीक्षक मती कृष्णा, आरक्षक  सुनील एवं पायलट  राजेंद्र ठाकुर ने मौके पर पहुंचकर बालक को अपने संरक्षण में लिया। बालक घबराया हुआ था और अपने परिजनों के संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहा था। डायल-112 जवानों ने बालक को एफआरव्ही वाहन से साथ लेकर आसपास के क्षेत्र में पूछताछ तथा उसके परिजनों की तलाश की। लगातार प्रयासों के बाद बालक के परिजनों की जानकारी प्राप्त हुई, जिसके बाद टीम बालक को लेकर उनके पास पहुँची। पहचान एवं सत्यापन उपरांत बालक को सुरक्षित परिजनों के सुपुर्द किया गया। अपने बच्चे को सकुशल पाकर परिजनों ने डायल-112 सेवा और पुलिस जवानों का आभार व्यक्त किया। डायल 112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा बच्चों की सुरक्षा और सहायता के लिए हर समय संवेदनशीलता, धैर्य और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने हेतु सदैव प्रतिबद्ध है।  

मानसून से पहले नदियों और बड़े नालों का पानी रोकने की क्षमता को बढ़ाया जा रहा

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बाढ़ नियंत्रण और प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए बड़े बदलाव कर रही है। सरकार बाढ़ नियंत्रण की पारंपरिक विधियों की जगह कुछ नए तरीके अपना रही है, जिससे करोड़ों रुपये की बचत होगी। साथ ही बाढ़ नियंत्रण के लिए किसानों की जमीनों का बार-बार अधिग्रहण नहीं करना पड़ेगा।  प्रदेश सरकार ने बाढ़ प्रभावित जिलों में नए तरीकों से लगभग 40.72 लाख हेक्टेयर भूमि को सुरक्षित किया और 3 करोड़ से ज्यादा लोगों को इससे फायदा मिला। इसके बाद बाढ़ नियंत्रण के नए तरीकों को विस्तार देने की तैयारी चल रही है। अब तक बाढ़ नियंत्रण और प्रबंधन के लिए पत्थर की बड़ी मेड़, गैबियन दीवारें (लोहे की तार के बक्सों में पत्थर की दीवार), बड़े-बड़े बांध और तटबंध बनाने का ध्यान दिया जा रहा था। वहीं दूसरे तरीके में कई जगहों पर संवेदनशील क्षेत्रों में नदी और बड़े नालों से गाद निकालने, कीचड़ हटाने पर ध्यान दिया जा रहा है। ताकि नदी के मार्ग और मोड़ को पानी की अधिक क्षमता वहन करने लायक बनाया जा सके। लखीमपुर खीरी में बाढ़ सुरक्षा परियोजना के तहत इस नए तरीके को अपनाया गया। इंजीनियरों ने नदी की क्षमता बढ़ाने के लिए गाद निकाली, जिस पर महज 22 करोड़ रुपये खर्च हुए। पहले यहीं बाढ़ नियंत्रण की तैयारी में 180 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान था। बाराबंकी में एल्गिन ब्रिज के आस-पास और सरयू क्षेत्र में भी नए तरीके से महज 5 करोड़ रुपये का खर्च आया, जिस पर पहले अन्य उपायों के जरिए 115 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान था। नदियों से 16 किलोमीटर तक निकाली गई गाद इसी क्रम में बाढ़ नियंत्रण से जुड़े विभागों ने इंजीनियरों के साथ मिलकर घाघरा, शारदा और सुहेली नदियों के कई हिस्सों में बड़ा बदलाव किया। इन नदियों के मार्ग में करीब 9 से 16 किलोमीटर तक गाद निकालकर उनकी क्षमता में विस्तार किया गया है। इस मॉडल से हर मानसून में तटबंध और मिट्टी के बांध बनाने के लिए बाढ़ प्रभावित जिलों में कृषि भूमि का अधिग्रहण कम होगा, जिसका सीधा फायदा किसानों को मिलेगा। योगी सरकार में 8 से ज्यादा वर्षों में लगभग 1,665 बाढ़ नियंत्रण परियोजनाएं पूरी की गईं हैं। साथ ही अब तक 60 नदियों से गाद निकालने और कई नहरों का निर्माण भी किया गया है। वहीं वर्ष 2026 में बाढ़ नियंत्रण के नए मॉडल के तहत उच्च जोखिम वाली नदियों-नालों की ड्रोन और सेंसर आधारित निगरानी होगी। साथ ही गाद निकालने की प्रक्रिया को प्राथमिकता पर रखा जाएगा। योगी सरकार का प्रयास है कि अब तक स्पुर (नदी के किनारों पर बड़े पत्थर रखना), जियो बैग्स (रेत से भरे बड़े थैले), पुराने ढांचों की मरम्मत, पत्थरों को बदलने और आपातकालीन सुदृढ़ीकरण कार्यों में होने वाले खर्चों को नए तरीकों से कम किया जाए। पुराने तरीकों को एक साथ बंद नहीं किया जाएगा, हालांकि इनके विकल्प तलाशे जाएं।

सोमनाथ मंदिर की 75वीं वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने लिखा लेख, बताया भारत की अदम्य शक्ति

अहमदाबाद   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 मई को पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। उन्होंने यह जानकारी देते हुए एक लेख में भव्य-दिव्य सोमनाथ धाम को समर्पित अपनी भावनाएं भी व्यक्त की हैं। उन्होंने कहा कि यह अवसर हमें स्मरण कराता है कि इस पावनस्थल की रक्षा और इसके पुनर्निर्माण के लिए किस प्रकार देश की कई पीढ़ियों ने निरंतर संघर्ष किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपना लेख शेयर किया। पोस्ट में उन्होंने लिखा, "पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में 11 मई को मुझे एक बार फिर वहां जाने का सौभाग्य मिलने वाला है। यह अवसर हमें स्मरण कराता है कि इस पावनस्थल की रक्षा और इसके पुनर्निर्माण के लिए किस प्रकार देश की कई पीढ़ियों ने निरंतर संघर्ष किया।" सोमनाथ मंदिर को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में इसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया है। उन्होंने बताया कि 2026 की शुरुआत में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल होना उनके लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव रहा, जो मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में मनाया गया था। उन्होंने लिखा, "वर्ष 2026 की शुरुआत में मुझे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में सम्मिलित होने का सौभाग्य मिला। यह सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष बाद भी मंदिर के शाश्वत और अविनाशी होने का पर्व था।" पीएम मोदी ने उल्लेख किया कि 11 मई को वे एक बार फिर सोमनाथ जाएंगे, जहां वे पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर होने वाले कार्यक्रम में शामिल होंगे। उन्होंने कहा, "अब 11 मई को मुझे एक बार फिर सोमनाथ जाने का सुअवसर प्राप्त हो रहा है। इस बार यह यात्रा पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में है। मैं उस क्षण को फिर जीने जा रहा हूं, जब भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर का लोकार्पण किया था। उस दिन, सोमनाथ में विध्वंस से सृजन तक की यात्रा फिर से जीवंत होगी। छह महीनों के भीतर सोमनाथ के इतिहास से जुड़े इन दो अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ावों का साक्षी बनना मेरे लिए बहुत सौभाग्य की बात है।" अपने लेख में प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर को केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता और उसकी निरंतरता का प्रतीक बताया। उन्होंने लिखा, "सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, हमारी सभ्यता का अटूट संकल्प है। इसके सामने लहराता विशाल समुद्र अनंत काल की अनूभूति कराता है। इसकी लहरें हमें सिखाती हैं कि तूफान चाहे कितने भी विकराल क्यों न हों, मनुष्य का साहस और आत्मबल हर बार फिर से उठ खड़ा होने में सक्षम है। तट से टकराती लहरें सदियों से यह उद्घोष कर रही हैं कि मानवीय चेतना को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता है।" उन्होंने प्राचीन ग्रंथों के उल्लेख के साथ सोमनाथ की आध्यात्मिक महत्ता को भी रेखांकित किया और इसे शैव परंपरा का एक महत्वपूर्ण केंद्र बताया। पीएम मोदी ने कहा, "हमारे प्राचीन शास्त्रों में लिखा है, 'प्रभासं च परिक्रम्य पृथिवीक्रमसंभवम्।' अर्थात दिव्य प्रभास (सोमनाथ) की परिक्रमा पूरी पृथ्वी की परिक्रमा के समान है। जब लोग यहां दर्शन-पूजन के लिए आते हैं, तब उन्हें उस सभ्यता की अद्भुत निरंतरता का भी अनुभव होता है, जिसकी ज्योति कभी बुझाई नहीं जा सकी। कई साम्राज्य आए और गए, समय बदला और इतिहास ने ढेरों उतार-चढ़ाव देखे, फिर भी सोमनाथ हमारे हृदय में हमेशा बना रहा।" प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, "यह समय उन असंख्य महान विभूतियों के स्मरण का भी है, जो क्रूर आक्रांताओं के सम्मुख अडिग रहे। लकुलीश और सोम शर्मा जैसे मनीषियों ने प्रभास को शैव दर्शन का महान केंद्र बनाया। चक्रवर्ती महाराज धारसेन चतुर्थ ने सदियों पहले वहां दूसरा मंदिर बनवाया था। समय की कठिन परीक्षा के बीच भीम प्रथम, जयपाल और आनंदपाल जैसे शासकों ने आक्रमणों के विरुद्ध अपनी सभ्यता की ढाल बनकर मंदिर की रक्षा की थी। ऐसा माना जाता है कि महान राजा भोज ने भी इस पावन स्थल के पुनर्निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया था। कर्णदेव सोलंकी और जयसिंह सिद्धराज ने गुजरात की राजनीतिक और सांस्कृतिक शक्ति को पुनर्स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई।" उन्होंने आगे लिखा, "भाव बृहस्पति, कुमारपाल सोलंकी और पाशुपताचार्यों ने इस तीर्थ को आराधना और ज्ञान के केंद्र के रूप में स्थापित करने में अमूल्य योगदान दिया। विशालदेव वाघेला और त्रिपुरांतक ने इसकी बौद्धिक और आध्यात्मिक परंपराओं की रक्षा की। महिपाल चूड़ासमा और राव खंगार चूड़ासमा ने विध्वंस के बाद पूजा-पाठ की परंपरा को पुनर्जीवित किया। पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होल्कर, जिनकी 300वीं जयंती मनाई जा रही है, उन्होंने सबसे चुनौतीपूर्ण समय में भी भक्ति की परंपरा को जीवंत रखा। बड़ौदा के गायकवाड़ों ने तीर्थयात्रियों के अधिकारों की रक्षा की। इसके साथ ही हमारी यह धरती वीर हमीरजी गोहिल, वीर वेगड़ाजी भील जैसे पराक्रमियों से धन्य हुई है। उनके साहस और बलिदान को आज भी याद किया जाता है।" प्रधानमंत्री ने 20वीं सदी के पुनर्निर्माण आंदोलन का भी उल्लेख किया, जिसमें सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया गया। अपने लेख में पीएम मोदी ने लिखा, "1940 के दशक में स्वतंत्रता की भावना पूरे भारत में फैल रही थी। सरदार पटेल जैसे महान नेताओं के नेतृत्व में स्वतंत्र भारत की नींव रखी जा रही थी। ऐसे में एक बात जो उन्हें बहुत व्यथित करती थी, वह थी- सोमनाथ की दुर्दशा। 13 नवंबर 1947 को, दिवाली के समय, उन्होंने सोमनाथ के जर्जर अवशेषों के सामने खड़े होकर, समुद्र का जल हाथ में लेकर संकल्प लिया, 'इस (गुजराती) नववर्ष पर हमारा निश्चय है कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण होगा। सौराष्ट्र के लोगों को इसके लिए हर तरह से अपना योगदान देना होगा। यह एक पावन कार्य है, जिसमें हर किसी को भागीदारी निभानी होगी।' उनके इस आह्वान ने सिर्फ गुजरात ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतवर्ष को नए उत्साह से भर दिया।" उन्होंने आगे कहा कि दुर्भाग्यवश, सरदार पटेल अपने उस सपने को साकार होते नहीं देख सके, जिसके लिए उन्होंने स्वयं को समर्पित कर दिया था। इससे पहले कि जीर्णोद्धार के बाद सोमनाथ मंदिर भक्तों के लिए खुलता, उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। इसके बावजूद, प्रभास पाटन की पावन धरती पर … Read more

नियमितीकरण मामलों में अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर होगा पुनर्विचार, हाईकोर्ट का आदेश

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार, उसके बोर्डों, निगमों और विभिन्न विभागों में वर्षों से नियमितीकरण की आस लगाए बैठे हजारों कच्चे, अनुबंधित और अस्थायी कर्मचारियों के लिए हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने 98 अपीलों के संयुक्त निपटारे में स्पष्ट कर दिया कि कर्मचारियों के नियमितीकरण के दावों पर अब पुरानी नीतियों की सामान्य व्याख्या की बजाय सुप्रीम कोर्ट द्वारा 16 अप्रैल 2026 को दिए गए ‘मदन सिंह बनाम हरियाणा राज्य’ निर्णय के आधार पर नए सिरे से विचार किया जाएगा। हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार, बिजली निगमों, नगर निगमों, हाउसिंग बोर्ड और अन्य सार्वजनिक संस्थाओं को निर्देश दिए कि वे प्रत्येक कर्मचारी के मामले की व्यक्तिगत जांच कर छह माह के भीतर कारण युक्त यानी स्पीकिंग आर्डर पारित करें। मौजूदा सेवा स्थिति में कोई प्रतिकूल बदलाव नहीं अदालत ने यह भी साफ किया कि जब तक संबंधित कर्मचारी के दावे पर अंतिम प्रशासनिक निर्णय नहीं हो जाता, तब तक उसकी मौजूदा सेवा स्थिति में कोई प्रतिकूल बदलाव नहीं किया जाएगा। यानी फिलहाल कर्मचारियों को कार्यरत स्थिति से हटाने या नुकसान पहुंचाने वाली कार्रवाई पर रोक जैसी सुरक्षा मिल गई है। खंडपीठ ने इससे पहले सिंगल बेंच द्वारा 22 जनवरी 2025 को दिए गए आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि अब 1996, 2003, 2011, 2014 अथवा 2024 की नीतियों पर विचार सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय संवैधानिक सिद्धांतों के अधीन होगा। अदालत ने माना कि ‘उमा देवी’ फैसले और उसके बाद ‘योगेश त्यागी’ विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की अंतिम व्याख्या के बाद राज्य को प्रत्येक कर्मचारी के सेवा रिकार्ड, पात्रता और नीति की वैधता के अनुसार निर्णय लेना होगा। लंबित नियमितीकरण विवादों के समाधान का नया ढांचा तैयार हरियाणा सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया कि सभी कर्मचारियों के दावों की नये सिरे से जांच की जाएगी, जिसके बाद कोर्ट ने व्यापक बहस में जाने की बजाय पूरी प्रक्रिया को प्रशासनिक पुनर्विचार के लिए भेज दिया। साथ ही प्रत्येक कर्मचारी को आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के दो सप्ताह के भीतर अपने विभाग को विस्तृत अभ्यावेदन देने का निर्देश दिया गया है। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे हरियाणा के विभिन्न विभागों में लंबे समय से लंबित नियमितीकरण विवादों के समाधान का नया ढांचा तैयार हुआ है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा मदन सिंह बनाम हरियाणा राज्य मामले में कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए गए थे।