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निपुण भारत मिशन को रफ्तार देगी योगी सरकार, जिला समन्वयकों को मिलेगी विशेष ट्रेनिंग

निपुण भारत मिशन को मिलेगी नई गति, योगी सरकार जिला समन्वयकों को देगी विशेष ट्रेनिंग – 1 और 2 जून को लखनऊ में होगा राज्य स्तरीय प्रशिक्षण, प्रदेश के सभी जिलों से पहुंचेंगे जिला समन्वयक – निपुण भारत मिशन और गुणवत्ता शिक्षा संवर्धन गतिविधियों की जमीनी मॉनिटरिंग को मिलेगा नया आधार – प्रशिक्षण के जरिए स्कूल शिक्षा में सीखने के परिणामों और अकादमिक गुणवत्ता सुधार पर रहेगा फोकस – राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), लखनऊ में होगा प्रशिक्षण लखनऊ  उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार अब निपुण भारत मिशन और गुणवत्ता शिक्षा अभियान को जमीनी स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसी क्रम में राज्य स्तर पर कार्यरत जिला समन्वयक (निपुण भारत मिशन) एवं जिला समन्वयक (प्रशिक्षण) के लिए 1 और 2 जून को राज्य स्तरीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके लिए सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को संबंधित जिला समन्वयकों की प्रशिक्षण में अनिवार्य सहभागिता सुनिश्चित कराए जाने संबंधी निर्देश दिए गए हैं। राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), लखनऊ में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के सभी 75 जनपदों से जिला समन्वयक प्रतिभाग करेंगे। प्रशिक्षण का उद्देश्य निपुण भारत मिशन और गुणवत्ता शिक्षा संवर्धन से जुड़ी गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन, अनुश्रवण और मूल्यांकन व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना है। निपुण भारत मिशन एक शैक्षिक कार्यक्रम के साथ-साथ बच्चों की सीखने की बुनियादी  क्षमता को सुदृढ़ करने का व्यापक अभियान है। योगी सरकार ने पिछले एक दशक में परिषदीय शिक्षा के ढांचे, तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था और शिक्षण पद्धतियों में व्यापक सुधार किए हैं। ऑपरेशन कायाकल्प, स्मार्ट क्लास, डिजिटल मॉनिटरिंग, ई-कंटेंट और निपुण भारत मिशन जैसे अभियानों के माध्यम से परिषदीय शिक्षा व्यवस्था में बड़े परिवर्तन लाए गए हैं। अब जिला समन्वयकों के विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से इन सुधारों को विद्यालय स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करने और शिक्षा व्यवस्था को अधिक परिणाममुखी बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। दो बैचों में होगा प्रशिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम को दो बैचों में आयोजित किया जाएगा। पहले बैच का प्रशिक्षण 1 जून को होगा, जिसमें आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, आजमगढ़, बरेली, बस्ती, देवीपाटन, गोरखपुर और चित्रकूट मंडल के जिलों के प्रतिभागी शामिल होंगे। वहीं दूसरे बैच का आयोजन 2 जून को किया जाएगा, जिसमें झांसी, कानपुर, लखनऊ, मेरठ, मिर्जापुर, मुरादाबाद, प्रयागराज, सहारनपुर और वाराणसी मंडल के जिला समन्वयक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। अकादमिक अनुश्रवण और सीखने के परिणामों पर रहेगा विशेष फोकस प्रदेश सरकार का मानना है कि जब जिला स्तर पर अकादमिक मॉनिटरिंग और प्रशिक्षण व्यवस्था मजबूत होगी, तभी विद्यालयों में सीखने के परिणामों में वास्तविक सुधार दिखाई देगा। इसी सोच के तहत प्रशिक्षण के माध्यम से जिला समन्वयकों को अकादमिक एवं प्रशासनिक अनुश्रवण, डेटा आधारित योजना एवं निर्णय निर्माण, प्रभावी समीक्षा प्रक्रियाओं, शिक्षक सहयोग तंत्र तथा सीखने के परिणामों (एसएलओज) में सुधार हेतु आवश्यक प्रक्रियाओं और प्रणालियों पर प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके साथ ही जिला समन्वयकों को निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों, आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन), गुणवत्ता मूल्यांकन, शिक्षकों के क्षमता संवर्धन, गतिविधि आधारित शिक्षण तथा विद्यालयों में गुणवत्ता शिक्षा संवर्धन से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा और जिला स्तर पर बेहतर योजना, प्रभावी अनुश्रवण और शैक्षणिक सहयोग के माध्यम से विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण सीखने को बढ़ावा दिया जायेगा।

Twisha Sharma Case: कोर्ट ने गिरिबाला-सamarth को भेजा CBI रिमांड पर, अब खुलेंगे आखिरी घंटों के राज

भोपाल  एक्ट्रेस-मॉडल ट्विशा शर्मा मौत मामले में सीबीआई ने उसकी सास रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और पति समर्थ को शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया। जांच एजेंसी के वकील ने दोनों की 5-5 दिन की रिमांड मांगी। इस पर आरोपी पक्ष के वकील ने कोई आपत्ति जाहिर नहीं की। जिसके बाद स्पेशल कोर्ट की जज शोभना भलावे ने सीबीआई रिमांड को मंजूरी दे दी। बता दें कि ट्विशा का पति समर्थ सिंह पहले से ही 7 दिन की सीबीआई रिमांड पर था। शुक्रवार को ये रिमांड खत्म होने पर उसे कोर्ट में पेश किया गया। सूत्रों के मुताबिक, रिमांड के दौरान सीबीआई दोनों आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी। समर्थ ने फरारी कहां और किसके साथ काटी, इसको लेकर भी सवाल-जवाब होंगे। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, अब जांच के लिए टनल व्यू इन्वेस्टिगेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। एजेंसी ट्विशा के आखिरी घंटों का वर्चुअल रीक्रिएशन तैयार कर रही है, ताकि घटना से पहले और बाद की हर गतिविधि को मिनट-टू-मिनट समझा जा सके। अदालत में पेशी, 5 दिन की रिमांड मंजूर सीबीआई ने गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को 5 दिन की रिमांड पर भेज दिया गया. कोर्ट में सुनवाई के दौरान गिरिबाला और समर्थ शांत मुद्रा में नजर आए।  वकीलों ने रिमांड का विरोध नहीं किया गिरिबाला सिंह के वकीलों ने सीबीआई की रिमांड का विरोध नहीं किया, बल्कि यह कहा कि एसआईटी के पास जो भी सबूत हैं, उन्हें सुरक्षित तरीके से सीबीआई को सौंपा जाए. इस पर सीबीआई ने बताया कि उन्हें सभी आवश्यक दस्तावेज मिल चुके है।  कोर्ट में हुई बहस, CBI ने रोका दखल सुनवाई के दौरान कटघरे में खड़े गिरिबाला सिंह की सीबीआई अधिकारियों से बहस भी हुई. अधिकारी ने उन्हें वकीलों से अधिक बोलने और मामले से इतर विषय उठाने से रोका, जिससे कुछ देर के लिए अदालत का माहौल गर्म हो गया।  घटना के दिन के हालात पर होगी पूछताछ सीबीआई अब घटना के दिन की परिस्थितियों को लेकर अहम सवाल करेगी. इसमें यह जानने की कोशिश होगी कि कटारा हिल्स स्थित घर में उस समय कौन-कौन मौजूद था और अंदर क्या घटनाक्रम हुआ था।  शादी के 5 महीने बाद मौत पर सवाल जांच एजेंसी यह भी पता लगाएगी कि यदि सब कुछ सामान्य था, तो शादी के महज 5 महीने बाद ऐसी स्थिति कैसे बनी कि ट्विशा शर्मा की मौत हो गई. साथ ही परिवार के भीतर चल रहे विवादों और उत्पीड़न के आरोपों की भी पड़ताल की जाएगी।  सबूतों और पुलिस जांच पर संदेह सीबीआई पुलिस जांच के दौरान हुई कथित गड़बड़ियों पर भी सवाल उठाएगी. जैसे- मौत की सूचना देने में देरी क्यों हुई, शव को नीचे लाकर CPR देने का फैसला किसने लिया और पुलिस रिकॉर्ड में लंबाई जैसी जानकारी गलत कैसे दर्ज हुई।  40 मिनट की घटनाओं पर फोकस जांच का सबसे अहम हिस्सा वह 40 मिनट का समय है, जब ट्विशा जिम एरिया में गईं और फिर उनकी मौत हुई. सीबीआई यह जानने की कोशिश करेगी कि उस दौरान क्या हुआ और किन परिस्थितियों में उन्हें नीचे लाया गया।  वायरल वीडियो पर भी सवाल जांच एजेंसी यह भी देखेगी कि केवल छत से नीचे लाने का वीडियो ही क्यों वायरल हुआ, उसके पहले या बाद का कोई फुटेज क्यों सामने नहीं आया. इससे सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका भी जताई जा रही है।  समर्थ सिंह की भूमिका भी जांच के घेरे में सीबीआई समर्थ सिंह की भूमिका की भी गहराई से जांच करेगी. उनके बयानों में विरोधाभास, फरार रहने के दौरान मदद और पूरे घटनाक्रम में उनकी संलिप्तता की जांच की जाएगी।  परिजनों के आरोपों की पड़ताल ट्विशा शर्मा के परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप भी जांच में अहम होंगे. इनमें कथित उत्पीड़न, जबरन गर्भपात और चरित्र पर सवाल उठाने जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं।  जांच में खुल सकती हैं नई परतें सीबीआई की इस पूछताछ से मामले के कई अनछुए पहलुओं से पर्दा उठने की संभावना है. अब सबकी नजर 2 जून तक की रिमांड अवधि पर टिकी है, जहां से इस हाई-प्रोफाइल केस में अहम खुलासे हो सकते हैं। 

चुनावी नतीजों के बाद एक्शन मोड में पंजाब सरकार, कल होगी CM मान की अहम बैठक

चंडीगढ़ जाब में निकाय चुनावों के परिणाम आने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शनिवार को मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह सरकार की पहली कैबिनेट बैठक होगी, जिस पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की नजरें टिकी हुई हैं। जारी आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार मंत्रिमंडल की बैठक 30 मई को दोपहर 12 बजे मुख्यमंत्री आवास, सेक्टर-2, चंडीगढ़ में आयोजित की जाएगी। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री भगवंत मान करेंगे। बैठक को लेकर सभी मंत्रियों को उपस्थित रहने के निर्देश जारी किए गए हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार बैठक में विभिन्न विभागों से जुड़े प्रस्तावों, प्रशासनिक मामलों और जनहित से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है। हालांकि बैठक का आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन चुनावी परिणामों के बाद होने वाली इस बैठक को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परिणामों के बाद अहम है बैठक निकाय चुनावों में आम आदमी पार्टी के बेहतरीन प्रदर्शन के बाद यह बैठक सरकार की आगामी रणनीति तय करने के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि सरकार विकास कार्यों, प्रशासनिक सुधारों और विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा भी कर सकती है। बैठक के लिए मुख्य सचिव, वरिष्ठ अधिकारियों और संबंधित विभागों को आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार बैठक मुख्यमंत्री आवास में होगी और इसमें मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों की मौजूदगी अपेक्षित है। एजेंडा अभी स्प्ष्ट नहीं किया राजनीतिक जानकारों का मानना है कि निकाय चुनावों के बाद होने वाली इस पहली कैबिनेट बैठक से सरकार के अगले कदमों और प्राथमिकताओं की दिशा स्पष्ट हो सकती है। हालांकि अभी तक इस बैठक का एजेंडा साफ नहीं किया गा है। अब सभी की नजरें बैठक में लिए जाने वाले संभावित फैसलों पर टिकी हुई हैं। उल्लेखनीय है कि निकाय चुनावों के नतीजे आने के तुरंत बाद बुलाई गई इस बैठक को सरकार की आगामी प्रशासनिक और राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पुलिस प्रशिक्षण व्यवस्था को आधुनिक और परिणामोन्मुख बनाया जाए: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

तकनीक, संवेदनशीलता और प्रोफेशनल दक्षता से लैस रहे यूपी पुलिस: मुख्यमंत्री पुलिस प्रशिक्षण व्यवस्था को आधुनिक और परिणामोन्मुख बनाया जाए: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ देश में iGOT प्रशिक्षण पूर्णता में यूपी पुलिस अव्वल, 59 लाख से अधिक कोर्स पूर्ण जनसंवाद, व्यवहार और तकनीकी दक्षता पर विशेष फोकस के साथ बदलेगी पुलिस ट्रेनिंग व्यवस्था ड्रोन, साइबर फॉरेंसिक और सिम्युलेटर आधारित प्रशिक्षण से सशक्त होगी यूपी पुलिस लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  पुलिस प्रशिक्षण व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए कहा कि बदलते समय में पुलिसिंग केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गई है। आधुनिक तकनीक, संवेदनशील व्यवहार, संवाद कौशल, साइबर अपराधों की समझ और फॉरेंसिक दक्षता प्रभावी पुलिसिंग की बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने निर्देश दिए कि पुलिस प्रशिक्षण व्यवस्था को पूरी तरह परिणामोन्मुख, व्यवहारिक, तकनीक आधारित और समयानुकूल बनाया जाए, ताकि उत्तर प्रदेश पुलिस दक्षता, अनुशासन, संवेदनशीलता और जनविश्वास के मानकों पर देश की सर्वश्रेष्ठ पुलिस बल के रूप में स्थापित हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण व्यवस्था में गुणवत्ता, एकरूपता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। प्रशिक्षण संस्थानों में आधुनिक तकनीकों का अधिकतम उपयोग हो तथा प्रशिक्षण का नियमित मूल्यांकन किया जाए। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों को केवल कानून लागू करने तक सीमित न रखते हुए उन्हें संवाद कौशल, मानवीय व्यवहार और तनावपूर्ण परिस्थितियों में संतुलित निर्णय लेने के लिए भी प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। बैठक में बताया गया कि पुलिस प्रशिक्षण निदेशालय के अंतर्गत पुलिस अकादमी मुरादाबाद, 11 प्रशिक्षण संस्थान, 6 पुलिस ट्रेनिंग स्कूल, 2 आर्म्ड पुलिस ट्रेनिंग संस्थान तथा 62 अस्थायी एवं 31 स्थायी रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटर संचालित हैं। 112 RTC पर एक साथ प्रशिक्षण प्रारंभ कर अंतिम परीक्षाओं को शुचितापूर्ण एवं पारदर्शी तरीके से संपन्न कराया गया तथा एक साथ परीक्षा परिणाम घोषित किए गए। प्रशिक्षण क्षमता को 18 हजार से बढ़ाकर 60,244 तक किया गया है। प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का उच्चीकरण किया गया है तथा बाह्य विषयों में आवधिक मानक निर्धारित कर गुणवत्ता सुनिश्चित की गई है। यूपी पुलिस ट्रेनिंग पोर्टल के माध्यम से प्रशिक्षण सामग्री प्रशिक्षकों एवं प्रशिक्षुओं को उपलब्ध कराई जा रही है और 5,000 विशेषज्ञ प्रशिक्षक तैयार किए गए हैं। बैठक में बताया गया कि मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत iGOT पोर्टल पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। 27 मई 2026 तक 3,90,799 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं तथा 59,02,703 कोर्स पूर्ण किए जा चुके हैं। 20 मार्च 2026 को उत्तर प्रदेश पुलिस की 149 इकाइयों का iGOT पोर्टल पर सृजन कराया गया, जिससे जनपद, वाहिनी और इकाई स्तर पर प्रशिक्षण का प्रभावी पर्यवेक्षण संभव हुआ है। बैठक में बताया गया कि 2 अप्रैल से 10 अप्रैल 2026 तक आयोजित साधना सप्ताह में उत्तर प्रदेश पुलिस ने देश की समस्त राज्य पुलिस एवं केंद्रीय पुलिस बलों में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग ने अकेले 28 लाख से अधिक कोर्स पूर्ण किए, जो कई राज्यों के समस्त विभागों के संयुक्त प्रदर्शन से भी अधिक रहा। इस अवधि में 2,61,032 कर्मियों ने 2 घंटे से अधिक तथा 2,16,724 कर्मियों ने 4 घंटे से अधिक का लर्निंग समय पूरा किया। 2,45,645 कर्मियों ने AI कोर्स भी पूर्ण किए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि रोल आधारित ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रमों को तेजी से विकसित किया जाए। बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के साथ हुए एमओयू के तहत नवंबर 2025 में प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले 34 पुलिस उपाधीक्षकों को ‘एमए इन पुलिस साइंस एंड स्ट्रैटेजिक मैनेजमेंट’ की डिग्री प्रदान की गई। वहीं मई 2026 में पुलिस अकादमी मुरादाबाद में प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले 47 उपनिरीक्षकों को ‘पीजी डिप्लोमा इन पुलिस एंड सिक्योरिटी मैनेजमेंट’ प्रदान किया गया। बैठक में आगामी प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया गया कि 4,253 उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस, 15,131 आरक्षी पीएसी/सशस्त्र पुलिस, 2,282 महिला पीएसी आरक्षी, 10,469 आरक्षी नागरिक पुलिस तथा 1,341 यूपीएसएसएफ आरक्षियों सहित बड़ी संख्या में कार्मिकों का आधारभूत प्रशिक्षण प्रस्तावित है। इसके साथ ही 4,500 उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस एवं प्लाटून कमांडरों के प्रस्तावित प्रशिक्षण के लिए विस्तृत तैयारियां की जा रही हैं। प्रशिक्षण पाठ्यक्रम को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में संशोधित कर 11 संवेदनशीलता मॉड्यूल जोड़े गए हैं। ATS, STF, NDRF, SDRF, RAF, यूपी-112, विमेन पावरलाइन, चाइल्डलाइन, BDS और फायर सर्विसेज जैसी विशेषज्ञ एजेंसियों द्वारा ऑपरेशनल मॉक ड्रिल और कैप्सूल कोर्स संचालित किए जाएंगे। बैठक में बताया गया कि प्रशिक्षण में अत्याधुनिक तकनीकों का समावेश किया जा रहा है। इसके तहत ड्रोन प्रशिक्षण, साइबर फॉरेंसिक लैब, फॉरेंसिक लैब, ड्राइविंग सिम्युलेटर और फायरिंग सिम्युलेटर जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। स्मार्ट क्लासरूम के माध्यम से अतिथि विशेषज्ञों द्वारा ऑनलाइन प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिसकर्मियों का व्यवहार ही पुलिस की वास्तविक पहचान बनाता है। बैठक में बताया गया कि जनता से दुर्व्यवहार की शिकायत वाले 5,816 पुलिसकर्मियों को चिन्हित कर उनके लिए संवाद कौशल एवं सौम्य व्यवहार का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुंबई द्वारा 3 से 5 फरवरी 2026 तक 37 पुलिसकर्मियों को Behaviour, Operational Soft Skills एवं Caselets का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के प्रभाव का आकलन करने के लिए इम्पैक्ट असेसमेंट व्यवस्था लागू की गई है, जिसमें महिला सम्मान, संवाद क्षमता, आत्मनियंत्रण, तनाव प्रबंधन, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता और संवेदनशील व्यवहार जैसे 18 प्रमुख बिंदुओं पर मूल्यांकन किया जा रहा है। बैठक में बताया गया कि पहली बार उत्तर प्रदेश पुलिस अकादमी मुरादाबाद में मालदीव पुलिस सेवा के उपनिरीक्षकों को प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव भारत सरकार के स्तर पर विचाराधीन है। विदेश मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित इस प्रस्ताव को गृह मंत्रालय के माध्यम से विचारार्थ भेजा गया है। मुख्यमंत्री जी ने इसे भारत और पड़ोसी देशों के बीच आंतरिक सुरक्षा सहयोग की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।  मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रशिक्षण प्रणाली में निरंतर नवाचार, जवाबदेही और आधुनिकता सुनिश्चित की जाए, ताकि उत्तर प्रदेश पुलिस हर चुनौती का सामना अधिक दक्षता, संवेदनशीलता और प्रोफेशनल क्षमता के साथ कर सके।

Vinesh Phogat केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, WFI की मुश्किलें बढ़ीं

 नई दिल्ली भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 2026 एशियन गेम्स के चयन ट्रायल्स में हिस्सा लेने की अनुमति दे दी. ये ट्रायल्स 30 और 31 मई को आयोजित होने हैं।  जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसे भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर किया था. हाईकोर्ट ने पहले ही विनेश फोगाट को ट्रायल्स में भाग लेने की इजाजत दी थी।  सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि विनेश फोगाट का मामला सामान्य खिलाड़ियों से अलग है, क्योंकि उन्होंने देश को कई मौकों पर गौरवान्वित किया है. कोर्ट ने कहा, 'अगर कोई और खिलाड़ी होता तो मामला अलग होता. उन्होंने देश का नाम रोशन किया है। हालांकि, कोर्ट ने खेल मामलों में बार-बार न्यायिक हस्तक्षेप को लेकर चिंता भी जताई. जस्टिस नरसिम्हा ने कहा, 'आप शानदार रेसलर हैं, आपने देश को गर्व महसूस कराया है, लेकिन देश पहले है. हाईकोर्ट पूरे शेड्यूल को बाधित नहीं कर सकता।  सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के तरीके पर भी सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा कि खेल प्रशासन में इस तरह तेजी से हस्तक्षेप करने से पूरे स्पोर्ट्स सिस्टम और शेड्यूल पर असर पड़ सकता है।  दरअसल, पिछले हफ्ते दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि मातृत्व को किसी खिलाड़ी के करियर में 'अक्षम्यता' या बाहर करने का आधार नहीं बनाया जा सकता. इसी आधार पर हाईकोर्ट ने WFI को निर्देश दिया था कि विनेश फोगाट को ट्रायल्स में हिस्सा लेने दिया जाए।  अब सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल विनेश को राहत देते हुए ट्रायल्स में खेलने की मंजूरी दे दी है, लेकिन साथ ही WFI की याचिका पर उनका जवाब भी मांगा है. मामले की अगली सुनवाई अगले हफ्ते होगी।  इस फैसले के बाद अब सभी की नजरें 30-31 मई को होने वाले ट्रायल्स पर टिकी हैं, जहां विनेश फोगाट एक बार फिर मैट पर अपनी दावेदारी पेश करती नजर आएंगी।   

मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को किया सम्मानित  मुख्यमंत्री ने बच्चों का कराया अन्नप्राशन, महिलाओं की गोदभराई कार्यक्रम में लिया हिस्सा मऊ/लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मऊ में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को चेक, चाबी, लैपटॉप, स्वीकृति पत्र आदि देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने महिलाओं की गोदभराई कार्यक्रम में हिस्सा लिया और बच्चों का अन्नप्राशन भी कराया। मऊ के विकास पर आधारित लघु फिल्म भी दिखाई गई।  मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित हुईं लाभार्थी  👉 रमला देवी- 38.68 लाख का चेक- सबमिशन ऑफ एग्रीकल्चरल मैकनाइजेशन योजना के तहत हाईटेक हब फॉर कस्टम हायरिंग सेंटर  👉 लवंगी- प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रथम किस्त की धनराशि का प्रमाण पत्र  👉 भगवान सोनकर- पीएम स्वनिधि योजना के तहत 50 हजार का तृतीय ऋण का अनुदान 👉 संजू सिंह- आयुष्मान कार्ड  👉 अमृता यादव व तोयेशा चौहान (कक्षा-10) को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत लैपटॉप  👉 मधुबनी संकुल स्तरीय संघ- 33 समूहों को सीआईएफ दिए जाने हेतु 49.50 लाख का चेक- (चेक श्रद्धा सिंह ने प्राप्त किया) 👉 नया सवेरा संकुल स्तरीय संघ-30 समूहों को सीआईएफ दिए जाने हेतु 49.50 लाख का चेक- (चेक रिंकू सिंह ने प्राप्त किया)  👉 मालती- मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत चाबी व स्वीकृति पत्र 👉 सुधीर- मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत चार लाख रुपये का चेक  👉 स्वरांजलि- स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत टैबलेट  👉 महेश कुमार त्रिपाठी-नंदिनी कृषक समृद्धि योजना के तहत 21.87 लाख का चेक।

नौकरी का मौका! AIIMS देवघर में कॉन्ट्रैक्ट बेस पर होगी भर्ती, ऑफलाइन करना होगा आवेदन

देवीपुर/देवघर. एम्स देवघर ने विभिन्न गैर-शैक्षणिक पदों पर संविदा आधारित नियुक्ति के लिए योग्य अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किया गया है। संस्थान द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रारंभिक रूप से 11 माह के लिए की जाएगी, जिसे आवश्यकता एवं संतोषजनक कार्य प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ाया जा सकता है। भर्ती प्रक्रिया के तहत ब्लड ट्रांसफ्यूजन ऑफिसर, सीनियर प्रोग्रामर, पब्लिक रिलेशन ऑफिसर, असिस्टेंट ब्लड ट्रांसफ्यूजन ऑफिसर, लॉ ऑफिसर, सिक्योरिटी ऑफिसर, असिस्टेंट इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल), सैनिटेशन ऑफिसर तथा बायोमेडिकल इंजीनियर समेत कई महत्वपूर्ण पदों को भरा जाएगा। विभिन्न पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता, अनुभव एवं आयु सीमा अलग-अलग निर्धारित की गई है। एम्स देवघर प्रशासन के अनुसार आवेदन केवल ऑफलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। इच्छुक अभ्यर्थियों को निर्धारित आवेदन प्रपत्र भरकर आवश्यक प्रमाण-पत्रों एवं दस्तावेजों के साथ संस्थान को निर्धारित अवधि के भीतर भेजना होगा। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि रोजगार समाचार में विज्ञापन प्रकाशित होने की तिथि से 45 दिनों के भीतर निर्धारित की गई है। एम्स देवघर की वेबसाइट पर सब उपलब्ध संस्थान ने अभ्यर्थियों को आवेदन करने से पूर्व विस्तृत विज्ञापन का अध्ययन करने की सलाह दी है, ताकि पदवार योग्यता, अनुभव, वेतनमान एवं चयन प्रक्रिया संबंधी सभी जानकारियों की सही जानकारी प्राप्त हो सके। एम्स प्रबंधन द्वारा कहा गया है कि यह भर्ती संस्थान की विभिन्न सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इच्छुक अभ्यर्थी विस्तृत जानकारी एवं आवेदन प्रपत्र के लिए एम्स देवघर की आधिकारिक वेबसाइट का अवलोकन कर सकते हैं।

क्या बिहार में बदलने वाला है सियासी समीकरण? सम्राट फैक्टर से बढ़ी नीतीश की चिंता

पटना. बिहार की राजनीति इन दिनों तेजी से बदलते घटनाक्रमों और अंदरखाने चल रही सियासी हलचलों के कारण चर्चा के केंद्र में है। विधान परिषद चुनाव से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी रणनीतियों को धार देने में जुटे हैं। बयानबाजी का सिलसिला भी जारी है। एक ओर पूर्व सीएम नीतीश कुमार लगातार सक्रिय होकर राजनीतिक संदेश दे रहे हैं, तो दूसरी ओर मुख्‍यमंत्री सम्राट चौधरी और कृष‍ि मंत्री व‍िजय कुमार सिन्‍हा दिल्‍ली में हैं। दिल्ली में चिराग पासवान, ग‍िरिराज सिंह समेत बिहार के कई नेताओं से सीएम की मुलाकात हुई है। इसके अलावा विजय सिन्‍हा की भी कई नेताओं से मुलाकात की तस्‍वीरें सामने आई हैं। इधर, विपक्ष में भी नई हलचल दिखाई दे रही है। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव फैमिली में तेजस्वी के बेटे इराज के बर्थडे की पार्टी में एक फिर एकजुटता दिखाई दी है। इसके अलावा दूसरी ओर राजद संगठन में बदलाव की चर्चाओं ने बिहार की सियासत को और गर्म कर दिया है। सत्ता के भीतर क्या बदल रहा है? हाल के दिनों में हुए घटनाक्रमों ने सबसे ज्यादा ध्यान एनडीए के भीतर के समीकरणों पर खींचा है। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार लगातार संगठन और सरकार दोनों पर नजर बनाए हुए हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा तब और तेज हो गई, जब नीतीश कुमार अचानक उपमुख्यमंत्री व‍िजय कुमार चौधरी के आवास पहुंच गए। बताया जाता है कि इस दौरान उन्होंने सरकार और कैबिनेट के कामकाज को लेकर विस्तार से चर्चा की। जाते समय उनका यह कहना कि शाम को घर आइएगा और एक-एक चीज बताइएगा कि क्या चल रहा है, कई राजनीतिक अर्थ निकाल रहा है। बिहार की सियासत के जानकार विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ एक सामान्य बातचीत नहीं, बल्कि सत्ता संरचना के भीतर बदलते संतुलन का संकेत भी हो सकता है। कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ी बेचैनी? राजनीतिक जानकारों की मानें तो बिहार में हालिया कैबिनेट विस्तार के बाद सरकार के फैसलों की गति और शैली दोनों में बदलाव दिखा है। पहले जहां बड़े फैसलों में जदयू नेतृत्व की सीधी भागीदारी महसूस की जाती थी, वहीं अब भाजपा नेतृत्व अधिक सक्रिय नजर आ रहा है। एन्काउंटरों को लेकर भी पिछले दिनों सियासी माहौल गरमाया था। यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या जदयू सरकार के भीतर अपनी भूमिका को लेकर अतिरिक्त सतर्क हो गई है? या फिर नीतीश कुमार यह संदेश देना चाह रहे हैं कि मुख्यमंत्री पद से हटने के बावजूद राजनीतिक नियंत्रण अब भी उनके हाथ में है। जदयू कार्यालय पहुंचकर दिया संगठनात्मक संदेश विजय चौधरी के आवास से निकलने के बाद नीतीश कुमार सीधे जदयू कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और यह भरोसा दिलाने की कोशिश की कि सबकुछ सामान्य है। गौर करें कि मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद नीतीश कुमार कम से कम 5 बार जदयू कार्यालय पहुंचकर नेताओं कार्यकर्ताओं से मेल-मुलाकात कर चुके हैं। हालांकि, राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे संगठनात्मक शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देख रहे हैं। माना जा रहा है कि जदयू नेतृत्व अपने कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश देना चाहता है कि पार्टी अब भी पूरी तरह सक्रिय और संगठित है। भाजपा की दिल्ली सक्रियता ने बढ़ाई अटकलें इधर, भाजपा खेमे की दिल्ली सक्रियता ने भी सियासी चर्चाओं को हवा दी है। कृषि मंत्री व‍िजय कुमार सिन्‍हा के दिल्ली दौरे और वहां की बैठकों को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में इसे 'मार्गदर्शन प्राप्त करने वाला' दौरा बताया और बिहार के कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की बात कही है। इस बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। बताया जा रहा है कि वहां वे शीर्ष नेताओं और अधिकारियों के साथ कई अहम बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं। वहां से चिराग पासवान आदि बिहार के नेताओं के साथ बैठक के बाद की उनकी तस्वीरें सामने आई हैं। ऐसे में इसे बिहार में होने वाले एमएलसी चुनाव की रणनीतिक तैयारी से भी जोड़कर देखा जा रहा है। यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि हम पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी पहले ही सार्वजनिक रूप से एमएलसी चुनाव को लेकर एनडीएम में एक सीट की डिमांड कर चुके हैं। विपक्ष में भी बढ़ी हलचल उधर, विपक्षी खेमे में भी गतिविधियां तेज हैं। तेजस्‍वी यादव के बेटे इराज के पहले जन्मदिन के मौके पर गाजियाबाद में आयोजित कार्यक्रम में परिवार की मौजूदगी को राजद में एकजुटता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इराज के बर्थडे सेलिब्रेशन में तेज प्रताप यादव मौजूद रहे थे। हालांकि, रोह‍िणी आचार्य की गैरमौजूदगी को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं। इस बीच लालू प्रसाद स्‍वास्‍थ्‍य जांच के लिए सिंगापुर जा रहे हैं। इसके साथ ही राजद में प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर भी अंदरखाने मंथन चल रहा है। पार्टी के भीतर कई नए नामों की चर्चा हो रही है, जिससे संगठनात्मक बदलाव की संभावनाओं को बल मिल रहा है। आनंद मोहन के बयानों से बढ़ी सियासी गर्मी उधर, पूर्व सांसद आनंद मोहन लगातार अपने बयानों से राजनीतिक हलचल बढ़ा रहे हैं। उनके हालिया बयान सत्ता और विपक्ष दोनों खेमों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में जातीय और सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिशें अब तेज हो चुकी हैं और आने वाले विधान परिषद चुनाव से पहले सभी दल अपने-अपने आधार को मजबूत करने में जुट गए हैं। बीते साल बिहार की राजनीति में कदम रखने वाले जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। उन्होंने बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में पुरजोर तरीके से उतरने का एलान किया है। बता दें कि बांकीपुर सीट भाजपा का 40 साल से गढ़ रही है। ऐसे में देखना होगा कि आने वाले समय में प्रशांत किशोर किस तरह चुनौती पेश कर पाते हैं। कारण कि विधानसभा चुनाव में पीके की पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था। जानकारों का मानना है कि विजय सिन्हा के 'सब्जेक्ट बदल दिए जाने' वाले बयान ने भी भाजपा के लिए टेंशन बढ़ाई है। सिन्हा … Read more

बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल दुर्घटना को मुख्यमंत्री ने बताया हृदय विदारक, राहत-बचाव अभियान युद्धस्तर पर चलाने के निर्देश

हमीरपुर हादसे पर सीएम योगी ने जताया शोक, मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक मदद का ऐलान बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल दुर्घटना को मुख्यमंत्री ने बताया हृदय विदारक, राहत-बचाव अभियान युद्धस्तर पर चलाने के निर्देश प्रदेश के कई जिलों में आंधी-तूफान, बारिश व आकाशीय बिजली से हुए नुकसान का भी सीएम ने लिया संज्ञान सभी जिलाधिकारियों को तत्काल सर्वे कर नुकसान का आकलन करने और राहत राशि शीघ्र जारी करने के निर्देश सीएम की आमजन से अपील- खराब मौसम में रखें विशेष सतर्कता और अनावश्यक यात्रा से बचें लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हमीरपुर जिले में बेतवा नदी के निर्माणाधीन पुल पर हुई दर्दनाक दुर्घटना में श्रमिकों की मौत पर गहरा शोक प्रकट किया है। उन्होंने हादसे को अत्यंत दुःखद एवं हृदय विदारक बताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की है। सीएम ने मृतकों के आश्रितों को 5-5 लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने गुरुवार देर रात कई जिलों में तेज आंधी-तूफान, बारिश और आकाशीय बिजली से भारी तबाही का भी संज्ञान लेते हुए सभी जिलाधिकारियों को बचाव कार्य तेज करने, नुकसान का आकलन करने और राहत राशि जल्द जारी करने के निर्देश दिए हैं। हमीरपुर हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल इसका संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन को एसडीआरएफ के साथ मिलकर राहत एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने घायलों को तत्काल बेहतर उपचार उपलब्ध कराने और प्रभावित परिवारों की हरसंभव मदद सुनिश्चित करने को कहा है। प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। गुरुवार देर रात आए तेज आंधी-तूफान, बारिश व आकाशीय बिजली से प्रदेश के कई जिलों में भारी नुकसान तथा जनजीवन प्रभावित हुआ है। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को तत्काल फील्ड में जाकर सर्वे कर नुकसान का आकलन करने और राहत राशि शीघ्र जारी करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राहत एवं बचाव कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और हर तीन घंटे में स्थिति की अद्यतन रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराई जाए। साथ ही मुआवजा वितरण, राहत शिविरों, बचाव अभियान और अन्य प्रशासनिक गतिविधियों की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करने को भी कहा गया है, ताकि आमजन तक सही और समयबद्ध सूचना पहुंच सके। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

किसान हित योगी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: मंत्री सूर्य प्रताप शाही

किसान हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही योगी सरकार: सूर्य प्रताप शाही कृषि मंत्री शाही ने कहा कि सपा सरकार की नीतियों से किसान हुए थे निराश, योगी सरकार ने दिया सम्मान और राहत कृषि मंत्री बोले, योगी सरकार ने पहली कैबिनेट बैठक में 86 लाख किसानों का किया कृषि ऋण माफ लखनऊ  योगी सरकार में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर किसान विरोधी नीतियां अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है। गुरुवार को उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों की गलत नीतियों के कारण प्रदेश का किसान निराश, हताश और आत्महत्या के लिए मजबूर हो गया था। योगी आदित्यनाथ सरकार ने सत्ता में आते ही किसानों को आर्थिक संकट से बाहर निकालने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और ऐतिहासिक फैसलों के जरिए किसानों को लाभ पहुंचाने का कार्य किया। सीएम योगी ने पहली कैबिनेट में लिया कृषि ऋण माफ करने का ऐतिहासिक फैसला कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में पहली कैबिनेट बैठक में ही 86 लाख किसानों के 36 हजार करोड़ रुपये के कृषि ऋण माफ करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल आर्थिक सहायता का नहीं था, बल्कि किसानों को सम्मान और आत्मविश्वास लौटाने का माध्यम था। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान, समर्थन मूल्य पर खरीद और उर्वरकों की उपलब्धता जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया। प्राकृतिक आपदाओं के समय भी किसानों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया, जिसके कारण किसान आर्थिक रूप से टूट चुके थे। योगी सरकार ने किया गन्ना किसानों को रिकॉर्ड भुगतान मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि जब योगी सरकार सत्ता में आई, तब गन्ना किसानों का लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का बकाया भुगतान लंबित था। योगी सरकार ने प्राथमिकता के आधार पर किसानों का भुगतान सुनिश्चित कराया। उन्होंने बताया कि योगी सरकार ने अपने कार्यकाल में गन्ना किसानों को रिकॉर्ड 3 लाख 27 हजार करोड़ रुपये का भुगतान कराया, जिसमें पूर्ववर्ती सरकार के समय का बकाया भी शामिल है। उन्होंने कहा कि पहले गन्ना किसानों को 3 से 4 वर्षों तक भुगतान के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते थे। दलालों, बिचौलियों और भ्रष्टाचार के कारण किसान परेशान रहते थे लेकिन योगी सरकार ने पारदर्शी व्यवस्था लागू कर किसानों को समय पर भुगतान दिलाने का काम किया।