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अनिल विज का अधिकारियों पर एक्शन मोड, यमुनानगर बैठक में चेतावनी- गड़बड़ी करने वालों को नहीं छोड़ेंगे

यमुना नगर. जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने पुलिस और बिजली निगम के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए साफ कहा कि गलत काम करने वालों को ठीक करने के लिए ही वह सरकार में आए हैं। बैठक में चोरी, प्रशासनिक लापरवाही और विभागीय मिलीभगत से जुड़े मामलों पर सुनवाई हुई। सूचीबद्ध 15 शिकायतों के अलावा करीब 200 लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। बैठक के दौरान एक मामले में पुलिस अधिकारी ने मंत्री को बताया कि शिकायतकर्ता संतुष्ट है और उसने लिखित में दे दिया है। इस पर मंत्री ने तुरंत पूछा कि लिखित में किसके सामने दिया गया और उसका नाम क्या है। उन्होंने कहा कि केवल कागज दिखाकर शिकायतें बंद नहीं की जा सकतीं। हर मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। बिजली निगम को चेतावनी बिजली निगम से जुड़े मामलों में मंत्री ने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि पत्थर क्रेशर संचालकों से अधिकारियों की नजदीकी पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। मंत्री ने साफ कहा कि किसी भी स्तर पर मिलीभगत बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों के अनुसार कार्रवाई होगी। बैठक के दौरान मंत्री ने कहा कि कुछ अधिकारी शिकायतकर्ताओं को बाहर बैठाकर मामले दबाने का प्रयास करते हैं, लेकिन अब यह व्यवस्था नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि वह सात बार विधायक रह चुके हैं और प्रशासनिक व्यवस्था को अच्छी तरह समझते हैं। मंत्री ने अधिकारियों से कानून पढ़कर आने की बात भी कही। शिकायतकर्ताओं को लेकर दिया संदेश मंत्री ने यह भी कहा कि जो भी शिकायतकर्ता उनके दरबार में आता है, वह खाली हाथ नहीं जाता। इसके बाद पुलिस अधीक्षक कमलदीप गोयल ने माइक संभालते हुए सभी शिकायतकर्ताओं को अंदर भेजने के निर्देश दिए। कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने कहा कि अब जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक हर महीने के आखिरी शुक्रवार को दोपहर 12 बजे आयोजित होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिकायतों की पूरी तैयारी के साथ बैठक में पहुंचे। 15 शिकायतों की जगह पहुंचे 200 लोग जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। बैठक में 15 शिकायतें सूचीबद्ध थीं, लेकिन करीब 200 शिकायतकर्ता मौके पर पहुंचे, जिससे अधिकारियों में भी हलचल बनी रही। अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए मंत्री अनिल विज ने कहा कि वह सात बार विधायक रह चुके हैं और प्रशासनिक मामलों को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने कहा, पद भले छोटा हो, लेकिन अनुभव बहुत बड़ा है। सरकार में सबसे ज्यादा अनुभव उनको है।

छत्तीसगढ़ रेल कॉर्पोरेशन की बैठक सम्पन्न

छत्तीसगढ़ रेल कॉर्पोरेशन की बैठक सम्पन्न रायपुर छत्तीसगढ़ रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की बैठक आज मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।                 बैठक में कटघोरा- डोंगरगढ़ रेल लाइन सहित प्रदेश में चल रही अन्य रेल परियोजनाओं की प्रगति और बोर्ड के कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। अधिकारियों ने निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति, तकनीकी पहलुओं और समयसीमा पर चर्चा की।            बैठक में सचिव वाणिज्य एवं उद्योग विभाग एवं रेल परियोजनाएं श्री रजत कुमार, विशेष सचिव मुख्यमंत्री सचिवालय एवं आयुक्त जनसंपर्क तथा संचालक खनिज विकास निगम श्री रजत बंसल सहित वित्त विभाग एवं रेलवे कॉर्पोरेशन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

‘सिखिया दा महाजश्न’ को लेकर तैयारी पूरी, हर सरकारी स्कूल को मिला प्रचार और वीडियो बनाने का टास्क

चंडीगढ़. पंजाब के सरकारी स्कूलों में 30 मई को आयोजित होने वाले ‘सिखिया दा महाजश्न’ कार्यक्रम को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने इस कार्यक्रम को केवल शैक्षणिक आयोजन तक सीमित न रखते हुए इसे बड़े स्तर के जनसंपर्क और इंटरनेट मीडिया अभियान के रूप में चलाने की तैयारी की है। इसके तहत प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों को जमीनी स्तर पर विशेष मीडिया असाइनमेंट पूरे करने के निर्देश दिए गए हैं। जारी निर्देशों के अनुसार कार्यक्रम के दौरान आयोजित मेगा पीटीएम, पैरेंट वर्कशॉप और ‘सिखिया दा महाजश्न’ समारोह की गतिविधियों को प्रभावी ढंग से रिकॉर्ड और प्रचारित करना अनिवार्य होगा। हर सरकारी स्कूल को 10 उच्च गुणवत्ता वाले वीडियो रिकॉर्ड करने होंगे, जिनमें अभिभावकों की प्रतिक्रियाएं शामिल होंगी। इन वीडियो को स्कूलों के इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म, विशेषकर इंस्टाग्राम और फेसबुक पर अपलोड करना होगा। वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर निर्देश जारी विभाग ने वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। कैमरे के फ्रेम में केवल अभिभावक दिखाई देने चाहिए। पृष्ठभूमि साफ-सुथरी और बिना भीड़भाड़ वाली होनी चाहिए ताकि पूरा फोकस बोलने वाले व्यक्ति पर रहे। इंटरव्यू लेने वाला शिक्षक या स्टाफ कैमरे के पीछे रहेगा और उसका चेहरा वीडियो में नहीं दिखना चाहिए। विभाग ने यह भी कहा है कि बातचीत केवल औपचारिक न होकर भावनात्मक जुड़ाव वाली होनी चाहिए ताकि अभिभावकों की वास्तविक प्रतिक्रिया सामने आ सके। इसके लिए स्कूलों को दो मुख्य सवाल भी सुझाए गए हैं। पहला, “आप अपने बच्चे के स्कूल के बारे में क्या महसूस करते हैं?” और दूसरा, “आपने यहां सबसे बड़ा बदलाव क्या देखा है?” इंटरनेट पोस्ट के लिए हैश-टैग जारी इसके अलावा स्कूलों को कार्यक्रम स्थल पर 6 फीट ऊंचे और 4 फीट चौड़े सेल्फी स्टैंडी लगाने के निर्देश दिए गए हैं। स्टैंडियों के साथ अभिभावकों और आगंतुकों की कम से कम 10 हाई रेजोल्यूशन तस्वीरें लेना भी अनिवार्य किया गया है। विभाग ने इंटरनेट मीडिया पोस्ट के लिए #PunjabSikhiyaKranti, #Megaptm, #Parentworkshop और #Sikhyadamahajashn हैशटैग का उपयोग अनिवार्य किया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि विभाग पूरे अभियान की निगरानी करेगा और यह जांची जाएगी कि सभी स्कूलों ने निर्धारित वीडियो, फोटो और इंटरनेट मीडिया पोस्ट समय पर अपलोड किए या नहीं।

CG में अमानक खाद बेचने वालों पर शिकंजा, दुकानों से 180 क्विंटल खाद बरामद

बिलासपुर. अमानक खाद पर कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रतनपुर की दुकानों से 180 क्विंटल अमानक खाद जब्त किया है। साथ ही दुकानदारों को नोटिस जारी किया गया है। यह कार्रवाई कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर की गई, जिससे बाकी दुकानदारों में हड़कंप मच गया है। किसानों को गुणवत्तायुक्त खाद-बीज उपलब्ध कराने बिलासपुर क्षेत्र में अभियान चलाया गया। कृषि विभाग की टीम ने रतनपुर क्षेत्र की कई दुकानों और समितियों की जांच की। सेवा सहकारी समिति चपोरा में रिकॉर्ड और भंडारण में अनियमितताएं पाई गई। मेंसर्स गुप्ता ग्रेन मर्चेंट रतनपुर में भी गड़बड़ियां उजागर हुई। सेवा सहकारी समिति रतनपुर में अभिलेखों में खामियां पाई गई। उन्नत कृषि सेवा केंद्र रतनपुर में भी नियमों का उल्लंघन सामने आया। यहां खाद विक्रय और भंडारण संबंधी कई अनियमितताएं मिलने से कृषि विभाग ने संबंधित संस्थाओं और विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

CM डॉ. यादव बोले- प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में प्रदेश में तेजी से हो रहा अधोसंरचना विकास

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में प्रदेश का हो रहा है अधोसंरचात्मक विकास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 3,540 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा हाई-स्पीड कॉरिडोर मध्य भारत में कनेक्टिविटी का नया मानक स्थापित करेगा 114 किलोमीटर लंबी परियोजना से मिलेगी जाम से राहत, व्यापार, पर्यटन और औद्योगिक विकास को मिलेगा नया आधार जबलपुर आउटर रिंग रोड परियोजना से आवागमन होगा तेज भोपाल  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में विकसित हो रहे आधुनिक अधोसंरचना नेटवर्क ने भारत की विकास यात्रा को नई गति प्रदान की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेस-वे, आर्थिक कॉरिडोर और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी परियोजनाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार और निवेश को नई ऊर्जा मिल रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा मध्यप्रदेश में विकसित की जा रही जबलपुर आउटर रिंग रोड परियोजना महाकौशल क्षेत्र के विकास का नया अध्याय लिखने जा रही है। प्रदेश में सड़क अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण परियोजना है। लगभग 3,540 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित हो रही 114 किलोमीटर लंबी यह महत्वाकांक्षी परियोजना जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी, व्यापार, पर्यटन एवं औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान करेगी। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि जबलपुर क्षेत्र के विकास को नई दिशा देने वाली यह परियोजना शहर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के साथ-साथ क्षेत्रीय व्यापार, पर्यटन, कृषि और औद्योगिक गतिविधियों को भी मजबूती प्रदान करेगी। फोर लेन वाले इस अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का निर्माण विशेष रूप से शहर के बाहर से आने-जाने वाले भारी एवं लंबी दूरी के यातायात को सुगम मार्ग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है। फोर लेन वाले इस अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का निर्माण विशेष रूप से शहर के बाहर से आने-जाने वाले भारी एवं लंबी दूरी के यातायात को सुगम मार्ग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इसके पूर्ण होने के बाद जबलपुर शहर में यातायात का दबाव कम होगा तथा उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की ओर जाने वाले वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश करने की आवश्यकता नहीं रहेगी। शहर को मिलेगी ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत विगत वर्षों में जबलपुर में तेजी से हुए शहरी विस्तार, औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि तथा यात्री एवं मालवाहक वाहनों की संख्या बढ़ने से यातायात दबाव लगातार बढ़ा है। शहर की प्रमुख सड़कों पर जाम, लंबा यात्रा समय और ईंधन की अतिरिक्त खपत आम समस्या बन गई थी। आउटर रिंग रोड परियोजना इन चुनौतियों का दीर्घकालिक समाधान प्रस्तुत करती है। इसके संचालन से लंबी दूरी के वाहनों का आवागमन शहर के बाहर से होगा, जिससे शहरी सड़कों पर दबाव कम होगा और आम नागरिकों को अधिक सुगम एवं सुरक्षित यातायात व्यवस्था उपलब्ध होगी। पांच पैकेजों में हो रहा निर्माण परियोजना को प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 5 अलग-अलग पैकेजों में विभाजित किया गया है। इनमें बरेला से मानेगांव, मानेगांव से एनएच-45, एनएच-45 से कुशनेर, कुशनेर से अमझर तथा अमझर से बरेला तक के खंड शामिल हैं। सभी पैकेज मिलकर जबलपुर के चारों ओर एक मजबूत बाहरी परिवहन नेटवर्क तैयार करेंगे। इन मार्गों के विकसित होने से जबलपुर हवाई अड्डे सहित क्षेत्र के प्रमुख कस्बों और ग्रामीण इलाकों को बेहतर सड़क संपर्क प्राप्त होगा। परियोजना के विभिन्न हिस्से इस वर्ष तथा अगले वर्ष चरणबद्ध रूप से यातायात के लिए खोले जाएंगे। किसानों की उपज समय पर पहुंचेगी बाजार परियोजना का सीधा लाभ किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा। वर्तमान में बरेला, शाहपुरा, पाटन, सिहोरा और आसपास के क्षेत्रों के किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में ट्रैफिक जाम और परिवहन संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। आउटर रिंग रोड बनने के बाद कृषि उत्पादों का परिवहन तेज होगा, जिससे समय की बचत होगी और किसानों को बेहतर बाजार अवसर उपलब्ध होंगे। परिवहन लागत कम होने से उनकी आय पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। स्थानीय किसानों का मानना है कि परियोजना के कुछ प्रारंभिक हिस्सों के संचालन से ही यात्रा में होने वाली देरी में कमी महसूस होने लगी है और पूर्ण परियोजना शुरू होने के बाद यह लाभ और अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन को मिलेगी नई गति जबलपुर मध्य भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र है। आउटर रिंग रोड बनने के बाद मालवाहक वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश नहीं करना पड़ेगा, जिससे परिवहन लागत और समय दोनों में कमी आएगी। ईंधन की बचत होगी और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क अधिक कुशल बन सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भविष्य में जबलपुर को मध्य भारत के प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। पर्यटन क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ जबलपुर की पहचान केवल औद्योगिक और प्रशासनिक शहर के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में भी है। भेड़ाघाट की संगमरमरी घाटियां, धुआंधार जल प्रपात, ग्वारी घाट, नर्मदा तट और निकटवर्ती कान्हा राष्ट्रीय उद्यान देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। नई रिंग रोड इन पर्यटन स्थलों तक पहुंच को अधिक तेज और सुविधाजनक बनाएगी। साथ ही अमरकंटक जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक यात्रा भी पहले की तुलना में अधिक सुगम होगी। इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों और स्थानीय रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी। नर्मदा पर बनेगा आधुनिक इंजीनियरिंग का प्रतीक परियोजना का सबसे आकर्षक और महत्वपूर्ण हिस्सा नर्मदा नदी पर निर्मित किया जा रहा लगभग 750 मीटर लंबा एक्सट्राडोज्ड ब्रिज है। आधुनिक तकनीक से तैयार किया जा रहा यह पुल न केवल परिवहन सुविधा को बेहतर बनाएगा बल्कि भविष्य में क्षेत्र की एक विशिष्ट पहचान के रूप में भी स्थापित होगा। मध्यप्रदेश की जीवन रेखा मानी जाने वाली नर्मदा नदी पर निर्मित यह पुल आधुनिक विकास और सांस्कृतिक विरासत के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण होगा। व्यापक अधोसंरचना निर्माण इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत 14 बड़े पुल, 37 छोटे पुल, 4 रेलवे ओवरब्रिज, 3 फ्लाईओवर, 12 वाहन अंडर-पास, 23 हल्के वाहनों के अंडर-पास, 2 एलिवेटेड स्ट्रक्चर, 3 ओवर-पास तथा लगभग 332 पुलियाओं का निर्माण किया जा रहा है। यह अधोसंरचना न केवल यातायात को निर्बाध बनाएगी बल्कि भविष्य की बढ़ती परिवहन आवश्यकताओं को भी पूरा करेगी। महाकौशल क्षेत्र के विकास को मिलेगा … Read more

पद्मडॉ. सुनीता गोडबोले एवं डॉ. रामचंद्र गोडबोले द्वारा बस्तर में किए गए सेवा कार्यों की मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की सराहना

बस्तर और जनजातीय समाज के लिए चार दशक का समर्पण मानवता की असाधारण मिसाल : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पद्मडॉ. सुनीता गोडबोले एवं डॉ. रामचंद्र गोडबोले द्वारा बस्तर में किए गए सेवा कार्यों की मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की सराहना बस्तर में सुरक्षा के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा और जनसेवा पहुंचाने पर सरकार का फोकस : मुख्यमंत्री रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में पद्मसे सम्मानित समाजसेवी दंपति डॉ. सुनीता गोडबोले और डॉ. रामचंद्र गोडबोले से आत्मीय मुलाकात कर उनके द्वारा बस्तर और जनजातीय समाज के बीच चार दशकों से अधिक समय से किए जा रहे सेवा कार्यों की सराहना की। मुलाकात के दौरान गोडबोले दंपति ने मुख्यमंत्री को बताया कि “बस्तर और बस्तरवासियों से हमें गहरा प्रेम है। हम गोंडी और हल्बी में उनसे संवाद करते हैं, यही हमारी संस्कृति है और अब हम बस्तर नहीं छोड़ना चाहते हैं।” मुख्यमंत्री साय ने इस आत्मीय भावना को बस्तर, उसकी संस्कृति और जनजातीय समाज के प्रति गहरे समर्पण का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह केवल सेवा का विषय नहीं, बल्कि मानवीय आत्मीयता, संवेदनशीलता और सामाजिक प्रतिबद्धता की दुर्लभ मिसाल है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गोडबोले दंपति को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनका पद्मसम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश, विशेष रूप से बस्तर, जनजातीय समाज और बस्तरवासियों के सम्मान का विषय है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सेवा, समर्पण और मानवता की मिसाल बने गोडबोले दंपति का सम्मानित होना छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण है। उन्होंने कहा कि डॉ. सुनीता गोडबोले और डॉ. रामचंद्र गोडबोले ने चार दशकों से अधिक समय तक बस्तर और अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में समर्पण और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर यह उदाहरण प्रस्तुत किया है कि सेवा का वास्तविक अर्थ समाज के सबसे जरूरतमंद व्यक्ति तक अपनत्व, विश्वास और मानवीय संवेदना पहुंचाना है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गोडबोले दंपति ने जनजातीय समाज तक पहुंचकर निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया, कुपोषण, टीबी, मलेरिया, पीलिया और अन्य गंभीर बीमारियों के प्रति जागरूकता फैलायी तथा शिक्षा और नशामुक्ति जैसे विषयों पर उल्लेखनीय कार्य किया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद जनजातीय समाज के बीच बने रहना और सेवा करते रहना असाधारण समर्पण का उदाहरण है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गोडबोले दंपति केवल चिकित्सक के रूप में नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के आत्मीय सहयोगी के रूप में कार्य करते रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि नक्सलवाद के कठिन दौर में भी गोडबोले दंपति ने सेवा का मार्ग नहीं छोड़ा और मानवता को सर्वोपरि रखते हुए जनजातीय समाज के बीच लगातार कार्य करते रहे। उन्होंने कहा कि जब भय और असुरक्षा का वातावरण था, तब भी इनका बस्तर और उसके लोगों के प्रति विश्वास और प्रतिबद्धता कमजोर नहीं हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दर्शाता है कि इस प्रदेश, इसकी संस्कृति और जनजातीय समाज के प्रति उनका प्रेम कितना गहरा और आत्मीय है। उन्होंने कहा कि सेवा का वास्तविक अर्थ कठिन परिस्थितियों में समाज के साथ खड़े रहने से सिद्ध होता है और गोडबोले दंपति ने इसे अपने जीवन से प्रमाणित किया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि उन्हें यह देखकर विशेष प्रसन्नता हुई कि गोडबोले दंपति को बस्तर और छत्तीसगढ़ की संस्कृति की गहरी समझ है। उन्होंने कहा कि वे केवल यहां कार्य नहीं कर रहे, बल्कि स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली में पूरी तरह रच-बस गए हैं तथा उसे आत्मसात किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोंडी और हल्बी जैसी स्थानीय भाषाओं में संवाद स्थापित करना इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने लोगों के बीच विश्वास, अपनत्व और आत्मीयता का मजबूत रिश्ता बनाया है। यही कारण है कि आज वे स्वयं कहते हैं कि अब बस्तर छोड़ने का उनका मन नहीं है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि वनवासी कल्याण आश्रम से उनका स्वयं का जुड़ाव रहा है और वे जानते हैं कि आश्रम के संस्कार सेवा, समर्पण और समाज के प्रति आत्मीयता की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि आश्रम की यात्रा और उसके मूल उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक संवेदनशीलता और आत्मीय सहयोग पहुंचाने के विचार से जुड़े हैं तथा यह कार्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत नींव तैयार करता है। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गोडबोले दंपति से संवाद करते हुए बस्तर के विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे सूक्ष्म स्तर के प्रयासों और कार्ययोजना की जानकारी भी साझा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बस्तर में विकास और विश्वास की नीति पर गंभीरता से कार्य कर रही है ताकि सुरक्षा के साथ-साथ लोगों तक शासन, सेवाएं और अवसर भी पहुंचें। उन्होंने कहा कि सरकार सुरक्षा व्यवस्था को केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उसे जनसेवा से जोड़ते हुए व्यापक सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बना रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार सुरक्षा कैंपों को “सेवा डेरा” के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है, ताकि वहां सुरक्षा के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग, जनसेवा और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार सुनिश्चित हो सके।  मुख्यमंत्री ने “नियद नेल्ला नार” जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार दूरस्थ क्षेत्रों तक शासन की पहुंच सुनिश्चित कर रही है और वहां विकास कार्यों को नई गति मिल रही है। उन्होंने कहा कि बस्तर में विकास, सुरक्षा और विश्वास का जो नया वातावरण बना है, वह संवेदनशील शासन और सतत प्रयासों का परिणाम है।        चर्चा के दौरान गोडबोले दंपति ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से संत गहिरा गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा और प्रेरणा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कैलाश गुफा, वहां संचालित संस्कृत विद्यालय, आश्रम तथा सरगुजा अंचल की यात्राओं का अनुभव साझा करते हुए छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के प्रति अपने जुड़ाव की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अत्यंत प्रसन्नता का विषय है कि गोडबोले दंपति ने केवल बस्तर ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना, जनजातीय जीवन मूल्यों और आध्यात्मिक परंपराओं को भी आत्मसात किया है।  मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि गोडबोले दंपति की समर्पण और सेवा की भावना पूरे छत्तीसगढ़ में जनसेवा और सामाजिक जागरूकता की नई चेतना को मजबूत करेगा।

The Art of Living के 45 वर्ष पूरे, उपराष्ट्रपति ने लॉन्च कीं 5 राष्ट्रीय पहलें और किया विशेष डाक टिकट का अनावरण

माननीय उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने पांच राष्ट्रीय पहलों का शुभारंभ किया, द आर्ट ऑफ लिविंग के 45 वर्ष पूरे होने पर स्मारक डाक टिकट का अनावरण किया बेंगलुरु भारत के माननीय उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने आज द आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में युवा विकास, उद्यमिता, स्थिरता, चेतना अध्ययन और शिक्षा से जुड़ी पांच प्रमुख राष्ट्रीय पहलों का शुभारंभ किया। यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब इस संस्था ने मानवीय सेवा के 45 वर्ष में प्रवेश किया हैं और इसी माह 70 वर्ष के हुए गुरुदेव रवि शंकर के शांति, कल्याण एवं मानवीय मूल्यों के प्रति उनके जीवनपर्यंत योगदान को रेखांकित किया गया है। माननीय उपराष्ट्रपति ने अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ एक स्मारक डाक टिकट का भी अनावरण किया, जो व्यक्तिगत कल्याण, सामाजिक परिवर्तन और वैश्विक शांति में द आर्ट ऑफ लिविंग के 45 वर्षों के योगदान का प्रतीक है।शुरू की गई पहलों में युवा करियर उत्कृष्टता कार्यक्रम (यूथ करियर एक्सीलेंस प्रोग्राम), पूर्वी ज्ञान प्रणाली संकाय (फैकल्टी ऑफ ईस्टर्न नॉलेज सिस्टम्स), नवाचार एवं उद्यमिता (आर्ट ऑफ लिविंग इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप इंक्यूबेशन), चेतना अध्ययन और मानव क्षमता उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन कॉन्शियसनेस स्टडी एंड ह्यूमन पोटेंशियल), तथा इको शांति सम्मिलित हैं। ये पहलें शिक्षा, नवाचार, पर्यावरणीय स्थिरता और मानव विकास पर संगठन के बढ़ते ध्यान को प्रतिबिंबित करती हैं। यह शुभारंभ समारोह द आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में महीने भर चले उत्सव का चरमोत्कर्ष था, जिसमें भारत और विश्व भर के 678 प्रतिष्ठित अतिथियों ने भाग लिया। इनमें विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के राष्ट्रीय नेता, व्यापारिक दिग्गज, खिलाड़ी, उद्यमी, शिक्षाविद, आध्यात्मिक गुरु, राजनयिक, कलाकार और सामाजिक परिवर्तनकर्ता सम्मिलित थे।सभा को संबोधित करते हुए माननीय उपराष्ट्रपति ने गुरुदेव रवि शंकर द्वारा स्थापित इस आंदोलन की असाधारण वैश्विक पहुंच पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, आज उस महान दूरदर्शिता का उत्सव है जिसने विभिन्न महाद्वीपों में करोड़ों जीवनों को स्पर्श किया है। मैं यह जानकर विस्मित रह गया कि द आर्ट ऑफ लिविंग 182 देशों में विद्यमान है। मानव जाति की लगभग संपूर्ण सभ्यता इस आंदोलन के माध्यम से परस्पर जुड़ रही है। संगठन की यात्रा का वर्णन करते हुए उन्होंने आगे कहा, पैंतालीस वर्ष पूर्व, एक सरल किंतु गहन विचार के साथ एक आंदोलन का सूत्रपात हुआ था कि आंतरिक शांति ही बाह्य सामंजस्य की आधारशिला है। संघर्ष और अनिश्चितता से घिरे इस संसार में, गुरुदेव रवि शंकर विवेक, जागरूकता, शांति और सद्भाव के मूल्यों से मानवता को निरंतर अनुप्राणित कर रहे हैं।गुरुदेव की सरलता और उनके प्रभाव की प्रशंसा करते हुए राधाकृष्णन ने टिप्पणी की, उनकी मुस्कान, उनकी विनम्रता और उनका स्नेह प्रत्येक व्यक्ति के हृदय को छू लेता है। जो बात उनके योगदान को असाधारण बनाती है, वह उनके भीतर समाहित विनम्रता और मानवता है। माननीय उपराष्ट्रपति का स्वागत करते हुए गुरुदेव रवि शंकर ने समकालीन चुनौतियों के समाधान में आंतरिक विकास की शाश्वत प्रासंगिकता पर बल दिया। गुरुदेव ने कहा, आज विश्व ने स्वीकार कर लिया है कि ध्यान अब कोई विलासिता नहीं है। विश्व ध्यान दिवस घोषित करने के लिए 192 देशों के एक साथ आने से यह समझ सुदृढ़ हुई है कि एक स्वस्थ, सुखी और तनावमुक्त जीवन के लिए ध्यान एक मूलभूत आवश्यकता है। मानव विकास के प्रति एक समग्र दृष्टिकोण का आह्वान करते हुए उन्होंने आगे कहा, जीवन भर तीन चीजें सदैव हमारे साथ होनी चाहिए: ज्ञान, ध्यान और संगीत।वैश्विक सद्भाव के संदेश के साथ अपनी बात समाप्त करते हुए गुरुदेव ने कहा, आइए हम एक ऐसे वसुधैव कुटुम्बकम् का स्वप्न देखें, जो भय, तनाव और घृणा से मुक्त एक वैश्विक परिवार हो। एक शांत और सौहार्दपूर्ण विश्व का प्रारंभ शांत और सौहार्दपूर्ण व्यक्तियों से ही होता है। कर्नाटक के माननीय राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने भी सभा को संबोधित किया और संगठन के उद्गम के साथ कर्नाटक के गहन संबंध को रेखांकित किया।उन्होंने कहा, यह कर्नाटक के लिए गौरव का विषय है कि इस वैश्विक आंदोलन की जड़ें हमारी इस पवित्र भूमि से जुड़ी हुई हैं। चार दशकों से अधिक समय से, द आर्ट ऑफ लिविंग विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से व्यक्तिगत, सामुदायिक और वैश्विक स्तर पर शांति और कल्याण को बढ़ावा दे रहा है।शांति स्थापना में गुरुदेव के योगदान पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल ने आगे कहा, मानवीय सेवा से परे, गुरुदेव के शांति-स्थापना के प्रयासों ने दीर्घकालिक संघर्षों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मानवीय मूल्यों के पुनरुत्थान के माध्यम से एक हिंसा-मुक्त और तनाव-मुक्त समाज की उनकी दूरदर्शिता को संपूर्ण विश्व में सराहना और मान्यता प्राप्त हुई है। इस आयोजन के दौरान शुरू की गई पांच पहलें शिक्षा, नवाचार, स्थिरता और मानव विकास के माध्यम से समकालीन समाज की कुछ अत्यंत तात्कालिक आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रयास करती हैं।यूथ करियर एक्सीलेंस प्रोग्राम युवाओं को सिविल सेवा में करियर के लिए तैयार करेगा, साथ ही ग्रामीण और शहरी युवाओं में रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए उद्योग-उन्मुख आतिथ्य प्रशिक्षण भी प्रदान करेगा। फैकल्टी ऑफ ईस्टर्न नॉलेज सिस्टम्स एक बहुविषयक मंच के रूप में कार्य करेगा जो पूर्वी ज्ञान परंपराओं को समकालीन शिक्षा और अनुसंधान के साथ एकीकृत करेगा, जिससे आधुनिक नैतिक, सामाजिक और पारिस्थितिक चुनौतियों का समाधान किया जा सके। आर्ट ऑफ लिविंग इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप इंक्यूबेशन पहल का उद्देश्य मार्गदर्शन, प्रोटोटाइपिंग सुविधाओं और प्रारंभिक चरण के वित्तपोषण सहायता के माध्यम से नवाचार-संचालित और हार्डवेयर-केंद्रित स्टार्टअप को पोषित करना है, जिसका लक्ष्य 500 स्टार्टअप को सक्षम बनाना है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन कॉन्शियसनेस स्टडीज एंड ह्यूमन पोटेंशियल चेतना, संज्ञान, मानसिक कल्याण और मानव क्षमता में अनुसंधान, शिक्षा और नवाचार के लिए एक अंतःविषय पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करेगा।द आर्ट ऑफ लिविंग की एक स्थिरता पहल इको शांति का उद्देश्य संधारणीय विकल्पों के माध्यम से एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक को समाप्त करना है, जिसका लक्ष्य 2030 तक प्लास्टिक उत्पादन और उपयोग को प्रतिवर्ष कम से कम 1,00,000 टन कम करना है। आश्रम प्रवास के दौरान, माननीय उपराष्ट्रपति ने संगठन की विभिन्न सुविधाओं और पहलों का अवलोकन किया। उन्होंने गुरुकुलम का भ्रमण किया, छात्रों से संवाद किया, प्रताप गणपति मंदिर में प्रार्थना की, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पवित्र अवशेषों के दर्शन किए और लगभग 1,600 स्वदेशी गायों के निवास स्थान गौशाला का भी भ्रमण किया। इस यात्रा का एक विशेष आकर्षण द आर्ट ऑफ लिविंग के इंट्यूशन प्रोग्राम के अभ्यासकर्ताओं … Read more

किशनगंज के जनता हाट में NIA की दबिश, बड़े ऑपरेशन के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा

किशनगंज. ब‍िहार के सीमांचल के क‍िशनगंज जिला अंतर्गत पोठिया थाना क्षेत्र अंतर्गत मिर्जापुर पंचायत के जनता हाट इलाके में शुक्रवार की सुबह राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सुबह-सुबह भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच एनआईए की टीम के पहुंचते ही स्थानीय लोगों में अफरातफरी का माहौल बन गया। सूत्रों के अनुसार, इस कार्रवाई में एनएसजी (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड) और अन्य सुरक्षा बलों के जवान भी शामिल थे। सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त टीम ने जनता हाट निवासी मनोज रविदास, पिता लखन रविदास, के घर पर छापेमारी की। यह कार्रवाई कई घंटों तक चली और पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में रखा गया। कई घंटों तक चली तलाशी, युवक को साथ ले गई टीम स्थानीय लोगों ने बताया कि सुबह अचानक बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों के पहुंचने से गांव में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। जवानों ने घर के अंदर और आसपास के क्षेत्र की गहन तलाशी ली। दस्तावेजों, मोबाइल उपकरणों और अन्य संभावित साक्ष्यों की जांच की गई। छापेमारी के दौरान मनोज रविदास को टीम अपने साथ लेकर चली गई। हालांकि, उसे किस आधार पर हिरासत में लिया गया, इस पर आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी साझा नहीं की गई है। कार्रवाई के बाद से पूरे गांव में तरह-तरह की चर्चाएं जारी हैं। संदिग्ध कॉल रिकॉर्डिंग और इनपुट की चर्चा ग्रामीणों के बीच यह चर्चा बनी हुई है कि जांच एजेंसियों को कुछ संदिग्ध कॉल रिकॉर्डिंग और संचार से जुड़े इनपुट मिले थे। इन्हीं इनपुट्स के आधार पर एनआईए ने यह कार्रवाई की है। हालांकि, इस संबंध में किसी भी सुरक्षा एजेंसी की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एनआईए की कार्रवाई आमतौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामलों में की जाती है। ऐसे में इस कार्रवाई को भी संवेदनशील जांच के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। सामान्य परिवार से जुड़ा है मामला, ग्रामीणों में हैरानी जानकारी के अनुसार, मनोज रविदास जनता हाट में चप्पल की दुकान चलाता है, जबकि उसके पिता लखन रविदास खेती और मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। अचानक हुई इस कार्रवाई से परिवार के सदस्य स्तब्ध हैं और किसी भी प्रकार की जानकारी से इनकार कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि परिवार सामान्य जीवन जी रहा था और उन्हें इस तरह की कार्रवाई की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी। छापेमारी के बाद से परिवार और आसपास के लोग मानसिक तनाव में हैं। गांव में बढ़ी हलचल, बड़ी संख्या में जुटे लोग छापेमारी की खबर जैसे ही इलाके में फैली, बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। गांव में कई घंटों तक भीड़ और चर्चा का माहौल बना रहा। लोग अलग-अलग तरह की अटकलें लगा रहे हैं, लेकिन किसी के पास ठोस जानकारी नहीं है। सुरक्षा बलों की मौजूदगी के कारण पूरे इलाके को नियंत्रित रखा गया और किसी को भी घर के आसपास अनावश्यक रूप से जाने की अनुमति नहीं दी गई। जांच एजेंसियां पूरी तरह सतर्क, आगे की कार्रवाई पर नजर फिलहाल एनआईए और स्थानीय प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले को गंभीरता से जांच रही हैं और सभी पहलुओं की गहन छानबीन की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई किसी बड़े नेटवर्क या संवेदनशील इनपुट से जुड़ी हो सकती है, जिसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही संभव होगी। फिलहाल पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है। ग्रामीणों की निगाहें जांच के अगले कदम पर घटना के बाद जनता हाट और आसपास के क्षेत्रों में दहशत और उत्सुकता दोनों का माहौल है। लोग अब जांच एजेंसियों के अगले कदम और आधिकारिक बयान का इंतजार कर रहे हैं। पूरा मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण इसे बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। प्रशासन ने भी लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

स्थायी रोजगार की मांग को लेकर अड़े सफाई कर्मचारी, 31 मई तक जारी रहेगी हड़ताल; मंत्री के घर होगा प्रदर्शन

बाढड़ा/चंडीगढ़. ग्रामीण सफाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर लगातार संघर्षरत हैं। ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन सीटू के आह्वान पर चल रही हड़ताल शुक्रवार को 15वें दिन भी जारी रही। कर्मचारी धरने पर बैठकर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी कर रहे हैं लेकिन सरकार अब तक उनकी मांगों को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रही। ग्रामीण सफाई कर्मचारी पक्का कर्मचारी का दर्जा, 26 हजार रुपये मासिक वेतन लागू करने, एक्सग्रेसिया नीति लागू करने तथा 400 की आबादी पर स्थायी सफाई कर्मचारी भर्ती करने सहित कई मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षो से गांवों की सफाई व्यवस्था संभालने के बावजूद उन्हें ना तो स्थायी रोजगार मिला है और ना ही सम्मान जनक वेतन। हड़ताल को 31 मई तक बढ़ाने का फैसला लिया गया है। 31 मई तक प्रदेश के मंत्रियों के आवासों पर रोष प्रदर्शन होगा। भिवानी, चरखी दादरी और रोहतक जिलों के ग्रामीण सफाई कर्मचारी 31 मई को सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी के आवास पर जोरदार प्रदर्शन करेंगे। धरने की अध्यक्षता संजय जीतपुरा ने की तथा संचालन सुरेश कुमार ने किया। यूनियन नेता सुरेश कुमार जेवली ने कहा कि ग्रामीण सफाई कर्मचारी पिछले 15 दिनों से लगातार आंदोलन कर रहे हैं। पंचायत सचिवों और सरपंचों की ओर से कर्मचारियों पर काम पर लौटने का दबाव बनाया जा रहा है। लेकिन कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार प्रदेश के लगभग 10500 ग्रामीण सफाई कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय केवल झूठे आश्वासन देने में लगी है। सीटू जिला संयोजक राजकुमार घिकाड़ा और जिला सह संयोजक कमलेश भैरवी ने कहा कि आज प्रदेश में महंगाई और बेरोजगारी बढ़ रही है।

निकाय चुनाव में धांधली का आरोप, पंजाब चुनाव आयोग पहुंचा भाजपा का डेलिगेशन

चंडीगढ़. भारतीय जनता पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के नेतृत्व में वीरवार को पंजाब राज्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात कर पंजाब में जारी निकाय चुनावों के दौरान कथित बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन-सह-शिकायत पत्र सौंपा। भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के विभिन्न हिस्सों से सामने आए बूथ कैप्चरिंग, मतदाता सूचियों में हेरफेर, सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग तथा अन्य चुनावी अनियमितताओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की। पार्टी ने राज्य चुनाव आयोग से इन शिकायतों का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों एवं चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता की रक्षा सुनिश्चित की जा सके। ज्ञापन में उन प्रभावित क्षेत्रों में मतदान रद कर पुनर्मतदान करवाने की भी मांग की गई, जहां गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। पत्रकारों से बातचीत करते हुए भाजपा पंजाब अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि पार्टी मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा तथा चुनाव प्रक्रिया को भय, दबाव और सत्ता के दुरुपयोग से मुक्त बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। ढिल्लों के साथ प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. सुभाष शर्मा, प्रदेश विधि प्रकोष्ठ संयोजक एनके वर्मा, प्रदेश मीडिया प्रमुख विनीत जोशी तथा वरिष्ठ भाजपा नेता रणजीत गिल शामिल थे।