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मुख्यधारा में लौटे 113 युवाओं के जीवन में आया नया सवेरा, 5G कनेक्टिविटी और खेलों से संवर रहा भविष्य

रायपुर  नक्सलवाद के दंश को पीछे छोड़ छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला अब बदलाव की एक नई और बेहद खूबसूरत इबारत लिख रहा है। जिला प्रशासन द्वारा संचालित जिला पुनर्वास केंद्र में रह रहे 113 आत्मसमर्पित युवाओं (42 महिलाएं और 71 पुरुष) के जीवन में वास्तव में नया सवेरा आ चुका है। कभी जंगलों में भटकने और हाथों में घातक हथियार थामने वाले ये युवा अब न सिर्फ समाज की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं, बल्कि पुनर्वास केंद्र के परिसर में पहली बार इनके द्वारा लगाए गए भारत माता की जय के नारे सुकमा के बदलते और सुरक्षित होते भविष्य की गवाही दे रहे हैं। अनुशासित दिनचर्या और कौशल विकास पर जोर          पुनर्वास केंद्र में इन युवाओं की दिनचर्या अब पूरी तरह अनुशासित, सुरक्षित और रचनात्मक हो चुकी है। सुबह उठकर बागवानी (गार्डनिंग) और साफ-सफाई करने के बाद सभी युवा मिल-जुलकर नाश्ता और भोजन तैयार करते हैं। प्रशासन ने इनके बौद्धिक विकास के लिए दो विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की है, जो इन्हें प्रतिदिन सुबह-शाम अक्षर ज्ञान, बुनियादी गणित और अंग्रेजी सिखाते हैं। समाज का वैध और सम्मानित हिस्सा बनाने के लिए प्रशासन कलेक्ट्रेट के सिंगल विंडो रूम के माध्यम से इन सभी के आधार कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, श्रम कार्ड और वोटर आईडी जैसे महत्वपूर्ण शासकीय दस्तावेज प्राथमिकता से बनाया जा रहा है। इसके साथ ही इन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण (स्किल ट्रेनिंग) भी दी जा रही है। अत्याधुनिक हथियारों की जगह हाथों में आई वॉलीबॉल         प्रशासन की इस मानवीय पहल का सबसे खूबसूरत रंग खेल और मनोरंजन के मैदान में देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार की मंशा के अनुरूप, जब इन पूर्व नक्सलियों से उनके मनोरंजन और खेल की पसंद पूछी गई, तो सबसे ज्यादा रुझान वॉलीबॉल के प्रति दिखा। इसके बाद प्रशासन ने केंद्र में खेल प्रतियोगिता की शुरुआत की, जिसमें युवक-युवतियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कभी अत्याधुनिक हथियार संभालने वाले इन हाथों में जब वॉलीबॉल आई, तो मैदान पर उनकी खेल प्रतिभा और किक देखकर हर कोई हैरान रह गया। ओयाम जोगा, वेको हुंगा और सोड़ी सोमड़ी जैसे युवा अब खेल के मैदान में अपना जौहर दिखाकर बेहद खुश और उत्साहित हैं। डिजिटल युग से जुड़ाव मनोरंजन के साथ मिले 5G स्मार्टफोन           दिनभर की रचनात्मक गतिविधियों और खेल के बाद शाम को सभी युवा संगीत कक्ष में सुर-ताल मिलाते हैं, जिससे उनका भरपूर मनोरंजन होता है। वर्तमान डिजिटल युग के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए जिला प्रशासन ने इन युवाओं को 5G स्मार्टफोन भी उपलब्ध कराए हैं। इस आधुनिक तकनीक के जरिए देश-दुनिया की खबरों से कटे रहने वाले ये युवा अब समकालीन समाज और नई जानकारियों से सीधे जुड़ पा रहे हैं।  पुनर्वास का एक अनुकरणीय मॉडल           सुकमा जिला पुनर्वास केंद्र का यह मानवीय और विकासात्मक मॉडल साबित करता है कि यदि सही दिशा, उचित संसाधन और संवेदनशीलता मिले, तो मुख्यधारा से भटके हुए युवाओं को भी परिष्कृत कर देश की प्रगति का मजबूत स्तंभ बनाया जा सकता है।

“Month of Solar” अभियान में बेहतर प्रदर्शन के लिए मिलेगा पीएम सूर्यघर एक्सीलेंस अवार्ड

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री सूर्यघर : मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत आयोजित “Month of Solar” अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाना राज्य के लिए अत्यंत गौरव और प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य में स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और जनहितकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में किए जा रहे सतत प्रयासों का प्रमाण है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि मध्यम उपभोक्ता आधार वाले राज्यों की श्रेणी में सर्वाधिक वेंडर रजिस्ट्रेशन के मामले में छत्तीसगढ़ ने देश में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है, जिसके लिए राज्य का चयन पीएम सूर्यघर एक्सीलेंस अवार्ड हेतु किया गया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि ऊर्जा क्षेत्र में राज्य की सक्रियता, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनसहभागिता का सकारात्मक परिणाम है। मुख्यमंत्री  साय ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए ऊर्जा विभाग, क्रेडा, विद्युत वितरण कंपनियों, सभी अधिकारियों, कर्मचारियों तथा सहयोगी संस्थाओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि टीमवर्क, प्रतिबद्धता और बेहतर समन्वय के कारण छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य सरकार ऊर्जा आत्मनिर्भर, पर्यावरण अनुकूल और हरित छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प को पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाले ऐसे प्रयास प्रदेश के नागरिकों को आर्थिक राहत देने के साथ-साथ स्वच्छ एवं सतत विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

लोक भवन में गोवा, सिक्किम एवं तेलंगाना के स्थापना दिवस समारोह हुआ संपन्न

भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि स्‍थापना दिवस समारोह केवल राज्यों के प्रशासनिक गठन का स्मरण नहीं, बल्कि उनके संघर्ष, सांस्कृतिक विरासत और विकास यात्रा से प्रेरणा ग्रहण करने का उपक्रम है। भारत की भौगोलिक, भाषाई और सांस्कृतिक विविधताएँ ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति हैं। यही सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत की नींव हैं। उन्होंने कहा कि सिक्किम का पर्यावरणीय मॉडल, गोवा का पर्यटन, मत्स्य उद्योग और तेलंगाना की तकनीकी नवाचार क्षमता राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण आधार स्तंभ हैं। राज्यपाल  पटेल मंगलवार को गोवा, सिक्किम एवं तेलंगाना राज्य के स्थापना दिवस के संयुक्त समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने तीनों राज्यों के निवासियों को राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दी। लोकभवन के सांदीपनि सभागार में “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” संकल्पना के तहत कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि “एक भारत–श्रेष्ठ भारत” की भावना देश की एकता, अखंडता और समग्र विकास का सशक्त आधार है। आयोजन प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत निर्माण संकल्प के प्रति राष्ट्रीय एकता की सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रदर्शन है। उन्होंने सभी नागरिकों से राष्ट्र के नव निर्माण में अपना सर्वोत्तम योगदान देने तथा “एक भारत–श्रेष्ठ भारत” की भावना को और अधिक सशक्त बनाने का आह्वान किया है। उन्होंने युवा संगम कार्यक्रम के तहत आई.आई.टी धनबाद से आये युवाओं का स्वागत करते हुए उन्हें झारखंड के अमर शहीद भगवान बिरसा मुंडा से प्रेरणा लेते हुए विकसित भारत @ 2047 में योगदान के लिए प्रेरित किया। कहा कि युवा परिवार और राष्ट्र की आशा के केन्द्र होते है, इसलिए भावी जीवन में सदैव अच्छा व्यक्ति बनने के लिए कार्य करें। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि तेलंगाना राज्य की ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक विविधता और आधुनिक विकास का अद्भुत समन्वय भारत की विशिष्ट पहचान को समृद्ध करते है। राज्य की गौरवशाली परंपराएं, स्थापत्य कला और ऐतिहासिक महत्व देश की अमूल्य धरोहर हैं। लोकतांत्रिक अधिकारों, सामाजिक कल्याण और विकास के क्षेत्र में तेलंगाना की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि गोवा की ऐतिहासिक विरासत, समुद्री वैभव, भारतीय और पश्चिमी परंपराओं का सांस्कृतिक समन्वय की विविधता देश की शक्ति है। गोवा केवल प्रमुख पर्यटन केंद्र ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना और औपनिवेशिक शासन से मुक्ति के लिए हुए साहसिक संघर्ष की प्रेरक भूमि भी है। राष्ट्रभक्ति और आत्मसम्मान की भावना को सुदृढ़ करती है। राज्यपाल  पटेल ने स्थापना दिवस समारोह में सिक्किम वासियों को देश का पाँचवाँ पूर्ण साक्षर राज्य बनने की बधाई दी। उन्होंने कहा कि हिमालय की गोद में बसे देश के प्रथम पूर्णतः जैविक राज्य सिक्किम की प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक शांति और सतत विकास मॉडल भारत की वैश्विक पहचान को सुदृढ़ करता है। समारोह में सिक्किम के राज्यपाल  ओमप्रकाश माथुर, गोवा के राज्यपाल  पुसापति अशोक गजपति राजू तथा तेलंगाना के राज्यपाल  शिव प्रताप शुक्ला के शुभकामना वीडियो संदेशों का प्रसारण किया गया। कार्यक्रम में गोवा, सिक्किम, तेलंगाना और मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती लघु फिल्में प्रदर्शित की गई। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की श्रृंखला में तेलुगु संगमम भोपाल द्वारा अन्नामाचार्य कीर्तनम् पर आधारित एकल नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी गई। युवा, बाल कलाकारों ने राजस्थान और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक विरासत के अनूठे संगम का समूह नृत्य जिसकी जड़ें राजस्थान की बंजारा संस्कृति से जुड़ी हैं और भद्राचलम स्थित प्रसिद्ध  सीता रामचन्द्रस्वामी मंदिर और भगवान राम की भक्ति को समर्पित समूह नृत्यों की प्रस्तुति दी। आई.आई.टी. इंदौर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मृगेन्द्र दुबे ने युवा संगम के संबंध में जानकारी दी। आई.आई.टी. धनबाद के युवाओं के 6 दिवसीय मध्यप्रदेश भ्रमण के समापन अवसर पर लोकभवन के गरिमामय समारोह में शामिल होने को अविस्मरणीय बताया है। राज्यपाल  पटेल का समारोह के प्रारंभ में गोवा समाज के प्रतिनिधि  क्रिस्टोफर एफ. नरोन्हा तथा  पी.वी. फर्नाडिस एवं तेलुगु संगमम भोपाल के  चंद्रमोहन नायडू द्वारा स्मृति-चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया गया। राज्यपाल का स्वागत तेलुगु संगमम के बाल सदस्यों व्ही. साईं सिरिशा, व्ही. साई दीक्षिता और व्ही. साईं कात्यायनी द्वारा पुष्पगुच्छ एवं उनके द्वारा बताई गई कलाकृति भेंट कर किया गया। कार्यक्रम में डिप्टी डायरेक्टर टेक्निकल एजुकेशन डॉ. बी. लक्ष्मीनारायण रेड्डी ने आभार प्रदर्शन किया। कंट्रोलर हाउस होल्ड लोक भवन मती शिल्पी दिवाकर ने संचालन किया।   स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में मध्यप्रदेश की आईपीएस अधिकारी मती कृष्णवेनी देसवतु, राज्यपाल के उप सचिव  सुनील दुबे, आई.आई.टी. धनबाद के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुरेश कुमार वाय, संस्थान के 59 युवाओं के प्रतिनिधिमंडल सहित गोवा, तेलंगाना और सिक्किम राज्यों के मूल निवासी सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि, शिक्षाविद, प्रशासनिक अधिकारी तथा सांस्कृतिक संगठनों के सदस्य उपस्थित थे।  

मानव कल्याण और सेवा का संदेश देता है भगवान देवनारायण का जीवन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भगवान देवनारायण सिर्फ़ गुर्जर समाज के आराध्य देव ही नहीं, बल्कि न्याय, लोक कल्याण, सेवा और पराक्रम के प्रतीक हैं। उनका पूरा जीवन पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने अपने कर्मों से यह सिद्ध किया कि धर्म का वास्तविक स्वरूप मानवता की सेवा और कमजोरों की रक्षा में निहित है‌। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) से उज्जैन जिले के ग्राम जमालपुरा में आयोजित  देवनारायण कथा महोत्सव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कथा महोत्सव आयोजकों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान देवनारायण मंदिर परिसर में लगातार छठें वर्ष 7 दिवसीय कथा का आयोजन धर्म प्रेमियों के लिए सोने गर सुहागा की तरह है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान देवनारायण लोक देवता हैं। वे भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं। उनका ननिहाल उज्जैन है़ वे 12 वर्ष तक उज्जैन में ही रहे। उनका जीवन सदैव जनसेवा और लोक कल्याण को समर्पित रहा। सेवा ही भारतीय संस्कृति का सबसे बड़ा धर्म हैं। हम सबको इसी भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए। प्रसिद्ध कथा वाचक पं. ईश्वर सिंह गुर्जर (भगत जी),  रामचन्द्र जी,  निर्भय सिंह आंजना,  वीरेन्द्र आंजना,  मानसिंह चौधरी,  हीरालाल आंजना सहित बड़ी संख्या में स्थानीय धर्म प्रेमी उपस्थित थे।  

राज्यमंत्री गौर ने प्रतिमा का अनावरण कर अर्पित की पुष्पांजलि

भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बाबूलाल गौर की जन्म जयंती पर मंगलवार को वार्ड 54 के साकेत नगर स्थित 'बाबूलाल गौर पार्क' में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान का स्मरण किया। राज्यमंत्री  कृष्णा गौर ने कहा कि श्रद्धेय 'बाबूजी' का संपूर्ण जीवन जनसेवा और प्रदेश के विकास के लिए समर्पित रहा। उन्होंने भोपाल और विशेषकर गोविंदपुरा क्षेत्र के विकास को जो नई दिशा दी है, वह हम सभी के लिए एक महान आदर्श है। राज्यमंत्री  गौर ने कहा कि उनकी यह प्रतिमा हमें सदैव उनके द्वारा किए गए जन-कल्याणकारी कार्यों, उनके संघर्षपूर्ण जीवन और जमीन से जुड़े नेता के रूप में उनकी सादगी की प्रेरणा देती रहेगी। राज्यमंत्री  गौर ने कहा कि बाबूजी के सपनों का गोविंदपुरा क्षेत्र और एक उन्नत मध्यप्रदेश बनाने के लिए हम उनके बताए मार्ग पर निरंतर जनसेवा का कार्य करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि स्व. गौर जी ने अपना पूरा जीवन समाज के वंचित वर्गों और आम जनता के उत्थान में लगा दिया। उनके यही विचार और जनहितैषी नीतियां हमारी सबसे बड़ी धरोहर हैं। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, पार्षदगण और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। राज्यमंत्री  गौर ने पूर्व मुख्यमंत्री स्व. बाबूलाल गौर की जयंती के अवसर पर भेल स्थित बाबूलाल स्नातकोत्तर शासकीय महाविद्यालय में आयोजित सेमिनार में शामिल हुईं। उन्होंने कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ की। इस दौरान उन्होंने स्व. बाबूलाल गौर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं के साथ पूर्व मुख्यमंत्री स्व. बाबूलाल गौर की स्मृति में पौधारोपण भी किया।  

टोल-फ्री कॉल, वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप के जरिए नागरिक दर्ज करा सकेंगे अपनी शिकायतें

रायपुर सुशासन एवं अभिसरण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आज मंत्रालय (महानदी भवन) नवा रायपुर में सीएम हेल्पलाइन (1076) के विभागीय नोडल एवं सहायक नोडल अधिकारियों के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में शासन के सभी विभागों के अधिकारी शामिल हुए। समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निराकरण पर जोर          कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव  राहुल भगत ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन आम नागरिकों तक सुशासन पहुँचाने का सबसे सशक्त और सुलभ माध्यम है। उन्होंने सभी नोडल अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि आम जनता की शिकायतों का निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए। प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु          अधिकारियों को आधुनिक शिकायत प्रबंधन प्रणाली (Grievance Redressal System) के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी गई। शिकायतों का समय पर निराकरण न होने की स्थिति में उन्हें प्रक्रिया, एल-1 से एल-4 स्तर तक स्वचालित रूप से ट्रांसफर करने की तकनीकी प्रक्रिया समझाई गई। नागरिकों से उनकी संतुष्टि का फीडबैक लेने की पारदर्शी प्रक्रिया के बारे में बताया गया। इन माध्यमों से दर्ज होगी शिकायत           सुशासन एवं अभिसरण विभाग के संयुक्त सचिव  मयंक अग्रवाल ने बताया कि इस सिस्टम से शिकायत निवारण दर और नागरिक संतुष्टि दोनों में तेजी से सुधार आएगा। आगामी लॉन्चिंग के बाद नागरिक टोल-फ्री नंबर 1076 पर कॉल करके, वेब पोर्टल, समर्पित मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप के माध्यम से अपनी शिकायतें सीधे दर्ज करा सकेंगे।

मुंबई पुणे मिसिंग लिंक – बिना सरकारी बोझ के 6600 करोड़ की परियोजना! महाराष्ट्र के फाइनेंस मॉडल से सीख लेगा मध्यप्रदेश

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विकासवादी सोच को धरातल पर उतरने के लिए मंत्री राकेश सिंह की अध्यक्षता में लोक निर्माण विभाग का 14 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल 1 और 2 जून को महाराष्ट्र और गुजरात अध्ययन यात्रा पर गया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने महाराष्ट्र की मेगा सड़क परियोजनाओं, उनके वित्तीय मॉडल, सड़क विकास की दीर्घकालीन रणनीति और भास्कराचार्य संस्थान के सहयोग से तैयार की गई डिजिटल गवर्नेंस तथा रियल-टाइम मॉनिटरिंग प्रणालियों विस्तार से चर्चा की। मध्यप्रदेश में सड़क और पुल निर्माण को केवल निर्माण कार्य तक सीमित न रखकर उसे आर्थिक विकास, पर्यटन, सड़क सुरक्षा और आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में लोक निर्माण विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसी उद्देश्य से यह अध्ययन यात्रा बहुत महत्वपूर्ण है बताई जा रही है। प्रतिनिधिमंडल में प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग  सुखबीर सिंह, मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक  भारत यादव, भवन विकास निगम के प्रबंध संचालक  सिबी चक्रवर्ती, विभाग के प्रमुख अभियंता  के.पी.एस. राणा एवं  एसआर बघेल तथा वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सोच को धरातल पर उतारने का प्रयास अध्ययन दौरे का उद्देश्य केवल अन्य राज्यों की परियोजनाओं को देखना नहीं था, बल्कि यह समझना भी था कि सड़कों को आर्थिक विकास, निवेश, पर्यटन, सड़क सुरक्षा और डिजिटल प्रबंधन से कैसे जोड़ा जाए। लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश तेजी से विकसित हो रहा है। प्रदेश में बड़ी संख्या में सड़क, पुल और भवन निर्माण परियोजनाएं चल रही हैं। ऐसे समय में देश के अग्रणी राज्यों के अनुभवों का अध्ययन कर उन्हें मध्यप्रदेश की परिस्थितियों के अनुरूप लागू करना आवश्यक है। पहला दिन : महाराष्ट्र में मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल का अध्ययन एवं मुख्यमंत्री  देवेंद्र फडणवीस से सौजन्य भेंट प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री  देवेंद्र फडणवीस से सौजन्य भेंट की। बैठक में अधोसंरचना विकास, बड़े प्रोजेक्ट्स के वित्तीय प्रबंधन, भूमि अधिग्रहण की चुनौतियों, परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की रणनीति और राज्यों के बीच बेहतर संपर्क व्यवस्था जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री  फडणवीस ने बताया कि बड़ी परियोजनाओं की सफलता केवल धन उपलब्ध होने से नहीं होती, बल्कि उसके लिए स्पष्ट लक्ष्य, इनोवेटिव फाइनेंस मौडलिंग, तेज निर्णय प्रक्रिया और लगातार निगरानी आवश्यक होती है। बैठक में मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र को जोड़ने वाले राज्य राजमार्गों और प्रमुख मार्गों के संयुक्त विकास पर भी सहमति बनी। निर्णय लिया गया कि मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) और महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) मिलकर सीमावर्ती मार्गों के विकास की कार्ययोजना तैयार करेंगे। इससे दोनों राज्यों के बीच व्यापार, उद्योग, पर्यटन और परिवहन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद MSRDC के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध संचालक डॉ. अनिलकुमार गायकवाड़, संयुक्त प्रबंध संचालक  राजेश पाटिल,  लक्ष्मीनारायण मिश्रा तथा  राजेश निघोट ने महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम के मुख्यालय में विस्तृत प्रस्तुतीकरण के माध्यम से मेगा इन्फ्रस्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और फाइनैन्सिंग मॉडेल्स की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि महाराष्ट्र में लगभग 3.5 लाख किलोमीटर का सड़क नेटवर्क है, जिसका संचालन और रखरखाव लोक निर्माण विभाग तथा महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम मिलकर करते हैं। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के महत्वपूर्ण मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर उन्हें "कोर रोड नेटवर्क" घोषित किया है। इन्हें वर्ष 2047 तक चरणबद्ध तरीके से विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। MSRDC ने बताया कि कोर रोड नेटवर्क को दो प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है     ग्रोथ कॉरिडोर ये ऐसे मार्ग हैं जो उद्योग, व्यापार, कृषि और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं। इन मार्गों पर बेहतर सड़कें बनने से उद्योगों तक कच्चा माल जल्दी पहुंचता है, किसानों की उपज तेजी से बाजार तक पहुंचती है और नए निवेश आकर्षित होते हैं।     टूरिज्म कॉरिडोर ये ऐसे मार्ग हैं जो प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़ते हैं। अधिकारियों ने बताया कि अच्छी सड़कें केवल यात्रा को आसान नहीं बनातीं बल्कि पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करती हैं। प्रतिनिधिमंडल ने इस मॉडल का विशेष अध्ययन किया क्योंकि मध्यप्रदेश में भी धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों की बड़ी संख्या है। समृद्धि महामार्ग का वित्तीय मॉडल बना आकर्षण का केंद्र बैठक में महाराष्ट्र की प्रमुख परियोजनाओं और उनके वित्तीय मॉडल पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेष रूप से समृद्धि महामार्ग के लिए अपनाई गई वित्तीय रणनीति ने मध्यप्रदेश के अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया। अधिकारियों ने बताया कि किस प्रकार एसेट सिक्योरिटाइजेशन, वैकल्पिक वित्त पोषण और दीर्घकालिक वित्तीय योजना के माध्यम से बड़े प्रोजेक्ट्स को बिना अतिरिक्त वित्तीय दबाव के पूरा किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी समझा कि भविष्य की परियोजनाओं के लिए केवल बजटीय प्रावधानों पर निर्भर रहने के बजाय नए वित्तीय विकल्पों का उपयोग कैसे किया जा सकता है। अटल सेतु का अध्ययन प्रतिनिधिमंडल अटल सेतु परियोजना के भ्रमण किया। समुद्र के ऊपर निर्मित यह पुल आधुनिक भारत की इंजीनियरिंग क्षमता का प्रतीक माना जाता है। अधिकारियों ने परियोजना की निर्माण तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण, रखरखाव व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और वित्तीय मॉडल की जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल ने जाना कि इतनी बड़ी परियोजना में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय किस प्रकार स्थापित किया गया और समय-सीमा का पालन कैसे सुनिश्चित किया गया। मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक : इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण अटल सेतु के बाद प्रतिनिधिमंडल मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे की मिसिंग लिंक परियोजना के अध्ययन के लिए पहुंचा। यह परियोजना देश की सबसे जटिल सड़क परियोजनाओं में से एक मानी जाती है। अधिकारियों ने बताया कि यहां निर्मित सुरंग विश्व की सबसे चौड़ी सुरंगों में शामिल है। इसके साथ भारत का सबसे ऊंचा केवल-स्टे (Cable Stayed) पुल भी इस परियोजना का भाग है। परियोजना की कुल लागत लगभग 6600 करोड़ रुपये है। सबसे रोचक तथ्य यह रहा कि इस परियोजना के वित्तपोषण के लिए महाराष्ट्र सरकार को अलग से वित्तीय बोझ नहीं उठाना पड़ा। इसका पूरा वित्तीय प्रबंधन मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे से प्राप्त टोल राजस्व के आधार पर किया गया। लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने इसे एक अनुकरणीय मॉडल बताते हुए कहा कि भविष्य में मध्यप्रदेश की बड़ी परियोजनाओं के लिए भी ऐसे नवाचारी वित्तीय विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। प्रतिनिधिमंडल ने बांद्रा-वर्ली सी लिंक का भी भ्रमण किया। यहां अधिकारियों ने परियोजना के संचालन, रखरखाव, परिसंपत्ति … Read more

सूखे पेयजल स्रोतों की करायें जांच, नल जल योजनाएं बिना किसी बाधा के हो संचालित

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नागरिकों को समुचित पेयजल आपूर्ति हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नागरिकों को पर्याप्त और निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की कमी न रहे। गर्मी के मौसम और बढ़ती आवश्यकताओं को देखते हुए जलापूर्ति व्यवस्था की सतत् निगरानी की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिये कि जहां जैसी आवश्यकता हो, वहां वैसी त्वरित व्यवस्थाएं की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में जल अभाव की स्थिति बन रही है, वहां तत्काल वैकल्पिक व्यवस्थाएं लागू कर पानी उपलब्ध कराया जाए। बैठक में पीएचई की मैदानी योजनाओं एवं पेयजल आपूर्ति की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री  सम्पत्तिया उइके ने बताया कि विभाग तेजी से अपनी लक्ष्य पूर्ति की ओर बढ़ रहा है। मार्च 2028 से पहले प्रदेश में हर घर नल से जल के उद्देश्य से जल जीवन मिशन का काम पूरा कर लिया जायेगा। मिशन का 80 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। उज्जैन राजस्व संभाग सहित प्रदेश के 11 जिलों में जल जीवन मिशन का शत् प्रतिशत कार्य हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शत-प्रतिशत कार्य करने वाले ऐसे गांवों/ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहन/सम्मानित किया जाये, जिन्होंने बेहतर तरीके से नल जल योजनाओं का संचालन/संधारण किया। मंत्री  उइके ने बताया कि बोरवेल में गिरने से होने वाली आकस्मिक दुर्घटनाओं/मृत्यु को रोकने के लिए प्रदेश में बोरवेल अधिनियम बनाया गया है। ऐसा अधिनियम बनाने वाला मध्यप्रदेश, देश का पहला राज्य है। उन्होंने विभागीय संरचना और गतिविधियों को अधिक बेहतर बनाने के लिए विभाग के सिविल विंग, मैकेनिकल विंग और जल निगम को एकीकृत करने का सुझाव दिया। मंत्री  उइके बताया कि जल गंगा संवर्धन अभियान- 2026 में डिंडोरी और मंडला जिले में 8 हजार से अधिक एकल ग्राम नल जल योजनाओं पर काम पूरा कर लिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभाग को बधाई देते हुए कहा कि इस काम को 'कर्म स्थान से जन्म स्थान की ओर' अवधारणा से जोड़ा जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रदेश में जल आपूर्ति व्यवस्था एवं अधोसंरचनात्मक विकास के लिए केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय से तत्काल समन्वय करें। केन्द्र सरकार से मध्यप्रदेश को जल जीवन मिशन अन्तर्गत लगभग 5 हजार करोड़ रुपये का आवंटन प्राप्त होना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री  सीआर पाटिल ने मध्यप्रदेश को यह आवंटन जारी करने की सहमति दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों से राज्य में ऐसा मैकेनिज्म तैयार करने को कहा जिससे कि सभी नलजल योजनाएं बिना किसी बाधा के संचालित होती रहे। उन्होंने कहा कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग जल बचाने वाले और इस पुनीत कार्य में सहयोग देने वालों का राज्य एवं जिला स्तर पर सम्मान कार्यक्रम आयोजित करें। बताया गया कि विभाग द्वारा जल महोत्सव कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। इसमें प्रदेश में एकल एवं समूह नल जल योजना के संचालन एवं प्रबंधन में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल महोत्सव कार्यक्रम को जल गंगा संर्वधन अभियान के साथ जोड़ने और जल बचाने के लिए अधिकाधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। जल गंगा संर्वधन अभियान के तहत विभाग द्वारा ग्रामीण, शहरी एवं स्कूलों में स्थापित जल स्रोतों की वाटर टेस्टिंग की जा रही है। साथ ही हैंडपंपों की जांच एवं नल जल योजना के ऑपरेटर्स को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल स्रोतों के लिए पीएचई केवल टयूबवेल जैसे माध्यम पर ही आश्रित न रहे। जल स्रोत के रूप में तालाब सरोवर निर्माण से कई लाभ होंगे। इससे जल संरक्षण के साथ जल स्तर में वृद्धि होगी। क्षेत्र में वॉटर रिचार्जिंग बढ़ेगी। जल संग्रहण क्षमता बढ़ने के साथ ही नल-जल योजना के संचालन के लिए स्थायी जल संरचना भी उपलब्ध हो सकेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस कार्य में म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिसर (मैपकास्ट) की विशेषज्ञ सेवाओं का भी लाभ लें। प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी  मनीष सिंह ने बताया कि विभागीय स्तर पर पेयजल आपूर्ति की गहन मॉनीटरिंग की जा रही है। प्रदेश के ग्रामीण अंचलों के साथ ही नगरीय क्षेत्रों में भी पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में सुधार किया गया है। पेयजल आपूर्ति में आ रही समस्या की सूचना मिलते ही उसे तत्काल दूर किया जा रहा है। पेयजल से निर्माण कार्य करने वालों पर सख्ती की जा रही है। उन्होंने बताया कि म.प्र. जल निगम के समूह ग्राम पेयजल प्रदाय योजनाओं के संचालन एवं संधारण खर्चे को कम करने के लिए प्रदेश में सौर ऊर्जा एवं पवन ऊर्जा परियोजना स्थापित की जा रही हैं। पीएचई सोलर एण्ड विंड एनर्जी का बल्क यूजर है। प्रमुख सचिव  सिंह ने बताया कि प्रदेश में दिसम्बर 2023 से अब तक 16.50 लाख से अधिक  क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन दिये गये, साथ ही 15 हजार 238 नवीन नलकूप/हैंडपंप भी स्थापित किये गये। प्रदेश के 14 हजार 200 गांवों में जल प्रदाय व्यवस्था का शत् प्रतिशत काम पूरा कर इन्हें हर घर जल घोषित किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 1 करोड़ 11 लाख से अधिक परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश के करीब 75 प्रतिशत परिवारों को नल से जल के तहत कवर कर लिया गया है।   म.प्र. जल निगम के प्रबंध संचालक  वी.एस. कोलसानी ने बताया कि उज्जैन राजस्व संभाग की एकल ग्राम नल जल योजनाओं के काम पूरे कर लिये गये है। यहां 7 लाख 9 हजार 65 परिवारों को क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन दे दिए गये है। प्रदेश की 155 प्रयोगशालाओं को एनएबीएल से प्रमाणित करा लिया गया है। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत संचालित योजनाओं की उपयोगिता के आंकलन और हितग्राहियों से शिकायतें/सुझाव प्राप्त कर उनका निराकरण करने के लिए ऑनलाइन जल दर्पण पोर्टल भी तैयार किया गया है। उन्होंने बताया गया कि विभाग में प्रचलित प्रमुख विकास योजनाओं के लिए वर्ष 2026-27 के लिए 5 हजार करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। जल जीवन मिशन का कार्य तेजी से … Read more

नैनो तकनीक से शैलेंद्र ने पकड़ी आधुनिक खेती की राह, बने मिसाल

रायपुर पारंपरिक खेती के पुराने ढर्रे को छोड़कर जब कोई किसान आधुनिक तकनीकों का हाथ थामता है, तो वह न सिर्फ अपनी तकदीर बदलता है बल्कि पूरे अंचल के लिए प्रेरणा बन जाता है। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम लटुवा के प्रगतिशील किसान शैलेंद्र कुमार कन्नौजे आज क्षेत्र में ऐसी ही एक अभिनव मिसाल बनकर उभरे हैं। पिछले दो वर्षों से नैनो उर्वरक (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) का लगातार उपयोग कर वे उन्नत और स्मार्ट खेती की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। परिवहन के खर्च और मेहनत से मिली बड़ी राहत        कृषक शैलेंद्र कुमार ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि खेती में लगातार बढ़ती लागत और पारंपरिक बोरी वाले खादों को दुकान से खेत तक लाने (परिवहन) तथा उनके छिड़काव में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों ने उन्हें कुछ नया सोचने पर मजबूर किया था। कृषि विभाग की सलाह पर जब उन्होंने नैनो तकनीक को अपनाया, तो इसके परिणाम बेहद चौंकाने वाले और संतोषजनक रहे। शैलेंद्र बताते हैं कि नैनो उर्वरक बाजार में पारंपरिक खाद की तुलना में बेहद कम दाम पर और आसानी से उपलब्ध हो जाता है, जिससे खेती के शुरुआती खर्च में ही बड़ी बचत हो जाती है। नैनो उर्वरक के प्रमुख व्यावहारिक लाभ         शैलेंद्र कुमार ने बताया कि जहाँ पहले भारी-भरकम बोरियों को ढोने और संभालने में किसानों का पसीना छूट जाता था, वहीं अब महज आधे लीटर की छोटी बोतलें आसानी से जेब या थैले में रखकर खेत तक ले जाई जा सकती हैं। पानी में घोलकर फसलों पर सीधे छिड़काव करने से पौधों को पोषक तत्व सीधे और सही मात्रा में मिलते हैं, जिससे खाद की बर्बादी नहीं होती। इस तकनीक के प्रयोग से फसलों की गुणवत्ता में सुधार आया है और प्रति एकड़ पैदावार में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस वर्ष भी नैनो तकनीक पर ही भरोसा          अपनी इस शानदार सफलता से उत्साहित होकर शैलेंद्र ने इस वर्ष भी अपनी फसलों में पूरी तरह से केवल नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का ही उपयोग करने का निर्णय लिया है। लटुवा के इस जागरूक किसान की यह अनूठी पहल आज पूरे बलौदाबाजार जिले के किसानों को आधुनिक, कम लागत वाली और आत्मनिर्भर खेती की एक नई राह दिखा रही है। जिला प्रशासन और कृषि विभाग भी शैलेंद्र की इस सफलता को रोल मॉडल के रूप में पेश कर अन्य ग्रामीण किसानों को नैनो तकनीक अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है।

ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में लगातार बढ़ रही भागीदारी, बड़ी संख्या में अभ्यर्थी कर रहे पंजीकरण

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार प्रतिभाशाली और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को प्रशासनिक सेवाओं में अवसर दिलाने के लिए लगातार प्रयासरत है। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित निःशुल्क आईएएस/ पीसीएस कोचिंग योजना युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में लगातार बढ़ती भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं इस योजना के माध्यम से अपने सपनों को नई उड़ान देना चाहते हैं। महंगी कोचिंग की बाधा दूर कर रही योगी सरकार सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी के लिए निजी कोचिंग संस्थानों में लाखों रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के विद्यार्थियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में योगी सरकार की निःशुल्क कोचिंग योजना इन युवाओं के लिए राहत लेकर आई है। योजना का उद्देश्य प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों को गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल बनाना है। 865 सीटों पर मिलेगा प्रशिक्षण, 25 प्रतिशत सीटें लेटरल एंट्री के लिए समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने बताया कि प्रदेश में आईएएस/ पीसीएस कोचिंग के लिए कुल 865 सीटें निर्धारित हैं। इनमें से 25 प्रतिशत सीटें ऐसे छात्र-छात्राओं के लिए आरक्षित हैं जो लेटरल एंट्री के माध्यम से प्री परीक्षा क्वालीफाई कर चुके हैं। इससे उन अभ्यर्थियों को भी बेहतर मार्गदर्शन मिलेगा, जिन्होंने प्रतियोगी परीक्षा के प्रारंभिक चरण में सफलता प्राप्त कर ली है और मुख्य परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। ऑनलाइन आवेदन में युवाओं की बढ़ी भागीदारी योगी सरकार में युवाओं का उत्साह लगातार बढ़ रहा है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून तक कुल 5513 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया है, जबकि 2848 अभ्यर्थियों ने अपनी आवेदन प्रक्रिया को अंतिम रूप देते हुए फाइनल लॉक किया है। वहीं इच्छुक अभ्यर्थी 18 जून तक आवेदन कर सकते हैं इसके बाद 5 जुलाई को परीक्षा होगी। यह संख्या दर्शाती है कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में युवा इस अवसर का लाभ उठाने के लिए आगे आ रहे हैं। योगी सरकार में प्रतिभाओं को मिल रहा बेहतर मंच गौरतलब है कि समाज कल्याण विभाग, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में पूरी पारदर्शिता के साथ चयन प्रक्रिया और कक्षाएं संचालित करने की तैयारी कर रहा है। योगी सरकार की प्राथमिकता है कि आर्थिक अभाव किसी भी प्रतिभाशाली छात्र के सपनों के आड़े न आए। इसी उद्देश्य से निःशुल्क कोचिंग, अध्ययन सामग्री और विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। योगी सरकार की यह पहल न केवल युवाओं के लिए अवसरों के नए द्वार खोल रही है, बल्कि प्रशासनिक सेवाओं में सामाजिक समावेशन को भी मजबूती प्रदान कर रही है।