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डीजीपी ने एनसीआरबी आंकड़ों को बताया यूपी की मजबूत कानून-व्यवस्था का प्रमाण

एनसीआरबी के आंकड़े यूपी की मजबूत कानून-व्यवस्था की गवाही: डीजीपी राष्ट्रीय क्राइम रेट से काफी कम रहा यूपी का क्राइम रेट अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति धरातल पर उतरी लखनऊ  पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने कहा है कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की वर्ष 2024 रिपोर्ट निर्विवाद रूप से स्थापित करती है कि क्राइम रेट ही विभिन्न राज्यों के बीच अपराध की तुलना का एकमात्र वैज्ञानिक और सांख्यिकीय दृष्टि से उचित आधार है। राष्ट्रीय क्राइम रेट 252.3 के मुकाबले उत्तर प्रदेश का क्राइम रेट मात्र 180.2 है। यह सुधार सतत और सुविचारित प्रयासों का प्रतिफल है। यह साबित करता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में अपराध व अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति कागज़ों से निकलकर धरातल पर उतरी है।  कठोर कार्रवाई से स्थापित किया कानून-व्यवस्था का राज पुलिस महानिदेशक ने कहा कि गत 9 वर्षों में आधुनिक पुलिस स्टेशन, सतर्क एंटी-रोमियो स्क्वॉड, हर थाने पर समर्पित महिला हेल्प डेस्क, कमज़ोर वर्गों को त्वरित न्याय दिलाने वाले फास्ट-ट्रैक कोर्ट और संगठित अपराधों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई ने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था का राज स्थापित किया है। एनसीआरबी के आंकड़े इसी की गवाही देते हैं। छोटी से छोटी शिकायत का संज्ञान लेती है यूपी पुलिस पुलिस महानिदेशक ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कोई भी व्यक्ति बिना किसी भय-संकोच के पुलिस थाने जाकर शिकायत दर्ज करा सकता है। उत्तर प्रदेश पुलिस इसके प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। हम डिजिटल माध्यमों पर भी आई छोटी से छोटी शिकायत का संज्ञान लेते हैं और जहां भी उचित हो, उसे एफआईआर में परिवर्तित करते हैं। अधिक पंजीकरण एक अधिक संवेदनशील, सुलभ और पारदर्शी पुलिस बल की पहचान है। यही वह संस्कृति है, जिसका निर्माण उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विज़न के तहत कर रही है।

रायपुर कार्यक्रम के दौरान अनूपपुर में हुआ राष्ट्रीय अध्यक्ष का हुआ स्वागत

रायपुर कार्यक्रम के दौरान अनूपपुर में हुआ राष्ट्रीय अध्यक्ष का हुआ स्वागत अनूपपुर  राष्ट्रीय स्वर्णकार समाज राजनीतिक एवं भागीदारी मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जीतेंद्र वर्मा स्वर्णकार जी का रायपुर से कार्यक्रम वापस के दौरान अनूपपुर स्टेशन पहुंचने पर काफी संख्या में स्वर्णकार समाज के लोगों द्वारा स्वागत वंदन अभिनंदन कर स्वर्णकार समाज को आगे बढ़ाने की दिशा में चर्चा की गई इस दौरान स्वर्णकार समाज के काफी संख्या में लोग मौजूद थे जिसमें मुख्य रूप से श्री डल्लू कुमार सोनी राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति ने मुलाकात की इस दौरान विनय कुमार सोनी एडवोकेट जिला अध्यक्ष अनूपपुर,ओमप्रकाश सोनी वरिष्ठ समाजसेवी एवं जिला अध्यक्ष अनूपपुर अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति के साथ अन्य पदाधिकारी ने की राष्ट्रीय अध्यक्ष का पुष्पकुंज से स्वागत कर उनसे मुलाकात की.

KL Rahul बनाम Sunil Narine: अरुण जेटली में कौन मारेगा बाजी?

नई दिल्ली साउथ-ईस्ट दिल्ली के सरिता विहार इलाके में बीती रात पुलिस और बदमाशों के बीच एकनाउंटर हुआ। दोनों ओर से 6 राउंड गोलियां चलीं। हालांकि गोली किसी को नहीं लगी। इसके बाद पुलिस ने 6 बदमाशों को पकड़ा। ये सभी बांग्लादेशी हैं। जो यहां डकैती की वारदात करते थे। खबर लिखे जाने तक आरोपियों से पूछताछ की जा रही थी। पुलिस सूत्र ने बताया कि क्राइम ब्रांच की एंटी एक्सटॉर्शन किडनैपिंग सेल टीम को सूचना मिली थी कि सरिता विहार इलाके में कुछ बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहे हैं। सूचना के आधार पर क्राइम ब्रांच की टीम उन्हें पकड़ने पहुंची थी। टीम ने मौके पर घेराबंदी कर बदमाशों को पकड़ने की कोशिश की तो उन्होंने आत्मसमर्पण करने के बजाय पुलिस पार्टी पर फायरिंग शुरू कर दी। 6 बांग्लादेशी बदमाशों को दबोचा बदमाशों की ओर से कुल तीन राउंड फायर किए गए। आत्मरक्षा और अपराधियों को काबू करने के लिए पुलिस टीम ने भी जवाबी कार्रवाई में तीन राउंड गोलियां चलाईं। गनीमत रही कि इस गोलाबारी में पुलिस टीम का कोई भी सदस्य या आरोपी घायल नहीं हुआ। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए सभी छह बांग्लादेशी बदमाशों को दबोच लिया। बड़ी संभावित वारदात को टली तलाशी के दौरान बदमाशों के पास से तीन देसी कट्टे, 1 देसी 12 बोर की बंदूक, पांच कारतूस और एक बटनदार चाकू बरामद हुआ। पकड़े गए सभी आरोपी मूल रूप से बांग्लादेश के रहने वाले बताए जा रहे हैं। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि ये लोग कब से दिल्ली में रह रहे थे और इनके तार किन-किन वारदातों से जुड़े हैं। साथ ही, इनके अवैध रूप से सीमा पार करने और स्थानीय संपर्कों की भी जांच की जा रही है। दावा किया जा रहा है कि सफल ऑपरेशन ने इलाके में एक बड़ी संभावित वारदात को टाल दिया है।  

उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा का रिजल्ट जारी, योगी सरकार में भर्ती प्रक्रिया रही पारदर्शी

योगी सरकार में पारदर्शी भर्ती, उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा का परिणाम जारी 15 लाख से अधिक अभ्यर्थियों का इंतजार खत्म, 12,333 अभ्यर्थी अगले चरण के लिए सफल घोषित डीवी/पीएसटी की प्रक्रिया मई के तीसरे सप्ताह में होगी आयोजित  14 और 15 मार्च 2026 को चार पालियों में आयोजित हुई थी परीक्षा लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया का एक और बड़ा उदाहरण सामने आया है। गुरुवार को उप निरीक्षक नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया गया है। 4543 पदों के लिए आयोजित इस भर्ती प्रक्रिया में 15,75,760 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। परिणाम जारी होने के साथ ही लाखों युवाओं का इंतजार खत्म हो गया है। 12,333 अभ्यर्थी अगले चरण के लिए सफल घोषित उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने नियमावली और निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा परिणाम घोषित किया है। परीक्षा 14 और 15 मार्च 2026 को चार पालियों में आयोजित की गई थी। पूरी प्रक्रिया अपनाते हुए प्रत्येक विषय में न्यूनतम 35 प्रतिशत और कुल 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों में से मेरिट और आरक्षण के आधार पर 12,333 अभ्यर्थियों को अभिलेख सत्यापन एवं शारीरिक मानक परीक्षण (डीवी/पीएसटी) के लिए सफल घोषित किया गया है। निष्पक्ष और समयबद्ध भर्ती से युवाओं में बढ़ा भरोसा योगी सरकार में भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी, तकनीकी रूप से मजबूत और समयबद्ध बनाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। यही वजह है कि युवाओं का सरकारी भर्तियों के प्रति भरोसा मजबूत हुआ है। भर्ती बोर्ड के मुताबिक, डीवी/पीएसटी की प्रक्रिया मई के तीसरे सप्ताह में आयोजित की जाएगी। इसकी पूरी जानकारी जल्द ही बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी।

योगी सरकार की कड़ी नीतियों से पर्यटन परियोजनाओं में होगी तेजी, नवंबर तक मिलेंगे ठोस नतीजे

योगी सरकार की सख्ती से पर्यटन परियोजनाओं में आएगी तेजी, नवंबर तक धरातल पर दिखेंगे परिणाम पर्यटन विकास को नई रफ्तार, अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं में बढ़ी जवाबदेही  ऐतिहासिक स्थलों और हेलीपोर्ट परियोजनाओं पर विशेष फोकस, पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को दिए निर्देश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में उत्तर प्रदेश में पर्यटन और संस्कृति क्षेत्र तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में लखनऊ स्थित पर्यटन भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी स्वीकृत परियोजनाओं की टेंडर प्रक्रिया 20 मई 2026 तक पूरी कर स्वीकृत पत्र जारी किए जाएं। साथ ही निर्माणाधीन परियोजनाओं को 20 नवंबर 2026 तक हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप विकास कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि फाइलों को लटकाने और काम में लापरवाही की संस्कृति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को समय से पूरा करने पर जोर पर्यटन मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को तय समय सीमा के भीतर पूरा करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि नवंबर 2026 तक प्रदेश में चल रही परियोजनाओं का परिणाम जमीन पर दिखाई देना चाहिए, ताकि इनका लोकार्पण कर जनता को समर्पित किया जा सके। बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि मुख्यालय से अधिकारी समय-समय पर स्थलीय निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण टीम फोटोग्राफर के साथ मौके पर जाकर कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता का भौतिक सत्यापन करेगी। इससे परियोजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और कार्यों में तेजी आएगी। मंत्री ने कहा कि सरकार केवल कागजी कार्रवाई नहीं बल्कि धरातल पर परिणाम चाहती है। उन्होंने अधिकारियों को पत्राचार के बजाय समाधान आधारित कार्यशैली अपनाने के निर्देश दिए। पर्यटन स्थलों के विकास से बढ़ेगा प्रदेश का गौरव समीक्षा बैठक में आगरा और मथुरा में हेलीपोर्ट परियोजनाओं को क्रियान्वित करने के निर्देश भी दिए गए। वहीं भारत सरकार स्तर पर लंबित योजनाओं की समीक्षा करते हुए स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत नैमिषारण्य में प्रस्तावित कार्यों को जल्द शुरू करने पर जोर दिया गया। इसके अलावा ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के स्थलों के इतिहास लेखन और शिलालेख संबंधी कार्यों को स्थापित प्रक्रिया के अनुसार संचालित करने के निर्देश दिए गए। जिला महोत्सवों को जनपद स्थापना दिवस के अवसर पर भव्य रूप से आयोजित करने पर भी विशेष बल दिया गया। वहीं वर्ष 2017 से अब तक पर्यटन और संस्कृति विभाग द्वारा कराए गए कार्यों, उनकी लागत, स्वीकृत धनराशि और प्रगति की जनपदवार रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिससे विकास कार्यों की प्रभावी निगरानी हो सके। पारदर्शिता और जवाबदेही पर योगी सरकार का फोकस बैठक में अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कार्यदायी संस्थाओं को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि परियोजनाओं को पूरा करने में किसी प्रकार की हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने भुगतान प्रक्रिया के लिए समय सारिणी तय करने के निर्देश दिए, ताकि कार्यदायी संस्थाओं को समय पर भुगतान हो सके और परियोजनाएं प्रभावित न हों। पर्यटन मंत्री ने नकारा और कार्य में रुचि न लेने वाले ठेकेदारों को सिस्टम से बाहर करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि योगी सरकार की प्राथमिकता पारदर्शी व्यवस्था, जवाबदेही और तेज विकास है।  बैठक में विशेष सचिव पर्यटन मृदुल चौधरी, प्रबंध निदेशक यूपीएसटीडीसी आशीष कुमार, निदेशक इको पर्यटन पुष्प कुमार के., विशेष सचिव संस्कृति संजय कुमार सिंह, पर्यटन सलाहकार जे.पी. सिंह, क्षेत्रीय पर्यटक अधिकारी अंजू चौधरी, संयुक्त निदेशक प्रीति श्रीवास्तव, प्रचार अधिकारी कीर्ति एवं कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

ममता कैबिनेट बर्खास्त, विधानसभा पर राज्यपाल का वीटो प्रभाव

कलकत्ता पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा संवैधानिक संकट तब खड़ा हो गया, जब राज्यपाल आर.एन. रवि ने अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए मंत्रिमंडल को बर्खास्त कर दिया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफ़ा देने से इनकार करने के बीच, राज्यपाल ने अपनी संवैधानिक वीटो शक्ति का प्रयोग करते हुए राज्य विधानसभा को भंग करने की अधिसूचना जारी कर दी। यह ऐतिहासिक निर्णय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत लिया गया। राज्यपाल के निर्देश पर मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला द्वारा जारी इस आदेश के बाद, राज्य सरकार का अस्तित्व प्रभावी रूप से समाप्त हो गया है। राज्यपाल के इस कड़े कदम से बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में हलचल मच गई है, जिसके परिणामस्वरूप मंत्रिमंडल और विधानसभा, दोनों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय बड़ा संवैधानिक संकट खड़ा हो गया, जब राज्यपाल आर. एन. रवि ने अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कैबिनेट को बर्खास्त कर दिया. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार के बीच राज्यपाल ने संवैधानिक वीटो का इस्तेमाल करते हुए 7 राज्य विधानसभा को भंग करने की अधिसूचना जारी कर दी है. यह ऐतिहासिक निर्णय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत लिया गया है. मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला द्वारा राज्यपाल के निर्देशों पर जारी इस आदेश के बाद राज्य सरकार का वजूद समाप्त हो गया है. राज्यपाल के इस कड़े कदम ने बंगाल की सियासत में खलबली मचा दी है, जिससे कैबिनेट और विधानसभा दोनों तत्काल प्रभाव से भंग कर दी गई हैं।  अनुच्छेद 174(2)(b) और बंगाल का अभूतपूर्व संकट यह पूरी कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के इर्द-गिर्द घूमती है. यह अनुच्छेद राज्यपाल को राज्य विधानसभा को भंग करने की शक्ति प्रदान करता है. आमतौर पर राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर ऐसा करते हैं लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में जब सरकार और राजभवन के बीच टकराव चरम पर था, राज्यपाल ने इस वीटो जैसी शक्ति का इस्तेमाल कर ममता सरकार के अस्तित्व को ही समाप्त कर दिया. मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला द्वारा जारी अधिसूचना स्पष्ट करती है कि यह निर्णय राजभवन के सीधे आदेश पर लिया गया है जो राज्य में गहरे राजनीतिक और प्रशासनिक गतिरोध का संकेत है।  पश्चिम बंगाल गवर्नर के आदेश के मुख्‍य प्‍वाइंट्स · ऐतिहासिक बर्खास्तगी: राज्यपाल आर. एन. रवि ने ममता बनर्जी की कैबिनेट को बर्खास्त कर 7 मई, 2026 से विधानसभा भंग करने की घोषणा की है।  · संवैधानिक आधार: इस पूरी कार्रवाई को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत अंजाम दिया गया है, जो राज्यपाल को विधानसभा भंग करने का अधिकार देता है।  · अधिसूचना जारी: मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला ने आधिकारिक आदेश जारी कर बताया कि यह निर्णय राज्यपाल के निर्देशों पर तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।  · संवैधानिक संकट: ममता बनर्जी द्वारा पद छोड़ने से इनकार के बाद यह कदम उठाया गया, जिससे राज्य में निर्वाचित सरकार का शासन समाप्त हो गया है।  · आगे का रास्ता: विधानसभा भंग होने के बाद अब राज्य में राष्ट्रपति शासन या जल्द चुनाव की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं।  सवाल-जवाब राज्यपाल ने किस संवैधानिक शक्ति के तहत पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग किया है? राज्यपाल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग किया है।  पश्चिम बंगाल गवर्नर का आदेश किस तारीख से प्रभावी माना जाएगा? मुख्य सचिव द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, विधानसभा भंग करने और कैबिनेट बर्खास्त करने का यह निर्णय 7 मई, 2026 से प्रभावी हो गया है।  क्या मुख्यमंत्री की सलाह के बिना विधानसभा भंग की जा सकती है? सामान्यतः राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर काम करते हैं, लेकिन असाधारण परिस्थितियों या संवैधानिक विफलता की स्थिति में राज्यपाल अनुच्छेद 174 के तहत स्वविवेक का प्रयोग कर सकते हैं।  मुख्य सचिव की पश्चिम बंगाल के गवर्नर के आदेश में क्या भूमिका रही? मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला ने राज्यपाल के निर्देशों को प्रशासनिक रूप से लागू किया और विधानसभा भंग करने की आधिकारिक अधिसूचना जारी की। 

गर्मी और औद्योगिक गतिविधियों से बिजली की मांग बढ़ी, इक्रा ने जताई 5-5.5% वृद्धि की संभावना

नई दिल्ली   औद्योगिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों के निरंतर बढ़ने से 2026-27 में बिजली की मांग 5.0-5.5 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। 2025-26 में यह वृद्धि केवल एक प्रतिशत रही थी. साख निर्धारण करने वाली एजेंसी इक्रा ने यह बात कही।  इक्रा ने बयान में कहा कि संभावित ‘एल नीनो’ के बीच सामान्य से कम वर्षा के आसार से वित्त वर्ष 2026-27 में कृषि एवं घरेलू क्षेत्रों से भी मांग को समर्थन मिलने की संभावना है. साथ ही उद्योगों तथा इलेक्ट्रिक वाहनों एवं डाटा सेंटर जैसे उभरते स्रोतों से भी मांग बढ़ेगी।  देश में तापीय बिजली संयंत्रों का ‘प्लांट लोड फैक्टर’ (पीएलएफ या क्षमता उपयोग) 2025-26 में मांग में कमी के कारण घटकर 65-66 प्रतिशत रह गया. यह 2026-27 में करीब 65 प्रतिशत पर आ सकता है. नवीकरणीय स्रोतों से उत्पादन में अच्छी वृद्धि और तापीय क्षेत्र में छह गीगावाट क्षमता वृद्धि की संभावना इसकी मुख्य वजह रहेगी।  इक्रा के उपाध्यक्ष एवं सह-समूह प्रमुख (कॉरपोरेट रेटिंग्स) अंकित जैन ने कहा कि भारत में तापीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश पर फिर से जोर दिया जा रहा है जबकि नवीकरणीय क्षमता तेजी से बढ़ती जा रही है।  उन्होंने साथ ही बताया कि आठ अप्रैल 2026 तक घरेलू बिजली संयंत्रों के वास्ते कोयला भंडार लगभग 19 दिन के लिए पर्याप्त था।  समूचे भारत में वितरण कंपनियों के बही-खाता घाटे में 2024-25 में 2023-24 की तुलना में सुधार हुआ. मार्च 2025 तक राज्य-स्वामित्व वाली बिजली वितरण कंपनियों का सकल ऋण घटकर 7.1 लाख करोड़ रुपये रह गया जो मार्च 2024 में 7.4 लाख करोड़ रुपये था।  वर्तमान राजस्व और लाभप्रदता को देखते हुए हालांकि इतना उच्च ऋण स्तर कंपनियों के लिए टिकाऊ नहीं है।  अप्रैल 2026 तक 28 में से 17 राज्यों में 2026-27 के लिए शुल्क आदेश जारी किए जा चुके हैं।  बिजली वितरण कंपनियों के घाटे में काम करने के बावजूद अधिकतर राज्यों में 2026-27 के लिए स्वीकृत शुल्क वृद्धि सीमित रही है।  इक्रा का अनुमान है कि सीमित शुल्क वृद्धि और अपेक्षाकृत अधिक शुल्क वाली क्षमताओं के जुड़ने से बिजली खरीद लागत बढ़ने की स्थिति में 2026-27 में प्रति इकाई नकद अंतर 30-33 पैसे के उच्च स्तर पर बना रह सकता है।  इक्रा ने कहा कि सीमित शुल्क वृद्धि और लगातार घाटे के कारण बिजली वितरण क्षेत्र के लिए उसका दृष्टिकोण नकारात्मक बना हुआ है। 

मार्श-प्रिंस की शानदार पारियों से लखनऊ ने बेंगलुरु को मात दी

लखनऊ लखनऊ सुपर जायंट्स ने रोमांचक मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू को 9 रनों से हरा दिया है. क्रुणाल पांड्या और रोमारियो शेफर्ड ने अंतिम ओवर तक मुकाबले को रोमांचक बनाए रखा, लेकिन दिग्वेश राठी ने आखिरी ओवर में कसी हुई गेंदबाजी करते हुए लखनऊ की जीत सुनिश्चित की. लखनऊ की जीत में सबसे बड़ा योगदान मिचेल मार्श की शतकीय पारी का रहा, वहीं गेंदबाजी में तेज गेंदबाज प्रिंस यादव ने कहर बरपाया।  बारिश से प्रभावित यह मुकाबला बार-बार रोका गया. पहले बल्लेबाजी करते हुए लखनऊ की टीम ने 209 रन बनाए थे. जवाब में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू को एक समय 5 ओवरों में 80 रन बनाने थे. टिम डेविड, क्रुणाल पांड्या और फिर रोमारियो शेफर्ड ने ऐसा कहर बरपाया कि अंतिम ओवर में बेंगलुरू जीत की ओर बढ़ती हुई दिख रही थी।  लगातार 8 हार के बाद पहली जीत लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए यह जीत ऐतिहासिक भी है, क्योंकि अपने घरेलू मैदान पर लगातार 8 हार झेलने के बाद उसे पहली जीत नसीब हुई है. इकाना स्टेडियम पर LSG टीम की आखिरी जीत अप्रैल 2025 में गुजरात टाइटंस के खिलाफ आई थी. उसके बाद ऋषभ पंत और उनकी सेना यहां पिछले लगातार आठ मुकाबले हार चुकी थी. मगर अब RCB को 9 रनों से हराकर लखनऊ ने उस हार के सिलसिले को विराम दिया।  मैच समाप्त होने के बाद पंत ने कहा, 'मैं यह जीत अपनी टीम के मालिक संजीव गोयनका सर को समर्पित करना चाहता हूं. क्योंकि भले ही हमारा प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं रहा हो, लेकिन जिस तरह से उन्होंने हर मैच से पहले हमारा साथ दिया और हमें आत्मविश्वास दिया, वह हमारी टीम के लिए वाकई बहुत बड़ी बात थी. उन्हें बहुत-बहुत धन्यवाद।  लखनऊ को मिली रोमांचक मिली जीत बात करें मैच के बारे में तो इकाना में लखनऊ की टीम बाजी मारने में कामयाब रही. बारिश से प्रभावित मुकाबले में डकवर्थ लुईस नियम के तहत मिले 213 रनों का लक्ष्य का पीछा करते हुए आरसीबी 19 ओवर में 6 विकेट खोकर 203 रन ही बना सकी. एलएसजी की यह इस सीजन की तीसरी जीत है।  बारिश के कारण हुए समय की बर्बादी की वजह से ओवरों में कटौती की गई और मुकाबले को 19-19 ओवर का किया गया. एलएसजी से मिले 210 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी आरसीबी की शुरुआत अच्छी नहीं रही. जैकब बेथेल सिर्फ 4 रन बनाकर मोहम्मद शमी का शिकार बने. इसके बाद प्रिंस यादव ने बेहतरीन गेंद पर विराट कोहली को 46 पारियों के बाद 'डक' पर पवेलियन भेजा।  आखिरी 6 गेंद में चाहिए थे 20 रन अंतिम 6 गेंद में बेंगलुरू टीम को जीत के लिए 20 रन बनाने थे. सामने दिग्वेश राठी थे, जो अपने पहले 3 ओवरों में 41 रन लुटा चुके थे. फिर भी कप्तान ऋषभ पंत ने राठी पर भरोसा दिखते हुए उन्हें आखिरी ओवर की जिम्मेदारी सौंपी. पहली 3 गेंदों पर सिर्फ 2 रन आए और फिर वाइड. हालात ऐसे थे कि बेंगलुरू को जीत के लिए तीन गेंद में तीन छक्के लगाने थे. चौथी गेंद पर शेफर्ड ने चौका लगाया, इसी के साथ लखनऊ की जीत पक्की हो चुकी थी।  लखनऊ सुपर जायंट्स चाहे अब भी पॉइंट्स टेबल में सबसे निचले पायदान पर हो, लेकिन उसने अपनी प्लेऑफ की उम्मीदों को जीवित रखा है. 10 मैचों में LSG के 6 अंक हैं और अभी लीग स्टेज में उसके चार मुकाबले बचे हैं। 

यूपी में नई रणनीति तैयार कर रही भाजपा, बंगाल जीत के बाद बंसल को सौंपा जा सकता है अहम काम

लखनऊ   यूपी की अगली चुनावी लड़ाई को लेकर भारतीय जनता पार्टी के भीतर हलचल तेज हो गई है। पार्टी के अंदर यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल को प्रदेश में अधिक सक्रिय और प्रत्यक्ष भूमिका दी जा सकती है, ताकि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के जातीय समीकरणों को फिर से मजबूत किया जा सके। यह अटकलें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की हालिया सफलता के बाद तेज हुई हैं, जहां बूथ स्तर की मजबूत रणनीति और संगठनात्मक समन्वय ने पार्टी को बड़ी जीत दिलाई और 15 वर्षों से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया। हालांकि भाजपा के भीतर यह समझ भी है कि उत्तर प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियां पश्चिम बंगाल से कहीं अधिक जटिल हैं। पार्टी नेताओं का मानना है कि केवल संगठनात्मक मजबूती से यूपी की चुनौती का समाधान संभव नहीं होगा, क्योंकि यहां जातीय समीकरण चुनावी राजनीति का सबसे अहम आधार बने हुए हैं। फिलहाल उत्तर प्रदेश में भाजपा के संगठनात्मक मामलों की निगरानी बी एल संतोष और विनोद तावड़े कर रहे हैं, लेकिन पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि यूपी की सामाजिक और जातीय संरचना को देखते हुए ऐसे नेताओं की जरूरत है जिन्हें राज्य की चुनावी जमीन का गहरा अनुभव हो। भाजपा के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी ने कहा, 2017 में पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले अमित शाह और संगठनात्मक नेटवर्क को मजबूत करने वाले सुनील बंसल को फिर से बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। यूपी की राजनीति पर नजर रख सकते हैं अमित शाह उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अमित शाह यूपी की राजनीति पर पहले से ज्यादा सीधी नजर रख सकते हैं, जबकि सुनील बंसल को राज्य का प्रभारी बनाकर चुनावी तैयारियों की कमान दी जा सकती है। उत्तर प्रदेश में भाजपा की ताकत लंबे समय तक सवर्ण, गैर-यादव पिछड़ा वर्ग और गैर-जाटव दलितों के व्यापक सामाजिक गठजोड़ पर आधारित रही है। इसके साथ पार्टी ने मजबूत हिंदुत्व एजेंडे के जरिए अपनी पकड़ बनाई। लेकिन हालिया चुनावों में इस सामाजिक समीकरण में कमजोरी के संकेत दिखाई दिए हैं। दरअसल अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी ने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति के जरिए जातीय राजनीति को नए तरीके से संगठित किया है, जिससे मुकाबला और कड़ा हो गया है। बीजेपी के लिए उम्मीद से कठिन था 2022 चुनाव का मुकाबला 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा सत्ता तो बचाने में सफल रही, लेकिन पार्टी के भीतर यह स्वीकार किया गया कि मुकाबला उम्मीद से कहीं ज्यादा कठिन था। वहीं 2024 लोकसभा चुनाव ने भाजपा के सामने नई चुनौती को और स्पष्ट कर दिया। समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश की 80 में से 37 सीटें जीतकर भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक में भी सेंध लगाई। भाजपा का आंकड़ा 2019 की 62 सीटों से घटकर 2024 में 33 पर पहुंच गया। भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि, 2022 और 2024 के अनुभव अभी भी पार्टी के लिए चेतावनी की तरह हैं और संगठन किसी भी तरह की आत्मसंतुष्टि से बचना चाहता है। इसलिए अमित शाह जी और सुनील बंसल जी का दखल उत्तर प्रदेश में बढ़ सकता है। सीएम योगी की कानून व्यवस्था को सबसे बड़ी ताकत मानती है भाजपा करीब एक दशक से उत्तर प्रदेश की सत्ता में रहने के कारण भाजपा को स्थानीय स्तर पर एंटी-इंकम्बेंसी और विभिन्न समुदायों में प्रतिनिधित्व की बढ़ती मांग जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। हालांकि पार्टी अब भी अपनी कल्याणकारी योजनाओं, बुनियादी ढांचे के विकास और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कानून-व्यवस्था की छवि को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानती है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम बंगाल की जीत भाजपा के लिए बड़ी उपलब्धि है, लेकिन पार्टी को यह समझना होगा कि उत्तर प्रदेश की राजनीति कहीं अधिक जटिल है। भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारी ने बताया कि, हिंदी पट्टी में जातीय राजनीति बेहद पेचीदा है। भाजपा को अपना सामाजिक गठबंधन दोबारा मजबूत करने, स्थानीय मुद्दों पर काम करने और विपक्ष के नैरेटिव का प्रभावी जवाब देने के लिए गंभीर मेहनत करनी होगी, जो 2024 में कमजोर पड़ती दिखाई दी थी। इस लिहाज से उत्तर प्रदेश में ऐसे नेताओं की जरूरत पड़ेगी जो यहाँ की चुनावी गणित को बेहतर तरीक़े से समझते हों।

शराब और बीयर की कीमत बढ़ने की संभावना, 20% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव

मुंबई  पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब सिर्फ कच्चे तेल या शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत के शराब उद्योग पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ने लगा है। देश की कई बड़ी शराब और बीयर कंपनियों ने राज्य सरकारों से कीमतें बढ़ाने की मांग की है। कंपनियों का कहना है कि वेस्ट एशिया संकट के कारण सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे बोतल, कैन, पैकेजिंग और ट्रांसपोर्टेशन की लागत तेजी से बढ़ गई है। यही वजह है कि अब इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL), बीयर और वाइन की कीमतों में बढ़ोतरी की मांग जोर पकड़ रही है। देश की प्रमुख इंडस्ट्री संस्था (Confederation of Indian Alcoholic Beverage Companies-CIABC) और (Brewers Association of India) ने कई राज्यों को पत्र लिखकर राहत की मांग की है। बीयर कंपनियों के संगठन BAI ने सरकारों से 15% से 20% तक कीमतें बढ़ाने की अनुमति मांगी है ताकि बढ़ती लागत का कुछ बोझ कम किया जा सके। संगठन के डायरेक्टर जनरल विनोद गिरी (Vinod Giri) के मुताबिक, वेस्ट एशिया संकट के बाद ग्लास बोतलों की कीमत करीब 20% तक बढ़ गई है, जबकि पेपर कार्टन लगभग दोगुने महंगे हो चुके हैं। इसके अलावा LDPE, BOPP और चिपकाने वाले मटेरियल्स की कीमतों में भी 20-25% तक की बढ़ोतरी हुई है। सबसे ज्यादा दबाव ग्लास उद्योग पर देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद स्थित ग्लास मैन्युफैक्चरिंग हब में गैस सप्लाई कम होने से कई फैक्ट्रियां संकट में हैं। कंपनियों का कहना है कि उन्हें अब महंगे LNG और LPG का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिससे उत्पादन लागत और बढ़ गई है। बीयर कंपनियों के सामने एल्यूमीनियम कैन की कमी भी बड़ी चुनौती बन रही है क्योंकि मिडिल ईस्ट से एल्यूमीनियम सप्लाई प्रभावित हुई है। इंडस्ट्री को डर है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले महीनों में कैन और ग्लास की भारी कमी हो सकती है। इस संकट का असर सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं है। ट्रांसपोर्ट और फ्रेट लागत भी करीब 10% बढ़ चुकी है, जबकि डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने आयात को और महंगा बना दिया है। अनंत एस अय्यर (Anant S Iyer) का कहना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव ने शराब उद्योग पर महंगाई का बड़ा दबाव बना दिया है। कंपनियों ने सरकारों से अंतरिम राहत के तौर पर टैक्स और मैन्युफैक्चरिंग लेवी में कटौती की भी मांग की है। अगर सरकारें कीमत बढ़ाने की अनुमति देती हैं, तो आने वाले समय में बीयर, व्हिस्की और वाइन जैसी शराबों के दाम आम ग्राहकों के लिए और महंगे हो सकते हैं।