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डेंगू के बढ़ते खतरे से अमृतसर में चिंता, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की चेतावनी

अमृतसर. बरसाती मौसम से पहले ही अमृतसर में डेंगू के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग एक्शन मोड में आ गया है। पंजाब सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत सिविल सर्जन डॉ. सतिंदरजीत सिंह बजाज द्वारा “हर शुक्रवार डेंगू ते वार” मुहिम की शुरूआत करते हुए टीमों को शहर के विभिन्न हाट-स्पॉट क्षेत्रों की ओर रवाना किया गया। ये टीमें शहर के संवेदनशील क्षेत्रों में एंटी लारवा गतिविधियों, फॉगिंग, स्प्रे के साथ-साथ लोगो को जागरूक भी करेंगी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि जून माह में डेंगू का डंक गंभीर रूप धारण कर सकता है इसलिए मई माह से ही तैयारियां तेज कर ली गई हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि बारिश के दौरान पानी जमा होना आम बात है लेकिन यही स्थान मच्छरों के पनपने के केंद्र बन जाते हैं। यदि लोगों ने सावधानी नहीं बरती तो हालात बिगड़ सकते हैं। इसलिए हर घर की जिम्मेदारी बनती है कि कूलरों, टंकियों, गमलों और छतों पर पड़े बेकार सामान में पानी जमा न होने दिया जाए। डेंगू के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत इलाज करवाएं : डॉ. हरजोत कौर जिला एपिडैमियोलॉजिस्ट डॉ. हरजोत कौर ने बताया कि डेंगू एक वायरल बुखार है जो एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, आंखों के पीछे दर्द, उल्टियां तथा नाक या मसूड़ों से खून आना शामिल हैं। उन्होंने कहा कि डेंगू के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत सरकारी अस्पताल में मुफ्त जांच और इलाज करवाना चाहिए। पिछले वर्ष जिले में आए थे डेंगू के 69 मामले पिछले वर्ष जिले में डेंगू के 69 मामले सामने आए थे और 11 स्थानों को हॉटस्पॉट घोषित किया गया था। इस बार स्वास्थ्य विभाग किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहता। इससे पहले आशा वर्करों और पैरामैडीकल स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया ताकि जमीनी स्तर पर अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। डेंगू से बचाव के लिए क्या करें? – कूलर, टंकी और गमलों में पानी जमा न होने दें। – सप्ताह में एक दिन पानी वाले बर्तनों की सफाई करें। – पूरी बाजू वाले कपड़े पहनें। – मच्छर भगाने वाली क्रीम का इस्तेमाल करें।

अधिकमास क्या है और क्यों खास माना जाता है?

 अधिकमास इस बार 17 मई यानी कल से शुरू हो रहा है और इसका समापन 15 जून तक रहेगा. यह अतिरिक्त महीना हर साल नहीं आता, बल्कि वैदिक ज्योतिष के अनुसार, इसे खास तौर पर हमारे कैलेंडर को संतुलित करने के लिए जोड़ा जाता है. दरअसल, चंद्र कैलेंडर लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि सौर कैलेंडर 365 दिनों का. ऐसे में दोनों के बीच तालमेल बनाए रखने के लिए अधिकमास रखा जाता है, ताकि हमारे त्योहार सही मौसम में ही आएं. लेकिन यह सिर्फ कैलेंडर ठीक करने के लिए ही नहीं है. धार्मिक दृष्टि से यह महीना बहुत खास माना जाता है. इसे भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) को समर्पित किया जाता है. मान्यता है कि इस पूरे महीने में किए गए पूजा-पाठ, दान और ध्यान का फल कई गुना बढ़ जाता है. इसलिए इसे एक तरह से पूरे महीने चलने वाला आध्यात्मिक उत्सव भी कहा जाता है. अधिकमास में क्या करें (पुण्य कर्म) अधिकमास को पुण्य कमाने का सबसे अच्छा समय माना जाता है. यह एक ऐसा मौका है जिसे आपको गंवाना नहीं चाहिए. इस पूरे महीने में ध्यान अच्छे और निस्वार्थ कामों पर रखना चाहिए, जिससे मन और आत्मा शुद्ध होती है. 1. भगवान विष्णु की पूजा करें यह महीना भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) को समर्पित होता है, इसलिए उनकी पूजा सबसे जरूरी मानी जाती है. आप रोज विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर सकते हैं. सत्यनारायण व्रत कथा सुनना या पढ़ना भी बहुत शुभ होता है. यहां बड़ी पूजा नहीं, बल्कि सच्चे मन से की गई भक्ति ज्यादा महत्वपूर्ण होती है. 2. दान करें अधिकमास में किया गया दान कई गुना फल देता है. यह सिर्फ पैसे का दान नहीं है, बल्कि भावना सबसे जरूरी होती है. आप अन्न दान, वस्त्र दान या दीप दान कर सकते हैं. जरूरतमंदों की मदद करना इस महीने का सबसे सीधा और असरदार उपाय माना जाता है. 3. जप और तप करें इस महीने में मंत्र जाप और व्रत रखना बहुत लाभदायक होता है. 'ऊं नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का रोज जाप करें, अगर संभव हो तो तुलसी की माला से 108 बार जप करें. व्रत रखने से मन और इंद्रियों पर नियंत्रण आता है और ध्यान भगवान में लगता है. 4. धार्मिक ग्रंथ पढ़ें इस समय आप भगवद्गीता, श्रीमद्भागवत पुराण या रामायण जैसे पवित्र ग्रंथ पढ़ सकते हैं. इससे ज्ञान बढ़ता है और जीवन को सही दिशा मिलती है. सिर्फ पढ़ें ही नहीं, बल्कि उसकी बातों को अपने जीवन में उतारने की कोशिश करें. अधिक मास में क्या नहीं करना चाहिए शुभ कार्य न करें: जैसे शादी (विवाह), मुंडन और गृह प्रवेश बड़ी खरीदारी से बचें: नया घर, गाड़ी या महंगे गहने न खरीदें नई शुरुआत न करें: नया बिजनेस शुरू करना, घर बनवाना या किसी प्रोजेक्ट की शुरुआत करना टालें क्यों टालें ये काम? क्योंकि ये सभी काम हमारी इच्छाओं और भौतिक सुखों से जुड़े होते हैं. अधिकमास हमें सिखाता है कि थोड़े समय के लिए इन चीजों से ध्यान हटाकर अपनी आत्मा और अध्यात्म पर ध्यान दें. पूरे महीने का व्रत और नियम जो लोग अधिकमास में अपनी भक्ति को और गहरा बनाना चाहते हैं, वे पूरे महीने व्रत रख सकते हैं. यह एक कठिन लेकिन बहुत ही फलदायी साधना मानी जाती है. अगर आप यह व्रत करते हैं, तो आपको एक सही दिनचर्या अपनानी होती है. इस दौरान आपका भोजन बहुत साधारण और सात्विक होना चाहिए. दिन में सिर्फ एक बार खाना खाएं और उसमें प्याज, लहसुन, अनाज और मांसाहार से पूरी तरह परहेज करें. फल, दूध और व्रत में खाए जाने वाले आहार जैसे साबूदाना आदि का सेवन करें. आपकी दिनचर्या ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पहले) उठकर स्नान और पूजा से शुरू होनी चाहिए. यह व्रत शरीर को कष्ट देने के लिए नहीं, बल्कि मन को शांत करने और भगवान की भक्ति में लगाने के लिए किया जाता है. अधिकमास की कथा अधिकमास से जुड़ी यह कथा बहुत सुंदर और भावुक है. पहले इस अतिरिक्त महीने का कोई देवता नहीं था, इसलिए इसे मलमास कहा जाता था, यानी ऐसा महीना जिसे अशुभ या बेकार माना जाता था. इस महीने में कोई त्योहार या शुभ काम नहीं किए जाते थे, इसलिए यह खुद को उपेक्षित और दुखी महसूस करता था. यह कथा हमें उस भावना से जोड़ती है, जब कोई खुद को महत्वहीन समझने लगता है. अपनी परेशानी लेकर यह महीना भगवान विष्णु के पास गया. पद्म पुराण के अनुसार, भगवान विष्णु ने जब इस महीने की परेशानी सुनी तो उन्होंने इसे अपना लिया. उन्होंने न सिर्फ इसे महत्व दिया, बल्कि अपना ही एक नाम पुरुषोत्तम भी इसे दे दिया. तभी से यह महीना पुरुषोत्तम मास कहलाने लगा. भगवान विष्णु ने यह भी कहा कि जो भक्त इस महीने में बिना किसी स्वार्थ के पूजा-पाठ, दान और अच्छे कर्म करेगा, उसे उनका विशेष आशीर्वाद मिलेगा और उसका पुण्य कई गुना बढ़ेगा. इस तरह जो महीना पहले उपेक्षित था, वही सबसे पवित्र और खास बन गया.

DIOS ने जारी किए आदेश, आकस्मिक अनुमति के बिना शिक्षक नहीं जा सकेंगे बाहर

लखनऊ माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मी जून-जुलाई में जिला मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। इस दौरान होने वाली भर्ती परीक्षाओं के कारण शिक्षकों के जिला मुख्यालय छोड़ने पर रोक रहेगी। जिला स्तर पर डीआईओएस द्वारा इसके आदेश जारी किए जा रहे हैं। जून-जुलाई में लेखपाल भर्ती लिखित परीक्षा, पुलिस भर्ती, जीआईसी प्रवक्ता, बीएड परीक्षा, यूपीटेट समेत आधा दर्जन से अधिक परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। इसके साथ ही जनगणना का भी भौतिक काम शुरू होने वाला है। ऐसे में ये शिक्षक गर्मी की छुट्टियों का भी लाभ नहीं उठा सकेंगे। डीआईओएस की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि आकस्मिक व वैध कारण होने पर ही जिला विद्यालय निरीक्षक की अनुमति से वे जिला मुख्यालय से बाहर जा सकेंगे। इसके लिए उन्हें लिखित अनुमति लेनी होगी। वहीं माध्यमिक शिक्षा निदेशक डाॅ. महेंद्र देव ने कहा कि परीक्षा कराने के लिए अनुभवी शिक्षकों की जरूरत होती है। लिहाजा स्कूलों के शिक्षक व स्टाफ को ही इसमें ड्यूटी लगाई जाती है। कक्ष निरीक्षक बनाया जाता है ताकि किसी प्रकार की कोई समस्या न हो।   माध्यमिक के दो अपर शिक्षा निदेशक के कार्यक्षेत्र में बदलाव माध्यमिक शिक्षा विभाग ने समूह क श्रेणी के दो अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया है। विभाग के संयुक्त सचिव संदीप परमार की ओर से जारी आदेश के अनुसार अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) सुरेंद्र कुमार तिवारी को अपर शिक्षा निदेशक (व्यावसायिक शिक्षा) के पद पर तैनात किया गया है। वहीं अपर शिक्षा निदेशक (व्यावसायिक शिक्षा) मनोज कुमार द्विवेदी को अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) बनाया गया है। इन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अपने नए तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करके इसका प्रमाण शासन को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।   आकांक्षी जिलों के शिक्षक तबादले के लिए पहुंचे निदेशालय प्रदेश के आकांक्षी जिलों के परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षकों ने अपने साथ दोहरा व्यवहार करने और तबादले का लाभ न देने का आरोप लगाया है। अपने तबादले के लिए कई जिलों के शिक्षक शुक्रवार को बेसिक से माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के चक्कर काटते रहे लेकिन उन्हें कोई प्रभावी आश्वासन नहीं मिला है। शिक्षकों ने बताया कि वर्ष 2018 और 2020 में इन जिलों के तबादले पर रोक लगा दी गई थी। 2023 में मात्र 10 फीसदी शिक्षकों के ही तबादले हुए। इसमें अधिक भारांक वाले शिक्षकों का ही तबादला हुआ। वरिष्ठ शिक्षक इससे वंचित हैं। उन्होंने कहा कि बेसिक शिक्षा नियमावली के तहत वरिष्ठता के आधार पर एक से दूसरे जिले में तबादला किया जाए। इसमें भारांक की भेदभावपूर्ण नीति को समाप्त किया जाए। वहीं, इन जिलों में लगी अघोषित रोक को तत्काल हटाया जाए ताकि हमारे परिवार को राहत मिल सके। शिक्षकों ने इस गर्मी की छुट्टी में इस आधार पर जल्द तबादला प्रक्रिया पूरी करने की मांग उठाई।  

वास्तु शास्त्र: घर की सीढ़ियों पर क्यों नहीं बैठना चाहिए? जानें इसके पीछे की मान्यताएं और असर

हमारे वास्तु शास्त्र में घर की हर एक चीज का काफी खास महत्व बताया गया है. चाहे हमारे घर का मुख्य दरवाजा हो, किचन हो या फिर घर की सीढ़ियां ही क्यों न हों. जब आप इसमें बताया गए नियमों का सही से पालन करने लगते हैं तो आपकी जिंदगी काफी सुखद और समृद्धि से भरी हुई हो जाती है. वहीं, इन नियमों को नजरअंदाज करने से जीवन में परेशानियों के बढ़ने का भी खतरा रहता है. हमारे वास्तु शास्त्र में घर की सीढ़ियों को लेकर भी कुछ खास नियम बताये गए हैं, जिनमें आपको इस सवाल का जवाब भी मिल जाता है कि आखिर आपको क्यों घर की सीढ़ियों पर नहीं बैठना चाहिए. आज हम आपको इसी सवाल का जवाब इस आर्टिकल में देने वाले हैं. जब आप इस आर्टिकल को पढ़ लेंगे तो दोबारा कभी भी घर की सीढ़ियों पर बैठने की गलती नहीं करेंगे. सीढ़ियों पर बैठने से रुकती है पॉजिटिव एनर्जी वास्तु शास्त्र के अनुसार आपके घर में जो भी एनर्जी होती है वह लगातार एक जगह से दूर जगह घूमती रहती है. आपकी घर की सीढ़ियां ही इस एनर्जी के ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर जाने का रास्ता मानी जाती है. ऐसे में जब कोई भी आकर सीढ़ियों पर बैठ जाता है, तो वह एनर्जी के फ्लो में रुकावट बन जाता है. मान्यताओं के अनुसार जब आप ऐसा करते हैं तो घर में पॉजिटिव एनर्जी घटने लगती है और साथ ही स्ट्रेस और बेचैनी बढ़ने लग जाती है. फिनांशियल प्रॉब्लम्स से भी जोड़ा जाता है इसे वास्तु शास्त्र में हमारी घर की सीढ़ियों को ही जीवन में तरक्की करने का और आगे बढ़ने का संकेत माना गया है. ऐसे में अगर आप घर की सीढ़ियों में बैठते हैं या फिर लंबे समय तक खड़ा रहते हैं, तो हो सकता है कि आपकी तरक्की में रुकावट आ जाए. मान्यताओं के अनुसार आपकी यह गलती पैसों से जुड़ी दिक्कतों को भी बढ़ा सकती है. कई बार इसकी वजह से आपको मेहनत का भी पूरा फल नहीं मिलता है. परिवार के रिश्तों पर भी पड़ सकता है असर आपके घर का माहौल कैसा है और वहां की एनर्जी कैसी है इस बात का असर पारिवारिक रिश्तों पर भी काफी गहरा पड़ता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर घर की एनर्जी बैलेंस्ड न रहे, तो छोटी से छोटी बातों पर भी स्ट्रेस और झगड़े बढ़ने लग जाते हैं. इसके अलावा जब आप सीढ़ियों पर बैठे रहते हैं या फिर उसे गंदा करके रखते हैं तो पूरे घर का माहौल भारी लगने लगता है. कई बार इसकी वजह से परिवार में झगड़े और बहस भी बढ़ जाते हैं. हेल्थ पर भी पड़ सकता है निगेटिव असर वास्तु शास्त्र के अनुसार आपको इसलिए भी घर की सीढ़ियों पर नहीं बैठना चाहिए, क्योंकि इसकी वजह से दुर्घटना होने का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा आपके घर में आने-जाने वालों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. कई बार सीढ़ियों के आसपास धूल जमा हो जाती है, जिस वजह से इसका असर आपकी सेहत पर भी पड़ सकता है.  

पेट्रोल-डीजल महंगा होने के बाद सार्वजनिक वाहनों ने बढ़ाया किराया, यात्रियों में नाराजगी

 पटना पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की कीमतों में वृद्धि के बाद अब सार्वजनिक वाहन चालक मनमाने ढंग से किराया वसूल रहे हैं। इससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पटना जंक्शन से बेली रोड से सगुना मोड़ या अन्य जगह जाने के लिए किराये में 15 से 20 रुपये तक अधिक वसूला जा रहा है। शनिवार सुबह आशियाना मोड़ निवासी पप्पू कुमार ने बताया कि वह पटना जंक्शन से आशियाना मोड़ तक आए तो उनसे 50 रुपया किराया वसूल लिया गया। यह 20 रुपया अधिक है। पूछने पर ऑटो चालक ने कहा कि पेट्रो उत्पादों की कीमतों में वृद्ध के कारण ऐसा हो रहा है। इसी तरह की शिकायत गोला रोड निवासी आशुतोष कुमार ने भी की। उन्होंने कहा कि उनसे 15 रुपया किराया अधिक लिया गया। यात्रियों ने कहा कि प्रशासन से अपील है कि वह इस मामले को गंभीरता से ले। पटना जिला प्रशासन ने क्या कहा? इधर, इस मामले में पटना जिला प्रशासन की ओर कहा गया कि विभिन्न माध्यमों से सूचना मिल रही है कि टेम्पू, ऑटो और अन्य सार्वजनिक वाहनों का किराया मनमाने तरीके से बढ़ाया जा रहा है। प्रशासन ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि प्रमंडल-स्तरीय भाड़ा निर्धारण समिति की अनुमति के बिना यात्री किराया बढ़ाना पूरी तरह अवैध है। Bihar News: निशांत को वैशाली, विजय सिन्हा को गयाजी की कमान; जानिए कौन-किस जिले के प्रभारी मंत्री बने अधिक किराया वसूलने पर कार्रवाई प्रशासन के अनुसार, टेम्पू, ऑटो एवं नगर सेवा बसों के भाड़े में किसी भी प्रकार की वृद्धि सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति के बिना नहीं की जा सकती। यदि कोई वाहन चालक या संचालक निर्धारित नियमों का उल्लंघन करते हुए अधिक किराया वसूलता पाया गया, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे निर्धारित किराया ही दें और अधिक वसूली की शिकायत संबंधित अधिकारियों को तुरंत उपलब्ध कराएं

वट सावित्री व्रत 2026: परिक्रमा के दौरान इस मंत्र से मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद

आज यानी 16 मई को देश भर में सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए वट सावित्री का व्रत रख रही हैं.  इस दिन बरगद (वट) के पेड़ की पूजा और परिक्रमा का सबसे ज्यादा महत्व होता है.  शास्त्रों के अनुसार, अगर आज परिक्रमा करते समय एक विशेष मंत्र का जाप किया जाए, तो पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है. आज पूजा का सबसे उत्तम समय अगर आप आज पूजा करने जा रही हैं, तो समय का खास ख्याल रखें. ज्योतिषियों के मुताबिक, आज पूजा का सबसे महाशुभ मुहूर्त (अभिजीत मुहूर्त) सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:44 बजे तक है.  इस 54 मिनट के दौरान पूजा और परिक्रमा करना बेहद फलदायी माना गया है. परिक्रमा करते समय इस मंत्र का करें जाप बरगद के पेड़ के चारों ओर कच्चा सूत या कलावा लपेटते हुए महिलाओं को कम से कम 7 या 11 बार परिक्रमा करनी चाहिए.  परिक्रमा के दौरान मन ही मन इस पौराणिक मंत्र का जाप करना चाहिए: "यानि कानि च पापानि जन्मांतर कृतानि च। तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिण पदे-पदे।।" इसका आसान अर्थ क्या है? इस मंत्र का मतलब है कि जाने-अनजाने में हमारे इस जन्म या पिछले जन्मों के जो भी पाप या कमियां रही हों, इस पवित्र वृक्ष की परिक्रमा (प्रदक्षिणा) के हर एक कदम के साथ वे सभी नष्ट हो जाएं और हमारे परिवार में सुख-शांति आए. बरगद की पूजा क्यों है इतनी खास? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बरगद के पेड़ की जड़ों में ब्रह्मा जी, तने में भगवान विष्णु और शाखाओं (डालियों) में साक्षात शिव जी का वास होता है. इसके साथ ही, सावित्री ने इसी पेड़ के नीचे अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे.  यही वजह है कि आज के दिन इस पेड़ की पूजा करने से तीनों देवों के साथ माता सावित्री का भी आशीर्वाद एक साथ मिल जाता है.

जमीन घोटाला मामले में Robert Vadra को राहत, अदालत ने मंजूर की बेल

नई दिल्ली कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पति और कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा को गुरुग्राम के शिकोहपुर लैंड डील से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राहत मिल गई है. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी।  रॉबर्ट वाड्रा बुधवार को खुद अदालत में पेश हुए थे. अदालत में पेशी के बाद उन्हें नियमित प्रक्रिया के तहत जमानत दे दी गई. कानूनी जानकारों के मुताबिक, किसी भी आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत में पेश होकर जमानत लेना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होता है।  ‘मैं निडर हूं, ईडी को झेलना है’ कोर्ट से मिली जमानत के बाद रॉबर्ट वाड्रा ने कहा, ‘मैं निडर हूं. मैं डरता नहीं हूं. अब तक ईडी को झेलना है, क्योंकि वह तो सरकार के इशारे पर चलती है।  क्या है पूरा मामला? यह मामला हरियाणा के गुरुग्राम स्थित शिकोहपुर जमीन सौदे से जुड़ा है, जिसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है. ईडी ने 17 जुलाई 2025 को इस मामले में रॉबर्ट वाड्रा समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।  इससे पहले पिछली सुनवाई में दिल्ली हाई कोर्ट ने वाड्रा को कोई अंतरिम राहत नहीं दी थी और उन्हें निचली अदालत में पेश होने के लिए कहा था. मामले की सुनवाई के दौरान वाड्रा की ओर से पेश वकील ने दलील दी थी कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला नहीं बनता. वाड्रा के वकील ने अदालत से यह भी कहा था कि ईडी की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान नहीं लिया जाना चाहिए. हालांकि अदालत ने 2 अगस्त 2025 को वाड्रा सहित 10 अन्य आरोपियों को प्री-समन जारी किए थे।  ईडी का आरोप है कि शिकोहपुर भूमि सौदे में वित्तीय अनियमितताएं हुईं और इसी से जुड़े लेन-देन की जांच मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से की जा रही है. मामले में आगे की सुनवाई अब राउज एवेन्यू कोर्ट में होगी। 

आंधी-बारिश के बाद आम किसानों की उम्मीद बैगिंग तकनीक पर टिकी, उद्यान विभाग कर रहा मदद

लखनऊ प्रदेश में आंधी- बारिश और कीटों की मार के बाद बागों में बची 40 से 50 फीसदी आम की फसल को सुरिक्षत करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। इसके लिए बैगिंग प्रणाली पर जोर दिया जा रहा है, ताकि आम की भरपूर कीमत मिल सके। किसानों को बेहतर फायदा देने के लिए उद्यान विभाग के कर्मचारी उन्हें बैग बांधने के तरीके बता रहे हैं। आम की स्थिति जानने के लिए हम शुक्रवार सुबह काकोरी के रास्ते सहिलामऊ पहुंचे। यहां एक बाग में मिले शंकर सिंह आसमान की तरफ देखकर कहते हैं कि ये बादल और टिप टिप गिरती बूंदें आम के लिए जहर जैसी हैं। बैग ( कागज, पालीथीन थैला) को दिखाकर कहते हैं कि इससे कुछ उम्मीद है। वह थैला बांधने में लगे मजदूरों को समझाते हैं कि सिर्फ लंगड़ा और चौसा में ही बांधना है। दशहरी को उसके हाल पर छोड़ दो। ताकीद भी करते हैं कि जो फल मजबूत दिख रहा है सिर्फ उसी में बांधना है। यहां से आगे बढ़े तो कनार गांव की बाग में उद्यान विभाग के कर्मचारी मिले। वे किसानों को बैग बांधने का तरीका सिखा रहे थे। बस्ती के बागवान संदीप मौर्य बताते हैं कि पिछले वर्ष तीन हजार फलों में बैग बंधवाया था। सामान्य आम 20 से 25 रुपये प्रति किलो तो बैग वाला 35 से 45 रुपये किलो बिका था। यह आम ज्यादा बड़ा, चमकदार और टिकाऊ था। फलों को तोड़ने के बाद सुरक्षित रखे गए बैग इस बार भी इस्तेमाल कर रहे हैं। आम्रपाली और चौसा के लिए पांच हजार नए बैग मंगवाये हैं। बाराबंकी, उन्नाव, बुलंदशहर और अमरोहा के हसनगंज के बागवान भी इस प्रणाली से आम को निर्यात लायकबनाने में जुटे हैं।

योगी सरकार का बड़ा फैसला, भवन निर्माण उपविधि 2025 में संशोधन से व्यापारिक निर्माण होंगे आसान

 लखनऊ विकास के साथ अन्य निर्माण कार्य में आने वाली विसंगति को योगी आदित्यनाथ सरकार ने दूर करके बड़े वर्ग को राहत प्रदान की है। उत्तर प्रदेश भवन निर्माण उपविधि तथा जोनिंग रेगुलेशन्स-2025 के संशोधन से अब तमाम निर्माण कार्य की राह आसान हो गई है। आवास विभाग से जारी अधिसूचना के मुताबिक प्रदेश में अब सात मीटर चौड़ी सड़क पर वेयरहाउस व लाजिस्टिक पार्क का निर्माण कराया जा सकेगा। इसी तरह सात मीटर चौड़ी सड़क पर राजमार्ग सुविधा जोन विकसित किए जा सकेंगे। इसके लिए राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश विकास प्राधिकरण भवन निर्माण एवं विकास उपविधि तथा आदर्श जोनिंग रेगुलेशन्स-2025 में संशोधन किया है। विसंगतियां दूर करने के लिए किए संशोधन के तहत अब शापिंग माल के अलावा दुकानों अन्य व्यावसायिक निर्माण भी 18 मीटर चौड़ी सड़क पर किए जा सकेंगे। प्रमुख सचिव आवास पी गुरू प्रसाद के कार्यालय से जारी अधिसूचना के मुताबिक सात मीटर चौड़ी सड़क पर औद्योगिक गतिविधियों की अनुमति दिए जाने के बावजूद अब तक वेयरहाउसिंग व लाजिस्टिक पार्क का निर्माण 18 मीटर चौड़ी सड़क पर ही करने अनुमति थी जिसे अब संधोशन के जरिए सात मीटर किया गया है। इसी तरह अब तक शापिंग माल तो 18 मीटर चौड़ी सड़क पर बनाया जा सकता था लेकिन दुकान व अन्य व्यावसायिक निर्माण केवल 24 मीटर चौड़ी सड़क पर ही करने की अनुमति थी। संशोधन के जरिए अब 18 मीटर पर दुकान आदि का भी निर्माण किया जा सकेगा। अभी तक राजमार्ग सुविधा जोन (हाईवे फैसिलिटी जोन) के लिए सड़क की चौड़ाई से लेकर एफएआर के प्रविधान स्पष्ट नहीं थे इसलिए अब संशोधन कर सरकार ने कृषि उपयोग क्षेत्र के समकक्ष राजमार्ग सुविधा जोन को माना है। ऐसे में अब राजमार्ग सुविधा जोन की सड़क की चौड़ाई न्यूनतम सात मीटर रहेगी। विदित हो कि चार जुलाई 2025 से लागू उत्तर प्रदेश विकास प्राधिकरण भवन निर्माण एवं विकास उपविधियों-2025 और जोनिंग रेगुलेशन्स को लेकर हो रही दिक्कतों को दूर करने के लिए कठिनाई निवारण समिति बनी हुई है। समिति, सुझाव के आधार पर उपविधि को संशोधन करती रहती है। नियमों और सुविधाओं से जुड़ी मुख्य बातें सड़क की चौड़ाई: वेयरहाउस व लॉजिस्टिक्स पार्क के लिए 7 मीटर चौड़ी सड़क (ब्लैक टॉप रोड) और कम से कम 1.5 मीटर फुटपाथ की अनिवार्यता तय की गई है। प्लेज पार्क पॉलिसी: औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्लेज पार्क को भी 7 मीटर चौड़ी सड़क पर बनाने की अनुमति दी गई है, जबकि पहले 12 मीटर की सड़क अनिवार्य थी श्रेणी (Category): सात मीटर चौड़े संपर्क मार्ग पर केवल ग्रीन व ऑरेंज (गैर-प्रदूषणकारी और कम प्रदूषणकारी) श्रेणी के उद्योगों/गोदामों की ही अनुमति होगी। व्यावसायिक निर्माण: वेयरहाउस या प्लेज पार्क के कुल क्षेत्रफल में अधिकतम 10 प्रतिशत हिस्से पर व्यापारिक व वाणिज्यिक सुविधाएं (शॉपिंग, दुकानें आदि) बनाई जा सकती हैं।  

अपराधियों पर शिकंजा: फरीदाबाद में 10 क्राइम ब्रांच टीमों की एक साथ दबिश

फरीदाबाद. एनआईटी-तीन स्थित नेहरू कॉलोनी शनिवार सुबह अचानक पुलिस छावनी में तब्दील हो गई, जब क्राइम ब्रांच की 10 टीमों ने एक साथ नशा तस्करों के खिलाफ बड़ा सर्च अभियान शुरू कर दिया। अभियान में 100 से अधिक पुलिसकर्मी शामिल हैं, जो गली-गली और घर-घर जाकर नशीले पदार्थों की तलाश कर रहे हैं। शुरुआती कार्रवाई में 4 से 5 लोगों को हिरासत में लिए जाने की सूचना है, जबकि मौके से बड़े स्तर पर नशीले पदार्थ बरामद होने की भी चर्चा है। सूत्रों के अनुसार क्राइम ब्रांच को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि नेहरू कॉलोनी में संगठित तरीके से नशे का कारोबार चल रहा है। बताया जा रहा है कि कुछ मकानों को नशा सप्लाई के अड्डों के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। इसी इनपुट के आधार पर शनिवार सुबह अचानक कार्रवाई की गई ताकि किसी आरोपित को भागने का मौका न मिले। संदिग्ध मकानों को घेरकर तलाशी शुरू की पुलिस टीमों ने कालोनी के कई संदिग्ध मकानों को घेरकर तलाशी शुरू की। कई स्थानों पर महिलाओं की मौजूदगी में महिला पुलिसकर्मियों ने भी जांच की। कार्रवाई के दौरान कालोनी में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और बड़ी संख्या में लोग घरों के बाहर जमा हो गए। फरीदाबाद पुलिस इससे पहले भी शहर में नशा तस्करों के खिलाफ बड़े अभियान चला चुकी है। वर्ष 2024 में “ऑपरेशन आक्रमण” के दौरान भी पुलिस ने जिलेभर में एक साथ छापेमारी कर नशा तस्करी, अवैध शराब और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल दर्जनों लोगों को पकड़ा था। शहर में नशा तस्करों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इससे पहले अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियों पर भी बुलडोजर कार्रवाई हो चुकी है। नेहरू कॉलोनी में पहले भी कई बार अभियान चला चुकी  क्राइम ब्रांच की टीम नेहरू कॉलोनी में पहले भी कई बार अभियान चला चुकी है, लेकिन पुलिस को आशंका है कि कुछ गिरोह दोबारा सक्रिय हो गए हैं। इसी वजह से इस बार बड़ी संख्या में पुलिस बल उतारा गया है। अधिकारियों का कहना है कि अभियान पूरा होने के बाद बरामदगी और गिरफ्तार किए गए आरोपितों को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।